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द्वारका जिला पुलिस ने मई में अवैध रूप से रह रहे 71 विदेशियों को पकड़कर डिपोर्टेशन के लिए भेजा

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ मई और जून में कड़ा एक्शन लिया। द्वारका जिला पुलिस ने मई में 71 विदेशियों को डिपोर्ट किया, जिनमें 47 बांग्लादेशी, 17 म्यांमार के रोहिंग्या और 7 नाइजीरियाई शामिल हैं। इसके अलावा, नॉर्थ-वेस्ट और शाहदरा जिला पुलिस ने भी बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। द्वारका पुलिस की बड़ी कार्रवाई द्वारका जिला पुलिस ने मई में अवैध रूप से रह रहे 71 विदेशियों को पकड़कर डिपोर्टेशन के लिए भेजा। डीसीपी द्वारका अंकित सिंह ने बताया कि इन विदेशियों के पास वैध वीजा नहीं था। पुलिस की स्पेशल स्टाफ, उत्तम नगर थाना, एंटी-नारकोटिक्स सेल, छावला थाना और AATS की टीमें इस ऑपरेशन में शामिल थीं। पकड़े गए विदेशियों को फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में छापेमारी 2 जून को नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली पुलिस ने भारत नगर थाना क्षेत्र में 18 बांग्लादेशी नागरिकों को धर दबोचा। खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में पुलिस ने वजीरपुर जेजे कॉलोनी में तलाशी ली। डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि 36 फुटपाथों और 45 गलियों को खंगाला गया। एक संदिग्ध को पहले पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में बांग्लादेशी होने की बात कबूल की। ये लोग हरियाणा से दिल्ली आए थे और पकड़े जाने से बचने के लिए बार-बार ठिकाने बदल रहे थे। शाहदरा में भी पुलिस की पैनी नजर इसी दिन शाहदरा जिला पुलिस ने सीमापुरी इलाके में 16 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा। खबर मिली थी कि उत्तर प्रदेश-दिल्ली बॉर्डर के पास शहीद नगर इलाके में अवैध प्रवासियों की आवाजाही हो रही है। पुलिस ने तुरंत सूचना की पुष्टि की और एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया। मुखबिर की मदद से इन लोगों को सीमापुरी में घुसते समय पकड़ लिया गया। ये कार्रवाई क्यों है अहम? दिल्ली पुलिस की इन कार्रवाइयों से साफ है कि अवैध प्रवासियों पर नकेल कसने के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी जा रही। बांग्लादेशी नागरिकों की बड़ी संख्या ने पुलिस की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। लेकिन, दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र की तारीफ करनी होगी, जो लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है।  

दो बार रहे विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहने वाले लेग स्पिनर पीयूष चावला ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

नई दिल्ली  भारत के दो बार के विश्व कप विजेता लेग स्पिनर पीयूष चावला ने शुक्रवार को पेशेवर क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी है। 36 वर्षीय चावला ने इंस्टाग्राम पोस्ट करके इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘मैदान पर दो दशक से अधिक समय बिताने के बाद इस खूबसूरत खेल को अलविदा कहने का समय आ गया है।’    चावला में 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीत में भारतीय टीम का हिस्सा थे। चावला ने पेशेवर क्रिकेट में सभी प्रारूपों में 1000 से अधिक विकेट हासिल किए। 2012 में अपने अंतिम प्रदर्शन तक पांच वर्षों में भारत के लिए 3 टेस्ट, 25 वनडे और 7 टी20 मैच खेले जिसमें उन्होंने 43 विकेट लिए।  चावला ने कहा, ‘भारत का सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने से लेकर 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनने तक, इस अविश्वसनीय यात्रा में हर पल किसी वरदान से कम नहीं रहा है। ये यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी। आईपीएल फ्रेंचाइजी पंजाब किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस को दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। इंडियन प्रीमियर लीग मेरे करियर का एक खास अध्याय रहा है और मैंने इसमें खेलते हुए हर पल को संजोया है। मैं अपने कोचों श्री के.के. गौतम और स्वर्गीय श्री पंकज सारस्वत का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे एक क्रिकेटर के रूप में तैयार किया।’  उन्होंने आगे कहा, ‘आज मेरे लिए बेहद भावुक दिन है क्योंकि मैं आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा करता हूं। भले ही मैं क्रीज से दूर चला जाऊं, लेकिन क्रिकेट हमेशा मेरे भीतर रहेगा। अब मैं इस खूबसूरत खेल की भावना और सबक को अपने साथ लेकर एक नई यात्रा शुरू करने के लिए उत्सुक हूं।’ 

पाक को UNSC में अध्यक्ष और आतंकवाद विरोधी का उपाध्यक्ष बनने पर कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला: शशि थरूर

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत मित्रहीन नहीं है और पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बनाया जाना तथा आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाए जाने का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है। थरूर भारत द्वारा सामना किए जा रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खतरे और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प के बारे में प्रमुख वार्ताकारों को जानकारी देने के लिए अमेरिका में एक बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। थरूर ने गुरुवार को यहां भारतीय दूतावास में बातचीत के दौरान कहा, ‘ये सभी समितियां आम सहमति पर काम करती हैं और किसी अध्यक्ष के लिए अकेले दम पर कुछ ऐसा करवा पाना संभव नहीं है जिसका अन्य विरोध करते हैं या किसी विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं जिसका अन्य देश समर्थन नहीं करते हैं।’ पाकिस्तान, 2025-26 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और वह 2025 के लिए परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता करेगा तथा 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष होगा। गुयाना और रूस ‘1988 तालिबान प्रतिबंध समिति’ के उपाध्यक्ष होंगे। अल्जीरिया ‘1373 आतंकवाद-रोधी समिति’ की अध्यक्षता करेगा जबकि फ्रांस और रूस अन्य उपाध्यक्ष होंगे। पाकिस्तान ‘दस्तावेजीकरण और अन्य प्रक्रियात्मक प्रश्नों एवं सामान्य यूएनएससी प्रतिबंध मुद्दों पर अनौपचारिक कार्य समूहों’ का सह-अध्यक्ष भी होगा। भारत ने लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित अधिकतर आतंकवादियों और संगठनों को पाकिस्तान में पनाह मिली है। अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन कई वर्षों तक पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा रहा और मई 2011 में अमेरिकी नौसेना के जवानों के एक अभियान में मारा गया। दूतावास में कई ‘थिंक टैंक’ समूहों और युवा पेशेवरों के साथ संसदीय प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के दौरान थरूर से पाकिस्तान द्वारा यूएनएससी की दो प्रतिबंध समितियों की अध्यक्षता करने के बारे में जब पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यूएनएससी की छह आतंकवाद निरोधक समितियां हैं। उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्य बारी-बारी से ऐसी संस्थाओं की अध्यक्षता करते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसलिए जब तक पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में है, तब तक इस तरह का ‘विशेषाधिकार’ उसे मिल सकता है… सुरक्षा परिषद में हम बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं, इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि इस पद का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन इस पर सावधानीपूर्वक नजर रखेगा। बुधवार को दूतावास में प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान को दो समितियों का प्रभार दिए जाने के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल का जवाब देते हुए थरूर ने कहा, ‘एक तो तालिबान समिति है जिसका जिम्मा उन्हें (पाकिस्तान को) मिला है। मुझे नहीं पता कि इस बारे में अफगानों की क्या भावनाएं हैं।’ थरूर ने कहा कि यूएनएससी सदस्यों को हर महीने बारी बारी से परिषद की अध्यक्षता मिलती है। उन्होंने कहा, ‘अन्य लोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हम सुरक्षा परिषद में और इसकी समितियों में बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं।’ प्रतिनिधिमंडल 24 मई को भारत से न्यूयॉर्क पहुंचा। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा कर चुका है और मंगलवार दोपहर को दौरे के अंतिम चरण के लिए वाशिंगटन पहुंचा। थरूर ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय नहीं गया। थरूर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), गंटी हरीश मधुर बालयोगी (तेलुगु देशम पार्टी), शशांक मणि त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी), भुवनेश्वर कलिता (भारतीय जनता पार्टी), मिलिंद देवड़ा (शिवसेना), तेजस्वी सूर्या (भारतीय जनता पार्टी) और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत संधू शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। थरूर ने इस मुलाकात को ‘‘सार्थक’’ बताया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल भी उसी समय अमेरिका पहुंचा, जब थरूर के नेतृत्व में भारत का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा था। भुट्टो ने भारत के साथ सैन्य संघर्ष और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने के पाकिस्तान के प्रयास के तहत अपने प्रतिनिधिमंडल सहित सुरक्षा परिषद के राजदूतों के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की। त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट को लेकर समर्थन व्यक्त किया।  

अरुण गोविल ने बॉलीवुड स्टार्स को नकारा, बोले – राम बनने के काबिल कोई एक्टर नहीं

मुंबई रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम का रोल करने वाले अरुण गोविल ने महाकाव्य को फिर से बनाने के कई आधुनिक प्रयासों पर खुलकर बात की है। NDTV के साथ एक इंटरव्यू में बोलते हुए अरुण ने बताया कि इस जेनरेशन में कौन सा एत्टर भगवान राम का रोल प्ले कर सकता है। अरुण गोविल ने कहा, ‘तीन-चार लोगों ने इसे फिर से बनाने की कोशिश की है, लेकिन वे सफल नहीं हुए। मुझे नहीं लगता कि हमारे जीवनकाल में किसी को रामायण का रीमेक बनाने का प्रयास करना चाहिए। जब राम की भूमिका निभाने की बात आती है, तो मेरी राय में आज हमारे पास मौजूद कोई भी स्टार इस रोल के लिए उपयुक्त नहीं है। शायद इंडस्ट्री से बाहर का कोई सही ऑप्शन हो।’ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उनकी टिप्पणी अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दूसरे चरण के दौरान आई है, जो एक आध्यात्मिक और राजनीतिक गाथा है और रामायण कथा के साथ लंबे समय से जुड़े भक्ति और धार्मिकता के विषयों को दिखाता है। 78 एपिसोड वाली पहली ‘रामायण’ 1987 से 1988 तक 78 एपिसोड में भगवान राम का किरदार निभाने वाले गोविल किसी महान किरदार से कम नहीं थे, जिसने रविवार की सुबह 9:30 बजे दूरदर्शन पर पूरे भारत के घरों में एक आध्यात्मिक अनुष्ठान में बदल दिया। इस शो ने इतना सांस्कृतिक प्रभाव छोड़ा कि दशकों बाद भी, इसके जादू को फिर से बनाने की सारी कोशिशें फेल हो गईं। ‘आदिपुरुष’ की भद पिटी बता दें कि साल 2023 की फिल्म ‘आदिपुरुष’ में प्रभास को राम के रोल में लिया गया था और इस फिल्म को कई कारणों से आलोचना का सामना करना पड़ा था। यह बॉक्स ऑफिस पर भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर दिलचस्प बात यह है कि अरुण गोविल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रणबीर कपूर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। दो पार्ट वाली यह फिल्म 2026 और 2027 में दिवाली पर रिलीज़ होने वाली है। जहां नितेश तिवारी के वर्जन को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है, वहीं अरुण गोविल की बात एक कटाक्ष की तरह सामने आई है।

बिहार विधानसभा चुनाव में सवर्ण राजनीति के लौटेंगे दिन! आयोग कर सकता है समुदाय के लिए ये तीन सिफारिशें

पटना बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने सवर्ण आयोग को मजबूत कर दिया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार ने आयोग को नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मेंबर दिए हैं। यही नहीं आयोग ने बुधवार को ही एक मीटिंग भी की है, जिसमें सवर्ण समाज में आने वाली जातियों के हालात पर चिंता व्यक्त की गई। नीतीश कुमार सरकार को लगता है कि अति-पिछड़ा, दलित और पिछड़ा की गोलबंदी के बीच कहीं सवर्ण समुदाय न छिटक जाए। ऐसे में उसे साधने के लिए यह उपक्रम किया गया है। भाजपा के समर्थक कहे जाने वाले सवर्ण समुदाय की राजपूत और भूमिहार जैसी जातियां अकसर छिटकती रही हैं। हालांकि ब्राह्मण और कायस्थ भाजपा के पक्ष में एकजुट नजर आए हैं। ऐसी स्थिति में सवर्णों की पूरी गोलबंदी एनडीए के फेवर में हो, इसके लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी की कड़ी सवर्ण आयोग है। अब यह आयोग आने वाले दिनों में कुछ सिफारिशें भी कर सकता है। इन सिफारिशों में एक यह भी होगा कि गरीब सवर्ण परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट दी जाए। इसके अलावा यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग की सिफारिश हो सकती है। गरीब सवर्णों के बच्चों को हॉस्टल की सुविधान देने की सिफारिश भी आयोग की तरफ से की जा सकती है। सवर्ण आयोग का कहना है कि 2011 में भले ही इसका गठन हुआ था, लेकिन अब यह ज्यादा कारगर होगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग के सदस्यों का कहना है कि अब हमारे पास जातीय जनगणना का डेटा है। हम यह जानते हैं कि कितने सवर्ण परिवार गरीब हैं और उसके कारण क्या हैं। उन्हें क्या लाभ देकर आगे बढ़ाया जा सकता है। दरअसल ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ मिलकर बिहार में करीब 15 फीसदी हैं। भले ही यह बड़ा आंकड़ा नहीं है, लेकिन यदि एकमुश्त वोट किसी दल को मिलता है तो नतीजे पलटने का दम रखते हैं। खासतौर पर मिथिलांचल में ब्राह्मणों की अच्छी तादाद है। इसके अलावा कई जिलों में भूमिहार मजबूत हैं। सवर्ण आयोग ने बनाईं तीन समिति, किन मामलों में करेंगी सिफारिश फिलहाल सवर्ण आयोग ने अलग-अलग मसलों के लिए तीन उप-समितियों का गठन कर दिया है। इन समितियों की सिफारिश के आधार पर ही आगे फैसला होगा। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सवर्ण आयोग की कुछ सिफारिशें सरकार को दी जा सकती है। यही नहीं चुनाव में उतरने से पहले कुछ सिफारिशों को लागू करने का ऐलान भी नीतीश कुमार की सरकार कर सकती है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएँ, फर्नीचर और अन्य निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं

रीवा उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले में सांदीपनि विद्यालय और अन्य विद्यालयों के उन्नयन एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पी.के. गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, रीवा को सांदीपनि विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विशेष चर्चा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएँ, फर्नीचर और अन्य निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। जिससे आगामी शैक्षणिक सत्र से सेवाओं का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चनों को त्वरित रूप से उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर प्राथमिकता के आधार पर निराकृत किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा शहर के समीपवर्ती क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों के प्रस्तावित उन्नयन कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की और निर्देशित किया कि सभी आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्रता से पूर्ण कर प्रस्तावों को सक्षम स्तर पर अनुमोदन के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि रीवा शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के उन्नयन को प्राथमिकता से किया जाये, जिससे इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और उन्हें शिक्षा के लिये शहर आने की असुविधा न हो। आयुक्त, स्कूल शिक्षा श्रीमती शिल्पा गुप्ता, पीआईयू, एवं एप्को के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

वरुण बडोला ने बोला – एकता कपूर ने कर दी टीवी इंडस्ट्री बर्बाद , बस पैसे से मतलब

मुंबई टीवी एक्टर वरुण बडोला कई सालों से भारतीय टेलीविज़न पर एक जाना-माना नाम रहे हैं और हाल ही में उन्होंने स्ट्रीमिंग पर भी काम करना शुरू किया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में वरुण ने भारतीय टेलीविज़न की स्थिति के बारे में बात की और पिछले कुछ सालों में इस माध्यम पर एकता कपूर के राज करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एकता से इस बारे में बात की थी कि वह किस तरह के शो बना रही हैं, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि वह सुनने को तैयार नहीं हैं। एकता कपूर के बारे में अपनी बात रखते हुए वरुण ने ‘ज़िंदगी विद ऋचा’ यूट्यूब चैनल पर कहा, ‘टीवी पर कंटेंट को खराब करने से ज़्यादा, एकता कपूर ने भारतीय टेलीविज़न का चेहरा बदल दिया, चाहे वह अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए। वह लगातार मज़बूत होती गईं क्योंकि शो पैसे कमा रहे थे। हमारी इंडस्ट्री में जब कॉर्पोरेट शामिल होते हैं, तो उन्हें कला की परवाह नहीं होती, वे सिर्फ़ पैसे कमाना चाहते हैं। एकता ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर आप अपने तरीके से शो बनाना चाहते हैं, तो अपना पैसा लगाएं और बनाएं और वह गलत नहीं थीं। आपको बहुत ज़्यादा दबाव से निपटना पड़ता है।’ वरुण बडोला ने एकता कपूर पर निकाली भड़ास वरुण बडोला ने कहा, ‘जब लोग कहते हैं कि बी-टियर और सी-टियर के दर्शक ऐसे कंटेंट देखना पसंद करते हैं, तो मैं इससे सहमत नहीं हूं। जब डीडी पर अच्छे शो आए, तब भी लोग उन्हें देख रहे थे। लॉकडाउन में महाभारत और रामायण को खूब देखा गया। मुझे लगता है कि प्रतिगामी शो को लोग कॉमेडी के तौर पर देखते हैं। एकता ने एक अवसर देखा और उसने इसका फायदा उठाया। हम पांच, कोशिश… एक आशा उसके शो थे और मैंने स्टार प्लस की एक महिला से इस बारे में चर्चा की जो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के खिलाफ थी। वह शिक्षित थी और सोच रही थी कि क्या दर्शकों को इस तरह के कंटेंट दिखाना सही होगा। लेकिन उन्होंने उसकी बात को इग्नोर कर दिया और शो शुरू कर दिया।’ एकता की परेशानी से कोई दिक्कत नहीं आगे उनसे पूछा गया कि क्या ये कमेंट एकता को परेशान करेंगे, तो वरुण बडोला ने कहा, ‘कहानी घर घर की के साथ सारे सेट एक जैसे दिखते थे लेकिन फिर भी उनकी बात नहीं मानी गई। और देखिए कैसे शो बहुत लोकप्रिय हो गए। बालिका वधू एक बेहतर शो था, इसमें अलग-अलग बातें थीं। लोग टीवी से प्रभावित होते हैं, इसलिए पहली बात जो हमें हमेशा बताई जाती थी, वह यह थी कि शो को इंट्रेस्टिंग होना चाहिए।’ एकता ने बात नहीं सुनी उन्होंने आगे कहा, ‘शुरुआत में मैंने कंटेंट के संबंध में एकता से अपनी असहमति जताई लेकिन मुझे तब ही पता चल गया था कि वह ऐसी नहीं हैं जो मेरी बात सुनेंगी। मैं तब सिर्फ़ एक छोटा एक्टर था। उन्होंने एक मौके का लाभ उठाया और एक बिजनेस वुमन होने के नाते, उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार था। मैं उनके एक भी शो से सहमत नहीं हूं, मैंने उनसे यहां तक कहा था कि मैं उनके शो के अलावा कुछ और करूंगा। कोशिश के बाद, ‘अपहरण’ तक मैंने बालाजी के साथ कुछ नहीं किया। वह जानती हैं कि मैं एक बहुत अलग मानसिकता वाला एक्टर हूं।’

स्टारलिंक को India सरकार से मिल गया लाइसेंस, एलन मस्क की भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री

 नई दिल्ली  भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की एंट्री बहुत जल्द होने जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि स्टारलिंक को भारत के दूरसंचार मंत्रालय से एक महत्वपूर्ण लाइसेंस मिल गया है। इस लाइसेंस का मिलना स्टारलिंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बता दें कि स्टारलिंक भारत में तीसरी कंपनी होगी, जिसको दूरसंचार मंत्रालायल द्वारा सैटकॉम लाइसेंस मिला है। इससे पहले जियो और एयरटेल को भी ये लाइसेंस मिल चुका है। इससे पहले गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया था कि जल्द ही स्टारलिंक सैटकॉम लाइसेंस दिया जा सकता है, इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार से मंजूरी के बाद अब स्टारलिंक भारत में अपने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की शुरुआत करने के और करीब पहुंच गया है. अब स्टारलिंक भारत की तीसरी ऐसी कंपनी बन गई है जिसे सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने की अनुमति मिली है. संचार मंत्री ने मंजूरी के बारे में बताया देश के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह जानकारी दी कि अब स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भारती एयरटेल की OneWeb और रिलायंस की Jio को भी सरकार की तरफ से लाइसेंस जारी किया गया था. अब स्टारलिंक को भी ये लाइसेंस मिलने से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं एक नया रूप लेंगी. उन्होंने कहा कि स्टारलिंक की सैटेलाइट कनेक्टिविटी देश की टेलीकॉम सेवाओं में एक महत्वपूर्ण जोड़ है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन कनेक्शन होते थे, फिर मोबाइल नेटवर्क आया, फिर ब्रॉडबैंड और अब ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भी आ गया है. इन सबके साथ-साथ अब सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बेहद जरूरी हो गई है. सिंधिया ने यह भी कहा कि देश के उन इलाकों में जहां परंपरागत टावर या केबल लगाना मुश्किल होता है, वहां तक इंटरनेट पहुंचाना अब सैटेलाइट तकनीक से संभव होगा. इससे दूर-दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में भी अच्छी इंटरनेट सेवा मिल सकेगी और डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ेगा.. क्या है Starlink? Starlink, एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX की एक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है. ये लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है. इसकी मदद से दुनिया के दूर-दराज के इलाकों में हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. पिछले काफी समय से चर्चा है कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में लॉन्च होगी. स्टारलिंक 500 से 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहुत से छोटे सैटेलाइट्स के जरिए काम करती है. ये कोई पहला मौका नहीं जब भारत में स्टारलिंक की चर्चा हो रही हो. कंपनी ने साल 2021 में भारत में प्री-बुकिंग शुरू कर दी थी. हालांकि, भारत सरकार से जरूरी लाइसेंस ना मिलने की वजह से उस वक्त कंपनी को प्री-बुकिंग रोकनी पड़ी थी. जियो और Airtel से करना होगा मुकाबला भारत में इस कंपनी का सीधा मुकाबला रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के OneWeb से होगा. हालांकि, हाल में ही स्टारलिंक ने इस दोनों कंपनियों के साथ साझेदारी का ऐलान किया था. ये ऐलान स्टारलिंक की किट और हार्डवेयर डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर है. स्टारलिंक कई देशों में उलपब्ध है और भारत में इसकी सर्विस शुरू होने में अभी वक्त है.   जरूरी लाइसेंस मिलने के बाद भी अभी तक सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की तस्वीर साफ नहीं हुई है. सैटेलाइट स्पेक्ट्रम बंट जाने के बाद ही कोई कंपनी भारत में अपनी सर्विस शुरू कर पाएगी. यहां एक चुनौती स्पेक्ट्रम आवंटन के तरीके पर है. जहां जियो और एयरटेल पारंपरिक तरीके से स्पेक्ट्रम की नीलामी चाहते हैं. वहीं Starlink एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से बंटवारा चाहती है. फायदे और कीमत अब सवाल है कि Starlink या फिर सैटेलाइट इंटरनेट से लोगों को क्या फायदा मिलेगा. रिमोट एरिया में इससे कनेक्टिविटी आसान हो जाएगा. खासकर ऐसी जगहों पर जहां टावर लगाना या फिर ब्रॉडबैंड की सर्विस पहुंचाना मुश्किल है. सैटेलाइट इंटरनेटज की वजह से ऐसे एरिया में भी बेहतर स्पीड मिलेगी. हालांकि, ये सर्विस किस कीमत पर लॉन्च होती है, ये भी एक बड़ा सवाल है. अभी तक के अनुमान के मुताबिक कंपनी की सर्विस महंगी होगी. स्टारलिंक की किट के लिए आपको अच्छी-खासी राशि देनी पड़ सकती है. वहीं मंथली या ऐनुअल प्लान भी रेगुलर ब्रॉडबैंड प्लान के मुकाबले काफी महंगे होंगे.  

विष्णु सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया, गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी

रायपुर  राज्य सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब इस अपराध में लिप्त आदतन आरोपितों पर सफेमा के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आरोपितों की संपत्ति को जब्त कर नीलाम किया जाएगा और प्राप्त राशि को गोसेवा में लगाया जाएगा। गृहमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी जिलों के एडिशनल एसपी स्तर के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जिलेवार समीक्षा की गई और 15 जुलाई 2024 को लागू की गई एसओपी के तहत अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा की गई। गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोतस्करी में लिप्त पाए गए पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाएगा। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों को राजसात कर उनकी नीलामी की जाएगी। इस धन का उपयोग गोसेवा के लिए किया जाएगा। गोसेवा आयोग को गोसेवकों के लिए पहचान पत्र जारी करने का भी आग्रह किया जाएगा। जिन जिलों में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है, वहां के अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गोतस्करी केवल अपराध नहीं, संगठित नेटवर्क है: डिप्टी सीएम उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पुलिस को सफेमा और रासुका जैसे कानूनों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों से ठोस कार्रवाई के प्रमाण और आगामी बैठक में पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि गोतस्करी केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। डिप्टी सीएम ने यह दिए सुझाव उन्होंने हाईवे पर कमजोर बैरिकेडिंग और तस्करों द्वारा पैदल रास्तों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने गोसेवकों व एनसीसी से जुड़े युवाओं को चिन्हित कर निगरानी तंत्र में शामिल करने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं और पुलिस के बीच संवाद स्थापित करने विशेष पास जारी करने पर जोर दिया। टेक्नोलाजी के माध्यम से सूचना तंत्र मजबूत करने की बात भी कही।

संसद के परिसीमन 2026 को लेकर एक अनुमानित रिपोर्ट सामने आई है,

An estimated report has come out regarding the delimitation of Parliament 2026, भोपाल। जिसमें देश भर में लोकसभा और राज्यसभा सीटों की संख्या में बदलाव का खाका पेश किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल 800 लोकसभा सीटें और 432 (320+112) राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल मिलाकर 1132 संसद सदस्यों का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह परिसीमन 90% वजन जनसंख्या और 10% क्षेत्रफल के आधार पर किया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 121 लोकसभा सीटें और 47 राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल 168 सांसदों का प्रतिनिधित्व करेंगी। वहीं, बिहार में 61 लोकसभा और 24 राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल 85 सांसदों को जगह देंगी। महाराष्ट्र में 76 लोकसभा और 31 राज्यसभा सीटें होंगी, जिससे कुल 107 सांसद होंगे।क्षेत्रीय आधार पर देखें तो दक्षिण भारत में तमिलनाडु को 48 लोकसभा और 19 राज्यसभा सीटें मिलेंगी, जबकि तेलंगाना में 25 लोकसभा और 10 राज्यसभा सीटें होंगी। पश्चिमी भारत में गुजरात को 42 लोकसभा और 17 राज्यसभा सीटें मिलेंगी। पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल को 57 लोकसभा और 23 राज्यसभा सीटें दी जाएंगी। उत्तरी भारत में राजस्थान को 46 लोकसभा और 18 राज्यसभा सीटें मिलेंगी।रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या में मामूली बदलाव होगा। उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली को 1-1 लोकसभा सीट मिलेगी। इस परिसीमन से क्षेत्रीय और जनसंख्या के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश की गई है।यह अनुमान 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया है, और इसके लागू होने पर संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह अभी केवल एक अनुमान है, और अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित समितियों द्वारा लिया जाएगा

सतर्क रहें किसान…अंबिकापुर में नकली धान और मक्का बीज के अवैध कारोबार का राजफाश

अंबिकापुर  अंबिकापुर में नकली धान और मक्का बीज के अवैध कारोबार का राजफाश हुआ है। अंबिकापुर के गंगापुर इलाके में जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने एक अवैध नकली बीज निर्माण और पैकिंग फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में नकली धान और मक्के के बीज बरामद किए हैं। बता दें कि छापे के दौरान फैक्ट्री से हजारों तैयार पैकेट, पैकिंग सामग्री, सीलिंग मशीन, केमिकलयुक्त रंगीन तरल और नामी बीज कंपनियों नकली पैकेट बरामद किए गए। कुछ पैकेट खाली थे तथा कुछ पैकेटों में बीज भरा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बड़ी मात्रा में नकली बीज बाजार में खप चुके हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, तहसीलदार उमेश कुमार बाज और कृषि विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि गंगापुर क्षेत्र में नकली बीज की एक फैक्ट्री संचालित हो रही है। सूचना की पुष्टि होते ही टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री पर छापा मारा। छापे के वक्त फैक्ट्री के बाहर एक ट्रक खड़ा था। इस ट्रक से 750 बोरी धान मंगाए गए थे। धान की बोरियों को रायगढ़ के सरिया और चंद्रपुर से लोड किया गया था। इसी प्रकार स्थानीय धान से नकली बीज तैयार करने के खेल की पुष्टि जांच के दौरान हुई। फैक्ट्री के भीतर बड़े पैमाने पर नकली बीजों की पैकिंग की जा रही थी। धान और मक्के को रंगीन केमिकल में डुबोकर उन्हें नया और आकर्षक दिखाया जा रहा था, फिर इन्हें नामी कंपनियों के खाली पैकेटों में भरकर सील किया जा रहा था। रात में चलती थी मशीनें, दिन में पैकेजिंग का काम धान और मक्के की नकली बीज तैयार करने वाली फैक्ट्री खुले जगह पर थी। अगल-बगल मकान थे और बीच में रिक्त जगह पर सामने लोहे के टिन से घेरा किया गया था। इसके पीछे दो कमरे थे। बीच के खाली हिस्से को तिरपाल और प्लास्टिक से ढक कर वहां नकली बीज तैयार किया जा रहा था। जांच में पता चला कि रात को यहां मशीनें चलती थी। स्थानीय धान और मक्का की खरीदी कर उसमें केमिकलयुक्त रंग मिलाकर बीज तैयार किया जाता था। रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक नकली बीज तैयार होता था। उस दौरान मशीनों से आवाज आती थी। दिन में नकली बीजों की पैकेजिंग का काम चलता था। किसानों को गुमराह करने की साजिश मौके से बड़ी संख्या में नामी कंपनियों के खाली पैकेट मिले हैं। इससे साफ जाहिर है कि किसानों को भ्रमित कर उनकी मेहनत और फसलों से छलावा करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही थी। ये पैकेट बाजार में बिकते असली बीजों जैसे ही दिखते हैं, जिससे आम किसान के लिए नकली और असली में फर्क कर पाना लगभग असंभव होता। यदि बाजार में यह नकली धान और मक्का बीज खप गया होगा तो किसानों को नुकसान हो सकता है। संचालक फरार, एफआइआर की तैयारी फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों ने बताया कि इसका संचालन इंद्रजीत नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो छापे के समय मौके से फरार हो गया। प्रशासन ने ट्रक को भी जब्त कर लिया है और मामले में एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तहसीलदार उमेश कुमार बाज ने बताया कि फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और संचालक की तलाश जारी है। प्रशासन का कहना है कि यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी का नहीं बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का मामला है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, कृषि कानून और किसान हितों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। सतर्क रहें किसान, बीज खरीद में सावधानी बरतें प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे बीज खरीदते समय लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खरीदारी करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सामग्री की तत्काल सूचना नजदीकी कृषि कार्यालय या प्रशासनिक अमले को दें।यह केवल एक फैक्ट्री की बात नहीं है। संभाग के दूसरे जिलों में भी ऐसे गिरोह सक्रिय हो सकते हैं जो किसानों की मेहनत को निशाना बना रहे हैं।

जसविंदर आत्महत्या मामले में बड़ा खुलासा… बॉयफ्रेंड सहित 8 आरोपी गिरफ्तार, 6वीं मंजिल से कूदकर दी थी जान

रायपुर रायपुर राजेंद्र नगर इलाके में छह मंजिला बिल्डिंग से युवती के कूदकर जान देने की वजह का खुलासा हो गया है। युवती को पूर्व प्रेमी काफी परेशान कर रहा था। साथ ही वर्तमान पुरुष मित्र और अन्य लोग मिलकर उसे धमका रहे थे। इससे भयभीत होकर युवती ने खुदकुशी कर ली। इस आत्महत्या के मामले में पुलिस ने युवती को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें जसविंदर के पूर्व और वर्तमान ब्वायफ्रेंड के अलावा चार युवतियां भी शामिल हैं। आठ लाख रुपये के कर्ज ने छीनी चैन की नींद पुलिस की जांच में सामने आया है कि जसविंदर और आरोपियों के बीच करीब 8 लाख रुपये का लोन लिया गया था, लेकिन दुकान बंद हो जाने के बाद सभी आरोपी लगातार जसविंदर पर पैसे लौटाने का दबाव बना रहे थे। मानसिक और शारीरिक रूप से की जा रही यह प्रताड़ना जसविंदर के लिए असहनीय हो गई थी। दोनों ब्वायफ्रेंड्स के बीच में फंसी रही जसविंदर पुलिस के अनुसार जसविंदर फिलहाल नीरज मजूमदार नामक युवक के साथ रिश्ते में थी, जबकि उनके पूर्व ब्वायफ्रेंड का नाम प्रशांत लांडे है। दोनों युवकों के बीच लगातार तनाव चल रहा था, जिसका प्रभाव जसविंदर पर पड़ रहा था। मंगलवार दोपहर को प्रशांत ने जसविंदर को फोन कर पैसों की मांग की। फिर अन्य साथियों से भी फोन करवाया। नीरज भी लगातार जसविंदर पर दबाव बना रहा था कि वह प्रशांत से बात न करे। कॉलोनी पहुंचे आरोपी शाम होते-होते सभी आरोपी जसविंदर की कॉलोनी पहुंच गए। उनके साथ चार युवतियां रोशनी साहू उर्फ तन्नू, साबिया परवीन, तिलोत्मा पांडेय और नेहा यादव भी थीं। सभी ने मिलकर जसविंदर को नीचे बुलाने की कोशिश की। वह नहीं आई तो वे उसके अपार्टमेंट की ओर बढ़े। जसविंदर स्थिति बिगड़ती देख छत पर चली गई। वहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद जसविंदर ने छत से छलांग लगा दी। पुलिस ने सभी आरोपियों को किया गिरफ्तार घटना के तुरंत बाद पुलिस ने सभी आठ आरोपियों नीरज मजूमदार, प्रशांत लांडे, आकाश वैष्णव, दीपक पाटले और चार युवतियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस आत्महत्या के लिए उकसाने और मानसिक प्रताड़ना की धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच कर रही है।

जापान का महत्वाकांक्षी मून मिशन फिर फेल, सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान क्रैश हुआ

टोक्यो  जापान का महत्वाकांक्षी मून मिशन को बड़ा झटका लगा है। देश की एक निजी मून लैंडर शुक्रवार 6 जून को चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जापानी कंपनी आईस्पेस ने लैंडर से संपर्क टूटने के कई घंटे बाद मिशन के फेल होने की पुष्टि की है। कंपनी का यह दूसरा चंद्र अभियान था। जापानी कंपनी के रेजिलिएंस अंतरिक्ष यान को जापान के स्थानीय समयानुसार 6 जून को सुबह 4.17 बजे चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन निर्धारित लैंडिंग से एक मिनट 45 सेकंड पहले लैंडर से संपर्क टूट गया। फ्लाइट कंट्रोलर ने संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मिशन को समाप्त करने की घोषणा की गई। पहले भी नाकाम रही थी लैंडिंग चंद्रमा पर पहली निजी लैंडिंग की कोशिश कर रही ispace के लिए यह बड़ा झटका है। इसके पहले आईस्पेस ने अप्रैल 2023 में पहली बार मून लैंडिंग की कोशिश की थी। उस दौरान भी अंतरिक्ष यान नाकाम रहा था और मिशन को अंततः नाकाम घोषित करना पड़ा था। आईस्पेस के सीईओ और संस्थापक ताकेशी हाकामाडा ने मिशन की नाकामी पर दुख जताया और मिशन में योगदान देने वाले सभी लोगों से माफी मांगी। कंपनी के सीईओ ने मांगी माफी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताकेशी हाकामाडा ने कहा, ‘हम मिशन 2 को सफल बनाना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से हम लैंडिंग करने में विफल रहे।’ हाकामाडा ने कहा, ‘जिन लोगों ने हमारा समर्थन किया है, हम उनसे माफ़ी मांगना चाहते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि आईस्पेस भविष्य की उड़ानों के लिए अपनी विफलताओं से सीखने के लिए प्रतिबद्ध है। स्पेसडॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, रेजिलिएंस के अंतिम क्षणों से टेलीमेट्री पर आधारित प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि लैंडर के लेजर रेंजफाइंडर ने जांच की चंद्र सतह से दूरी मापते समय किसी प्रकार की देरी का अनुभव किया। आईस्पेस के अधिकारियों ने एक अपडेट में बताया कि लैंडर मून लैंडिंग के लिए जरूरी स्पीड तक पहुंचने के लिए पर्याप्त धीमा नहीं हो सका। इन परिस्थितियों के आधार पर वर्तमान में यह माना जाता है कि लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर संभवतः हार्ड लैंडिंग की।  

साउथ सुपरस्टार नागार्जुन के घर फिर जश्न का माहौल, छोटे बेटे अखिल ने गर्लफ्रेंड संग रचाई शादी

मुंबई साउथ सुपरस्टार नागार्जुन के घर फिर जश्न का माहौल है। नागार्जुन के छोटे बेटे और नागा चैतन्य के भाई अखिल अक्किनेनी शादी के बंधन में बंध गए हैं। उन्होंने 6 जून को हैदराबाद में अपनी गर्लफ्रेंड जैनब रावजी से शादी कर ली है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। हालांकि, अखिल अक्किनेनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर शादी की पहली तस्वीरें शेयर नहीं की हैं, लेकिन उनकी शादी फंक्शन की कई इंटरनेट पर वायरल हो गईं। वायरल हो रही फोटोज में अखिल को ट्रेडिशनल व्हाइट आउटफिट में देखा जा सकता है, जबकि जैनब आइवरी की कढ़ाई वाली एक ऑफ-व्हाइट साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने सुंदर डिजाइन वाले हीरे के आभूषणों भी पहने हैं और बालों को व्हाइट फूलों से सजाया है। ओवरऑल लुक में दुल्हन बनी जैनब बेहद प्यारी लग रही हैं।   इसके अलावा एक अन्य फोटो में नागार्जुन अपने बेटे के साथ शादी की रस्म निभाते नजर आ रहे हैं। अखिल की शादी में नागार्जुन के बड़े बेटे नागा चैतन्य और उनकी पत्नी शोभिता धुलिपाला भी मौजूद रहे।   सगाई में नजर आई थीं कई बड़ी हस्तियां बता दें, अखिल और जैनब ने पिछले साल नवंबर में अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में सगाई की थी। इससे पहले दोनों ने लगभग तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया था। वहीं, अब फाइनली ये कपल पति-पत्नी बन गए हैं। कौन हैं जैनब?  बता दें कि जैनब इंडस्ट्रियलिस्ट ज़ुल्फ़ी रावदजी की बेटी हैं, जिन्हें कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री का पायनियर माना जाता है। ज़ैनब खुद एक कलाकार हैं जो प्रकृति, संतुलन और सांस्कृतिक प्रभावों के विषयों को दर्शाती पेंटिंग्स बनाती हैं और काफी ज्यादा पॉपुलर हैं। मालूम हो कि जै़नब अखिल से 9 साल बड़ी हैं। बता दें, इससे पहले एक्टर नागा चैतन्य ने 4 दिसंबर, 2024 को गर्लफ्रेंड व एक्ट्रेस शोभिता धूलिपाला संग दूसरी शादी रचाई थी, जिसकी तस्वीरों ने खूब चर्चा बटोरी थी। वहीं, अब एक साल के अंदर नागार्जुन के घर दूसरी बहू भी आ गई है।  घरों में आई। भारत में फिल्म ने अब तक 94.22 करोड़ रुपये, जबकि वैश्विक स्तर पर 363 मिलियन डॉलर की कमाई कर ली है।  

बुर्का पहन पति संग राम मंदिर पहुंची मुस्लिम महिला, गाने लगी भजन, महिला को देखकर लोगो को हुआ आश्चर्य

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में 5 जून को राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में राम भक्त अयोध्या पहुंचे थे। लेकिन भक्तों की भीड़ के बीच एक जोड़ा ऐसा था जिस पर हर किसी की नजर टिक गई। लखीमपुर खीरी के अमीन और उनकी पत्नी राम लला के दर्शन को पहुंचे थे। दोनों पूरी तरह राम लला की भक्ति में लीन नजर आए। अमीन ने जहां यह कहा कि श्री राम जैसा जगत में कोई नहीं है, वहीं उनकी पत्नी ने ‘भीलनी परम तपस्विनी शबरी जाको नाम, गुरू मतंक कहकर गए, तोही मिलेंगे राम…’, भजन गाकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। दोनों ने प्रशासन से राम मंदिर में राम लला के दर्शन की इजाजत मांगी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें इसकी इजाजत मिल गई। गंगा दशहरा के मौके पर दोनों ने राम लला के दर्शन किए। भक्तों की कतार में बुर्का पहनी महिला को देखकर कई लोगों को आश्चर्य हुआ लेकिन इस बारे में अमीन ने जो कुछ कहा उसने सबका दिल जीत लिया। एक निजी चैनल से बातचीत में अमीन ने कहा कि जो राम को नहीं जानता है उससे बड़ा मूर्ख कोई नहीं है। श्री राम जैसा नहीं जगत में कोई। राम नाम भजे हर कोई। राम का नाम बड़ा सुखदाई। अन्य कोई न पार लगाए। राम के आगे शीश झुकाए। राम मुझे जीना सिखलाए। राम जैसा कोई आम इंसान नहीं बन सकता। अमीन ने कहा कि राम फरिश्ता हैं। वह मुझे बहुत अच्छे लगते हैं। अच्छा हुआ कि आज राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर आ गया। अमीन ने बताया कि वह अन्य मंदिरों में भी दर्शन करते रहते हैं। गोला गोकर्णनाथ में भी तीन बार कांवड़ लेकर जा चुके हैं। अमीन ने सीएम योगी की तारीफ करते हुए उन्हें अच्छा नेता बताया। उन्होंने सीएम को जन्मदिन की बधाई भी दी। अमीन और उनकी पत्नी मीडिया चैनल्स से बात कर ही रहे थे कि चेक पोस्ट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने वीआईपी विजिट का हवाला देते हुए उन्हें दर्शन के लिए जाने को कहा। इसके बाद वे दर्शन के लिए चले गए। सुरक्षा के लिहाज से कुछ पुलिसकर्मी भी उनके साथ गए। दर्शन की मिली इजाजत राम मंदिर आए मुस्लिम पति-पत्नी को दर्शन की इजाजत मिल गई। महिला सुरक्षा कर्मियों ने बुर्कानशीं महिला की जांच की। उनके पति की भी जांच की गई। इसके बाद उन्हें राम मंदिर की ओर भेजा गया।  

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