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मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई

माँ क्षिप्रा के कल कल बहते शुद्ध जल के साथ होगा सिंहस्थ का भव्य आयोजन : मुख्यमंत्री डॉ यादव  ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माँ ‍क्षिप्रा में कल कल बहता शुद्ध जल प्रवहमान रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामघाट पर सपत्नीक पूजा-अर्चना के साथ माँ ‍क्षिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी चढ़ाई। उन्होंने प्रदेश की उन्नति की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि काल के प्रत्येक प्रवाह में उज्जैन नगरी का अस्तित्व रहा है, यह नगरी सदैव जीवंत रही है। सम्राट विक्रमादित्य ,सम्राट अशोक से लेकर कई प्रतापी सम्राटों की कर्मभूमि यह अवंतिका नगरी रही है। यह नगरी कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने में समेटे हुए हैं। माँ ‍क्षिप्रा कई ऐतिहासिक गतिविधियों की साक्षी है, मोक्षदायिनी अवंतिका नगरी देवताओं की राजधानी है। इस नगरी का संबंध महाकवि कालिदास तथा राजा भृतहरी जैसे इतिहास पुरुषों से है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश शासन गरीब कल्याण का संकल्प लेकर कार्य कर रहा है। औद्योगिक विकास के लिए निवेश की संपूर्ण संभावनाओं के साथ विकास जारी है। सकारात्मक औद्योगिक नीति के कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है । शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में उल्लेखनीय रूप से मेडिकल कॉलेज की संख्या में वृद्धि हुई है। देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को भी पूर्ण सम्मान के साथ अपनाया जा रहा है। जल भंडारण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। हम अपने तीज त्योहारों को संपूर्ण आस्था के साथ मना रहे हैं तीज त्यौहार हमें प्रकृति तथा परमात्मा से जोड़ते हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश एक नई पहचान बना रहा है। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन दिव्य स्वरुप में होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश का भाग्य बदल रहा है उन्होंने कहा कि मां क्षिप्रा के घाटों पर आरती की भव्यता सदैव स्मरणीय है। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि माँ शिप्रा का जल सदैव प्रवाह मान रहे कल कल रूप से निरंतर बहता रहे। आगामी सिहस्थ के दौरान माँ शिप्रा के पक्के घाटों पर सुविधाजनक ढंग से करोड़ों लोग दिव्य स्नान कर सकेंगे। कार्यक्रम में डॉ. श्रीराम तिवारी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लेजर शो हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में ऋषिकेश से पधारे स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, सांसद अनिल फिरोजिया, जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे।  

बलकर ट्रक की टक्कर से अधेड़ महिला की मौत, ग्रामीणों ने ओवरलोड वाहनों का किया विरोध

बड़ामलहरा बड़ामलहरा पुलिस अनुभाग के थाना बमनौरा के अर्तगत गुरुवार को दोपहर करीब ढाई के दरम्यान एक बलकर ट्रक ने एक अधेड़ महिला को बमनोरा हीरापुर रोड पर टक्कर मार दी जिसमे महिला की मौके पर ही मौत हो गई है। आपको बता दे ट्रक दमोह हीरापुर की ओर से आ रहा था उसी समय महिला रोड़ पर किसी काम से घर से बाहर निकली और और ट्रक तेज रफ्तार में होने से टक्कर हो गई जिससे महिला शीला बाई लोधी पर चढ़ गया और शीला बाई लोधी की मौके पर मौत हो गई। जैसे ग्रामीणों ने यह हादसा देखा तो तत्काल बमनोरा पुलिस को सूचना और बलकर ट्रक को पुलिस ने पकड़ लिया और थाना परिसर में रखवा दिया। मौके पर पुलिस ने जाकर शव को अपने कब्जे लिया और शव पंचनामा तैयार कर शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सुपुर्द कर दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पुलिस प्रधासन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है ग्राम बमनोरा से भारी वाहन जो ओवरलोड चलते है वह भारी संख्या में ऐसे वाहनों की आवाजाही लगी रहती है जबकि इन वाहनों को यहां से निकलने के लिए किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नही है फिर भी यह ओवरलोड वाहन यहां से गुजरते है यहां पर इन्ही वाहनों की बजह से यहां की सड़क पूर्ण रूप से खस्ताहाल हो गई है साथ यह सड़क आबादी से होकर गुजरती है यहां से भारी वाहनों की आवाजाही से आय दिन पशुओं की मौते हो रही लगातार जनहानि भी हो रही पिछली साल भी इन्ही भारी बलकर ट्रक से एक कि मौत हुई थी लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नही उठा रहा है।

जानिए कौन-सी कम बुरी चॉइस, 5 ड्रिंक्स की रैंकिंग आई सामने

नई दिल्ली भारत में शराब पीना एक आम सामाजिक व्यवहार बनता जा रहा है, हालांकि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह आदत नुकसानदायक मानी जाती है।  राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21)  के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की उम्र के लगभग  22.4% पुरुष और 0.7% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। हालांकि, यह आंकड़े राज्य दर राज्य अलग-अलग हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में पुरुषों में शराब सेवन की दर सबसे अधिक पाई गई है। जब इतनी बड़ी संख्या में लोग शराब का सेवन कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि कौन-सी शराब सबसे कम हानिकारक हो सकती है। आइए जानते हैं एल्कोहॉल कंटेंट के आधार पर 5 प्रमुख शराबों की रैंकिंग और उनमें से कौन-सी विकल्प थोड़ी ‘बेहतर’ मानी जा सकती है। बीयर  एल्कोहॉल कंटेंट:  4-6% बीयर में एल्कोहॉल की मात्रा कम होती है और इसमें कुछ विटामिन्स और खनिज पदार्थ भी पाए जाते हैं। हालांकि ज़्यादा मात्रा में पीने पर वजन बढ़ना और लीवर को नुकसान संभव है। यदि कभी-कभार पीना हो, तो बीयर को एक हल्का विकल्प माना जा सकता है।   साइडर एल्कोहॉल कंटेंट: 4-7% साइडर सेब से बनता है, जिसमें फाइबर और विटामिन्स होते हैं। इसकी एल्कोहॉल मात्रा भी बीयर जैसी ही होती है।  एक मीठा और हल्का विकल्प, लेकिन कम मात्रा में ही सेवन करें। वाइन एल्कोहॉल कंटेंट:  11-13%  खासकर रेड वाइन में एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे रेस्वेराट्रॉल पाया जाता है, जो दिल की सेहत के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है।  सीमित मात्रा (1 ग्लास) में रेड वाइन को कभी-कभी पीना कम हानिकारक हो सकता है। वोडका एल्कोहॉल कंटेंट:  35-50% एल्कोहॉल की मात्रा अधिक होती है। वोडका को “क्लीन ड्रिंक” कहा जाता है क्योंकि इसमें बहुत कम स्वाद और गंध होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह सुरक्षित है। उच्च मात्रा में बेहद हानिकारक, केवल संयमित सेवन ही करें। व्हिस्की एल्कोहॉल कंटेंट:  40-50% एल्कोहॉल की मात्रा काफी ज्यादा होती है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि सीमित मात्रा में यह रक्तसंचार में मदद कर सकती है, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। अगर पीनी ही हो, तो बहुत सीमित मात्रा में।  शराब का कोई भी रूप स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। लेकिन यदि आपको कभी-कभार पीनी हो, तो बीयर, रेड वाइन या साइडर जैसे विकल्पों को कम मात्रा में चुना जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि शराब पीने से बचना ही सबसे स्वस्थ विकल्प है । इसलिए “थोड़ी नहीं, बिल्कुल नहीं-शराब से दूरी ही समझदारी है।”  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर्व पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा स्थित नीलगंगा सरोवर पर किया पूजन

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा पर्व पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा स्थित नीलगंगा सरोवर पर पूजन कर गंगा दशहरा की मंगलकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीलगंगा सरोवर का जीर्णोद्धार लगभग 4 करोड़ की लागत से किया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के दुश्मनों को परास्त किया। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी महाराज, प्रेम गिरी जी महाराज और श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

15 जून को बंद हो जाएंगे ‘मिनी गोवा’ कहे जाने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व के द्वार

पीलीभीत पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल न सिर्फ बाघों को लेकर बल्कि प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर भी सैलानियों को आकर्षित करता है। पीटीआर की खूबसूरती पर चार चांद लगाता है चूका बीच। जंगल और शारदा डैम के किनारे स्थित चूका बीच का नजारा सैलानियों के लिए गोवा का एहसास करता है। इसलिए इसे मिनी गोवा भी कहा जाता है। सात महीने तक चलने वाले पर्यटन सत्र के दौरान हजारों सैलानी यहां आकर प्राकृतिक सुंदरता को करीब से निहारते हैं। जंगल सफारी का रोमांच भी देखने को मिलता है। इस पर्यटन सत्र के कुछ ही दिन बचे हैं। 15 जून की शाम सात बजे पीटीआर सैलानियों के लिए बंद हो जाएगा। इस सत्र में अब तक 50 हजार सैलानियों ने चूका बीच और जंगल की सैर की। अंतिम दिनों में सैलानियों की आमद बढ़ गई हैं। वीकेंड पर आप भी घूमने का प्लान बना रहे हैं तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व बेहतर विकल्प हो सकता है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल चूका बीच के द्वार 15 नवंबर से सैलानियों के लिए खोल दिए जाते हैं। इसके बाद करीब सात माह तक चूका बीच और जंगल का क्षेत्र गुलजार रहता है। इस दौरान जनपद के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी सैलानियों की आमद रही। चूका बीच से सटे इलाके में स्थित शारदा डैम में हिलौरे लेता पानी और हरियाली के बीच बनी खूबसूरत हटें उनके आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इस दौरान बाघों के अधिक दीदार ने भी पीटीआर को नई पहचान दिलाई। सैलानियों की आमद से लेकर आय तक के पुराने सभी रिकॉर्ड टूट गए। आंकड़ों की बात करें तो इस बार अबतक 50 हजार सैलानी यहां पहुंचे। पर्यटन सत्र 15 जून को बंद हो जाएगा। उम्मीद है कि पर्यटन सत्र के आखिरी दिनों में सैलानियों की संख्या में इजाफा हो सकता है।   पीलीभीत मुख्यालय से 37 किलोमीटर दूर स्थित मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस पर प्रवेश द्वार है। यहां से सैलानी अपने वाहन को खड़ा कर जंगल सफारी के वाहन से घूमते हैं। दरअसल पर्यटन स्थल पर निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इसलिए वन विभाग की ओर से करीब 80 जंगल सफारी वाहनों की व्यवस्था की गई है। एक वाहन से अधिकतम छह लोग भ्रमण पर जा सकते हैं। जिप्सी वाहन का 4200 और जीनान वाहन का 5600 रुपये किराया है। इसमें छह सैलानी शामिल होते हैं। बरेली से 70 किलोमीटर दूर है चूका बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व दिल्ली से 350 और बरेली से 70 किलोमीटर दूर है। चूका बीच आने वाले सैलानियों के लिए ठहरने की भी बेहतर व्यवस्था है। इसमें चूका बीच में बनी वाटर, ट्री, बैंबो और थारू हट बुक कर सकते हैं। सैलानी ऑनलाइन वेबसाइट upecotourism.in पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं। इसी क्षेत्र में पौराणिक महत्व का गोमती नदी का उद्गम स्थल है। चूका बीच के अलावा पर्यटन में यह है खास पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर में चूका बीच के अलावा बराही रेंज में स्थित सायफन, सप्तसरोवर के अलावा बाइफरकेशन खास है। यहां का खूबसूरत नजारा भी सैलानियों को खूब पसंद आता है। चूका बीच की तर्ज पर बराही रेंज में स्थित सप्तसरोवर को विकसित किया गया है। यहां चार खूबसूरत हट बनाई गई हैं, जिसमें सैलानियों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव हुए किरण कवच शिविर के समापन में हुए शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पुलिस सामुदायिक भवन पुलिस लाइन में आयोजित निःशुल्क 15 दिवसीय आत्म रक्षा प्रशिक्षण ‘किरण कवच शिविर’ के समापन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिविर में प्रशिक्षित बेटियों से भेंट कर मातृशक्ति को देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर नमन किया। नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान  द्वारा निःशुल्क 15 दिवसीय आत्म रक्षा प्रशिक्षण किरण कवच शिविर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल , विधायक उज्जैन उत्तर श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, जनप्रतिनिधि श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी उपस्थित रहे।

प्रदेश के कई जिलों में बरसेंगे बादल, जानें कैसा रहेगा आगामी 2 दिनों का मौसम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। राज्य के पूर्वी हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है, विशेष रूप से पूर्वांचल, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, सिद्धार्थनगर और आसपास के जिलों में। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। तापमान में सामान्य वृद्धि देखने को मिलेगी। मौसम जानकारों के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गर्म और शुष्क हवाएं चलने की संभावना है। जबकि बुंदेलखंड, प्रयागराज, कानपुर, झांसी और आगरा मंडलों में लू चलने की संभावना, दोपहर के समय सतर्क रहने की आवश्यकता। वहीं गोरखपुर, बलिया, मऊ, देवरिया और कुशीनगर में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कहीं-कहीं बिजली गिरने की संभावना। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में न रहें। मौसम विभाग ने लू प्रभावित क्षेत्रों में दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचने की बात कही है। मौसम विभाग ने किसानों को फसल सुरक्षा के लिए निचले क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी है।

पहली एसी तीर्थयात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रामेश्वरम के लिए रवाना करेंगे सीएम भजनलाल शर्मा

जयपुर राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना के तहत रामेश्वरम के लिए पहली बार एसी ट्रेन शुक्रवार 6 जून को जयपुर से रवाना होगी। सुबह 11:30 बजे दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन से रवाना होने वाली इस ट्रेन को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस अवसर पर देवस्थान विभाग के केबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत भी मौजूद रहेंगे। इस ट्रेन के जरिए छह जिलों के कुल 776 वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्री रामेश्वरम की यात्रा पर जा रहे हैं। ये यात्री वर्ष 2024-25 के शेष बचे 7200 लाभार्थियों में शामिल हैं। इनमें जयपुर व दौसा जिले से 450, सीकर, अलवर व झुंझुनू से 150 तथा भरतपुर जिले से 176 यात्री हैं। भरतपुर जिले के यात्री सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार होंगे। देवस्थान विभाग ने इस एसी ट्रेन को खास रूप से सजवाया है। प्रत्येक डिब्बे को राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन धरोहरों की थीम पर डिजाइन किया गया है। डिब्बों पर राज्य के प्रमुख मंदिरों, दुर्गों, लोकनृत्य, त्योहारों और अभयारण्यों की झलक देखने को मिलेगी। इस बार ट्रेन में गोवा के प्रसिद्ध गिरिजाघरों को भी शामिल किया गया है। साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए तीर्थ स्थलों के संकेतक और साफ-सफाई की भी विशेष व्यवस्था की गई है। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने जानकारी दी कि बजट वर्ष 2025-26 के तहत 50 हजार वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा करवाई जाएगी। इसमें से 6 हजार वरिष्ठजन हवाई मार्ग से और 44 हजार एसी ट्रेनों के माध्यम से यात्रा करेंगे। जुलाई से योजना की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल का अपडेट कार्य पूरा हो गया है और जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा। इस वर्ष की यात्राओं में त्र्यंबकेश्वर, दश्मेश्वर, गोआ और आगरा जैसे नए तीर्थस्थलों को भी शामिल किया गया है।

यूपी पुलिस में होनी है 24 हजार पदों पर सीधी भर्ती

लखनऊ  प्रदेश पुलिस में जल्द करीब 24 हजार पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होगा। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। शासन की हरी झंडी मिलते ही इसका विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। सूत्राें की मानें तो आगामी 15 जून तक विज्ञापन जारी हो सकता है। पहले यह अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में जारी करने की तैयारी थी। डीजीपी मुख्यालय ने भर्ती बोर्ड को सिपाही के 19,220 पदों और उप निरीक्षक के 4543 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव बीते दिनों भेजा था। इनमें सिपाही पीएसी के 9837, सिपाही पीएसी महिला वाहनी के 2282, सिपाही नागरिक पुलिस के 3245, सिपाही पीएसी/सशस्त्र पुलिस 2444, सिपाही विशेष सुरक्षा बल के 1341 और घुड़सवार पुलिस के 71 पद (कुल 19220) पद शामिल थे। इसी तरह उप निरीक्षक के 4543 पदों का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें उप निरीक्षक नागरिक पुलिस के 4242 पद, उप निरीक्षक नागरिक पुलिस/प्लाटून कमांडर महिला वाहिनी बदायूं, गोरखपुर, लखनऊ के 106 पद, प्लाटून कमांडर/उप निरीक्ष सशस्त्र पुलिस के 135 पद, उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर विशेष सुरक्षा बल के 60 पद शामिल हैं। अब इन पदों पर भर्ती के लिए बोर्ड द्वारा विज्ञापन जारी करने की तैयारी है। बता दें कि मंगलवार को कैबिनेट ने उपनिरीक्षकों की भर्ती में तीन वर्ष की छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 35 लाख आवेदन आने की संभावना सिपाही और उप निरीक्षक के पदों पर भर्ती के लिए करीब 35 लाख आवेदन आने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि बीते दिनों सिपाही नागरिक पुलिस के 60,244 पदों पर सीधी भर्ती के लिए करीब 48 लाख आवेदन आए थे। इस बाद भर्तियों में अधिकांश पद पीएसी आदि के होने की वजह से 35 लाख से अधिक आवेदन होने की संभावना जताई जा रही है।

इंदौर नगर निगम शहर में निम्न दरों पर जनता को कराएँगे राइड, जल्द शुरू होगी कैब सर्विस

इंदौर एमपी के इंदौर शहर में कई कंपनियां ऑनलाइन कैब और दोपहिया उपलब्ध करवाती हैं। इसी तर्ज पर अब नगर निगम एप बेस्ड कैब सर्विस शुरू करने जा रहा है। दावा है कि इससे किफायती दाम पर बेहतर सर्विस मिलेगी।  पहले चरण में शहर से मेट्रो तक पहुंचने और यहां से जाने के लिए इसे शुरू किया जाएगा। बाद में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा, लेकिन इसका संचालन शहरी सीमा में ही होगा। इसमें टैक्सी के साथ ई रिक्शा को भी शामिल करना प्रस्तावित है। तैयार हो रहा एप इस सुविधा के लिए स्मार्ट सिटी एप तैयार कर रही है। पहले चरण में मेट्रो नेटवर्क से इसे जोड़ने का कारण यह है कि अभी मेट्रो ट्रेन तक आने के लिए कई लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। इन वाहनों की पार्किंग को लेकर दिक्कत होती है। यह सुविधा शुरू होने से कोई भी व्यक्ति राइड बुक कर सकता है। कई बार वाहन चालकों के दुर्व्यवहार और मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती हैं। निगम की व्यवस्था में लोगों को इससे राहत मिलेगी। किराये पर होगा नियंत्रण निगम के एप पर रजिस्टर्ड वाहनों को ही बुकिंग की जानकारी मिलेगी। वे लोकेशन पर पहुंचेगे और सवारी को नियत स्थान तक छोड़ेंगे। वाहन बुक करने से लेकर यात्री को छोड़ने तक की निगरानी निगम या स्मार्ट सिटी के पास रहेगी। इससे यात्रियों से लिए जाने वाले मनमाने किराये पर नियंत्रण रहेगा। एप पर रजिस्टर्ड वाहन चालकों की पूरी जानकारी रहेगी और उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाएगा। निगम के वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सेवा जल्द शुरू होगी। इससे यात्रियों को सुरक्षा और किफायती सफर की सौगात मिलेगी तो अन्य लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही बेतरतीब चल रहे ई रिक्शा पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा।  

डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के दीक्षांत समारोह में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को मानद डी लिट् उपाधि प्रदान की जाएगी

सागर  लंबे इंतजार के बाद डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में आयोजित 33 वां दीक्षांत समारोह की तारीख निर्धारित हो गई है। दीक्षांत समारोह 12 जून को मनाया जाएगा। समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों के नाम की सूची अभी तय नहीं हुई है। समारोह में शिक्षाविद पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को मानद डी लिट् उपाधि प्रदान की जाएगी। समारोह की आवश्यक तैयारियों को लेकर कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में कुलपति ने आयोजन की तैयारियों के संबंध में विभिन्न समितियों के समन्वयक एवं उपसमन्वयक से चर्चा कर तैयारियों की जानकारी ली और सफल आयोजन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आयोजन के मुख्य समन्वयक प्रो. नवीन कानगो ने बताया कि लगभग 1225 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। पीजी के 426, यूजी के 482 तथा पीएचडी के 49 छात्रों सहित कुल 957 छात्र समारोह में उपस्थित रहकर उपाधि प्राप्त करेंगे।  9 से 11 जून को डिग्री फाइल का होगा वितरण दीक्षांत समारोह में भाग लेने वाले पंजीकृत अभ्यर्थियों को 9, 10 व 11 जून को सुबह 11.00 बजे से शाम 4.00 बजे के बीच गौर प्रांगण से डिग्री फाइल और ड्रेस सामग्री ( पगड़ी और स्टोल) वितरित की जाएगी। निर्धारित ड्रेस कोड (छात्र- सफेद कुर्ता और पायजामा, छात्राएं-सफेद सलवार और कुर्ता) की व्यवस्था अभ्यर्थियों को स्वयं करनी होगी। विश्वविद्यालय स्टोल एवं बुंदेली सतरंगी पगडी़ उपलब्ध कराएगा। सभी विद्यार्थी बुंदेली वेशभूषा में नजर आएंगी। दो दिन चलेगी रिहर्सल डिग्री पाने वाले अभ्यर्थी 10 एवं 11 जून को दोपहर 3 बजे गौर प्रांगण में रिहर्सल में भाग ले सकेंगे। बुंदेली सतरंगी पगड़ी, स्टोल, दीक्षांत समारोह हॉल में प्रवेश के लिए अपना प्रवेश पत्र अपनी फोटो आईडी (आधार, पैन आदि) साथ लाना होगा। विद्यार्थियों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित बैठक व्यवस्था का पालन करें। पंजीकृत पदक प्राप्तकर्ता, पीएचडी, पीजी, यूजी एवं पंजीकृत छात्रों के साथ आने वाले व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था भी गौर प्रांगण में की गई है। अद्यतन जानकारी के लिए अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट का अवलोकन करते रहें।

दिल्‍ली आनेवाले लोगों की जेब नहीं होगी ढीली, CM रेखा गुप्‍ता देंगी सौगात, गडकरी को कहिए थैंक …

नई दिल्ली  दिल्ली की सीमाओं से MCD टोल बूथ हटाने की तैयारी है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसके लिए जोर दिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और एलजी वीके सक्सेना भी इससे सहमत हैं। उनका मानना है कि शहर की सीमाओं पर एंट्री फीस लेने वाले बूथों को हटाने की जरूरत है। इन बूथों के कारण लोगों को परेशानी होती है और समय बर्बाद होता है। सरकार अब एमसीडी के लिए राजस्व के नए स्रोत तलाशने पर विचार कर रही है। दिल्ली की सीमाओं से टोल बूथ हटाने का सुझाव दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में MCD के लिए राजस्व के नए स्रोत खोजने के सुझाव पर सहमति जताई। एमसीडी को एंट्री फीस से हर साल लगभग 800-900 करोड़ रुपये मिलते हैं। गडकरी ने कहा कि मुख्य मार्गों पर लगे टोल बूथ यात्रियों के लिए ‘भारी उत्पीड़न’ का कारण बनते हैं। इससे लोगों के काम के घंटे बर्बाद होते हैं और ट्रैफिक जाम लगता है। नितिन गडकरी ने इसलिए लिया अहम फैसला एक सूत्र ने बताया कि गडकरी ने दिल्ली सरकार को राजस्व के नए स्रोत खोजने का सुझाव दिया। इसमें प्रॉपर्टी डेवलपमेंट या गाड़ियों पर मामूली अतिरिक्त चार्ज शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि एंट्री फीस और ग्रीन सेस की वसूली ‘खुलेआम लूट’ से कम नहीं है। उन्होंने हाइवे डेवलपमेंट में किए गए भारी निवेश पर भी प्रकाश डाला। MCD को 800-900 करोड़ रुपये का नुकसान दिल्‍ली सरकार यदि एंट्री प्‍वाइंट पर बने बूथ को खत्‍म करने की योजना पर आगे बढ़ती है तो केंद्र प्रशासित क्षेत्र के रेवेन्‍यू पर इसका व्‍यापक असर पड़ेगा. इन बूथों के जरिये MCD को सालाना 800 से 900 करोड़ रुपये का राजस्‍व हासिल होता है. ऐसे में यदि इन बूथ को हटा दिया जाएगा तो नगर निगम को तकरीबन 1000 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू लॉस होगा. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीएम रेखा गुप्‍ता और एलजी वीके सक्‍सेना इस बात पर सहमत हैं कि MCD को आय के लिए दूसरा सोर्स ढूंढ़ना होगा, ताकि 800-900 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई की जा सके. गडकरी की सलाह केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली में एनवायरमेंट कंप्रेसन चार्ज (ईसीसी) यानी ग्रीन सेस और एंट्री फीस की वसूली को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. एक उच्चस्तरीय बैठक में गडकरी ने इसे ‘पब्लिक लूट’ करार देते हुए कहा कि यह व्यवस्था यात्रियों को भारी परेशानी और देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने संकेत दिया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस वसूली को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है. बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, गडकरी ने कहा कि दिल्ली की मुख्य सड़कों पर लगे टोल बूथ यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं. इससे न सिर्फ घंटों समय की बर्बादी होती है, बल्कि ट्रैफिक जाम से ईंधन की खपत और प्रदूषण भी बढ़ता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार को नए राजस्व स्रोतों की तलाश करनी चाहिए, जैसे कि संपत्ति विकास या वाहनों पर मामूली अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है. MCD के सालाना बजट पर प्रभाव गडकरी ने जब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही तो उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसे अदालत से बाहर सुलझाने की बात कही और भरोसा जताया कि इस पर जल्द समाधान निकाला जाएगा. बैठक में नगर निगम (MCD) के अधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि यदि ईसीसी और एंट्री फीस वसूली बंद की जाती है तो इसका एमसीडी के सालाना बजट पर गहरा असर पड़ेगा, जो लगभग 5,000 करोड़ रुपये का है. अधिकारियों का कहना है कि यह राजस्व उनके लिए आवश्यक सेवाएं चलाने के लिए जरूरी है. गडकरी ने बैठक में यह भी दोहराया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली की सड़कों और हाईवे नेटवर्क के विस्तार में भारी निवेश किया है. ऐसे में इन टोलों से वसूली करना अनुचित है, खासकर जब इससे आम जनता को असुविधा हो रही हो. ऐसे एमसीडी को राजस्व की होगी प्राप्ति जब गडकरी ने कहा कि NHAI पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) या ग्रीन सेस की वसूली रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी, तो सक्सेना ने जवाब दिया कि इस मुद्दे को अदालत जाए बिना भी सुलझाया जा सकता है। जल्द ही इसका रास्ता निकाल लिया जाएगा। बैठक में मौजूद MCD अधिकारियों ने कहा कि राजस्व में कमी से नागरिक निकाय के वार्षिक बजट पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा, जो लगभग 5,000 करोड़ रुपये है। दिल्ली के एलजी, सीएम, मंत्रियों के साथ बैठक दिल्ली के PWD मंत्री परवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और MoS (सड़क परिवहन) हर्ष मल्होत्रा भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में सभी चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की गई। पिछले हफ्ते, दिल्ली सरकार और MCD के शीर्ष अधिकारी फिजिकल बूथों को हटाने के लिए मल्टीलेन फ्री फ्लो (MMLF) टोल और एंट्री फीस कलेक्शन सिस्टम लगाने पर सहमत हुए थे। बैठक में कई प्रोजेक्ट पर चर्चा बैठक में लिए गए निर्णयों पर अधिकारियों ने कहा कि NHAI ग्यारह मूर्ति से आईएनए से वसंत कुंज तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड तक एक अंडरग्राउंड लिंक (सुरंग) की संभावना तलाशने के लिए एक तकनीकी अध्ययन करेगी। एक अधिकारी ने कहा कि इससे सरदार पटेल मार्ग पर ट्रैफिक कम करने में मदद मिलेगी, जो सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान पूरी तरह से जाम हो जाता है और यहां वीआईपी मूवमेंट भी बहुत होता है। CM कार्यालय ने एक बयान में यह भी कहा कि सराय काले खान को IGI एयरपोर्ट से जोड़ने वाली सुरंग के लिए भी एक व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। NHAI जल्द ही तीन NH स्ट्रेच की रिपोर्ट करेगा तैयार अधिकारियों ने कहा कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि NHAI जल्द ही तीन NH स्ट्रेच – हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर से पंजाबी बाग (18.5 किमी), आश्रम से बदरपुर (7.5 किमी) और मेहरौली से गुड़गांव बॉर्डर (8.5 किमी) – को अपने कब्जे में लेगी और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के बाद उन्हें सिग्नल फ्री बनाएगी। उन्होंने कहा कि PWD इन राजमार्ग स्ट्रेच के किनारे सर्विस रोड और नालियों का रखरखाव करेगी।  

दमोह वनमंडल का एक बड़ा हिस्सा अब आधिकारिक रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में शामिल कर लिया गया

दमोह  प्रदेश की नई पहचान बन चुका वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अब और अधिक संगठित और सशक्त होता जा रहा है। दमोह वनमंडल का एक बड़ा हिस्सा अब आधिकारिक रूप से इस टाइगर रिजर्व में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही वन विभाग के करीब 35 कर्मचारियों को भी टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अधीन कर दिया गया है।  इन कर्मचारियों की तैनाती अब रिजर्व क्षेत्र की गश्त, निगरानी, सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में की जाएगी। यह कदम न केवल टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि इससे इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में यहां बाघों की संख्या बढ़ने की भी पूरी संभावना है। गौरतलब है कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की घोषणा वर्ष 2023 में की गई थी। इसके बाद दमोह वनमंडल के कुछ क्षेत्रों को टाइगर रिजर्व में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। वन प्रबंधन को मिलेगी मजबूती इस संबंध में डीएफओ दमोह ईश्वर जरांडे ने बताया कि दमोह वनमंडल के 30 से 35 कर्मचारियों को टाइगर रिजर्व में अधिकृत रूप से शामिल कर लिया गया है। इससे वन्यजीव संरक्षण के कार्यों को गति मिलेगी और टाइगर रिजर्व प्रबंधन की क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने आगे बताया कि यह प्रशासनिक और मानव संसाधन स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिससे टाइगर रिजर्व की समग्र व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी। यह बदलाव आने वाले समय में न सिर्फ बाघों बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में भूमि विकास नियम में दिये गये प्रावधानों के अनुसार ऑनलाइन कम्पांउडिंग लागू किया गया

भोपाल प्रदेश में 413 नगरीय निकायों में यूनिफॉर्म एवं पारदर्शी तरीके भवन अनुज्ञा जारी करने के लिये ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रुवल सिस्टम (एबीपीएएस) लागू किया गया है। एबीपीएएस के अंतर्गत निकाय कार्यालय में उपस्थित हुए बिना ही भवन अनुज्ञा प्राप्त किये जाने के लिये आवेदन ऑनलाइन स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था की गई है। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिना किसी मानव हस्तक्षेप के ऑटोमेटेड प्रोसेस से ही की जाती है। यहाँ तक की बिल्डिंग इस्पेंक्टर द्वारा स्थल निरीक्षण के समय में भी मोबाइल ऐप द्वारा ही जानकारी प्राप्त कर सिस्टम में अपलोड कर दी जाती है। अब तक करीब 3 लाख 50 हजार भवन अनुज्ञाएँ ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत की गई हैं। ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान सिस्टम नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा तैयार किया गया है। प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में भूमि विकास नियम में दिये गये प्रावधानों के अनुसार ऑनलाइन कम्पांउडिंग (प्रशमन) लागू किया गया है। ऑनलाइन कम्पांउडिंग प्राणाली में शुल्क भी सिस्टम के द्वारा ऑटोमेटिक जनरेट किया जाता है एवं शुल्क के लिये सभी ऑनलाइन भुगतान विकल्प का उपयोग किया जाता है। ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रुवल सिस्टम में नागरिक स्वयं प्लिंथ प्रमाण पत्र, सेवा प्रमाण पत्र, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और अधिभोग प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा प्राप्त कर सकते है। भवन अनुज्ञा के लिये अनिवार्य दस्तावेजों की संख्या 16 से घटा कर 5 और साइट निरीक्षण चेक लिस्ट बिंदुओं को भी 43 से घटा कर 26 कर दिया गया है। फीस मेमों सिस्टम द्वारा स्वता: ही शुल्क जनरेट किया जाता है। शुल्क भुगतान के लिये सभी प्रकार के ऑनलाइन माध्यम स्वीकार किये जाते है। राज्य शासन द्वारा भवन अनुज्ञा प्रक्रिया के सरलीकरण के लिये अधिकारिता रखने वाले प्राधिकारी द्वारा समयक रूप से पंजीकृत वास्तुविद और संरचना इंजीनियर को 300 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल के भू-खंडों पर भवन अनुज्ञा जारी किये जाने की शक्तियाँ प्रदान की गई है। नये नियमों के अनुसार 186 वर्ग मीटर तक के आवासीय भू-खंडों पर त्वरित डीम्ड स्वीकृति प्रक्रिया को भी सिस्टम अंतर्गत लागू किया गया है।  

बक्सवाहा की जमीन के नीचे दबा है 6000 किलो हीरे का भंडार, जिसकी कीमत 70 हजार करोड़

छतरपुर  जिले से 100 किमी दूर बक्सवाहा के जंगलों में एक ऐसी खोज हो चुकी है, जो मध्य प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदलने का दम रखती है. 25 साल पहले बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत बक्सवाहा के जंगलों में एक सर्वे शुरू हुआ था, जिसमें जमीन के नीचे 3 करोड़ कैरेट से ज्यादा (लगभग 6000 किलो) हीरे का भंडार होने का दावा किया गया था. उस वक्त इस डायमंड डिपॉजिट की अनुमानित कीमत 55 हजार करोड़ रू आंकी गई थी, जो अब लगभग 60 से 70 हजार करोड़ रू के करीब है. अगर ये खजाना जमीन से बाहर आता तो मध्य प्रदेश की किस्मत बदल जाती. जाने देश के इस सबसे बड़े खजाने के बारे में. क्या है सबसे बड़े हीरे के भंडार की कहानी? दरअसल, मध्य प्रदेश के बक्सवाहा के जंगलों में यह सर्वे आस्ट्रेलियाई कंपनी रियोटिंटो ने कराया था. देश की सबसे बड़ा माइनिंग कंपनी रियोटिंटो ने सन् 2000 से 2005 के बीच पूरे बक्सवाहा जंगल में सर्वे कराया. एक दिन सर्वे टीम की खुशी का ठिकाना न रहा जब उन्हें किंबरलाइट पत्थरों की बड़ी-बड़ी चट्‌टानें नजर आईं. दरअसल, हीरा इसी किंबरलाइट की चट्‌टान में पाया जाता है. तब 55 हजार करोड़ थी हीरों की अनुमानित कीमत 25 साल पहले रियोटिंटो कंपनी को यहां हीरों के भंडार का पता चला था. कंपनी को यहां बड़े पैमाने पर किंबरलाइट की चट्‌टानें मिली थीं. दावा था कि जमीन के नीचे 55 हजार करोड़ तक के हीरे हो सकते हैं. दावा था कि जंगल में जमीन के नीचे साढ़े तीन करोड़ कैरेट (लगभग 6000kg) से ज्यादा के हीरे हैं. हालांकि, इसकी खोज करने वाली कंपनी 2017 में इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गई, जिसके बाद बक्सवाहा के जगंल को सरकार ने हीरा निकालने के लिए नीलम किया था. ये प्रोजेक्ट लीज पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी को 2019 में मिला पर हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया था. खुदाई से पहले लगा हाईकोर्ट का स्टे छतरपुर जिले की बक्सवाहा हीरा खदान 2019 में नीलाम की गई थी. आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी ने 50 साल की लीज पर इसे लिया था. कंपनी को लगभग 364 हेक्टेयर जमीन मिली थी. खुदाई शुरू हो पाती उसके पहले ही पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था. बताया गया था कि इस जंगल में 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिह्नित किया गया था, पर कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा, जिससे बाकी जमीन का उपयोग खनन करने और प्रोसेस के दौरान खदानों से निकला मलबा डंप करने में किया जा सके. इसी दौरान हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया. बन जाती एशिया की सबसे बड़ी डायमंड माइन खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, ” बक्सवाहा के जंगलों में बंदर डायमंड के नाम से एक ब्लॉक बनाया गया था, जिसे रियोटिंटो कंपनी ने एक्सप्लोर किया था लेकिन रियो टिंटो उसे छोड़ कर चली गई थी. उस समय फॉरेस्ट से उन्होंने रकबा बहुत बड़ा मांगा था, जो किसी वजह से नहीं दिया गया. उसके बाद एक छोटा रकबा 364 हेक्टेयर का बनाया गया था. अगर बक्सवाहा की माइंस चलती तो एशिया की सबसे बड़ी माइंस होती, उस समय 55 हजार करोड़ के हीरे निकलने की वेल्युएशन की गई थी.” लाखों पेड़ कटने की अफवाहें थीं वहीं खनिज अधिकारी ने आगे कहा, ” 364 हेक्टेयर क्षेत्र की लीज दी गई तो अफवाहें उड़ीं कि पूरे में खुदाई होगी और लाखों पेड़ कटेंगे. ये महज अफवाह थी. अब खुदाई की आधुनिक तकनीकें आ गई हैं, ज्यादा से ज्यादा एक फुटबॉल ग्राउंड के बराबर जमीन पर ही खुदाई होती है, इससे न तो ज्यादा पेड़ कटते हैं और न वन्य जीवों को नुकसान होता है. जितने पेड़ कटते हैं उसके 10 गुने पेड़ लगवाए भी जाते है,और उनकी पूरी देखरेख की जाती है.”

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