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नई जनगणना के सारे आंकड़े 2029 से पहले आना मुश्किल, परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य

नई दिल्ली  केंद्र सरकार 16 जून को अगली जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी कर सकती है। वैसे जमीन पर ‘जनगणना-2027’ की प्रक्रिया 2026 में शुरू होगी और इस तरह से इसमें छह साल की देरी होगी, जिसके लिए मुख्य तौर पर कोविड महामारी को जिम्मेदार माना जा सकता है। क्योंकि, जनगणना का काम तब जो लटका, वह लटकता ही चला गया। इस बार की जनगणना के भरोसे राजनीतिक तौर पर कम से कम दो अहम चीजें लटकी हुई हैं। एक तो कानून के मुताबिक 2026 के बाद होने वाली जनगणना को ही आधार मानकर निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होना है। क्योंकि, देश में आबादी के हिसाब से जनप्रतिनिधियों की संख्या काफी कम है और निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों में भी बड़ी असमानताएं उभर रही हैं। दूसरी तरफ संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण की व्यवस्था की है, यह भी तभी संभव है जब निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन हो। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में कहना मुश्किल है कि यह सब 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए संभव हो सकेगा। केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार 1 अप्रैल, 2026 से जनगणना शुरू हो सकती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, इस हिसाब से यह काम 2021 में ही हो जाना था। सरकार ने नई जनगणना के लिए 1 मार्च, 2027 को रेफ्रेंस डेट के रूप में तय किया है। मतलब, जनगणना के आंकड़ों के लिए यही तारीख आधार होगी। हालांकि, अभी यह नहीं बताया गया है कि जनगणना के आंकड़े कब जारी होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनगणना से जुड़े सभी आवश्यक आंकड़े 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले आ जाएंगे? अगर सरकारी सूत्रों की मानें तो इसका जवाब है नहीं। मसलन, एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि जातिगत आंकड़े तीन साल में जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि जातिगत गणना ही आरक्षण का आधार बनेगी। पिछली जनगणना में आंकड़े जारी होने में करीब दो साल लगे अगर पिछली जनगणना को देखें तो अंतिम जनसंख्या गणना के आंकड़े जारी होने में लगभग 2 साल लग गए थे। हालांकि, यह देखने वाली बात है कि क्या सरकार इसकी कोई तारीख बताती है, जब जनगणना के आंकड़े आने की संभावना है। क्योंकि, बेहतर तकनीक और डिजिटल डेटा के इस्तेमाल से अब जनगणना में उतना वक्त लगने की संभावना नहीं है, जितना की पहले लगा करता था। पिछले परिसीमन में लगा था करीब साढ़े तीन साल का वक्त मान लिया जाए कि जनगणना के आंकड़े पहले के मुकाबले जल्द भी आ जाएं और परिसीमन आयोग 2029 के चुनाव से पहले अपना काम शुरू भी कर देता है, तो भी इसे परिसीमन के काम में लंबा वक्त लग सकता है। जैसे 2001 की जनगणना के बाद 2002 में परिसीमन आयोग बना था। उसने उसी जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया और इसके गठन से लेकर काम पूरा करने में मोटे तौर पर साढ़े तीन साल लग गए और 2007 में जाकर काम पूरा हुआ, जो कि 2008 से प्रभावी हुआ। मतलब, 2009 के लोकसभा चुनावों इसकी ओर से किया गया बदलाव अमल में आ पाया। परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य अगर राजनीतिक तौर पर देखें तो इस बार के परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्य पहले से ही चिंतित बैठे हुए हैं। उनको डर है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत काम किया है और उसे काफी नियंत्रण में रखा है। लेकिन, अगर आबादी परिसीमन की आधार बनी तो उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं और बिहार और यूपी जैसे राज्यों को इसका फायदा ज्यादा सीटों के तौर पर मिल सकता है। इसलिए, परिसीमन के काम को लेकर भारी विरोध भी दिख रहा है। सरकार को यह भी देखना है कि कहीं यह मुद्दा उत्तर और दक्षिण भारतीय राज्यों में बड़ी विवाद की वजह न बन जाए। केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार है, जो आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी दल टीडीपी के समर्थन पर टिकी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए इसपर तेजी से बढ़ना राजनीतिक रूप से भी आसान नहीं होगा। इन सारे हालातों को देखने के बाद यही लगता है कि नई जनगणना के आंकड़े 2034 के लोकसभा चुनावों से पहले काम में आना मुश्किल है।  

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान पर कान्हा नेशनल पार्क

मंडला टाइगर्स के लिए पूरे देश में मशहूर मध्य प्रदेश के नाम एक और बड़ी उपलब्धि है. मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या के मामले में देश में नंबर वन बन गया है. वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान दिया गया है, वहीं जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क दूसरे स्थान पर आया है. बता दें कि मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व अपने टाइगर्स की लिए देश-दुनिया में जाना जाता है और यहां दूर-दूर से लोग टाइगर्स का दीदार करने आते हैं. WII की रिपोर्ट में कान्हा नेशनल पार्क नंबर-1 वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क की स्टडी की थी. यहां खासतौर पर शाकाहारी वन्यजीवों पर रिसर्च की गई. रिसर्च में पाया गया कि मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व ने इस मामले में देश के अन्य टाइगर रिजर्व के साथ-साथ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को भी पछाड़ दिया है. इसी वजह से कान्हा टाइगर्स के लिए अनुकूल वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. यहां सबसे ज्यादा शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदी टाइगर्स के संरक्षण के लिए जबर्दस्त है. ये यहां की पूरी फूड चेन के लिए अच्छा संकेत है. पिछले वर्ष की रिसर्च के आधार पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इस रिपोर्ट को पेश किया है. 2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया 2074.31 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है. इस पूरे क्षेत्र में टाइगर्स के साथ-साथ बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की भरमार है. शाकाहारी वन्य प्राणियों की अधिक संख्या की वजह से दूसरे मांसाहारी जीव खासतौर पर टाइगर्स के लिए ये जगह उपयुक्त है. जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है कान्हा नेशनल पार्क कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल के मुताबिक, ” कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्य जीव के मामले में पूरे भारत में नंबर वन है. जहां शाकाहारी वन्य जीवों की तादाद ज्यादा होती है, वहां मांसाहारी वन्य जीव भी अधिक होते हैं.यही वजह है कि कान्हा टाइगर रिजर्व जैव विविधता का सबसे अच्छा उदाहरण है.

भारत ने रूस के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट छोड़ा, भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे

नई दिल्ली लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने को मंजूरी दे चुका है. लेकिन, ये विमान भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे. प्रोडक्शन शुरू करने से पहले विमान को अभी डिजाइन, विकास और परीक्षण की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो एक बड़ी चुनौती वाला और समय खाने वाला काम है. ऐसे में भारत सरकार के सामने तुरंत इस जरूरत को पूरा करने की चुनौती है. भारतीय एयरफोर्स अब सार्वजनिक तौर पर फाइटर जेट की कमी की बात करने लगी है. दरअसल, चीन और पाकिस्तान से दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही इंडियन एयरफोर्स को अपनी लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए फाइटर जेट्स की 42 स्क्वायड्रन की जरूरत है. एक स्क्वायड्रन में 18 विमान होते हैं. लेकिन, मौजूदा वक्त में एयरफोर्स के पास 32 स्क्वायड्रन बचे हैं. दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान की एयर फोर्स अब पांचवीं पीढ़ी के विमानों से लैस हो रही है. ऐसे में चुनौती तो है. हालांकि, इस चुनौती को सरकार और वायुसेना दोनों समझती है और इसके लिए उचित कदम भी उठाए जा रहे हैं. चुनौती का दूसरा पहलू खैर, आज हम इस चुनौती की नहीं बल्कि इससे जुड़े एक अन्य पहलू की बात कर रहे हैं. इसे पहलू भी नहीं बल्कि एक चूक कही जा सकती है. दरअसल, भारत सरकार ने 2007 में रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के लिए एक अंतर सरकारी समझौता किया था. इस समझौते के तहत रूस में सुखोई फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी और भारत की सरकारी कंपनी एचएएल एक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का विकास करने वाली थी. इस प्रोजेक्ट को ब्रह्मोस मिसाइल की तरफ आगे बढ़ाना था. ज्ञात हो कि बीते दिनों ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की एयरफोर्स की कमर तोड़ने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ ही मिलकर डेवलप किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक भारत और रूस ने जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की कल्पना की थी वह एक स्टील्थ जेट था. उसमें दो इंजन लगाए जाने थे. उसको हवाई, जमीनी और नौसैनिक टारगेट्स को नष्ट करने के लिए बनाया जाना था. इसके लिए भारत ने 2006 में ही अपनी एक टीम रूस भेज दी थी. समझौते के बाद दिसंबर 2008 में फाइटर जेट की डिजाइन और दिसंबर 2010 में खर्च को लेकर समझौते भी हो गए. भारत और रूस ने 6-6 अरब डॉलर के निवेश से 154 विमानों के उत्पादन की योजना बनाई. परियोजना में आने लगी अड़चनें भारत ने रूस से इस परियोजना की तकनीकी समानता और सोर्स कोर्ड साझा करने की मांगी की. सोर्स कोड किसी विमान में सॉफ्टवेयर नियंत्रण प्रणाली होती है. उसी के जरिए भविष्य में विमान में किसी बदलाव को अंजाम दिया जा सकता है. लेकिन, रूस ने इस सोर्स कोड को देने से इनकार कर दिया. फिर बातचीत हुई और इसके लिए रूस ने अतिरिक्त 7 अरब डॉलर की राशि की मांग की. विमानों की संख्या, सोर्स कोड, तकनीकी हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर असहमति के कारण 2016 तक भारत की इस परियोजना में दिलचस्पी कम हो गई. फिर भारत ने 2018 में आधिकारिक तौर पर इस परियोजना से निकलने की घोषणा कर दी. भारत ने देसी एएमसीए प्रोग्राम पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया. इसके साथ ही एयरफोर्स की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे गए. जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट परियोजना से भारत बाहर हुआ उस पर रूस ने काम जारी रखा. फिर यह सुखोई-57 के रूप में सामने आया. इस विमान में कई ऐसी चीजें हैं जो भारत की जरूरतों के अनुकूल है. इस तरह रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने वाला तीसरा मुल्क बन गया. इससे पहले अमेरिका और चीन के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं.   अब दोनों की मजबूरी 2018 से 2025 आते-आते काफी चीजें बदल चुकी हैं. एक तरफ भारत को इस वक्त पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. वहीं यूक्रेन युद्ध के कारण रूस की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है. वह पैसे के अभाव में इस फाइटर जेट्स का उत्पादन नहीं कर पा रहा है. अभी तक वह इसका केवल 40 यूनिट ही बना पाया है. ऐसे में वह भारत को अब सोर्स कोड और तकनीक ट्रांसफर के साथ इसे देना चाहता है. भारत की जरूरत के हिसाब से बनने वाले फाइटर जेट को सुखोई-57ई नाम दिया गया है. उसने इसका उत्पादन भी भारत ने करने की बात कही है. इसे एचयूएल के मौजूदा प्लांट में आसानी से बनाया भी जा सकता है. क्या एफ-35 और जे-20 से कमतर है सुखाई-57 परियोजना से बाहर निकलने के वक्त से कुछ जानकार इस फाइटर जेट्स की कमी को उजागर करते रहे हैं. द हिंदू और द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की कुछ रिपोर्ट को मानें तो वायु सेना ने इस फाइटर जेट्स की रडार क्रॉस-सेक्शन और स्टील्थ क्षमता पर सवाल उठाया था. भारत ने इस विमान में ऐसे 43 तकनीकी सुधार की मांग की थी, जिसे रूस ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. राजनीतिक कारण एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने के लिए पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया. इसके पीछे का एक कारण चीन के साथ रूस का गठजोड़ रहा है. रूस और चीन के बीच लगातार मजबूत होते गठजोड़ के कारण भारत चिंतित रहता है. ऐसे में भारत को डर था कि रूस कहीं इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की तकनीक को चीन के साझा न कर दे.

बकायेदारों के खिलाफ विद्युत वितरण कंपनी की भोपाल में कार्रवाई जारी, 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया

भोपाल चिराग तले अंधेरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी..अब देख भी लीजिए. तेजी से उभरते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग को लंबा पलीता लगा रहा है. बिजली बिलों का बकाया अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अकेले शहर में घरेलू उपभोक्ताओं पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है. हैरानी की बात तो ये कि इनमें से 86 उपभोक्ताओं पर 1 लाख रुपये से अधिक का बकाया है. बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के अनुसार, इनमें से अधिकांश मामलों में कोई न कोई विवाद है. कई केस अदालतों में विचाराधीन हैं. सबसे अधिक बकाया एक घरेलू उपभोक्ता पर 4.21 लाख रुपये का सामने आया है. यह उपभोक्ता कटारा हिल्स वितरण क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहता है. फिर भी कनेक्शन चालू TOI की रिपोर्ट के अनुसार, कटारा हिल्स वाले उपभोक्ता का मई महीने का चालू बिल 2,246 रुपये था, जिस पर 5,199 रुपये विलंब शुल्क और 4.15 लाख रुपये का पुराना विवादित बकाया जुड़कर कुल देय राशि 4,21,079 रुपये हो गई. मामला अदालत में लंबित होने के कारण बिजली कनेक्शन चालू है. इस मामले में डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य स्थिति में यदि किसी घरेलू उपभोक्ता पर 5,000 रुपये से अधिक बकाया होता है तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है. लेकिन, जिन उपभोक्ताओं के बिल विवादित है या न्यायिक प्रक्रिया में है, उनके खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. छोटे बकायदार भी करीब 37 हजार 1 लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वालों के बाद सबसे बड़ी संख्या उन उपभोक्ताओं की है, जिन पर 10,000 से 1 लाख के बीच की राशि बकाया है. ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 16,681 है. इनमें से किसी पर 99,797 रुपये तो किसी पर 10,001 रुपये तक का बकाया है. इसके अलावा 19,704 उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन पर 5,000 से 10,000 रुपये तक की राशि लंबित है. बिजली कंपनी इस काम में लगी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का बकाया होना बिजली वितरण व्यवस्था और बिल वसूली प्रक्रिया में गहराते संकट की ओर संकेत करता है. यदि विवादों और अदालती मामलों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो यह बकाया राशि और बढ़ सकती है. डिस्कॉम की ओर से फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं से संपर्क कर विवाद सुलझाने और समझौते की कोशिश की जा रही है. वहीं, अधिकारियों ने संकेत दिए कि सरकार से नीति-निर्माण स्तर पर भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी.

विश्व पर्यावरण दिवस पर जबलपुर केंद्रीय जेल में अनूठा आयोजन, बंदियों ने किया पौधारोपण व गाजरघास सफाई अभियान

A unique event was organized in Jabalpur Central Jail on World Environment Day, prisoners did plantation and carrot grass cleaning campaign जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाताजबलपुर | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल जबलपुर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर के मार्गदर्शन में जेल परिसर को हराभरा और स्वच्छ बनाने के लिए व्यापक पर्यावरणीय गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस मौके पर उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश, उप जेल अधीक्षक श्रीमती रूपाली मिश्रा, सहायक जेल अधीक्षक हिमांशु तिवारी सहित समस्त अधिकारी-कर्मचारी व बंदियों ने मिलकर जेल परिसर में पौधारोपण किया। बंदियों की भागीदारी से संवरा परिसरइस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें जेल के बंदियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने न सिर्फ पौधे लगाए, बल्कि परिसर के आसपास उग आए हानिकारक गाजर घास को उखाड़कर नष्ट किया। कल्याण अधिकारी श्रीमती सरिता घारू, लिपिक उपेन्द्र त्रिवेदी व अन्य कर्मचारियों की देखरेख में यह सफाई अभियान सफलता से संपन्न हुआ। गाजर घास मिट्टी की उर्वरता को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक मानी जाती है, ऐसे में इसका सफाया एक आवश्यक कदम था। जेल अधीक्षक ने दिया पर्यावरण सरंक्षण का संदेशइस अवसर पर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने कहा, “विश्व में लगातार घटते जंगलों के कारण प्रदूषण व तापमान में वृद्धि हो रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में पेड़ लगाना और पर्यावरण की रक्षा करना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।” उन्होंने सभी को वर्ष भर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाने की प्रेरणा भी दी। सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की मिसालकेंद्रीय जेल में आयोजित यह अभियान न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि समाज से अलग-थलग पड़े बंदियों के भीतर एक नई सोच और जिम्मेदारी का भाव भी उत्पन्न किया। इस आयोजन से यह संदेश भी गया कि समाज के हर वर्ग को मिलकर धरती को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

आज शुक्रवार 06 जून 2025 का पढ़ें दैनिक राशिफल

मेष राशि- आज आप मानसिक रूप से शांत रहेंगे। निवेश लाभ और समृद्धि लाएगा। आज आपको कार्यों में सफलता हासिल होगी। कार्यस्थल पर आज हर कोई आपकी बात ईमानदारी से सुनेगा। विद्यार्थियों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। आपका जीवनसाथी आज शुरुआती दौर के प्यार और रोमांस को फिर से शुरू करेगा। आर्थिक रूप से दिन अच्छा रहने वाला है। वृषभ राशि– आज का दिन आपके लिए मौज-मस्ती भरा रहने वाला है। जिन लोगों ने कर्ज लिया था उन्हें आज कर्ज चुकाने में परेशानी हो सकती है। करियर में बदलाव की प्लानिंग बना रहे हैं तो आज इसे कार्यरूप देने का अच्छा समय है। आपके सहकर्मी आपको सपोर्ट करेंगे। जीवनसाथी के बीच की अनबन खत्म हो सकती है। आर्थिक रूप से दिन ठीक ठाक रहेगा। व्यापारियों को उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। मिथुन राशि- आज आपको आर्थिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है। किसी मित्र के सहयोग से कारोबार में उन्नति मिल सकती है। कार्यस्थल पर कुछ सहकर्मी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को संभालने के आपके तरीके को पसंद नहीं करेंगे आप मानसिक रूप से शांत रहेंगे, जिसका फायदा आपको पूरे दिन मिलेगा। आज आप अपने जीवन का सबसे अच्छा दिन अपने जीवनसाथी के साथ बिताएंगे। कर्क राशि- आज आपको अपनी सकारात्मक सोच का पूरा लाभ मिलेगा। किसी महत्वपूर्ण फैसले को लेने में सफल रहेंगे। आपकी लाइफस्टाइल में बदलाव हो सकता है। अगर आप छात्र हैं और विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं तो आज आर्थिक संकट आपको परेशान कर सकता है। जीवनसाथी के साथ अनबन के संकेत हैं। आर्थिक रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। कोई बड़ा खर्च सामने आ सकता है। सिंह राशि- आज आपकी सेहत अच्छी रहने वाली है। किसी प्रिय व्यक्ति का साथ मिलने से महत्वपूर्ण कार्यों को निपटा सकेंगे। लेकिन आज आपके खर्च करने का तरीका आपकी आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। अब समय आ गया है कि परिवार पर अपना दबदबा बनाने वाला रवैया बदलें। जीवन के उतार-चढ़ाव को साझा करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करें। कार्यस्थल पर लोगों का नेतृत्व करें। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। कन्या राशि- आज आपको कार्यस्थल पर किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक रूप से आप समृद्ध महसूस करेंगे। हालांकि ऑनलाइन पेमेंट करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है। आपका पार्टनर सहयोगी और मददगार रहेगा। आज किसी करीबी व्यक्ति से महत्वपूर्ण सलाह मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे। तुला राशि- आज का दिन आपके लिए मौज-मस्ती भरा रहने वाला है। आज इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी कर सकते हैं। घरेलू काम थका देने वाला होगा और मानसिक तनाव का बड़ा कारण बनेगा। आपका लव अफेयर जादुई होता जा रहा है। आज आपका खाली समय अपने ऑफिस के काम को पूरा करने में भी व्यतीत होगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे। वृश्चिक राशि- आज आपका उत्साह व आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा। जिन लोगों को आप जानते हैं उनके माध्यम से आय के नए स्रोत उत्पन्न होंगे। किसी करीबी व्यक्ति की सलाह के चलते आप व्यक्तिगत मामलों को सुलझाने में सफल रहेंगे। आज कार्यस्थल पर आपकी मुलाकात किसी खास व्यक्ति से हो सकती है। लव लाइफ रोमांटिक रहेगी। धनु राशि- आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। लेकिन आज खर्चों पर नजर रखने की जरूरत है कि आपका पैसा कहां खर्च हो रहा है, नहीं तो आने वाले समय में आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। आपकी लव स्टोरी आज एक नया मोड़ ले सकती है, जिसमें आपका पार्टनर आपसे शादी को लेकर बातचीत कर सकता है। व्यापारियों के लिए आज का दिन लाभकारी रहने वाला है। मकर राशि- आज आप धर्म-कर्म में हिस्सा लेंगे। आज किसी करीबी दोस्त की मदद से कुछ व्यापारियों को धन लाभ होने की संभावना है। आज आपकी आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती है। करीबी के साथ एक शानदार शाम बिताने का मौका मिलेगा। नौकरी पेशा में नए अवसरों की प्राप्ति होगी। आप सिंगल जातकों की लाइफ में कोई खास व्यक्ति आ सकता है। कुंभ राशि- आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। सेहत में पहले से सुधार होगा। कार्यस्थल पर आपके प्रयासों की सराहना होगी। अपने जुनून पर काबू रखें, यह आपके लव अफेयर को खतरे में डाल सकता है। आपको वाहन सावधानी से चलाएं। आज किसी तीसरे व्यक्ति के कारण जीवनसाथी के अनबन हो सकती है। आर्थिक रूप से स्थिति अच्छी रहने वाली है। मीन राशि- आज आपको एकांत में समय बिताना चाहिए, जिससे आपको मानसिक राहत मिल सके। आज आप भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे। जीवनसाथी का साथ मिलेगा। आर्थिक रूप से स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापारियों को आज नई पार्टनरशिप के ऑफर आ सकते हैं। आज आप अपने जीवन का सबसे अच्छा समय अपने जीवनसाथी के साथ बिताएंगे।

चारधाम यात्रा में सेहत बन रही जानलेवा चुनौती, खराब स्वास्थ्य ने ली 80 ज़िंदगियां

देहरादून हर साल लाखों लोग पवित्र चारधाम यात्रा के लिए जाते हैं। इस बार भी यह यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि इस बार की चारधाम यात्रा एक दुखद वजह से भी चर्चा में है। इस साल यात्रा के दौरान अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि पहाड़ों की ऊंचाइयों पर सांसें अटक रही हैं? अगर आप भी पहाड़ पर किसी यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो किन बातों का ख्याल रखें? आइए समझते हैं। लाखों लोग करते हैं चारधाम यात्रा हर साल मई से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा पड़ाव मानी जाती है। लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने के बाद से ही मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक 80 श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, हार्ट अटैक और सांस लेने में तकलीफ की वजह से हुई हैं। पहाड़ों की ऊंचाई है सांसों का दुश्मन! चारधाम के मंदिर समुद्र तल से 3 हजार से साढ़े 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं।पहाड़ों पर जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन का स्तर कम होता जाता है। समुद्र तल पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा 21% होती है, लेकिन 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह स्तर काफी कम हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाइपोक्सिया’ कहते हैं। खासकर उन लोगों के लिए, जो मैदानी इलाकों से सीधे पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं, यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना तैयारी के ऊंचाई पर चढ़ने से ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (AMS) का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी और सांस फूलना शामिल हैं। किन लोगों को होता है सबसे ज्यादा खतरा? मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हैं। हार्ट रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और सांस की बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालु इस ऊंचाई पर सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। इसके अलावा, कई लोग बिना मेडिकल जांच और तैयारी के यात्रा पर निकल पड़ते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देता है। क्या है प्रशासन की तैयारी? इन मौतों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन इस स्थिति को संभालने के लिए तैयार है? उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, ऑक्सीजन सिलेंडर और आपातकालीन सेवाएं शुरू की हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने ये सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। इसके अलावा, मौसम की मार भी यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। अचानक बारिश, भूस्खलन और ठंड यात्रा को और जोखिम भरा बना देती है। ये टिप्स बचा सकते हैं जान अगर आप भी चारधाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कुछ सावधानियां आपकी जान बचा सकती हैं… मेडिकल जांच जरूरी: यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह लें और अपनी सेहत की पूरी जांच कराएं। ऊंचाई की आदत डालें: सीधे ऊंचाई पर न चढ़ें। पहले कुछ दिन कम ऊंचाई वाले इलाकों में रुकें, ताकि शरीर को ऑक्सीजन की कमी की आदत पड़ सके। सही कपड़े और दवाएं: ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें। हाइड्रेशन जरूरी: खूब पानी पिएं, ताकि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।

केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी की जारी

प्रेस-काउंसिल अथवा भारतीय प्रेस-परिषद के नाम का उपयोग करना अवैधानिक प्रेस-काउंसिल ने जारी की एडवाइजरी केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी की जारी भोपाल केन्द्र सरकार ने प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया (भारतीय प्रेस परिषद) के नाम के अनाधिकृत उपयोग पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा एडवाइजरी में कहा गया है कि उन्हें सूचना मिली है,कुछ प्रेस संगठनों द्वारा ‘प्रेस-परिषद’ शब्द का अनुचित उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया की संस्थागत महत्ता प्रभावित हो रही है और उसके विशिष्ट अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइजरी जारी की गई है। सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रेस-काउंसिल ऑफ इंडिया एक सांविधिक निकाय है। इसकी स्थापना प्रेस-परिषद अधिनियम-1978 के तहत प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने और समाचार-पत्रों एवं समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने एवं सुधारने के उद्देश्य से की गई थी। इसका सचिवालय नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स के सूचना भवन में है। सचिवालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय प्रेस-परिषद की किसी भी राज्य में कोई शाखा नहीं है, न ही उसने किसी अन्य निकाय को अपने समान या मिलते-जुलते नाम का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया है। सचिवालय से जारी निर्देश के अनुसार किसी संगठन द्वारा प्रेस काउंसिल अथवा भारतीय प्रेस-परिषदशब्द का उपयोग करना, प्रतीक और नाम के अनुचित उपयोग निवारण अधिनियम, 1950 की धारा 3 और प्रविष्टि 7(ii) का उल्लंघन है। इस संदर्भ में केन्द्रीय विधि विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि किसी अन्य संगठन द्वारा इस नाम का उपयोग करना अवैध है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सचिवालय ने ‘प्रेस-काउंसिल’ अथवा भारतीय प्रेस परिषदशब्द का उपयोग न करने के संबंध में सभी जिला कलेक्टर्स को भी निर्देशित किया गया है। सचिवालय का निर्देश है कि यदि कोई स्थानीय, निजी अथवा सरकारी संगठन इस नाम का दुरुपयोग करता है, तो उनके पंजीकरण को निरस्त किया जाए अथवा उसमें आवश्यक सुधार किया जाए। सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रेस परिषद ऑफ इंडिया की प्रतिष्ठा को बनाए रखना और प्रेस की स्वतंत्रता व मानकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

भारत के खिलाफ लीड्स में होने पहले टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड ने अपनी क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया

लंदन  भारत के खिलाफ लीड्स (हेड‍िंग्ले) में होने पहले टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड ने अपनी क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया है. 14 सदस्यीय स्क्वॉड में तेज गेंदबाज जेमी ओवरटन की 3 साल बाद टेस्ट टीम में वापसी हुई है. ओवरटन लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे, वहीं गस एट‍िंक्सन को मौका नहीं मिला है. ओवरटन ने आखिरी बार जून 2022 में हेडिंग्ले में न्यूजीलैंड के खिलाफ इंग्लैंड के लिए टेस्ट मैच खेला था. हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे के दौरान उनकी दाहिनी हाथ की छोटी उंगली में फ्रैक्चर हो गया, जिसके बाद इंग्लैंड की मेडिकल टीम उनकी कंडीशन पर नजर बनाए हुए है. इंग्लैंड की 14 सदस्यीय टीम में कई अहम चेहरे लौटे हैं. इनमें तेज़ गेंदबाज़ ब्रायडन कार्से जैकब बथेल और अनुभवी ऑलराउंडर क्रिस वोक्स की वापसी हुई है. ये तीनों खिलाड़ी आखिरी बार दिसंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नजर आए थे, जबकि कार्से और वोक्स हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ़ चोट के चलते नहीं खेल पाए थे. वहीं पेस बॉलर गस एटकिंसन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण इस बार चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने पिछले महीने ट्रेंट ब्रिज में जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट खेला था, लेकिन पूरी तरह फिट ना होने के कारण वह भारत के खिलाफ पहले टेस्ट से बाहर रहेंगे. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों सीरीज का पहला मुकाबला 20 जून से लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर खेला जाएगा. इंग्लैंड और भारत की टीम में बड़े बदलाव इंग्लैंड की टीम में पिछले 18 महीनों में काफी बदलाव हुआ है. जब उन्हें भारत में 4-1 से टेस्ट सीरीज में हार मिली थी, उसके बाद कई बड़े खिलाड़ी टीम से बाहर हो गए. जेम्स एंडरसन ने उस दौरे के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया. जॉनी बेयरस्टो, बेन फॉक्स और ओली रॉबिन्सन को भी अब टीम में नहीं रखा गया है. भारत की टीम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. रविचंद्रन अश्विन, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया है. अब शुभमन गिल भारत की टेस्ट टीम के नए कप्तान बने हैं और पहली बार टीम की कमान संभालेंगे. सीरीज की शुरुआत हेडिंग्ले से होगी और फिर मुकाबले एजबेस्टन, लॉर्ड्स, ओल्ड ट्रैफर्ड और आखिर में ओवल में खेले जाएंगे. भारत ने 2007 के बाद से इंग्लैंड में कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीती है. इस बार कुछ भारतीय खिलाड़ी पहले से ही इंग्लैंड में हैं और इंडिया ए टीम के लिए इंग्लैंड लॉयंस के खिलाफ खेल रहे हैं. बाकी खिलाड़ी शुक्रवार को इंग्लैंड पहुंचेंगे. भारत के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम: बेन स्टोक्स (कप्तान), शोएब बशीर, जैकब बथेल, हैरी ब्रूक, ब्रायडन कार्स, सैम कुक, जैक क्रॉली, बेन डकेट, जेमी ओवरटन, ओली पोप, जो रूट, जेमी स्मिथ, जोश टंग, क्रिस वोक्स. इंग्लैंड दौरे के लिए 18 सदस्यीय भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (उप-कप्तान/विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), अभिमन्यु ईश्वरन, शार्दुल ठाकुर, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, करुण नायर, वॉशिंगटन सुंदर, आकाश दीप, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव. इंग्लैंड की धरती पर भारत का रिकॉर्ड इंग्लैंड की धरती पर भारत की जीत का टेस्ट रिकॉर्ड अच्छा नहीं है. इंग्लैंड के खिलाफ उसके घर में भारत ने अब तक (1932-2022) 67 टेस्ट मैच खेले है.  इनमें से भारत को सिर्फ 9 टेस्ट में जीत मिली है, जबकि 36 मैचों में हार झेलनी पड़ी. 22 मैच ड्रॉ रहे.  महेंद्र सिंह धोनी (2011-2014) का कप्तान के तौर पर इंग्लैंड की धरती पर खराब रिकॉर्ड रहा. 9 टेस्ट मैचों में भारत को एक ही जीत मिली, जबकि इंग्लिश टीम को 7 में जीत मिली. एक मैच ड्रॉ रहा. 20 जून से शुरू हो रही है सीरीज भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज हेडिंग्ले के लीड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शुरू होने वाली है, जिसका पहला मैच 20 से 24 जून तक होगा. अगला टेस्ट बर्मिंघम के एजबेस्टन क्रिकेट ग्राउंड में 2 से 6 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा.तीसरा टेस्ट 10 जुलाई से 14 जुलाई तक लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में होगा. फ‍िर मैनचेस्टर 23 जुलाई से 27 जुलाई तक ओल्ड ट्रैफर्ड में चौथे टेस्ट की मेजबानी करेगा. इस रोमांचक सीरीज का पांचवां और अंतिम मुकाबला 31 जुलाई से 4 अगस्त तक लंदन के द ओवल में खेला जाना है. भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का पूरा शेड्यूल पहला टेस्ट: 20-24 जून, 2025 – हेडिंग्ले, लीड्स दूसरा टेस्ट: 2-6 जुलाई, 2025 – एजबेस्टन, बर्मिंघम तीसरा टेस्ट: 10-14 जुलाई, 2025 – लॉर्ड्स, लंदन चौथा टेस्ट: 23-27 जुलाई, 2025 – ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर पांचवां टेस्ट: 31 जुलाई-4 अगस्त, 2025 – द ओवल, लंदन

सीआरपीएफ के जवानों ने किया वृक्षारोपण, साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की खाई कसम

गरियाबंद  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में 65 वीं वाहिनी CRPF के F/ समवाय कुल्हाड़ीघाट में वृक्षारोपण का कार्यक्रम रखा गया. इस दौरान जवानों ने वृक्षारोपण करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की कसम भी खाई. बता दें, कुल्हाड़ीघाट एक अतिसंवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. अक्सर यहां नक्सल गतिविधियां होती रहती है. इस क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाये रखने में एफ/ समवाय का अहम योगदान जारी है. 65वीं वाहिनी समय-समय पर सिविक एक्सन प्लान, मुफ्त चिकित्सा शिविर और रोजगार मार्गदर्शन शिविर जैसे कई अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रम कर लोगों को मुख्याधारा में जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है. आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 65वीं वाहिनी के सभी जवानों ने पर्यावरण संरक्षण का भी बीड़ा उठाया लिया है. उन्होंने शपथ ली है कि वे आजीवन पर्यावरण उत्थान के लिए निरंतर हर संभव प्रयास करते रहेंगे. इस कार्यक्रम के इस दौरान एफ/65 समवाय के सहायक समादेष्टा सुधीर कुमार, निरीक्षक लवकुश कुमार पाण्डेय और समवाय के सभी जवान उपस्थित रहे.

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ विश्व पर्यावरण दिवस पर जनजागरूकता अभियान, , 450 बच्चों ने लिया भाग

रायपुर 05 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा आज न्यू कन्वेन्शन हॉल सर्किट हाऊस, रायपुर में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. मण्डल द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट के विरूद्ध चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत इस प्रतियोगिता का विषय ’’प्लास्टिक प्रदूषण – दुष्प्रभाव और समाधान’’ रखा गया था. जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 450 बच्चों ने भाग लिया. इस पोस्टर प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए पी.सी. पाण्डेय, भा.व.से., अध्यक्ष, राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, छत्तीसगढ़ ने कहा कि स्वस्थ जीवन शैली के लिए हमें प्लास्टिक का उपयोग बंद करना होगा. विशेषकर प्लास्टिक से बनी कैरी बैग्स का उपयोग न करने का आग्रह किया. पाण्डेय ने कहा कि प्लास्टिक के उपयोग के कारण हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है. पाण्डेय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए स्कूली व महाविद्यालयीन बच्चों को आगे आ कर इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया. मण्डल द्वारा आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता चार आयु वर्ग में रखी गई थी प्रथम वर्ग 12 वर्ष तक, द्वितीय वर्ग 13 से 17 वर्ष,तृतीय वर्ग 18 से 21 वर्ष एवं चतुर्थ वर्ग दिव्यांग जन रखा गया था, जिसमें लगभग 300 बच्चों ने भाग लिया. पोस्टर प्रतियोगिता – 12 वर्ष तक आयु वर्ग में प्रथम – लेहक बडोले, द्वितीय – अथर्व पटोदिया , तृतीय – आराध्या प्रियदर्शिनी, आयु वर्ग 13 से 17 वर्ष तक प्रथम – योगिता वर्मा, द्वितीय – अन्वेषा रॉय, तृतीय – कैवल्य प्रिया साहू, आयु वर्ग 18 से 21 तक प्रथम – उत्कर्ष पटेल, द्वितीय – रूबी घृतलहरे, तृतीय – कामेश चन्द्राकर, इसी क्रम में पोस्टर प्रतियोगिता हेतु दिव्यांग श्रेणी से – प्रथम – लवली खुटियारे, द्वितीय – कु. पूजा और तृतीय – प्रणीत सरकार रहे. प्रतिभागियों को आकर्षक नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया. इस अवसर पर उद्योग प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण के अधिकारी व बडी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

ऊर्जा मंत्री तोमर ने साइकिल चलाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भोपाल. विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर में साइकिल चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साइकिल रैली में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्कूली बच्चे, एनसीसी के छात्र-छात्रायें एवं यूथ हॉस्टल के सदस्यगण शामिल हुए। यूथ हॉस्टल द्वारा साइकिल रैली का शुभारंभ विश्व पर्यावरण दिवस पर शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़े से किया गया। इस मौके पर पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, संस्था के संरक्षक एवं पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, संस्था के चेयरमेन शैलेन्द्र माहौर सहित डीआईजी अमित सांघी, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए।   साइकिल रैली सराफा बाजार, गश्त का ताजिया, फालका बाजार, गुरुद्वारा, जयेन्द्रगंज होकर फ्लैग प्वॉइंट थीम रोड पहुँची। रैली के समापन अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रतिभागियों को 250 पौधे एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

उज्जैन में वेलनेस निवेश को मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रोत्साहन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट में वेलनेस क्षेत्र के निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए खुले दिल से आमंत्रित किया और राज्य की अनुकूल निवेश नीतियों पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। सभी निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल और प्रगतिशील नीतियों की सराहना की और प्रदेश में निवेश के लिए संकल्प लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अरबिंदो हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी, लीजर होटल्स ग्रुप के डायरेक्टर मुकुंद प्रसाद, शतायु आयुर्वेद के सीईओ और एमडी डॉ. मृत्युंजय स्वामी, मेफ़ेयर ट्रैवल्स के एमडी शरद थडानी, लाभम ग्रुप के डायरेक्टर युगांश सोनी, शांतिगिरी आश्रम के जोनल हेड स्वामी चितासुधन ज्ञान तपस्वी, रॉयल ऑर्किड होटल के डायरेक्टर सुदीप रॉय, एरा हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक शिवंदर सिंह, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप के डायरेक्टर राजुल भार्गव, लेटेन्ट डेवकॉन के डायरेक्टर देवांग कपाडिया, जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुधीर एम.वी., ट्रैवलपैक के चेयरमैन अशोक पटेल, हार्टफुलनेस इंटरफेथ प्रोग्राम्स एंड इवेंट के डायरेक्टर त्रिलोचन चावला और सनसेट डेजर्ट कैंप के सीईओ और एमडी हितेश्वर सिंह सिसौदिया ने वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में, मध्यप्रदेश वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों के इस उत्साहजनक प्रतिसाद से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे मध्यप्रदेश को वैश्विक वेलनेस मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान मिल सकेगा।

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय आज से प्रवेश शुरू, ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन

दुर्ग हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त महाविद्यालयों में सत्र 2025-26 के तहत स्नातक प्रथम सेमेस्टर में नियमित प्रवेश के लिए ऑनलाइन प्रवेश 5 जून से शुरू हो गया है. छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की वेबबसाइट www.durguniversity.ac.in पर जाकर अथवा http://durg1.ucanapply.com के जरिए ऑनलाइन आवेदन फार्म भर सकते हैं. विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रथम चरण के लिए 5 जून से शुरू हुई प्रक्रिया 15 जून तक चलेगी, 16 जून को मेरिट सूची जारी की जाएगी. इसके बाद 16 से 20 जून तक सूची में शामिल छात्र प्रवेश ले सकते हैं. इसके बाद दूसरे चरण के लिए प्रवेश प्रक्रिया 21 से 30 जून तक चलेगी. एक जुलाई को मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी. मेरिट लिस्ट में शामिल छात्र एक जुलाई से 7 जुलाई तक प्रवेश ले सकते हैं. इसी तरह तृतीय चरण के लिए प्रवेश प्रक्रिया 8 से 21 जुलाई तक चलेगी. मेरिट लिस्ट 22 जुलाई को जारी की जाएगी. चयनित छात्र 22 से 31 जुलाई तक महाविद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं. महाविद्यालयों में सीटें रिक्त होने की स्थिति में कुलपति की अनुमति से प्रवेश की अंतिम तिथि 14 अगस्त है. बीसीए, बीबीए, बीएससी. गृह विज्ञान, बीए, डीसीए कक्षाओं के लिए प्रवेश आवेदन पोर्टल खोला जा रहा है. इसी तरह से प्राइवेट विद्यार्थियों के अलग से पंजीयन पोर्टल खोला जाएगा. जिसके लिए वेबसाइट www.durguniversity.ac.in का अवलोकन करने कहा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रवेश आवेदन फार्म पूर्णतः निःशुल्क है. छात्रों को ABC (Academic Bank of Credit) आईडी (Link:- http://www.abc.gov.in) बनाना अनिवार्य है. ABC (Academic Bank of Credit) आई.डी. बनाने के पश्चात ही विद्यार्थी प्रवेश आवेदन फार्म भर सकेंगे. साइंस कॉलेज में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग (साइंस कॉलेज) में 6 जून से प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ शुरू हो गई है. प्रथम सेमेस्टर विज्ञान संकाय के अंतर्गत जीव विज्ञान के समस्त समूह, गणित संकाय के समस्त समूह, वाणिज्य संकाय, कला संकाय तथा कम्प्यूटर साइंस विषय हेतु प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इच्छुक विद्यार्थी सांइस कॉलेज की वेबसाइट www.govtsciencecollegedurg.ac.in पर प्रवेश के लिए लिंक पर जाकर अपना पंजीयन कर सकते हैं.

मध्यप्रदेश भारत के वेलनेस मिशन के नेतृत्व को तैयार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में “स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट” में कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “हील इंडिया” और ‘लाइफ स्टाइल’ (LiFE) जैसे दूरदर्शी विचारों से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को समग्र जीवनशैली और वेलनेस नवाचार का ग्लोबल सेंटर बनाया जा रहा है। समिट के माध्यम से प्रदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत के वेलनेस मिशन का नेतृत्व करने को पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट को एक परिवर्तनकारी पहलबताया और कहा कि यहां नीति, निवेश, अध्यात्म और समाज कल्याण का संगम हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब  भारत के वेलनेस मिशन का ग्लोबल इंजन बनने को तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट में वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के निवेशकों से14 वन-टू-वन बैठकेंकीं, जिनमें बुनियादी ज़रूरतों, निवेश समर्थक नीतियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। समिट में 1929 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा एक ही दिन होने का सुखद संयोग हुआ है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का प्रदेश में पुनः शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 करोड़ पौधे रोपे गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार रोजगार सृजन के लिए तेजी से काम कर रही है। धार्मिक स्थानों पर सभी चिकित्सा पद्धतियों के बड़े केन्द्र बनाने के पीछे आशय यही है कि दुनिया भर के लोगों को स्वास्थ्य के साथ अध्यात्म भी प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले साल सभी संभागीय मुख्यालयों पर हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और फरवरी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट 30 लाख करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, यहां 21 लाख 75 हजार रोजगार सृजन होने की संभावना भी है। उन्होंने कहा कि हमने 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया है और लगातार सेक्टर वार समिट का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदसौर और नरसिंहपुर में एग्री समिट के अलावा इंदौर में आईटी समिट के अच्छे परिणाम आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नीति आयोग ने प्रदेश को तेज गति से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अग्रणी माना है। मध्यप्रदेश में सरप्लस बिजली के साथ उत्कृष्ट अधोसंरचना और नई नीतियों के चलते निवेशकों ने यहां का रूख किया है। उन्होंने एमएसएमई सहित अन्य उद्योग को घोषित नीति अनुसार 5000 करोड़ रूपये का अनुदान दिये जाने का उल्लेख भी किया।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्पष्ट नीति, सक्षम प्रशासन और मजबूत नेतृत्व के साथ निवेशकों को स्थायित्व और सफलता की गारंटी देता है। उन्होंने सभी वेलनेस उद्यमियों और संस्थाओं से प्रदेश में निवेश करने और उज्जैन से शुरुआत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश आएं, और भारत को विश्वगुरु बनाने की यात्रा में भागीदार बनें।” समिट में एनआईपीआर अहमदाबाद और एमपीआईडीसी के बीच समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत उज्जैन मेडिकल डिवाइस पार्क को तकनीकी और शैक्षणिक सहायता प्राप्त होगी। यह पार्क टेस्टिंग और प्रमाणीकरण हब के रूप में विकसित किया जाएगा। समिट में शिवंदरसिंह संस्‍थापक एराहॉस्पिटैलिटी, मुकुंदप्रसाद डायरेक्‍टर लीजरहोटल्सग्रुप, अशोक पटेल चेयरमेन ट्रैवलपैक, शरदथडानी एमडी मेफ़ेयरट्रैवल्स एवं सुधीर एमवी सीएओ जिंदल नेचुरोकेयर इंस्टिट्यूट द्वारा निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आध्यात्मिक संबोधन दिया और उज्जैन में केंद्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को आशय पत्र (एलओआई) सौंपा। लीज़र होटल्स, शतायु आयुर्वेद और भंडारी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश को वेलनेस निवेश के लिए उपयुक्त गंतव्य बताया। प्रमुख निवेश प्रस्तावों में भंडारी ग्रुप –984 करोड़ रूपये, अमलतास ग्रुप –400 करोड़ रूपये, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप –200 करोड़ रूपये, लेटेंट डेवकॉन, लाभम ग्रुप, शथायू आयुर्वेद, रॉयल ऑर्किड, शांतिगिरी आश्रम, जिंदल ग्रुप सहित अन्य निवेशकों के प्रस्ताव शामिल हैं। पैनल चर्चा में तैयार हुआ विज़न रोडमैप समिट में दो पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें वेलनेस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिंहस्थ आधारित मेडिकल टूरिज्म, रोज़गार सृजन, और कौशल विकास जैसे विषयों पर विचार हुआ। मुख्य सत्र में वेलनेस विज़निंग  में प्रदेश का समग्र रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

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