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प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के कार्य प्राथमिकता से पूरे किए जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर कार्य करें, जिससे कार्य के दौरान कोई कठिनाई नहीं आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश मेट्रो रेल परियोजना की समीक्षा कर रहे थे। भोपाल मेट्रो रेल परियोजना भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को नवंबर 2018 में मंजूरी दी गई। भोपाल मेट्रो की दोनों लाइन की कुल वास्तविक लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है और इसके 30 स्टेशनों में ये 2 भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। जिसकी लागत 10 हजार 033 करोड़ रूपए अनुमानित है। शुरुआत में यहां 3 कार वाली कुल 27 ट्रेन संचालित होंगी। भविष्य में मेट्रो की कार संख्या बढ़ाकर 6 की जा सकती है। ऑरेंज लाइन-करोंद चौराहा से एम्स साकेत नगर तक और ब्लू लाइन- भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक होगी। मेट्रो डिपो सुभाष नगर में स्थापित होगा। भोपाल मेट्रो के पहले फेज (पुल बोगदा से एम्स तक) का कार्य अगस्त 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर और स्टेशनों की संख्या 8 है। वहीं, दूसरे फेज में करोंद चौराहा से पुल बोगदा तक 9 किलोमीटर में 6 स्टेशन बनाए जाएंगे इनमें से 2 स्टेशन जमीन के नीचे बनाए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के तीसरे फेज में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक 14.16 किलोमीटर में मेट्रो ट्रैक बनाया जाएगा, जिसमें कुल 14 एलिवेटेड स्टेशन निर्मित किए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के दूसरे और तीसरे फेज का निर्माण कार्य जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। यहां पुल बोगदा ऑरेंज और ब्लू लाइन का इंटरचेंज स्टेशन होगा। पूर्व में सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन के बीच मेट्रो की टेस्टिंग अक्टूबर 2023 में की जा चुकी है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना राज्य सरकार ने इंदौर मेट्रो ट्रेन परियोजना को नवंबर 2018 में स्वीकृति प्रदान की थी। इस परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर से अधिक है, 7 भूमिगत सहित जिसमें कुल 28 स्टेशन बनाए गए हैं। यहां पहले फेज में 3 कार वाली ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है। आगामी वर्षों में मेट्रो ट्रेन बढ़ाकर 25 और मेट्रो कार संख्या आवश्यकतानुसार 6 तक बढ़ाई जा सकती है। इंदौर मेट्रो परियोजना की कुल लागत 12 हजार 088 करोड़ रूपए अनुमानित है। यलो लाइन के प्रमुख स्टेशन- गांधी नगर, आईएसबीटी, विजय नगर चौराहा, पत्रकार कॉलोनी, रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, बड़ा गणपति, एयरपोर्ट हैं। मेट्रो डिपो गांधी नगर में स्थापित होगा। इंदौर मेट्रो के पहले फेज (रीच 1) में गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर 3 के बीच 6.3 किलोमीटर में मेट्रो का संचालन शुरू हो चुका है, जिसका उद्घाटन 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इस फेज में मेट्रो स्टेशनों की संख्या 5 है। पहले फेज के रीच 2 में सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर चौराहा के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबाई में 11 स्टेशन बनकर तैयार होंगे। इस कार्य की डेडलाइन अक्टूबर 2025 रखी गई है। इसी प्रकार इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज में मालवीय नगर चौराहा से पलासिया चौराहा तक 5.34 किलोमीटर ट्रैक बनाया जाएगा इसमें 5 एडिवेटेड स्टेशन होंगे। इस फेज में कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य दिसंबर 2027 रखा गया है। तीसरे फेज में पलासिया चौराहा से गांधीनगर तक 8.70 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक निर्माण किया जाएगा। यहां अंडरग्राउंड स्टेशनों की संख्या 7 होगी। इस फेज का निर्माण कार्य दिसंबर 2028 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति मेट्रो परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन एवं जबलपुर शहरों के लिए व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि परियोजनाएं अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं। भोपाल-सीएमपी और एएआर प्रस्तुत एमआरटीएस कॉरिडोर प्रस्तावित हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। इंदौर- सीएमपी और एएआर एमआरटीएस मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। ग्वालियर- सीएमपी और एएआर और हितधारकों द्वारा अनुमोदित एमआरटीएस लाइट मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर- सीएमपी और एएआर हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। राज्य शासन के अनुमोदन के बाद प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडर के डीपीआर तैयार किए जाने के प्रक्रिया की जाएगी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

उमरिया के पाली जनपद में दो पंचायत सचिव निलंबित, लापरवाही और मनमानी के चलते हुई कार्रवाई

उमरिया  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं में घोर लापरवाही बरतने, मनमानी करने और शासकीय कार्यों से अनुपस्थित रहने के आरोपों के चलते जनपद पंचायत पाली अंतर्गत दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 1999 के नियम 4 के तहत तत्काल प्रभाव से की है। पहला निलंबन – विजय सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत गोयरा मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत गोयरा के पंचायत सचिव विजय सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत पाली कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र रहेंगे। निलंबन का कारण ग्राम पंचायत गोयरा में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना, समग्र सीडिंग तथा जल गंगा संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अत्यंत धीमी प्रगति पाया जाना रहा। समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट हुआ कि संबंधित सचिव योजनाओं के क्रियान्वयन में न केवल लापरवाह हैं, बल्कि अक्सर पंचायत में अनुपस्थित भी रहते हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा बार-बार उनके विरुद्ध शिकायतें की गई थीं, जिनमें शासकीय कार्यों से दूरी, स्वेच्छाचारिता और जनहित की उपेक्षा जैसे आरोप शामिल थे। दूसरा निलंबन – छोटेलाल सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत मालाचुआ इसी तरह ग्राम पंचायत मालाचुआ के पंचायत सचिव छोटेलाल सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके निलंबन का आदेश भी उन्हीं नियमों के अंतर्गत पारित किया गया है। मुख्यालय के रूप में उन्हें भी जनपद पंचायत पाली कार्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। छोटेलाल सिंह पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि जल गंगा संवर्धन, प्रधानमंत्री आवास, समग्र सीडिंग और सीएम हेल्पलाइन जैसे प्राथमिक महत्व की योजनाओं में नगण्य प्रगति हुई है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार वे प्रायः पंचायत कार्य से दूर रहते हैं और मनमाने तरीके से काम करते हैं। उनका आचरण मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 3 के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में पाया गया। प्रशासन की ओर से सख्त संदेश जिला पंचायत उमरिया के सीईओ द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि शासकीय योजनाओं और जनहित कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन हेतु जवाबदेही तय करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पंचायत सचिवों को यह स्पष्ट संकेत है कि यदि वे निर्धारित कर्तव्यों से विमुख होते हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई अवश्य की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अन्य पंचायत सचिवों और ग्रामीण विकास से जुड़े कर्मचारियों को भी चेतावनी मिलती है कि शासन की योजनाओं में लापरवाही करने वालों को अब पद पर बने रहना संभव नहीं होगा।  

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष एक अप्रैल 2025 से लेकर 31 मार्च 2026 तक चलेगा

अयोध्या  अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को विभिन्न स्रोतों से 2024-25 में 316.57 करोड़ यानी तीन अरब से ज्यादा की कमाई हुई है। खास ये रहा कि इस अवधि में राम मंदिर परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य पर सर्वाधिक साढ़े चार सौ करोड़ का व्यय हुआ। ये जानकारी तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टीज की बैठक में आय-व्यय के प्रस्तुत बजट से मिली। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष एक अप्रैल 2025 से लेकर 31 मार्च 2026 तक चलेगा। इसके पहले एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के सभी खाते बंद हो गये है। इनका ऑडिट कराकर सितम्बर माह में आईटीआर दाखिल किया जाएगा। इस बीच बीते वित्त वर्ष में राम मंदिर में अलग-अलग स्रोतों से हुई आय का विवरण ट्रस्ट की बैठक में सार्वजनिक किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार तीर्थ क्षेत्र को डोनेशन एकाउंट में समर्पित धनराशि 35.01 करोड़ थी। इसी तरह दानपात्र में समर्पित धनराशि 94.30 करोड़ रही। ऑनलाइन खातों में भेजी गई धनराशि 12.79 करोड़ थी जबकि विदेशी मुद्रा के अन्तर्गत खोले गये एफसीआरए खाते में 0.55 करोड़ की आय हुई। इस तरह कुल धनराशि 173.86 करोड़ हुई। इसके अलावा अलग-अलग बैंकों में जमा धनराशि से प्राप्त ब्याज को मिला कर कुल आय 316.57 करोड़ हुई। राम मंदिर निर्माण पर हुआ 452.76 करोड़ का खर्च तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टीज की बैठक में प्रस्तुत आय-व्यय के रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक खर्च मंदिर निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं पर 452.76 करोड़ की धनराशि व्यय की गई। दूसरा बड़ा व्यय लैंड परचेज पर किया गया जिसमें बाग-बिजैसी व रामकोट क्षेत्र में अलग-अलग खरीदी गई जमीनों पर 105.45 करोड़ का व्यय किया गया। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल व्यय 87.56 करोड़ व अन्य मद में व्यय 1.70 करोड़ को मिलाकी कुल 652.55 करोड़ खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट के तुलनात्मक अध्ययन के मुताबिक एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के मध्य कुल आय 363 .34 करोड़ रही जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह आय 208.97 करोड़ थी। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल व्यय 922.62 रहे जबकि 2022-23 में कुल व्यय 386.91 करोड़ थे। कारसेवक पुरम में भवन-निर्माण के लिए किया गया भूमि पूजन राम मंदिर निर्माण के बाद देश भर संगठन के अखिल भारतीय अधिकारियों से लेकर प्रांतीय अधिकारियों का आवागमन बना हुआ है। इसके चलते कारसेवक पुरम में जी प्लस टू आवासीय परियोजना के लिए भूमि पूजन किया गया। यह भूमि पूजन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव व विहिप के केन्द्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने किया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आधारशिला रखी। बताया गया कि यहां बेसमेंट में वाहनों के लिए गैराज व भूतल एवं प्रथम तल पर आठ फ्लैट का निर्माण किया गया। इसके अलावा रिसेप्शन भी शामिल हैं। बताया गया कि यहां पहले है भूतल पर गैराज था। इस गैराज की बिल्डिंग को ध्वस्त कर नये सिरे निर्माण कराया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रक्तदान महादान है। रक्तदान से कई ज़िंदगियों को बचाया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अधिकाधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान कर इस मानवीय अभियान को सशक्त बनाएं। रक्तदान किसी व्यक्ति को जीवनदान देने जैसा है। उन्होंने आह्वान किया कि रक्तदान को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और नियमित रूप से रक्तदान करके मानवता के इस यज्ञ में भागीदार बनें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में कार्यरत टेक्नीशियन श्री परमल सिंह राठौड़ के रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने में सक्रिय भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि श्री राठौड़ जैसे समर्पित स्वास्थ्यकर्मी हमारे समाज के सच्चे नायक हैं। जिन्होंने रक्तदान को जन आंदोलन बनाया। उन्होंने कार्य-निष्ठा, पारदर्शिता और सेवाभाव का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह सम्पूर्ण स्वास्थ्य तंत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति से अलीराजपुर रक्तदान में बना आत्मनिर्भर उल्लेखनीय है कि टेक्नीशियन श्री राठौड़ ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में समर्पण और अनुकरणीय सेवा से जिले में रक्तदान को जनआंदोलन बनाया। आर्मी की नौकरी छोड़कर स्वास्थ्य विभाग में आए श्री राठौड़ ने बीते 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति कर, पूरे जिले को रक्तदान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने ब्लड बैंक के लाइसेंस को रिन्यू कराया साथ ही 10 वर्षों से अधिक का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में व्यवस्थित किया। चाहे आधी रात हो या दूरस्थ क्षेत्र, उनका पहला कर्तव्य मरीजों को जीवनरक्षक रक्त उपलब्ध कराना रहा। उनके प्रयासों से एक ही छत के नीचे 700 से अधिक रक्तदाताओं का सफल पंजीकरण और 2 हजार यूनिट से अधिक रक्त संग्रह किया गया। इस उपलब्धि से अलीराजपुर ज़िला पूरे प्रदेश में जनहित का उत्कृष्ट उदाहरण बना। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त किया गया संग्रहित मध्यप्रदेश में वर्तमान में 67 शासकीय सहित कुल 174 ब्लड सेंटर संचालित हैं। वर्ष 2024-25 में प्रदेश भर में 5 हजार 283 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इसमें 7 लाख 41 हजार 460 पुरुषों और 20 हजार 323 महिलाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान कर समाज को नई ऊर्जा दी। यह संग्रहण गत वर्षों की तुलना में लगभग 2 लाख यूनिट अधिक है, जो प्रदेश की जनजागरूकता और सेवा भावना का प्रमाण है। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल एनीमिया, थैलीसिमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को रिप्लेसमेंट फ्री और नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी रक्त की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 118 ब्लड स्टोरेज यूनिट्स को चिन्हित कर ब्लॉक स्तर पर क्रियाशील किया गया है। साथ ही, संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए एनएटी तकनीक द्वारा वर्ष 2024-25 में 84 हजार 074 यूनिट रक्त की जांच कर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया गया। प्रदेश के ब्लड सेंटरों में 25 ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट्स का संचालन भी प्रारंभ किया गया है।  

मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार

मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये किये जाये समन्वित प्रयास विश्व में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भारत दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट आयोजित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री हुए शामिल भोपाल  केन्द्रीय मछुआ पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा है कि दुनिया में मछली उत्पादन में भारत का स्थान दूसरा है। मछली उत्पादन मुनाफे का व्यवसाय है जिसमें मछली उत्पादक अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। इसके लिए मत्स्य उत्पादकों को शिक्षण और प्रशिक्षण के साथ तकनीकी जानकारी भी देना होगी। साथ ही उन्हें अच्छा बीज भी उपलब्ध कराना होगा। यदि हमें विटामिन और प्रोटीन उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ना है, तो हमें मछली उत्पादन को अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। देश में मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं है, जिसका लाभ उठाकर मछली उत्पादक अपने व्यवसाय को एक नई ऊँचाई दे सकता है। बीते 10 वर्षों में भारत में मछली का उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 147 लाख टन हुआ है। इसी अवधि में भारत ने मत्स्य उत्पाद का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये का हो गया है। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह आज इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में अहमदाबाद में हुई विमान त्रासदी में मृत यात्रियों एवं अन्य को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केन्द्रीय मंत्री रंजन ने कहा कि असंगठित क्षेत्रों में जो मछली उत्पादक है, उन्हें संगठित क्षेत्रों में लाना है। मत्स्य सहकारी समितियों को और मजबूत करना होगा। सभी मत्स्य उत्पादकों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेना चाहिए। केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न राज्य सरकार की योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री मीनाक्षी योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, अनुगृह सहायता योजना, शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मत्स्य उत्पादक उठायें। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य उत्पादक अपने व्यवसाय को कई गुना आगे बढ़ा सकते हैं। मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि हर राज्य मत्स्य किसानों को एक विस्तृत कार्य योजना बनाकर एनएफडीबी द्वारा प्रदाय नि:शुल्क प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करायें ताकि मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी हो। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्य सहकारी समिति को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है। इस हेतु नेशनल फिश डिजिटल पोर्टल में किसानों का पंजीयन करायें। मत्स्य किसानों में जागरूकता फैलाये तथा राज्य सरकार मछली उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर दें तथा अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के मंत्री जार्ज कुरियन ने कहा कि देश में तीन करोड़ लोग मछली उत्पादन से जुड़े है। विश्व के कुल मत्स्य उत्पादन में भारत का 8 प्रतिशत योगदान है, जो कम नहीं है। मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार सतत प्रयासरत है। मंत्री कुरियन ने आगे कहा कि मछली उत्पादकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। मछुआरों के बच्चों को शिक्षा के लिए भी सुविधाओं में और बढ़ोतरी होनी चाहिए। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि यदि हमें कृषि के क्षेत्र में किसानों की आय दुगुनी करना है तो हमें मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन को बढ़ावा देना होगा। मछली उत्पादन के लिए हमें हर जिले में अमृत सरोवर की संख्या को बढ़ानी होगी। केन्द्रीय मंत्री बघेल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में छोटी-छोटी नदियां विलुप्त की कगार पर है, इस ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नारायण सिंह पंवार ने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये निरंतर प्रयासरत है। इसके लिये अनेक कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल में हलाली क्लस्टर की स्थापना की जा रही है। इससे मत्स्य पालन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने मछुआरों के कल्याण और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिये संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। मीट का उद्देश्य उन इनलैंड राज्यों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं जुड़ती हैं। इस मीट में सिर्फ उन राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो समुद्र से मत्स्य उत्पादन गतिविधियाँ नहीं करते हैं। कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश के मत्स्य पालन विभाग मंत्री संजय कुमार निषाद, बिहार की मछुआ पालन और पशुपालन मंत्री सुरेणु देवी, हरियाणा के पशुपालन, डेरी और मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा, केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी और संयुक्त सचिव सागर मेहरा सहित छतीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड आदि राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस मौके पर अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मत्स्य उत्पादकों से संवाद भी किया। प्रदर्शनी में मछली उत्पादन से जुड़े विभिन्न चित्रों एवं ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।  

कांग्रेस पुरानी गलतियों से सबक लेकर आगे देख रही, विधायक दल की एक बैठक 15 जून को बुलाई

पटना बिहार में बीते तीन दशकों में अपनी राजनीतिक जमीन गंवाने वाली कांग्रेस पुरानी गलतियों से सबक लेकर आगे देख रही है। मतदाता और आमजन से अपनी दूरी पाटने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व संवाद और संपर्क के जरिये कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है। वह ऐसे मुद्दों पर मुखर हो रही है जिनका सीधा वास्ता आमजन से है। मसला बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षार्थियों का हो, युवाओं के बिहार से पलायन, नौकरी या फिर रोजगार का हो या फिर अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज देने का, इन मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी में पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही। अपने अभियान की इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए पार्टी ने अब चुनावी तैयारियों और चुनाव के मुद्दों पर चर्चा के लिए पार्टी विधायक दल की एक बैठक 15 जून को बुलाई है। बैठक में पार्टी के सभी विधायक, विधान पार्षद समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और प्रभारी कृष्णा अल्लावारू की उपस्थिति में होने वाली बैठक में जहां विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर नेता आपसी संवाद करेंगे वहीं जनहित के वैसे मुद्दे जो आज ज्वलंत हैं उन पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा चरणवार राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनेगी। चर्चा है कि पार्टी ने महागठबंधन की एक दिन पूर्व हुई बैठक के आलोक में यह बैठक बुलाई है। जिसमें नेता वैसी सीटों की पहचान कर उन्हें सूचीबद्ध करेंगे जहां पार्टी मजबूत स्थिति में हैं। यह सूची महागठबंधन के प्रमुख दल के मुखिया और महागठबंधन की समन्वय समिति के अध्यक्ष को दी जाएगी। पार्टी ने अपने सभी विधायकों और पार्षदों के साथ वरिष्ठ नेताओं को 15 जून की बैठक की सूचना भेज दी है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बस्तर संभाग में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह इस बदलाव के साक्षी बने

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, जहां कभी गोलियों की गूुज सुनाई देती थीं, वहां अब हर जगह खुशी और उल्लास की गूंज सुनाई देती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति व नियद नेल्लानार योजना के प्रभाव से माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवक-युवतियों और नक्सल पीड़ितों ने नई जिंदगी की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बस्तर संभाग में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह इस बदलाव के साक्षी बने हैं। सुकमा के मिनी स्टेडियम में 13 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में दो आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों मौसम महेश-हेमला मुन्नी और मड़कम पाण्डू-रव्वा भीमे ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह रचाया। ये चारों जून 2024 में नक्सल संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके थे। मुख्यमंत्री ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर साय ने सुकमा जिले को 206 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात भी दी। नवदंपतियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी नीतियों और पुनर्वास योजनाओं ने उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की राह अपनाने के लिए प्रेरित किया। दंतेवाड़ा में 220 जोड़ों का सामूहिक विवाह, पूवर्ती की नक्सल पीड़िता ने जवान संग रचाई शादी दंतेवाड़ा के मेंढका डोबरा में मंदिर परिसर में 20 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 220 जोड़ों ने परिणय सूत्र में बंधकर गृहस्थ जीवन शुरू किया। इनमें पूवर्ती गांव की एक नक्सल पीड़िता और वहां तैनात जवान का जोड़ा भी शामिल था। पूवर्ती, जो कभी खूंखार नक्सली हिड़मा और देवा का गढ़ था, अब सरकार की योजनाओं और सुरक्षा बलों की मौजूदगी से भयमुक्त होकर खुशहाली की ओर अग्रसर है। नियद नेल्लानार योजना के तहत धुरली गांव के दो जोड़ों सीमा भास्कर-रमेश भास्कर और सुंदरी तेलाम-धन्नु कुंजाम ने भी विवाह रचाया। सभी नवदंपतियों के बैंक खातों में 35 हजार रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: निर्धन परिवारों का सहारा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने बस्तर के निर्धन परिवारों को नया जीवन दिया है। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये सीधे वधु के खाते में हस्तांतरित होते हैं। विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल में अब तक 15 हजार से अधिक जोड़ों का विवाह इस योजना के तहत संपन्न हो चुका है। बस्तर में शांति और विकास की नई इबारत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल विरोधी कार्रवाइयों और कल्याणकारी योजनाओं ने बस्तर के ग्रामीणों का हौसला बढ़ाया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार, आवास और आर्थिक सहायता के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। बस्तर संभाग के इन विवाह समारोहों ने साबित कर दिया कि प्यार, विश्वास और सहानुभूति से हिंसा और नफरत को हराया जा सकता है। बस्तर अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शांति, प्रेम और विकास की रोशनी में चमक रहा है।

मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय, मूंग एवं उड़द का 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य

किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किये जाने संबंधी निर्णय लेकर प्रस्ताव केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग एवं उड़द के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होगा। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये कृषि आधारित उद्योग लगाने में भी मदद कर रही है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिये प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान संघों से हुई चर्चा में आश्वस्त किया कि हम सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिये डबल इंजन की सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार किसानों को अगली फसल के लिये भी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज और उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में निरंतर कृषि मेलों का आयोजन कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। राज्य किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गये प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है। 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है। एमएसपी पर पंजीयन प्रक्रिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी। किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा। इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे। समर्थन मूल्य पर उपार्जित मूंग-उड़द की एक समान विनिर्दिष्टियां भारत सरकार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिये केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एक समान विनिर्दिष्टियां के अनुरूप किया जायेगा। इसके अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी। निर्धारित मापदण्ड अनुसार उपार्जन सुनिश्चित करने के लिये सहकारी संस्थाओं/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपण संघ मर्यादित भोपाल/म.प्र. वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, खाद्य, कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के मैदानी अमले को ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की गुणवत्त हेतु जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द उपार्जन की कीमत एवं समान विनिर्दिष्टियां का व्यापार प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे किसानों का ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द विचौलियों द्वारा कम दाम पर खरीदा न जा सके। उपार्जित फसल का परिवहन उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी। ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा। किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी। परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के‍लिये सुविधाएं उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी। उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी। इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा। जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।  

आदिवासी अंचलों में घर-घर पहुंचकर सरकार बनाएगी आयुष्मान कार्ड, अभियान 15 जून से

रायपुर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, भारत सरकार के निर्देश पर वर्तमान वर्ष को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. आगामी 15 से 30 जून 2025 तक धरती आबा, जानजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आदिवासीय विकास विभाग छ.ग. के नेतृत्व में आयोजित होगा. जिसमें राज्य के अन्य महत्वपूर्ण विभाग भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगी. विशेष तौर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिनस्थ कर्यरत राज्य नोडल एजेंसी द्वारा पूरे प्रदेश के आदिवासीय बाहुल्य ग्रामों में छूटे अदिवासियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन किया जाएगा. आदिवासीय विकास विभाग छ.ग. से प्राप्त सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 85 आदिवासीय बाहुल्य विकास खण्ड है व प्रदेश में 6691 चिन्हांकित गांव है जहॉ जनजातीय समुदाय की बहुतायत है. आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, भारत सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार इन समस्त गांवों में प्रत्येक घर तक राज्य सरकार के नुमांईंदों को पहुंचना है. जिसका उद्देश्य भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित अलग-अलग योजनाओं से आदिवासियों को हर हाल में जोड़ना है. जिसके लिए आगामी 15 से 30 जून तक आदिवासी विकास विभाग छ.ग. धरती आबा, जानजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाने जा रहा है. राज्य सरकार अधीन समस्त महत्वपूर्ण शासकीय विभाग इस दौरान अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे और विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से आदिवासियों को जोडेंगे. घर-घर पहुंचकर बनाएगें आयुष्मान कार्ड आष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना एवं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से जनजातीय समूहों को जोड़ने के लिए राज्य नोडल एजेंसी छ.ग. द्वारा विशेष अभियान चलाया जाएगा. 15 जून से मितानिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत कर्मियों के जरिए ऐसे आदिवासी जिनका आयुष्मान कार्ड नहीं बन सका है. उन सभी का आयुष्मान कार्ड पंजीयन कराया जाएगा. कार्ड पंजीयन के लिए दल जनजातीय समूहों के प्रत्येक घर तक पहुंचने का प्रयास करेगा. सभी जिलों को दे दी गई है पूर्व सूचना इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए राज्य नोडल एजेंसी छ.ग. द्वारा सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी जा चुकी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकारण, भारत सरकार द्वारा भी इस अयोजन की लगातार मानिटरिंग की जा रही है. अभियान को किस तरह मूर्तरूप देना है. इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. राज्य नोडल एजेंसी के द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से प्राप्त निर्देशों के तारतम्य में ही कार्ययोजना बनाई गई है.

NEET UG result 2025: नीट यूजी का रिजल्ट आज जारी हो सकता है, ऐसे कर सकेंगे चेक

नई दिल्ली Neet UG Result 2025: नीट यूजी 2025 के नतीजे जल्द ही घोषित होने की उम्मीद है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) शनिवार, 14 जून 2025 को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) का रिजल्ट जारी कर सकता है. इस साल, 22.7 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 4 मई, 2025 को भारत के 557 शहरों और 14 विदेशी शहरों में 4,750 केंद्रों पर आयोजित NEET UG परीक्षा दी. परिणाम NEET की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर घोषित किया जाएगा.  नीट यूजी रिजल्ट के साथ नीट यूजी कट-ऑफ भी जारी की जाएगी, जिसके आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन होंगे.  NEET UG 2025 परिणाम: यहां चेक कर सकते हैं रिजल्ट परिणाम देखने के लिए NTA द्वारा प्रबंधित प्राथमिक पोर्टल-neet.nta.nic.in एनटीए की मुख्य साइट, जिस पर परिणाम भी उपलब्ध होंगे-nta.ac.in इस सरकारी ऐप के जरिए भी रिजल्ट चेक कर सकते हैं-Umang App उम्मीदवार डिजिटल लॉकर के जरिए भी स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं.- NEET UG 2025 परिणाम: कैसे जांचें आधिकारिक NEET वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं. होम पेज पर NEET UG 2025 Result लिंक पर क्लिक करें. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि और पिन दर्ज करें.  सभी डिटेल दर्ज करने के बाद सबमिट पर क्लिक करें. आपको आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिख जाएगा. स्कोरकार्ड को प्रिंट कर अपने पास रख लें.  

21 या 22 जून इस दिन मनाई जाएगी योगिनी एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व बताया गया है. साल में कुल 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं, जिसमें हर माह में 2 एकादशी पड़ती हैं. आषाढ़ माह में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. योगिनी एकादशी का व्रत निर्जला एकादशी के बाद और देवश्यनी एकादशी के बीच में रखा जाता है. अक्सर योगिनी एकादशी का व्रत जून या जुलाई के माह में रखा जाता है. साल 2025 में आषाढ़ माह में पड़ने वाली योगिनी एकादशी के व्रत की डेट को लेकर लोगों में कन्फियूजन हैं. जानते हैं यह व्रत कब रखा जाएगा. योगिनी एकादशी 2025 तिथि     एकादशी तिथि की शुरूआत 21 जून, शनिवार 2025 को सुबह 07.18 मिनट पर होगी.     वहीं एकादशी तिथि समाप्त 22 जून, 2025 को सुबह 04.27 मिनट पर होगी.     योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून को रखा जाएगा.     योगिनी एकादशी व्रत का पारण 22 जून, रविवार को किया जाएगा. योगिनी एकादशी 2025 व्रत पारण एकादशी के व्रत को रखने के साथ-साथ एकादशी व्रत का सही समय और सही नियम से पारण करना भी जरूरी होता है. योगिनी एकादशी व्रत का पारण 22 जून को दोपहर 1.28 मिनट से लेकर 4.03 मिनट तक कर सकते हैं. हरि वासन समाप्त होने का समय सुबह 09.41 मिनट है. योगिनी एकादशी व्रत का महत्व योगिनी एकादशी का व्रत अयंत महत्वपूर्ण व्रत होता है, जो आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस व्रत को रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है. इस व्रत को सच्चे मन और विश्वास के साथ रखने से श्री हरि विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही इस व्रत को करने से जीवन में समृद्धि और आनन्द की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करना अठ्यासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है.

राजस्थान में राज्य सेवा से IAS प्रमोशन की प्रक्रिया अंतिम चरण में , 19 अधिकारियों का प्रमोशन तय

  जयपुर राजस्थान में राज्य सेवा (RAS) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति की प्रक्रिया इस माह पूरी की जाएगी। इसके लिए केंद्रीय कार्मिक विभाग (DoPT) द्वारा अगले सप्ताह तक डीपीसी (DPC) की बैठक आयोजित किए जाने की संभावना है। इस बार 19 RAS अधिकारियों को प्रमोशन देकर IAS कैडर में शामिल किया जाएगा। 1997 और 1998 बैच के अधिकारी दौड़ में प्रमोशन की दौड़ में 1997 और 1998 बैच के RAS अधिकारी शामिल हैं। चयन एसीआर (Annual Confidential Report) और मेरिट के आधार पर होगा। राज्य सरकार द्वारा पूर्व में 57 अधिकारियों की सूची केंद्र को भेजी गई थी, जिनमें से 19 का चयन संभावित है। संभावित प्रमोशन सूची में ये नाम शामिल सूत्रों के मुताबिक जिन अधिकारियों को IAS में प्रमोशन मिल सकता है, उनमें ये नाम प्रमुख हैं:     राजेंद्र सिंह     गजेंद्र सिंह राठौड़     राकेश कुमार शर्मा     नवनीत कुमार     सुखवीर सैनी     जसवंत सिंह     महेंद्र खींचीं     जगवीर सिंह     हरसहाय मीणा     जुगल किशोर मीणा     ललित कुमार     डॉ. शिव प्रसाद सिंह     मेघना चौधरी     (अन्य नामों की पुष्टि प्रक्रिया पूर्ण होने पर होगी) तबादला सूची भी इसी माह जारी होने की संभावना प्रमोशन प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार IAS अधिकारियों की बहुप्रतीक्षित तबादला सूची भी इसी महीने जारी कर सकती है। राज्य में दो दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं और कई अधिकारी अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। ऐसे में नए IAS अधिकारियों की नियुक्ति से प्रशासनिक ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है।

सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी

सर्पदंश रोकथाम अभियान सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी भोपाल मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इसे स्थानीय आपदा घोषित किया है। पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक मौत हुई थी जिससे व्यापक जनहानि हुई थी। बारिश के मौसम में बढ़ने वाली इन घटनाओं की रोकथाम के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें जनजागरूकता, आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और निवारण संबंधी उपाय शामिल किए गए हैं। जनजागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया के जरिए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रसारित की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को इस खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित ‘सर्प मित्र’ और ‘स्नेक-कैचर्स’ की तैनाती की जाएगी, जिनके हेल्पलाइन नंबर जनता को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम (विषनाशक दवा) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने की व्यवस्था को और सुचारू बनाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। निवारक उपायों पर सामुदायिक भागीदारी जनजागरूकता गतिविधि में ग्रामीणों को खेतों और जंगलों में काम करते समय मोटे जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी जाएगी। घरों के आसपास सफाई रखने, झाड़ियों को काटने और कूड़े के उचित निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुपालकों को पशुशालाओं के आसपास बाड़ लगाने और पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करने की सलाह दी गई है। पर्यटन स्थलों पर सर्प अधिकता क्षेत्रों को चिह्नित करने और चेतावनी बोर्ड लगाने का भी प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन और जनता से अपील राज्य सरकार ने इस अभियान के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये आवंटित किए हैं। बजट का उपयोग प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता कार्यक्रमों में किया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या देसी उपचार की बजाय तुरंत निकटतम अस्पताल पहुँचें, क्योंकि पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ यानि जीवनरक्षक होता है। साथ ही, सांपों को मारने या परेशान करने के बजाय उन्हें दूर भगाने के उपाय करने पर जोर दिया गया है। इस व्यापक अभियान से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने राज्य सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी करने के निर्णय का स्वागत किया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के महेश चौधरी तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 19 जून से मूंग खरीदी के लिए पंजीयन शुरू होंगे।उन्होंने मुख्यमंत्री जी की किसानों के प्रति संवेदनशीलता की तारीफ की और आभार व्यक्त किया।  

छत्तीसगढ़ के 15 जिलों में यलो अलर्ट, रायपुर में मानसून 15 के बाद पहुंचने के आसार

रायपुर छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक 15 दिन पहले बस्तर में हो चुकी है, पर यह वहीं अटका हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक 14 जून के आसपास मानसूनी हवा को बस्तर से आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलेंगी। मानसून को बढ़ने के लिए सही रफ्तार मिली तो यह 15 जून के बाद रायपुर पहुंच जाएगा। इसी के साथ मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अच्छी वर्षा के आसार हैं। वैसे एक नया मानसूनी सिस्टम बंगाल की उत्तर खाड़ी में 14 जून के आसपास बनने जा रहा है। यह सिस्टम ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और एमपी होते हुए राजस्थान तक पहुंचेगा। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश के 20 जिले बारिश और तेज हवा तथा गरज-चमक से प्रभावित होंगे। बस्तर, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर तथा सरगुजा संभाग के भी कुछ हिस्सों में बारिश होगी। 15 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग लगातार अपडेट जानकारी जारी करेगा। बस्तर संभाग के चार जिले ऑरेंज अलर्ट है।

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