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चाय पर चर्चा : कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने पर हुई बातचीत

Chai Pe Charcha: Discussion on strengthening the Congress organization हरिप्रसाद गोहेआमला। रविवार को अवकाश के दिन वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता सर रमेश दामले ने वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सौजन्य भेंट कर “चाय पर चर्चा” का आयोजन किया।इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के सीनियर कार्यकर्ता ॐ प्रकाश सूरे से विस्तारपूर्वक बातचीत की। दामले ने कहा कि कांग्रेस संगठन की रीति-नीति और विचारधारा से कार्यकर्ताओं को निरंतर जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संगठन को मजबूती देने तथा जनता तक कांग्रेस की नीतियों और योजनाओं को पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए और एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

MPWLC में 10 करोड़ का टेंडर घोटाला : नियम ताक पर, चहेती फर्मों को फायदा, कार्रवाई गायब

MPWLC tender scam: Rules flouted, favoured firms benefit by crores; learn how officials are committing fraud भोपाल। MPWLC Scam in 10 crores मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (MPWLC) में सड़क और साइनज के करीब 10 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। शिकायतें बताती हैं कि अधिकारियों ने तय नियमों की अनदेखी कर चहेती फर्मों को फायदा पहुँचाया और पात्रता की मूल शर्तें पूरी न करने के बावजूद उन्हें क्वालिफाई कर दिया। टेंडर की पहली शर्त ही टूटी MPWLC Scam in 10 crores जुलाई 2025 में जारी इस टेंडर में साफ लिखा था कि भाग लेने वाली फर्म मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी में पंजीकृत होनी चाहिए। लेकिन कॉर्पोरेशन ने एवेन्यू ग्राफिक्स, सत्यम ग्राफिक्स और अबुल फैज जैसी फर्मों को भी क्वालिफाई कर लिया, जिनका रजिस्ट्रेशन उस वक्त नहीं था। हद तो यह कि एक फर्म ने तो टेंडर जारी होने के बाद आवेदन किया, जो कि नियमों के हिसाब से अमान्य है। OEM सर्टिफिकेट के बिना भी क्वालिफाई MPWLC Scam in 10 crores पड़ताल में यह भी सामने आया कि इन फर्मों के पास ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट तक नहीं था। बावजूद इसके उन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में दस्तावेज़ लेकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रतिस्पर्धा खत्म, थ्री एम वेंडर बाहर इस टेंडर में छह वेंडर शामिल हुए थे, जिनमें तीन थ्री एम इंडिया से और तीन ओराफिल से थे। लेकिन अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को बाहर कर दिया। जबकि उनके पास पीडब्ल्यूडी रजिस्ट्रेशन और सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे। इससे प्रतिस्पर्धा घट गई और अनुमान लगाया जा रहा है कि टेंडर सामान्य से 20–25% कम दर पर मंजूर होने की बजाय केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर खोला गया। नियमों की अनदेखी, पारदर्शिता पर सवाल जानकारों का कहना है कि टेक्निकल बिड खुलने के सिर्फ एक घंटे बाद ही फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई, जबकि नियमानुसार इसमें कम से कम 24 घंटे का अंतर होना चाहिए। इस प्रक्रिया से किसी भी वेंडर को आपत्ति दर्ज कराने का मौका ही नहीं मिला। जवाबदेही से बचते अधिकारी जब चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “हमने पीडब्ल्यूडी एनआईटी के अनुसार फर्मों को क्वालिफाई किया है, बाकी जानकारी अधीक्षण यंत्री से लीजिए।”अधीक्षण यंत्री एसके जैन का कहना था कि “स्टैंडर्ड मानकों के हिसाब से कार्रवाई हुई है और रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाली फर्म को भी पात्र माना जाता है। शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।”वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की एसीएस रश्मि अरुण शमी ने कहा, “मुझे जानकारी नहीं है, पता करती हूं।” एमडी अनुराग वर्मा से संप

भैंसाई नदी में बहे लापता युवक का मिला शव।

The body of the missing youth who was swept away in the Bhainsai river was found. हरिप्रसाद गोहेआमला। बोरदही थाना क्षेत्रांतर्गत आनेवाले भूआरिया ग्राम स्थित भेसाईं नदी में बहे लापता युवक का शवएन.डी.आर.एफ, पुलिस, एवं राजस्व संयुक्त दल को कड़ी मशक्कत के 36 घंटे बाद देड से दो किलोमीटर दूरी पर मिला। थाना बोरदेही से प्राप्त जानकारी अनुसार मृतक युवक की पहचान अरुण पिता जगन्नाथ उईके निवासीग्राम बेहडी के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया शव नदी से बाहर निकलवाकर कार्यवाही जारी है पी एम के बाद शव परिजनों को सौप दिया जाएगा।

कुतुब मीनार का बंद दरवाज़ा: 1981 की भगदड़ में 45 मौतें, क्यों 44 साल से पर्यटकों के लिए बंद है प्रवेश?

Why are the doors of Qutub Minar closed for 44 years: Read the report नई दिल्ली। Qutub Minar of closed door यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल दक्षिण दिल्ली के महरौली क्षेत्र का कुतुब कॉम्प्लेक्स हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। दुनिया की सबसे ऊँची ईंट से बनी मीनार कहे जाने वाली कुतुब मीनार केवल स्थापत्य कला और ऐतिहासिक वैभव का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि इसके भीतर एक ऐसा दर्दनाक अतीत भी छिपा है, जिसने इसकी पहचान को हमेशा के लिए बदल दिया। 1981 में हुए एक हादसे ने इस स्मारक के दरवाजे जनता के लिए स्थायी रूप से बंद कर दिए। स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व Qutub Minar of closed door कुतुब मीनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में रखी थी, जिसे बाद में इल्तुतमिश और फिर फिरोज शाह तुगलक ने पूरा कराया। करीब 73 मीटर ऊँची यह मीनार पाँच मंज़िलों में बनी है। लाल और पीले बलुआ पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी इसे देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह केवल स्थापत्य का अद्भुत नमूना नहीं, बल्कि दिल्ली सल्तनत के गौरव और उस दौर की तकनीकी क्षमता का प्रमाण भी है। कभी खुला था आम जनता के लिए Qutub Minar of closed door आज यह स्मारक केवल बाहर से निहारा जा सकता है, लेकिन एक समय था जब पर्यटकों को इसके भीतर प्रवेश और संकरी सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने की अनुमति थी। लोग झरोखों से दिल्ली का मनोरम नज़ारा देखते और इस अद्भुत स्मारक का रोमांचक अनुभव अपने साथ ले जाते। स्कूलों और कॉलेजों के बच्चे शैक्षणिक भ्रमण पर यहाँ आना अपनी उपलब्धि मानते थे। 4 दिसंबर 1981: वह काला दिन Qutub Minar of closed door इतिहास के पन्नों में दर्ज यह तारीख कुतुब मीनार के लिए अभिशाप बन गई। उस दिन सुबह से ही मौसम खराब था। आसमान में बादल छाए थे और दोपहर होते-होते बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। संकरी और अंधेरी सीढ़ियों के भीतर लगभग 300 से अधिक लोग मौजूद थे। इसी दौरान अफरातफरी मच गई। बताया जाता है कि किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई और वह घबराकर नीचे की ओर भागी। अंधेरे में किसी ने यह अफवाह फैला दी कि मीनार गिर रही है। घबराहट और भगदड़ का ऐसा माहौल बना कि चीख-पुकार से सीढ़ियाँ गूँज उठीं। त्रासदी का मंजरकुछ ही मिनटों में भगदड़ ने भयावह रूप ले लिया। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, बच्चों और महिलाओं की चीखें दूर तक सुनाई दीं। इस अफरातफरी में 45 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे थे जो पिकनिक के लिए आए थे। कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। दिल्ली के अस्पतालों में उस दिन का नज़ारा किसी युद्ध जैसी त्रासदी से कम नहीं था। स्थायी ताले की शुरुआतहादसे के बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। सुरक्षा कारणों से कुतुब मीनार के भीतर पर्यटकों का प्रवेश हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। तभी से, यानी पिछले 44 सालों से, लाखों लोग केवल बाहर से इस ऐतिहासिक धरोहर को निहारने तक ही सीमित हैं। Read more: ट्रम्प ने फिर उगला जहर, भारत-चीन समेत कई देशों को बताया ड्रग तस्कर कहा- ये खतरनाक केमिकल बना रहे सवाल और सीखइस घटना ने देशभर में स्मारकों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर गहन बहस छेड़ी। सवाल उठे कि क्या पर्याप्त रोशनी और निगरानी होती तो यह हादसा टल सकता था? क्या भीड़ नियंत्रण के उपाय किए जा सकते थे? हालांकि समय के साथ तकनीकी सुविधाएँ काफी बेहतर हो चुकी हैं, पर कुतुब मीनार का दरवाजा अब भी बंद है। आज भी वही कसकदिल्ली घूमने आने वाले पर्यटक जब कुतुब मीनार के पास पहुँचते हैं तो उसकी भव्यता उन्हें रोमांचित करती है। लेकिन भीतर प्रवेश न मिलने पर निराशा भी होती है। बहुत से बुजुर्ग लोग आज भी बताते हैं कि उन्होंने बचपन में कुतुब मीनार की सीढ़ियाँ चढ़ी थीं और ऊपर से दिल्ली का नजारा देखा था। नई पीढ़ी उस अनुभव से वंचित है। कुतुब मीनार सिर्फ एक स्थापत्य धरोहर नहीं, बल्कि हमारे अतीत की चेतावनी भी है। यह याद दिलाती है कि सुरक्षा चूक कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। 1981 की भगदड़ ने न केवल मासूम जिंदगियाँ छीनीं, बल्कि एक अनोखी परंपरा को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया। आज जब हम इसकी सुंदरता को बाहर से निहारते हैं, तो साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि इतिहास केवल गौरवशाली नहीं होता, उसमें वे पीड़ादायक किस्से भी दर्ज रहते हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

आमला जनपद पंचायत : खंड स्तरीय स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम का शुभारंभ।

Amla District Panchayat: Block level Swachhata Hi Seva program was launched. हरिप्रसाद गोहेआमला ! क्षेत्र का प्रमुख देवीधाम स्थल मा रेणुका धाम छावल से आज खंड स्तरीय स्वक्षता सेवा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत जनपद अध्यक्ष आमला गणेश यादव द्वारा की गई इस दौरान मौजूदा ग्रामीण जानों को स्वक्षता की शपथ भी दिलाई गई। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष आमला गणेश यादव, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि हरि यादव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला संजीत श्रीवास्तव, बीपीओ संजय सावरकर,ग्राम सरपंच एवं सचिव द्वारा ग्राम पंचायत छावल में साफ-सफाई अभियान चलाया गया और ग्रामीणों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई । कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष गणेश यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा स्वच्छता अपनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम अपने घर, मोहल्ले और गांव को स्वच्छ रखते हैं तो परिवार और समाज बीमारियों से दूर रहेंगे। स्वच्छ वातावरण से जीवन स्वस्थ और सुखद बनता है।स्वच्छता को व्यवहार का अंग बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए आगामी दिनों में भी विविध जन-जागरूकता गतिविधियो का संचालन कीया जायेगा। वहीं स्वच्छता ही सेवा के दौरान नवरात्र पर्व भी आयोजित होंगा। इस त्योहार को क्लीन ग्रीन उत्सव के रूप में मनाने पर बल दिया जायेगा।वहीं पूजा समितियों एवं आयोजकों से अनुरोध किया गया है। कि नवरात्र पूजा एवं मेला परिसर को प्लाष्टिक कचरा सहित सभी तरह का कचरा से मुक्त स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल त्योहार बनाने का हर संभव प्रयास करें। पूजा परिसर में एकल उपयोग वाले प्लाष्टिक के थैले का उपयोग न करें। इसके बदले जूट, कपड़े, कागज या इको-फ्रेंडली सामग्री से निर्मित थैले का उपयोग करें। कचरा न फैलाएं। ब्लाकवासियो से अनुरोध किया गया है कि वे इसमें भाग लें और अपने घर परिवेश गांव को स्वच्छ बनाएं। गांव मोहल्ला और गली को प्लाष्टिक कचरा सहित सभी तरह के कचरा से मुक्त बनाने के लिए संचालित अभियान में श्रमदान करें। कार्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन ब्लॉक समन्वयक विमल बचले, सरपंच राजू कापसे, सचिव गजेंद्र सिकरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

आवारा मवेशियों की समस्या खत्म चाहिए, विकल्प नहीं स्थाई समाधान चाहिए : पूर्व पार्षद राकेश धामोडे

The problem of stray cattle needs to be resolved, we need a permanent solution, not an alternative: Former councillor Rakesh Dhamode हरिप्रसाद गोहेआमला। नगर में व्याप्त आवारा मवेशियो की समस्या से न खुश पूर्व पार्षद राकेश धामोडे ने आज मंगलवार नगर के व्यस्ततम चौराहा जनपद चौक पर अर्धनग्न प्रदर्शन कर नगर पालिका प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया ओर नगर की ज्वलंत समस्या आवारा मवेशीयो की खत्म करने मांग की गई। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन को अल्टीमेटम देकर कहा समस्या का विकल्प नहीं स्थाई समाधान चाहिए बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आगामी दिनों में जिले का ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए बाध्य रहूंगा जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की होंगी। प्रदर्शन के दौरान धामोडे हाथों में स्लोगन लिखी तख्ती रख भारत माता की जय जयघोष लगा रहे थे। इस दौरान उन्हें विभिन्न संगठन एवं नगर वासियों का भी भरपूर समर्थन मिला।हमारे प्रतिनिधी से चर्चा के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद आमला नितिन बिंजवे ने बताया आवारा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने शहर मुनादी कराई जा रही है, मुल्लताई से पशु वाहन बुलाया गया हैं कल से पशु पकड़ने कार्यवाही शुरू की जाएंगी वहीं डाग के लिए निविदा निकाली जाएगी।।

हाथ पकड़कर पुल पार कर रहे थे दो युवक भेसाईं नदी में बहे।

Two youths were crossing the bridge holding hands and were swept away in the Bhesain river. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला विकास खंड अंतर्गत आने वाले भूआरिया गांव स्थित भेसाईं नदी पर बना बिना रेलिंग का पुल लोगों की जान का दुश्मन बन हुआ है । जहां प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु के दौरान घटना दुर्घटना घटित हो रही बावजूद जिम्मेदार, जन प्रतिनिधी,विभाग प्रमुख सहित प्रशासन का ध्यान नदी पर पुल बनाने की और नहीं हे। जिस कारण पुल पर गंभीर दुर्घटना होना आम हो गया है। आपको बता दे क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के चलते सोमवार शाम फिर एक बार भेसाईं नदी पर बने पुल को तेज बहाव के बावजूद दो युवक हाथ पकड़कर पार कर रहे थे जिस दौरान दोनों युवक के नदी में बह जाने के मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। बहरहाल एक युवक ने तिरकर नदी पार कर अपनी जन बचा ली है।वही दूसरे लापता युवक को एन डी आर एफ की टीम सरगर्मी से तलाश कर रही है। मिली जानकारी अनुसार तैरकर बाहर निकला मंडी यादव ने पुलिस को बताया बेहड़ी गांव निवासी अरुण ऊईके और में हाथ पकड़कर नदी पार कर रहे थे इस दौरान दोनों नदी में गिर गए।मैने तैरकर जान बचाली मेरा साथी अभी लापता है। थाना प्रभारी बोरदेही राधेश्याम वटी ने बताया लापता युवक की तलाश एन डी आर एफ की टीम लगीं है पानी मटमेला होने से दिक्कत आ रही है। मौके पर पुलिस बल सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद है।

मुख्यमंत्री आवास पर ओबीसी आरक्षण को लेकर अहम बैठक

Important meeting regarding OBC reservation at Chief Minister’s residence भोपाल ! ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर आज शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री आवास पर माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक के प्रमुख बिंदु: इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार और ओबीसी समाज एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष प्रस्तुत करेंगे और ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ओबीसी आरक्षण प्रकरण के संदर्भ में आयोजित बैठक में ओबीसी महासभा से अपनी ओर से दो अधिवक्ताओं के नाम सुझाने का अनुरोध किया गया था। इस पर महासभा ने देश के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल श्री पी. विल्सन का नाम प्रस्तावित किया है। शीघ्र ही एक और वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम भी ओबीसी महासभा द्वारा प्रदान किया जाएगा।13% होल्ड हटाने एवं 27% आरक्षण लागू करने की दिशा में ओबीसी महासभा द्वारा एक अभिमत (Representation) एडवोकेट जनरल को सौंपा जाएगा। तत्पश्चात एडवोकेट जनरल उस अभिमत का गहन अध्ययन कर अपना अभिमत सरकार को प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर 13% होल्ड हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

जनता के पैसे से बना हुआ कारखाना बीजेपी नहीं बेच सकती :पंकज उपाध्याय

BJP cannot sell a factory built with public money: Pankaj Upadhyay शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति की जन जागरण यात्रा आज लगभग एक दर्जन गाँव में पहुंची। यात्रा आज शक्कर कारखाने की पुस्तेनी जमीन कुर्रोली से प्रारम्भ होकर लाभकरण, बुद्धगडी, टीकटगड़ी,बिलगांव क्वारी, तोरीका, नयागांव, शेखपुर, भटपुरा, और दीपेरा पहुंची। जहाँ सभी लोगों को कारखाने को बचाने एवं पुनः चालू कराने के लिए अपनी बात रखी। तथा सभी ग्राम वासियों ने एक साथ हाथ उठाकर मुरैना में होने वाली आम सभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आश्वाशन दिया। यात्रा को जौरा विधायक पंकज उपाध्याय,मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक तिवारी जी,कारखाने के पूर्व संचालक श्री गयाराम धाकड़ जी, नीकेराम त्यागी जी, डॉ मुरारी लाल अमर जी आदि ने सम्बोधित किया।विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा की यह कारखाना हमारे पूर्वजों ने अपने खून पसीने से सींचा है इसे हम कोड़ियों के भाव नहीं बिकने देंगे 1965 में जब कारखाना बन रहा था तब एक शेयर ₹500 का था और एक तोला सोना ₹65 का आता था आज के हिसाब से वह ₹500 7-8 लाख होता है कारखाने को हमें हर हाल में बिकने से बचाना होगा श्राद्ध पच्छ चल रहा 21सितम्बर को अंतिम श्राद्ध है अगर अपने पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो 21तारीख को सब काम छोड़कर इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होना है तभी हमारे पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।मुरैना में होने वाले जन आंदोलन में किसान सभा के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष किसान नेता राकेश टिकैत साहब,बादल सरोज जी, वृंदा करात जी पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी जी एवं कई अन्य नेता शामिल होंगे।इस यात्रा में सभी समाज के लोग ,छोटे, बड़े, बुजुर्ग माता बहने एवं जनसंगठन कांग्रेस, माकपा, बसपा, आप, सपा, भीम आर्मी, एवं सभी संगठन शामिल है।

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे।

जनता से 8 साल की देरी का हिसाब कौन देगा? जीएसटी सुधार पर उठे सवाल

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; कानून के अनुपालन को सरल बनाए: किसी छोटे व्यापारी या दुकानदार … Read more

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

Teachers stuck on lucrative posts for years by taking deputation भोपाल। मध्यप्रदेश समग्र शिक्षक संघ ने राज्य में प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे एवं प्रदेश संरक्षक मुरारी लाल सोनी ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन को पत्र प्रेषित किया है। संघ पदाधिकारियों ने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यत: 4 वर्ष तय है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि दोनों विभागों की सहमति से केवल 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में नीति के विपरीत अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक ऐसे हैं, जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। जो स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। संघ ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति की लंबी अवधि से मूल विभाग के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य केवल विशेष प्रशासनिक आवश्यकता की पूर्ति होती है, न कि व्यक्तिगत सुविधा से इसे स्थायी पदस्थापना का रूप देना है। प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार विभागों में जमेसंघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दुबे का कहना है कि विभिन्न संगठनों से जुड़े कई शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन मलाईदार विभागों में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर 10 से 15 वर्षों से जमे हुए हैं। ऐसे सभी कर्मचारी, अधिकारियों और शिक्षकों को मूल विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए। प्रतिनियुक्ति पर जमे लोकसेवकों की संपत्ति की जांच होसंघ के प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का का आरोप है कि अनेक लोकसेवक कई वर्षों से नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। वे शासन को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं। ऐसे लोकसेवकों की प्रति नियुक्ति समाप्त कर उनके कार्यकाल और संपत्ति की जांच कराई जाए।

शिवपुरी में दलित सरपंच परिवार पर फायरिंग, महिला को लगी गोली

Firing on Dalit Sarpanch family in Shivpuri, woman shot शिवपुरी। जिले के करेरा थाना क्षेत्र में आने वाले लालपुर गांव में सरपंच परिवार पर हमला हुआ है. आरोपियों ने एक महिला पर दिन दहाड़े देसी कट्टे से फायर कर गंभीर रूप से घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए. घायल महिला को अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि हमले की यह घटना किसी पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई है. जिसकी अब पुलिस पड़ताल कर रही है. 3 महीने पहले भी इस इन्हीं लोगों ने इसी दलित सरपंच परिवार पर हमला बोलते हुए उनके घर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग की थी. उस समय मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जहां से लौट के बाद एक बार फिर इन्होंने यह गंभीर घटना अंजाम दिया है. रामहेत परिहार अपने परिजन महाराज सिंह परिहार और रामसिंह परिहार के साथ घर के बाहर चबूतरे पर बैठे थे. इसी दौरान गांव का गुड्डू उर्फ नाहर सिंह गौतम अपने एक साथी के साथ वहां आया और गाली-गलौज करने लगा इस दौरान दोनों में बहस बाजी होने लगी. विवाद बढ़ने पर आरोपी ने कट्टे से फायर कर दिया. गोलियां चलने की आवाज का शोर सुनकर रामहेत की मां पुष्पा परिहार बाहर आईं और बीच बचाव करने की कोशिश करने लगी इसी दौरान आरोपी गुड्डू ने कट्टे से फायर कर दिया और गोली पुष्पा परिहार के पेट में जा लगी उन्हें तुरंत करैरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।

पांच वर्ष से अलग, अलग रह रहे मामले में हुआ सुलह

Separated for five years, reconciliation happened in the case of living separately हरिप्रसाद गोहेआमला। व्यवहार न्यायालय आमला में वर्ष 2021 में अनावेदक उमेश के विरुद्ध भरन पोषण का मामला श्रीमान अपर जिला सत्र न्यायाधीश आमला तपेश कुमार दुबे के न्यायालय में पेश किया था।जिस मामले का निराकरण व्यवहार न्यायालय आमला में आज आयोजित नैशनल लोक अदालत में सफलता पूर्वक किया गया। बतादेआवेदिका रूपाली का विवाह अनावेदक उमेश बंजारे ग्राम सेहरा के साथ सम्पन्न हुआ था। दोनों लगभग 5 वर्ष पूर्व से अलग ,अलग निवास कर रहे थे। आवेदीका रूपाली जो की बेलमंडाई पंखा की निवासी है।जोकि श्रीमान अपर जिला सत्र न्यायाधीश आमला तपेश कुमार दुबे, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आमला कुशांक अग्रवाल ,न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अमला राहुल निरंकारी, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी आमला सुश्री चारु व्यास एवं अधिवक्तागणों के आपसी प्रयासों से दोनों के मध्य हुए आपसी विवाद को समाप्त कर दोनों पक्ष ने राजी खुशी साथ साथ रहना स्वीकार किया और सौहार्दपूर्ण वातावरण में दोनों पक्ष को एक पेड़ भेंट कर रूपाली और उमेश एक साथ अपने ग्रस्त जीवन में रहने हेतु न्यायालय से रवाना हो गए । नेशनल लोक अदालत में सर्वाधिक प्रकरणों का निराकरण आज हुआ जिसमें श्रीमान जिलासत्र न्यायाधीश अमला श्री तपेश कुमार दुबे के न्यायालय में 46 लंबित प्रकरण का निराकरण हुआ । श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी खुशांक अग्रवाल आमला के न्यायालय में 26 प्रकरण एवं श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अमला श्रीमान राहुल निरंकारी के न्यायालय में 18 प्रकरण एवं श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी सुश्री चारु व्यास के न्यायालय में 24 प्रकरण के साथ आयोजित नैशनल लोक अदालत में कुल 113 प्रकरण का निराकरण नेशनल लोक अदालत के माध्यम से हुआ ।

आमला : मेंटनेंस कार्य के चलते रविवार बिजली सप्लाई रहेंगी बाधित

Amla: Due to maintenance work, electricity supply will be disrupted on Sunday. आमला नगर जोन अंतर्गत बोड़खी 11 के व्ही फीडर में होना हे सुधार कार्य। हरिप्रसाद गोहे आमला। मेंटेनेंस कार्य के चलते रविवार विद्युत सप्लाई बाधित रहेगी”ए ई मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी आमला विलास उईके से प्राप्त जानकारी अनुसार आमला नगर जोन अंतर्गत आने वाले बोड़खी 11 के व्ही फीडर में रविवार दिनांक 14/09/2025 को आमला नगर जोन अंतर्गत बोड़खी 11 के व्ही फीडर में सुधार कार्य किया जाना है। जिसके चलते सुबह 10 बजे से तीन बजे तक विद्युत सप्लाई बाधित रहेंगी जिससे आमला, 12 क्वार्टर, भीम नगर, बोड़खी, लोहार मोहल्ला, हसलपुर, जीराढाना सहित समस्त बोड़खी क्षेत्र प्रभावित रहेगा ।

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