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कृति सेनन का मनीष मल्होत्रा को खास पोस्ट, खूबसूरत आउटफिट्स के लिए जताया आभार

मुंबई   बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने बीते महीने अपनी बहन और एक्ट्रेस नुपूर सेनन की शादी धूम-धाम से सेलिब्रेट की थी। शादी के बाद अभिनेत्री लगातार अलग-अलग फंक्शन से जुड़ी फोटोज सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही हैं। उन्होंने अपनी बहन की विदाई को लेकर भी एक भावुक पोस्ट किया था, लेकिन अब उन्होंने इंडस्ट्री के मशहूर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के लिए एक थैंक्यू पोस्ट किया है। कृति सेनन और उनके पूरे परिवार ने नुपूर की शादी में जितनी भी इंडियन ड्रेसेज पहनी थीं, उन्हें मनीष मल्होत्रा ने डिजाइन किया था। नुपूर की शादी का लहंगा और उनके माता-पिता समेत कृति की ड्रेस भी मनीष ने खास तौर पर डिजाइन किए थे। अब कृति ने इतनी खूबसूरत इंडियन ड्रेसेज और शादी को यादगार बनाने के लिए डिजाइनर का धन्यवाद किया है। उन्होंने परिवार के साथ फोटोज पोस्ट कर लिखा, “मेरे खास दोस्त मनीष मल्होत्रा के लिए खास पोस्ट। शादी के लिए मेरे पूरे परिवार को इतने खूबसूरत ढंग से सजाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।” उन्होंने लिखा, “आपने सभी के लुक को इतने प्यार, स्नेह और आशीर्वाद से कस्टमाइज किया कि दुल्हन से लेकर मेरे माता-पिता तक, जो पहली बार मनीष मल्होत्रा ​​की ड्रेस पहनकर बेहद खुश थे, सभी खुश और सहज महसूस कर रहे थे। सबके चेहरों पर दिख रही खुशी सब कुछ बयां कर रही है। हमारे खास दिन को और भी खूबसूरत बनाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।” बहन नुपूर की शादी के दिन कृति ने ऑफ व्हाइट और गोल्डन कलर का लहंगा पहना था, जिस पर पैच वर्क से लेकर बारीक कढ़ाई की गई थी, जबकि अभिनेत्री की मां ने पिंक और गोल्डन कलर की हैवी एम्ब्रॉयडरी वाली साड़ी पहनी थी। वहीं, दुल्हन नुपूर का लहंगा पिंक और रेड दोनों शेड्स के साथ था। सभी इंडियन ड्रेसेस एक से बढ़कर एक थीं। नुपूर सेनन से पहले मनीष मल्होत्रा परिणीति चोपड़ा, आलिया भट्ट, करीना कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन, कियारा आडवाणी और कैटरीना कैफ तक के लिए आउटफिट डिजाइन कर चुके हैं। उन्होंने कियारा आडवाणी, कैटरीना कैफ और आलिया भट्ट के लिए शादी का आउटफिट डिजाइन किया था।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सहारा बनेगी नई हेल्पलाइन, छात्रों को मिलेगी हर मदद

रायपुर  बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु आयोजन और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व ही हेल्पलाइन सेवा शुरू कर दी गई है। यह हेल्पलाइन हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी एवं हायर सेकेंडरी व्यावसायिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन सेंटर से विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 1800-233-4363 पर सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक फोन कर सहायता ली जा सकती है। हेल्पलाइन में प्रतिदिन मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक अभिप्रेरक तथा मण्डल के अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जो परीक्षा से जुड़े तनाव, मार्गदर्शन और अन्य शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करेंगे। खास बात यह है कि यह सेवा रविवार के दिनों में भी कार्यालयीन समय में उपलब्ध रहेगी। माशिमं ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या तनाव की स्थिति में हेल्पलाइन का लाभ उठाएं, ताकि परीक्षाएं तनावमुक्त माहौल में संपन्न हो सकें।

मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश

अन्तःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करें, अन्नदाता की आय में होगा कई गुना इजाफा: मुख्यमंत्री गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों के लिए लाभकारी: मुख्यमंत्री 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका ‘गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तःफसली खेती’ को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि ‘बहु-गुणित’ करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि ‘गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि  कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।

Yamaha EC-06 इलेक्ट्रिक स्कूटर: 169 किलोमीटर की रेंज और कीमत में होगा दम, जानिए डिटेल्स

मुंबई  यामाहा इंडिया ने भारतीय बाजार में अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर Yamaha EC-06 आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है. दिल्ली में इसकी एक्स-शोरूम कीमत 1.67 लाख रुपये रखी गई है. कंपनी ने इसे सबसे पहले नवंबर 2025 में मुंबई के एक इवेंट में पेश किया था. अब यह स्कूटर देश के चुनिंदा शहरों मे यामाहा के प्रीमियम ‘ब्लू स्क्वायर’ शोरूम के जरिए ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा. डिजाइन इस स्कूटर का डिजाइन यामाहा की खास पहचान और आधुनिक स्टाइल का मिश्रण है. इसमें शार्प बॉडी लाइन्स और एक मजबूत बनावट दी गई है जो इसे सड़क पर प्रीमियम लुक देती है. राइडिंग को मजेदार बनाने के लिए इसमें तीन मोड दिए गए हैं- इको, स्टैंडर्ड और पावर. इसके अलावा, तंग जगहों पर पार्किंग को आसान बनाने के लिए इसमें ‘रिवर्स मोड’ की सुविधा भी स्टैंडर्ड तौर पर दी गई है. परफॉरमेंस परफॉरमेंस की बात करें तो EC-06 में 4 kWh की दमदार बैटरी लगी है, जो एक बार फुल चार्ज होने पर 169 किलोमीटर की रेंज देती है. इसकी मोटर 9 bhp की पावर और 26 Nm का टॉर्क जनरेट करती है, जिससे यह स्कूटर 79 किमी प्रति घंटे की टॉप स्पीड तक पहुँच सकता है. इसकी बैटरी और मोटर को पानी और धूल से बचाने के लिए IP65 और IP67 रेटिंग दी गई है. फीचर्स  फीचर्स के मामले में यामाहा ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. इसमें 24.5 लीटर का बड़ा अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है, जहाँ आप अपना सामान आसानी से रख सकते हैं. सुरक्षा के लिए इसमें आगे और पीछे 200mm के डिस्क ब्रेक दिए गए हैं, जो ‘कॉम्बी ब्रेक सिस्टम’ (CBS) के साथ आते हैं. साथ ही, इसमें LED हेडलाइट्स और एक रंगीन LCD डिस्प्ले भी मिलता है जो राइडर को जरूरी जानकारी देता है. कनेक्टिविटी के शौकीनों के लिए इस स्कूटर को “Yamaha Motor Connect R” ऐप के जरिए स्मार्टफोन से जोड़ा जा सकता है. इससे राइडर रियल-टाइम डेटा और अन्य स्मार्ट फीचर्स का लाभ उठा सकते हैं. चार्जिंग की बात करें तो इसे घर पर नॉर्मल प्लग से चार्ज किया जा सकता है, जिसमें फुल चार्ज होने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है. कंपनी बैटरी पर 3 साल या 30,000 किमी की वारंटी भी दे रही है. 

सीएम यादव का ऐतिहासिक निर्णय, सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार’ कक्ष की अनिवार्यता, 13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे

इंदौर   सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। यह पहल ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ के तहत ‘गर्भ संस्कार’ को बढ़ावा देगी। इसका मकसद बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को मजबूत बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताए फायदे सीएम यादव ने इंदौर में ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ कार्यक्रम में कहा कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जो आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि यह आधुनिक विज्ञान और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का एक मेल है। इसे राष्ट्र निर्माण में एक लंबे समय का निवेश माना जाना चाहिए। अस्पतालों में बनेंगे अलग कमरे मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य के सरकारी अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार के लिए विशेष कमरे बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि एलोपैथी के डॉक्टर भी अब व्यापक प्रसव पूर्व देखभाल के फायदों को स्वीकार कर रहे हैं। 13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए, यादव ने कहा कि राज्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा दे रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जाएंगे। यह आजादी के बाद पहली बार है जब इतने सारे आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जा रहे हैं। इनमें से आठ कॉलेज एक साल के भीतर चालू हो जाएंगे। अभिमन्यु और अष्टावक्र का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने गर्भ संस्कार की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में अभिमन्यु और अष्टावक्र जैसे उदाहरण हैं। इनसे पता चलता है कि गर्भ में ही मूल्यों, सीखने और संस्कारों को ग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण की प्रभावशीलता को दिखाया है, जहां आयुर्वेद और एलोपैथी एक दूसरे के पूरक थे। उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण जीवन शैली, भारतीय रसोई और स्वदेशी आहार के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

केंद्र में शिवराज सिंह चौहान की सफलता, मध्यप्रदेश के लिए घोषित हुआ सबसे बड़ा बजट

भोपाल   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 9वां बजट पेश किया। इस बजट में कई राज्यों को बड़ी सौगातें दी गई हैं। इसमें के टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मध्यप्रदेश के 10 शहरों को फायदा मिल सकता है। वहीं, मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल प्रदेश के 6 मंत्रियों में सबसे अधिक बजट शिवराज सिंह चौहान के विभाग को मिला है। केंद्र में शिवराज का जलवा कायम मध्यप्रदेश कोटे से मोदी सरकार की कैबिनेट में 6 मंत्री शामिल हैं। जिसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, डीडी उइके, वीरेंद्र कुमार खटीक और सावित्री ठाकुर लोकसभा सदस्य हैं। वहीं, एल मुरुगन एमपी से राज्यसभा के सदस्य हैं। सभी मंत्रियों के विभाग की तुलना करें तो उसमें शिवराज के कृषि और ग्रामीण को सबसे ज्यादा बजट मिला है। शिवराज के दो विभागों को इतना बजट केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं किसान कल्याण के लिए 130561.38 करोड़ और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग को 9967.40 करोड़। यानी कुल मिलाकर देखें तो कृषि विभाग 140528.78 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट 197023.14 करोड़ है। जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को 194368.81 करोड़ और भूमि संसाधन विभाग को 2654.33 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। सिंधिया के विभाग पर मेहरबान हुई केंद्र सरकार केंद्रीय संचार और नार्थ ईस्ट मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के डाक और संचार विभाग को 102267.02 करोड़ रूपये दिए गए हैं। जिसमें डाक विभाग को 130561.38 करोड़ और दूरसंचार विभाग को 73990.94 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, पूर्वोतर क्षेत्र विकास मंत्रालय को 6812.30 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। वीरेंद्र कुमार खटीक के विभाग को मिला इतना बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक के विभागों को कुल 15357.31 करोड़ दिए गए हैं। जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को 13687.59 करोड़ रूपये मिले और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को 1669.72 करोड़ की राशि दी गई है। यह भी पीछे नहीं एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के विभाग को कुल 4551.94 करोड़ का बजट मिला। जनजातीय कार्य मंत्रालय डीडी उइके को कुल 15421.97 करोड़ का बजट मिला। वहीं, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर को 28183.06 करोड़ का बजट मिला है।

बांग्लादेश चुनाव में भारत की सक्रिय भागीदारी, मोहम्मद यूनुस ने भेजा निमंत्रण, सरकार भेजेगी ऑब्जर्वर

ढाका   बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अब कुछ दिन ही बचे हैं. यह चुनाव शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद हो रहे हैं. हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त को उन्हें देश छोड़कर निकलना पड़ा था. इसके बाद से, बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चल रही है, जिसके मुखिया मोहम्मद यूनुस हैं. इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. हालांकि, इन चुनावों में पारदर्शिता एक बड़ा सवाल है. दुनिया को दिखाने के लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, पर्यवेक्षकों को बुला रही है. इसी के मद्देनजर भारत को भी आमंत्रित किया गया है.  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने रविवार को इस बाबत बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘आगामी चुनावों के लिए 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है. जिन देशों ने अब तक अपने प्रतिनिधियों की पुष्टि नहीं की है, उनमें भारत, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया शामिल हैं.’ बयान में आगे कहा गया, ‘इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) सहित छह अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव और जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह के लिए कम से कम 63 पर्यवेक्षक तैनात करने पर सहमति जताई है. ये पर्यवेक्षक यूरोपीय संघ, 16 देशों और विभिन्न वैश्विक संस्थाओं से जुड़े 32 व्यक्तियों के मिशनों के साथ जुड़ेंगे. इस प्रकार दोहरे मतदान के लिए अब तक कुल 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है.’ बयान में यह भी कहा गया कि आगामी चुनावों के लिए पुष्टि किए गए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या, 7 जनवरी 2024 को हुए विवादित आम चुनाव की तुलना में दोगुनी से अधिक है. 12वें, 11वें और 10वें आम चुनावों में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या क्रमशः 158, 125 और केवल चार थी. OIC के चुनाव पर्यवेक्षण इकाई के प्रमुख शाकिर महमूद बंदर दो सदस्यीय OIC पर्यवेक्षक मिशन का नेतृत्व करेंगे.” कई पर्यवेक्षक अमेरिका और यूरोप से हैं. विदेश मंत्रालय और चुनाव आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर मोहम्मद यूनुस ने कहा, ‘इसके अलावा, 28 पर्यवेक्षक एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस (ANFREL) से, 25 कॉमनवेल्थ सचिवालय से, सात अमेरिका स्थित इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) से और एक नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट (NDI) से आएंगे. इसके अतिरिक्त, वॉइस फॉर जस्टिस, डेमोक्रेसी इंटरनेशनल, SNAS अफ्रीका, सार्क ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन और पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 32 पर्यवेक्षक व्यक्तिगत क्षमता में चुनाव की निगरानी करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि कई आमंत्रित देशों ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडलों के नामों की पुष्टि नहीं की है.’ इन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की यात्रा के समन्वय की देखरेख वरिष्ठ सचिव और एसडीजी समन्वयक लामिया मुर्शेद कर रहे हैं. कितनी पार्टियां, उम्मीदवार लड़ रहे चुनाव दक्षिण एशिया के चुनाव प्रबंधन निकायों के मंच (FEMBoSA) द्वारा भी जल्द ही अपने प्रतिनिधियों के नाम घोषित किए जाने की उम्मीद है. बांग्लादेश में लगभग 2,000 उम्मीदवार 300 संसदीय सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. बांग्लादेश के इस चुनाव में 50 से अधिक राजनीतिक दल और निर्दलीय प्रत्याशी उतर रहे हैं. इस आम चुनाव के दौरान जुलाई नेशनल चार्टर पर भी जनमत संग्रह भी होगा. यह मोहम्मद यूनुस द्वारा पेश किए गए सुधारों की मांग है. अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना चाहिए.

U19 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल: भारत का मुकाबला किस से होगा, जानिए सही डेट और टाइम

 नई दिल्ली U19 World Cup Semi Final Schedule: पाकिस्तान को धूल चटाकर भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और इंग्लैंड के साथ अपनी जगह बना ली है। इस टूर्नामेंट में भारत के अलावा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीम भी अजेय रहीं है, उन्हें भी अभी तक एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा है। वहीं अफगानिस्तान को सुपर-6 में एकमात्र हार का सामना श्रीलंका के हाथों करना पड़ा था। अंडर-19 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल के मैच काफी रोमांचक होने वाले हैं। आईए एक नजर शेड्यूल समेत मुकाबलों से जुड़ी तमाम अहम जानकारियों पर डालते हैं- आईसीसी U19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाली टीमें भारत इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया अफगानिस्तान ICC U19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल कब? आईसीसी U19 वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल 3 फरवरी को तो दूसरा 4 फरवरी को खेला जाएगा। दोनों नॉकआउट मुकाबले क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, बुलावेयो में होंगे। U19 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल शेड्यूल- पहला सेमीफाइनल 3 फरवरी– ऑस्ट्रेलिया वर्सेस इंग्लैंड, क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, बुलावेयो में दोपहर 1 बजे से दूसरा सेमीफाइनल 4 फरवरी- भारत बनाम अफगानिस्तान, क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, बुलावेयो में दोपहर 1 बजे से ICC U19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों के स्क्वॉड भारतीय टीम: आयुष म्हात्रे (कप्तान), आर.एस. अंबरीश, कनिष्क चौहान, डी. दीपेश, मोहम्मद एनान, एरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलान ए. पटेल, हरवंश सिंह, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी ऑस्ट्रेलिया टीम: ओलिवर पीक (कप्तान), केसी बार्टन, नाडेन कूरे, जेडन ड्रेपर, बेन गॉर्डन, स्टीवन होगन, थॉमस होगन, जॉन जेम्स, चार्ल्स लैचमुंड, विल मलाजजुक, नितेश सैमुअल, हेडन शिलर, आर्यन शर्मा, विलियम बायरोम, एलेक्स ली यंग इंग्लैंड टीम: थॉमस रीव (कप्तान), फरहान अहमद, राल्फी अल्बर्ट, विल बेनिसन, बेन डॉकिन्स, कालेब फाल्कनर, अली फारूक, एलेक्स फ्रेंच, एलेक्स ग्रीन, ल्यूक हैंड्स, मैनी लम्सडेन, बेन मेयस, जेम्स मिंटो, जो मूरेस, सेबेस्टियन मॉर्गन अफगानिस्तान टीम:महबूब खान (कप्तान), खालिद अहमदजई, उस्मान सादात, फैसल खान, उजैरुल्लाह नियाजई, अजीज मिया खिल, नाजीफ अमीरी, खातिर स्टानिकजई, नूरिस्तानी, अब्दुल अजीज, सलाम खान, वाहिद जादरान, जैतुल्लाह शाहीन, रोहुल्लाह अरब, अकील खान ओबैद। रिजर्व: अकील खान, फहीम कासेमी, इज्जत नूर U19 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल लाइव स्ट्रीमिंग और लाइव टेलिकास्ट डिटेल अंडर-19 वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया वर्सेस इंग्लैंड और इंडिया वर्सेस अफगानिस्तान सेमीफाइनल मुकाबलों का लुत्फ आप ऑनलाइन जियोहॉटस्टार पर उठा सकते हैं, वहीं टीवी पर इन नॉक आउट मुकाबलों का लाइव प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स पर होगा।

‘क्यों चुप है केंद्र सरकार?’ Epstien Files को लेकर दीपक बैज ने PM मोदी पर साधा निशाना

रायपुर जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी 2017 की इजरायल यात्रा के दावों पर पीसीसी चीफ दीपक बैज का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स मामले में केंद्र सरकार चुप क्यों हैं? सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए. हालांकि इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि इजरायल दौरे के अलावा कही गई बातें एक दोषी की बकवास और निरधार कल्पनाएं है. इसे पूरी तरह तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए. गरियाबंद हिंसा मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा है. गरियाबंद के फिंगेश्वर में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कहा कि सरकार कहां है, कौन इसका जिम्मेदार है. लॉ एंड ऑर्डर कहां है, सरकार ने आग में झोंक दिया है. समय पर रोक कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती. बैज ने लॉ एंड ऑर्डर खराब होने के चलते घटना घटी की बात कहते हुए न्यायिक जांच की मांग की है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तीन नाकामियों को लेकर पीसी कर रहे हैं. धान खरीदी को लेकर किसान परेशान हैं. उन्होंने बताया कि सरकार का घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था. पिछले साल से 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन धान कम खरीदा गया. कई किसानों का पंजीयन हुआ, लेकिन टोकन नहीं दिया गया है. सरकार का रवैया किसानों के प्रति सही नहीं है. बैज ने आरोप लगाया कि किसानों के खिलाफ सरकार लगातार षड्यंत्र कर रही है. 29 जिलों में धान की खरीदी कम हुई है. दीपक बैज ने कहा कि कम धान खरीदी पर सरकार ने जश्न भी मनाया. सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों से माफी मांगे. धान खरीदी की तारीख की मांग को दोहराते हुए कहा कि किसानों के लिए कांग्रेस ने सड़को पर उतरकर प्रदर्शन किया, बचे हुए किसानों का टोकन काटने की मांग की. लेकिन गूंगी बहरी सरकार आंख बंद कर चुप रही. किसान परेशान और चिंतित है. बैज ने कहा कि यह हटधर्मिता और किसान विरोधी सरकार है. सरकार का इतना जिद्द ठीक नहीं है. सरकार को एक सर्कुलेशन जारी कर बचे हुए किसानों का धान खरीदना चाहिए. धान खरीदी में सरकार फेल है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ को इस बार के बजट में भी ठगा गया. माइनिंग का विशेष कॉरिडोर बनाने का निर्णय हुआ. चहेते उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है. बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा की गई है.

कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: मुख्यमंत्री प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य करें; मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, उपकार और निजी उद्योग को एक मंच पर लाने का निर्देश, बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म रिलीज़ प्रक्रिया तेज हो कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास से जोड़ने और हर क्लाइमेटिक ज़ोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के निर्देश प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण तेज़ हो, प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के मुख्यमंत्री के निर्देश अगले पाँच वर्षों में पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की योजना, टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक ‘बीज नीति’ समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति कोई भी ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुँचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह मानक होना चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता बताई। फसल विविधीकरण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार करने को कहा। इसी क्रम में प्रदेश में अगले पांच वर्षों में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय बन सके। मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।

लोकसभा में चीन को लेकर सियासी संग्राम, राहुल गांधी के आरोपों पर रक्षा मंत्री का पलटवार

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानपर लोकसभा में हंगामा मच गया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के नाम पर दावा करते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास हैं। इसके लिए उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देने की बात कही, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें चैलेंज कर दिया। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी और कहा कि आप बताएं कि आखिर यह पुस्तक प्रकाशित हुई भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी पुस्तक के आधार पर यहां बात नहीं की जा सकती, जो प्रकाशित ही नहीं हुई है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि यह पुस्तक पब्लिश हुई थी या नहीं। अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।   राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह मनोज नरवणे की पुस्तक के आधार पर यह बात कह रहे हैं। इस पर डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि वह पुस्तक को प्रस्तुत कर दें। यदि कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है तो फिर उसके आधार पर ऐसे दावे कैसे किए जा सकते हैं। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का हवाला दिया है, जो प्रकाशित ही नहीं हुए हैं। इस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की स्पीच का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी इस सदन से बाहर के संदर्भों की बात की थी। इस पर होम मिनिस्टर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने किसी मीडिया रिपोर्ट या फिर विषय से हटकर किसी पुस्तक का जिक्र नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी स्पीच में 2004 से 2014 तक राष्ट्रपति के अभिभाषणों पर बात की थी। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जो आपत्तिजनक था। राजनाथ सिंह और अमित शाह के ऐतराज के बाद भी राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ये लोग तो आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि यह सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती। अखिलेश यादव ने भी दिया दखल- बोलने देने से परेशानी क्या है? राहुल गांधी की स्पीच को लेकर बवाल बढ़ा तो अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि चीन का मसला संवेदनशील है और उससे सावधान रहने की जरूरत है। डॉ. लोहिया भी ऐसा कहते थे और मुलायम सिंह यादव भी उसे लेकर चिंतित थे। ऐसे में नेता विपक्ष यदि चीन को लेकर कुछ कहना चाहते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक लगी है तो फिर उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। ऐसा करना गलत है और सदन की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी बार-बार इसी मसले पर बोलना चाहते थे, लेकिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राजनाथ सिंह ने कई बार खड़े होकर ऐसी पुस्तक के जिक्र पर आपत्ति जताई, जो प्रकाशित ही नहीं हुई। मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, राहुल गांधी को स्पीकर की नसीहत अंत में बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

जबलपुर में रैकेट का खुलासा: उज़्बेकिस्तान की महिला और उसके पति को हिरासत में लिया, मुख्य आरोपी फरार

जबलपुर  शहर में एक घर में पुलिस ने दबिश दी. यहां उज़्बेकिस्तान की एक महिला मिली. उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था. पुलिस की दबिश के दौरान मुख्य आरोपी फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी को हिरासत में लिया है. पुलिस जांच में जुटी है. जांच में पता चला कि उज्बेकिस्तान की इस महिला की शादी मुंबई में हुई थी. वह दिल्ली में ब्यूटी पार्लर की एक लड़की के माध्यम से जबलपुर पहुंची. जबलपुर में इसके पहले भी विदेशी महिलाओं से देह व्यापार करवाने के मामले सामने आ चुके हैं. मुखबिर ने 11 महिलाओं की दी सूचना महिला अपराध शाखा की नगर पुलिस अधीक्षक आशीष जैन ने बताया “जबलपुर के माढोताल थाने में पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि शिव चौधरी नाम का व्यक्ति देह व्यापार का अड्डा चला रहा है और इस बार उसने विदेशी महिलाओं को बुलाया है. जबलपुर में 11 महिलाओं की पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने जब शिव चौधरी के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां उज़्बेकिस्तान की रहने वाली महिला मिली.” मुख्य आरोपी की पत्नी हिरासत में देह व्यापार चलाने का आरोपी शिव चौधरी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी और विदेशी महिला को हिरासत में ले लिया. सीएसपी आशीष जैन ने बताया “उज़्बेकिस्तान की महिला ने पूछताछ में जानकारी दी है कि 2011 में उसकी शादी मुंबई में हुई थी. 2023 में उसके पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद से ही वह दिल्ली में एक पार्लर में काम करती थी.” स्पा सेंटर के नाम पर देह व्यापार उज्बेकिस्तान की महिला ने पुलिस को बताया “दिल्ली में एक लड़की ने शिव चौधरी से मेरी मुलाकात करवाई थी और उसी के माध्यम से मैं जबलपुर आई.” सीएसपी आशीष जैन का कहना “उज़्बेकिस्तान की महिला पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इसकी जांच की जा रही है.” जबलपुर में इसकी पहले भी विजयनगर में इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां कुछ विदेशी महिलाएं मिली थीं. जबलपुर में देह व्यापार कराने वाले लोग इन महिलाओं को रहने की जगह उपलब्ध करवाते हैं. मोबाइल पर ग्राहकों को फोटो और नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं. स्पा सेंटर की आड़ में भी कई जगहों पर इसी तरह के गलत काम चल रहे हैं. 

MP को केंद्रीय बजट में 7500 करोड़ का झटका, सिंहस्थ पैकेज की उम्मीदें टूटीं, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू ‘महिला अमृत मित्र’ की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 ‘महिला अमृत मित्र’ को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है।

छत्तीसगढ़ में मतांतरण विरोधी विधेयक पर कानूनी संकट, बजट सत्र में पास होने की संभावना कमजोर

रायपुर  विष्णु देव साय सरकार के कड़े मतांतरण विरोधी कानून लाने के संकल्प पर फिलहाल कानूनी अड़चनों के बादल मंडरा रहे हैं। शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की घोषणा के बाद अब 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में भी इसके पेश होने की उम्मीद कम नजर आ रही है। मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने विधेयक की राह कठिन कर दी है। दरअसल, देश के विभिन्न राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और राजस्थान को नोटिस जारी करके जवाब दाखिल करने कहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी तक टाल दी है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार चूंकि मूल कानून की वैधता पर ही सवालिया निशान है, इसलिए राज्य सरकार नए संशोधन विधेयक को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। प्रस्तावित कानून: 10 साल की सजा का प्रविधान सूत्रों के अनुसार साय सरकार जिस नए विधेयक पर काम कर रही है, वह ”छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968” का स्थान लेगा। इसमें सजा के कड़े प्रावधान शामिल हैं। प्रलोभन या जबरन मतांतरण पर 10 साल तक की कैद, मतांतरण से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होना, वर्तमान में मात्र 5,000 रुपये जुर्माने का प्रविधान है, जिसे कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। राज्य सरकार का कहाना है कि जबरन मतांतरण और प्रलोभन की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा में बढ़े मामले एक अनुमान के मुताबिक राज्य में पिछले दो वर्षों में मतांतरण से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों (बस्तर और सरगुजा) में भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि मंत्रिमंडलीय उप-समिति इस पर काम कर रही है, लेकिन उन्होंने विधेयक पेश करने की निश्चित तिथि पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालिया घटनाएं: राज्य में तनाव की स्थिति     केस 01: राजनांदगांव में प्रार्थना सभा पर हंगामा एक फरवरी 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में एक घर के भीतर चल रही ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि वहां मतांतरण कराया जा रहा है। पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हुआ।     केस 02: सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार 29 जनवरी 2026 को सरगुजा पुलिस ने चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराने के आरोप में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया। उनके निवास पर 50-60 लोग मौजूद थे, जहां कथित तौर पर मतांतरण की प्रक्रिया चल रही थी।     केस 03: कांकेर में प्रलोभन का आरोप पांच जनवरी 2026 को कांकेर में एक प्रार्थना सभा को लेकर ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा था कि आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों का मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था।  

Chhattisgarh Board Exam 2026: 20 फरवरी से परीक्षा का आगाज, शिक्षकों पर ‘एस्मा’ के तहत कार्रवाई

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाओं के सुचारु संचालन को लेकर राज्य सरकार ने शिक्षकों और परीक्षा कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया है। एस्मा के तहत 15 फरवरी से 30 अप्रैल तक शिक्षक और कर्मचारी किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं ले सकेंगे। इस दौरान हड़ताल, धरना या किसी भी तरह के आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी शिक्षकों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही उनकी ई-पुस्तिका अपडेट की जाएगी। 2,514 परीक्षा केंद्र, कंट्रोल रूम से निगरानी प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाओं के लिए कुल 2,514 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा संचालन की निगरानी के लिए मंडल स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस वर्ष लगभग सात लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। ड्यूटी से इन्कार पर होगी कार्रवाई गृह विभाग के निर्देशानुसार परीक्षा अवधि में न तो छुट्टियां स्वीकृत होंगी और न ही सामूहिक अवकाश लिया जा सकेगा। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी से इन्कार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़े कार्यों को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा है। क्या है एस्मा? निवारण अधिनियम, 1979 के तहत एस्मा लागू होने पर अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी कार्य से इन्कार नहीं कर सकते। अधिनियम की धारा 4 (1) के अनुसार कोई भी कर्मचारी पूर्ण या आंशिक हड़ताल, कार्य बहिष्कार या किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है, जिसमें कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है।  

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