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आम जनता के लिए राहत: विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, मुकदमेबाजी कम करने का योगी सरकार का फैसला

लखनऊ यूपी में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवाद लंबे समय से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं. कई मामलों में यह सामने आता रहा है कि किसी जमीन की रजिस्ट्री ऐसा व्यक्ति अपने नाम से कर देता है जो उसका वास्तविक मालिक ही नहीं होता. कभी प्रतिबंधित जमीन की बिक्री हो जाती है, तो कहीं सरकारी या कुर्क संपत्ति भी रजिस्ट्री के जरिए दूसरे के नाम दर्ज हो जाती है. ऐसे मामलों का नतीजा अक्सर वर्षों तक चलने वाले कोर्ट केस और आर्थिक-मानसिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से जुड़ा अहम प्रस्ताव मंजूर किया गया है. सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी। रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की सख्त जांच नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच अनिवार्य होगी. विशेष रूप से खतौनी, स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है, वही उसका वास्तविक मालिक हो और संपत्ति पर किसी तरह का कानूनी विवाद या प्रतिबंध न हो. राज्य सरकार का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच कर ली जाए तो बाद में पैदा होने वाले कई विवादों को रोका जा सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला राज्य के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल ने बताया कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का वास्तविक मालिक कोई और होता है लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो जाती है. कई बार ऐसा भी होता है कि प्रतिबंधित या विवादित जमीन को भी बेच दिया जाता है. कुछ मामलों में तो कुर्क की गई संपत्ति या सरकारी जमीन का भी विक्रय विलेख तैयार कराकर उसका पंजीकरण करा लिया जाता है. ऐसे मामलों का पता तब चलता है जब बाद में कोई पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाता है. तब तक जमीन की खरीद-फरोख्त कई हाथों में जा चुकी होती है और विवाद और जटिल हो जाता है. सीमित अधिकार के कारण हो जाती थी रजिस्ट्री वर्तमान में जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत संचालित होती है. इस कानून के अनुसार उप-निबंधक के पास किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के अधिकार बहुत सीमित हैं. कानून की धारा 35 के तहत उप-निबंधक केवल कुछ परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोक सकता है. यही वजह है कि कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है और बाद में विवाद खड़ा हो जाता है. सरकार का कहना है कि इसी खामी को दूर करने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कानून में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन के तहत रजिस्ट्रेशन अधिनियम में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. इनमें प्रमुख रूप से धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी. धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा. धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी. धारा 35-A के अंतर्गत यदि रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, कब्जा या हस्तांतरण से जुड़े आवश्यक कागजात संलग्न नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी को रजिस्ट्री से इनकार करने का अधिकार होगा. सरकार इन दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। विवादित जमीन की बिक्री पर लगेगी रोक सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से कई तरह की समस्याओं पर रोक लग सकेगी. उदाहरण के तौर पर- प्रतिबंधित जमीन की बिक्री, सरकारी भूमि की रजिस्ट्री, कुर्क संपत्ति का विक्रय, वास्तविक स्वामी के अलावा किसी और द्वारा जमीन बेच देना जैसे मामलों को शुरुआत में ही रोका जा सकेगा. इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत राज्य सरकार का कहना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा. अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं. बाद में यदि पता चलता है कि संपत्ति विवादित है या किसी और की है, तो उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों की संभावना काफी कम हो सकती है। अन्य राज्यों में भी लागू हैं ऐसे प्रावधान सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश के कई राज्यों में इसी तरह के प्रावधान पहले से लागू हैं, जहां संदिग्ध या विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है. उत्तर प्रदेश में भी अब इसी दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है. इसका मतलब यह है कि जमीन और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, बशर्ते वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। आगे क्या होगा कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक को राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा. विधानमंडल से स्वीकृति मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा और फिर पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य हो जाती है, तो इससे संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित हो जाएगी. इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी बल्कि जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

मेडिकल पीजी की 780 सीटें खाली, डॉक्टरों का सवाल—1.3 करोड़ फीस कौन देगा?

कर्नाटक नीट पीजी की कटऑफ माइनस 40 तक गिरने के बावजूद कर्नाटक में मेडिकल पीजी की 780 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) ने 7 मार्च को नीट पीजी काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली थी जिसके बाद प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में 4,773 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों में से 783 (16 फीसदी) सीटें खाली रह गईं। इस साल लगभग 14400 छात्रों ने काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया और लगभग 10000 छात्रों ने केईए (KEA) पोर्टल के जरिए मेडिकल पीजी सीटों के लिए वेब ऑप्शन चुने। विशेषज्ञों ने सीटों के खाली रहने के लिए एक ही साल में 967 सीटों का बढ़ना और काउंसलिंग के लंबे राउंड्स को मुख्य वजह बताया है। 1.3 करोड़ रुपये तक फीस ज्यादातर सीटें जो खाली रह गई हैं, वे मैनेजमेंट कोटे के तहत आती हैं; इन सीटों की फीस प्राइवेट कॉलेजों में एनाटॉमी की सीट के लिए 25,000 रुपये से लेकर डर्मेटोलॉजी की सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये तक है। हैरानी की बात यह है कि पॉपुलर स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। उदाहरण के लिए, जनरल मेडिसिन में कुल 500 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 37 अभी भी खाली हैं। एमडी रेडियोडायग्नोसिस में 287 सीटों में से 35 सीटें खाली हैं। जनरल सर्जरी में 425 सीटों में से 11 सीटें खाली रह गई हैं, जबकि डर्मेटोलॉजी में 196 सीटों में से 15 और पीडियाट्रिक्स में 362 सीटों में से 25 सीटें खाली हैं। इतनी अधिक सीटें खाली रहने के मामले पर सोशल मीडिया पर भी चर्चा छिड़ गई है। डॉक्टर और उम्मीदवार दोनों ही अपनी राय साझा कर रहे हैं। डर्मेटोलॉजी की बढ़ी हुई फीस को देखते हुए एक न्यूरोलॉजिस्ट ने लिखा, ‘एमडी डर्मेटोलॉजी की एक सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये? कोई हैरानी की बात नहीं कि इसे लेने वाला कोई नहीं मिला। मेडिकल शिक्षा की लागत कम होनी चाहिए। इसका असर मेडिकल इलाज की लागत कम होने पर भी पड़ सकता है।’ इसके अलावा प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल सीटों पर बहुत कम छात्रों ने दाखिला लिया। डेटा से पता चलता है कि कुल 119 सीटों में से, केवल आठ छात्रों ने एनाटॉमी की सीटें लीं। कोर्स , कुल सीटें , खाली सीटें एनाटॉमी 119 111 फिजियोलॉजी 117 97 बायोकेमिस्ट्री 113 92 फार्माकोलॉजी 123 53 पैथोलॉजी 265 39 माइक्रोबायोलॉजी 130 99 कम्युनिटी मेडिसिन 143 63 फोरेंसिक मेडिसिन 77 47 डर्मेटोलॉजी 196 15 पीडियाट्रिक्स 362 25 जनरल मेडिसिन 500 37 रेडियो डायग्नोसिस 287 35 रेस्पिरेटरी मेडिसिन 87 4 इमरजेंसी मेडिसिन 74 1 ऑर्थोपेडिक्स 358 28 एनेस्थीसिया 443 3 जनरल सर्जरी 425 11 ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी 362 18 डिप्लोमा इन क्लिनिकल पैथोलॉजी 2 2 डिप्लोमा इन पब्लिक हेल्थ 3 3 कुल 4,186 783 इस साल क्यों हालात अलग रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना से पता चलता है कि 2024–25 में, केईए काउंसलिंग के जरिए कुल 3,806 मेडिकल PG सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 3,378 सीटें अलॉट कर दी गईं, जबकि 428 सीटें खाली रह गईं। ये सभी सीटें प्री- और पैरा-क्लिनिकल प्रोग्राम की थीं। इसी तरह साल 2023 में प्री- और पैरा-क्लिनिकल स्ट्रीम में 478 सीटें अलॉट नहीं हो पाई थीं। यह स्थिति इस साल से काफी अलग है क्योंकि इस साल तो सबसे ज्यादा मांग वाली स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए द ऑक्सफोर्ड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन SNVL नरसिम्हा राजू ने कहा, ‘MBBS और MD के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों की सोच अलग होती है। MBBS में, किसी भी स्टेज पर सीटें जोड़ी जाएं, वे भर जाती हैं। लेकिन PG में ऐसा नहीं होता। हमने जो देखा है, उसके मुताबिक काउंसलिंग के बीच में जोड़ी गई सीटों के लिए ज्यादा दावेदार नहीं मिलते। PG छात्रों ने अपने करियर का रास्ता पहले से ही तय कर लिया होता है।’ सीटें खाली क्यों रही उन्होंने आगे कहा, ‘कोर्ट केस और दूसरी देरी की वजह से काउंसलिंग में बहुत ज्यादा समय लगता है। एक काउंसलिंग और अगले साल की परीक्षा के बीच बहुत कम समय बचता है। इसलिए छात्र इस साल ज्यादा फीस वाली कैटेगरी की सीट लेने के बजाय अगले साल की परीक्षा की बेहतर तैयारी करने का फैसला करते हैं। इस वजह से कई संस्थानों में NRI/मैनेजमेंट कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं।’

निगम कमिश्नर फंसीं 2 घंटे, पार्षद के बेटे की शादी का होर्डिंग हटाने पर स्थानीय नेताओं का हंगामा

झांसी यूपी के झांसी में पार्षद के बेटे की शादी की होर्डिंग हटाने का मामला देर शाम उस समय गरमा गया जब पार्षदों ने हंगामा करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने नगर निगम ऑफिस गेट पर कब्जा कर अधिकारियों व कर्मचारियों को अंदर जाने व बाहर आने से रोक दिया। इसके चलते नगर आयुक्त भी ऑफिस में लगभग दो घंटे तक फंसी रहीं, बाद में पुलिस की मदद से उन्हें सुरक्षा घेरे में निकाला गया. पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का समाधान न हुआ तो कल से अधिकारियों को फिर ऑफिस अरेस्ट किया जाएगा। झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र के बीकेडी चौराहे के पास एक पार्षद के बेटे की शादी की होडिंग अवैध रूप से लगी थी. जिसको नगर निगम ने 9 मार्च को हटवा दिया. जब इसकी जानकारी पार्षदों को हुई तो वह आक्रोशित हो गए। गेट पर कब्जा और नगर आयुक्त को घेरा भाजपा व अन्य दलों के दो दर्जन से ज्यादा पार्षद दोपहर 4 बजे नगर निगम गेट पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान उन्होंने किसी को गेट के अंदर-बाहर नहीं जाने दिया। पार्षदों ने छीनी गाड़ी की चाबी ऑफिस पहुंचे सहायक नगर आयुक्त गौरव कुमार को पार्षदों ने वापस लौटा दिया और उनकी सरकारी गाड़ी की चाबी निकाल ली. अपने चेम्बर में मौजूद नगर आयुक्त आकांक्षा राणा भी वहीं फंस गईं। पुलिस ने सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला शाम 6 बजे के बाद भी ब पार्षद हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस बुलाई गयी और पुलिस की मदद से नगर आयुक्त को ऑफिस से कड़ी सुरक्षा के बीच बाहर निकाला गया। प्रस्तावों पर काम न होने से नाराज हैं पार्षद भाजपा पार्षद दिनेश प्रताप बुंदेला ने आरोप लगाया कि पार्षदों के प्रस्तावों पर काम न होने से जनता में उनकी छबि खराब हो रही है. नगर आयुक्त मनमानी कर रहीं हैं. वहीं जब नगर निगम आयुक्त आकांक्षा राणा से बात की तो उन्होंने कहा सभी काम कराये जा रहे हैं, अगर कोई समस्या है तो आएं और बात करें।

तारिक रहमान की पहल: भारत के साथ बेहतर रिश्तों के लिए बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ को दिल्ली भेजा

नई दिल्ली बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद से किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनियुक्त DGFI महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को एक निजी रात्रिभोज के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। भारत की प्राथमिकता नई सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए तारिक रहमान सरकार अब भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई थी। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। इन्हें शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात बनगांव से पकड़ा गया। बांग्लादेश सरकार ने गिरफ्तार व्यक्तियों तक ‘काउंसुलर एक्सेस’ मांगी है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी। उन्होंने कहा, “हमने कोलकाता स्थित अपने मिशन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंच मांगी है। चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए हम आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास करेंगे। हमें इस मामले में भारत से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।” सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी के हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।

छत्तीसगढ़ बना पीएम मातृत्व वंदना योजना में अव्वल, अन्य राज्यों के लिए मिसाल

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल बड़े राज्यों को पछाड़कर बना नंबर-वन, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दी बधाई रायपुर महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) के क्रियान्वयन की फरवरी 2026 की स्टेट-वाइज राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने बड़े राज्यों की श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। राज्य ने अन्य बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। जारी रैंकिंग के अनुसार छत्तीसगढ़ ने 93.37 प्रतिशत नामांकन, 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर और 93.95 प्रतिशत शिकायतों के त्वरित समाधान के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं 30 दिनों से अधिक लंबित प्रकरणों की दर मात्र 7.07 प्रतिशत और लंबित शिकायत दर 4.96 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ ने पिछले माह की तुलना में 6 स्थानों की छलांग लगाकर पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है और छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। महिला एवं बाल विकास  मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए विभागीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही छत्तीसगढ़ आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों-कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आपसी समन्वय, प्रतिबद्धता और समयबद्ध कार्यशैली के परिणामस्वरूप ही राज्य यह मुकाम हासिल कर पाया है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग भविष्य में भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करते हुए इस प्रथम स्थान को बनाए रखेगा तथा प्रदेश की प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक योजना का लाभ समय पर पहुंचाएगा। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्रदेश में 1,86,586 गर्भवती महिलाओं का प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पंजीकरण किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा अब तक 72 करोड़ 24 लाख 89 हजार रुपये की राशि सीधे पात्र हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिली है और छत्तीसगढ़ देश के सामने एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

मध्य प्रदेश में गैस की कमी, कमर्शियल सिलेंडर सीमित, 15 लाख लोगों पर असर

भोपाल  ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी सैन्य कार्रवाई से पेट्रोलियम की सप्लाई प्रभावित हो रही है। केंद्र के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार सतर्क हो गई है। प्रदेश के डीलर्स के पास कमर्शियल सिलेंडर का करीब दो दिन का ही स्टॉक बचा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी से प्रदेश के करीब 15 लाख व्यावसायिक उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कमर्शियल संस्थानों के साथ बैठक कर गैस का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।  घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त स्टॉक सरकार के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी गैस की आपूर्ति फिलहाल सामान्य रूप से जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। प्रदेश में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 90 लाख के आसपास है, जिनमें से करीब 92 प्रतिशत उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं। वहीं, बाकी आठ प्रतिशत यानी करीब 15 लाख कमर्शियल उपभोक्ता हैं।  उद्योग हो सकते हैं प्रभावित  कमर्शियल उपयोग की बात करें तो प्रदेश में एलपीजी का केवल 5 से 7 प्रतिशत उपयोग कमर्शियल क्षेत्र में होता है। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए करीब दो से तीन दिन का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, ऑयल कंपनियों के पास औसतन 6 से 7 दिन का स्टॉक रहता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल होटल, रेस्टारेंट और उद्योगों को दूसरे विकल्पों का उपयोग करने के लिए कहा गया है। इसमें सबसे अधिक उद्योगों के प्रभावित होने की बात सामने आर ही है।  शादी-समारोहों पर असर पड़ना तय  कमर्शियल गैस की सीमित उपलब्धता का असर होटल व्यवसाय और शादी-समारोहों की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। वहीं घरेलू गैस सिलेंडरों को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। पहले जहां उपभोक्ता 21 दिन के अंतराल में सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब बुकिंग के लिए 25 दिन का अंतराल तय किया गया है। इसके साथ ही एक उपभोक्ता को एक महीने में एक से अधिक सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।   कलेक्टरों को दिए गए निर्देश सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक संस्थानों के साथ बैठक कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएं और गैस का विवेकपूर्ण व सीमित उपयोग सुनिश्चित कराएं। आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रिसिटी सहित अन्य वैकल्पिक साधनों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने को कहा गया है। वहीं, अस्पताल और शैक्षणिक सेवाओं के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई फिलहाल जारी रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाजार में गैस की काला बाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। यदि जरूरत पड़ी तो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक  वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक हैं। इसके अलावा सप्लाई जारी है। वहीं, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। डिपो में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बता दें मध्य प्रदेश में सालाना पेट्रोल की खपत करीब 1200 मीट्रिक टन और डीजल की खपत करीब 1600 मीट्रिक टन है। मुख्यमंत्री ने बनाई समन्वय समिति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेट्रोलियम से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रदेश के बीच समन्वय के लिए मंत्रिगण की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति गैस आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर आगे की रणनीति तय करेगी। 

सदन में शायरी की सियासत: विपक्ष ने ओम बिरला पर कसा तंज

नई दिल्ली संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान बुधवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने के पूरे आसार है। सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा में हिस्सा लेंगे। इससे पहले मंगलवार को दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। विपक्ष ने जहां ओम बिरला पर सरकार की आवाज बनने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कहा है कि ओम बिरला ने कभी पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थापित कर दी गई थी। ओम बिरला को पद से हटाने पर तुला विपक्ष, चाहिए होंगे कितने वोट? बता दें कि ओम बिरला के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव बीते फरवरी माह में ही लाया गया था जिस पर लगभग 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसके बाद इस पर सांसदों के मत लिए जाएंगे। प्रस्ताव पास कराने के लिए विपक्ष को सिंपल मेजोरिटी यानि साधारण बहुमत की आवश्यकता है। तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल… TMC सांसद का शायराना अंदाज टीएमसी संसद सयानी घोष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार सदन में बेरोजगारी, एपस्टीन फाइल्स, SIR जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होने देती है। वहीं ओम बिरला के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें खेद हैं कि वह पहली बार सांसद बनी हैं लेकिन उन्हें ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करता पड़ा है। इस दौरान उनका शायराना अंदाज देखने भी को मिला। उन्होंने अपना वक्तव्य खत्म करते हुए कहा, “तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल, दिल रो पड़ेगा तुझको पशेमां देखकर।” किसी नेता के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है प्रस्ताव- रविशंकर प्रसाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव उनके खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि ‘किसी’ के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है। विपक्ष द्वारा बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रसाद ने कहा, ”लोकसभा अध्यक्ष के पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को किसी के अहंकार की संतुष्टि का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।” प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा, ”यह प्रस्ताव बिरला के खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि किसी के अहं की संतुष्टि के लिए लाया गया है।” कांग्रेस ने ओम मोदी की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा में पीएम मोदी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। अपना नाम लिए जाने पर भड़के राहुल गांधी लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा बार बार अपना नाम लिए जाने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भड़क उठे। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया गया। और बार बार मेरा नाम लिया जा रहा है।

धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों को 72 घंटे में भुगतान : खाद्य मंत्री

खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल के विभागों के लिए 6216 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित  किसानों और गरीबों की खाद्य सुरक्षा पर सरकार का जोर धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों को 72 घंटे में भुगतान : खाद्य मंत्री 73 लाख राशन कार्डधारियों को मुफ्त चावल, चना-गुड़ और नमक योजनाओं पर जोर किसानों को 33 हजार करोड़ का भुगतान, खाद्य सुरक्षा योजनाओं का विस्तार नई राशन दुकानों और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर सरकार का बड़ा कदम रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  दयाल दास बघेल के विभागों से संबंधित वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6216 करोड़ 73 लाख 82 हजार रूपए की अनुदान मांगें सर्वसम्मति से पारित किया गया है।  मंत्री  दयाल दास बघेल ने अपने विभागीय बजट भाषण में विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, गरीब परिवारों और उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।  मंत्री ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से समर्थन मूल्य पर 141 लाख 04 हजार 365 टन धान की खरीदी की गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 33 हजार 431 करोड़ रुपये रही। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। धान खरीदी प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाने के लिए इस वर्ष किसानों का एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराया गया और राज्य के 2,740 धान खरीदी केंद्रों में बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित किए गए, इसके माध्यम से किसानों के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही धान की खरीदी की गई। मंत्री  बघेल ने बताया कि किसानों को भुगतान की व्यवस्था भी बेहतर बनाई गई है। अधिकांश किसानों को धान बेचने के 72 घंटे के भीतर उनके बैंक खातों में भुगतान कर दिया गया, जिससे करीब 33 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों तक पहुंची। धान खरीदी केंद्रों में टोकन व्यवस्था में सुधार करते हुए इस वर्ष 25 लाख से अधिक किसानों को 29 लाख से अधिक टोकन जारी किए गए। इससे किसानों को अपने धान को सुगमता से बेचने में मदद मिली और खरीदी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनी। खाद्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में खरीदे गए धान का कस्टम मिलिंग के माध्यम से तेजी से निराकरण किया जा रहा है। 9 मार्च 2026 तक 141 लाख टन धान में से 92 लाख 72 हजार टन यानी लगभग 66 प्रतिशत धान का उठाव कस्टम मिलिंग के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राज्य के 73 लाख 97 हजार अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशन कार्डधारियों को दिसंबर 2028 तक निःशुल्क चावल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्ष 2025-26 में इसके लिए 11,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले राशन कार्डधारियों को खाद्यान्न के साथ आयोडीन युक्त नमक, चना और गुड़ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अनुसूचित क्षेत्रों में नमक वितरण, 85 विकासखंडों में 5 रुपये प्रति किलो की दर से चना वितरण और बस्तर संभाग में रियायती दर पर गुड़ वितरण की योजनाएं संचालित हैं।  सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अंत्योदय एवं प्राथमिकता वाले  राशनकार्डधारी परिवारों में आयोडीन की कमी दूर करने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में 02 किलो प्रति एवं गैर अनुसूचित क्षेत्रों में 01 किलो प्रति राशनकार्ड प्रतिमाह निःशुल्क नमक वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में 73.62 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को योजना का लाभ मिल रहा है। इसके लिए रिफाईन्ड आयोडाईज्ड नमक वितरण हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में उपरोक्त योजना के लिये 150 करोड रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है।  मंत्री  बघेल ने बताया कि राज्य के 85 अनुसूचित विकासखण्ड एवं 09 माडा क्षेत्र के 31.32 लाख प्राथमिकता एवं अंत्योदय कार्डधारियों को मात्र 5 रूपए किलो की दर पर 2 किलो चना वितरण किया जा रहा है। चना वितरण योजना के लिये वित्तीय वर्ष 2026-27 में 450 करोड रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसी तरह बस्तर संभाग के निवासियों में आयरन की कमी दूर करने के लिए संभाग के 7.75 लाख अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को प्रतिमाह रियायती दर पर 02 किलो गुड़ वितरण किया जा रहा है। गुड़ योजना के लिये वित्तीय वर्ष 2026-27 में 75 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए इस वर्ष 181 नई उचित मूल्य दुकानों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही 3 लाख 32 हजार नए राशन कार्ड जारी किए गए और 6 लाख 57 हजार नए सदस्यों के नाम राशन कार्ड में जोड़े गए हैं। खाद्य मंत्री ने बताया कि खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य भंडारगृह निगम की 139 शाखाओं के माध्यम से फरवरी 2026 की स्थिति में 25 लाख 31 हजार मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है। 01 लाख 17 हजार मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का निर्माण किया जा रहा है। गोदाम निर्माण के अतिरिक्त निगम में 210 इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा की स्थापना की गई है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में नाबार्ड सहायता से गोदाम निर्माण हेतु 180 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था की गई है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण को और मजबूत बनाया जा रहा है।

IPL 2026 का धमाका: पहले मैच में ये टीमें भिड़ेंगी, टूर्नामेंट का रिकॉर्ड बन सकता है नया

नई दिल्ली  इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का आगाज होने जा रहा है. इसकी शुरुआत पिछले सीजन के फाइनल के रीमैच के बिना होने जा रही है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स अलग-अलग दिनों में अपने अभियान की शुरुआत करेंगे. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी 28 मार्च को बेंगलुरु में सीजन ओपनर में खेलने वाली है, जबकि पंजाब किंग्स 29 मार्च को मुल्लनपुर में गुजरात टाइटंस के खिलाफ अपना पहला मैच खेल सकती है। आरसीबी बनाम चेन्नई सुपर किंग्स ओपनर की संभावना सबसे अलग नजर आती है. यह लीग को पहले ही दिन सबसे ज्यादा बिकने वाला मुकाबला दे सकता है, जिससे माहौल तुरंत गर्म हो जाएगा. आईपीएल में कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जिनमें पॉइंट्स, फॉर्म या हालिया इतिहास की परवाह किए बिना खुद ही रोमांच होता है. आरसीबी और सीएसके की भिड़ंत इसी श्रेणी में आती है. वहीं, पंजाब किंग्स अपना सीजन एक दिन बाद शुरू करने जा रही है. इसमें भी एक खास बात है. पिछली बार फाइनल में पहुंची टीम इस बार आईपीएल 2026 में चैंपियनशिप रीमैच का रंग लेकर नहीं आ रही है. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले दो अहम प्री-सीजन तारीखें भी तय की गई हैं. कप्तानों और कोचों की बैठक 25 मार्च को मुंबई में होगी, जिसमें फ्रेंचाइजी को नियमों में बदलाव, संचालन की जानकारी और सीजन से जुड़ी खास बातें बताई जाएंगी. 15 मार्च को दिल्ली में कप्तानों का फोटोशूट होगा. इसे लेकर शुरुआती तस्वीर साफ है. आईपीएल 2026 की शुरुआत आरसीबी की चमक के साथ होगी. पंजाब किंग्स अलग राह पर और लीग फिर से धमाकेदार अंदाज में करने जा रही है। आरसीबी ने 2025 में पहली बार जीता खिताब 2008 में शुरु हुई इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीतने में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु की टीम को लंबा इंतजार करना पड़ा. राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और विराट कोहली ने टीम की कमान संभाली लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाए. रजत पाटीदार ने पहले ही सीजन में टीम को ये कामयाबी दिलाई।

पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्रालय को मिली बड़ी मंजूरी, अनुदान 492 करोड़ रुपये से ज्यादा

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल के विभागों के लिए 492 करोड़ रूपए से अधिक की अनुदान मांगे पारित पर्यटन विभाग के बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की वृद्धि  पर्यटन विभाग के अंर्तगत तीन नई योजनाओं हेतु कुल 110 करोड़ रूपए का प्रावधान मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन हेतु 100 करोड़, शक्तिपीठ भ्रमण योजना हेतु 5 करोड़, छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान  मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजना हेतु 3 करोड़ रूपए का प्रावधान, छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को आईआरसीटीसी के माध्यम से पर्यटन स्थलों के भ्रमण मे 75 प्रतिशत तक सब्सिडी  पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों हेतु अनुदान मद के अंर्तगत 100 करोड़ रूपए का प्रावधान  रामलला दर्शन योजना के लिए 36 करोड़ रूपए का प्रावधान शक्तिपीठ परियोजना के अंर्तगत छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को विकसित किए जाने हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान सिरपुर एकीकृत विकास योजना हेतु 10 करोड़ रूपए का प्रावधान, सिरपुर को हेरिटेज स्थल के रूप मंे किया जाएगा विकसित राजकीय मानव संग्रहालय, छत्तीसगढ़ इतिहास संग्रहालय, अभिलेखागार एवं भारत भवन का किया जाएगा निर्माण सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और कलाकारों के प्रोत्साहन पर विशेष जोर मंदिरों के जीर्णाेद्धार और प्रमुख मेलों के आयोजन को मिलेगा प्रोत्साहन रायपुर,  छत्तीसगढ़ विधानसभा में पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों को सदन में पारित किया गया। विभागीय मंत्री  राजेश अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत बजट पर चर्चा के बाद इन विभागों के लिए कुल 492 करोड़ 20 लाख रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं, इसमेें पर्यटन विभाग के लिए 344 करोड़ रूपए, संस्कृति विभाग के लिए 98.20 करोड़ रूपए तथा धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व विभाग के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  सदन में बजट भाषण के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों और धार्मिक आस्था से जुड़ी विरासत से है। राज्य सरकार इन तीनों क्षेत्रों को समन्वित रूप से विकसित कर छत्तीसगढ़ को पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन विभागों के बजट में पर्यटन अधोसंरचना के विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटन विभाग मंत्री  अग्रवाल ने बताया कि पर्यटन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 344 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के माध्यम से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन सर्किटों और पर्यटक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। इसके लिए इस वर्ष 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे पर्यटन स्थलों की अधोसंरचना, ब्रांडिंग, स्वच्छता, पेयजल और पर्यटक सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए  रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 52 विशेष ट्रेनों के माध्यम से लगभग 44 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क दर्शन कराया जा चुका है और इसके लिए इस वर्ष 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी जाएगी। इस योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।   अग्रवाल ने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन और जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जलाशयों और प्राकृतिक स्थलों पर जल क्रीड़ा तथा एडवेंचर गतिविधियों के विकास के लिए बजट में 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री  अग्रवाल ने जानकारी दी कि पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास  कार्यों हेतु  100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, इसके अंर्तगत भोरमदेव कॉरिडोर का विकास, मयाली-बगीचा के विकास के अंर्तगत जशपुर जिले के मधेश्वर पहाड़ के निकट स्थित मयाली मंे पर्यटक रिसॉर्ट, स्किल डेवलपमेंट सेंटर का विकास एवं बगीचा स्थित कैलाश गुफा में पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। उन्होेंने आगे कहा कि नया रायपुर मंे चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेेंटर का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर एवं सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर टूरिज्म सर्किट एवं जशपुर टूरिज्म सर्किट के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे जिससे छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों का स्वरूप और अधिक निखरकर सामने आएगा।  मंत्री  अग्रवाल ने आगे कहा कि पर्यटन प्रोत्साहन अनुदान मद में 5 करोड़ की वृद्धि कर 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंर्तगत बस्तर, सरगुजा एवं अन्य संभावित पर्यटन क्षेत्रों मंे पर्यटकों के लिए होमस्टे सुविधा एवं सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के आर्थिक विकास एवं पर्यटन के विकास के लिए निजी निवेशकों एवं स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। शक्तिपीठ परियोजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को उत्तराखंड की चारधाम परियोजना की तर्ज पर विकसित करने और जोड़ने का कार्य किया जाना है। इस हेतु बजट मंे 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। सिरपुर को बुद्धिष्ट थीम पर हेरिटेज स्थल के रूप मंे विकसित किया जाएगा, इसके लिए सिरपुर विकास योजना केे तहत 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजनांर्तगत आईआरसीटीसी के माध्यम से 75 प्रतिशत सब्सिडी मंे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलांे का भ्रमण कराया जाएगा। इस हेतु बजट में 3 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रथम चरण में राजधानी रायपुर से जगदलपुर एवं बारनवापारा-सिरपुर टूर तैयार किया जा रहा है।  पर्यटन विभाग के अंर्तगत नया रायपुर स्थित भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान हेतु 4 करोड़ रूपए, स्टेट टूरिज्म अवार्ड हेतु 5 लाख रूपए एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन के प्रचार-प्रसार एवं ब्राडिंग हेतु मेला, उत्सव, प्रर्दशनी अनुदान मद मंे 8.50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट तथा स्टेक होल्डर्स से संपर्क कर उन्हें छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के लिए कार्य किए जाने हेतु प्रोत्साहित करने प्रमुख 10 शहरों में रोड शो और बिजनेस मीटिंग का अयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।  संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री  अग्रवाल ने बताया कि संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 98 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया … Read more

युद्ध का 12वां दिन: 140 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान ने हॉर्मुज की रणनीति मजबूत की

तेहरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए।  स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया।  1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है।  बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा     इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया।      खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी।      सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है. ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.  ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर … Read more

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विभागों के लिए बजट पास, कई प्रमुख क्षेत्रों को वित्तीय मंजूरी

उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, गृह, जेल, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग का बजट पारित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 16 हज़ार 560 करोड़ रुपए प्रावधानित रायपुर, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनते ही हमने आवासहीन लोगों को प्रतिबद्घ होकर प्रथम बैठक में 18 लाख से अधिक लंबित आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गयी थी। 2 वर्षों में एसईसीसी 2011 एवं आवास प्लस-2018 की सूची के सभी पात्र हितग्राहियों के आवास स्वीकृत किया जा चुका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, गृह, जेल, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग का बजट  विधानसभा में पारित किया गया l          विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत 33 हजार 255 परिवारों को आवास स्वीकृति दी जा चुकी है एवं 19 हजार 199 आवास पूर्ण भी हो चुके हैं। प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित पात्र परिवारों को पीएम आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत विशेष परियोजना के तहत आवास लाभ प्रदान किए जाने हेतु भारत सरकार द्वारा 15 हजार परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है।        मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 38 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है एवं 15 हजार से अधिक आवास पूर्ण भी हो चुके है। सरकार गठन उपरांत राशि  400 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान भी किया गया, यह राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि कोई भी परिवार आवासहीन न रहे।       भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय से पीएमजी एसवाई 4 के तहत 774 सड़कों द्वारा 781 बसाहटे लाभान्वित होंगी। जिसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 2237.97 करोड़ रुपए एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के लिए 550 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत निर्मित एवं निर्माणाधीन सड़कों के नागरिक सूचना पटल पर QR कोड आधरित सूचना स्वप्रकटीकरण बोर्ड लगाकर सड़कों की समस्त जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।     मंत्री  शर्मा ने बताया कि इस बजट में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 4000 करोड़ रुपए एवं  प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना हेतु 4265.00 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 350 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु बजट प्रावधान 850 करोड़ रुपए किया गया है। ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान हेतु 8.75 करोड़ का प्रावधान किया गया है।  ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के लिए 144 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।      गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि पुलिस विभाग के लिए मुख्य बजट में राजस्व व्यय मद अंतर्गत 7130.48 करोड़ रुपए एवं पूंजीगत परिव्यय मद अंतर्गत 590.53 करोड़ रुपए कुल 7721.01 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पुनर्वास करने वाले वामपंथी उग्रवादी नक्सली कैडर को केन्द्रीय पुनर्वास नीति के तहत् उनके प्रतिस्थापन एवं पुनर्वास के लिये फिक्स डिपाजिट एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिये राशि रूपये 38 करोड़ का बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में वर्तमान में हो रहे आधुनिक किस्म के अपराध एवं साइबर अपराध के मामलों की गहन अनुसंधान एवं रोकथाम हेतु पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में आधुनिक आई.टी. सेंटर खोले जाने हेतु 06 नवीन पद तथा जिला बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, सक्ती, बलरामपुर में कुल 05 साइबर थाना के गठन हेतु 50 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है। सरकार द्वारा जिला रायपुर के नगरीय क्षेत्रों में लागू किये गये पुलिस आयुक्त प्रणाली का सुचारू एवं कुशलतापूर्णक संचालन हेतु कुल 67 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक से नवीन पुलिस जिला रायपुर ग्रामीण के रूप में संचालन हेतु कुल 251 नवीन पदों का प्रावधान किया गया हैं। इसी प्रकार राज्य के 06 नवगठित जिलों सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा एवं मुंगेली में पुलिस के महत्त्वपूर्ण कार्य हेतु डीसीबी, डीसीआरबी के 156 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।         प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों के लिए 15 नवीन पुलिस थाना की स्थापना हेतु कुल 975 नवीन पदों एवं 08 पुलिस चौकी को पुलिस थाना में उन्नयन किये जाने हेतु 337 नवीन पद, अत्यधिक कम बल स्वीकृत वाले 21 पुलिस थानों में अतिरिक्त बलवृद्धि किये जाने हेतु कुल 870 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।         प्रदेश में पुलिस प्रशासन को सुदृढ़ किये जाने हेतु नवीन पुलिस महानिरीक्षक रेंज रायपुर एवं राजनांदगांव तथा पुलिस उप महानिरीक्षक रायगढ़ रेंज कार्यालय के लिए कुल 41 नवीन पद तथा प्रदेश के विभिन्न पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में अनुसचिवीय बल के कुल 110 अतिरिक्त नवीन पदों का प्रावधान किया गया है। शासकीय रेल पुलिस रायपुर के थाना/चौकी एवं लाईन में अतिरिक्त बलवृद्धि किये जाने हेतु कुल 150 अतिरिक्त नवीन पदों सहित, जगदलपुर हवाई पट्टी की सुरक्षा हेतु हेतु 40. न्यू स्टेट हैंगर माना रायपुर की सुरक्षा हेतु 40 नवीन पद का प्रावधान किया गया है। राजभवन की सुरक्षा, मुख्यमंत्री निवास सुरक्षा एवं मंत्रालय की सुरक्षा हेतु 250 अतिरिक्त नवीन पद, छसबल की वाहिनियों के अकुशल ट्रेडमेन संवर्ग के 400 नवीन पद, बस्तर फाईटर बल में अतिरिक्त बलवृद्धि (आरक्षक) हेतु 1500 नवीन पद, विशेष आसूचना शाखा मुख्यालय के लिए अनुसचिवीय संवर्ग के 24 नवीन पद, एटीएस विशेष शाखा में आदर्श आतंकवाद निरोधक दस्ता हेतु 325 नवीन पद, प्रदेश के विभिन्न छसबल वाहिनीयों में श्वान दल हेतु 83 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।      मंत्री   शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 440 नवीन पदों की स्वीकृतियां प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 01 नवीन भारत रक्षित वाहिनी के गठन हेतु 1007 नवीन पद, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल का 01 बटालियन गठन किये जाने हेतु 500 नवीन पद. जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन हेतु 100 नवीन पद, विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय अंतर्गत एस०ओ०जी० (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन हेतु 44 नवीन पद सहित थाना एवं चौकियों की संख्या में वृद्धि करते हुये कुल 5421 नवीन पदों की स्वीकृतियां प्रदान की गई है। सरकार द्वारा विशेष पुलिस बल अंतर्गत … Read more

पारंपरिक कला बनी कमाई का जरिया, एक प्रेरक सफलता की कहानी

सफलता की कहानी : पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद बना आजीविका का साधन स्व सहायता समूह से जुड़कर कांसाबेल की महिलाओं ने स्वरोजगार की राह अपनाई रायपुर  पारंपरिक कौशल, जैसे मिट्टी के बर्तन, कढ़ाई और लकड़ी का काम, स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना के तहत जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं। कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की हरियाली स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है।          समूह की सदस्य मती बालमुनि भगत ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अच्छी कमाई कर रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दे रहा है। उन्होंने बताया कि यह न केवल एक व्यवसाय है, बल्कि यह परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।            महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, सहयोग और विपणन सुविधा मिलने से उनका उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार और मेलों में लोकप्रिय हो चुका है। महिलाएं कहती हैं कि अब वे सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी पहचान खुद बना रही हैं।        समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से हम सशक्त और आत्मनिर्भर हो रहे हैं। हम महिलाओं के लिए हस्तशिल्प उत्पाद आय का मुख्य जरिया है, जो लाखों लोगों को, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है।

भारत मनाएगा ICC ट्रॉफी जीत का उत्सव, इस दिन होगा क्रिकेट सितारों का संगम

मुंबई  भारतीय क्रिकेट का इस समय स्वर्णिम युग चल रहा है। पिछले कुछ समय में भारत की टीमों ने आधा दर्जन से ज्यादा आईसीसी टूर्नामेंट जीते हैं। मेंस और वुमेंस क्रिकेट ही नहीं, बल्कि यूथ मेंस और वुमेंस टीम भी आईसीसी ट्रॉफी जीत चुकी हैं। बीते करीब 13-14 महीने में भारत की अलग-अलग टीमों ने 5 आईसीसी खिताब अपने नाम किए हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई भी अपने खिलाड़ियों को सम्मानित करने वाली है। इसकी घोषणा कर दी गई है। रविवार 15 मार्च को, BCCI नई दिल्ली में अपने सालाना NAMAN अवॉर्ड्स आयोजित करेगा। यह इवेंट एयरपोर्ट के पास एक शानदार फाइव स्टार होटल में होगा। यह जगह खास तौर पर उन खिलाड़ियों के लिए ट्रैवल को आसान बनाने के लिए चुनी गई थी जो जल्द ही आने वाले सीजन के लिए अपनी-अपनी IPL फ्रेंचाइजी में शामिल होने के लिए जा रहे हैं। बता दें कि बीसीसीआई पहले ही टी20 विश्व कप 2026 की विजेता टीम के लिए 131 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा कर चुकी है। BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने कन्फर्म किया कि यह सेरेमनी चैंपियंस का एक बड़ा गेट-टुगेदर होगा। उन्होंने बताया, “हम हाल ही के T20 वर्ल्ड कप चैंपियंस सहित सभी ICC टूर्नामेंट विनर्स को उनके कोच के साथ बुलाने का प्लान बना रहे हैं।” जिन पांच टीमों को सम्मानित किया जाएगा। उनमें आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 विनिंग टीम, आईसीसी वुमेंस वनडे वर्ल्ड कप 2025 विनिंग टीम, आईसीसी अंडर 19 मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 विजेता टीम, आईसीसी अंडर 19 वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम और आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 विजेता टीम शामिल है। फैंस इस इवेंट में अपने कुछ पसंदीदा क्रिकेट आइकॉन को देखने की उम्मीद कर सकते हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे लेजेंड्स, जिन्होंने भारत की 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका निभाई थी, अगर उनका शेड्यूल इजाज़त देता है तो वे भी इस इवेंट में शामिल हो सकते हैं। रोहित को हाल ही में 2026 T20 वर्ल्ड कप के दौरान टूर्नामेंट के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर टीम के लिए चीयर करते हुए देखा गया था। इसके अलावा एमएस धोनी भी इन अवॉर्ड्स की शोभा बढ़ाते हुए दिखाई पड़ सकते हैं। टीमों के खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कोच भी इस दौरान उपलब्ध रहेंगे।

सिर पर करोड़ों का इनाम रखने वाले 106 नक्सली छत्तीसगढ़ में हुए सरेंडर

रायपुर  भारत में नक्सलवाद को खत्म करने की कोशिश में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में कुल 106 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी पर कुल 3.95 करोड़ रुपए का इनाम था। इन सभी नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में सक्रिय थे। बीजापुर के 37, नारायणपुर के 4, बस्तर के 16, कांकेर से 3 और सुकमा से 18, दंतेवाड़ा से 30 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी के सिर पर कुल लगभग 4 करोड़ रुपए का इनाम था और ये नक्सली अलग-अलग रैंक पर तैनात थे।  छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ रुपये के इनामी 106 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें बीजापुर और दंतेवाड़ा के 67 नक्सली भी शामिल हैं। रैंक की बात करें तो बीजापुर में डीवीसीएम रैंक के तहत दो नक्सली, पीपीसीएम रैंक में 4, एसीएम में 9 और पीएम रैंक वाले 22 नक्सलियो ने सरेंडर किया है। कुल 37 नक्सलियों पर 106 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। नारायणपुर में डीवीसीएम रैंक के तहत एक नक्सली, सीवाईपीसीएम का एक, पीपीसीएम का एक और पीएम रैंक वाले दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर 22 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।  बस्तर में डीवीसीएम रैंक का 1, पीपीसीएम के पांच, एसीएम के तीन और पीएम रैंक वाले सात नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कुल 16 नक्सलियों पर 99 लाख रुपये का इनाम है। कांकेर में डीवीसीएम रैंक का एक, एसीएम और पीएम रैंक में एक एक नक्सली ने सरेंडर किया है। कुल तीन नक्सलियों पर 14 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।  सुकमा में सीवाईपीसीएम रैंक वाले दो, पीपीसीएम रैंक में छह, एसीएम में पांच पीएम रैंक में 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी पर 85 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। दंतेवाड़ा में डीवीसीएम का एक, पीपीसीएम में दो, एसीएम में पांच और पीएम रैंक में 22 नक्सलियों का सरेंडर हुआ है। इन पर 69 लाख रुपये का इनाम था।  क्या है सरकार का लक्ष्य बता दें कि भारत सरकार ने साल 2026 में देश से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस दौरान पिछले कुछ महीनों सैकड़ों नक्सलियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया और इस दौरान हजारों नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। सरेंडर करने की इसी कड़ी में बुधवार को 106 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर कर दिया।  

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