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छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट, LPG और ईंधन की सप्लाई व्यवस्था पर रखी जा रही कड़ी नजर

छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी के निर्देश खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने आयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशानिर्देश शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी रायपुर छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने सभी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में संचालित सभी 5 एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में एलपीजी गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इस अवसर पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को राज्य में एलपीजी गैस की दैनिक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में ऑयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेण्डर वर्तमान में केवल विशेष अत्यावश्यक संस्थाओं, जैसे अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को ही सप्लाई किए जा रहे हैं। इस पर खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने निर्देशित किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की परीक्षाएँ चल रही हैं, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं एवं छात्रावासों को गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। बैठक के दौरान सचिव श्रीमती कंगाले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर 15 प्रतिशत कमर्शियल सप्लाई होटलों आदि को भी दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही जिलों में एलपीजी गैस के दुरुपयोग तथा अवैध गैस रिफिलिंग की रोकथाम के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके। बैठक में राज्य में डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के तीनों डीजल-पेट्रोल डिपो में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। इस पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीजल और पेट्रोल की दैनिक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर भी नियमित निगरानी रखी जाए। खाद्य सचिव श्रीमती कंगाले ने राज्य के उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है और इन पेट्रोलियम पदार्थों की किसी प्रकार की कमी या शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेण्डर की आपूर्ति नियमानुसार नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं।

गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर

रेसिपी आधारित पुष्टाहार व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा उत्तर प्रदेश बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा पौष्टिक आहार, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मिलेगी मजबूती गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) होगा लागू, धांधली पर लगेगी रोक लखनऊ  योगी सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर पोषण के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अप्रैल से रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लागू की जा रही इस व्यवस्था के साथ उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। अनुपूरक पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) लागू की जाएगी जिसके क्रम में प्रदेश में अनुपूरक पोषाहार का ऑफलाइन वितरण अमान्य कर केवल एफआरएस प्रणाली से ही वितरण मान्य किया गया है। इससे पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  पौष्टिक भोजन से खिलेंगे नौनिहाल नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में सात श्रेणी के लाभार्थियों को ध्यान में रखकर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रेसिपी आधारित पुष्टाहार तैयार कर सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। जिन जिलों या परियोजनाओं में इसकी व्यवस्था नहीं होगी, वहां नैफेड के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों तक आपूर्ति की जाएगी। सरकार ने अलग अलग आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं के लिए अलग भोजन तय किया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन का हलवा (मीठा) दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष तक के बच्चों को भी आटा-बेसन हलवा (मीठा) मिलेगा, जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन बर्फी (मीठा) और दलिया-मूंग-सोया खिचड़ी (नमकीन) दी जाएगी। गर्भवती और धात्री महिलाओं को आटा-बेसन-सोया बर्फी और दलिया-मूंग-दाल खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। अतिकुपोषित बच्चों को विशेष आहार  अतिकुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक आहार का प्रावधान रखा गया है। इसके अंतर्गत 06 माह से 01 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा, 01 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा “बाल संजीवनी” तथा 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। यह रेसिपी आधारित व्यवस्था बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रेसिपी के पोषण मानकों में भारत सरकार के मानकों के अनुरूप कैलोरी और प्रोटीन के साथ-साथ 11 अन्य आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को भी शामिल किया गया है। सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का फंड किया स्वीकृत इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने वायबिलिटी गैप फंड भी मंजूर किया है। प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार की आपूर्ति वर्ष 2017 के कॉस्ट नॉर्म्स पर की जा रही है। इसके कारण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के अंतर्गत रेसिपी आधारित पुष्टाहार का उत्पादन करने वाली इकाइयों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था। लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध कराते हुए इसकी गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो, इसे ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों को होने वाली संभावित हानि की प्रतिपूर्ति के लिए वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) की आवश्यकता पाई गई। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एसआरएलएम के माध्यम से संचालित उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिपरिषद ने कुल 301.19 करोड़ रुपये की वीजीएफ स्वीकृत की है। इससे उत्पादन इकाइयों के संचालन को मजबूती मिलेगी और लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पुष्टाहार की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री से मिले नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात  उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा  लखनऊ  नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया। बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है। लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2D मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान की धमकी के बीच अमेरिका ने लिया फैसला बदलने का कदम, होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर

वाशिंगटन मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है। अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं। अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा। युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

गैस की किल्लत जारी: महीने भर बाद मिलेगा दूसरा सिलेंडर, 25 दिन का नियम फेल

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

धीरे-धीरे अंधापन ला सकता है ग्लूकोमा, समय रहते पहचानें ये चेतावनी संकेत

‘ग्लूकोमा’ आम ‘मोतियाबिंद या कैटारेक्ट’ नहीं है। इसमें केवल आंखों की रोशनी धुंधली नहीं पड़ती बल्कि पूरी दृष्टि चली जाती है। अगर समय पर इसकी पहचान हो जाए तो इसे रोक पाना संभव है वरना व्यक्ति अंधेपन का शिकार तक हो सकता है। कैसे होता है ग्लूकोमा? आंखों में एक तरफ से पानी भरता है और दूसरी ओर से निकलता है, जब यह प्रक्रिया बाधित होकर आई एंगल ब्लाक करने लगती है तब ग्लूकोमा की शुरुआत होती है। दरअसल, आंखों के अंदर मौजूद ‘एक्वियस ह्यूमर’ नामक तरल पदार्थ बाहर न निकलकर अंदर ही जमा होने लगता है। जिससे आंखों के पीछे की आप्टिक नर्व पर दबाव बढ़ता है और दृष्टि कम होने लगती है। इसके अलावा उम्र बढ़ना, रक्तचाप, मधुमेह, आनुवंशिकता या आंखों में लगी चोट को ग्लूकोमा होने के कारण बताए जाते हैं। लक्षण शुरुआत में ग्लूकोमा के लक्षण विशेष रूप से दिखते नहीं हैं। कई लोगों को सिरदर्द, आंखों के सामने इंद्रधनुष जैसे रंग बनना या उल्टियां होने जैसी परेशानियां होती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में तो इस बीमारी में आंखों में दर्द तक नहीं होता। जब आंखों की साइड की नजर कमजोर होने लगती है तब जाकर ग्लूकोमा के लक्षण सामने आते हैं और फिर धीरे-धीरे केंद्र की रोशनी भी जाने लगती है। क्या है ऑप्टिक नर्व? आंख के पिछले हिस्से में दस लाख से अधिक तंत्रिका तंतुओं का एक समूह है, जो रेटिना द्वारा देखी गई छवियों को विद्युत संकेतों के रूप में मस्तिष्क तक पहुंचाने का काम करता है। यह नर्व आंख और मस्तिष्क के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्ट के रूप में काम करती है। ग्लूकोमा के प्रकार ग्लूकोमा भी दो तरह के होते हैं। पहला, ओपन-एंगल ग्लूकोमा, जो भारत में अधिकांश लोगों को होता है, इसमें व्यक्ति की दृष्टि धीरे-धीरे जाती है, लेकिन दूसरा, एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा जिसमें बीमारी का पता चलते ही दृष्टि एक से दो दिन के अंदर ही चली जाती है। क्या है इलाज? मेडिकल साइंस में ग्लूकोमा का इलाज संभव है। पहले नसों के दबाव की जांच होती है और ग्लूकोमा का पता लगाया जाता है। आंखों की हालत देखकर डाक्टर आई ड्राप देते हैं, जिसे सारी जिंदगी लेना होता है। कई बार लोग लापरवाही के चलते इसे बीच में ही छोड़ देते हैं और ग्लूकोमा वापस आ जाता है। किन विटामिन्स का रखें खयाल? आंखों की रोशनी ठीक रखने के लिए विटामिन ए, सी और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही एंटी-आक्सीडेंट्स युक्त हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और ओमेगा थ्री फैटी एसिड भी लेना चाहिए। ये हैं जरूरी बातें     अगर आंख का आपरेशन पहले से हुआ है, तो ग्लूकोमा होने की संभावनाएं अधिक होती हैं।     एक बार आई ड्राप शुरू होने पर सारी उम्र उसे लेना अनिवार्य होता है।     जरूरत पड़ने पर ग्लूकोमा की सर्जरी भी होती है।  

अमरीन-आफरीन का ईरानी डेरा कनेक्शन सामने, बनीं सेक्स रैकेट की हेड

भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए हाई प्रोफाइल धर्मांतरण और रेप केस में गिरफ्तार दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन फिलहाल जेल में बंद हैं. इस मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी समय उनके परिवार की नजदीकियां ईरानी डेरे से बढ़ने लगी थीं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ईरानी डेरे के आपराधिक छवि वाले लोगों से इन दोनों बहनों का कोई संपर्क था या नहीं. फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी संभावित सबूतों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। ब्यूटी पार्लर की आड़ में चल रहा था रैकेट पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना रैकेट फैलाया था. पुलिस का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी युवतियां इस जाल का शिकार बनी हैं. जांच एजेंसियां पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच में जुटी  इस मामले में एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कड़ियों की तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से विवेचना जारी है।

एमपी के कई शहरों में गर्मी की लहर, ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा प्रभावित, भोपाल और इंदौर में भी तापमान बढ़ा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने तेज तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह औसत से करीब 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद गर्मी का असर और तेज हो सकता है। यह आज की ताज़ा ख़बरों में मौसम से जुड़ा बड़ा अपडेट माना जा रहा है। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान 38 डिग्री के पार पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री तथा दमोह और टीकमगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पांच बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 37.2 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। हवा की दिशा बदलने से बढ़ी गर्मी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में हवा की दिशा में बदलाव आया है। पहले जहां हवाएं उत्तर-पूर्व से आ रही थीं, वहीं अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की ओर से चल रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर मध्यप्रदेश तक पहुंचती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 15 मार्च के बाद मौसम में बदलाव संभव मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मार्च में लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन अप्रैल और मई में भीषण गर्मी पड़ सकती है। इस दौरान 15 से 20 दिनों तक हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ने के संकेत हैं।  मंगलवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री और गुना में 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दमोह और टीकमगढ़ में भी पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री या उससे ऊपर रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में तापमान 37.2 डिग्री, उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में इतनी तेजी से तापमान बढ़ना सामान्य ट्रेंड से अलग है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने की मुख्य वजह हवा की दिशा में बदलाव है। फिलहाल प्रदेश में हवाएं उत्तर-पूर्व की बजाय पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये रेगिस्तानी क्षेत्रों से होकर आती हैं, जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का मौसम संक्रमण और एलर्जी के लिहाज से संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-रात हल्की ठंड रहने के कारण सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ सकते हैं। डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह और देर रात ठंडी हवा से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। हालांकि इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अप्रैल और मई के महीने सबसे अधिक गर्म रह सकते हैं। ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने का अनुमान है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में प्रदेश में दिन गर्म और रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहती हैं, जबकि कभी-कभी बारिश भी होती है। इस बार भी ऐसा ही मौसम देखने को मिल सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी ने लोगों को गर्मी का अहसास जल्दी करा दिया है।

सावधान! 21 मार्च से बुध की नई चाल बढ़ा सकती है परेशानी, इन राशियों पर खास असर

ज्योतिष शास्त के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी गति बदलता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है. इसी कड़ी में बुध ग्रह की चाल में बदलाव फिर से कुछ राशि वालों पर अलग- अलग प्रकार से प्रभाव डाल सकता है. आपको बता दें 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था शुरू हुई थी, जो 21 मार्च 2026 को समाप्त होने जा रही है. इस दिन से ही बुध फिर से सीधी चाल चलेंगे यानी मार्गी होने वाले हैं. मान्यता के अनुसार, बुध का मार्गी होना सामान्य रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह कुछ राशियों के लिए चुनौतियां भी लेकर आ सकता है. आइए सबसे पहले समझते हैं बुध के व्रकी और मार्गी होने क्या राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है. बुध के मार्गी होने का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार, तकनीक और गणना का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध की चाल बदलती है तो इसका सीधा असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता, बातचीत और कामकाज पर पड़ सकता है. वक्री अवस्था में जहां कई काम अटक सकते हैं, वहीं मार्गी होने पर अक्सर चीजें धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं. हालांकि यदि ग्रह की स्थिति कमजोर हो या वह अशुभ प्रभाव में हो तो मार्गी अवस्था में भी कुछ राशियों के लिए तनाव और रुकावटें बनी रह सकती हैं. इन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां! तुला राशि     तुला राशि के जातकों के लिए बुध की सीधी चाल कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है.     कार्यक्षेत्र में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं.     सहकर्मियों के साथ संवाद में सावधानी रखें.     व्यापार से जुड़े लोगों को कागजी कार्यों में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी.     आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें. कुंभ राशि     कुंभ राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है.     कामकाज में अचानक बाधाएं आ सकती हैं.     योजनाएं पूरी होने में देरी हो सकती है.     तकनीकी या ऑनलाइन कार्यों में परेशानी आ सकती है.     यात्रा से जुड़े मामलों में भी विलंब संभव है. मीन राशि     मीन राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक दबाव महसूस हो सकता है.     निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है.     धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है.     किसी बात को लेकर गलतफहमी या विवाद की स्थिति बन सकती है.     कामकाज में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है.  

बार-बार आखिरी समय में काम क्यों बिगड़ जाता है? प्रेमानंद महाराज ने खोल दिया राज

जीवन में कई बार आपको भी ऐसा लगा होगा कि आपके हर काम बनते हुए भी बिगड़ जाते हैं। अक्सर होता है कि कोई काम बिल्कुल अंत तक पहुंच जाता है और अचानक सब कुछ बिगड़ जाता है। कई बार तो चीजें शुरू होते ही खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में समझ नहीं आता कि भाग्य को दोष दें या कर्मों को। प्रेमानंद महाराज से पूछा गया सवाल प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में आए एक श्रद्धालु का भी ठीक यही प्रश्न था। उन्होंने कहा कि महाराज जी मेरे बनते हुए काम आखिर में क्यों बिगड़ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने के पीछे आखिर क्या वजह है। इसपर प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर हर किसी को जरूर जानना चाहिए। पूर्व कर्मों के फल हैं प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आप पूर्व जन्मों के पाप होते हैं। ये पूर्व के पाप ही हमें इस जीवन में भी दुख का अनुभव कराते हैं। वहीं हमारे अच्छे कर्म हमें सफलता प्रदान करते हैं। सफलता की ओर ले जाती हैं ये चीजें महाराज जी कहते हैं कि पूर्व जन्म के पाप ही असफलता का कारण होते हैं। इन्हें नष्ट करने का एक ही उपाय है कि आप सद्मार्ग की ओर बढ़ें। प्रभु का नाम जप करें, कीर्तन करें, अच्छे इंसान बनें, तीर्थयात्रा करें और लोगों की सेवा करें। ये सभी चीजें आपके पाप कर्म नष्ट कर के सफलता की ओर ले जाती हैं। आध्यात्म से जुड़ना है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इसी कारण आध्यात्म से जुड़ना बहुत जरूरी है। अन्यथा आपकी कामनाएं तो रहेंगी लेकिन वो कभी पूरी नहीं होंगी। जिस वजह से शोक, दुख, चिंता, भय आदि लगे ही रहेंगे। मन की शांति है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन की शांति बहुत जरूरी है। अगर कोई इंसान गरीब भी है लेकिन धर्म के रास्ते पर चलता है, तो आप देखेंगे कि वो शांत है और जीवन में खुश है। वहीं अगर आप धनवान भी हैं लेकिन वासनाओं में लिप्त हैं, तो आपका जीवन हमेशा दुख, शोक, पीड़ा, चिंता आदि से भरा रहेगा। भजन से ही संभव है मन की शांति महाराज जी कहते हैं कि मन की शांति सिर्फ भजन से ही संभव है। आप धन, पद और प्रतिष्ठा से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति नहीं। इसलिए अच्छे कर्म करें, भगवान का भजन करें; सफलता और सुख-शांति अपने आप ही आपके जीवन में प्रवेश करेंगे।

भोपाल समेत कई राज्यों में IT की कार्रवाई, कारोबारी दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर छापा

भोपाल  राजधानी भोपाल में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब आयकर विभाग की विशेष टीम ने शहर के बड़े माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। दिल्ली से पहुंची आयकर विभाग की टीम ने तड़के चूना भट्टी क्षेत्र में स्थित उनके आवास और एमपी नगर इलाके में मौजूद व्यावसायिक कार्यालयों पर कार्रवाई की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह अभियान केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग की अलग-अलग टीमें कानपुर, छतरपुर और दिल्ली समेत कई शहरों में गुप्ता से जुड़े प्रतिष्ठानों और कार्यालयों की जांच कर रही हैं, जिससे पूरे मामले को बड़े पैमाने की समन्वित कार्रवाई माना जा रहा है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से टैक्स चोरी और वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की जांच को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि माइनिंग कारोबार से होने वाली आय का पूरा विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स की जांच कर वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर का आकलन किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कर चोरी या वित्तीय हेरफेर का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों के रडार पर पहले भी रह चुके है दिलीप गुप्ता गौरतलब है कि दिलीप गुप्ता पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भी उनके ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की गई थी। उस समय तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, जिंदा कारतूस और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। आरोप लगाए गए थे कि निवेश योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए शेयर आवंटन किया गया। अब आयकर विभाग की नई कार्रवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। अधिकारियों से सांठगांठ की जानकारी मौजूदा जांच में अधिकारियों द्वारा बेनामी संपत्तियों और हवाला से जुड़े लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। आयकर विभाग की टीम दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर रही है और घर के सदस्यों तथा कार्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद भोपाल के व्यापारिक और माइनिंग क्षेत्र में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि कारोबारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी जांच या खुलासे सामने आ सकते हैं। माइनिंग सेक्टर में सक्रिय दिलीप गुप्ता के खिलाफ यह कार्रवाई प्रदेश में आर्थिक अनियमितताओं पर नियंत्रण के प्रयासों के रूप में देखी जा रही है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से जब्त की गई संपत्तियों या दस्तावेजों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन जिस स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित अघोषित संपत्ति से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ली विभागों की बैठक, कांकेर में नेशनल लोक अदालत की तैयारी जारी

कांकेर. आगामी शनिवार 14 मार्च को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की तैयारियों एवं अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला न्यायालय कांकेर में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजीव कुमार टामक द्वारा की गई। बैठक में बैंक, नगरपालिका, विद्युत एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों से न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अधिकतम संख्या में राजीनामा, समझौते के माध्यम से नेशनल लोक अदालत में निराकृत कराने पर विशेष बल दिया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिन प्रकरणों में समझौते की संभावना है, उनकी सूची शीघ्र तैयार कर संबंधित न्यायालयों में प्रस्तुत करें, ताकि पक्षकारों को समय पर नोटिस जारी किया जा सके। साथ ही प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी समय पर प्रस्तुत करने हेतु विभागीय अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए, जिससे अधिकतम मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण संभव हो सके। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांकेर की सचिव श्रीमती शांति प्रभु जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

चैत्र नवरात्रि 2026: घर में नहीं होनी चाहिए ये 5 चीजें, तभी बरसेगी मां दुर्गा की कृपा

चैत्र नवरात्रि केवल उपवास और पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन और परिवेश को शुद्ध करने का एक पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा स्वयं धरती पर पधारती हैं और अपने भक्तों के घर में वास करती हैं। माता रानी के स्वागत के लिए केवल मन की शुद्धि ही काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में रखी कुछ चीजें नकारात्मक ऊर्जा का संचय करती हैं, जो सुख-समृद्धि के मार्ग में अदृश्य बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। यदि घर में वास्तु दोष हो या भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा जमा हो, तो कठिन पूजा-अर्चना के बाद भी वह शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता जिसकी हम कामना करते हैं। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे नव-संवत्सर और चैत्र नवरात्रि से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आशियाने को उन वस्तुओं से मुक्त करें जो दरिद्रता और अशांति को निमंत्रण देती हैं। घर के कोनों में छिपा कबाड़ या टूटी-फूटी वस्तुएं न केवल धन के प्रवाह को रोकती हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। तो आइए जानते हैं, वास्तु के उन 5 खास नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप नवरात्रि से पहले अपने घर का कायाकल्प कर सकते हैं। खंडित मूर्तियां या फटे हुए धार्मिक चित्र अक्सर हम अनजाने में घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां रखे रहते हैं जो कहीं से खंडित होती हैं या देवी-देवताओं के चित्र फटे हुए होते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में दुख और अशांति का कारण बनती हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले इन्हें पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं। खराब या बंद पड़ी घड़ियां वास्तु में रुकी हुई घड़ी को ‘ठहरे हुए भाग्य’ का प्रतीक माना जाता है। बंद पड़ी घड़ियां घर की प्रगति को रोकती हैं और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। यदि आपके घर में कोई ऐसी घड़ी है जो काफी समय से बंद है या टूटी हुई है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर निकाल दें। टूटे हुए कांच और बर्तन टूटे हुए शीशे या चटके हुए बर्तन घर में दरिद्रता (गरीबी) को न्योता देते हैं। नवरात्रि के दौरान माता का भोग लगाने के लिए साफ और अखंडित बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए। इसलिए, रसोईघर या श्रृंगार दान में रखे टूटे हुए कांच के सामान को हटाना ही श्रेयस्कर है। फटे-पुराने जूते और चप्पल वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या अलमारी के नीचे रखे फटे-पुराने जूते-चप्पल नकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत होते हैं। यह शनि दोष का भी कारण बन सकते हैं। नवरात्रि से पहले घर के कोनों की सफाई करें और जो जूते उपयोग में नहीं हैं, उन्हें हटा दें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। कबाड़ और बेकार का सामान घर की छत या स्टोर रूम में रखा पुराना कबाड़, जंग लगा लोहा या रद्दी कागज मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। माता अंबे की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को हल्का और खुला रखना जरूरी है। कबाड़ हटाने से घर में ‘प्राण ऊर्जा’ का संचार बढ़ता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।

सरपंच व सचिव चला रहे अपने राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां

सरपंच व सचिव चला रहे अपने  राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां। राजेंद्रग्राम/छबिलाल जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत दुनिया के सरपंच श्रीमती जोगवती व सचिव पंचम सिमर को कर रहे अपने मन की राज और सरकार  के पैसों का धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं, अगर देखा जाए तो ग्राम पंचायत दुनिया के ग्राम मिर्च दादर में शासकीय प्राथमिक विद्यालय स्थित है जिसका बाउंड्री कारण किया जा रहा है जिसमें सुचारू रूप से गुणवत्ता विहीन है ऐसा लगता है की सीमेंट नहीं राख से चुने किया गया हो दीवाल को छूने से धूल जैसा उड़ रहा है उसे बाउंड्री वॉल में सरकार के द्वारा लाखों रुपए की लागत लगाकर बाउंड्री बनाने का निर्देश दिया गया है लेकिन एक पैसे का नहीं समझ में आ रहा है। उसे बाउंड्री वालों को बनते बनते लगभग एक से डेढ़ साल पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक काम को पूरा कर सरपंच संचिव के द्वारा विद्यालय परिसर को नहीं सोपा गया है। और अगर देखा जाए तो कहीं पहले स्टार अधूरा तो कहीं चुनाई अधूरा तो कहीं दीवाल ही तैयार नहीं किया गया है और काम को पेंडिंग में छोड़ दिया गया है जहां कोई अधिकारियों  कर्मचारी के द्वारा जाकर वहां मौके पर संज्ञान में नहीं लिया जाता है। और यह भी कहा जाता है कि अगर सरिया को खुले में छोड़ दिया जाता है तो बहुत जल्दी जंग लग जाता है तो कई सालों से पड़ा हुआ जंग वाला सरिया टूटने के कगार में भी आ चुके हैं ऐसे में दीवार क्या सक्सेसफुल हो पाएगी। और जानकारी के अनुसार बताया गया की लगभग 1 साल काम को पेंडिंग में रखकर सरपंच सचिव चल फिर कर भी देखने नहीं पहुंच पा रहे हैं। की बाउंड्री बच्चा की गिर गया।

मंत्री सारंग ने रचना टॉवर का निरीक्षण किया, परिसर में आधुनिक सुविधाओं के लिए निर्देश जारी

मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने किया रचना टॉवर का दौरा  रचना टॉवर परिसर में होगा सौंदर्यीकरण, पार्क, ओपन जिम और पोल लाइट लगाने के निर्देश भोपाल  सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत स्थित रचना टॉवर परिसर का दौरा कर क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। नागरिकों द्वारा क्षेत्र में बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण की मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को रचना टॉवर के समक्ष स्थित पेविंग के समीप सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने के लिए यहां पार्क का विकास किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके। मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि पार्क के साथ ही यहां ओपन जिम की भी व्यवस्था की जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिक नियमित रूप से व्यायाम कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती आबादी को देखते हुए इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क और ओपन जिम क्षेत्र की फेंसिंग कर उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए। मंत्री  सारंग ने क्षेत्र में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए रचना टॉवर के समक्ष पोल लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रचना टॉवर परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ किया जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। नागरिकों ने क्षेत्र के विकास के लिए मंत्री  सारंग का आभार व्यक्त किया। 

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