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छह नोड्स में अब तक 62 कंपनियों को भूमि आवंटित, 9 प्रमुख इकाइयों में उत्पादन शुरू

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2018 में स्थापित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से प्रदेश को रक्षा उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के छह रणनीतिक नोड्स (कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट) में तेजी से औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रहीं हैं। नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक ₹35,526 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत 2,040 हेक्टेयर भूमि में से 977.54 हेक्टेयर भूमि उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में रक्षा और संबद्ध विनिर्माण गतिविधियों के लिए 62 कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है, जबकि लगभग 11 कंपनियों के लिए लीज डीड की प्रक्रिया प्रगति पर है। रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में निवेश प्रस्तावों की बात करें तो कानपुर में ₹12,803 करोड़, झांसी में ₹11,738 करोड़, लखनऊ में ₹4,850 करोड़, अलीगढ़ में ₹4,490 करोड़, चित्रकूट में ₹880 करोड़ और आगरा में ₹607 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से प्रदेश में रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार हो रहा है। नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने शुरू किया उत्पादन कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जो भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इनमें अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा कानपुर में लगभग ₹1,500 करोड़ की लागत से स्थापित गोला-बारूद निर्माण संयंत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो इस कॉरिडोर का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। अलीगढ़ नोड में अमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने लगभग ₹330 करोड़ के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है। वहीं वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड और नित्या क्रिएशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छोटे हथियारों और प्रिसिशन आर्म्स कंपोनेंट्स का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। लखनऊ नोड बना रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र लखनऊ नोड तेजी से रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने लगभग ₹320 करोड़ के निवेश से टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है, जबकि ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने लगभग ₹300 करोड़ की लागत से ब्रह्मोस एनजी मिसाइल सिस्टम के निर्माण की दिशा में उत्पादन प्रारंभ किया है। इसके अलावा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस द्वारा रक्षा सुरक्षा उपकरणों और परिधानों का निर्माण भी शुरू किया गया है। वहीं, कानपुर नोड में ए.आर. पॉलिमर्स और आधुनिक मेटेरियल्स एंड साइंसेज जैसी कंपनियों ने क्रमशः बैलिस्टिक मेटेरियल्स और डिफेंस टेक्सटाइल्स का उत्पादन शुरू कर औद्योगिक गतिविधियों को नई गति दी है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में घोषित यह डिफेंस कॉरिडोर प्रदेश में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और उद्योग अनुकूल नीतियों के माध्यम से तेजी से निवेश आकर्षित कर रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से यह परियोजना केवल रक्षा विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्योगों को भी वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने का काम कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आने वाले वर्षों में प्रदेश में रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और निर्यात उन्मुख औद्योगिक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ईरान में अमेरिकी कोशिशें नाकाम! खामेनेई के बेटे की सरकार पर कोई संकट नहीं

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल बीते 13 दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। शुरुआती दिनों ही ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे, लेकिन अब भी देश की जनता का भरोसा अपने नेतृत्व पर कायम है। यह बात तो खुद अमेरिकी एजेंसियों ने भी स्वीकार की है। अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि ईरान की सरकार गिरने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अब भी जनता पर उसकी पकड़ बनी हुई है। तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने कहा कि ईरान की जनता पर लीडरशिप की पकड़ कायम है। इसका अर्थ यह है कि अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को जनता ने स्वीकार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ दिनों में यह जानकारी निकाली है। दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा गैस की भी किल्लत हो रही है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका का कहना है कि हम जल्दी ही जंग खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह ईरान के नेतृत्व का शायद जज्बा है या फिर उसे मिल रहा जनता का समर्थन है कि उसका कहना है कि जंग भले ही अमेरिका ने शुरू की थी, लेकिन इसे अब खत्म हम ही करेंगे। यह बात दिलचस्प है कि ईरान के शीर्ष नेता मारे गए हैं। फिर भी उसकी नई लीडरशिप को जनता ने ना सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि उसके साथ खड़ी है। ईरानी लीडरशिप को मिली ताकत से कैसे अमेरिका को झटका यह अहम इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर होगी। फिर लोकतंत्र बहाली के नाम पर वह दखल दे सकेगा और अपने किसी करीबी को कमान सौंपा देगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ऐसी उम्मीदें भी थीं, लेकिन जनता ने खामेनेई के बेटे को ही लीडर मान लिया है। ऐसे हालात तब हैं, जबकि अमेरिका लगातार हमले कर रहा है और मुजतबा खुद भी खतरे में हैं। जंग के पहले ही दिन मारे गए थे अयातुल्लाह खामेनेई, अब तक नहीं निकला जनाजा बता दें कि जंग के पहले ही दिन अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। उनका तब से अब तक जनाजा नहीं निकाला गया है। माना जा रहा है कि इस नमाज-ए-जनाजा में करोड़ों की भीड़ जुटेगी। इसी के कारण ईरानी लीडरशिप उन्हें अभी दफनाने से बच रहा है। यदि ऐसा कोई आयोजन हुआ तो अमेरिका और इजरायल एक बार फिर से बड़ी तबाही कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के हालात बनने पर ही शायद अब खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।  

28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

सावरकर टिप्पणी विवाद थमा, कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस किया बंद

मुंबई महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक आपराधिक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को बुधवार, 11 मार्च को बड़ी राहत दी है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आर.एल. नरवाडे की अदालत ने गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले को बंद कर दिया है। यह मामला उनके द्वारा हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा था, जो उन्होंने 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की थीं। अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हुए टिप्पणी की थी। राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत नासिक स्थित निर्भया फाउंडेशन के अध्यक्ष देवेंद्र भुटाडा ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 15 और 16 जून, 2022 को हिंगोली और अकोला में रैलियों में गांधी की टिप्पणियां मानहानि करने वाली और अपमानजनक थीं। किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था भुटाडा की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। सितंबर 2024 में नासिक अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन भी जारी किया था। बाद में राहुल गांधी को अदालत से जमानत मिल गई और उन्हें कार्यवाही में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति भी दी गई। सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। शिकायतकर्ता ने वापस ली शिकायत बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में आवेदन देकर मामला वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद ट्रायल जज ने मानहानि से जुड़ी पूरी कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।  

रामनवमी पर बड़ी संख्या में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन तथा रामनवमी की तैयारियों को लेकर गुरुवार को समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में तैयारियों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने पीएफसी स्थित सभाकक्ष में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों, जन प्रतिनिधियों व पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित आगमन के दृष्टिगत सभी तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता का रखा जाए विशेष ध्यान  समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियों के बारे में जानकारी दी, जिसमें एयरपोर्ट पर स्वागत, यात्रा मार्ग पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा अतिथियों के लिए आवश्यक प्रबंध शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता तथा आगंतुकों के लिए सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पूज्य संतों समेत अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों के लिए समुचित प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन व ट्रस्ट के पदाधिकारी समन्वय के साथ करें तैयारी  मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रशासन व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी समन्वय के साथ सभी तैयारियों को निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करें। सीएम ने पुलिस अधिकारियों को सभी सार्वजनिक स्थानों पर कड़ी निगरानी व ठोस सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने, खुफिया तंत्र व एंटी-ड्रोन कंट्रोल रूम को अलर्ट रखने के निर्देश दिए। रामनवमी की तैयारियों की भी की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनवमी के अवसर पर अयोध्या धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संबंध में भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं तथा फुटपाथों को खाली रखा जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो। सीएम योगी ने भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था करने तथा दर्शन-पूजन कार्यक्रम को स्क्रीन के माध्यम से भी प्रसारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रामनवमी प्रमुख पर्व है, इस अवसर पर अयोध्या धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध एवं देशविरोधी तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। मंदिर परिसर में बिना जांच के किसी को भी प्रवेश न दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। *लता मंगेशकर चौक से हनुमानगढ़ी तक गोल्फ कार्ट संचालित करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में रामनवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लता मंगेशकर चौक से हनुमानगढ़ी तक गोल्फ कार्ट संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें ज्यादा पैदल न चलना पड़े। सीएम ने इसके साथ ही वीआईपी मूवमेंट को न्यूनतम रखने पर भी जोर दिया, जिससे आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने निर्देश दिया कि पार्किंग व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। सड़कों के किनारे वाहनों की पार्किंग न होने दी जाए। सेवाभाव से विभिन्न स्थानों पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।  बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने परिक्रमा मार्ग एवं मंदिर म्यूजियम के निर्माण की प्रगति की भी जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री जी के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में कृषि मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, डॉ अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य गोपाल जी, ट्रस्ट्री अनिल मिश्रा, एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार, मंडलायुक्त राजेश कुमार, डीआईजी सोमेन बर्मा, जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर आदि मौजूद रहे।

IPL 2017 की धमाकेदार शुरुआत: युवराज सिंह की पारी से SRH ने RCB को हराया

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 19 वें सीजन (आईपीएल 2026) की शुरुआत 28 मार्च से हो रही है। बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के पहले 16 दिनों का शेड्यूल जारी कर दिया है। पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। आरसीबी पिछले सीजन विजेता रही थी। आरसीबी और एसआरएच 2017 में भी सीजन का पहला मुकाबला खेल चुकी हैं। इस मुकाबले में एसआरएच 35 रन से विजयी रही थी। यह मुकाबला राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम, हैदराबाद में खेला गया था। इस मैच में आरसीबी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए एसआरएच ने युवराज सिंह के 27 गेंदों पर 7 चौकों और 3 छक्कों की मदद से बनाए 62 रन, मोइसेस हेनरिक्स के 37 गेंदों पर बनाए 52 रन और शिखर धवन के 31 गेंदों पर बनाए 40 रन की मदद से 4 विकेट पर 207 रन बनाए थे। आरसीबी के लिए टाइमल मिल्स, अनिकेत चौधरी, चहल और बिन्नी ने 1-1 विकेट लिए थे। 208 रन का लक्ष्य हासिल करने उतरी आरसीबी 19.4 ओवर में 172 पर सिमट गई और 35 रन से मैच हार गई। आरसीबी के लिए क्रिस गेल ने सर्वाधिक 32 रन बनाए थे। इसके अलावा, केदार जाधव ने 31 और ट्रेविस हेड ने 30 रन की पारी खेली थी। एसआरएच के लिए आशीष नेहरा, भुवनेश्वर कुमार, राशिद खान ने 2-2, जबकि दीपक हुड्डा और बिपुल शर्मा ने 1-1 विकेट लिए थे। एसआरएच ने उस सीजन प्लेऑफ में जगह बनाई थी, लेकिन आरसीबी टॉप 4 से बाहर रही थी। दोनों टीमों के बीच 2016 का फाइनल खेला गया था जिसमें एसआरएच विजेता रही थी। देखना होगा कि आईपीएल 2026 के पहले मुकाबले में बाजी आरसीबी या एसआरएच किसके हाथ लगती है। पिछला सीजन जीतने के बाद आरसीबी के हौसले बुलंद हैं, तो एसआरएच ने भी पिछले 2 सीजन में अपने खेल से फैंस को रोमांचित किया है।  

8th Pay Commission अपडेट: 6% वार्षिक इंक्रीमेंट और नए DA फॉर्मूले की मांग, सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

16 मार्च से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, लोकसंस्कृति और जनसंचार के विविध आयामों पर होगी चर्चा

जयपुर पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय द्वारा “लोकसंस्कृति और जनसंचार” विषय पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 16 मार्च से किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य लोकसंस्कृति और आधुनिक जनसंचार माध्यमों के अंतर्संबंधों पर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय ने संगोष्ठी का पोस्टर जारी करते हुए कहा कि लोकसंस्कृति और जनसंचार माध्यमों के बीच संबंधों पर होने वाले विविध व्याख्यान और शोध समाज तथा राष्ट्र को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोक परंपराओं के संरक्षण और समकालीन संदर्भों में उनके सशक्त प्रस्तुतीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनोज लोढा ने बताया कि दहमीकलां स्थित विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से विद्वान, शोधार्थी, मीडिया विशेषज्ञ तथा लोकसंस्कृति के अध्येता भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के प्रमुख विषयों में भारतीय लोकगीत और जनसंचार माध्यम, लोकनृत्य और दृश्य माध्यम, लोकसंस्कारों का मीडिया प्रतिनिधित्व, लोकदेवता और डिजिटल मंच, डिजिटल मीडिया एवं लोकसंस्कृति का अंतर्संबंध तथा लोक अध्ययन पर जनसंचार शोध जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। आयोजकों के अनुसार यह संगोष्ठी लोक परंपराओं और आधुनिक मीडिया के बीच संवाद स्थापित करने के साथ-साथ शोध और अकादमिक दृष्टिकोण को भी मजबूत करने का मंच प्रदान करेगी।

ड्यूल ग्रिड पावर सप्लाई से लगातार संचालन सुनिश्चित करने के लिए दोहरी बिजली आपूर्ति प्रणाली का प्रावधा

लखनऊ राज्य को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर योगी सरकार विशेष जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर पॉलिसी 2021 के अंतर्गत डेटा सेंटर पार्क के लिए ऊर्जा आपूर्ति और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सुनिश्चित करने को लेकर कई कदम उठाए हैं।  इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर टेक निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। डेटा सेंटर उद्योग को स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति कराने को लेकर योगी सरकार ने दोहरी ग्रिड बिजली व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था डेटा सेंटर संचालन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है। ग्रेटर नोएडा में हीरानंदानी समूह द्वारा विकसित प्रदेश का पहला डेटा सेंटर पार्क संचालन में है। अडानी और एनटीटी जैसी कंपनियों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश सरकार ने डेटा सेंटर पार्क और डेटा सेंटर इकाइयों के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इसके तहत परियोजनाओं के लिए समर्पित बिजली फीडर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए। योगी सरकार का मानना है कि लगातार बिजली आपूर्ति डेटा सेंटर उद्योग के लिए निवेश आकर्षित करने का एक अहम कारक है। इसके साथ ही ड्यूल ग्रिड पावर सप्लाई का भी प्रावधान नीति में किया गया है। इस व्यवस्था के तहत डेटा सेंटर पार्कों को दो अलग-अलग बिजली स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसी एक ग्रिड में समस्या आने की स्थिति में भी डेटा सेंटर का संचालन प्रभावित नहीं होगा। डेटा सेंटर उद्योग में निरंतर संचालन अत्यंत आवश्यक होता है और ड्यूल ग्रिड प्रणाली इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योगी सरकार ने ऊर्जा लागत को कम करने के लिए ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली खरीदने की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इसके अंतर्गत डेटा सेंटर इकाइयों को खुले बाजार से प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है। इससे कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार सस्ती और स्थिर ऊर्जा स्रोतों का चयन कर सकेंगी। इससे संचालन लागत कम होगी और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनेगा। प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर क्लस्टर्स विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार की योजना के अनुसार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट होगी। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम जारी है। योगी सरकार अब तक 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी कर चुकी है, जिनमें 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं।  बिजली आपूर्ति के अलावा डेटा सेंटर पार्कों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, सीवर और अन्य औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि डेटा सेंटर परियोजनाओं को आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर उपलब्ध कराया जाए।  विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बिजली व्यवस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा सेंटर उद्योग के विकास की आधारशिला होते हैं। उत्तर प्रदेश में नीति आधारित प्रोत्साहन और बेहतर ऊर्जा व्यवस्था के कारण कई बड़ी कंपनियां यहां निवेश को लेकर रुचि दिखा रही हैं।

क्रिकेट में करप्शन पर कड़ा प्रहार: ICC ने जेवन सियरल्स व दो अधिकारियों को किया सस्पेंड

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने क्रिकेट वेस्टइंडीज और आईसीसी के एंटी-करप्शन कोड (भ्रष्टाचार रोधी नीति) के तहत वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर जेवन सियरल्स, टाइटंस टीम के मालिक चितरंजन राठौड़ और टीम अधिकारी ग्रिफिथ पर सख्त कार्रवाई की है। आईसीसी ने एक बयान में कहा, “तीनों लोगों पर ‘बिम10’ टूर्नामेंट 2023/24 से जुड़े आरोप हैं, जो क्रिकेट वेस्टइंडीज एंटी-करप्शन कोड के दायरे में आता है। इसके अलावा, ग्रिफिथ पर अंतरराष्ट्रीय मैचों से जुड़ा एक आरोप है जो आईसीसी एंटी-करप्शन कोड के दायरे में आता है।” आईसीसी ने कहा कि तीनों को तुरंत प्रभाव से क्रिकेट से कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, गवर्निंग बॉडी ने आरोपों का जवाब देने के लिए 11 मार्च, 2026 से 14 दिन का समय दिया है। राठौड़ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत तीन और सियरल्स पर चार चार्ज लगे हैं, जबकि टीम ग्रिफिथ पर चार चार्ज और आईसीसी कोड के तहत एक चार्ज लगा है। क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के आर्टिकल 2.1.1 का उल्लंघन – 2023/24 में ‘बिम10’ टूर्नामेंट के मैचों के नतीजे, कंडक्ट या किसी और पहलू को फिक्स करना, फिक्स करने की कोशिश करना या गलत तरीके से प्रभावित करना, या किसी, सहमति या कोशिश में शामिल होना। क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के आर्टिकल 2.1.4 का उल्लंघन – क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत जुर्म करने के लिए खिलाड़ियों को उकसाना, निर्देशित करना, बढ़ावा देना या सुविधा देना। क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के आर्टिकल 2.4.4 का उल्लंघन – क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत संभावित अपराधों के संबंध में अधिकारियों द्वारा की गई उचित जांच में सहयोग न करना या सहयोग न करना। सियरल्स और गिफिथ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के आर्टिकल 2.4.2 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है—क्रिकेट वेस्टइंडीज को ऐसे किसी भी अप्रोच या इनविटेशन की जानकारी न देना जो क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा, ग्रिफिथ पर “आईसीसी कोड के आर्टिकल 2.4.7 के उल्लंघन – संभावित भ्रष्ट आचरण की एसीयू की जांच में रुकावट डालना, ऐसी जानकारी को छिपाना या उससे छेड़छाड़ करना जो जांच के लिए जरूरी हो सकती थी, या जो सबूत बन सकती थी या भ्रष्ट आचरण के सबूत की खोज का कारण बन सकती थी”, का आरोप लगाया गया है। सियरल्स वेस्टइंडीज अंडर-19 टीम की तरफ से खेल चुके हैं। वह 2018 में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए आईपीएल में भी खेले हैं।  

ऑस्कर 2026 के ‘स्वैग बैग’ का खुलासा: 23 लग्जरी गिफ्ट्स, कीमत ₹3.20 करोड़

लॉस एंजिल्स सिनेमा की दुनिया के सबसे प्रतिष्‍ठ‍ित अवॉर्ड Oscars 2026 की घोषणा में अब सिर्फ 4 दिन बचे हैं। 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) का ऐलान रविवार, 15 मार्च, 2026 को हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में होने वाला है। इसमें साल 2025 की बेस्ट फिल्मों, बेस्‍ट एक्‍टर्स को 24 अलग-अलग कैटेगरी में सम्मानित किया जाएगा। हम इससे पहले इस बार के ऑस्‍कर नॉमिनेशंस की चर्चा कर चुके हैं। लेकिन आज बात उस गिफ्ट बैग की करेंगे, जो हर साल ऑस्कर नॉमिनीज को दिया जाता है। एकेडमी अवॉर्ड पाने वाले हर नॉम‍िनीज को यह शानदार ‘एवरीबडी विन्स’ गिफ्ट बैग मिलता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार साल 2026 में जो गिफ्ट बैग दिया जा रहा है, उसकी कीमत कथ‍ित तौर 3.20 करोड़ रुपये है। आइए, जानते हैं कि इस बार गिफ्ट बैग में क्‍या-क्‍या होगा। यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि ये ‘गिफ्ट बैग’ एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ऑफिशियली नहीं बांटती। लेकिन ये बैग अवॉर्ड सीजन की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक बन गए हैं। ऑस्कर सेरेमनी में ‘एवरीवन विन्स’ गिफ्ट बैग लॉस एंजिल्स की मार्केटिंग फर्म डिस्टिंक्टिव एसेट्स बांट रही है। इसके फाउंडर लैश फेरी हैं, जो लगातार 24वें साल यह काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस साल के बैग की कीमत कथित तौर पर लगभग $350,000 (3.2 करोड़ रुपये) है, जिसमें लग्‍जरी वेकेशन से लेकर वेलनेस ट्रीटमेंट और महंगे लाइफस्टाइल आइटम तक शामिल हैं। Oscars 2026 ग‍िफ्ट बैग में होंगे ये 23 लग्‍जरी आइटम और सर्विस     कोस्टा रिका में कंसीयज और शेफ के साथ प्राइवेट लग्जरी विला में ठहरने का गिफ्ट कूपन     फिनिश लैपलैंड में आर्कटिक विला रिट्रीट, जहां से नॉर्दर्न लाइट्स के नजारे दिखते हैं     श्रीलंका के संतानी रिजॉर्ट में 10 दिन का वेलनेस रिट्रीट     कैलिफोर्निया में गोल्डन डोर में 7 दिन का वेलनेस प्रोग्राम     स्कल्प्ट एंड लिफ्ट फेशियल एक्सपीरियंस और लग्जरी स्किनकेयर प्रोडक्ट्स     स्विस लग्जरी स्किनकेयर सेट और वायरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स     फेशियल और मसाज ट्रीटमेंट के लिए स्पा क्रेडिट     लग्जरी सनस्क्रीन और ब्यूटी प्रोडक्‍ट्स     न्यूयॉर्क में $25,000 (23 लाख रुपये) का फेशियल रिजुविनेशन प्रोसीजर     डेंटल स्माइल मेकओवर कंसल्टेशन     सेलिब्रिटी डिवोर्स अटॉर्नी जेम्स सेक्सटन की ओर से कस्टम प्री-नपशियल एग्रीमेंट     लग्जरी टी टेस्टिंग असॉर्टमेंट     एडिबल गोल्ड क्रिस्टल के साथ डार्क चॉकलेट प्रेट्जेल     चॉकलेट कोटिंग वाले फ्रूट स्नैक्स और बादाम बाइट्स     कैनबिस और THC प्रोडक्ट्स     बेबो का लग्जरी कैनेबिस गिफ्ट सेट     THC ड्रिंक पैकेट और कैनेबिस-इनफ्यूज्ड ड्रिंक्स     अल्कोहल-फ्री THC मार्गरिटा     जापानी स्टाइल वाल डिजाइनर लगेज बैग     आरामदायक बॉडी-सपोर्टिव अंडरवियर     कस्टम होम इंटीरियर डिजाइन सर्विस     क्रिप्टोकरेंसी कोल्ड-स्टोरेज वॉलेट     लग्जरी फाउंटेन पेन क्‍यों दिए जाते हैं Oscars ग‍िफ्ट बैग Oscars में नॉम‍िनेशन पाने वाली हर एंट्री को यह गिफ्ट बैग दिया जाता है। यह दुनिया से सबसे प्रतिष्‍ठ‍ित फिल्‍म अवॉर्ड में नाम जुड़ने के लिए सेलिब्रेशन जैसा है। फिर चाहे वो ऑस्कर जीतें या ना जीतें। मार्केटर लैश फेरी, बीते ढाई दशक से इन्हें क्यूरेट कर रहे हैं। वह कहते हैं कि यह इनिशिएटिव छोटे बिजनेस, महिलाओं द्वारा शुरू किए गए ब्रांड और माइनॉरिटी-ओन्ड कंपनियों को प्रमोट करने में भी मदद करता है। कई ब्रांड अपने प्रोडक्ट को शामिल करने के लिए पैसे देते हैं, उम्मीद करते हैं कि हॉलीवुड की सबसे बड़ी रात से ग्लोबल एक्सपोजर उनके ऑफर को ज्यादा बड़े ऑडियंस तक पहुंचाएगा। Oscars 2026 के नॉम‍िनेशन, ‘सिनर्स’ ने रचा इतिहास 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशंस का ऐलान 22 जनवरी, 2026 को बेवर्ली हिल्स के सैमुअल गोल्डविन थिएटर में किया गया था। इसमें ‘सिनर्स’ को सबसे अधकि 16 नॉमिनेशन मिले और इसने ऑस्कर के इतिहास में नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले ‘ऑल अबाउट ईव’ (1950), ‘टाइटैनिक’ (1997) और ‘ला ला लैंड’ (2016) को सबसे अध‍िक 14 नॉमिनेशन मिले थे। इसी के साथ 30 साल के ट‍िमोथी शैलेमे को 3 नॉम‍िनेशन मिले हैं। वह मार्लन ब्रैंडो के बाद यह कारनामा करने वाले सबसे कम उम्र के एक्टर बन गए हैं। वैगनर मौरा, बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल कैटेगरी में नॉमिनेट होने वाले पहले ब्राजीलियन बने हैं। भारत में कब और कहां देखें Oscars 2026 सेरेमनी लॉस एंजिल्स में होने वाले ऑस्‍कर सेरेमनी का भारत में भी सीधा प्रसारण होगा। आप इसे सोमवार, 16 मार्च, 2026 की सुबह तड़के 4:30 बजे से स्‍टार मूवीज टीवी चैनल या फिर OTT प्‍लेटफॉर्म JioHotstar पर लाइव देख सकते हैं। ऑस्‍कर 2026 के मंच पर दिखेंगी प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड की ‘देसी गर्ल’ प्रियंका चोपड़ा जोनस भी ऑस्‍कर 2026 के मंच पर नजर आएंगी। उन्‍हें अवॉर्ड प्रेजेंटर चुना गया है। खास बात यह है कि प्रियंका चोपड़ा स्‍टेज पर रॉबर्ट डाउनी जूनियर, ऐनी हैथवे, विल अर्नेट, ग्वेनेथ पाल्ट्रो और पॉल मेस्कल जैसे बड़े नाम के साथ नजर आएंगी। भारतीय मूल की Geeta Gandbhir को दो नॉम‍िनेशन भारतीय मूल की अमेरिकी फिल्ममेकर Geeta Gandbhir को इस साल की ऑस्कर डॉक्यूमेंट्री रेस में दो नॉम‍िनेशन मिले हैं। गीता को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर कैटेगरी में ‘द परफेक्ट नेबर’ और बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट कैटेगरी में ‘द डेविल इज बिजी’ के लिए नॉमिनेशन मिला है।

ओरल कैंसर रोकथाम के लिए बड़ा कदम: भोपाल GMC में बनेगा नोडल सेंटर, पूरे MP के डॉक्टरों को ट्रेनिंग

भोपाल  प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में पदस्थ दंत चिकित्सकों (डेंटिस्ट) और चिकित्सा अधिकारियों में मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान के लिए उनकी तकनीकी समझ बढ़ाई जाएगी। इसके लिए भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रदेश भर में मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नोडल ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका दी है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और विशेषज्ञों का प्रशिक्षण अक्सर देखा गया है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य संक्रमण या छाला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देरी के कारण मरीज तब अस्पताल पहुंचता है जब बीमारी एडवांस चरण (थर्ड या फोर्थ स्टेज) में होती है। जीएमसी में होने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान डेंटल और ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डेंटिस्ट और चिकित्सा अधिकारियों को सिखाएंगे कि कैसे मुंह के अंदर होने वाले सफेद दाग (ल्यूकोप्लाकिया), लाल चकत्ते या लंबे समय से न भरने वाले छालों को देखकर कैंसर की आशंका का सटीक पता लगाया जाए। मृत्यु दर में कमी और मास्टर ट्रेनर मॉडल अधिकारियों का कहना है कि इस मुहिम से न केवल प्रदेश में ओरल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि बड़े अस्पतालों पर बढ़ने वाला मरीजों का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। यह प्रशिक्षण ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ मॉडल पर आधारित होगा, यानी यहाँ से सीखकर जाने वाले डॉक्टर अपने जिले के अन्य छोटे केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। रेफरल सिस्टम होगा मजबूत एक बार जब जिलों में पदस्थ डॉक्टर इस स्क्रीनिंग में माहिर हो जाएंगे, तो वे संदिग्ध मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर सकेंगे। इससे मरीजों का समय बचेगा और इलाज की सफलता की दर बढ़ेगी। कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों पर रहेगी नजर सफेद या लाल धब्बे – मुंह के अंदर ऐसे पैच जो रगड़ने पर भी न हटें। असामान्य गांठ – मसूड़ों या गालों के अंदर की तरफ गांठ का महसूस होना। पुराने छाले – ऐसे छाले जो दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा के बाद भी ठीक न हों। जबड़े में जकड़न – मुंह खोलने में परेशानी होना या निगलते समय दर्द होना। विभागाध्यक्ष का वक्तव्य प्रदेश के 51 जिलों के दंत चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ओरल कैंसर के शीघ्र निदान पर है। यदि शुरुआती चरण में ही कैंसर के लक्षणों की पहचान हो जाए, तो मरीज की जान बचाना काफी आसान हो जाता है। – डॉ. अनुज भार्गव, विभागाध्यक्ष, डेंटल सर्जरी विभाग, जीएमसी भोपाल

की, आज ‘बनारसी हनी’ बना रहा उनकी पहचान योगी सरकार की योजना के तहत मिला ब्याजमुक्त ऋण, पूंजी की बाधा दूर होने से कारोबार को मिली रफ्तार

लखनऊ योगी सरकार के ‘नारी सशक्तीकरण’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को वाराणसी के ओदार गांव की शिवानी पटेल धरातल पर उतार रहीं हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के जरिए शिवानी ने न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि नारी सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण पेश किया है। उन्होंने मधुमक्खी पालन को आज ‘बनारसी हनी’ जैसे सफल ब्रांड में तब्दील कर दिया है। शिवानी ने बताया कि, एक समय था जब वह निजी क्षेत्र में नौकरी करती थीं लेकिन उनका मन अपना व्यवसाय करने का था । इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया और मधुमक्खी के महज  5 बक्सों से अपने सफर की शुरुआत की। किसी भी नए व्यवसाय के लिए सबसे बड़ी बाधा पूंजी के इंतजाम की  होती है। शिवानी के सपनों को तब पंख मिले जब उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA)’ योजना के बारे में पता चला। योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से शिवानी को वित्तीय सहायता मिली। इस योजना के तहत शिवानी को ब्याजमुक्त ऋण मिला। सरकार के इस सहयोग ने मधुमक्खियों के और बक्से खरीदे। अब उनको अच्छी कमाई हो रही है।  शिवानी बताती हैं कि योजना के तहत ऋण का लाभ मिलने के बाद शहद का उत्पादन इतना बढ़ा कि उन्होंने अपना ब्रांड खड़ा कर लिया। वे खुद बक्सों की निगरानी करतीं हैं। परिजनों की मदद से शहद निकालतीं हैं और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करतीं हैं। उनके पास ‘मल्टी-फ्लोरल’ और ‘सरसों’  जैसे विभिन्न प्रकार के शहद उपलब्ध हैं। शिवानी पटेल की यात्रा यह साबित करती है कि यदि सही विजन और सरकार का साथ मिले तो महिलाएं किसी भी बाधा को पार कर सकती हैं।

पेशावर दूतावास बंद करने के पीछे क्या है वजह? अमेरिका के फैसले से मची हलचल

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला ले लिया है। यह दूतावास अफगान सीमा के सबसे नजदीक स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशन था और 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिका के हमले से बाद से एक प्राथमिक संचालन केंद्र था। बुधवार को मिली अधिसूचना की एक प्रति के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह अमेरिकी संसद को वाणिज्य दूतावास को बंद करने के अपने इरादे के बारे में सूचित किया और कहा कि इससे प्रति वर्ष 75 लाख अमेरिकी डॉलर की बचत होगी। अमेरिका ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की उसकी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि पेशावर वाणिज्य दूतावास में 18 अमेरिकी राजनयिक और अन्य सरकारी कर्मचारी तथा 89 स्थानीय कर्मचारी कार्यरत हैं। नोटिस में कहा गया है कि मंत्रालय इसे बंद करने के लिए 30 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करेगा। अमेरिका ने क्यों किया बंद? जानकारी के मुताबिक इस फैसले का ईरान युद्ध से लेना देना नहीं है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग सभी संघीय एजेंसियों में कटौती शुरू करने के बाद से यह कदम एक साल से अधिक समय तक विचाराधीन रहने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस बीच ईरान युद्ध के कारण कराची और पेशावर सहित विभिन्न पाकिस्तानी शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके कारण अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों ने अस्थायी रूप से अपना संचालन निलंबित कर दिया है। अमेरिकी दूतावास में हुई थी हिंसा इससे पहले इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाल में हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सरकार ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी बढ़ा दी थी। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में एक मार्च को 12 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए और लगभग 47 अन्य घायल हो गए। लाहौर और इस्लामाबाद में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए थे।

यूपी के किसानों के खाते में 21वीं किस्त तक आई 94,668.58 करोड़ की धनराशि

लखनऊ मोदी-योगी सरकार अन्नदाता किसान की समृद्धि को बढ़ा रही है। डबल इंजन सरकार खेत से लेकर किसानों के सम्मान तक निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी असम से किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त भेजेंगे। इससे उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। इनके खाते में डीबीटी के माध्यम से सीधे 4335.11 करोड़ रुपये भेजे जाएंगे। यूपी के किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की अब तक (21वीं किस्त) 94,668.58 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी जा चुकी है।  प्रतिवर्ष तीन किस्त में दी जाती है छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता   शुक्रवार को जारी होने वाली पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त से उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। इन किसानों के खाते में 4335.11 करोड़ की धनराशि आएगी। योजना की धनराशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित की जाती है। इसमें पात्र किसान परिवार के एक सदस्य को प्रतिवर्ष छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता वर्ष में तीन किस्त में प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2025 को कोयम्बटूर से सम्मान निधि का लाभ किसानों को दिया था।  यूपी के किसानों के खाते में आ चुके हैं 94668.58 करोड़ रुपये  उत्तर प्रदेश के किसानों के खाते में 21वीं किस्त तक 94668.58 करोड़ रुपये की धनराशि आ चुकी है। शुक्रवार को 4335.11 करोड़ जारी होने के बाद यह राशि 99003.69 करोड़ रुपये हो जाएगी।  वर्ष      धनराशि  2018-19     2238.92 करोड़  2019-20      11006.87 करोड़  2020-21      14,432.14 करोड़  2021-22      15,775.52 करोड़  2022-23      12,454.32 करोड़  2023-24     13,808.48 करोड़  2024-25      15,594.74 करोड़  2025-26  (अप्रैल-जुलाई)    5043.33 करोड़ 2025-26  (अगस्त-नवंबर)  4314.26 करोड़  2025-26  (दिसंबर-मार्च)   4335.11 करोड़ (यह राशि शुक्रवार 13 मार्च को खाते में भेजी जाएगी) कुल-   99003.69 करोड़ रुपये

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