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मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण जल व्यवस्था सुधारने की दिशा में लिया ऐतिहासिक कदम

छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।           मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।               मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।            उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।              मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।                केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।            कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

NDC के सैन्य-गैर सैन्य ट्रेनी अधिकारियों ने की CM साय से भेंट, नक्सलवाद खत्म करने का श्रेय डबल इंजन सरकार को

 रायपुर छत्तीसगढ़ की हमारी धरती सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है. इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य और सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया. इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया. अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की. उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया. मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है. उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. सीएम साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है, कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं. छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है. इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी. कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है. प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है. इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए. विदेशी मेहमानों ने कहा- अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा  अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है. उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की. एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है, जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं, जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया. इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, आईजी ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है. उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है. इस वर्ष 66वां प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है. प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया. इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया. अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की.

एक दिन में दो बड़े शिकार, इजरायल ने मारे ईरान के 2 कमांडर, IRGC और बासिज फोर्स पर हुआ प्रहार

तेहरान  इजरायल के ताजा हमले में ईरान को 2 तगड़े झटके लगे हैं. ईरान ने कहा है कि इजरायली हवाई हमले में इस्लामिक रिव्यूलेशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गई है. इसके अलावा एक दूसरे हमले में ईरान के बासिज फोर्स के खुफिया प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी की मौत हो गई है।  ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता और जनसंपर्क के उप-प्रमुख थे. उन्हें जुलाई 2024 में IRGC के कमांडर-इन-चीफ़ हुसैन सलामी ने इस पद पर नियुक्त किया गया था. 1957 में जन्मे नैनी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे. इस जंग के दौरान वह जख्मी भी हुए थे।  नैनी के पास उनके पास सेकेंड ब्रिगेडियर जनरल का पद था. नैनी अक्सर IRGC की ओर से बयान जारी करते थे, जिनमें ईरान की सैन्य तत्परता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के बारे में चेतावनियां होती थीं।  IRGC के प्रवक्ता थे अली मोहम्मद नैनी मार्च 2026 के मध्य में बढ़ते संघर्ष के बीच उन्होंने दावा किया कि ईरान कम से कम छह महीने तक चलने वाले हाई इंटेंसिटी वाले युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है. उन्होंने कहा कि कई नई पीढ़ी की मिसाइलों और ड्रोनों का अभी तक उपयोग नहीं किया गया है।  मोहम्मद नैनी ईरान-इराक जंग (1980-88) की पूरी अवधि के दौरान फ्रंटलाइन पर रहे. लगभग 8 साल तक उन्होंने जंग में अलग अलग रोल में काम किया।  युद्ध के पहले साल उन्होंने क़द्र बटालियन के जनसंपर्क प्रमुख के रूप में सेवा की. उन्होंने सर्पोल-ए जहाब में अबूजर बैरक में भी जनसंपर्क और ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली. बाद में वे नजफ मुख्यालय में फ्रंटलाइन प्रचार के डिप्टी के रूप काम कर रहे थे।  इजरायल ने कहा है कि उसने ईरानी शासन से जुड़ी 130 से ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर साइटों पर हमला किया है. इन टारगेट में पश्चिमी और मध्य ईरान में बैलिस्टिक मिसाइल साइटें, UAV और डिफेंस सिस्टम शामिल थीं।  इजरायल ने बयान में कहा गया, “इजरायल वायु सेना पश्चिमी और मध्य ईरान में हमले जारी रखे हुए है, ताकि वहां से इजरायल की ओर होने वाली गोलाबारी के दायरे को जितना हो सके कम किया जा सके और ईरान पर अपनी हवाई श्रेष्ठता का विस्तार किया जा सके।  बासिज फोर्स के इंटेलिजेंस चीफ थे जनरल इस्माइल अहमदी बासिज के खुफिया विभाग के प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी IRGC से जुड़े एक अधिकारी थे. वे संगठन में सुरक्षा और खुफिया भूमिका निभाते थे. वे बुशहर प्रांत के मूल निवासी थे।  उनकी भूमिका बासिज में सुरक्षा और खुफिया से जुड़ी थी. वे  कई बार IRGC कमांडर हुसैन सलामी द्वारा सम्मानित किए गए थे. वे बासिज के कमांडर शहीद घुलामरज़ा सुलेमानी के सहयोगी और डिप्टी थे. बासिज के खुफिया प्रमुख के रूप में संगठन में उनकी भूमिका आंतरिक सुरक्षा, जासूसी-रोकथाम और वैचारिक निगरानी की थी।  17  मार्च को अली लारिजानी मारे गए इससे पहले इजरायल के हमले में ईरान के डी फैक्टो लीडर अली लारिजानी की 17 मार्च 2026 को मौत हो गई थी. यह हमला रात में हुआ था जब वे अपनी बेटी के घर पर थे. इस हमले में उनके बेटे, कुछ अंगरक्षक और अन्य साथी भी मारे गए।  लारिजानी को खामेनेई की मौत के बाद ईरान का अस्थायी प्रमुख माना जा रहा था. उनकी मौत ने ईरान के नेतृत्व में बड़ा संकट पैदा किया है। 

गौमांस विवाद के बाद असलम पर NSA, जमानत मिलने के बावजूद जेल गेट से फिर ले गई पुलिस

भोपाल  बहुचर्चित भोपाल स्लॉटर हाउस मामले में 24 घंटे के भीतर ऐसा जबरदस्त मोड़ आया कि सब दंग रह गए। कोर्ट से जमानत मिलने की खुशी अभी अधूरी ही थी कि जेल की चौखट पर ही असलम कुरैशी की आजादी छिन गई। पुलिस ने कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए उसे फिर से हिरासत में ले लिया है और अब उस पर एनएसए यानी रासुका के तहत कार्रवाई की जा रही है। जेल के बाहर मची अफरातफरी असलम के परिजनों का आरोप है कि बुधवार रात करीब 10 बजे जैसे ही वह जेल से बाहर निकला, उसे जबरन एक लाल रंग की गाड़ी में बिठाकर ले जाया गया। परिजनों ने भौंरी बाईपास तक गाड़ी का पीछा भी किया, लेकिन पुलिस की फुर्ती के आगे वे नाकाम रहे। जब वे गांधी नगर थाने पहुंचे, तब जाकर पता चला कि यह कोई किडनैपिंग नहीं बल्कि पुलिस की प्रिवेंटिव एक्शन थी। जेल के बाहर 100 प्रदर्शनकारी हो गए इकट्ठा असलम की रिहाई की खबर मिलते ही जेल के बाहर 50 से 100 के करीब प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे। नारेबाजी और बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस को डर था कि त्योहारों के इस मौसम में शहर की शांति भंग हो सकती है। इसी इनपुट के आधार पर कलेक्टर ने तत्काल डिटेंशन वारंट जारी कर दिया। गो-मांस मिलने पर हुआ था हंगामा यह पूरा मामला भोपाल के एक स्लॉटर हाउस से जुड़ा है जहां भारी मात्रा में संदिग्ध प्रतिबंधित मांस मिलने का आरोप है। असलम कुरैशी इस स्लॉटर हाउस का ऑपरेटर है। उसे पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बुधवार को सेशन कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। अब एनएसए लगने के बाद उसकी मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज की फाइनल टेस्टिंग, इमरजेंसी ब्रेक और स्टेशन प्रबंधन की पूरी जांच

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काउंटडाउन शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अनुसार, मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च 2026 तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है।  MPMRCL की ओर से बताया गया कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया और स्टेशन मैनेजमेंट, यात्रियों की सुविधाओं, गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और आपातकालीन स्थितियों जैसे पैमानों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया।  मेट्रो रेल प्रायोरिटी कॉरिडोर के 6 किलोमीटर लंबे रूट पर कमर्शियल ऑपरेशन 31 मई 2025 को शुरू किए गए थे।  MPMRCL के मैनेजिंग डायरेक्टर एस कृष्णा चैतन्य ने कहा, “CMRS से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के दूसरे चरण के कमर्शियल ऑपरेशन जल्द ही शुरू हो सकते हैं।  मूल योजना के अनुसार, शहर में 31.32 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल कॉरिडोर 7500.8 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है।   इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय और कमर्शियल इलाकों में आई बाधाओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई, और अब इसकी लागत बढ़ने की उम्मीद है।   

परीक्षा घोटालों पर सख्ती: विधेयक पास, सीएम साय ने कहा—मेधावी छात्रों का होगा सम्मान

रायपुर  छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और घोटालों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026 सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से यह विधेयक पारित किया गया. नए कानून के तहत नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थियों और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं. दोषी पाए जाने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं नकल में संलिप्त अभ्यर्थियों को तीन वर्षों तक किसी भी भर्ती परीक्षा से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जाएगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि युवा राज्य के विकास के केंद्र में होते हैं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में उनके भविष्य के साथ अन्याय हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएससी जैसी संस्थाओं में भ्रष्टाचार हुआ. प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए. साय ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी, जिसके चलते कई आरोपी जेल तक पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि यह कानून नकल गिरोहों पर निर्णायक कार्रवाई के लिए बनाया गया है. संगठित अपराध की स्थिति में आरोपियों की संपत्ति जब्त करने और कुर्की करने का भी प्रावधान किया गया है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के जरिए नकल करने वालों पर विशेष रूप से सख्ती बरती जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कानून का दायरा व्यापक होगा और यह पीएससी, व्यापमं, निगम-मंडल समेत सभी भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा. जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच पुलिस उप निरीक्षक (SI) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा. आवश्यकता पड़ने पर सरकार अन्य एजेंसियों से भी जांच करा सकेगी. उन्होंने कहा कि कानून में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी तय की गई है. परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है. विपक्ष का समर्थन, राजनीतिक टिप्पणी पर आपत्ति नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी. हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व सरकार पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए तथा ध्यान केवल छात्रों के हित पर केंद्रित रहना चाहिए.

एक्शन मोड में प्रशासन: खनिज, राजस्व और पुलिस की रेड में 14 वाहन व मशीनें जब्त

आरंग महानदी से रेत के अवैध दोहन का काला कारोबार करने वालों पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद रायपुर खनिज विभाग, राजस्व और आरंग पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात एक बड़ा ‘स्ट्राइक’ करते हुए करोड़ों की मशीनरी और वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है. प्रशासन को सूचना मिली थी कि आरंग के कुम्हारी, कुरूद और मोहमेला घाटों पर रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. योजनाबद्ध तरीके से की गई इस छापेमारी में प्रशासन ने रेत के अवैध परिवहन में लगे 11 हाइवा वाहन, नदी के बीच से रेत निकालने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा एक चैन माउंटेन मशीन और घाटों पर लोडिंग के लिए तैनात दो जेसीबी मशीन को जब्त किया है. इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए जिले के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभाला. इसमें मुख्य रूप से एएसपी, रायपुर ग्रामीण अभिषेक झा, खनिज अधिकारी उमेश भार्गव, नायब तहसीलदार गजानंद सिदार, आरंग थाना प्रभारी हरीश साहू शामिल रहे. पकड़े गए सभी वाहनों और मशीनों को जब्त कर गिधपुरी, उपरवारा और आसपास के स्थानीय थानों की सुपुर्दगी में दे दिया गया है. इन सभी पर खनिज अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है. इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है और कई लोग घाट छोड़कर भाग खड़े हुए. ग्रामीणों ने ली राहत की सांस आरंग महानदी से बेतहाशा रेत चोरी के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था, बल्कि भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कें भी जर्जर हो रही थीं. प्रशासन की इस सख्ती के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि अब अवैध उत्खनन पर पूरी तरह से लगाम लगेगी.

छत्तीसगढ़ में अफीम नेटवर्क का विस्तार: रायगढ़ से एक आरोपी दबोचा गया

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ जिले में अफीम की खेती पकड़ी गई है, जहां तरबूज, ककड़ी की खेती के बीच करीब एक एकड़ में अफीम की खेती हो रही थी। मामले की सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची है। पूरा मामला तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट का है। बताया जा रहा कि आमाघाट के नदी किनारे करीब एक एकड़ में अफीम की खेती हो रही थी। इसकी जानकारी मिलते ही एसपी, एडिशनल एसपी समेत जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस झारखंड के आरोपी मार्शल सांगां को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ निवासी सुषमा खलखो की झारखंड में शादी हुई है। लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत करते हुए रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया, झारखंड से यहां आकर सुषमा खलखो का पति अफीम की खेती कर रहा था। एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ जारी है। पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की जाएगी। कलेक्टर ने बताया, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद छानबीन की कार्रवाई की जा रही है। छानबीन के दौरान यह मामला पकड़ में आया है। अन्य फसलों के बीच करीब एक एकड़ में अफीम की खेती की जा रही थी। बता दें कि सबसे पहले दुर्ग जिले में करीब पांच एकड़ में अफीम की खेती पकड़ी गई थी, जहां समोदा गांव में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अवैध अफीम की खेती हो रही थी। इस मामले में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें विकास बिश्नोई (जोधपुर, राजस्थान), विनायक ताम्रकार (तेमरापारा, दुर्ग) और मनीष उर्फ गोलू ठाकुर (समोदा), छोटू राम शामिल हैं। जांच में सामने आया कि अफीम की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराने में छोटू राम की अहम भूमिका थी, जिसे राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया है। बलरामपुर में दो जगहों पर पकड़ाई थी अफीम की खेती दुर्ग के बाद बलरामपुर जिले में दो स्थानों पर अफीम की खेती पकड़ी गई थी। झारखंड सीमा से लगे करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव और कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब तीन एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस ने अफीम की खेती करने के मामले में किसान सहादुर नगेशिया और टुईला राम को गिरफ्तार किया है। टुईला राम ने पुलिस को बताया कि उसके पास खेत नहीं है। उसने गांव के ही रहने वाले रोपना से छह हजार रुपये सालाना देने के शर्त पर खेत को लीज पर लिया था। उसने खेत पर मक्के की फसल लगाई लेकिन उसे फायदा नहीं हुआ। इसके बाद दोनों किसानों का संपर्क झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले भूपेंद्र उरांव से हुआ। उसने कहा था कि मसालों की खेती करने से फायदा होगा। भूपेंद्र उरांव ने कहा कि अगर मैं खेत में मसाले की खेती कराऊंगा कतो मुनाफे में कुछ हिस्सा लूंगा जिसके बाद दोनों किसान तैयार हो गए। भूपेन्द्र ने अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। पहले सहादुर नगेशिया के खेत में अफीम की फसल लगाई गई। यहां अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे थे। जिसका मतलब है कि बड़ी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी है। उसके बाद टुईला राम के खेत में अफीम लगाई गई। इसके खेत में अभी फसल में डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था। दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग फसल की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए।

भरोसे पर वार: अनु डाकपाल ने 5 लाख का किया गबन, पुलिस जांच जारी

बांसवाड़ा बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ कस्बे के उप डाकघर में नियुक्त रहे एक अनु डाकपाल ने 5 लाख रुपए की सरकारी राशि का गबन कर लिया। विभागीय पत्रावलियों के मिलान के दौरान सामने आई कमियों के बाद की गई जांच में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। मामले को लेकर सज्जनगढ़ थाने में प्रकरण दर्ज कराया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। थानाधिकारी धनपतसिंह ने दी जानकारी सज्जनगढ़ थानाधिकारी धनपतसिंह ने बताया कि बांसवाड़ा डाकघर उप मंडल के निरीक्षक सुरेश खरवड़ ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, सज्जनगढ़ उप डाकघर में अनु डाकपाल मुकेश कुमार बैरवा 7 सितंबर 2024 से 27 मई 2025 तक कार्यरत रहा। वर्तमान में वह सहायक डाकपाल के रूप में डूंगरपुर प्रधान डाकघर में पदस्थ है। बैरवा ने सज्जनगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान बिना किसी देनदारी के नकद राशि रोकना शुरू कर दिया था। इस संदिग्ध कार्यप्रणाली को देखते हुए डूंगरपुर मंडल कार्यालय की ओर से जांच के आदेश दिए गए। इसके तहत 20 मई 2025 को सज्जनगढ़ उप डाकघर की अतिशेष राशि से संबंधित पत्रावलियों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि निकासी भुगतान के वाउचर सरकारी हिसाब में दर्ज नहीं किए गए थे और न ही उनका फिनेकल (Finacle) प्रणाली में कोई इंद्राज किया गया था। अनु डाकपाल बैरवा की कार्यप्रणाली संदिग्ध पाए जाने पर निरीक्षक सुरेश कुमार ने सहायक अधीक्षक बांसवाड़ा डाकघर का सहयोग लिया। इसके बाद सहायक अधीक्षक धर्मसिंह मीणा ने संयुक्त रूप से जांच करते हुए संबंधित खाताधारकों से पूछताछ की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि बैरवा ने बैंक निकासी का 47 नंबर वाउचर विभाग को नहीं भेजा था। 5 मई 2025 को बैंक से 5 लाख रुपए की निकासी की गई थी, जिसे सरकारी खाते में दर्ज नहीं किया गया। मामले की जानकारी मिलने पर बांसवाड़ा मुख्य डाकघर के डाकपाल मनमोहन सिंह मीणा ने अधीक्षक को रिपोर्ट सौंपी। इस पर अधीक्षक घेवरचंद ने सज्जनगढ़ उप डाकघर का निरीक्षण किया। पूछताछ के दौरान अनु डाकपाल बैरवा ने स्वीकार किया कि उसने 5 लाख रुपए की सरकारी राशि अपने घर पर रखी थी और उसे सरकारी हिसाब में दर्ज नहीं किया था। सरकारी राशि को अपने पास रखकर दुर्विनियोजन करने के मामले में विभाग ने ब्याज सहित राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की और उक्त राशि को सरकारी खाते में जमा भी कराया गया। मामले में 5 लाख रुपए से अधिक की राशि के गबन को गंभीर मानते हुए डाक निदेशालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार सज्जनगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की ओर से पूरे मामले में अनुसंधान शुरू कर दिया गया है।

विधानसभा में छातिम वृक्ष पर बहस तेज, मंत्री ओपी चौधरी ने किसी भी रोक से किया इनकार

रायपुर. विधानसभा में आज फिर एक बाद छातिम वृक्ष का मुद्दा गूंजा. फिर एक बार भाजपा विधायक सुनील सोनी छातिम वृक्ष को जीवन के लिए खतरनाक बताते हुए इसे हटाने के संबंध में सवाल किया. सुनील सोनी ने प्रश्नकाल में पर्यवारण मंत्री ओपी चौधरी से पूछा कि क्या छातिम पेड़ के दुष्प्रभाव को देखते हुए इसके रोपण पर रोक लगाई है ? क्या रोपित वृक्षों को हटाकर अन्य जगह विस्थापित किया जाना प्रस्तावित है? मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि न तो अभी छातिम वृक्षों का रोपण किया जा रहा है और न इस पर अभी रोक लगाई गई है. और न ही अभी विभाग की ओर से रोपित वृक्षों को हटाने का कोई प्रस्ताव या कार्ययोजना है. मुख्यमंत्री साय आज पेश करेंगे दो विधेयक रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज 15वां दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. सदन की कार्यवाही के दौरान कई अहम विषयों पर चर्चा और निर्णय होने की संभावना है. प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ओपी चौधरी, राजेश अग्रवाल और रामविचार नेताम विधायकों के सवालों के जवाब देंगे. इसके अलावा वित्तमंत्री ओपी चौधरी विभिन्न पत्रों को सदन के पटल पर रखेंगे. आज सदन में कुल 71 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए जाएंगे, जिनमें जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा. वहीं विधायक पुन्नूलाल मोहले प्रतिवेदन की प्रस्तुति करेंगे. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगे. वहीं वित्तमंत्री ओपी चौधरी छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक को भी प्रस्तुत करेंगे. विधायक अजय चंद्राकर और सुशांत शुक्ला सदन में दो अशासकीय संकल्प प्रस्तुत करेंगे. आज की कार्यवाही में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं, जिससे सदन का माहौल गरमाने की संभावना है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा, डबल इंजन सरकार ने नक्सलवाद को दूर कर प्रदेश के विकास में गति दी

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर : मुख्यमंत्री साय नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात विदेशी मेहमानों ने कहा – अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की हुई सराहना नेशनल डिफेंस कॉलेज का 15 सदस्यीय अध्ययन दल 05 दिवसीय यात्रा पर पहुंचा है छत्तीसगढ़ रायपुर  छत्तीसगढ़ की हमारी धरती   सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।          मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।          मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए।  विदेशी मेहमानों ने कहा – अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा           अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।              एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।          इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, आईजी ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुसुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है।             उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, ‘सिंहस्थ-2028 में सनातन संस्कृति का वैभव देखेगी दुनिया

सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुड़ी पड़वा, सृष्टि आरम्भ उत्सव पर धर्मनगरी उज्जैन में राम घाट पर हुआ भव्य आयोजन पार्श्व गायक विशाल मिश्रा की प्रस्तुति, ड्रोन शो, लेजर शो और भव्य आतिशबाजी ने बांधा समां उज्जैन  विक्रमोत्सव-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन का परमात्मा ने भाग्य विशेष रूप से लिखा है। जो भी व्यक्ति एक बार उज्जैन आता है, उसका जीवन संवर जाता है। मां शिप्रा के पावन तट पर बसी यह नगरी अनादि काल से अस्तित्व में है और हर युग में इसकी महिमा अक्षुण्ण रही है। उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से जाना जाता था, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का धाम है। वर्षप्रतिपदा के इस विशेष दिन विक्रम संवत 2083 के आगमन का उल्लास पूरे शहर में देखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को विक्रमोत्सव-2026 अंतर्गत उज्जैन के राम घाट पर आयोजित सृष्टि आरंभ उत्सव का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जब दुनिया आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन का उपयोग युद्ध में कर रही है, वहीं ड्रोन तकनीक उज्जैन में देवी-देवताओं की झलक आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है। यह सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है। करीब दो हजार वर्ष पूर्व उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर राष्ट्र की रक्षा की और सुशासन की मिसाल कायम की। उनका 32 पुतलियों वाला सिंहासन, नवरत्नों की विद्वता, वीरता और दानशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। आज विक्रमादित्य की इसी गौरवगाथा को पुनर्जीवित करते हुए पूरे प्रदेश में विक्रमोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक आदर्शों की पुनर्स्थापना का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार का सिंहस्थ अभूतपूर्व और ऐतिहासिक होने वाला है। उज्जैन को जोड़ने वाले सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है, वहीं मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है। विक्रम उद्योगपुरी, मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र पूर्ण रूप से विकसित हो चुका है और अतिरिक्त 5 हजार एकड़ क्षेत्र में नया पार्क तैयार किया जा रहा है। साथ ही नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं की योजना से धार्मिक तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास है। आने वाले समय में उज्जैन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक, औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनेगा। जब 2028 में सिंहस्थ का विराट स्वरूप दुनिया के सामने आएगा, तब पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का वैभव देखेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत 19 मार्च को गुड़ी पड़वा, सृष्टि आरम्भ उत्सव के पावन अवसर पर धर्मनगरी उज्जैन में भव्य और आकर्षक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिप्रा तट स्थित रामघाट,दत्त अखाड़ा घाट पर आयोजित इस महोत्सव में आस्था, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद प्रसिद्ध पार्श्व गायक विशाल मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संगीत का आनंद लिया और नववर्ष का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। गुड़ी पड़वा, जिसे हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है, से पूरे शहर में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। भव्य ड्रोन-शो, लेजर-शो और आकर्षक आतिशबाजी से आकाश को भर दिया रोशनी और रंगों से कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भव्य ड्रोन-शो, लेजर-शो और आकर्षक आतिशबाजी रही, जिसने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। ड्रोन-शो के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेशों का मनोहारी प्रदर्शन किया गया, जिससे उपस्थित जनसमूह अभिभूत हो उठा। विभिन्न साहित्य का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083, संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग, बिमल कृष्ण दास की 84 महादेव, रामस्वरूप दास की ओरछाधीश, वीर भारत न्यास के महर्षि अत्रि, महर्षि अंगिरा, धनवंतरी, महर्षि अगस्त्य, भरत मुनि के भारत निधि मोनोग्राफ, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ की अष्टावक्र गीता, नारद गीता, ब्राह्मण गीता, गर्भ गीता, उत्तर गीता का विमोचन किया। विक्रमोत्सव अंतर्गत आयोजित सृष्टि आरम्भ उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ संगीत, संस्कृति और तकनीक के संगम के रूप में उज्जैन को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान प्रदान की। सृष्टि आरम्भ उत्सव ने उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आधुनिक आयोजन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज,विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा,महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, विक्रमादित्य शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी, संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, राजेश कुशवाह, नरेश शर्मा, राजेंद्र भारती और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

आनंद केवल अंतस से अनुभूत होता है, यह अर्थ क्रय से नहीं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आनंद एक ऐसी सुखानुभूति है, जो अर्थ क्रय से नहीं, अंतस से होती है अनुभूत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दूजे के सुख में भी स्व का आनंद ढूंढ़ना है भारतीय संस्कृति की चेतना का आधार मुख्यमंत्री ने आनंदोत्सव के विजेताओं को किया पुरस्कृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद के आयाम राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुए शामिल प्रशासन अकादमी में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम मनुष्य आदतन सुख-सुविधाओं की वस्तुओं और विलासतापूर्ण जीवन में ही सुख ढूंढ़ते रहते हैं। भौतिक सुख की अभिलाषा सबको है पर आत्मिक सुख और शांति की दरकार कम ही लोगों को है। जबकि जीवन का आनंद भौतिकता में नहीं, मन के भावों की संतुष्टि में निहित है। उन्होंने कहा कि आनंद एक ऐसी सुख की अनुभूति है, जो धन से सुख-सुविधाओं के यंत्र वस्तुएं खरीदकर नहीं, बल्कि अपने अंतस में जागे मानवीय भावों के तृप्त होने पर भीतर से उपजती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित आनंद के आयाम-राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलन कर राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगल आरंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 14 से 28 जनवरी तक मनाए गए आनंदोत्सव के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिए। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी विधा में प्रथम पुरस्कार के रूप में 25 हजार रूपए, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपए एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 10 हजार रूपए दिए गए। मुख्यमंत्री ने फोटोग्राफी विधा में मिलिंद कुमार को प्रथम, शैलेंद्र बिहार को द्वितीय एवं सुसीमा अग्निहोत्री को तृतीय पुरस्कार दिया। वीडियोग्राफी विधा में सैयद अफजान को प्रथम, राजा खान को द्वितीय एवं जीवन रजक को तृतीय पुरस्कार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम दूसरों के सुख में भी अपने आनंद की अनुभूति प्राप्त कर लें, यही सनातन संस्कृति की चेतना का आधार है। हम सभी को अपने कार्यों को पूरे आनंद, उत्साह और दक्षता के साथ संपादित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन में आनंद के आयाम, हमारे सुख और दु:ख के बीच के अंतर को समझने से पता चलते हैं। आदिकाल से भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की रही है, जिसमें परिवार की धारणा को विशेष महत्व दिया गया है। वर्ष 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन में मार्गेट थेचर ने भारत और इंग्लैंड की संस्कृति का मूल अंतर सबको समझाया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय परिवारों की व्यवस्था में अगर कोई एक सदस्य भी कमाई करता है तो पूरा परिवार आनंद और सम्मान के साथ जीवन जीता है। यह दुनिया में सिर्फ भारत में ही संभव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण, माता देवकी के जीवन में भारी कष्टों से निवृत्ति के बाद मिले आनंद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यशोदा मैया और नंद बाबा ने कन्हैया के लालन-पालन में ही आनंद की अनुभूति की। उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि यह किसी और का शिशु है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुख और दु:ख बिना विचलित हुए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। जबकि महाभारत में उन्हीं के सैनिक उनके सामने युद्ध लड़ रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के आयोजन में साधु-संत भीषण गर्मी में अग्नि स्नान करते देखे जाते हैं। उनके शरीर पर मौसम और कांटों तक का कोई असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे भगवान के समीप साधना के मार्ग से आनंद में डूबते हैं। सनातन संस्कृति में हमारे संत अग्नि वस्त्र धारण कर समाज की कई उलझनों को दूर करने के लिए अपने जीवन का निचोड़ देते हैं। हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज ने कहा कि संसार के भौतिक जगत को मापने का मापदंड मैटा फिजिक्स तय करती है। इसके दो भागों में संसार के तत्व ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान का अध्ययन किया जाता है। आनंद की प्राप्ति के लिए वेदांत में कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है। आनंद ही ब्रह्म है, जो पूरे संसार को गति प्रदान करता है। देश की गुलामी के समय बेलियम हेस्टिंग ने गीता को पढ़कर कहा था कि भारत अब लंबे समय तक गुलाम नहीं रहेगा, क्योंकि उन्होंने गीता में आनंद के तत्व ज्ञान को जाना था। बाद में गीता लंदन पहुंची और वहां हर विचारधारा के विद्वानों ने गीता को हाथों हाथ लिया। अमेरिका के विद्वान भी गीता के ज्ञान को परफेक्शन के रूप में देखा है। परफेक्शन अभ्यास से ही आता है। अमेरिकी जीवन सिद्दांत से देखें, तो जब कोई अपनी विधा में, अपने काम में परफेक्शन प्राप्त कर लेता है, तो वह योगी हो जाता है। आज हमारा भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फिर से विश्व गुरु बनने की यात्रा कर रहा है। आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आनंद विभाग प्रदेश के सभी ब्लॉक स्तर पर शासकीय सेवकों के लिए आनंद से रहने की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शासकीय सेवक स्वयं आनंदित रहना और नागरिकों के साथ कुशल व्यवहार करना सीख रहे हैं। विद्यार्थियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे चित्त में प्रसन्नता है, तो समझिए सारा संसार खुश है। राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ता के रूप में दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के सचिव अभय महाजन, कमलेश पटेल, डॉ. जामदार सहित आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी के महानिदेशक सचिन सिन्हा, राज्य आनंद संस्थान के सीईओ आशीष कुमार, उप निदेशक प्रवीण गंगराड़े एवं बड़ी संख्या में प्रदेश के जिलों से आए आनंदक एवं गणमान्यजन उपस्थित थे। राज्य आनंद संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक मनु दीक्षित ने सभी का आभार माना।  

आतंकवाद का केंद्र बने पाकिस्तान, सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक सुधार नहीं होगा

संयुक्त राष्ट्र   भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक “आतंक का वैश्विक केंद्र” पाकिस्तान अपने तरीकों में सुधार नहीं करता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को “संधियों की पवित्रता बनाए रखने की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक जिम्मेदार उच्च जलधारा वाला राज्य रहा है लेकिन जिम्मेदारी दोतरफ़ा रास्ता है। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से छोड़ना होगा।” हरीश का यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को ऐसा प्रस्तुत किया मानो वह हताहत पक्ष हो, जबकि कार्यक्रम का विषय था सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़ा है। हरिश ने कहा, “भारत ने इस संधि पर 1960 में सद्भाव और मित्रता की भावना में हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने इस भावना का उल्लंघन करते हुए भारत पर तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए।” उन्होंने कहा, “दसियों हजार निर्दोष भारतीय पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों के शिकार बने।” पिछले साल द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम में धर्म आधारित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता और उदारता ने पाकिस्तान के तरीकों को नहीं बदला। अंततः हमें घोषणा करनी पड़ी कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, सभी प्रकार के आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।” उन्होंने कहा कि तकनीकी, जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक बदलावों के कारण पिछले 65 वर्षों में क्षेत्र में मौलिक बदलाव हुए हैं, जिसके लिए पाकिस्तान चर्चा करने से इंकार करता रहा। उन्होंने कहा, “संधि में संशोधन पर पाकिस्तान के साथ हमारी सभी कोशिशें ठुकरा दी गईं।” कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस रविवार को पड़ रहा है और भारत ने सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुंच के सतत विकास लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने के पानी की आपूर्ति कर दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।” 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक ग्रामीण घरों के 81.76 प्रतिशत घरों (कुल 1.58 करोड़) तक सुरक्षित नल का पानी पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है, जिसमें गांव जल समितियां, जिनमें से कई महिलाओं द्वारा नेतृत्व की जाती हैं, स्थानीय जल प्रणालियों की योजना, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।” उन्होंने जोड़ा, “संयुक्त राष्ट्र में हमारे सामूहिक प्रयास तब सबसे प्रभावी होंगे जब वे ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हों जो हमें जोड़ते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, विशेष रूप से विकासशील देशों में, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना।”

ऑस्ट्रेलियाई पेस चौकड़ी से IPL में हड़कंप, टीमों का गेम प्लान हुआ खराब

 नई दिल्ली 28 मार्च से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन की शुरुआत हो रही है. सीजन का ओपनर मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में होना है. आईपीएल के लिए सभी 10 टीमें तैयारियों में जुटी हैं, वहीं खिलाड़ियों की इंजरी से भी टीमों को दो चार होना पड़ा है। आईपीएल शुरू होने से ठीक पहले बड़ी टेंशन ऑस्ट्रेलिया के स्टार तेज गेंदबाजों ने बढ़ाई है. मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस और जोश हेजलवुड टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में उपलब्ध नहीं होंगे. वहीं सबसे बड़ा झटका चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को लगा है क्योंकि फास्ट बॉलर नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के चलते पूरी आईपीएल सीजन बाहर हो गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएसके अब उनके रिप्लेसमेंट की तलाश में है। जोखिम नहीं लेना चाहता बोर्ड क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) अपने प्रमुख तेज गेंदबाजों को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. आने वाले 12 महीनों में टीम को करीब 21 टेस्ट मैच खेलने हैं, जिसमें भारत, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बड़े दौरे शामिल हैं. इसके अलावा 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी भी ध्यान में रखी जा रही है। सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस बैक इंजरी से परेशान हैं. उधर जोश हेजलवुड हैमस्ट्रिंग और अकिलिज टेंडिनाइटिस (एड़ी की नस में सूजन) से जूझ रहे हैं. मिचेल स्टार्क ने हालिया समय में काफी ज्यादा टेस्ट क्रिकेट खेला है. तीनों तेज गेंदबाजों को धीरे-धीरे वापसी के लिए तैयार किया जा रहा है। कप्तान पैट कमिंस की गैरमौजूदगी में सनराइजर्स हैदराबाद की गेंदबाजी थोड़ी कमजोर हो गई है. कमिंस की अनुपस्थिति में ईशान किशन इस टीम की कप्तानी करने जा रहे हैं. दूसरी तरफ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को जोश हेजलवुड की अनुपस्थिति में गेंदबाजी कॉम्बिनेशन बदलना पड़ेगा. दिल्ली कैपिटल्स (DC) को निश्चित तौर पर शुरुआती मैचों में मिचेल स्टार्क की कमी खलेगी। एलिस का विकल्प खोज पाएगी CSK? नाथन एलिस के बाहर होने से सीएसके के पास डेथ ओवर्स स्पेशलिस्ट गेंदबाज की कमी हो गई है. एलिस के बाहर होने की वजह पुरानी हैमस्ट्रिंग इंजरी का दोबारा उभरना है, जो उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप से पहले झेली थी. हाल ही में होबार्ट में हुए वनडे कप फाइनल के दौरान यह चोट फिर से गंभीर हो गई। मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस और जोश हेजलवुड की वापसी उनकी फिटनेस प्रगति पर निर्भर करेगी. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ये खिलाड़ी टूर्नामेंट के बीच में जुड़ सकते हैं. लेकिन शुरुआती मुकाबलों में इनकी गैरमौजूदगी ने आईपीएल टीम्स का संतुलन जरूर बिगाड़ दिया है।

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