The tableau of Central Jail Jabalpur, “Gudiya”, became a sensitive example of prison reform.

जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता/
कैमरामैन अर्पिता श्रीवास्तव
जबलपुर । केंद्रीय जेल जबलपुर द्वारा प्रस्तुत झांकी “गुडिया” ने जेल सुधार और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा है। यह झांकी केंद्रीय जेल जबलपुर के बंदियों के अथक परिश्रम से तैयार की गई है, जो समाज को यह संदेश देती है कि सुधार की राह ही वास्तविक परिवर्तन की कुंजी है।
मासूम “गुडिया” की कहानी से खुलता है सच
झांकी में एक छोटी बच्ची “गुडिया” की कहानी के माध्यम से उन बच्चों की स्थिति को दर्शाया गया है, जो अपने माता या पिता के साथ जेल में रहने को मजबूर होते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक दंडात्मक जेल व्यवस्था के चलते 6 वर्ष तक के निर्दोष बच्चों को भी जेल के कठिन वातावरण में रहना पड़ता था।
सुधारात्मक सोच से बदली बच्चों की दुनिया
झांकी में यह भी दर्शाया गया है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जेलों में सुधारात्मक विचारधारा अपनाए जाने के बाद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। अब जेल परिसरों में बच्चों के लिए
- स्कूल
- झूलाघर
- आंगनवाड़ी
- पौष्टिक आहार
- टीकाकरण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ का मजबूत संदेश
“गुडिया” झांकी बेटे और बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने का संदेश देती है और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है। यह समाज में समानता और जागरूकता को बढ़ावा देने वाली झांकी है।

नारी सशक्तिकरण और बंदियों की भावनाएँ भी दिखीं
झांकी में महिला कमांडो के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को दर्शाया गया है। वहीं जेल में सजा काट रहे बंदियों द्वारा जनजातीय गौरव दिवस जैसे अवसरों पर अपनी रिहाई की आशा को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करते हुए दिखाया गया है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।

समाज के लिए एक मजबूत संदेश
कुल मिलाकर, केंद्रीय जेल जबलपुर की झांकी “गुडिया” यह साबित करती है कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, संवेदना और मानवता का केंद्र भी बन सकती है।









