Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda
संवाददाता चंदा कुशवाह
नलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।
नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,
“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”
वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।
नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।
अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।









