After worshiping Guru, offerings were made in Panch Kundiya Gayatri Mahayagya.
- गायत्री परिवार द्वारा गायत्री प्रज्ञापिठ में मनाया गुरु पूर्णिमा पर्व ।
- आगामी दिनों में रामटेक पहाड़ी पर करंजी पौधे रोपित करने बनी सहमति ।
हरिप्रसाद गोहे
आमला । अखिल विश्व गायत्री परिवार आमला द्वारा गायत्री प्रज्ञापीठ आमला में गुरूपुर्णिमा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।

इस मौके पर सैकड़ों साधको ने अपने अनुष्ठान की पुर्णाहुती समर्पित कि व बृम्हास्त्र साधना के साथ 40 दिवसीय सवा लक्ष गायत्री पुरष्चरण हेतु संकल्प लिया वहीं साधको द्वारा गुरूदिक्षा लेकर साधना के मार्ग को अपनाया ।

इस अवसर पर प्रज्ञापीठ के मुख्य ढ्रस्टी बी पी धामोड़े,एस पी डढोरे ने गायत्री साधना हेतु मार्गदर्शन दिया ।
पंच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ और महाप्रसादी कार्यक्रम में साधको द्वारा बढ चढकर हिस्सा लिया वहीं भरत धोटें और नर्मदा सोलंकी द्वारा गुरूपुर्णिमा पर्व पर संगीत की प्रस्तुती दी गई ।

कार्यक्रम में भोजनालय में प्रसादी बनाने हेतु त्रषभ पंवार एवं महिला मंडल द्वारा प्रसादी निर्माण कर सभी परिजनो को वितरित किया ।

इस अवसर पर सभी ट्रस्टी एवं समन्वयक समिति के सदस्यों द्वारा आगामी 4 सितम्बर 2024 को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर वृक्षगंगा अभियान के तहत करंजी के पौधों का रोपण कर अपने अभियान को गति देने हेतु योजना बनाकर परिजनो से पौधो को लगाने हेतु चर्चा कर कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आग्रह किया ।

गुरूपुर्णिमा पर्व पर गायत्री परिवार के के सूर्यवंशी, वंदना ढढोरे, विमला पंवार, माधुरी मालवीय ,श्रद्धा मालवीय ,पंचफूला देशमुख ,उमा देशमुख, गुलाबराव ओडुकले, देवकरण टिकारिया ,राजेश मालवी, वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल पाठक, राजेन्द्र उपाध्याय, नितिन देशमुख, अनिल सोनी आदि परिजन मौजूद रहे ।

ट्रस्टी ठाकुर दास पंवार ने बताया कि गायत्री परिवार बृम्हास्त्र साधना का क्रम चला रहा है जिसमे एक बैठक में 10 माला गायत्री महामंत्र के साथ एक माला महामृत्युंजय मंत्र का जप वंदनीय माता जी जन्म शाताब्दी तक परिजनो द्वारा चलाया जाना है । इस हेतु इच्छुक परिजन अपना पंजीयन करवा ले जिसकी जानकारी शांतिकुंज हरिद्वार दोष परिमार्जन हेतु भेजी जायेगी ।

गायत्री परिवार के निलेश मालवीय ने बताया की आगामी 04 अगस्त दिन रविवार को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर करंजी के पौधे लगाकर वृक्षगंगा अभियान को गति देने ज्यादा से ज्यादा संख्या में पंहुचकर श्रम दान करने जिससे इस प्रकृति का संरक्षण हो ।









