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पूरे भारत में भारी बारिश के बीच, सितंबर 2023 के बाद पहली बार देश के मुख्य जलाशयों का जलस्तर बढ़ा

नई दिल्ली केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि पूरे भारत में भारी बारिश के बीच, सितंबर 2023 के बाद पहली बार देश के मुख्य जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ 29 सितंबर 2023 को जारी बुलेटिन के बाद से दर्ज की गई सप्ताह-दर-सप्ताह आने वाली गिरावट रुक गई है। उस समय इनकी भंडारण क्षमता 73 प्रतिशत थी। यह सुधार देशभर में व्यापक वर्षा के बीच हुआ है। देशभर के 150 जलाशयों की भंडारण स्थिति की निगरानी करने वाली सीडब्ल्यूसी ने चार जुलाई को इन घटनाक्रम का विवरण देते हुए अपना नवीनतम बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन के अनुसार, 150 जलाशयों में से 20 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए समर्पित हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 35.30 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। सीडब्ल्यूसी के चार जुलाई के बुलेटिन में कहा गया कि इन जलाशयों में उपलब्ध भंडारण क्षमता 39.729 बीसीएम थी जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का 22 प्रतिशत है। इसकी तुलना में, पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान उपलब्ध संग्रहण स्तर 50.422 बीसीएम था, जबकि सामान्य संग्रहण स्तर 44.06 बीसीएम था। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि इससे पता चलता है कि वर्तमान भंडारण क्षमता पिछले वर्ष की इसी अवधि की 79 प्रतिशत तथा सामान्य भंडारण क्षमता की 90 प्रतिशत है। उत्तरी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान) में 10 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 19.663 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण 5.39 बीसीएम (27 प्रतिशत) है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 45 प्रतिशत था, जबकि सामान्य भंडारण क्षमता 31 प्रतिशत है। पूर्वी क्षेत्र (असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नगालैंड और बिहार) में 23 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 20.430 बीसीएम है। यहां वर्तमान भंडारण 3.979 बीसीएम (19 प्रतिशत) है, जो पिछले वर्ष के 20 प्रतिशत से कम है तथा सामान्य स्तर 23 प्रतिशत है। पश्चिमी क्षेत्र (गुजरात और महाराष्ट्र) में 49 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 37.130 बीसीएम है। वर्तमान में भंडारण 7.949 बीसीएम (21 प्रतिशत) है, जबकि पिछले वर्ष यह 27 प्रतिशत था, जबकि सामान्य भंडारण स्तर 22 प्रतिशत है। मध्य क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ) में 26 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 48.227 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण 12.26 बीसीएम (25 प्रतिशत) है, जबकि पिछले साल यह 35 प्रतिशत था और सामान्य भंडारण स्तर 26 प्रतिशत है। दक्षिणी क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु) में 42 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 53.334 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण स्तर 10.152 बीसीएम (19.03 प्रतिशत) है, जो पिछले साल के 19.43 प्रतिशत से कम है और सामान्य स्तर 24 प्रतिशत है। बुलेटिन में सामान्य भंडारण स्तर को पिछले 10 वर्षों के औसत भंडारण के रूप में परिभाषित किया जाता है। सम्रग रूप से भंडारण स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि तथा इसी अवधि के दौरान सामान्य भंडारण दोनों से कम है। ब्रह्मपुत्र, साबरमती और ताद्री से कन्याकुमारी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में जल भंडारण सामान्य से बेहतर देखा गया है। सिंधु, सुवर्णरेखा, माही और अन्य नदियों में जल भंडारण सामान्य के करीब पाया गया है। महानदी, कावेरी, ब्राह्मणी और वैतरणी नदियों में जल भंडारण कम है। पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियों और अन्य समान नदियों में जल भंडारण अत्यधिक कम है।    

अमरवाड़ा उपचुनाव में दांव पर लगी कमल नाथ की साख, 9 बजे तक 17% मतदान

अमरवाड़ा छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग सुबह 7 बजे से जारी है। मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा। 9 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला बीजेपी के कमलेश शाह, कांग्रेस के धीरन शाह और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के देवरावेन भलावी के बीच है। अमरवाड़ा के स्कूल में बनाए गए पोलिंग बूथ के बाहर मतदान के दौरान हंगामा हो गया। एक मतदाता की डॉक्यूमेंट्स को लेकर सुरक्षाकर्मियों से बहस हो गई। गोंगपा प्रत्याशी भी मतदान केंद्र पर पहुंच गए। बातचीत के बाद हंगामा शांत हो गया। कांग्रेस प्रत्याशी धीरन शाह ने आंचलकुंड मतदान केंद्र के बूथ में वोट डाला। उपचुनाव में मतदाता छल को भी मुद्दा बनाकर वोट डाल रहे हैं। मतदाता स्वय जैन का कहना है, ‘हमने अपने नेता चुना था, वो दूसरी पार्टी में चले गए, जनता से छल किया, इसी मुद्दे पर वोट किया है।’ व्यापारी मंडल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेश जैन का कहना है, ‘स्थानीय मुद्दे बहुत ज्यादा हैं। वर्तमान में सरकार के पक्ष में ही मतदान होना चाहिए।’ 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अमरवाड़ा से कमलेश शाह जीते थे। लोकसभा चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हो गए। इस वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है। हर्रई विकास खंड में वोट का बहिष्कार अमरवाड़ा विधानसभा के अंतर्गत आने वाले विकासखंड हर्रई की ग्राम पंचायत सलैया बुलाकी के ग्राम डावरी झील के लोगों ने वोट का बहिष्कार किया। साथ ही ये लोग मतदान स्थल पर रोड नहीं तो वोट नहीं लिखी हुई दफ्ती लेकर पहुंच गए। इन दस्तावेजों के आधार पर डाल सकेंगे वोट मतदाता पर्ची के साथ 13 फोटो युक्त दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज मतदान के लिए जरूरी है। मतदाता जब मतदान करने जाएं तो मतदाता सूचना पर्ची के साथ फोटो युक्त दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जरूर लेकर जाएं। क्यूआर कोड युक्त मतदाता सूचना पर्ची से मतदाता अपने मतदान केन्द्र का नाम, पता, क्रमांक, निर्वाचक नामावली में मतदाता क्रमांक राज्य और जिले का हेल्पलाइन नम्बर जैसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन मतदान के लिए एक फोटो युक्त दस्तावेज जरूरी होगा। यदि किसी मतदाता के पास मतदाता सूचना पर्ची नहीं है और उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो 13 फोटो युक्त वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज दिखाकर मतदाता अपना मतदान कर सकेंगे। यह हैं 13 वैकल्पिक दस्तावेज फोटो युक्त वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, दिव्यांग यूनिक आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा जॉब कार्ड, पेंशन दस्तावेज (फोटो सहित), पासपोर्ट, पासबुक (फोटो सहित बैंक/डाकघर द्वारा जारी), फोटोयुक्त सर्विस पहचान पत्र (केन्द्र/राज्य सरकार/सार्वजनिक उपक्रम/पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी), सांसद, विधायक  को जारी आधिकारिक पहचान पत्र, एनपीआर के अंतर्गत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड (श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी) में से कोई भी एक दस्तावेज दिखाकर मतदान कर सकते हैं। दांव पर कमल नाथ की साख आदिवासी विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया। यह चुनाव कमल नाथ के लिए भी काफी महत्वपूर्ण हैं। इसके परिणाम यदि पार्टी के अनुकूल रहते हैं तो फिर यह माना जाएगा कि क्षेत्र में उनकी पकड़ है। यही कारण है कि प्रत्याशी चयन से लेकर मैदानी जमावट उनकी सहमति से ही की गई। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि सभी केंद्रों के लिए मतदान दल रवाना किए जा चुके हैं। सुबह साढ़े पांच बजे माकपोल के बाद सात बजे से मतदान प्रारंभ हो जाएगा जो शाम छह बजे तक चलेगा। मतगणना 13 जुलाई को सुबह आठ बजे से होगी।

विहिप ने राज्य सरकारों से हिंदू मंदिरों और तीर्थ स्थलों के क्षेत्रों से मुस्लिम दुकानों को बंद करवाने की मांग की

नई दिल्ली  विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सभी राज्य सरकारों से हिंदू मंदिरों और तीर्थ स्थलों के क्षेत्रों से मुस्लिम दुकानों को बंद करवाने की मांग की है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा ने कहा कि उन्हें अनेक स्थानों से जानकारी मिली है कि जो लोग ‘भारत माता की जय’ या ‘वंदे मातरम’ भी नहीं बोल सकते और मूर्ति पूजा के विरोधी हैं, वे छद्म नामों से या हिंदू देवी-देवताओं के नामों से या हिंदू आस्था केंद्रों के नाम से हिंदू धर्म स्थलों पर प्रसाद और पूजा सामग्री बेच रहे हैं। देशभर से अनेकों प्रत्यक्ष ऐसी घटनाएं सामने आईं हैं, जहां सब्ज़ियों सहित अन्य खाद्य एवं पेय सामग्रियों पर थूककर उन्हें अपवित्र करने के बाद श्रद्धालुओं को बेचा जाता है, जिससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। विहिप महामंत्री ने आगे कहा कि देश के अनेक तीर्थों में भगवान के भोग, श्रृंगार व अर्पण इत्यादि से जुड़ी अनेक वस्तुओं को मुस्लिम समाज के लोग अपवित्र कर बेच रहे हैं, जो कि हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ है, जिसे अविलंब रोका जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सभी राज्य सरकारों से मांग करती है कि वे हिंदू मंदिरों व धर्मस्थलों की पवित्रता को बनाए रखने हेतु मजहबी धोखेबाजों के विरुद्ध तुरंत प्रभावी कदम उठाएं, जिससे समाज की आस्था व विश्वास को किसी प्रकार की क्षति ना पहुंचे। साथ ही वे हिंदू समाज से भी अपील करते हैं कि ऐसे धर्मद्रोहियों से सावधान रहकर उन्हें बेनकाब करें और स्थानीय शासन-प्रशासन को समय पर सूचित करें।    

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये

वारसॉ  यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है। वाशिंगटन में शुरू हो रहे उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों द्वारा द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने  बताया कि समझौते में यूक्रेन के लिए पोलैंड के निरंतर रक्षा समर्थन, विशेष रूप से वायु रक्षा का जिक्र है। इसके साथ ही पोलैंड ने यूक्रेन को ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करने और पुनर्निर्माण में भाग लेने का भी आश्वासन दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) और 19 देशों ने यूक्रेन के साथ इसी तरह के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेज में व्यावहारिक द्विपक्षीय प्रतिबद्धताएं शामिल हैं, न कि केवल खोखले वादे। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रक्षा सहयोग और यूक्रेन के सुरक्षाबलों की जरूरतें उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं हैं। वह एक शांतिपूर्ण और मजबूत यूक्रेन के साथ-साथ एक शांतिपूर्ण और मजबूत पोलैंड के निर्माण में विश्वास करते हैं। इससे पहले सोमवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा से मुलाकात की। वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों के बारे में पोलैंड के राष्ट्रपति को जानकारी दी। जेलेंस्की ने बताया कि हमने इस बात पर चर्चा की कि हमारे लोगों को अधिक सुरक्षा देने के लिए क्या आवश्यक है। उन्होंने उद्घाटन शांति शिखर सम्मेलन के महत्व के साथ-साथ यूक्रेन और पोलैंड के बीच सुरक्षा समझौते पर भी ध्यान दिया।  

सावन में यह सपना देखें तो बनेंगे सबसे भाग्यशाली

: हिंदू धर्म शास्त्रों में सावन का महीना बेहद खास माना गया है. ये माह भगवान शिव को समर्पित है. इस माह में शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-पाठ करते हैं और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कई उपाय करते हैं. इस माह में महादेव के साथ मां पार्वती की उपासना की जाती है. बता दें कि स्वप्न शास्त्र में सावन में दिखने वाले शुभ और अशुभ सपनों के बारे में बताया गया है. कुछ सपने भविष्य में होने वाली शुभ घटनाओं के बारे में संकेत देती हैं. आइए जानें ऐसे ही कुछ सपनों के बारे में. सपने में भगवान शिव और मां पार्वती के दर्शन स्वप्न शास्त्र में सावन के महीने में भगवान शिव और मां पार्वती के दर्शन होना बहुत शुभ माना गया है. ज्योतिष के अनुसार इसे बहुत ही शुभ माना गया है. अगर सावन के महीने में आपको भी ऐसा सपना दिखता है, तो इसका अर्थ है वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होने वाला है. साथ ही, व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. सपने में शिवलिंग के दर्शन सावन के महीने में अगर किसी जातक को सपने में शिवलिंग के दर्शन होते हैं, तो ये भविष्य में होने वाली शुभ घटना की ओर संकेत करता है. बता दें इसका अर्थ है, आपकी इच्छा भगवान शिव तक पहुंच गई है और वे जल्द ही इसे पूरा कर देंगे. सपने में शिव जी का मंदिर दिखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक को सपने में शिव जी के मंदिर के दर्शन होते हैं, तो इसे भी बहुत ही शुभ स्वप्न माना गया है. अगर आपके साथ ऐसा होता है, तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपकी समस्याओं का समाधान होने वाला है. साथ ही, स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलेगा. शिव जी की पूजा करते हुए दिखना अगर सावन के महीने में आप खुद को शिव जी की उपासना करते हुए देखते हैं तो ये इस बात का संकेत हैं, कि जल्द ही आपकी कोई मनोकामना पूर्ण होने वाली है. नाग देवता के दर्शन सपने में नाग देवता के दर्शन भविष्य में शुभ घटना की ओर संकेत करता है. इसका अर्थ है, जल्द ही आपको धन लाभ होगा. बेल पत्र और डमरू का दिखना सपने में बेल पत्र, डमरू और त्रिशूल का दिखना ये संकेत देता है कि आपको शिव जी की खास कृपा प्राप्त होने वाली है. इससे आपके जीवन में स्थिरता आएगी. और परिवार वालों के साथ खुशी के पल बिता पाएंगे.

रेट्रो नोकिया लूमिया डिज़ाइन फोन को लेकर लीक रिपोर्ट में भी जानकारी मिली

नई  दिल्ली  स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एचएमडी ग्लोबल ने नए फोन एचएमडी विव का ऐलान कर दिया है। अब आने वाले मिड-रेंज एचएमडी विव फोन को लेकर लीक रिपोर्ट में भी जानकारी मिली है। लीक में रेट्रो नोकिया लूमिया डिज़ाइन और दमदार 108-मेगापिक्सेल कैमरे के साथ हाई-एंड एचएमडी स्काईलाइन की झलक पहले ही पेश की जा चुकी है। एचएमडी विव के डिजाइन के बारे में बात करें तो उम्मीद की जा रही है कि फोन थोड़ा राउंड डिज़ाइन वाले मेटल फ्रेम के साथ आएगा। इसका फिंगरप्रिंट सेंसर इसके पावर बटन में दिया जाएगा।इसमें दो लेंस और एक एलईडी फ्लैश के साथ एक रेक्टैंगुलर कैमरा मॉड्यूल होगा। बताया गया है कि ये फोन तीन कलर ऑप्शन मेट्योर ब्लैक, आइस और वेलवेट में आ सकता है। कहा जा रहा है कि ये एक मिड-रेंज फोन होगा, और इसमें 1080 पी प्लस रेज़ोलूशन वाला ओलेड डिस्प्ले होने की बात सामने आई है।ये नया 6एनएम एआरएम प्रोसेसर 2.3 जीएचझेड तक चलने वाले दो हाई-परफॉर्मेंस वाले  एआरएम कारटेक्स-ए78 कोर और 2.0 जीएचझेड पर चलने वाले छह कारटेक्स-ए55 कोर के साथ आता है। ऐसा कहा जा रहा है कि एचएमडी व्यू को कम से कम एक वेरिएंट 8 जीबी रैम के साथ पेश किया जाएगा। फोन की कीमत के बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन लीक में एक कॉम्पैक्ट डिज़ाइन, एक ओलेड डिस्प्ले, एक 50-मेगापिक्सल कैमरा और एक लंबे समय तक चलने वाली बैटरी होने की बात कंफर्म की गई है। ऐसा कहा जाता है कि कैमरा सेटअप के तौर पर फोन में 50-मेगापिक्सल के प्राइमरी सेंसर के साथ एक सेकेंडरी लेंस मिलता है। पावर के लिए फोन में 4700 एमएएच की बैटरी होने की उम्मीद की जा रही है। एचएमडी विव को क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6एस जेन 3 चिपसेट पर चलने के लिए तैयार किया गया है।  

बुढ़ापा कटेगा आराम से, अब हर महीने मिलेंगे 10,000 रुपये पेंशन, APY की रकम बढ़ाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली  केंद्र सरकार अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) में न्यूनतम भुगतान को दोगुना कर सकती है ! माना जा रहा है कि सरकार बजट में इस बारे में घोषणा कर सकती है ! अगर ऐसा होता है तो इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) में रजिस्ट्रेशन कराने वालों को दोगुनी पेंशन का लाभ मिलेगा ! Atal Pension Yojana , न्यूनतम राशि बढ़ाने पर विचार आपको बता दें कि फिलहाल अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) के तहत हर महीने 5000 रुपये दिए जाते हैं, जिसे दोगुना करके 10000 रुपये प्रति महीने करने पर विचार किया जा रहा है ! पिछले महीने पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन दीपक मोहंती ने कहा था कि 2023-24 में अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) के तहत नामांकन योजना शुरू होने के बाद से सबसे अधिक रहा है ! आपको बता दें कि इस सामाजिक सुरक्षा योजना को वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया था ! वित्त मंत्री ने कही थी ये बात गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) को गारंटीड पेंशन राशि वाली किफायती योजना के तौर पर डिजाइन किया गया है ! सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) ने अपनी शुरुआत से अब तक 9.1% रिटर्न दिया है और यह अन्य बचत योजनाओं की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है ! मैच्योरिटी के आधार पर मिलती है पेंशन इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) के तहत खाता खोलने पर लोगों को मैच्योरिटी पर 1 हजार से 5 हजार रुपये तक मासिक पेंशन मिलती है ! यह अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) में निवेश की गई राशि पर निर्भर करता है !  सरकार अपनी प्रमुख सोशल सिक्योरिटी स्कीम अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana) के तहत न्यूनतम गारंटीड राशि को दोगुना कर 10,000 रुपये कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार इसके राजकोषीय प्रभाव का आकलन कर रही है तथा बजट से पहले इस पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार देश में सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना चाहती है क्योंकि वह सामाजिक सुरक्षा पर लेबर कोड लागू करने के लिए आधार तैयार कर रही है। 20 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक अटल पेंशन योजना में कुल 6.62 करोड़ लोगों ने खाते खोले थे। साल 2023-24 में 1.22 करोड़ नए खाते खोले जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि अटल पेंशन योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें गारंटीड राशि बढ़ाना भी शामिल है। इन पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में, सरकार द्वारा गारंटीकृत लाभ के साथ, अंशदान के आधार पर 1,000-5,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। पिछले महीने पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक मोहंती ने कहा था कि 2023-24 में अटल पेंशन योजना के तहत एनरॉलमेंट 2015 में योजना के शुभारंभ के बाद से सबसे अधिक था। किसे नहीं मिलता है फायदा पेंशन रेगुलेटर ने पेंशन राशि में बढ़ोतरी की वकालत की है। उसका कहना है कि मौजूदा राशि समय के साथ अपनी वैल्यू बरकरार नहीं रख पाएगी। इस साल की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अटल पेंशन योजना को एक किफायती योजना के रूप में डिजाइन किया गया है जिसमें पेंशन राशि की गारंटी है। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस योजना ने शुरुआत से ही 9.1% रिटर्न दिया है और यह अन्य बचत योजनाओं की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है। वित्त मंत्री ने कहा कि अटल पेंशन योजना गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिए एक सब्सिडी वाली योजना है और यह स्पष्ट है कि अधिकांश पेंशन खाते निचले स्लैब में हैं। साल 2015-16 में शुरू की गई अटल पेंशन योजना को नेशनल पेंशन स्कीम के माध्यम से PFRDA द्वारा प्रशासित किया जाता है। इस योजना में मृत्यु या लाइलाज बीमारी के मामलों को छोड़कर 60 वर्ष की आयु में पेंशन फंड के 100% एन्युटी के साथ योजना से बाहर निकलने की अनुमति है। बाहर निकलने पर ग्राहक को पेंशन उपलब्ध होती है। इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले लोग इस योजना में शामिल होने के पात्र नहीं हैं।  

पूनावाला ने कहा,

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में एक और लड़की की पिटाई का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने साझा कर ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने उनकी पार्टी टीएमसी का मतलब ‘ तालिबानी मुझे चाहिए’ बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक और तालिबानी वीडियो सामने आया है। चोपड़ा के बाद यह एक और वीडियो। जिसमें यह दिखाई दे रहा है कि एक महिला को तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का करीबी बेरहमी से पीट रहा है। इस प्रकार की घटनाएं लगातार हो रही है उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी का मतलब अब ‘तालिबानी मुझे चाहिए’ बन चुका है। हालत यह हो गई है कि टीएमसी के विधायक और नेता इस तरह की घटनाओं को डिफेंड भी करते हैं। इससे पहले वे संदेशखाली और चोपड़ा जैसी घटनाओं को भी डिफेंड कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखाली पर ममता बनर्जी सरकार को फटकार भी लगाई है। पूनावाला ने कहा, “आज ममता दीदी की सरकार मां-माटी-मानुष नहीं केवल बलात्कारी,भ्रष्टाचारी और बम धमाके करने वालों को बचाओ सरकार बन गई है। इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी खेमे की चुप्पी पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, ” दुख की बात यह है कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले नेता इस पर चुप है। क्या मणिपुर जाने वाले राहुल गांधी बंगाल जाकर इस महिला से मिलेंगे, ममता सरकार के खिलाफ बोलेंगे? प्रियंका गांधी वाड्रा, प्रियंका चतुर्वेदी और आम आदमी पार्टी इस पर बोलेंगे। इनमें से कोई नहीं बोलेगा। ये सब स्वाति मालीवाल, संदेशखाली , चोपड़ा और इस बार की तालिबानी घटना पर भी कुछ नहीं बोलेंगे।” ममता बनर्जी ने बंगाल को तालिबानी व्यवस्था के सहारे छोड़ दिया : तरुण चुघ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और जम्मू कश्मीर के प्रभारी तरुण चुघ ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल को ममता बनर्जी ने तालिबानी व्यवस्था के सहारे छोड़ दिया है। बंगाल के अंदर लगातार टीएमसी के नेता और गुर्गे देश की न्याय व्यवस्था को धता बता कर वहां कंगारू कोर्ट चला रहे हैं। तरुण चुघ ने कहा कि बंगाल के अंदर चाहे वह नॉर्थ 24 परगना की कामरावती की घटना हो या फिर संदेशखाली की घटना हो, बंगाल के अंदर देखी जा रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि ममता बनर्जी ने बंगाल को तालिबानी शासन व्यवस्था के हाथ में छोड़ दिया है और तालिबानी कानूनों के तहत कंगारू कोर्ट लगाकर टीएमसी के नेता वहां पर अमानवीय अत्याचार, महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वहां तालिबान का शासन चल रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रायबरेली दौरे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी से निवेदन करता हूं कि वह कुछ दिन तमिलनाडु में भी गुजारें जहां जहरीली शराब पीकर दलित समाज के लोग लगातार मर रहे हैं। वहां आपकी गठबंधन की सरकार है। इस पर उनकी रहस्यमय चुप्पी है। राहुल गांधी को कुछ दिन बंगाल के संदेशखाली और नॉर्थ 24 परगना में गुजारने चाहिए। बंगाल में लगातार, हत्याएं, ब्लात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में झंडा देखकर घर को जलाया जा रहा है, बंगाल में तालिबानी शासन चल रहा है। राहुल गांधी के पास तमिलनाडु, बंगाल जाने के लिए बिलकुल भी समय नहीं है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। तरुण चुघ ने कहा कि जम्मू कश्मीर की घटनाएं दुखद हैं, घोर कष्टदायक है, आतंकी हमले की जितनी निंदा की जाए, कम है। शहादत देने वाले शहीदों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। आज जम्मू कश्मीर के अंदर जो शांति है, लोकतंत्र के प्रति वहां की जनता का अटूट विश्वास है। जहां पहले बहिष्कार की राजनीति होती थी, वहां लाखों लोग खड़े होकर वोट दे रहे हैं। इससे बौखलाकर आतंकी संगठन लोगों को निशाना बना रहे हैं। वह हारी हुई और आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे। लगातार सुरक्षा बल उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे भयभीत होकर आतंकी ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन भारत उन्हें नहीं बख्शेगा।        

तालिबान सरकार ने ओलंपिक में भाग ले रहीं 3 महिला एथलीट्स को मान्यता देने से इनकार किया

काबुल अफगानिस्तान में जबसे आतंकी संगठन तालिबान का राज शुरू हुआ है तभी से महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ होता रहा है. आगामी पेरिस ओलंपिक्स 2024 की शुरुआत 26 जुलाई से होगी, जिसमें अफगानिस्तान के 6 एथलीट भाग ले रहे होंगे, जिनमें 3 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं. अब तालिबान सरकार ने ओलंपिक में भाग ले रहीं 3 अफगानी महिला एथलीट्स को मान्यता देने से इनकार कर दिया है, जिसका कारण सुनकर कोई भी हैरत में पड़ जाएगा. अफगानिस्तान के खेल विभाग ने आधिकारिक स्टेटमेंट जारी करते हुए बताया – ओलंपिक में अफगानिस्तान के केवल 3 एथलीट भाग ले रहे होंगे. फिलहाल अफगानिस्तान में महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने पर पाबंदी है. जब लड़कियां खेल ही नहीं पा रहीं तो उन्हें नेशनल टीम में प्रवेश कैसे मिल सकता है. हम ओलंपिक्स में भाग ले रहे केवल 3 पुरुष एथलीट्स की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं, जिनकी ट्रेनिंग और स्कॉलरशिप का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. महिलाओं के लिए हालात अच्छे नहीं अफगानिस्तान में एथलीट्स के लिए हालात अच्छे नहीं हैं और विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति ज्यादा बदतर है. अफगानिस्तान के जो 6 एथलीट पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले हैं, जिनमें से तीनों महिलाएं और 2 पुरुष एथलीट अफगानिस्तान से बाहर रह रहे हैं. अकेला एथलीट जो अफगानिस्तान में रह रहा है, वह जूडो एथलीट है और बाकी 2 पुरुष एथलेटिक्स और स्विमिंग में भाग लेंगे. वहीं महिला खिलाड़ी एथलेटिक्स और साइकलिंग में भाग लेंगी. अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने तालिबान की इस हरकत पर बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने अफगानिस्तान के 6 एथलीट्स को न्योता देने से पहले ना तो किसी तालिबान के अधिकारी से सलाह ली थी और ना ही उन्हें ओलंपिक खेलों के लिए आमंत्रित किया था. तालिबान सरकार में महिलाओं को स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने की भी अनुमति नहीं है.

भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने उच्च स्तरीय राजनीतिक फोरम एचएलपीएफ के उद्घाटन के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। योजना पटेल ने कहा कि हम ऐसे समय में मिले रहे हैं, जब दुनिया इस दर्दनाक सच्चाई का सामना कर रही है कि एसडीजी लक्ष्यों में से केवल 12 प्रतिशत ही अभी ट्रैक पर है। इसलिए 2030 एजेंडा और इसके लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने की तत्काल जरूरत है। भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया है। एसडीजी यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय विकास संबंधित लक्ष्यों के सेट हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाया गया है और वैश्विक लक्ष्यों के समान प्रचारित किया गया है। राजदूत योजना पटेल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एसडीजी के समाधान के लिए कई केंद्रित हस्तक्षेप भी शुरू किए गए हैं। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय थिंक टैंक नीति आयोग एसडीजी को लागू करने में केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों दोनों का मार्गदर्शन कर रहा है। नीति आयोग ने एक गवर्निंग काउंसिल बनाई है, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। वह एसडीजी की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और इसकी समीक्षा राज्य सरकारों द्वारा भी की जाती है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग एसडीजी की प्रगति पर नजर रखने और महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने के लिए विभिन्न सूचकांकों का भी इस्तेमाल करता है। भारत को अपने एसडीजी स्थानीयकरण मॉडल पर गर्व है, जो चार स्तंभों, संस्थागत स्वामित्व, सहयोगात्मक प्रतिस्पर्धा, क्षमता निर्माण और पूरे समाज के दृष्टिकोण पर आधारित है। भारत के मजबूत आर्थिक विकास सूचकांक प्रणालीगत सुधारों, समावेशी नीतियों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लाभ से आते हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा शुरू किया गया आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) 112 पिछड़े जिलों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एडीपी की सफलता ने आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की शुरुआत की है। भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की इच्छा रखता है, जो हमारी स्वतंत्रता का 100वां वर्ष होगा। भारत सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और 2030 एजेंडा को साकार करने की वैश्विक प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा खड़ा है।  

बाढ़ से असम में मचा हाहाकार! 18.80 लाख लोग अब भी प्रभावित,अबतक 85 की मौत

गुवाहाटी  असम में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, हालांकि अब भी 27 जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या करीब 18.80 लाख है। अधिकारियों नेयह जानकारी दी।अधिकारियों ने बताया कि राज्य में छह और लोगों की मौत हो जाने से इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। ब्रह्मपुत्र सहित कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं तथा कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। अधिकारियों ने बताया कि अब 27 जिलों में 18,80,700 लोग प्रभावित हैं जबकि  करीब 22.75 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित थे। राज्य में धुबरी जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां करीब 4.75 लाख लोग बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद कछार में दो लाख से अधिक लोग और बारपेटा में करीब 1.36 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन 25 जिलों में 543 शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है तथा वर्तमान में 3,45,500 विस्थापित लोगों की देखभाल कर रहा है।राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ( एसडीआरएफ) सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहाटी स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने  बताया कि अगले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ बारिश हो सकती है।  असम के मौजूदा हालात पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, बाढ़ से प्रभावित 22.75 लोगों की तुलना में रविवार को 27 जिलों में 18.80 लाख प्रभावित थे। बाढ़ के कारण धुबरी बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 4.75 लाख लोग बाढ़ के पानी में रहने को मजबूर है। इसके अलावा कछार में 2.01 लाख लोग और बारपेटा में 1.36 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की तरफ से राहत शिविरों का आयोजन प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 25 जिलों में 543 राहत शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में 3,45,500 लोग रह रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एसडीआरएफ सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहटी में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि असम और आसपास के राज्यों में चक्रवात का खतरा बना हुआ है।   ब्रह्मपुत्र नदी निमती घाट, तेजपुर, गुवाहाटी और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अन्य प्रमुख नदियां सुबनसिरी ( बदाती घाट), बुरहिडीहिंग (चेनिमारी), दिखौ (शिवसागर), दिसांग ( नांगलमुराघाट), कोपिली (धरमतुल ), बराक (बी पी घाट), संकोश (गोलोकगंज) और कुशियारा ( करीमगंज) भी खतरे के निशान को पार कर गई हैं ।    

मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित

नई दिल्ली  पूर्वी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व में एक अकेली मादा घड़ियाल देखी गयी जो इस क्षेत्र में घडियालों की संख्या को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकती है। मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित है। वर्ष 1950 के दशक से इस नदी से घड़ियाल विलुप्त हो गये थे। सर्वेक्षण में मादा घड़ियाल अपनी प्रजाति की एकमात्र ऐसी घड़ियाल पाई गई जो “रेतीले तट” और “4.5 मीटर गहरे जल वाले रेतीले टीले” के बीच रहती है। इस मादा घड़ियाल को पहली बार 2021 में काजीरंगा के बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में देखा गया था। इस घड़ियाल की लंबाई 2.55 मीटर है। इसे जनवरी में ब्रह्मपुत्र पर जलीय सरीसृपों के 10 दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान चुनी गई तीन प्राथमिकता वाले ठिकानों में से एक में 500 मीटर की दूरी पर नदी के तट पर बालू पर दो बार धूप सेंकते हुये देखा गया था। जानकारों का मानना है कि घड़ियालों की आबादी बढ़ाने की स्वीकृति मिलने पर उत्तर प्रदेश के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से घड़ियाल यहां लाये जा सकते है। इसका उद्देश्य घड़ियालों को उनके ऐतिहासिक क्षेत्र में वापस लाना और इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के अस्तित्व को बचाना है। वन्यजीव अधिकारियों और विशेषज्ञों को अभी यह पता नहीं चला कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के भीतर ब्रह्मपुत्र नदी के एक हिस्से में यह घड़ियाल कैसे आ गया, लेकिन उन्हें यकीन है कि यह सरीसृप नदी को घड़ियालों से फिर से आबाद करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अपनी लम्बी थूथन के कारण अन्य मगरमच्छों से बिल्कुल भिन्न इस घड़ियाल ( गेवियलिस गैंगेटिकस ) के बारे में माना जाता है कि यह 1950 के दशक में ब्रह्मपुत्र नदी से विलुप्त हो गये थे, हालांकि 1990 के दशक में इसे देखने के दावे भी किये गये थे। सरीसृपों में विशेषज्ञता रखने वाली गैर सरकारी संस्था टर्टल सर्वाइवल अलायंस फाउंडेशन इंडिया (टीएसएएफआई) और असम वन विभाग की टीमों ने पश्चिम में कलियाभोमोरा पुल से लेकर बिश्वनाथ डिवीजन के पूर्वी छोर से आगे माजुली के कमलाबाड़ी घाट तक 160 किलोमीटर के क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र का सर्वेक्षण किया। टीएसएएफआई की परियोजना निदेशक सुष्मिता कार ने कहा, “हम इस उपयुक्त आवास में घड़ियालों को पुनः स्थापित करने के लिए प्रस्ताव करते हैं।” काजीरंगा की निदेशक सोनाली घोष ने घड़ियाल प्रजनन कार्यक्रम के लिए क्षेत्र की आदर्श स्थितियों पर प्रकाश डाला, जिसमें न्यूनतम मानवजनित व्यवधान और प्रचुर मछली आबादी का हवाला दिया गया।  

भारतीय सेना ने डीएमए को भेजी सिफारिशें, 50 पर्सेंट से ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट करनेका प्रस्ताव

नई दिल्ली भारतीय सेना ने सिफारिश की है कि अग्निवीर अगर वीरगति (killed in action) को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को जीवन निर्वहन के लिए पेंशन जैसी मदद दी जाए। साथ ही सेना ने यह भी सिफारिश की है कि 50 पर्सेंट या इससे ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट किया जाए। अभी अग्निपथ स्कीम के तहत अधिकतम 25 पर्सेंट अग्निवीरों को ही परमानेंट करने का प्रावधान है। सेना ने करीब चार महीने तक अपनी सभी यूनिट से अग्निपथ स्कीम और अग्निवीरों को लेकर फीडबैक लिया और सेना के भीतर ही पूरा सर्वे कराया। सेना ने कुछ दिनों पहले ही फीडबैक और सर्वे के आधार पर अपनी सिफारिशें डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स यानी डीएमए को भेजी हैं। डीएमए प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं। सूत्रों के मुताबिक सिफारिश में कहा गया है कि अगर अग्निवीर वीरगति को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को subsistence allowance (जीवन निर्वाह भत्ता) दिया जाना चाहिए। अभी नहीं है ऐसा कोई प्रावधान एक अधिकारी के मुताबिक यह एक तरह से पेंशन ही है। सिफारिश में यह भी कहा गया है कि अगर देश की रक्षा के लिए काम करते हुए अग्निवीर डिसएबल्ड (विकलांग) होते हैं तो उन्हें भी एक्स ग्रेशिया (आर्थिक मदद) दिया जाना चाहिए। अभी अग्निपथ स्कीम में अग्निवीर के लिए इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। सेना की सिफारिश है कि हर बैच में कम से कम 50 पर्सेंट अग्निवीरों को परमानेंट किया जाना चाहिए। इसके साथ ही टेक्निकल आर्म में अग्निवीरों की अधिकतम ऐज बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। सूत्रों के मुताबिक सेना की तरफ से अग्निवीर का कार्यकाल चार साल से बढ़ाने जैसी कोई सिफारिश नहीं की गई है। जून 2022 में लई गई थी स्कीम भारतीय सेना में अग्निपथ स्कीम जून 2022 में लागू की गई और इसके साथ ही पुराने भर्ती सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। सेना में जितनी भी भर्ती हो रही हैं वह सब अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की हो रही हैं। स्कीम लागू होने के साथ ही इसे लेकर सवाल भी उठने लगे और इसका विरोध भी होने लगा। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आने पर वे अग्निपथ स्कीम को खत्म कर पुराने भर्ती सिस्टम को लागू करेंगे। विपक्ष को नहीं पसंद सरकार की नई स्कीम पहले संसद सत्र में इंडिया गठबंधन ने अग्निपथ स्कीम का विरोध किया और अग्निवीर और रेगुलर सैनिकों के बीच भेदभाव का मसला उठाया। कई रिटायर्ड ऑफिसर कह चुके हैं कि अग्निपथ स्कीम सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध लड़ने की योग्यता को कम करेगी। पूर्व नेवी चीफ एडमिरल केबी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ‘अग्निपथ स्कीम लाने के पीछे मोटिव सिर्फ पेंशन बिल घटाना था। जबकि तथ्य यह है कि यह स्कीम कॉम्बेट इफेक्टिवनेस को कम करेगी और ये तथ्य नैशनल सिक्योरिटी को समझने वाले सभी लोग जानते हैं’।

जून 2024 वैश्विक स्तर पर इस बार सबसे ज्यादा गर्म रहा, लगातार 12वां महीना तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक दर्ज

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कहीं गर्मी तो कहीं बारिश का तांडव देखा जा सकता है। तापमान ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस गर्मी में पारा भारत में अब तक 50 डिग्री के पार जा चुका है। इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने बताया कि पिछले महीने पांच महाद्वीपों में लाखों लोगों को चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ा। साथ ही इस बात की पुष्टि की कि जून अब तक का सबसे गर्म महीना था। 1.5 डिग्री की लिमिट को पार करने के करीब दुनिया बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के संकट को टालने के लिए विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करने के कगार पर खड़ी है। जून इस तय सीमा के करीब पहुंचने का लगातार 12वां महीना है। सी3एस के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले साल जून के बाद से हर महीना रिकॉर्ड पर सबसे गर्म महीना रहा है। जनवरी भी अब तक की सबसे गर्म गौरतलब है, इस साल जनवरी में बढ़ता तापमान औद्योगिक काल (1850 से 1900) से पहले की तुलना में 1.66 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था, जो इसे अब तक की सबसे गर्म जनवरी बनाता है। बता दें कि कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस यूरोपियन यूनियन के अर्थ ऑब्जरवेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। जनवरी 2024 के दौरान सतह के पास हवा का औसत वैश्विक तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो 1991 से 2020 के दरमियान जनवरी माह में दर्ज औसत तापमान से करीब 0.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।  रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी सिर्फ़ ज़मीन तक ही सीमित नहीं है। जून 2024 में समुद्री सतह का तापमान भी अब तक का सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने बताया कि वैश्विक महासागर सतह तापमान विसंगति उनके जलवायु रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा थी, जिसने ध्रुवीय बर्फ़ पिघलने की ख़तरनाक दर में योगदान दिया। अंटार्कटिक समुद्री बर्फ़ कवरेज ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है, जो वैश्विक समुद्री स्तरों और पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए गंभीर निहितार्थ पैदा करने वाली प्रवृत्ति को जारी रखती है। समुद्री बर्फ़ में गिरावट, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का एक स्पष्ट संकेतक है। ग्लोबल वार्मिंगजिससे मौसम का मिजाज और समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। अभूतपूर्व तापमान ने वैश्विक नेताओं और पर्यावरण संगठनों के बीच कार्रवाई के लिए नए सिरे से आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगे के नुकसान को कम करने के लिए मजबूत जलवायु नीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की स्थिति के बने रहने से आने वाले महीनों में उच्च तापमान बना रह सकता है, जिससे संभवतः 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्षों में से एक बन सकता है। चल रहे गर्मी की लहर संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर दक्षिणी यूरोप और चीन तक महाद्वीपों में मौसम संबंधी गंभीर घटनाओं पर एक अध्ययन से यह पता चलता है कि किस प्रकार गंभीर मौसम संबंधी घटनाएं लगातार और तीव्र होती जा रही हैं तथा जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप अब उनकी संभावना 50 गुना अधिक हो गई है। कुल मिलाकर, जून का महीना इतिहास में सबसे गर्म महीना होने का रिकॉर्ड तोड़ता है, जो जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति और इसके व्यापक प्रभावों की एक स्पष्ट याद दिलाता है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ता जा रहा है, प्रभावी जलवायु समाधानों की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए ग्रह की सुरक्षा के लिए संधारणीय प्रथाओं को लागू करने के प्रयासों को तेज करना चाहिए।

भारत से सस्ती है कंगाल पाकिस्तान में मोबाइल सेवा, जानिए बाकी देशों में कितना है मिनिमम रिचार्ज

नई दिल्ली रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है। इससे महंगाई से जूझ रहे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इससे शहरी इलाकों में टेलिकॉम सर्विसेज पर खर्च वित्त वर्ष 2025 में कुल घरेलू खर्च का 2.8 फीसदी हो जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो जाएगा लेकिन सरकार और टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ फिक्स करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनका इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भारत में मोबाइल टैरिफ अब भी दुनिया के अधिकांश देशों से सस्ता है। दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। हालिया बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो का मिनिमम सर्विस चार्ज 139 रुपए से बढ़कर 189 रुपए हो गया है। इसमें 28 दिन की वैलिडिटी और दो जीबी डेटा शामिल है। इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का भी मिनिमम सर्विस चार्ज 179 रुपए से बढ़कर 199 रुपए हो गया है लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में महीनेभर के लिए अनलिमिटेड वॉयस और 18 जीबी डेटा के लिए आपको 1.89 डॉलर यानी करीब 157 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह रेट सरकारी कंपनी बीएसएनएल का है। बीएसएनएल पहले एक प्राइस रेगुलेटर की तरह काम करता था। इससे प्राइवेट कंपनियां टैरिफ बढ़ाने से बचती थीं। लेकिन कंपनी 4-जी और 5-जी सर्विसेज के मामले में निजी कंपनियों के साथ होड़ करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान में सस्ती है सेवा सरकार ने कई देशों में मोबाइल टैरिफ के बारे में डिटेल जानकारी देते हुए भारत से उनकी तुलना की है। इन आंकड़ों के मुताबिक चीन में मिनिमम सर्विस के लिए यूजर्स को 8.84 डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अफगानिस्तान में यह राशि 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर और नेपाल में 2.75 डॉलर है यानी इन देशों में मोबाइल टैरिफ भारत से महंगा है। वहीं पाकिस्तान में मोबाइल यूजर्स को अपनी सर्विस बनाए रखने के लिए मिनिमम 1.39 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं यानी पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। अमेरिका में मिनिमम मोबाइल रिचार्ज प्लान 49 डॉलर यानी करीब 4000 रुपए का है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए यूजर्स को 20.1 डॉलर, साउथ अफ्रीका में 15.8 डॉलर, यूके में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर, मिस्र में 2.55 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। भारत में टेलिकॉम कंपनियों ने प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की है। उन्होंने महंगे 5G स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाए हैं लेकिन अभी तक बहुत कम मोनेटाइजेशन हुआ है। यह नवंबर 2021 के बाद मोबाइल टैरिफ में पहली बड़ी बढ़ोतरी है। सरकार का दखल नहीं, बाजार के हिसाब से होती हैं तय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने इसे लेकर शुक्रवार को एक बयान जारी किया. बयान में दूरसंचार विभाग ने कहा कि अभी घरेलू बाजार में 1 सरकारी कंपनी और 3 प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. मोबाइल सेवाओं का बाजार अब डिमांड और सप्लाई के हिसाब से काम करता है. मोबाइल कंपनियां नियामक ट्राई द्वारा तय किए गए ढांचे के तहत दरें तय करती हैं. सरकार फ्री मार्केट के निर्णयों में दखल नहीं देती है. टैरिफ में बदलाव की ट्राई करता है निगरानी बयान के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों के द्वारा दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की ट्राई निगरानी करता है और देखता है कि ये बदलाव तय दायरे में रहें. दूरसंचार विभाग ने साथ ही ये भी जोड़ा कि बीते 2 सालों से देश में मोबाइल टैरिफ में कोई बदलाव नहीं हुआ था, जबकि उस दौरान टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने देश में 5जी सेवाएं शुरू करने पर भारी निवेश किया. उसी का परिणाम है कि आज देश में औसत मोबाइल स्पीड बढ़कर 100 एमबीपीएस के स्तर पर पहुंच गई है और मोबाइल स्पीड के मामले में देश की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग अक्टूबर 2022 के 111 से छलांग लगाकर 15 पर पहुंच गई है. टेलीकॉम कंपनियों ने इतना महंगा किया प्लान तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइिडया ने इस महीने से अपने प्लान को महंगा किया है. दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ में 11 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. सबसे पहले रिलायंस जियो ने टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था. उसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया. टैरिफ बढ़ने से मोबाइल उपभोक्ताओं पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ बढ़ने का अनुमान है. विपक्षी पार्टियां इस बात को मुद्दा बना रही हैं. वहीं सरकार ने ताजे बयान में सफाई देते हुए दोहराया है कि अभी भी भारत में मोबाइल सेवाओं की दरें दुनिया के प्रमुख देशों की तुलना में कम हैं. दूरसंचार विभाग ने अपनी बात रखने के लिए इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन के द्वारा जारी आंकड़ों को आधार बनाया है. आईटीयू के आंकड़ों में न्यूनतम मोबाइल, वॉयस और डेटा के बास्केट (140 मिनट, 70 एसएमएस और 2 जीबी डेटा) की दरें बताई गई हैं. डेटा पिछले साल यानी 2023 के हिसाब से है. प्रमुख देशों में मोबाइल सेवाओं की दरें आंकड़ों के अनुसार, मिनिमम सेवाओं के लिए चीन में उपभोक्ता 8.84 डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसी तरह अफगानिस्तान में 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर, नेपाल में 2.75 डॉलर और पाकिस्तान में 1.39 डॉलर खर्च करना पड़ रहा है. प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की दरों को देखें तो वे अमेरिका में 49 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया में 20.1 डॉलर, दक्षिण अफ्रीका में 15.8 डॉलर, ब्रिटेन में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर और मिस्र में 2.55 डॉलर हैं. भारत के मामले में यह दर 1.89 डॉलर है, जिसमें उपभोक्ताओं को अनलिमिटेड वॉयस कॉल के साथ 18 जीबी डेटा का लाभ मिल रहा है.

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