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आमला: धूमधाम से हुआ शक्ति संवर्धन 108 कुंडिया गायत्री महायज्ञ का आगाज।

Amla: Shakti Samvardhan 108 Kundiya Gayatri Mahayagna started with great pomp. हरिप्रसाद गोहेआमला। मध्यप्रदेश के बैतूल जिला स्थित आमला नगर के रेल्वे खेल मैदान हवाई पट्टी क्षेत्र में शक्ति संवर्धन 108 कुंडिय गायत्री महायज्ञ का विशाल आयोजन आयोजित किया जा रहा है। जहां बड़ी संख्या में गायत्री परिवार से जुड़े साधक क्षेत्र सहित जिले भर से लोग पहुंच अपनी उपस्थिति दर्ज करा कार्यक्रम को सफ़ल बना रहे हैं। आयोजन को लेकर बड़े स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। उक्त आयोजित आयोजन शांति कुंज हरिद्वार,के मार्गदर्शन में अखिल विश्व गायत्री परिवार आमला एवं क्षेत्रीय परिजन/समस्त नगरवासी आमला जिला बैतूल के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। मिली जानकारी अनुसार त्रिदिवसीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ शुक्रवार भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। ऐतिहासिक कलश यात्रा हसलपुर स्थित गणेश मैरिज लॉन से शुरू होकर नगर भ्रमण कर आयोजन स्थल पहुंची थी। इस दौरान महिलाओं ने पिला परिधान धारण कर सर पर कलश लेकर चल रही थी। जो आकर्षण का केंद्र लग रहा था। शनिवार देव पूजन के साथ 108 कुंडिय गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ जहां सभी ने पहुंच यज्ञ में सामुहिक आहुति डाल पुण्य लाभ अर्जित कर आयोजन समिति द्वारा संचालित मां भगवती भोजनालय में भोजन प्रसाद ग्रहण किया। आयोजित कार्यक्रम अंतर्गत रविवार गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार के साथ आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पांड्या जी द्वारा विशिष्ठ उद्बोधन एवं विराट दीप महायज्ञ का आयोजन होंगा। वहीं सोमवार गायत्री महायज्ञ एवं पूर्ण आहुति होंगी। आयोजन समिति ने आमजन से उक्त सभी आयोजन में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफ़ल बनाने अपिल की है।

Indore News: हाईकोर्ट ने कहा कुत्तों की नसबंदी बड़ा घोटाला, सड़क पर निकलने में भी लगता है डर

Indore News: High Court said that sterilization of dogs is a big scam, people are afraid to even go out on the road. इंदौर हाई कोर्ट ने शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। कोर्ट ने निगम द्वारा पेश किए गए नसबंदी के आंकड़ों को संदिग्ध बताते हुए इसे एक बड़ा घोटाला करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। नसबंदी अभियान पर न्यायिक जांच की चेतावनीसुनवाई के दौरान प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस बीके द्विवेदी की बेंच ने निगम के दावों पर सवाल उठाए। जब निगम ने कहा कि वे 2.39 लाख कुत्तों की नसबंदी कर चुके हैं, तो कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों पर बढ़ती कुत्तों की संख्या कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो अब तक हुए स्टरलाइजेशन अभियान की न्यायिक जांच कराई जाएगी। बच्चों के सामाजिक विकास पर बुरा असरमाननीय न्यायाधीशों ने इस बात पर चिंता जताई कि कॉलोनियों में कुत्तों के डर से बच्चों का घर से बाहर निकलना बंद हो गया है। इससे उनका सामाजिक विकास प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि एक कुत्ते की नसबंदी पर दो हजार रुपए खर्च करना और फिर भी समस्या का जस का तस बने रहना एक गंभीर विषय है। कोर्ट के अनुसार, इंदौर अब आवारा कुत्तों का हब बनता जा रहा है। सड़कों पर पैदल चलना और वाहन चलाना हुआ दूभरकोर्ट ने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि रात के समय सड़कों पर निकलना खतरनाक हो गया है। कुत्तों के झुंड राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों पर हमला कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। निगम के इस तर्क पर कि वे सूचना मिलने पर कार्रवाई करते हैं, कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि 25 नवंबर के निर्देशों के बावजूद शहर में कोई प्रभावी अभियान नजर नहीं आया है। अगली सुनवाई 12 जनवरी कोहाई कोर्ट ने अब इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया है। कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले शहर के प्रमुख स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने की प्रभावी कार्रवाई की जाए। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की गई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी नायब तहसीलदार को 10 हजार रिश्वत लेते पकड़ा

Lokayukta’s action against corruption continues; Naib Tehsildar caught taking a bribe of Rs 10,000 सतना ! मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बावजूद सरकारी महकमे में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सतना जिले के रामपुर बाघेलान तहसील कार्यालय से सामने आया है, जहां रीवा लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार को उनके ही कार्यालय में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त टीम ने रामपुर बाघेलान तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह जायसूर को उस समय पकड़ा, जब वे अपनी कुर्सी पर बैठकर फरियादी से 10 हजार रुपये की रिश्वत ले रहे थे। अचानक हुई इस कार्रवाई से तहसील कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। पुश्तैनी जमीन के बंटवारे और नामांतरण का था मामलाजानकारी के अनुसार यह पूरा मामला पुश्तैनी जमीन के बंटवारे और नामांतरण आदेश से जुड़ा हुआ है फरियादी आशुतोष सिंह के पिता चंद्रशेखर सिंह के नाम पर दर्ज जमीन के बंटवारे का आदेश तहसील स्तर पर लंबित था फरियादी का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने इस फाइल को पास करने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। 15 दिसंबर को की गई थी लोकायुक्त में शिकायतरिश्वत से परेशान होकर फरियादी आशुतोष सिंह ने 15 दिसंबर को रीवा लोकायुक्त कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई हैरानी की बात यह रही कि सत्यापन के दौरान ही आरोपी नायब तहसीलदार ने पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये ले लिए थे, जिसके बाद लोकायुक्त ने ट्रैप की पूरी योजना तैयार की। बाकी रकम लेते ही दबोचा गया अधिकारीगुरुवार को योजना के मुताबिक फरियादी शेष बचे 10 हजार रुपये लेकर रामपुर बाघेलान तहसील कार्यालय पहुंचा। जैसे ही नायब तहसीलदार ने फरियादी से पैसे अपने हाथ में लिए, वहां पहले से सिविल ड्रेस में मौजूद लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी के हाथ धुलवाकर केमिकल टेस्ट कराया, जिसमें रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। कार्रवाई से मचा हड़कंपलोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया। कर्मचारी और फरियादी हैरान रह गए। कुछ देर के लिए तहसील का कामकाज भी प्रभावित रहा लोकायुक्त टीम ने मौके पर ही आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्जलोकायुक्त द्वारा आरोपी नायब तहसीलदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। आगे की जांच जारी है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

Kakori conspiracy:4600 रुपये की काकोरी ट्रेन लूट का क्या है सच, फांसी पर चढ़ने वाले Ram Prasad Bismil और अश्फाक उल्ला ने क्या देखा था सपना?

Kakori conspiracy: What is the truth behind the Kakori train robbery of Rs 4600? What did the hanged Ram Prasad Bismil and Ashfaqulla dream about? Kakori conspiracy / काकोरी के शहीद : राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) , अशफाक उल्ला खान (Ashfaqulla Khan) और रोशन सिंह की शहादत को 98 साल पूरे हो गए। काकोरी कांड को अंजाम देने के लिए 19 दिसंबर 1927 ((Kakori Kand) को तीन लोगों राम प्रसाद बिस्मिल, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दी गई थी। Ram Prasad Bismil : काकोरी कांड को जोगेशचन्द्र चटर्जी, प्रेमकृष्ण खन्ना, मुकुन्दी लाल, विष्णुशरण दुबलिश, सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य, रामकृष्ण खत्री, मन्मथनाथ गुप्त, राजकुमार सिन्हा, ठाकुर रोशन सिंह, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, गोविन्दचरण कर, रामदुलारे त्रिवेदी, रामनाथ पाण्डे, शचीन्द्रनाथ सान्याल, भूपेन्द्रनाथ सान्याल, और प्रणवेश कुमार चटर्जी ने मिलकर अंजाम दिया। उनपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। नीचे की फोटो में अशफाउल्ला खान (Ashfaqulla Khan) की तस्वीर नहीं है। राजेंद्र लहरी को 17 दिसंबर 1927 को दी गई थी फांसी98 Years of Kakori Kand: राजेंद्र लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई, जबकि दो दिन बाद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह को फांसी की सजा दी गई थी। वहीं चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से लड़ते हुए खुद को गोली मारकर जान दे दी। क्या काकोरी कांड सिर्फ पैसों की लूट था?प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम बताते हैं कि लोग यह गलतबयानी करते हैं कि क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों की आर्थिक हालत खराब हो चुकी थी और उनके पास पहनने तक के साबूत कपड़े भी नहीं बचे थे। वह सुधीर विद्यार्थी के हवाले से कहते हैं, ‘याद रहे सरकारी ख़ज़ाने को लूटने के पीछे का उद्देश्य हथियार व गोला-बारूद खरीदना नहीं था बल्कि एक छापाखाना स्थापित करना था ताकि समाजवादी साहित्य छाप कर नौजवानों, मज़दूरों, किसानों और बुद्धजीविओं के बीच प्रसारित किया जा सके।’ काकोरी ट्रेन कांड को कौन कर रहा था लीड?काकोरी उत्तर प्रदेश में लखनऊ से 17.5 किलोमीटर की दूरी पर एक छोटा सा रेलवे स्टेशन था। राम प्रसाद बिस्मिल ने ट्रेन लूटने की योजना बनाई। उन्होंने इस काम के लिए नौ क्रांतिकारियों का चयन किया। उनके अलावा इस मुहिम में राजेंद्र लाहिड़ी, रोशन सिंह, सचींद्र बख्शी, अशफ़ाक़उल्ला ख़ां, मुकुंदी लाल, मन्मथनाथ गुप्त, मुरारी शर्मा, बनवारी लाल और चंद्रशेखर आज़ाद शामिल थे। 4600 रुपये का मिथक?राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में लिखा, ‘कुली गार्ड के डिब्बे में रखे लोहे के संदूक उतार रहा था। उसमें ना ही जंजीर और ना ही ताले लगे होते हैं। बस उसी दिन मैंने यह तय कर लिया कि इसी को लूटना है। क्रांतिकारियों ने यह तय किया ट्रेन में यात्रा कर रहे किसी यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस काम के लिए क्रातिकारियों ने 8 अगस्त 1925 का दिन मुकर्रर किया, पर वो ट्रेन स्टेशन से छूटने के 10 मिनट बाद स्टेशन पहुंच पाए। 8 डाउन से लूटे थे 4600 रुपये8 अगस्त को योजना में कामयाबी नहीं मिलने के बाद उन्होंने यह तय किया अब इस काम को वे 9 अगस्त को अंजाम देंगे। अगले दिन वे चार माउज़र पिस्तौलें और रिवॉल्वर लेकर ट्रेन में सवार हुए और लखनऊ से शाहजहांपुर रूट पर 8 डाउन में सवार हो गए। काकोरी में ट्रेन की चेन खींची और लोहे का बक्सा उतार लिया। इस बक्शे में सिर्फ 4600 रुपये थे। क्रांतिकारियों पर कौन-कौन सी लगाई गई थीं धाराएंकाकोरी षड्यंत्र के बाद अंग्रेजी सरकार क्रांतिकारियों के पीछे कुत्तों की तरह पीछे लग गई। इस कांड को अंजाम देने वालों पर भारतीय दंड संहिता के तहत 121 A, 120B, 396 की धाराएं लगाई गईं। अंग्रेजी सरकार ने रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र लहरी, रोशन सिंह, और अशफ़ाक़उल्ला ख़ां को राजद्रोह और षड्यंत्र रचने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई। बिस्मिल ने फंदे पर झूलने से पहले कहा था- ‘आई विश डाउनफाल ऑफ ब्रिटिश इम्‍पायर’। उन्होंने ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’ और ‘अंग्रेजी सरकार मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए थे। देश पर जान न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी यह मानते थे कि अंग्रेजी शासन तानशाही के रास्ते पर चल रही है और उन्हें तानाशाही व्यवस्था का अंत करना है। भारतीय कम्युनिस्टों से अश्फाक उल्ला ने की थी ये अपील सुधीर विद्यार्थी अपनी किताब ‘अशफ़ाकुल्लाह और उनका युग’ में लिखते हैं, ‘कम्युनिस्ट ग्रुप से अशफ़ाक़ की गुज़ारिश है कि तुम इस गैर-मुल्क की तहरीक को लेकर जब हिन्दुस्तान में आए हो तो तुम अपने को गैर-मुल्की ही तस्सवुर करते हो, देसी चीज़ों से नफ़रत, विदेशी पोशाक और तर्ज़-ए- मआशरत (जीने का अंदाज़) के दिल दादा हो, इस से काम नहीं चलेगा, अपने असली रंग में आ जाओ। देश के लिए जियो, देश के लिए मरो। मैं तुम से काफ़ी तौर पर मुत्तफ़िक़ (सहमत) हूं और कहूंगा कि मेरा दिल ग़रीब किसानों के लिए और दुखिया मज़दूरों के लिए हमेशा दुखी रहा है।’ किसानों और मजदूरों की हालत पर रोते थे अश्फाक उल्लासुधीर लिखते हैं, ‘मैं ने अपने आयाम-ए-फ़रारी (पुलिस से छुपकर रहने वाला काल) में भी अक्सर इनके हालात देखकर रोया किया हूं क्योंकि मुझे इनके साथ दिन गुज़रने का मौक़ा मिला है। मुझ से पूछो तो मैं कहूंगा कि मेरा बस हो तो मैं दुनिया की हर चीज़ इन के लिए वक़्फ़ (सुरक्षित) कर दूं। हमारे शहरों की रौनक़ इनके दम से है। हमारे कारखाने इन की वजह से आबाद और काम कर रहे हैं। हमारे पम्पों से इनके हाथ ही पानी निकालते हैं। ग़रज़ की दुनिया का हर एक काम इनकी वजह से हुआ करता है। गरीब किसान बरसात के मूसलाधार पानी और जेठ-बैसाख की तपती दोपहर में भी खेतों पर जमा होते हैं और जंगल में मंडराते हुए हमारी खुराक का सामान पैदा करते हैं। यह बिल्कुल सच है कि वह जो पैदा करते हैं, जो वह बनाते हैं, उनमें उनका हिस्सा नहीं होता। वह हमेशा दुखी और मुफ़लिस-उल-हाल (दरिद्र) रहते हैं। मैं इत्तेफ़ाक़ करता हूं कि इन तमाम बातों के ज़िम्मेदार हमारे गोरे आक़ा और उनके एजेंट हैं।’ क्या शहीदों के सपने हुए पूरे? आईआईटी, बंबई में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के पूर्व प्रोफेसर और वर्तमान समय में सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेकुलरिज्म (सीएसएस) की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष राम पुनियानी क्रांतिकारियों के विचारों से सहमति जताते हुए कहते हैं … Read more

बालाघाट में लाखों क्विंटल धान खरीदी केंद्रों पर ही पड़ी, परिवहन नहीं होने से परेशानी बढ़ी

Lakhs of quintals of paddy remained at procurement centres in Balaghat, problems increased due to lack of transportation बालाघाट। बालाघाट जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के परिवहन में देरी हो रही है। 1 दिसंबर से शुरू हुई धान खरीदी के बाद से अब तक 8 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी केंद्रों पर ही पड़ा है, जिसका परिवहन नहीं हो पाया है।जिले में अब तक 49,881 किसानों से 23 लाख 50 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई है, जिसकी कुल कीमत 556 करोड़ रुपए है। इसमें से किसानों को 150 करोड़ 82 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। हालांकि, खरीदी गई धान में से लगभग 15 लाख क्विंटल का ही परिवहन हो सका है। धान परिवहन की गति विशेष रूप से बालाघाट और लालबर्रा क्षेत्रों में धीमी है। लालबर्रा विकासखंड के केंद्रों से परिवहन में देरी के कारण फर्म मेसर्स पंकजम पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

डॉक्टर नदारद, वार्ड बॉय के उपचार से मरीज की मौत; परिजनों ने हंगामा कर थाने में दी शिकायत

Doctor absent, patient dies after being treated by ward boy; family members create ruckus and file complaint at police station शहडोल जिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार का जिला होने के बावजूद यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पाली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार में भारी लापरवाही का मामला सामने आया। यहां डॉक्टर की अनुपस्थिति में कथित तौर पर वार्ड बॉय और स्टाफ द्वारा इलाज किए जाने के बाद एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता दिनेश कुमार जैन ने पुलिस को बताया कि उनके परिजन कमलेश जैन, निवासी गुरुनानक चौक, को 16 दिसंबर की रात करीब 11.30 बजे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज को इमरजेंसी कक्ष में ले जाया गया, जहां मौजूद एक युवक ने स्वयं को चिकित्सक बताकर उपचार शुरू कर दिया। वहीं, अस्पताल की एक महिला स्टाफ द्वारा दवाइयां लिखी गईं। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत बिगड़ने लगी और उसे घबराहट होने पर भी समय पर सीपीआर नहीं दिया गया। उचित और तत्काल चिकित्सा सहायता के अभाव में कुछ ही देर बाद कमलेश जैन की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज का इलाज वार्ड बॉय द्वारा किया गया, जो सीधे तौर पर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजन तत्काल कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। उपनिरीक्षक उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत स्वीकार कर ली गई है और जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भोपाल में हुई अहम बैठक, मिलर्स बोले– बिना भुगतान नहीं करेंगे धान मिलिंग

An important meeting was held in Bhopal, where millers said they would not mill paddy without payment. विशेष संवाददाता (जितेन्द्र श्रीवास्तव) भोपाल। भोपाल स्थित पत्रकार कॉलोनी में नागरिक आपूर्ति निगम के मुख्यालय में खाद्य एवं आपूर्ति निगम विभाग की अपर मुख्य सचिव माननीय रश्मि अरुणा शमी की अध्यक्षता में चावल उद्योग महासंघ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में नान के प्रबंध सचिव अनुराग वर्मा, महाप्रबंधक मनोज वर्मा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान महासंघ अध्यक्ष आशीष अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने शासन को 8 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक शासन द्वारा वर्ष 2024-25 की मिलिंग पर अपग्रेडेशन राशि, हमाली एवं बारदाने की उपयोगिता व्यय राशि का भुगतान नहीं किया जाता और वर्ष 2025-26 के उपार्जन अंतर्गत मिलिंग पर 200 रुपये अपग्रेडेशन राशि देने संबंधी आदेश जारी नहीं होते, तब तक प्रदेश के मिलर्स मिलिंग कार्य नहीं करेंगे। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन मिलिंग एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई करना चाहता है तो वह उसके लिए भी तैयार है। पदाधिकारियों ने कहा कि मिलर्स अपनी-अपनी मिलों की चाबी शासन को सौंपने को तैयार हैं और यदि शासन चाहे तो मिलों का अधिग्रहण भी कर सकता है, लेकिन बिना अपग्रेडेशन राशि के आदेश के किसी भी स्थिति में मिलिंग कार्य संभव नहीं है। महासंघ द्वारा रखे गए तथ्यों और मांगों को गंभीरता से सुनने के बाद माननीय अपर मुख्य सचिव ने कुछ समय की मांग करते हुए कहा कि इस विषय में उच्च स्तर पर अवगत कराकर शीघ्र जवाब दिया जाएगा। बैठक के बाद भी मिलर्स के रुख में कोई नरमी नहीं दिखी, जिससे आने वाले समय में धान मिलिंग व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: अब दूसरों को कैसे दिखाएंगे वन्यजीवों के संग बिताए यादगार पल? बदल गए जंगल सफारी के नियम

Bandhavgarh Tiger Reserve: How will you now show others your memorable moments with wildlife? Jungle safari rules have changed. मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। कोर क्षेत्र में पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। नए नियम के तहत पर्यटकों को सफारी पर जाने से पहले अपने मोबाइल फोन बंद कर सुरक्षित रूप से जमा कराने होंगे। बिना मोबाइल फोन जमा किए किसी भी पर्यटक को कोर एरिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पार्क प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला जंगल और वन्यजीवों के प्रति पर्यटकों की संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। बीते वर्षों में देखा गया था कि अधिकांश पर्यटक सफारी के दौरान फोटो खींचने, वीडियो बनाने और सोशल मीडिया के लिए रील्स रिकॉर्ड करने में ही व्यस्त रहते थे। इससे न केवल उनका ध्यान वन्यजीवों से भटकता था, बल्कि कई बार जानवरों की स्वाभाविक गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से जंगल की शांति भंग हो रही थी। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी प्रवेश द्वारों पर मोबाइल जमा करने के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां पर्यटकों को सुरक्षित व्यवस्था के तहत अपने फोन जमा करने की सुविधा मिलेगी, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। आदेश में देश के सभी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शुभरंजन सेन ने इस संबंध में सभी रिजर्व प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद बांधवगढ़ प्रबंधन ने तुरंत अमल शुरू कर दिया। नए नियम से सोशल मीडिया पर जंगल की तस्वीरें और वीडियो साझा करने का चलन कम होगा। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को प्रकृति के साथ वास्तविक जुड़ाव का अवसर मिलेगा। बाघों की अच्छी संख्या के लिए प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। प्रबंधन को उम्मीद है कि यह कदम जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देगा और जंगल का मूल स्वरूप बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

कोल माफिया पर खनिज का करारा प्रहार, 8 हाइवा जप्त

Mining department strikes hard on coal mafia, 8 Hiva trucks seized सिंगरौली । अवैध खनन और कोयले के गैरकानूनी परिवहन के खिलाफ सिंगरौली प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर गौरव बैनल के स्पष्ट निर्देशों के तहत खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोयले के अवैध परिवहन में संलिप्त 8 हाइवा वाहनों को जप्त किया है। इस कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। खनिज विभाग को ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि झिंगुरदह क्षेत्र के बरहवा टोला में रात के अंधेरे में कोयले का अवैध परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व खनिज निरीक्षक अशोक मिश्रा ने किया। गोपनीय सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के दौरान खनिज विभाग की टीम ने मौके से 8 हाइवा वाहनों को कोयले के साथ रंगे हाथों पकड़ा। वाहनों के पास वैध परिवहन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। तत्पश्चात सभी जप्त वाहनों को सुरक्षार्थ मोरवा थाना परिसर में खड़ा कराया गया है। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में कोयला माफियाओं में अफरा-तफरी का माहौल है। लगातार हो रही प्रशासनिक सख्ती से अवैध खनन व परिवहन करने वाले कारोबारी सकते में हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को ग्रामीणों ने भी सराहा है और कहा है कि इससे क्षेत्र में हो रहे पर्यावरणीय नुकसान पर भी रोक लगेगी। खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में अवैध खनन और परिवहन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध गौण खनिज अधिनियम एवं संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि सिंगरौली में अवैध खनन व परिवहन करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। आने वाले दिनों में और भी कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। खनिज विभाग की कार्रवाई से कोल माफियाओं में हड़कंपजिले में अवैध कोयला उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा की गई सख्त कार्रवाई से कोल माफियाओं में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में दबिश देकर अवैध गतिविधियों पर शिकंजा कसा। कार्रवाई के दौरान बिना वैध दस्तावेजों के कोयला परिवहन करते कई वाहनों की जांच की गई, वहीं कुछ वाहनों को जप्त कर चालान की प्रक्रिया भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से जिले में अवैध कोयला कारोबार की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह अभियान तेज किया गया। अचानक हुई कार्रवाई से माफियाओं में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।

घाना में विशाल निःशुल्क चिकित्सा शिविर, 205 से अधिक मरीजों को मिला उपचार

A massive free medical camp was held in Ghana, treating over 205 patients. जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता)जबलपुर । वेदांत होम्योपैथिक क्लिनिक, घाना में एक विशाल निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन डॉ. अंजना कपूर (प्रेसिडेंट, र्मावल यूनिट – HMAI) एवं डॉ. विकास विश्वकर्मा (डीसीसी, र्मावल यूनिट) के संयुक्त समन्वय से किया गया। शिविर के दौरान क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती रजनी साहू तथा होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI) के वरिष्ठ चिकित्सकों का शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। साथ ही शिविर में सेवाएं देने वाले सभी चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 205 से अधिक मरीजों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार किया गया तथा उन्हें निःशुल्क होम्योपैथिक दवाओं का वितरण किया गया। आयोजन को क्षेत्रवासियों का भरपूर सहयोग और सराहना मिली।

‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड मौतें: एक हफ्ते में 6 बाघों की मौत, 2025 में आंकड़ा 54 पार

Record deaths in ‘Tiger State’ Madhya Pradesh: 6 tigers died in a week, toll crosses 54 in 2025 भारत के ‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश में पिछले एक हफ्ते के भीतर 6 बाघों की मौत दर्ज की गई है. इसके साथ ही वर्ष 2025 में अब तक बाघों की कुल मौतों का आंकड़ा 54 हो गया है. यह संख्या 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक साल में अब तक की सबसे अधिक बताई जा रही है. आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में- ज्यादातर मौतों का कारण प्राकृतिकवन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं, जो बाघों की बढ़ती संख्या को भी दर्शाती हैं. उन्होंने कहा, “संख्या जितनी ज्यादा होगी, प्राकृतिक मौतें भी उतनी बढ़ेंगी. यह स्वाभाविक है.” अधिकारियों के अनुसार, यह रुझान बताता है कि अगली बाघ गणना में भी मध्य प्रदेश देश का शीर्ष ‘टाइगर स्टेट’ बना रह सकता है. हाल ही में बांधवगढ़ में मिला बाघ का शवबाघ की मौत का ताजा मामला बांधवगढ़ का है, जहां उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र के आरएफ-10 में कथली नदी के पास एक बाघ का शव मिला. शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला, जिसके बाद इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी गई है. फील्ड स्टाफ नियमित गश्त और जनगणना कार्य में जुटा था, तभी यह मामला सामने आया. करंट लगने से बाघ की मौत की आशंकावन विभाग की टीमें साक्ष्य सुरक्षित करने में जुटी हैं. डॉग स्क्वॉड की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की तलाश की जा रही है और आसपास के वन क्षेत्रों व नदी किनारे की पट्टी की सघन तलाशी ली जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि शव बिजली लाइन कॉरिडोर के पास मिला है, इसलिए करंट लगने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है. नजदीकी बिजली ढांचे की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं खुले या अवैध तारों की वजह से घटना तो नहीं हुई. 54 में से 36 रहस्यमयी मौतें, ज्यादातर शिकार सेटाइगर की 54 मौतों में से 36 मौतें रहस्यमयी हैं. ज्यादातर मामलों में टाइगर का शिकार किया गया है. कई बार टाइगर के पंजे काटकट शिकारी ले गए. तस्करी में एक टाइगर की कीमत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करीब एक से 3 करोड़ रुपये होती है. कई बार शिकारी जंगल मे टाइगर्स की निगरानी में लगे कैमरों में कैद हो चुके हैं. बाघों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे भी चोरी होने के कई मामले आए हैं. टाईगर्स की बढ़ती मौतों और सुरक्षा में लापरवाही पर NTCA ने चिंता जताई है. कांग्रेस ने एमपी सरकार पर लगाए आरोपटाइगर्स की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने सरकार को में असफल बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बबारोलिया ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वन राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहरवार का कहना है कि विभाग मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है.

नेशनल हेराल्ड मामले में सियासी उबाल: भोपाल में भाजपा दफ्तर का घेराव करेगी कांग्रेस, जीतू पटवारी के नेतृत्व में 3 बजे कूच करेंगे कार्यकर्ता

Political uproar in the National Herald case: Congress to surround BJP office in Bhopal, workers led by Jitu Patwari to march at 3 pm भोपाल। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ED की कार्रवाई तथा हालिया न्यायालय से मिली राहत के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा पर गांधी परिवार को फंसाने का आरोप लगाते हुए भोपाल में भाजपा कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर 3 बजे कांग्रेस कार्यालय से भाजपा कार्यालय की ओर कूच करेंगे और वहां घेराव करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से गांधी परिवार को नेशनल हेराल्ड मामले में फंसाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने ED की कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। हालांकि, हालिया अदालती फैसले में दिल्ली कोर्ट ने ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, जिसे कांग्रेस ने सत्य की जीत बताया है।

MP Assembly Special Session: मनरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर विधानसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन, महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर जताया विरोध

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने आज अपने स्थापना के 69 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आज 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। यह दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ठीक 69 साल पहले, 17 दिसंबर 1956 को मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। वहीं कांग्रेस ने विधानसभा में मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस विधायकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर विरोध किया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि बीजेपी महात्मा गांधी का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि राम जी के नाम पर कोई नई योजना लानी चाहिए थी, राम जी के नाम पर कोई नई योजना आती तो हम उसकी तारीफ करते। महात्मा गांधी से बीजेपी को तकलीफ है। कांग्रेस के प्रदर्शन पर बोले विधायक रामेश्वर शर्माकांग्रेस के विधानसभा में प्रदर्शन पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को राम से एलर्जी है इसलिए विरोध कर रही है। राम से एलर्जी रखोगे तो रावण से राम तक सबका अंत होगा।कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल किया। हम महात्मा गांधी के विचारों और कार्यों का अनुसरण कर रहे हैं। कांग्रेस गांधी का नाम लेकर कई बार सत्ता में आई लेकिन गरीब का घर नहीं बनाया। यह दुनिया जानती है कि महात्मा गांधी के रामराज्य को जमीन पर उतारने का काम किसी ने किया है तो वो पीएम मोदी ने किया है। शर्मा ने कहा कि हमने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया, ग़रीब के पक्के मकान बनाने का काम किया, गरीब के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए, किसानों का सम्मान किया क्योंकि यही गांधी जी चाहते थे। सबका साथ सबका विकास – यही काम भाजपा सरकार कर रही है। मनरेगा में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भ्रष्टाचार हुआ, अब मनरेगा के बलबूते पर ग्रामीण लोगों का विकास होगा।

शासकीय योजना में दो लाख की प्रोत्साहन राशि, 90 हजार रुपये मांगी रिश्वत, जनजातीय विभाग के बाबू को लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा

Lokayukta catches Tribal Department clerk red-handed after demanding Rs 90,000 bribe for Rs 2 lakh incentive under government scheme भोपाल। राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोकायुक्त पुलिस भोपाल की टीम ने मंगलवार शाम नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट स्थित जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-दो मनोज सोनी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी बाबू ने अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की राशि दिलाने के बदले एक हितग्राही से 50 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। हितग्राही से पहले 20 हजार रुपये और काम पूरा होने के बाद 70 हजार रुपये लेने की डील तय हुई थी। बाद में पहली किश्त के रूप में 10 हजार रुपये पर सहमति बनी। सिवनीमालवा के सिपुर निवासी 36 वर्षीय हितग्राही प्रवीण सोलंकी ने रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त भोपाल एसपी कार्यालय में की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद आरोपी बाबू को पकड़ने के लिए लोकायुक्त टीम गठित कर जाल बिछाया गया। तय योजना के अनुसार जैसे ही शिकायतकर्ता ने मंगलवार शाम आरोपी क्लर्क के कार्यालय में पहुंचकर उसे रिश्वत की रकम थमाई, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। इस कार्रवाई में लोकायुक्त टीम में डीएसपी बीएम द्विवेदी, डीएसपी अजय मिश्रा, निरीक्षक रजनी तिवारी, प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, प्रधान आरक्षक मुकेश पटेल, आरक्षक मुकेश परमार, आरक्षक चैतन्य प्रताप सिंह व गौरव साहू शामिल रहे। घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया है।

Cabinet Meeting: कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव,7 कैटेगरी खत्म, अब सिर्फ तीन वर्ग,1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

Cabinet Meeting: Major changes in employee management, 7 categories abolished, now only three, irrigation package worth Rs 1782 crore मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए सात प्रकार की नियुक्ति श्रेणियों को समाप्त कर दिया है। अब प्रदेश में केवल तीन ही कैटेगरी रहेंगी। नियमित, संविदा और आउटसोर्स। मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का अलग वर्ग अब नहीं रहेगा, क्योंकि दोनों की सेवा शर्तें, वेतन और पेंशन समान हैं। कैबिनेट निर्णय के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत कार्यभारित, दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, स्थायीकर्मी सहित अन्य श्रेणियों के कर्मचारी अपने सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। इनके सेवानिवृत्त होते ही पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। यदि किसी विभाग को आवश्यकता होगी, तो नियमित पद सृजित कर नई भर्ती की जाएगी। कार्यभारित कर्मचारियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधानसरकार ने यह भी निर्णय लिया कि सेवाकाल में कार्यभारित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। अब तक इस संवर्ग में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। न्यायालयीन मामलों में मिलेगी राहतनई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालतों में कर्मचारियों की अलग-अलग कैटेगरी बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न्यायालयीन भ्रम कम होगा और सरकार को बार-बार सुनवाई से राहत मिलेगी। साथ ही अस्थायी पदों के लिए हर साल कैबिनेट से अनुमति लेने की बाध्यता भी समाप्त हो जाएगी। नियमित और संविदा पर रहेगा जोरसरकार ने दो टूक कहा है कि भविष्य में नियुक्तियों का फोकस नियमित और संविदा कर्मचारियों पर रहेगा। आउटसोर्स कर्मी सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाएंगे, क्योंकि उनकी सेवाएं एजेंसियों के माध्यम से ली जाती हैं। मुख्यमंत्री ने ब्लाइंड विमेन T20 वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम की तीन मध्यप्रदेश की खिलाड़ियों को 25-25 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं बैतूल जिले के भरेवा धातु शिल्प को जीआई टैग मिलने पर शिल्पकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भोपाल-इंदौर मेट्रो के लिए 90.67 करोड़ स्वीकृतभोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए राज्य सरकार ने 90.67 करोड़ रुपए के प्रावधान को मंजूरी दी है। यह राशि मेट्रो संचालन से जुड़े व्यय को पूरा करने के लिए होगी। तीन आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेजनर्मदा घाटी विकास विभाग के तहत अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को स्वीकृति दी गई है। इससे अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों की 5512 करोड़ रुपए की योजनाएं पूरी होंगी। इन परियोजनाओं से 71,967 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा। कैबिनेट में अन्य महत्वपूर्ण फैसले मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के सूचकांक में वृद्धि, 3810 कार्य 693.76 करोड़ की लागत से होंगे।एमएसएमई विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को पांच साल तक जारी रखने का निर्णय, 905.25 करोड़ मंजूर।छह जिलों में वन विज्ञान केंद्र स्थापित होंगे, 48 करोड़ की स्वीकृति।इंदौर के एमवाय अस्पताल का 773 करोड़ से नवनिर्माण, 1450 बिस्तरों की सुविधा।

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