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शासन की करोड़ों की भूमि पर अतिक्रमण कर के बैठा ज्ञानगंगा कॉलेज, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो करेगा फर्जीवाड़े  की जांच

युवा क्रांती के उपाध्यक्ष (मध्य प्रदेश) रुपेश सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति मे बताया कि युवा क्रांती के द्वारा ज्ञानगंगा इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालको द्वारा किये जा रहे फर्जीवाड़ा और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर के, उस पर अपने स्वामित्व बताकर बिल्डिंग बनाकर, उस पर संबद्धता प्राप्त की । इसके साथ ही ज्ञानगंगा इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी के द्वारा वहा प्रोफेसर्स की ‘झूठी जानकारी प्रदान करके राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्व विद्यालय एवं आल इंडिया टेक्निकल एजेकेशन की एफिलिएशन संबद्धता प्राप्त की गई। इस सम्पूर्ण प्रकरण के जैसे सेंकड़ों कॉलेजों की मान्यता फर्जी डॉक्युमेंट्स के आधार पर है । जिसकी जाँच के लिये युवा क्रांती द्वारा एक ज्ञापन माननीय अडिशनल कलेक्टर महोदय जबलपुर को सौंपा गया था जिस पर जांच के आदेश हो गये थे। जांच में विलम्ब होने से युवा क्रौती केरूपेश सिंह के द्वारा शार्थिक अन्वेषण ब्यूरो भोपाल में शिकायत दी गई थी। आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो भोपाल के द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेकर बाँचे मे ले लिया गया है। साथ ही ज्ञानगंगा कालेज संचालको की नोटिस जारी कर दिये गये परंतु नियत 14 अगस्त की पेशी में कोई भी व्यक्ति ज्ञानगंगा इंस्टिट्यूट की तरफ से उपस्थित नहीं हुआ। जिसके उपरांत 23 अगस्त का नोटिस दिया गया है युवा क्रांती का आरोप है , कि ज्ञान गंगा इंस्टियूट आफ टेक्नोलाजी ने शासकीय भूमि पर निर्माण करके , शासन की करोड़ो रुपये की जमीन हडप ली है । साथ ही धोखा धडी करके , इसी सरकारी जमीन पर निर्मित भवन केआधार पर ज्ञान संगा-3 की संवद्धता प्राप्त कर ली है। शीघ्र ही युवा क्रांती के द्वारा तत्संबंध में सारे दस्तावेज और प्रमाण आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो को इस सोपे जावेगे ।

मप्र में व्याप्त बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के विरोध में युवा कांग्रेस ने निकाली मशाल रैली

जबलपुर/भोपाल –: 50 फीसदी कमीशनखोरी के मुद्दे पर मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार चौतरफा घिरी हुई है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इसके विरोध में राजधानी भोपाल में युवा कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकाली। मप्र युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी एवं ज़िला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रकाश चौकसे के संयुक्त नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुई ” युवा आक्रोश मशाल रैली ” शौर्य स्मारक पहुँची। इस मशाल रैली में हज़ारो की संख्या में युवा शामिल हुए। भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के विरुद्ध आयोजित इस मशाल जुलूस में हजारों की संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। मशाल रैली जब अपने गंतव्य तक पहुंची तो शौर्य स्मारक भारत माता कि जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान युवा शिवराज सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी करते दिखे। मशाल जुलूस संपन्न होने के बाद युवाओं ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हम संकल्प लेते हैं कि प्रदेशवासियों को भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी से निजात दिलाने के लिए मध्यप्रदेश में भाजपा सरकारों को उखाड़ फेंकेंगे। इस दौरान प्रकाश चौकसे ने कहा की प्रदेश में भाजपा सरकार जनविरोधी नीतियों से हर वर्ग प्रताड़ित है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। जीवन यापन दिन प्रति दिन दुशवार होता जा रहा है। ऊपर से भाजपा नेताओ ने भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं लाँघ दी है आज प्रदेश में कोई भी शासकीय कार्य बग़ैर रिश्वत दिये नहीं होता। आलम ये है की इस लोभी सरकार में हर काम के 50 % प्रतिशत कमीशन अनिवार्य हो चुका है। प्रदेश की जनता इस भाजपा सरकार को आगमी विधानसभा चुनाव में उखाड़ फेंकने के लिए दृढ़संकल्पित हो चुकी है। इस दौरान युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया की आज स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित युवा आक्रोश मशाल रैली के माध्यम से हम जनजागरण कर संदेश देना चाहते है की भारत को गुलामी से आजाद करवाने के लिए लाखों भारत माता के सपूतो ने अपने प्राणों की आहुति दी है तब जा कर हमें ये अमूल्य आजादी प्राप्त हुई जिसके हम सदैव ऋणी रहेंगे। परंतु आजादी के बाद इस भाजपा सरकार ने भी अंग्रेजी हुकूमत की तरह ही हमारे प्रदेश को लूटा है और भ्रष्टाचार की दलदल में धकेला है। त्रिपाठी ने आगे कहा, ‘आज प्रदेश का युवा एक सामान्य नौकरी के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहा है परंतु मध्य प्रदेश में निरंतर भर्ती परीक्षा में घोटाले हो रहे हैं। जिससे कहीं ना कहीं प्रदेश के युवाओं का मनोबल और भाजपा पर भरोसा टूटा है। आज हम सभी युवा साथियो ने संकल्प लिया है की प्रदेश में आगामी चुनाव में भाजपा को सबक सिखा कर मध्य प्रदेश को भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के दंश से मुक्त कराएंगे। आज भारत माता के चित्र के सामने पुष्पांजलि देकर हजारों युवाओं ने भाजपा को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राहुल मंडलोई नरेंद्र यादव , लोकेंद्र शर्मा, आकाश चौहान, चेतन साहू, अनीश सोमनाथं, योगेश सराठे, रवि परमार , अक्षय तोमर आदि युवा साथी उपस्थित रहे.

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाने वाले 4 शिक्षक बर्खास्त

मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक बड़ी खबर आ रही है जहाँ जिला शिक्षा अधिकारी ने चार फर्जी दिव्यांग शिक्षकों की सेवा समाप्त की हैं। DEO चंद्रशेखर सिसोदिया द्वारा 4 फर्जी दिव्यांग शिक्षकों की नियुक्तियां निरस्त की गई है। ये शिक्षक ग्वालियर से जारी फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त हो कर गुना जिले के स्कूलों में शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे थे। इन दिव्यांग शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाण पत्रों के परीक्षण उपरांत जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इनकी नियुक्ति समाप्त करने के साथ-साथ इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए है। इन चार शिक्षक को किया बर्खास्त जिन शिक्षकों की सेवा समाप्‍त की गयी हैं उनमें हर्षद तिवारी पुत्र योगेश तिवारी निवासी गुढा कम्‍पू लश्‍कर ग्‍वालियर, पदस्‍थापना प्राथमिक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिरौला जिला गुना, वचन सिंह रावत पुत्र जसवंत निवासी ग्राम सिकरोदा पोस्‍ट जौरा तहसील जौरा, पदस्‍थापना प्राथमिक शिक्षक, शासकीय हाईस्‍कूल कपासी जिला गुना, रोहित मरैया पुत्र नवल किशोर मरैया निवासी वार्ड नंबर 12 झुन्‍डपुरा सबलगढ़, पदस्‍थापना प्राथमिक शिक्षक, शासकीय माध्‍यमिक विद्यालय मूंदौल जिला गुना, विवेक सिंह धाकड़ पुत्र बदल सिंह निवासी आसलपुर झौंड कैलारस, पदस्‍थापना प्राथमिक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिद्यरा अहमद जिला गुना शामिल हैं। इन सभी पर FIR कराने के निर्देश भी दिए गए हैं

IRCTC ! रेलवे ने बदला लोअर बर्थ का नियम, अब इन यात्रियों के लिए रिजर्व होगी निचली सीट

रेलवे ने ट्रेन की निचली बर्थ दिव्यांगों के लिए आरक्षित कर दी है. उनकी यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने यह अहम फैसला लिया है. ट्रेन से रोजाना लाखों लोग यात्रा करते हैं. ऐसे में वे अपनी पसंदीदा सीट पाने के लिए एक महीने पहले से ही टिकट बुक करना शुरू कर देते हैं। ज्यादातर लोगों की पसंदीदा सीट लोअर बर्थ या साइड लोअर बर्थ होती है। लेकिन अब शायद वह यह सीट बुक नहीं कर पाएंगे. जी हां, भारतीय रेलवे ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। आदेश के मुताबिक, ट्रेन की निचली बर्थ कुछ श्रेणियों के लोगों के लिए आरक्षित रहेगी. रेलवे ने विकलांग या शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए ट्रेन की निचली बर्थ आरक्षित की है। उनकी यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने यह अहम फैसला लिया है. रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक दिव्यांगों के लिए स्लीपर क्लास में चार सीटें, नीचे की 2 बीच की 2 सीटें, थर्ड एसी में दो सीटें, एसी 3 इकोनॉमी में दो सीटें आरक्षित हैं। इस सीट पर वह या उनके साथ यात्रा करने वाले लोग बैठ सकेंगे. वहीं गरीब रथ ट्रेन में दिव्यांगों के लिए 2 निचली सीटें और 2 ऊपर की सीटें आरक्षित हैं. इन सीटों के लिए उन्हें पूरा किराया देना होगा. इनके अलावा भारतीय रेलवे वरिष्ठ नागरिकों यानी बुजुर्गों को बिना मांगे लोअर बर्थ देती है। ट्रेन में 45 साल या उससे अधिक उम्र और गर्भवती महिलाओं के लिए स्लीपर क्लास में 6 से 7 लोअर बर्थ, हर थर्ड एसी कोच में 4-5 लोअर बर्थ, हर सेकेंड एसी कोच में 3-4 लोअर बर्थ आरक्षित रहती हैं। उन्हें बिना कोई विकल्प चुने सीट मिल जाती है. वहीं, अगर टिकट बुकिंग में किसी वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग या गर्भवती महिला को ऊपर की सीट दी जाती है तो ऑनबोर्ड टिकट चेकिंग के दौरान टीटी द्वारा उन्हें नीचे की सीट देने का प्रावधान है।

आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया, पद खाली फिर भी नहीं हो पा रहे हैं प्रमोट

भोपाल. किसी भी सेवा का प्रशासनिक ढांचा पिरामिड आकार का होना बेहतर माना गया है. मप्र में आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया गया है. चिंताजनक पहलू यह है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद रिक्त पड़े हैं पर सेवा आर्हता नहीं होने से एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पदों पर प्रमोशन तक नहीं हो पा रहे हैं. स्थिति ऐसी बन गई है कि कैडर में सीसीएफ के 59 पद स्वीकृत है पर वर्तमान में आधा दर्जन के लगभग सीसीएफ ही कार्यरत है. सीसीएफ स्तर के आईएफएस नहीं होने की वजह से सर्किल में सीएफ की पोस्टिंग करना पड़ रही है. 2002 में कैडर में पीसीसीएफ का एक, प्लस दो और एपीसीसीएफ 4 पद कैडर में और इतने ही पद एक्स कैडर में थे. 2008 में हुई कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 10 पद कैडर में और एक्स कैडर में भी 10 पद स्वीकृत हुए. 2015 में हुए कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 21 पद स्वीकृत किए गए और उसके विरुद्ध 42 पद काम करने लगे. इसके बाद एपीसीसीएफ के पदों की संख्या बढ़कर 58 कर दी गई है. वर्तमान में आज तक की स्थिति यह है कि एपीसीसीएफ के 10 पद रिक्त है. इसी प्रकार कैडर में सीसीएफ के 59 पद है, जिसमें से केवल करीब आधा दर्जन ही सीसीएफ ही कार्यरत है. यानी नौबत यह बन गई है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन पाने के लिए कोई भी आईएफएस सेवा आर्हता पूरा नहीं कर पा रहा है. वन विभाग के जिम्मेदारों द्वारा प्रशासनिक ढांचे को सुधारने की दिशा में कोई पहल भी नहीं की जा रही है. कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को केंद्रीय कार्मिक विभाग ने संशोधन के लिए एमपी को लौटा दिया है पर अफसरों को इसकी एक्सरसाइज करने की फुर्सत नहीं है. इसकी मुख्य वजह भी बताई जा रही है कि आईएफएस अफसरों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाएगा. केडर मैनेजमेंट सुधारने के लिए पूर्व वन बल प्रमुख का सुझाव है कि एपीसीसीएफ के कुछ पद तत्काल समाप्त करने होंगे. यानि एपीसीसीएफ उत्पादन, एपीसीसीएफ निगरानी एवं मूल्यांकन, एपीसीसीएफ एचआरडी जैसे पदों का औचित्य नहीं है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सर्किल में जिस तरीके से वन संरक्षक स्तर के आईएफएस अधिकारियों की पदस्थापना करने की परंपरा शुरू हो गई है. ठीक उसी प्रकार अनुसंधान एवं विस्तार ( सामाजिक वानिकी ) के मुख्य वन संरक्षक के पद समाप्त कर इन पदों पर वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना की जानी चाहिए. 18 वनमंडल से हट जाएंगे सीएफ प्रस्ताव से सरकार सहमत हुई, तो एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम हो जाएंगे. सीएफ एवं डीएफओ के पद बढ़ जाएंगे. यानी फील्ड में ज्यादा अफसर पदस्थ होंगे. हालांकि इससे उन 18 वनमंडलों में सीएफ की जगह डीएफओ को पदस्थ करना होगा. इन वनमंडलों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर, छतरपुर, दमोह, देवास, गुना, खंडवा, नरसिंहपुर, सतना, शिवपुरी, विदिशा, होशंगाबाद, डिंडोरी, उमरिया और कटनी शामिल हैं. कैडर में थी खामिया कैडर में खामियां है. इसलिए विभाग ने केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित कैडर प्रस्ताव में एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम किए हैं. दरअसल, 1978, 1979 एवं 1980 बैच में 90 आईएफएस रहे. इन अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले पदोन्नति दिए जाने के कारण ऐसे हालात बने हैं. उन अधिकारियों को पदोन्नत करने के लिए केंद्र सरकार से अस्थाई मंजूरी ली गई थी. ऐसे 13 पद थे, जो समय पूरा होने के बाद भी समाप्त नहीं किए गए. अब ऐसे हालात बन गए हैं कि 24 साल की सेवा पूरी करने वाले सीसीएफ नहीं मिले रहें हैं जो कि एपीसीसीएफ बन सके. कमोबेश यही स्थिति मुख्य वन संरक्षक पद के लिए प्रमोट होने वाले सीएफ की है. वर्ष 2024 से पहले कोई भी वन संरक्षक मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने के लिए 18 वर्ष की सेवा पूरा नहीं कर पा रहा है. ऐसी स्थिति क्यों बनी आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराने की मुख्य वजह यह है कि भारत सरकार ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की परीक्षा एक साथ कराना है. एक साथ परीक्षा होने की वजह से अंकगणित, आर्ट्स और सोशल साइंस के परीक्षार्थी मेरिट में अब्बल आ जाते हैं. बॉटनी सब्जेक्ट के परीक्षार्थी पीछे रह जाते हैं. इसके कारण आईएफएस इंडक्शन में बामुश्किल पांच से सात अभ्यार्थी आते हैं. कैडर मैनेजमेंट को लेकर वर्ष 2010 से लगातार भारत सरकार को पत्र लिखते रहे हैं कि मप्र को आई एफ एस इंडक्शन में कम से कम 10 से 12 अभ्यर्थी प्रति वर्ष दिया जाए पर कोई सुनवाई नहीं हुई. आईएफएस कैडर में इंडक्शन कम होने की वजह से ही आज प्रशासनिक ढांचा लगभग ढह सा हो गया है. केंद्रीय कार्मिक विभाग में अटका प्रस्ताव पद वर्तमान प्रस्तावित हॉफ (वन बल प्रमुख ) 01 — 0 एपीसीसीएफ 25 – 18 सीसीएफ 59 34 सीएफ 40 30 डीएफओ 59 90

मेट श्रीराम कि शिकायत पर हुई जांच… जांच दल ने जीआरएस देशमुख पर निकाली वसूली‌

शब्द पावर लालबर्रा। मामला ग्राम पंचायत घोटी का मनरेगा के कार्यों को लेकर सीएम हेल्पलाइन हुई थी शिकायत। जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घोटी में मनरेगा संबंधित कार्य को लेकर मेट श्रीराम लानगे सहित अन्य मेटों ने मिलकर 13/01/2023 को सीईओ लालबर्रा, सीईओ जिला पंचायत बालाघाट, कलेक्टर कार्यालय बालाघाट व सीएम हेल्पलाइन पर ग्राम रोजगार सहायक देवेश देशमुख कि शिकायत दर्ज करवायें थे। जिसका शिकायत क्रमांक 20668700 है वहीं उक्त शिकायत का अखबार में प्रमुखता से प्रकाशन किया गया था तब जाकर जनपद पंचायत का अमला हरकत में आते हुए जांच दल गठित कर 19/04/2023 को सभी बिन्दुओं पर सभी के समक्ष जांच दल द्वारा जांच कि गई थी ।जिसमें शिकायतकर्ताओं ने जितने भी आरोप शिकायत पत्र में उल्लेख किये थे उन सभी बिन्दुओं पर क्रमशः जांच हुई सभी सही पाए गए हैं और रोजगार सहायक देवेश देशमुख पर जांच अधिकारी रुपेश इवने ने 81,441 (इक्यासी हजार चार सौ इकतालीस रुपए मात्र ) वसुली किये जाने हेतु एवं अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने, पंचायत में नियमित उपस्थित नहीं होने हेतु देवेश देशमुख रोजगार सहायक के विरुद्ध मनरेगा के प्रावधान पर अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु प्रस्तावित ,कर जनपद सीईओ कि ओर प्रेसित किये है। अनेक बिन्दुओं पर रोजगार सहायक कि हुई थी शिकायत वहीं घोटी पंचायत में पदस्थ मेट श्रीराम लानगे व अन्य मेटों ने अनेक बिन्दुओं पर शिकायत दर्ज करवायें थे जिसमें उनका आरोप था कि हम 2006-07 से लगातार पंचायत में मेट के पद पर कार्यरत हैं और प्रशिक्षण धारी मेट है हमको सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक मेट का काम करने नहीं देते है तथा रोजगार सहायक के द्वारा खिलेश्वर तितरमारे के नाम से डबल जांब कार्ड बनाकर राशि कि हेराफेरी कि गई, मृतक व्यक्ति गेंदलाल नानाजी के नाम से फर्जी हाजरी भरकर राशि कि हेराफेरी ,बडघन पति बुटन लाल के खेत तालाब में बिना काम के राशि निकाली गई सहित अन्य और भी बिन्दुओं पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। वहीं अब देखना यह है कि जांच अधिकारी रुपेश इवने द्वारा रोजगार सहायक देवेश देशमुख से कब तक शासन के खाते में राशि जमा करवाते हैं या फिर मामला दबाव में दबता है। यह तो भविष्य ही बताएगा कि राशि की वसुली होती है या नहीं। वहीं जीआरएस देशमुख कि शिकायत श्रीराम लानगे, आशाराम चौधरी, मदनलाल तितरमारे,लुखराम राहंगडाले सहित अन्य मेटों ने शिकायत कि थी। इनका कहना है। हमारे द्वारा घोटी पंचायत में पदस्थ जीआरएस देवेंश देशमुख कि अनेक बिन्दुओं पर शिकायत दर्ज करवाई गई थी जिस पर अधिकारियों द्वारा विधिवत रूप से जांच कि गई थी तथा जीआरएस देशमुख पर जो राशि वसुली योग्य निकाली गई है उसे तत्काल ही पंचायत के खाते में जमा कराकर उस पर विधीवत रुप से मनरेगा प्रावधान के विरुद्ध कार्यवाही किया जाये। श्रीराम लानगे मेट। जांच दल ने जो जांच किये थे वह जांच प्रतिवेदन हमारे द्वारा आगामी कार्यवाही हेतु जिला पंचायत में पहुंचा दिया गया है जिसमें रोजगार सहायक से राशि वसुली, सेवा समाप्ति सहित अन्य कार्यवाही वहीं से होगी लेकिन कार्यवाही होगी। गायत्री कुमार सारथी सीईओ लालबर्रा।

आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया, पद खाली फिर भी नहीं हो पा रहे हैं प्रमोट

भोपाल. किसी भी सेवा का प्रशासनिक ढांचा पिरामिड आकार का होना बेहतर माना गया है. मप्र में आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया गया है. चिंताजनक पहलू यह है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद रिक्त पड़े हैं पर सेवा आर्हता नहीं होने से एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पदों पर प्रमोशन तक नहीं हो पा रहे हैं. स्थिति ऐसी बन गई है कि कैडर में सीसीएफ के 59 पद स्वीकृत है पर वर्तमान में आधा दर्जन के लगभग सीसीएफ ही कार्यरत है. सीसीएफ स्तर के आईएफएस नहीं होने की वजह से सर्किल में सीएफ की पोस्टिंग करना पड़ रही है. 2002 में कैडर में पीसीसीएफ का एक, प्लस दो और एपीसीसीएफ 4 पद कैडर में और इतने ही पद एक्स कैडर में थे. 2008 में हुई कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 10 पद कैडर में और एक्स कैडर में भी 10 पद स्वीकृत हुए. 2015 में हुए कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 21 पद स्वीकृत किए गए और उसके विरुद्ध 42 पद काम करने लगे. इसके बाद एपीसीसीएफ के पदों की संख्या बढ़कर 58 कर दी गई है. वर्तमान में आज तक की स्थिति यह है कि एपीसीसीएफ के 10 पद रिक्त है. इसी प्रकार कैडर में सीसीएफ के 59 पद है, जिसमें से केवल करीब आधा दर्जन ही सीसीएफ ही कार्यरत है. यानी नौबत यह बन गई है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन पाने के लिए कोई भी आईएफएस सेवा आर्हता पूरा नहीं कर पा रहा है. वन विभाग के जिम्मेदारों द्वारा प्रशासनिक ढांचे को सुधारने की दिशा में कोई पहल भी नहीं की जा रही है. कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को केंद्रीय कार्मिक विभाग ने संशोधन के लिए एमपी को लौटा दिया है पर अफसरों को इसकी एक्सरसाइज करने की फुर्सत नहीं है. इसकी मुख्य वजह भी बताई जा रही है कि आईएफएस अफसरों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाएगा. केडर मैनेजमेंट सुधारने के लिए पूर्व वन बल प्रमुख का सुझाव है कि एपीसीसीएफ के कुछ पद तत्काल समाप्त करने होंगे. यानि एपीसीसीएफ उत्पादन, एपीसीसीएफ निगरानी एवं मूल्यांकन, एपीसीसीएफ एचआरडी जैसे पदों का औचित्य नहीं है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सर्किल में जिस तरीके से वन संरक्षक स्तर के आईएफएस अधिकारियों की पदस्थापना करने की परंपरा शुरू हो गई है. ठीक उसी प्रकार अनुसंधान एवं विस्तार ( सामाजिक वानिकी ) के मुख्य वन संरक्षक के पद समाप्त कर इन पदों पर वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना की जानी चाहिए. 18 वनमंडल से हट जाएंगे सीएफ प्रस्ताव से सरकार सहमत हुई, तो एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम हो जाएंगे. सीएफ एवं डीएफओ के पद बढ़ जाएंगे. यानी फील्ड में ज्यादा अफसर पदस्थ होंगे. हालांकि इससे उन 18 वनमंडलों में सीएफ की जगह डीएफओ को पदस्थ करना होगा. इन वनमंडलों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर, छतरपुर, दमोह, देवास, गुना, खंडवा, नरसिंहपुर, सतना, शिवपुरी, विदिशा, होशंगाबाद, डिंडोरी, उमरिया और कटनी शामिल हैं. कैडर में थी खामिया कैडर में खामियां है. इसलिए विभाग ने केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित कैडर प्रस्ताव में एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम किए हैं. दरअसल, 1978, 1979 एवं 1980 बैच में 90 आईएफएस रहे. इन अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले पदोन्नति दिए जाने के कारण ऐसे हालात बने हैं. उन अधिकारियों को पदोन्नत करने के लिए केंद्र सरकार से अस्थाई मंजूरी ली गई थी. ऐसे 13 पद थे, जो समय पूरा होने के बाद भी समाप्त नहीं किए गए. अब ऐसे हालात बन गए हैं कि 24 साल की सेवा पूरी करने वाले सीसीएफ नहीं मिले रहें हैं जो कि एपीसीसीएफ बन सके. कमोबेश यही स्थिति मुख्य वन संरक्षक पद के लिए प्रमोट होने वाले सीएफ की है. वर्ष 2024 से पहले कोई भी वन संरक्षक मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने के लिए 18 वर्ष की सेवा पूरा नहीं कर पा रहा है. ऐसी स्थिति क्यों बनी आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराने की मुख्य वजह यह है कि भारत सरकार ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की परीक्षा एक साथ कराना है. एक साथ परीक्षा होने की वजह से अंकगणित, आर्ट्स और सोशल साइंस के परीक्षार्थी मेरिट में अब्बल आ जाते हैं. बॉटनी सब्जेक्ट के परीक्षार्थी पीछे रह जाते हैं. इसके कारण आईएफएस इंडक्शन में बामुश्किल पांच से सात अभ्यार्थी आते हैं. कैडर मैनेजमेंट को लेकर वर्ष 2010 से लगातार भारत सरकार को पत्र लिखते रहे हैं कि मप्र को आई एफ एस इंडक्शन में कम से कम 10 से 12 अभ्यर्थी प्रति वर्ष दिया जाए पर कोई सुनवाई नहीं हुई. आईएफएस कैडर में इंडक्शन कम होने की वजह से ही आज प्रशासनिक ढांचा लगभग ढह सा हो गया है. केंद्रीय कार्मिक विभाग में अटका प्रस्ताव पद वर्तमान प्रस्तावित हॉफ (वन बल प्रमुख ) 01 — 0 एपीसीसीएफ 25 – 18 सीसीएफ 59 34 सीएफ 40 30 डीएफओ 59 90

छिंदवाड़ा- भूमाफिया के इशारे पर राजस्व विभाग कृषक को कर रहा परेशान

छिंदवाड़ा. सूरज माहोरे पिता धनसिंह माहोरे वार्ड नं 18 ने जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर बताया कि वह एक किसान है स्वयं की पुश्तैनी जमीन पर कृषि कार्य कर परिवार का भरण पोषण कर रहें हैं। चूँकि मेरी कृषि भूमि चांद रोड़ से सटी हुई है, जिस पर भूमाफियाओं की पहले से नजर है । इस सम्बंध में मैंने अतुल माहेश्वरी एवं हेमंत रघुवंशी के कूट रचित दस्तावेजों के खिलाफ सिविल न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया हूँ जिसका क्रमांक RCSA 164 । 2023 है और RCSA 202 । 2023 है । जिसकी पूरी जानकारी राजस्व विभाग को है। न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद राजस्व अधिकारी और भूमाफिया मुझे और मेरे परिवार को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित कर रहें हैं । भूमाफिया राजस्व विभाग से साठ गांठ कर जमीन का नाप जोक कर रहें हैं। विरोध करने पर चन्दपाल रघुवंशी जान से खत्म कर देने और देख लेने की धमकी दे रहें हैं। इनकी धमकी से मेरा पूरा परिवार दहशत में जीवन जीने को मजबूर है। जिसकी विधिवत शिकायत मेरे द्वारा दिनांक 08। 07 । 2023 को प्रशासन से की पर आज तक कोई कार्यवाही नही हुई है ।ऐसी ही शिकायत मेरे पुत्र बबलू महोरे ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी की है जिसका नम्बर 23134580 है जिसका निराकरण राजस्व विभाग जानबूझकर नही कर रहा है!

सर्वे कार्य में लापरवाही बरतने पर पटवारी श्री खाण्डवेकर निलंबित

बुरहानपुर, कलेक्टर एवं ज़िला दंडाधिकारी बुरहानपुर सुश्री भव्या मित्तल के निर्देशानुसार वर्तमान खकनार तहसील के पहनं 38 एवं 41 के पटवारी श्री मिलिन्द खाण्डवेकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में पटवारी श्री खाण्डवेकर का मुख्यालय कार्यालय तहसीलदार (नगर) बुरहानपुर रहेगा तथा उन्हें जीवन निर्वाह की पात्रता होगी।निलंबन की यह कार्यवाही शासकीय कार्य में अनियमितता एवं लापरवाही बरतने के कारण की गई। लेख है कि जिले में माह अप्रैल में आयी तेज़ हवा, आंधी एवं ओलावृष्टि के समय ग्राम धामनगांव एवं बोरसल में केला फसल के नुकसान के सर्वे कार्य में अनियमितता एवं लापरवाही बरती गई। उक्त अवधि में पटवारी श्री खाण्डवेकर को ग्राम धामनगांव एवं बोरसल का कार्य सौंपा गया था। सर्वे कार्य के दौरान पंचायत में चस्पा की गई सूची एवं राहत राशि हेतु स्वीकृति की गई सूची में भिन्नता पायी गई। कलेक्टर सुश्री मित्तल के निर्देशानुसार मामले की जांच की गई। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बुरहानपुर श्रीमति पल्लवी पुराणिक ने जानकारी देते बताया कि जांच में यह पाया गया कि चस्पा की गई सूची एवं स्वीकृत सूची में अंतर पाया गया। अतः पटवारी श्री खाण्डवेकर का यह कृत्य शासकीय कार्यो में लापरवाही का घोतक है। जिसके चलते पटवारी पर निलंबन की कार्यवाही की गई है।

पंचायत परिषद से निष्कासित सुबोधकांत सहाय , परिषद संविधान बदलने की तैयारी में…..

मा० सदस्य गण एवं पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों , समाज सेवकों , पंचायती राज में रुचि रखने वाले विशेषज्ञ गण , पंचायती राज संस्थाओं,विद्वत जनों , एवं राजनीतिज्ञों की जानकारी के लिए उद्धृत कर रहा हूँ कि रजिस्ट्रार ,रजिस्ट्रार आफ सोसाइटीज पूर्वी दिल्ली के आदेश दिनांक -19-7-2016 द्वारा सुबोध कांत सहाय एवं बाल्मिकी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गठित अखिल भारतीय पंचायत परिषद के प्रबंध कारिणी समिति को विवादास्पद एवं अवैध घोषित कर दिया था उस आदेश को समाप्त करवाने और अपने को परिषद का अध्यक्ष उद्घोषित करवाने के लिए सुबोध कांत सहाय ने अपने पी ए अनिल शर्मा के द्वारा सिविल जज पूर्वी दिल्ली के न्यायालय में वाद संख्या 765/2017 दाख़िल करवाया था जिसमें में पारित आदेश के अनुक्रम में कि सुबोध कांत सहाय एवं उनके निजी सहायक अनिल शर्मा परिषद के संविधान के अनुसार ऑल इंडिया पंचायत परिषद के सदस्य नहीं हो सकते हैं तो अध्यक्ष एवं महामंत्री कैसे हो सकते हैं? इनको याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है, याचिका ख़ारिज कर दी गयी। भाई सुबोध कांत सहाय जी एवं उनके निजी सहायक अनिल शर्मा जी स्वयंभू पदाधिकारी बन कर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के नाम पर अपनी निजी दुकान चलाने एवं परिषद के आजीवन अध्यक्ष मंत्री बने रहने के उद्देश्य से अनधिकार , ग़ैर क़ानूनी ऑल इंडिया पंचायत परिषद के मूल संविधान में अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अमूल चूल परिवर्तन ( संविधान बदलने ) की तैयारी में लगे हुए हैं।इस सम्बंध में हमने दिनांक 16 जून को पोस्ट प्रेषित किया था जो शत प्रतिशत सच साबित हुई है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद से दिनांक 18-2-2023 को अध्यक्ष मंडल द्वारा आजीवन निष्कासित किए जाने के पश्चात सुबोध कांत सहाय ने अवैध , ग़ैर क़ानूनी फ़र्ज़ी तथा कथिति संविधान संशोधन समिति का पत्र जारी किया है जिसमें ऐसे लोगों को सदस्य नामित किया है जिनका अखिल भारतीय पंचायत परिषद से कोई सम्बंध नहीं है और अपने पी ए अनिल शर्मा से प्रतिलिपियाँ उन तथा कथित लोगों को जारी करवाया है। आप सब की जानकारी के लिए उक्त पत्र , रजिस्ट्रार आफ सोसाइटीज के आदेश एवं सिविल जज पूर्वी दिल्ली के आदेश की प्रतिलिपियाँ जारी कर रह हूँ। ज्ञातव्य है कि ऑल इंडिया पंचायत परिषद के संविधान में कुल तीन बार आंशिक संशोधन नियमानुसार किए गये हैं। प्रथम संशोधन 29जनवरी 1985 , द्वितीय 17 नवम्बर 1990 में एवं 2002 में किया गया था।वर्ष 2002 में एक मुख्य महामंत्री का पद सृजित किया गया था एवं वार्षिक संबद्धता तथा सदस्यता शुल्क में वृद्धि की गयी थी जो वर्तमान में लागू है। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों , पंचायती राज में रुचि रखने वालों, अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं , पंचायती राज विशेषज्ञों , विद्वत जनों से आग्रह है कि तथ्यों से अवगत हों और लोक नायक जयप्रकाश नारायण , बलवंत राय मेहता , लाल बहादुर शास्त्री , गुलज़ारी लाल नंदा , विनोदा नंद झा एवं डाक्टर लाल सिंह त्यागी द्वारा स्थापित संस्था ऑल इंडिया पंचायत परिषद की अस्मिता और उसके संविधान की रक्षा के लिए लाम बंद होकर सफ़ेद पोस क्षद्म राजनीतिक डाक्टर मनमोहन सिंह की कैविनेट के पूर्व मंत्री भू माफिया सुबोध कांत सहाय एवं उनके अन्य सहयोगीआपराधिक ,सजायाफ़्ता साथियों का पुर ज़ोर विरोध करें । जय पंचायती राज शीतला शंकर विजय मिश्र ( लोक तंत्र रक्षक सेनानी) मुख्य महामंत्री ऑल इंडिया पंचायत परिषद

मध्य भारत की विशाल तिरंगा यात्रा 14 को अखंड भारत दिवस पर ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ के तहत निकलेगी तिरंगा यात्रा मोदी सरकार ने तिरंगे को आम आदमी के घर तक पहुंचाया: रामेश्वर शर्मा

राष्ट्रवाद और धर्म के प्रति जागरूकता लाने हेतु नित नए आयोजन करने वाले हुजूर विधायक अपनी संस्था ‘‘कर्मश्री’’ के तत्वावधान में इस बार भी 14 अगस्त को अखंड भारत दिवस और केंद्र सरकार के ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ के तहत मध्य भारत की सबसे बड़ी तिरंगा यात्रा निकालने जा रहे हैं। यात्रा में तिरंगा लगे 15 हजार से अधिक दोपहिया-चौपहिया वाहन शामिल होंगे। ‘‘कर्मश्री’’अध्यक्ष और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 14 अगस्त को हम अखंड भारत दिवस मनाते हैं एवं पिछले वर्ष की तरह इस बार भी केंद्र सरकार ने ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ शुरू किया है। युवा पीढ़ी के मन में अखंड भारत की स्मृति ताजा करने और हर घर तिरंगा अभियान को गति देने के उद्देश्य से ‘‘कर्मश्री’’ द्वारा मुखर्जी नगर कोलार से लेकर संत नगर तक मध्य भारत की सबसे विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन 14 अगस्त को किया गया है। विधायक शर्मा ने राष्ट्रवाद के ओतप्रोत इस विशाल आयोजन में भोपाल वासियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि यह तिरंगा यात्रा का आयोजन प्रत्येक भारतवासी का आयोजन है । उन्होंने युवाओं एवं बच्चो को इस आयोजन में विशेष रूप से पधारने का आग्रह किया है । विधायक शर्मा ने कहा कि युवा और बच्चे भारत का आने वाला भविष्य है उनके कंधों पर देश की बागडोर आने वाली है तिरंगे के प्रति उनका सम्मान ही भारत को परम वैभव पर ले जाएगा । श्री शर्मा ने राजधानी वासियों से यात्रा में शामिल होने का आग्रह करते हुए कहा कि इस यात्रा में शामिल होने वाला, यात्रा का स्वागत करने वाला हर व्यक्ति राष्ट्र की सेवा कर अपने नागरिक बोध का परिचय भी देगा। अतः भोपाल वासियों का आह्वान करता हूँ कि इस तिरंगा यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व-अपने उत्साह का प्रदर्शन करें। यात्रा में भाग लेकर हम गौरवशाली राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें। मोदी सरकार ने तिरंगे को आम आदमी के घर तक पहुंचाया: रामेश्वर शर्मा तिरंगा यात्रा के आयोजक हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक विश्व शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कश्मीर से धारा 370 खत्म हुई और कश्मीर से कन्याकुमारी तक सही मायने में भारत अब एक हुआ है। वही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। देश का आर्थिक विकास भी द्रुत गति से दौड़ रहा है। संपूर्ण विश्व में भारतवंशियों का मान बढ़ा है। पहले तिरंगा विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा ही फहराया जाता था और सरकारी कार्यालयों की शोभा बढ़ाता था। अब मोदी सरकार ने भारत के आम नागरिक को अपने हाथों में तिरंगा थामने और घरों में तिरंगा फहराने का अधिकार दिया है यह क्रांतिकारी कदम है। अतः इस अधिकार के बारे में जन जागृति लाने और इसका उत्सव मनाने के लिए इस बार पहले से भी विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया है। कोलार से सुबह 10 बजे निकलकर संतनगर पहुँचेगी यात्रा, भैंसाखेड़ी में होगा समापन 500 से अधिक स्थानों पर होगा स्वागत कर्मश्री के तत्वाधान में स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व 14 अगस्त को निकाली जा रही तिरंगा यात्रा प्रातः 10 बजे मदर टेरेसा स्कूल मुखर्जी नगर कोलार से आरंभ होकर भोपाल के विभिन्न चौक चौराहों से होती हुई संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। यात्रा मार्ग में लगभग 500 से अधिक स्थानों पर स्थानीय नागरिक बंधुओ सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा स्वागत की तैयारियां जा रही है । आयोजक संस्था के अध्यक्ष-विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि यात्रा सुबह 10 बजे मुखर्जी नगर कोलार स्थित मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल से प्रारंभ होकर बैरागढ़ चिचली कोलार, डी मार्ट चौराहा, ललिता नगर, बीमा कुंज, सर्वधर्म कोलार, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट चौराहा, माता मंदिर, अटल पथ चौराहा, नानके तिराहा, रोशनपुरा चौराहा, बाणगंगा, विवेकानंद चौराहा (पॉलिटेक्निक चौराहा), राजा भोज सेतु, वीआईपी रोड, लालघाटी , हलालपुर बस स्टैंड से होते हुए संत हिरदाराम नगर, दीनदयाल उपमंडी भैंसाखेड़ी पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा में भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से कर्मश्री संस्था के कार्यकर्ताओं के साथ अनेक जनप्रतिनिधि, धार्मिक,सामाजिक, व्यापारिक, राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं अन्य नागरिक बंधु उपस्थित रहेंगे । 15 हजार से अधिक वाहन होंगे शामिल विधायक रामेश्वर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मश्री संस्था के तत्वाधान में आयोजित होने वाली विशाल तिरंगा यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 15 हजार से अधिक दो एवं चार पहिया वाहन सम्मिलित रहेंगे। सभी वाहनों पर तिरंगा लगा होगा और वाहन सवार अपने हाथों में भी तिरंगा थामे रहेंगे। यात्रा का सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रचार हुजूर विधायक एवं कर्मश्री अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा द्वारा 14 अगस्त को निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा की तैयारियां जोरों पर है। यात्रा का सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रचार चल रहा है। कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों द्वारा भी तिरंगा यात्रा का बढ़-चढ़कर प्रचार किया जा रहा है। यात्रा को भव्य बनाने के लिए कार्यकर्ता पूरी तन्मयता के साथ जुटे हुए है। कार्यकर्ताओ द्वारा होर्डिंग बैनर पोस्टर एवं सोशल मीडिया पर यात्रा का जबरदस्त प्रचार प्रसार किया जा रहा है । विधायक श्री शर्मा ने कहा कि 15 हजार से अधिक वाहनों की संभावित उपस्थिति से निश्चित है कि भोपाल 14 अगस्त को तिरंगे के रंग में रंग जाएगा। आकर्षण का केंद्र रहेगी वेशभूषा तिरंगा यात्रा में शामिल होने वाले युवाओं में भारतीय परिधानों के साथ यात्रा में सम्मिलित होने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही है । साफा के साथ कुर्ता-पजामा, तिरंगे रंग के दुपट्टे, तिरंगा पगड़ी आदि यात्रा में आकर्षण का केंद्र रहेंगे । यात्रा को आकर्षक और उत्साहवर्धक बनाने के लिए अनेकों अनेक उपाय कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे हैं । पूर्व के वर्षों में निकली तिरंगा यात्रा में भी शामिल लोगों की वेशभूषा सदैव आकर्षण का केंद्र रही है। इस बार भी तिरंगा यात्रा में राष्ट्र प्रेम के अनूठे प्रदर्शन नजर आएंगे।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर, शिक्षा एवं परिवाहन विभाग ग्वालियर से आला अधिकरियो की लापरवाही

रोहित राठौर,ग्वालियर, शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग इतने मदहोश हो चुके हैं क्यों उन्हें बच्चों की सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा से कोई लेना देना नहीं, जहां एक और सरकार और प्रशासन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर कर रही हैं वहीं विभागों के आला अधिकारी को इस से कोई लेना-देना नहीं, इन्हे तो एक मोटी रकम मिलती रहे, जिसको विद्यालय चलाने के लिए मान्यता चाहिए वह ले जाय, बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो या नहीं हमें कोई लेना-देना नहीं ना ही विद्यालय का निरीक्षण किया जाता है, अगर कोई शिकायतकर्ता है तो दिखाने के लिए टीम बना दी जाती है चाय नाश्ता करती है और अपना लिफाफा लेकर चली आती है सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ी लापरवाही करती रहती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो आनंद आनंद में गाड़ियों की चेकिंग लगा दी जाती है और दिखाने के लिए कार्यवाही करते हैं लगातार शहर भर में स्कूली वाहन चलाई जा रहे हैं लेकिन परिवहन विभाग की तरफ से कोई चेकिंग नहीं की जाती इस से जाहिर होता है कि प्रशासन कुछ बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है हमारे पत्रकार साथी समय-समय पर प्रशासन को चैनल के माध्यम से अखबार की माध्यम से अवगत कराते रहते हैं लेकिन आला अधिकारी के कानों में आवाज नहीं जाती अब देखना यह है कि सरकार प्रशासन कब कुंभकरण की नींद से जगाती है या कोई बड़े हादसे का इंतजार कर रही है रोहित राठौर

नकली रुतबे में असली जेल (रुतबा दिखाने को बना नकली आई ए एस, सोशल मीडिया की फोटो ने पहुंचाया जेल)

खुद को आई ए एस अफसर बताकर मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर कलेक्टर का पदभार संभालने की फोटो सोशल मीडिया पर डालने वाले शख्स को जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबलपुर में थाना तिलवारा की टी आई सरिता बर्मन के अनुसार आरोपी राहुल गिरी मूलतः महाराष्ट्र के गोंदिया का रहने वाला है और जबलपुर के शास्त्रीनगर में किराए के मकान में रहता था, राहुल बी एस सी तक पढ़ा है और सिविल सेवा में जाना चाहता था परंतु आर्थिक कारणों से वह सिविल सर्विस की तैयारी पूरी नहीं कर सका और नकली अधिकारी बन लोगो में रुतबा बनाने का मन बना लिया, सोशल मीडिया के दौर में उसने एडिटिंग एप का सहारा लिया और देश के गृह मंत्री समेत कई बड़े नेताओं मंत्रियों और अधिकारियों के साथ फोटो एडिट कर पोस्ट करने लगा , अभी हाल में ही जब आरोपी ने नरसिंहपुर कलेक्टर की कुर्सी पर बैठकर पदभार ग्रहण करने की फोटो पोस्ट की जिसे खुद कलेक्टर नरसिंहपुर ने देखा और तहसीलदार गोटेगांव को को इसकी शिकायत हेतु निर्देशित किया उनकी सूचना पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया, आरोपी राहुल रुतबे को दिखाने के लिए अपने दोस्तों को अपने आई ए एस बनने की पार्टियां भी दी थी तथा वह अपनी कार पर फर्जी नेम प्लेट भी लगाता था उसकी इस सनक ने उसे पुलिस के हत्थे चढ़ा दिया और पुलिस अब यह जानकारी कर रही है कि यह मात्र एक सनक थी या कुछ और||

MP में ‘मां नर्मदा कॉरिडोर’ बनेगा, सीएम शिवराज ने की घोषणा; सिंधिया समर्थक रघुराज सिंह धाकड़ कांग्रेस में वापसी करेंगे

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ‘मां नर्मदा कॉरिडोर’ बनाने की घोषणा की है। सीएम अनूपपुर जिले के दो दिन के दौरे पर हैं। आज वे अमरकंटक में हैं, यहां मां नर्मदा की पूजा अर्चना की। सीएम ने कहा कि मां नर्मदा कि लाखों लोग परिक्रमा करते हैं, इसलिए मां नर्मदा की पवित्र धरा पर कॉरिडोर बनाया जाएगा। सीएम शिवराज ने कहा कि मां नर्मदा महालोक बनेगा तो लाखों लोग अमरकंटक आएंगे। अमरकंटक में जगह सीमित है, यहां अमरकंटक को नया सैटेलाइट शहर बनाया जाएगा। यह सैटेलाइट शहर नीचे बनेगा, जहां होटल, खाने-पीने जैसी सभी तरह की दुकानें रहेंगी। सिंधिया समर्थक रघुराज सिंह धाकड़ कांग्रेस में वापसी करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में गए रघुराज सिंह धाकड़ गुरुवार को कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में धाकड़ समाज के नेता रघुराज सिंह धाकड़ पार्टी की सदस्यता लेंगे। कमलनाथ की मौजूदगी में वे कांग्रेस जॉइन करेंगे। विधायक जयवर्धन सिंह के साथ धाकड़ भोपाल पहुंचे हैं। कोलारस (शिवपुरी) से करीब 200 गाड़ियों का काफिला साथ आया है। इससे पहले सिंधिया समर्थक बैजनाथ सिंह यादव और राकेश गुप्ता भी BJP छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

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