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केस्को के साथ 1.68 करोड़ का फ्रॉड, कौन हजम कर गया 1905 उपभोक्ताओं का पैसा?

कानपुर में कानपुर बिजली आपूर्ति कंपनी(केस्को) के साथ 1.68 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है. इससे केस्को विभाग में हड़कंप मच गया है. पुलिस कमिश्नर ने इस ठगी का खुलासा करने वाली पुलिस की टीम को 1-1 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. जानकारी के मुताबिक केस्को को जून और जुलाई महीने मे 1900 से अधिक उपभोक्ताओं का पैसा नहीं मिला था. पैसा ट्रांसफर न होने और खाते से हेराफेरी की शिकायत करते हुए केस्को ने आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. केस्को के राजस्व में करोड़ों रुपये की ठगी के मामला सामने आने के बाद कमिश्नरेट के अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया. उसने सर्विलांस, साइबर सेल, स्वाट टीम समेत एक स्पेशल टीम को मामले की जांच में लगाया गया. इसके बाद पुलिस टीम ने दिल्ली और बागपत से ठगी करने वाले गैंग के 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके पास से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई है. बता दें कि केस्को में बिल जमा करने के लिए कानपुर के उपभोक्ता आईसीआईसीआई बैंक के गेटवे के माध्यम से ऑनलाइन अपना बिल जमा करते हैं. कोस्को को लगा करोड़ों का चूना उपभोक्ता के बिलों की जमा राशि आईसीआईसीआई बैंक केस्को के खाते में ट्रांसफर करता है. लेकिन बीते महीने जब केस्को को 1905 उपभोक्ताओं के रुपये का ट्रांसफर नही हुआ तो विभाग ने छानबीन शुरू की. इसमें सामने आया कि बैंक ने किसी दूसरे खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं. इस पर केस्को ने ग्वालटोली थाने में आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. इधर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो मामले के तार बागपत मेरठ दिल्ली समेत अलग-अलग जिलों से जुड़ते नजर आए.? कैसे लगाते थे चूना? अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस की एक टीम ने अलग-अलग जिलों में छानबीन शुरू की. इसके बाद ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हो गया. जांच में सामने आया कि हैकर्स आईसीआईसीआई बैंक की बड़ौत शाखा में उपभोक्ताओं की जमा हो रही रकम के गेटवे का यूआरएल हर एक से 2 घंटे में चेंज करते थे. इस तरह से वह लाखों रुपये की रकम केस्को इलेक्ट्रॉनिक के नाम से खुले अकाउंट में ट्रांसफर कर रहे थे. ये अकाउंट बागपत निवासी सुमन के नाम पर था. ठगी करने वालों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल इस ठगी करने वाले गिरोह में सॉफ्टवेयर इंजीनियर. बिजली विभाग का ठेकेदार समेत अन्य लोग शामिल हैं. पुलिस को पकड़े गए बैंक के 6 शातिरों के पास से 30 से अधिक मोबाइल, दर्जनों एटीएम कार्ड और 90 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं. मीडिया को जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है. इसके लिए पुलिस टीम कई जनपदों में ठगी के नेटवर्क को खंगाल रही है. शानदार काम करने वाली साइबर सर्विलांस की टीम को एक-एक लाख रुपये का इनाम भी दिया गया है.

आरबीआई की नीति में सख्त रुख के बाद सेंसेक्स लुढ़का

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों और रुख पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप इन्‍हें यथावत बनाये रखा है। वहीं इसने अपने टोन को सख्‍त किया है यानी भविष्‍य में रेपो रेट बढ़ाने के संकेत दिये हैं। समिति की गुरुवार को समाप्‍त हुई तीन दिवसीय बैठक में महत्वपूर्ण बदलाव मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत करना है। इसका मतलब है कि ऊंची नीतिगत दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी और इसलिए अगले वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही से पहले दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार के नजरिए से नीति में कोई सकारात्मक या नकारात्मक आश्चर्य नहीं है। एलकेपी सिक्योरिटीज के बैंकिंग विश्लेषक अजीत काबी ने कहा कि आरबीआई ने एमपीसी हालिया बैठक में नीतिगत दर को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। मुद्रास्फीति (खुदरा महंगाई को छोड़कर) चिंता का कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए खुदरा महंगाई का पूर्वानुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा, वास्तविक जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान 6.5 प्रतिशत आंका गया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने और मुद्रास्फीति की अपेक्षा को नियंत्रित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। आरबीआई की नीति घोषणा के बाद बीएसई का सेंसेक्स तेजी से 326 अंक गिरकर 65,669 अंक पर आ गया। एशियन पेंट्स (NS:ASPN) में दो फीसदी से बड़ी गिरावट है। टाटा मोटर्स (NS:TAMO) और नेस्ले (NS:NEST) के शेयर भी एक फीसदी से ज्यादा टूटे।।

मंगलवार को जारी सीएजी रिपोर्ट में राजस्व क्षेत्र में फैली अनियमिततओं, लापरवाहियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। इसी का नतीजा हैै कि केवल एक साल में राजस्व जुटाने वाले पांच विभागों ने सरकारी खजाने को 3640 करोड़ रुपये की चपत लगा दी।

राज्य सरकार के पांच विभागों के अधिकारियों ने लापरवाही और अनियमितताओं की वजह से 3640 करोड़ रुपये का नुकसान कर दिया है। राजस्व क्षति वाले इन शीर्ष पांच विभागों में पहले नंबर पर स्टेट जीएसटी, दूसरे नंबर पर आबकारी विभाग, तीसरे पर खनन, चौथे पर स्टांप व पंजीयन और पांचवें पर वाहन व यात्री कर विभाग हैं। यह खुलासा मंगलवार को विधानसभा में रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ। सीएजी रिपोर्ट ने राजस्व क्षेत्र में फैली अनियमितताओं, लापरवाहियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। इसी का नतीजा हैै कि केवल एक साल में राजस्व जुटाने वाले पांच विभागों ने सरकारी खजाने को 3640 करोड़ रुपये की चपत लगा दी है। राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) में गलत तरह से दिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्टेट जीएसटी की 1525 करोड़ रुपये की अनियमितताओं में से करीब 1446 करोड़ रुपये के मामले अकेले फर्जी आईटीसी से संबंधित हैं। करीब 31 करोड़ रुपये कैश लेजर से ज्यादा वापस कर दिए गए। बिना टैक्स दिए ही डेवलपरों को 27 करोड़ रुपये दे दिए गए। सीएजी ने स्टांप व निबंधन विभाग के 60 उप निबंधक कार्यालयों में स्टांप शुल्क और बंधक दस्तावेजों की सैम्पल जांच की। इनमें 708 मामलों में 351 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ियां पकड़ी गईं। जिसमें 300 करोड़ से ज्यादा मामले बंधक दस्तावेजों पर लगाए गए स्टांप से जुड़े थे। खनन विभाग भी अनियमितताओं में पीछे नहीं है। सीएजी ने जांच में प्रदेश के 13 जिला खान अधिकारियों के दस्तावेजों की जांच की। जिसमें 3588 मामलों में पाया गया कि राॅयल्टी या तो कम ली गई या ली ही नहीं गई। इस तरह कुल 440 करोड़ रुपये का नुकसान सरकारी खजाने को किया गया। जांच में पाया गया कि 119 करोड़ रुपये की राॅयल्टी वसूली ही नहीं गई। पट्टों पर कम स्टांप शुल्क लगाकर छह करोड़ से ज्यादा की चपत लगाई गई। वाहन, माल और यात्री कर विभाग की जांच में भी लगभग 48 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई। सीएजी ने 76 इकाइयों में से 11 इकाइयों के 16,379 फाइलों की जांच में ये अनियमितता पाईं। इसमें सबसे ज्यादा 4165 मामले ऐसे थे, जिनमें 25 करोड़ रुपये के टैक्स की वसूली कम की गई। वसूली प्रमाणपत्रों को ठंडे बस्ते में डालने से भी 10 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो गया। उधर, आबकारी विभाग की सीएजी जांच में 1276 करोड़ रुपये का घपला पकड़ा गया। जांच में 128 इकाइयों में से 29 इकाइयों की 2519 फाइलों की जांच में ये खुलासा हुआ। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान दस्तावेजों में आबकारी सामग्री के कम उपभोग की जानकारी दर्ज करने से हुई। इस मद में 1078 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति हुई। अधिकारियों ने अनुज्ञापन शुल्क न लेकर 164 करोड़ रुपये का नुकसान किया। राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले शीर्ष पांच विभागराज्य कर विभाग 1525 करोड़ रुपयेआबकारी 1276 करोड़ रुपयेखनन विभाग 440 करोड़ रुपयेस्टांप व पंजीयन 351 करोड़ रुपयेपरिवहन व यात्री कर 48 करोड़ रुपयेकुल राशि 3640 करोड़ रुपये

राहुल गांधी ने क्या आख़िरी पलों में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने की रणनीति बदल ली?

भारतीय मीडिया में यह ख़बर पिछले दो दिनों से सुर्खियों में थी कि राहुल गांधी ही चर्चा की शुरुआत करेंगे. मंगलवार को राहुल गांधी का नाम भी लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के पास पहले वक़्ता के तौर पर भेजा गया था. मीडिया में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर थी कि राहुल गांधी सांसदी बहाल होने के बाद लोकसभा में किस तेवर में बोलेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आख़िरी मिनटों में राहुल गांधी ने चर्चा की शुरुआत करने से इनकार कर दिया. अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि राहुल गांधी ने ऐसा क्यों किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राहुल के इनकार के बाद कांग्रेस के फ्लोर मैनेजरों ने ओम बिड़ला को सूचित किया कि असम से पार्टी के सांसद गौरव गोगोई चर्चा की शुरुआत करेंगे. गौरव गोगोई ने ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था. छोड़कर ये भी पढ़ें आगे बढ़ें ये भी पढ़ें समाप्त कांग्रेस नेता चर्चा की शुरुआत राहुल गांधी की ओर से नहीं होने पर कोई ठोस कारण नहीं बता रहे हैं लेकिन सत्ताधारी बीजेपी इससे ज़रूर हरकत में आ गई. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा में चर्चा शुरू होने के दौरान ही पूछा कि राहुल गांधी का नाम स्पीकर के पास भेजा गया था लेकिन उनका नाम वापस क्यों लिया गया? इस पर गोगोई ने जवाब दिया कि “स्पीकर के चैंबर में हुई बातों को सार्वजनिक करना ठीक नहीं है, क्या ये भी बता जाएगा कि प्रधानमंत्री और स्पीकर के बीच क्या बात हुई.” इमेज स्रोत,ANI इस बयान पर ट्रेज़री बेंच, अमित शाह सहित केंद्रीय मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई. अमित शाह ने कहा, “ ये गंभीर आरोप है. आपको बताना चाहिए पीएम और स्पीकर के बीच क्या बात हुई.” प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस की ओर से कौन बहस शुरू करेगा इसे लेकर पैदा हुए कंफ्यूजन पर कहा, “ये सबको पता था कि बहस की शुरुआत कौन करेगा.” मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में बोलने वाले दूसरे नेता थे निशिकांत दुबे. उन्होंने तंज़ वाली भाषा में कहा, “हमें उम्मीद थी की राहुल गांधी विपक्ष की ओर से पहले वक्ता होंगे लेकिन लगता है वो तैयारी करके नहीं आए और देर से सोकर उठे.” इमेज स्रोत,ANI कांग्रेस में भी कंफ्यूज़न छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें छोटी उम्र बड़ी ज़िंदगी उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर समाप्त ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस के सांसदों को भी इसका अंदाज़ा नहीं था कि राहुल गांधी प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत नहीं करेंगे, सभी अपने-अपने कारण बता रहे थे. अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक कांग्रेस के सांसद ने कहा, “शायद उन्हें लगा कि गोगोई को बहस शुरू करनी चाहिए क्योंकि वह पूर्वोत्तर से हैं और उन्होंने मणिपुर का दौरा किया था. गोगोई ने ही सदन को नोटिस दिया था और वही चर्चा शुरू करने वाले थे. राहुल गांधी की लोकसभा में वापसी ही एक दिन पहले हुई है.” एक अन्य सांसद ने अख़बार से दावा किया कि गांधी ने पहले नहीं बोलने का फ़ैसला किया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सदन में मौजूद नहीं थे. वहीं तीसरे सांसद ने कहा कि राहुल गांधी “असहज” महसूस कर रहे थे इसलिए नहीं बोला. कांग्रेस के कुछ सांसद ये भी कह रहे थे कि वो सरकार को सरप्राइज़ करना चाहते थे. एक सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमने उनका (राहुल गांधी) नाम एक चाल के तहत दिया था. हमें पता था जैसे ही सरकार को पता चलेगा कि राहुल गांधी बोल रहे हैं, ट्रेज़री बेंच अपनी पूरी तैयारी के साथ आएगा और उनकी बहस को मुद्दे से भटकाना चाहेगा. लेकिन जब हमने ऐन मौक़े पर तय किया कि गोगोई बोलेंगे तो वो लोग हैरान परेशान हो गए, वो (सत्ता पक्ष के सांसद) लोग इसके लिए तैयार इमेज स्रोत,ANI राहुल गांधी के भाषण ना देने पर बीजेपी की आपत्ति मोदी सरकार के खिलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जब राहुल गांधी ने मंगलवार को भाषण नहीं दिया तो उस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस ने सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर एक पत्र दिया, जिसमें कहा गया कि राहुल गांधी बोलेंगे, बहस दोपहर में शुरू हुई, मुझे आश्चर्य है कि पाँच मिनट में ऐसी क्या समस्या आ गई कि उन्होंने भाषण ना देने का फ़ैसला ले लिया. इसके जवाब में कांग्रेस सांसद रंजन गोगोई ने कहा कि “सत्ता पार्टी के मंत्रियों को लोकसभा स्पीकर के चेंबर में हुई बातों को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाना चाहिए.” चेतावनी वाले लहजे में उन्होंने कहा कि “अगर इस तरह स्पीकर से हुई हमारी बात को सामने लाया जा रहा है तो फिर चेंबर में प्रधानमंत्री और स्पीकर के बीच क्या बात हुई है ये भी आपको बताना होगा.” गोगोई के इस बयान पर गृहमंत्री अमित शाह ग़ुस्से मे अपनी सीट से उठ गए और गोगोई से कहा, “ ये गंभीर आरोप है, आपको बताना चाहिए कि पीएम ने क्या कहा है.” प्रह्लाद जोशी ने स्पीकर से कहा, “आप स्पीकर और प्रधानमंत्री को लेकर ऐसे बेबुनियाद आरोप नहीं लगा सकते. यह एक गंभीर मामला है.” इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने गौरव गोगोई से कहा मेरा चेंबर भी लोकसभा का हिस्सा है इसलिए ऐसे कोई बयान मत दीजिए जिसके पीछे सच्चाई ना हो. इमेज स्रोत,ANI निशिकांत दुबे का ‘बेटे और दामाद’ वाला बयान सत्ताधारी पक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करते हुए झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पूरे भाषण में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के विरोधाभासों पर ज़ोर दिया. उन्होंने टीएमसी, डीएमके, जेडीयू और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दलों के कांग्रेस के साथ अतीत के टकराव का विस्तार से ज़िक्र किया, उन्होंने तंज़ करते हुए कहा कि इस गठबंधन के ज़्यादातर लोग गठबंधन ‘इंडिया’ का “फुल फॉर्म नहीं बता पाएँगे”. निशिकांत दुबे ने अविश्वास प्रस्ताव को ‘ग़रीब के बेटे’ और ‘लोगों के लिए घर बनाने वाले’ व्यक्ति पर हमला बताया. दुबे ने सोनिया गांधी का नाम लेकर उनके बेटे और दामाद का ज़िक्र किया, उन्होंने अपने भाषण में कई बार ‘दामाद’ शब्द का प्रयोग किया जिस पर विपक्ष ने कई बार विरोध किया, उन्होंने कहा कि किसी का भी दामाद … Read more

मध्यप्रदेश बीज खरीदी मे घपलेबाज़ी -अपर मुख्य सचिव ने बदला अपना ही आदेश -दलालों और अधिकारियों के सिंडिकेट की रहेगी चांदी –

मध्यप्रदेश मे बीज खरीदी का मामला सामने आया है जहाँ दलालों के सिंडिकेट को बरकरार रखने के लिए उद्यानिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अपना ही आदेश बदल दिया है, अधिकारियों और बिचौलियों का यह खेल मध्यप्रदेश मे गहरी जडे जमा चुका है और एम पी एग्रो इसका एक बड़ा अड्डा बन चुका है | प्रदेश मे सालों से चल रही बीज खरीद घोटाले मे परत -दरपरत दलालों और अधिकारियो की मिलीभगत उजागर हो रही है, बीज की खरीद सिर्फ एम पी एग्रो से हो इसके लिए उद्यानिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव जे. एस. कंसोटिया ने अपने ही पुराने आदेश को बदल दिया है, ज्ञात हो कि कमलनाथ सरकार गिरने के उपरांत प्रदेश कि सत्ता मे आसीन शिवराज सरकार के अधिकारी टमाटर के आलावा सभी बीज दोगुने से अधिक दामों मे खरीद रहे हैं सूत्रों की माने तो पड़ताल के बाद पता चला है कि इस प्रकरण मे एम पी एग्रो के आलावा उद्यानिकी विभाग के आला अफसरों की मिलीभगत भी आने लगी है कि कैसे अकेले एक आदेश से मध्यप्रदेश के जिलों के ग्रमीण विकास अधिकारी राष्ट्रीय बीज निगम के बजाय एम. पी एग्रो मे रजिस्टर्ड बिचौलियों से दोगुने से अधिक दामों पर बीज की खरीदी करने को बाध्य हो रहे हैं, अधिकारियों और बिचौलियों के इस संगम से सरकार को करोडो का चूना लग रहा है, तथा जनता की गाढ़ी कमाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है, शिवराज सरकार के अफसरों कि मनमानी भ्रष्टाचार को चरम पर ले जा रही है और मामा मुख़्यमंत्री आँखे मूँद कर बैठे हैं, विभाग के छोटे कर्मचारियों का कहना है कि बड़े अफसरों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है और इसी वजह से वह ऐसा कृत्य करने मे संकोच नहीं करते हैं तो क्या मुख़्यमंत्री कार्यालय तक इस सिंडिकेट के तार जुड़ें हैं यह एक बड़ा सवाल है परन्तु सत्ताधारी पार्टी के नेता भारत एवं दुनिया भर मे जिस भ्रष्टाचार मुक्त शाशन कि दुहाई देते फिर रहे हैं उनके दावों पर यह एक बड़ा काला धब्बा हैं सच ये भी है कि जो हो रहा है वह किसी मजबूत संरक्षण के बिना संभव भी नहीं है तो क्या सत्ताधारी पार्टी कि कथनी एवं करनी मे फर्क है सवाल अभी बाकी है..

जलवायु परिवर्तन को लेकर जी20 समूह के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं

मुताबिक़, यूक्रेन पर कड़ा रूख़ ना रखने को लेकर महीनों तक चली खींचतान के बाद, जी-20 समूह अब सितंबर में नेताओं की बैठक से पहले जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर आम सहमति नहीं बहना पाया है. जुलाई में ऊर्जा परिवर्तन, पर्यावरण और जलवायु पर दो जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठकों में उत्सर्जन का टारगेट, जीवाश्म ईंधन में कटौती और जलवायु वित्त सहित कई प्रमुख मुद्दों पर एक राय नहीं बन पाई और इसके बाद ही चिंताएं बढ़ गई हैं. पहली बैठक गोवा में जी-20 एनर्जी ट्रांजिशन वर्किंग ग्रुप (ईटीडब्ल्यूजी) की थी, उसके बाद बीते महीने चेन्नई में जी-20 पर्यावरण और जयवायु सस्टेनेबिलिटी वर्किंग ग्रुप (ईसीएसडब्ल्यूजी) की बैठक हुई. बैठक के बाद अध्यक्ष ने जो बैठक की सारांश रिपोर्ट बनाई उसमें ऐसे मुद्दे हैं, जिसमें जी-20 सदस्यों के बीच कोई ‘सहमति’ नहीं बन पाई. रूस और चीन अब भी यूक्रेन से संबंधित पैराग्राफ़ों पर जी-7 देशों के ख़िलाफ़ हैं. चीन का कहना है कि कोई भी “भूराजनीतिक” मुद्दे शामिल नहीं किए जाने चाहिए. वहीं अब ये असहमति जी7 देशों और विकासशील देशों के बीच उत्सर्जन टारगेट और जलवायु वित्त को लेकर भी देखी जा रही है. खासकर ‘फ़ेज़ आउट’ यानी कोयले के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करना और जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में कमी के प्रस्ताव का सऊदी अरब और भारत सहित कई देश विरोध कर रहे हैं. इन देशों का कहना है कि फ़ेज़ आउट की जगह “फेज़ डाउन” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाएं. सहमति बनाना काफ़ी मुश्किल अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि इस बातचीत से जुड़े लोगों के मुताबिक़ जी-20 वार्ताकारों ने जलवायु बैठक से पहले “रात भर और दो दिनों तक सुबह पाँ बजे तक” जलवायु मुद्दों पर चर्चा करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि आम सहमति से एक प्रस्ताव तैयार होना चाहिए. इस बैठक में अमेरिका के विशेष दूत जॉन केरी सहित कई देशों के प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया. आख़िरकार जब सभी देशों के बीच तालमेल बैठाना असंभव लगने लगा तो भारतीय वार्ताकारों ने कहा कि वे मतभेद के सभी बिंदुओं को बयान में दर्ज करना करेंगे, ताकि 9 और 10 सितंबर को “नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान असहमति के मुद्दों पर समाधान निकालने का विकल्प” तलाशा जा सके. एक अधिकारी ने द हिंदू को बताया, “अगर हम बैठक के बाद ऐसी रिपोर्ट बनाएंगे जिसमें असहमति के कोई मुद्दे ही ना हों तो हम उन बिंदुओं को बाद में नहीं ला सकते हैं. फ़ंडिंग की कमी और भारत की चुनौती ईसीएसडब्ल्यूजी की बैठक के अंत में अध्यक्ष ने जो बयान जारी किया, उसके अनुसार, सदस्यों के बीच 2025 तक वैश्विक उत्सर्जन लक्ष्य को चरम पर पहुँचाने और 2035 तक उत्सर्जन में 60% की कटौती (2019 की तुलना में) करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत सहित विकासशील देशों ने इस लक्ष्य के लिए प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है. एक मुद्दा और है, जिस पर विवाद है, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित विकसित देशों ने ग़रीब देशों को जलवायु परिवर्तन के तहत किए जा रहे बदलावों को लागू करने के लिए100 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने का वादा किया था. ये मदद 2020 से दी जानी थी. इस बैठक की सारांश रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी ने दर्ज किया है कि जी -20 सदस्य इस बात पर भी सहमत नहीं थे, जिस पर वह पहले ही सहमत हो चुके हैं. चेन्नई में हुई बैठक की सारांश रिपोर्ट का पैराग्राफ़ 64 कहता है, “पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह के आदेश पर जी-20 सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार हैं. ऊर्जा परिवर्तन के मुद्दों और उन्हें इस दस्तावेज़ में किस लहजे में लिखा जाए किया जाए, इस पर भी अलग-अलग विचार हैं. ” इसके अलावा, जलवायु विशेषज्ञ और कार्यकर्ता समूह इस बात से निराश हैं कि बैठक में जो उम्मीद थी उसके उलट जलवायु परिवर्तन का मुद्दा “हल्का” नज़र आ रहा है. संभव है ये नवंबर में दुबई में होने वाले संयुक्त राष्ट्र COP28 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भी बातचीत को पटरी से उतार सकती है. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने चेन्नई में बैठक के बाद कहा कि “हमें एक मज़बूत और एकमत संदेश की उम्मीद थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं.” चौथी शेरपा बैठक अब 3-6 सितंबर को हरियाणा के मानेसर में होने वाली है, इसके बाद 5-6 सितंबर को वित्त और केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधियों की बैठक होगी. अब तक यूक्रेन युद्ध को लेकर में मतभेद मुख्य कारण रहा है, जिसके कारण अब तक जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन पर आम सहमति वाली भाषा चुन पाना वार्ताकारों के सामने चुनौती बढ़ा रहा है. भारत ऐसे जी20 बैठक की मेज़बानी नहीं करना चाहता, जहाँ बैठक के बाद “नेताओं के साझा बयान” जारी ना किए जा सकें.

असम में बहुविवाह पर लगेगा प्रतिबंध

ये कानून बनाने के लेकर सीएम की टिप्पणी तब आई है जब राज्य सरकार की ओर से गठित एक एक्सपर्ट पैनल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. असम सरकार ने इस मुद्दे को देखने और 60 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए मई में गुवाहाटी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस रूमी फुकन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था. सरमा ने पत्रकारों से कहा, “मैंने रिपोर्ट अभी नहीं पढ़ी है. पैनल को यह समझने का काम सौंपा गया था कि क्या राज्य सरकार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बना सकती है या नहीं. समिति ने हमें बताया है कि हमारे पास ऐसा अधिकार है, लेकिन कानून को अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति से मिलनी चाहिए, न कि राज्यपाल से. यह विशेषज्ञ समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि राज्य विधायिका के पास बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के अधिकार हैं या नहीं. असम सरकार के अनुसार, यह समिति अगले छह महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करेगी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पिछले मंगलवार को बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए इस विशेषज्ञ समिति का गठन करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था, “बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने को लेकर कानूनी विशेषज्ञों और विद्वानों वाली यह समिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के साथ-साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अधिनियम, 1937 के प्रावधानों की जांच करेगी.” छोड़कर ये भी पढ़ें आगे बढ समाप्त उन्होंने यह भी कहा था, “हम यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की ओर नहीं जा रहे हैं जिसके लिए एक राष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता होती है, लेकिन असम में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के एक घटक के रूप में हम एक राज्य अधिनियम के माध्यम से बहुविवाह को असंवैधानिक और अवैध घोषित करना चाहते हैं.” इमेज स्रोत,@HIMANTABISWA देश की आजादी के बाद से यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की मांग उठती रही है. लेकिन यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड से अलग असम सरकार राज्य में एक नया क़ानून लाकर जिस तर्ज पर बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रही है उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान ने ख़ासकर निचले असम में बसे बंगाली मूल के मुसलमानों को चिंता में डाल दिया है.

जबलपुर मे है स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल.. अनुराग तिवारी

मध्य प्रदेश जबलपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदेश सरकार बिलकुल ही उदासीन है । प्रदेश शासन के द्वारा जबलपुर जैसे 28 लाख की आबादी वाले शहर में जिला मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय मिश्रा जी को पदस्थ करके रखा गया है जो की नियमित पदस्थापना नहीं है । यह की बड़े अचरज की बात है की , जबलपुर में लगातार स्वास्थ्य विभाग की अनियमितताओं के कारण मेडिकल सिंडीकेट के खासम खास एवम जबलपुर के एक माननीय के वरद हस्त के कारण , डॉ संजय मिश्रा जी को हर प्रकार से संरक्षित किया जा रहा है । इससे बड़ी बात ये है की , डॉ संजय मिश्रा को उपकृत करने स्वास्थ्य माफिया के द्वारा ज्वाइंट डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है । जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला “आयुष्मान भारत योजना का घोटाला ” में ऐसे पहली बार हुआ की जिस अधिकारी डॉ संजय मिश्रा एवम “आयुष्मान भारत ” के मैनेजर भुवनेश साहू की देखरेख में सारा घोटाला हुआ फर्जी बिल पास हुए अस्पताल संचालकों को जेल भेजा गया वो दोनो अधिकारियों को आरोपी नही बनाया गया । युवा क्रांति के अनुराग तिवारी ने बताया की युवा क्रांति द्वारा दोनो अधिकारियों की इस घोटाले में भूमिका की जांच के लिए एक आवेदन एस आई टी को सौंपा जाएगा साथ ही दोनो अधिकारियों की संपत्ति की जांच का आवेदन लोकायुक्त महोदय मध्य प्रदेश को सौंपा जाएगा । ज्ञात हो कि स्वास्थ्य विभाग के अंदरूनी सूत्रों ने जानकारी दी है की दोनो अधिकारी जबलपुर से संचालित एक हॉस्पिटल सिंडीकेट के कमाऊ पूत है और दोनो ने अनुपातहीन संपत्ति अर्जित कर के रखी हुई है । दोनो के द्वारा सिडीकेट के इशारे पर छोटे अस्पताल संचालकों को इरादतन परेशान किया जा रहा है । साथ ही नए अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के लिए भी अनाप शनाप मांग की जा रही है । डॉ संजय मिश्रा जानबूझकर भोपाल अग्रेषित किए जाने वाले सारे दस्तावेज भेजने में आनाकानी कर रहे इस गोरखधंधे में दोनो तरफ से भ्रष्टाचार किए जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है । आज दिनांक 7 अगस्त 2023 को युवा क्रांति का एक डेलिगेशन भोपाल में इस प्रकरण की सघन जांच के लिए ज्ञापन भी सौंपा है

India Vs West Indies 2nd T20 LIVE Score Update: भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज पर कसा शिकंजा… पंड्या ने किए 3 शिकार

India Vs West Indies 2nd T20 LIVE Score Update: वेस्टइंडीज के सामने 153 रनों का टारगेट है. टीम इंडिया के लिए तिलक वर्मा ने शानदार अर्धशतकीय पारी खेली. उन्होंने 41 गेंदों पर 51 रन बनाए. यह उनकी इंटरनेशनल करियर में पहली फिफ्टी रही. उनके अलावा ईशान किशन ने 27 और कप्तान हार्दिक पंड्या ने 24 रन बनाए. विंडीज के लिए अकील हुसैन, अल्जारी जोसेफ और रोमारियो शेफर्ड ने 2-2 विकेट लिए. भारतीय टीम में एक बड़ा बदलाव किया गया है. चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टीम से बाहर हैं. उनकी जगह रवि बिश्नोई को प्लेइंग-11 में शामिल किया गया. बताया गया है कि प्रैक्टिस के दौरान कुलदीप यादव को चोट लगी है. इस कारण वो दूसरे मैच से बाहर हैं. कप्तान पंड्या ने कहा कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है. सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम को 4 रनों से हार मिली थी. इस तरह वेस्टइंडीज सीरीज में 1-0 से आगे है. मैच में भारतीय कप्तान हार्दिक पंड्या ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया. भारतीय टीम में एक बड़ा बदलाव किया गया है. चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टीम से बाहर हैं. उनकी जगह रवि बिश्नोई को प्लेइंग-11 में शामिल किया गया. बताया गया है कि प्रैक्टिस के दौरान कुलदीप यादव को चोट लगी है. इस कारण वो दूसरे मैच से बाहर हैं. कप्तान पंड्या ने कहा कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है. सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम को 4 रनों से हार मिली थी. ऐसे में पंड्या के लिए यह मैच वापसी के लिहाज से काफी अहम है. पिछले मैच में बैटिंग कमजोर नजर आई थी. ऐसे में कप्तान पंड्या इस मैच में स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल को मौका दे सकते हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह यशस्वी का वनडे में डेब्यू होगा. पिछले मुकाबले में तिलक वर्मा और मुकेश कुमार ने डेब्यू किया था.

Bankruptcy cases: What India can learn from UK’s urgent list system for fast resolutions

India could learn valuable lessons from the UK’s urgent list system for bankruptcy cases. With judges possessing a deep understanding of insolvency legislation and practical realities, the UK’s approach ensures complex and contentious cases are directed to specialised courts for faster resolution. “Insolvency cases need timely attention because there are often urgent matters to be dealt with, such as employee concerns, safety issues, and stock price movements. In such instances, someone needs to take control of the company quickly. We are able to appoint administrators outside of court, resulting in fewer delays. In addition, we can approach the insolvency courts on an urgent basis and receive prompt decisions,” says Kanika Kitchlu-Connolly, Partner at TLT’s India Group, a well-known law firm based in the UK. Connolly suggests that India could adopt a similar model to expedite insolvency proceedings and empower judges with technical knowledge and commercial acumen for more effective outcomes. In the UK, if the county court lacks insolvency expertise or if the case becomes complex or contentious, it will be referred to the next largest county court with the required expertise. The High Court may also hear cases that are particularly difficult or of high value. In addition, the High Court has specialised lists for bankruptcy. The judges presiding over these cases are experts in insolvency law; they are known as ICC judges (insolvency and companies court judges) and possess the technical knowledge, technical expertise, and commercial understanding relevant to insolvency matters,” adds Connolly. IBC, once hailed as a game-changer, is now grappling with delayed decisions and conflicting judgments, posing significant challenges to the insolvency process. Under the IBC, the National Company Law Tribunal (NCLT) is entrusted with the task of ascertaining the occurrence of default within 14 days of receiving an insolvency application. This milestone has been breached to an alarming 140 days, and in a few cases, crossing 1,400 days, causing significant delays in the process. Adding to the complexity, numerous proceedings are deliberately initiated before the NCLT to intentionally delay the progress of the insolvency processes. A lawyer expresses concern about the occurrence of creditors submitting baseless objections, and the courts frequently consider and entertain such petitions. Vidarbha Vs. Axis Bank case has also led to confusion over the admission of applications under Section 7 of the IBC. The Supreme Court ruled that the NCLT and NCLAT were mistaken in assuming that such applications must be admitted solely based on the presence of debt and default by the corporate debtor. The Court’s interpretation of the word “may” in Section 7(5)(a) suggested that it is not a mandatory provision, giving NCLTs discretion to admit or reject applications based on grounds presented by the corporate debtor. This has introduced uncertainty and prolonged the admissions process. IBC, once hailed as a game-changer, is now grappling with delayed decisions and conflicting judgments, posing significant challenges to the insolvency process. Under the IBC, the National Company Law Tribunal (NCLT) is entrusted with the task of ascertaining the occurrence of default within 14 days of receiving an insolvency application. This milestone has been breached to an alarming 140 days, and in a few cases, crossing 1,400 days, causing significant delays in the process. Adding to the complexity, numerous proceedings are deliberately initiated before the NCLT to intentionally delay the progress of the insolvency processes. 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जबलपुर मे है स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल.. अनुराग तिवारी

मध्य प्रदेश जबलपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदेश सरकार बिलकुल ही उदासीन है । प्रदेश शासन के द्वारा जबलपुर जैसे 28 लाख की आबादी वाले शहर में जिला मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय मिश्रा जी को पदस्थ करके रखा गया है जो की नियमित पदस्थापना नहीं है । यह की बड़े अचरज की बात है की , जबलपुर में लगातार स्वास्थ्य विभाग की अनियमितताओं के कारण मेडिकल सिंडीकेट के खासम खास एवम जबलपुर के एक माननीय के वरद हस्त के कारण , डॉ संजय मिश्रा जी को हर प्रकार से संरक्षित किया जा रहा है । इससे बड़ी बात ये है की , डॉ संजय मिश्रा को उपकृत करने स्वास्थ्य माफिया के द्वारा ज्वाइंट डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है । जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला “आयुष्मान भारत योजना का घोटाला ” में ऐसे पहली बार हुआ की जिस अधिकारी डॉ संजय मिश्रा एवम “आयुष्मान भारत ” के मैनेजर भुवनेश साहू की देखरेख में सारा घोटाला हुआ फर्जी बिल पास हुए अस्पताल संचालकों को जेल भेजा गया वो दोनो अधिकारियों को आरोपी नही बनाया गया । युवा क्रांति के अनुराग तिवारी ने बताया की युवा क्रांति द्वारा दोनो अधिकारियों की इस घोटाले में भूमिका की जांच के लिए एक आवेदन एस आई टी को सौंपा जाएगा साथ ही दोनो अधिकारियों की संपत्ति की जांच का आवेदन लोकायुक्त महोदय मध्य प्रदेश को सौंपा जाएगा । ज्ञात हो कि स्वास्थ्य विभाग के अंदरूनी सूत्रों ने जानकारी दी है की दोनो अधिकारी जबलपुर से संचालित एक हॉस्पिटल सिंडीकेट के कमाऊ पूत है और दोनो ने अनुपातहीन संपत्ति अर्जित कर के रखी हुई है । दोनो के द्वारा सिडीकेट के इशारे पर छोटे अस्पताल संचालकों को इरादतन परेशान किया जा रहा है । साथ ही नए अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के लिए भी अनाप शनाप मांग की जा रही है । डॉ संजय मिश्रा जानबूझकर भोपाल अग्रेषित किए जाने वाले सारे दस्तावेज भेजने में आनाकानी कर रहे इस गोरखधंधे में दोनो तरफ से भ्रष्टाचार किए जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है । आज दिनांक 7 अगस्त 2023 को युवा क्रांति का एक डेलिगेशन भोपाल में इस प्रकरण की सघन जांच के लिए ज्ञापन भी सौंपा है

India Vs West Indies 2nd T20 LIVE Score Update: भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज पर कसा शिकंजा… पंड्या ने किए 3 शिकार

India Vs West Indies 2nd T20 LIVE Score Update: वेस्टइंडीज के सामने 153 रनों का टारगेट है. टीम इंडिया के लिए तिलक वर्मा ने शानदार अर्धशतकीय पारी खेली. उन्होंने 41 गेंदों पर 51 रन बनाए. यह उनकी इंटरनेशनल करियर में पहली फिफ्टी रही. उनके अलावा ईशान किशन ने 27 और कप्तान हार्दिक पंड्या ने 24 रन बनाए. विंडीज के लिए अकील हुसैन, अल्जारी जोसेफ और रोमारियो शेफर्ड ने 2-2 विकेट लिए. भारतीय टीम में एक बड़ा बदलाव किया गया है. चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टीम से बाहर हैं. उनकी जगह रवि बिश्नोई को प्लेइंग-11 में शामिल किया गया. बताया गया है कि प्रैक्टिस के दौरान कुलदीप यादव को चोट लगी है. इस कारण वो दूसरे मैच से बाहर हैं. कप्तान पंड्या ने कहा कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है. सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम को 4 रनों से हार मिली थी. इस तरह वेस्टइंडीज सीरीज में 1-0 से आगे है. मैच में भारतीय कप्तान हार्दिक पंड्या ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया. भारतीय टीम में एक बड़ा बदलाव किया गया है. चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टीम से बाहर हैं. उनकी जगह रवि बिश्नोई को प्लेइंग-11 में शामिल किया गया. बताया गया है कि प्रैक्टिस के दौरान कुलदीप यादव को चोट लगी है. इस कारण वो दूसरे मैच से बाहर हैं. कप्तान पंड्या ने कहा कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है. सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम को 4 रनों से हार मिली थी. ऐसे में पंड्या के लिए यह मैच वापसी के लिहाज से काफी अहम है. पिछले मैच में बैटिंग कमजोर नजर आई थी. ऐसे में कप्तान पंड्या इस मैच में स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल को मौका दे सकते हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह यशस्वी का वनडे में डेब्यू होगा. पिछले मुकाबले में तिलक वर्मा और मुकेश कुमार ने डेब्यू किया था.

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सर्वोच्च न्यायालय से राहुल गाँधी को सुप्रीम राहत..

मोदी सरनेम केस में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए सजा पर रोक लगा दी है. अब राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाई है. कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को मैक्सिम दो साल की सजा दी गई. निचली अदालत ने ये कारण नहीं दिए कि क्यों पूरे दो साल की सजा दी गई. हाईकोर्ट ने भी इस पर पूरी तरह विचार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही ये भी कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी गुड टेस्ट में नहीं थी. पब्लिक लाइफ में इस पर सतर्क रहना चाहिए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले दिलचस्प बताया था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला बेहद दिलचस्प है. इस फैसले में ये बताया गया है कि आखिर एक सांसद को कैसे बर्ताव करना चाहिए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए.

सर्वोच्च न्यायालय से राहुल गाँधी को सुप्रीम राहत..

मोदी सरनेम केस में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए सजा पर रोक लगा दी है. अब राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाई है. कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को मैक्सिम दो साल की सजा दी गई. निचली अदालत ने ये कारण नहीं दिए कि क्यों पूरे दो साल की सजा दी गई. हाईकोर्ट ने भी इस पर पूरी तरह विचार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही ये भी कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी गुड टेस्ट में नहीं थी. पब्लिक लाइफ में इस पर सतर्क रहना चाहिए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले दिलचस्प बताया था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला बेहद दिलचस्प है. इस फैसले में ये बताया गया है कि आखिर एक सांसद को कैसे बर्ताव करना चाहिए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए.

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