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शादी से इनकार करने पर बेटी को गोली से उड़ाया 

सागर। जिले के बहरोल थाना क्षेत्र के झारई गांव में शादी से इनकार करने पर बेटी की हत्या मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मृत छात्रा अंकिता उर्फ अंकू फोन पर लगातार किसी से बात करती थी। आरोपी पिता ने अंकिता को कई बार फोन पर बातें करते देखा था। वे अंकिता को टोकते भी थे लेकिन अंकिता लगातार पिता की बातों को इग्नोर कर रही थी। सोमवार सुबह भी आरोपी पिता और अंकिता की मां के बीच इस बात को लेकर बहस हुई। इस बीच वहां पहुंची अंकिता ने पिता अशोक से अभद्रता की जिसके बाद आरोपी ने अपनी बेटी की गोली मारकर हत्या कर दी। उधर, आरोपी को पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। एडिशनल एसपी विक्रम सिंह कुशवाहा ने बताया कि अंकिता उर्फ अंकू घर में रहकर फोन पर किसी से अक्सर बात करती रहती थी, जो पिता को ठीक नहीं लगता था। वहीं, अंकिता शादी नहीं कर रही थी। आरोपी बेटी के इस व्यवहार से खफा रहता था। सोमवार को विवाद के दौरान आरोपी पिता ने ये बातें दोहराई तो अंकिता ने पिता से अभद्रता की। बेटी के व्यवहार से गुस्साए पिता ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद लाश के पास बैठा रहा पिता एडिशनल एसपी ने बताया कि बेटी की हत्या के बाद आरोपी शव के पास कुछ देर तक बैठा रहा। सूचना के बाद उसे घटनास्थल से गिरफ्तार किया गया। उसे बेटी की हत्या का जरा भी अफसोस नहीं है। विक्रम सिंह ने बताया कि फोन पर बात करने को लेकर विवाद के बाद जब बेटी अभद्रता कर किचन में चली गई तब आरोपी पिता भी पीछे से 12 बोर की बंदूक लेकर किचन में गया और बेटी पर बंदूक तान दी। ट्रिगर दबाने से पहले भी आरोपी ने कहा कि न जाने किससे बातें करती है। सोमवार सुबह करीब 8 बजे मृतका की मां पुष्पलता वैश्य आंगन में पौधे लगा रही थी। अशोक वैश्य (69) ने पौधे लगाने से मना किया। थोड़ी देर बाद वाद- विवाद के बीच बेटी की शादी की बात आ गई। इसी बात पर दोनों के बीच बहस शुरू हुई, तभी बेटी अंकिता उर्फ अंकू वैश्य (30) बीच में आ गई। अंकिता ने इस दौरान पिता से अभद्रता की। इससे गुस्साए पिता अशोक सिंह अंदर बंदूक लेने चले गए। उधर, पिता का गुस्सा देख अंकिता किचन में चली गई। फिर अशोक किचन में पहुंचा और बेटी की गोली मारकर हत्या कर दी। भोपाल से पढ़ाई कर रही थी अंकिता अंकिता भोपाल के कॉलेज में बीफार्मा की पढ़ाई कर रही थी। कोरोना काल में लॉकडाउन के बाद कॉलेज बंद होने से अपने गांव झारई में रह रही थी। अशोक अंकिता की शादी करना चाह रहे थे। वह लड़का देख रहे थे, लेकिन बेटी शादी नहीं करने की जिद कर रही थी। अशोक की अंकिता समेत तीन बेटियां और एक बेटा है। ग्रामीणों के अनुसार, अशोक किसान है। घटनाक्रम के दौरान अंकिता का भाई, चाचा व अन्य सदस्य रिश्तेदार के घर शादी समारोह में शामिल होने गए थे।

MP : वैक्सीनेशन में रिकॉर्ड बनाने के बाद शिवराज सरकार की फजीहत

भोपाल। राजधानी के जयप्रकाश अस्पताल के पास स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में बने वैक्सीनेशन सेंटर पर सोमवार को बाग सेवनिया निवासी 70 साल के बुजुर्ग बब्बन चौरड़िया की तबीयत बिगड़ गई थी। गश खाकर गिरने के कारण उन्हें सिर में गंभीर चोट आई है। इसके बाद उन्हें एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी हालत स्थिर है। मंगलवार को एम्स में सिटी स्कैन हुई। इसमें ही सही स्थिति पता चलेगी। बेटे प्रभाकर का कहना है कि पिता को खून की उल्टियां भी हुई है। बावजूद उनकी तबीयत जानने के लिए अफसरों ने कोई संपर्क नहीं किया, जबकि वैक्सीनेशन सेंटर में अव्यवस्थाओं के कारण ही उनकी तबीयत बिगड़ी थी। सरस्वती शिशु मंदिर में सोमवार को कोवीशील्ड के 400 सेकेंड डोज लगाए गए, लेकिन दो घंटे में ही ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्लॉट बुक हो जाने के कारण यहां हंगामा हो गया था। बुजुर्ग बब्बन चौरड़िया भी वैक्सीन का सेकेंड डोज लगवाने आए थे और दो घंटे से लाइन में लगे थे। हंगामे के दौरान ही उनकी तबीयत भी बिगड़ गई थी और वे गश खाकर जमीन पर गिर गए थे। इससे उनके सिर में चोट आई थी। तत्काल उन्हें पहले जेपी अस्पताल और फिर एम्स ले जाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

पति-पत्नी और ‘वो’ में बर्बाद हुआ परिवार

इंदौर। दूसरी महिला से संबंध होने पर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। परेशान पत्नी नाराज होकर मायके चली गई। जन्मदिन पर पति उसे लेने गया, लेकिन उसने आने से मना कर दिया। इसी से नाराज होकर पति ने गाड़ी से पेट्रोल निकालकर खुद को आग लगा ली। गंभीर हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां सोमवार सुबह मौत हो गई। पति-पत्नी के बीच में दूसरी महिला के आने से पूरा परिवार बर्बाद हो गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है। जांच अधिकारी SI रामकुमार ने बताया, 1 जुलाई को महेंद्र पिता बलराम निवासी किशनगंज राऊ पत्नी को लेने ससुराल आया था। उसकी ससुराल MIG थाना क्षेत्र स्थित कन्हैयालाल की चाल में है। महेंद्र के किसी दूसरी महिला से संबंध थे। इसी कारण विवाद के बाद पत्नी एक महीने पहले मायके रहने आ गई थी। उसे ही लेने वह पहुंचा था। पत्नी ने जाने से मना किया, तो उसने ससुराल में ही खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी सोमवार सुबह मौत हो गई। भाई कमलेश ने बताया, भाई और भाभी का कुछ दिनों से विवाद हो रहा था। इसी कारण भाभी मायके आ गई थी। भाभी का 1 तारीख को जन्मदिन था, इसलिए भैया उन्हें लेने गए थे। भाभी इसलिए नहीं जाना चाह रही थी, उनके किसी और महिला से संबंध थे। उनके बीच करीब एक साल से विवाद चल रहा था। जिस दिन वे भाभी को लेने जाने वाले थे, उसके पहले उन्होंने घर में अनाज भरा था। ठेला भी ठीक करवा लिया था। उन्होंने कहा था, पत्नी और बच्चों को लेने जा रहा हूं। वहां से लौटकर काम शुरू करूंगा।

MP : तीसरी लहर की आशंका खत्म होने तक नहीं खुलेंगे स्कूल; स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस लेंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, कोरोना की तीसरी लहर से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों की जिंदगी दांव पर नहीं लगा सकते, इसलिए तीसरी लहर की आशंका समाप्त होने के बाद ही स्कूल खुलेंगे। केवल पूर्व निर्धारित ट्यूशन फीस ली जा सकेगी। इसमें कोई वृद्धि नहीं होगी और न ही इसके अतिरिक्त कोई शुल्क वसूला जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, कोरोना के चलते स्कूल नहीं खुल पाने के कारण शिक्षकों की सैलरी खासकर प्राइवेट सकूलों में दिक्कत आ रही है। इसके साथ ही बच्चों के अभिभावकाें की अपनी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि मुझे कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूल बंद होने पर पढ़ाई नहीं हो रही है, लेकिन फीस बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल टयूशन फीस के अतिरिक्त कोई शुल्क नहीं लेगा। शिवराज ने कहा, चिंता इस बात की है कि लोग अब बिना मास्क के ही घूम रहे हैं। जनता भूल जाती है, कोरोना की दूसरी लहर में कितने कष्ट उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के सामने बाजार में एक साथ 600 से ज्यादा लोग देखे गए। इसमें से 70% ने मास्क नहीं लगाया था। यह तीसरी लहर को न्योता है। मुख्यमंत्री ने सोमवार देर शाम प्रदेश के सभी कोविड प्रभारी मंत्री, अधिकारी, कर्मचारी व क्राइसिस मैनेजमेंट समूहों के सदस्यों को टीकाकरण और कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के नियंत्रण को लेकर बैठक की। इसमें उन्होंने कहा, क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है। सरकार जरूरी दवाइयाें का स्टॉक करके रख रही है। ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील हो रहे हैं। ऑक्सीजन टैंकर्स की व्यवस्था भी की जा रही है। उन्होंने बताया, अस्पतालों में 75 हजार बैड तैयार कर लिए गए हैं। बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाए जा रहे हैं।

सावधान .. शादी में सूट-बूट वाला चोर, 20 लाख के जेवर से भरा बैग ले भागा

इंदौर।  जिस होटल में पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक सुरेन्द्र पटवा के परिवार में शादी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मेहमान थे, उसी होटल के एक अन्य हॉल में शादी समारोह से चाेर 20 लाख रुपए कीमत के जेवरों से भरा बैग ले उड़ा। लसूड़िया पुलिस ने गुड़गांव के CA पवन अग्रवाल की शिकायत पर चोरी का केस दर्ज किया है। घटना बाइपास स्थित होटल शेरेटन ग्रेंड पैलेस में 2 जुलाई की रात 11.55 बजे हुई। रात 9 बजे परिजनों ने अग्रवाल को बैग दिया, जिसमें दुल्हन को देने के लिए करीब 20 लाख के जेवर और डेढ़ लाख रुपए रखे थे। अग्रवाल ने बताया कि मैं रात 11.55 बजे ग्रुप फोटो के दौरान बैग स्टेज पर रखकर खड़ा हो गया। तीन मिनट बाद देखा तो बैग गायब था। मूलत: उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उनके जीजा ग्वालियर में किराना व्यापारी हैं। भांजी की शादी पचोर में रहने वाले एक परिवार में हुई है। दोनों परिवार ने तय किया कि इंदौर की एक अच्छी होटल में शादी करेंगे, इसलिए यहां पर आए थे। शादी में शामिल होने के लिए अग्रवाल जब दोपहर 11 बजे होटल पहुंचे तो उनकी भी सघन जांच हुई। हवाला दिया गया कि यहां पूर्व मंत्री पटवा के परिवार में किसी की शादी है। यहां मुख्यमंत्री आने वाले हैं, इसलिए सख्ती है। शाम 6 बजे से शादी के कार्यक्रम शुरू हो गए। रात 9 बजे परिवार ने अग्रवाल को एक बैग दिया था। पलक झपकते ही बैग गायब अग्रवाल ने बताया कि रात 11.55 बजे जब पूरे परिवार का ग्रुप फोटो होने लगा तो मैंने बैग को स्टेज पर रखा और फोटो खिंचवाने के लिए खड़ा हो गया। तीन मिनट बाद देखा तो बैग वहां नहीं था। मुझे समझ आ गया कि कोई चोर घुसा हुआ है, लेकिन सोचने वाली बात यह थी कि जिस होटल में मुख्यमंत्री शिवराज चौहान हैं, उसी होटल में चोर कैसे घुस गया? मुख्यमंत्री रात 8.30 बजे बाद जैसे ही होटल से निकले तो सारी सुरक्षा व्यवस्थाएं खत्म हो गईं। मैं तत्काल होटल प्रबंधन के पास पहुंचा। उनसे कहा कि बैग चोरी हुआ है। जल्दी CCTV कैमरे दिखाओ। उन्होंने अपनी सुरक्षा पॉलिसी का हवाला देकर फुटेज दिखाने से मना किया। मैंने बोला कि अभी कैमरे दिखा दाे तो दो शायद हम लोग चोर को पकड़ सकते हैं, लेकिन वे नहीं माने। आखिर हमने पुलिस बुलाई। सुबह 6 बजे पुलिस को फुटेज दिखाए गए, तब तक काफी देर हो चुकी थी। रात 10 बजे से शादी में मौजूद था सूट-बूट वाला चोर अग्रवाल ने बताया कि हमने होटल में शूटिंग कर रहे हमारे कैमरामैन से वीडियो दिखाने काे कहा ताे चोर उसमें नजर आया। वह सूट-बूट पहनकर आया था। वह रात 10 बजे से शादी में शामिल था। जब वह बैग लेकर गया तो पहले बाथरूम में गया। वहां अपना कोट उतारा और उसी से बैग काे छिपाया। अग्रवाल ने होटल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्हाेंने चाेर के बारे में सुराग देने वाले काे 50 हजार का इनाम देने की भी बात कही है। उधर, पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज के आधार पर चोर की तलाश की जा रही है।

रो पड़े लालू यादव, बोले – तेजस्वी, राबड़ी नहीं होते तो रांची में ही मर जाता

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सोमवार को अपना 25 वां स्थापना दिवस मना रहा है। पार्टी के सिल्वर जुबली समारोह में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने 30 मिनट तक राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी और राबड़ी नहीं होते, तो मैं रांची में ही खत्म हो जाता। वहीं, जनता से वादा करते हुए कहा कि जल्द पटना आएंगे और सभी से मुलाकात करेंगे। लालू के भाषण में चुनाव के दौरान जेल में रहने का मलाल भी नजर आया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान वह जेल में तड़पते रहे गए, बाहर नहीं आ सके। हालांकि, तेजस्वी से उनकी बात होती रहती थी। उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी को चिंता नहीं करनी चाहिए। राजद का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। भविष्य में हम देश को आगे बढ़ाएंगे।’ RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद ने केंद्र और नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरा राज जंगलराज नहीं, गरीबों का राज था। भाषण में लालू ने दोनों बेटों की तारीफ की तेज प्रताप यादव और तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा कि तेज प्रताप ने बहुत अच्छा भाषण दिया। उसकी बातों में दम है। तेजस्वी को बहुत कम उम्र में बिहार ने अपना नेता मान लिया है। वे बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। सरकार पर हमला बोलते हुए लालू ने कहा- ‘देश में आर्थिक संकट है। सामाजिक ताने-बाने को खत्म किया जा रहा है। अयोध्या के बाद मथुरा… ये क्या नारा है। देश में क्या चाहते हैं? सत्ता के लिए लोगों को देश में तबाह करना चाहते हैं। संसद भी नहीं चल पाती है। इनको देखना चाहिए। लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हम मिट जाएंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।’ बेरोजगारी को लेकर आंदोलन करेंगे तेजस्वी पार्टी के कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद न कभी झुके थे, ना झुकेंगे। उसी तरह तेजस्वी यादव भी कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बेरोजगारी के मुद्दे पर बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे। लालू प्रसाद ने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी, वह आर्थिक न्याय के सवाल पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मंत्री और विधायक ही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा, ‘जिस समय पार्टी की स्थापना हुई थी, हम सभी बच्चे थे। जिस BN कॉलेज में मेरे पिताजी पढ़ते थे, उसी BN कॉलेज में मैंने एडमिशन लिया और उसी बेंच पर बैठना शुरू किया। हम जब बोलते हैं तो बहुत सारे लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं। हमारे पिताजी के भाषण का भी लोग मजाक उड़ाते थे।’ नीतीश की तुलना बहादुर शाह जफर से राज्यसभा सांसद और राजद के प्रवक्ता मनोझ झा ने स्थापना दिवस पर संकल्प पत्र पढ़ा। कहा, ‘हम गैर लोकतांत्रिक शक्तियों को खत्म करने का संकल्प लेते हैं।’ वहीं, ​​​​​​राजद नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार की तुलना बहादुर शाह जफर से की। उन्होंने कहा कि जफर की पूरी मिल्कियत लाल किले के अंदर तक थी। नीतीश कुमार एक अणे मार्ग तक सीमित हो गए हैं। राजद के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों का जवाब सोशल मीडिया से दिया जाएगा। इसलिए हर कार्यकर्ता सोशल मीडिया के मामले में पूरी जानकारी रखें। पटना में पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने रामविलास पासवान की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी रामविलास को श्रद्धांजलि दी। लालू प्रसाद साल 1997 में जनता दल से अलग हुए थे और अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी। यह पार्टी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी है और बड़ा जनाधार भी रखती है, जिसकी वजह इसका ‘MY’ समीकरण है। इसमें 16 फीसदी यादव और 16 फीसदी मुसलमानों का तगड़ा वोट बैंक है। चिराग पर भी दिखेगा राजद का रुख लोजपा में इन दिनों दो गुट हो गए हैं। एक गुट के नेता स्व. रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान हैं और दूसरे गुट के पशुपति कुमार पारस। चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हनुमान बताते हैं और दूसरी तरफ लालू प्रसाद सांप्रदायिकता के सवाल पर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते रहे हैं। रामविलास पासवान की जयंती मनाने के बड़े राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। चिराग और तेजस्वी दोनों एक दूसरे को भाई भी कहते रहे हैं। सबसे खास बात यह कि चिराग और तेजस्वी के साझा राजनीतिक दुश्मन नीतीश कुमार हैं।

इंस्टाग्राम पर रोनाल्डो एक पोस्ट के लिए 11.9 करोड़ रुपए लेते हैं, विराट कोहली 5 करोड़

लंदन. पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो इंस्टाग्राम पर एडवर्टाइजिंग से सबसे ज्यादा कमाने वाले सेलिब्रिटीज में टॉप पर हैं। सोशल मीडिया मार्केटिंग फर्म हॉपर HQ (HopprHQ.com) के मुताबिक रोनाल्डो अपने अकाउंट पर एक पोस्ट के 11.9 करोड़ रुपए (1.6 मिलियन डॉलर) करोड़ रुपए चार्ज करते हैं। वहीं, भारत के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली इस मामले में 19वें नंबर पर हैं। विराट एक पोस्ट से 5.07 करोड़ रुपए कमाते हैं। हॉपर HQ फर्म इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाले खिलाड़ियों का आकलन करने के लिए एवरेज इंगेजमेंट, सेलिब्रिटीज कितनी जल्दी पोस्ट करते हैं और उनके फॉलोअर्स की संख्या जैसी बातों को ध्यान में रखती है। रोनाल्डो के आसपास कोई भी प्लेयर नहीं हॉपर HQ की रिपोर्ट के मुताबिक 5 बार के बैलॉन’डि ओर विजेता रोनाल्डो के आसपास कोई भी प्लेयर नहीं है। इस मामले में हॉलीवुड एक्टर ड्वेन जॉनसन दूसरे नंबर पर हैं। जॉनसन एक पोस्ट का 11.3 करोड़ रुपए चार्ज करते हैं। वहीं, पॉप स्टार एरियाना ग्रैंड इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। वे एक पोस्ट के एडवर्टाइमेंट से करीब 11.2 करोड़ रुपए लेती हैं। विराट कोहली अकेले भारतीय प्लेयर ओवरऑल स्पोर्ट्स की बात करें, तो रोनाल्डो के बाद मेसी का नंबर आता है। वे एड के एक पोस्ट से करीब 8.6 करोड़ रुपए कमाते हैं। भारत के विराट कोहली 395 सेलिब्रिटी की लिस्ट में अकेले भारतीय खिलाड़ी हैं। इस लिस्ट में ज्यादातर फुटबॉल स्टार्स का नाम है। इसमें डेविड बेकहम, रोनाल्डिन्हो, इब्राहिमोविच, गैरेथ बेल और मोहम्मद सालाह जैसे खिलाड़ी हैं। हॉपर HQ की लिस्ट में 6 भारतीय इस लिस्ट में सिर्फ 6 भारतीयों को जगह मिली। विराट के अलावा अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, इन्फ्लुएंसर कृतिका खुराना और आशना श्रॉफ, फोटोग्राफर और ट्रैवलर वरुण आदित्य और फूड ब्लॉगर और साउथ के सुपरस्टार वैंकटेश की बेटी आश्रिथा दग्गुबती शामिल हैं। आश्रिथा हालांकि, स्पेन में रहती हैं। खिलाड़ियों को इतना पैसा क्यों मिल रहा? अब हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्या है कि बस एक पोस्ट से इन सेलिब्रिटीज की इतनी कमाई हो जाती है? दरअसल इंस्टा या सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखना सेलिब्रिटीज के लिए वक्त काटने का जरिया ही नहीं है, बल्कि इससे उनकी बड़ी कमाई भी होती है। यानी वह जो भी लिखते हैं या पहनते हैं या जैसे भी दिखते हैं, उसके पीछे पूरी प्लानिंग होती है। यह उनकी कमाई से जुड़ी होती है। इंस्टा पोस्ट से फॉलोअर्स पर असर पड़ता है सेलिब्रिटीज की इंस्टा पोस्ट का सीधे उनके फॉलोअर्स पर असर होता है। उदाहरण के तौर पर विराट को ही लें। इंस्टा पर उनके 12.5 करोड़ फॉलोअर्स हैं। अब अगर वे किसी भी प्रोडक्ट का प्रचार करते हैं, तो यह सीधे उनके करोड़ों फॉलोअर्स के पास पहुंच जाएगा। सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर का काम करते हैं यह एक तरह का विज्ञापन है, जिसमें किसी प्रोडक्ट को खरीदने या पसंद करवाने के लिए सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर का काम करते हैं। इसे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग कहते हैं। इसमें सेलिब्रिटी को पोस्ट करने के पैसे मिलते हैं। इंस्टाग्राम इसके लिए सेलिब्रिटी को पैसे नहीं देता है, बल्कि वह ब्रांड देता है, जिसे वह प्रमोट कर रहे होते हैं। कुछ खास हो रहा है तो वह विज्ञापन है इंस्टा पर प्रमोशन के इतने पैसे मिलने के पीछे एक बड़ी वजह है इसका नैचुरल लगना। उदाहरण के तौर पर टीवी पर एडवर्टाइजमेंट देखने वाले लोग समझ जाते हैं कि यह एक एड है। वैसे ही इंस्टा पोस्ट में खिलाड़ी एक पूरी स्क्रिप्ट और अच्छे प्लानिंग के साथ उसे पोस्ट करते हैं। ऐसा लगता है मानो, वह खुद उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, अगर सेलिब्रिटी किसी खास ब्रांड के कपड़े पहनता है या कोई खास जूते पहने है या कोई जूस पी रहा है, तो यह भी एड का हिस्सा ही होता है। लोग सेलिब्रिटी के ब्रांड की तरफ खिंचते हैं लोग समझ जाते हैं कि यह ब्रांड इस सेलिब्रिटी का फेवरेट है। साथ ही उनके मन में उस ब्रांड को लेकर इच्छा भी जगती है। साथ ही उसे वह खरीदने भी जाते हैं। इससे उस ब्रांड और प्रोडक्ट का प्रचार हो जाता है। आम लोग भी इंस्टा पोस्ट से पैसे कमा सकते हैं इसके लिए सबसे पहले फॉलोअर्स बढ़ाने की जरूरत होती है। जब फॉलोअर्स बढ़ेंगे, तभी ब्रांड्स पार्टनरशिप करेंगे। दरअसल एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स होने पर ब्रांड में पार्टनरशिप मिल जाती है। इससे ये तय होता है कि आपकी बात कितनों पर असर डालेगी। इसके बाद अपना पसंदीदा फील्ड चुनें। जैसे- स्पोर्ट्स, ब्यूटी, फैशन, क्रिएटिविटी, मोटिवेशनल, स्प्रिरीचुअल या कुछ और। इसके बाद बारी आती है आपके कंटेंट और कौन उसे प्रमोट कर सकता है इसकी। यह बिजनेस प्लानिंग की तरह है। इसके अलावा सही हैशटैग का यूज करें, ताकि ज्यादातर लोग आपके करीब पहुंच सकें। बहुत से और प्रॉपर हैशटैग हों, तो लोगों के उस हैशटैग को डालने पर पोस्ट की पहुंच बढ़ेगी। फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बेहतर पिक्चर या कंटेंट महत्वपूर्ण है। अगर आपकी दी गई तस्वीर अच्छी है तो आपकी लिस्ट में फॉलोअर्स बढ़ने लगेंगे।

आमिर खान और किरण राव ने शादी के 15 साल बाद लिया तलाक का फैसला

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान और किरण राव से आपसी सहमति से तलाक लेने की घोषणा की है। आमिर और किरण ने शादी के करीब 15 साल बाद अलग होने का फैसला किया है। दोनों ने 28 दिसंबर, 2005 को शादी की थी।अभिनेता आमिर खान पत्नी किरण राव से अलग हो रहे हैं। उनका साझा बयान भी आ गया। इसमें लिखा था… ’15 साल साथ बिताने के दौरान हमने हंसी-खुशी से हर पल को जिया और हमारा रिश्ता विश्वास, सम्मान और प्यार के साथ आगे बढ़ता रहा। अब हम अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करेंगे-जो कि पति-पत्नी की तरह नहीं, बल्कि को-पेरेंट और एक-दूसरे के लिए परिवार की तरह होगा। हमने कुछ समय पहले ही अपना सेपरेशन प्लान किया था और अब हम इस अलग-अलग रहने की व्यवस्था में सहज हैं। हम बेटे आज़ाद के लिए को-पेरेंट्स बने रहेंगे और उसकी परवरिश साथ ही करेंगे। हम फिल्मों और अपने पानी फाउंडेशन के अलावा उन सभी प्रोजेक्ट्स पर साथ काम करते रहेंगे जिनमें हमारी रूचि होगी। हमारे दोस्तों और परिवारों को शुक्रिया जिन्होंने हमें इस दौरान अपना लगातार सपोर्ट किया, उनके समर्थन के बिना हम ये फैसला लेने में सक्षम नहीं हो पाते। हम अपने शुभचिंतकों से ये आशा करते हैं कि वो हमारी तरह इस तलाक को एक अंत नहीं, बल्कि एक नए सफर की शुरुआत की तरह देखें। ‘लगान’ के सेट पर हुई थी पहली मुलाकात 56 साल के आमिर की ये दूसरी शादी टूटी है। अपने से 9 साल छोटी किरण राव ने आमिर से 28 दिसंबर 2005 को शादी की थी। इस रिलेशनशिप को लेकर आमिर ने एक बार बताया था कि ‘किरण से उनकी पहली भेंट फिल्म लगान के सेट पर हुई थी। किरण उस फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर होती थीं। एक दिन किरण का फोन आया और उन्होंने करीब आधे घंटे बात की। उस बातचीत के बाद जाने क्यों मैं खुशी के मारे उछल पड़ा था। मैं अपने अंदर आई खुशी को महसूस कर रहा था। उस फोन कॉल के बाद ही मैंने किरण को डेट करना शुरू किया था। हमने एक-दूसरे को करीब दो साल तक डेट किया और साथ भी रहे। फिर अहसास हुआ कि मैं उसके बिना अपनी लाइफ सोच नहीं सकता हूं। उसमें सबसे अच्छी बात ये है कि वो एक स्ट्रॉन्ग महिला है। फिर मैंने अपने रिश्ते को नाम दिया और शादी कर ली।’ सरोगेसी से हुआ था बेटे का जन्म किरण और आमिर का एक बेटा है आजाद। उनकी उम्र 10 साल का है। उनका जन्म सरोगेसी से हुआ था। किरण को कंसीव करने में दिक्कत होने की वजह से सरोगेसी का फैसला लिया गया था जिसके बाद 2011 में आजाद का जन्म हुआ। 16 साल चली थी पहली शादी आमिर खान की पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी। आमिर जब फिल्म क़यामत से क़यामत तक की शूटिंग कर रहे थे, तभी उन्होंने रीना से शादी कर ली थी। 18 अप्रैल 1986 को हुई शादी करीब 16 साल तक चली थी। 2002 में इनका तलाक हो गया था। कपल के दो बच्चे (बेटा जुनैद और बेटी आइरा) हैं, जो अब रीना के साथ रहते हैं। ——————-

धन के देवता कुबेर देव की 10 खास बातें

पुलस्त्य पुलस्ति ऋषि को ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माना जाता है। कर्दम प्रजापति की कन्या हविर्भुवा से इनका विवाह हुआ था। कहते हैं कि ये कनखनल के राजा दक्ष के दामाद और भगवान शंकर के साढू थे। इनकी दूसरी पत्नी इडविला थी। पुलस्त्य और इडविला के पुत्र विश्रवा थे और विश्रवा के पुत्र रावण और कुबेर थे। विश्रवा की पहली पत्नी भारद्वाज की पुत्री देवांगना थी जिसका पुत्र कुबेर था। विश्रवा की दूसरी पत्नी दैत्यराज सुमाली की पुत्री कैकसी थी जिसकी संतानें रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा थीं। खर, दूषण, कुम्भिनी, अहिरावण और कुबेर रावण के सगे भाई बहन नहीं थे। आओ जानते हैं धन के देवता कुबेर के बारे में 10 खास बातें। 1. हिन्दू धर्म में कुबेर को धन का देवता माना गया है। धनतेरस और दीपावली पर माता लक्ष्मी और श्रीगणेश के साथ इनकी भी पूजा होती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को इनकी विशेष पूजा की जाती है। 2. कुबेरदेव को यक्षों का राजा माना जाता है और उनके राज्य की राजधानी अलकापुरी है। कैलाश के समीप इनकी अलकापुरी है। श्वेतवर्ण, तुन्दिल शरीर, अष्टदन्त एवं तीन चरणों वाले, गदाधारी कुबेर अपनी सत्तर योजन विस्तीर्ण वैश्रवणी सभा में विराजते हैं। 3. कुबेर को यक्ष के अतिरिक्त राक्षस भी कहा गया है, क्योंकि वे रावण के भाई हैं। यक्ष के रूप में वे खजानों के रक्षक है पुराने मंदिरों के वाह्य भागों में कुबेर की मूर्तियां पाए जाने का रहस्य भी यही है कि वे मंदिरों के धन के रक्षक हैं और राक्षस होने के नाते वे धन का भोग भी करते हैं। 4. दीपावली की रात्रि को यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ हास-विलास में बिताते व अपनी यक्षिणियों के साथ आमोद-प्रमोद करते थे। सभ्यता के विकास के साथ यह त्योहार मानवीय हो गया और धन के देवता कुबेर की बजाय धन की देवी लक्ष्मी की इस अवसर पर पूजा होने लगी, क्योंकि कुबेर जी की मान्यता सिर्फ यक्ष जातियों में थी पर लक्ष्मीजी की देव तथा मानव जातियों में। 5. कुबेरे देवता देवताओं के कोषाध्यक्ष थे। सैन्य और राज्य खर्च वे ही संचालित करते थे। यक्षों के राजा कुबेर उत्तर के दिक्पाल तथा शिव के भक्त हैं। भगवान शंकर ने इन्हें अपना नित्य सखा स्वीकार किया है। देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर को पूजने से भी पैसों से जुड़ी तमाम समस्याएं दूर रहती हैं। 6. कुबेर पहले श्रीलंका के राजा था परंतु रावण ने उनसे लंका को हथिया लिया। कुबेरदेव के पास एक महत्वपूर्ण पुष्पक विमान और चंद्रकांता मणि भी थी जिसे भी रावण ने हथिया लिया था। 7. कुबेर के संबंध में लोकमानस में एक जनश्रुति प्रचलित है। कहा जाता है कि पूर्वजन्म में कुबेर चोर थे-चोर भी ऐसे कि देव मंदिरों में चोरी करने से भी बाज न आते थे। एक बार चोरी करने के लिए एक शिव मंदिर में घुसे। तब मंदिरों में बहुत माल-खजाना रहता था। उसे ढूंढने-पाने के लिए कुबेर ने दीपक जलाया लेकिन हवा के झोंके से दीपक बुझ गया। कुबेर ने फिर दीपक जलाया, फिर वह बुझ गया। जब यह क्रम कई बार चला, तो भोले-भाले और औघड़दानी शंकर ने इसे अपनी दीपाराधना समझ लिया और प्रसन्न होकर अगले जन्म में कुबेर को धनपति होने का आशीष दे डाला। बाद में भगवान ब्रह्मा ने इन्हें समस्त सम्पत्ति का स्वामी बनाया। यह भी कहा जाता है कि यह कुबड़े और एक आंख वाले थे परतुं भगवती की अराधना से धनपति और निधियों के स्वामी बन गए थे। 8. कुबरे की शादी मूर दानव की पुत्री से हुई थी जिनके दो पुत्र नलकूबेर और मणिग्रीव थे। कुबेर की पुत्री का नाम मीनाक्षी था। अप्सरा रंभा नलकुबेर की पत्नी थी जिस पर रावण ने बुरी नजर डाली थी। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को शाप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसको स्पर्श नहीं कर पाएगा और यदि करेगा तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा। नलकूबेर और मणिग्रीव भगवान श्री कृष्णचन्द्र द्वारा नारद जी के शाप से मुक्त होकर कुबेर के साथ रहते थे। 9. कुबेर मंत्र : ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ कुबेर धन प्राप्ति मंत्र : ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥ कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥ 10. घर की उत्‍तर दिशा को कुबेर देव की दिशा माना जाता है। अत: इस दिशा की दशा सही रखने से घर में सुख, शांति और धन धान्य बना रहता है।

राजा विक्रमादित्य को दिए थे दर्शन मां बगलामुखी देवी ने, पढ़ें कहां और कैसे

डोंगरगढ़ (छत्‍तीसगढ़) जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर पहाड़ों में विराजित है मां बम्लेश्वरी का मंदिर। यहां मां बम्लेश्वरी के दो मंदिर है। पहला मंदिर ऊंची पहाड़ी पर और दूसरा मंदिर के प्रवेश द्वार से पश्चिम दिशा में स्थित है। पहाड़ वाली मां बम्लेश्र्वरी देवी के गर्भगृह के चारों ओर गुफाएं हैं। अंचल के लोग नीचे मंदिर में स्थापित माता को छोटी बम्लाई और पहाड़ावाली मां को बड़ी बम्लाई कहते है। लगभग 1 हजार से सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ों वाली मां के दर्शन होते है। यहां तक पहुंचने के लिए रोप-वे भी बना हुआ है। मां बम्लेश्र्वरी मंदिर की स्थापना की एक रोचक कथा है। आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व कामाख्या नगरी जिसे आज डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है, वहां पहले राजा वीरसेन का शासन था। राजा वीरसेन की कोई संतान नहीं थी। जिसके कारण उन्होंने शिवजी और मां दुर्गा की उपासना की। उपासना के एक वर्ष बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम मदनसेन रखा गया। मां दुर्गा और भगवान शिव का उपासक होने के कारण वीरसेन ने यहां कामाख्या नगरी में मां बम्लेश्वरी का मंदिर बनवाया। इसके बाद राजा मदनसेन के पुत्र कामसेन ने यहां शासन किया। कामसेन के दरबार में नृत्यकला में प्रवीण कामकंदला व अलौकिक संगीतज्ञ और मधुर गायक माधवनल थे। दोनों के बीच अथाह प्रेम था। परिस्थतिवश माधवनल को कामाख्या नगरी का त्याग करना पड़ा। माधवनल कामख्या नगरी से सीधे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के पास पहुंचा और उन्हें अपनी करुण कथा सुनाई। कथा सुनकर राजा विक्रमादित्य ने कामाख्या नगरी पर आक्रमण कर दिया। कामसेन और विक्रमादित्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में राजा विक्रमादित्य विजयी हुए। युद्ध में कामख्या नगरी पूरी तरह तबाह हो गई। नगर में सिर्फ डोंगर बचा और माता का मंदिर। युद्ध के बाद विक्रमादित्य ने माधवनल और कामकंदला की प्रेम की परीक्षा लेने के लिए यह अफवाह फैला दी कि युद्ध में माधवनल वीरगति को प्राप्त हो गया है। जैसे ही यह समाचार कामकंदला को मिला उसने एक तालाब में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। यह तालाब आज भी मंदिर के पास पहाड़ी के नीचे स्थित है। कामकंदला की मृत्यु का समाचार पाकर माधवनल ने भी अपना जीवन समाप्त कर लिया। राजा विक्रमादित्य को जब यह समाचार मिला तो उन्हें गहरा पश्चाताप हुआ। उन्होंने मां बगलामुखी की आराधना शुरू कर दी। लेकिन माता ने दर्शन नहीं दिए। इसके बाद राजा विक्रमादित्य भी अपने प्राण त्यागने के लिए तत्पर हो गए। इसी समय मां बगलामुखी ने राजा को दर्शन दिए। वरदान मांगने पर राजा ने कामकंदला और माधवनल का जीवन और मां बगलामुखी के कामाख्या में ही निवास करने का वर मांगा। तभी मां बगलामुखी साक्षात् रूप में यहां है। ऐसा कहा जाता है बगलामुखी का ही परिवर्तित नाम बम्लेश्वरी है।

जीवन में उन्नति चाहते हैं तो नियमित पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र

आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से अप्रत्याशित लाभ मिलता है। लंबी उम्र, नौकरी में पदोन्नति, धन प्राप्ति, प्रसन्नता, आत्मविश्वास तथा सभी कार्यों में सफलता मिलती है तथा हर मनोकामना सिद्ध होती है। इतना ही नहीं यह पाठ हर तरह के शत्रु से मुक्ति भी दिलाता है। सरल शब्दों में कहें तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र हर क्षेत्र में चमत्कारी सफलता देता है। यहां पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र संपूर्ण पाठ- आदित्य ह्रदय स्तोत्र ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌ । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌ ॥1॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌ । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥ राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌ । येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥ आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌ । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌ ॥4॥ सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌ । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌ ॥5॥ रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌ । पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌ ॥6॥ सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि: ॥7॥ एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥ पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥ आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌ । सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥ हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌ । तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌ ॥11॥ हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: । अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥ व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: । घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥ आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥ नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: । तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते ॥15॥ नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: । ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥ जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: । नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥ नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥ ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे । भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥ तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥ तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे । नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥ नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: । पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥ एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌ ॥23॥ देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च । यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥ एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च । कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥ पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌ । एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥ अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि । एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌ ॥27॥ एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा ॥ धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌ ॥28॥ आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌ । त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌ ॥29॥ रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌ । सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌ ॥30॥ अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: । निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥

Shriram Sharma aachary : पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के 8 प्रेरक विचार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म तिथि के अनुसार आश्विन मास में उत्तरप्रदेश के आगरा जनपद के आंवलखेड़ा गांव में हुआ था। वर्तमान युग में हर व्यक्ति धर्म-कर्म की राह से भटक रहा है। ऐसे व्यक्तियों को सही रास्ता दिखलाने के लिए प्रस्तुत है शांतिकुंज गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य पं. श्रीराम शर्मा के 8 प्रेरक विचार- * जिस भी व्यक्ति ने अपने जीवन में स्नेह और सौजन्य का समुचित समावेश कर लिया है, वह सचमुच ही सबसे बड़ा कलाकार है। * जीवन को प्रसन्न रखने के दो ही उपाय है- एक अपनी आवश्यकताएं कम करें और दूसरा विपरित परिस्थितियों में भी तालमेल बिठाकर कार्य करें। * संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना ही गृहस्थ का तपोवन है। * अपने आचरण से प्रस्तुत किया उपदेश ही सार्थक और प्रभावी होता है, अपने वाणी से किया गया नहीं। * दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसंद नहीं है। * जिन्हें लंबी जिंदगी जीनी हो, वे बिना तगड़ी (ज्यादा, कड़ी) भूख लगे कुछ भी न खाने की आदत डालें। * किसी भी व्यक्ति के द्वारा किए गए पाप उसके साथ रोग, शोक, पतन और संकट साथ लेकर ही आते है। * हर व्यक्ति को अपना मूल्य समझना चाहिए और अपने आप पर यह विश्वास करना चाहिए कि वे संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है।

क्या भ्रष्टाचार का विरोध और जी-हुजूरी नहीं करना बगावत है?

— विशेष टिपण्णी : गोपाल स्वरूप वाजपेयी, पत्रकार व लेखक ईमानदारी तेरा किरदार है तो खुदकुशी कर ले, सियासी दौर को तो जी हुजूरी की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विरोध करने पर एडीएम पद से हटाए गए मध्यप्रदेश के युवा आईएएस लोकेश कुमार जांगिड़ ने इस शायरी से अपना दर्द बयां किया। 2014 बैच का ये आईएएस अफसर एक सप्ताह तक देशभर में सुर्खियों में रहा और अब यह मुद्दा शांत हो गया है। बिना हल निकले इतने गंभीर मामले की इतनी जल्दी हवा निकलना वर्तमान माहौल में कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता। ये मामला इसलिए और गंभीर और संवेदनशील है, क्योंकि मख्यमंत्री शिवराज सिंह के करीब 15 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी आईएएस अफसर ने निशाने पर लिया और वह भी भ्रष्टाचार के मामले में। गजब यह है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले अपर कलेक्टर को 24 घंटे के अंदर पद से हटा दिया गया लेकिन जिस पर आरोप लगे, यानी जिले के कलेक्टर का बाल बांका नहीं हुआ। ये मुद्दा भले ही शांत हो गया हो, लेकिन कई सवाल भी खड़े कर गया। क्या भ्रष्टाचार का विरोध करना बगावत है? क्या भ्रष्टाचार का विरोध कर आईएएस लोकेश जांगिड़ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की आचार संहिता का उल्लंघन किया? क्या जिले में तैनात कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक सूबे के मुख्यमंत्री के वसूली एजेंट होते हैं? आईएएस और आईपीएस को जिले में कलेक्टर व एसपी के रूप में तैनात करने के क्या मानक हैं? क्या इन दोनों अफसरों की तैनाती सियासी रसूख के दम पर होती है? क्या कलेक्टर व एसपी बनने के लिए सियासी गलियों में बोली लगती है? क्या कलेक्टर व एसपी का भ्रष्टाचार के नाले में डुबकी लगाना मजबूरी है? कलेक्टर व एसपी को जिले से हटाने का क्या पैमाना है? सरकार को डायरेक्ट आईएएस की तुलना में प्रमोटी आईएएस क्यों प्रिय हैं? और सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार को लोगों ने रीति-नीति में गुप्त रूप से शिष्टाचार का दर्जा दे दिया है? क्या भ्रष्टाचार व अनैतिकता का विरोध करने वाले का बहिष्कार नहीं किया जा रहा? दरअसल, आईएएस अफसर लोकेश कुमार जांगिड़ को शिवराज सरकार हरियाणा के आईएएस अफसर खेमका की तर्ज पर फुटबाल बना रही है। 2014 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अफसर लोकेश जांगिड़ की फील्ड पोस्टिंग के अभी साढ़े 4 साल हुए हैं, लेकिन उनके 8 बार ट्रांसफर हो चुके हैं। यानी औसतन हर 6 माह में उन्हें हटाया गया। 42 दिन पहले राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक से बड़वानी अपर कलेक्टर बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें वापस राज्य शिक्षा केंद्र भेज दिया गया है। बड़वानी में पदस्थ होने के बाद उन्हें जिले का कोविड प्रभारी बनाया गया था। इस दौरान जांगिड़ ने पूरे जिले का तूफानी दौरा किया और कोरोना की रफ्तार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। बड़वानी कलेक्टोरेट के अधिकारी बताते हैं कि अप्रैल और मई में वह शायद ही अपने दफ्तर में बैठे। वे हमेशा फील्ड में रहते थे। इसी दौरान जांगिड़ ने आॅक्सीजन कंसट्रेटर की खरीदी में हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया। बड़वानी में कोरोना महामारी में उपकरणों की खरीदी में भारी हेरफेर हुआ था। 39 हजार के आॅक्सीजन कंसंट्रेटर 60 हजार रुपए में खरीदे गए। भ्रष्टाचार के इस खेल में जांगिड़ शामिल नहीं हुए और उन्होंने इसका विरोध किया। यह खरीदी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा के माध्यम से हुई। इसके साथ ही अन्य उपकरणों की खरीदी में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ था। जांगिड़ ने चार्ज लेते ही भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगा दी थी। इसकी कीमत जांगिड़ को देनी पड़ी। जांगिड़ को अपर कलेक्टर के पद से हटा दिया गया। बड़वानी से तबादले के बाद लोकेश जांगिड़ ने बड़वानी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए आईएएस एसोसिएशन के सोशल मीडिया ग्रुप में लिखा कि कलेक्टर पैसा नहीं खा पा रहे हैं। इसलिए वर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कान भर दिए। वे एक ही किरार समुदाय से हैं और कलेक्टर की पत्नी किरार महासभा की सचिव हैं, मुख्यमंत्री की पत्नी अध्यक्ष हैं। नैतिकता का तकाजा कहता है कि इतना गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से इस बारे में स्पष्टीकरण जारी होना चाहिए था। लेकिन एक शब्द नहीं कहा गया। चूंकि, बड़वानी कलेक्टर पर सीधेतौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे तो उन्हें भी पद से हटाया जाना चाहिए था और जांच होनी चाहिए थी। लेकिन ये सब तो बहुत दूर, कलेक्टर को एक नोटिस तक जारी नहीं किया गया। भ्रष्टाचार का विरोध करने वालों के लिए यह हतप्रभ व हताश करने वाली घटना है। दरअसल, ऐसा माहौल बनता जा रहा है कि भ्रष्टाचार व अनैतिकता पर बहस करना अब समय की बर्बादी है। घोटालों व भ्रष्टाचार के आरोपों को शिवराज सरकार गंभीरता से नहीं लेती। कुछ माह पहले प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि शिवराज सरकार ने सात माह में 17 घोटाले किए। ग्वालियर में आटा घोटाले में गरीब-मजदूरों को 10 किलो आटे के पैकेट में महज छह किलो से लेकर आठ किलो आटा दिया गया। कोरोना काल में बांटे गए त्रिकूट चूर्ण में भी घोटाले का आरोप लगा। शिवराज सरकार ने इन आरोपों पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस विपक्षी दल है। इसलिए मान लेते हैं उनका काम ही आरोप लगाना है। लेकिन जब केंद्र की मोदी सरकार की एजेंसियां ही शिवराज सरकार को घोटाले को लेकर एलर्ट करें तो मामला बेहद संगीन हो जाता है। प्रदेश में उपचुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बालाघाट व मंडला में हुए चावल घोटाले पर शिवराज सरकार को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए थे। केंद्रीय एजेंसी ने माना था कि प्रदेश में बालाघाट और मंडला में पोल्ट्री ग्रेड का चावल गरीबों को बांटा गया है। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले को लेकर भी शिवराज सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया था। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की जानकारी भी शिवराज सरकार को दी। मध्यप्रदेश में सहकारी समितियों ने किसानों को यूरिया देने के नाम पर बड़ा फजीर्वाड़ा किया। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार ने शिवराज सरकार को दी थी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शिवपुरी जिले में कटनी और रीवा से दो रैक में 51 हजार क्विंटल चावल पिछले साल जुलाई में आया था। घटिया चावल … Read more

Sawan Month 2021 Start Date : इस बार कब शुरू होगा शिव का श्रावण मास

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास वर्ष का पांचवां माह होता है। अंग्रेजों के कैलेंडर के अनुसार यह जुन-जुलाई के बीच आता है। इस बार इस माह की शुरुआत 25 जुलाई 2021 रविवार से हो रही है। 26 जुलाई को सावन का पहला सोमवार रहेगा। 22 अगस्त रविवार रक्षा बंधन के दिन श्रावण मास समाप्त हो जाएगा और भाद्रपद माह की शुरुआत हो जाएगी। दक्षिण भारत में श्रावण मास का प्रारंभ देर से होता है। अषाड़ माह के शुक्ल पक्ष की समाप्ति के पश्चात श्रावण माह का प्रारंभ होता है। अषाड़ माह से ही वर्षा ऋतु का प्रारंभ हो जाता है और इसी माह की शुक्ल एकादशी के दिन देव सो जाते हैं। देवशयनी एकादशी से ही चतुर्मास का प्रारंभ हो जाता है। श्रावण माह से व्रत और साधना के चार माह अर्थात चातुर्मास प्रारंभ होते हैं। ये 4 माह हैं- श्रावण, भाद्रपद, आश्‍विन और कार्तिक। पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में शिव को प्राप्त करने हेतु युवावस्था में श्रावण महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया था। इसलिए यह माह विशेष है। श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना। अर्थात सुनकर धर्म को समझना। इस माह में सत्संग का महत्व है। इस माह में पतझड़ से मुरझाई हुई प्रकृति पुनर्जन्म लेती है। श्रावण माह में सिर्फ सावन सोमवार ही नहीं संपूर्ण माह ही व्रत रखना जाता है। जिस तरह गुड फ्राइडे के पहले ईसाइयों में 40 दिन के उपवास चलते हैं और जिस तरह इस्लाम में रमजान माह में रोजे (उपवास) रखे जाते हैं उसी तरह हिन्दू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है। पूरे श्रावण माह में निराहारी या फलाहारी रहने की हिदायत दी गई है। इस माह में शास्त्र अनुसार ही व्रतों का पालन करना चाहिए। मन से या मनमानों व्रतों से दूर रहना चाहिए। संपूर्ण माह नहीं रख सकते हैं तो सोमवार सहित कुछ खास दिनों व्रत का पालन अवश्य करें। उत्तर भारतीयों के लिए सावन सोमवार के दिन : 1. रविवार, 25 जुलाई 2021 श्रावण मास का पहला दिन 2. सोमवार, 26 जुलाई 2021 पहला श्रावण सोमवार 3. सोमवार, 02 अगस्त 2021 दूसरा श्रावण सोमवार 4. सोमवार, 09 अगस्त 2021 तीसरा श्रावण सोमवार 5. सोमवार, 16 अगस्त 2021 चौथा श्रावण सोमवार 6. रविवार, 22 अगस्त 2021 श्रावण मास का अंतिम दिन पश्‍चिम और दक्षिण भारत में श्रावण माह : वहां 9 अगस्त 2021 से श्रावण मास प्रारंभ होगा और 7 सितंबर 2021 को श्रावण मास का अंतिम दिन होगा। 9 अगस्त, 19 अगस्त, 23 अगस्त, 30 अगस्त और 6 सितंबर को श्रावण के सोमवार रहेंगे।

बजरंग बाण का पाठ करने से पहले जान लें 10 खास बातें

श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस लिखने से पहले हनुमान चालीसा लिखी थी और फिर हनुमान की कृपा से ही वे श्रीरामचरित मानस लिख पाए। कहते हैं कि तुलसीदासजी ने ही बजरंग बाण भी लिखा था। आओ जानते हैं कि बजरंग बाण का पाठ क्यों करना चाहिए और क्या रखना चाहिए सावधानी। कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास पर काशी में किसी तांत्रिक ने मारण मंत्र का प्रयोग किया था। तब तुलसीदास जी के शरीर पर फोड़े निक आए थे। इसके बाद तुलसीदास जी ने बजरंग बाण का पाठ पढ़कर हनुमान जी से गुहार लगाई थी। बजरंग बाण के पाठ से एक दिन में सारे फोड़े ठीक हो गए थे। तभी से माजा जाता है कि यह पाठ शत्रुओं पर अचूक वार करता है। 1. क्यों करते हैं बजरंग बाण का पाठ? : बहुत से व्यक्ति अपने कार्य या व्यवहार से लोगों को रुष्ट कर देते हैं, इससे उनके शत्रु बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों को स्पष्ट बोलने की आदत होती है जिसके कारण उनके गुप्त शत्रु भी होते हैं। यह भी हो सकता है कि आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हो। ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो बजरंग बाण का पाठ आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है। 2. सच्चे और पवित्र लोग ही करें इसका पाठ : बजरंग बाण से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है, लेकिन इसका पाठ एक जगह बैठकर अनुष्ठानपूर्वक 21 दिन तक करना चाहिए और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हनुमानजी सिर्फ सच्चे और पवित्र लोगों का ही साथ देते हैं। 21 दिन में तुरंत फल मिलता है। कभी किसी का बुरा करने की कामना के साथ बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। किसी भी अनैतिक कार्य की पूर्ति के लिए या फिर किसी से विवाद की स्थिति में विजय पाने के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। कर्म करना जीवन में बहुत आवश्यक होता है इसलिए बिना प्रयास के ही किसी कार्य में सफलता पाने के उद्देश्य से बजरंग बाण का पाठ न करें। धन, ऐश्वर्य या किसी भी भौतिक इच्छा की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। 3. सावधानी : बजरंग बाण के बारे में कहा जाता है कि इसका प्रयोग हर कहीं, हर किसी को नहीं करना चाहिए। जब व्यक्ति घोर संकट में हो तब ही इसका प्रयोग करना चाहिये। प्रयोग करने के पूर्व इसे सिद्ध करना होता है। इसका प्रयोग करते वक्त सावधानी रखना चाहिए। किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होना चाहिए। जितनी बार बजरंग बाण पाठ का संकल्प लें, उतनी बार रुद्राक्ष की माला से पाठ करें। बजरंग का बाण पाठ करते समय ध्यान रखें कि शब्दों का उच्चारण साफ और स्पष्ट होना चाहिए। अगर आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ कर रहे हैं तो कम से कम 41 दिनों तक यह पाठ नियमपूर्वक करें। आपको जितने दिन तक बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों में ब्रह्मचर्य का पूर्णतया पालन करना जरूरी है। जितने दिन भी आपको बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों तक किसी प्रकार का नशा या तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। 4. विधिवत रूप से करें पाठ : बजरंग बाण का पाठ करके के लिए हनुमानजी के चित्र या मूर्ति के समक्ष कुशासन (एक विशेष प्रकार की घास से बना आसन) पर बैठकर विधिवत उनकी पूजा अर्चना करने के बाद इसका पाठ करना चाहिए। 5. कब करें ये पाठ : बजरंग बाण का पाठ अक्सर शनिवार को ही किया जाता है, परंतु मंगलवार को भी इसका पाठ कर सकते हैं। 6. पाठ के पूर्व क्या करें : बजरंग बाण का पाठ करने के पूर्व संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे। इसके अलावा रामजी की स्तुति पढ़ें और फिर विधिवत पूजा के बाद पाठ करें। पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान राम का स्मरण और कीर्तन करें। 7. घी का दीप जलाएं : पाठ के पूर्व घी का दीपक चलाएं जिसमें पांच बत्ती हो। इसी के सात गुग्गल की सुगंध भी फैलाएं। 8. अर्पित करें ये सामग्री : हनुमानजी को चमेली का तेल, गुड़, चना, जनेऊ, पान का बिड़ा आदि अर्पित करें। चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फल भी अर्पित कर सकते हैं। 9. शनि, राहु-केतु से मिलती है मुक्ति : घटना-दुर्घटना को राहु-केतु और शनि अंजाम देते हैं। जैसे अचानक आग लग जाना, आपकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता या किसी मुसिबत का अचानक आ जाना। हनुमानजी आपको सभी तरह की घटना और दुर्घटना से बचा लेते हैं। इसके लिए आप सदा उनकी शरण में रहकर प्रतिदिन बजरंग बाण पाठ कर सकते हैं। 10. मंगल दोष से मुक्ति : यदि किसी की कुंडली में मांगलिक दोष है जिसके कारण विवाह नहीं हो पा रहा है या विवाह होने के बाद वैवाहिक जीवन में संकट पैदा हो रहा है तो उसे नियमित रूप से मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। अगर नियमपूर्वक निष्ठा के साथ बजरंग बाण का पाठ किया जाए, तो इससे मांगलिक दोष का निवारण जल्द हो सकता है।

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