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एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत: वित्त वर्ष 2025-26 में 30,000 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान

नई दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) को एलपीजी सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपए देने को मंजूरी दी है। यह राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी ताकि वे घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर को रियायती कीमतों पर उपलब्ध करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी देने के बाद केंद्र सरकार लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर 613 रुपए प्रति सिलेंडर (दिल्ली में) की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध करा रही है। घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को सी3 और सी4 गैस स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि यह एलपीजी उत्पादन सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं। सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष कंपनी के जरिए 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाए हैं। ये भंडार ईरान युद्ध जैसे हालात में सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद करेंगे। मंत्री ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां इनकी कीमतों पर फैसला करती हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार टैक्स संरचना में बदलाव करके उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए वित्तीय हस्तक्षेप भी करती है।उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने दो चरणों में पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम की थी, जिसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं को दिया गया था। इसके अलावा मार्च 2024 में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अप्रैल 2025 में जब पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई गई, तब इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

डॉ. यादव के नेतृत्व में जल प्रबंधन अभियान तेज, जनभागीदारी से मिल रहा व्यापक समर्थन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये प्रभावी रूप से जनभागीदारी की पहल की गई है। प्रदेश में “जल महोत्सव-2026” आयोजित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह अभियान केवल पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन के लिये समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाने की अवधारणा को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के चयनित ग्रामों में 8 मार्च से 22 मार्च 2026 के बीच जल महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य उन ग्रामों की उपलब्धियों को सामने लाना है जहाँ हर घर तक नल से जल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है और पेयजल योजनाओं का संचालन, प्रबंधन तथा रख-रखाव ग्राम पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जल महोत्सव ग्रामीण समुदाय को जल प्रबंधन की जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरूक एवं सहभागी बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल जीवन मिशन को एक व्यापक जनभागीदारी आधारित पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जल महोत्सव के माध्यम से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के सुचारु संचालन और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निरंतर उल्लेखनीय कार्य किये जाते रहे है। देश का पहला “जल अर्पण दिवस” राजगढ़ जिले में गोरखपुरा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 23 दिसम्बर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसने जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। जल महोत्सव के लिए ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहाँ हर घर जल की स्थिति सत्यापित हो चुकी है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन प्रभावी रूप से किया जा रहा है। प्रत्येक जिले से ऐसे 2 ग्राम चिन्हित किए गए हैं जहाँ जल जीवन मिशन के मानकों के अनुरूप जल प्रदाय की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इन ग्रामों में कार्यक्रमों का आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से किया जा रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित महोत्सव में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वाल्वमैन, स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सक्रिय सदस्यों को चिन्हित किया जाएगा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर के द्वारा इनका सम्मान किया जाएगा, जिससे समुदाय आधारित जल प्रबंधन के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर उपलब्ध मद से अधिकतम 25 हजार रु. तक की राशि व्यय की जा सकेगी। प्रदेश की विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में यह आयोजन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, नीमच, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, उज्जैन तथा बड़वानी सहित अन्य जिलों के चयनित ग्राम शामिल हैं। जल महोत्सव-2026 के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता की दिशा में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी रूप से संचालित किया जा सके।  

पीएम नरेन्द्र मोदी गुवाहाटी से देश के 9.32 करोड़ किसानों के खाते में राशि अंतरित करेंगे

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी 13 मार्च को असम राज्य के गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के करीब 9.32 करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22 वीं किस्त की राशि 18 हज़ार 650 करोड़ रुपये का अंतरण करेंगे। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम से छत्तीसगढ राज्य के 24 लाख 71 हजार 498 किसानों के खाते में  498.83 करोड़ रूपए की राशि भेजी जाएगी। इस योजना के तहत छत्तीसगढ राज्य के 2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी और 37 हजार 400 विशेष पिछड़ी जनजाति किसानों को भी लाभान्वित किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लाखों किसान सहित जनप्रतिनिधिगण राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद, कृषि महाविद्यालय जोरा रायपुर से जुड़ेंगे।        कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पी एम किसान उत्सव के तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में किसान बैठकों का आयोजन किया जाएगा और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी कराया जाएगा, ताकि किसान सीधे इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।        गौरतलब है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत ’’पहली किश्त फरवरी 2019 में किसानों के खातों में जारी की गई थी’’। योजना प्रारंभ होने से लेकर अब तक प्रदेश के किसानों को ’’कुल 11 हजार 283 करोड़ 09 लाख रुपये’’ की राशि प्रदान की जा चुकी है, जिससे लाखों किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य शासन द्वारा ’’2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी किसानों’’ तथा ’’37 हजार 400 विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के किसानों’’ को भी योजना में पंजीयन कर लाभान्वित किया जा रहा है।          विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसानों को योजना का लाभ प्रदान करने के लिए ’’कृषि भूमि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है’’। योजनांतर्गत सभी ’’एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू- अभिलेख के रिकार्ड में दर्ज हैं, योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।            प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि देश के कृषक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना ’’दिसम्बर 2018 से लागू की गई है’’। यह योजना ’’भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित’’ है। इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को ’’प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि’’ प्रदान की जाती है, जिसे ’’2-2 हजार रुपये की तीन समान किश्तों में प्रत्येक चार माह के अंतराल पर डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है’’। योजना का लाभ सभी वर्ग एवं श्रेणी के उन किसानों को दिया जाता है जिनका नाम भू- अभिलेख में दर्ज है। योजनांतर्गत ’’सभी एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू-अभिलेख में दर्ज हैं, ’’वन अधिकार पट्टाधारी किसान’’ तथा ’’विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसान’’ लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।

अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख

रायपुर  प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।  मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

कुपोषण के खिलाफ तकनीक का सहारा, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार पोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही है । प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए 1 लाख 33 हजार से अधिक आधुनिक उपकरण स्टेडियोमीटर जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों की मदद से बच्चों की लंबाई की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके पोषण स्तर का सही आकलन करने में मदद मिलती है।  ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए कई आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2021 और 2022 में एक लाख 88 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर उपकरणों की आपूर्ति की गई थी। स्टेडियोमीटर के माध्यम से 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की ऊंचाई का सटीक आकलन किया जाता है। इस उपकरण की मदद से बच्चों के विकास की नियमित निगरानी संभव हो रही है और कुपोषण की पहचान समय रहते की जा रही है। सरकार का मानना है कि बचपन में स्वास्थ्य और पोषण की सही देखभाल ही एक मजबूत समाज की नींव रखती है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के लाखों बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। तकनीक के सहारे कुपोषण पर प्रहार योगी सरकार ने कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में तकनीक को महत्वपूर्ण हथियार बनाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के विकास की निगरानी के लिए आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों के संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद उनके माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य का आकलन वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके। इससे न केवल बच्चों की वृद्धि की सटीक जानकारी मिल रही है बल्कि समय रहते पोषण संबंधी आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिल रही है।

Indane यूजर्स परेशान: सिस्टम क्रैश होने से गैस सिलेंडर बुकिंग ठप

नई दिल्ली दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से गैस सिलेंडर की कमी हो रही है। इसी वजह से अचानक गैस बुकिंग की कॉल्स में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मनीकंट्रोल के मुताबिक, गैस बुकिंग के लिए आने वाली कॉल्स सामान्य दिनों की तुलना में 8 से 10 गुना तक बढ़ गईं, जिससे Indane का बुकिंग सिस्टम कुछ समय के लिए क्रैश हो गया। इसका असर यह हुआ कि कई यूजर्स फोन, ऐप या वेबसाइट के जरिए सिलेंडर बुक नहीं कर पाए और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ शहरों में तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें भी लग गईं। वहीं रिसर्चर्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और गैस सप्लाई को लेकर बनी चिंता के कारण लोगों ने एक साथ सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया, जिससे सिस्टम पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ गया। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर LPG बुकिंग सिस्टम क्यों क्रैश हुआ और इसका यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई जगह लोगों को IVRS नंबर या मिस्ड कॉल के जरिए सिलेंडर बुक करने में दिक्कत हुई। कुछ जगहों पर तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं। 8–10 गुना बढ़ी कॉल्स से सिस्टम पर पड़ा दबाव मनीकंट्रोल के अनुसार Indane के IVRS और मिस्ड कॉल नंबर पर बुकिंग के लिए अचानक कॉल्स की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई। सामान्य दिनों के मुकाबले कॉल्स लगभग 8 से 10 गुना ज्यादा आ गईं। कंपनी ने अपने डीलरों को भेजे एक message में बताया कि इतनी ज्यादा कॉल्स आने की वजह से पूरा सिस्टम भारी दबाव में आ गया और कई बार ग्राहकों को कनेक्ट होने में दिक्कत होने लगी। लोगों की हुई परेशानी सिस्टम में आई टेक्निकल दिक्कत की वजह से कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पाए। कुछ जगहों पर मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं। ऐसे में कई लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं और काफी भीड़ देखने को मिली। कई ग्राहकों ने शिकायत की कि उन्होंने कई बार कॉल करने की कोशिश की लेकिन बुकिंग नहीं हो सकी। सरकार ने बदला गैस बुकिंग का नियम सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक नया नियम भी लागू किया है। अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह समय 21 दिन था। सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया है ताकि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें और सभी यूजर्स को गैस मिल सके।  

छह नोड्स में अब तक 62 कंपनियों को भूमि आवंटित, 9 प्रमुख इकाइयों में उत्पादन शुरू

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2018 में स्थापित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से प्रदेश को रक्षा उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के छह रणनीतिक नोड्स (कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट) में तेजी से औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रहीं हैं। नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक ₹35,526 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत 2,040 हेक्टेयर भूमि में से 977.54 हेक्टेयर भूमि उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में रक्षा और संबद्ध विनिर्माण गतिविधियों के लिए 62 कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है, जबकि लगभग 11 कंपनियों के लिए लीज डीड की प्रक्रिया प्रगति पर है। रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में निवेश प्रस्तावों की बात करें तो कानपुर में ₹12,803 करोड़, झांसी में ₹11,738 करोड़, लखनऊ में ₹4,850 करोड़, अलीगढ़ में ₹4,490 करोड़, चित्रकूट में ₹880 करोड़ और आगरा में ₹607 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से प्रदेश में रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार हो रहा है। नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने शुरू किया उत्पादन कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जो भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इनमें अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा कानपुर में लगभग ₹1,500 करोड़ की लागत से स्थापित गोला-बारूद निर्माण संयंत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो इस कॉरिडोर का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। अलीगढ़ नोड में अमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने लगभग ₹330 करोड़ के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है। वहीं वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड और नित्या क्रिएशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छोटे हथियारों और प्रिसिशन आर्म्स कंपोनेंट्स का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। लखनऊ नोड बना रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र लखनऊ नोड तेजी से रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने लगभग ₹320 करोड़ के निवेश से टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है, जबकि ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने लगभग ₹300 करोड़ की लागत से ब्रह्मोस एनजी मिसाइल सिस्टम के निर्माण की दिशा में उत्पादन प्रारंभ किया है। इसके अलावा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस द्वारा रक्षा सुरक्षा उपकरणों और परिधानों का निर्माण भी शुरू किया गया है। वहीं, कानपुर नोड में ए.आर. पॉलिमर्स और आधुनिक मेटेरियल्स एंड साइंसेज जैसी कंपनियों ने क्रमशः बैलिस्टिक मेटेरियल्स और डिफेंस टेक्सटाइल्स का उत्पादन शुरू कर औद्योगिक गतिविधियों को नई गति दी है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में घोषित यह डिफेंस कॉरिडोर प्रदेश में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और उद्योग अनुकूल नीतियों के माध्यम से तेजी से निवेश आकर्षित कर रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से यह परियोजना केवल रक्षा विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्योगों को भी वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने का काम कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आने वाले वर्षों में प्रदेश में रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और निर्यात उन्मुख औद्योगिक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यूपी को इको टूरिज्म हब बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल, फिरोजाबाद और गाजीपुर में इको टूरिज्म गतिविधियों का होगा विकास

लखनऊ  यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश को इको-टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में कई उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इस दिशा में बोर्ड कम लोकप्रिय इको पर्यटन केंद्रों में भी अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास कर रहा है। इससे इन क्षेत्रों में एक ओर इको टूरिज्म की गतिविधियों की बढ़ोतरी होगी, साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अतिरिक्त स्रोत भी मिलेंगे। इस क्रम में फिरोजाबाद का रपड़ी इको पर्यटन केंद्र और गाजीपुर में स्थित कामाख्या वन पार्क में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जो प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को नया अनुभव प्रदान करेगा। फिरोजाबाद के रपड़ी इको पार्क में कराए जा रहे हैं फेज-2 के विकास कार्य यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड फिरोजाबाद में स्थित रपड़ी इको पार्क में 5 करोड़ रुपये की लागत से फेज-2 के विकास कार्य करा रहा है। परियोजना के तहत पार्क में प्रवेश द्वार, इंटरप्रिटेशन सेंटर और टिकट काउंटर विकसित किया जा रहा है। पर्यटकों को रोमांचक और यादगार अनुभव देने के लिए वॉल क्लाइम्बिंग, वुडन डेक और सेल्फी प्वाइंट का विकास किया जा रहा है। साथ ही पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच भ्रमण का आनंद लेने के लिए नेचर ट्रेल का विकास किया जाएगा। वहीं पर्यटकों को अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पार्किंग, पेयजल और टॉयलेट ब्लॉक के साथ साइनेज भी लगाए जा रहे हैं। पर्यटकों के ठहरने और विश्राम के लिए गजेबो या गोल हट तथा स्विस टेंट की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क में बन रहा है बटरफ्लाई गार्डन, लैंडस्केप और चिल्ड्रेन पार्क गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क में इको-टूरिज्म की सुविधाओं के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करने के लिए यहां विशेष रूप से बटरफ्लाई गार्डन विकसित किया जा रहा है, जहां विभिन्न प्रजातियों की तितलियों को देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा लैंडस्केप पार्क, वाटर फाउंटेन, गजेबो या गोल हट के साथ बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया जाएगा। साथ ही कामाख्या वन पार्क में आकर्षक प्रवेश प्लाजा और इंटरप्रिटेशन सेंटर का भी निर्माण किया जाएगा, जो पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ वन पार्क की विशेषताओं से भी परिचित करवाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए पेयजल, पोल लाइट, बेंच और डस्टबिन भी लगाए जाएंगे। इन परियोजनाओं के विकास से फिरोजाबाद और गाजीपुर के वन पार्कों को नई पहचान मिलेगी, साथ ही प्रदेश में इको-टूरिज्म के विकास की यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

एयर चीफ मार्शल की सोलो उड़ान से गूंजा आसमान, मल्टी-रोल फाइटर जेट के साथ वायु सेना का शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली आज भारत की वायु सेना का सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन करने के लिए देखने को मिला। भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल एपी सिंह ने आज मिग-29 यूपीजी मल्टी-रोल लड़ाकू विमान को अकेले उड़ाया। एपी सिंह ने एक प्रमुख सीमावर्ती बेस से उड़ान भरी। विमान के लैंड करने का वीडियो भी सामने आया है।   अपनी यात्रा के बाद, एयर चीफ़ ने बेस पर भारतीय वायु सेना के  पूर्व सैनिकों से भी बातचीत की। इस दौरे में भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल तैयारी, लड़ाकू क्षमताओं और फ़ॉरवर्ड बेस पर मिशन की तैयारी पर ज़ोर दिया गया। मिकोयान MiG-29 सोवियत यूनियन का बनाया हुआ एक द्वी-इंजन लड़ाकू विमान है। भारतीय वायु सेना चार दशकों से इस्तमाल हो रहे अपने MiG-29 फ़्लीट को अपग्रेड करने का फ़ैसला किया था। सोवियत में बना यह विमान 1970 के दशक में बनाया गया था और 1980 के दशक में वायु सेना में शामिल किया गया था। इसे असल में अमेरिकन F-16 लड़ाकू विमान का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। MiG-29 के कई वेरिएंट हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल भारतीय नौसेना भी करती है। मिकोयान MiG-29 (अपग्रेड) चौथी जेनरेशन का सर्वश्रेष्ठता लड़ाकू विमान है। इस विमान को नई एवियोनिक्स, रडार और हवा ही हवा में रिफ्यूलिंग क्षमता के साथ अपग्रेड किया गया है। यह विमान जानलेवा है और हवा ही हवा, हवा से जमीन और सटीक गोला-बारूद दागने में सक्षम है।

28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

ईरान में अमेरिकी कोशिशें नाकाम! खामेनेई के बेटे की सरकार पर कोई संकट नहीं

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल बीते 13 दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। शुरुआती दिनों ही ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे, लेकिन अब भी देश की जनता का भरोसा अपने नेतृत्व पर कायम है। यह बात तो खुद अमेरिकी एजेंसियों ने भी स्वीकार की है। अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि ईरान की सरकार गिरने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अब भी जनता पर उसकी पकड़ बनी हुई है। तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने कहा कि ईरान की जनता पर लीडरशिप की पकड़ कायम है। इसका अर्थ यह है कि अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को जनता ने स्वीकार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ दिनों में यह जानकारी निकाली है। दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा गैस की भी किल्लत हो रही है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका का कहना है कि हम जल्दी ही जंग खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह ईरान के नेतृत्व का शायद जज्बा है या फिर उसे मिल रहा जनता का समर्थन है कि उसका कहना है कि जंग भले ही अमेरिका ने शुरू की थी, लेकिन इसे अब खत्म हम ही करेंगे। यह बात दिलचस्प है कि ईरान के शीर्ष नेता मारे गए हैं। फिर भी उसकी नई लीडरशिप को जनता ने ना सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि उसके साथ खड़ी है। ईरानी लीडरशिप को मिली ताकत से कैसे अमेरिका को झटका यह अहम इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर होगी। फिर लोकतंत्र बहाली के नाम पर वह दखल दे सकेगा और अपने किसी करीबी को कमान सौंपा देगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ऐसी उम्मीदें भी थीं, लेकिन जनता ने खामेनेई के बेटे को ही लीडर मान लिया है। ऐसे हालात तब हैं, जबकि अमेरिका लगातार हमले कर रहा है और मुजतबा खुद भी खतरे में हैं। जंग के पहले ही दिन मारे गए थे अयातुल्लाह खामेनेई, अब तक नहीं निकला जनाजा बता दें कि जंग के पहले ही दिन अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। उनका तब से अब तक जनाजा नहीं निकाला गया है। माना जा रहा है कि इस नमाज-ए-जनाजा में करोड़ों की भीड़ जुटेगी। इसी के कारण ईरानी लीडरशिप उन्हें अभी दफनाने से बच रहा है। यदि ऐसा कोई आयोजन हुआ तो अमेरिका और इजरायल एक बार फिर से बड़ी तबाही कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के हालात बनने पर ही शायद अब खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।  

रामनवमी पर बड़ी संख्या में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन तथा रामनवमी की तैयारियों को लेकर गुरुवार को समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में तैयारियों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने पीएफसी स्थित सभाकक्ष में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों, जन प्रतिनिधियों व पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित आगमन के दृष्टिगत सभी तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता का रखा जाए विशेष ध्यान  समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियों के बारे में जानकारी दी, जिसमें एयरपोर्ट पर स्वागत, यात्रा मार्ग पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा अतिथियों के लिए आवश्यक प्रबंध शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता तथा आगंतुकों के लिए सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पूज्य संतों समेत अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों के लिए समुचित प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन व ट्रस्ट के पदाधिकारी समन्वय के साथ करें तैयारी  मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रशासन व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी समन्वय के साथ सभी तैयारियों को निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करें। सीएम ने पुलिस अधिकारियों को सभी सार्वजनिक स्थानों पर कड़ी निगरानी व ठोस सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने, खुफिया तंत्र व एंटी-ड्रोन कंट्रोल रूम को अलर्ट रखने के निर्देश दिए। रामनवमी की तैयारियों की भी की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनवमी के अवसर पर अयोध्या धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संबंध में भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं तथा फुटपाथों को खाली रखा जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो। सीएम योगी ने भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था करने तथा दर्शन-पूजन कार्यक्रम को स्क्रीन के माध्यम से भी प्रसारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रामनवमी प्रमुख पर्व है, इस अवसर पर अयोध्या धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध एवं देशविरोधी तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। मंदिर परिसर में बिना जांच के किसी को भी प्रवेश न दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। *लता मंगेशकर चौक से हनुमानगढ़ी तक गोल्फ कार्ट संचालित करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में रामनवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लता मंगेशकर चौक से हनुमानगढ़ी तक गोल्फ कार्ट संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें ज्यादा पैदल न चलना पड़े। सीएम ने इसके साथ ही वीआईपी मूवमेंट को न्यूनतम रखने पर भी जोर दिया, जिससे आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने निर्देश दिया कि पार्किंग व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। सड़कों के किनारे वाहनों की पार्किंग न होने दी जाए। सेवाभाव से विभिन्न स्थानों पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।  बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने परिक्रमा मार्ग एवं मंदिर म्यूजियम के निर्माण की प्रगति की भी जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री जी के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में कृषि मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, डॉ अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य गोपाल जी, ट्रस्ट्री अनिल मिश्रा, एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार, मंडलायुक्त राजेश कुमार, डीआईजी सोमेन बर्मा, जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर आदि मौजूद रहे।

सावरकर टिप्पणी विवाद थमा, कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस किया बंद

मुंबई महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक आपराधिक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को बुधवार, 11 मार्च को बड़ी राहत दी है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आर.एल. नरवाडे की अदालत ने गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले को बंद कर दिया है। यह मामला उनके द्वारा हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा था, जो उन्होंने 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की थीं। अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हुए टिप्पणी की थी। राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत नासिक स्थित निर्भया फाउंडेशन के अध्यक्ष देवेंद्र भुटाडा ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 15 और 16 जून, 2022 को हिंगोली और अकोला में रैलियों में गांधी की टिप्पणियां मानहानि करने वाली और अपमानजनक थीं। किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था भुटाडा की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। सितंबर 2024 में नासिक अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन भी जारी किया था। बाद में राहुल गांधी को अदालत से जमानत मिल गई और उन्हें कार्यवाही में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति भी दी गई। सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। शिकायतकर्ता ने वापस ली शिकायत बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में आवेदन देकर मामला वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद ट्रायल जज ने मानहानि से जुड़ी पूरी कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।  

IPL 2017 की धमाकेदार शुरुआत: युवराज सिंह की पारी से SRH ने RCB को हराया

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 19 वें सीजन (आईपीएल 2026) की शुरुआत 28 मार्च से हो रही है। बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के पहले 16 दिनों का शेड्यूल जारी कर दिया है। पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। आरसीबी पिछले सीजन विजेता रही थी। आरसीबी और एसआरएच 2017 में भी सीजन का पहला मुकाबला खेल चुकी हैं। इस मुकाबले में एसआरएच 35 रन से विजयी रही थी। यह मुकाबला राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम, हैदराबाद में खेला गया था। इस मैच में आरसीबी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए एसआरएच ने युवराज सिंह के 27 गेंदों पर 7 चौकों और 3 छक्कों की मदद से बनाए 62 रन, मोइसेस हेनरिक्स के 37 गेंदों पर बनाए 52 रन और शिखर धवन के 31 गेंदों पर बनाए 40 रन की मदद से 4 विकेट पर 207 रन बनाए थे। आरसीबी के लिए टाइमल मिल्स, अनिकेत चौधरी, चहल और बिन्नी ने 1-1 विकेट लिए थे। 208 रन का लक्ष्य हासिल करने उतरी आरसीबी 19.4 ओवर में 172 पर सिमट गई और 35 रन से मैच हार गई। आरसीबी के लिए क्रिस गेल ने सर्वाधिक 32 रन बनाए थे। इसके अलावा, केदार जाधव ने 31 और ट्रेविस हेड ने 30 रन की पारी खेली थी। एसआरएच के लिए आशीष नेहरा, भुवनेश्वर कुमार, राशिद खान ने 2-2, जबकि दीपक हुड्डा और बिपुल शर्मा ने 1-1 विकेट लिए थे। एसआरएच ने उस सीजन प्लेऑफ में जगह बनाई थी, लेकिन आरसीबी टॉप 4 से बाहर रही थी। दोनों टीमों के बीच 2016 का फाइनल खेला गया था जिसमें एसआरएच विजेता रही थी। देखना होगा कि आईपीएल 2026 के पहले मुकाबले में बाजी आरसीबी या एसआरएच किसके हाथ लगती है। पिछला सीजन जीतने के बाद आरसीबी के हौसले बुलंद हैं, तो एसआरएच ने भी पिछले 2 सीजन में अपने खेल से फैंस को रोमांचित किया है।  

8th Pay Commission अपडेट: 6% वार्षिक इंक्रीमेंट और नए DA फॉर्मूले की मांग, सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

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