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एशिया में ईंधन की किल्लत से हाहाकार: सरकारों के बड़े फैसले, लोगों की दिनचर्या पर पड़ा असर

ईरान ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमले के बाद मध्य-पूर्व में छिड़े संघर्ष और तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत समेत सभी एशियाई देशों ने ऊर्जा बचाने और आर्थिक असर को कम करने के लिए कई आपात कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एशिया अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 60% मध्य-पूर्व से आयात करता है, इसलिए ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ता है। इंधन संकट को देखते हुए भारत ने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग, रूस से तेल आयात में वृद्धि, और घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कड़ी निगरानी कर रही है, वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तलाश रही है, और खुदरा कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रही है। भारत ने आपात प्रावधानों का उपयोग करते हुए एलपीजी (LPG) को औद्योगिक उपयोग से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ने का भी फैसला किया है, ताकि आम जनता को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। सरकार ने राज्यों को एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए सतर्क रहने और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पड़ोसी देशों में क्या उपाय किए जा रहे पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश फिलहाल गंभीर ईंधन संकट (Fuel Crisis) का सामना कर रहा है, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा ईरान युद्ध है। देश की 95% ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, जो वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के कारण प्रभावित हुई हैं। इस संकट की वजह से बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं क्योंकि सरकार ने ईंधन आपूर्ति सीमित कर दी है। ऊर्जा बचत के लिए कई विश्वविद्यालयों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। संकट के बीच भारत ने “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की पहली खेप पाइपलाइन के जरिए भेजी है। पाकिस्तान में स्कूल बंद, सेवाएं ऑनलाइन पश्चिमी पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी ईंधन संकट के बीच ऊर्जा बचत के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। पाक सरकार ने सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कटौती कर दी है, जबकि दफ्तरों में 4-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है। इसके अलावा 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया गया है। स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद करना, और सरकारी स्तर पर अनावश्यक कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है। पाकिस्तान ने मंत्रियों, सलाहकारों और सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकारी इफ्तार पार्टियों और कार्यक्रमों पर भी पूर्ण पाबंदी लगा दी है। अन्य एशियाई देशों में क्या कदम? चीन ने ईंधन संकट से बचने के लिए अपने विशाल स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व (रणनीतिक तेल भंडार) का उपयोग शुरू कर दिया है, जो 100 दिनों से अधिक की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही, चीन ने क्रूड ऑयल की खरीद बढ़ा दी है और ईंधन निर्यात को अस्थाई रूप से रोक दिया है। चीन ने अगले पांच वर्षों में कार्बन तीव्रता घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाने की योजना तेज कर दी है।   विदेश यात्राओं पर रोक दक्षिण कोरिया ने बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 30 वर्षों में पहली बार ईंधन कीमतों पर सीमा (price cap) लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही वह होर्मुज स्ट्रेट के बाहर अन्य स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश वियतनाम ने कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) की सुविधा देने की अपील की है। थाईलैंड ने सरकारी कर्मचारियों को विदेश यात्राएं रोकने और घर से काम करने के निर्देश दिए हैं, जबकि फिलिपीन्स में कुछ सरकारी कार्यालयों में अस्थायी रूप से चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है। साथ ही एयर-कंडीशनिंग का तापमान 24°C से कम न रखने का निर्देश दिया गया है और बैठकों को वर्चुअल तरीके से करने को कहा गया है। संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा तो खाद और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है, जिसका सबसे अधिक असर एशिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा संकट लंबा खिंचने पर एशिया की अर्थव्यवस्थाओं और आम जनता दोनों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।  

एलपीजी सप्लाई में सुधार, उत्पादन 28% बढ़ा; 2.5 दिन में घर पहुंचेगा सिलेंडर: पुरी

नई दिल्ली पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है। पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है। पुरी ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है। मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं। समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है। पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान से की मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत् प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत और कई महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त केंद्रीय मंत्री  चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी। दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी। फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके। कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री  चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके। ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।  

अय्यर के बयान पर थरूर का तीखा रिएक्शन, ‘सरेंडर’ वाली बात पर भी सुनाई खरी-खरी

ईरान ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर भारत के स्टैंड पर सरकार को कांग्रेस घेरने में जुटी है। इस बीच उसके ही दो वरिष्ठ नेता आपस में उलझे हुए हैं और सार्वजनिक रूप से खुले खत लिखकर एक-दूसरे पर बरस रहे हैं। पहले मणिशंकर अय्यर ने फ्रंटलाइन पत्रिका में एक लेख लिखकर शशि थरूर पर नेहरूवादी नीति से भटकने का आरोप लगाया था। इजरायल और अमेरिका पर उनके रुख की आलोचना की थी। अब उन्हें जवाब देते हुए शशि थरूर ने भी विस्तार से पोस्ट लिखा है। एक्स पर ही जवाब देते हुए थरूर ने लिखा है कि असहमति होने में कुछ गलत नहीं है। लोकतंत्र की यही खूबी है कि लोग अलग-अलग राय रख सकते हैं। इसके आगे उन्होंने मणिशंकर अय्यर को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, ‘सिर्फ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना जरूरी हो गया है।’ वह लिखते हैं कि मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज्जत सबसे ऊपर है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना कोई ‘मोरल सरेंडर’ नहीं है — यह जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता का संतुलन रही है। जवाहर लाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति से लेकर आज की बहु-ध्रुवीय कूटनीति तक भारत का मकसद हमेशा एक ही रहा है, अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और दुनिया में न्याय की बात करना। संसद में हो या संसद के बाहर, मेरा रिकॉर्ड इसी संतुलन को दिखाता है। देशभक्ति पर किसी एक पीढ़ी का अधिकार नहीं है। और न ही गांधी जी या नेहरू जी को समझने का अधिकार किसी एक समूह के पास है। असली सम्मान यही है कि उनके विचारों को आज के समय की हकीकत के साथ समझकर लागू किया जाए। इसके आगे वह लिखते हैं, ‘इतिहास में भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की गलत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं ललकारा, क्योंकि हमारे अपने राष्ट्रीय हित उससे जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख अपनाया। आज भी खाड़ी देशों के साथ भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं। लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, हमारी ऊर्जा सुरक्षा और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम कर रहे हैं। ऐसे में विदेश नीति बनाते समय इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है।’ सरेंडर वाली बात पर भी मणिशंकर अय्यर को खूब सुनाया अय्यर के सरेंडर वाले कॉमेंट पर भी थरूर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यथार्थ को समझना किसी के आगे झुकना नहीं होता। आज अमेरिका में ऐसी सरकार है जो अंतरराष्ट्रीय कानून को हमेशा उसी तरह प्राथमिकता नहीं देती जैसे हम देना चाहते हैं। लेकिन अगर हम उसे खुलकर चुनौती देते हैं तो उसके परिणाम भी हो सकते हैं। अपने हाल के लेख में मैंने साफ लिखा है कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हमारे कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, उन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी। विदेश नीति आखिरकार राष्ट्रीय हित के बारे में ही होती है, केवल भाषण देने या दिखावे की राजनीति करने के बारे में नहीं। क्या सरकार देती है विदेश जाने का पैसा? थरूर ने दिया जवाब उन्होंने एक के बाद एक सभी आरोपों पर जवाब दिया और यह भी बताया कि उनकी विदेश यात्राओं को सरकार प्रायोजित ना बताया जाए। वह लिखते हैं, ‘मेरी विदेश यात्राओं को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर मेरी बाकी विदेश यात्राएं निजी रही हैं। न उन्हें सरकार आयोजित करती है, न सरकार उनका खर्च उठाती है। दुनिया भर के कई विश्वविद्यालय और संस्थान मुझे बुलाते हैं, जितने निमंत्रण आते हैं, उनमें से ज्यादातर को मैं अपने काम के कारण स्वीकार भी नहीं कर पाता। इसके बाद जहां तक क्षेत्रीय राजनीति की बात है, मेरे विचार सालों से एक जैसे रहे हैं। अय्यर पर कसे तीखे तंज, बोले- अब जवाब देना जरूरी था अय्यर पर दोहरे रवैये के लिए तंज भी शशि थरूर ने कसा। उन्होंने लिखा, ‘आपने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मेरा समर्थन किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। फिर जब आपको पार्टी से निलंबित किया गया था, तब मैंने भी आपके समर्थन में आवाज उठाई थी। मुझे खुशी है कि वह निर्णय बाद में ठीक किया गया। आपने अपने पत्र के अंत में ‘रास्ते अलग होने’ की बात कही। सच यह है कि आपरेशन सिंदूर पर मेरे बोलने के बाद से ही आप लगातार मेरे बारे में कई टिप्पणियां कर रहे थे। मैंने अब तक सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया, इसलिए दे रहा हूं।’  

आधुनिक तकनीक से कृषि में बदलाव, प्रदेश ने दर्ज की महत्वपूर्ण उपलब्धि: मंत्री वर्मा 🌾

भोपाल राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाते हुए किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार और पारदर्शी कृषि प्रबंधन की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को अपनाते हुए डिजिटल फसल सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।डीसीएस के सटीक, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को 130 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। राजस्व मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फसल सर्वेक्षण प्रणाली (गिरदावरी) को आधुनिक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए जियो-फेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई/एमएल) और सैटेलाइट डेटा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।डिजिटल फसल सर्वेक्षण में जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया गया है। इसके तहत सर्वेयर की खेत पर प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य की गई है, जिससे बिना स्थल निरीक्षण के डेटा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। राजस्व मंत्री  वर्मा ने कहा कि जमीनी स्तर पर एकत्रित डेटा का मिलान एआई/एमएल तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी से किया जा रहा है। इससे सर्वेक्षण की सटीकता और विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हुई है।किसानों को सर्वेक्षण और विभिन्न योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के लिए एसएमएस और एआई आधारित वॉइस कॉल की सुविधा शुरू की गई है। इससे किसानों को उनकी अपनी भाषा में सीधे मोबाइल पर आवश्यक सूचनाएं दी जा रही हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रमुख विशेषताएँ डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) में खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी दर्ज की जाती है। सर्वे डेटा का एआई एल्गोरिदम से क्रॉस-वेरिफिकेशन कर डेटा की शुद्धता सुनिश्चित की जा रही है।सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें पटवारी स्तर पर जांच और विभिन्न विभागों द्वारा डेटा का उपयोग शामिल है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थान पर पहुंचकर ही प्रारंभ हो।इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी सर्वे के दौरान ली गई तस्वीरों की प्रामाणिकता और सही लोकेशन का सत्यापन प्रणाली द्वारा किया जाता है। साथ ही सर्वे को निर्धारित समयावधि से जोड़ा गया है, जिससे मोबाइल समय में छेड़छाड़ होने पर प्रणाली स्वतः सर्वे को रोक देती है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा आधारित निर्णय लेने में भी यह प्रणाली सहायक सिद्ध हो रही है। डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग से मध्यप्रदेश में कृषि प्रबंधन अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और किसान हितैषी बन रहा है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। 

मजबूत कर-संग्रह और बढ़ते पूंजीगत निवेश से सुदृढ़ हुई राज्य की वित्तीय स्थिति

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई गति मिली है और निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है। मध्यप्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नीति आयोग द्वारा जारी दूसरी वार्षिक “Fiscal Health Index 2026” रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। फिस्कल हेल्थ इंडेक्स राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का व्यापक और तुलनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करता है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा। वर्तमान में पूंजीगत व्यय राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राज्य में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं जैसी अधोसंरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 57,348 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान में 74,662 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक है और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में राज्य के कर राजस्व में 62.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें स्टेट जीएसटी, व्यापार एवं बिक्री कर तथा राज्य आबकारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही पेंशन और ब्याज देनदारियों में वृद्धि के कारण प्रतिबद्ध व्यय कुल राजस्व व्यय का 43 प्रतिशत से अधिक हो गया है। राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय पर लगातार ध्यान बनाए रखा है, जो पिछले 5 वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य का ऋण स्तर अभी भी वैधानिक सीमाओं में है, जो वित्तीय अनुशासन और संतुलित राजकोषीय प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत राजस्व आधार और अधोसंरचना में बढ़ते निवेश से मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि को दीर्घकालिक गति मिल सकती है और राज्य निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है। 

भारत-ईरान संवाद जारी: जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से तीन बार की बातचीत, जहाजों की सुरक्षा पर चिंता

नई दिल्ली   ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल संकट पैदा हो गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से किसी भी कार्गो जहाज को जाने से मनाही है, जिसकी वजह से कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ा है। इस बीच, भारत सरकार ने बताया है कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की पिछले कुछ दिनों में ईरानी विदेश मंत्री के साथ तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी बातचीत में शिपिंग (जहाजों) की सुरक्षा और भारत में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इसके अलावा, इस मामले में मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इससे पहले, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच, भारत सरकार ने बुधवार को कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान एक पोत पर हुए हमले में दो भारतीयों की मौत हो गई और एक लापता हो गया। उन्होंने कहा, ”प्रवासी समुदाय की सुरक्षा और कल्याण हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इजराइल समेत क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है, वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन देशों के साथ-साथ ईरान के अपने समकक्षों के साथ नियमित संपर्क में हैं। जायसवाल ने कहा, ”हम अपने नागरिकों, जीसीसी और पश्चिम एशियाई देशों में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस क्षेत्र में हमारे सभी मिशन समुदाय के सदस्यों के साथ नियमित संपर्क में हैं।” उन्होंने कहा कि वाणज्यिक जहाजों से जुड़ी घटनाओं में दो भारतीयों की मौत हो गई है और एक लापता है। जायसवाल ने कहा, ”जीसीसी क्षेत्र में घायल हुए कुछ अन्य भारतीयों की देखभाल की जा रही है। उनका इलाज जारी है और हमारा दूतावास और वाणिज्य दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ लगातार संपर्क में हैं।” उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों से जुड़ी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और भारतीय दूतावास प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में भारत के लगभग एक करोड़ नागरिक रहते हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता बनी हुई है।  

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी चलाएं अभियान की गतिविधियां 19 मार्च से प्रारंभ होगा प्रदेश व्यापी अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष “वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण” ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम “परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश” के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

‘सुबह ट्रंप, दोपहर पुतिन, शाम जिनपिंग…’ राहुल पर निशिकांत दुबे का कटाक्ष, विदेश नीति को लेकर साधा निशाना

नई दिल्ली भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर एक बार फिर से निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि राहुल चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह, दोपहर और शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को गाली दें। इसी से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। निशिकांत दुबे ने कहा, ”इस देश में समस्या है कि विकसित भारत 2047 कैसे बनेगा, देश का विकास कैसे होगा। प्रधानमंत्री उसी के लिए पूरे देश को मिशन मोड में ले जा रहे हैं। लेकिन गांधी परिवार का जो इतिहास रहा है, श्रीलंका में लड़ाई चल रही थी, उसमें भारतीय सेना को राजीव गांधी जबरदस्ती ले गए और उसका नतीजा यह रहा कि विदेश में पहली बार वहां के सैनिकों ने हमारे प्रधानमंत्री पर हमला किया।” उन्होंने आगे कहा, ”राहुल गांधी के पूरे साल दो साल के बयान हैं, उसको सुनिए। वे चाहते हैं कि पीएम मोदी सुबह ट्रंप को गाली दें, दोपहर में पुतिन को गाली दें और शाम को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को गाली दें। इन तीनों को गाली देने के बाद उनकी आत्मा को शांति मिल जाएगी। उसके बाद चीन अमेरिका और रूस हमारा बॉयकॉट कर देगा और हमला कर देगा, तब उनके कलेजे को ठंडक मिलेगी। क्योंकि सोरोस का जो एजेंडा है, भारत को तोड़ने का, वह सफल हो जाएंगे।” एलपीजी की अनुपलब्धता पर चल रही बहस का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जहां कई पड़ोसी देश इसकी कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत कहीं बेहतर स्थिति में है। उन्होंने दावा किया, ”आपको यह समझना चाहिए: पाकिस्तान लगभग चार दिन से एक तरह से बंद है। वहां लगभग 90 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हैं। बांग्लादेश में लगभग 95 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो गए हैं। श्रीलंका में लगभग 98 प्रतिशत रेस्तरां बंद हैं और वहां गाड़ियां भी नहीं चल रही हैं।” राहुल गांधी को बताया लीडर ऑफ प्रोपगेंडा इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ के बजाय ‘लीडर ऑफ प्रोपगेंडा’ करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को कहा कि राहुल गांधी को देश और मीडिया गंभीरता से नहीं लेता। लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए विपक्ष के संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए दुबे ने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो सदन में कई बार ऐसे मौके आए, जब टकराव की स्थिति बनी थी। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्षी सदस्यों को परेशान किया गया था, लेकिन भाजपा ने मौजूदा विपक्ष की तरह तुच्छ राजनीति नहीं की। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई ‘इग्नोरेंट’ (अज्ञानी) आदमी ‘ऐरोगेंस’ (अहंकार) का शिकार हो जाए तो वह ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ (एलओपी) के बजाय ‘लीडर ऑफ प्रोपगेंडा’ हो जाता है। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अब तक 95 चुनाव हार चुकी है और मीडिया तथा देश उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि वे (कांग्रेस) 12 साल से सरकार में नहीं आ पा रहे, अपने हिसाब से संस्थाओं को नहीं चला पा रहे, इसलिए ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाया है।  

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं घरेलू एलपीजी सिलेंडर : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी की सुचारू रूप से वितरण हो रहा है। इनकी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है एवं लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। आयुक्त खाद्य  कर्मवीर शर्मा ने बताया है कि वाणिज्यिक एलपीजी गैस उपयोग के लिए शैक्षणिक संस्थान एवं चिकित्सकीय संस्थान को छूट दी गई है, जो जारी रहेगी, जिससे शैक्षणिक गतिविधि एवं चिकित्सकीय व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रह सके। एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी रोकने के लिए जिलों को निर्देश दिये गये हैं। जिलों द्वारा इस क्षेत्र में लगातार कार्यवाही की जा रही है। एलपीजी के वैकल्पिक साधनों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही ऐसी गतिविधियों, जिनमें एलपीजी का अधिक उपयोग होता है, उन्हें नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। 

जीपीएफ संबंधी समस्या के निराकरण के लिए जबलपुर में लगेगा 16 मार्च को शिविर

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की विभिन्न उत्तरवर्ती कंपनियों से सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के सामान्य भविष्यनिधि भुगतान या अंतिम या अनंतिम आहरण आदि से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के संबंध में एक शिविर का आयोजन 16 मार्च को किया गया है। शिविर का आयोजन विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्तिभवन जबलपुर में स्थित केन्द्रीय पुस्तकालय में प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होगा। शिविर में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व कार्मिकों द्वारा सामान्य भविष्यनिधि के अंतिम भुगतान की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण और जीपीएफ पार्ट फाइनल एवं ऋण (लोन) आहरण के प्रकरण की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। कंपनी ने समस्त उत्तरवर्ती विद्युत कंपनियों के कार्मिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस शिविर का लाभ उठायें।  

पापमोचनी एकादशी 2026: व्रत के दिन इन भूलों से बचें, नहीं तो नहीं मिलेगा व्रत का लाभ

चैत्र का महीना चल रहा है. इस माह में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं. इन्हीं में शामिल है पापमोचनी एकादशी का व्रत. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. ये व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. साथ ही व्रत किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पापमोचनी एकदाशी का व्रत करने से जाने अनजाने में किए गए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है, लेकिन अगर इस व्रत के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो इसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता. यही कारण है इस एकादशी के नियमों का कठोरता से पालन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पापमोचनी एकादशी के दिन कौन सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए? कब है पापमोचनी एकादशी? दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा. व्रत का पारण 16 मार्च को सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 9 बजकर 18 मिनट के बीच किया जा सकता है. पापमोचनी एकादशी के दिन न करें ये गलतियां चावल खाना: एकादशी के दिन चावल खाना मना है. पौराणिक कथाओं में चावल का संबंध रेंगने वाले जीव से बताया गया है. मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से चंचलता बढ़ती है और व्रत का सात्विक प्रभाव कम होता है. क्रोध और वाद-विवाद: इस दिन किसी पर क्रोध करने, अपशब्द बोलने या किसी की बुराई करने से बचें. ऐसा करने से संचित पुण्य नष्ट हो जाते हैं. तुलसी तोड़ना: एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित होता है. ऐसे में पूजा के लिए तुलसी एकादशी के एक दिन पहले तोड़कर रख लें. दिन में सोना: व्रत के दौरान दिन में सोने से बचें. क्योंकि इससे व्रत का प्रभाव कम होता है. इसके बजाय इस समय भगवत गीता का पाठ या मंत्र जाप करें. तामसिक भोजन: पापमोचनी एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें.

OBC आरक्षण मामला: क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ आय को आधार नहीं बना सकते – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के क्रीमी लेयर में होने या न होने का निर्धारण केवल उसकी पारिवारिक आय के आधार पर नहीं किया जा सकता है। पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “पदों की श्रेणियों और स्टेटस मापदंडों का संदर्भ लिए बिना, केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर का दर्जा तय करना कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।” अदालत का मानना है कि आय के साथ-साथ व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक पद को भी ध्यान में रखा जाना अनिवार्य है। क्या है क्रीमी लेयर की अवधारणा? क्रीमी लेयर शब्द का प्रयोग ओबीसी समुदाय के उन लोगों के लिए किया जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी समृद्ध हो चुके हैं। आरक्षण का लाभ इस वर्ग को न मिलकर समुदाय के उन गरीब और पिछड़े लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तव में आवश्यकता है। इस अवधारणा की शुरुआत 1992 के प्रसिद्ध इंद्रा सहनी बनाम भारत सरकार मामले के बाद हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को तो बरकरार रखा था, लेकिन संपन्न तबके को इससे बाहर रखने का आदेश दिया था। इसके बाद 1993 में सरकार ने इसे लागू करने के नियम बनाए थे। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी ओबीसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है तो उसे क्रीमी लेयर में माना जाता है। ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के हकदार नहीं होते। आय की यह सीमा आखिरी बार 2017 में 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी। आय के अलावा उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों और बड़े व्यवसायियों के बच्चों को भी क्रीमी लेयर की श्रेणी में रखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से सरकार पर क्रीमी लेयर की पहचान करने वाले 1993 के नियमों की समीक्षा करने का दबाव बढ़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया है कि केवल पैसे को पैमाना मान लेना सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्यों के खिलाफ हो सकता है। उदाहरण के लिए एक कम वेतन पाने वाला व्यक्ति भी अगर ऊंचे प्रशासनिक पद पर है तो उसकी सामाजिक स्थिति एक अमीर व्यापारी से भिन्न हो सकती है।  

सरकारी नौकरी का मौका: एमपी में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के पदों पर भर्ती शुरू

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। बोर्ड ने ‘ग्रुप-5’ के तहत पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में 291 रिक्त पदों को भरा जाएगा। भर्ती का विवरण और पद नोटिफिकेशन के तहत स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) और अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है जो चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहते हैं। पदों की संख्या और आरक्षण का विवरण आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिया गया है, जिसे उम्मीदवार बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता मानदंड) शैक्षणिक योग्यता: आवेदक ने संबंधित विषय में 12वीं (साइंस स्ट्रीम) पास की हो। इसके साथ ही, पद के अनुसार संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा या डिग्री (जैसे- GNM, B.Sc Nursing, B.Pharma, या लैब टेक्नोलॉजी डिप्लोमा) होना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवार का मध्य प्रदेश के संबंधित काउंसिल (जैसे- नर्सिंग या फार्मेसी काउंसिल) में रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। आयु सीमा: आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश के मूल निवासी आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) और महिलाओं को सरकारी नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके। भर्ती के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू होगी। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 मार्च 2026 है। आवेदन शुल्क सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/दिव्यांग) के लिए यह 250 रुपये है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल शुल्क का भुगतान भी करना होगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा के आधार पर होगा। परीक्षा में दो भाग होंगे। सामान्य भाग में सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और रगजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।तकनीकी भाग उम्मीदवार के संबंधित विषय (जिस पद के लिए आवेदन किया है) पर आधारित होगा। परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और अन्य जिला केंद्रों पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें?     सबसे पहले MPESB की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं। 2. ‘Online Form’ सेक्शन में जाकर ‘Group-5 Paramedical & Nursing Recruitment 2026’ के लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन (MP Online Profile) पूरा करें। 4. आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करें। 5. आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

औषधीय खेती को बढ़ावा, बस्तर–सरगुजा में योजनाओं के विस्तार की घोषणा : विकास मरकाम

रायपुर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक सम्पन्न छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक का आयोजन 12 मार्च को बोर्ड कार्यालय के सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने की। बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कहा कि वन मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि बोर्ड और शासन की योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय वैद्यों के स्थायी पंजीकरण के लिए भी आवश्यक प्रयास करने को कहा।     बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला ने बैठक में कहा कि औषधीय पौधों का क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि हमारा सपना है कि बस्तर औषधीय पौधों के माध्यम से दुनिया के समृद्ध क्षेत्रों में शामिल हो। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं और गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों का रोपण, औषधीय पौधों की खेती (कृषिकरण) तथा विभिन्न नवाचार कार्यों की जानकारी दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने आश्वस्त किया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर बस्तर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बस्तर क्षेत्र में पहले से लगाए गए पाम और नीलगिरी के प्लांटेशन में औषधीय पौधों की मल्टी- क्रॉपिंग के माध्यम से कार्य किया जाएगा। बैठक में नारायण संकल्प फाउंडेशन रायपुर की मती सीमा गुप्ता, एन.डी. मेमोरियल फाउंडेशन दुर्ग के  शालीभद्र मुथा, क्रिस्टल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसायटी की मती रीनू छाबड़ा सहित बोर्ड की योजनाओं से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा बोर्ड के तकनीकी सलाहकार और कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।

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