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कानपुर का चौंकाने वाला मामला: पत्नी ने कहा – “मेरे साथ फ्रॉड हुआ, पति नपुंसक”

कानपुर .कानपुर के किशोर नगर की रहने वाली एक युवती ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. युवती का कहना है कि उसकी शादी 25 अप्रैल 2025 को हमीरपुर निवासी युवक से पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ हुई थी. उसके पिता ने होटल, जेवर, कैटरिंग और अन्य इंतजाम मिलाकर करीब 38 लाख रुपये खर्च किए थे. परिवार को उम्मीद थी कि बेटी की नई जिंदगी खुशहाल होगी, लेकिन शादी के बाद हालात बिल्कुल उलट निकले. पत्नी ने कहा, ‘मैंने पति से सुहागरात के लिए कई बार कहा लेकिन वो हमेशा टालता रहा. बाद में मुझे पता चला कि वो नपुंसक है. मेरे साथ फ्रॉड हुआ है.’  पति ने दूरी बनाए रखी पीड़िता के मुताबिक, 26 अप्रैल को वह विदा होकर ससुराल पहुंची. शादी के बाद के शुरुआती चार दिनों में ही उसे पति के व्यवहार पर संदेह होने लगा. उसका आरोप है कि पति ने उससे दूरी बनाए रखी और सुहागरात तक नहीं मनाई. उसने कई बार इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन हर बार पति ने टालमटोल कर दी. कुछ दिनों बाद वह मायके आ गई. फिर पति उसे नोएडा ले गया, जहां उसे अपने बड़े चाचा के फ्लैट में रखा गया. युवती का कहना है कि वहां करीब एक महीने तक साथ रहने के बावजूद पति ने उससे शारीरिक संबंध नहीं बनाए. इसी दौरान उसे शक हुआ कि पति शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है. धमकियां देने का आरोप जब उसने इस बारे में ससुर और उनके बड़े भाई से बात की तो, उसके मुताबिक, पहले उसे समझाने और इलाज कराने का भरोसा दिया गया. आरोप है कि उससे कहा गया कि वह बेटे के साथ पत्नी की तरह रहे, इलाज करवा दिया जाएगा और पूरा खर्च उठाया जाएगा. लेकिन जब उसने अपनी आपत्ति जताई तो उसे कथित तौर पर धमकियां दी जाने लगीं. पांच लाख लाने को कहा गया पीड़िता का यह भी आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये और लाने को कहा गया ताकि इलाज कराया जा सके. मना करने पर उसे बदनाम करने और परिवार की इज्जत खराब करने की धमकी दी गई. युवती का कहना है कि ससुराल पक्ष ने न सिर्फ बेटे की सच्चाई छिपाई, बल्कि शादी में खर्च हुआ पैसा भी व्यर्थ कर दिया और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. मामला दर्ज हुआ आखिरकार परेशान होकर युवती अपने पिता के घर लौट आई और कानपुर के रावतपुर थाने में पति, ससुर और ताऊ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. थाना प्रभारी कमलेश राय के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और एक टीम हमीरपुर भेजी जाएगी. वहीं, लड़की के परिवार का कहना है कि वे फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन उन्हें न्याय की उम्मीद है. इस पूरे मामले ने एक बार फिर शादी से पहले जरूरी जानकारियां छिपाने और पारिवारिक दबाव के मुद्दे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है।            छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की  रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं। बिहान से मिली आर्थिक तरक्की की राह    रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।        रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।       आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

यूपी सरकार की बड़ी योजना: 69 किमी लंबी फोरलेन सड़क से 3 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

लखनऊ   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े तीन जिलों को राहत देने वाली 69 किलोमीटर लंबी नई फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है। यह राजमार्ग लखनऊ के चिनहट क्षेत्र से शुरू होकर बाराबंकी, सीतापुर और आगे बहराइच तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की महत्वाकांक्षी एनएच-727 योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से चहलारी घाट (बहराइच) तक निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। यातायात दबाव होगा कम यह हाईवे कुर्सी रोड और अयोध्या-लखनऊ किसान पथ से जुड़कर सीतापुर, लखीमपुर और बहराइच की ओर जाने वाले यातायात का दबाव कम करेगा। औद्योगिक क्षेत्र देवा और तहसील फतेहपुर को जोड़ते हुए यह मार्ग सीतापुर के महमूदाबाद और घाघरा तटवर्ती क्षेत्रों तक आवागमन को सुगम बनाएगा। री परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। परियोजना का तीन चरणों में होगा निर्माण     देवा से फतेहपुर (20 किमी)     इस खंड के निर्माण पर लगभग 660 करोड़ रुपये खर्च होंगे।     मार्ग सलारपुर, विशुनपुर, इसरौली, बसारा और रसूलपुर पनाह औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरेगा।     करीब 16 गांव सीधे इस फोरलेन से जुड़ेंगे। अब तक 85 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है और 2,000 से अधिक किसानों को मुआवजा प्रक्रिया से जोड़ा गया है।     फतेहपुर से महमूदाबाद (22 किमी)     इस हिस्से के फोरलेन निर्माण से सीतापुर तक सीधा और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा।     चिनहट से देवा व कुर्सी मार्ग (27.35 किमी) इस खंड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर 468.48 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह मार्ग किसान पथ से जुड़कर लखनऊ से सीधा संपर्क स्थापित करेगा। बाइपास और पुलों का निर्माण परियोजना में तीन नगरों के लिए बहुउद्देशीय बाइपास शामिल हैं, विशुनपुर में 2 किमी लंबा बाइपास, फतेहपुर में लगभग 3 किमी लंबा बाइपास, देवा में भी बाइपास का निर्माण प्रस्तावित है। इन बाइपास से रेलवे क्रॉसिंग और बाजार क्षेत्रों में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। साथ ही, कल्याणी नदी और शारदा सहायक नहर पर चार नए पुलों सहित कुल सात पुलों का निर्माण किया जाएगा। ये सभी प्रावधान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में शामिल हैं। क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा परियोजना पूरी होने के बाद लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर के बीच आवागमन तेज़ और सुविधाजनक होगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

रणनीति और समीकरण साधने की कवायद: यूपी में भाजपा की चुनावी तैयारी, योगी सरकार में बदलाव के संकेत

लखनऊ प्रदेश में राजनीतिक पदचापों की ध्वनि दूर तक पहुंचने लगी है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कई अहम विषयों को छेड़ते हुए प्रदेश को मथा, वहीं अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के सभी छह क्षेत्रों में समन्वय बैठकों में पहुंच रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अब ‘ट्रिपल एस’ यानी सरकार, संगठन और संघ के मॉडल पर चुनावी तार को कसा जा रहा है। पार्टी अंदरूनी घमासान, यूजीसी एवं जातीय उबाल से होने वाले नुकसान से निपटने की रणनीति बना रही, वहीं नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की कसरत भी तेज की गई है। सरकार, संघ और भाजपा की प्रदेश स्तर पर समन्वय बैठक नियमित अंतराल पर होती रहती है, जिसमें सरकार के कार्यों के साथ ही अनुषांगिक संगठनों के अभियानों एवं आगामी कार्यक्रमों की चर्चा होती है, साथ ही जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बढ़ाने पर जोर दिया जाता ह, लेकिन अब पार्टी के सभी छह क्षेत्रों में बैठकें हो रही हैं। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ ही योगी भी पहुंच रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श 28 फरवरी को लखनऊ में आयोजित बैठक में योगी, पंकज, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ ही संघ के सभी बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। एक मार्च को वाराणसी और दो मार्च को गोरखपुर क्षेत्र में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श हुआ। होली के बाद पांच मार्च को पश्चिम क्षेत्र की समन्वय बैठक गाजियाबाद, छह मार्च को कानपुर और सात को ब्रज क्षेत्र की बैठक आगरा में होगी। समन्वय बैठकों की टाइमिंग विशेष रूप से बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है। खासकर, ऐसे समय में जब प्रदेश संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव करने के साथ ही योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चा तेज है। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी का कहना है कि सप्ताहभर में गाजियाबाद, कानपुर एवं आगरा में समन्वय बैठक होगी। इन बैठकों में प्रमुख मुद्दों के साथ ही क्षेत्रीय स्तर के विषयों पर भी स्वाभाविक तौर पर चर्चा होगी।  

प्रयागराज में पशुओं के लिए यूनिक आधार प्रणाली, पोर्टल पर उपलब्ध होंगे स्वास्थ्य रिकार्ड

प्रयागराज  पशुपालन विभाग नए कलेवर में आ रहा है। विभाग ने नेशनल डिजिटल लाइव स्टाक मिशन (एनडीएलएम) पोर्टल पर पशुओं व उनके पालकों का विवरण अपलोड करने की योजना शुरू की है। पशुओं को 12 अंकों का यूनिक आधार (पशु आधार) दिया जाएगा। डिजिटल रिकार्ड में पशुपालक का विवरण, टीकाकरण, नस्ल सुधार और बीमारी की स्थिति दर्ज होगी। मवेशियों के नस्ल लेकर पशु का स्वास्थ्य रिकार्ड होगा इस डाटा फीडिंग की नियमित निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य पशुओं का डिजिटल डेटा बेस तैयार करना है। इस पोर्टल पर पशुधन की संख्या, पशुपालकों का आधार, मोबाइल नंबर व जन्म-मृत्यु का ब्योरा मिलेगा। मवेशियों के नस्ल लेकर पशु का स्वास्थ्य रिकार्ड, टीकाकरण की तारीख, उम्र और इलाज का इतिहास अब आनलाइन होगा। खास-खास – 12 अंकों का पशु आधार बनेगा, मवेशियों व उनके पालकों का भी बनेगा डेटा बेस – 14 लाख के करीब जनपद में दुधारू पशु, जिनमें गाय-भैंस, बकरी व भेड़ अधिक पूरा ब्योरा एनडीएलएम पोर्टल पर अपलोड होगा पशु की सेहत कैसी है, वह बीमार तो नहीं। कब उसका गर्भाधान कराया गया और कब कौन टीका लगा। एक-एक पशु का यह पूरा ब्योरा एनडीएलएम पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे बीमारी की पहचान जल्दी होती है और समय पर उपचार संभव होगा। शासन के फरमान पर विभाग ने कवायद तेज कर दी है। विभाग के कामकाज को धीरे-धीरे डिजिटाइज्ड किया जा रहा है। पशुधन प्रबंधन, स्वास्थ्य व उत्पादकता में सुधार को प्रयास सरकारी स्थायी व अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों पर हो रहे खर्च से लेकर भुगतान तक की आनलाइन निगरानी की व्यवस्था पहले से ही है। हर पशु की एक-एक जानकारी को विभागीय पोर्टल में समेटने की तैयारी है। पशुधन प्रबंधन, स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार को यह प्रयास हो रहा है। पशुओं का स्वास्थ्य रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा पशुओं का तैयार होने वाला पशु आधार स्वास्थ्य रिकार्ड, टीकाकरण इतिहास, प्रजनन डिटेल और प्रोडक्शन मेट्रिक्स को साथ जोड़ेगा। इससे पशुओं की पहचान, बीमारियों का प्रबंधन और स्वास्थ्य रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा। क्या कहते हैं सीवीओ? सीवीओ डाॅ. शिवनाथ यादव का कहना है कि इसके लिए जनपद की कमेटी गठित कर ली गई है, जिसमें डीएम मनीष कुमार वर्मा अध्यक्ष, सीडीओ हर्षिका सिंह सचिव व सीवीओ सदस्य सचिव हैं। ब्लाक स्तर पर एसडीएम, बीडीओ, पशु चिकित्सक की कमेटी बनाई गई है। वहीं क्लस्टर और ग्राम पंचायत स्तर पर इसी माह कमेटी गठित होगी। ग्राम पंचायतों में पशुधन प्रसार अधिकारी और दुग्ध समितियों के पदाधिकारी शामिल किए जाएंगे।    

योगी सरकार ने भर्तियों को लेकर विभागों को भेजा अहम निर्देश, आरक्षण पर विपक्ष को नहीं मिलेगा अवसर

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में भर्तियों में आरक्षितों को कम कोटा मिलने के विवाद को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी है। आरक्षित पदों की संख्या तय होने के बाद ही भर्तियां की जाएंगी। विभागों को रिक्तियों का प्रस्ताव भेजने से पहले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के पदों को स्पष्ट करना होगा। जरूरी हुआ तो इसके लिए आयोगों के साथ विभागों द्वारा बैठक भी की जाएगी, जिससे भर्तियों को लेकर कोई पेंच न फंसे। दरअसल 69000 शिक्षक भर्ती हो या लेखपाल की भर्ती यूपी की विपक्षी पार्टियों ने लगातार इसमें आरक्षण के नियमों का पालन नहीं करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे मुद्दा बनाया था। इसी वजह से मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने भी कई बार इशारों में आरक्षण को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में सरकार इस बार किसी को कोई मौका नहीं देना चाहती है। ओबीसी के कम पद का लगा था आरोप उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में भर्तियां हो रही हैं। राज्य सरकार ने भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश विद्युत सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल बनाया गया है। सबसे अधिक भर्तियां लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करता है। यूपी में पिछले कुछ भर्ती विज्ञापनों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। इसमें कहा गया है कि कुल रिक्तियों में ओबीसी के लिए कम पद तय किए जा रहे हैं। लेखपाल भर्ती को लेकर हुए था बवाल उत्तर प्रदेश में 7994 लेखपाल पदों की भर्ती में ओबीसी के लिए निर्धारित 27% आरक्षण में 1441 पद मिलने पर बड़ा बवाल हुआ था। सपा और अन्य दलों ने इसे आरक्षण में कटौती बता करारा हमला किया था। विरोध के बाद पदों की संख्या बढ़ाई गई। शासन इसीलिए चाहता है कि भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जाने से पहले पदों की गिनती पूरी तरह से कर ली जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि आरक्षण के मुताबिक पदों का बंटवारा किया गया है या नहीं। आरक्षण के पालन का निर्देश शासन की ओर से आयोगों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राज्य के अधीन सेवाओं में अनुमन्य ऊर्ध्वाधर यानी वर्टिकल और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्थाओं का मानक के अनुरूप पालन किया जाए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 में दी गई व्यवस्था को पूरी तरह से पालन किया जाएगा। साथ ही आरक्षण अधिनियम में दी गई वर्टिकल आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह से पालन किया जाएगा, जिससे कोई विवाद न होने पाए।

स्टार्टअप इकोसिस्टम से युवाओं को अवसर, ग्रामीण रोजगार को मिल रही मजबूती

156 एग्री स्टार्टअप्स से प्रदेश के किसानों को मिल रही मदद, खेती में बढ़ रहा लाभ डिजिटल प्लेटफॉर्म से गांव तक हुई पहुंच, खेती में बढ़ रही पेशेवर मार्गदर्शन की भूमिका स्टार्टअप इकोसिस्टम से युवाओं को अवसर, ग्रामीण रोजगार को मिल रही मजबूती नीतिगत समर्थन और निवेश से यूपी बन सकता है एग्री इनोवेशन का उभरता हब लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और संस्थागत समर्थन से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 156 पंजीकृत कृषि स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो किसानों को क्रेडिट सुविधा, सलाहकार सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध करा रहे हैं। इन पहलों से योगी सरकार में खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार हुआ है। प्रदेश सरकार ने कृषि को परंपरागत ढांचे से बाहर निकालकर तकनीक आधारित मॉडल से जोड़ने पर जोर दिया है। स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने, फसल प्रबंधन संबंधी परामर्श देने और बाजार से सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिल रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निर्भरता पारंपरिक साहूकारी व्यवस्था पर कम हुई है तथा उन्हें पारदर्शी वित्तीय सेवाएं मिल रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना की पहुंच को आसान बनाया है। मौसम पूर्वानुमान, फसल चयन, बीज और उर्वरक संबंधी सलाह अब मोबाइल एप और कॉल सेंटर के माध्यम से उपलब्ध हो रही है। इससे उत्पादन लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि की संभावना बढ़ी है। प्रदेश सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित हस्तक्षेप से कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी। सरकार की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और कृषि को आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी कदम आगे बढ़े हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश को एग्री इनोवेशन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर कार्य जारी है। कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि क्रेडिट, बाजार संपर्क और तकनीकी परामर्श की यह श्रृंखला मजबूत होती रही तो उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि जोखिम कम करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। 156 कृषि स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी को इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीएम मुद्रा योजना से मिला लोन, खुद सशक्त बनीं और पांच अन्य लोगों को दिया रोजगार

डबल इंजन सरकार ने बनाया मनीषा रावत को चॉकलेट निर्माता योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत स्थानीय प्रशासन से मिला मार्गदर्शन व पूरा सहयोग पीएम मुद्रा योजना से मिला लोन, खुद सशक्त बनीं और पांच अन्य लोगों को दिया रोजगार लखनऊ उत्तर प्रदेश के रायबरेली की रहने वाली मनीषा रावत की जिंदगी में डबल इंजन की सरकार ने नए रंग भर दिए। मनीषा ने पीएम मुद्रा योजना के माध्यम से ऋण प्राप्त कर चॉकलेट बनाने का अपना व्यवसाय शुरू किया, जिसमें योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत स्थानीय प्रशासन ने सहयोग के साथ-साथ उन्हें उचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया। इस पहल ने मनीषा की जिंदगी की दिशा बदल दी और वह आज पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अब वह न केवल स्वयं सम्मानजनक आमदनी कर रही हैं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। मनीषा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। बिना गारंटी लोन से बदली जिंदगी की दिशा मनीषा रावत ने वर्ष 2023 में हैंडमेड चॉकलेट बनाने का छोटा व्यवसाय शुरू किया था। बाजार में उनके हैंडमेड चॉकलेट व बेकरी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने लगी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता हुई। पहले वह यह काम घर से ही करती थीं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपनी केक और चॉकलेट की शॉप खोलने का निर्णय लिया। लेकिन, गारंटी व मॉरगेज जैसी कई अड़चनें सामने थीं। अक्टूबर 2024 में उन्हें पीएम मुद्रा योजना के बारे में पता चला। इसके बाद उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मैनेजर अर्जुन निगम ने उन्हें योजना के लाभ व पात्रता आदि की विस्तृत जानकारी दी। उन्हें बिजनेस मॉडल की बारीकियां भी समझाई गईं। आवश्यक दस्तावेज तैयार कर डीआईसी कार्यालय में जमा करने के 20 दिनों के भीतर ही उन्हें 9 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हो गया। खुद सशक्त बनीं, 5 लोगों को दिया रोजगार लोन स्वीकृत होते ही मनीषा ने अपने कारोबार का विस्तार किया। बढ़ते व्यवसाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार देना शुरू किया और आज 5 लोगों को नियमित रोजगार प्रदान कर रही हैं। पहले वह परिवार पर निर्भर थीं, लेकिन अब एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनका चॉकलेट व्यवसाय अच्छी तरह चल रहा है और इसका श्रेय वह अधिकारियों के प्रोत्साहन व इस योजना को देती हैं। उन्होंने अन्य लोगों को भी इस योजना के प्रति जागरूक किया है। डबल इंजन सरकार की योजनाओं से युवाओं को नई राह डबल इंजन की सरकार युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह केवल ऋण योजना नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के लिए व्यवसाय शुरू करने का प्रभावी माध्यम है। मनीषा बताती हैं कि इस योजना के तहत मिले ऋण की ब्याज दर कम है और गारंटर की आवश्यकता भी नहीं होती, जिससे उन्हें किस्त चुकाने में सुविधा हो रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर अप्रैल माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर से 48 सफल उद्यमियों को अपने आवास पर आमंत्रित किया था, जिनमें रायबरेली की मनीषा रावत भी शामिल थीं। इस मुलाकात को याद करते हुए वह कहती हैं कि वह पीएम मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं और युवाओं के लिए सच्चा मार्गदर्शक मानती हैं।

प्रदेश में पांव पसार रही गर्मी, फतेहपुर रहा सबसे गर्म शहर, कई जिलों में पारा 33 पार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में दिन चढ़ने के साथ धूप में तल्खी महसूस की जा रही है। प्रदेश में गर्मी की दस्तक और तापमान में बढ़ोतरी के संकेत साफ नजर आने लगे हैं।  34.8 डिग्री अधिकतम तापामान के साथ झांसी प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं फतेहपुर में 34.6 डिग्री, वाराणसी में 33.6 डिग्री, हमीरपुर में 33.2 डिग्री और आगरा में 33 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। इसके साथ ही प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।  साथ ही  फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई हिस्सों में करीब 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रूखी पछुआ हवा चली, जिसे स्थानीय भाषा में फगुनहट कहा जाता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मंगलवार से हवा की रफ्तार 35 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। अगले सप्ताह अधिकतम तापमान में लगभग तीन डिग्री तक वृद्धि की संभावना है, जिससे गर्मी और बढ़ेगी। पछुआ के थमते ही तेजी से चढ़ेगा पारा  राजधानी में दिन चढ़ते ही चिलचिलाती धूप ने लोगों को परेशान किया। सोमवार को फाल्गुन की पूर्णिमा पर दिन भर 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली रूखी पछुआ हवाएं चलीं। मौसम विभाग का अनुमान है कि मंगलवार को पछुआ हवाओं की रफ्तार 35 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं। इन हवाओं के थमते ही तापमान में तेजी से बढ़त देखने को मिलेगी। गर्मी और तीखी महसूस होगी। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, अब दिन और रात, दोनों के तापमान में क्रमिक बढ़ोतरी की संभावना है। सोमवार को अधिकतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 1.4 डिग्री की गिरावट के साथ 14.6 डिग्री सेल्सियस रहा।  

सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे

सर्वोत्तम के साथ यूपी को ‘हरित प्रदेश’ बनाने में जुटी योगी सरकार इस वर्ष भी प्रदेश में लगेंगे 35 करोड़ पौधे, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण  सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे गांवों में लग रही ग्रीन चौपाल,  15 हजार से अधिक गांवों में हुआ आयोजन  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक तरफ प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाया तो वहीं यूपी की पहचान ‘हरित प्रदेश’ के रूप में भी बन रही है। 9 वर्ष में यहां 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए। उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। पिछले वर्ष सिर्फ एक दिन (9 जुलाई) को ही 37.21 करोड़ पौधे लगाए गए। यही नहीं, रविवार को वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा। योगी सरकार 2026 में भी 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है।  9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक लगे पौधे, यूपी का वनाच्छादन भी बढ़ा  2017 में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने खुद यूपी की हरियाली की चिंता की। 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण अभियान के पहले वे खुद कई बार इसकी मीटिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी का वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट- 2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और उनके अभिभावकों को लकड़ी, फल व सहजन आदि प्रजातियों के पौधे भी प्रदान किए। एक पेड़ मां के नाम अभियान में सराहनीय कार्य को लेकर पीएम मोदी ने भी बधाई दी थी।  ‘योगी के यूपी’ ने चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  ‘योगी के यूपी’ ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन से यह रिकॉर्ड संभव हो सका। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। हाल में प्रस्तुत किए गए बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित कर रही ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 15000 से अधिक गांवों में चौपाल का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपाल ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही है। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।

1090 करोड़ रुपये का निवेश उत्तर प्रदेश में शिशु देखभाल पर, मृत्यु दर घटाने पर जोर

गाजियाबाद गाजियाबाद समेत प्रदेश के 75 जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के संचालन एवं शिशु देखभाल पर 1090 करोड़ खर्च होंगे।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ.पिंकी जोवल ने पहली बार बच्चों की देखभाल के लिये भारी भरकम बजट आवंटित करने के साथ ही इसको खर्च करने के लिये सख्त निर्देश जारी किये हैं। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बजट आवंटन संबंधी पत्र के मिलने की पुष्टि की है। गाजियाबाद समेत सभी जिलों के सीएमओ को भेजे गये पत्र में निर्देश दिये गये हैं कि आवंटित धनराशि का उपयोग वित्तीय नियमों के तहत किया जाये। प्रत्येक भुगतान एफएएमएस एवं एसएनए स्पर्श पोर्टल का प्रयोग करते हुए ससमय नियमानुसार व्यय एवं भुगतान किया जाये। स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख का बजट मेरठ मंडल स्तर पर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। एसएनसीयू को बेहतर तरीके से संचालित करने, नये उपकरण लगाने एवं मेंटेनेंस के लिये भी बजट दिया गया है। जिला महिला अस्पताल में 18 बेड के एसएनसीयू, संयुक्त अस्पताल के पीकू-नीकू वार्ड में मेडिकल संसाधन बढ़ाने और छह सीएचसी में अत्याधुनिक नर्सरी बनाने को भी धनराशि दी गई है। शिशुओं की देखभाल में लगे चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिलाने का भी रोस्टर जारी किया गया है।शिशु मृत्यु दर को कम करने और आरबीएसके को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिये यह धनराशि आवंटित की गई है। बता दें कि जिले में हर साल 40 से अधिक शिशुओं की मौत नर्सरी में उपचार के दौरान हो रही है।घर पर होने वाली मौत का डाटा अलग है। अकेले जिला महिला अस्पाल में संचालित एसएनसीयू में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भर्ती होने वाले 1233 बच्चों में से 29 बच्चों की मौत हुई है। यह रिपोर्ट 28 फरवरी को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखी गई। जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखी गई जिला महिला अस्पताल में शिशु मृत्यु की रिपोर्ट माह     शिशु मृत्यु अप्रैल     3 मई     2 जून     2 जुलाई     10 अगस्त     3 सितंबर     2 नवंबर     4 दिसंबर     0 जनवरी 2026     3  

श्री होलिकोत्सव समिति व आरएसएस के बैनर तले बुधवार सुबह घंटाघर से निकलेगी शोभायात्रा

सीएम योगी के साथ खास होगा गोरखपुर का रंगोत्सव होलिकोत्सव पर भगवान नृसिंह की शोभायात्रा में शामिल होंगे गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री होलिकोत्सव समिति व आरएसएस के बैनर तले बुधवार सुबह घंटाघर से निकलेगी शोभायात्रा भक्ति की उमंग में सामाजिक समरसता के रंग से सराबोर होगी शोभायात्रा गोरखपुर  भक्ति की शक्ति की प्रतिष्ठा, भेदभाव भुलाकर सबको गले लगाने और समृद्ध सनातन संस्कृति के उत्सव पर्व होली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर मौजूदगी गोरखपुर के रंगोत्सव को बेहद खास बनाती है। सीएम योगी के संग भक्ति की उमंग में यहां सामाजिक समरसता के रंग बरसते हैं। इसका माध्यम होती है घंटाघर से श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बैनर तले निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा। दशकों से जारी इस परंपरा का निर्वाह करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में बुधवार सुबह इस शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे। गोरक्षपीठ के नेतृत्व वाला रंगोत्सव सामाजिक संदेश के ध्येय से काफी खास है। सामाजिक समरसता का स्नेह बांटने के लिए ही गोरक्षपीठाधीश्वर दशकों से होलिकोत्सव भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में शामिल होते रहे हैं। 1996 से 2019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व करने वाले योगी आदित्यनाथ वर्ष 2020 और 2021 के होलिकोत्सव में लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए इसमें शामिल नहीं हुए थे। कोरोना प्रबंधन का पूरी दुनिया में लोहा मनवाने और इस वैश्विक महामारी को पूरी तरह काबू में करने के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 2022 से पुनः शोभायात्रा का नेतृत्व करने लगे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान नृसिंह की शोभायात्रा सीएम योगी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता के रंगों से सराबोर होगी।  गोरखपुर में भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत अपने गोरखपुर प्रवासकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा इसके काफी पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर समाज को एकजुट करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से भी गहरा नाता जुड़ गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया। 1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी अगुवाई में न केवल गोरखपुर, बल्कि समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का विशिष्ट पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली सरीखी है और लोगों को इंतजार रहता है योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भगवान नृसिंह शोभायात्रा का। पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली शोभायात्रा में पथ नियोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता करते हैं और भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों में सराबोर होकर बिना भेदभाव सबसे शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के रंगपर्व की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन या सम्मत की राख से तिलक लगाने के साथ होगी। पीठाधीश्वर के साथ ही मंदिर के प्रधान पुजारी एवं अन्य साधु-संत भी होलिकादहन की भस्म से रंगोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मंदिर में फाग गीत भी गाए जाएंगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में होली मिलन समारोह का आयोजन भी होगा।

10.53 लाख किसानों से हुई 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद, किया गया 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान

लक्ष्य से अधिक धान खरीद योगी सरकार ने किसानों को किया 14,886 करोड़ रुपये का भुगतान  खरीफ क्रय सत्र 2025-26 में सरकार ने तय किया था 60 लाख मीट्रिक धान खरीद का लक्ष्य  10.53 लाख किसानों से हुई 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद, किया गया 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान 12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया था पंजीकरण, बीती 28 फरवरी को प्रदेश में पूरी हुई धान खरीद की प्रक्रिया पिछला रिकॉर्ड भी टूटा, 2024-25 में 57.70 लाख मीट्रिक टन हुई थी खरीद, तब भुगतान हुआ था 13370.17 करोड़ रुपये का  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए धान खरीद प्रक्रिया पूरी हो गई। इसको लेकर किसान हितैषी योगी सरकार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। धान खरीद के तय लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ दिया। योगी सरकार ने खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था। इसे पार कर 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। इसके एवज में किसानों को लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। उत्तर प्रदेश में धान खरीद प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी हो गई। यही नहीं, 2024-25 की अपेक्षा इस वर्ष अधिक खरीद व भुगतान किया गया।  62.30 लाख मीट्रिक टन धान खरीद, लगभग 14,886 करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान  प्रदेश के 4869 क्रय केंद्रों के जरिए 10.53 लाख किसानों से 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खऱीद हुई। धान की खरीद (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हुई। इसके एवज में किसानों को लगभग 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को डीबीटी के माध्यम से बैंक खातों में भुगतान किया गया। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने के साथ ही किसानों को समय से पैसा भी मिला।  12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया है पंजीकरण  धान बिक्री के लिए 12,82,892 किसानों ने पंजीकरण कराया है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित सिंगल पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों तथा हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में 31 जनवरी तक धान खरीद चली। वहीं चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर, प्रयागराज संभाग तथा लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में 28 फरवरी तक धान खरीद हुई।  योगी सरकार ने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी तोड़ा  (2025-26) इतने किसानों से हुई खरीद- 10,53,561  धान खरीद- 62,30,735.63 मीट्रिक टन भुगतान- 14,886.35 करोड़ रुपये  क्रय केंद्र- 4869 2024-25 इतने किसानों से हुई खरीद- 7,97,500 धान खरीद- 57,70,671.09 मीट्रिक टन   भुगतान- 13370.17 करोड़ रुपये क्रय केंद्र- 4372

आगरा मेट्रो: कैंट से आगरा कॉलेज तक सितंबर तक दौड़ेगी, काम की गति में तेजी

आगरा  उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन दूसरे कॉरिडोर में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक सितंबर तक मेट्रो सेवा शुरू हो जाएगी। यह कॉरिडोर दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।  उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा ने बताया कि दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनाया जा रहा है। यह दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक मेट्रो ट्रेन सेवा चलेगी। इसमें पिलर और स्टेशन बनाने का काम चल रहा है। सितंबर में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक मेट्रो ट्रेन चलने लगेगी आगरा कॉलेज से कालिंदी विहार का ट्रैक बनाने का कार्य दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। पहले कॉरिडोर की बात करें तो अप्रैल में ताज पूर्वी से आईएसबीटी तक मेट्रो ट्रेन चलने लगेगी। अभी 6 स्टेशनों पर ही मेट्रो ट्रेन चल रही है। अगले पांच स्टेशन एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी, आरबीएस और आईएसबीटी स्टेशन है। इनका काम पूरा हो गया है। डाउन लेन की पटरी बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी महीने हाईस्पीड ट्रायल करने के बाद अगले महीने में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी।  

योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी

होली में गोमाता ने रंग भरे गोपालकों व ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश भर में किया जा रहा है निर्माण लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस बार होली का उल्लास न केवल रंगों से, बल्कि गोमाता के आशीर्वाद और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन से भी सराबोर होगा। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य के विभिन्न जिलों में पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों से पारंपरिक ‘ऑर्गेनिक गुलाल’ तैयार किया जा रहा है। यह गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए नारी सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहा है। प्रकृति के रंगों से सजेगा त्योहार गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीण महिलाएं गोशाला पालकों के सहयोग से प्राकृतिक तत्वों के जरिए गुलाल का निर्माण कर रही हैं। इसमें गोबर के कंडों की राख के अलावा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों और इंडिगो (नील) जैसे तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल युक्त रंगों के मुकाबले यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और त्वचा के लिए सुरक्षित है। गोबर की राख का ‘वैज्ञानिक’ आधार इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता देशी गाय के गोबर के कंडों की राख का उपयोग है। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ‘क्षारीय तत्व’ पाए जाते हैं, जो नमी को कम कर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं। प्रसंस्करण के बाद यह राख गुलाल को एक मुलायम आधार प्रदान करती है, जिससे रंगों का फैलाव बेहतर होता है और किसी कृत्रिम फिलर की जरूरत नहीं पड़ती। प्रदेश भर में रोजगार आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया गया है। यह प्रयास न केवल होली को स्वास्थ्यकर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। गोशालाओं से प्राप्त सामग्री के उपयोग से गोवंश का संरक्षण हो रहा है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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