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जफर अली की जमानत याचिका पर सुनवाई केस डायरी उपलब्ध ना होने के कारण 4 अप्रैल तक के लिए टली

संभल संभल स्थित शाही जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली की जमानत याचिका पर सुनवाई केस डायरी उपलब्ध ना होने के कारण 4 अप्रैल तक के लिए टाल दी गई। एक वकील ने बुधवार को बताया कि शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली को 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उनकी जमानत याचिका पर पहले 27 मार्च को सुनवाई होनी थी। उस दिन चंदौसी में न्यायाधीश निर्भय नारायण राय की एडीजे-2 अदालत ने अली की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उनकी स्थायी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की थी। उन्होंने बताया कि हालांकि, केस डायरी उपलब्ध न होने के कारण मामले को अब चार अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश सैनी ने बताया कि आज की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने केस डायरी नहीं होने का हवाला देते हुए जफर अली को अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया। हालांकि, मैंने दलील दी कि उनकी अंतरिम जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है, इसलिए याचिका को फिर से खारिज किया जाना चाहिए। न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। 4 अप्रैल तक केस डायरी उपलब्ध कराई जाए और तब स्थाई जमानत याचिका पर होगी सुनवाई उन्होंने कहा कि अदालत ने अब निर्देश दिया है कि 4 अप्रैल तक केस डायरी उपलब्ध कराई जाए और तब स्थाई जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। अली को मुगलकालीन मस्जिद के न्यायालय द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के विरोध में 24 नवंबर को हुई हिंसा के संबंध में पूछताछ के बाद 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन चंदौसी की एक अदालत ने अली की जमानत याचिका खारिज कर दी और उसे दो दिन की न्यायिक हिरासत में मुरादाबाद जेल भेज दिया। अली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अली ने आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि उन्हें फंसाया गया है। 4 नवंबर को हुई हिंसा में 4 लोग मारे गए थे और कई अन्य हो गए थे घायल बताया जा रहा है कि अली के बड़े भाई ताहिर अली ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न्यायिक समिति द्वारा गवाही दर्ज किए जाने से पहले ही उनके भाई को ‘‘जानबूझकर” जेल भेज दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वेक्षण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए समिति गठित की है। 24 नवंबर को हुई हिंसा में 4 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे।

सीएम योगी बने शिक्षक: विद्यालय के लोकार्पण पर बच्चों को अनुशासन और मेहनत की दी सीख, सेल्फी भी ली

बरेली नवाबगंज क्षेत्र के अधकटा नजराना स्थित अटल आवासीय विद्यालय के लोकार्पण पर सीएम योगी का अलग अंदाज दिखा। वह स्कूली बच्चों से घुल-मिल गए। उन्हें अनुशासन और मेहनत की सीख दी। बच्चों के साथ सेल्फी भी ली। बरेली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को नवाबगंज क्षेत्र के अधकटा नजराना में 73 करोड़ की लागत से तैयार अटल आवासीय विद्यालय का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में अटल आवासीय विद्यालय बनाए जा रहे हैं। नई पीढ़ी को इन विद्यालयों से राष्ट्रवाद की शिक्षा मिलेगी। ये विद्यालय राष्ट्रभक्त तैयार करने के साथ ही राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आवासीय विद्यालय में कुछ देर के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक बन गए। उन्होंने बच्चों से सवाल किए। जवाब सुनकर मुस्कुराए और पुरस्कार में टॉफी दी। बच्चों को दुलारते हुए मेहनत करने की सीख दी। मंच पर पांच बच्चों को शैक्षिक किट दी। अभिभावकों को भी नसीहत दी। सीएम ने बच्चों संग सेल्फी भी ली।   मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में 100 अटल आवासीय विद्यालयों के निर्माण की योजना शुरू की थी। 16 विद्यालय बनकर शुरू हो गए हैं। बरेली में 17वां विद्यालय बनकर तैयार है। यहां श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा मिलेगी। अभी तक यहां के बच्चे लखनऊ में पढ़ रहे थे। इस वर्ष से छठवीं और नौवीं कक्षा के बच्चे यहां पढ़ने आ गए हैं। जो बच्चे छठवीं से सातवीं और नौवीं से दसवीं में गए हैं, उनको 15 अप्रैल को यहां शिफ्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों-अभिभावकों से दोतरफा संवाद किया। बरेली की नौवीं कक्षा की दुर्गेश कुमारी से सीएम ने पहले नाम पूछा, फिर बोले- अच्छे से पढ़ाई करना। दुर्गेश ने अपने जवाब से सीएम को आश्वस्त किया। बदायूं के अंशदेव गौतम ने सीएम से कहा कि उन्हें यहां का वातावरण बहुत अच्छा लगा। बदायूं के ही शिवांश ने बताया कि सीएम ने नाम-पता पूछने के साथ ही कक्षा की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से कहा कि सरकार पर विश्वास रखें। बच्चों को बार-बार घर न बुलाएं। बच्चों से कहा कि अनुशासन में रहिएगा। समय पर जागिए, भोजन लीजिए, खेलकूद और पढ़ाई कीजिए। इसके अलावा कोई और एजेंडा नहीं होना चाहिए।   सीएम ने रोपा रुद्राक्ष का पौधा अटल आवासीय विद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। विद्यालय प्रांगण में मित्रवन, वेटलैंड संरक्षण वन, विरासत वन, मियावाकी पद्धति का प्रचार करने के लिए वन विभाग ने प्रदर्शनी भी लगाई।  

वक्फ की जमीन पर कॉलेज और अस्पताल बने प्रधानमंत्री मोदी को हिंदू धर्म गुरु ने खून से लिखा पत्र

 मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खून से पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि वक्फ की जमीन पर कॉलेज और अस्पताल बना दिए जाएं। दिनेश फलाहारी ने खून से लिखा है कि 1947 में हिंदुओं के लिए हिंदुस्तान दिया गया था और मुसलमानों के लिए जिन्ना ने  पाकिस्तान मांग लिया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने हिंदुओं को हमेशा ठगने का काम किया है। कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड बनाकर हिंदुस्तान की बेशकीमती जमीन मुसलमानों को दे दी। आगे लिखा है कि आप हिंदुओं के गौरव हैं, आपसे ही उम्मीद बची है। वक्फ बोर्ड की इस अवैध संपत्ति की जांच करा कर इस पूरी संपत्ति को कॉलेज, अस्पताल और पुलिस क्वार्टर के लिए दे दी जाए, जिससे जन समुदाय उसका लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति वक्फ बोर्ड का समर्थन करता है, वह देश विरोधी है। उन पर देशद्रोह की कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए, जिससे ये लोग पाकिस्तान में मजार और मस्जिद बना सकें और भाईचारा कायम कर सकें। ऐसे लोगों का हिंदुस्तान में कोई काम नहीं है। दिनेश फलाहारी ने पीएम मोदी को ट्वीट करके यह पत्र भेज दिया है। बता दें यह वही दिनेश फलाहारी हैं, जिन्होंने तीन वर्ष पहले प्रण लिया था कि जब तक मथुरा वाली मस्जिद, श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से नहीं हट जाएगी, तब तक वह भोजन ग्रहण नहीं करेंगे। आज तक वे बिना भोजन के ही रह रहे हैं और जहां भी जाते हैं, नंगे पैर ही जाते हैं।

मेरठ हत्याकांड मामले के आरोपी 14 दिन बाद एक दूसरे से मिले मुस्कान और साहिल, एक दूजे को देख हुए भावुक

मेरठ मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी जेल में बंद हैं. इस बीच खबर है कि उनकी न्यायिक हिरासत और बढ़ गई है. दोनों को अभी 14 दिन और न्यायिक हिरासत में जेल में रहना होगा. उनकी अगली पेशी 15 अप्रैल को होगी. आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुस्कान-साहिल की पेशी हुई. खास बात ये रही कि एक ही कमरे में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा ये पेशी हुई. ऐसे में करीब दो हफ्ते बाद सौरभ के ‘कातिल’ एक दूसरे से मिले. मेरठ जिला जेल प्रशासन के मुताबिक, 14 दिन बाद साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी एक दूसरे से मिले. उन्होंने एक दूसरे को देखा लेकिन उनके बीच कोई बात नहीं हुई. लगभग दो मिनट तक वे साथ रहे. इस दौरान दोनों भावुक नजर आ रहे थे. पेशी के बाद उन्हें अलग-अलग बैरक में डाल दिया गया. बता दें कि मुस्कान और साहिल को जेल नियमों के तहत अलग-अलग बैरकों में रखा है. दोनों ने एक ही बैरक में रहने की इच्छा जताई थी, लेकिन जेल मैन्युअल के नियमों के कारण यह संभव नहीं हो सका. जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जेल के नियमों के अनुसार ही कोई निर्णय लिया जाता है और फिलहाल दोनों को अलग-अलग बैरकों में ही रहना होगा. इसके अलावा मेरठ जेल प्रशासन ने दोनों को उनकी रुचि के अनुसार जेल में कार्य करने की अनुमति दी है. मुस्कान ने सिलाई-कढ़ाई का काम सीखने की इच्छा जताई, जबकि साहिल ने खेती-किसानी में रुचि दिखाई. जेल प्रशासन ने उनकी मांग स्वीकार कर ली और दोनों को उनके कार्यों में शामिल कर दिया गया है. इससे न केवल वे जेल में समय व्यतीत कर सकेंगे, बल्कि उनके आचरण का भी मूल्यांकन किया जाएगा. वहीं, मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल नियमों के तहत किसी भी बंदी को 10 दिन पूरे होने के बाद कार्य आवंटित किया जाता है. मुस्कान और साहिल दोनों 1 अप्रैल से अपने-अपने चुने हुए कार्यों को शुरू कर चुके हैं. यह प्रक्रिया जेल सुधार प्रणाली का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कैदियों को कौशल प्रदान करना और उन्हें व्यस्त रखना है. साहिल को मिलेगा प्रतिदिन 50 रुपये का मेहनताना, मुस्कान को नहीं साहिल को खेती के काम में लगाया गया है, जिसे जेल नियमों के तहत ‘नॉन-स्किल्ड वर्कर’ माना जाता है. इसके बदले उसे प्रतिदिन 50 रुपये की मजदूरी मिलेगी. अगर वह खेती करने में असमर्थ रहता है, तो उसे किसी अन्य कार्य में लगाया जाएगा. दूसरी ओर, मुस्कान ने सिलाई-कढ़ाई सीखने का विकल्प चुना है. चूंकि यह प्रशिक्षण कार्य की श्रेणी में आता है, इसलिए उसे इसके लिए कोई मजदूरी नहीं मिलेगी. हालांकि, जब वह पूरी तरह से सिलाई कार्य में दक्ष हो जाएगी और वस्त्रों की सिलाई करने लगेगी, तब उसे वेतन देने की व्यवस्था की जा सकती है. मालूम हो कि मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में 3 मार्च की रात को सौरभ राजपूत की हत्या उसकी पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल ने कर दी थी. दोनों हत्यारोपियों ने कई बार सौरभ के सीने में चाकू से वार किया था, इसके बाद उसकी गर्दन काट दी थी. फिर शव को ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया था. ये सब करने के बाद दोनों मौज-मस्ती के लिए हिमाचल चले गए थे. लौटने पर जब मुस्कान ने परिजनों को पति की हत्या की बात बताई तो मामले का खुलासा हुआ. पुलिस के मुताबिक, हत्या प्रेम प्रसंग में अंजाम दी गई थी.  

तेज रफ्तार कार ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से मारी टक्कर, 4 लोगों की मौत

मुजफ्फरनगर   उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बरला-बसेड़ा मार्ग पर एक तेज रफ्तार कार के ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी जिससे एक परिवार के 2 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई और 3 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। कार ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से मारी जोरदार टक्कर मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि घटना मंगलवार रात की है जिसमें मेरठ जिले की निवासी खुशनुमा (35), सानिया (15), तैयबा (3) और मिरहा (2) की मौत हो गई। ये सभी कार में सवार थे। उसने बताया कि तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब जुनेद के परिवार के सदस्य ईद के मौके पर रिश्तेदारों से मिलने के लिए कमालपुर (मेरठ) से सहारनपुर के गोपाली गांव जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।

बिकरू कांड मुख्य मामले की एंटी डकैती कोर्ट में मामले की चल रही सुनवाई, अब 15 अप्रैल को होगी सुनवाई

कानपुर बिकरू कांड मुख्य मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। नियत तिथि पर पीठासीन अधिकारी के न होने से सुनवाई टल गई। अब न्यायालय ने सुनवाई को 15 अप्रैल की तिथि नियत की है। चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे गैंग ने फायरिंग कर दी थी। घटना में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गए थे। मामले में पुलिस ने 45-50 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिसकी सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। एंटी डकैती कोर्ट में मामले की चल रही सुनवाई मामले में अभियोजन गवाह से बचाव पक्ष की जिरह चल रही है। नियत तिथि पर मंगलवार को पीठासीन अधिकारी के न होने से सुनवाई टल गई। इस दौरान सभी आरोपित न्यायालय में उपस्थित रहे। एडीजीसी आशीष तिवारी ने बताया कि अब 15 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी।   क्या हुआ था बिकरू कांड में बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे गैंग और उसके अन्य साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। घटना में आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। 30 आरोपितों पर हुई थी गैंगस्टर की कार्रवाई इस केस के बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। जिसें विकास दुबे एसटीएफ के इनकाउंटर में मारा गया था। मामले में पुलिस ने 30 आरोपितों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय पंचम में चल रही है। इन आरोपितों को मिली सजा कोर्ट ने साल 2023 में 23 आरोपितों, जिनमें बिकरू गांव का हीरू दुबे, श्यामू बाजपेई, जहान यादव, दयाशंकर अग्निहोत्री, बबलू मुसलमान, रामू बाजपेयी, शशिकांत पांडेय, शिवम दुबे, गोविंद सैनी, उमाकांत, शिवम दुबे उर्फ दलाल, शिव तिवारी, जिलेदार, राम सिंह यादव, जय बाजपेई, धीरेंद्र कुमार, मनीष, सुरेश, गोपाल, वीर सिंह, राहुल पाल, अखिलेश उर्फ श्यामजी, छोटू शुक्ला को गैंगस्टर मामले में दोषसिद्ध किया था।

महंत के अथक प्रयासों के बाद हुआ निर्णय-सुजावन देव मंदिर के पास यमुना नदी तट पर पक्के घाट का निर्माण कार्य शुरू

प्रयागराज विकासखंड जसरा के देवरिया ग्राम सभा में स्थित प्राचीन पर्यटन स्थल श्री सुजावन देव मंदिर के पास यमुना नदी तट पर पक्के घाट का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। यह फैसला यम द्वितीया मेले के अवसर पर लिया गया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष बीके सिंह को देवरिया प्रधान महंत राजीव गिरी जी महाराज और मंदिर के पुजारी श्री ज्ञानेंद्र गोस्वामी जी ने एक पत्र सौंपकर यहां पक्का घाट बनाने की मांग की थी। इस पत्र पर विचार करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष महोदय ने पक्के घाट का निर्माण स्वीकृत किया। इसके बाद प्रोटोकॉल मंत्री राजेश शुक्ला ने स्थल का निरीक्षण किया और पक्के घाट का निर्माण जल्दी शुरू करने का आश्वासन दिया। महंत के अथक प्रयासों के बाद हुआ निर्णय महंत राजीव गिरी जी के अथक प्रयासों के कारण इस निर्णय को गति मिली है। क्षेत्र में यम द्वितीया मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होती है, और रोजाना हजारों श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं। ऐसे में पक्के घाट का निर्माण क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा राहत का कारण बनेगा। इंजीनियरों की टीम ने मंदिर का निरीक्षण किया 30 मार्च 2025 को सुजावन देव मंदिर के पास इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों की टीम ने पक्के घाट का निरीक्षण किया। इस मौके पर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत राजीव गिरी जी महाराज और मंदिर के मुख्य पुजारी श्री ज्ञानेंद्र गोस्वामी जी महाराज भी उपस्थित रहे। सभी ने निरीक्षण के दौरान घाट के निर्माण के लिए जरूरी पहलुओं पर चर्चा की और यह सुनिश्चित किया कि निर्माण कार्य श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। 10 अप्रैल को आयोजित होगी बैठक देवरिया प्रधान महंत राजीव गिरी जी ने बताया कि 10 अप्रैल को एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें घाट के निर्माण कार्य को औपचारिक रूप से शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। पक्के घाट के निर्माण से क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल सुरक्षित स्नान करने की सुविधा मिलेगी, बल्कि यमुना नदी के किनारे की सुंदरता में भी इजाफा होगा। इस निर्णय से क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है, और वे पक्के घाट के निर्माण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अब एक नए प्रकार के माफिया उभर रहे हैं, जो उच्च पदों पर रहकर गठजोड़ बनाते हैं : ‘प्रदेश में नहीं बचा कोई बड़ा माफिया’

नोएडा नोएडा में पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश प्रशांत कुमार ने मंगलवार को कई नई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने 26 स्थानों पर वीडियो वॉल, 10 पिंक बूथ, 2 थानों में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट और 8 पुलिस चौकियों एवं पुलिस लाइन में नए भवनों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर सांसद डॉक्टर महेश शर्मा, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि एनजी और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम नोएडा पुलिस कमिश्नरेट सेक्टर-108 में आयोजित किया गया। पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में बड़े सुधार हुए हैं और अब कोई बड़ा माफिया प्रदेश में सक्रिय नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब एक नए प्रकार के माफिया उभर रहे हैं, जो उच्च पदों पर रहकर गठजोड़ बनाते हैं और प्रजातंत्र के मूल स्तंभों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 50 वर्षों के बाद पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया। इसे सात चरणों में लागू किया गया, जिसमें पहले चरण में लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि 2017 में यूपी पुल‍िस में ढाई लाख पद रिक्त थे, लेकिन पिछले आठ वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन पदों को भरा गया। अब केवल 50 हजार र‍िक्‍त‍ियां शेष हैं, जिनकी भर्ती की घोषणा कर दी गई है। महानिदेशक ने कोविड-19 महामारी और महाकुंभ के दौरान पुलिस की सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने ‘ड्यूटी बिफोर सेल्फ’ की भावना के साथ काम किया और लोगों की सेवा की। पुलिसकर्मियों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभाली, बल्कि जरूरतमंदों तक दवाइयां, दूध और सब्जियां पहुंचाने का काम भी किया। महामारी के दौरान विदेशों में बसे लोगों के परिवारजन जब अंतिम संस्कार के लिए उपस्थित नहीं हो सके, तब पुलिस ने उनका धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार भी करवाया। कुंभ मेले में पुलिस ने केवल रस्सी, सीटी और लाउड हेलर के सहारे 45 दिनों में 66 करोड़ श्रद्धालुओं को स्नान करवाया। उन्होंने बताया कि 2017 में यूपी 112 सेवा का औसत रिस्पांस टाइम 30 मिनट था, जिसे अब घटाकर 8 मिनट कर दिया गया है। अधिक से अधिक गाड़ियों को सेवा में शामिल किया गया और कॉल लेने की क्षमता बढ़ाई गई। पुलिस ने हॉटस्पॉट बनाए, जिनके आधार पर नोएडा में पिंक बूथ स्थापित किए गए। पिछले 16 महीनों में 89,000 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई, जिनमें से 65 को मृत्युदंड दिया गया। महिलाओं से जुड़े अपराधों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सबसे अधिक सजा दिलाने में सफलता प्राप्त की। प्रशांत कुमार ने बताया कि नोएडा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘भाषणीय ऐप’ का प्रयोग किया जाएगा, जिससे विभिन्न भाषाओं में संवाद संभव हो सकेगा। उन्होंने ड्रग्स की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ अभियान चलाया गया है। उन्होंने समाज से इस अभियान में पुलिस का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है और इसे और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

पुलिस जांच में स्पष्ट हो गया है कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की थी, प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह

मेरठ मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड की असली वजह सामने आ गई है। पुलिस ने इस मामले की जांच पूरी कर ली है और चार्जशीट लगभग तैयार है। शुरुआती अटकलों के विपरीत, इस हत्याकांड के पीछे कोई तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास नहीं था, बल्कि इसका कारण प्रेम संबंध निकला। प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह पुलिस जांच में स्पष्ट हो गया है कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की थी। दोनों नशे के आदी थे और एक साथ रहना चाहते थे, लेकिन सौरभ उनके रास्ते की रुकावट था। चूंकि उसके रहते वे शादी नहीं कर सकते थे, इसलिए उसे हटाने की साजिश रची गई। हत्या की प्लानिंग और सबूत पुलिस के मुताबिक, हत्या की पूरी योजना पहले से बनाई गई थी। मुस्कान ने चाकू, ड्रम और बेहोश करने की दवा का इंतजाम किया। साहिल सीमेंट लेकर आया, ताकि शव को ठिकाने लगाया जा सके। ड्रम में लाश डालकर सीमेंट से सील करने का आइडिया साहिल का था। पुलिस ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले सबूत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चार्जशीट में शामिल किया है। हत्या के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, खून से सने कपड़े, बैग, चादर और ड्रम को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। 18 मार्च को हुआ था हत्याकांड का खुलासा सौरभ का शव 18 मार्च को ब्रह्मपुरी के इंदिरा नगर स्थित घर से बरामद हुआ था। शव ड्रम में बंद था और उसे सीमेंट के घोल से ठोस बना दिया गया था। फोरेंसिक टीम की जांच के बाद पुलिस ने मकान को सील कर दिया था। केस में नहीं मिला तीसरा आरोपी जांच में यह भी स्पष्ट हो गया है कि इस हत्याकांड में कोई तीसरा व्यक्ति शामिल नहीं था। पुलिस जल्द ही चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने की तैयारी में है।

CM योगी ने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को किया खारिज, ‘सड़कें नमाज के लिए नहीं यातायात के लिए हैं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ मुसलमानों को प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी का बचाव करते हुए कहा है कि सड़कें यातायात के लिए होती हैं। आदित्यनाथ ने मुसलमानों से यह भी कहा कि वे हिन्दुओं से धार्मिक अनुशासन सीखें, जो विशाल महाकुंभ मेले में शामिल हुए लेकिन इस दौरान अपराध, तोड़-फोड़ या उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई। CM योगी ने वक्फ विधेयक के आलोचकों पर भी साधा निशाना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक न्यूज एजेंसी से एक विशेष साक्षात्कार के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक के आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड स्वार्थी हितों के साथ-साथ ‘‘लूट खसोट” के अड्डा बन गए हैं और इन्होंने मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम किया है। योगी आदित्यनाथ ने हिंदू मंदिरों और मठों द्वारा शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में किए गए दान का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या कई गुना अधिक संपत्ति होने के बावजूद किसी वक्फ बोर्ड ने इस तरह का कल्याणकारी कार्य किया है? उन्होंने कहा कि देखिए, हर अच्छे कार्य का विरोध होता है। वैसे ही वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हो-हल्ला हो रहा है। ये जो हो-हल्ला कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या कोई ऐसा कल्याणकारी काम है जो वक्फ बोर्ड के माध्यम से किया गया हो? सारे समाज की बात तो छोड़िए, क्या वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल मुसलमानों के कल्याण के लिए किया गया है?’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ये व्यक्तिगत स्वार्थ के अड्डे बने हुए हैं। चंद लोगों की लूट- खसोट के अड्डे बने हुए हैं। यह (वक्फ) किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बना हुआ है और सुधार इस समय की मांग है तथा हर सुधार का विरोध होता है। देश, काल और परिस्थिति के अनुसार हमें उसके लिए तैयार होना चाहिए और मुझे लगता है कि इसका लाभ मुस्लिम समाज को भी होगा। योगी एवं नेता आदित्यनाथ हिंदुत्व को लेकर अपने कट्टर विचारों और अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रशासक की छवि के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं। CM योगी ने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को किया खारिज उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी में मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत है लेकिन सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत है। आदित्यनाथ ने कहा कि वह न तो भेदभाव में विश्वास करते हैं और न ही तुष्टीकरण में। उन्होंने कहा कि हम तुष्टीकरण से अपने आपको हमेशा अलग रखते हैं और उस हर जरूरतमंद को, जो भारत का नागरिक है, शासन की हर सुविधा का लाभ मिलना चाहिए।” त्वरित न्याय के तौर पर उनके ‘‘बुलडोजर मॉडल” को अब अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है, हालांकि इसकी वैधता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।   आदित्यनाथ ने इस मामले में एजेंसी से कहा कि वह इस मॉडल को उपलब्धि नहीं बल्कि आवश्यकता मानते हैं। उन्होंने कहा कि बुलडोजर का उपयोग बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और अतिक्रमण हटाने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमने उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया है। उन्होंने दावा किया कि ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी उनके राज्य से संबंधित नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तव में शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाए गए दिशा-निर्देशों की सराहना की है। जानिए, मेरठ में सड़कों पर नमाज अदा करने की चेतावनी पर क्या बोले CM योगी? मेरठ में सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ उनके प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी पर उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने सरकार के कदम का दृढ़ता से बचाव करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क चलने के लिए होती है और जो लोग (इस फैसले के खिलाफ) बोल रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। कुल 66 करोड़ लोग प्रयागराज में आए। कहीं कोई लूटपाट नहीं, कहीं कोई आगजनी नहीं, कहीं कोई छेड़खानी नहीं, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं, कहीं कोई अपहरण नहीं, यह होता है अनुशासन… यह है धार्मिक अनुशासन… अगर आपको सुविधा चाहिए तो उस अनुशासन को भी मानना सीखिए।  

योगी ने बरेली से स्‍कूल चलो अभियान और विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

बरेली मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को बरेली से स्‍कूल चलो अभियान और विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके एक जनसभा को संबोधित करते हुए विरोधियों पर जमकर हमला बोला। उन्‍होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि ये वही बरेली है जहां 2017 के पहले, वर्ष में 5, 7, 10 दंगे हुआ करते थे। पिछले आठ वर्ष में बरेली में यहां कोई दंगा नहीं हुआ। बरेली अब चंगा है। अब बरेली में कोई दंगा नहीं होता है। अब बरेली में दंगा नहीं चंगा है। दंगाई सब चूहे की तरह बिलबिलाते हैं लेकिन बाहर निकलने का दुस्‍साहस नहीं कर पाते हैं। उन्‍हें मालूम है कि दंगा करेंगे तो दुष्‍परिणाम क्‍या होगा? बाप-दादाओं ने जो कमाई की होगी वो भी एक झटके में सरकार जब्‍त करके गरीबों में बंटवाने का काम कर देगी। सीएम योगी ने मंगलवार को बरेली को कई सौगातें दीं। उन्‍होंने 933 करोड़ की 132 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास और 2,554 नई एंबुलेंस का फ्लैग ऑफ किया। उन्‍होंने कहा कि आज बरेली विकास के पथ पर अग्रसर हुआ है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का नया मॉडल दे रही है। अपनी नाथ नगरी की पहचान को पिछली सरकारों ने झुमका के साथ जोड़ा था, हम लोगों ने बरेली को नाथ नगरी के रूप में नाथ कॉरीडोर देकर आपको आपकी पहचान दिलाने का काम किया है। आज बरेली में निवेश आ रहा है। यहां पर इंडस्‍ट्री लग रही है। समाजवादी पार्टी के मुखिया के ‘गोबर से दुर्गंध’ वाले बयान पर उन्‍हें घेरते हुए सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने निराश्रित गोवंश दिए। गायों को लावारिस छोड़ दिया था। सपा के मुखिया कहते हैं कि गोवंश से दुर्गंध आती है। इनकी असलियत यही है। ये गोमाता को कसाइयों के हवाले करते थे। हमने कसाइयों को जब भेजा जहन्‍नुम की यात्रा में तो इनको परेशानी हुई। इनकी परेशानी तो ये है कि इनके मित्र कसाई तो सब चले गए जहन्‍नुम में। अब गोवंश को बचाने की चुनौती थी तो आप ही की धरती के सपूत आंवला के विधायक ने 7700 से अधिक निराश्रित गोआश्रय स्‍थल खोल दिए। वहां पर 14 लाख से अधिक गोवंश की देखभाल तो स्‍वयं राज्‍य सरकार कर रही है। शेष हमने अन्‍नदाता किसानों को दिए हैं। आप भी पालिए। एक गोवंश रखने के लिए सरकार 1500 रुपए देती है। गोवंश की सेवा के लिए पुण्‍य भी पाओ, सरकार का अनुदान भी पाओ।

उत्तर-प्रदेश पुलिस में 26,596 पदों पर भर्ती का शॉर्ट नोटिफिकेशन किया जारी,12वीं पास से ग्रेजुएट्स तक को मौका

लखनऊ उत्तर-प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल, सब-इंस्पेक्टर सहित अन्य के 26,596 पदों पर भर्ती निकली है। फिलहाल उत्तर-प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड ने इसका शॉर्ट नोटिस जारी किया है। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में इसका डीटेल्ट नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। नोटिस uppbpb.gov.in पर जारी किया जाएगा। विभाग का नाम: उत्तर-प्रदेश पुलिस पद का नाम: उत्तर-प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड पदों की संख्या: 26,596 पदों का विवरण: कॉन्स्टेबल स्पेशल फोर्स कॉन्स्टेबल महिला सिविल पुलिस PAC आर्म्ड फोर्स कॉन्स्टेबल माउंटेड जेल वॉर्डन सब-इंस्पेक्टर प्लाटून कमांडर योग्यता : मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास वेतन: विभाग के नियमों के अनुसार आयु सीमा :18 से 28 साल चयन प्रकिया: रिटन टेस्ट फिजिकल टेस्ट मेडिकल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन आवेदन प्रकिया: ऑफिशियल वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

11 अप्रैल को काशी के दौरे पर पीएम मोदी, तैयारियों में जुटे अफसर

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को एक बार फिर करोड़ों की सौगात देने आ रहे हैं। पीएमओ ने दौरे के लिए जिले के अफसरों से ब्योरा तलब किया है। इसके बाद अधिकारियों ने रविवार को बैठक भी की। अफसरों की मानें तो पीएम मोदी 11 अप्रैल को काशी का दौरा कर सकते हैं। पीएम मोदी तीन से चार घंटे का प्रवास होगा। इस दौरान नगर निगम सदन के भवन सहित करोड़ों की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। ‘हिन्दुस्तान’ की पहल पर हुए दुर्गाकुंड के सुंदरीकरण कार्यों का उद्घाटन भी पीएम मोदी कर सकते हैं। दुर्गाकुंड के कायाकल्प के लिए पीएमओ की पहल पर जल शक्ति मंत्रालय ने निजी कंपनी के माध्यम से सुंदरीकरण और जल की शुद्धता के लिए कार्य कराया है। लंबे समय से बदहाल दुर्गाकुंड के जल की गुणवत्ता काफी बेहतर हुई है। जिससे मछलियों और कछुओं के लिए सांस लेना संभव हो सका है। नगर निगम और वेलस्पन इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों ने सेवर तकनीक से दुर्गाकुंड के जल की गुणवत्ता में सुधार किया है। उल्लेखनीय है कि आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने दुर्गाकुंड की बदहाली पर अभियान चलाया था। ‘मैं दुर्गाकुंड बोल रहा हूं’ शीर्षक से खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया था और कार्रवाई का निर्देश दिया था। कुछ हफ्तों पहले कार्यालय की टीम ने भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ दुर्गाकुंड का दौरा किया था और प्रोजेक्ट की जानकारी ली थी। संभावित दौरे को लेकर अफसरों ने की बैठक प्रधानमंत्री के 11 अप्रैल को होने वाले संभावित कार्यक्रम को लेकर रविवार की देर शाम सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री के दौरे में क्या-क्या कार्यक्रम कराए जा सकते हैं, कौन-कौन सी परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास हो सकता है, इस पर मंथन किया गया। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ की ओर से प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का ब्योरा जिला प्रशासन से मांगा गया है।

योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, जिनके घर गिराए उन्हें 10-10 लाख का हर्जाना दो

नई दिल्ली/ प्रयागराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में 2021 में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर मंगलवार (1 अप्रैल) को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को आदेश दिया कि वह 5 याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे। यह मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर दिया जाना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कहा कि नोटिस मिलने के मात्र 24 घंटे के भीतर मकान गिराना कानून के खिलाफ है। न्यायालय ने यह भी कहा कि भविष्य में सरकारों को इस प्रकार की गलत कार्रवाइयों से बचना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। बच्ची का वीडियो बना मुद्दा 23 मार्च को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में हुई एक अन्य बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बच्ची अपनी झोपड़ी के गिराए जाने के दौरान भागती हुई दिख रही थी, जो अपनी किताबें बचाने के लिए दौड़ रही थी। इस भावनात्मक वीडियो का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चेताया कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की पहले भी चेतावनी  7 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बुलडोजर कार्रवाई के लिए फटकार लगाई थी। पीड़ितों ने दावा किया कि राज्य सरकार ने गलती से उनकी ज़मीन को गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति मान लिया, जिसके कारण प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घर ध्वस्त कर दिए गए। इसी मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जल भुइयां ने यूपी के अंबेडकर नगर में 24 मार्च को हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एक तरफ झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था तो दूसरी तरफ 8 साल की एक बच्ची अपनी किताबें लेकर भाग रही थी. इस तस्वीर ने सबको हैरान कर दिया, ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जहां अवैध रूप से तोड़फोड़ की जा रही है और इसमें शामिल लोगों के पास निर्माण कार्य करने तक की क्षमता नहीं है. नोटिस के 24 घंटे बाद चला बुलडोजर याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनको एक्शन से पहले कोई नोटिस नहीं मिला. यहां तक कि नोटिस भेजने के 24 घंटे के भीतर ही बुलडोजर चला दिया गया. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक साल 2021 में पहले एक मार्च को उन्हें नोटिस जारी किया गया था, उन्हें 6 मार्च को नोटिस मिला. फिर अगले ही दिन 7 मार्च को मकानों पर बुलडोजर एक्शन लिया गया. अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की जिनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे. याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि प्रशासन और शासन को ये लगा कि ये संपत्ति गैंगस्टर और राजनीतिक पार्टी के नेता अतीक अहमद की है. इन सभी लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फरियाद की थी. लेकिन हाईकोर्ट ने घर गिराए जाने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन घरों को गलती से गिराया गया है, उन्हें राज्य सरकार अपने खर्च पर फिर से बनाएगी। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार इस फैसले को चुनौती देना चाहती है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत हलफनामा दाखिल करना होगा। सरकार को कड़ी चेतावनी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी की संपत्ति को नष्ट करना कानून का उल्लंघन है। यह फैसला भविष्य में सरकारों को मनमानी कार्रवाई करने से रोकने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Noida में एक शॉपिंग कॉम्पलेक्स में लगी भीषण आग, लोग ऊपर से कूदे; कुछ के फंसे होने की सूचना

नोएडा नोएडा के सेक्टर 18 स्थित कृष्णा अपरा प्लाजा मार्केट में एक दुकान में मंगलवार दोपहर भयंकर आग लग गई। आग लगते ही मार्केट के आसपास अफरा-तफरी मच गई और सैकड़ों की संख्या में लोग बाहर निकल आए। आग लगने और धुआं भरने के बाद मार्केट से कई लोग नीचे कूद गए और इसमें कुछ चोटिल भी हो गए। अग्निशमन विभाग की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मार्केट के अंदर फंसे हुए लोगों को बाहर निकलने का प्रयास कर रही है। इस कॉम्पलेक्स में कई कंपनियों के दफ्तर हैं. आग लगने के बाद ग्राउंड फ्लोर पर काम करने वाले बाहर निकलने में सफल रहे. लेकिन ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोग फंस गए.फायर विभाग मौके पर पहुंच गया है और आग बुझाने की कोशिश कर रहा है. कहा जा रहा है कि अभी भी भीतर दो से तीन आदमी फंसे हुए हैं. कई लोगों को बचाया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. कृष्णा प्लाजा में लगी भीषण आग सेक्टर 20 थाना क्षेत्र के अट्टा मार्केट में स्थित कृष्णा प्लाजा में मंगलवार दोपहर को आग लग गई. यह बाजार का एक व्यस्त इलाका है, जहां बहुत लोग आते-जाते हैं. आग पहले सीढ़ियों के पास लगी और फिर देखते ही देखते पूरे ग्राउंड फ्लोर में फैल गई. इस हादसे से इमारत में हड़कंप मच गया और लोग डर के मारे चीखने लगे. ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद लोग तो जल्दी बाहर निकल आए, लेकिन ऊपर की मंजिलों पर कई लोग फंस गए. जान बचाने के लिए इमारत से कूदे लोग धुएं से इमारत के अंदर लोगों का दम घुटने लगा, जिससे हालात और खराब हो गए. कुछ लोगों ने शीशे तोड़कर राहत की कोशिश की. वहीं कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारत से कूद गए, जिनमें से तीन लोग जख्मी हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया. इस बीच, फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने के काम में जुट गई. दमकलकर्मियों ने शीशे भी तोड़े ताकि अंदर फंसे लोग सही सलामत बाहर आ सकें. शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका फायर ब्रिगेड ने सीढ़ियों के जरिए फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला और मौके पर एंबुलेंस भी बुलाई गई. कुछ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आग लगने का कारण अभी तक साफ नहीं हो पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है. इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग इमारत के अंदर फंसे हुए नजर आ रहे हैं.

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