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मेरठ जेल में करवटें बदलती रही मुस्कान, खाना नहीं खाया, बोली- मुझे अपने किए पर पछतावा

मेरठ मेरठ में पति सौरभ का कत्ल कर मुस्कान अपने प्रेमी साहिल के साथ हिमाचल, मनाली और शिमला में अय्याशी करने के लिए चली गई। वहीं, मासूम बेटी अपने पिता से बात करने के लिए बार-बार सौरभ और मुस्कान के मोबाइल पर कॉल करती रही। वह अपनी मां से हर बार एक ही बात कहती कि मां, जरा पापा से मेरी बात करा दो। लेकिन मुस्कान ने कभी सौरभ के व्यस्त होने और कभी सो जाने की बात कहकर हर बार उसे टाल दिया। मासूम को अब भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। 18 मार्च को सुबह मासूम ने बार-बार अपने पापा से बात कराने की जिद की तो मुस्कान टूट गई। पहले परिजनों को बताया कि सौरभ को उसके ही परिवार ने मार दिया है और ड्रम में बंद कर दिया है। इस दौरान उसे अगवा कर बंधक बनाकर रखा और अब छोड़ा है। हालांकि जब मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी ने ज्यादा खोजबीन की तो मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या का खुलासा किया। मासूम को नहीं पता, पिता का साया सिर से उठ गया सौरभ और मुस्कान की बेटी अपने नाना प्रमोद रस्तोगी के पास है। मासूम बच्ची को नहीं पता कि मां ने ही पिता की हत्या कर दी और सिर से पिता का साया उठ चुका है। फिलहाल बच्ची को प्रमोद रस्तोगी ने अपने पास रखने की ही बात कही है। सीमेंट तोड़ निकाली लाश,दो घंटे चला पोस्टमार्टम सौरभ की लाश को जिस ड्रम में डालकर सीमेंट का घोल भरा गया था, उसे पुलिस ने मंगलवार रात को मोर्चरी भिजवाया। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे मशक्कत करने के बाद इस ड्रम को काटकर और सीमेंट को तोड़कर लाश के टुकड़े बाहर निकाले गए। ड्रम में सौरभ का सिर और दोनों हाथ कटे हुए अलग मिले थे, जबकी बाकी शरीर अलग था। इसके बाद शव को मोर्चरी में रखवाया गया। बुधवार को करीब 2 घंटे पोस्टमार्टम चला। पोस्टमार्टम के अनुसार सौरभ की मौत दिल में चाकू लगने से हुई है। सीने पर चाकू के कुल मिलाकर पांच वार मिले हैं। पोस्टमार्टम हाउस के चिकित्सक और स्टाफ का कहना है कि उन्होंने अपनी नौकरी में सीमेंट के ड्रम में जमे शव का पहली बार पोस्टमार्टम किया है। खुलासा किया गया है कि किसी धारदार हथियार से सीने पर वार किए गए। इसके बाद उस्तरे से गर्दन काटने का प्रयास किया गया था, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद किसी बड़े चाकू या आरी से गर्दन काटी गई। इतना ही नहीं, दोनों हाथ भी काटकर अलग किए गए थे। पोस्टमार्टम में किसी नशीली दवा के इस्तेमाल की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टर ने जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा है। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर बातचीत करते हुए बताया कि शव पूरी तरह डी- कंपोज्ड हो गई थी। त्वचा पूरी तरह से हट गई थी। शरीर पर पपड़ी जमी थी। पोस्टमार्टम करने में चिकित्सक, पुलिस और स्टाफ को दो घंटे से ज्यादा का समय लगा।

योगी सरकार, 8 साल- बेमिसाल- वन, पर्यावरण व जलवायु विभाग ने कई बड़े-बड़े कार्य हुए, ‘हरित प्रदेश’ हुआ उत्तर प्रदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुशासन व सुदृढ़ कानून व्यवस्था की बदौलत एक तरफ उत्तर प्रदेश को जहां सर्वोत्तम प्रदेश बना डाला, वहीं आठ वर्ष में 204 करोड़ से अधिक पौधरोपण से इसे ‘हरित प्रदेश’ के रूप में भी समृद्ध कर दिया। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, यूपी के वनावरण और वनाच्छादन में 559.19 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ जनअभियान-2024 के तहत यूपी में 36.80 करोड़ पौधरोपण हुए। सीएम योगी के नेतृत्व में वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग ने कई बड़े-बड़े कार्य भी किए। वन विभाग में पारदर्शिता के आधार पर युवाओं को नियुक्ति दी गई। यूपी में पहली बार कार्बन क्रेडिट के जरिए किसानों की आय में वृद्धि हुई। 25 नवंबर 2024 से लखनऊ से पलिया तक योगी सरकार ने हवाई सेवा भी शुरू की। उत्तर प्रदेश में सारस की संख्या में भी वृद्धि हुई। योगी सरकार के प्रयास का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश की नदियों में सर्वाधिक डॉल्फिन पाई गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में ही राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में रिपोर्ट जारी की, जिसके मुताबिक देश में नदी डॉल्फिन की कुल संख्या 6,327 रही। देश के आठ राज्यों की 28 नदियों के सर्वेक्षण में सर्वाधिक संख्या (2397 डॉल्फिन) के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। अन्य राज्य यूपी से पीछे हैं। योगी सरकार ने 17 अक्टूबर 2023 को गंगा डॉल्फिन को राज्य जलीय जीव घोषित किया था। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में 204 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया। विगत वर्ष 36.80 करोड़ पौधरोपण कर उत्तर प्रदेश ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया।भारत वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। छत्तीसगढ़ को छोड़कर सभी राज्य उत्तर प्रदेश से पीछे हैं। योगी सरकार के नेतृत्व में वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग की अन्य प्रमुख उपलब्धियां- -आठ वर्ष में विभाग के अंतर्गत लगभग ढाई हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प‍िछले साल 10 सितंबर को 647 वन रक्षकों-वन्य जीव रक्षकों और 22 नवंबर को 701 वन दारोगा को नियुक्ति पत्र प्रदान किया था। -दुधवा टाइगर रिजर्व / दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में ईको पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए 25 नवंबर 2024 को लखनऊ से पलिया तक हवाई सेवा का शुभारंभ किया गया। -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा छह सितंबर 2024 को गोरखपुर के कैम्पियरगंज में एशिया के प्रथम नवनिर्मित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र का उद्घाटन किया गया। नव निर्मित जटायु/राजगिद्ध के संरक्षण व संवर्धन केंद्र में कुल छह राजगिद्धों (नर एवं मादा) को लाया जा चुका है। -पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ जन अभियान, 2024 के अंतर्गत वर्ष में 36.80 करोड़ पौधरोपण किए गए। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ, प्रयागराज व गोरखपुर में पौधरोपण किया। इसके अतिरिक्त प्रदेश के 223 महत्वपूर्ण वेटलैण्ड्स के जलागम क्षेत्र में ‘वेटलैण्ड संरक्षण वन’ की स्थापना की गई। -प्रदेश में 948 विरासत वृक्ष वाटिका का निर्माण किया गया। इसके अलावा मित्र वन, मियावाकी वन, सौमित्र वन, शक्ति वन आयुष वन, पंचवटी, नवग्रह वाटिका की स्थापना की गई। गंगा, यमुना, सरयू, हिंडन, गोमती सहित विभिन्न नदियों के जलागम क्षेत्र में ‘पवित्र धारा वृक्षारोपण’ योजना के तहत लगभग 3.72 करोड़ पौधरोपण किया गया। -किसानों की निजी भूमि पर खड़े वृक्षों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 जुलाई 2024 को कार्बन क्रेडिट का भुगतान किया। निजी वृक्षों के लिए कार्बन क्रेडिट का भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश प्रथम राज्य है। -ग्रीष्मकालीन गणना 2024 के अनुसार प्रदेश में राज्य पक्षी सारस की संख्या बढ़कर 19994 हो गई। 2023 में यह संख्या 19,522 और 2022 में 19,188 थी। योगी सरकार ने लगाए 204 करोड़ से अधिक पौधे – वर्ष पौधरोपण 2017-18 5.72 करोड़ 2018-19 11.77 करोड़ 2019-20 22.60 करोड़ 2020-21 25.87 करोड़ 2021-22 30.53 करोड़ 2022-23 35.49 करोड़ 2023-24 36.16 करोड़ 2024-25 36.80 करोड़ पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ जन अभियान 2024 की प्रमुख उपलब्धि- पौधरोपण- 36.80 करोड़ सर्वाधिक पौधरोपण वाले जनपद- सोनभद्र प्रथम (1.53 करोड़), झांसी द्वितीय (97 लाख), लखीमपुर खीरी तृतीय (95 लाख), जालौन चतुर्थ (94 लाख) व मिर्जापुर (93 लाख) पांचवें स्थान पर रहा। सर्वाधिक पौधरोपण वाले विभाग- ग्राम्य विकास विभाग (13.54 करोड़), वन विभाग (12.64 करोड़), कृषि विभाग (2.89 करोड़), उद्यान विभाग (1.61 करोड़), पंचायती राज विभाग (1.18 करोड़) । सर्वाधिक लगाए गए पौध- शीशम (4 करोड़ 33 लाख, 38723), सागौन (4.33 करोड़ से अधिक), जामुन (2.19 करोड़ से अधिक), अर्जुन (1.67 करोड़), आंवला (95 लाख से अधिक)।

आज से शुरू हुए यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन

प्रयागराज उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन आज से शुरू हो गया। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए कुल 261 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं जहां मूल्यांकन आज शुरू हो गया। यह मूल्यांकन कार्य 2 अप्रैल 2025 को संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी ना हो इसके लिए यहां यूपी बोर्ड परिसर में बने कंट्रोल रूम से मूल्यांकन कार्य पर पैनी नजर रखी जा रही है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जारी किए जाएंगे परीक्षाओं के परिणाम मिली जानकारी के मुताबिक, सिंह ने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया पर कई स्तर पर निगरानी की जा रही है। जिला स्तर पर, मंडल स्तर पर और यूपी बोर्ड के 5 क्षेत्रीय कार्यालयों में मूल्यांकन पर ऑनलाइन नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, यूपी बोर्ड और लखनऊ स्थित कैंप कार्यालय के जरिए भी नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के परिणाम अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जारी किए जाएंगे। 15 दिनों में पूरी होगी 3 करोड़ कॉपियों की जांच बताया जा रहा है कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में 1,63,22,248 लिखित उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 84,122 परीक्षक और 8,437 उप प्रधान परीक्षक नियुक्त किए गए हैं, जबकि इंटरमीडिएट में 1,33,71,607 लिखित उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 50,601 परीक्षक और 5,471 उप प्रधान परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रदेश में कुल 8,140 परीक्षा केंद्रों में 24 फरवरी से 12 मार्च, 2025 तक यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं संपन्न कराई गईं जिसमें हाईस्कूल की परीक्षा में कुल 25,56,992 छात्र-छात्राएं और इंटरमीडिएट की परीक्षा में 25,77,733 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 

मेरठ में दिल दहलाने वाला हत्याकांड, पति की लाश के 15 टुकड़े, सीमेंट में बुरी तरह धंसे अंग

मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सनसनीखेज खबर सामने आई है। यह दिल दहलाने वाली खबर जिसने भी सुनी वो ही हैरान हो गया। दरअसल, एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को बर्बरता से मार डाला। इसके बाद शव के टुकड़े किए और ड्रम में रखकर चिनाई करा दी। इसके बाद बेवफा पत्नी ने शिमला जाकर प्रेमी के साथ मौज मस्ती भी की। जब वापस आई तब पत्नी ने अपने पत्नी की हत्या की जानकारी परिवार को दी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पति की लाश के टुकड़े बरामद कर लिए हैं। पुलिस ने टुकड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। यह रूह कंपाने वाला मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थानाक्षेत्र के अंतर्गत इंदिरानगर मास्टर कॉलोनी में सामने आया है। जानकारी के अनुसार, लंदन से लौटे सौरभ कुमार (29) की चार मार्च की रात पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर हत्या कर दी। आरोपियों ने चार मार्च को शव के 15 टुकड़े ड्रम में रखकर उपर से चिनाई कर दी। मुस्कान अपनी पांच साल की बेटी को मायके में छोड़कर प्रेमी के साथ शिमला घूमने चली गई। वापस लौटकर मुस्कान ने अपने पिता को सौरभ की हत्या करने की जानकारी दी। मर्चेंट नेवी में काम कर चुका था सौरभ कुमार मंगलवार को प्रमोद कुमार और मुस्कान के साथ ब्रह्मपुरी थाने पहुंचे और पुलिस को वारदात की जानकारी दी। पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर सौरभ शव को बरामद किया है। लंदन के एक मॉल में नौकरी कर रहा ब्रह्मपुरी के इंदिरानगर की मास्टर कॉलोनी निवासी सौरभ कुमार (29) 24 फरवरी को अपने घर लौटा। दरअसल, 25 फरवरी को उसकी पत्नी मुस्कान (26) जन्मदिन था। इसी को मनाने के लिए वह वापस आया था, साथ ही 28 फरवरी को बेटी पीहू (5) का जन्मदिन था। चार मार्च की रात पूरी तरह बदल गई कहानी दोनों को धूमधाम से मनाया गया। इसके बाद चार मार्च की रात यह कहानी पूरी तरह बदल गई। पत्नी मुस्कान ने रात के समय खाने में कोई नशीली चीज मिलाकर सौरभ को बेहोश कर दिया। इसके बाद पड़ोस में ही रहने वाले अपने प्रेमी साहिल शुक्ला (28) को घर बुलाया और चाकू घोंपकर सौरभ की हत्या कर दी, फिर धारदार हथियार से शव के 15 टुकड़े किए और प्लास्टिक के ड्रम में टुकड़े डालकर डस्ट और सीमेंट से घोल बनाकर ढक्कन को सील कर दिया।   सौरभ का मुस्कान रस्तोगी से हुआ था प्रेम विवाह सौरभ कुमार मर्चेंट नेवी में काम करता था। वह अक्सर विदेश में जाता रहता था। वर्ष 2020 में लंदन के एक मॉल में नौकरी करने लगा था। वर्ष 2016 में सौरभ का मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह हुआ था। दोनों की पांच साल की बेटी पीहू है। सौरभ पत्नी और बेटी के साथ इंदिरानगर में ओमपाल के मकान में तीन साल से किराये पर रह रहा था। पिता मुन्नालाल, भाई बबलू और मां रेनू ब्रह्मपुरी में ही अलग रह रहे हैं। मुस्कान का परिवार भी उसी मोहल्ले में रहता है। वह अपनी बेटी को अक्सर मायके छोड़ देती थी। हालांकि वारदात के दिन पीहू घर में ही थी और और बराबर के कमरे में सो रही थी। हत्यारोपी साहिल शुक्ला सीए है और पड़ोस में ही रहता है। सौरभ नौकरी के कारण कई महीनों बाद आता था। इसी वजह से साहिल शुक्ला और मुस्कान की नजदीकियां बढ़ गईं। पति को बेहोश कर प्रेमी को घर बुलाया सौरभ को पत्नी मुस्कान के साहिल से संबंधों की जानकारी हुई। इस कारण कई दिनों से पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था। इसी विवाद में 4 मार्च की रात मुस्कान ने सौरभ को खाने में नशीली दवा मिलाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद प्रेमी साहिल को घर पर बुला लिया। दोनों ने सौरभ के सीने में चाकू से ताबड़तोड़ वारकर हत्या कर दी। इसके बाद शव के छुरे से लगभग 15 टुकड़े कर इन्हें प्लास्टिक ड्रम में भर दिया। इसी ड्रम में ऊपर से सीमेंट और डस्ट का घोल बनाकर शव के टुकड़ों को छिपा दिया। हत्या के बाद प्रेमी के साथ घूमने चली गई चार मार्च को हत्या करने के बाद पांच मार्च को मुस्कान प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ शिमला घूमने चली गई। 17 मार्च को लौटने के बाद उसके परिजनों ने दामाद सौरभ के बारे में पूछा, तो मुस्कान ने सबकुछ बता दिया। इसके बाद मंगलवार को प्रमोद कुमार अपनी बेटी मुस्कान के साथ ब्रह्मपुरी थाने पहुंचे। पुलिस ने मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को गिरफ्तार कर सौरभ के शव को बरामद किया।   चाकू सीने में घोंपा, छुरे से टुकड़े किए पुलिस के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ के सीने में चाकू घोंपा और फिर शव को बाथरूम में ले जाकर छुरे से उसके 15 टुकड़े किए। शव सीमेंट में इस कदर धंसा हुआ था कि पोस्टमार्टम के लिए पूरे ड्रम को ही मोर्चरी भेजना पड़ा। पुलिस ने ड्रम तोड़कर शव निकाला, जिसमें सिर, दोनों हाथ, पैर के पंजे अलग-अलग मिले।   सौरभ ने देख ली थी पत्नी की चेटिंग करीब दो साल पहले वर्ष 2023 में मुस्कान और साहिल की फोन पर चेटिंग सौरभ ने देख ली थी। जिसको लेकर दंपती में अक्सर विवाद रहने लगा। उधर, इसकी जानकारी लगने पर साहिल भी मुस्कान से शादी करने की जिद करने लगा। सौरभ ने पत्नी को तलाक नहीं दिया और लंदन में नौकरी करते रहे। रास्ते से हटाने के लिए की सौरभ की हत्या: एसपी सिटी एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल के संबंधों में बाधा बन गया था। उसे रास्ते से हटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने वारदात को अंजाम दिया। दोनों ने मिलकर बेरहमी से सौरभ की हत्या कर दी।

सीतापुर के सांसद राकेश राठौर को 48 दिनों की बाद मिली जमानत

सीतापुर जिला कारागार में दुष्कर्म के आरोप में बंद सांसद राकेश राठौर 48 दिन बाद बुधवार सुबह 8 बजे जेल से रिहा गए। बता दें कि मंगलवार को उनकी जमानत याचिका मंजूर हो गई। इसके बाद  रिहाई के लिए जेल तक परवाना पहुंचा ।  वह  30 जनवरी से जिला कारागार में बंद थे। हाईकोर्ट ने 11 मार्च को उनकी जमानत याचिका मंजूर की थी। हालांकि उस दिन पुलिस ने धारा 69 बढ़ा दी थी। ऐसे में सीजेएम कोर्ट में 12 मार्च को जमानत याचिका दाखिल की गई थी। मंगलवार को इस याचिका पर बहस हुई और सीजेएम ने जमानत मंजूर कर दी। जेल अधीक्षक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार शाम 6 बजे रिहाई का पत्र।मिला। जेल मैनुअल के मुताबिक बुधवार सुबह उन्हें रिहा किया गया। 17 जनवरी को दर्ज हुआ था केस सांसद राकेश राठौर पर शहर कोतवाली में दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ था। केस दर्ज होने के बाद राकेश राठौर पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े। उन्हें पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया।  इस दौरान इनके परिजनों व अन्य सहयोगियों के नम्बर भी सर्विलांस पर लगाये गए। सांसद के प्रतिनिधि वसी उल्लाह व एक अन्य को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस सम्बंध में एक।फेसबुक पोस्ट भी उस समय सांसद के अकॉउंट से की गई। काफी उठा पटक के बाद 30 जनवरी को सांसद लोहारबाग स्थित अपने आवास पहुंचे। उसी समय शहर कोतवाली पुलिस ने उन्हें हिरासत मे ले लिया था। इसके बाद से लगातार उनकी जमानत के प्रयास होते रहे। धमकी देने का एक मुकदमा भी हुआ दर्ज सांसद की एक करीबी महिला पर पीड़िता के पति ने घर आकर केस वापस लेने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इस आरोप के आधार पर सांसद व उनकी करीबी महिला पर धमकी देने का एक केस भी दर्ज हुआ था। इस मामले में भी उन्हें पूर्व में जमानत मिल चुकी है।

ओटीएस समाप्त होने के बाद एक्शन की तैयारी में बिजली विभाग, काटे जाएंगे 10 हजार से अधिक कनेक्शन

फिरोजाबाद जिले में 1.64 लाख से अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं, जो महीनों से बिजली का बिल जमा नहीं कर रहे हैं। जिन पर 363.95 लाख रुपये का बिल बकाया है। एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) समाप्त होने के बाद ऐसे उपभोक्ता विद्युत विभाग के रडार पर हैं। इनके विरुद्ध अभियान शुरू होगा। प्रदेश सरकार ने सभी श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 15 दिसंबर 2024 से 28 फरवरी 2025 तक तीन चरणों में एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की गई थी। इसमें सरचार्ज में छूट का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं 30 सितंबर तक मूल बकाया बिल का 30 प्रतिशत राशि जमा कराकर पंजीयन कराना था। इसके बाद एक मुश्त अथवा किश्तों में बकाया राशि जमा करने की सुविधा दी गई थी। शिविर लगाने के बाद भी विभाग ने नहीं दिखाई रुचि शासन की प्राथमिकता पर विद्युत विभाग ने गांव-गांव शिविर लगाने के साथ प्रचार-प्रसार कराया गया। फिर भी उपभोक्ताओं ने बकाया बिल जमा कराने में खास रुचि नहीं दिखाई। होली के बाद विद्युत विभाग ने बिजली का बिल जमा न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की योजना बना ली है। इसके लिए नगर, तहसील, ब्लाक व ग्रामीण क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक के बिल बकाएदारों के कनेक्शन काटे जाएंगे। फिर भी बिल जमा न करने प्राथमिकी दर्ज कराई जाएंगी।   अधीक्षण अभियंता ग्रामीण, अमित कुमार ने बताया जिन उपभोक्ताओं ने ओटीएस में पंजीयन नहीं कराया है, ऐसे सभी उपभोक्ताओं की डिवीजन वार सूची तैयार करा ली है। पूरे जिले में सख्ती से अभियान चलाकर बकाएदारों के कनेक्शन काटे जाएंगे। एक सप्ताह में बकाया राशि जमा न करने पर स्थाई रूप से कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई होगी। अधिक बिजली चोरी वाले क्षेत्र में निरंतर चेकिंग अभियान चलेगा। जर्जर खंभों से झूल रही बिजली लाइन, बड़ा हादसा होने का खतरा वहीं लखीमपुर जिले के कस्बे में बिजली आपूर्ति व्यवस्था कागजों में दुरुस्त दिख रही है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। मुख्य सड़कों और गलियों में जर्जर खंभों और झूलते तारों से बिजली दौड़ रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कस्बे वासियों ने कई बार इन खंभों को बदलने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की अनदेखी के चलते कस्बे में बिजली आपूर्ति तो हो रही है, लेकिन यह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसी स्थिति बन गई है। खंभों की जड़ें कमजोर, हवा में गिरने का खतरा निघासन कस्बे के भारती स्टेट बैंक से पेट्रोल पंप तक बिजली के खंभों की हालत बेहद खराब है। अधिकतर लोहे के खंभों की जड़ें जंग खा चुकी हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। ढखेरवा रोड और सिंगाही रोड पर भी यही हालात हैं। कई स्थानों पर नए खंभे लगाए गए हैं, लेकिन अभी भी कई वार्डों में बांस-बल्लियों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं की जान जोखिम में है। नगर पंचायत निघासन के ईओ दिनेश शुक्ला ने कहा, कस्बे में पुराने जर्जर खंभों को हटाने और बिजली लाइनों को सुधारने का कार्य जारी है। जल्द ही बचे हुए खंभों को भी बदला जाएगा। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया लोहे के खंभों की जड़ों में जंग लग गई है। हल्की हवा में भी गिर सकते हैं, जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।

फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई

दिहुली फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद फैसला आया। साल 1982 में डकैतों के गिरोह ने दलितों के गांव पर हमला बोल दिया था और अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 24 लोगों की हत्या कर दी थी। जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। दलित हत्याकांड मामले में अब कोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले 11 मार्च को मैनपुरी कोर्ट में स्पेशल जज ने तीनों हत्यारोपियों को दोषी ठहराया था। अपर सत्र न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने दोपहर साढ़े तीन बजे फांसी की सजा सुनाई। तीनों ही आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस हत्याकांड में 18 नवंबर 1981 को जसराना के ग्राम दिहुली में 24 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। फैसला आने के बाद तीनों ही आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। त कोर्ट ने नरसंहार को बेहद जघन्य माना न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा है कि हत्यारों को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जब तक कि इनकी मृत्यु न हो जाए। तीनों दोषियों की उम्र 75 से 80 साल है। इस हत्याकांड में कुल 20 हत्यारोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसमें से 13 आरोपियों की मौत हो चुकी है और फरार चल रहे चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट ने स्थाई वारंट जारी कर रखे हैं। मामले की पैरवी एडीजीसी रोहित शुक्ला द्वारा की गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आना पड़ा था दिहुली दिहुली में जब 44 साल पहले नरसंहार हुआ तब प्रदेश की सरकार हिल गई थी उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ‌गृहमंत्री बीपी सिंह, मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेई भी पीडितों का दर्द बांटने‌ देहुली पहुंचे थे। फिरोजाबाद जनपद क्षेत्र के थाना जसराना क्षेत्र का गांव दिहुली मे जव 18 नवंबर 1981 को संतोष सिंह उर्फ संतोषा और राधेश्याम उर्फ राधे के गिरोह के द्वारा दलित समाज के लोगों के ऊपर हमला कर सामूहिक नरसंहार के जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। उसे समय वह क्षेत्र मैनपुरी का हिस्सा हुआ करता था। चश्मदीदों ने बताया हत्याकांड मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह बनवारी लाल ने बताया किउनके पिता ज्वाला प्रसाद की सबसे पहले खेत मे‌‌ आलू की खुदाई करते समय गोलियों से भून कर हत्या की गई थी। उसके साथ उनके बड़े भाई मनीष कुमार और भूरे सिंह और चचेरे भाई मुकेश की हत्या हुई थी। वह काफी दबाव के बाद भी अंतिम समय तक अपनी गवाही पर कायम रहे। ‌उन्हें इस बात का संतोष है कि देर से सही लेकिन उन्हें इंसाफ मिला है। आरोपियों को फांसी मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अधिकांश पीड़ित परिवार गांव से पलायन कर गए हैं केवल तीन परिवार ही गांव में रह रहे हैं। 90 वर्ष की जय देवी का कहना है कि अपने परिवार के लोगों के खोने का दर्द अभी भी नहीं भूल पाए हैं, न्याय मिलने में बहुत देरी हुई है। उन्होंने हमलावरो से छिपकर अपनी जान बचाई थी। दिहुली निवासी लायक सिंह ने सामूहिक नरसंहार की रिपोर्ट राधेश्याम उर्फ राधे संतोष सिंह उर्फ संतोषा समेत 17 लोगों के खिलाफ‌ दर्ज कराई गई थी। ‌दलित समाज के महिला पुरुष तथा बच्चो‌ं का शाम के समय पुलिस की वर्दी में पहुंचे डकैत के गिरोह के लोग जो हथियारों से लैस थे उनके द्वारा सामूहिक सत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सामूहिक दलित समाज के हत्याकांड के पीछे बदमाशों के गिरोह की मुखबिरी और गवाही का मामला मुख्य रूप से सामने आया था। जिसको लेकर नाराज बदमाशों ने बदले की भावना से गांव में पहुंचकर हमला किया था। मामले की सुनवाई मैनपुरी जिला न्यायालय में चल रही थी जो बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद के सेशन कोर्ट में अक्टूबर 2024 तक ट्रायल चला था। जिला जज के आदेश पर अक्टूबर 2024 में संबंधित मामले को मैनपुरी की विशेष डकैती कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

सीएम योगी की फ्लीट के सामने आया सांड़, दो कर्मचारी निलंबित, 14 की सेवा समाप्त

वाराणसी वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान फ्लीट के सामने सांड़ आने की घटना को गंभीरता से लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के दो बेलदारों को निलंबित कर दिया गया है। आउटसोर्स पर तैनात 14 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। प्रशासन के सख्त रुख से खलबली मच गई है। सीएम योगी होली के ठीक पहले 12 मार्च को वाराणसी आए थे। इस दौरान विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही समीक्षा बैठक की थी। काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर जाते समय कबीरचौरा में उनकी फ्लीट के सामने सांड़ आ गया था। तमाम सतर्कता और तैयारियों के बाद भी मुख्यमंत्री की फ्लीट के सामने सांड आने को बेहद गंभीर माना गया है। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बेलदार अमृतलाल और संजय प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ. संतोष पाल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों पशु चिकित्सा विभाग से सम्बद्ध किये गये हैं। इसी तरह आउटसोर्स के कर्मचारियों रजत, राकेश, रामबाबू, आशीष, अंकित, लालधारी, श्याम सुंदर, दीपक शर्मा, निशांत मौर्या, शुभम, राजेश कुमार, गंगाराम, अरविंद यादव, राघवेंद्र चौरसिया की सेवा समाप्त कर दी गई है। नगर आयुक्त ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली कंपनी वॉरियर्स सिक्योरिटी ऐंड सर्विसेज के प्रबंधन को भी अंतिम चेतावनी दी है। इसमें कहा गया है कि अगली बार यदि उनके कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठे तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। साथ ही सभी 14 कर्मचारियों को नगर निगम के किसी अन्य विभाग में भी भविष्य में भर्ती के लिए न भेजने का निर्देश दिया गया है। छुट्टा पशुओं को लेकर लगातार राज्य के विपक्षी दल खासकर समाजवादी पार्टी योगी सरकार पर निशाना साधती रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव छुट्टा पशुओं से आम लोगों और किसानों को हो रहे नुकसान का मामला उठाते रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने छुट्टा पशुओं के लिए गौशालाओं का निर्माण कराया है। अधिकारियों को भी छुट्टा पशुओं को लेकर खास हिदायते दी गई हैं। इसके बाद भी सीएम योगी की मौजूदगी में सांड़ का सड़क पर दिखना अधिकारियों पर सवाल खड़े कर गया।

सचिन मीणा के घर गूंजी किलकारी, सीमा हैदर ने बेटी को दिया जन्म, घर आई लक्ष्मी

 ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर पांचवी बार मां बन गई है। यह बच्चा सीमा और सचिम मीणा का है। हैदर ने ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में मंगलवार सुबह करीब साढ़े चार बजे बच्ची को दिया जन्म। करीब दो साल पहले चार बच्चों के साथ पाकिस्तान से दुबई और नेपाल के रास्ते सीमा भारत आई थी। हालांकि उसे अभी तक भारत की नागरिकता नहीं मिली है। दोनों की मुलाकात ऑनलाइन पबजी गेम खेलते हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और सीमा बच्चों सहित अपने प्रेमी सचिन के पास रहन के लिए आ गई। दिसंबर में दी थी गुड न्यूज सीमा और सचिन ने पिछले साल दिसंबर के महीने में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो में सीमा के गर्भवती होनी की जानकारी दी गई थी। दोनों काफी खुश दिखाई दे रहे थे। वीडियो में हैदर प्रेग्नेंसी किट दिखाते हुए सचिन को पिता बनने की खुशखबरी दे रही थीं। जिसके बाद सचिन सीमा को गले लगा लेता है। तब सीमा ने बताया था कि वह सात महीने की गर्भवती है। जल्द ही उनके घर किलकारी गूंजने वाली है। 2023 में आई थी भारत सीमा हैदर अपने चार बच्चों के साथ 13 मई 2023 अवैध रूप से भारत आई थी। उसे अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने की वजह से 4 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सचिन मीणा को उसे शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 7 जुलाई को उसे स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई थी। सीमा ने पुलिस को बताया था कि उसने और सचिन ने नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के साथ शादी की थी। गौतमबुद्ध नगर में की थी शादी जमानत मिलने के बाद सीमा और सचिन ने गौतमबुद्ध नगर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। तब से दोनों रबूपुरा में पति-पत्नी के तौर पर रह रहे हैं। सीमा और सचिन की कहानी भारत-पाकिस्तान सहित सोशल मीडिया पर काफी मशहूर है। सीमा वीडियो के जरिए फैंस को अपडेट देती रहती हैं। सीमा के वकील विक्रम सिंह ने पाकिस्तानी भाभी की नागरिकता को लेकर कहा कि उनके खिलाफ अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने को लेकर दर्ज केस का निस्तारण हो जाए। इसके बाद कुछ हो सकता है।

होली के बाद UP पुलिस में हुए तबादले, 32 IPS और 17 DSP को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर आईपीएस अफसरों के तबादलों का बड़ा कदम उठाया है। इस बार कुल 32 आईपीएस अफसरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया गया है। इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। महत्वपूर्ण तैनाती: – डॉ. प्रीतिंदर सिंह को डीआईजी पीएसी मध्य जोन बनाया गया है, वे पहले डीजीपी मुख्यालय से अटैच थे। – आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। – अपर्णा कुमार को डीआईजी मानवाधिकार लखनऊ में तैनात किया गया है। – अशोक कुमार को एसपी क्षेत्रीय अभिसूचना गोरखपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – एलवी एंटोनी देव कुमार को एडीजी रूल्स एंड मैनुअल लखनऊ का कार्यभार सौंपा गया है। – अतुल शर्मा को डीआईजी पीएसी कानपुर अनुभाग सौंपा गया है। – शैलेंद्र कुमार राय को एसपी लोक शिकायत डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है। – देवेंद्र कुमार को अपर पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – आयुष श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर बनाया गया है। – इसके अलावा आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। अन्य महत्वपूर्ण तैनाती: – बजरंगबली को सेनानायक 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर, – कमलेश बहादुर को सेनानायक 25वीं वाहिनी पीएसी रायबरेली, – लाल भरत कुमार पाल को सेनानायक 49वीं वाहिनी पीएसी नोएडा, – दिनेश यादव को सेनानायक 41वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद, – अजय प्रताप को सेनानायक 48वीं वाहिनी PAC सोनभद्र, – अनिल कुमार यादव को डीसीपी वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, – रोहित मिश्रा को एसपी डीजीपी मुख्यालय लखनऊ PAC बाराबंकी, – नेपाल सिंह को सेनानायक 39वीं वाहिनी PAC मिर्जापुर, -शिवराम यादव को एसपी पीटीएस मेरठ, – दीपेंद्र नाथ चौधरी को डीसीपी कानपुर पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया है। प्रमोशन के बाद DIG बने 12 अफसरों को मिली तैनाती: प्रमोशन के बाद 12 आईपीएस अफसरों को डीआईजी की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तैनाती इस प्रकार हैं: – हेमंत कुटियाल को डीआईजी एसएसएफ लखनऊ, – स्वप्निल ममगाई को डीआईजी पीएसी मेरठ – शालिनी को डीआईजी पीएसी मुरादाबाद, – अरुण कुमार श्रीवास्तव को डीआईजी पीएसी अयोध्या अनुभाग, – डी प्रदीप कुमार को पुलिस महानिरीक्षक/अतिरिक्त सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड लखनऊ, – कमला प्रसाद यादव को डीआईजी एंटी करप्शन लखनऊ, – सूर्यकांत त्रिपाठी को डीआईजी फायर सर्विस मुख्यालय लखनऊ, – विकास कुमार वैद्य को डीआईजी स्थापना डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – तेज़ स्वरूप सिंह को डीआईजी कार्मिक डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – सुनीता सिंह को डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ, – राजेश कुमार सक्सेना को डीआईजी पीटीएस सुल्तानपुर, – हृदयेश कुमार को डीआईजी ईओडब्ल्यू मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है।  

मथुरा सहित 12 जिलों में भारतीय सेना में अग्निवीरों की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ, 10 अप्रैल तक पंजीकरण

मथुरा मथुरा सहित 12 जिलों में भारतीय सेना में अग्निवीरों की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ हो गए हैं। आवेदक 10 अप्रैल तक पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण कराने के बाद ही ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) में बैठ सकते हैं। सेना से मिली जानकारी के अनुसार आगरा स्थित सेना भर्ती कार्यालय के अंतर्गत अलीगढ़, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, हाथरस, जालौन, झांसी, कासगंज, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा और आगरा के अभ्यर्थियों की भर्ती की जाएगी। सामान्य ड्यूटी के साथ तकनीकी, क्लर्क, स्टोर कीपर व अग्निवीर ट्रेड्समैन के लिए 10वीं और 8वीं पास युवा आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) पहला कदम है। इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की ही सेना भर्ती रैली आयोजित होगी। क्या है आयु सीमा? साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के अभ्यर्थी पंजीकरण के पात्र हैं। अग्निवीर तकनीकी ट्रेड में प्रवेश के लिए पालिटेक्निक व आइटीआइ डिप्लोमा होना चाहिए। ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, उड़िया, बंगाली, उर्दू, गुजराती, मराठी और असमिया भाषा में आयोजित की जाएगी। वर्ष के अंत में सेना भर्ती रैली आयोजित की जाएगी। joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। अभ्यर्थियों को ऑनलाइन एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थी पात्रता के आधार पर दो अग्निवीर श्रेणियों में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए दो श्रेणियों के फार्म अलग-अलग भरने होंगे। अब अग्निवीर के लिए होगा अनुकूलनशीलता परीक्षण इस वर्ष से शारीरिक फिटनेस टेस्ट व शारीरिक माप परीक्षण उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को अनुकूलनशीलता परीक्षण (अडाप्टेबिलिटी टेस्ट) भी पास करना होगा। इसमें परखा जाएगा कि अभ्यर्थी सैन्य जीवन की चुनौतियों के अनुकूल हैं या नहीं। आवेदक इस परीक्षा के बाद ही मेडिकल परीक्षा और आगे की भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे। स्वरोजगार के लिए 11 बैंकों ने दिया 8़ 50 करोड़ का ऋण वहीं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत स्वरोजगार के लिए 170 युवाओं को ऋण दिया गया है। इनमें से हर युवा को बैंकों से पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। सबसे ज्यादा ऋण ग्रामीण आर्यावर्त बैंक ने 44 आवेदकों को वितरित किए हैं। इस योजना के तहत 1000 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक कुल 1502 आवेदन हुए हैं। शासन ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना प्रारंभ की गई है। इसका उद्देश्य शिक्षित व प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम पांच लाख रुपये तक का चार वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण जिले की बैंक शाखाओं के माध्यम से दिया जा रहा है। लेकिन बैंक इस योजना को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। इस योजना में अब तक 1502 कुल आवेदन आए हैं। इनमें स्वीकृत 350 आवेदन हुए हैं, जबकि ऋण वितरण 170 को हुआ है। जबकि 416 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं। अभी तक 719 आवेदन लंबित हैं। इस प्रकार 8़ 50 करोड़ रुपये का ऋण आवेदकों को दिया गया है। सबसे ज्यादा 44 युवाओं को ग्रामीण आर्यावर्त बैंक ने वितरित किए हैं।

Neja Mela : संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा

 संभल यूपी के संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले ‘नेजा मेले’ का आयोजन अब नहीं होगा. ‘नेजा मेला’ कमेटी के लोग अनुमति मांगने एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र के पास पहुंचे थे, लेकिन एडिशनल एसपी ने कमेटी को दो टूक मना कर दिया. साथ ही नसीहत देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, भारत में लूटमार व कत्लेआम मचाने वाले की याद में किसी भी मेले का आयोजन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके आप लोग अभी तक अपराध करते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. आपको बता दें कि सैयद सालार मसूद गाजी विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा और सेनापति था.  गजनवी ने 1000 से 1027 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार हमला किया था. इस दौरान उसने हिंदुओं की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों पर भी आक्रमण किया था. संभल पुलिस की ‘नेजा मेला’ कमेटी को दो टूक संभल के एसएसपी श्रीशचंद्र ने ‘नेजा मेला’ कमेटी के लोगों से कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, लुटेरे-हत्यारे की याद में किसी भी मेले का जिले में नहीं होगा. जो कोई व्यक्ति हत्यारे और लुटेरे के साथ रहेगा वह देश के साथ अपराध कर रहा है. आप लोग लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके अपराध करते रहे हैं. जिसने इस लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया वह व्यक्ति भी फिर देशद्रोही है. एसएसपी ने कहा कि ‘नेजा मेला’ एक बुरी कुरीति थी. किसी भी लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया जाना पूरी तरह से गलत है.  कानून व्यवस्था के चलते इजाजत नहीं दी जा रही है. मेला लगाने की कोई अनुमति नहीं है. अगर कोई नियम तोड़ेगा तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. संभल में होली के बाद सैयद सालार मसूद गाजी की याद में ‘नेजा मेला’ लगाया जाता था. इस आयोजन को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी. अब संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया है कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा. इस साल संभल में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाला ‘नेजा मेला’ नहीं लगेगा. इससे पहले ‘नेजा कमेटी’ के पदाधिकारियों ने एसडीएम डॉ. बंदना मिश्रा से मुलाकात की थी. पदाधिकारियों ने उनसे मेले के आयोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन तब भी एसडीएम ने साफ कर दिया था कि ‘नेजा मेले’ के नाम पर कोई अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं, पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि ‘नेजा मेला’ सदियों पुरानी परंपरा है और इसे उसी स्वरूप में आयोजित किया जाना चाहिए. लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी. नेजा मेला क्यों लगाया जाता है संभल में हजारों सालों से चला आ रहे नेजा मेले का इतिहास उस समय का है जब महाराजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी। धार्मिक नगर नेजा कमेटी संभल के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने निजा मेला क्यों मनाया जाता है इसके संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी और उस समय संभल में हजरत शेख पचासे मियां रहमतुल्लाह अलैह का परिवार रहा करता था। उनकी बेटी बहुत खूबसूरत थी, पृथ्वीराज चौहान के बेटे का दिल हजरत शेख पचासे मियां की बेटी पर आ गया। पैगाम पाकर आने का लिया फैसला पिता ने बेटी को सारा माजरा बताया तो बेटी ने कुछ वक्त लेने की बात कही और एक पैगाम अफगानिस्तान में सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्ला अलैह को भेजा और मदद की ख्वाहिश जाहिर की। सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह ने पैगाम पाकर संभल आने का फैसला किया। उसने यहां पृथ्वीराज चौहान को जंग में पराजित किया। इस जंग में शहीद हुए उसके साथियों के आज भी मजार संभल में हैं, जहां मेला लगाया जाता है।  नेजा मेले की खास परंपरा, यहां सजकर बैठतीं हैं दुल्हनें संभल में सैयद सलार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेला पर खास परम्परा के तहत दुल्हनें सजकर बैठीं और घर परिवार व मौहल्ले की महिलाओं ने उनके साज श्रंगार की सराहना कर उन्हें ईनाम दिया। नेजा मेला पर हर साल वह दुल्हनें सजकर बैठती हैं जिनकी शादी पिछले एक साल के दौरान हुई होती है। दुल्हन उसी तरह सजती संवरती है जैसे वह शादी के वक्त सजती संवरती है। शहर के मौहल्ला चौधरी सराय सहित कई मौहल्लों में दुल्हनें सजकर बैठीं। पहले बहुत ज्यादा संख्या में दुल्हनों के सजने की परम्परा था मगर अब बदले वक्त में कुछ संगठन इस पुरानी प्रथा का विरोध करने लगे हैं।  

अयोध्या में ओलो की बारिश, जमीन पर बिछ गई ओलो की परत

अयोध्या यूपी के अयोध्या में सोमवार की सुबह बारिश के साथ ओलो की बरसात हुई। कुछ ही देर में जमीन पर ओलो की परत बिछ गई। ओले गिरने से किसानों के माथे पर चिंता रेखा उभर आई। हालांकि बारिश थोड़ी देर में थम गई। इससे फसलों को किसी बड़े नुकसान का अंदेशा नहीं है। यदि आगे अभी और बारिश होती है तो फसलों को नुकसान जरूर होगा। फिलहाल मौसम साफ हो गया है। धूप खिल गई है। मौसम के साफ होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। उनका कहना है कि खेतों पर फसल पककर खड़ी है। अब काटने की तैयारी है। ऐसे में अधिक बारिश साल भर की मेहनत पर पानी फेर सकती है। बाराबंकी में बारिश के साथ गिरे ओले, किसान चिंतित बाराबंकी में सोमवार को सुबह से मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। बारिश के साथ ओलो की बरसात हुई। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। ओले गिरने से सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। जिला कृषि अधिकारी राजित राम ने बताया कि अभी इतनी बारिश नहीं हुई है, कि फसलों को नुकसान हो। यदि आगे और बारिश होती है तो फसलों को नुकसान होगा, इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने 400 करोड़ सरकार को दिए टैक्स, 5 साल में खर्च किए 2150 करोड़

अयोध्या  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने रविवार को कहा कि ट्रस्ट ने धार्मिक पर्यटन में उछाल के बीच पिछले पांच वर्षों में सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये का कर चुकाया है। उन्होंने कहा कि यह राशि पांच फरवरी 2020 से पांच फरवरी 2025 के बीच चुकाई गई। उन्होंने कहा कि इसमें से 270 करोड़ रुपये माल और सेवा कर (जीएसटी) के रूप में भुगतान किए गए, जबकि शेष 130 करोड़ रुपये अन्य विभिन्न कर श्रेणियों के तहत भुगतान किए गए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में 10 गुना वृद्धि हुई है, जिससे यह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन गया है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान 1.26 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या आए थे। राय ने कहा कि ट्रस्ट के वित्तीय रिकार्ड का नियमित रूप से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अधिकारियों द्वारा ऑडिट किया जाता है। जीएसटी में 272 करोड़ रुपये दिए गए राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक मणिरामदास छावनी में संपन्न हुई। न्यास की बैठक संपन्न हुई। सात सदस्य मौके पर रहे उपस्थित, चार सदस्य विशेष आमंत्रित के तौर पर बैठक में उपस्थित थे। बैठक में सदस्य कामेश्वर चौपाल और पुजारी सत्येंद्र दास जी श्रद्धांजलि दी। बैठक में अकाउंट में जानकारियां दी गईं। 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट का गठन हुआ था। 5 वर्षों में ट्रस्ट के अकाउंट से सरकार के विभिन्न एजेंसियों में 396 करोड़ का भुगतान हुआ है। अकेले जीएसटी 272 करोड़ रुपये दी गई। 2150 करोड़ कुल खर्च किया गया अयोध्या विकास प्राधिकरण को जन्मभूमि के नक्शे के लिए 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जमीन रजिस्ट्रेशन फीस रिवेन्यू टैक्स के तौर पर 29 करोड़ का भुगतान किया गया है। 10 करोड़ का बिजली का बिल का भरा गया है। वहीं पिछले 5 वर्षों में 2150 करोड़ कुल खर्च का भुगतान किया है। वहीं उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से200 करोड़ रुपये का काम दिया गया है। जून तक पूरा हो जाएगा राम मंदिर मंदिर निर्माण को लेकर के भी बैठक में जानकारी दी गई। रामलला का मंदिर जून तक तैयार हो जाएगा। परकोटा निर्माण का कार्य लगभग अक्टूबर तक चलेगा। शबरी निषाद और ऋषियों के सप्त मंदिर मई महीने में पूरे हो जाएगा। शेषा अवतार मंदिर का निर्माण अगस्त में पूरा होगा। मंदिर निर्माण का कार्य 96 प्रतिशत हो गया है। 30 अप्रैल तक राम मंदिर में बनाए जाने वाले सभी मंदिर की मूर्तियां अपने स्थान पर स्थापित हो जाएगी। राम मंदिर में मुख्य पुजारी नहीं होगा राम मंदिर में यात्रियों की सुविधा के लिए गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। यात्रियों के सहयोग से नॉमिनल खर्च देकर के यात्री इसका लाभ ले सकते हैं। वहीं लार्सन टुब्रो को मंदिर निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये भुगतान किया गया। साथ ही बताया गया कि आचार्य सत्येंद्र दास के बाद अब राम मंदिर में कोई मुख्य पुजारी नहीं होगा।

गाजीपुर कारागार के जेलर और डिप्टी जेलर पर योगी सरकार ने की बड़ी कार्रवाई

गाजीपुर यूपी के गाजीपुर जिला जेल के जेलर राकेश वर्मा और डिप्टी जेलर सुखवती देवी के खिलाफ योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल ने दोनों को सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही डीजी जेल ने शासन को पत्र लिखा कर जेल अधीक्षक पर कार्रवाई की संस्तुति की है। मामला बंदी द्वारा अवैध रूप से फोन कॉल करने से जुड़ा है। बता दें कि फरवरी महीने में जेल के अंदर से एक युवक को धमकी भरा फोन आया था। युवक ने एसपी ग्रामीण को तहरीर देकर बताया था कि ठगी के मामले में जेल में बंद बक्सूबाबा एकेडमी के संचालक विनोद गुप्ता ने उसे फोन पर धमकी दी थी। मामले को गम्भीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने छानबीन शुरू कराई। मामले में स्वाट व सर्विलांस टीम ने जंगीपुर थाना क्षेत्र के बिलाईच गांव निवासी पम्मी यादव नामक युवक को दबोचा। जिसने बताया कि जेल के अंदर उसने ही सिमकार्ड पहुंचाया था। उसने बताया कि जेल में बंद उसके चचेरे भाई बजरंगी यादव ने सिमकार्ड मंगवाया था और उस सिम का प्रयोग बजरंगी व विनोद गुप्ता ने किया। बंदी विनोद गुप्ता के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हो गया। मामले की जांच पूरी हो गई। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के अनुसार, जेल अधीक्षक के रीडर की भूमिका संदिग्ध मिली है। कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन में भेज दी गई। अब इस मामले में डीजी जेल ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला जेल से कुछ बंदी शिफ्ट किए जाएंगे जिला जेल में मोबाइल चलने और ठगी के आरोपी विनोद गुप्ता के फोन कर गवाहों को धमकी देने के मामले में कई बंदियों और सजायाफ्ता कैदियों की जेल बदल सकती है। सूत्रों के अनुसार ट्रांसफर होने वाले कैदी और बंदियों की लिस्ट बन गई है। जल्द ही कार्रवाई संभव है। जेल प्रशासन ने चार चिन्ह्नित बंदियों के जेल स्थानान्तरण की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी की जा रही है। बहुत जल्द ही जेल प्रशासन अपनी रिपोर्ट शासन तक पहुंचा देगा। इसके बाद स्थानान्तरण की प्रक्रिया पूरी कर दी जायेगी।

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