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तिरंगा यात्रा में उमड़ा जन सैलाब, नागरिकों ने दिया एकजुटता और देशभक्ति का संदेश

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा की जब भी बात आएगी हम सभी एक हैं। देश के, अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपनी सेना के साथ हैं। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा में सभी वर्गों के लोग, सेवानिवृत्त सैनिक, समाज सेवी संगठन, आम नागरिक, महिला एवं पुरुष, बच्चों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर एकजुटता, देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय सेना ने आपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में 9 आतंकवादी ठिकानों को पूरी तरह धराशायी कर दिया। हम सभी अपनी सेना के अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन करते हैं। आज का भारत नया भारत है, जो किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है। हमें सर झुकाने की जरूरत नहीं होगी, हमारा डंका पूरी दुनिया में बजेगा। उन्होंने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी की कुशल कूटनीति के कारण पूरे विश्व में देश का सम्मान बढ़ा है और पाकिस्तान का आतंकवाद को शह देने का चेहरा उजागर हुआ है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी स्थगित हुआ है बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कह की आज के इस दौर में हमें अफवाहों से सचेत रहने की जरूरत है। हमें हमारी सेना एवं नेतृत्व में पूर्ण विश्वास है उनके हाथों में देश सुरक्षित है। लोकसभा सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि तिरंगा यात्रा के माध्यम से आज हम एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इस अवसर पर जगदलपुर विधायक किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नया भारत का नया पैमाना तय किया जा रहा है जिसमें देश के दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है। हमारे सैनिकाें पर हमें पूरा विश्वास है उनके शौर्य और पराक्रम से हमारा देश सुरक्षित है। पहलगाम आतंकवादी हमला का जवाब ऑपरेशन सिंदूर हमारे अभिमान का प्रतीक है एवं माता बहनों की उजड़ी मांग के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम के संयोजक एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम संजय श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए देश के 140 करोड़ नागरिक एकजुट हैं, हम सभी सेना के जवानों के साथ खड़े हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और देश की आन, बान और शान, भारतीय सैनिकों के साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन करते हुए आज निकली गई तिरंगा यात्रा में लगभग 10 हजार लोग शामिल हुए। तिरंगा यात्रा मरीन ड्राइव से नगर घड़ी चौक तक निकाली गई। जिसमें सभी धर्म, जाति, संप्रदाय और सभी वर्गों के लोग भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के साथ हाथ में तिरंगा थामे शामिल हुए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मामले तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, स्वास्थ मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा सहित विधायकगण, महापौर श्रीमती मीनल चौबे उपस्थित थीं।

इस निर्णायक उपलब्धि को नक्सलमुक्त भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम : मुख्यमंत्री साय

 2026 तक नक्सलमुक्त भारत हमारा संकल्प है: सफल नक्सल ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सुरक्षा बलों के साहस की सराहना लाल आतंक के विरुद्ध निर्णायक विजय: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों के साहस और समर्पण को किया नमन इस निर्णायक उपलब्धि को नक्सलमुक्त भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम : मुख्यमंत्री साय रायपुर नक्सल उन्मूलन अभियान को निर्णायक मोड़ पर ले जाते हुए छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर  नक्सल विरोधी ऑपरेशन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक सफलता पर सुरक्षा बलों को बधाई दी है और इस निर्णायक उपलब्धि को नक्सलमुक्त भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए हम दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने सुरक्षा बलों  विशेषकर सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि लाल आतंक के विरुद्ध चल रही इस निर्णायक लड़ाई में हमारे वीर जवानों ने विषम परिस्थितियों में पूरी बहादुरी से नक्सलियों का सामना किया है। उनके अदम्य साहस, धैर्य और पराक्रम को मैं नमन करता हूं। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि अब वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा, और बस्तर के गांव-गांव में शांति, समृद्धि और विकास की नई रोशनी फैलेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके बताया है कि छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के दुर्गम क्षेत्र पर हाल ही में हुए अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 31 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराकर नक्सल उन्मूलन अभियान में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इलाके किया है कि  यह क्षेत्र रणनीतिक योजना, नक्सल प्रशिक्षण और हथियार निर्माण का गढ़ रहा है। आज उसी पहाड़ पर शान से तिरंगा लहरा रहा है – यह भारत की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता की विजय का प्रतीक है।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए संकल्पित हैं। मैं देशवासियों को पुनः विश्वास दिलाता हूँ कि 31 मार्च 2026 तक भारत का नक्सलमुक्त होना तय है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन महज 21 दिनों में पूरा हुआ, और इसमें सुरक्षा बलों का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ, जो हमारी रणनीति, समन्वय और शौर्य का प्रमाण है। उन्होंने सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों को खराब मौसम और कठिन भूगोल के बावजूद दिखाए गए अदम्य साहस और अनुशासन के लिए बधाई दी। शाह ने यह भी कहा कि यह सफलता केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक और वैचारिक विजय भी है, जिसने नक्सल नेटवर्क की रीढ़ को हिला दिया है। देश और विशेषकर छत्तीसगढ़ की जनता को यह विश्वास दिलाता है कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कभी लाल आतंक की सत्ता थी, वहाँ आज राष्ट्रध्वज की छाया में शांति, विकास और संविधान का शासन स्थापित हो चुका है।यह अभियान आने वाले समय में सुरक्षा बलों के लिए मॉडल ऑपरेशन के रूप में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य और केंद्र के बीच समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि यह साझा प्रयासों का ही परिणाम है कि इतने बड़े अभियान में ज़ीरो कैज़ुअल्टी के साथ इतनी बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा और सामर्थ्य के साथ कार्य कर रही हैं। अमित शाह ने कहा कि यह लक्ष्य अब केवल रणनीति नहीं, राष्ट्रीय संकल्प है।

यह माओवाद पर निर्णायक प्रहार है- मुख्यमंत्री साय

रायपुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी गढ़ माने जाने वाले करेगुट्टालू पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा संयुक्त रूप से 21 अप्रैल से 11 मई 2025 तक चलाए गए 21 दिवसीय व्यापक नक्सल विरोधी अभियान में कुल 31 वर्दीधारी माओवादी मारे गए, जिनमें 16 महिलाएं शामिल हैं। अभियान के दौरान माओवादियों के 216 ठिकानों और बंकरों को ध्वस्त किया गया तथा भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। यह अभियान छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य माओवादियों की सशस्त्र क्षमता को समाप्त कर राज्य के विकास को गति देना है। करेगुट्टालू पहाड़ी, जो छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना के मुलुगू जिले की सीमा पर स्थित है, को माओवादी संगठन वर्षों से अपनी सुरक्षित शरणस्थली के रूप में उपयोग कर रहे थे। इस 60 किलोमीटर लंबे और अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में पीएलजीए बटालियन की टेक्निकल यूनिट सहित लगभग 300-350 माओवादी सक्रिय थे। यहां से देसी हथियार, आईईडी और बीजीएल शेल तैयार किए जा रहे थे। अभियान के दौरान माओवादियों की 4 तकनीकी इकाइयों को भी नष्ट किया गया, जहाँ से 4 लेथ मशीनें, 450 नग आईईडी, 818 बीजीएल शेल, 899 बंडल कार्डेक्स, डेटोनेटर और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। इसके अतिरिक्त राशन, दवाइयां और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बरामद हुईं। लगातार 21 दिनों तक चले इस अभियान में कुल 21 मुठभेड़ें हुईं। 3 शव 24 अप्रैल, 1 शव 5 मई, 22 शव 7 मई और 5 शव 8 मई को बरामद किए गए। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों के 18 जवान आईईडी विस्फोटों में घायल हुए। हालांकि सभी जवान खतरे से बाहर हैं और उन्हें बेहतर इलाज प्रदान किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बावजूद जवानों ने साहस और धैर्य के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता पर कहा कि बीजापुर जिले की करेगुट्टालू की पहाड़ी पर हमारे जवानों ने जिस शौर्य और साहस का प्रदर्शन किया है, वह माओवाद पर निर्णायक प्रहार है। यह केवल ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारत के तिरंगे की विजय यात्रा है। मैं सभी वीर सुरक्षाकर्मियों को हृदय से बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह लड़ाई माओवाद की जड़ों तक पहुँच चुकी है और हम मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त करने में सफल होंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2025 के शुरुआती चार महीनों में राज्य में कुल 174 हार्डकोर माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़ के चलते माओवादी संगठन बिखर रहे हैं और छोटे-छोटे समूहों में विभाजित हो रहे हैं। बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र और नारायणपुर के माड़ क्षेत्र में भी ऑपरेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य शासन का उद्देश्य माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में आमजनों का विश्वास अर्जित करते हुए समावेशी विकास सुनिश्चित करना और समयबद्ध रूप से माओवाद का समूल उन्मूलन करना है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के दुष्कर्म मामले में डॉक्टरों की निगरानी में उसका गर्भपात कराने की अनुमति दी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म की शिकार आठवीं कक्षा की 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने यह फैसला पीड़िता के स्वास्थ्य को देखते हुए लिया, जिसे गर्भ ठहरने के बाद से गंभीर शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने हाई कोर्ट को अवगत कराते हुए कहा था कि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया गया, तो छात्रा की जान को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने इसको बेहद गंभीरता से लिया। पीड़िता महज एक नाबालिग छात्रा है, जो आरोपी के बहकावे में आकर उसके साथ चली गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद छात्रा ने परिजनों के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1), 64(2), 64(2)(एफ), 64(2)(एम), 365(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध दर्ज किया। चिकित्सकीय रिपोर्ट ने दिया खतरे का संकेत सरकारी अस्पताल में हुई चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि पीड़िता 10 सप्ताह 4 दिन की गर्भवती है और भ्रूण जीवित अवस्था में है। शुरुआत में डॉक्टरों ने पीड़िता की उम्र और मामले की न्यायिक स्थिति को देखते हुए गर्भपात की अनुमति नहीं दी थी। गर्भ की अवधि बढ़ने के साथ ही पीड़िता को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होने लगीं। डॉक्टरों ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया, तो छात्रा की जान को खतरा हो सकता है। सीएमएचओ की रिपोर्ट के आधार पर अनुमति हाई कोर्ट के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने पीड़िता का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण कराया और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि पीड़िता का गर्भपात किया जाना आवश्यक है। इससे उसकी जान को खतरा नहीं होगा। इस आधार पर न्यायालय ने विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में अबार्शन कराने की अनुमति दे दी। पीड़िता की गोपनीयता व गरिमा बनी रहे हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़िता की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता या उसकी कानूनी अभिभावक की उपस्थिति में वह जिला अस्पताल में रिपोर्ट करें, जहां डाक्टरों की टीम एक बार फिर से मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की जांच करेगी। सब कुछ ठीक पाए जाने पर गर्भपात की प्रक्रिया की जाएगी। कोर्ट ने एक और अहम आदेश में यह भी कहा कि गर्भपात के बाद भ्रूण को संरक्षित रखा जाए और उसका डीएनए नमूना लिया जाए, ताकि आगे की जांच में उसका उपयोग किया जा सके।  

मनेंद्रगढ़ में रेल परियोजना को गति, भू-अर्जन के लिए सर्वे सूची जारी, 30 दिनों में दर्ज कराएं दावा-आपत्ति

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ आज मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में यात्री सुविधाओं के विस्तार और रेल परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल की कोशिशें रंग ला रही हैं। उनके अथक प्रयासों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी-नागपुर रोड हाल्ट रेलवे प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में रेल मंत्रालय ने रेल अधिनियम 1989 की धारा 20(ए) के तहत एक अधिसूचना जारी की है। इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय विधायक साल 2017 से है प्रयासरत है। इसके बाद साल 2018 में रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के मध्य पचास पचास प्रतिशत राशि से निर्माण कार्य के लिए एमओयू हुआ था। किन्तु सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन सरकार ने ये कह कर प्रोजेक्ट को रोक दिया कि इसकी स्थानीय स्तर पर कोई उपयोगिता नहीं है। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय से पहले बजट में है इस प्रोजेक्ट के लिए राशि की मांग रखी जिसे पहले बजट में है वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा स्वीकृत कर राशि जारी कर दी गई।  इसके पश्चात शुरू हुई अन्य प्रक्रियाओं के तहत भू अर्जन हेतु सर्वे प्रक्रिया पूर्ण कर रेल मंत्रालय के द्वारा राजपत्र में भू अर्जन के लिए अधिसूचना का प्रकाशन किया गया है। इस अधिसूचना के तहत भू-अर्जन के लिए सर्वे सूची जारी की गई है, जिसमें चिराईपानी, सरोला, बंजी, खैरबना, सरभोका और चित्ताझोर गांवों के भूखंडों के खसरा नंबर और अन्य विवरण शामिल हैं। सर्वे सूची में उल्लिखित भूखंडों के संबंध में यदि किसी को कोई आपत्ति या दावा है, तो वे 30 दिनों के भीतर अपर कलेक्टर या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लिखित रूप में अपनी अपील दर्ज करा सकते हैं। यह कदम न केवल स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति देगा। मंत्री जायसवाल के प्रयासों से एमसीबी जिला विकास की नई ऊंचाइयों को छूने की ओर अग्रसर है। इस रेल प्रोजेक्ट के शुरू हो जाने से चिरमिरी को राज्य और राष्ट्र स्तर पर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और इसके साथ ही यहां के लोगों को शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य जैसे अनेक सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा।

मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान शुरू करने को मंजूरी

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में शासकीय विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हेतु एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” शुरू करने को मंजूरी दी गई, जो छत्तीसगढ़ में शिक्षा की संरचना और परिणामों को एक नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा जीवन निर्माण की प्रक्रिया है। हमारी सरकार का संकल्प है कि राज्य के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समग्र शिक्षा मिले, चाहे वह किसी भी कोने में क्यों न रहता हो। उन्होंने इसे भविष्य निर्माण की नींव बताया और कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना राज्य का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य है। इस अभियान के अंतर्गत राज्य भर के शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीतियाँ लागू की जाएंगी। स्कूल शिक्षा विभाग शीघ्र ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिनमें विद्यालय स्तर पर क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा दी जाएगी। विद्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान की प्रमुख विशेषता है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षण प्रक्रिया, विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ, आधारभूत सुविधाएँ और शिक्षक उपस्थिति जैसे संकेतकों के आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। यह पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की नई मिसाल होगी। जो विद्यालय अपेक्षित गुणवत्ता तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। यह कार्य न केवल शिक्षा विभाग द्वारा, बल्कि अन्य विभागों के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से किया जाएगा, जिससे सामुदायिक निगरानी को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक ओर जहाँ कमजोर विद्यालयों को चिन्हित किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर मॉडल विद्यालयों का चयन कर भी किया जाएगा। कमजोर विद्यालयों के शिक्षकों को इन मॉडल स्कूलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे श्रेष्ठ शैक्षणिक व्यवहार और व्यवस्थाओं से प्रेरणा ले सकें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पालक-शिक्षक सहभागिता मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू है। पालक-शिक्षक बैठकों (PTM) को एक औपचारिकता नहीं, बल्कि संवाद और सहभागिता का माध्यम बनाया जाएगा। इससे शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और बच्चों की प्रगति पर संयुक्त रूप से कार्य हो सकेगा। इस अभियान के तहत कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष फोकस रहेगा। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे आधुनिक शिक्षण विधियों, टेक्नोलॉजी के उपयोग और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाएँ, जिससे सीखने की प्रक्रिया आनंददायक और प्रभावी हो। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि यह अभियान केवल शिक्षा विभाग का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम शिक्षा को केवल पहुंच का विषय नहीं, बल्कि गुणवत्ता का विषय भी बनाता है। मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान न केवल प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल बनाएगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बड़े बदलाव: युवाओं, किसानों, उद्यमियों और निवेशकों को मिलेगा सीधा लाभ

राज्य मंत्रिपरिषद का ऐतिहासिक निर्णय – छत्तीसगढ़ औद्योगिक क्रांति की ओर एक और कदम रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को देश का अगला औद्योगिक और रोजगार हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई अहम संशोधनों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जो आने वाले वर्षों में राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देगा। स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्राथमिकता – बढ़ेगा रोजगार संशोधित नीति के अनुसार, जिन उद्योगों में छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोजगार मिलेगा, उन कंपनियों को सरकार की ओर से विशेष अनुदान मिलेगा। इससे स्थानीय रोजगार दर में तेज़ी आएगी और पलायन पर भी अंकुश लगेगा। आधुनिक खेती को मिलेगा संस्थागत समर्थन हाइड्रोपोनिक और एयरोपोनिक जैसी हाईटेक फार्मिंग तकनीकों को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल कर किसानों को आधुनिक उपकरण, ऑटोमेशन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी तकनीकों से जोड़ा जाएगा। इससे खेती की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ेगी। खेल प्रशिक्षण और अकादमियों को प्रोत्साहन राज्य सरकार खेल और युवा सशक्तिकरण को प्राथमिकता देती हुई खेल अकादमी और निजी प्रशिक्षण केंद्रों को प्रोत्साहन देगी। इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का विकास भी होगा। उच्च शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहन देकर छत्तीसगढ़ को शैक्षणिक हब के रूप में भी विकसित करने की योजना है। इससे राज्य के छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा के अवसर यहीं उपलब्ध होंगे। ऑटोमोबाइल सेक्टर को विस्तार अब ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग एवं सर्विस यूनिट्स को हर विकासखंड समूह में मान्यता दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी तकनीकी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटन और होटल व्यवसाय को नई उड़ान बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में होटल-रिसॉर्ट के निर्माण हेतु निवेश की न्यूनतम सीमा कम की गई है। इससे इन इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को आजीविका के साधन मिलेंगे। कपड़ा उद्योग को मिलेगा दोगुना प्रोत्साहन टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों को 200% तक का प्रोत्साहन मिलेगा। इससे महिलाओं एवं ग्रामीण कारीगरों को सिलाई, बुनाई और कढ़ाई जैसे रोजगारों में अधिक अवसर मिलेंगे। छत्तीसगढ़ बनेगा लॉजिस्टिक हब नई लॉजिस्टिक नीति के तहत पूरे राज्य में माल परिवहन को आसान बनाया जाएगा। इससे व्यापारियों को लागत में कमी, समय की बचत और बाजारों तक तेज पहुंच मिलेगी। दिव्यांगजनों को मिलेगा विशेष लाभ दिव्यांगजनों की परिभाषा में बदलाव कर उन्हें अधिक से अधिक योजनाओं में शामिल किया जाएगा। यह समावेशी विकास की दिशा में सरकार का सराहनीय कदम है।   रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर को स्पेशल पैकेज राज्य अब ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में भी निवेश आकर्षित करने हेतु विशेष प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करेगा। निजी औद्योगिक पार्कों को मिलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर अनुदान “प्लग एंड प्ले” फैक्ट्रियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ निजी औद्योगिक पार्कों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन मिलेगा। प्रदेश में इज ऑफ लिविंग को बढ़ावा प्रदेश में इज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने हेतु निजी सीबीएसई स्कूल और मिनी मॉल (मल्टीप्लेक्स युक्त) को भी थ्रस्ट सेक्टर की तरह मान्यता दी जाएगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां ये सुविधाएं नहीं हैं। समावेशी और क्षेत्रीय संतुलन आधारित नीति यह नीति राज्य के सभी क्षेत्रों  के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार करती है। इससे क्षेत्रीय असमानता में कमी आएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह संशोधित नीति केवल आर्थिक वृद्धि का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, युवाओं के भविष्य और किसानों के सशक्तिकरण का यंत्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष निवेश स्थलों में शामिल होगा।

कलाकारों और साहित्यकारों के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक है मासिक पेंशन बढ़ाने का निर्णय: मुख्यमंत्री साय

मासिक पेंशन 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये – 162 कलाकारों को मिलेगा सम्मान और संबल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के उन कलाकारों और साहित्यकारों के लिए एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक निर्णय लिया गया, जो आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। अब इन्हें दी जाने वाली मासिक वित्तीय सहायता (पेंशन) राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे कलाकार और साहित्यकार समाज की आत्मा हैं। उनका योगदान अमूल्य है। यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके प्रति राज्य की संवेदना और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बजट सत्र में की गई घोषणा का परिपालन है, और हमारी सरकार हर वर्ग के सशक्तिकरण हेतु प्रतिबद्ध है। यह पेंशन संस्कृति विभाग की वित्तीय सहायता योजना नियम-1986 के अंतर्गत दी जाती है। इस योजना की शुरुआत 1986 में हुई थी, जब सहायता राशि न्यूनतम 150 रुपये और अधिकतम 600 रुपये थी। बाद में 2007 में इसे 1500 रुपये और 2012 में 2000 रुपये किया गया, लेकिन 12 वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई थी। उल्लेखनीय है कि राज्य में वर्तमान में कुल 162 कलाकारों और साहित्यकारों को यह मासिक पेंशन दी जा रही है। अब उन्हें सालाना 24 हजार की जगह 60 हजार रुपये मिलेंगे, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतें बेहतर ढंग से पूरी कर सकेंगे। मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस संशोधन से राज्य पर कुल  58.32 लाख रुपये का वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार आएगा। पहले जहां कुल वार्षिक व्यय 38.88 लाख रुपये था, वह अब बढ़कर 97.20 लाख रुपए वार्षिक हो जाएगा। लेकिन यह व्यय राज्य सरकार के लिए गौरवपूर्ण कर्तव्य है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन लोगों ने कला, साहित्य और संस्कृति की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनका आत्मसम्मान बनाए रखना हमारा दायित्व है। यह निर्णय संवेदनशील और समावेशी शासन का प्रमाण है। सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक सहारा देगा, बल्कि कलाकारों और साहित्यकारों को आत्मबल और सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रदान करेगा।

बलरामपुर में अवैध रूप से सवारियां ढोने वाले वाहनों पर की कार्रवाई

बलरामपुर छत्तीसगढ़ के खरोरा में हुए दिल दहला देने वाले सड़क हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है. निजी उपयोग के वाहनों में अवैध रूप से सवारी ढोने वालों पर सख्ती बरती जा रही है. इसी कड़ी में परिवहन विभाग ने बलरामपुर जिले के धनवार चेक पोस्ट पर कार्रवाई की है. उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे गिरवानी मार्ग पर एक अवैध सवारी वाहन को पकड़ा है. परिवहन विभाग के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी वाहनों को अवैध रूप से कमर्शियल उपयोग में लाया जा रहा है. इस पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों की टीम ने कार्रवाई शुरू की. अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान पूरे दिन चलेगा और ऐसे अवैध वाहनों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी. दोबारा न हों खरोरा जैसी घटनाएं… सडकों पर उतरे अधिकारी   इस कार्रवाई के तहत एक वाहन को जब्त कर रघुनाथनगर थाने को सुपुर्द किया गया है. विभाग का स्पष्ट कहना है कि खरोरा जैसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ऐसे वाहनों पर लगातार नजर रखी जाएगी.

अवैध रेत खनन में कांस्टेबल की हत्या के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को जारी किया नोटिस

बलरामपुर छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित बलरामपुर जिले के लिबरा गांव में 11 मई की रात अवैध रेत परिवहन की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम पर रेत माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कांस्टेबल शिव भजन सिंह की ट्रैक्टर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और आम जनता में भारी आक्रोश है। घटना के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को नोटिस जारी किया है। वहीं, अब तक की जांच में सामने आया है कि जिस क्षेत्र में यह घटना घटी वहां वर्षों से अवैध रेत तस्करी जारी थी, लेकिन खनिज विभाग की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। बता दें कि सीमावर्ती झारखंड राज्य के गढवा क्षेत्र में रेत का अवैध भंडारण इस कदर हो गया है कि वह अब ‘रेत के पहाड़’ का रूप ले चुका है। हालांकि, घटना के बाद उन्हें जल्द से जल्द हटाने का कार्य भी जारी है। पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने भी गढवा के उपायुक्त को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि यदि इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में हालात यह हैं कि स्थानीय प्रशासन चाहे कलेक्टर हों या एसडीएम अब तक इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं कर पाए हैं। खनिज विभाग के अधिकारी न तो जनता, न जनप्रतिनिधियों और न ही पत्रकारों के कॉल्स का जवाब दे रहे हैं। फील्ड विजिट की तो बात ही दूर है। माना जा रहा है कि अगर विभाग समय पर सतर्क होता, तो कांस्टेबल शिव भजन सिंह की जान बचाई जा सकती थी। आईजी ने थाना प्रभारी को किया निलंबित हालांकि, घटना के बाद सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा ने तत्परता दिखाते हुए सनवाल थाना प्रभारी को बिना पर्याप्त बल के कार्रवाई की अनुमति देने के आरोप में निलंबित कर दिया है। लेकिन जिला कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने अब तक खनिज विभाग या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से कोई जवाब-तलब नहीं किया है। स्थानांतरण के बाद भी खनिज अधिकारी को नहीं किया गया रिलीव गौरतलब है कि खनिज अधिकारी अजय रंजन दास का स्थानांतरण 8 मई को रायगढ़ कर दिया गया था, लेकिन वे अब तक रिलीव नहीं हुए हैं। सनवाल थाना क्षेत्र के पचावल, कुंदरू, तारकेश्वरपुर, लिब्रा, बाल चौरा और अनिरुद्धपुर जैसे गांवों में अवैध रेत खनन जोरों पर जारी है और माइनिंग विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कलेक्टर ने की घटना की निंदा जब इस पूरे घटनाक्रम पर कलेक्टर राजेंद्र कटारा से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने बताया कि, “घटना निंदनीय है। संबंधित क्षेत्र छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर है, जिसमें छत्तीसगढ़ हिस्से में भी अवैध खनन हुआ है। कुछ शिकायतें पहले भी मिली थीं और मैंने एसडीएम को मौके पर भेजा था। तीन ट्रैक्टर पुलिस ने पहले भी पकड़े थे। हालांकि, तब खनिज संपदा लोड न होने की वजह से मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण थोड़ी कठिनाई आती है, लेकिन अवैध उत्खनन जैसे कार्यों पर रोक लगाया जाएगा। सरगुजा आईजी दीपक झा घटना पर लगातार बनाए हुए हैं नजर गौरतलब है कि सरगुजा आईजी दीपक झा घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सनवाल क्षेत्र में ही डेरा डाले हुए हैं। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ संदेहियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

हाईकोर्ट ने डीएमएफ घोटाला मामले में रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समेत 4 आरोपियों की जमानत खारिज

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने आज पूर्व IAS रानू साहू, पूर्व सीएम के उप सचिव सौम्या चौरसिया, एनजीओ संचालक मनोज कुमार और बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी की स्थायी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में एफआईआर और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने बाद आवेदक की धारा 7 और 12 के तहत अपराध करना प्रतीत होता है. प्रथम दृष्टया पीसी एक्ट के तहत आर्थिक अपराध परिलक्षित होता है. एफआईआर और रिकॉर्ड में रखी गई अन्य सामग्री को देखते हुए, प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आवेदक का संबंधित अपराध में संलिप्तता है. जानिए क्या है DMF घोटाला: प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, ईडी की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है. केस में यह तथ्य सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है. टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया. जांच रिपोर्ट में यह पाया गया है कि टेंडर की राशि का 40% सरकारी अफसर को कमीशन के रूप में दिया गया है. प्राइवेट कंपनियों के टेंडर पर 15 से 20% अलग-अलग कमीशन सरकारी अधिकारियों ने ली है. ED ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया था कि IAS अफसर रानू साहू और कुछ अन्य अधिकारियों ने अपने-अपने पद का गलत इस्तेमाल किया.

बोदरी में समाधान शिविर बना बुजुर्गों के लिए वरदान, वय वंदन योजना के तहत मिली 5 लाख तक की स्वास्थ्य सुरक्षा

हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार बिलासपुर, बोदरी में आयोजित समाधान शिविर में बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली। समाधान शिविर में आयुष्मान वय वंदन योजना के तहत  अनेक वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य सहायता दी गई , योजना से लाभान्वित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार।      बोदरी नगर पालिका क्षेत्र के निवासी वरिष्ठ नागरिक श्री शत्रुघ्न उपाध्याय, श्रीमती राधा तिवारी और श्रीमती जसमीत कौर की आंखों में चमक और चेहरे पर खुशी उस समय दिखाई पड़ी जब उन्हें आयुष्मान वय वंदन योजना के तहत वय वंदन कार्ड वितरित किए गए। इन कार्डों के माध्यम से अब इन हितग्राहियों को 5 लाख रुपये तक की नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। बुजुर्ग हितग्राहियों ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बढ़ती उम्र में जब स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ जाती हैं, तब सरकार द्वारा दी जा रही यह सहायता उनके लिए बड़ी राहत है।    श्री शत्रुघ्न उपाध्याय ने भावुक होकर कहा, कि “पहले इलाज के लिए बड़ी आर्थिक समस्या होती थी, अब इस कार्ड से हमें बड़ी राहत मिलेगी। यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं।” इसी तरह शिविर में  समस्या का त्वरित निराकरण होने पर श्रीमती राधा  तिवारी और श्रीमती जसमीत कौर ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताया, उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य संबंधी उनकी एक बड़ी चिंता दूर हो गई है। उन्होंने सुशासन तिहार की पहल को सरकार की एक संवेदनशील पहल बताया। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा  बुजुर्गों के सम्मान एवं उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जा रही है,जिसके तहत उन्हें 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविरों में आम लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।     उल्लेखनीय है कि वय वंदन योजना बुजुर्गों के स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में एक अहम पहल है जिसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर 5 लाख रुपये तक की नि:शुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाती है। योजना के तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पंजीकृत अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को वय वंदन स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाता है, जो उनकी पहचान और पात्रता का प्रमाण होता है। इस कार्ड से अस्पताल में भर्ती से लेकर इलाज तक की सारी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो जाती है। योजना का उद्देश्य है कि बुजुर्गों को इलाज के आर्थिक बोझ से मुक्ति मिले और वे सम्मानपूर्वक और स्वस्थ जीवन जी सकें

नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन कामयाब, कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता हाथ लगी है। कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया है। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं। सीआरपीएफ के डीजी ने जानकारी दी कि नक्सल विरोधी अभियान की शुरुआत 2014 में हुई थी, लेकिन 2019 के बाद से इस अभियान ने अधिक गति पकड़ी है। जवानों के लिए देश भर में संयुक्त प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, जिससे उनकी रणनीतिक और सामरिक क्षमताओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जहां 2014 में 35 जिले नक्सली गतिविधियों के केंद्र हुआ करते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर मात्र 6 जिलों तक सीमित रह गई है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के चलते नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ‘नक्सल फ्री भारत’ के संकल्प में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के कुर्रगुट्टालू पहाड़ (केजीएच) पर 31 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराया। गृह मंत्री ने कहा कि जिस पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहां आज शान से तिरंगा लहरा रहा है। कुर्रगुट्टालू पहाड़ पीएलजीए बटालियन 1, डीकेएसजेडसी, टीएससी और सीआरसी जैसी बड़ी नक्सल संस्थाओं का यूनिफाइड हेडक्वार्टर था, जहां नक्सल ट्रेनिंग के साथ-साथ रणनीति और हथियार भी बनाए जाते थे। उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी इस सबसे बड़े अभियान को हमारे सुरक्षा बलों ने मात्र 21 दिनों में पूरा किया और मुझे अत्यंत हर्ष है कि इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों में एक भी जानहानि नहीं हुई। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में भी अपनी बहादुरी और शौर्य से नक्सलियों का सामना करने वाले हमारे सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों को बधाई देता हूं। पूरे देश को आप पर गर्व है। शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए संकल्पित हैं। मैं देशवासियों को पुनः विश्वास दिलाता हूं कि 31 मार्च 2026 तक भारत का नक्सलमुक्त होना तय है।” उल्लेखनीय है कि सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के सहयोग से अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। कर्रेगुट्टा जैसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार की कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतर्कता और साहस का प्रमाण है।

घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस टास्क फोर्स का गठन, अब तक 128 संदिग्धों की पहचान, 9 हिरासत में

कवर्धा भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र कबीरधाम जिले में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया गया है। जिला पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक विशेष ‘पुलिस टास्क फोर्स’ का गठन किया है, जो संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए जगह-जगह अभियान चला रही है। बता दें कि टास्क फोर्स की ताजा कार्रवाई में 6 उत्तर प्रदेश और 3 अन्य जिलों के कुल 9 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान इनके पास वैध पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं पाए गए, जिसके चलते इनके खिलाफ धारा 128 बीएनएसएस के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। एडिशनल एसपी पुष्पेन्द्र बघेल के नेतृत्व में गठित इस टीम में डीएसपी कृष्ण कुमार चंद्राकर, कोतवाली प्रभारी, दो टीआई और 50 से अधिक पुलिस जवान शामिल हैं। टीम ने मंगलवार को आदर्श नगर, कसाई पारा, अटल आवास, समनापुर और हरिनछपारा गांव में सघन और अचानक चेकिंग अभियान चलाया। एएसपी बघेल ने बताया कि यह विशेष टीम बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों की अवैध घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से गठित की गई है। अब तक जिले में 128 संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साथ ही, मकान मालिकों से कहा गया है कि वे किरायेदारों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराएं, ताकि असामाजिक तत्वों की पहचान समय रहते की जा सके।

भारतीय सेना के सम्मान में कांग्रेस ने किया मंत्री विजय शाह का पुतला दहन

कोंडागांव भारतीय सेना और उनके सम्मान को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मध्यप्रदेश केबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में कांग्रेस ने तीखा रुख अपनाया है. इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करने के निर्देश दिए, जिसके तहत कोंडागांव जिला कांग्रेस कमेटी ने जोरदार प्रदर्शन किया और मंत्री विजय शाह का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारतीय सेना देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों की संस्था है, और उसके किसी भी अधिकारी के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल न केवल अस्वीकार्य है बल्कि राष्ट्र की अस्मिता पर हमला है. मंत्री विजय शाह की टिप्पणी को सेना के गौरव के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर एकत्र होकर नारेबाजी की और उनका पुतला जलाकर विरोध जताया. कोंडागांव जिला कांग्रेस अध्यक्ष बुधराम नेताम ने इस मौके पर कहा, “हम सेना और उसके जवानों के सम्मान के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार हैं. मंत्री विजय शाह की टिप्पणी केवल कर्नल सोमिया का ही नहीं, बल्कि समस्त भारतीय सेना का अपमान है. जब तक वे सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, हमारा विरोध जारी रहेगा.” प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, NSUI और अन्य प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता भी भारी संख्या में उपस्थित रहे. उन्होंने एक स्वर में कहा कि भारतीय सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए और जो नेता इस तरह की बयानबाजी करते हैं, उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा नेतृत्व इस मामले में संज्ञान ले और मंत्री विजय शाह को उनके पद से हटाया जाए. यदि ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस राज्यभर में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रही है.

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