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कांकेर के अखिल सेन ने 12वीं में किया टॉप, हासिल किया 98.20 प्रतिशत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हायर सेकेण्डरी परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित कर दिया है. कांकेर जिले के छात्र अखिल सेन ने 98.20 प्रतिशत अंक के साथ 12वीं में टॉप किया है. इस साल 12वीं का रिजल्ट 81.87 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल 12वीं का रिजल्ट 87.04% रहा था. सीएम ने सभी छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी है. यहां देख सकेंगे सीजी बोर्ड का रिजल्ट बता दें कि इस साल कक्षा 12वीं में 2 लाख 40 हजार 356 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी. इसमें से 81.87 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं. छत्तीसगढ़ बोर्ड कक्षा 10वीं, 12वीं का परिणाम (CGBSE CG Board Result 2025) सीजीबोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों cgbse.nic.in, results.cgbse.nic.in, cg.nic.in और results.cg.nic.in पर जारी किया गया है. परीक्षार्थी यहां अपना रिजल्ट देख सकते हैं.

सुशासन तिहार 2025 में मंत्री टंकराम वर्मा समस्याओं के समाधान की दी गई जानकारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंकराम वर्मा आज सुशासन तिहार के अंतर्गत बोदरी नगर पालिका परिषद में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। बड़ी संख्या में लोगों ने शिविर में शामिल होकर अपने आवेदन के निराकरण की जानकारी ली। उन्हें केंद्र और राज्य शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत लाभान्वित किया गया। शिविर को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री ने कहा कि संवाद से समाधान तक शिविर के उद्देश्य से आयोजित शिविर में जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।      राजस्व मंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार वंचितो और अंतिम छोर के व्यक्तियों को शासन की प्रमुख योजनाओं से जागरूक कर उन्हें लाभान्वित कर रही है। उन्होंने सभी लोगों को  योजनाओं का लाभ उठाने की बात कही। उन्होंने हितग्राहियों को किसान किताब का वितरण किया। हितग्राहियों से चर्चा कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। यहां 1478 आवेदनों में से 1410 आवेदनों का निराकरण कर लिया गया है। शिविर में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नीलम विजय वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल, एडीएम श्री शिव कुमार बनर्जी सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।        शिविर में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने विभागीय योजना स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्टॉल प्रभारी और हितग्राहियों से चर्चा कर योजना का लाभ देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच है कि लोगों के घर, गांव तक पहुंचकर सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, उज्ज्वला गैस योजना आदि का लाभ शत प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को दिलाने के लिए सरकार  लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को शत प्रतिशत लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विष्णु के सुशासन में जनता की हर समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब सरकार द्वारा नामांतरण की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है। रजिस्ट्री के साथ ही अब नामांतरण भी हो जाएगा। उन्होंने सभी से योजनाओं का लाभ पात्रतानुसार अवश्य उठाने की अपील की। कलेक्टर ने कहा कि समाधान शिविर का मुख्य उद्देश्य समस्या के निदान के लिए है। लोगों की  समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां विभागीय स्टॉल भी लगाए गए हैं,  योजनाओं की जानकारी लेकर लोग पात्रतानुसार लाभ उठा सकते है।                           शिविर में खाद्य, श्रम, आदिवासी विकास विभाग, स्वास्थ्य, परिवहन, महिला बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी और हितग्राहियों को लाभान्वित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जारी किया 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम

रायपुर परीक्षा देने के बाद परिणाम का इंतजार कर रहे छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) के 10वीं और 12वीं कक्षा के लाखों विद्यार्थियों के लिए आखिरकार वह घड़ी आ ही गई. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बतौर स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में आज दोनों कक्षाओं का परिणाम घोषित किया. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्र और अभिभावक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in और results.cg.nic.in पर जाकर परिणाम देख सकते हैं. पिछले सालों की तरह परिणाम देखने में कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए बोर्ड ने सर्वर को अपडेट कर लिया है. 2.40 लाख विद्यार्थियों ने दी 10वीं की परीक्षा कक्षा 10वीं में 2,40,422 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिसमें से 519 विद्यार्थियों को परीक्षा निरस्त किया गया है. वहीं परीक्षा के दौरान 16 नकल प्रकरण सामने आया है. 40 विद्यार्थियों का जांंच का प्रकरण है. 3.28 लाख विद्यार्थियों ने दी 12वीं की परीक्षा वहीं कक्षा बारहवीं में 3,28,716 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिसमें से 6163 विद्यार्थियों का परीक्षा निरस्त किया गया है. पच्चीस नकल प्रकरण बना है, और वही पांच विद्यार्थी जांच प्रकरण के दायरे में हैं.

सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल 7 मई को, नागरिकों को आपात स्थिति में बचाव के तरीके सिखाने का प्रयास

सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल 7 मई को, नागरिकों को आपात स्थिति में बचाव के तरीके सिखाने का प्रयास कलेक्टर-एसपी ने की मॉक ड्रिल तैयारी की समीक्षा बिलासपुर बिलासपुर सहित संपूर्ण देश में कल यानी 7 मई को सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की जायेगी। इसका उद्देश्य नागरिकों को आपात स्थिति में बचाव और प्रतिक्रिया के तरीकों के बारे में जागरूक करना है। कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं एसएसपी रजनेश सिंह ने आज मंथन सभाकक्ष में बैठक लेकर मॉक ड्रिल की तैयारी की समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि मॉक ड्रिल से किसी को दहशत में आने की कतई जरूरत नहीं हैं। आपदा की स्थिति में लोग कैसे व्यवहार करें और क्या उपाय करें कि कम से कम क्षति पहुंचे। इसके लिए लोगों को तरीका बताकर जागरूक करने का प्रयास किया जायेगा। बैठक में जिले में स्थित महत्वपूर्ण संस्थान जैसे एनटीपीसी, एसईसीएल, एयरपोर्ट, रेलवे सहित अधिकारी एवं सुरक्षा से जुड़े संस्थान जैसे एनसीसी, एनएसएस, होम गार्डस, रेडक्रास सोसायटी आदि उपस्थित थे।       मॉक ड्रिल के दौरान हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए जाएंगे। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का अभ्यास किया जायेगा। इसके अलावा ब्लेक आउट की स्थिति में बिजली प्रबंधन का अभ्यास भी किया जायेगा। कलेक्टर ने कहा कि आपात स्थिति से निपटने के लिए लोग हमेशा तैयार रहें। अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी इसके बारे में बताएं कि किस तरह की आपदा में किस तरीके से बचाय किया जाये। मॉक ड्रिल के पहले लोगों को बता दिया जाए कि यह केवल रिहर्सल है। वास्तविक घटना से इसका कोई लेना देना नहीं है ताकि वे किसी तरह के पैनिक स्थिति में न आएं।        एसएसपी ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थाओं के मॉक ड्रिल का तौर-तरीका अलग होगा। उन्होंने स्वयं सेवकों, एनसीसी, एनएसएस, पूर्व सैनिकों की लिस्टिंग किये जाने पर जोर दिया। मॉक ड्रिल क्यों और कैसे किया जाये, इसके बारे में लोगों को बताया जाये। उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया अथवा अन्य किसी भी स्रोत से प्रसारित अफवाहों पर ध्यान नहीं दिये जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे सभी लोग सामान्य तैयारी के रूप में लें। जब हम पहले से तैयार रहें तो क्षति कम होगी। कलेक्टर ने केन्द्र सरकार की बड़ी संस्थानों को विशेष रूप से सतर्क रहने एवं सुरक्षा एसओपी का नियमित रूप से पालन करते रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के लिए 7 मई को कोई समय विशेष निर्धारित नहीं है। लोग अपनी सुविधा अनुसार इस दिन इसका आयोजन कर सकते हैं। बैठक में नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल,जिला कमाण्डेन्ट दीपांकुर नाथ, रेडक्रास सोसायटी के समन्वयक सौरभ सक्सेना भी उपस्थित थे।

बीजापुर में करेगुट्टा पहाड़ियों के पास सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, 15 नक्सली मारे गए, 200 से ज्यादा आईईडी भी बरामद

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा की विशाल और दुर्गम पहाड़ियों में पिछले दो सप्ताह से सुरक्षा बलों द्वारा बड़े स्तर पर नक्सल-विरोधी ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मंगलवार देर रात एक बड़ी मुठभेड़ हुई है, जिसमें सुरक्षा बलों ने 18 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सलियों के मारे जाने का आंकड़ा बढ़ सकता है। मारे गए नक्सलियों के पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। यह ऑपरेशन पिछले 14 दिनों से लगातार चलाया जा रहा है। जिसमें कई नक्सलियों को मार गिराया जा चुका है। कर्रेगुट्टा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए तलाशी अभियान को चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन सुरक्षाबल के जवान तलाशी और गश्त अभियान चला रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस क्षेत्र में कुछ शीर्ष नक्सली नेताओं और बटालियन नंबर एक की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। जिसके आधार पर ऑपरेशन को तेज किया गया। संभावना जताई जा रही है कि मारे गए नक्सलियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि कई अन्य ठिकानों पर भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी है। हालांकि, इस मुठभेड़ को लेकर अभी तक स्थानीय पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र पहले भी नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई इस पूरे इलाके में नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। 200 से ज्यादा आईईडी बरामद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जवानों ने करेगुट्टा इलाके में तलाशी के दौरान 200 से ज्यादा आईईडी (IED) बरामद किए हैं। करेगुट्टा पहाड़ पर लगभग 5000 फीट की ऊंचाई पर जवान तैनात हैं। माना जा रहा है कि अब अगर नक्सलियों ने तेलंगाना बॉर्डर से छत्तीसगढ़ में घुसने की कोशिश की, तो उनका सीधा सामना जवानों से होगा। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर किए ढेर हथियारबंद जवान बांस के झुरमुटों, जंगली बेलों को पार करते हुए चट्टानों पर सावधानी से कदम रखते हुए पहाड़ी चोटी पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। सालों से बस्तर में जमे नक्सलियों के लिए यही पहाड़ और जंगल सुरक्षित जगह रहे हैं। नक्सली इन मुश्किल इलाकों से पूरी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने बताया कि बताया कि बस्तर क्षेत्र में शुरू किए गए सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में से एक इस अभियान में जिला रिजर्व गार्ड, बस्तर फाइटर्स और छत्तीसगढ़ पुलिस के एसटीएफ, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा) के जवान समेत विभिन्न इकाइयों के जवान शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान अंतरराज्यीय सीमा पर बीजापुर (छत्तीसगढ़) और मुलुगु और भद्राद्री-कोठागुडेम (तेलंगाना) के दोनों ओर लगभग आठ सौ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले दुर्गम इलाके और घने जंगल में जारी है। यह स्थान राजधानी रायपुर से 450 किलोमीटर दूर है। पहली बार इन पहाड़ियों पर चलाया ऑपरेशन पहली बार जवानों ने करेगुट्टा में ऑपरेशन चलाया है। इससे पहले इन पहाड़ों पर कभी भी जवानों ने ऑपरेशन नहीं चलाया था, जिसका फायदा नक्सली उठाते आए हैं। अब हालात बदल गए हैं। जवानों ने पहाड़ पर कब्जा कर लिया है। जवान अब नक्सलियों तक पहुंचने के लिए हर तरह की मुश्किलों से जूझते हुए लगातार रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। बीजापुर के उसुर थाना क्षेत्र के दायरे में नीलम सराई, दोबे, नम्बी, दुर्गमगुट्टा और करेगुट्टा पहाड़ी रेंज है, जिस पर फिलहाल ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इतनी पहाड़ी रेंज को अपने कब्जे में लेते हुए जवान लगातार नक्सलियों की तलाश में जुटे हुए हैं।  

उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग ने सुव्यवस्थित और सुनियोजित विकास के लिए 54 नगर पालिकाओं और 124 नगर पंचायतों के साथ किया मंथन

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नगर सुराज संगम में आज भी प्रशिक्षण की कमान खुद संभाली और नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के अध्यक्षों को पीपीटी (Power Point Text) के जरिए शहरों के विकास एवं जनसुविधाएं विकसित करने का रोडमैप समझाया। उन्होंने नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों के साथ ही मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और अभियंताओं से संवाद कर अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना पर चर्चा की। साव ने डेढ़ घंटे के अपने प्रेजेंटेशन में अटल विश्वास पत्र के प्रमुख बिंदुओं, नगरीय निकायों की चुनौतियों, नागरिकों की अपेक्षाओं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा, शहरी वानिकी, शहरी परिवहन, स्ट्रीट लाइटिंग, कर संग्रहण और सिटी डेव्हलपमेंट प्लान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों से कहा कि आप लोग शहर के प्रथम नागरिक हैं, आपका शहर आपका घर है। शहरवासियों को अपना परिजन मानते हुए उनकी चिंता करें, उनकी बेहतरी के लिए काम करें। शहर का विकास, साफ-सफाई और जन सुविधाएं विकसित करना आपकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यशाला में सहभागिता कर रहे सभी लोगों से पूरे मनोयोग से कार्यशाला में मौजूद रहने को कहा। यहां सिखाई जा रही बातों को एकाग्रता और तन्मयता से आत्मसात करने को कहा। साव ने नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके निकाय उभरते हुए शहर हैं। उन्हें विकास के पथ पर दौड़ाना है। सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास से ही शहर स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि आप लोग अपने शहरों में ऐसा काम करें जो यादगार हो, शहर को नई दिशा देने वाला हो, नागरिकों की सुख-सुविधाएं बढ़ाने वाला हो, शहर को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने वाला हो। साव ने शहरों के प्रत्येक घर में रोज पर्याप्त जल की आपूर्ति को बड़ी चुनौती बताते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कड़ाई से अमल करने को कहा। साव ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से संसाधनों के बेहतर उपयोग, नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहर को सुविधापूर्ण बनाने देश-विदेश में स्थानीय स्वशासनों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और श्रेष्ठ प्रथाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने पार्षदों के लिए भी संभागीय स्तर पर इस तरह के प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के आयोजन की बात कही। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने ’’नगर सुराज संगम’’ में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि नगरीय निकायों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को केंद्र व राज्य सरकार तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) की योजनाओं की जानकारी देने इसका आयोजन किया गया है। इस दौरान नगरीय निकायों से संबंधित अधिनियमों और उनके महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी। यह संगम दोनों तरफ से संवाद का मंच है। इस मंच के माध्यम से आप लोग नगरीय प्रशासन और विकास से जुड़ी अपनी शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान कर सकते हैं। इस कार्यशाला का आप लोग पूरा लाभ उठाएं। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक आर. एक्का और सुडा के सीईओ शशांक पाण्डेय भी कार्यशाला में मौजूद थे।

कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में, भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया जा रहा , वन विभाग की प्रतिक्रिया

बीजापुर भोपालपटनम ब्लाक के कुचनूर क्षेत्र की वर्षों पुरानी कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में है। इस बार खनन से पहले सैकड़ों पेड़ों की चुपचाप कटाई को लेकर इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है। बात यह है कि जहां मौके पर भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया गया है। वहीं वन विभाग और खनिज विभाग दोनों ही इस गतिविधि से अनभिज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। करीब तीन दशक से बंद पड़ी खदान को लेकर हाल के दिनों में गतिविधियां तेज हुई हैं। भारी वाहनों की आवाजाही, मजदूरों की हलचल और वन क्षेत्र में साफ-सफाई जैसी गतिविधियां देखने को मिली हैं। लेकिन, इस पूरे स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड है, न ही यह स्पष्ट है कि किस एजेंसी या ठेकेदार के अधीन यह कार्य हो रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्य छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMDC) के अंतर्गत किया जा रहा है। जिसने रायपुर के एक ठेकेदार को खदान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, यहां न तो CMDC का कोई स्थानीय कार्यालय मौजूद है, न ही उसके कोई कर्मचारी है। पेड़ों की कटाई पर गंभीर सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि खदान क्षेत्र के आसपास सैकड़ों सागौन व अन्य कीमती पेड़ काटे जा चुके हैं। दो साल पहले  300 पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी, लेकिन अब बिना किसी सार्वजनिक सूचना या प्रक्रिया के दोबारा भारी कटाई की गई है। यह भी गौर करने वाली बात है कि खदान स्थल तक पहुँचने का रास्ता वन विभाग के नाके के पास से होकर गुजरता है, बावजूद इसके वन अमला इस कटाई से अनजान बना हुआ है। वन विभाग की प्रतिक्रिया इस विषय में जब आईटीआर के रेंजर रामायण मिश्रा  से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ‘उत्पादन विभाग’ को हैंडओवर किया जा चुका है और पेड़ों की कटाई की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्थल का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करेंगे। खनिज विभाग भी अनभिज्ञ स्थानीय खनिज अधिकारियों ने भी इस काम के बारे में किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी होने से इनकार किया है। यदि वास्तव में कोई कानूनी प्रक्रिया के तहत खनन कार्य शुरू हुआ है, तो उसकी जानकारी और दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध क्यों नहीं हैं? प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह मुद्दा उठाया है कि क्या खदानों से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव अब भी बना हुआ है? यदि यह कार्य CMDC के माध्यम से किया जा रहा है, तो क्या जिले के अधिकारियों को सूचना देना जरूरी नहीं था?  

विष्णुदेव साय का दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स, मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था

रायपुर  दस साल की उम्र में पिता को खोने के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय के पास खेल-कूद और मौज-मस्ती के लिए समय ही नहीं था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने तुरंत परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। सीएम साय ने बताया कि शायद इसीलिए वह कभी व्यक्तिगत रूचियों पर ध्यान नहीं दे पाए और अब उन्हें केवल सामाजिक कार्यों में ही सुकून मिलता है। 26 साल की उम्र में बने सरपंच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने परिवार और अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि युवावस्था में ही वह गांव के पंच चुन लिए गए थे और पांच साल बाद वह 1990 में 26 साल की उम्र में सरपंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं सरपंच बनूंगा।’’ हालांकि, इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता रहा। साय तीन बार विधायक और चार बार सांसद चुने गए। साल 2023 में वह सत्ता के शिखर पर पहुंचे, जब उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी आदिवासी मुख्यमंत्री कहा जाता है लेकिन उनके निधन तक उनका आदिवासी दर्जा विवाद में रहा।’’ 10 साल की उम्र में हो गया था निधन सीएम साय ने बताया कि ‘‘बचपन में मुझे खेल-कूद का मौका नहीं मिला क्योंकि 10 साल की उम्र में मेरे पिता का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई क्योंकि मैं चार भाइयों में सबसे बड़ा था। मेरा सबसे छोटा भाई तब दो महीने का था। मेरे पिता के तीन भाई थे और वे सभी अलग-अलग गांवों में रहते थे। मुझे अपने छोटे भाइयों और मां की देखभाल के साथ-साथ हमारे गांव बगिया में खेती-किसानी का काम भी करना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘तब मैंने खेती-किसानी करके अपने भाइयों को शिक्षित करने का फैसला किया ताकि वे जीवन में सफल हो सकें। मैंने कभी सरपंच बनने के बारे में नहीं सोचा था।’’ साय ने कहा कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और स्थानीय ग्रामीणों के कहने पर अपने गांव के पंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘गांव के कुछ लोगों ने मुझे पंच बनने के लिए कहा और मैंने यह जिम्मेदारी संभाल ली। पांच साल तक मेरा काम देखने के बाद उन्होंने 1990 में मुझे निर्विरोध सरपंच चुन लिया।’’ बीजेपी ने दिया टिकट उन्होंने कहा कि सरपंच बनने के छह महीने के भीतर ही राज्य में विधानसभा चुनाव हुआ और भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतारा गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब 25-26 साल का था और सीख रहा था। मैंने पार्टी से कहा कि ‘मैं विधायक बनने के लायक नहीं हूं।’ मैंने 1990 में तत्कालीन मध्य प्रदेश के जशपुर जिले की तपकारा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह विधायक के रूप में मेरी यात्रा की शुरुआत थी।’’ साय 1993 में लगातार दूसरी बार तपकारा से चुने गए। 1998 में, उन्होंने पड़ोस के पत्थलगांव सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वह लगातार चार बार – 1999, 2004, 2009 और 2014 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2014 में केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद, उन्हें केंद्रीय इस्पात और खान राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। मौजूदा विधानसभा में वह कुनकुरी सीट से विधायक हैं। कैसा रहा राजनीति सफर उन्होंने 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी 2014 से उसी वर्ष अगस्त तक छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। राज्य में 2018 में भाजपा की सत्ता जाने के बाद, उन्हें 2020 में फिर से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राजनीति में ‘जनसेवा’ के लिए प्रवेश किया। लोगों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करना अच्छा लगता है। जब मैं बीमार लोगों की मदद करता हूं तब मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी गईं, मैंने उन्हें पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।’’ दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स सांसद रहते हुए दिल्ली में अपने आवास को ‘‘मिनी एम्स’’ कहे जाने को याद करते हुए, साय ने कहा, ‘‘दिवंगत भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव दिल्ली में मेरे फ्लैट पर आते थे और वहां एम्स दिल्ली में भर्ती लोगों के रिश्तेदारों को ठहरा हुआ देखकर कहते थे कि आपने अपना घर ‘मिनी एम्स’ बना लिया है।’’ मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं केंद्र में राज्य मंत्री था, तब मैं रोजाना 70-80 लोगों के भोजन की व्यवस्था करता था, जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती होते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी मैंने यहां कुनकुरी सदन की स्थापना की है, जहां राज्य भर से इलाज के लिए रायपुर आने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।’’ परिवार के कई सदस्य राजनीति में साय राजनीतिक परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया, ‘‘मेरा परिवार शुरू से ही राजनीति में रहा है। आजादी के बाद, मेरे दादा दिवंगत बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे। मेरे चाचा (दादा के छोटे भाई के बेटे) दिवंगत नरहरि प्रसाद साय ने तीन बार विधायक के रूप में कार्य किया और सांसद (1977-79) भी चुने गए। उन्होंने जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में मेरे चचेरे भाई रोहित साय भी विधायक चुने गए।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता के बड़े भाई दिवंगत केदारनाथ साय भी जनसंघ सदस्य के रूप में तपकारा से विधायक चुने गए थे।

कोरोना महामारी में पैरोल पर छूटे 70 कैदी वापस नहीं लौटे, हाईकोर्ट ने दिए यह निर्देश

रायपुर  रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। भी तक 70 कैदी वापस नहीं लौटे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती दिखाने के बाद जेल डीजी ने शपथपत्र में यह जानकारी दी है।हालांकि, जेल प्रबंधन ने ऐसे फरार कैदियों के खिलाफ थानों में केस भी दर्ज कराया है। जिनकी तलाश की जा रही है। 10 को गिरफ्तार किया गया, 3 की मौत दरअसल, हाईकोर्ट ने पैरोल पर छोड़े गए कैदियों को लेकर हाईकोर्ट ने जेल डीजी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। जिसके बाद जेल डीजी की तरफ से हाईकोर्ट को जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक प्रदेश की पांच सेंट्रल जेलों के 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, 3 की मृत्यु हो गई है। अभी भी प्रदेशभर की जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल प्रशासन का दावा- फरार कैदियों की तलाश जारी जेल प्रशासन का दावा है कि पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने फरार कैदियों की तलाश की। लेकिन, अब तक उनका कोई पता नहीं चला है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने 7 बंदियों के पैरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। जेल प्रबंधन ने दर्ज कराया है केस बिलासपुर जेल में इस तरह 22 बंदी नहीं लौटे हैं। उनके परिजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने उनके खिलाफ संबंधित थानों में केस दर्ज कराया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे आचरण वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उपजेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। कई बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

मुख्यमंत्री ने आज सहसपुर ग्राम पंचायत आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण किया

रायपुर प्रदेश में सुशासन और जनहितकारी योजनाओं के प्रभाव को धरातल पर परखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इन दिनों लगातार प्रदेश के विभिन्न इलाकों के दौरे पर हैं। इसी क्रम में आज उन्होंने जिला बेमेतरा के सहसपुर ग्राम पंचायत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना के पहुंचे मुख्यमंत्री ने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया और वहां इलाज करा रहे मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी स्थिति जानी। मुख्यमंत्री ने मितानिन दीदियों से चर्चा करते हुए संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात के स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है कि सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हों। मितानिनों को गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करने और उन्हें अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सा स्टाफ को निर्देशित किया कि गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए दवाइयों और उपचार सामग्रियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही नहीं होनी चाहिए और आमजन को समय पर, गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले, यही राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने का काम कर रही है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और अधिक सशक्त बनाने की बात भी कही। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री साय सुशासन तिहार के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की बुनियादी संस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ हर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर की कमियों को तुरंत दूर किया जाए।   इस मौके पर विधायक ईश्वर साह, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद मौजूद रहे।

कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश

जगदलपुर : जमीन से सम्बंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु राजस्व और पुलिस की माह में एक बार जरूर हो संयुक्त बैठक-कलेक्टर हरिस एस राजस्व के लम्बित प्रकरणों के निराकरण में लाए तेजी: कलेक्टर हरिस एस कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश जगदलपुर कलेक्टर हरिस एस ने कहा कि जमीन से संबंधित प्रकरणों के निराकरण हेतु राजस्व व पुलिस विभाग के अधिकारी माह में एक बार जरूर संयुक्त बैठक करें। इस बैठक के माध्यम से सम्पत्ति से संबंधित प्रकरणों का त्वरित निराकरण की पहल की जाए। समाज के संवेदनशील मामलों में बदमाश लोगों का चिन्हांकन कर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी करें। इसके लिए गांव के कोटवार व जनप्रतिनिधियों से लगातार संवाद बनाए रखें और ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार भ्रमण करें। कलेक्टर हरिस एस और पुलिस अधीक्षक शलभ सिंहा मंगलवार को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के बैठक लिए।       कलेक्टर ने कहा कि स्लैरी पाइप लाइन विस्तार के मामलों को राजस्व अधिकारी लीड लेकर काम को जल्द करवाएं। चलित थाना का आयोजन संवेदनशील क्षेत्रों में भी करवाएं जिसमें राजस्व अधिकारी की उपस्थिति भी हो। गांव के कोटवार-पटेल का राजस्व अधिकारी माहवार बैठक ले ताकि गांव की स्थिति, समस्या-मांग की जानकारी लगातार मिल सके। सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविर का भी आयोजन सभी ब्लॉकों में किया जा रहा है इसमें आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाने के भी निर्देश दिए ।      बैठक में पुलिस अधीक्षक सिंहा ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था हेतु अनुभाग स्तर पर भी जांच करें, दुर्घटनाजन्य स्थलों में सुधार की आवश्यकता का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार जानकारी दें। नो पार्किंग में खडे गाड़ियों का आवश्यक चालानी कार्यवाही करें। रात में ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण और डीजे वालों पर आवश्यक कार्यवाही करें। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर शराब सेवन करने वालों पर कार्यवाही करें। इसके अलावा अन्य देशों के नागरिकों या अप्रवासी लोगों की पहचान करने के लिए संयुक्त कार्यवाही करें। बैठक में कलेक्टर ने मुख्य सचिव द्वारा कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध दिए निर्देश की भी चर्चा किए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सी पी बघेल, अति. पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग, आईपीएस  आकाश श्रीश्रीमाल सहित राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।      राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर हरिस ने कहा कि राजस्व अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहते हुए, राजस्व प्रकरणों का निराकरण करने में तत्परता दिखाएं। बैठक में राजस्व प्रकरणों के दर्ज, निराकरण एवं लंबित प्रकरणों, ई-कोर्ट के प्रकरणों, स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन, नक्शा बटांकन की प्रगति, भू-अर्जन के प्रकरण, स्लरी पाइप लाइन विस्तार के तहत भुगतान के प्रकरण, अविवादित नामांतरण, अविवादित खाता विभाजन, विवादित खाता विभाजन, सीमांकन के प्रकरण, राजस्व न्यायालयवार लंबित प्रकरणों, भू-अभिलेख पर त्रुटि सुधार के मामलें, आर बी सी 6-4 के प्रकरणों के निराकरण की स्थिति और भुगतान की समीक्षा की गई। इसके अलावा शीर्ष बी-121 विविध सामान्य राजस्व प्रकरण, अनाधिकृत रूप से भूमि पर कब्जा करने या रखने वाले व्यक्तियों की बेदखली और उन पर शास्ति की कार्रवाई, अ -74 के मामले, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 170,126,135 के प्रकरण, वनाधिकार पट्टे का डिजिटाइजेशन एवं अभिलेख दुरुस्ती व्यवस्था की जानकारी, अनुविभागीय व तहसील कार्यालय के निर्माण कार्यों की प्रगति और आवश्यक संसाधनों, असर्वेक्षित गांवों के राजस्व सर्वेक्षण की प्रगति, नक्शा नवीनीकरण की प्रगति, बैंक बंधक के प्रकरण, डिजिटल हस्ताक्षरिकृत खसरों की प्रगति, राजस्व शिविर की क्रियान्वयन एवं आवेदनों पर कार्यवाही की समीक्षा किया गया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल, समस्त अनुविभागीय दंडाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार उपस्थित रहे ।

लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के कलेक्टर ने दिये निर्देश

कोरिया : सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों की कलेक्टर ने की समीक्षा कलेक्टर ने पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के दिए निर्देश लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के कलेक्टर ने दिये निर्देश कोरिया जिले में आयोजित सुशासन तिहार के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की समीक्षा आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने की।कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने सभी अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सुशासन तिहार व जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों पर व्यक्तिगत रुचि लेकर तत्परता से कार्य करें। कलेक्टर ने बैठक में विभागीय अधिकारियों से कहा कि प्राप्त आवेदनों के शीघ्र समाधान और पारदर्शिता से जनता को समाधान शिविरों में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान मांग और शिकायतों से जुड़े आवेदनों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन अब यह आवश्यक है कि समाधान शिविरों में आम जनता के समक्ष इन कार्यवाहियों की जानकारी भी पूरी पारदर्शिता के साथ दी जाए। उन्होंने सभी विभागों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी शिविर स्थलों पर आमजन को देने को कहा, ताकि पात्र हितग्राही इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। बैठक में बैकुण्ठपुर व सोनहत के एसडीएम और संबंधित तहसीलों के तहसीलदारों को निर्देशित किया गया कि वे राजस्व पखवाड़ा और सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करें तथा लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने पटवारी, ग्राम विस्तार अधिकारी, पंचायत सचिव, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं पर्यवेक्षकों की कार्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। स्वास्थ्य, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ऊर्जा, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को आयुष्मान कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पेयजल व्यवस्था, विधुत कनेक्शन, विद्यार्थियों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र व  राशन कार्ड आदि से संबंधित आवेदनों का प्राथमिकता से निराकरण करने को कहा गया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, जिला वनमण्डलाधिकारी चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी, अपर कलेक्टर अरुण मरकाम, डी.डी. मंडावी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री जनशिकायत एवं जनदर्शन, पीएमओ पोर्टल, ई-समाधान पोर्टल में दर्ज लंबित प्रकरणों का शीघ्रता से करें निराकरण

 गौरेला पेंड्रा मरवाही : कलेक्टर ने ली साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक खरीफ फसलों की तैयारी के तहत किसानों से खाद-बीज का कराएं उठाव: कलेक्टर मौसमी बीमारियों से निपटने कार्य योजना बनाकर करें तैयारी राजस्व प्रकरणों के निराकरण में लाएं प्रगति मुख्यमंत्री जनशिकायत एवं जनदर्शन, पीएमओ पोर्टल, ई-समाधान पोर्टल में दर्ज लंबित प्रकरणों का शीघ्रता से करें निराकरण  गौरेला पेंड्रा मरवाह साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के निराकरण और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उपलब्धि की समीक्षा की। अरपा सभा कक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने आगामी खरीफ फसलों की तैयारी के तहत किसानों से खाद एवं बीज का उठाव कराने के साथ ही किसानों का आय बढ़ाने के लिए धान के अलावा अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि खरीफ फसलों के लिए प्रेरित करने कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए कार्य योजना बनाकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए।               कलेक्टर ने सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की और लंबित प्रकरणों को तत्काल निराकृत करने के साथ ही मुख्यमंत्री जनशिकायत, मुख्यमंत्री जनदर्शन, पीएमओ पोर्टल एवं ई-समाधान पोर्टल में दर्ज प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की और लंबित प्रकरणों को शीघ्रता से निराकृत करने संबंधित विभागों को निर्देश दिए। उन्होंने सीमांकन, त्रुटि सुधार, विवादित नामांतरण, विवादित खाता विभाजन, व्यपवर्तन, वृक्ष कटाई, डिजिटल हस्ताक्षर, नक्शा बटांकन आदि लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण में प्रगति लाने के निर्देश दिए। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सामान्य क्षेत्रों में स्वीकृत एवं अप्रारंभ 758 और पीएम जनमन योजना के तहत अप्रारंभ 106 आवासों को शीघ्र प्रारंभ कराने कहा।               कलेक्टर ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, आयुष्मान कार्ड, संस्थागत प्रसव, सिकलसेल स्क्रीनिंग, पेयजल की स्थिति, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, जन औषधि केन्द्र, पेंशन प्रकरण, आश्रम-छात्रावास, पीएमश्री स्कूल, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजना आदि की समीक्षा की और लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सुशासन तिहार के तृतीय चरण में आयोजित हो रहे समाधान शिविरों में आवेदनों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण की जानकारी से ग्रामीणों को अवगत कराने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य, अपर कलेक्टर श्रीमती नम्रता आनंद डोंगरे, एसडीएम पेण्ड्रारोड सुश्री ऋचा चंद्राकर एवं एसडीएम मरवाही श्री प्रफुल्ल रजक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

विभाग किसानों के केसीसी प्रकरण तैयार कर, बैंकों को शीघ्र भेजे :कलेक्टर

धमतरी : नगरी में मसालों की खेती की ज्यादा संभावनाएं :कलेक्टर अमानक खाद-बीज बेचने वाले दुकानदारों पर करें कार्यवाही: कलेक्टर विभाग किसानों के केसीसी प्रकरण तैयार कर, बैंकों को शीघ्र भेजे :कलेक्टर कलेक्टर ने कृषि एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों की ली बैठक   धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र मे भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए वहां मसाला खेती की संभावनाएं अधिक है। इसके लिए विभागीय अधिकारी किसानां को शासन की योजनाओं-कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। उक्त निर्देश कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने आज कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में आयोजित कृषि एवं उससे संबंधित अधिकारियों की बैठक में दिये। बैठक में कलेक्टर ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मछलीपालन सहित अन्य विभागों से किसानों के केसीसी प्रकरण की बैंकवार बारी-बारी से जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इन प्रकरणों को बैकों को शीघ्र भेजें। बैठक में कलेक्टर ने पशुपालन विभाग के अधिकारी को एनएलएम के तहत् प्रकरण तैयार करने कहा। कलेक्टर ने जिले में बीते 1 मार्च से की जा रही चना खरीदी एवं किसानों को भुगतान की जानकारी ली।                बैठक में कलेक्टर ने जिले में यूरिया वितरण की जानकारी ली और अधिकारियां को निर्देशित किया कि मई माह में लक्ष्य के 40 प्रतिशत का वितरण करना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही अमानक खाद-बीज का विक्रय करने वाले दुकानदारों पर कार्यवाही करने के भी निर्देश कलेक्टर ने बैठक में दिये। कलेक्टर ने जिले के किसानों को मसाला, मखाना, फल और सब्जियों की खेती के लिए अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की बात कही। उन्होंने इसके लिए अधिक से अधिक किसानों के प्ररकण तैयार करने कहा। कलेक्टर ने बीज निगम के अधिकारियों को मिलेट्स के बीज वितरीत करने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने खाद हेतु किसान पंजीयन की जानकारी ली और परसतराई गांव का बीज हेतु पंजीयन करने कहा। दुग्ध संग्रहण हेतु जिले की पंजीकृत समितियों की जानकारी ली उन्होंने माह में कुल संग्रहित दुग्ध की जानकारी लेते हुए ऐसी समितियां जो वर्तमान में सक्रिय नहीं है, उन्हें सक्रिय करने के निर्देश अधिकारियो को दिये। कलेक्टर ने कहा कि किसी भी स्थिति में किसानों को दुग्ध का भुगतान न रोका जाये, राशि प्राप्त होते ही उनका भुगतान किया जाये। अन्यथा संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। बैठक में कलेक्टर ने जिले में आयोजित हो रहे किसान चौपाल की भी जानकारी ली और चौपाल में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे व्यक्ति या संस्था को बुलाकर जिले के किसानों को प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही शासन की योजनाआें से उन्हें लाभान्वित करने योजना तैयार करें। कलेक्टर ने किसानों को फूड प्रोसेसिंग, एआइएफ से भी जोड़ने कहा।

रायपुर : सुशासन तिहार में दिव्यांग रामूराम की समस्या पर हुई त्वरित सुनवाई

रायपुर : सुशासन तिहार में दिव्यांग रामूराम की समस्या पर हुई त्वरित सुनवाई  समाधान शिविर में वन मंत्री एवं सांसद ने सौंपी ट्राईसाइकिल, आवाजाही में अब नहीं होगी परेशानी रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर पूरे प्रदेश में 8 अप्रैल से 31 मई तक तीन चरणों में सुशासन तिहार 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनसमस्याओं की त्वरित सुनवाई और समाधान सुनिश्चित करना है।     इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के ग्राम सुलेंगा निवासी दिव्यांग रामूराम नाग ने सुशासन तिहार के पहले चरण में मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए आवेदन दिया था। रामूराम ने बताया कि बीमारी के कारण उनका बायां पैर संक्रमित हो गया था, जिसे बाद में कटवाना पड़ा था। फिर कृत्रिम पैर लगवाने के बावजूद उन्हें आवागमन में भारी कठिनाई होती थी। इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देते हुए जिला प्रशासन द्वारा उनकी समस्या का निराकरण किया गया। रामूराम को 05 मई को पालकी में आयोजित समाधान शिविर में वन मंत्री श्री केदार कश्यप और बस्तर लोकसभा सांसद श्री महेश कश्यप द्वारा मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान की गई। ट्राईसाइकिल मिलने पर रामूराम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने गांव से शहर आने-जाने के लिए सोचना नहीं पड़ेगा और ना ही कोई परेशानी होगी। उन्होंने सुशासन तिहार में अपनी समस्या के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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