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बिना पोस्टमार्टम के भालू को दफनाना पड़ा मंहगा, फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर को शो कॉज नोटिस जारी

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद से आज एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है. बीते महीने जिले के हर्राठेमा वन परिक्षेत्र में 24 फरवरी को तांदुला जलाशय के किनारे एक भालू का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. इसकी जानकारी नियमानुसार DFO कार्यालय को दिया जाना था, लेकिन वनकर्मी और विभागीय अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को सूचित न करते हुए गोपनीय तरीके से मृत भालू के शव को दफना दिया. इस घटना का खुलासा होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया. मामले के खुलासे के बाद DFO के निर्देशानुसार बालोद वन विभाग और वेटनारी डॉक्टर तांदुला जलाशय के किनारे घटना स्थल पहुंचे और खुदाई कर भालू के शव को बाहर निकाले. वहीं बालोद DFO ने इस मामले में तत्काल फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है. साथ ही देर होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. इस मामले के उजागर होने के बाद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के जानवरों के अंगों की तस्करी में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि भालू के शव के पोस्टमॉर्टम और जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी.

फर्जी दस्तावेजों से भारतीय पहचान बनाने वाले तीन बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार

रायपुर  छत्तीसगढ़ एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने रायपुर से गिरफ्तार किए गए तीन बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके पासपोर्ट निरस्त करवा दिए हैं। इसके अलावा, फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी को भी रद्द करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया है। तीनों बंगलादेशी मोहम्मद इस्माइल (27 साल), शेख अकबर (23 साल) और शेख साजन (22 साल) रिश्ते में भाई है और 8 फ़रवरी को रायपुर से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे थे, जहां से वे फर्जी दस्तावेजों के सहारे इराक भागने की फिराक में थे। लेकिन समय रहते ATS ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। फर्जी दस्तावेजों का जाल, बांग्लादेशी मास्टरमाइंड फरार ATS की जांच में सामने आया कि ये तीनों बांग्लादेशी नागरिक रायपुर में मोहम्मद आरिफ नाम के व्यक्ति की मदद से आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवाने में सफल रहे थे। यह पूरा नेटवर्क एक संगठित गिरोह की तरह काम करता था, जिसे शेख अली नाम का व्यक्ति चला रहा था। शेख अली लंबे समय से बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाकर उन्हें खाड़ी देशों में भेजने का काम कर रहा था। वह अब फरार हो चुका है और पुलिस को उसके बांग्लादेश भागने की आशंका है। शेख अली की तलाश में छत्तीसगढ़ पुलिस की एक टीम बांग्लादेश बॉर्डर तक गई, लेकिन फिलहाल वह हाथ नहीं लगा। 2017 से जारी था फर्जी दस्तावेज बनाने का खेल ATS की जांच में पता चला है कि साल 2017 से यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दिलाकर खाड़ी देशों में भेजने का काम कर रहा था। रायपुर का चॉइस सेंटर संचालक मोहम्मद आरिफ भी इस गैंग का हिस्सा था, जो पैसों के बदले फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी तैयार करता था। ATS को शक है कि इस गिरोह के जरिए कई और बांग्लादेशी भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश छोड़ने की फिराक में हैं। जल्द ही इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

EOW की विशेष अदालत ने CGMSC घोटाला मामले में पांचों आरोपियों को सात दिन की रिमांड पर भेजा

रायपुर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (CGMSC) में करोड़ों के रीएजेंट खरीदी घोटाले में ईओडब्लू की विशेष अदालत ने पांच आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. ईओडब्ल्यू ने आरोपियों की 15 दिन की रिमांड मांगी थी. ईओडब्ल्यू ने दो आईएएस समेत CGMSC और हेल्थ विभाग के दर्जन भर अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ करने के बाद की पांचों लोगों को देर रात गिरफ्तार किया था. इसके बाद आज सुबह ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में पेश किया गया. ईओडब्ल्यू की ओर से मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों की 15 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी. विशेष अदालत के न्यायधीश ने सुनवाई के बाद सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया. मामले में CGMSC के तत्कालीन प्रभारी महाप्रबंधक उपकरण एवं उप प्रबंधक क्रय एवं संचालन बसंत कुमार कौशिक, तत्कालीन बायोमेडिकल इंजीनियर छिरोध रौतिया, तत्कालीन उप प्रबंधक उपकरण कमलकांत, तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर स्टोर डॉ. अनिल परसाई, तत्कालीन बायोमेडिकल इंजीनियर दीपक कुमार बाँधे विशेष अदालत के फैसले के बाद अब 28 मार्च तक रिमांड पर रहेंगे. बता दें कि कांग्रेस शासनकाल में स्वास्थ्य विभाग के CGMSC ने मोक्षित कॉरपोरेशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की राजकोष को किस तरह से खाली किया है इस पूरे मामले को लेकर 660 करोड़ रुपए के गोल-माल को लेकर भारतीय लेखा एंव लेखापरीक्षा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) आईएएस यशवंत कुमार ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार पिंगआ को पत्र लिखा था. दो साल के ऑडिट में खुली थी पोल लेखा परीक्षा की टीम की ओर से CGMSC की सप्लाई दवा और उपकरण को लेकर वित्त वर्ष 2022-24 और 2023-24 के दस्तावेज को खंगाला गया तो कंपनी ने बिना बजट आवंटन के 660 करोड़ रुपये की खरीदी की थी, जिसे ऑडिट टीम ने पकड़ लिया था. ऑडिट में पाया गया है कि पिछले दो सालों में आवश्यकता से ज्यादा खरीदे केमिकल और उपकरण को खपाने के चक्कर में नियम कानून को भी दरकिनार किया गया. बिना जरूरत की हॉस्पिटलों को सप्लाई प्रदेश के 776 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों सप्लाई की गई, जिनमें से 350 से अधिक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं, जिसमें कोई तकनीकी, जनशक्ति और भंडारण सुविधा उपलब्ध ही नहीं थी. ऑडिट टीम के अनुसार DHS ने स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं में बेसलाइन सर्वेक्षण और अंतर विश्लेषण किए बिना ही उपकरणों और रीएजेंट मांग पत्र जारी किया था.

जिले में कानून व्यवस्था होगी सख्ती, अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दिए गए निर्देश

कानून व्यवस्था को लेकर जिला स्तरीय बैठक हुई संपन्न एमसीबी मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में और पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह की उपस्थिति में महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में आगामी ईद-उल-फितर और चैत्र नवरात्र के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। पुलिस अधीक्षक ने जिले में बाहरी घुसपैठियों की पहचान और फर्जी सिम कार्डों की ट्रैकिंग को लेकर विशेष अभियान चलाने की जानकारी दी। घर-घर सर्वे कर बाहरी व्यक्तियों की पहचान, उनका आधार और मोबाइल नंबर सत्यापित करने के निर्देश दिए गए। अपराधियों की मोबाइल ट्रैकिंग और कॉल रिकॉर्ड की निगरानी कर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने जिले में अवैध अतिक्रमण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी में अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई होगी और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर वहां पौधारोपण किया जाएगा। शहर के बीच एनएच पर खड़े ट्रकों और अन्य वाहनों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यातायात बाधित न हो। साथ ही, पार्किंग व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन विशेष अभियान चलाएगा। चेंबर पदाधिकारियों के साथ बैठक कर फल-सब्जी, मटन और मछली बाजारों के लिए उचित स्थान निर्धारित किए जाएंगे। शहर में अवैध रूप से लगाए गए ठेलों को हटाने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं, खासकर स्कूलों और शासकीय कार्यालयों के आसपास के क्षेत्र में सख्ती बरती जाएगी। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी गई है। चिरमिरी बस स्टैंड, बाजार और नगर निगम कार्यालय के आसपास अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए गए हैं, जिसके लिए पहले स्थानीय लोगों से चर्चा कर उचित समाधान निकाला जाएगा। इस बैठक के जरिए जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। अवैध गतिविधियों, अतिक्रमण और बाहरी घुसपैठियों पर सख्ती बरती जाएगी। आने वाले दिनों में इन सभी निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा ताकि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शांति और सुचारु प्रशासन व्यवस्था बनी रहे। इस बैठक में एसडीएम लिंगराज सिदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अशोक वडेगावकर, एलेक्स टोप्पो अनुविभागीय अधिकारी मनेंद्रगढ़ के साथ समस्त पुलिस अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर प्रीतेश राजपूत सहित समस्त तहसीदार और अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।

मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व जल दिवस पर विशेष लेख एमसीबी/मनेंद्रगढ़  जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन और सभ्यता की धुरी है। मनुष्य के अस्तित्व से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यावरण तक जल की अनिवार्यता स्पष्ट है। लेकिन आज जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सतत जल प्रबंधन की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका प्रभाव पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की हुई प्रतिबद्धता         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है । मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को देखें तो अबतक कुल 60,379 नल कनेक्शन पूर्ण किया किया गया है । जबकि जिले की 19 गांवों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन से जोड़ा गया है, जिससे वहां के लोगों को अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई है, जिससे जल आपूर्ति निरंतर बनी रहे। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की चुनौतियां और उसके संभावनाएं छत्तीसगढ़ जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां महानदी, हसदेव, शिवनाथ, इंद्रावती, अरपा और खारून जैसी प्रमुख नदियां हैं, जो कृषि, उद्योग और पेयजल कबआपूर्ति के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। लेकिन अनियंत्रित जल दोहन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे कई जिलों में पानी की कमी देखी जा जाती है। मानसून में अनिश्चितता के कारण कुछ इलाके बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि अन्य हिस्से सूखे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए किया जा रहा सशक्त प्रयास           केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें  “कैच द रेन” अभियान के तहत गांवों और शहरों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं, तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिले। “अटल भूजल योजना”  विशेष रूप से भूजल स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई है, जिसमें समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल रिचार्जिंग, जल पुनर्भरण संरचनाओं और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं “अमृत सरोवर मिशन”  के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अबतक 96 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ये सरोवर जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार लाने, और कृषि एवं आजीविका के साधनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा ये सरोवर सामुदायिक गतिविधियों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता में वृद्धि होती है। इन सरोवरों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को सिंचाई, मछली पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसके अलावा “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” के अंतर्गत किसानों को माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो सके। इससे जल की बर्बादी कम होती है और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। “अमृत योजना” के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जल संकट को दूर करने में मदद मिल रही है। जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की जनभागीदारी जरूरी       छत्तीसगढ़ और पूरे देश में जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर को पुनः भरना आवश्यक है। स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कि डिजिटल वॉटर मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों को जल पुनर्चक्रण अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जल अपव्यय को कम किया जा सके। गांवों में पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनर्निर्माण कर उन्हें जल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि में पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण की शिक्षा देकर युवाओं के साथ साथ हर व्यक्ति को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विश्व जल दिवस के दिन जल संरक्षण का संकल्प लेने का सही समय        विश्व जल दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताने और ठोस कार्रवाई करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पूरे देश और छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। लेकिन केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। हर नागरिक को जल बचाने की दिशा में योगदान देना होगा। यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो भविष्य में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। हमें आज ही जल संरक्षण के ठोस उपाय अपनाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध जल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। इस विश्व जल दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए … Read more

एनटीपीसी के अस्पताल परिसर में घुसा चीतल, मचा हड़कंप

कोरबा कोरबा के कटघोरा वन मंडल के दर्री वन परिक्षेत्र में आने वाले एनटीपीसी के विभागीय चिकित्सालय में उसे वक्त हड़कंप मच गया। जब देर रात एक चीतल यहां घुस गया।हां चिकित्सालय परिसर में मौजूद लोगों की नजर पड़ी। देखते ही देखते आसपास लोगों के भीड़ बएकत्रित हो गई। बताया जा रहा है कि जंगल से भटक कर पहुंचे चीतल पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया,  जिनसे जान बचाकर वो अस्पताल परिसर में पहुंच गया। कुत्ते वहां भी पहुंच गए। लोगों ने कुत्तों से बचाने के लिए चीतल को पकड़ने का प्रयास किया। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग और पुलिस विभाग को दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने चीतल को पकड़ने के प्रयास किया। घंटों की मशक्कत के बाद किसी तरह चीतल को पकड़ा गया और उसे जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया।

कोरबा में बारिश के साथ ही आसमान से बरसे ओले

कोरबा छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आंधी तूफान के साथ बारिश हुई और कई स्थानों पर ओलावृष्टि की स्थिति में निर्मित हुई। कोरबा जिले के भैंसमा में ऐसा ही कुछ हुआ। बारिश के साथ ही आसमान से ओले बरसे। गर्मी के बीच अचानक हुए मौसम के परिवर्तन के कारण आम जनजीवन खासा प्रभावित हुआ। वहीं, ओले गिरने से सब्जी की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार की दोपहर तेज आंधी तूफान आने से मौसम का मिजाज बदल गया। शहर में तेज आंधी तूफान के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश होने लगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। कोरबा के ग्रामीण अंचलो मे जमकर हुई बारिश से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।  बताया जा रहा है कि लेमरू, सुर्वे, बड़गाव सहित श्याग, चकामार इलाके में जमकर बारिश हुई और ओले गिरे। ग्रामीणों की मानें तो शुक्रवार की दोपहर से मौसम का मिजाज बदला हुआ था। जहां देर रात हुई आंधी तूफान के बाद आकाशीय बिजली की चमक देखने को मिली। वहीं शुक्रवार की सुबह तक कई इलाकों में हल्की बारिश और बिजली की चमकती रही। सुबह होने पर मौसम फिर से खुला।  

सरकंडा में कपड़े की दुकान में लगी आग, लाखों का सामान खाक

बिलासपुर बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में शुक्रवार की देर रात नूतन कॉलोनी सड़क के पास स्थित एक कपड़ा दुकान में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि दुकान में रखा पूरा सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जानकारी के मुताबिक, नूतन कॉलोनी चौक से जोरापारा जाने वाले रास्ते में रात करीब 9 बजे एक कपड़ा दुकान में आग लग गई। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, दुकान में रखा करीब तीन लाख का सामान जलकर खाक हो गया। इस दौरान आसपास के लोगों ने सरकंडा पुलिस और दमकल की टीम को सूचना दी। जिसपर घंटों बाद आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट से होने की जानकारी सामने आ रही है।

नगर निगम महापौर ने एसईसीएल, पीएचई व सीएससीबी के अधिकारियों की ली आवश्यक बैठक

नगर निगम महापौर ने एसईसीएल, पीएचई व सीएससीबी के अधिकारियों की ली आवश्यक बैठक ग्रीष्म ऋतु में पेयजल संकट निदान हेतु महापौर ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश एमसीबी/चिरमिरी भीषण गर्मी आते ही पेयजल संकट विकराल रूप ले लेता है। इस संकट से निपटने के लिए नगर पालिक निगम चिरमिरी के प्रथम नागरिक महापौर रामनरेश राय की अध्यक्षता में गुरुवार को महापौर कक्ष में एसईसीएल, पीएचई विभाग एवं छ.ग.रा.वि.मं.मर्या. चिरमिरी के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल प्रदाय व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसमें महापौर ने पूरे 40 वार्डों में जल संकट की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सुचारू जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि जल आपूर्ति से संबंधित सभी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करें ताकि नागरिकों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इस दौरान एसईसीएल ने भी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। महापौर रामनरेश राय ने कहा कि नगर निगम, एसईसीएल एवं पीएचई विभाग एक परिवार की तरह कार्य कर रहे हैं और सभी का दायित्व है कि गर्मी के दौरान जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। जल आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए और किसी भी प्रकार की समस्या को तत्काल हल किया जाए।           इस बैठक में ग्रीष्म ऋतु के दौरान जल संकट से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जल आपूर्ति की टैंकर सेवा को मजबूत किया जाएगा ताकि जहां पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंच रहा, वहां नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से जल उपलब्ध कराया जाए। नगर निगम नए जल स्रोतों की पहचान करेगा और नए बोरवेल खोदने के साथ-साथ अन्य वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जाएगा। जल संकट को देखते हुए कुछ वार्डों में राशनिंग सिस्टम लागू करने पर भी मंथन हुआ ताकि पानी का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा ताकि लोग पानी का दुरुपयोग न करें और जरूरतमंदों तक पर्याप्त जल पहुंच सके।                इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर पालिक निगम के सभापति संतोष सिंह, एमआईसी सदस्य नरेंद्र साहू, राम अवतार, मनीष खटीक, आयुक्त रामप्रसाद आचला, सहायक अभियंता विजय बधावन, सब इंजीनियर विक्टर वर्मा, पीएचई के ई.ई. पी.के. पवार, एसईसीएल के इंजीनियर संजय सिंह, कनिष्ठ अभियंता किंडो व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। नगर निगम की इस पहल से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगामी गर्मी के मौसम में चिरमिरी के नागरिकों को जल संकट का सामना न करना पड़े और सभी वार्डों में निर्बाध जल आपूर्ति जारी रहे।

फॉरेस्ट्स एण्ड फूड्स थीम पर आधारित है वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित विश्व वानिकी दिवस संगोष्ठी में शामिल होकर प्रदेशवासियों को वन संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ‘ऑक्सिजोन’ बनकर पूरे भारत को ऑक्सीजन प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जो न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का अभिन्न हिस्सा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस ‘फारेस्ट एंड फूड’ थीम पर आधारित है, जो इस बात पर बल देता है कि वन केवल ऑक्सीजन ही नहीं, बल्कि पोषण, रोजगार और संस्कृति का भी स्रोत हैं। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘वाइल्ड एडिबल प्लांट्स इन छत्तीसगढ़ स्टेट’ पुस्तक का विमोचन किया तथा पुदीना-मिंट फ्लेवर के बस्तर काजू प्रोडक्ट को लॉन्च भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय भाई बहनों की है जो वनों के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वनों में निवासरत जनजातीय भाई-बहनों को वनाधिकार पट्टे प्रदान कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और खेती की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि बस्तर की इमली, जशपुर का महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा जैसे सैकड़ों लघु वनोत्पाद छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं, जिनका वैल्यू एडिशन कर आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, वनवासी संस्कृति और समृद्ध जैव विविधता पूरे देश के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। बस्तर का धूड़मारास अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बना चुका है। पर्यटन का विस्तार हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में लगभग चार करोड़ वृक्ष लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में पीपल फॉर पीपल कार्यक्रम के अंतर्गत हर चौराहे पर पीपल का रोपण किया गया है, जो भविष्य में शुद्ध ऑक्सीजन का सशक्त स्रोत बनेंगे। पीपल का पेड़ वैज्ञानिक रूप से सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष है, और यह पहल शहरी हरियाली की दिशा में एक प्रभावी कदम है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के वन विश्व के सबसे सुंदर वनों में गिने जाते हैं। साल और सागौन के वृक्ष यहां की प्राकृतिक शोभा हैं। साल के वनों में एक अनूठा सम्मोहन है और यह गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक जंगल हैं, तब तक जीवन है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों का पूरा जीवन वनों पर आधारित है। उनका जीवनस्तर ऊँचा उठाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।  उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, और इसका सबसे कारगर उपाय वन क्षेत्र का विस्तार है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी भाई-बहनों के पास प्रकृति का अनुभवजन्य ज्ञान है – उसका समुचित उपयोग कर हम विकास और संरक्षण दोनों को संतुलित कर सकते हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विधायकगण धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, योगेश्वर राजू सिन्हा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रशिक्षण से अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मिलेगा मदद

रायपुर राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ द्वारा नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यशाला का  सफलतापूर्वक समापन हुआ। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के सभाकक्ष में 20 और 21 मार्च को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ करना, नीति-निर्माण को डेटा आधारित बनाना और योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना था। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारियों के लिए मूल्यांकन, क्यों, कब और कैसे विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में राज्य शासन के अधिकारियों को मानिटरिंग और इवैल्यूएशन के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी गयी। योजनाओं की प्रगति प्रभाविता को ट्रैक करने और परिणामों का विश्लेषण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। मूल्यांकन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, योजनाओं के प्रभाव को मापने के लिए लॉजिकल फ्रेमवर्क और थ्योरी ऑफ चेंज का उपयोग, डेटा संग्रह की पद्धतियां, प्रभावी नीति निर्माण के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यशाला में मूल्यांकन में आने वाली चुनौतियां और समाधान पर भी विस्तृत व्याख्यान दिया गया। कार्यशाला में प्रोग्राम/स्कीम इवैल्यूएशन के महत्व, उसके विभिन्न प्रकार, तरीकों, रूपरेखा (फ्रेमवर्क) और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावी मूल्यांकन से न केवल योजनाओं की सफलता और विफलता का विश्लेषण किया जा सकता हैए बल्कि सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान डेटा संग्रह, विश्लेषण तकनीक, निगरानी एवं मूल्यांकन के सर्वाेत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को प्रभाव मूल्यांकन, प्रक्रियात्मक मूल्यांकन और परिणाम मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया। राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम ने बताया कि आयोग मूल्यांकन हेतु संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उपाय अपना रहा है। आने वाले समय में नीति निर्माण को डेटा संचालित और प्रभावी बनाने इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शी और सटीक मूल्यांकन आवश्यक है। यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगा। कार्यशाला के समापन अवसर पर राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और डी.एम.ई.ओ. टीम को धन्यवाद देते हुए कहा, कि भविष्य में राज्य नीति आयोग और डी.एम.ई.ओ. इस तरह की और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में डेटा-संचालित शासन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। कार्यशाला में डी.एम.ई.ओ., नीति आयोग, भारत सरकार के निदेशक अबिनाश दास व उनकी एक्सपर्ट टीम द्वारा आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, डाटा गर्वनेंस क्वालिटी इंडेक्स एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क तथा मॉनिटरिंग व इवैल्यूएशन के बारे में प्रस्तुतीकरण व परिचर्चा की गई। उक्त कार्यशाला में सुशासन एवं अभिसरण विभाग, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, योजना विभाग सहित अन्य विभागों के राज्य एवं जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण शामिल हुये।

राज्यपाल डेका ने सरोवरों के आसपास पेड़ लगाने और जल संचयन के उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली और उनकी समीक्षा की। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, दुर्ग संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर, राजनांदगांव रेंज आईजी दीपक झा, कलेक्टर चन्द्रकांत वर्मा सहित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में जिले में संचालित “अमृत सरोवर” योजना की जानकारी लेते हुए राज्यपाल डेका ने सरोवरों के आसपास पेड़ लगाने और जल संचयन के उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल स्तर की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण जनों को जल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। राज्यपाल रमेन डेका ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। राज्यपाल ने लाइव टीबी केस की जानकारी भी ली और जिला प्रशासन को जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया ताकि टीबी से बचाव और उपचार की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंच सके। इसके अलावा, राज्यपाल ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की समीक्षा भी की और टीबी उन्मूलन में रेड क्रॉस की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से जिले में चल रहे सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली और समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने एक पेड़ माँ के नाम पर अभियान की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि वृक्षारोपण के महत्व के बारे में नागरिकों को जागरूक किया जाए और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए। बैठक में सहकारी संस्थाओं की भी समीक्षा की गई, जिसमें राज्यपाल ने कहा कि आम नागरिकों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जनजातीय और वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का विकास करने और इन क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने के लिए उपाय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में शिविर लगाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि सही समय पर जनजातीय समुदायों को इनका लाभ मिल सके। राज्यपाल ने श्रमिकों के बच्चों के लिए संचालित योजनाओं की भी जानकारी ली और श्रम विभाग से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। अंत में, राज्यपाल ने कृषि विभाग की समीक्षा की, जिसमें जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए चल रही गतिविधियों की जानकारी ली गई। उन्होंने कोदो फसल प्रदर्शन और जैविक खेती मिशन के अंतर्गत कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। राज्यपाल डेका ने कहा कि जिले के विकास के लिए सभी नागरिकों को प्रदेश की योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए और समय पर उनका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक योजना का जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया खिलाड़ियों का सम्मान, कहा “आपने छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊंचा किया” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय खेल पदक विजेता खिलाड़ियों को बताया छत्तीसगढ़ का गौरव: खिलाड़ियों को दी ओलंपिक विजेता बनने की शुभकामनाएं बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री 130 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रूपए की सम्मान राशि उनके बैंक खाते में अंतरित रायपुर आप सभी ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और जुनून से छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। ये सिर्फ आपकी नहीं, पूरे प्रदेश की जीत है। आप प्रदेश के खेल जगत के हीरे हैं। सरकार आपको तराशेगी, निखारेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएगी। आपके लिए हर संभव संसाधन और समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित राष्ट्रीय खेल विजेता सम्मान समारोह में गोवा और उत्तराखंड नेशनल गेम्स में पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने समारोह में गोवा में वर्ष 2023 में सम्पन्न 37वें नेशनल गेम में छत्तीसगढ़ के पदक विजेता 72 खिलाड़ियों को और वर्ष 2025 में उतराखंड में सम्पन्न 38 वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ पदक विजेता 58 खिलाड़ियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि आप सभी छत्तीसगढ़ के गौरव है। आपने न सिर्फ पदक जीते हैं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। आप सभी ने छत्तीसगढ़  का सर गर्व से ऊंचा किया है। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अब एशियाड, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  अपने संबोधन में कहा कि आज गोवा और उत्तराखंड में हुए नेशनल गेम्स विजेता खिलाड़ियों का सम्मान कर हम सब बहुत गौरव का अनुभव कर रहे हैं। आप सभी ने अपने शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है इसके लिए आप सभी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम लोगों ने गोवा में पदक जीतने वाले राज्य के 72 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 7 लाख 60 हजार रुपए की राशि एवं उत्तराखंड में नेशनल गेम्स जीतने वाले 58 खिलाड़ियों को 87 लाख 60 हजार रुपए की राशि प्रदान कर सम्मानित किया है। इस प्रकार समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 130 राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को कुल 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रुपए की सम्मान राशि हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के खाते में अंतरित की जा रही  है। ओलंपिक विजेता खिलाड़ियों के लिए विशेष पुरस्कारों की हमारी सरकार ने की है घोषणा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के जो भी खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में पदक लाएंगे, उनके लिए विशेष पुरस्कारों की घोषणा हमारी सरकार ने की है। ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तीन करोड़ रुपए, रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को दो करोड़ रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपए देने का निर्णय हमारी सरकार ने किया है। बस्तर क्षेत्र में खेलों की वापसी, नई आशा और विश्वास का प्रतीक मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बरसों तक माओवादी आतंक झेलने के बाद जब बस्तर में अमन लौटा तो खेल भी लौटा, वहां हमने बस्तर ओलंपिक का आयोजन कराया। उन्होंने कहा कि जहां कभी पांव भी रखने से लोग डरते थे, आज वहीं हज़ारों खिलाड़ी खेल रहे हैं। लोगों में जबर्दस्त उत्साह दिखा, पूरे देश में कम ही हुआ होगा कि किसी खेल आयोजन में 1 लाख 65 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और वह भी ऐसा आयोजन जो बस्तर संभाग में हुआ जहां की आबादी शेष जगहों की तुलना में काफी विरल है। इसमें ऐसे लोगों ने भी हिस्सा लिया, जो नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके थे। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी हिस्सा लिया। नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। इस आयोजन से प्रदेश के खेलप्रेमियों की उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। खिलाड़ियों को बेहतरीन खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने सरकार कर रही प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों में काफी दमखम है। हम छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए शानदार अधोसंरचना तैयार कर रहे हैं। खेलो इंडिया के 7 नये सेंटर हमने आरंभ किये हैं। छत्तीसगढ़ में हर तरह की खेल प्रतिभाएं हैं। हमने इसे ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के खेलों के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की है। इसी साल हमने तीन नई अकादमी की शुरूआत की है। रायपुर में टेनिस, राजनांदगांव में हाकी और नारायणपुर में मल्लखंभ अकादमी हमने आरंभ की है। परंपरागत खेलों को मिलेगा नया जीवन: 20 करोड़ रूपए की छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने परंपरागत खेलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन खेलों का समुचित विकास होता रहे, इसके लिए हमने 20 करोड़ रुपए का प्रावधान छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना के तहत किया है। हमारी सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। खेलों में जीत के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही फिटनेस बहुत जरूरी मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुछ दिनों पहले हमने मल्लखंभ के खिलाड़ियों का ढोलकल की पहाड़ियों पर अद्भुत करतब देखा, यह मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य था।  मल्लखंभ या किसी भी तरह के खेल के लिए लचीलापन बहुत जरूरी होता है और यह सब फिटनेस से आता है। खेलों में जीतने के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही एक अच्छे लेवल का फिटनेस भी बहुत जरूरी है। मोदी जी ने फिट इंडिया मूवमेंट चलाया है। फिटनेस के माध्यम से खेलों में तो सफलता हासिल की ही जा सकती है। फिट रहने से आप एक हेल्दी लाइफ स्टाईल भी जीते हैं जिससे कोई भी कार्य आप करें, उसमें आपको सफलता मिलती है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में अपार खेल प्रतिभा है। जिसे पहचान कर तराशना हमारी प्राथमिकता है। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव … Read more

रायपुर : हाथियों के प्रति नकारात्मक धारणा बदलने की जरूरत

रायपुर छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाथियों के प्रति समाज में व्याप्त नकारात्मक धारणा को लेकर चिंता व्यक्त की है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने कहा कि समाचार पत्रों और अन्य मीडिया माध्यमों में ‘आतंकी, उत्पाती, हत्यारा, हिंसक, पागल, बिगड़ैल, जिद्दी‘ जैसे नकारात्मक शब्दों का उपयोग किया जाता है, जिससे समाज में हाथियों के प्रति भय और नकारात्मकता बढ़ती है। यह प्रवृत्ति मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रयासों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा है कि भारत में हाथी सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। प्राचीन काल से भगवान गणेश का प्रतीक माने जाने वाले हाथी को धैर्य, शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। हाथी को ‘कीस्टोन प्रजाति‘ एवं ‘ईको-सिस्टम इंजीनियर‘ भी कहा जाता है, क्योंकि वे वनों के पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके रहने से वनों की कार्बन अवशोषण क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। हाथी और मानव के मधुर संबंध के प्रमाण छत्तीसगढ़ के इतिहास में हाथियों का मनुष्य के साथ घनिष्ठ संबंध रहा है। बस्तर के 11वीं शताब्दी के ताम्रपत्रों, मुगलकालीन अभिलेखों और ब्रिटिश शासनकाल के गजेटियरों में इसका विस्तृत उल्लेख मिलता है। अकबर के दरबारी लेखक अबुल फजल की ‘आईने-अकबरी‘ और कलचुरी राजाओं के शासनकाल के अभिलेखों में भी छत्तीसगढ़ के हाथियों और मनुष्यों के पारस्परिक संबंधों का प्रमाण मिलता है। मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने मीडिया से अपील की है कि हाथियों को लेकर सकारात्मकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। मानव-हाथी संघर्ष को केवल टकराव के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाए, ताकि सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने मीडिया को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि हाथियों का संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में समाज को हाथियों के महत्व को समझना होगा और उनके संरक्षण में सकारात्मक योगदान देना होगा।

सूरजपुर : मनबस ने दृढ़ इच्छाशक्ति से बनाई अपने आर्थिक उन्नति की राह

सूरजपुर : मनबस ने दृढ़ इच्छाशक्ति से बनाई अपने आर्थिक उन्नति की राह स्व सहायता समूह से जुड़कर कर रही हैं 25 से 35 हजार तक की आय सूरजपुर कर्मठ व्यक्ति अपने में बदलाव लाने और अपने जीवन शैली को बेहतर करने अर्थिक रूप से उन्नत होने के लिए में हमेशा कुछ नया करने का प्रयास करता रहता है। ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिलता है सूरजपुर जिले में जहां एक नारी ने अपने दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच से  अपनी परिस्थिति को बेहतर कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कहानी है जिला सूरजपुर के जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सरहरी की रहने वाली मनबस कुशवाहा की । इन्होंने अपने आर्थिक स्थिति को बेहतर करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए एक नए प्रयास के रूप में 14 जुलाई 2019 के दिन मां गौरी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। मनबस की शुरुआत शून्य अधिशेष से हुई, लेकिन समूह के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी उन्नति की राह बनाई। समूह की साप्ताहिक बचत, चक्रिय निधि और सामुदायिक निवेश कोष ने सदस्यों को कृषि आधारित कार्यों ने उन्हें सहयोग दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि मनबस कुशवाहा अपने सकारात्मक सोंच से निरंतर आगे बढ़ने की राह चुनी। अपने भविष्य को संवारने की उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के लिए प्रेरित किया। जिससे ऋणस्वरूप 1,42,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई । इस राशि का प्रयोंग करने उन्होंने नमकीन खाद्य उत्पाद मक्के से बने पोला, रिंग, पफ और कपड़ा दुकान संचालन का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। इस कदम में बी.पी.एम. अल्का कुजूर और पी.आर.पी. ललीता मिंज का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। जब इंसान खुद पर विश्वास करता है, तो जीवन में चमत्कार होने लगते हैं। आज मनबस कुशवाहा वाड्रफनगर और प्रतापपुर विकासखंड के 100 से अधिक गांवों में किराना दुकानों को होलसेलर के रूप में खाद्य सामग्री सप्लाई कर रही हैं। इससे हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक की आय हो रही है। साथ ही, कपड़े के व्यवसाय से भी 5 से 8 हजार रुपये मासिक आमदनी हो रही है। अब उनका परिवार भी अपनी छोटी बड़ी इच्छाओं को खुल कर पूरा करने न समर्थ है, उनकी सफलता केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में स्वरोजगार को लेकर महिलाओं की सोच में एक सकारात्मक बदलाव का बड़ा कारण बनी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को तो मजबूत किया ही, साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गईं। आज मनबस कुशवाहा अपने समूह को अपने परिवार का अभिन्न अंग मानती हैं और कहती हैं। कि तंगहाली से खुशहाली की ओर जाने वाला यह सफर आसान नहीं था, हर सपनों को पूरा करने के पहले अनेकों चुनौतियां सामने खड़ी होती थी, लेकिन समूह और बिहान योजना ने सभी चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देते हुए इसे संभव बनाया। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो अपने सपनों को सच करने की चाह रखती हैं। प्रयास करने वाले ही अपने जीवन में चमत्कार कर सकते हैं, और मनबस कुशवाहा इसकी जीती-जागती मिसाल हैं।

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