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शिक्षकों के पक्ष में हाईकोर्ट का अहम फैसला, VSK ऐप के आधार पर कार्रवाई पर रोक

बिलासपुर। VSK ऐप को लेकर प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने VSK ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा और याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी। मामले की सुनवाई जस्टिस एन के चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई। दरअसल, शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया, कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। उन्होंने इसे शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से नहीं कराया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने कहा है। हालांकि ये आदेश कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में ही जारी किया है, इसका लाभ अन्य शिक्षकों को भी मिलेगा या नहीं, ये अभी साफ नहीं है। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक राज्य सरकार शिक्षकों को VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं करेगी। साथ ही, इस मुद्दे को लेकर किसी भी शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले में याचिकाकर्ता कमलेश सिंह बिसेन ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिका में दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है। पहला, शिक्षकों की निजता का प्रश्न और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का विषय। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है।

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा बोले- डिजिटल ऋण पुस्तिका राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम

पारदर्शी और तकनीक-सक्षम राजस्व व्यवस्था की ओर ऐतिहासिक कदम रायपुर,      छत्तीसगढ़ में आज डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1से 4 पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पहल राज्य के किसानों और भूमिधारकों को आधुनिक, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर संचालक भू अभिलेख श्री विनीत नन्दनवार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।      डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे।      डिजिटल प्रणाली में आवश्यक विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे, जिससे जानकारी संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। साथ ही, संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने  कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं। अब ऋण पुस्तिका से संबंधित जानकारी ऑनलाइन और वास्तविक समय में उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी। मंत्री ने बताया कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी तथा शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, NIC तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें। डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों के हितों से जुड़ी भू-अभिलेख पुस्तकों का किया विमोचन

रायपुर  राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन किया। उमेश पटेल और  कांत वर्मा द्वारा लिखित इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन है। अभी तक मार्केट में जो पुस्तक थी, उसके लेखक और प्रकाशक मध्य प्रदेश के हैं। इसके कारण मध्यप्रदेश के सर्कुलर और आदेश उस पुस्तक में मिलते हैं, परंतु छत्तीसगढ़ के नहीं।       अब इस पुस्तक में, वर्ष 2000 के बाद मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी सर्कुलर जो छत्तीसगढ़ राज्य में लागू नहीं है, उन्हें नहीं दिया गया है। छत्तीसगढ़ द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार दिया गया है। परिशिष्ट के रूप में सर्वे, राजस्व वन भूमि के अभिलेख, गिरदावरी,  डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि महत्वपूर्ण विषयों पर जारी लेटेस्ट सर्कुलर शामिल किए गए हैं। विषय से संबंधित प्रश्न, इकाई परिवर्तन, शब्दार्थ आदि का भी समावेश किया गया है।       छत्तीसगढ़ विशेष के लिए नियमावली की यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ अमेजन और जेम पोर्टल पर उपलब्ध होगा

शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पशुपालन एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़े संकेतकों की विस्तृत समीक्षा

रायपुर. आंगनवाड़ी, विद्यालय एवं दुग्ध उत्पादन केंद्रों का किया स्थल निरीक्षण महानिदेशक नीति आयोग, नई दिल्ली एवं जिले की प्रभारी सचिव निधि छिब्बर ने आज महासमुद के आकांक्षी विकासखंड पिथौरा  प्रवास कर विभिन्न विकास योजनाओं एवं संपूर्णता अभियान 2.0 की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास, स्वच्छता तथा आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ  हेमंत नंदनवार, नीति आयोग के अपर सचिव  सतीश गोस्वामी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। लक्ष्य प्राप्ति के साथ निरंतरता और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर जोर छिब्बर ने कहा कि केवल संकेतकों के लक्ष्य को पूर्ण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के रूप में अपनाते हुए गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने संबंधितों को निर्देश दिए कि योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और प्राप्त उपलब्धियों को स्थायी परिणामों में बदला जाए। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं डेयरी उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए पशुपालन विभाग को विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से सशक्त बनाने पर बल दिया गया। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। संपूर्णता अभियान 2.0 के अंतर्गत जिले की प्रमुख उपलब्धियां बैठक में बताया गया कि 31 दिसंबर 2025 तक जिले में अधिकांश लक्ष्यों की प्राप्ति हो चुकी है। जन्म के समय जीवित शिशुओं के वजन मापन में 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है और कुल 12 हाजर 318 नवजात शिशुओं का वजन मापा गया है। क्षय रोग अधिसूचना दर को 81 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अंतर्गत 1,200 अनुमानित मामलों में से 973 मामलों की पहचान की जा चुकी है। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस का आयोजन 96.09 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्रों में किया गया है। जिले के सभी 1 हजार 956 विद्यालयों में बालिकाओं के लिए क्रियाशील शौचालय उपलब्ध हैं, जिससे इस सूचकांक में 100 प्रतिशत लक्ष्य पहले ही प्राप्त कर लिया गया है। पशुपालन क्षेत्र में भी 99.61 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण पूर्ण किया जा चुका है और अप्रैल 2026 तक इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पिथौरा विकासखंड में उल्लेखनीय प्रगति आकांक्षी विकासखंड पिथौरा में संपूर्णता अभियान 2.0 के तहत 28 जनवरी से 14 अप्रैल 2026 तक विभिन्न प्रमुख सूचकांकों में शत-प्रतिशत उपलब्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आईसीडीएस योजना के अंतर्गत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित अनुपूरक पोषण प्रदान करने में 86.77 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई है, जिसमें 16 हजार 800 पात्र बच्चों में से 13 हजार 107 बच्चों को 21 दिनों से अधिक समय तक पोषण आहार दिया गया है। मार्च 2026 तक इसे 95 प्रतिशत तथा अप्रैल तक 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की माप-तौल की दक्षता 99.86 प्रतिशत दर्ज की गई है। 358 संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में से 356 में शौचालय सुविधा उपलब्ध है तथा 349 केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। क्षेत्र के 493 विद्यालयों में बालिकाओं के लिए पर्याप्त शौचालय उपलब्ध हैं। पशुधन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण अभियान के तहत लक्षित 41 हजार 250 गोवंश पशुओं के विरुद्ध 41 हजार 324 पशुओं का टीकाकरण कर 100 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल की गई है। आंगनवाड़ी, विद्यालय एवं दुग्ध उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण नीति आयोग की महानिदेशक छिब्बर ने लहरौद आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों के पोषण स्तर, नियमित उपस्थिति, टीकाकरण, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था एवं रजिस्टर संधारण की समीक्षा की। उन्होंने गर्भवती एवं धात्री माताओं को प्रदाय की जा रही पोषण एवं पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता का भी परीक्षण किया। नवीन प्राथमिक विद्यालय लहरौद में कक्षाओं का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से संवाद किया, शैक्षणिक स्तर की जानकारी ली तथा मध्यान्ह भोजन योजना, छात्र उपस्थिति एवं आधारभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त ग्राम गोड़बहाल में महिला समूहों द्वारा संचालित दुग्ध व्यवसाय का निरीक्षण कर महिलाओं को आजीविका विस्तार एवं बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रेरित किया। समयबद्ध लाभ वितरण एवं गुणवत्ता सुधार के निर्देश निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने संबंधित अधिकारियों को शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने, नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों का पोषण और शिक्षा जिले की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इन क्षेत्रों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। इस अवसर पर जिला प्रशासन एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।  

शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं का फायदा हितग्राहियों को समय पर मिले: मुख्य सचिव

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील ने अधिकारियों से कहा है कि शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं का फायदा हितग्राहियों को समय पर मिले यह सुनिश्चित हो। इसके लिए पहले से ही हितग्राही से संबंधित जानकारी दुरस्त कर लिया जाये। मुख्य सचिव आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित जनगणना वर्ष 2027 के संबंध में आयोजित राज्य स्तरीय कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी गर्मी के मौसम में सभी जिलों में पेयजलापूर्ति, गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियों से पहले से ही लोगों को सावधान रहने एवं बचाव करने जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्ययोजना बनाने और तैयारियां पहले से ही कर लें। कलेक्टर्स को इस वर्ष खरीफ मौसम की धान खरीदी की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने, राशन दुकानों में खाद्यान्न सामग्री की उपलब्धता, इस साल तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य, हाई स्कूल हायर सेकेंडरी परीक्षा, जनसमस्याओं के समाधान एवं निवारण, पीएम आवास सहित अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को जनगणना वर्ष 2027 संबंधी कार्यों को सतर्कता एवं संवेदनशीलता से करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गये।  मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी राशनकार्ड धारकों को पात्रता के अनुसार समय पर खाद्यान्न सामग्री मिले इसके लिए लगातार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों की मानीटरिंग करें। मुख्य सचिव ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को धान संग्रहण केन्द्रों के भौतिक सत्यापन कर धान परिवहन एवं मिलिंग कार्य करने जरूरी दिशा निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मिलर्स के लंबित भुगतान करने जरूरी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कृषि विभाग एवं मार्कफेड के अधिकारियों को आगामी खरीफ मौसम में खाद एवं बीज के पर्याप्त भंडारण करने कहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह ने कलेक्टरों को लोगों की विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं निवारण के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित करने कहा है। उन्होंने विभिन्न शासकीय लंबित भुगतान करने शिविर शिविर लगाकर कार्यवाही करने कहा है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ ने कलेक्टर्स को भारत की जनगणना 2027 से संबंधित कार्य के संबंध दिशा निर्देशों के संबंध विस्तार से बताया। राज्य स्तरीय संभागायुक्त कलेक्टर्स कान्फ्रेंस में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के भारसाधक सचिव, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उंराव समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण

रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जशपुर जिले के डांडटोली में कोल विद्रोह के महानायक, अमर शहीद वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उरांव समाज के लिए निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं प्रदान कीं। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि अमर शहीद वीर बुधु भगत ने जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष, साहस और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उसके प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि “अमर शहीद वीर बुधु भगत का बलिदान हमें अन्याय और शोषण के विरुद्ध     दृढ़तापूर्वक खड़े रहने की प्रेरणा देता है। उनका संघर्ष केवल इतिहास की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है।” ज्ञातव्य है कि वीर बुधु भगत की जयंती प्रतिवर्ष 17 फरवरी को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 234वीं जयंती मनाई गई। वे उरांव समुदाय से थे और 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले प्रमुख जनजातीय क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, अत्यधिक कर वसूली और स्थानीय शोषण के विरुद्ध जनजागरण किया। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज संगठित हुआ और विदेशी शासन को चुनौती दी। अंग्रेजी शासन ने उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए सैन्य अभियान चलाया। संघर्ष के दौरान 13 फरवरी 1832 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान जनजातीय अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट है। समारोह में जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने अमर शहीद वीर बुधु भगत को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक

रायपुर छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा ने   आज कोण्डागांव प्रवास के दौरान कलेक्टोरेट स्थिति सभाकक्ष में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पूरक पोषण आहार योजना, मध्यान्ह भोजन योजना तथा शासकीय आश्रम तथा छात्रावास को बीपीएल दर पर प्रदाय खाद्यान्न भोजन की समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में माह फरवरी और मार्च हेतु जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न के भंडारण की समीक्षा कर माह फरवरी हेतु शेष दुकानों में खाद्यान्न का भंडारण और वितरण 07 दिवस के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।  सभी खाद्य निरीक्षको द्वारा दुकानों का निरीक्षण और प्राप्त शिकायत का तत्परता से पूर्ण निराकरण करने, दुकानों की निगरानी समिति को कार्यशील बनाने तथा इसके सदस्यों के मोबाईल नंबर सभी दुकानों में प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए। जिले के ऐसे सभी स्कूल जहां रसोईया हड़ताल के कारण मध्यान्ह भोजन योजना प्रभावित हुई है उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। जिले के सभी बालक छात्रावास की विशेषकर साफ़-सफाई एवं भोजन व्यवस्था की विशेष निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के सतत निरीक्षण और बच्चों की उपस्थिति रिपोर्टिंग व्यवस्था को त्रुटिरहित बनाने के निर्देश दिए गए। सभी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्र तथा छात्रावास में फोर्टीफाईड चावल को पकाने की सही विधि और उपभोग के लाभ की जानकारी हेतु संबंधित को प्रशिक्षण दिए जाने, प्रति डाइट अनुसार खाद्यान्न पात्रता प्रदर्शित करने तथा शिकायत और सुझाव हेतु खाद्य आयोग के काल सेंटर नंबर को स्थाई रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश आयोग के अध्यक्ष द्वारा दिए गए। राज्य खाद्य आयोग के दल द्वारा अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास, माकड़ी और बालक छात्रावास, शामपुर  का निरीक्षण किया गया । कन्या छात्रावास में व्यवस्था बेहतर पाई गई जबकि बालक छात्रावास, शामपुर में छात्रों से चर्चा उपरांत  दाल  और सब्जी की गुणवत्ता में सुधार, साफ़-सफाई की व्यवस्था में सुधार तथा प्रति डाइट अनुसार खाद्यान्न की पात्रता तथा खाद्य आयोग के काल सेंटर नंबर को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। 

राज्यपाल रमेन डेका से राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष चौरड़िया ने की सौजन्य भेंट

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका से आज यहां लोेकभवन में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति  गौतम चौरड़िया ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने आयोग के कार्याे एवं गतिविधियों की जानकारी राज्यपाल को दी।  डेका ने इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन दिया। चौरड़िया ने 21 एवं 22 फरवरी 2026 को रायपुर में उपभोक्ता संरक्षण पर आयोजित हो रहे दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला हेतु बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल को आमंत्रित भी किया।

फर्जी ATS अधिकारी बनकर 17.15 लाख की साइबर ठगी

रायपुर राजधानी रायपुर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताकर एक आरटीओ एजेंट और उसके पूरे परिवार को 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रखा और 17 लाख 15 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए। मामला रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित आरटीओ एजेंट शरद कुमार तिवारी की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शरद कुमार तिवारी को अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार और बैंक खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में हुआ है। गिरफ्तारी से बचने और जांच में सहयोग करने के नाम पर उन्हें वीडियो कॉल पर रहने के निर्देश दिए गए। आरोपियों ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को 24 घंटे तक डिजिटल निगरानी में रखा गया। इस दौरान बैंक खातों की जानकारी लेकर अलग-अलग किस्तों में कुल 17 लाख 15 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। परिवार को भी रखा दबाव में साइबर ठगों ने परिवार के सदस्यों को भी वीडियो कॉल पर शामिल कर मानसिक दबाव बनाया। किसी को फोन न करने और घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई। लगातार निगरानी और धमकी के चलते परिवार पूरी तरह सहम गया और आरोपियों के निर्देशों का पालन करता रहा। शिकायत के बाद मामला दर्ज जब ठगी का अहसास हुआ तो शरद कुमार तिवारी ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, एटीएस या किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें। किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं किया जाता और न ही बैंक खातों की जानकारी मांगी जाती है। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में दें।

मुख्यमंत्री साय से छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात, 80 वॉ महा- अधिवेशन का दिया न्यौता

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज महानदी भवन में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने 21 व 22 फरवरी 2026 को बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम चाँपा (सैंहा)में आयोजित हो रहे 80 वॉ छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज महा-अधिवेशन के लिए निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा,केन्द्रीय महामंत्री यशवंत सिंह वर्मा, कोषाध्यक्ष जागेश्वर बघेल, राज प्रधान बलौदाबाजार मती सुनीता वर्मा,चन्दखुरी चिन्ता राम वर्मा, रायपुर जगेश्वर प्रसाद वर्मा अर्जुन राज हरी राम वर्मा ,हरिश्चंद्र वर्मा, रघुनंदन वर्मा सहित समाज के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है जनगणना 2027: मुख्यमंत्री साय

रायपुर  भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है. उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है. यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा. एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है. उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी. मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी. छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा. यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है. यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा. प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है. उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए. मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो. उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए. साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए. मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे. इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है. यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है. उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी. उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है. इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए. राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

सुरक्षा पर सवाल: सेंट्रल जेल में कैदी का आत्मघाती प्रयास, इलाज जारी

बिलासपुर बिलासपुर सेंट्रल जेल के किचन में काम कर रहे एक कैदी ने हंसिया से अपना गला रेतकर खुदकुशी की कोशिश की। गंभीर हालत में जेल कर्मचारियों ने उसे तुरंत सिम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। गला रेतने के बाद कैदी अभी बातचीत नहीं कर पा रहा है, इसलिए घटना के पीछे के कारणों की पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाई है कि आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया। जानकारी के अनुसार पेंड्रा निवासी विकास कश्यप हत्या के मामले में 2 साल से केंद्रीय जेल में सजा काट रहा है। कैदी विकास कश्यप ने पारिवारिक विवाद में अपनी दादी की हत्या कर दी थी। वर्ष 2024 में उसे उक्त मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। उससे जेल के किचन में भोजन बनाने का काम फिलहाल लिया जा रहा है। मंगलवार की सुबह 7 बजे कैदी विकास अपने बैरक से जेल के किचन में भोजन बनाने के लिए पहुंचा। काम करने के दौरान उसने अचानक सब्जी काटने के हंसिया से गला रेत लिया। इस दौरान काम कर रहे अन्य कैदियों ने विकास को तड़पता देखकर उसे संभाला और जेल के अधिकारियों को सूचना दी। कैदी के खुदकुशी करने की कोशिश करने की सूचना पर जेल में हड़कंप मच गया। जेल अधीक्षक, जेलर सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उसके बाद तत्काल जेल के एम्बुलेंस से गंभीर रूप से घायल कैदी को इलाज के लिए सिम्स ले जाया गया। बताया जा रहा है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसका इलाज चल रहा है। बहरहाल, कैदी के होश में आने पर घटना की सच्चाई सामने आ पाएगी।

किसान की मौत पर भूपेश बघेल का बयान, बोले– प्रशासन निरंकुश हो चुका है

रायपुर बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम द्वारा की गई मारपीट से आदिवासी किसान की मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना पर तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे प्रदेश में गिरती कानून-व्यवस्था के उदाहरण के तौर पर पेश किया है. पंजाब दौरे से लौटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रदेश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति बेहद ख़राब है. हद तो यह है कि प्रशासन के लोग ही हत्या करने लगे हैं. विष्णु देव सरकार और विजय शर्मा के विभाग के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं. वृद्ध आदिवासी को पीट-पीट कर मार डाला. वहीं होली के दौरान शराब दुकानों के खुले रहने पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इनको (सरकार) तीज त्योहार से कोई मतलब नहीं है. होली जैसे त्योहार में शराब दुकान खोल रहे हैं. इनको केवल पैसे से मतलब है, सब कुछ पैसा है. एक बात तो समझ आती है कि सरकार को किसी के भावना से कोई मतलब नहीं है.

जल संरक्षण से आत्मनिर्भर किसान, चिड़ौला में शक्तिगत कूप बना ग्रामीण समृद्धि की मिसाल

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल सफलता की कहानी रायपुर, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं।  शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा। कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: आदिवासी मतांतरण पर रोक, ग्राम सभाओं को मिले संवैधानिक अधिकार

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूती दी है। 16 फरवरी 2026 को दिए गए निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘पेसा’ कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का पूर्ण अधिकार है। इस फैसले के बाद बस्तर से सरगुजा तक जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार मिल गया है। मामला कांकेर जिले की उन ग्राम पंचायतों से जुड़ा था, जिन्होंने बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने गांवों में सूचना पट्ट लगाकर इस संबंध में स्पष्ट संदेश भी दिया था। हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की मुहर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पहले ही ग्राम पंचायतों के इस निर्णय को वैध माना था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखते हुए कहा है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ग्राम सभाओं द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम पूरी तरह वैधानिक हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ग्राम सभाएं केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि वास्तविक स्वशासन की इकाई हैं। फैसले पर सियासी प्रतिक्रिया निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने धर्म प्रचारकों से सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने की बात कही। वहीं आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के चेयरमैन विकास मरकाम ने इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान की बड़ी जीत बताया। गांव-गांव जनजागरण अभियान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा और अन्य संगठनों ने गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व मंत्री और जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मान्यता दे दी है, तो समाज को जागरूक कर परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

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