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पाकिस्तान के भिखरियों ने भीख मांगकर खरीद ली हवेली से लेकर SUV, , विदेश तक फैला नेटवर्क

नई दिल्ली पाकिस्तान में भीख मांगना कारोबार बन गया है। काफी लोग भीख मांगकर आलिशान जीवन जी रहे हैं। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तान कर्ज के तले दबा हुआ है और उधार के पैसों से चल रहा है। पाकिस्तान को हाल ही में आईएमएफ से बेलआउट पैकेज मिला है। पाकिस्तान के भिखारियों की यह स्थिति है कि काफी लोग दुनिया के दूसरे देशों में भी जाकर भीख मांग रहे हैं। वहीं पाकिस्तान ने भी इस बात को मान लिया है कि उसके देश में भिखारियों की संख्या बढ़ रही है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बताया गया कि साल 2024 से अब तक 5000 से ज्यादा पाकिस्तानी भिखारियों को अलग-अलग देशों से वापस भेजा गया है। पाकिस्तानी भिखारियों के पास हवेली, SUV बता दें, इस साल फरवरी के महीने में एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें पेशे से एक डॉक्टर महिला ने दावा किया था कि उसकी शादी के कुछ महीने बाद उसे पता चला कि उसके ससुराल में हवेली, एसयूवी, स्विमिंग पूल और दूसरे आलीशान सामान भीख के पैसों से खरीदा गया था. इसलिए उसकी शादी एक शाही भिखारी परिवार में हुई है. इसमें सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान में दो तरह के भिखारी पाए जाते हैं. पाकिस्तान में दो तरह के भिखारी एक वो जो वहीं पर भीख मांगकर अपना गुजारा करते हैं जबकि दूसरे भिखारी वो हैं जिनके बड़े सपने होते हैं. वो ऐसे भिखारी होते हैं जो पाकिस्तान को छोड़कर दूसरे देशों में भीख मांगने जाते हैं. वहां पर वो भीख मांगकर काफी पैसे कमा लेते हैं. उनका ये सारा कारोबार एक मॉडल पर चलता है. जिस तरह से आपको कोई भी कारोबार शुरू करने के लिए स्किल्स की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह से पाकिस्तान में भिखारियों ने इस पेशे को अपने भीख मांगने के स्किल्स के साथ चला रहे हैं. ये भीख मांगते समय खास तरह की ड्रेस पहनते हैं, ये आपको अलग-अलग लुक में नजर आएंगे, ताकि सामने वाले लोगों का ध्यान खींचा जा सके. सऊदी अरब के बाद इराक ने सबसे ज्यादा 247 पाकिस्तानियों को वापस भेजा. यूएई ने पाकिस्तान सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई और पाकिस्तानियों के लिए वीजा नियमों को कड़ा किया. इस दौरान 58 लोगों को वापस भेजा गया. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह समस्या खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे पाकिस्तानियों के लिए दूसरे देशों से वीजा प्राप्त करना मुश्किल हो गया है. उन्होंने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान में करीब 22 मिलियन लोग भीख मांगते हैं, जिससे सालाना करीब 42 बिलियन डॉलर की कमाई होती है. यह आंकड़ा इस समस्या के पैमाने को दिखाता है. 2023 में सीनेट समिति की बैठक के दौरान, तत्कालीन विदेश मंत्रालय सचिव, जुल्फिकार हैदर ने खुलासा किया कि विदेशों में गिरफ्तार किए गए अधिकांश भिखारी लगभग 90 फीसदी पाकिस्तानी नागरिक थे. उन्होंने कहा कि उनमें से कई सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे देशों में तीर्थयात्रा वीजा पर यात्रा करते हैं, लेकिन फिर भीख मांगते हैं. व्यवसाय का नया मॉडल पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने खुलासा किया है कि सबसे ज्यादा 4,498 भिखारियों को सऊदी अरब से वापस भेजा गया था. ऐसे में जब सब कुछ सामने आ चुका है तो सवाल ये उठता है कि, पाकिस्तान अब भारत के रक्षा मंत्री के उस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देगा, जिसमें उन्होंने ये कहा था कि “जहां भी पाकिस्तान खड़ा होता है, भिखारियों की कतार वहीं से शुरू होती है. भीख मांगकर बनाई हवेली फरवरी में एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक पाकिस्तानी महिला ने बताया कि शादी के कुछ महीनों बाद उसे पता चला कि उसके ससुराल वालों की हवेली, एसयूवी, स्विमिंग पूल और दूसरी लग्जरी चीजें भीख मांगकर खरीदी गई हैं। यह पाकिस्तानी महिला पेशे से डॉक्टर है। उसकी शादी भिखारियों के एक अमीर परिवार में हुई थी। भीख मांगकर कमाई बेशुमार दौलत पाकिस्तानी भिखारियों ने भीख मांगकर बेशुमार दौलत कमाई है। यही नहीं, कई पाकिस्तानी भिखारी विदेश चले गए और वहां भी उन्होंने भीख मांगी। ऐसे में उन्होंने और ज्यादा दौलत इकट्ठी की ली। उनका यह बिजनेस मॉडल लोगों को हैरान कर रहा है। वहीं पिछले 3 सालों में 50 हजार पाकिस्तानी दुनिया भर के देशों में भीख मांगते पाए गए। किन-किन देशों से भेजे गए भिखारी? पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को सौंपे गए एक लिखित बयान के अनुसार साल 2024 से अब तक कुल 5,402 पाकिस्तानी भिखारियों को विदेश से खदेड़ा गया है। सऊदी अरब, इराक, मलेशिया, यूएई, कतर और ओमान जैसे कई देश शामिल हैं, जहां से पाकिस्तानी भिखारियों को पकड़कर भगाया गया है। ज्यादातर भिखारी सऊदी अरब से वापस भेजे गए हैं। सऊदी अरब से 4,498 और इराक से 242 भिखारी वापस पाकिस्तान भेजे गए। इसी तरह मलेशिया से 55 और यूएई से 49 पाकिस्तानी भिखारियों को वापस पाक भेजा गया है।

पीएम मोदी 25 मई को आ रहे गुजरात, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला दौरा

अहमदाबाद पहलगाम हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंकवादियों के आकाओं को कड़ा जवाब देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर आएंगे। पीएम मोदी के अहमदाबाद, दाहोद और कच्छ के भुज जाने की संभावना है। पीएम मोदी कच्छ के भुज में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करेंगे। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार जल्द ही पीएम मोदी का आधिकारिक कार्यक्रम रिलीज हो जाएगा। इसे अंतिम तौर पर फाइनल किया जा रहा है। पीएम मोदी पिछले साल दिवाली पर कच्छ पहुंचे थे तब उन्होंने सरक्रीक के पास हरामी नाला के नजदीक सैनिकों के साथ दिवाली मनाई थी। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले हफ्ते भुज एयरबेस का दौरा किया था। सीमावर्ती जिलों में हुए थे हमले पाकिस्तान के साथ सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर राष्ट्र को संबोधित किया था। इसके बाद वह जाब के आदमपुर एयरबेस पहुंचे थे। वहां से पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। अब पीएम मोदी अपने गृह राज्य गुजरात पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे सकते हैं। गुजरात में कच्छ-बनासकांठा और पाटण जिले पाकिस्ता की सीमा वाले जिले हैं। सैन्य संघर्ष के दौरान इन जिलों पाकिस्तान ने ड्रोन से हमला किया था। जिसका भारत ने बखूबी जवाब दिया था और सभी हमलों को नाकाम कर दिया था। पहलगाम आतंकी हमले में गुजरात के तीन लोग मारे गए थे। इनमें दो भावनगर और एक व्यक्ति सूरत के रहने वाले थे। कच्छ में तैयारियां जोरों पर सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद 25 मई से 26 मई तक गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी कच्छ के भुज, दाहोद और अहमदाबाद में रहने की उम्मीद है। पीएम मोदी अपने दौरे में कच्छ के भुज शहर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पीएम मोदी का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहला गुजरात में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। गुजरात दौरे पर के बाद पीएम मोदी पूर्वोत्तर के दौरे पर जाएंगे।

पाकिस्तान से बांग्लादेश होते हुए तुर्किये… ट्रंप परिवार का ये दोस्त कौन, जो बुन रहा डील का जाल

नई दिल्ली  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में उन देशों के साथ पींगें बढ़ाई है जिनके साथ भारत के अच्छे रिश्ते नहीं हैं। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की शामिल हैं। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान में ट्रंप की दिलचस्पी केवल क्रिप्टो करेंसी के कारोबार तक ही सीमित नहीं है। उनके सहयोगियों ने हाल ही में इस्लामाबाद के साथ उनके परिवार की कंपनी के लिए क्रिप्टो करेंसी का सौदा किया था। अब एक नई बात सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के कॉलेज के दोस्त जेंट्री बीच ने जनवरी में पाकिस्तान का दौरा किया था। इसके बाद वह बांग्लादेश और तुर्की भी गए थे। फिर उन्होंने मार-ए-लागो में ट्रंप सीनियर और उनके करीबी सहयोगियों को पाकिस्तान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक अद्भुत जगह है। वहां दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रियल एस्टेट के क्षेत्र में अरबों डॉलर के सौदे किए जा सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जेंट्री बीच की दो बार मेजबानी की। जेंट्री बीच पहली बार जनवरी में पाकिस्तान आए थे। इस दौरान शरीफ ने उनकी मेजबानी की थी। इस दौरान वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी शामिल थे। शरीफ दूसरी बार 11 फरवरी को दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के दौरान जेंट्री बीच से मिले। शरीफ ने कई विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्राध्यक्षों के साथ तस्वीरें पोस्ट की थीं। लेकिन जेंट्री बीच उनमें से एक अनजान चेहरा थे। उनकी तस्वीर @PakPMO पर पोस्ट की गई थी। विवादों से पुराना नाता जेंट्री बीच ने बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस से मुलाकात की। यूनुस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार हैं। यह मुलाकात पाकिस्तानी पीएम से मिलने के एक दिन बाद (29 जनवरी को) हुई थी। ट्रंप के करीबी सहयोगी जेंट्री बीच ने ढाका को तेल और गैस की खोज, एयरोस्पेस, रक्षा और रियल एस्टेट में भारी FDI लाने का वादा किया। शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। ट्रंप जूनियर और उनके दोस्त जेंट्री बीच का विवादों से पुराना नाता है। 2018 में द गार्डियन ने लिखा था कि कैसे ट्रंप जूनियर के शिकार के साथी जेंट्री बीच ने डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के चुनाव अभियान के लिए लाखों डॉलर जुटाए थे। इससे उन्हें ट्रंप के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच मिली। उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों पर वेनेजुएला में अमेरिकी प्रतिबंधों को कम करने और वहां अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापार खोलने की योजना बनाने का दबाव डाला। शहबाज से मुलाकात, अरबों डॉलर का वादा जेंट्री थॉमस बीच ने इस दौरे में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से मुलाकात की और अरबों डॉलर निवेश का वादा किया. डॉन न्यूज की 30 जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार जेंट्री थॉमस ने तब कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप आर्थिक कूटनीति में विश्वास करते हैं और उनका ये दौरा इसी के तहत हो रहा है. जेंट्री थॉमस ने कहा था, “हम पाकिस्तान में अलग अलग सेक्टर में अरबों डॉलर निवेश करने योजना बना रहे हैं, इनमें खनिज और प्रॉपर्टी सेक्टर शामिल है.” जेंट्री थॉमस ने कहा था कि वे पाकिस्तान में ऐसी लग्जरी इमारतें बनाएंगे जैसी पाकिस्तान में अबतक नहीं बनी है, सोने की खान पर ट्रंप के करीबी की नजर एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार इस ट्रिप में जेंट्री थॉमस ने पाकिस्तान की कंपनी एपेक्स एनर्जी से एक डील साइन की थी. इस डील का मकसद था, सिंधु नदी के किनारे मिले ‘प्लेसर गोल्ड’ के भंडार को खोजना और विकसित करना. बता दें कि पाकिस्तान में हाल ही में सोना मिलने की खबर आई है. इस सोने की अनुमानित कीमत अरबों डॉलर बताई जा रही है. कुछ महीने पहले, पाकिस्तान की नेशनल इंजिनियरिंग सर्विसेज ने दावा किया था कि उन्होंने अटक में सिंधु नदी के पास 80,000 करोड़ रुपये मूल्य का एक विशाल प्लेसर गोल्ड ब्लॉक पाया है, बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ पाकिस्तान (जीएसपी) की साल 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार देश में कई जगहों पर खनिजों और बहुमूल्य धातुओं की खोज का काम जारी है. जीएसपी ने पाकिस्तान पंजाब के ज़िला अटक में और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के ज़िला मानसहरा में जियोकेमिकल तकनीक से प्लेसर गोल्ड और दूसरी धातुओं की मौजूदगी का पता लगाने की कोशिश की है. रिपोर्ट के अनुसार अटक में सोने की मौजूदगी का पता लगाने के लिए जियो फिजिकल सर्वे और नमूने जमा किए गए हैं और इन पर काम जारी है. कहा जाता है कि ये सोना लाखों साल पहले हिमालय से बहकर आया है. और सिंधु नदी के तलछटों में है. इस्लामाबाद के बाद ढाका जेंट्री थॉमस का अगला पड़ाव 30 जनवरी को जेंट्री थॉमस इस्लामाबाद में थे तो 31 जनवरी को उनका चार्टर्ड प्लेन ढाका में था. यहां भी जेंट्री थॉमस ने मोहम्मद यूनुस को ढाका में भारी भरकम निवेश का लालच दिया.  यूनुस से मुलाकात में जेंट्री थॉमस ने कहा था कि अब समय आ गया है कि इस देश में और अधिक निवेश आए. हम यहां आकर उत्साहित हैं, उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी रियल एस्टेट, खासकर कम लागत वाले सामाजिक आवास, एयरोस्पेस और रक्षा में निवेश करने में भी रुचि रखती है. जेंट्री थॉमस को बांग्लादेश में सोना तो नहीं मिला लेकिन यहां पर वो जिस डील पर विचार कर रहे हैं उसकी वैल्यू सोने से कम नहीं है. हाईग्राउंड होल्डिंग्स के मुख्य कार्यकारी और संस्थापक बीच ने कहा था उनकी कंपनी ने पहले ही बांग्लादेश में कई परिसंपत्तियां हासिल कर ली हैं और वे देश के ऊर्जा, वित्त और अन्य क्षेत्रों में और अधिक निवेश करना चाहेंगे. जेंट्री थॉमस ने यूनुस सरकार की हिन्दू अल्पसंख्यकों पर किए जाए अनैतिक और अवैध कार्यों को नजरअंदाज करते हुए कहा था कि आपने बहुत अच्छा काम किया है. और बांग्लादेश में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति अच्छी हुई है. बीच की यात्रा से सवाल उठना लाजिमी है बीच और ट्रंप जूनियर की दोस्ती वॉर्टन बिजनेस स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से है, जहां वे 1990 के दशक में साथ थे. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जब पाकिस्तान पहलगाम आतंकी हमले की साजिश रचने में व्यस्त था, इस दौरान जेंट्री … Read more

Pakistan पर आर्थिक चोट, FATF की ग्रे लिस्ट में फिर आएगा नाम, भारत ने कर ली पूरी तैयारी

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के करीब दो हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाली जम्मू-कश्मीर (POK) में कुल नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए उस पर एयर स्ट्राइक किया।भारत की यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद हुई कई असैन्य और रणनीतिक कार्रवाई के बाद हुई, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने समेत कई अन्य फैसले लिए गए। इस दौरान भारत की तरफ से पाकिस्तान को एक बार फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में डाले जाने की कूटनीतिक विवाद की व्यापक चर्चा हुई। भारत पाकिस्तान में एक्टिव आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर के संबंध में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को नई खुफिया जानकारी सौंपने की प्लानिंग कर रहा है. FATF मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था है जिसने पाकिस्तान को कुछ सालों पहले तक आतंक के समर्थन के लिए ग्रे लिस्ट में रखा था. पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और पूरी दुनिया को दिखाया कि कैसे पाकिस्तान आतंक के इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट कर रहा है. भारत पहले ही वैश्विक मुद्रा कोष, आईएमएफ सहित दुनिया की वित्तीय संस्थाओं से पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकने की अपील कर चुका है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान इन पैसों को आतंकवाद के लिए इस्तेमाल कर रहा है. भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की सोच रहा है. भारत नए सबूत दिखाने वाला है जिससे साफ होता है कि पाकिस्तान का सरकारी तंत्र आतंकी समूहों को लगातार संरक्षण दे रहा है. ऐसे में पाकिस्तान एक बार फिर FATF की ग्रे लिस्ट में जा सकता है. भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले में संलिप्तता के लिए पाकिस्तान के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान तेज कर दिया है तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को धनराशि उपलब्ध न कराने को कहा है। इसके अलावा भारत ने पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में डालने को कहा है। बताते चलें कि एफएटीएफ की अगली बैठक जून महीने में प्रस्तावित है। पाकिस्तान पिछले कई वर्षों तक ग्रे लिस्ट में शामिल रहा और 2022 में वह इस सूची से बाहर हुआ था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  भारत ने कहा था कि एफएटीएफ की निगरानी की वजह से पाकिस्तान को 26/11 मुंबई हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बताते चलें कि 2021 में एफएटीएफ की अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान को टेरर फंड्स का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। एफएटीएफ ने 27 प्वाइंट एक्शन प्लान को जारी करते हुए पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। यह एक्शन प्लान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने की कार्रवाई से संबंधित था। अब एक बार फिर से पाकिस्तान को इस सूची में शामिल किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। क्या है FATF? फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) वैश्विक तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग की निगरानी करने वाली संस्था है। पेरिस स्थित 40 सदस्यों वाली इस संस्था की स्थापना 1989 में हुई थी। एफएटीएफ अपने सभी निर्णय एफएटीएफ प्लेनरी के जरिए लेता है और साल में तीन बार इसकी बैठक होती है। इस बैठक में उन देशों की जवाबदेही तय की जाती है, जो इसके मानकों का पालन नहीं करते हैं। FATF की ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान का पुराना नाता पाकिस्तान आतंकवाद के लिए कई बार FATF की ग्रेल लिस्ट में डाला जाता रहा है. आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली FATF ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था. FATF का कहना था कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के नामित आतंकवादी समूहों को टार्गेट करने में कमी दिखाई है. FATF के मुताबिक, पाकिस्तान आतंकवादी समूहों की संपत्ति फ्रीज करने, उन्हें सजा देने और उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाने में नाकाम रहा था. इसके बाद से पाकिस्तान के FATF की ब्लैक लिस्ट में डाले जाने का डर भी बना हुआ था. लेकिन अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया. पाकिस्तान पहले भी कई बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला-निकाला जाता रहा है. पाकिस्तान को सबसे पहले 2008 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था और 2009 में हटा लिया गया था. 2012 और 2015 के बीच भी पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में था. पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को बनाया निशाना 22 अप्रैल को पाकिस्तान स्पॉन्सर आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला किया था जिसमें 26 लोग मारे गए थे और 17 अन्य घायल हुए थे. इस हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया और 6-7 अक्टूबर को पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए. भारत के हमले में कम से कम 100 आतंकी मारे गए जिन्हें पाकिस्तानी सरकार ने शह दे रखा था. भारत की कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान ने सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे नाकाम कर दिया गया. दोनों देशों के बीच लड़ाई करीब 4 दिनों तक चली जिसके बाद दोनों संघर्षविराम पर राजी हुए. हालांकि, भारत ने साफ कहा है कि आगे से किसी भी आतंकी कृत्य को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. क्या है ग्रे और ब्लैक लिस्ट? एफएटीएफ की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, यदि कोई देश एफएटीएफ के मानकों को लागू करने में विफल रहता है, तो उसे बढ़ी हुई निगरानी (इनक्रीज्ड मॉनिटरिंग) और अधिक जोखिम वाले क्षेत्राधिकार (हाई रिस्क ज्यूरिसडिक्शंस) में डाला जाता है और इसे ही सामान्य भाषा में ग्रे और ब्लैक लिस्ट कहा जाता है। ब्लैक लिस्ट में वे देश शामिल हैं, जहां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए गंभीर रणनीतिक क्षमता का अभाव होता है। इस सूची में फिलहाल तीन देश शामिल हैं: डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया, ईरान और म्यांमार। वहीं, बढ़ी हुई निगरानी वाले क्षेत्राधिकार, जिन्हें ग्रे लिस्ट कहा जाता है, में … Read more

हम खुद 140 करोड़ है, भारत कोई धर्मशाला नहीं, जहां दुनिया भर के शरणार्थी घुस आएं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली सुप्रीम कोर्ट ने शरणार्थियों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है. दुनिया भर से आए शरणार्थियों को भारत में शरण क्यों दें? हम 140 करोड़ लोगों के साथ संघर्ष कर रहे हैं. हम हर जगह से आए शरणार्थियों को शरण नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता ने श्रीलंका से आए तमिल शरणार्थी को हिरासत में लिए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए ये बात कही.   तुरंत भारत छोड़ देना… सुप्रीम कोर्ट में श्रीलंका के एक नागरिक की हिरासत के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया. पीठ मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें निर्देश दिया गया था कि याचिकाकर्ता को UAPA मामले में लगाए गए 7 साल की सजा पूरी होते ही तुरंत भारत छोड़ देना चाहिए. जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली बेंच में जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे। श्रीलंकाई तमिल ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि अपनी 7 साल की सजा पूरी होने के तुरंत बाद वह देश से निकल जाए। शख्स को UAPA के एक केस में 7 साल कैद की सजा मिली थी। लेकिन श्रीलंकाई तमिल ने सजा पूरी होने के बाद भारत में ही रहने की इच्छा जाहिर की। उसके वकील ने अदालत से कहा कि मेरा मुवक्किल वीजा लेकर भारत आया था। अब यदि वह अपने देश वापस गया तो फिर उसकी जान को खतरा होगा। उन्होंने कहा कि शख्स को बिना किसी डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के ही करीब तीन सालों से हिरासत में रखा गया है। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, ‘आखिर आपका यहां बसने का क्या अधिकार है?’ इस पर याची के वकील ने कहा कि वह एक शरणार्थी हैं और उनके बच्चे एवं पत्नी पहले से ही भारत में सेटल हैं। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि याची को भारत छोड़ने का आदेश देने में किसी भी तरह से आर्टिकल 21 का उल्लंघन नहीं हुआ है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि आर्टिकल 19 के तहत भारत में बसने का अधिकार सिर्फ यहां के नागरिक को ही है। किसी भी बाहरी व्यक्ति के पास कोई अधिकार नहीं है कि वह आए और यहां बस जाए। इस पर वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल यदि अपने देश वापस लौटे तो उनकी जान को खतरा होगा। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि वह किसी और मुल्क में जा सकते हैं। रोहिंग्या रिफ्यूजी वाली अर्जी भी सुप्रीम कोर्ट ने की थी खारिज बता दें कि रोहिंग्या रिफ्यूजियों के मामले में भी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया था। दरअसल याची को 2015 में लिट्टे से जुड़े होने के आरोप में अरेस्ट किया गया था। 2018 में शख्स को ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था और 10 साल की कैद की सजा दी थी। इस फैसले के खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद उसकी सजा 7 साल हो गई। इसके साथ ही यह आदेश भी उच्च न्यायालय ने दिया था कि वह सजा पूरी होते ही देश छोड़ देगा। अब देश छोड़ने के फैसले के खिलाफ याची ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस दत्ता ने पूछा कि यहां बसने का आपका क्या अधिकार है? वकील ने दोहराया कि याचिकाकर्ता एक शरणार्थी है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि अनुच्छेद-19 के अनुसार, भारत में बसने का मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को ही प्राप्त है। जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने देश में जान का खतरा है, तो जस्टिस दत्ता ने कहा कि किसी दूसरे देश में चले जाइए। बता दें, साल 2015 में याचिकाकर्ता को दो अन्य लोगों के साथ LTTE ऑपरेटिव होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। साल 2018 में याचिकाकर्ता को UAPA की धारा-10 के तहत अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था और उसे दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।   मद्रास हाई कोर्ट ने साल 2022 में उसकी सजा को घटाकर साल साल कर दिया था, लेकिन निर्देश दिया कि उसे अपनी सजा के तुरंत बाद भारत छोड़ना होगा और भारत छोड़ने तक शरणार्थी शिविर में रहना चाहिए।

बेंगलुरु में भारी बारिश से जलभराव और बाढ़ जैसे हालात

बेंगलुरु बेंगलुरु भारी बारिश से निचले इलाके जलमग्न हो गए है. तेज बारिश की वजह से सडकें दरिया बन गई है. जनजीवन प्रभावित हुआ. मूसलाधार बारिश के चलते शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. हजारों लोग बाढ़ जैसी स्थिति से प्रभावित हुए हैं. कई स्थानों पर नाव चलाने की नौबत भी आ गई है. भारी जल निकासी की व्यवस्था के बावजूद, लगातार बारिश के कारण जलस्तर कम नहीं हो पा रहा है. बारिश का यह सिलसिला पिछले 48 घंटों में पूरे शहर की स्थिति को अस्त-व्यस्त कर चुका है. बेंगलुरु के कई मशहूर इलाकों में कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया है. इस जलभराव ने आम नागरिकों की दिनचर्या पर बेहद नकारात्मक असर डाला है. राहत और बचाव कार्य जोरों से चल रहे हैं. पंपों से जल निकासी की जा रही है. बेंगलुरु में रविवार को हुई भारी बारिश ने शहर के कई इलाकों को बुरी तरह से प्रभावित किया। खासकर होरमावु इलाके में घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। होरमावु में बुरा हाल भारी बारिश के बाद ग्राउंड फ्लोर के घरों में पानी भर गया। फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घर का सामान बर्बाद हो गया। लोग घुटनों तक पानी में चलकर घर से निकलने को मजबूर हुए। इलाके की सड़कों पर पानी भरने से ट्रैफिक ठप हो गया और वाहन डूबते दिखे। शहर की जल निकासी व्यवस्था फेल अचानक आई तेज बारिश से जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह नाकाम हो गई। कई सड़कें नालों में बदल गईं, जिससे आम लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो गई। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रफ्तार भी धीमी हो गई और यात्री फंसे रहे। मौसम विभाग का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण कर्नाटक, असम, मेघालय और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। दोपहर 3 बजे से रात 1 बजे के बीच बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में तेज तूफान और बारिश की संभावना जताई गई है। बेंगलुरु में लगातार हो रही बारिश शहर में लगातार एक सप्ताह से बारिश हो रही है। शुक्रवार की रात भी तेज बारिश हुई, जो कई घंटों तक जारी रही थी।  

नेतन्याहू के ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ से खौफ में गाजा,151 मौतों के बीच बड़ी राहत का भी ऐलान

गाजा  गाजा पट्टी एक बार फिर इतिहास के सबसे भयावह मानवीय संकटों में से एक का गवाह बन गई है. इजरायल की तरफ से शुरू किए गए ‘गिदओन्स चारियट्स’ ऑपरेशन के तहत महज एक दिन में 151 फिलिस्तीनियों की मौत ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में भोजन भेजने की घोषणा कर जंग और राहत का एक साथ ऐलान कर नया बवाल मचा दिया है.  इजरायल ने नए जमीनी ऑपरेशन में एक दिन में 151 लोगों की जान ले ली। उधर, उत्तरी इजरायल में एक इंडोनेशियाई अस्पताल पर भी कब्जे की सूचना है। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में राहत सामग्री भेजने का ऐलान किया। उन्होंने कैबिनेट की मंजूरी के बाद कहा कि गाजा में भुखमरी की कगार पर खड़े फिलिस्तीनियों को भोजन मिलेगा। लेकिन यह फैसला इजरायली सेना के नए भीषण जमीनी हमले के बीच लिया गया है, जिसका मकसद हमास को पूरी तरह कुचलना है। इजरायल का गाजा में सबसे बड़ा ऑपरेशन इजरायल ने इस नए सैन्य अभियान को नाम दिया है “गिदओन्स चारियट्स” और यह अब तक का सबसे बड़ा ज़मीनी ऑपरेशन बताया जा रहा है। सिर्फ रविवार को ही इस हमले में 151 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा के इंडोनेशियन अस्पताल को इजरायली सेना ने घेर लिया है। इजरायल को अस्पताल में हमास के कुछ आतंकियों के इनपुट मिले थे। उधर, अस्पताल निदेशक डॉ. मरवान अल-सुल्तान के मुताबिक, अंदर 55 लोग फंसे हुए हैं, जिनमें डॉक्टर, मरीज और स्टाफ भी शामिल हैं। आधे मिलियन लोगों पर भूख का संकट Euronews की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 5 लाख फिलिस्तीनी भुखमरी से जूझ रहे हैं। 10 लाख और लोग पोषण संकट से जूझ रहे हैं। भुखमरी के हालात को देखते हुए नेतन्याहू ने भोजन देने की बात कही है। लेकिन चेतावनी दी कि कोई भी मदद हमास के हाथ न लगे। नेतन्याहू ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी कैबिनेट ने सेना की सिफारिश पर गाज़ा में “मूलभूत मात्रा में भोजन” भेजने की अनुमति दी है। ये फैसला लगभग तीन महीने की नाकाबंदी के बाद लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम मानवीय राहत के साथ-साथ इजरायल की सैन्य रणनीति का हिस्सा है, ताकि गाजा में सेना का बड़ा अभियान और तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।  

अब आतंकी सैफुल्लाह का शव पाक झंडे में लिपटा, पहलगाम कनेक्शन आया सामने

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के सिंध प्रांत में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक टॉप आतंकी सैफुल्लाह खालिद की मौत हो गई है. रविवार को सैफुल्लाह, जिसे विनोद कुमार, मोहम्मद सलीम, खालिद, वानियाल, वाजिद और सलीम भाई के नाम से भी जाना जाता था, को सिंध के बदिन जिले के मटली तालुका में मार गिराया गया. लेकिन अब उसके जनाजे में ठीक वैसा ही नजारा दिखा है, जिसकी पाकिस्तान से उम्मीद थी. आतंकी सैफुल्लाह के शव को पाकिस्तानी झंडे से ढका गया. इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर में जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों को मारा था तब भी पाकिस्तान ने राजकीय सम्मान दिया था. सैफुल्लाह खालिद के नमाज-ए-जनाजे में लश्कर के कई आतंकी मौजूद रहे. उसकी लाश को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया, जिसके बाद एक-एक कर लश्कर के आतंकियों ने नमाज-ए-जनाजा पढ़ा. बता दें कि रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने ताबड़तोड़ गोलियां मारकर सैफुल्लाह की हत्या कर दी थी. वह लश्कर के नेपाल मॉड्यूल का इंचार्ज था. पाकिस्तान में रहकर लश्कर के लिए रिक्रूटमेंट का काम देख रहा था यानी आतंकियों की भर्ती कर रहा था. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में लश्कर के टॉप आतंकियों की सुरक्षा में पाक आर्मी और ISI ने इजाफा किया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैफुल्लाह को भी लश्कर की तरफ से घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलने को कहा गया था. सैफुल्लाह की सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी. हाल फिलहाल में लश्कर के चीफ हाफिज सईद के कई करीबियों की पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में हत्या की गई है. खुद हाफिज सईद पर लाहौर में उसके घर के पास फिदायीन हमला हुआ था, जिसमें वह बाल-बाल बच गया था. ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर का हेडक्वार्टर मुरिदके इंडियन आर्मी के निशाने पर था और उसे मिसाइल से उड़ाया गया था. ऐसे में हाफिज सईद इसके बेटे ताल्हा सईद समेत इंडिया के सभी मोस्ट वांटेड आतंकियों की ना सिर्फ सुरक्षा बढ़ाई गई है बल्कि उन सभी को ज्यादा मूवमेंट ना करें ये भी पाकिस्तान आर्मी और ISI की तरफ से मैसेज दिया गया है. सैफुल्लाह के पहले हाफिज सईद के साथ साए की तरह रहने वाले इंडिया के मोस्ट वांटेड आतंकी अबु कताल की पाकिस्तान में भी हत्या कर दी गई थी. अबु कताल की 16 मार्च को पाकिस्तान में हत्या की गई थी. ये लश्कर का सबसे खूंखार आतंकी था जिसने कश्मीर में सेना के ऊपर कई बड़े हमलों को अंजाम दिलवाया था. हाफिज सईद के करीबी और इंडिया मोस्ट वांटेड आतंकी अबु कताल के पहले दो और लश्कर के खूंखार आतंकी और हाफिज सईद के बेहद करीबी आतंकियों में शुमार आतंकी हंजला अदनान की कराची में दिसंबर 2023 में हत्या कर दी गई थी. वहीं, आतंकी रियाज अहमद उर्फ अबु कासिम की सितम्बर 2023 में भी अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी गई थी. ये सभी हत्याएं सीधेतौर पर हाफिज सईद के लिए बड़ा झटका माना जाता है.

बेटियों के लिए घर बैठे अप्लाई कर सकते हैं इस सरकारी स्कीम में

नई दिल्ली ऐसी कई सरकारी योजनाएं होती हैं जिनके फायदे जानते हुए भी हम सिर्फ सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से उनके लिए अप्लाई नहीं करते। वहीं अगर आपको बताया जाए कि आप बिना किसी लाइन में लगे या सरकारी दफ्तर के धक्के खाए अपनी बिटिया के भविष्य के लिए एक खास सरकारी योजना में अप्लाई कर सकते हैं, तो कैसा रहेगा? अगर आपके घर में भी प्यारी सी छोटी बिटिया है, तो यह खबर आपको पढ़नी चाहिए। दरअसल घर बैठे अपने फोन से आप सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना में अप्लाई कर सकते हैं। इस स्कीम में आप हर साल थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करके बेटी की पढ़ाई या शादी के लिए बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। इसमें आपको अच्छा ब्याज तो मिलेगा ही साथ ही टैक्स में भी छूट मिलेगी। अगर आप इस सरकारी स्कीम में नियमित रूप से निवेश करेंगें, तो बिटिया के 21 साल का होने पर ₹65 लाख का फंड तैयार हो सकता है। चलिए जानते हैं इस खास स्कीम के लिए फोन से अप्लाई करने का तरीका। इन जरूरी डॉक्यूमेंट्स को तैयार रखें फोन से इस योजना के लिए अप्लाई करने का तरीका जानने से पहले जान लेतें हैं कि आपको किन डॉक्यूमेंट्स को तैयार रखना होगा। इन डॉक्यूमेंट्स को तैयार रखने से आप और भी तेजी से इस योजना के लिए अप्लाई कर पाएंगे। फोन से इस योजना के लिए अप्लाई करने से पहले ये डॉक्यूमेंट्स स्कैन करके PDF या फोटो के रूप में अपने फोन में रखें। इसमें सबसे पहले बेटी के जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत होगी। इसके बाद माता-पिता के आधार कार्ड और एड्रेस प्रूफ जैसे कि बिजली का बिल, राशन कार्ड आदि को तैयार रखें। बेटी की पारपोर्ट साइज फोटो और जिस बैंक में खाता खालना है वहां की पासबुक भी तैयार रखें। नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप फोन से सुकन्या समृद्धि योजना के लिए फोन से अप्लाई करने के लिए आपके पास SBI, PNB, ICICI, HDFC, या अन्य प्रमुख बैंकों में से किसी एक में बैंक खाता होना चाहिए। इसके अलावा आपके पास उस बैंक की मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग सुविधा एक्टिव होनी चाहिए। दरअसल एक सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट आपके बैंक में खोला जाता है। इसके लिए नेट बैंकिंग या ऐसे बनेगा खाता सुकन्या समृद्धि योजना के लिए अप्लाई करने के लिए अपनी बैंकिंग ऐप में लॉग इन करें और Govt Schemes या Sukanya Samriddhi Account वाला ऑप्शन चुनें। इसके बाद Open Account पर क्लिक करें। इसके बाद आपको पूछी गई हर एक डिटेल भरनी है। जैसे कि बेटी का नाम, जन्म तारीख, जन्म प्रमाण पत्र नंबर आदि। यहां आपसे माता-पिता/अभिभावक का नाम और आधार नंबर, नॉमिनी की जानकारी, और KYC के लिए डॉक्यूमेंट अपलोड करने के लिए भी कहा जाएगा। पहली किस्त से खाता शुरू बता दें कि सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट के लिए सभी डिटेल्स भर देने के बाद खाते की शुरूआत करने के लिए आपको कम से कम 250 रुपये जमा करने होंगे। यह आप UPI, बैंक बैलेंस या नेट बैंकिंग के जरिए से कर सकते हैं। ध्यान रखें कि फॉर्म भरने के बाद आपको एक रेफरेंस नंबर मिलेगा और कुछ ही देर में आपको अपना अकाउंट शुरू होने की जानकारी आपके फोन पर ही SMS के जरिए मिल जाएगी।

देश के 17 सांसदों को संसद रत्न पुरस्कार 2025 से किया जाएगा सम्मानित

नई दिल्ली संसद में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 17 सांसदों और 2 संसदीय स्थायी समितियों को संसद रत्न पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। ये पुरस्कार संसद में सक्रियता, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कामकाज में योगदान के आधार पर दिए जाते हैं। यह पुरस्कार प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन की तरफ से शुरू किया गया है। इस वर्ष के विजेताओं का चयन जूरी कमेटी ने किया, जिसकी अध्यक्षता हंसराज अहीर, (राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष) ने की। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जिन्होंने लोकतंत्र को मजबूती देने के लिए संसद में उत्कृष्ट योगदान दिया है। लगातार उत्कृष्ट कार्य के लिए- चार सांसदों को विशेष सम्मान चार सांसदों को संसदीय लोकतंत्र में उत्कृष्ट और सतत योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन के अनुसार, ये चारों सांसद 16वीं और 17वीं लोकसभा में भी संसद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे हैं और अपनी मौजूदा कार्यकाल में भी लगातार सक्रिय हैं।     भर्तृहरि महताब (भाजपा)     सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी)     एन. के. प्रेमचंद्रन (आरएसपी)     श्रीरंग अप्पा बारणे (शिवसेना) अन्य संसद रत्न पुरस्कार विजेता सांसद बाकी 13 सांसदों को भी उनके विशिष्ट संसदीय कार्यों के लिए चुना गया है। इनमें कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन सांसदों ने संसद में प्रश्न पूछने, चर्चा में भाग लेने और विधेयकों पर सुझाव देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।   स्मिता वाघ (भाजपा)                      अरविंद सावंत (शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट) नरेश गणपत म्हास्के (शिवसेना) वर्षा गायकवाड़ (कांग्रेस) मेधा कुलकर्णी (भाजपा) प्रवीण पटेल (भाजपा) रवि किशन (भाजपा) निशिकांत दुबे (भाजपा) बिद्युत बारन महतो (भाजपा) पी. पी. चौधरी (भाजपा) मदन राठौर (भाजपा) सी. एन. अन्नादुरै (डीएमके) दिलीप सैकिया (भाजपा)     दो संसदीय समितियों को भी मिला सम्मान इस वर्ष दो संसदीय स्थायी समितियों को भी संसद रत्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा। वित्त पर स्थायी समिति अध्यक्ष: भर्तृहरि महताब इस समिति ने वित्तीय नीतियों पर कई प्रभावशाली और व्यावहारिक रिपोर्टें संसद में प्रस्तुत की हैं। कृषि पर स्थायी समिति अध्यक्ष: चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस) इस समिति ने किसानों की समस्याओं और कृषि सुधारों पर ठोस सुझाव संसद में रखे हैं। क्या है संसद रत्न पुरस्कार? संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत 2010 में हुई थी और यह पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जो पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए संसद में सक्रिय रहते हैं। इसका उद्देश्य सांसदों को प्रोत्साहित करना और जनता के बीच संसदीय कार्यवाही को लोकप्रिय बनाना है।

भारत बना जन्मभूमि, चीन को छोड़ा पीछे, दुनिया का सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाला देश बना भारत

नई दिल्ली दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है और 2025 तक यह 8.23 अरब के पार पहुंच गई है। जनसंख्या के मामले में भारत, चीन जैसे देश टॉप पर हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस देश में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं? एक नई रिपोर्ट में इस दिलचस्प सवाल का जवाब दिया गया है। भारत बना जन्मभूमि, चीन को छोड़ा पीछे विजुअल कैपिटलिस्ट के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का वह देश है जहां हर घंटे सबसे ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं। 2023 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में हर घंटे औसतन 2,651 बच्चे पैदा हो रहे थे। यह आंकड़ा हमारे पड़ोसी देश चीन से काफी आगे है जहां इसी अवधि में हर घंटे 1,016 बच्चे जन्म ले रहे थे। भारत और चीन के बाद सबसे ज्यादा बच्चे पैदा होने वाले देशों की सूची में नाइजीरिया तीसरे स्थान पर है जहां हर घंटे 857 बच्चे पैदा हुए। चौथे स्थान पर हमारा दूसरा पड़ोसी देश पाकिस्तान रहा जहां 2023 में हर घंटे 786 बच्चे जन्म ले रहे थे। इसके बाद इंडोनेशिया (512 बच्चे प्रति घंटा), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) (499 बच्चे प्रति घंटा), इथोपिया (469 बच्चे प्रति घंटा), संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) (418 बच्चे प्रति घंटा) और बांग्लादेश (398 बच्चे प्रति घंटा) का स्थान आता है। इन आंकड़ों से साफ है कि बच्चों के जन्म के मामले में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है। रिपोर्टों के अनुसार अकेले 2023 में भारत में 2 करोड़ 32 लाख 19 हजार 489 बच्चों का जन्म हुआ था। फर्टिलिटी रेट में कौन है आगे? भारत नहीं है नंबर वन हालांकि अगर प्रति महिला बच्चे पैदा करने की औसत दर यानी फर्टिलिटी रेट की बात करें तो भारत इस मामले में पहले स्थान पर नहीं है। स्टेटिस्टा (statista) की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा फर्टिलिटी रेट अफ्रीकी देश चाड में है। दक्षिण अफ्रीका का यह देश प्रति महिला औसतन 5.94 बच्चे पैदा करने की दर के साथ पहले स्थान पर है। चाड के बाद सोमालिया का नंबर आता है जहां महिलाएं औसतन 5.91 बच्चों को जन्म देती हैं। इसके बाद कांगो का स्थान है जहां महिलाएं औसतन 5.9 बच्चे पैदा करती हैं। सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और नाइजर भी उच्च फर्टिलिटी रेट वाले देशों में शामिल हैं। इस तरह बच्चों के कुल जन्म की संख्या के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है जबकि प्रति महिला बच्चे पैदा करने की औसत दर के मामले में अफ्रीकी देश आगे हैं। यह आंकड़े दुनिया की जनसंख्या गतिशीलता और भविष्य की जनसांख्यिकी को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।  

बांग्लादेश में मैन्युफैक्चरिंग कर रही भारतीय कंपनियों को झटका, महंगे हो जाएंगे गारमेंट प्रोडक्ट

नई दिल्ली सरकार के फैसले के मुताबिक बांग्लादेश से अब सड़क मार्ग से गारमेंट नहीं आ सकेंगे और इसका सीधा लाभ घरेलू गारमेंट निर्माताओं को मिलने जा रहा है। अति कम विकसित राष्ट्र (एलडीसी) की श्रेणी में शामिल होने से बांग्लादेश से भारत आने वाले गारमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगता है। शुल्क मुक्त होने की वजह से बांग्लादेश से आने वाले गारमेंट घरेलू गारमेंट के मुकाबले सस्ते होते हैं जिससे घरेलू गारमेंट निर्माताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा था। तिरुपुर के गारमेंट उद्यमियों से लेकर क्लोथ मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरफ से कई बार सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया गया। बांग्लादेश को मिलती है छूट बांग्लादेश को मिली शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा का फायदा चीन भी उठा रहा था। चीन बांग्लादेश के रास्ते भारत में अपने माल शुल्क मुक्त तरीके से भेज रहा था। जबकि चीन से गारमेंट या फैबरिक मंगाने पर 20 प्रतिशत का शुल्क लगता है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (सिटी) के पूर्व अध्यक्ष व टीटी लिमिटेड के एमडी संजय कुमार जैन ने बताया कि बांग्लादेश से सालाना 6000 करोड़ के गारमेंट का आयात हो रहा है। सड़क मार्ग से आयात पर रोक के सरकार के फैसले से घरेलू गारमेंट मैन्यूफैक्चरर्स को 2000 करोड़ के गारमेंट निर्माण के अवसर मिलेंगे। बांग्लादेश में निर्माण कर रही कंपनियां अब सिर्फ न्हावा शेवा और कोलकाता स्थित समुद्री बंदरगाह से आयात की अनुमति के बाद बांग्लादेशी गारमेंट की लागत काफी बढ़ जाएगी और भारत में उनकी बिक्री भी प्रभावित होगी। शुल्क मुक्त आयात की सुविधा की वजह से कई भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में निर्माण कर रही है क्योंकि बांग्लादेश में श्रमिकों की मजदूरी सस्ती होने से निर्माण लागत भारत की तुलना में काफी कम है। इसलिए भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में माल बनाकर भारत में बिना किसी शुल्क के आयात कर लेती है। अब इन कंपनियों को भारत में ही निर्माण करने में लाभ दिखेगा। गारमेंट के निर्यात बाजार में भी बांग्लादेश भारत को कड़ा मुकाबला देता है और यूरोप में भारत से अधिक बांग्लादेश गारमेंट का निर्यात करता है।  

लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह खालिद को अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी, पाकिस्तान में हुई हत्या

नई दिल्ली आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ आतंकी सैफुल्लाह खालिद  की पाकिस्तान में हत्या कर दी गई। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी। वो लश्कर के संस्थापक आतंकी हाफिज सईद का बेहद करीबी था। जानकारी के मुताबिक, मटली शहर में जैसी ही वो अपने घर के बाहर निकला, हमलावरों ने उसके सिर और सीने पर गोली मार दी। भारत में तीन बड़े हमलों में था शामिल यह आतंकी भारत में हुए तीन हमलों में शामिल था। उसने महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में साल 2006 में हमले की साजिश रची थी। साल 2001 में रामपुर में सीआरपीएफ कैंप में हुए हमले और बंगलौर में 2005 में हुए हमले में वो शामिल था। नेपाल में कई सालों तक छिपा रहा खालिद खालिद विनोद कुमार के फर्जी नाम से कई सालों तक नेपाल में छिपा रहा था। खालिद ने अपना ठिकाना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले के मतली में बना लिया था। वहां वह लश्कर-ए-तैयबा और उसके मुखौटा संगठन जमात-उद-दावा के लिए काम करता रहा, जिसका मुख्य काम आतंकी अभियानों के लिए भर्ती और धन उगाही करना था।

BMC ने मिथुन चक्रवर्ती को गैर कानूनी निर्माण के चलते कारण बताओ नोटिस भेजा

मुंबई मुंबई के मड इलाके में अवैध इमारतों को हटाने के लिए बीएमसी (बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) गंभीर हो गई है। अब इस लिस्ट में मिथुन चक्रवर्ती का नाम भी शामिल हो गया है। दिग्गज अभिनेता और भाजपा नेता को मलाड के एरंगल गांव में कथित रूप से गैर कानूनी निर्माण के चलते कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार मिथुन को अब यह बताना होगा कि निर्माण को क्यों नहीं गिराया जाना चाहिए। अगर वे इसका जवाब नहीं देते हैं तो बीएमसी इसे गिरा सकती है और कानूनी कार्रवाई करेगी। बीएमसी ने मड इलाके में 100 से ज्यादा अवैध निर्माणों को चिन्हित किया है, जिनमें कुछ बंगले भी शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर फर्जी लेआउट प्लान का इस्तेमाल करके बनाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि वे मई के अंत तक ऐसी सभी अवैध इमारतों को हटाने की योजना बना रहे हैं। बीएमसी ने मिथुन चक्रवर्ती को नोटिस जारी करने के लिए मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा 351 (1 ए) का इस्तेमाल किया है, जिसमें उन्हें 10 मई से एक हफ्ते का समय दिया गया है। उनसे यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि कथित निर्माण को क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए। यदि वह समय पर जवाब देने में विफल रहते हैं, तो नागरिक निकाय संरचना के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि इस तरह के उल्लंघन मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा 475 ए के तहत आते हैं। जिसके कारण जुर्माना और यहां तक कि जेल भी हो सकती है। नोटिस का जवाब देते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने अपना रुख बरकरार रखते हुए फ्री प्रेस जर्नल को बताया, ‘मेरी कोई अवैध इमारत नहीं है, कई लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, और हम अपने जवाब भेज रहे हैं’।

गाजा के लोग अब भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं, तुरंत रोके ‘गाजा’ पर हमले, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

बगदाद फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का आग्रह किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इराक की राजधानी बगदाद में आयोजित 34वें अरब लीग शिखर सम्मेलन में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इजरायली सैन्य अभियानों को रोकने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अरब योजना को अपनाने का आह्वान किया। अब्बास ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायली कब्जे को समाप्त करके और फिलिस्तीनी लोगों के पूर्ण अधिकारों को सुनिश्चित करके ही स्थायी शांति प्राप्त की जा सकती है। मार्च में युद्धविराम का समझौता टूटने के बाद से इजरायल ने गुरुवार से अब तक सबसे घातक बमबारी में सैकड़ों फिलिस्तीनियों को मार डाला। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को मध्य पूर्व का दौरा समाप्त किया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने पिछले 19 महीने से गाजा में फिलिस्तीनियों पर किए गए ‘अत्याचार और हिंसा’ की कड़ी निंदा करते हुए हिंसक अभियान का उद्देश्य गाजा की आबादी को समाप्त करना बताया। अल-सीसी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका से गाजा में मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए कड़े कदम उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने शत्रुता समाप्त होने के बाद गाजा की शीघ्र पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की मिस्र की प्रतिबद्धता भी दोहराई। शिखर सम्मेलन की समाप्ति के बाद, गाजा में हमास संचालित मीडिया कार्यालय ने उपस्थित लोगों से गाजा पर अन्यायपूर्ण नाकाबंदी को तोड़ने और प्रतिदिन होने वाली हत्याओं को रोकने का आह्वान किया। गाजा के लोग अब भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं। इसके लिए क्रॉसिंग को तत्काल और बिना शर्त खोलने, गाजा के लोगों को भोजन, मानवीय सहायता और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए इजरायल पर दबाव बढ़ाने का आग्रह किया गया। लेबनान के प्रधान मंत्री नवाफ सलाम ने अपने संबोधन में, इजरायल की शत्रुता की निंदा की और उस पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इजरायल की तरफ से हो रहे लगातार हमले पिछले साल नवंबर के अंत में दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति का उल्लंघन है। सलाम ने आगे कहा, “प्यारे भाइयों, हम आपसे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव डालने का आह्वान करते हैं ताकि इजरायल को अपने आक्रमणों को समाप्त करने और सभी लेबनानी क्षेत्रों से पूरी तरह से हटने के लिए मजबूर किया जा सके।” संयुक्त राष्ट्र सहायता प्रमुख टॉम फ्लेचर ने इस सप्ताह सुरक्षा परिषद से पूछा कि क्या वह “नरसंहार को रोकने” के लिए कार्रवाई करेगी। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने युद्ध के बाद अरब देशों के पुनर्निर्माण में मदद के लिए एक कोष बनाने की घोषणा की, जिसमें गाजा और लेबनान के लिए 20-20 मिलियन डॉलर की शुरुआती राशि देने का वादा किया गया, जहां पिछले साल हिजबुल्लाह समूह के खिलाफ इजरायली अभियान में दक्षिणी हिस्से का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था। शिखर सम्मेलन में 22 अरब लीग सदस्य देशों के नेताओं और शीर्ष राजनयिकों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 2003 के अमेरिकी आक्रमण के बाद इराक की तरफ से आयोजित यह दूसरा आयोजन है। पहला आयोजन 2012 में हुआ था। इजरायल ने छह सप्ताह के युद्ध विराम के बाद गाजा पर फिर से सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी है। इजरायल का आरोप है कि हमास, आतंकवादियों के बीच काम करता है। हालांकि शिखर सम्मेलन में मौजूद नेताओं ने इसका विरोध किया। इजरायल का घोषित लक्ष्य हमास की सैन्य और सरकारी क्षमताओं को खत्म करना है। हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया था। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायल सैन्य अभियान ने क्षेत्र के भीड़भाड़ वाले इलाके को तबाह कर दिया है। 2.3 मिलियन निवासी अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं और 53,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजरायल पर युद्ध विराम वार्ता फिर से शुरू करने और गाजा में खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति की अनुमति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।

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