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पहलगाम आतंकी हमले पर राजनाथ सिंह की दो टूक, भारत को डराया नहीं जा सकता, करारा जवाब देंगे

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर दो टूक कहा कि भारत को डराया नहीं जा सकता है और जिम्मेदार लोगों को करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति है। इसके अलावा, जिन्होंने पर्दे के पीछे बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रची है, उन तक भी पहुंचा जाएगा। एक कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा, ”आप जानते हैं कि कल पहलगाम में धर्म को निशाना बनाते हुए आतंकवादियों द्वारा किए गए कायरतापूर्ण हमले में हमारे देश ने अनेक निर्दोष नागरिकों को खोया है। इस घोर अमानवीय कृत्य से हम सभी गहरे शोक में हैं। सबसे पहले उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपनों को खोया है। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए परमात्मा से प्रार्थना करता हूं। यहां मैं भारत के दृढ़ संकल्प को दोहराना चाहूंगा, आतंक के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है।” रक्षा मंत्री ने आगे कहा, ”भारत का एक-एक नागरिक इस कायरतापूर्ण हरकत के खिलाफ एकजुट है। मैं इस मंच से देशवासियों को आश्वस्त करता हूं कि घटना के मद्देनजर भारत सरकार वह हर कदम उठाएगी जो जरूरी होगा। हम सिर्फ उन लोगों तक नहीं पहुंचेंगे जिन्होंने घटना को अंजाम दिया है, हम उन तक भी पहुंचेंगे जिन्होंने पर्दे के पीछे बैठकर भारत के खिलाफ नापाक साजिश रची है। भारत पुरानी सभ्यता और इतना बड़ा देश है, जिसको ऐसी किसी भी आतंकी गतिविधियों से डराया नहीं जा सकता है। ऐसी हरकतों का जिम्मेदार और इसके जिम्मेदार लोगों को आने वाले समय में जोरदार तरीके से नजर आएगा। मैं देशवासियों को आश्वस्त करता हूं।” जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बेसरन घाटी में बीते दिन आतंकियों ने गोलीबारी करके 26 पर्यटकों की हत्या कर दी। इसके अलावा 17 अन्य घायल हुए हैं। हमले के बाद सामने आया कि आतंकियों ने लोगों के धर्म पूछकर उनकी जान ली। लोगों से कलमा पढ़ने को कहा गया और जिन्होंने पढ़ लिया, उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि अन्य को सिर के नजदीक से गोली मार दी गई।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन में भारतीय सेना और सरकार, गृह मंत्री शाह की दो टूक- कायराना आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

 पहलगाम  जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से पूरा देश आहत है। जिस तरह से आतंकियों ने कायराना हरकत को अंजाम दिया और पर्यटकों को अपना निशाना बनाया, उसने पूरे देश को झकझोर के रख दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस टेरर अटैक पर रिएक्ट किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस कायराना आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बुधवार को पहलगाम में बैसरन का दौरा किया। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अमित शाह ने क्या कहा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘भारी मन से पहलगाम आतंकी हमले के मृतकों को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत आतंक के आगे नहीं झुकेगा। इस नृशंस आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।’ पहलगाम टेरर अटैक के बाद पहली बार अमित शाह ने प्रतिक्रिया दी है। आतंकी हमले में जान गंवाने वालों को शाह ने दी श्रद्धांजलि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बुधवार को पहलगाम में बैसरन का दौरा किया। जम्मू कश्मीर में ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर इस पर्यटन स्थल में मंगलवार को आतंकवादियों के नृशंस हमले में 28 पर्यटक मारे गए थे। अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए पुलिस नियंत्रण कक्ष में आयोजित शोक समारोह में पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद अमित शाह हेलिकॉप्टर से यहां से करीब 110 किलोमीटर दूर बैसरन के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि शाह को सुरक्षा अधिकारियों ने घटना के बारे में जानकारी दी। पहलगाम अटैक में 28 पर्यटकों ने गंवाई जान आतंकवादियों ने मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में एक प्रमुख पर्यटक स्थल पर हमला किया, जिसमें 28 लोग मारे गए और 16 लोग घायल हो गए। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे तो पहलगाम घूमने के लिए आए थे। अमित शाह हमले के कुछ घंटों के भीतर मंगलवार रात को यहां पहुंचे और उन्हें पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने स्थिति के बारे में जानकारी दी। गृह मंत्री ने एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की भी अध्यक्षता की, जिसमें उपराज्यपाल भी शामिल हुए।

किसान के 2 एकड़ में आग लगने की वजह से किसान की सारी फसल जलकर राख, मदद के लिए आगे आए गुरु रंधावा

मुंबई ‘नाच मेरी रानी’, ‘हाई रेटड’ और ‘पटोला’ जैसे हिट गाने गा चुके मशहूर सिंगर गुरु रंधावा अक्सर चर्चा में रहते हैं। वे हमेशा अपनी गायकी से लोगों का दिल जीत लेते हैं। हाल ही में इस सिंगर ने पंजाब के किसानों (जिनकी फसल भीषण आग से नष्ट हो गई) की मदद के लिए आगे आए है और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने का फैसला लिया है। दरअसल, हाल ही में एक किसान का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके पास सिर्फ 2 एकड़ जमीन है और 2 एकड़ में आग लगने की वजह से किसान की सारी फसल जलकर राख हो गई है। इस बीच, किसान की बेटी रोते हुए अपने पिता को सांत्वना देती है। जब यह वीडियो गुरु रंधावा तक पहुंचा तो उनका दिल दहल गया। गुरु ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “यह देखकर बहुत दुख हुआ।” क्या आप मुझे परिवार का संपर्क नंबर दे सकते हैं? मैं एक किसान के रूप में अपने परिवार की मदद करना चाहता हूं। मैं उनका दर्द समझ सकता हूं। अगर किसी को पता हो तो कृपया नंबर कमेंट करें। धन्यवाद, जय जवान, जय किसान। यह भी बताया जा रहा है कि उक्त किसान गांव माड़ी मुस्तफा, तहसील बाघापुराना, जिला मोगा का निवासी है, जिसके निवासी भी सिंगर के इस फैसले की प्रशंसा कर रहे हैं। वहीं अगर गुरु रंधावा के वर्क फ्रंट की बात करें तो गायक और एक्टर गुरु रंधावा इन दिनों अपनी नई पंजाबी फिल्म ‘शौंकी सरदार’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, जिनकी यह बहुचर्चित फिल्म जल्द ही दुनियाभर में रिलीज होने वाली है।

एजेंसियों का दावा हमलावर आतंकी पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटिव के साथ प्रत्यक्ष रूप से संपर्क में

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले के डिजिटल सबूत पाकिस्तान से जुड़ते नजर आ रहे हैं. भारत की खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि हमले के संदिग्ध आतंकियों के डिजिटल फुटप्रिंट मुजफ्फराबाद और कराची स्थित सेफ हाउस तक पहुंच रहे हैं. इससे इस हमले के क्रॉस बॉर्डर लिंक का सबूत मिल रहा है. बता दें कि इस हमले में अबतक 28 सैलानियों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हैं. खुफिया सूत्रों ने घटनास्थल से बरामद फॉरेंसिक एनालिसिस और हमले में बचे लोगों से मिली जानकारी के आधार पर कहा है कि आतंकियों ने सेना के लिए इस्तेमाल होने वाले हथियारों का इस्तेमाल हमले के लिए किया. इसका ये अर्थ निकलता है कि हमलावर पूरी तरह से ट्रेंड थे और उन्हें सभी जरूरी हथियार मिले थए. भारत की एजेंसियों को घटनास्थल के आस-पास एडवांस कैटेगरी के संचार उपकरण मिले हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि आतंकियों को बाहर से लॉजिस्टिक सपोर्ट और सहयोग मिल रहा था.   खुफिया एजेंसियों का दावा है कि हमलावर आतंकी पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटिव के साथ प्रत्यक्ष रूप से संपर्क में थे. पहलगाम हमले के संदिग्धों के डिजिटल कनेक्शन पाकिस्तान स्थित मुजफ्फराबाद और कराची के ‘सेफ हाउस’ पर पाए गए, जिससे सीमा पार आतंकियों के संबंध के साक्ष्य मजबूत हुए. सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हथियारों की प्रकृति और हमले की सटीकता से पता चलता है कि आतंकियों ने प्रशिक्षित संचालकों से सैन्य सहायता ली थी. बता दें कि द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) जो छद्म नाम लेकर आतंकी हमले करता है ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. खुफिया एजेंसियों के अनुसार आतंकवादी पूरी तैयारी के साथ हमले के लिए आए थे. आतंकवादियों ने अपनी पीठ पर बैग टांग रखे थे, जिसमें सूखे मेवे, दवाइयां और संचार उपकरण थे.  5 से 6 विदेशी आतंकवादियों का एक समूह कुछ समय से जंगल में छिपा हुआ था और स्थानीय लोगों की मदद से पहलगाम की रेकी कर रहा था. तैयारी पूरी होने के बाद दहशतगर्दों ने मौका देखकर हमला कर दिया. खुफिया एजेंसियों का दावा है कि 3 से4 आतंकवादियों ने एके-47 से लगातार फायरिंग की. इस दौरान 2 पाकिस्तानी आतंकवादी पश्तो भाषा बोल रहे थे. उनके साथ 2 स्थानीय आतंकी (आदिल और आसिफ) भी थे. ये दो स्थानीय आतंकवादी बिजभेरा और त्राल के हैं. पाकिस्तानी आतंकियों ने बॉडी कैमरा पहनकर सब कुछ रिकॉर्ड किया. माना जा रहा है कि पहलगाम में आतंकवादी हमला 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले की तर्ज पर किया गया था. इस आतंकवादी हमले का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना था. इस हमले के पीछे संभवतः पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ है. खुफिया एजेंसियों ने इस हमले को अंजाम देने वाले 4 आतंकियों की एक साथ तस्वीरें जारी की है. इन तस्वीरों में सबसे दायीं ओर पाकिस्तानी सेना से रिटायर आसिफ फौजी भी शामिल है. जांच से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “यह सिर्फ एक अलग-थलग आतंकी घटना नहीं है. हमलावरों को सीमा पार से निर्देशित, सुसज्जित किया गया था और उन्हें सपोर्ट दिया गया. उनका उद्देश्य क्षेत्र को अस्थिर करना और शांति को पटरी से उतारना है.” गृह मंत्रालय स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है. वरिष्ठ खुफिया और सैन्य अधिकारियों की अध्यक्षता में इस सप्ताह के अंत में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक होने की उम्मीद है. यह घटना क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति में बदलाव का संकेत देती है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सैन्य-ग्रेड हथियारों और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों का उपयोग कश्मीर में हाइब्रिड युद्ध के एक नए चरण की ओर इशारा करता है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद के साथ, हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल व्यापक नेटवर्क के बारे में अधिक विवरण सामने आने की संभावना है. पाकिस्तान ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में क्या कहा? बता दें कि पहलगाम अटैक के बाद पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. पाकिस्तान ने इस घटना से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले से पाकिस्तान का कोई लिंक नहीं है. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना से हमारा कोई ताल्लुक नहीं है.    

‘सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने का आ गया है समय, पहलगाम आतंकी हमला पर बोले- पूर्व राजदूत कंवल सिब्बल

नई दिल्ली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलाधिपति और रूस में भारत के पूर्व राजदूत कंवल सिब्बल ने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को अनिश्चित काल के लिए निलंबित करने की वकालत की है. दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भारत के विदेश सचिव रहे सिब्बल ने एक्स पर किए अपने पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान द्वारा उकसाए गए पहलगाम में नवीनतम आतंकवादी हमले के लिए वास्तव में सार्थक प्रतिक्रिया के रूप में सिंधु जल संधि को अनिश्चित काल के लिए निलंबित करने का समय आ गया है. हमने पहले भी कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं चल सकते. आइए हम अपनी घोषित स्थिति पर काम करें. यह एक रणनीतिक प्रतिक्रिया होगी.” लेकिन सिब्बल आईडब्ल्यूटी को निलंबित करने के लिए क्यों दबाव डाल रहे हैं? दरअसल, सिंधु नदी और उसकी 5 सहायक नदियों के पानी के उपयोग को नियंत्रित करने वाली सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे. इस संधि के अनुसार, भारत रावी, ब्यास और सतलुज के पानी का उपयोग कर सकता है जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी आवंटित किया गया है. भले ही वितरण समान लगता हो, लेकिन संधि पाकिस्तान के पक्ष में है क्योंकि देश को सिंधु नदी प्रणाली के कुल जल प्रवाह का लगभग 80 प्रतिशत प्राप्त होता है. पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है, खासकर पंजाब और सिंध में. सिब्बल ने पोस्ट में आगे कहा कि व्हाइट हाउस में ट्रम्प प्रशासन के साथ, भारत अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर अनुकूल स्थिति में है, क्योंकि हमला अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भारत यात्रा के दौरान हुआ था. उनका मानना ​​है कि इस कार्रवाई से बांग्लादेश को भी कड़ा संदेश जाएगा. “ट्रंप और वेंस के इस्लामी चरमपंथ और आतंकवाद पर कड़े विचार हैं. इस कदम से बांग्लादेश को भी अच्छा संदेश जाएगा.” बता दें कि 2019 के पुलवामा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक में 2 विदेशी नागरिकों सहित कम से कम 26 लोगों की जान चली गई है. हमलावर आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े हैं.

चीनी एप ने दिखाया भारत का गलत नक्शा, सरकार ने गूगल को प्ले स्टोर से हटाने का दिया निर्देश

 नई दिल्ली  इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गूगल को प्ले स्टोर से चीनी चैट एप एबलो को हटाने का निर्देश दिया है। इस पर दिखाया गया भारत का नक्शा सही नहीं है। सरकार ने नोटिस में कहा है कि चीनी वीडियो चैट प्लेटफार्म ने केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है और अपने मानचित्र से लक्षद्वीप को पूरी तरह से हटा दिया है। गूगल प्ले स्टोर से इसे दस हजार से अधिक लोगों ने किया डाउनलोड प्ले स्टोर पर इसे 10000 से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि गूगल ने आदेश का अनुपालन कर लिया है, क्योंकि एप के प्ले स्टोर पेज पर अब यह संदेश दिखाई दे रहा है कि हमें खेद है, अनुरोधित यूआरएल इस सर्वर पर नहीं मिला। यह एप अब भारतीय यूजर्स के लिए एपल के एप स्टोर पर भी उपलब्ध नहीं है। केंद्र सरकार ने गूगल को जारी किया नोटिस गूगल को भेजे नोटिस में कहा गया है कि यह स्पष्ट है कि प्ले स्टोर पर उपलब्ध एबलो एप में दर्शाए गए नक्शे में भारत की बाहरी सीमा को गलत तरीके से दर्शाया गया है। यह भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालता है। आईटी नियम 2021 का पालन न करने पर लगाई फटकार इसी तरह 2021 में ट्विटर (अब एक्स) को सरकार ने आईटी नियम 2021 का पालन न करने पर फटकार लगाई थी। तत्कालीन ट्विटर इंडिया के प्रमुख मनीष माहेश्वरी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारत के नक्शे को गलत तरीके से दर्शाने के आरोप में मामला दर्ज किया था। क्या है Ablo एप? Ablo एक सोशल वीडियो चैट एप था, जिसे बेल्जियम की कंपनी MassiveMedia ने तैयार किया था। बाद में इस कंपनी को Match Group ने खरीद लिया, जो Tinder और OkCupid जैसे लोकप्रिय डेटिंग एप्स का भी मालिक है। यह एप दुनियाभर के लोगों से वीडियो कॉल और इंस्टेंट मैसेजिंग के जरिए जुड़ने का मौका देता था। इस एप की खासियत इसका इन-बिल्ट अनुवाद फीचर था। यह चैट और वॉइस बातचीत को रियल-टाइम में अनुवाद करता था, जिससे अलग-अलग देशों के लोग अपनी-अपनी भाषाओं में सहज रूप से संवाद कर सकते थे। यह खासतौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय था, जो दुनिया भर के नए-नए लोगों से दोस्ती करने और अलग-अलग संस्कृतियों को जानने में रुचि रखते थे।    

कुछ बड़ा होने वाला है! पाकिस्तान को सताने लगा डर, PoK समेत कई जगह अलर्ट

पहलगाम सप्ताहभर पहले शादी के बंधन में बंधे विनय नरवाल और उनकी पत्नी की चमकती आंखें जाने कितने सपने संजो रही थीं. लेकिन किसे मालूम था कि चंद मिनटों में सब कुछ चकनाचूर हो जाएगा. शादी, पगफेरे और फिर रिसेप्शन के बाद दोनों ने हनीमून के लिए कश्मीर जाने का फैसला किया. लेकिन जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पहलगाम में कुछ ऐसा हुआ कि इस प्रेम कहानी ने यहीं दम तोड़ दिया और सामने आई दिल कचोट देने वाली वो तस्वीर जिसमें वादियों के बीच विनय की नई दुल्हन उनके शव के पास पथराई बैठी है और सोच रही है कि उसका गुनाह क्या है? हाल में हुई थी नेवी में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शादी पहलगाम के बैसरन में मंगलवार को बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिससे बाद पूरे देश में आक्रोश है. यहां आतंकियों ने एक टूरिस्ट ग्रुप को निशाना बनाया, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई. दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल भी हुए, जिनका इलाज चल रहा है. आतंक का शिकार हुए इन लोगों की कहानियां सामने आ रही हैं तो झकझोर कर रख दे रही हैं. यहां हम बात कर रहे हैं मृतकों में से एक नेवी में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात करनाल के रहने वाले विनय नरवाल की जिनकी हाल ही में शादी हुई थी.   शव लेने पहुंच रहे विनय के पिता विनय की आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई जिसके बाद से उनके परिवार में मातम पसर गया है. अपना सबकुछ लुटा चुके विनय के पिता अब अपने बेटे के शव को लेने के लिए पहलगाम निकले हैं. हमारी टीम उनके घर के बाहर स्थिति का जायजा लिया हालांकि घर के बाहर सन्नाटा छाया हुआ था परिवार के सदस्य कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. विनय के गांव के लोगों ने कहा आतंकियों के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाही होनी चाहिए, अगर आतंकियों को छोड़ेंगे तो इस तरह के हमले फिर दोबारा होते रहेंगे. ऐसे आतंकियों के खिलाफ सख्त सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा देशभर में भी आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग जोर शोर से उठ रही है. इधर, आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. मेरे पत‍ि को बचा लो प्लीज’, पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत घटना के बाद का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें चीख-पुकार और मदद की गुहार लगाते पर्यटक दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक महिला कहती सुनाई दे रही है, “हम भेलपूरी खा रहे थे, तभी एक शख्स आया और गोली मार दी। उसने कहा, ‘शायद ये मुस्लिम नहीं है’ और उसके बाद फायरिंग शुरू कर दी।” महिला रोते हुए अपने घायल पति के लिए मदद मांग रही है। आसपास कई अन्य महिलाओं की चीखें भी सुनी जा सकती हैं। एक बच्चा भी रोते हुए सहायता की अपील करता दिख रहा है। वीडियो में कुछ लोग जमीन पर घायल पड़े दिखाई देते हैं, जबकि कुछ खून से लथपथ हैं। पाकिस्तान को सताने लगा डर, PoK समेत कई जगह अलर्ट जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। खुफिया सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि भारत के संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से पाकिस्तान ने अपने एयरफोर्स को अलर्ट पर रखा है। साथ ही भारत-पाकिस्तान सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। सूत्रों के अनुसार, लाहौर, कराची, पेशावर, रावलपिंडी और इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं। पाकिस्तान में यह डर है कि भारत सर्जिकल स्ट्राइक या एयरस्ट्राइक जैसे कड़े कदम उठा सकता है, जैसा कि उरी और पुलवामा हमले के बाद किया गया था। भारत की ओर से इस हमले को लेकर सख्त रुख पहले ही जाहिर किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा है कि इस कायराना हमले के गुनहगारों को छोड़ा नहीं जाएगा। इस सबके बीच भारतीय सेना और वायुसेना ने पहले ही जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और LoC पर ड्रोन व हवाई निगरानी बढ़ाई गई है। सभी यूनिट्स को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपको बता दें कि आतंकवादियों ने मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थल पहलगाम में हमला किया जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए लोगों में दो विदेशी नागरिक थे जिसमें एक संयुक्त अरब अमीरात से और एक नेपाल से था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में ही समाप्त की और बुधवार सुबह भारत लौट आए। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मंगलवार शाम को श्रीनगर पहुंचकर सुरक्षा हालात का जायजा लिया।

अब 30 जून 2025 से फिर से शुरू होने जा रही कैलाश मानसरोवर यात्रा, यात्रा में कुल 250 तीर्थयात्री शामिल होंगे

नई दिल्ली कैलाश मानसरोवर यात्रा, जो पिछले पांच वर्षों से स्थगित थी, अब 30 जून 2025 से फिर से शुरू होने जा रही है। यह यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते से होकर तिब्बत के कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाएगी। यात्रा में कुल 250 तीर्थयात्री शामिल होंगे, जिन्हें पांच समूहों में बांटा जाएगा। यात्रा का महत्व कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि यहां की परिक्रमा और मानसरोवर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस यात्रा की विशेषता यह है कि यह भारत और चीन के बीच बेहतर संबंधों का प्रतीक भी है, खासकर धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों में। क्यों बंद हुई थी यात्रा? इस यात्रा को हर साल आयोजित किया जाता है, लेकिन 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़पों और सीमा विवाद के कारण यात्रा फिर से शुरू नहीं हो सकी। अब भारत सरकार के प्रयासों से यह यात्रा संभव हो पाई है, जो दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों का संकेत देती है। 30 जून 2025 को दिल्ली से शुरू होगी यात्रा यात्रा की शुरुआत 30 जून 2025 को दिल्ली से होगी। इस यात्रा में 250 यात्री शामिल होंगे, जिन्हें 5 दलों में बांटा जाएगा, हर दल में 50 यात्री होंगे। यात्रा की पूरी अवधि 22 दिन की होगी। यात्रियों की स्वास्थ्य जांच यात्रियों की स्वास्थ्य जांच दिल्ली और गुंजी में की जाएगी, ताकि ऊंचाई और कठिन मौसम में यात्रा करने के लिए वे पूरी तरह से तैयार हों। यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) द्वारा किया जाएगा। भारत और चीन के बीच सहयोग कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुरू होना भारत और चीन के बीच एक सीमित लेकिन सकारात्मक सहयोग को दिखाता है। इसे सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग का संकेत भी माना जा सकता है।  

बारामूला में घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, सेना ने ढेर किए 2 आतंकी, जारी है ऑपरेशन

नईदिल्ली /पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरा बीच में ही खत्म कर बुधवार सुबह दिल्ली लौट आए हैं. दिल्ली एयरपोर्ट पर ही NSA अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव ने पहलगाम अटैक को लेकर उनको ब्रीफिंग दी. पीएम के स्वदेश लौटने के बाद से दिल्ली में हाई लेवल मीटिंगों का दौर जारी है तो दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में ग्राउंड जीरो पर हालातों का जायजा ले रहे हैं. उन्होंने मंगलवार देर रात एक बजे तक जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों के साथ लगातार मीटिंग की. उन्होंने अधिकारियों को आतंकियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.  बारामूला में LoC के पास घुसपैठ की बड़ी कोशिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया है और एनकाउंटर में दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया है. सुरक्षाबलों की टीम ने आतंकियों के पास से दो राइफल और एक आईईडी बरामद किया है. सुरक्षाबलों ने जानकारी देते हुए बताया कि बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है. टीम ने आतंकियों के पास से 2 AK सीरीज की राइफलें और एक IED बम बरामद किया है. इस बारे में जानकारी देते हुए आर्मी के चिनार कॉप्स ने बताया कि बुधवार को 2-3 यूआई आतंकवादियों ने उरी नाला, बारामूला के सामान्य क्षेत्र से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे. तभी नियंत्रण रेखा पर सतर्क TPS ने उन्हें रोक लिया इसके बाद आतंकियों ने सुरक्षाबल की टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी. सुरक्षाबल की टीम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन शुरू किया और एनकाउंटर में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है, चल रहे ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया. आतंकवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और युद्ध जैसे अन्य सामान बरामद किए गए हैं. बता दें कि मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हलमें में 28 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे जो छुट्टियां बिताने यहां आए थे. घटनास्थल जाएंगे अमित शाह बताया जा रहे कि अमित शाह अब से कुछ देर पर पहलगाम में घटना स्थल पर जाएंगे, लेकिन इससे पहले वह अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात करेंगे. इसके बाद आर्म्ड पुलिस हेडक्वार्टर जाएंगे, जहां वह मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद वह दिल्ली लौटेंगे और CCS बैठक में शामिल होंगे. गृह मंत्री के निर्देश के बाद सुरक्षाबलों की कई टीमों ने इलाके को घेरते हुए मंगलवार को ही बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया है. इससे पहले पीएम मोदी ने मंगलवार को सऊदी से ही कश्मीर की स्थिति का आकलन किया था.पीएम मोदी और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले को लेकर बातचीत भी हुई. मोहम्मद बिन सलमान ने आतंकवादी हमले की निंदा की. इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी परिषद की सह-अध्यक्षता की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता को और मजबूत करना है. मंगलवार को दो दिवसीय यात्रा पर जेद्दा पहुंचे PM मोदी ने कश्मीर की स्थिति का आकलन करने के लिए क्राउन प्रिंस के साथ अपनी निर्धारित बैठक में करीब दो घंटे की देरी की. पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे. यह हमला 2019 में पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला है. रात्रिभोज में नहीं शामिल हुए PM मोदी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की लेकिन आधिकारिक रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए और अपनी यात्रा को छोटा करने और मंगलवार रात को स्वदेश लौटने का फैसला किया. प्रधानमंत्री दो दिनों के दौरे के लिए सऊदी गए थे. बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री शामिल होंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में हाई-लेवल मीटिंग की. आतंकियों ने पर्यटकों के एक ग्रुप को निशाना बनाया, जिसमें करीब 26 लोगों की मौत की आशंका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की हमले की निंदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह हमले की निंदा करते हैं. उन्होंने लिखा, जो लोग इस जघन्य कृत्य के पीछे हैं, उन्हें कठघरे में लाया जाएगा और बख्शा नहीं जाएगा. आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अडिग है. डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए कहा कि मुश्किल समय में हम भारत के साथ हैं. आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ अमेरिका मजबूती से खड़ा है.  

मौसम विभाग के अनुसार आगामी 7 दिनों में कुछ राज्यों में तेज धूप और लू चलेगी, कई राज्यों में बारिश, गिरेगी बिजली

नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 7 दिनों में कुछ राज्यों में तेज धूप और लू चलेगी वहीं कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। गर्मी और बारिश की यह दोहरी मार लोगों को खासा परेशान कर सकती है। 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, गिरेगी बिजली मौसम विभाग के अनुसार असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 22 से 26 अप्रैल तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 23 अप्रैल को जमकर बारिश हो सकती है। इन सभी इलाकों में बिजली गिरने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। इन दक्षिणी राज्यों में भी बरसेगा पानी केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है। वहीं तमिलनाडु, पुडुचेरी और तेलंगाना में भी अगले सात दिनों तक बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। पश्चिमी विक्षोभ करेगा असर, इन पहाड़ी राज्यों में बदलेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरी पाकिस्तान और मध्य पाकिस्तान में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से पश्चिमी विक्षोभ असर में है। इसके चलते पश्चिमी हिमालयी राज्यों—जैसे जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गरज, बिजली और बारिश के साथ 50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। महाराष्ट्र और गुजरात में भी बारिश, बढ़ेगा पारा मध्य महाराष्ट्र में 24-25 अप्रैल को बारिश हो सकती है जबकि गुजरात में 22 से 24 अप्रैल तक भारी बारिश का पूर्वानुमान है। उधर, विदर्भ के चंद्रपुर में रविवार को तापमान 44.6 डिग्री तक पहुंच गया जो पूरे देश में सबसे अधिक था। कहां कितना बढ़ेगा तापमान? उत्तर पश्चिम भारत में अगले छह दिनों में तापमान में 2-3 डिग्री की वृद्धि हो सकती है। मध्य भारत और गुजरात में अगले तीन दिनों में तापमान 2 डिग्री तक बढ़ेगा। वहीं पूर्वी भारत में तापमान में 4 से 6 डिग्री की जबरदस्त बढ़ोतरी का अनुमान है। इन 11 राज्यों में हीटवेव का अलर्ट दिल्ली एनसीआर में आने वाले 3 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और तेज धूप पड़ेगी। तापमान में बढ़ोतरी के साथ 42 डिग्री सेल्सियस तक पारा पहुंचने की संभावना है। बीते 24 घंटों में अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहा जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  

देश में सबसे ज़्यादा शराब पीने वाली महिलाओं वाले शीर्ष 7 राज्य, बीयर है पहली पसंद

नई दिल्ली दुनिया में शराब के शौकीनों की कमी नहीं है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि, जब भी शराब का जिक्र आता है, तो इसे पुरुषों के शौक के रूप में बताया जाता है। अब परिस्थिति बदलती नजर आ रही है। महिलाएं भी जाम से जाम टकरा रही हैं। सांस्कृतिक और आदिवासी परंपराएं जैसी इसकी कई वजह हैं। एक सर्वे से पता चलता है कि भारत में कम से कम 7 राज्य ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं शराब का सेवन करती हैं।भारत में पारंपरिक रूप से शराब सेवन को पुरुषों से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के ताज़ा आंकड़े इस धारणा को बदलते दिखते हैं. 2019-2021 के बीच हुए इस सर्वे में कई राज्यों में महिलाओं द्वारा शराब सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति सामने आई है. कुछ राज्यों में यह प्रतिशत पुरुषों के लगभग बराबर या उससे अधिक हो गया है. रिपोर्ट में NFHS-5 यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि इस लिस्ट में सबसे पहला नाम पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश का है। ये आंकड़े साल 2019 से 2021 के बीच जुटाए गए थे। अरुणाचल प्रदेश आंकड़े बताते हैं कि अरुणाचल प्रदेश में 24.2 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। राज्य में मेहमानों को चावल से बनी स्थानीय बीयर पेश करना बेहद आम बात है। साथ ही शराब यहां सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में अहम भूमिका निभाती है। सिक्किम लिस्ट में दूसरा स्थान सिक्किम को मिला है। यहां घर में बनी छांग जैसे पेय पदार्थ काफी मशहूर हैं। यहां करीब 16.2 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। असम पूर्वोत्तर के ही एक और राज्य को इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर रखा गया है। असम में 7.3 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। कहा जाता है कि यहां व्हिस्की काफी लोकप्रिय है। तेलंगाना तेलंगाना में व्हिस्की और बीयर को पसंद करने वालों की संख्या ज्यादा मानी जाती है। आंकड़े बताते हैं कि यहां 6.7 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। झारखंड मुख्य रूप से आदिवासी इलाकों में झारखंड में 6.1 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। अंडमान एंड निकोबार आईलैंड्स हांडिया, टोडी और जंगली। ये सारे पेय अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में काफी लोकप्रिय हैं। यहां करीब 5 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या 4.9 प्रतिशत है। कहा जाता है कि यहां व्हिस्की और वोडका को ज्यादा पसंद किया जाता है।

अमेरिका में हर चौथा मुसलमान इस्लाम छोड़ चुका, अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे

नई दिल्ली भारत के लिए धर्म परिवर्तन बहुत बड़े राजनीतिक विवाद का मसला रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि अपना धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाने या किसी भी धर्म को न मानने वाले लोगों के मामले में अमेरिका और यूरोप के देश ज्यादा आगे हैं। तथ्य यह भी है कि जब धर्म परिवर्तन की बात आती है या अपना धर्म छोड़ने की बात आती है तो इसमें ईसाई सबसे आगे हैं। उनके बाद बौद्ध हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन करने में दिलचस्पी दिखाई है। एक बड़ा तथ्य यह भी है कि ऐसा करने वालों में अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपना धर्म तो छोड़ दिया है, लेकिन वह किसी अन्य धर्म से जुड़े भी नहीं। इसके बाद वे लोग हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपना धर्म बदला है, बल्कि नई आस्था भी कबूल की है। दक्षिण कोरिया में 50% ने छोड़ा अपना धर्म प्यू रिसर्च सेंटर दुनिया के 36 देशों में सर्वे के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर दक्षिण कोरिया जैसे देश की आधी आबादी अपना धर्म छोड़ चुकी है, वहीं हिंदू और मुसलमानों की यह विशेषता है कि वह जिस धर्म में पैदा होते हैं, उसे बिरले ही छोड़ते हैं। मतलब, उनकी आस्था अपने धर्म से आमतौर पर हमेशा जुड़ी रहती है। इस सर्वे के अनुसार अपना धर्म बदलने वाले लोगों में एक बड़ा ट्रेंड ये है कि इनमें ज्यादातर जनसंख्या उन लोगों की है, जो किसी दूसरे धर्म को अपनाने की जगह खुद को नास्तिक, अनिश्वरवादी (atheists),अज्ञेयवादी (agnostics) या ‘नथिंग इन पर्टिक्युलर’कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। दक्षिण कोरिया के बाद सबसे ज्यादा लोगों ने अपना धर्म स्पेन में बदला है। इस लिस्ट में कुल 15 देशों के नाम हैं, जिसमें भारत 14वें स्थान पर है, जहां मात्र 2% लोग आज उस धर्म का पालन नहीं करते, जिस आस्था में उनका जन्म हुआ था। अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे हमने ऊपर बात की ईसाई धर्म मानने वालों की, जो सबसे ज्यादा धर्म बदल रहे हैं। यह इस तरह से देखा जा सकता है कि स्पेन में जहां करीब 100 में से 90 लोग ईसाई बनकर पैदा हुए, लेकिन अब उनमें से 54 ही इस धर्म को मानते हैं। यानी कुल 36% क्रिश्चियन अपना धर्म छोड़ चुके हैं। इसमें कुल 10 ईसाई बहुल देशों का जिक्र है, जिसमें दूसरे नंबर पर स्वीडन और आखिर में इटली का नाम है। इटली में भी 20 क्रिश्चियन आज उस धर्म को नहीं मानते, जिसमें उनका जन्म हुआ था। अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 22% है। धर्म छोड़ने वालों में ईसाइयों के बाद बौद्ध हजारों साल पहले भारत में बौद्ध धर्म का रंग फीका पड़ने लगा था। दुनिया भर में ईसाइयों के बाद आज जिस धर्म के लोग अपने मूल धर्म से मुंह फेर रहे हैं तो वे बौद्ध हैं। मसलन, जापान में अगर 58 लोगों ने बौद्ध धर्म में जन्म लिया तो आज उनमें से मात्र 34 ही इस धर्म को मानते हैं। कुल मिलाकर 26% ने अपना मूल धर्म छोड़ दिया है। यह स्थिति दक्षिण कोरिया, सिंगापुर से लेकर श्रीलंका तक में दिखाई दे रही है। अमेरिका में 23% मुसलमानों ने छोड़ा इस्लाम जैसा कि पहले बताया गया कि इस सर्वे के अनुसार आज भी हिंदू और मुसलमानों में ऐसे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो अपने धर्म में ही बने रहना पसंद करते हैं, और अपना धर्म छोड़कर दूसरे को अपनाने वालों की संख्या इनमें सबसे कम है। जैसे बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में एक भी मुसलमान ने इस्लाम नहीं छोड़ा। यही स्थिति ट्यूनिशिया की भी है। भारत में सिर्फ 1% मुसलमान अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में शामिल हुए हैं। भारत से ज्यादा तुर्की में मुसलमानों ने इस्लाम छोड़ा है। यहां इस्लाम में पैदा होने वाले 4% लोग अब खुद को मुस्लिम नहीं मानते और इनमें से 1% दूसरा धर्म अपना चुके हैं। सिंगापुर में यह संख्या 3% है, जो अब मुस्लिम नहीं हैं। सबसे ज्यादा मुसलमानों ने अमेरिका में इस्लाम छोड़ा है। यहां अगर 100 लोग इस्लाम में पैदा हुए थे तो अब उनमें से सिर्फ 77 ही इसका पालन करते हैं। यानी 23% ने इस्लाम छोड़ दिया है। 10% ने कोई अन्य धर्म अपना लिया है और 13% किसी भी धर्म का पालन नहीं करते। अमेरिका में 18% हिंदुओं ने हिंदुत्व छोड़ा मुसलमान ही नहीं अमेरिका में रहने वाले सबसे ज्यादा हिंदुओं ने भी अपना धर्म छोड़ा है। आज अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 18% है, जो पैदा तो हिंदू धर्म में हुए थे, लेकिन अब इस धर्म को नहीं मानते। ऐसा करने वाले श्रीलंका में 11% हैं। श्रीलंका में जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़ा है, उनमें से अधिकांश अब ईसाई बन चुके हैं। लेकिन, अमेरिका में हिंदुत्व छोड़ने वाले अधिकतर आज कोई धर्म नहीं मानते और बाकी ईसाई बन चुके हैं। दुनिया में 14.4% लोग किसी धर्म को नहीं मानते इस सर्वे का एक बड़ा नतीजा ये रहा है कि 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में अगर 31.6% ईसाई, 25.8% मुसलमान और 15.1% हिंदू थे तो ऐसे लोगों की तादाद 14.4% हो चुकी थी, जो किसी धर्म से नहीं जुड़े थे। इनके बाद 6.6% बौद्ध,5.4% फोक रिलिजनिस्ट, 0.8% अन्य और 0.2% यहूदी थे। एक और महत्वपूर्ण बात जो इस सर्वे से सामने आई है, वह यह कि धर्म से मुंह मोड़ने वालों में ज्यादातर युवा हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तादाद पढ़े-लिखे और पुरुषों की है, जो उस धर्म से निकल रहे हैं, जिसमें वे पैदा हुए थे।

मुस्लिम समुदाय के गरीब परिवारों और महिलाओं के विकास के लिए वक्फ (संशोधन) मील का पत्थर साबित होगा: किरेन रिजिजू

मुंबई वक्फ कानून को लेकर मंगलवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मुंबई में मुस्लिम समुदाय के लोगों से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान उन्हें वक्फ कानून के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे यह कानून देश के गरीब मुसलमानों के लिए फायदेमंद साबित होगा। मुंबई में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “आज मुंबई में वक्फ सुधार जनजागरण अभियान के तहत आम जन से मुलाकात कर संबोधित किया। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर यहां उपस्थित लोगों का उत्साह अत्यंत सुखद है। यह अधिनियम न्याय, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करता है। मुस्लिम समुदाय के गरीब परिवारों और महिलाओं के विकास के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।” दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को सुनने के बाद मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात की। बातचीत के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस कानून पर खुशी जाहिर की और पीएम मोदी का आभार जताया। हाजी पटेल ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि आज यहां पर एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ कानून के बारे में हम लोगों को विस्तार से बताया है। मैं समझता हूं कि केंद्र की मोदी सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वक्फ में संशोधन किया है। इस कानून से वक्फ की जमीनों का लाभ गरीब मुसलमानों को मिलेगा। अब तक जो मुसलमान जमीन की कमी होने के कारण सड़कों पर रहने के लिए मजबूर थे। वह अब वक्फ की जमीन पर अपना घर बना सकेंगे। मैं एक बार फिर से पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का धन्यवाद करना चाहता हूं। सलीम बागवान ने बताया कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ कानून के बारे में बताया। हम लोगों को पूरा भरोसा है कि यह कानून गरीब मुसलमानों के हित को देखते हुए लाया गया है। जो लोग इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वह अब तक सिर्फ मुसलमानों को अपना वोट बैंक समझते थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। वक्फ कानून से गरीब मुसलमानों को घर मिलेगा, कारोबार के लिए जगह मिलेगी। मैं पीएम मोदी का आभार जताना चाहता हूं।

नितिन गडकरी ने कहा- प्रदूषण और सड़क हादसे कम करने में बच्चे निभाएं सामाजिक जिम्मेदारी

नई दिल्ली देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कई पहल शुरू की हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और केंद्रीय विद्यालय संगठन ने मिलकर ‘एसआईएम-केवीएस रोड सेफ्टी ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम’ आयोजित किया। राष्ट्रीय राजधानी के नई दिल्ली कैंट स्थित केंद्रीय विद्यालय 2 में मंगलवार को आयोजित हुए इस विशेष प्रोग्राम के तहत रोड सेफ्टी लर्निंग मॉड्यूल ‘सुरक्षित सफर’ को लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम का हिस्सा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी रहे। यहां बच्चों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “आने वाला समय हाइड्रोजन का है। हमें ऊर्जा को आयात करने वाला नहीं, निर्यात करने वाला देश बनना है। देश की राजधानी में प्रदूषण और सड़क हादसों को कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं। इन दोनों ही मुद्दों से निपटने के लिए आप जैसे बच्चों द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता दिखाए जाने की जरूरत है।” कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश में सड़क सुरक्षा एक जरूरी मुद्दा है, जिसे देखते हुए एनसीईआरटी देश में एक नया करिकुलम और टेक्स्ट बुक बना रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए अपनी जिम्मेदारी और भूमिका बढ़ा रहे हैं। आने वाले समय में पहली से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सड़क सुरक्षा को लेकर पाठ्य सामग्री को तैयार किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा, ”जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि सड़क सुरक्षा बेहद जरूरी है और इसे जन-आंदोलन में परिवर्तित करना होगा। हम उन्हीं के विजन के अनुरूप काम कर रहे हैं।” इस कार्यक्रम में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के कार्यकारी निदेशक प्रशांत के. बनर्जी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश के विकास में सड़क सुरक्षा एक बड़ी परेशानी बनी हुई है और इस परेशानी को खत्म करने के लिए जनरेशनल चेंज की जरूरत होगी।

अमेरिकी टैरिफ वॉर का चीन द्वारा दिया तगड़ा झटका, चीन ने अमेरिका को दुर्लभ खनिजों की सप्लाई रोक दी

बीजिंग दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध और गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 245 फीसदी का टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने पहले अमेरिकी बोइंग विमानों को खरीदने से इनकार कर दिया था और अब उसने अमेरिका को दुर्लभ खनिजों की सप्लाई रोक दी है। सीमा शुल्क के आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले दुर्लभ खनिजों की सभी सप्लाई करीब-करीब रोक दी गई है। अमेरिकी टैरिफ वॉर का चीन द्वारा दिए गए इस जवाब से अमेरिकी निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि ये सभी चीनी माल पर ही निर्भर थे। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने सोलर पैनल और थर्मोइलेक्ट्रिक उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाने वाली धातु टेल्यूरियम के निर्यात में करीब 44 प्रतिशत की गिरावट आई है। टंगस्टन रॉड शिपमेंट में लगभग 84 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि अन्य खनिज पदार्थ टंगस्टन के निर्यात में 77 प्रतिशत की गिरावट आई है। सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, मोलिब्डेनम पाउडर, बिस्मथ उत्पादों और टंगस्टन सामग्री की अन्य तीन श्रेणियों सहित कुछ उत्पाद श्रेणियों के लिए शिपमेंट पूरी तरह से रोक दिए गए हैं। फरवरी में अमेरिका द्वारा चीन पर टैरिफ लगाए जाने के बाद से ही टंगस्टन, बिस्मथ, टेल्यूरियम, इंडियम और मोलिब्डेनम के निर्यात पर चीन ने प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया था। चीनी नियमों के मुताबिक निर्यातकों को इन खनिजों को विदेश भेजने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है। लेकिन अमेरिका से बढ़ते व्यापार युद्ध के बाद चीन सरकार ने इन नियार्तों पर बैन लगा दिया है। चीन की कोशिश है कि इस तरह का प्रतिबंध लगाकर अमेरिका पर दबाव बढ़ाया जा सके ताकि वह 245 फीसदी के टैरिफ को कम कर सके। संकट में तीन बड़ी इंडस्ट्री इन खनिजों के निर्यात पर बैन और सप्लाई में आई बड़ी कमी से अमेरिका का न केवल सोलर पैनल और थर्मोइलेक्ट्रिक उपकरणों का निर्माण करने वाली कंपनियां और इंडस्ट्री दबाव में हैं बल्कि स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से लेकर अत्याधुनिक सैन्य उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी परेशान हैं। दरअसल, इन कंपनियों और निर्माण उद्योग में इस्तेमाल होने वाली दुर्लभ खनिजों के भंडार और शोधन एवं प्रसंस्करण पर चीन का एकाधिकार है। इसीलिए चीन ने अमेरिका को जबाव देने के लिए सबसे पहले इन खनिजों की सप्लाई पर ब्रेक लगाया है। इटट्रियम की सप्लाई में 86 फीसदी की कटौती आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च में चीन ने अमेरिका को निर्यात होने वाले एक अन्य खनिज पदार्थ इटट्रियम की सप्लाई में 86 फीसदी की कटौती की है। इसी तरह स्कैडियम के निर्यात में दो तिहाई की कटौती की गई है। बता दें कि चीन टंगस्टन के कुल वैश्विक उत्पादन में 83 फीसदी, बिसमथ में 81 फीसदी, टेल्यूरियम में 75 फीसदी, इंडियम में 70 फीसदी और मोलिब्डेनम में 42 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। इन खनिज तत्वों का इस्तेमाल एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में होता है।

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