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मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि प्रिंस सलमान से पूछिए, क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है: असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, “जब आपका जहाज सऊदी अरब की फिजाओं में दाखिल हुआ था, तब सऊदी के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया, ये एक दोस्ताना इशारा था। लेकिन मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि जब आप सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलें, तो उनसे पूछिए क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है या नहीं?” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय सऊदी अरब की यात्रा पर हैं और जेद्दा पहुंचे हैं। ये उनकी तीसरी सऊदी यात्रा है, लेकिन पहली बार जेद्दा आए हैं। उनके स्वागत में सऊदी एयरफोर्स के एफ-15 विमान ने उनकी फ्लाइट को एयरस्पेस में एस्कॉर्ट किया। हर मुस्लिम देश में वक्फ मौजूद: ओवौसी मंगलवार को दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘सेव वक्फ कॉन्फ्रेंस’ में ओवौसी ने हालिया संसद में बीजेपी सांसद के उस बयान का जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कुछ मुस्लिम देशों में वक्फ की कोई व्यवस्था नहीं है। ओवैसी ने कहा कि वक्फ हर मुस्लिम देश में होता है, चाहे वो लोकतंत्र हो या सल्तनत हो। ओवैसी ने आगे कहा कि वक्फ का अस्तित्व हर मुस्लिम देश में है और भारत में भी इसे संविधान और संसद का समर्थन मिला है। उन्होंने याद दिलाया कि वक्फ एक्ट 2013 को दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पास किया था। उन्होंने यह भी कहा, “संविधान के अनुसार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका स्वतंत्र हैं। अगर सरकार संविधान का दुरुपयोग करती है, तो न्यायपालिका ही हमारी आखिरी उम्मीद होती है।” सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या बोले ओवैसी ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ एक्ट में किए गए 40 से ज्यादा संशोधनों पर अंतरिम आदेश को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “ये कानून काले कानून जैसा है जो वक्फ की जायदाद को बचाने के लिए नहीं, बल्कि खत्म करने के लिए लाया गया है। अगर केंद्र सरकार ऐसे नियम बनाती है जो वक्फ को कमजोर करते हैं, तो ये संघीय ढांचे के भी खिलाफ होगा।” उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस कानून का विरोध जारी रखेंगे और कानूनी लडाई भी लडते रहेंगे।

पाकिस्तान के ‘आसिम मुनीर’ का बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है: अनिल गौर

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के सुरक्षा से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, इस कायराना हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ तो है ही। मुनीर के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए था- अनिल गौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल ‘आसिम मुनीर’ का वह बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है। क्या हमने उस बयान को हल्के में लिया है। ऐसे कई सवाल उठना लाजिमी है। जनरल मुनीर ने 144 घंटे पहले इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन 2025 में कहा था, ‘कश्मीर पर हमारा (पाकिस्तानी सेना) और सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम इसे नहीं भूलेंगे। हम भारत के कब्जे के खिलाफ संघर्ष करने वाले अपने कश्मीरी भाइयों को नहीं छोड़ेंगे। बतौर सुरक्षा विशेष गौर, यह सामान्य बयान नहीं था। इसकी गंभीरता को समझना चाहिए था। जम्मू कश्मीर में बढ़ानी चाहिए थी सुरक्षा- अनिल गौर कैप्टन (रिटायर्ड) अनिल गौर ने कहा, मुनीर के बयान के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए थी। हालांकि खुफिया एजेंसियों ने अपने स्तर पर कुछ न कुछ किया ही होगा। पाकिस्तानी सेना के चीफ मुनीर ने जो कुछ कहा था, उसका असर पहलगाम के आतंकी हमले के तौर पर दिख रहा है। मुनीर ने बयान से स्पष्ट था कि कश्मीर में हमारे बंदे हैं। पहलगाम में आतंकियों ने टारगेट भी हिंदुओं को किया है। गोली मारने से पहले लोगों का धर्म पूछा गया था। अनिल गौर बताते हैं, जम्मू और कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले अधिकांश लोगों में तो हिंदू ही होते हैं। आतंकी संगठन चाहते हैं जम्मू-कश्मीर में न आएं पर्यटक यह हमला, कुछ अन्य बातों की तरफ भी इशारा करता है। जैसे आतंकियों को अब पहले के मुकाबले लोकल सपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दूसरा, आतंकियों की नई भर्ती अब तकरीबन बंद हो चुकी है। उन्हें अब लोकल सपोर्ट भी नहीं मिल रही है। वे पहाड़ों पर छिपे हैं। इस हमले का मकसद वहां आने वाले हिंदुओं में दहशत फैलाना है। आतंकी संगठन चाहते हैं कि जम्मू और कश्मीर में पर्यटक न आएं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो बिजनेस प्रभावित होगा। जब बिजनेस प्रभावित होगा तो सरकार की विकास नीति भी पटरी से उतर सकती है। आतंकी यह संदेश भी देना चाह है कि उन्हें लोकल सपोर्ट नहीं मिलेगी तो ऐसे हमले आगे भी देखने को मिल सकते हैं।

मैं पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, जिन्होंने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। मंगलवार को उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘मैं पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा जा रही है।’ उन्होंने कहा कि इस जघन्य कृत्य के पीछे जो लोग हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका नापाक एजेंडा कभी सफल नहीं होगा। आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अटल है और यह और भी मजबूत होगा। दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटक स्थल पहलगाम में आतंकवादी हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हुए हैं। हमले वाली जगह का एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें कई लोग खून से लथपथ और जमीन पर बेसुध पड़े हुए दिखाई देते हैं। इसमें महिला पर्यटक रोती और अपने प्रियजनों की तलाश करती दिखती हैं। हालांकि, वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सालों तक आतंकवाद से जूझने के बाद कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जा रही है। साथ ही, 38 दिवसीय अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई से शुरू होनी है। आतंकवादी बैसरन घाटी से उतरे और शुरू की गोलीबारी रिपोर्ट के मुताबिक, हमला दोपहर करीब 3 बजे हुआ। आतंकवादी बैसरन घाटी में पहाड़ से नीचे उतरे और वहां पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस स्थान को लंबे हरे-भरे घास के मैदानों के कारण ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है। बैसरन पहलगाम में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पहलगाम से खच्चरों के माध्यम से इस क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है और रास्ते में पहलगाम शहर व लिद्दर घाटी का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। देश भर से लाखों तीर्थयात्री दो मार्गों से पवित्र गुफा मंदिर की यात्रा करते हैं। एक मार्ग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा मार्ग गंदेरबल जिले में 14 किलोमीटर का छोटा बालटाल मार्ग है जहां खड़ी चढ़ाई है। गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह तुरंत श्रीनगर के लिए रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को घटना के बारे में जानकारी दी है। आतंकवादी हमले के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की है। पीएम मोदी फिलहाल सऊदी अरब में हैं। शाह ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे।’ हालात सामान्य होने के दावे पर राहुल गांधी का सवाल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश एकजुट है और सरकार को इस केंद्रशासित प्रदेश में हालात सामान्य होने के खोखले दावे करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि इस कायराना आतंकी हमले में पर्यटकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की खबर बेहद निंदनीय और दिल दहलाने वाली है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं।’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘आतंक के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के खोखले दावों के बजाय अब जवाबदेही ले। साथ ही, सरकार ठोस कदम उठाए -ताकि आगे ऐसी बर्बर घटनाएं न होने पाएं और निर्दोष भारतीय यूं अपनी जान न गंवाएं।’

पहलगाम आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट की मौत, नाम पूछकर मारी गोली, NIA करेगी जांच

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले 26 टूरिस्ट की मौत हुई है। मृतकों में सभी पुरुष हैं। आतंकियों के हमले का निशाना बने पर्यटकों में दो विदेशी नागरिक हैं। बड़े आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निर्देश मिलने के बाद गृह मंत्री नई दिल्ली से पहलगाम के लिए रवाना हुए हैं। आतंकी हमले में काफी टूरिस्ट घायल हुए हैं हालांकि अभी तक दो टूरिस्ट की मौत की पुष्टि हुई है। नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर में भी उच्चस्तरीय बैठक कर सकते हैं। पीएम मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है। किसी को नहीं छोड़ेंगे: शाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई करेंगे। अमित शाह ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को घटना के बारे में जानकारी दी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी एजेंसियों के साथ तत्काल सुरक्षा समीक्षा बैठक करने के लिए जल्द ही श्रीनगर के लिए रवाना होऊँगा।   बैसरन वैली में हुआ आतंकी हमला पहलगाम यह आतंकी हमला मशहूर बेताब वैली से 10 किमी दूर स्थित बैसरन वैली में उस वक्त हुआ जब टूरिस्ट का एक ग्रुप घास पर घुड़सवारी का आनंद ले रहा है। आतंकी हमले के बाद सामने आए वीडियो में इस बात की पुष्टि हुई है कि हथियारबंद हमलावरों ने नाम पूछकर गोली मारी। हमले के बाद सामने आए वीडियो में आतंकवादियों की क्रूरता बयां हुई है। महिला ने वीडियो में बताया है कि महिला ने बताया कि आतंकियों ने नाम पूछा और गोली मार दी। इसी वीडियो में एक और महिला महिला बुरी तरह रो रही हैं और ये कह रही हैं कि भगवान के लिए मेरे पति को बचा लो। वीडियो में एक शख्स कहता है कि आप टेंशन मत लो, आप यहां पर रहो। ठीक है ठीक है हम बचा देंगे। मैं आ रहा हूं।   कुछ साल पहले बना था टूरिस्ट प्वाइंट पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर के समर्थित टीआरएफ  संगठन ने ली है। यह संगठन लश्कर ए तैयबा का हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसा ही संगठन है। जम्मू कश्मीर इसके सबूत मिले हैं कि इस आतंकी संगठन के पीछे लश्कर ए तैयबा ही है। आतंकियों ने दूसरे राज्यों के जिन टूरिस्ट पर हमला किया वह बैसरन घाटी का टूरिस्ट प्वाइंट चार-पांच साल पहले ही बना था। घाटी में माहौल बदलने के बाद बड़ी संख्या में टूरिस्ट इस प्वाइंट पर पहुंच रहे थे। पहलगाम के इस आतंकी हमले में सामने आया है कि कुछ आतंकी पुलिस की वर्दी में थे। इसलिए वे पर्यटकों के पास तक आसानी से पहुंच गए। पहलगाम हमले की चौतरफा निंदा पहलगाम के बैसरन टूरिस्ट प्वाइंट पर पर्यटकों के हमले को लेकर जहां केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है ताे वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ से बात की है। जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया है। घायलों को एयरलिफ्ट किए जाने की संभावना पर भी विचार हो रहा है।

भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा, इसके खतरनाक परिणाम होंगे, लोग बेरोजगार हो सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे आविष्कार से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं तो रोजगार से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को सता रही हैं। इस चिंता में अब सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो गया है। अदालत ने मंगलवार को एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा। इसके खतरनाक परिणाम होंगे और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें मांग की गई थी कि सरकार को इलेक्ट्रिकल वीकल्स की खरीद और उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति बनाने को को कहा जाए। इसी दौरान अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ड्राइवरों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। अदालत ने कहा, ‘हमारी चिंता यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन ड्राइवरों का रोजगार नहीं जाना चाहिए। भारत में ड्राइवर की नौकरी भी रोजगार का एक बड़ा माध्यम है।’ मजाकिया अंदाज में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एआई से तो वकीलों को भी टक्कर मिल रही है। ऐसे टूल आ गए हैं, जिनसे आप कोई भी कानूनी राय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है। कुछ महीनों में ही कोई एक अच्छा मॉड्यूल आ जाता है। फिलहाल हम देख रहे हैं कि AI आधारित एडवोकेट टूल हैं। अमेरिका में तो इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है। हमें भी वकीलों को लेकर चिंता होती है। बता दें कि भारत में भी बड़े-बड़े उद्योगपति इसे लेकर चिंता जताते रहे हैं। कॉन्टेंट राइटिंग, कंसल्टेंसी समेत कई ऐसे बिजनेस हैं, जिन पर AI के चलते विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इलेक्ट्रिक कारों की खरीद की नीति को लेकर दायर पीआईएल के लिए प्रशांत भूषण पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिकल वीकल्स को तेजी से बढ़ावा देना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 तो भारत के ही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि सरकार खुद ऐसी नीति लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि आगे नहीं बढ़ेगी तो फिर दूसरे विभाग कैसे आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बेसिक इन्फ्रा मुहैया कराना चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा कि 400 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक वीकल्स की चार्जिंग सेंटर मिलते हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमें कुछ समय दिया जाए। फिर हम बताएंगे कि आखिर सरकार की इसे लेकर क्या नीति है। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है।

कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा, सुप्रीम कोर्ट भड़का

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के जरिए मांगी गई राहत को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मंगलवार को वकील पर याचिकाकर्ता के रूप में याचिका दायर करने के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दया और कहा कि उसने कोर्ट का माहौल खराब किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वकील संदीप टोडी को चार सप्ताह का समय दिया है। इस समयसीमा के भीतर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के खातों में राशि जमा करने को कहा है। साथ ही, यह पता लगाने के लिए 6 सप्ताह बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया कि क्या पैसा जमा किया गया था। जस्टिस नाथ ने कहा, ‘आपने इस अदालत का माहौल खराब कर दिया है। कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा।’ संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारात्मक तरीकों के अधिकार की गारंटी देता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। पीठ ने कहा, ‘अगर हम याचिका को साधारण तरीके से वापस लेने की अनुमति देते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा।’ याचिका में क्या रखी गई थी मांग पीठ ने वकील पर जुर्माना लगाते हुए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी। वकील की याचिका में पारिवारिक विवाद में एक व्यक्ति को दी गई राहत पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बीते 25 मार्च को दायर याचिका में कुटुंब न्यायालय, मुंबई के 25 सितंबर 2019 के आदेश को चुनौती दी गई। इसके मद्देनजर वर्तमान प्रतिवादी संख्या 4 (नेहा टोडी जिन्हें नेहा सीताराम अग्रवाल के नाम से भी जाना जाता है) के पक्ष में दी गई सभी राहतों पर एकपक्षीय रोक लगाने का आदेश देने की मांग रखी गई। याचिका में केंद्र, मुंबई की एक कुटुंब अदालत और बंबई उच्च न्यायालय को प्रतिवादी बनाया गया है।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों से बोलीं ममता बनर्जी, शिक्षकों से स्कूलों में लौटने का आग्रह किया, वेतन की व्यवस्था हम करेंगे

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती विवाद बढ़ता ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब 26 हजार शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द हो गई है। इसके बाद शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जीन ने शिक्षकों से स्कूलों में लौटने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके वेतन की भी व्यवस्था करेगी। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अपनी नौकरी गंवा चुके हजारों शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। साल्ट लेक में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) मुख्यालय के बाहर मंगलवार को उनका प्रदर्शन जारी है। ममता बनर्जी ने कहा, “आपको इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि कौन दागी है और कौन नहीं। आपको केवल इस बात की चिंता करने की जरूरत है कि क्या आपके पास नौकरी है या नहीं और क्या आपको समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं। दागी और बेदाग शिक्षकों की पहचान करने वाली सूची सरकार और अदालतों के पास है।’ बनर्जी ने मिदनापुर में एक प्रशासनिक कार्यक्रम में कहा, ‘हम आश्वासन देते हैं कि आपकी नौकरी अभी सुरक्षित है और आपको आपका वेतन मिलेगा। कृपया अपने स्कूलों में वापस जाएं और कक्षाएं फिर से शुरू करें। मैंने कल रात से कई बार इस बारे में बात की है। हम आपके साथ हैं।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरी गंवाने वाले ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों के लिए एक पुनर्विचार याचिका भी उच्चतम न्यायालय में दायर की जाएगी और “तब तक हम पर अपना विश्वास बनाए रखें”। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह मई के पहले सप्ताह में मुर्शिदाबाद के अशांत क्षेत्रों का दौरा करेंगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक तरफ शिक्षकों का प्रदर्शन चल रहा है तो दूसरी तरफ मुर्शिदाबाद के दंगों को लेकर भी विपक्षी ममता सरकार को घेर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी ही कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रही है। वक्फ कानून को लेकर प्रदर्शन के बाद मुर्शिदाबाद में हुए दंगों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी।

रोड़ पर चलती AC बस में कंडक्टर की अनदेखी बनी मुसीबत, कपल ने बनाए शारीरिक संबंध, वीडियो वायरल होते ही हड़कंप

मुंबई नवी मुंबई से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और सामाजिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक चलती AC बस में कपल द्वारा खुलेआम अश्लील हरकत करने का मामला सामने आया है। यह घटना तब उजागर हुई जब किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और इसे वायरल कर दिया। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर फैला, नवी मुंबई महानगरपालिका की छवि को लेकर भी सवाल उठने लगे। कंडक्टर की अनदेखी बनी मुसीबत नवी मुंबई म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट (NMMT) के वरिष्ठ अधिकारियों ने बस में तैनात कंडक्टर को इस घटना को रोकने में नाकाम रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों के अनुसार, कंडक्टर को यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए थी। उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और लिखित में जवाब मांगा गया है कि आखिर चलती बस में यह सब कैसे हुआ।   पनवेल से कल्याण जा रही थी बस यह घटना उस समय हुई जब NMMT की बस पनवेल से कल्याण की ओर जा रही थी और ट्रैफिक की वजह से धीरे-धीरे चल रही थी। इसी दौरान बस की पिछली सीट पर बैठे कपल ने शारीरिक संबंध बनाए। घटना को देख रहे एक शख्स ने अपने वाहन से इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। RTI कार्यकर्ता ने उठाए सवाल आरटीआई कार्यकर्ता अनरजीत चौहान ने बताया कि कंडक्टर से लिखित में यह बताने को कहा गया है कि उसने जोड़े को क्यों नहीं रोका। उन्होंने बताया कि 22 सेकंड का यह वीडियो एक मोटर चालक ने बनाया था, जिसने बस की खिड़की से जोड़े को देखा था, जिनकी उम्र 20 साल के आसपास थी।  अधिकारी ने जानकारी दी कि “बस उस समय लगभग खाली थी और ट्रैफिक की वजह से धीरे चल रही थी। उसी दौरान किसी शख्स ने वीडियो रिकॉर्ड कर उसे नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारियों तक पहुंचा दिया।” अनारजित चौहान ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सार्वजनिक परिवहन की गरिमा के खिलाफ” बताया और कहा कि प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें करना एक दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर तीन महीने की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में कपल पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

आतंकी ने पूछा मुस्लिम हो? फिर गोली मार दी’, पहलगाम आतंकी हमले के चश्मदीदों ने बयां किया मंजर

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन में आतंकी हमला हुआ है. आतंकियों ने घुड़सवारी कर रहे पर्यटकों के ग्रुप को निशाना बनाया, जिसमें 12 लोग घायल हो गए हैं. घायलों में चार की हालत क्रिटिकल है. एक पर्यटक की मौत हो गई है. इस हमले में न केवल इंसान बल्कि कुछ घोड़े भी घायल हुए हैं, जिनको गोलियां लगी हैं. आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. सीआरपीएफ (CRPF) की अतिरिक्त क्विक रिएक्शन टीम (QAT) घटनास्थल के लिए भेजा गया है. दरअसल, कश्मीर में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां पर आतंकवाद नजर नहीं आता, पहलगाम उसमें से एक ऐसा हिस्सा है. यहां पर पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. मार्च में हुई बर्फबारी के बाद सैकड़ों की तदाद में पर्यटक यहां लगातार पहुंच रहे हैं. पहलगाम के एक पहाड़ के टॉप पर ट्रैकिंग के लिए पर्यटक जाते हैं. वहां पर ये आतंकी हमला हुआ. पर्यटकों पर वहां छुपे आतंकियों ने गोलीबारी की. भेलपूरी खा रहे थे और आतंकी ने पति को गोली मार दी पहलगाम में हुए आतंकी हमले में एक महिला के पति को गोली मार दी गई. सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के माध्यम से जो वीडियो सामने आई है उसमें एक महिला ने दुःख भरे शब्दों में बताया कि आतंकियों ने उनके पति को केवल इस वजह से गोली मार दी क्योंकि उन्होंने कहा था कि ये मुस्लिम नहीं है. मेरे पति को बचा लो – महिला की अपील पहलगाम से आई ताजा तस्वीर में एक महिला लोगों से अपने पति को बचाने की अपील कर रही हैं. इस भावुक अपील ने पूरे देश में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है. चश्मदीदों का कहना है कि आतंकियों ने पहले नाम पूछे और फिर उनपर गोलियां चलाई गईं. घटनास्थल पर क्या हैं ताजा हालात?     पहगलाम में हुए आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह से फोन पर बात की है. प्रधानमंत्री ने शाह से उचित कदम उठाने को कहा है. प्रधानमंत्री ने शाह को घटनास्थल का दौरा करने के लिए कहा है.     पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आपात बैठक बुलाई है. बैठक में आईबी के गृह सचिव और गृह मंत्रालय के दूसरे अधिकारी मौजूद हैं. जम्मू-कश्मीर के लोग और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी वर्चुअली इस मीटिंग में जुड़ रहे हैं.     जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम में हुए हमले को लेकर कहा कि वह स्तब्ध हैं. पर्यटकों पर किया गया हमला बेहद घृणित है. इस हमले के अपराधी दरिंदे हैं, अमानवीय हैं और तिरस्कार के पात्र हैं. श्रीनगर से लौट रहा हूं. घायल लोगों की निगरानी करने के लिए मेरे सहयोगि अस्पताल पहुंच चुके हैं.     घायलों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. घायलों की संख्या अब 12 पहुंच गई है. जिसमें से चार की हालत गंभीर है. एक पर्यटक की मौत हो गई है.     बीजेपी नेता रविंदर रैना ने पहलगाम में हुआ आतंकी हमला को कायराना बताया है. रविंदर ने कहा कि पाकिस्तान के आतंकी भारतीय सुरक्षाबलों का सामना नहीं कर सकते, इसलिए निहत्थे और मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया.     इस आतंकी हमले में एक शख्स की मौत हो गई है. घायलों का इलाज किया जा रहा है.     जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की. महबूबा ने कहा कि हमारी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ है.     खुफिया सुरक्षा एजेंसी सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में TRF के आतंकी तंजीम का हाथ है. दो से तीन हमलावर पुलिस/आर्मी यूनिफॉर्म में थे.     हमले के बाद आई तस्वीर में पर्यटक घबराए हुए दिख रहे हैं. वह अपने होटल की ओर तेजी से भागते नजर आए.     पहलगाम से आए ताजा तस्वीर में एक महिला रोते हुए नजर आ रही हैं. महिला रो-रोकर बता रही हैं कि उनके बेटे को गोली लगी है. आसपास खड़े लोग उन्हें दिलासा दे रहे हैं.     आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. सुरक्षाबलों ने पर्यटकों से नहीं घबराने की अपील की है. वहीं, पहलगाम से आई ताजा तस्वीर में नजर आ रहा है कि कई स्थानीय लोग अपनी दुकान को बंद कर दिया. J&K के पूर्व DGP एसपी वैद ने हमले को लेकर क्या कहा? पहलगाम में हुए आतंकी हमला चिंताजनक खबर है. कुछ समय में अमरनाथ यात्रा भी आने वाली है और पहलगाम में ही बेस कैंप है. प्रदेश में टूरिज्म अभी पीक पर है. क्योंकि भारत के ज्यादातर इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है. ज्यादातर आतंकी टूरिस्ट पर हमला नहीं करते है. क्योंकि इसे स्थानीय लोगों के व्यापार पर असर पड़ेगा. ये पर्यटक जहां पहुंचे थे वो पहाड़ की ऊंचाई थी, सभी जगह पुलिसवाले नहीं पहुंच सकते. आतंकी को मौका मिला और उन्होंने पर्यटकों को टारगेट किया. कश्मीर घाटी और जम्मू के क्षेत्र में 90 फीसदी जो अभी आतंकी मौजूद हैं वह पाकिस्तान से इन्फिलिटरेट होकर अंदर आए हैं. लोकल आतंकी को सेंसिटिविटी रहती है, उनकी संख्या बेहद ही कम है.  

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद PM मोदी ने गृह मंत्री को किया फोन, कुछ देर में J-K रवाना हुए अमित शाह

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आज आतंकी हमले को अंजाम दिया गया। इस हमले में एक पर्यटक की मौत हो गई है। वहीं, हमले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में गृह सचिव और IB के अधिकारी शामिल हैं। पीएम मोदी ने शाह से की बात पीएम मोदी ने अमित शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने इस घटना पर कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए। वहीं, पीएम ने अमित शाह को घटनास्थल पर जाने का आदेश भी दिया है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबल पहुंच चुके हैं और पहाड़ी इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। घायल पर्यटकों को इलाज के लिए भेजा गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई को फोन पर एक महिला ने बताया, मेरे पति के सिर में गोली लगी है, जबकि सात अन्य भी इस हमले में घायल हुए हैं। महिला ने अपनी पहचान नहीं बताई है। लेकिन महिला ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई है। अमरनाथ यात्रा प्रभावित करना चाहते आतंकी   बताते चलें कि 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। ऐसे में पर्यटकों को निशाना बनाना आतंकियों की नई चाल की ओर इशारा करता है। हमले से ऐसे लग रहा है कि आतंकी अमरनाथ यात्रा को प्रभावित करना चाहते हैं। आतंकी हमले पर सीएम अब्दुल्ला ने क्या कहा? सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर चिंता जाहिर करते हुए कहा,”मैं विश्वास से परे सदमे में हूं। पर्यटकों पर यह हमला एक घृणित घटना है। इस हमले के अपराधी जानवर, अमानवीय और घृणा के पात्र हैं। निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि घायलों के लिए अस्पताल में व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी सहकर्मी सकीना इटू से बात की है और वह घायलों के लिए व्यवस्थाओं की देखरेख करने के लिए अस्पताल चली गई हैं। मैं तुरंत श्रीनगर वापस आ जाऊंगा।” कश्मीरियों के सबसे बड़े दुश्मन हैं आतंकवादी : सज्जाद लोन इस आतंकी हमले पर J&K पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने कहा, “आतंकवादियों से बड़ा कश्मीरियों का कोई दुश्मन नहीं हो सकता। उनकी जंग कश्मीरियों के आतिथ्य के खिलाफ है। वे चाहते हैं कि पर्यटक कश्मीर छोड़ दें और कश्मीरियों के पास आजीविका का कोई स्रोत न हो। वे हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के दुश्मन हैं। वे आतंकवादी हैं। निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाना सबसे बड़ा पाप है। उन्हें न तो यहां माफ किया जाएगा, न ही भगवान की नजर में।”

Vice President ने कहा एक मामले में SC ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं दूसरे मामले में कहा कि यह संविधान का हिस्सा

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने एक नए संबोधन में कहा है कि संविधान के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए. संविधान क्या होगा? इसे अंतिम रुप से तय करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि हीं होंगे और इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि संसद सुप्रीम संस्था है. राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान के पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं. मेरे हिसाब से नागरिक सर्वोच्च है. हर किसी की अपनी भूमिका होती है. उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर संविधान कोर्ट की आलोचना की और सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान की प्रस्तावना को लेकर व्याख्याओं में असंगति पर सवाल उठाया. जगदीप धनखड़ ने कहा, “एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है (गोलकनाथ मामला) दूसरे मामले में उसने कहा कि यह संविधान का हिस्सा है (केशवानंद भारती). बता दें कि गोलकनाथ केस में संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों को संशोधित या समाप्त नहीं कर सकती, क्योंकि मौलिक अधिकार संविधान का अभिन्न हिस्सा हैं. यानी कि संसद को मौलिक अधिकारों में कटौती करने का अधिकार नहीं है. केशवानंद भारती केस में सर्वोच्च न्यायालय की 13 जजों की संविधान पीठ ने 7:6 के बहुमत से फैसला दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित कर सकती है, लेकिन यह संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को नष्ट नहीं कर सकती. मूल संरचना में संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघीय ढांचा, शक्ति पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, और मौलिक अधिकारों का सार शामिल है. 25 जून 1975 लोकतंत्र का काला दिन उपराष्ट्रपति ने देश में आपातकाल का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 25 जून 1975 हमारे लोकतंत्र का काला दिवस था. इस दिन देश की सर्वोच्च अदालत ने 9 उच्च न्यायालयों की सलाह की अवहेलना की. जगदीप धनखड़ ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन सौदेबाजी नहीं की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अभिव्यक्ति और संवाद से ही पनपता है. अगर अभिव्यक्ति के अधिकार का गला घोंटा जाता है तो लोकतंत्र खत्म हो जाता है. और अगर अभिव्यक्ति के अधिकार पर अहंकार हो जाता है तो वह हमारी सभ्यता के अनुसार अभिव्यक्ति नहीं है संवैधानिक पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं दिल्ली विश्वविद्यालय संविधान के 75  वर्ष लागू होने के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम ‘कर्तव्यम’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत में कर्तव्य का अर्थ है कर्तव्य. हमारे संविधान निर्माता ने ऐसा संविधान दिया जिसमें टकराव से बचा जा सके. उन्होंने संविधान में मौजूद कुछ ऐसे पदों की ओर इशारा किया जिन्हें आम तौर पर सजावटी कहा जाता है. जगदीप धनखड़ ने कहा, “संवैधानिक पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं. मेरे अनुसार, एक नागरिक सर्वोच्च है. हर किसी की भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है (गोलकनाथ मामला) दूसरे मामले में उसने कहा कि यह संविधान का हिस्सा है (केशवानंद भारती). संसद ही सुप्रीम है उन्होंने कहा कि संविधान के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए. संविधान क्या होगा? इसे अंतिम रुप से तय करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि ही होंगे और इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. संसद सर्वोच्च है. उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र सहभागी है. डॉ. अंबेडकर ने माना कि स्वतंत्रता के लिए जिम्मेदारियों की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि मौलिक कर्तव्य मूल रूप से संविधान में नहीं थे. इसलिए 42वें संविधान संशोधन द्वारा हमने अनुच्छेद 51A पेश किया. शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 86वें संशोधन द्वारा एक और कर्तव्य जोड़ा गया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रवाद के लिए ऐसी प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है जिसमें मिलावट न की जा सके. हमारा संविधान हजारों वर्षों से हमारी सभ्यता के सिद्धांतों को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बातचीत में जीता है और बातचीत में सभी बराबर हैं. लोकतंत्र की सेहत बातचीत की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. अगर बातचीत को पैसे वालों, विदेशी हितों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, तो क्या होगा? हमें पक्षपात से ऊपर उठना होगा.    

आतंकियों ने घुड़सवारी करते पर्यटकों पर की गोलीबारी, एक की मौत, सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन किया शुरू

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन में आतंकी हमला हुआ है. आतंकियों ने घुड़सवारी कर रहे पर्यटकों के ग्रुप को निशाना बनाया, जिसमें सात लोग घायल हो गए हैं. घायलों में तीन पर्यटक, तीन स्थानीय हैं, एक की अभी जानकारी नहीं है. दो की हालत गंभीर है. इस हमले में न केवल इंसान बल्कि कुछ घोड़े भी घायल हुए हैं, जिनको गोलियां लगी हैं. एक शख्स की मौत हो गई है. आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. सीआरपीएफ (CRPF) की अतिरिक्त क्विक रिएक्शन टीम (QAT) घटनास्थल के लिए भेजा गया है. दरअसल, कश्मीर में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां पर आतंकवाद नजर नहीं आता, पहलगाम उसमें से एक ऐसा हिस्सा है. यहां पर पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. मार्च में हुई बर्फबारी के बाद सैकड़ों की तदाद में पर्यटक यहां लगातार पहुंच रहे हैं. पहलगाम के एक पहाड़ के टॉप पर ट्रैकिंग के लिए पर्यटक जाते हैं. वहां पर ये आतंकी हमला हुआ. पर्यटकों पर वहां छुपे आतंकियों ने गोलीबारी की. आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. सुरक्षाबलों ने पर्यटकों से नहीं घबराने की अपील की है. वहीं, पहलगाम से आई ताजा तस्वीर में नजर आ रहा है कि कई स्थानीय लोग अपनी दुकान को बंद कर दिया. J&K के पूर्व DGP एसपी वैद ने हमले को लेकर क्या कहा? पहलगाम में हुए आतंकी हमला चिंताजनक खबर है. कुछ समय में अमरनाथ यात्रा भी आने वाली है और पहलगाम में ही बेस कैंप है. प्रदेश में टूरिज्म अभी पीक पर है. क्योंकि भारत के ज्यादातर इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है. ज्यादातर आतंकी टूरिस्ट पर हमला नहीं करते है. क्योंकि इसे स्थानीय लोगों के व्यापार पर असर पड़ेगा. ये पर्यटक जहां पहुंचे थे वो पहाड़ की ऊंचाई थी, सभी जगह पुलिसवाले नहीं पहुंच सकते. आतंकी को मौका मिला और उन्होंने पर्यटकों को टारगेट किया.  कश्मीर घाटी और जम्मू के क्षेत्र में 90 फीसदी जो अभी आतंकी मौजूद हैं वह पाकिस्तान से इन्फिलिटरेट होकर अंदर आए हैं. लोकल आतंकी को सेंसिटिविटी रहती है, उनकी संख्या बेहद ही कम है.  

40 साल में पहली बार भारतीय पीएम की जेद्दा यात्रा पर, आसमान में ही PM मोदी का भव्य स्वागत, F-15 लड़ाकू विमानों ने जेद्दा तक किया एस्कॉर्ट

जेद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को जेद्दा पहुंचे. पीएम मोदी का विमान जब सऊदी हवाई क्षेत्र में पहुंचा तो उनका विशेष स्वागत किया गया. रॉयल सऊदी एयर फोर्स के एफ-15 लड़ाकू विमानों ने जेद्दा तक प्रधानमंत्री मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया. यह प्रधानमंत्री की सऊदी अरब की तीसरी यात्रा है, जबकि वह पहली बार जेद्दा गए हैं. सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी की जेद्दाह यात्रा के दौरान भारत और सऊदी अरब कम से कम छह समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जबकि कुछ और समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ भारत-सऊदी अरब स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल की दूसरी बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे. सऊदी अरब की अपनी दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा, ‘भारत सऊदी अरब के साथ अपने दीर्घकालिक और ऐतिहासिक संबंधों को अत्यधिक महत्व देता है. हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में रणनीतिक गहराई और गति आई है. दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों सहित पारस्परिक रूप से लाभकारी और ठोस साझेदारी विकसित की है.’ प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से लेकर अब तक, सऊदी अरब और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों की दिशा बदली है. साल 2016 और 2019 में पहले की यात्राओं के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की खाड़ी क्षेत्र के किसी देश की 15वीं यात्रा है. सऊदी अरब में भारतीय राजदूत सुहेल एजाज खान ने प्रधानमंत्री की यात्रा पर कहा, ‘भारत और सऊदी अरब के बीच संपर्क के मामले में जेद्दा एक बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है, क्योंकि सदियों से जेद्दा दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए बंदरगाह था और यह मक्का का प्रवेश द्वार भी है. इसलिए जो कोई भी उमराह और हज के लिए आता है, वह जेद्दा में उतरता है और फिर मक्का जाता है.’ समाचार एजेंसी पीटीआई ने उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी शाम को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के साथ अपनी बैठक के दौरान भारतीय हज यात्रियों के लिए कोटा सहित हज यात्रा से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं. भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान ने कहा, ‘हज एक बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा है और भारत सरकार इसे बहुत महत्व देती है. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय इस यात्रा की व्यवस्था कर रहा है. द्विपक्षीय वार्ता में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई है. हज यात्रा को लेकर सऊदी सरकार और भारत के बीच हमेशा से बहुत अच्छा समन्वय रहा है.’      

‘शरबत जिहाद’ वाले बयान पर बाबा रामदेव को हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

नई दिल्ली योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक की लोकप्रिय स्क्वैश ड्रिंक रूह अफजा पर ‘शरबत जिहाद’ वाली टिप्पणी “अस्वीकार्य” है और इसने अदालत की “अंतरात्मा” को झकझोर दिया है.  न्यायमूर्ति अमित बंसल ने रूह अफजा निर्माता हमदर्द के मुकदमे की सुनवाई करते हुए कहा, “इससे अदालत की अंतरात्मा को झटका लगा है. यह अस्वीकार्य है. हमदर्द की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि बाबा रामदेव हमदर्द के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. कंपनी के मालिकों के धर्म पर भी हमला कर रहे हैं. रोहतगी ने यह भी कहा कि यह एक ऐसा मामला है जो हर किसी को चौंकाने वाला है, और यह अपमान से परे है. यह सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने से जुड़ा मामला है, यह नफरत फैलाने वाले भाषण जैसा है. अदालत ने क्या कहा? रामदेव की ‘पतंजलि फूड्स लिमिटेड’ के खिलाफ ‘हमदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया’ की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा, ‘‘इसने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. यह उचित नहीं है. आप (रामदेव के वकील) अपने मुवक्किल से निर्देश लें, अन्यथा सख्त आदेश दिया जाएगा.” बाद में रामदेव ने अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी ब्रांड या समुदाय का नाम नहीं लिया. बाबा रामदेव ने क्या कहा था? बताते चलें कि हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो कहते हुए सुने गए थे कि लोग गर्मी में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक पीते हैं. ये असल में टॉयलेट क्लीनर की तरह होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ टॉयलेट क्लीनर जैसे जहर का हमला है और दूसरी तरफ एक कंपनी है जो शरबत बेचती है. उससे कमाए गए पैसे से मस्जिदें और मदरसे बनवाती है. बाबा रामदेव ने किसी का नाम तो नहीं लिया था लेकिन, माना जा रहा है कि उनका निशाना ‘रूह अफजा’ पर था. बाबा रामदेव ने आगे कहा था कि अगर आप शरबत पीते हैं तो इससे मस्जिदों और मदरसों के निर्माण को सपोर्ट मिलेगा. लेकिन, पतंजलि का गुलाब शरबत पीते हैं तो इससे गुरुकुल, आचार्यकुलम, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड आगे बढ़ेगा. हाईकोर्ट ने बयान पर जताई नाराजगी इससे पहले हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव द्वारा दिए गए ‘शरबत जिहाद’ संबंधी बयान पर सख्त नाराजगी जताई और इसे अक्षम्य और अदालत की चेतना को झकझोरने वाला करार दिया है. क्या कहा हाईकोर्ट ने… हाईकोर्ट ने कहा, यह बयान अक्षम्य है और अदालत की चेतना को झकझोर देने वाला है. यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई, जिसे हमदर्द लैबोरेटरीज ने रामदेव के एक बयान के खिलाफ दायर किया है. यह बयान हमदर्द के प्रसिद्ध उत्पाद ‘रूह अफ़ज़ा’ को लेकर दिया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि इस बयान को किसी भी तरह से ठीक नहीं ठहराया जा सकता है. हमदर्द की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए. रोहतगी ने दलील दी कि बाबा रामदेव का बयान हेट स्पीच के दायरे में आता है. यह बयान धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाला है. हमदर्द ने हाई कोर्ट में क्या कहा… हमदर्द की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला सिर्फ ‘रूह अफ़ज़ा’ की छवि को धूमिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे जाकर यह एक साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करने वाला मामला भी बनता है. वकील ने दलील दी कि बाबा रामदेव का यह बयान सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाला है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. कोर्ट ने रामदेव के वकील को दोपहर 12 बजे पेश होने के लिए कहा था. दोपहर 12 बजे कोर्ट ने फिर इस मसले पर सुनवाई की.  

आम लोगों के लिए बड़ी खबर: गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम किए लागू

नई दिल्ली LPG सिलेंडर आज के समय में सभी लोगों के लिए बड़ी जरूरत बन चुका है। गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार आए दिन राशन कार्ड व गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में बदलाव करती रहती है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि, केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर को लेकर नए नियम पूरे देश में लागू कर दिए हैं, जिनका असर सभी वर्गों पर पड़ेगा। अगर आप भी गैस सिलेंडर भरवाने जा रहे हैं तो पहले लागू किए नए नियम जान लें। ये नियम केंद्र सरकार की योजना राशन कार्ड और गैस सिलेंडर 2025 के लिए 21 अप्रैल 2025  से शुरू हो रहे हैं। आपको बता दें कि इस योजना की अवधि 21 अप्रैल से 31 दिसंबर 2028 तक है, जिसमें प्रति परिवार 6-8 गैस सिलेंडर हर वर्ष मिलेंगे।  गैस सिलेंडर बुकिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। जारी किए गए नियमों के तहत गैस सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी व सब्सिडी प्रक्रिया को डिजीटल कर दिया गया है। KYC अपडेट करवाना जरूरी अब गैस सिलेंडर की बुकिंग से पहले उपभोक्ता को अपनी KYC अपडेट करवानी होगी। इसके लिए उपभोक्ता को अपना आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर व अन्य जानकारी एजेंसी को अपडेट करवानी होगी। इसके लिए आपका आधार नंबर मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए। जिस उपभोक्ता का KYC अपडेट नहीं होगा उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। OTP वेरिफिकेशन जरूरी बुकिंग के बाद गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए नियम लागू हुआ है। दरअसल, गैस सिलेंडर की डिलीवरी की दौरान OTP वेरिफिकेशन जरूरी है। आपको बता दें कि ये OTP आपको गैस सिलेंडर बुकिंग के दौरान आया है, जिसे डिलीवरी ब्वॉय को देना होता है। अगर कोई उपभोक्ता अपना OTP नहीं देता हो उसे सिलेंडर नहीं मिलेगा। सब्सिडी अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के बाद तीसरा नियम लागू होता सब्सिडी पर। गैस सिलेंडर की सब्सिडी का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता का बैंक खाता, आधार व गैस कनेक्श लिंक होना चाहिए। बता दें कि सब्सिडी की रक्म में सरकार समय-समय पर बदलाव कर सकती है। इसकी कोई भी रकम तय नहीं है। ये भी बता दें कि जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक करवाने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। नियमों के फायदे लागू किए कए नियमों के सबसे बड़ा फायदा ये है कि, सब कुछ डिजिटल होने से फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है। वहीं OTP से गलत डिलीवरी व चोरी का कोई डर नहीं रहेगा। इसके साथ ही सब्सिडी सीधा उपभोक्ता के खाते में आ है। जरूरी दस्तावेज मोबाइल नंबर आधार कर्ड सब्सिडी के लिए इंकम सर्टीफिकेट बैंक खाता गैस कनेक्शन बुक व e-KYC अपडेट।  

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