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वक्फ कानून के तहत किसानों को उन जमीनों पर खेती कर रहे उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए: मुख्यमंत्री सिद्धाररमैया

नई दिल्ली वक्फ मामले में कर्नाटक सरकार ने किसानों को नोटिस भेजने वाले अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी है। भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड में बदलाव करने और वक्फ कानून के तहत किसानों को जमीन खाली करने का नोटिस भेजने वाले अधिकारियों को चेताया गया है। राजस्व विभाग के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार कटारिया ने जिलों के सभी क्षेत्रीय आयुक्तों और उपायुक्तों पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री सिद्धाररमैया ने कुछ भू-संपत्तियां कर्नाटक वक्फ बोर्ड के पक्ष में किए जाने की शिकायतों के बाद हाल में बैठक की थी। पत्र के मुताबिक, बैठक में तय किया गया कि भूमि का स्वामित्व बदलने के लिए किसी भी सरकारी कार्यालय या प्राधिकारी की ओर से पूर्व में दिए गए सभी निर्देश वापस लिए जाते हैं। पूर्व में दिए गए सभी नोटिस भी वापस लिए गए हैं। उन जमीनों पर खेती कर रहे किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। पत्र में कहा गया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार किसानों और जमीन मालिकों को 7 नवंबर को भेजे पत्र व नोटिस वापस लिए जाते हैं। वक्फ बोर्ड ने इन जमीनों पर जताया अपना दावा राजेंद्र कुमार कटारिया ने अपने पत्र में कहा, ‘मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद नोटिस भेजने वाले अधिकारियों को उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’ कर्नाटक में 13 नवंबर को तीन अहम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। उसके बीच यह निर्देश जारी किया गया है। उत्तर कर्नाटक में विजयपुरा के कुछ किसानों ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि उन्हें जमीन खाली करने के नोटिस दिए गए हैं, क्योंकि वक्फ बोर्ड ने इन जमीनों पर अपना दावा जताया है। इसके बाद राज्य के कुछ अन्य हिस्सों से भी शिकायतें मिलने लगी थी। भाजपा के नेता तेजस्वी सूर्या ने 25 अक्टूबर को गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के वक्फ मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने उपायुक्तों और राजस्व अधिकारियों को 15 दिन के भीतर वक्फ बोर्ड के पक्ष में जमीनें पंजीकृत करने का निर्देश दिया था, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। सूर्या के अनुरोध पर वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने 7 नवंबर को कर्नाटक का दौरा किया। उन्होंने हुब्बली, विजयपुरा और बेलगावी जिलों के किसानों से मुलाकात की जिन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीनों को वक्फ संपत्ति के तौर पर चिह्नित किया गया है।

जबरवान के जंगल में चल रही मुठभेड़, सोपोर इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर में बारामूला जिले के सोपोर इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कश्मीर संभाग की पुलिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में कहा, ‘बारामूला के रामपोरा सोपोर इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया गया। तलाशी अभियान के दौरान गोलीबारी हुई।’ पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ की विस्तृत जानकारी का इंतजार है। हालांकि, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि मुठभेड़ के दौरान एक आतंकवादी मारा गया है। उन्होंने बताया कि मारे गए दहशतगर्द और उसके संगठन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, श्रीनगर के बाहरी इलाके में जबरवान वन क्षेत्र में रविवार को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह मुठभेड़ दाचीगाम और निशात क्षेत्र के ऊपरी इलाकों को जोड़ने वाले वन क्षेत्र में सुबह करीब 9 बजे शुरू हुई। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इलाके की घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया था। मुठभेड़ में अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। कठुआ में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा गौरतलब है कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे कठुआ में सेना प्रमुख का दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद निरोधक अभियान तेज हो गए हैं। यहां गुरुवार को किश्तवाड़ जिले में हुए हमले में आतंकवादियों ने 2 ग्राम रक्षा गार्ड का अपहरण करने के बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। एडीजीपीआई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कठुआ, जम्मू कश्मीर में तैनात राइजिंग स्टार कोर की अग्रिम इकाइयों का दौरा किया। उन्हें मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। सेना प्रमुख ने सैनिकों से भी बातचीत की और उनके पेशेवर रवैये व कर्तव्य के प्रति समर्पण के उच्च मानकों की सराहना की।’

डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया फैसले लेने में कैसा होता है प्रेशर- जजों पर केवल राजनीतिक दबाव नहीं

नई दिल्ली जजों के ऊपर केवल राजनीतिक दबाव ही नहीं होता है। उनके ऊपर निजी हित समूहों का भी दबाव होता है। यह बात रिटायर्ड सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कही। उन्होंने कहाकि यह सोशल मीडिया का सहारा लेकर माहौल बनाते हैं। वह ऐसा प्रचारित करते हैं जिससे जज के ऊपर किसी खास तरह का फैसला करने का दबाव बन जाए। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि यहां तक इस तरह से दबाव बनाने के लिए ट्रोलिंग की जाती है। सोशल मीडिया के जरिए हमले किए जाते हैं। डीवाई चंद्रचूड़ ने यह भी कहाकि न्याय व्यवस्था की आजादी को मापने का सिर्फ यह पैमाना नहीं होना चाहिए कि कितने फैसले सरकार के खिलाफ दिए गए। वह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले पूर्व सीजेआई ने इस दौरान अपने फैसलों पर भी बात की। उन्होंने कहाकि मुझे लगता है कि मैंने एक बैलेंस बनाने की कोशिश की है। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि मैंने हमेशा फैसले किसी खास विचार से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि अपनी न्यायिक समझ के आधार पर ही दिया है। इस मौके पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहाकि हालांकि सीजेआई और सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को प्रशासनिक पक्ष में सरकार के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी फंड्स को लेकर किए गए अपने सुधारों को याद किया। इसके अलावा सरकारों से राय लेने में कोर्ट और एग्जीक्यूटिव्स के बीच मतभेदों को सुलझाने में अहम होता है। पूर्व सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और सरकार के बीच उपजे मतभेद का हवाला दिया जो कई बार सुर्खियों में रहा। हालांकि उन्होंने यह भी कहाकि सभी मतभेद सुलझाए भी नहीं जा सकते। उन्होंने कहाकि इसका सबसे अच्छा उदाहरण है कि सरकार अभी भी वकील सौरभ किरपाल को हाई कोर्ट का जज बनाने को राजी नहीं है। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि किसी जज की सेक्सुअलिटी या उसके पार्टनर का विदेशी नागरिक होना उसके फैसलों पर असर नहीं डाल सकता। इसके साथ ही उन्होंने फैसलों में स्पष्टता की भी बात की। पूर्व सीजेआई ने कहाकि खराब ढंग से लिखे गए फैसले न्याय की आस रखने वालों को निराश करते हैं।

ट्रंप इस राज्य और उसके 11 चुनावी वोटों को रिपब्लिकन की झोली में डालने में कामयाब रहे

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले डोनाल्ड ट्रंप कमाल करते दिख रहे हैं। उन्होंने एरिजोना में भी जीत हासिल कर ली। इस तरह 5 नवंबर को हुए चुनावों में सभी 7 स्विंग राज्यों में रिपब्लिकन ने विजय परचम लहरा दिया है। ट्रंप इस राज्य और उसके 11 चुनावी वोटों को रिपब्लिकन की झोली में डालने में कामयाब रहे। साल 2020 में डेमोक्रेटिक लीडर जो बाइडन की जीत के बाद भी उन्होंने अबकी बार यह कर दिखाया। 70 बरसों के बाद एरिजोना जीतने वाले बाइडन दूसरे डेमोक्रेट बने थे। ताजा आंकड़ों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप को अब तक 312 इलेक्टोरल वोट मिल चुके हैं। ये व्हाइट हाउस की दौड़ जीतने के लिए जरूरी 270 से कहीं अधिक हैं। साल 2016 में जब ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव जीता तो उन्हें 304 चुनावी वोट मिले थे। अमेरिकी मीडिया 50 राज्यों में आधे से अधिक में ट्रंप को विजेता घोषित कर चुकी है। इनमें जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और विस्कॉन्सिन के स्विंग राज्य शामिल हैं, जिनमें से सभी ने पिछले चुनाव में डेमोक्रेटिक वोट दिया था। उन्होंने उत्तरी कैरोलिना और नेवादा के में भी जीत हासिल की है। नेवादा में भी ट्रंप ने लहराया विजय का परचम डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को नेवादा राज्य में विजय का परचम लहराया। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बाद से पहली बार यह राज्य और इसके 6 इलेक्टोरल वोट रिपब्लिकन पार्टी के पास लौटे हैं। इससे पहले 2004 में बुश ने इस राज्य से जीत हासिल की थी। ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी रहीं कमला हैरिस ने इस साल राज्य में कई बार प्रचार किया। नेवादा की ज्यादातर काउंटी ग्रामीण हैं और इसने 2020 में ट्रंप के लिए भारी मतदान किया था। मगर, डेमोक्रेट जो बाइडन ने उस समय दो सबसे घनी आबादी वाली काउंटी वैशू और क्लार्क से जीत हासिल की थी। एसोसिएटेड प्रेस ने ट्रंप के विजयी होने की जानकारी दी।

किश्तवाड़ में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू, 2 ग्रामीणों के हत्या में शामिल थे यही दहशतगर्द

किश्तवाड़ किश्तवाड़ में दो विलेज डिफेंस गार्ड्स की अगवा कर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई थी. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि इस इलाके में 3 से 4 आतंकवादी छिपे हैं. यह आतंकियों का वही ग्रुप है जिसने दो निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर दी थी. विलेज डिफेंस गार्ड्स को अगवा कर मारा इससे पहले किश्तवाड़ में गुरुवार (7 नवंबर 2024) को दो विलेज डिफेंस गार्ड्स की अगवा कर हत्या कर दी गयी थी. मृतकों की पहचान नसीर अहमद और कुलदीप कुमार के रूप में हुई थी. दोनों का शव 12 घंटे के गहन तलाशी अभियान के बाद शुक्रवार को कुंतवाड़ा जंगल के अंदर एक नाले के पास मिला. शवों का पोस्टमार्टम किया गया तो इस बात की पुष्टि हुई कि उनके सिर में पीछे से गोली मारी गई थी. अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी और उनके हाथ उनकी पीठ पर बंधे हुए थे. घटना के बाद सेना ने बढ़ाई घेराबंदी लोगों ने सड़कों पर उतरकर इस घटना पर विरोध प्रदर्शन किया था. जम्मू में पाकिस्तान से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात ग्राम रक्षा गार्ड रोजाना की तरह सुरक्षा बलों के साथ ड्यूटी करते हैं. इस घटना के बाद थलसेना की व्हाइट नाइट कोर के कमांडर ने हत्या के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों का पता लगाने के लिए जारी अभियानों की समीक्षा की. इस जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले आतंकवादियों की तलाश के लिए सेना की ओर से घेराबंदी बढ़ाने के लिए शनिवार (9 नवंबर 2024) को इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था. मृतक नजीर अहमद के परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी के अलावा एक दिव्यांग भाई है, जबकि कुलदीप कुमार के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है. जब दोनों अपने मवेशियों को चराने के लिए वन क्षेत्र में गए तभी आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाया.

‘फासीवादियों को रैली की इजाजत नहीं’, हसीना की आवामी लीग पर भड़की बांग्लादेश सरकार

ढाका. बांग्लादेश की सियासी गलियारों में लगातार हलचल मची हुई है। अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश से भागने के तीन महीने बाद उनकी पार्टी अवामी लीग ने रविवार को ढाका में मौजूदा सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन रैली का आह्वान किया। इस पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार भड़क उठी और आवामी लीग को ‘फासीवादी’ करार देते हुए बांग्लादेश में रैली की इजाजत देने से इनकार कर दिया। दरअसल, अगस्त में छात्रों के विद्रोह के बाद से अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमलों का सामना करते हुए पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ पार्टी अपने अधिकांश शीर्ष नेतृत्व के जेल में या निर्वासन में रहने के कारण फिर से संगठित होने और अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। इसी के चलते पार्टी ने रविवार यानी 10 नवंबर को ढाका में विरोध मार्च का आह्वान किया। क्या बोली अंतरिम सरकार? सरकार ने कहा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को रविवार को प्रस्तावित रैली को आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने फेसबुक पर एक पोस्ट कर शनिवार को कहा कि अंतरिम सरकार देश में किसी भी तरह की हिंसा या कानून व्यवस्था को भंग करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी। एजेंसियों की सख्ती का करना पड़ेगा सामना आलम ने कहा कि अवामी लीग अपने मौजूदा स्वरूप में एक फासीवादी पार्टी है। किसी भी सूरत में इस फासीवादी पार्टी को बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति रैली, सभा और जुलूस आयोजित करने की कोशिश करेगा, उसे कानून लागू करने वाली एजेंसियों की पूरी सख्ती का सामना करना पड़ेगा। आलम का यह बयान अवामी लीग की ओर से उस आह्वान के बाद आया, जिसमें पार्टी समर्थकों से रविवार को गुलिस्तान में शहीद नूर हुसैन छत्तर या जीरो पॉइंट पर ‘कुशासन’ के खिलाफ विरोध के लिए एकत्र होने का आग्रह किया गया है। यह कदम पिछले महीने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा छात्र संघ की छात्र शाखा पर प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया गया है। पांच अगस्त को हसीना को छोड़ना पड़ा था देश हसीना अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच पांच अगस्त को भारत चली गई थीं। उनके भारत जाने के बाद अवामी लीग द्वारा रैली का यह पहला आह्वान है। अवामी लीग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया है कि रविवार को देशभर में जमीनी स्तर पर रैलियां आयोजित करें। विरोध स्थल ‘शहीद नूर हुसैन छत्तर’ ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहीं पर 10 नवंबर, 1987 को तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल एचएम इरशाद के निरंकुश शासन के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान अवामी लीग के युवा नेता नूर हुसैन की हत्या कर दी गई थी।

‘मेरा अपहरण कर अश्लील वीडियो बनाने किया मजबूर’, महाराष्ट्र के एनसीपी विधायक के बेटे का सनसनीखेज दावा

मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी सरगर्मियां जारीं हैं। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक अशोक पवार के बेटे ने कहा है कि उसका कथित तौर पर अपहरण हो गया था। पुलिस ने इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की है और मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पुणे की शिरुर सीट से विधायक अशोक पवार के बेटे रुशिराज पवार का कहना है कि कुछ लोगों ने उसका अपहरण किया था और उससे 10 करोड़ रुपये मांगे थे। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने रुशिराज को मिलने के लिए बुलाया था। उन्होंने कहा था कि कई लोग राकांपा-एसपी में शामिल होना चाहते हैं और इसलिए विधायक के बेटे को उनसे मिलना होगा। शिकायत के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी इसके बाद रुशिराज को बाइक में बिठाकर एक बंगले में ले गए। उसे एक अज्ञात महिला के साथ अश्लील वीडियो बनाने के लिए भी मजबूर किया गया। आरोपियों ने कथित तौर विधायक के बेटे से वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल न करने के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की। ‘अपहरण से छूटने के लिए रची कहानी’ रुशिराज की तरफ से पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, वह फिरौती की रकम जुटाने का झांसा देकर बंगले से बाहर निकला और वहां से भाग निकला। बाद में वह पुलिस के पास गया और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर शिरुर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुणे के एसपी पंकज देशमुख ने कहा कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है और जांच जारी है। 

संकल्प संस्था द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह एक अभूतपूर्व और भव्य आयोजन के रूप में सम्पन्न हुआ

नई दिल्ली यह विशेष कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, आदरणीय जस्टिस श्री हेमंत गुप्ता साहब के निवास पर आयोजित किया गया, जहाँ समाज के विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर संकल्प संस्था के अध्यक्ष, आदरणीय डॉ. जी. प्रसन्ना कुमार साहब पूर्व आईएएस ने पूरे आदर और आत्मीयता के साथ श्री हरिशचंद्र अग्रवाल, श्रीमती बबीता अग्रवाल, आयुषी अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, हेमकुमार गोयल, रजनी गोयल और यश गोयल का स्वागत किया। डॉ. प्रसन्ना कुमार साहब ने स्वामी विवेकानंद जी का चित्र और भगवान राम की पुस्तक भेंटस्वरूप प्रदान की, जो हमारे सनातन मूल्यों और संस्कृति का प्रतीक है। इस दीपावली मिलन समारोह ने समाज में एकता, सेवा और सद्भाव के संदेश को नई ऊर्जा दी, और हमारी परंपराओं के प्रति सम्मान और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विशेष आकर्षण का केंद्र आदरणीय श्री संतोष तनेजा जी की उपस्थिति रही, जिनके प्रेरणादायक विचारों ने उपस्थित महानुभावों के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। श्री तनेजा जी की सेवा भावना और समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण ने इस आयोजन को एक उच्च प्रेरणा का स्रोत बना दिया, जो समाज के हर व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है। समारोह की शोभा में चार चाँद लगाने में अन्य सम्माननीय अतिथियों का भी विशेष योगदान रहा। श्री ओ.पी. गुप्ता जी, श्री लखन तिवारी जी और श्री अतुल मेहता जी जैसे विद्वान महानुभावों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक सफल और प्रेरणास्पद अनुभव में बदल दिया। इन सभी विभूतियों का आत्मीय सहयोग, समाज के प्रति उनकी निष्ठा और अनुकरणीय जीवनशैली ने समारोह में उपस्थित जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। श्री हरिशचंद्र अग्रवाल जी का सहज और आत्मीय स्वभाव, श्रीमती बबीता अग्रवाल जी की ऊर्जावान उपस्थिति, आयुषी अग्रवाल जी का सकारात्मक दृष्टिकोण, श्री ओ.पी. गुप्ता जी की विद्वत्ता, श्री लखन तिवारी जी की विनम्रता, और श्री अतुल मेहता जी की नेतृत्व क्षमता ने सभी के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी। संकल्प संस्था का यह दीपावली मिलन समारोह केवल दीपों की जगमगाहट का पर्व नहीं था, बल्कि उन महान आत्माओं के उज्ज्वल विचारों और सेवा भावना से आलोकित था, जिन्होंने समाज के लिए सद्भाव, संस्कार और सेवा की एक अनमोल प्रेरणा दी। इस आयोजन ने समाज में एकता, सेवा और सकारात्मक मूल्यों के प्रसार के साथ नई ऊंचाई को स्पर्श किया। यह दीपावली मिलन समारोह, जिसमें संस्कार और संस्कृति का संगम हुआ, सभी के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा और एक नई रोशनी का संदेश फैलाया।”

सातों स्विंग स्टेट में जीत दर्ज कर रचा इतिहास, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने एरिजोना राज्य भी जीता

वॉशिंगटन. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी मतगणना जारी थी। इनमें से एक एरिजोना भी था। शनिवार को घोषित हुए नतीजों में डोनाल्ड ट्रम्प ने एरिजोना में भी जीत हासिल की। इसके साथ ही राष्ट्रपति चुनाव में सातों स्विंग राज्यों में जीत दर्ज कर डोनाल्ड ट्रंप ने इतिहास रच दिया। इससे पहले साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी ने जो बाइडन के नेतृत्व में एरिजोना में जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने इस राज्य की सभी 11 इलेक्टोरल वोट पर अपना कब्जा जमाया। एरिजोना राज्य रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है। साल 2020 में एरिजोना में जीत दर्ज करने वाले जो बाइडन बीते 70 वर्षों में सिर्फ दूसरे डेमोक्रेट नेता थे। अब 2024 में एक बार फिर से रिपब्लिकन पार्टी ने अपना गढ़ बचाने में सफलता हासिल की है। ट्रंप के खिलाफ कई आपराधिक मामले चल रहे हैं, इसके बावजूद उन्होंने 2016 के मुकाबले ज्यादा इलेक्टोरल वोट से राष्ट्रपति चुनाव जीता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को अब तक 312 इलेक्टोरल वोट मिले हैं, जो व्हाइट हाउस की दौड़ जीतने के लिए आवश्यक 270 से कहीं ज्यादा हैं। साल 2016 के चुनाव में ट्रंप को 304 इलेक्टोरल वोट मिले थे। सभी स्विंग राज्यों में ट्रंप को जिताया अमेरिकी मीडिया के अनुसार, जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और विस्कॉन्सिन जैसे स्विंग राज्यों सहित 50 राज्यों में से आधे से अधिक में ट्रम्प को विजेता घोषित किया गया है। गौरतलब है कि इनमें से सभी ने पिछले चुनाव में डेमोक्रेटिकत पार्टी को वोट दिया था। ट्रंप ने स्विंग राज्यों उत्तरी कैरोलिना और नेवादा में भी जीत हासिल की। वहीं कमला हैरिस को अब तक 226 इलेक्टोरल वोट मिले हैं। ट्रंप के जीत के साथ ही यह लगातार चौथी बार होगा, जब व्हाइट हाउस पर डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी का बारी-बारी से कब्जा होगा। 19वीं सदी के उत्तरार्ध के बाद यह पहली बार हो रहा है, जब अमेरिकी मतदाता हर चार साल के कार्यकाल के बाद दूसरी पार्टी की सरकार को सत्ता सौंप देते हैं। क्या होते हैं स्विंग स्टेट और क्यों हैं ये अहम अमेरिका में स्विंग स्टेट उन राज्यों को कहा जाता है, जहां पार्टियों का समर्थन बदलता रहता है। मतलब जहां अमेरिका के कई राज्यों में पहले से विभिन्न सर्वे में पता चल जाता है, कि इन राज्यों में किस पार्टी को जीत मिलेगी, वहीं कुछ राज्यों में बेहद कड़ा मुकाबला होता है और वहां किसी भी पार्टी का पलड़ा भारी हो सकता है। यही वजह है कि इन राज्यों को स्विंग स्टेट कहा जाता है और राष्ट्रपति चुनाव में किस उम्मीदवार को जीत मिलेगा, उसमें इन स्विंग स्टेट की अहम भूमिका होती है। 2024 के चुनाव में सात स्विंग स्टेट थे जिनमें पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, जॉर्जिया, विस्कॉन्सिन, उत्तरी कैरोलिना, नेवादा, एरिजोना का नाम शामिल रहा। अब चुनाव नतीजों में सातों स्विंग स्टेट में ट्रंप का जीतना ऐतिहासिक है। राष्ट्रपति चुनाव तीन प्रकार के राज्य तय करते हैं —  रेड स्टेट्स: रिपब्लिकन पार्टी 1980 के बाद से जीत रही है।  ब्लू स्टेट्स: 1992 से ही डेमोक्रेट्स का वर्चस्व रहा है।  स्विंग स्टेट: पूरी तरह से अलग नतीजे देते हैं। अक्सर इन राज्यों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में कांटे की टक्कर होती है। यह राज्य ही चुनावी भाग्य का फैसला करते हैं।

किसानों की कर्जमाफी और वृद्धा पेंशन बढ़ेगी, महाराष्ट्र चुनाव: भाजपा का 25 लाख नौकरी का संकल्प

मुंबई. महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही। वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज होती जा रही है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले, मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे। संकल्प पत्र में क्या कुछ – 0- युवाओं के लिए 25 लाख नई नौकरियों का वादा 0- महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देने का वादा 0- किसानों का कर्ज माफ करने का वादा 0- किसानों के लिए भावांतर योजना लाएगी 0- वृद्ध पेंशन योजना- सीमा 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये की जाएगी 0- स्कील सेंटर खोले जाएंगे भारत के लिए विकसित महाराष्ट्र बनाने की रूपरेखा उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के लिए भाजपा का चुनाव संकल्प पत्र विकसित भारत के लिए विकसित महाराष्ट्र बनाने की रूपरेखा है। कब होने हैं चुनाव? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होने हैं और सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतगणना 23 नवंबर को होगी। 2019 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने 105 सीटें, शिवसेना ने 56 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 122, शिवसेना को 63 और कांग्रेस को 42 सीटें मिली थीं।

समर्थकों से की विपक्षी पार्टी की मदद की अपील, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी पर आया तरस

वॉशिंगटन. डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस को हरा दिया है, लेकिन अभी भी उनका डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधना जारी है। अब अपने ताजा बयान में भी ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर तंज कसा है और दावा किया है कि चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी ने इतना पैसा खर्च किया कि अब उनके पास वेंडर्स का भुगतान करने के भी पैसे नहीं बचे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘मुझे बेहद हैरानी हो रही है कि डेमोक्रेटिक पार्टी, जिन्होंने बहुत मेहनत और बहादुरी से 2020 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड संख्या में पैसा इकट्ठा किया था, अब उनके पास एक भी डॉलर नहीं बचा है। अब वेंडर्स और अन्य के द्वारा उन्हें निचोड़ा जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के मुश्किल वक्त में हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए। मैं अपील करता हूं कि एक पार्टी के तौर पर हमें एकजुट रहना चाहिए। हमारे पास अभी भी बहुत सारा पैसा बचा हुआ है क्योंकि प्रचार अभियान के दौरान हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे खुद के द्वारा ‘कमाया गया मीडिया’ था और हमें उसके लिए बहुत सारा पैसा नहीं खर्च करना पड़ा।’ सातों स्विंग स्टेट में जीते ट्रंप ट्रंप ने अपने इस पोस्ट के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी पर मीडिया को प्रभावित करने का अप्रत्यक्ष आरोप लगाया। गौरतलब है कि हालिया राष्ट्रपति चुनाव में दोनों ही पार्टियों ने जमकर पैसा खर्च किया और इस चुनाव को अमेरिकी इतिहास के सबसे महंगे चुनाव में एक बताया गया। चुनाव अभियान के दौरान चुनाव में कांटे की टक्कर दिखाई गई थी, लेकिन नतीजों ने सभी को हैरान किया और ट्रंप ने प्रचंड जीत हासिल की। ट्रंप की ऐतिहासिक जीत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सातों स्विंग स्टेट में ट्रंप को जीत मिली। 

भाजपा बोली-कानून बनाकर क्रूरता खत्म करेंगे, केरल में 400 एकड़ जमीन पर वक्फ का दावा

तिरुवनंतपुरम. कर्नाटक में किसानों की जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे का विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ है कि अब केरल में भी 400 एकड़ से ज्यादा जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया है। वक्फ बोर्ड के इस दावे से केरल की राजनीति में घमासान शुरू हो गया है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि उनकी सरकार वक्फ विधेयक को संसद में पास कराकर इस क्रूरता को खत्म करेगी। केरल के कोचि के नजदीक मुनांबम इलाके में वक्फ बोर्ड ने 400 एकड़ से ज्यादा जमीन पर दावा कर दिया है। यह जमीन करीब 600 परिवारों के पास हैं, जिनमें से अधिकतर ईसाई समुदाय के हैं। केरल में उपचुनाव में वक्फ का यह मामला चर्चा में है। वायनाड में चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि ‘यह सिर्फ मुनांबम की बात नहीं है…यह क्रूरता पूरे भारत में खत्म होगी। कड़े फैसले लिए जाएंगे और सच्चे संविधान को लागू किया जाएगा। यह विधेयक (वक्फ विधेयक) संसद में पास कराया जाएगा।’ सुरेश गोपी ने कहा कि ‘कल तो सबरीमाला भी वक्फ की संपत्ति हो जाएगा। भगवान अयप्पा को भी जगह खाली करनी पड़ेगी! क्या हम इसकी इजाजत दे सकते हैं? तमिलनाडु में वेलानकन्नी चर्च ईसाइयों के लिए बेहद अहम है, अगर वक्फ उस जमीन पर दावा कर दे तो वह चर्च भी वक्फ का हो जाएगा। हम इसके खिलाफ विधेयक लाए हैं। एलडीएफ और यूडीएफ गठबंधन ने इस विधेयक के खिलाफ विधानसभा में विधेयक पारित किया है। अगर आप नहीं चाहते कि सबरीमाला और वेलानकन्नी वक्फ के पास न जाएं तो भाजपा को वोट दें।’

कॉलेज प्रशासन ने छात्रो से सख्ती से कहा है कि या तो दाढ़ी ट्रिप करनी होगी या फिर क्लीन शेव करनी होगी

कर्नाटक कर्नाटक के एक कॉलेज में पढ़ने वाले जम्मू-कश्मीर के छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनसे जबरन दाढ़ी कटवाई जा रही है। उनका कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने सख्ती से कहा है कि या तो उन्हें दाढ़ी ट्रिप करनी होगी या फिर क्लीन शेव करनी होगी। हसन जिले के सरकारी नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने दावा किया है कि दाढ़ी कटवाए बिना क्लीनिकर एक्टिविटी में उन्हें अनुपस्थित कर दिया जाता है। छात्रों के मुताबिक यहां करीब 24 कश्मीरी छात्र हैं और उनसे कहा गया है कि वह या तो नंबर 1 पर दाढ़ी को ट्रिम करवा लें, या फिर क्लीन शेव कर लें। उन्होंने कहा कि दाढ़ी रखने की वजह से क्लास में उनकी अनुपस्थिति दर्ज हो जाती है और इसलिए उनका अकैडमिक रिकॉर्ड भी खराब हो रहा है। इस मामले को लेकर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स असोसिएशन ने करन्टाक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखा और उनसे दखलल की मांग की। पत्र में कहा गया कि इस तरह दाढ़ी कटवाने का दबाव बनाकर छात्रों के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस पत्र में कहा गया. जानकारी के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को दाढ़ी कटवाने का आदेश दिया है। जिन स्टूडेंट्स की दाढ़ी हैं उनकी एब्सेंट लगा दी जाती है। ऐसे में उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि वे किसी खास ग्रुप को टारगेट नहीं कर रहे हैं। कॉलेज के क्लीनिकल इन्सपेक्टर विजय कुमार ने कहा कि निर्देश सभी छात्रों के लिए जारी किए गए हैं। इसमें यहां के स्थानीय छात्र भी शामिल हैं। क्लीनिकल ड्यूटी के लिए हाइजीन मेनटेन रखना जरूरी है और इसलिए ये नियम बनाए गए थे। कॉलेज के बयान में कहा गया था, कॉलेज से निर्देशों के बावजूद छात्र उनका पालन नहीं कर रहे हैं। इस बार सख्त चेतावनी दी जा रही है। कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि कश्मीरी छात्र अकसर क्लास से गायब रहते हैं और धार्मिक प्रार्थनाओं में चले जाते हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निर्देशों के बाद कॉलेज प्रशासन ने कश्मीरी छात्रों के साथ बैठक की और फिर उन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चलने की छूट दे दी।

कनाडा के रडार पर ISI एजेंट कियानी, भारत ने नहीं, पाकिस्तान ने कराई निज्जर की हत्या?

नई दिल्ली खालिस्तानी आतंकवादी हदीप सिंह निज्जर की हत्या की गुत्थी अभी सुलझी नहीं है। इस बीच एक बड़ी बात सामने निकलकर आई है। कनाडा भले ही इस हत्या का आरोप भारत की सरकार पर लगा रहा है, लेकिन इस केस में अब पाकिस्तान का एंगल भी सामने आ चुका है। तारीक कियानी और उनके साथी राहत राव, जो कि ISI एजेंट हैं, दोनों को रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने हदीप सिंह निज्जर की हत्या के संबंध में जांच के घेरे में लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया, “कनाडा में निज्जर के नजदीक जाना हर किसी के लिए संभव नहीं था। राव और कियानी कनाडा में ISI के दो प्रमुख एजेंट हैं। दोनों ही खुफिया एजेंसी के लिए सबसे अधिक सक्रिय हैं। दोनों ही उन आतंकवादियों को भी हैंडल कर रहे हैं जो भारत से कनाडा आए हैं।” पाकिस्तान ने कराई थी हत्या? सूत्रों के अनुसार, कियानी और राव को निज्जर की हत्या का आदेश दिया गया था ताकि ड्रग व्यापार को सीधे उनके द्वारा नियंत्रित किया जा सके। सूत्र ने कहा, “निज्जर समय के साथ शक्तिशाली हो रहा था और कनाडाई समुदाय में उसकी लोकप्रियता बढ़ रही थी। राव, कियानी और पन्नू को शायद इस व्यापार को नियंत्रित करने का काम दिया गया था। यह उनका मुख्य आय स्रोत था। निज्जर का पाकिस्तान के नेताओं से संबंध ISI के लिए एक समस्या बन गया था। इसलिए, शायद व्यापार को फिर से कंट्रोल करने के लिए उन्होंने निज्जर को पहला निशाना बनाया।” कियानी और राव की गतिविधियां अब कनाडा के खुफिया अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन चुकी हैं। ये दोनों कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम कर रहे हैं और कनाडा में खालिस्तानी समर्थकों और आतंकवादियों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। कनाडा में हुई हिंसा के लिए हिंदुओं को ठहराया दोषी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के एजेंट और रिपब्लिक प्लस टीवी के मालिक तारीक कियानी ने कनाडा में दीवाली से पहले हुई हिंसा का बचाव किया है। कियानी ने 3 नवंबर को हुई हिंसा के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि सिख शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हिंदुओं ने ही हालात को बिगाड़ा। इस घटना से जुड़ी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। कियानी ने एक 30 मिनट लंबी वीडियो में यह दावा किया कि हिंसा में सिखों का कोई हाथ नहीं था और यह सब हिंदुओं के कारण हुआ। उन्होंने कहा, “सिखों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन हिंदुओं ने झड़प शुरू की।” एक वीडियो में कियानी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी बयान दिए। सूत्रों ने कहा, “उनका टीवी शो भारत की घरेलू राजनीति में दखल दे रहा है। वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक के मुद्दों पर बोलते हैं। यह अनुचित है कि वह एक सत्तारूढ़ सरकार को अपराधी कह रहे हैं। वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का बचाव भी कर रहे हैं और साफ तौर पर कनाडा में उनकी मौजूदगी को नकार रहे हैं।”

कनाडा में मंदिर पर हमले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, हमले का मास्टरमाइंड है आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी है

कनाडा कनाडा में मंदिर पर हमला करने के मामले में चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान ब्राम्पटन के 35 वर्षीय इंदरजीत गोसाल के रूप में हुई है। वह मंदिर पर हमले का मास्टरमाइंड है और खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी है। ग्रेटर टोरंटो में हिंदू मंदिर पर हमले का प्लान इंदरजीत ने ही तैयार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश देकर छोड़ भी दिया गया। इससे पहले पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इंदरजीत गोसाल सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू का दाहिना हाथ है। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद वही रेफरेंडम से जुड़े काम को देख रहा है। पुलिस ने बताया, गोसाल को 8 नवंबर को गिरफ्तार किया गया है। उसे जमानत पर छोड़ दिया गया है और कहा गया कि तय तारीख पर कोर्ट में हाजिर होना है। बता दें कि 4 नवंबर को खालिस्तानियों ने कनाडा में कई मंदिरों को निशाना बनाया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए कनाडा को कड़ा संदेश दिया था। कनाडा में हिंदुओं पर इस तरह के हमले को लेकर दुनिया के कई देशों ने निंदा की थी। पुलिस ने कहा, घटना की जांच के लिए एक विशेष दल बनाया गया है और इसकी जांच की जा रही है। हमलों के आरोपियों के पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने देश के कुछ नेताओं पर हिंदुओं और सिखों को “जानबूझकर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने” की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडाई मूल के हिंदू और सिख एक तरफ हैं और खालिस्तानी दूसरी तरफ। आर्य की यह टिप्पणी ब्रैम्पटन के एक मंदिर में हिंदुओं पर हमले की घटना के कुछ दिन बाद आई है। आर्य ने कहा कि कनाडा के कई नेता ब्रैम्पटन की घटना को कनाडाई मूल के हिंदुओं और सिखों के बीच संघर्ष के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के जानबूझकर किए गए कृत्यों और खालिस्तानियों के प्रभाव के कारण कनाडा के लोग अब खालिस्तानियों और सिखों को एक जैसा समझने लगे हैं। खालिस्तानी झंडे लिए प्रदर्शनकारियों की गत तीन नवंबर को ओंटारियो के ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र के ब्रैम्पटन शहर में स्थित हिंदू सभा मंदिर में लोगों के साथ झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर अधिकारियों और भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बाधा डाली थी। ओंटारियो के नेपियन क्षेत्र से सांसद आर्य ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कुछ नेता जानबूझकर इस हमले के लिए खालिस्तानियों को जिम्मेदार ठहराने और उनका जिक्र करने से बच रहे हैं। वे अन्य तत्वों पर दोष मढ़ रहे हैं। वे इसे हिंदुओं और सिखों के बीच एक मुद्दे के रूप में पेश करके कनाडा के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।” आर्य ने कहा, “खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा मंदिर पर किए गए हमले को लेकर नेता हिंदुओं और सिखों को इस तरह से चित्रित कर रहे हैं कि वे एक-दूसरे के खिलाफ हैं। जबकि, यह सच्ची तस्वीर नहीं है। हकीकत में हिंदू-कनाडाई और सिख-कनाडाई एक तरफ हैं और खालिस्तानी दूसरी तरफ।” 

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