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हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है : जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के विभिन्न देशों से आज अपील किया कि वे भारत की प्रतिभाओं एवं युवा जनशक्ति का अपने यहां विकास के लिए लाभ लें। डॉ जयशंकर ने यहां सुषमा स्वराज भवन में प्रवासी श्रमिकों के कानूनी एवं सुरक्षित प्रवासन के लिए विदेश मंत्रालय के विदेशी रोज़गार प्रभाग द्वारा विकसित पोर्टल ‘ईमाईग्रेट’ के नये संस्करण के अनावरण के मौके पर यह अपील की। इस मौके पर केन्द्रीय श्रम, रोज़गार, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरीटा भी उपस्थित थे। डॉ जयशंकर ने कहा कि पिछले साल ही सुरक्षित और कानूनी प्रवासन चैनलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रालय के अभियान के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सुरक्षित जाएं, संरक्षित जाएं’ आदर्श वाक्य के साथ एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था। आज का कार्यक्रम उस भावना को दर्शाता है क्योंकि यह जीवन को आसान बनाने और जन केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। ई-माइग्रेट पोर्टल का शुभारंभ भारतीय श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित, अधिक पारदर्शी और समावेशी गतिशीलता बनाने के हमारे निरंतर प्रयासों का एक प्रमाण है और हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विदेश मंत्री ने कहा कि जबकि हम भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा में अपने प्रवासी श्रमिकों के अमूल्य योगदान को पहचानते हैं, हमें उन कमजोरियों को भी स्वीकार करना चाहिए जिनका वे विदेशी भूमि पर सामना करते हैं। हमारे मिशनों, विशेष रूप से खाड़ी में मिशनों में समर्पित श्रमिक अताशे हैं जो श्रम और अन्य शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि संशोधित ई-माइग्रेट पोर्टल में उनके सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए 24 गुणा 7 बहुभाषी हेल्पलाइन नंबर भी हैं, जिनके लिए कभी-कभी तत्काल समाधान की आवश्यकता होती है।” उन्होंने कहा कि यह पाेर्टल एवं मोबाइल ऐप प्रवासी श्रमिकों के लिए अवसरों के द्वार खोल रहा है। भारत सरकार ने उनके लिए रोज़गार के अवसराें के साथ सुरक्षित एवं प्रशिक्षित प्रवासन के सभी उपाय भी मुहैया कराये हैं। विदेश मंत्री ने इस मौके पर मौजूद विदेशी राजनयिकों से अपील की कि वे अपने अपने देशों के विकास की यात्रा में भारत की प्रतिभाओं एवं परिश्रमी युवाओं के कौशल का लाभ उठायें। उन्होंने सभी पक्षकारों से ईमाइग्रेट पोर्टल के उपयोग की भी अपील की। मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने भारत के युवाओं को ना केवल देश में बल्कि विश्व भर में रोज़गार के अवसर सुलभ कराने का संकल्प लिया है और उनका कहना है कि भारत सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों को समग्रता में सोचना एवं योजना तैयार करना चाहिए। ईमाइग्रेट पोर्टल उसी सोच का परिणाम है जिसमें श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का नेशनल कैरियर पोर्टल और माई भारत पोर्टल भी जुड़ा है। इससे दुनिया के अन्य देशों को भी भारत की प्रतिभाओं का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। ईमाइग्रेट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप में डिजीलॉकर, करीब छह लाख कॉमन सर्विस सेंटरों, भाषिणी अनुवाद सेवा, उमंग पोर्टलों को जोड़ा गया है। आर्थिक जांच वांछित (ईसीआर) श्रेणी के 21 देशों और नॉन ईसीआर देशों में काम के लिए इच्छुक कामगार सीधे पंजीकरण करा सकते हैं। विदेशी मिशनों में स्थायी रूप से माइग्रेशन अताशे की नियुक्ति की गयी है जो प्रवासी श्रमिकों की मदद के मुद्दों को देखते हैं।      

सर्जन कविता सहाय ने महानिदेशक जनरल चिकित्सा सेवा (नौसेना) के रूप में संभाला पदभार

नई दिल्ली सर्जन वाइस एडमिरल कविता सहाय ने 14 अक्टूबर को नौसेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक डीजी मेडिकल सर्विसेज एमएस के रूप में कार्यभार संभालने से पहले, वह एएमसी सेंटर एंड कॉलेज की पहली महिला कमांडेंट थीं। वह आर्मी मेडिकल कोर की कर्नल कमांडेंट के रूप में चुनी जाने वाली पहली महिला अधिकारी भी हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक वाइस एडमिरल कविता सहाय को 30 दिसंबर 1986 को सेना चिकित्सा कोर में नियुक्त किया गया था। वह प्रतिष्ठित सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज पुणे की पूर्व छात्रा हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित एम्स, नई दिल्ली से पैथोलॉजी में विशेषज्ञता और ऑन्कोपैथोलॉजी में सुपर स्पेशलाइजेशन किया है। वाइस एडमिरल कविता सहाय एएचआरआर और बीएचडीसी में प्रयोगशाला विज्ञान विभाग की प्रोफेसर और प्रमुख रही हैं। वह पैथोलॉजी विभाग, एएफएमसी, पुणे में प्रोफेसर भी रही हैं। उनकी चिकित्सा शिक्षा में विशेष रुचि है। उन्हें 2013-14 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया के प्रतिष्ठित फाउंडेशन फॉर एडवांसमेंट ऑफ इंटरनेशनल मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एफएआईएमईआर) फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। सर्जन वाइस एडमिरल कविता सहाय को विशिष्ट सेवा के लिए वर्ष 2024 में सेना पदक और 2018 में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। 2008 और 2012 में सेना प्रमुख और जीओसी-इन-सी (डब्ल्यूसी) द्वारा 2010 में उनकी सराहना की गई है। गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में शल्या चिकित्सरक वाइस एडमिरल आरती सरीन, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) की पहली महिला महानिदेशक बनी थी। वाइस एडमिरल आरती सरीन ने 01 अक्टूबर को सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक का पदभार संभाला है। वह यह पदभार संभालने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए सुरक्षित कार्य स्थितियों और प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए हाल ही में आरती सरीन को राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में भी नियुक्त किया गया है। वाइस एडमिरल आरती सरीन को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं में सेवाएं देने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है।  

चारधाम परियोजना का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ :केंद्र ने न्यायालय से कहा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि सामरिक रूप से अहम उत्तराखंड की चारधाम परियोजना के तहत आवंटित ठेके का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके तहत चीन तक साल भर तक यातायात के लिए उपलब्ध सड़क बनाई जा रही है। सामरिक रूप से अहम 900 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चार पवित्र धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को साल पर चालू रहने वाली सड़कों से जोड़ना है। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति सी.टी.रविकुमार और न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां की पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित निगरानी समिति ने उच्चतम न्यायालय को दो रिपोर्ट दाखिल की हैं। भाटी के मुताबिक शीर्ष अदालत ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाई है। भाटी ने अगस्त 2024 में जमा समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘आवंटित कार्य का लगभग 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है।’’ उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना से संबंधित दो रिपोर्ट हैं – एक अप्रैल, 2024 की और दूसरी 27 अगस्त की। पीठ ने कहा कि समिति की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर दर्ज की जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने दिसंबर 2021 में चारधाम राजमार्ग परियोजना के तहत दो लेन तक सड़क के चौड़ीकरण की अनुमति दी थी और साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन किया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए गठित समिति नया पर्यावरण मूल्यांकन नहीं करेगी। समिति को रक्षा, सड़क परिवहन और पर्यावरण मंत्रालयों, उत्तराखंड सरकार और संबंधित जिलाधिकारियों की ओर से भी पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया। चारधाम परियोजना की घोषणा दिसंबर 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों को चौड़ा करना है ताकि सुरक्षित, सुगम और तेज यातायात सुनिश्चित हो सके।      

दक्षिण रेलवे ने कावराईपेट्टई ट्रेन दुर्घटना वाले स्थल पर मरम्मत कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया

चेन्नई  दक्षिण रेलवे ने कहा है कि तमिनाडु में कावराईपेट्टई में हुयी ट्रेन दुर्घटना वाले स्थल पर मरम्मत कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है और आज से चरणबद्ध तरीके से सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। रेलवे की ओर से देर रात जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि शुक्रवार रात कावराईपेट्टई में मैसूर-दरभंगा बागमती एक्सप्रेस और एक खड़ी मालगाड़ी के बीच हुई टक्कर के कारण चेन्नई-गुम्मिडीपुंडी खंड में मेल/एक्सप्रेस और उपनगरीय ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं। बागमती एक्सप्रेस के दस डिब्बे और मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन कुछ यात्रियों को चोटें आई थीं और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। सात घायल यात्रियों को नियमानुसार अनुग्रह राशि दी गई। इस हादसे के कारम चेन्नई-गुम्मिडिपंडी सेक्शन में रेल यातायात बाधित रहा। सेक्शन से गुजरने वाली करीब 20 मेल/एक्सप्रेस सेवाएं रद्द कर दी गईं, कुल 60 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित/विनियमित/पुनर्निर्धारित किया गया। चेन्नई उपनगरीय सेवाएं चेन्नई-गुम्मिडिपंडी सेक्शन में निलंबित कर दी गईं और मिंजुर तक ईएमयू स्पेशल और दूसरे छोर पर सुलुरुपेटा से गुम्मिडिपंडी तक चलाई गईं। दक्षिणी रेलवे ने राज्य और जिला प्रशासन तथा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और तमिलनाडु अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी से बचाव कार्य शुरू किया। विज्ञप्ति के अनुसार यात्रियों की सहायता और बचाव अभियान चलाने के लिए 500 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया था। आधुनिक उपकरणों और चिकित्सा सुविधाओं से लैस दक्षिणी रेलवे की दुर्घटना राहत ट्रेनें पास के टोंडियारपेट यार्ड से लाई गईं। बागमती एक्सप्रेस के फंसे हुए यात्रियों को बसों के जरिए पोन्नेरी जैसे नजदीकी स्टेशनों पर ले जाया गया, जहां तत्काल ध्यान देने के लिए पांच मेडिकल टीमें मौजूद थीं। फंसे हुए यात्रियों को डॉ एमजीआर चेन्नई सेंट्रल पहुंचाने के लिए विशेष ईएमयू सेवाओं की व्यवस्था की गई। डॉ. एमजीआर सेंट्रल पहुंचने वाले यात्रियों को विशेष सहायता डेस्क ने सहायता प्रदान की। दुर्घटना के आठ घंटे के भीतर फंसे यात्रियों के लिए दरभंगा के लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई। वैकल्पिक ट्रेन सेवा, बागमती एक्सप्रेस के समान संरचना वाली एक विशेष ट्रेन, फंसे हुए यात्रियों को डॉ. एमजीआर चेन्नई सेंट्रल से दरभंगा ले जाने के लिए व्यवस्थित की गई थी। विज्ञप्ति में कहा गया कि रेलवे के डॉक्टरों द्वारा मेडिकल जांच और भोजन और पानी के प्रावधान के बाद कल तड़के 04.45 बजे डॉ एमजीआर चेन्नई सेंट्रल से रवाना हुई।इस विशेष ट्रेन में 1,800 से अधिक यात्रियों को ठहराया गया। इस बीच, पटरी से उतरे डिब्बों को फिर से पटरी पर लाने के लिए पांच भारी अर्थ मूवर्स, तीन जेसीबी और दो 140 टन के क्रेन की तैनाती के साथ बहाली का काम तुरंत शुरू हो गया। टीमों ने चौबीसों घंटे काम किया और साइट पर निर्बाध काम की सुविधा के लिए प्रकाश व्यवस्था की गई। दक्षिणी रेलवे के महाप्रबंधक आर एन सिंह, अतिरिक्त महाप्रबंधक, डीआरएम/चेन्नई, एडीआरएम/चेन्नई और जोन के वरिष्ठ अधिकारी दुर्घटना स्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों और बहाली कार्यों की बारीकी से निगरानी की। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (दक्षिणी सर्कल), बेंगलुरु ने 12 अक्टूबर को दुर्घटना स्थल का वैधानिक निरीक्षण किया। विज्ञप्ति के अनुसार सीआरएस ने पटरियों, सिग्नलों, इंटरलॉकिंग पैनलों, ब्लॉकों और प्वाइंटों, कोचों और लोको की गहन जांच की और अधिकारियों तथा घायल यात्रियों से भी बातचीत की। सीआरएस 16 और 17 अक्टूबर को वैधानिक जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि कावराईपेट्टई में बहाली का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, यूपी मेनलाइन से पटरी से उतरे कोचों और वैगनों को साफ कर दिया गया है। दुर्भाग्यपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेन के ०9 एसी कोच और एक पावर कार सहित कुल 10 कोचों और मालगाड़ी के दो वैगनों को क्रेन का उपयोग करके हटा दिया गया है।  

जम्मू-कश्मीर से 6 साल बाद हटाया राष्ट्रपति शासन, उमर अब्दुल्ला का सरकार गठन का रास्ता साफ

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) के इस फैसले के साथ ही आधिकारिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश में सरकार गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 और 239ए के साथ पठित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 का आदेश, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 54 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति से तुरंत पहले निरस्त किया जाता है। नवनिर्वाचित सरकार को शपथ लेने की अनुमति देने के लिए यूटी में राष्ट्रपति शासन को रद्द करने की आवश्यकता थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के आधार पर एक राष्ट्रपति आदेश लागू किया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव जीता और सरकार बनाने के लिए तैयार है। एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, जिन्हें गठबंधन के नेता के रूप में चुना गया है, जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। छह साल के लंबे अंतराल के बाद, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस के गठबंधन ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है और अब वे सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उमर अब्दुल्ला को सर्वसम्मति से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक दल का नेता चुना गया है, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह उमर अब्दुल्ला का दूसरा कार्यकाल होगा, इससे पहले वे 2009 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जब राज्य एनसी-कांग्रेस गठबंधन के अधीन था। राष्ट्रपति शासन हटा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की। यह राष्ट्रपति शासन 19 जून 2018 को पीडीपी-भाजपा गठबंधन के टूटने के बाद लगाया गया था। 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था, जिसके बाद यह क्षेत्र एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। राज्य का दर्जा बहाल करने पर जोर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि नई सरकार का प्रमुख उद्देश्य जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना होगा। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को एकजुट करना और चुनाव के दौरान फैली नफरत को खत्म करना होगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए ताकि राज्य सुचारू रूप से कार्य कर सके और हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” चुनाव परिणाम और गठबंधन इस बार के चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। कांग्रेस की पांच सीटें कश्मीर से और एक जम्मू से हैं। दोनों पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया था और चार निर्दलीय विधायकों तथा आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक का समर्थन भी उन्हें मिला है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 29 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। 10 साल के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुए चुनाव जम्मू-कश्मीर में 10 साल के लंबे अंतराल के बाद विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। यह चुनाव अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार हुआ है, जिससे यह ऐतिहासिक महत्व रखता है। चुनाव तीन चरणों में सम्पन्न हुए, जिनमें 18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को मतदान हुआ। जम्मू-कश्मीर में छह साल बाद राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार बनने से राज्य की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यह सरकार राज्य के पुनर्गठन और विकास के लिए कई अहम कदम उठाने की योजना बना रही है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना है। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है।

केंद्रीय कर्मचारियों को एक महीने की सैलरी के बराबर बोनस, खाते में आएगी इतनी राशि, आदेश जारी

नई दिल्ली वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 10 अक्तूबर को जारी आदेश के अनुसार, एडहॉक बोनस के तहत जो रकम दी जाती है, उसका निर्धारण करने के लिए एक नियम बनाया गया है। कर्मियों का औसत वेतन, गणना की उच्चतम सीमा के अनुसार, जो भी कम हो, उसके आधार पर यह बोनस जोड़ा जाता है। यदि किसी कर्मी को सात हजार रुपये मिल रहे हैं, तो उसका 30 दिनों का मासिक बोनस लगभग 6908 रुपये रहेगा। इस तरह के बोनस का फायदा, केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों को ही मिलेगा, जो 31 मार्च 2024 को सेवा में रहे हैं। उन्होंने साल 2023-24 के दौरान कम से कम छह महीने तक लगातार ड्यूटी दी है। इन आदेशों के तहत तदर्थ बोनस का भुगतान केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों और सशस्त्र बलों के पात्र कर्मचारियों के लिए भी स्वीकार्य होगा। ये आदेश संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के उन कर्मचारियों पर भी लागू माने जाएंगे, जो परिलब्धियों के संबंध में केन्द्र सरकार की पद्धति का अनुसरण करते हैं। इसके अलावा वे कर्मचारी, किसी अन्य बोनस या अनुमग्रह स्कीम के अंतर्गत नहीं आते हैं। इन आदेशों के अंतर्गत भुगतान के लिए केवल वे कर्मचारी पात्र होंगे, जो 31.03.2024 को सेवा में थे और जिन्होंने वर्ष 2023-24 के दौरान न्यूनतम छह महीने तक लगातार सेवा की है। वर्ष में छह महीने से लेकर पूरे एक वर्ष तक लगातार सेवा की अवधि के लिए पात्र कर्मचारियों को यथा-अनुपात भुगतान किया जाएगा। पात्रता-अवधि की गणना, सेवा के महीनों (महीनों की निकटतम पूर्णांकित संख्या) के रूप में की जाएगी। गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) की मात्रा की गणना औसत परिल्बधियों/गणना की उच्चतम सीमा, इनमें से जो भी कम हो, के आधार पर की होगी। एक दिन के लिए गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) की गणना करने के लिए, एक वर्ष की औसत परिलब्धियों को 30.4 (एक महीने के औसत दिनों की संख्या) से विभाजित किया जाएगा। इसके बाद दिए जाने वाले बोनस के दिनों की संख्या से इसको गुणा किया जाएगा। उदाहरण के लिए, मासिक परिलब्धियों की उच्चतम गणना सीमा को 7000/- रुपए (जहां वास्तविक औसत परिलब्धियां 7000/- रुपए से ज्यादा हैं) मानते हुए, 30 दिनों के लिए गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) 7000 x 30/30.4 + 6907.89/- रुपए (पूर्णाकित 6908/- रुपए) बनेगा। ऐसे दिहाड़ी मजदूर, जिन्होंने 6 कार्य-दिवसीय सप्ताह वाले दफ़्तरों में पिछले तीन अथवा इससे अधिक वर्षों में हर वर्ष कम से कम 240 दिन (पांच कार्य-दिवसीय सप्ताह वाले कार्यालयों के मामले में 3 या इससे अधिक वर्षों में हर वर्ष 206 दिन) कार्य किया है, इस गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) के भुगतान के पात्र होंगे। देय गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) की राशि (1200 रुपए x 30/30.4 अर्थात 1184.21/- रुपए (पूर्णाकित 1184/- रुपए)) होगी। ऐसे मामलों में जहां वास्तविक परिलब्धियां 1200/- रुपए प्रतिमाह से कम हैं, इस राशि की गणना वास्तविक मासिक परिलग्धियों के आधार पर होगी। इन आदेशों के अंतर्गत सभी भुगतान निकटतम रुपए में पूर्णाकित किए जाएंगे।  इस मद में होने वाला व्यय दिनांक 16 दिसंबर, 2022 की व्यय विभाग की अधिसूचना के अनुसार संबंधित शीर्ष के नामे डाला जाएगा। गैर-उत्पादकता संबद्ध बोनस (तदर्थ बोनस) की मद में होने वाला व्यय चालू वर्ष के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों के संस्वीकृत बजट प्रावधान के तहत पूरा किया जाना है। जहां तक भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों का संबंध है, ये आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 148(5) के तहत यथा अधिदेशित भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के परामर्श से जारी किए गए हैं। योग्य कर्मचारी, इन शर्तों को जरुर पढ़ लें वित्त मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, जो कर्मचारी अस्थायी तौर से एडहॉक बेस पर नियुक्त हुए हैं, उन्हें भी ये बोनस मिलेगा, बशर्ते उनकी सेवा के बीच कोई ब्रेक न रहा हो। ऐसे कर्मचारी जो, 31 मार्च 2024 को या उससे पहले सेवा से बाहर हो गए, उन्होंने त्यागपत्र दे दिया हो या सेवानिवृत हुए हों, उसे स्पेशल केस माना जाएगा। इसके तहत वे कर्मी, जो अमान्य तरीके से मेडिकल आधार पर 31 मार्च से पहले रिटायर हो गए या दिवंगत हो गए हैं, लेकिन उन्होंने वित्तीय वर्ष में छह माह तक नियमित ड्यूटी की है, तो उसे एडहॉक बोनस के योग्य माना जाएगा। इसके लिए संबंधित कर्मचारी की नियमित सेवा की निकटवर्ती संख्या को आधार बनाकर ‘प्रो राटा बेसिस’ पर बोनस तय होगा। ये कर्मचारी होंगे बोनस के हकदार इस बोनस के लिए केंद्र सरकार के वे कर्मचारी हकदार होंगे जो 31 मार्च 2024 तक सर्विस में थे और जिन्होंने वर्ष के दौरान कम से कम 6 महीने की निरंतर सेवा दी है. जो कर्मचारी एक वर्ष से कम समय तक सर्विस कर चुके हैं, उन्हें काम किए गए महीनों के आधार पर बोनस मिलेगा. कैसे होगा बोनस का कैलकुलेशन बोनस की राशि की गणना औसत वेतन को 30.4 से विभाजित करके की जाएगी, फिर उसे 30 दिनों से गुणा किया जाएगा. उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की मंथली तनख्वाह 7,000 रुपये है, तो उनका 30 दिनों का नॉन-प्रोडक्टविटी लिंक्ड बोनस लगभग 6,908 रुपये आएगा. जो अस्थायी श्रमिक (Casual laborers) लगातार तीन सालों में हर साल कम से कम 240 दिन काम कर चुके हैं, वे भी इस बोनस के लिए पात्र होंगे. ऐसे श्रमिकों के लिए बोनस 1,200 प्रति माह के आधार पर तय की जाएगी. आर्डर के अनुसार, सभी पेमेंट को निकटतम रुपये में राउंडेड किया जाएगा और खर्चों को संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उनके स्वीकृत बजट के भीतर कवर किया जाएगा. केंद्र सरकार ये कर्मी भी होंगे बोनस के पात्र वे कर्मचारी, जो प्रतिनियुक्ति, विदेश सेवा, केंद्र शासित प्रदेश या किसी पीएसयू में 31 मार्च 2024 को कार्यरत हैं तो उन्हें लेंडिंग डिपार्टमेंट यानी उधार देने वाला विभाग, यह बोनस नहीं देगा। ऐसे केस में उधार लेने वाले संगठन की जिम्मेदारी बनती है कि वह एडहॉक बोनस, पीएलबी, एक्सग्रेसिया और इंसेंटिव स्कीम आदि प्रदान करे, बशर्तें वहां ऐसे प्रावधान चलन में हों। यदि कोई कर्मचारी ‘सी’ या इससे ऊपर के ग्रेड में है और उसे वित्तीय वर्ष के दौरान बीच में ही विदेश सेवा से वापस बुला लिया जाता है, तो इसे लेकर एडहॉक बोनस का नियम बनाया गया है। इसके तहत वित्तीय वर्ष में विदेशी विभाग से यदि उस कर्मी के … Read more

उद्धव ठाकरे अस्पताल में एडमिट, हार्ट की विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी की

नई दिल्ली महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे को अस्पताल में एडमिट कराया गया है। उन्हें मुंबई के रिलायंस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी तबीयत सुबह बिगड़ गई थी, जिसके बाद अस्पताल लाया गया। उनके हार्ट की विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी का फैसला लिया। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे को सुबह 8 बजे ही अस्पताल लाया गया था। उन्हें बेचैनी की शिकायत थी, जिसके बाद चेकअप किया गया तो एंजियोप्लास्टी की जरूरत महसूस हुई। उनके हार्ट में ब्लॉकेज की शिकायत थी। इसी के चलते उनकी आज ही एंजियोप्लास्टी कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार 12 अक्टूबर को दशहरे की रैली के बाद से ही उद्धव ठाकरे असहज महसूस कर रहे थे। उस रैली में उद्धव ठाकरे ने राज्य की महायुति सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला था। बता दें कि 2016 में भी उद्धव ठाकरे को अस्पताल में एडमिट कराया गया था। तब उनके एंजियोग्राफी टेस्ट हुए थे। यही नहीं इससे पहले भी दो बार उद्धव ठाकरे की एंजियोप्लास्टी जुलाई और नवंबर 2012 में हो चुकी है। तब उनके हार्ट की तीन आर्टरिज ब्लॉक थीं। इसी के चलते उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी। करीबी सूत्रों के अनुसार उनका हार्ट करीब 60 फीसदी तक ब्लॉक था।

इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा, नॉर्थ गाजा में 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए

गाजा पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से फिलिस्तीन में इजरायल का हमला जारी है, जिसमें हजारों नागरिकों की मौत हो चुकी है. इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं. Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ गाजा में करीब 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए हैं और इजराइली सेना के निकासी आदेश जारी करने के बावजूद किसी को भी इलाके को छोड़ने की अनुमति नहीं दे रही है. ऐसे में कहानी एक ऐसी फिलिस्तीनी महिला और उसके परिवार की, जिसको जंग के पिछले एक साल में 14 बार विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ा. पीड़ित महिला सबरीन ने Al Jazeera से बात करते हुए कहा, “जंग से पहले मैं एक शानदार जिंदगी गुजार रही थी. एक ऐसी जिंदगी, जिसमें इज्जत थी. अल्लाह के शुक्र से हम खुशहाल थे. मेरे पति एक मछुआरे थे, हमें और कुछ नहीं चाहिए था. मेरी पोती खुश थी, वह अपने स्कूल जाती थी लेकिन जंग ने सब ठप कर दिया.” ‘जिंदा रहने की कोशिश में भटकने को मजबूर…’ इजरायल के पहले हमले में सबरीन को गाजा शहर में बना अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने पहले भी अपने परिवार के साथ नॉर्थ गाजा में शरण ली थी लेकिन आगे साउथ की तरफ जाने के बाद उन्हें जिंदा रहने की कोशिश में बार-बार साउथ और फिर सेंट्रल गाजा को पार करना पड़ा. फिलिस्तीनी नागरिक सबरीन आगे कहती हैं, “मैं आपको विस्थापन के बारे में बताती हूं. आप पर अत्याचार किया जाता है, यह बहुत महंगा है, हम लोगों से लोन लेते हैं ताकि हम एक जगह से निकल कर दूसरी जगह जा सकें. विस्थापन की शुरुआत से लेकर अब तक चुकाने के लिए बहुत सारे लेन हैं और मेरे नाम पर भी कुछ नहीं बचा है. यह इस हद तक पहुंच गया है कि मुझे अपनी बेटी और अपनी नातिन का गोल्ड बेचना पड़ा है. अब जो बचा है, वह है मेरी नातिन का कंगन, उसकी अंगूठी और झुमके हैं.” जब सीजफायर होने की खबर आई, तो उन्होंने घर जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नॉर्थ की ओर लौटने की कोशिश की. ‘हम छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे…’ सबरीन अपना दर्दनाक एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए कहती हैं, “मैंने बच्चे और लड़कियों, अपनी मां और बेटी, बहन और अपनी भतीजी को लिया और हम चल पड़े. हम सेना की चौकियों के पास दो सड़कों पर पहुंचे. मैंने कोई सैनिक नहीं देखा लेकिन फिर सैनिक आ गए, लगभग तीस सैनिक हमें रुकने के लिए कह रहे थे. उन्होंने हमसे पूछा कि हम पहले क्यों नहीं आए, हमसे पहले कुछ लोग अंदर आ गए. मैं दो घंटे बाद वापस लौटी, फिर स्नाइपर्स ने मुझ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. लाइव गोला बारूद. हम अपने छोटे बच्चों, छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे, लेकिन मैं अपने चारों ओर गोलीबारी के बावजूद भी चल रहे थेय एक युवक आया और मुझे खींचकर ले गया.” अन्य लोगों की तरह, सबरीन ने भी गाजा में इजरायल के नरसंहार की वजह से अपने कई रिश्तेदारों को खो दिया है और बार-बार विस्थापन के कारण उन्हें शोक मनाने भी वक्त सही से नहीं मिल सका है. ’23 लाख नगारिक हुए विस्थापित’ सबरीन कहता हैं, “हमारे रिश्तेदारों में से बहुत से शहीद हुए हैं. मेरी बहन का पति, उसका बेटा भी, मेरे चाचा के बेटे और चाची के बेटे सहित कई लोग. हमला होने के बाद हमें अपने बच्चों के साथ निकलना पड़ा. हमने शहीदों को दफना दिया और हम साउथ की तरफ गए.” गाजा के करीब 23 लाख नागरिक कम से कम एक बार जरूर विस्थापित हुए हैं. सबरीन की तरह कई लोगों को इजरायली हमलों की वजह से कई बार विस्थापित होना पड़ा है. गाजा का ज्यादातर इलाका इजरायली सेना के विस्थापन आदेशों का सामना कर रहा है, लोगों का कहना है कि उनके पास भागने के लिए जगह नहीं बची है. सबरीन दर्द बयां करते हुए कहती हैं, “हम उम्मीद करते हैं कि गाजा फिर से पहले की तरह हो जाए. फिर से बनाया जाए, फिर से सुकून और सुरक्षित महसूस करें, दूसरे अरब देशों की तरह. हमारे बच्चे दूसरे देशों के बच्चों की तरह शानदार जिंदगी गुजार सकें. हमें सुरक्षित रहने का अधिकार है, हमें अपने घर लौटने का अधिकार है.  

मानसून की विदाई हो चुकी, लेकिन 15 से 17 अक्टूबर तक होगी मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

नई दिल्ली देश के अधिकांश हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन कुछ स्थानों पर अभी भी बारिश जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 12 घंटों में डिप्रेशन में बदल सकता है। साथ ही, बंगाल की खाड़ी में एक और नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे मौसम में बड़े बदलाव होंगे। प्रमुख जानकारी: तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश: 15 से 17 अक्टूबर तक मूसलाधार बारिश की संभावना। अन्य प्रभावित राज्य: तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, माहे, लक्षदीप, कराईकल, यनम, कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और रायलसीमा में अगले हफ्ते तक बारिश जारी रहेगी। 16 अक्टूबर को भारी बारिश: तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, और रायलसीमा में 16 अक्टूबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान है। गुजरात में भी बारिश: अगले दो दिनों तक गुजरात में मध्यम बारिश हो सकती है, साथ ही कोकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, विदर्भ, और छत्तीसगढ़ में भी बारिश की संभावना है। अगले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश से मौसम प्रभावित हो सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

हरियाणा में भाजपा ने गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी

चंडीगढ़ हरियाणा में बड़ी जीत के साथ भाजपा ने नई सरकार के गठन की तैयारी तेज कर दी है। इससे पहले भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा ने अमित शाह और मोहन यादव को हरियाणा में केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के दौरान भी मोहन यादव प्रचार के लिए उतरे थे। भाजपा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि पार्टी के संसदीय बोर्ड ने हरियाणा में नई सरकार के गठन और विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एमपी के सीएम मोहन यादव को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्ति किया है। यह ऐलान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा किया गया। हरियाणा में दशहरे के बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है। राज्य के एक भाजपा नेता ने कहा कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 12 अक्टूबर के दशहरा उत्सव के बाद आयोजित किये जाने की संभावना है। वहीं, भाजपा ने चुनावों के दौरान संकेत ही दिया था कि मार्च में मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल खट्टर की जगह लेने वाले और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले नायब सिंह सैनी अगर जीतते हैं तो सीएम पद के लिए वह पार्टी की पसंद होंगे। हरियाणा में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 14 मंत्री हो सकते हैं। इससे पहले भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 48 सीट हासिल की। भाजपा ने कांग्रेस से 11 अधिक सीटें जीती। इस चुनाव में जजपा और आप का सफाया हो गया और इनेलो सिर्फ दो सीट जीतने में सफल रही। हालांकि सैनी कैबिनेट के 10 में से आठ मंत्रियों को हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन महिपाल ढांडा और मूलचंद शर्मा पानीपत ग्रामीण और बल्लभगढ़ सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहे।

बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में टेस्ट के रिजल्ट के बाद कश्यप को कोर्ट में पेश किया गया आरोपी, जाना पड़ा जेल

नई दिल्ली एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में एक आरोपी धर्मराज कश्यप का मुंबई पुलिस ने ओसिफिकेशन टेस्ट करवाया। इसके बाद पुष्टि की गई कि वह नाबालिग नही है। किसी की आयु का पता लगाने के लिए ओसिफिकेशन टेस्ट करवाया जाता है। बोन फ्यूजन के आधार पर पता लगाया जाता है कि शख्स की उम्र कितनी है। टेस्ट के रिजल्ट के बाद कश्यप को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 21 अक्टूबर तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दरअसल कश्यप के वकील ने दावा किया था कि धर्मराज कश्यप अभी नाबालिग है। इसके बाद मुंबई की अदालत ने ओसिफिकेशन टेस्ट करवाने का आदेश दे दिया। इससे पहले बाबा सिद्दीकी मर्डर केस के एक अन्य आरोपी गुरमैल सिंह को भी 21 अक्टूबर तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक शिवकुमार नाम का आरोपी अब भी फरार है। रविवार को पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी की पहचान प्रवीण लोनकर के तौर पर हुई है। उसकी उम्र करीब 28 साल है। वह हत्या की साजिश में शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि उसने ही धर्मराज कश्यप और शिवकुमार गौतम को हत्या के लिए चुना था। एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की उनके विधायक बेटे के कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके सीने में दो गोलियां लगी थीं। इसके बाद उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रविवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई जिसमें बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। एकनाथ शिंदे ने क हा, बाबा सिद्दीकी की हत्या दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। मुंबई पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी जो भी लोग साजिश में शामिल हैं उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके अलावा जिन्हें भी धमकी मिल रही है उनकी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

इंडिया के विमान में बम की धमकी, दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग कराई गई, तलाशी जारी

नई दिल्ली मुंबई से न्यूयॉर्क जाने वाले एयर इंडिया के विमान में सोमवार को बम की धमकी के चलते दिल्ली की ओर डायवर्ट कर दिया गया। विमान की दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग कराई गई है। सभी यात्री फिलहाल सुरक्षित हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां विमान की चेकिंग कर रही हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, मुंबई से न्यूयॉर्क जा रहे एयर इंडिया के एक विमान को फ्लाइट में बम की धमकी के मद्देनजर दिल्ली डायवर्ट कर दिया गया। विमान फिलहाल आईजीआई एयरपोर्ट पर खड़ा है और उसमें सवार यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने सभी यात्रियों से किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी को फैलाने से रोकने में सहयोग की अपील की हैं।

गैंग में 700 शूटर, 11 राज्यों में आतंक, दाऊद इब्राहिम के नक्शे कदम पर लॉरेंस बिश्नोई: NIA

नई दिल्ली एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ले ली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक इस गैंग े पास इस समय 700 शूटर हैं। बिश्नोई गैंग भी दाऊद इब्राहिम के नक्शे कदम पर चल रहा है। एनआईए ने कम से कम 16 गैंगस्टरों के खिलाफ यूएपीए के तहत चार्जशीट फाइल की है। इसमें लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार भी शामिल हैं। इस चार्जशीट में दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी के रास्ते पर ही आगे बढ़ रहा है। एनआईए की चार्जशीट में बताया गया कि लॉरेंस बिश्नोई और उसका टेरर सिंडिकेट नायकीय अंदाज में बढ़ा है। यह उसी तरह आगे बढ़ रहा है जैसे कि 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम का गैंग तेजी से फैल रहा था। दाऊद इब्राहिम ने अपना नेटवर्क ड्रग्स तस्करी से बढ़ाना शुरू किया था। इसके बाद उगाही का काम शुरू हो गया। बाद में इसे डी कंपनी नाम दे दिया गया। यह गैंग पाकिस्तान के आतंकियों के साथ भी जुड़ गया। इसी तरह बिश्नोई गैंग ने भी छोटे-मोटे अपराध शुरू किए थे लेकिन अब उसका बड़ा गैंग है। बिश्नोई गैंग में 700 शूटर एनआईए की चार्जशीट में बताया गया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बरार चलाता है जो कि कनाडा पुलिस और इंडियन एजेंसियों की लिस्ट में वॉन्टेड है। इसके अलावा बिश्नोई गैंग में 700 शूटर हैं जिनमें से 300 पंजाब के हैं। गोल्डी बरार और लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीरें फेसबुक, इन्स्टाग्राम और यूट्यूब पर शेयर की जाती हैं। बिश्नोई को कोर्ट ले जाने की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके युवाओं को गैंग में शामिल करने का प्रयास किया जाता है। 2021-21 के दौरान इस गैंग ने उगाही के जरिए करोड़ों रुपये इकट्ठा किए और इसे हवाला चैनल्स से विदेश भेज दिया। चार्जशीट में बताया गया के बिश्नोई गैंग ने हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के अन्य आपराधिक गैंगों के साथ भी गठजोड़ कर रखा है। अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आतंक पूरे उत्तर भारत में है जिसमें पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड शामिल हैं। विदेश भेजने का सपना दिखाकर युवाओं को लुभाता है गैंग आरोप है कि बिश्नोई गैंग युवाओं क विदेश भेजने का लालच देता है। कनाडा जैसे देश की नागरिकता दिलवाने की लालच में गैंग उन्हें अपने लिए इस्तेमाल करने लगता है। एनआईए के मुताबिक खालिस्तानी आतंकवादी हरविंदर सिंह रिंडा पाकिस्तान में बिश्नोई गैंग के शूटर्स का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए करता है।

उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे, नई सरकार के गठन की तैयारी तेज

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नयी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की। तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद जून 2017 से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन जारी हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 और 239ए के साथ पठित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 का आदेश, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 54 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति से तुरंत पहले निरस्त किया जाता है।’’ हाल में संपन्न हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्हें गठबंधन का नेता चुना गया है। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू कश्मीर और लद्दाख – के रूप में विभाजित किए जाने के बाद 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को संसद ने पांच अगस्त 2019 को पारित किया था। पूर्ववर्ती राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को भी उसी दिन निरस्त कर दिया गया था। 31 अक्टूबर 2019 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद जून 2017 से तत्कालीन राज्य में राष्ट्रपति शासन जारी था। उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल को खतरे से बाहर निकालें, नेतन्याहू ने एंटोनियो गुटेरेस से तत्काल अनुरोध किया

इजरायल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से तत्काल अनुरोध किया है कि वे लेबनान के दक्षिणी इलाके में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) को खतरे से बाहर निकालें. यह बयान उन्होंने हाल ही में एक वीडियो बयान में दिया. नेतन्याहू ने कहा, “मैं सीधे यूएन महासचिव से अपील करता हूँ. हिजबुल्लाह के मजबूत ठिकानों और लड़ाई वाले इलाकों से UNIFIL को हटाना अब जरूरी है.” नेतन्याहू ने इस पैगाम को अंग्रेजी में भी दोहराया, “महाशय महासचिव, UNIFIL बलों को खतरे से बाहर निकालिए, यह तुरंत किया जाना चाहिए.” आईडीएफ की गोलाबारी में दो शांति रक्षक घायल हाल ही में दो घटनाओं में, इजरायली रक्षा बलों (IDF) की गोलाबारी में UNIFIL के दो शांति रक्षक घायल हो गए थे. शुक्रवार, 11 अक्टूबर को एक इजरायली हमले में UNIFIL के मुख्य आधार नाकौरा के पास स्थित एक पर्यवेक्षक टॉवर के पास दो शांति रक्षक घायल हो गए. इसके अलावा, इजरायल के बुलडोजर ने यूएन की स्थिति के पास बैरियर को गिरा दिया था. नेतन्याहू ने कहा कि शांति रक्षकों को उनके ठिकाने पर रखना हिजबुल्लाह के लिए मानव ढाल का काम करता है. उन्होंने बताया कि इसके कारण शांति रक्षकों और इजरायली सैनिकों दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है. अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अमेरिका और यूरोपीय देशों ने इजरायल से अपील की है कि शांति रक्षकों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, हालांकि नेतन्याहू ने कहा कि यूरोपीय नेता गलत जगह पर दबाव डाल रहे हैं. नेतन्याहू ने कहा, “उनका ध्यान हिजबुल्लाह पर होना चाहिए, जो शांति रक्षकों का इस्तेमाल मानव ढाल के रूप में करता है.” आयरलैंड के रक्षा बलों के प्रमुख जनरल शॉन क्लांसी ने शुक्रवार को कहा कि पर्यवेक्षक टॉवर पर टैंक की गोलाबारी जानबूझकर की गई थी. उन्होंने कहा, “यह एक बेहद छोटे लक्ष्य पर प्रत्यक्ष गोलाबारी थी, जिसे संयोग नहीं माना जा सकता.” गुटेरेस के साथ इजरायल का तनाव बढ़ा इजरायल और गुटेरेस के बीच तनाव 7 अक्टूबर के बाद से और बढ़ गया है. इजरायल के विदेश मंत्री इसराइल कट्ज ने हाल ही में गुटेरेस को “प्रति-अवांछनीय व्यक्ति” घोषित किया और उन्हें इजरायल में प्रवेश करने से रोकने का ऐलान किया. एक पोल के अनुसार, 87% इजरायली जनता इस फैसले का समर्थन करती है.

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