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फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम, जानें किसी कैदी को कब मिलती है पैरोल?

रोहतक हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं और वोटिंग से ठीक पांच दिन पहले रेप और हत्या जैसे केस में सजायाफ्ता गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आने वाला है. चुनाव आयोग की शर्तों पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को पैरोल मिल गई है. गुरमीत जेल से बाहर आने के बाद हरियाणा में नहीं रहेगा. वो किसी राजनीतिक गतिविधि का भी हिस्सा नहीं बनेगा. सोशल मीडिया पर प्रचार नहीं कर सकेगा. गुरमीत ने 20 दिन की इमरजेंसी पैरोल मांगी थी. गुरमीत ने जेल विभाग को दिए आवेदन में कहा था कि वो यूपी के बरनावा आश्रम में रहेगा. राम रहीम को 4 साल में 11 बार पैरोल या फरलो मिली है. दिलचस्प बात यह है कि इनमें 8 बार ठीक चुनाव से पहले रियायत दी गई है. गुरमीत रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद है. उसने 2 सितंबर को 21 दिन की फरलो काटकर जेल में सरेंडर किया था. राम रहीम के मामले में कहा जाने लगा है कि इसे सजा नहीं, पैरोल कहिए. एक तरफ रेप और कत्ल जैसा संगीन जुर्म किया है और दूसरी तरफ गुनहगार गुरमीत पर ‘सरकारी आजादी’ रेवड़ी की तरह बरस रही है. पिछले दो साल में ही 253 की पैरोल या फरलो की मंजूरी मिल गई है. एक दिन पहले 20 दिन की पैरोल को जोड़ा जाए तो यह संख्या 273 दिन हो जाएगी. यानी इस पैरोल के बाद गुरमीत का 9 महीने 12 दिन जेल से बाहर बिताने का वक्त हो जाएगा. जबकि 2020 से 2022 तक गुरमीत को सिर्फ एक दिन 12 घंटे की ही पैरोल मंजूर की गई थी. गुरमीत राम रहीम की पैरोल की शर्तों में यह भी शामिल है कि वह चुनाव तक हरियाणा में नहीं रह सकेगा। इसके अलावा किसी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा भी लेने की परमिशन नहीं होगी। यही नहीं वह सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को संबोधित नहीं कर सकेगा। यदि उसकी ओर से इन शर्तों का किसी भी तरह से उल्लंघन किया गया तो पैरोल को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। यह 11वां मौका है, जब गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी जाएगी। उसे पैरोल मिलने पर सवाल उठते रहे हैं कि आखिर क्यों उसे बार-बार जेल से बाहर रहने की परमिशन दी जा रही है। राम रहीम को चुनावी सीजन में पैरोल मिलने के मायने निकाले जा रहे हैं। राम रहीम का सिरसा, हिसार, फतेहाबाद समेत हरियाणा के कई जिलों में अच्छा प्रभाव है। उसके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। इसी के चलते राजनीतिक दल अकसर उसे साथ लेने की कोशिश करते हैं। हरियाणा में 5 अक्टूबर को मतदान होना और 8 तारीख को नतीजे आने हैं। पैरोल मिलने का असर उसके समर्थकों की राय पर भी दिख सकता है। उसे अब तक एक दर्जन से ज्यादा बार पैरोल मिल चुकी है।

Indian Air Force के नए प्रमुख बने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, संभाला कार्यभार

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का बेहद खास वीडियो सामने आया है। इसमें वायुसेना प्रमुख अपनी मां को सैल्यूट करते हुए और पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए नजर आ रहे हैं। ये खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब वायुसेना प्रमुख बुधवार सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देशवासियों के सामने खास मिसाल पेश की। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अपनी मां पुष्पंत कौर का आशीर्वाद लेते नजर आए। अमर प्रीत सिंह का दिल छू लेने वाला वीडियो इंडियन एयरफोर्स के नए चीफ का पदभार संभालने के बाद अमर प्रीत सिंह ने जिस तरह से अपनी मां का सम्मान किया, वो पल बेहद दिल छू लेने वाला था। वीडियो में नजर आ रहा कि उनकी मां व्हीलचेयर पर बैठी थीं। इसी दौरान वायुसेना प्रमुख एपी सिंह नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे। यहां उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी दौरान उन्होंने अपनी मां को सबसे पहले सैल्यूट किया फिर उनके पैर छुए। उन्हें बेहद प्यार से गले लगाया। पहले किया सैल्यूट फिर मां के छुए पैर मां के प्रति जिस तरह से भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने प्यार और सम्मान जताया, वो हर किसी के लिए मिसाल है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सोमवार को वायुसेना चीफ का कार्यभार संभाला है। उन्होंने वीआर चौधरी की जगह ली है। एयर चीफ एपी सिंह को 5 हजार घंटे से ज्यादा समय तक विमान उड़ाने का अनुभव है और वह लड़ाकू विमान के बेहद ट्रेंड पायलट हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह अपने पिछले कार्यभार में वायु सेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे। वीआर चौधरी की जगह संभाली वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी तीन साल तक वायु सेना की कमान संभालने के बाद रिटायर हुए। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने दिसंबर 1984 में भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमान पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने लगभग 40 वर्षों की अपनी लंबी सेवा में विभिन्न कमान, स्टाफ, निर्देशात्मक और विदेशी नियुक्तियों में काम किया। इन पदों की भी थी जिम्मेदारी वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) भी थे और उन्हें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, तेजस का उड़ान परीक्षण करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वायु रक्षा कमांडर और पूर्वी वायु कमान में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी के महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियां भी संभाली हैं। वायु मुख्यालय जाने से पहले वह केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ भी थे। एयर मार्शल एपी सिंह ने दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वायु रक्षा कमांडर और पूर्वी वायु कमान में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है। केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी उन्होंने उत्कृष्ट सेवा दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता के बल पर भारतीय वायुसेना को लगातार मजबूती मिली है।

एल.वी. प्रसाद नेत्र अस्पताल के डॉ. निलय रेड्डी का एक्सिडेंट, चार मंजिला जितना ऊंचे फ्लाइओवर से नीचे गिरी कार

हैदराबाद हैदराबाद आउटर रिंग रोड (ओआरआर) में  सुबह हुई एक सड़क दुर्घटना में एलवी प्रसाद आई हॉस्पिटल में काम करने वाले एक डॉक्टर की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, 29 वर्षीय डॉ. निलय रेड्डी की मौत तब हुई जब उनकी कार सड़क के डिवाइडर से टकरा गई और सड़क से नीचे गिर गई। वह इस प्रतिष्ठित मेडिकल फैसिलिटी में कॉर्निया और एंटीरियर सेगमेंट फेलो थे। हैदराबाद स्थित मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एलवी प्रसाद आई हॉस्पिटल का कर्मचारी जुबली हिल्स स्थित अपने घर से राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (आरजीआईए) जा रहा था, तभी यह सड़क दुर्घटना हुई। हालांकि, इस रिपोर्ट को लिखने के समय दुर्घटना के कारण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उसकी कार बहुत तेज़ गति से चल रही थी। पुलिस ने यह भी पुष्टि की है कि पीड़ित शराब के नशे में नहीं था। रिपोर्ट में बताया कि दुर्घटना के समय डॉ. निलय रेड्डी की कार लगभग 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही थी। सड़क पर कार की अनुमत गति 120 किमी प्रति घंटा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुबह करीब 5:00 बजे उनकी सेडान कार ORR के एग्जिट 17 के पास सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। पीड़ित का शव दुर्घटनास्थल के पास झाड़ियों में मिला। राजेंद्रनगर पुलिस ने दुर्घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। मृतक डॉक्टर के शव को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया जनरल अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कार को दुर्घटनास्थल से हटा दिया गया है। कर्नाटक के उडुपी में एक असंबंधित घटनाक्रम में, सोमवार को पजेगुड्डे में राज्य राजमार्ग पर एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, जब उनका दोपहिया वाहन कथित तौर पर एक मिनी ट्रक से टकरा गया। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना तब हुई जब परिवार सोमवार सुबह करकला से वेनूर जा रहा था।  

खुद पाकिस्तानी, बीवी बांग्लादेशी और ठिकाना बेंगलुरु, 10 साल बाद ‘शर्मा’ सरनेम की पहचान

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में चार पाकिस्तानी नागरिकों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए चार लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि चारों पाकिस्तानी नागरिकों ने फर्जी पहचान बताकर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया था। चारों दस साल से यहां धर्म प्रचार में शामिल हो गए थे। सभी आरोपियों ने खुद को हिंदू बताया था। कथित तौर पर यह लोग 2014 में दिल्ली आए थे और बाद में 2018 में बेंगलुरु चले गए। रविवार को बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में छापेमारी के बाद पकड़ा गया। शर्मा सरनेम की पहचान पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान पाकिस्तान के कराची निवासी राशिद अली सिद्दीकी उर्फ शंकर शर्मा, पाकिस्तान के लाहौर निवासी आयशा उर्फ आशा रानी, लाहौर निवासी हनीफ मोहम्मद उर्फ रामबाबू शर्मा और लाहौर निवासी रुबीना उर्फ रानी शर्मा के रूप में हुई है। बेंगलुरु पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां कोर्ट ने उन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश शुरू कर दी है। आईबी की टीम भी पहुंची पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने जिगनी थाने का दौरा किया और आरोपियों के बारे में जानकारी हासिल की। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। साथ ही उन पर पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12(1)(बी), 12,1ए (बी), 12(2) के तहत भी मामला दर्ज किया है। दरअसल 29 सितंबर को बेंगलुरु के जिगनी पुलिस को राजापुरा गांव में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों के पास हिंदू नाम से पासपोर्ट इससे पहले चेन्नई पुलिस ने उनके दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया था। आरोपी राशिद अली सिद्दीकी उर्फ शंकर शर्मा और उसके परिवार के सदस्य घर खाली कर रहे थे। पुलिस पूछताछ के दौरान राशिद ने दावा किया कि वह नई दिल्ली का रहने वाला है और पिछले छह साल से यहां रह रहा है। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो पता चला कि सभी आरोपियों के पास हिंदू नाम से पासपोर्ट भी हैं। हालांकि, पुलिस को घर की दीवार पर ‘मेहंदी फाउंडेशन इंटरनेशनल- जश्न-ए-यूनुस’ लिखा मिला है। घर से मुस्लिम धार्मिक नेता की तस्वीर मिली इसके अलावा पुलिस को उनके घर से एक मुस्लिम धार्मिक नेता की तस्वीर भी मिली है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे पाकिस्तान से हैं और चेन्नई में गिरफ्तार किए गए लोग उनके रिश्तेदार हैं। आरोपी राशिद अली सिद्दीकी ने बताया कि वह कराची के पास लियाकताबाद का रहने वाला है, और अपनी पत्नी और उसके माता-पिता के साथ हिंदू बनकर रह रहा है। मेहंदी फाउंडेशन से मिलते थे पैसे राशिद ने यह भी बताया कि वह साल 2011 में आयशा से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मिला था और शादी के समय उसका परिवार बांग्लादेश में रहता था। उसने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान में धार्मिक नेताओं से पीड़ित होने के बाद वह अपनी पत्नी के साथ बांग्लादेश रहने के लिए चला गया था। आरोपी को अपने खर्च के लिए मेहंदी फाउंडेशन से पैसे मिलते थे। फाउंडेशन के सदस्य भारत सहित पूरी दुनिया से ताल्लुक रखते हैं।

SEX के बाद लड़की के प्राइवेट पार्ट से बहा खून, इंटरनेट पर इलाज ढूंढता रहा प्रेमी, मौत

सूरत गुजरात के सूरत में एक लड़की की दर्द से तड़पकर मौत हो गई। युवती का खून निकलता रहा और उसे अस्पताल ले जाने के बजाय बॉयफ्रेंड इंटरनेट पर इलाज ढूंढता रहा। जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में 26 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया है। वहीं मृतका एक नर्सिंग छात्रा थी। 23 सितंबर को गुजरात के नवसारी जिले के एक होटल में यौन संबंध बनाने के बाद युवती को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी। यह देखने के बावजूद उसने ऑनलाइन इलाज ढूंढने में घंटों बर्बाद कर दिए। जांचकर्ताओं ने बताया कि युवती को अस्पताल ले जाने या मेडिकल हेल्प लेने के बजाय, आरोपी ने अपने फोन के इंटरनेट पर ‘इंटरकोर्स के दौरान ब्लीडिंग रोकने के लिए क्या करें’ के बारे में सर्च किया। पुलिस सूत्रों ने टीओआई को पुष्टि की कि उसने ब्लीडिंग होते देखने के बावजूद फिर से सेक्स करने की कोशिश की। जलालपुर पुलिस ने बॉयफ्रेंड के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया है। नवसारी के एसपी सुशील अग्रवाल ने कहा, ‘फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की वजह से युवती की मौत हो गई। 108 या मेडिकल हेल्प को कॉल करने के बजाय, उसने अपने दोस्तों से संपर्क किया और उनका इंतजार करने के बाद उसे एक निजी वाहन में ट्रांसफर कर दिया। अगर उसे IV फ्लूड, ब्लड और दवाओं के साथ इमरजेंसी मेडिकल हेल्प मिली होती, तो उसकी जान बच जाती।’ ब्लीडिंग के बावजूद किया सेक्स पुलिस सूत्रों ने टीओआई को बताया कि युवती को काफी ब्लीडिंग होने के बावजूद आरेापी सेक्स करता रहा। नवसारी एसपी ने बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में युवती की मौत का कारण ज्यादा ब्लीडिंग बताया गया है। उन्होंने बताया कि युवक ने 108 या मेडिकल हेल्प लेने के बजाय उसने अपने दोस्तों को फोन किया और युवती को एक निजी वाहन में ट्रांसफर कर दिया। बाद में अस्पताल में युवती को मृत घोषित कर दिया गया। तीन सल पहले हुई थी दोस्ती पूछताछ में पता चला है कि आरोपी पहली बार तीन साल पहले युवती से मिला था। इसके बाद दोनों दो साल तक संपर्क में नहीं था। करीब सात महीने पहले दोनों एक बार फिर से सोशल मीडिया के जरिए जुड़े और 23 सितंबर को उन्होंने प्राइवेट टाइम बिताने का फैसला किया। दोनों ने होटल में करीब 60 से 90 मिनट बिताए। पुलिस ने बताया कि होटल से निकलने से पहले आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए खून के धब्बे भी साफ कर दिए। पुलिस ने आरोपी को 4 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि युवती की मौत प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोटों और उसके कारण बहुत ज्यादा खून बहने के कारण हुई, जिसके परिणामस्वरूप हेमरैजिक (बहुत ज्यादा खून निकलने) शॉक हुआ। एफआईआर के अनुसार, महिला नवसारी में नर्सिंग कोर्स के फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। वह पहली बार आरोपी से तीन साल पहले मिली थी, लेकिन वे दो साल से अधिक समय से संपर्क में नहीं थे। वे करीब सात महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए दोबारा जुड़े। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘सात महीने तक रिलेशनशिप में रहने के बाद, उन्होंने 23 सितंबर को कुछ प्राइवेट टाइम बिताने का फैसला लिया और होटल में ठहरे। यह जानने के बाद भी कि उसके प्राइवेट पार्ट से खून निकल रहा है, आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। जब स्थिति बिगड़ गई, तो उसने होटल में 60 से 90 मिनट बिताए। अस्पताल ने दोपहर 2.15 बजे उसे मृत घोषित कर दिया। होटल छोड़ने से पहले, उसने सबूत मिटाने के लिए खून के धब्बे साफ किए।’ स्थानीय अदालत ने आरोपी को 4 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गाजा पट्टी में लोग अमानवीय हालात में जिंदगी जीने को मजबूर हैं

गाजा  संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गाजा पट्टी में लोग अमानवीय हालात में जिंदगी जीने को मजबूर हैं। नियर ईस्ट में फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) ने एक्स पर लिखा, “गाजा में स्वच्छता और रहने की स्थिति अमानवीय है।” यूएनआरडब्ल्यूए के मुताबिक, “गाजा के मध्य क्षेत्रों में कचरे के पहाड़ जमा हो रहे हैं, सीवेज का पानी सड़कों पर बह रहा है, परिवार कचरे के ढेर के पास रहने को मजबूर हैं।’ यूएन एजेंसी ने तत्काल युद्ध विराम की अपील की है। बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को फिलिस्तीनी आतंकवादी ग्रुप हमास ने इजरायल में बड़ा हमला किया था। इसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और करीब 250 का अपहरण किया गया था। इसके बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और गाजा पट्टी में सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। इजरायली हमलों में गाजा में बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ है। अलजजीरा की सोमवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर से अब तक गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 41,595 लोग मारे गए हैं और 96,251 घायल हुए हैं। गाजा में इजरायली का मिलिट्री ऑपरेशन जारी है। इस बीच पिछले कुछ दिनों से यहूदी राष्ट्र, लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर रहा है। इजरायली सेना के निशाने पर लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के हमलों में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह भी मारा गया है। इसके अलावा संगठन के कई सीनियर कमांडरों की भी मौत हो चुकी है। लेबनान में इजरायल के हवाई हमले जारी हैं। राजधानी बेरूत में एक इजरायली एयर स्ट्राइक में पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन के तीन सदस्य मारे गए। यह हमला बेरूत के अल कोला क्षेत्र में एक रेजिडेंशियल बिल्डिंग पर हुआ। लेबनानी राजधानी पर यह पहला हमला है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने अल-जदीद स्थानीय टीवी चैनल के हवाले से बताया कि इससे पहले के हमले बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर केंद्रित थे। घनी आबादी वाले अल कोला इलाके में इजरायली हवाई हमलों से बचने के लिए विस्थापित लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है।    

अत्याधुनिक तकनीक के साथ हिंदी के मेल ने कारोबार के क्षेत्र में भारत में 57.2 करोड़ और विश्व में 50 करोड़ हिंदी भाषियों के लिए संभावनाओं के द्वार खोले- सिंगापुर

सिंगापुर  सिंगापुर के एक शीर्ष कारोबारी नेता ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका के साथ हिंदी का महत्व भी बढ़ा है और अत्याधुनिक तकनीक के साथ हिंदी के मेल ने कारोबार के क्षेत्र में भारत में 57.2 करोड़ और विश्व में 50 करोड़ हिंदी भाषियों के लिए संभावनाओं के द्वार खोले हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें पहले अछूते रहे विशाल बाजारों में प्रवेश करने का अवसर मिलता है। ‘सिंगापुर इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ के अध्यक्ष नील पारेख ने कहा, ‘‘हम डिजिटलीकरण की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं, जहां संस्कृति और बाजारों के बीच सीमाएं तेजी से धुंधली होती जा रही हैं और भाषा लोगों, विचारों एवं अवसरों को जोड़ने वाले अहम सेतु के रूप में उभरी है।’’ सप्ताहांत में आयोजित ‘‘वैश्विक हिंदी उत्कृष्टता शिखर सम्मेलन – 2024’’ की थीम ‘‘नवाचार के युग में हिंदी की उत्कृष्टता’’ थी, जिसका आयोजन सिंगापुर स्थित ‘ग्लोबल हिंदी फाउंडेशन’ ने किया था। पारेख ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से उभरते भारत में काम करने के लिए हिंदी भाषा के ज्ञान के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। पारेख सिंगापुर में संसद के मनोनीत सदस्य भी हैं। निवेश-केंद्रित उद्यमी पारेख ने कहा, ‘‘हिंदी सिर्फ संचार की भाषा नहीं है बल्कि यह गहरी सांस्कृतिक समझ के लिए एक सेतु है। इससे हमें भारतीय बाजार में प्रवेश का मौका मिलता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की इच्छा रखने वाले निगमों और एसएमई (लघु एवं मध्यम उद्यमों) के लिए उत्कृष्ट संभावनाएं प्रदान करता है।’’ उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसे वैश्विक स्तर पर 50 करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं। भारत में 57.2 करोड़ से अधिक लोग सिर्फ हिंदी बोलते हैं। उन्नत प्रौद्योगिकियों के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भी भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने में एक शक्तिशाली उपकरण बन गई है और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) और मशीन लर्निंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाया जा रहा है। सिंगापुर स्थित वित्तीय सलाहकार मंदार पाध्ये ने भाषाओं विशेषकर हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रयासों का उल्लेख किया, जो देश के अधिकांश स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली भाषाओं में से एक है। पाध्ये ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूरी है तथा इसके बाद जिन दो भाषाओं का ज्ञान आपको होना चाहिए, वे हैं हिंदी और चीनी (मंदारिन), क्योंकि अगली पीढ़ी के नेता ऐसी जगहों से आ रहे हैं जहां ये भाषाएं बोली जाती हैं।’’ पाध्ये की हालिया पुस्तक ‘द रिजिलिएंट इन्वेस्टर’ में मानव-से-मानव संबंधों पर प्रकाश डाला गया है जो निरंतर विकसित होते वित्तीय परिदृश्य में व्यावसायिक विकास और व्यक्तिगत विकास के बीच विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी एक अहम भाषा होगी क्योंकि कई कारोबारी नेता भारतीय समुदाय से आते हैं और इनमें से कई की मातृभाषा हिंदी है। निवेश सलाहकार ने कहा कि इसलिए भारत में मौजूद विदेश कार्यकारियों के लिए हिंदी का बेहतर ज्ञान जरूरी हो जाता है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश अहम भूमिका निभा रहा है। करीब 300 प्रतिभागियों के साथ हिंदी पर अपने विचार साझा करने के लिए सिंगापुर पहुंचीं इंदौर में ‘प्री-एग्जामिनेशन ट्रेनिंग सेंटर’ की प्राचार्य अलका भार्गव ने कहा कि उनका मानना है कि वैश्विक मंच पर हिंदी को और अधिक बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंदी को मुख्य भाषा के रूप में प्रचारित करने के लिए शिक्षण कार्यक्रमों का आह्वान किया।  

ट्रम्प ने चुनावी सभा में की अप्रवासियों की निंदा, महिला अपराध पर सख्त दिखे ट्रंप

राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप नहीं जीते तो यह अमेरिका का आखिरी चुनाव: एलन मस्क मस्क बोले अगर ट्रंप नहीं जीते तो यह अमेरिका का आखिरी चुनाव होगा और इसके बाद देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा ट्रम्प ने चुनावी सभा में की अप्रवासियों की निंदा, महिला अपराध पर सख्त दिखे ट्रंप वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी गरमाने लगी है। खास बात यह है कि अब अमेरिकी सियासत में भारत की तरह चुनावी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं। टेस्ला के मालिक एलन मस्क खुलकर डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन में हैं। उन्होंने दावा किया है कि अगर ट्रंप नहीं जीते तो यह अमेरिका का आखिरी चुनाव होगा और इसके बाद देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। सोशल मीडिया एक्स पर एक यूजर को जवाब देते हुए मस्क ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप को सत्ता में लाना ही लोकतंत्र को बचाने का एकमात्र तरीका है। मस्क ने आरोप लगाया कि जो बाइडेन की सरकार अवैध प्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता देकर स्विंग स्टेट्स में चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। मस्क के मुताबिक अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो अमेरिका एक दलीय राज्य बन जाएगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। मस्क ने बाइडेन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि शरण चाहने वालों को स्विंग स्टेट्स जैसे पेन्सिलवेनिया, ओहायो, विस्कॉन्सिन और एरिजोना में भेजा जा रहा है। यह हर चुनाव जीतने की एक निश्चित रणनीति है, जिससे अमेरिका एक पार्टी के नियंत्रण में आ जाएगा और लोकतंत्र का अंत हो जाएगा। एलन मस्क ने इसके साथ ही 1986 में कैलिफोर्निया के आम माफी का जिक्र करते हुए कहा कि कैसे उस समय भी बड़े पैमाने पर प्रवासियों को वैध मतदाता बनाकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की थी। मस्क ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो अमेरिका की हर जगह स्थिति वैसी ही हो जाएगी जैसी सैन फ्रांसिस्को में है, जो अत्यधिक समाजवादी नीतियों के लिए जाना जाता है। मस्क ट्रंप के मुखर समर्थक रहे हैं और इससे पहले भी ट्रंप के समर्थन में अपनी राय दे चुके हैं। ट्रम्प ने चुनावी सभा में की अप्रवासियों की निंदा, महिला अपराध पर सख्त दिखे ट्रंप अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध रूप से घुसपैठ करने वाले और आपराधिक प्रवृत्ति वाले अप्रवासियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने ऐसे अप्रवासियों के खिलाफ कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया है और खासतौर पर उन लोगों की कड़ी आलोचना की है जो महिलाओं के साथ हुए अपराधों में शामिल थे। ट्रंप ने इसके साथ ही डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस के खिलाफ भी निजी टिप्पणियां की है। चुनावी राज्य विस्कॉन्सिन में एक जनसभा में ट्रंप ने कमला हैरिस को मानसिक रूप से विकलांग और अस्थिर कहा है। हैरिस ने शुक्रवार को अपने 2024 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान पहली बार अमेरिका-मेक्सिको सीमा का दौरा किया था। ट्रंप के भाषण अवैध प्रवासियों पर केंद्रित था। उन्होंने हिंसक अपराध करने वाले प्रवासियों को राक्षस, पत्थर दिल हत्यारे और जानवर कहा। ट्रंप और हैरिस के बीच पांच नवंबर के चुनाव से पहले कांटे की टक्कर देखी जा रही है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक वोटर्स के लिए इमिग्रेशन और साउथ बॉर्डर कई बड़े मुद्दों में से एक है। ट्रम्प ने हैरिस और डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडन पर अवैध प्रवासियों को अमेरिका में एंट्री की परमिशन देने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रवासी अमेरिकी नागरिकों के साथ दुष्कर्म उन्हें लूटने, चोरी करने और उनकी हत्या करने की मंशा रखते हैं। ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि यह एक अंधकारमय भाषण है। ट्रंप का यह भाषण विस्कॉन्सिन के छोटे शहर प्रेयरी डू चीएन में हुआ, जहां सितंबर में एक वेनेजुएलाई व्यक्ति को अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने और एक महिला के साथ यौन शोषण और उसकी बेटी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाइडन प्रशासन के दौरान करीब 70 लाख प्रवासियों को अमेरिका-मेक्सिको सीमा पार करते समय गिरफ्तार किया गया है, जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। इसके कारण ट्रंप और अन्य रिपब्लिकन नेताओं ने हैरिस और बाइडन की आलोचना की है।    

देश-दुनिया को खूब लुभा रही देवभूमि की प्राकृतिक सौंदर्य, हिल-झील और हिमालय

देहरादून उत्तराखंड में मानसून का कहर थमा और मौसम का रुख बदला तो हरिद्वार से लेकर केदारनाथ धाम तक आस्था का ज्वार दिखने लगा है। देवभूमि एक बार फिर गुलजार हो गई है। चारधाम यात्रा की बात करें तो अब तक 37 लाख 91 हजार 205 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। वैसे इन दिनों उत्तराखंड देवभूमि की प्राकृतिक सौंदर्य देश-दुनिया को खूब लुभा रही है। हिल-झील और हिमालय मानो सुकून सा अहसास करा रहे हैं। चारधाम यात्रा के लिए देश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्री देवभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य का भी लुप्त उठा रहे हैं। उत्तराखंड के चार धाम हिंदुओं के पवित्र स्थलों में से हैं। गत 10 मई से शुरू हुई चारधाम यात्रा पर गौर करें तो सबसे अधिक तीर्थयात्री हिमालय की चोटी पर मंदाकिनी नदी के समीप स्थित भगवान श्रीकेदारनाथ के दर पर शीश नवा चुके हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के ड्यूटी आफिसर व वरिष्ठ निजी सचिव पंकज कुमार सैनी की एक रिपोर्ट के अनुसार केदारनाथा धाम में अब तक 12 लाख 27 हजार 295 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। अलकनंदा नदी के समीप स्थित श्रीबदरीनाथ धाम में अब तक 10 लाख 48 हजार 957, गंगोत्री में सात लाख 10 हजार 255, यमुनोत्री में छह लाख 22 हजार 829, गौमुख में 7458 तो हेमकुंड साहिब दरबार में एक लाख 74 हजार 411 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। सुरक्षित धार्मिक यात्रा कराने को लेकर धामी सरकार प्रतिबद्ध गत दिनों मानसून के कहर से आई आपदा के कारण चारधाम यात्रा जरूर प्रभावित हुई, लेकिन आस्था का सैलाब कम नहीं हुआ। वर्तमान में चारों धामों के लिए सड़क व हवाई मार्ग दोनों सुचारू हैं। सरकार-प्रशासन से लेकर विभागीय स्तर पर निगरानी की जा रही है। चारधाम यात्रा व्यवस्था पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद नजर बनाए हुए हैं। श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसका भी ख्याल रखा जा रहा है। धामी सरकार सुरक्षित धार्मिक यात्रा कराने को लेकर प्रतिबद्ध है।    

मोदी सरकार ने अपने कर्मचारियों को नवरात्रि से पहले देगी महंगाई भत्ता का तोहफा, यहां जाने कितनी बढ़कर आएगी सैलरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी अक्टूबर 2024 में महंगाई भत्ता (DA) में बकी घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि सरकार दिवाली से पहले 3% से 4% तक की डीए बढ़ोतरी की घोषणा करेगी। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू मानी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी। साथ ही जुलाई से लागू डीए का एरियर भी सैलरी के साथ आएगा। सैलरी में कितनी होगी बढ़ोतरी? अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह है, तो 3% बढ़ोतरी से उसकी सैलरी ₹540 मंथली बढ़ेगी। अगर डीए 4% बढ़ता है तो सैलरी में मंथली ₹720 रुपये बढ़ जाएंगे। उदाहरण के लिए अगर किसी की कुल सैलरी ₹30,000 है और उसमें से ₹18,000 बेसिक पे है, तो मौजूदा 50% डीए के अनुसार उसे ₹9,000 महंगाई भत्ता मिलता है। 3% बढ़ोतरी के बाद यह ₹9,540 हो जाएगा और 4% बढ़ोतरी पर ₹9,720 हो जाएगा। DA और DR: क्या फर्क है? डीए सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है जबकि डीआर यानी महंगाई राहत पेंशनर्स की पेंशन में जुड़कर मिलता है। दोनों में ही साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में रिवीजन होता है। हालांकि, सरकार कभी भी इसका ऐलान करें लेकिन ये जनवरी और जुलाई से ही लागू माने जाते हैं। इस बार की डीए और डीआर की बढ़ोतरी से एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को फायदा होगा। डीए कैसे तय होता है? महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी का ऐलान ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आधार पर किया जाता है। पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर केंद्र सरकार डीए रिवाइज करती है, जिसका ऐलान आमतौर पर मार्च और सितंबर में किया जाता है। 8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीदें 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू हुई थीं और अब 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। हालांकि, 8वें वेतन आयोग की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी इसके जल्द गठन की उम्मीद कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन ₹34,560 हो सकता है, जबकि पेंशन भी बढ़कर ₹17,280 हो सकती है। सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग पर कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसकी घोषणा जल्द की जाएगी।

जम्मू-कश्मीर की 40 सीटों पर आज हो रही वोटिंग,आखिरी फेज में 415 कैंडिडेट्स

श्रीनग  जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए आज मंगलवार को हो रहे मतदान में भारी भीड़। तीसरे चरण में 40 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा, जिनमें से 16 कश्मीर घाटी में और 24 जम्मू में हैं। ये विधानसभा क्षेत्र सात जिलों कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, उधमपुर, कठुआ, सांबा और जम्मू में फैले हैं। जम्मू-कश्मीर में एक दशक में पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहा है। पिछला विधानसभा चुनाव 2014 में हुआ था। चुनाव के तीसरे चरण में न केवल 415 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा, बल्कि यह भी पता चलेगा कि जम्मू-कश्मीर में 08 अक्टूबर को कौन सी पार्टी अगली सरकार बना सकती है। मतदान सुबह सात बजे शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा। चुनाव आयोग के मुताबिक 40 विधानसभा सीटों पर 39.18 लाख मतदाता पंजीकृत हैं तथा 5060 मतदान केंद्र स्थापित किये गये हैं। तीसरे चरण में 25 पूर्व मंत्री और विधायकों समेत कई नामचीन उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। प्रमुख उम्मीदवारों में छंब विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता तारा चंद, बारामूला से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के बशारत बुखारी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी रमजान, भारतीय जनता पार्टी के शाम लाल शर्मा और देवेंद्र सिंह राणा तथा कांग्रेस के चौधरी लाल सिंह और उस्मान मजीद शामिल हैं। कश्मीर में सबकी निगाहें अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) पर होंगी, जिसका नेतृत्व सांसद अब्दुल रशीद शेख कर रहे हैं, जिन्हें इंजीनियर रशीद के नाम से जाना जाता है। उन्हें अंतरिम जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था और उन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए जमकर प्रचार किया है। जम्मू जिले में चुनावी मैदान में 109 उम्मीदवार हैं, इसके बाद बारामूला में 101, कुपवाड़ा में 59, बांदीपोरा में 42, उधमपुर में 37, कठुआ में 35 और सांबा में 32 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। जम्मू संभाग के उधमपुर जिले के उधमपुर पश्चिम में 12 उम्मीदवार, 60-उधमपुर पूर्व में 09, चेनानी में 09, जबकि रामनगर में 07 उम्मीदवार मैदान में हैं। कठुआ जिले के बनी में 08 उम्मीदवार, बिलावर में 04, बसोहली में 04, जसरोटा में 08, कठुआ में 05 और हीरानगर विधानसभा क्षेत्रों में 06 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। सांबा जिले के रामगढ़ में 07 उम्मीदवार रह गए हैं, सांबा में 14 और विजयपुर में 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। जम्मू जिले के बिश्नाह में 09 उम्मीदवार, सुचेतगढ़ में 11, आर.एस. पुरा-जम्मू दक्षिण, बाहु में 12, जम्मू पूर्व में 09, नगरोटा में 08, जम्मू पश्चिम में 12, जम्मू उत्तर में 17, मढ़ में 06, अखनूर में 03 और छंब विधानसभा क्षेत्र में 08 उम्मीदवार हैं। इसी तरह कश्मीर संभाग के कुपवाड़ा जिले के करनाह में चुनाव के लिए 08 उम्मीदवार, त्रेहगाम में 10, कुपवाड़ा में 08, लोलाब में 11, हंदवाड़ा में 07, और लंगेट में 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। बारामूला जिले के सोपोर में 20 उम्मीदवार, रफियाबाद में 12, उरी में 06 बारामूलामें 25, गुलमर्ग में 13, वागूरा-क्रीरी में 12, और 13-पट्टन विधानसभा क्षेत्रों में 13 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। बांदीपोरा जिले के सोनावारी में 18 उम्मीदवार, बांदीपोरा में 19 और गुरेज में 05 उम्मीदवार मैदान में हैं।गौरतलब है कि प्रदेश में पहले और दूसरे दौर का चुनाव क्रमश: 18 और 25 सितंबर को हुआ है। चुनाव परिणाम आठ अक्टूबर को आएंगे।    

JK विधानसभा चुनाव के दौरान 130 करोड़ रुपये की जब्ती हुई: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

श्रीनगर  चुनाव अधिकारियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के कुल 1,263 उल्लंघनों की सूचना मिली और 130 करोड़ रुपये की नकदी और अन्य सामग्री जब्त की गई। मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) पीके पोल ने कहा कि पुलिस विभाग ने सबसे अधिक 107.50 करोड़ रुपये जब्त किए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1,263 एमसीसी उल्लंघनों में से 600 को जांच और उचित कार्रवाई के बाद बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 364 शिकायतों की जांच चल रही है, जिनका भी जल्द ही निपटारा कर दिया जाएगा। इसके अलावा 115 उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, मीडिया घरानों और अन्य को एमसीसी उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। सीईओ ने बताया कि ड्रग्स, नकदी और शराब से जुड़ी अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन एजेंसियों ने 32 एफआईआर दर्ज की हैं। पोल ने कहा, “2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान अब तक जम्मू-कश्मीर में विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कुल 130 करोड़ रुपये की जब्ती की गई है।” विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग ने 107.50 करोड़ रुपये, सीजीएसटी ने 9.88 करोड़ रुपये, एसजीएसटी/सीटी ने 8.03 करोड़ रुपये, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 2.06 करोड़ रुपये, आयकर विभाग ने 87 लाख रुपये तथा राज्य आबकारी विभाग ने 50 लाख रुपये की जब्ती की है। विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को रैलियां, जुलूस, पार्टी कार्यालय खोलने, वाहन, बैनर, झंडे, पर्चे, होर्डिंग्स, नुक्कड़ सभाएं, घर-घर जाकर प्रचार आदि के संबंध में 7,088 अनुमतियां दी गई हैं। तीसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान 1 अक्टूबर को होना है। पहले चरणों में मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी रही थी, 18 सितंबर को पहले चरण में 61.38 प्रतिशत और 26 सितंबर को दूसरे चरण में 57.31 प्रतिशत मतदान हुआ था। अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से जम्मू और कश्मीर में यह पहला विधानसभा चुनाव है, जिसके नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।  

सिएटल में वेश्यावृत्ति के धंधे में आया उछाल, अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम

 सिएटल अमेरिका को सपनों का देश कहा जाता है, जहां की लाइफस्टाइल, जॉब्स और ग्लैमर दुनियाभर के लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे की सच्चाई अक्सर दुनिया की नजरों से दूर रहती है. कुछ ऐसी ही कहानी है सिएटल शहर की एक बदनाम गली की, जो वेश्यावृत्ति का केंद्र बन चुकी है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सिएटल की इस गली को ‘द ब्लेड’ के नाम से जाना जाता है, जहां हर रात महिलाएं कम कपड़ों में ग्राहकों को लुभाने के लिए सड़कों पर खड़ी नजर आती हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गली के पास ही दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां जैसे अमेजन और एप्पल के ऑफिस भी मौजूद हैं. लेकिन इसके बावजूद, इस इलाके में वेश्यावृत्ति का धंधा तेजी से फैल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गली में हर दिन लगभग 300 लोग आते हैं, और करीब 60 महिलाएं इस व्यापार में शामिल होती हैं. कोविड-19 महामारी के दौरान हालात और भी बिगड़ गए, जब क्लब और बार बंद हो गए और महिलाओं को मजबूरन सड़कों का रुख करना पड़ा. स्थानीय दुकानदार डटन क्लार्क के मुताबिक-कोविड के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं. पिछले साल इस गली में हर वक्त 50-60 महिलाएं खड़ी रहती थीं, जो ग्राहकों की तलाश में रहती थीं. सबसे दर्दनाक बात यह है कि इन महिलाओं में से कई की उम्र बेहद कम होती है. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यहां आने वाले ग्राहकों में से एक तिहाई लोग आसपास की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स होते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गली में वेश्यावृत्ति के साथ-साथ अपराध भी बढ़ गए हैं. जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है. यहां की घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है.अब यह गली सिर्फ वेश्यावृत्ति का केंद्र नहीं, बल्कि बढ़ते अपराधों की वजह से भी चर्चा में है. जिसने स्थानीय निवासियों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम  सिएटल सिटी में  दो नए विधेयक पारित किए। इनका उद्देश्य सार्वजनिक रूप से नशीली दवाओं के उपयोग, बिक्री और वेश्यावृत्ति पर लगाम लगाना है।पहले विधेयक में यह प्रावधान है कि अब नशीलों दवाओं के सौदागरों के सिएटल शहर के मुख्य भाग स्टे आउट ऑफ ड्रग एरिया में प्रवेश करना प्रतिबंधित होगा। द सिएटल टाइम्स की एक खबर के अनुसार, नशीली दवाओं से संबंधित विधेयक लाने का प्रस्ताव काउंसिल सदस्य बॉब केटल ने किया। इसे सिटी अटॉर्नी एन डेविसन ने पेश किया। यह विधेयक 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इसके खिलाफ मतदान किया। दूसरा विधयेक उत्तरी सिएटल में ऑरोरा एवेन्यू से संबंधित है। यह जगह वेश्यावृत्ति और आवारागर्दी के लिए बदनाम है। इसमें कहा गया है कि सेक्स वर्कर को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। काउंसिल सदस्य कैथी मूर का यह विधेयक भी 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इस विधेयक के खिलाफ भी मतदान किया। उल्लेखनीय है कि सिएटल वाशिंगटन राज्य का एक प्रमुख शहर है। यह प्रमुख बंदरगाह है। यह प्रशांत महासागर और लेक वौशिंग्टन के बीच स्थित है। कनाडा की सीमा यहां से मात्र 160 किलोमीटर दूर है। अप्रैल 2009 में यहां की आबादी लगभग 61,700 थी।  

पड़ोसी देश पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट में घिरा की 6 मंत्रालय ही बंद और डेढ़ लाख नौकरियां खत्म

 इस्लामाबाद पड़ोसी देश पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट में घिर गया है कि अब उसने डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा 6 मंत्रालयों को ही भंग कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सरकारी खर्च को रोका जा सके। यही नहीं दो मंत्रालयों का अन्य विभागों के साथ विलय कर दिया गया है। आईएमएफ से 7 अरब डॉलर की लोन डील के तहत पाकिस्तान सरकार ने ये कदम उठाए हैं। पाकिस्तान लगातार संकट के दौर से गुजर रहा है और आईएमएफ से लोन की एक किस्त मिलने के बाद भी उसका संकट समाप्त नहीं हुआ है। अब वह एक और राउंड का लोन लेने के लिए जुगत भिड़ा रहा है। आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए मंजूर लोन की पहली किस्त 26 सितंबर को जारी की थी। इसके तहत 1 अरब डॉलर का पैकेज घोषित किया गया है। आईएमएफ ने इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने खर्च घटाएं, टैक्स में इजाफा करे, कृषि और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में पर भी टैक्स लगाया जाए। इसके अलावा सब्सिडी खत्म की जाए और कुछ योजनाओं को भी सीमित किया जाए। अमेरिका से लौटे पाकिस्तानी वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि आईएमएफ के साथ डील हो गई है। यह हमारी आखिरी डील होगी। हमें इसके तहत कुछ नीतियों को लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि इसी के तहत हम सरकारी खर्चों में भी कटौती कर रहे हैं। 6 मंत्रालयों को बंद किया जाएगा और दो का विलय किया जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग मंत्रालयों के डेढ़ लाख सरकारी पदों को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम टैक्स में भी इजाफे के प्रयास करेंगे। बीते साल 3 लाख अतिरिक्त टैक्सपेयर जुड़े हैं। इस साल अब तक 7 लाख से ज्यादा नए टैक्सपेयर जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स के नियमों को सख्त किया जाएगा। जो लोग टैक्स नहीं भरेंगे, उन्हें संपत्ति और वाहन खरीदने की परमिशन नहीं होगी। औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान को यदि जी-20 का हिस्सा बनना है तो फिर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तो हमारा एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है।

लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा के तापमान में 8-10 केल्विन की असामान्य गिरावट देखी गई

नई दिल्ली/बेंगलुरु भारतीय शोधकर्ताओं ने पाया है कि 2020 के वैश्विक कोविड लॉकडाउन का चंद्रमा तक प्रभाव पड़ा था। पीयर-रिव्यू मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लेटर्स में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि अप्रैल-मई 2020 के सबसे सख्त लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान में असामान्य गिरावट देखी गई थी। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) के के दुर्गा प्रसाद और जी अंबिली ने 2017 और 2023 के बीच चंद्रमा के निकटवर्ती भाग पर छह विभिन्न स्थानों – ओशनस प्रोसेलारम के दो स्थान, मेरे सेरेनिटैटिस, मेयर इम्ब्रियम, मेयर ट्रैंक्विलिटैटिस और मेरे क्रिसियम पर रात्रि के समय सतह के तापमान का विश्लेषण किया। पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज ने कहा कि यह हमारे समूह का एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह काफी अद्वितीय है। कैसे की स्टडी? नासा के चंद्रयान (Lunar Reconnaissance Orbiter) के आंकड़ों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉकडाउन के महीनों में चंद्रमा के तापमान में अन्य वर्षों की तुलना में लगातार 8-10 डिग्री कम (8-10 केल्विन) हो गया था। प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हमने वास्तव में 12 सालों का डेटा विश्लेषण किया था, लेकिन अध्ययन में समानता बनाए रखने के लिए हमने सात सालों (2017 से 2023) का डेटा इस्तेमाल किया,लॉकडाउन वाले साल 2020 से पहले के तीन साल और उसके बाद के तीन साल। शोधकर्ताओं का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान पृथ्वी से निकलने वाले विकिरण (Radiation) में कमी के कारण चंद्रमा का तापमान कम हुआ। चूंकि मानवीय गतिविधियों में काफी कमी आई थी, ग्रीनहाउस गैसों और वायुमंडलीय कणों (Aerosols) का उत्सर्जन भी कम हो गया, जिसके कारण पृथ्वी के वायुमंडल में कम गर्मी फंसी और वापस निकली। तापमान में काफी बदलाव शोधकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों और वर्षों में तापमान में काफी बदलाव भी देखा। सबसे कम कुल तापमान 2020 में साइट-2 पर 96.2 K था, जबकि सबसे कम तापमानों में सबसे अधिक 2022 में साइट-1 पर 143.8 K था। आमतौर पर, 2020 में अधिकांश स्थानों पर सबसे ठंडा तापमान देखा गया, जबकि 2021 और 2022 में जब पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियां फिर से शुरू हुईं, तब एक उल्लेखनीय तापमान बढ़ने का रुझान देखा गया। के दुर्गा प्रसाद ने समझाया कि चंद्रमा पृथ्वी के विकिरण के चिन्ह का एक प्रवर्धक (Amplifier) के रूप में कार्य करता है। इस अनूठी वैश्विक घटना ने हमें यह देखने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया कि पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियों में बदलाव हमारे निकटतम खगोलीय पड़ोसी को कैसे प्रभावित कर सकता है।शोध पत्र में लिखा है कि चूंकि कोविड लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा के रात्रि के समय सतह के तापमान में असामान्य कमी देखी गई है, इसलिए अन्य संभावित कारकों जैसे सौर गतिविधि और मौसमी प्रवाह विविधता के प्रभावों की भी जांच की गई है। परिणाम दर्शाते हैं कि इन कारकों में से किसी का भी अवलोकित हस्ताक्षर(Observed Signature) पर कोई प्रभाव नहीं है, इस प्रकार यह हमारे निष्कर्षों का समर्थन है कि यह केवल कोविड लॉकडाउन के कारण है।

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