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घोस्टराइडर AC-130J आसमान में उड़ान भरते हुए घरों की खिड़की के अंदर तक नजर रख सकता

वॉशिंगटन अमेरिका की वायु सेना ने अपने सबसे आधुनिक विमान की ताकत का नजारा पेश किया है, जो ऊंचे आसमान में उड़ान भरते हुए घरों की खिड़की के अंदर तक नजर रख सकता है। घोस्टराइडर कहे जाने वाले AC-130J ने दक्षिण कोरिया में हुए सैन्य अभ्यास में अपनी ताकत दुनिया के सामने दिखाई है। दक्षिण कोरिया में ऊंचे अपार्टमेंट ब्लॉक के ऊपर जब इसने उड़ान भरी तो इसके शक्तिशाली कैमरे घरों की खिड़कियों के अंदर सब कुछ साफ देख पा रहे थे। लेकिन इसकी खासियत का ये सिर्फ इसका एक हिस्सा भर है। इसकी पूरी क्षमता हैरान करने वाली है। 50000 फीट से लगा सकता है निशाना चार इंजन वाला ये विमान 50000 फीट (लगभग 10 मील) की ऊंचाई से अपने लक्ष्य को पहचान सकता है, जो इस विमान पर लगी अब तक की सबसे बड़ी बंदूक के लिए संभावित लक्ष्य हैं। दक्षिण कोरिया में एक लाइव-फायर अभ्यास के दौरान 105 मिलीमीटर हॉवित्जर ने सियोल के पूर्व में 43 पाउंड के गोले दागे। फायरिंग इतनी शक्तिशाली थी कि 80 टन वजन का पिछला हिस्सा 6 फीट दाईं ओर चला गया। इसके 10 सेकंड बाद विमान के अंदर लगी स्क्रीन पर रेंज में गोले गिरने की तस्वीर उभरती है। इस अभ्यास में जमीन पर दो टैंकों को निशाना बनाया गया। गाइडेड मिसाइल और बम कर सकता है लॉन्च 105 मिलीमीटर की हॉवित्जर के अलावा इस विमान में 30 मिलीमीटर की तोप भी लगी हुई है। इसके साथ ही यह गाइडेड मिसाइल और बमों को लॉन्च कर सकता है। इसे पैदल सेना का सबसे अच्छा दोस्त भी कहा जाता है, क्योंकि यह सैनिकों के सामने कुछ ही दूरी पर दुश्मन पर ठिकानों पर फायर कर सकता है। हवा में ईंधन भरने के साथ यह सैद्धांतिक रूप से जमीनी बलों का समर्थन करते हुए तब तक स्टेशन पर रह सकता है, जब तक चालक दल और गोला-बारूद चल सकता है। विमान के पायलट कैप्टन जॉन इकेनबेरी ने CNN को बताया कि इस अभ्यास के जरिए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को सीधा संदेश दिया है, कि हम तैयार हैं। अमेरिकी सेना के हरक्यूलिस गनशिप का नवीनतम संस्करण AC-130J लगातार दूसरे साल कोरिया में अपनी क्षमता का परीक्षण कर रहा है। वियतनाम युद्ध में पहली बार हुआ था इस्तेमाल अमेरिकी वायु सेना ने पहली बार गनशिप का इस्तेमाल वियतनाम युद्ध से जमीन पर किया था, जब C-47 परिवहन विमान के एक तरफ फायर करने के लिए 7.62 मिमी की बंदूकें स्थापित की थीं। उस क्षमता के साथ विमान एक लक्ष्य के चारों ओर चक्कर लगा सकता था और उस पर निरंतर गोलाबारी कर सकता था। अमेरिकी वायुसेना की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी तोपें एक मिनट में 6000 राउंड फायर कर सकती थीं। समय के साथ युद्ध की भूमिका बदलीं, वायु सेना ने गनशिप की भूमिका के लिए एक भारी विमान की तलाश की और इस तरह C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट की तरफ रुख किया। सी-130 को पहली बार 1967 में दक्षिण पूर्व एशिया में इस्तेमाल किया गया था।

केंद्र सरकार EPF में योगदान के लिए न्यूनतम मूल वेतन सीमा में बढ़ोतरी कर सकती है

नई दिल्ली  केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में योगदान के लिए न्यूनतम मूल वेतन सीमा यानी बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी कर सकती है। इसे 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा सकता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। माना जा रहा है कि 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में इसका ऐलान किया जा सकता है। 10 साल बाद नियमों में संशोधन की तैयारी बताया जा रहा है कि कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा दायरा बढ़ाने के लिए मंत्रालय 10 साल बाद नियमों में संशोधन की तैयारी कर रहा है। इससे पहले 01 सितंबर 2014 को वेतन सीमा 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये की गई थी। हालांकि, इससे उलट कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में वेतन की सीमा इससे ज्यादा है। वहां साल 2017 से ही ₹21,000 की उच्च वेतन सीमा है और सरकार के भीतर इस बात पर सहमति है कि दो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वेतन सीमा को एक जैसा किया जाना चाहिए। अभी कितना योगदान मौजूदा नियमों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ईपीएफ खाते में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और प्रतिधारण भत्ता (अगर कोई हो) का 12-12 फीसद का समान योगदान करते हैं। जहां कर्मचारी का पूरा योगदान भविष्य निधि खाते में जमा किया जाता है, वहीं नियोक्ता के योगदान का 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है और शेष 3.67 फीसदी पीएफ खाते में जमा किया जाता है। पेंशन फंड में बढ़ जाएगा योगदान वर्तमान में बेसिक पे लिमिट 15,000 रुपये होने पर कर्मचारी और नियोक्ता का प्रत्येक योगदान 1800 रुपये है। नियोक्ता के योगदान में से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में 1,250 रुपये जाते हैं। बाकी 750 रुपये पीएफ खाते में जाते हैं। मूल वेतन सीमा 25,000 होने पर प्रत्येक का योगदान 3000 रुपये हो जाएगा। तब नियोक्ता के योगदान में से 2082.5 रुपये पेंशन कोष और 917.5 रुपये पीएफ खाते में जाएंगे।

पड़ोसी राज्य जम्मू कश्मीर के कठुआ में आंतकी हमले के बाद पुलिस जिला नूरपुर अलर्ट, बढ़ाई सुरक्षा

नूरपुर पड़ोसी राज्य जम्मू कश्मीर के कठुआ में आंतकी हमले के बाद पुलिस जिला नूरपुर अलर्ट हो गई है। नूरपुर के पुलिस उपाधीक्षक विशाल वर्मा ने बताया कि पुलिस को जैसे ही यह सूचना मिली कि जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकी वारदात हुई है तो पुलिस जिला नूरपुर अलर्ट हो गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस जिला नूरपुर द्वारा पहले से ही सीमावर्ती इलाकों में नाके लगाए हुए हैं। लेकिन अब पुलिस ने पंजाब के साथ लगते हुए हर प्रवेश द्वार पर सुरक्षा मजबूत कर दी है। अलर्ट मोड पर हिमाचल पुलिस थाना क्षेत्र नूरपुर के तहत हिमाचल के प्रवेश द्वार कंडवाल में हर वाहन की मुस्तैदी से तलाशी ली जा रही है व तलाशी के बाद ही वाहनों को हिमाचल प्रदेश में प्रवेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं सीमावर्ती इलाकों की गश्त कर रहे हैं तथा अन्य टीमें भी नियमित रूप से पर गश्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से जगह-जगह नाके लगाए हुए हैं। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी हर आने जाने वाले वाहन पर पैनी नजर रखी जा रही है। आतंकी हमले में पांच जवान हुए बलिदान कठुआ में सोमवार को सेना के काफिला पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में पांच सुरक्षाकर्मी बलिदान हो गए। इसके साथ ही कई जवान घायल भी हुए। जिसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर में सेना का सर्च अभियान जारी है। मंगलवार रात को भी जम्मू-कश्मीर के डोडा में भी सेना ने ऑपरेशन चलाया। दोनों और से गोलीबारी भी हुई। मगर किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई। आज भी डोडा में सेना ने सर्च अभियान चलाया था। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में अभी भी पुलिस और सेना आतंकियों की तलाश में जुटी है।

हिट एंड रन मामले में मिहिर शाह के पिता को शिवसेना ने पद से हटाया, गिरी गाज

मुंबई वर्ली हिट एंड रन मामले में आरोपी मिहिर के पिता राजेश शाह के खिलाफ शिवसेना ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उपनेता के पद से हटा दिया है। वो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में उपनेता के पद पर तैनात थे, लेकिन बीते दिनों हिट एंड रन मामले में उनके बेटे का नाम सामने आने के बाद चर्चा तेज हो गई थी कि उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बीते रविवार सुबह सात बजे बीएमडब्लू कार सवार ने मछुआरा दंपत्ति प्रदीप नखवा और कावेरी नखवा को टक्कर मार दी थी। आरोपी की निर्दयता का अंदाजा आप महज इसी से लगा सकते हैं कि आरोपी मिहिर ने 100 मीटर तक कार नहीं रोकी। इसकी वजह से महिला गाड़ी के बोनट पर लटकी रही। इसके बाद महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, आरोपी मिहिर मौके से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने अपने बयान में बताया कि आरोपी कार चला रहा था, जबकि उसका ड्राइवर कार के पीछे बैठा हुआ था। पुलिस ने अपने बयान में बताया कि मिहिर ने फरार होने से पहले अपनी गाड़ी बांद्रा में छोड़ दी थी और ड्राइवर को कला नगर के पास छोड़कर चला गया था। पुलिस को जांच में पता चला है कि जिस गाड़ी से हादसा हुआ है, उसका बीमा नहीं हुआ था। इसके अलावा, कार के इंश्योरेंस की समय सीमा भी खत्म हो चुकी थी। बता दें कि मिहिर शाह ने शनिवार रात को अपने दोस्तों के साथ पार्टी की थी। इसके बाद वो वर्ली की तरफ चला गया, जहां उसने हिट एंड रन की वारदात को अंजाम दिया। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस फौरन मौके पर पहुंची। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि पार्टी में कितने लोग शामिल थे और किन लोगों ने ड्रिंक किया हुआ था। जिस जुहू के ‘वाइस ग्लोबल तपस बार में मिहिर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पार्टी की थी, उसे पुलिस ने अब सील कर दिया है। मिहिर शाह को मंगलवार को ठाणे से गिरफ्तार कर लिया गया।

बड़ी सफलता: अमृतसर पुलिस ने हथियार तस्करी करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार

अमृतसर अमृतसर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस कमिश्नर की टीम ने हथियारों की तस्करी करने वाले आठ लोगों के एक गिरोह को पकड़ा है। पुलिस कमिश्नर रणजीत सिंह ढिलो ने बताया कि ये लोग फर्जी हथियार लाइसेंस का इस्तेमाल कर हथियार रखते थे। उन्होंने कहा कि आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और जल्द ही उनके अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस दौरान पुलिस को पता चला कि एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और उसके पास हथियार हैं। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि यह हथियार लाइसेंस तरनतारन इलाके से बनाया गया था और यह पूरी तरह से फर्जी था। पुलिस ने कहा कि अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें शामिल छह लोगों ने फर्जी हथियार लाइसेंस बनवाये हैं। वहीं, फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने में दो लोग शामिल थे, जिनमें तरनतारन के सर्विस सेंटर का एक कर्मचारी भी शामिल है। सर्विस सेंटर का मैनेजर सूरज भंडारी इस गांव का सरगना है और वह फिलहाल पुलिस हिरासत से फरार है। पुलिस का कहना है कि अब तक जांच में छह असलहा लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं और पुलिस ने उन असलहा लाइसेंस बनाने वाले लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया है। जल्द ही इस मामले के सरगना सूरज भंडारी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दरअसल तरनतारन के कुछ सीआईए स्टाफ को फर्जी कंसल्टेंसी लाइसेंस बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जिसके बाद अमृतसर पुलिस ने फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने वाले लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन अमृतसर पुलिस का कहना है कि इन लोगों और तरनतारन पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों के बीच अब तक कोई संबंध सामने नहीं आया है।

गुजरात सरकार द्वारा करीब 108 हेक्टेयर जमीन वापस लेने के खिलाफ अदाणी पोर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी

नई दिल्ली अदाणी समूह को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य सरकार से अदाणी पोर्ट्स और एसईजेड को आवंटित 108 हेक्टेयर जमीन वापस लेने को कहा गया था। जस्टिस बी.आर. गवई और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने ये फैसला सुनाया। गुजरात सरकार द्वारा करीब 108 हेक्टेयर जमीन वापस लेने के खिलाफ अदाणी पोर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। यह जमीन कच्छ जिले में मुंद्रा बंदरगाह के पास स्थित है। मामला 2005 का है, जब अदाणी पोर्ट्स को 108 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। 2010 में जब अदाणी पोर्ट्स ने जमीन पर बाड़ लगाना शुरू किया, तो वहां के नवीनल गांव के लोगों ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर दी और अदाणी पोर्ट्स को 231 हेक्टेयर चारागाह भूमि के आवंटन को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि गांव में चारागाह भूमि की कमी है और इस आवंटन से उनके पास केवल 45 एकड़ भूमि ही बचेगी। 2014 में, राज्य सरकार द्वारा यह कहने के बाद कि चारागाह के लिए 387 हेक्टेयर सरकारी भूमि देने का आदेश दिया गया है, कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया। फिर 2015 में, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में एक रिव्यू पिटीशन दायर की और कोर्ट से कहा कि ग्राम पंचायत को आवंटित करने के लिए केवल 17 हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध थी। इसने प्रस्ताव दिया कि वह शेष भूमि यहां से लगभग 7 किलोमीटर दूर आवंटित कर सकती है। ग्रामीणों ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मवेशियों के चरने के लिए यह बहुत दूर है। इस साल अप्रैल में, कोर्ट ने एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी से समाधान निकालने को कहा। अधिकारी ने जवाब दिया कि राज्य सरकार ने 2005 में अदाणी पोर्ट्स को आवंटित की गई लगभग 108 हेक्टेयर भूमि अब वापस लेने का फैसला किया है।

जेल की सुरक्षा को बढ़ाया गया और अंदर छानबीन कर सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया, बढ़ाई गई सुरक्षा

ऊना हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में स्थित बनगढ़ जेल के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के गैंग से जुड़े गुर्गों से मिली इनपुट के आधार पर जिला ऊना पुलिस सतर्क हो गई है। जेल में सख्ती होने के कारण अधिकारियों को निशाना बनाने की बात पंजाब पुलिस के मार्फत हिमाचल पुलिस को देर शाम मिली जिसके बाद जिला पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया और तुरंत जेल का जायजा लिया। जेल की सुरक्षा को बढ़ाया गया और अंदर छानबीन कर सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया। गौरतलब है कि इस वक्त ऊना के जिला कारागार में पंजाब के कई गैंगस्टर विभिन्न मामलों में आरोपी के तौर पर बंद हैं, जिनका ट्रायल विभिन्न अदालतों में चल रहा है। पंजाब पुलिस की पकड़ में आए कुछ गैंगस्टरों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया था कि बनगढ़ जेल के अधिकारियों को भी निशाना बनाने की योजना चल रही थी, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने हिमाचल पुलिस को इस बाबत सूचित किया था और हिमाचल की ऊना पुलिस ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया है। एसपी राकेश सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर जिला कारागार की सुरक्षा बढ़ाई गई है।

भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की, भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं: चांसलर कार्ल नेहमर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऐतिहासिक ऑस्ट्रिया दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार को ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर से मुलाकात की और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की। बैठक से पहले मोदी ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया दोस्ती मजबूत है और आने वाले समय में यह और मजबूत होगी। मोदी दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार शाम मास्को से यहां पहुंचे। यह 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रिया की पहली यात्रा है। वर्ष 1983 में इंदिरा गांधी ने ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। पीएम मोदी के साथ चर्चा के दौरान ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर ने एक बेहद पुरानी बात को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। यह विश्वास का रिश्ता है जो 1950 के दशक में शुरू हुआ था। जब बात शांति समझौते की होती है, तो भारत और ऑस्ट्रिया बहुत महत्वपूर्ण और सपोर्टिव पार्टनर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद की और 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि के साथ वार्ता सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंची। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच जो बात खास है वह यह कि हम भू-राजनीतिक स्थिति के घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं।” ऑस्ट्रिया की ‘आजादी’ में भारत का बड़ा हाथ, नेहरू ने ऐसे की थी मदद 1955 में भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह वह समय था जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर चार सहयोगी शक्तियों (अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) का कब्जा था। भारत ने ऑस्ट्रिया की आजादी और तटस्थता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ऑस्ट्रिया के समर्थन में जोर दिया। भारत ने यह प्रस्ताव रखा कि ऑस्ट्रिया को एक स्वतंत्र और तटस्थ देश के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वह दोनों विश्व युद्धों के दौरान हुए संघर्षों से बाहर रह सके। क्या निकला नतीजा? इसका नतीजा ये निकला कि 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसने ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और तटस्थता की स्थापना की। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को चारों शक्तियों के नियंत्रण से मुक्त कर दिया और उसे एक संप्रभु राज्य बना दिया। भारत की इस पहल और समर्थन के कारण ऑस्ट्रिया ने स्वतंत्रता प्राप्त की और भारत की तरह ही शांति और तटस्थता की नीति अपनाई। क्या है ऑस्ट्रियन राज्य संधि? ऑस्ट्रियन राज्य संधि (Austrian State Treaty) एक महत्वपूर्ण संधि थी जिस पर 15 मई 1955 को वियना में हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चार सहयोगी शक्तियों (संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) के नियंत्रण से मुक्त करा दिया और उसे एक स्वतंत्र, संप्रभु और तटस्थ राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इससे ऑस्ट्रिया को पूर्ण स्वतंत्रता और संप्रभुता प्राप्त हुई, और सभी विदेशी सेनाओं को ऑस्ट्रियाई क्षेत्र से हटने का आदेश दिया गया। ऑस्ट्रिया ने अपनी स्थायी तटस्थता की घोषणा की, जिसका अर्थ है कि वह किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा और किसी भी सैन्य संघर्ष में भाग नहीं लेगा। ऑस्ट्रिया पर लगाए गए सभी प्रतिबंध और नियंत्रण हटा दिए गए, जिससे ऑस्ट्रियाई सरकार को अपने मामलों का स्वायत्त रूप से संचालन करने की अनुमति मिली। ऑस्ट्रिया ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए कुछ आर्थिक जिम्मेदारियों को स्वीकार किया और पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाए। यह संधि ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण थी और उसने देश को शांति और तटस्थता की नीति अपनाने में मदद की। ऑस्ट्रियन राज्य संधि के कारण, ऑस्ट्रिया एक तटस्थ राष्ट्र के रूप में विकसित हुआ और उसने अपने स्वतंत्रता और संप्रभुता को सुनिश्चित किया। अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस का ऑस्ट्रिया पर कब्जा क्यों था? संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर कब्जा किया था। इसका मुख्य कारण था कि ऑस्ट्रिया, नाजी जर्मनी का हिस्सा बन चुका था जब 1938 में एडोल्फ हिटलर ने ऑस्ट्रिया का एन्स्क्लुस (Anschluss) किया था। यहां एन्स्क्लुस का मतलब 1938 में ऑस्ट्रिया के विलय से है। यानी हिटलर ने ऑस्ट्रिया पर खुद का शासन स्थापित कर दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में, मित्र राष्ट्रों (Allied Powers) ने नाजी जर्मनी यानी हिटलर को हराया और यूरोप के पुनर्निर्माण की योजना बनाई। इस प्रक्रिया में, उन्होंने जर्मनी और उसके अधीनस्थ क्षेत्रों को विभाजित किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की नाजी सत्ता का पुनरुत्थान न हो सके और स्थिरता बनी रहे। इस विभाजन के हिस्से के रूप में, ऑस्ट्रिया को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया और इन क्षेत्रों का नियंत्रण संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को सौंपा गया। यह कब्जा अस्थायी था और इसका उद्देश्य ऑस्ट्रिया को नाजी शासन से मुक्त करना और देश में स्थायी शांति और लोकतंत्र की स्थापना करना था। इस प्रकार, इन चार सहयोगी शक्तियों ने मिलकर ऑस्ट्रिया के प्रशासन और पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी संभाली, ताकि देश को स्वतंत्र और तटस्थ राज्य के रूप में पुनः स्थापित किया जा सके।  

अकाल तख्त की ओर से अब इस पर रोक का आदेश आ सकता है कि अब फिल्मों में नहीं दिखेंगे सिख शादियों के सीन

नई दिल्ली अब फिल्मों और टीवी सीरियल में सिख शादियों के सीन नहीं दिखेंगे। एसजीपीसी ने मोहाली में सीरियल की शूटिंग के दौरान हुए विवाद को लेकर रिपोर्ट मांगी है। अकाल तख्त की ओर से अब इस पर रोक का आदेश आ सकता है। मोहाली में एक पंजाबी सीरियल की शूटिंग के दौरान गुरुद्वारे का सेट बनाया गया था और आनंदकारज यानी सिख विवाह दर्शाया गया था। इसे लेकर विवाद छिड़ गया था और मौके पर पहुंचे निहंगों ने शूटिंग रुकवा दी थी। इसके अलावा पुलिस से मांग की थी कि इस मामले में बेअदबी के आरोपों में केस दर्ज किया जाए और ऐक्शन लिया जाए। निहंगों का कहना था कि टीवी सीरियल मेकर्स को सब कुछ मालूम था, फिर भी ऐसा किया गया। निहंगों का कहना था कि शूटिंग के दौरान गुरुग्रंथ साहिब का स्वरूप भी दिखाया गया। ऐसा करना गलत है और बेअदबी है। इसकी इजाजत किसी को नहीं है और यूं हर जगह गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप नहीं ले जाया जा सकता। बता दें कि अकाल तख्त ने पहले ही मैरिज होम्स में होने वाली शादियों में गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को ले जाने पर पाबंदी लिखा रखी है। मोहाली की घटना को एसजीपीसी ने गलत करार दिया है। अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस मामले में एसजीपीसी से रिपोर्ट मांग ली है, जिसके बाद इसको लेकर अकाल तख्त से आदेश जारी हो सकते हैं। इससे पहले मैरिज पैलेसों में श्री गुरू ग्रंथ साहिब ले जाने पर रोक लगाई जा चुकी है। जल्द ही पंज सिंह साहिबों की मीटिंग कर लेंगे फैसला: ज्ञानी रघबीर सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने मोहाली के घडूआं में सीरियल की शूटिंग के दौरान नकली गुरुद्वारा साहिब में नकली आनंद कारज करने की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि फिल्मी क्षेत्र के लोग अपने व्यापार को मुख्य रखकर सिख परपंराओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। अगर वह इन हरकतों से बाज नहीं आए तो श्री अकाल तख्त साहिब को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी पडे़गी। सिख एक्टर या डायरेक्टर या सहायक कर्मी इस घटना में दोषी या सहायक पाए जाएंगे, उनके खिलाफ श्री अकाल तख्त से भी सिख परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीरियल निर्माताओं पर भी ऐक्शन की है तैयारी जल्द ही पंज सिंह साहिबों की मीटिंग कर भविष्य के लिए फिल्मों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी दिखाने पर रोक लगाने को लेकर भी सख्त फैसला लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि  जो सिख एक्टर या डायरेक्टर या सहायक कर्मी मोहाली की घटना में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ श्री अकाल तख्त से भी सिख परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने फिल्मों और सीरियलों में सिख परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाली हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

पुलिस के पास सवालों की लंबी लिस्ट, BMW केस में मिली 7 दिन की हिरासत, अब मिहिर शाह खोलेगा राज

मुंबई मुंबई बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन मामले के मुख्य आरोपी मिहिर शाह को 16 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मिहिर शाह 72 घंटे बाद पुलिस की गिरफ्त में आया है। पिछले तीन दिनों से वह पुलिस को छका रहा था। इस दौरान पुलिस की 12 टीमें उसे खोज रही थीं। मिहिर के एक दोस्त के मोबाइल ऑन करने के बाद पुलिस को उनकी लोकेशन का पता लगा और गिरफ्तारी मुमकिन हो पाई। मुंबई पुलिस को हिट एंड रन केस में अदालत द्वारा आरोपी मिहिर शाह की सात की कस्टडी मिल गई है। इन सात दिनों में पुलिस के पास चुनौती होगी कि वे मिहिर से कड़ी पूछताछ करेंगे और उसके खिलाफ केस मजबूत करने की कोशिश करेंगे। पहले ही तीन दिन बाद गिरफ्तारी से मिहिर के उस रात शराब पीने का पता चलने की कोई संभावना नहीं है। सवालों की लंबी लिस्ट पुलिस सूत्रों का कहना है कि मिहिर से शनिवार रात बार में एंट्री से रविवार सुबह एक्सीडेंट के बीच की पूरी घटना जानने की होगी। पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि मिहिर जिस बार में गया था, उसके मालिक ने दावा किया था मिहिर ने सिर्फ रेड बुल पी थी। इसके अलावा मिहिर मर्सिडीज में आया था। जबकि एक्सीडेंट बीएमडब्ल्यू से हुआ है। गिरफ्तारी से बचने के लिए मिहिर ने नंबर प्लेट कहीं फेंक दी है। पुलिस को उस नंबर प्लेट की भी तलाश है। इससे पहले एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना ने उसके पिता राजेश शाह को पार्टी से निलंबित कर दिया है। राजेश शाह के बेटे मिहिर शाह को कल शाम पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर तीन दिन पहले कावेरी नाम की महिला को अपनी कार से उड़ाने का आरोप है। यह भी जानकारी सामने आई है कि घटना के वक्त मिहिर नशे में था और अपने दोस्तों संग रातभर बार में पार्टी करने के बाद वह गाड़ी चला रहा था। गाड़ी चलाते वक्त उनका ड्राइवर बगल की सीट पर बैठा था। कार से स्कूटी को टक्कर मारने के बाद जब हड़बड़ाहट में मिहिर कार लेकर भागने लगा तो महिला कार के बोनट में ही फंस गई और करीब डेढ़ किलोमीटर तक कार के साथ घसीटती चली गई। इस दर्दनाक घटना में महिला की तो मौत हो गई लेकिन, उसका पति गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसका इलाज चला और वह फिलहाल घर पर अपने बच्चों के साथ है। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल, पति बोला- मैं भी ऐसे ही घसीटूंगा उधर, कावेरी की मौत के बाद घर पर उनके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। कावेरी के पति प्रदीप का कहना है कि उसके बच्चे दिन-रात अपनी मां के लिए पूछते रहते हैं। वह उन्हें कैसे समझाए कि वो अब कभी नहीं आएगी। प्रदीप का कहना है कि अगर मिहिर जैसे लोगों को सजा भी हो जाए तो क्या इससे मेरी पत्नी वापस आ जाएगी? वह गुस्से में आगे कहते हैं कि मैं भी उसे ऐसे ही घसीटूंगा जैसे मेरी बीवी की मौत हुई। वह मिहिर की कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस पर मिहिर को पकड़ने में ढिलाई बरतने और शिंदे सरकार पर आरोपियों को शह देने का आरोप लगाया है।  

भारतीय मर्दों को होममेकर्स की भूमिका को समझना चाहिए, एक गृहिणी अपने परिवार के लिए बहुत त्याग करती है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली भारतीय समाज में घरेलू महिलाओं की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है, जब भारतीय मर्दों को होममेकर्स की भूमिका को समझना चाहिए। अदालत ने कहा कि एक गृहिणी अपने परिवार के लिए बहुत त्याग करती है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मुस्लिम महिला की ओर से गुजारे भत्ते की मांग पर यह बात कही। अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत कोई भी मुस्लिम महिला पति से अलग होते हुए एलमिनी यानी गुजारे की मांग कर सकती है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में धर्म मायने नहीं रखता। कोई भी विवाहित महिला अलगाव की स्थिति में पति से गुजारा भत्ता मांगने की हकदार है। परिवार में गृहिणियों की अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि पति अपनी पत्तियों को आर्थिक सहयोग दें। अदालत ने इसका तरीका भी बताते हुए कहा कि आपको जॉइंट अकाउंट्स खुलवाने चाहिए। इसके अलावा पत्नी को एटीएम कार्ड देकर उसे अकाउंट का एक्सेस देना चाहिए। इससे उसके जीवन में एक आर्थिक स्थिरता होगी और वह घर में सम्मानित महसूस करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक मुस्लिम महिला भी अपने पति से तलाक के बाद गुजारे की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि गुजारा देना कोई चैरिटी नहीं है बल्कि महिला का अधिकार है। महिलाओं का यह अधिकार धार्मिक सीमाओं से परे है। लैंगिक समानता और विवाहित महिलाओं के अधिकारों के लिए यह जरूरी है। बेंच ने कहा कि सेक्शन 125 कहता है कि पर्याप्त संसाधन रखने वाला कोई व्यक्ति अपनी पत्नी, बच्चों और पैरेंट्स के लिए गुजारा दे। दरअसल मोहम्मद अब्दुल समद नाम के शख्स ने अदालत का रुख किया था। उसने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चैलेंज किया था, जिसमें प्रति माह 20 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। अब्दुल समद ने इस फैसले को पहले तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे उसने घटाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया था। इसके बाद समद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उसके वकील ने अदालत में कहा कि मुस्लिम महिला अधिकार संरक्षण एवं तलाक कानून, 1986 के तहत कोई भी तलाकशुदा मुस्लिम महिला गुजारे की मांग कर सकती है। इसके लिए सेक्शन 125 की जरूरत नहीं है। इस पर अदालत ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं भी सेक्शन 125 के तहत ही गुजारे की हकदार हैं।  

शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिये गए: हाईकोर्ट

चंडीगढ़ किसान आंदोलन के कारण 5 महीने से बंद शंभू बॉर्डर के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बॉर्डर से बैरिकेड हटाने के आदेश दिए हैं और एक हफ्ते के भीतर शंभू बॉर्डर खोलने को कहा है। शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिये गए। इसके साथ ही अदालत ने हरियाणा सरकार से कहा है कि वह किसानों को दिल्ली की तरफ जाने दें। लोकतंत्र में किसानों को हरियाणा में घुसने या घेराव करने से नहीं रोका जा सकता हाईकोर्ट ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर स्थिति शांतिपूर्ण है। किसानों की मांग केंद्र सरकार से है इसलिए उन्हें दिल्ली की तरफ जाने की छूट दे देनी चाहिए। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कहा कि अगर वे शंभू बॉर्डर से बैरिकेड हटा देते हैं तो किसान अंबाला में घुस जाएंगे और एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे क्योंकि उन्होंने ऐसी घोषणा कर रखी है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वर्दी वालों को घबराना नहीं चाहिए। लोकतंत्र में किसानों को हरियाणा में घुसने या घेराव करने से नहीं रोका जा सकता। किसान नेताओं ने कियाफैसले का स्वागत वहीं हाई कोर्ट के इस फैसले का किसानों ने स्वागत किया है। किसान नेता मनजीत राय ने कहा कि हमें अभी आदेश की कॉपी नहीं मिली, लेकिन इस फैसले का स्वागत करते हैं। हम बार-बार पूछ रहे हैं कि किस संविधान और कानून के तहत सड़क पर दीवारें बनाई गईं। सरकार ने लोकतंत्र को दरकिनार कर यह सड़कें बंद की थी। यह आम जनता, किसानों और व्यापारियों की राजधानी जाने की भावनाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि हम यहां नहीं बैठना चाहते, हम दिल्ली जाना चाहते हैं। हम इस बारे में मीटिंग कर अगली रणनीति तय करेंगे। भुखमरी के कगार पर आ गए दुकानदार, व्यापारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य ने हाईकोर्ट में शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। शांडिल्य ने जनहित याचिका में बताया कि 5 महीने से नेशनल हाईवे 44 बंद पड़ा है। अंबाला के दुकानदार, व्यापारी, रेहड़ी फड़ी वाले भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण सरकारी बसों को रूट डायवर्ट किया हुआ है, जिससे तेल का खर्च बढ़ रहा है। अंबाला व शंभू के आसपास के मरीज बॉर्डर बंद होने के कारण दिक्कत में है। एंबुलेंस के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंबाला व पटियाला जिला का छोटा बड़ा काम बंद हो चुका है। यह हाईवे पंजाब हिमाचल, जम्मू कश्मीर को जोड़ता है। इसके बंद होने से न सरकारों को भी नुकसान हो रहा है। याचिका में पंजाब व हरियाणा सरकार सहित किसान नेता स्वर्ण सिंह पंढेर व जगजीत सिंह डल्लेवाल को भी पार्टी बनाया था। 

ईडी ने चार्जशीट में आम आदमी पार्टी पर कई बड़े आरोप लगाए हैं और उसे आरोपी नंबर 38 बनाया

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट का कोर्ट ने संज्ञान लिया है और अरविंद केजरीवाल समेत कई आरोपियों को 12 जुलाई को कोर्ट में तलब किया गया है। ईडी ने चार्जशीट में आम आदमी पार्टी पर कई बड़े आरोप लगाए हैं और उसे आरोपी नंबर 38 बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट में ईडी ने कहा है कि आम आदमी पार्टी को शराब घोटाले से मिली 100 करोड़ की रिश्वत में से 45 करोड़ रुपए प्रत्यक्ष रूप से आम आदमी पार्टी को मिले और हवाला चैनल्स के जरिए इस रकम को गोवा विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल के लिए भेजा गया। ईडी ने चार्जशीट में दावा किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग अपराध में आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट है। राउज ऐवेन्यू स्थित ट्रायल कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया है जिसे पिछले महीने दायर किया गया था। कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत अन्य कई आरोपियों के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करते हुए 12 जुलाई को अदालत में मौजूद रहने को कहा है। चार्जशीट में आम आदमी पार्टी को आरोपी नंबर 38 बताया गया है। इस बीच केजरीवाल ने अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने चार्जशीट में कहा, ‘आम आदमी पार्टी को अपराध से अर्जित आय में 45 करोड़ रुपए मिले और इसे हवाला के जरिए गोवा भेजा गया। इसका इस्तेमाल चुनाव प्रचार में किया गया। इस तरह आम आदमी पार्टी, जिसके मुखिया अरविंद केजरीवाल हैं, 45 करोड़ रुपये की अपराध आय को प्राप्त करने, उपयोग और छिपाने जैसी गतिविधियों में शामिल है।’ यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया गया है। ईडी का दावा है कि वित्त वर्ष 2021-22 की शराब नीति में शराब कारोबारियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया और बदले में उनसे रिश्वत ली गई। हालांकि, आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार आरोपों से इनकार करती रही है।  

भारत और ऑस्ट्रिया का साझा घोषणापत्र हुआ जारी, दोनों देशों में राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध

वियना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया।अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर के साथ बातचीत करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 1983 के बाद पहली ऑस्ट्रिया यात्रा है.मोदी से पहले इंदिरा गांधी ने 1983 में प्रधानमंत्री के रूप में ऑस्ट्रिया गई थीं.इसके बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर फ्रेड सिनोवाट्ज 1984 में भारत आए थे.पीएम मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देश संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे.पीएम मोदी का ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलेन और चांसलर कार्ल नेहमर से बातचीत का कार्यक्रम है. भारत और ऑस्ट्रिया के सांस्कृतिक संबंध भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक समृद्ध इतिहास है.वियना विश्वविद्यालय में संस्कृत की पढ़ाई 1845 में ही शुरू हो गई थी.वहीं रवींद्रनाथ टैगोर ने 1920 के दशक में वियना की यात्रा की थी. उनकी इस यात्रा ने दोनों देशों में सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.ऑस्ट्रिया यूरोपीय संघ का सदस्य तो है, लेकिन नैटो का हिस्सा नहीं है. उसकी तटस्थता की यह नीति द्विपक्षीय संबंधों में एक दिलचस्प आयाम जोड़ती है. भारत ने 1953 में ऑस्ट्रिया की सोवियत संघ के साथ समझौता वार्ता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसी के बाद 1955 में ऑस्ट्रिया को आजादी मिली थी.भारत और ऑस्ट्रिया में राजनयिक संबंध 10 नवंबर 1949 को स्थापित हुए थे.इस तरह 2024 में दोनों देश राजनयिक संबंधों की 75वीं सालगिरह मना रहे हैं. भारत-ऑस्ट्रिया के राजनयिक संबंध भारत और ऑस्ट्रिया में राजनयिक संपर्क का एक लंबा इतिहास रहा है. भारत-ऑस्ट्रिया ने 1983 में संयुक्त आर्थिक आयोग की स्थापना की थी. इस आयोग ने इस्पात, निर्माण प्रौद्योगिकी, रेलवे और धातुकर्म जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और संयुक्त उद्यम स्थापित करने में सहयोग किया है.भारत ऑस्ट्रिया को इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ा, जूते और मशीनरी जैसे चीजों का निर्यात करता है. वहीं ऑस्ट्रिया मशीनरी, रेलवे पार्ट्स और स्टील का आयात भारत से करता है.दोनों देशों के बीच 2023 में 2.93 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ था.दोनों देशों ने फरवरी 2024 में भारत-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज की शुरुआत की थी. यह पहल दोनों देशों के बीच नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी. भारत ने 2013 में पीएसएलवी-सी20 के जरिए ऑस्ट्रिया के पहले दो उपग्रहों TUGSAT-1/BRITE और UniBRITE का प्रक्षेपण किया था.यह दोनों देशों का अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत थी. ऑस्ट्रिया में 30 हजार से अधिक भारतीय रहते हैं.ये भारतीय वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में काम करते हैं या व्यापार करते हैं या वहां पढ़ने गए हैं.  इनमें से अधिकांश पंजाब और केरल के रहने वाले हैं. ये भारतीय दोनों देशों में सास्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारतीय नेताओं का ऑस्ट्रिया दौरा पीएम मोदी की यात्रा से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिसंबर 2022 में ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी. उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री की यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में थी. अपनी यात्रा में जयशंकर ने ऑस्ट्रिया के प्रमुख नेताओं से बात की थी. उनकी यात्रा के दौरान पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे.नवंबर 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी. वहीं तत्कालीन ऑस्ट्रियाई राष्ट्रपति हेंज फिशर ने फरवरी 2005 में भारत की यात्रा पर आए थे. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील अक्टूबर, 2011 में चार दिन की यात्रा पर ऑस्ट्रिया गई थीं.पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार ऑस्ट्रिया जा रहे हैं, लेकिन वह वहां जाने से पहले ऑस्ट्रिया के नेताओं से मुलाकातें कर चुके हैं. पीएम मोदी अपने पहले कार्यकाल में जून, 2017 में इंटरनेशनल इकोनामिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग गए थे.वहां उन्होंने तत्कालीन ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन केर्न के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. अपने दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी अक्टूबर, 2021 में स्काटलैंड के ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-26) में भाग लेने गए थे.इससे इतर उन्होंने तत्कालीन ऑस्ट्रियाई चांसलर अलेक्जेंडर शालेनबर्ग से मुलाकात की थी.पीएम मोदी ने 26 मई, 2020 को ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलेन से टेलीफोन पर बातचीत की थी.ऑस्ट्रिया यात्रा से पहले पीएम मोदी ने लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन के साझा मूल्यों पर प्रकाश डाला था, जो भारत- ऑस्ट्रिया के बीच संबंधों को रेखांकित करते हैं. उन्होंने कहा,”मैं हमारे देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर हमारी चर्चा को लेकर उत्सुक हूं.” राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ पीएम मोदी का स्वागत एयरपोर्ट से निकलने के बाद पीएम मोदी सीधे ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना के होटल रिट्ज कार्लटन पहुंचे, जहां प्रवासी भारतीयों ने उनका अभिवादन किया। साथ ही ऑस्ट्रियाई कलाकारों ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में वंदे मातरम भी गाया। पोस्ट की मोदी के संग सेल्फी ऑस्ट्रिया चांसलर कार्ल नेहमर ने भी पीएम मोदी से मुलाकात की। उन्होंने पीएम मोदी के साथ सेल्फी पोस्ट करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वियना में आपका स्वागत है। ऑस्ट्रिया में आपका स्वागत करना खुशी और सम्मान की बात है। ऑस्ट्रिया और भारत मित्र और साझेदार हैं। मैं आपकी यात्रा के दौरान हमारी राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं की प्रतीक्षा कर रहा हूं!’ पीएम मोदी से पहली बार मिले नेहमर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेजबानी ऑस्ट्रियाई चांसलर कार्ल नेहमर ने की। यह दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात है। द्विपक्षीय साझेदारी के संबंध में चर्चा होगी।’’ एक तस्वीर में मोदी नेहमर को गले लगाते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में ऑस्ट्रियाई चांसलर प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। नेहमर ने भी मोदी के साथ की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वियना में आपका स्वागत है! ऑस्ट्रिया में आपका स्वागत करना हमारे लिए खुशी और सम्मान की बात है। ऑस्ट्रिया और भारत मित्र और साझेदार हैं। आपकी यात्रा के दौरान राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं को लेकर उत्सुक हूं।’’ प्रधानमंत्री ने ‘‘गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए’’ ऑस्ट्रियाई चांसलर का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह ‘‘कल हमारे बीच होने वाली वार्ताओं को लेकर उत्सुक हैं। हमारे देश पूरी दुनिया की भलाई के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।’’ मोदी ने ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में … Read more

राष्ट्रपति पुतिन के साथ पीएम मोदी की मजबूत दोस्ती, चाहे तो ख़त्म करवा सकते है युद्ध : अमेरिका

वाशिंगटन पीएम मोदी के रूस दौरे पर अमेरिका टकटकी लगाए बैठा रहा। अमेरिका ने यह तक कह दिया कि अगर कोई देश रूस से मिलता है तो उसे यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा। इन सब के बाद अब अमेरिका का एक और रिएक्शन सामने आया है। वाइट हाउस ने अपने एक बयान में मंगलवार को कहा है कि रूस के साथ भारत के संबंध अच्छी स्थिति में है जिसका भारत को फायदा उठाना चाहिए। अमेरिका ने कहा है कि भारत चाहे तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन में संघर्ष खत्म करने के लिए कह सकता है। यह बयान तब आया है जब पीएम मोदी ने पुतिन से मुलाकात के दौरान इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन युद्ध का समाधान बातचीत में है, युद्ध के मैदान में नहीं। एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करिन जीन-पियरे ने भारत को अमेरिका का रणनीतिक साझेदार कहा है जिसके साथ वे स्पष्ट बातचीत करते हैं। पुतिन के साथ पीएम मोदी की बैठक के बारे में पूछे जाने पर जीन-पियरे ने कहा, “भारत एक रणनीतिक साझेदार है जिसके साथ हम पूर्ण और स्पष्ट बातचीत करते हैं, जिसमें रूस के साथ उनके संबंध भी शामिल हैं और हमने इस बारे में पहले भी बात की है। इसलिए हमें लगता है कि यह महत्वपूर्ण है कि भारत सहित सभी देश यूक्रेन के मामले में शांति स्थापित करने की कोशिशों का समर्थन करें।” उन्होंने आगे कहा कि भारत चाहे तो यूक्रेन में युद्ध भी रुकवा सकता है। उन्होंने कहा, “हम यह भी मानते हैं कि रूस के साथ भारत के अच्छे संबंध उसे राष्ट्रपति पुतिन से अनुरोध करने की क्षमता देते हैं कि वे यूक्रेन में बिना कारण शुरू किए गए युद्ध को खत्म करें। इसे खत्म करना राष्ट्रपति पुतिन पर निर्भर है। राष्ट्रपति पुतिन ने युद्ध शुरू किया, और वे युद्ध को समाप्त कर सकते हैं।” PM ने उठाया था युद्ध के दौरान बच्चों की हत्या का मुद्दा वाइट हाऊस ने यह बयान तब दिया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन के साथ अपनी द्विपक्षीय वार्ता के दौरान युद्ध के दौरान बच्चों की हत्या का मुद्दा उठाया था। प्रधानमंत्री ने कहा है कि मानवता में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति तब दुखी होता है जब जान जाती है। यह बयान हाल ही में कीव में बच्चों के अस्पताल पर मिसाइल हमले के बाद आया है, जिसमें 37 बच्चे मारे गए थे। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “चाहे युद्ध हो, संघर्ष हो, आतंकी हमले हों – मानवता में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को जान जाने पर दुख होता है। लेकिन जब मासूम बच्चों की हत्या होती है, जब हम मासूम बच्चों को मरते हुए देखते हैं, तो यह दिल दहला देने वाला होता है। यह दर्द बहुत बड़ा है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता है और उन्होंने कहा कि बम, बंदूक और गोलियों के बीच शांति की बातचीत नहीं हो सकती है। ज़ेलेंस्की ने PM की यात्रा को बताया शांति प्रयासों के लिए झटका 2022 में मॉस्को और कीव के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से यह पीएम मोदी की पहली रूस यात्रा थी। इससे पहले मंगलवार को, यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा पर निराशा व्यक्त की थी और उन्होंने इसे शांति प्रयासों के लिए झटका करार दिया था। पीएम मोदी 8-9 जुलाई को रूस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। पीएम मोदी ने मॉस्को में भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया।  

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