LATEST NEWS

ट्रेनी IAS पूजा खेडकर पर सरकार की कार्रवाई, पुणे से वाशिम किया तबादला

  पुणे प्रोबेशन के दौरान विशेष सुविधाएं मांगने वालीं एक महिला IAS ट्रेनी का तबादला हो गया है। खबर है कि महाराष्ट्र सरकार ने डॉक्टर पूजा खेड़कर को पुणे से वाशिम भेजने का फैसला किया है। खास बात है कि खेड़कर ने VIP नंबर वाली कार, स्टाफ और गाड़ी जैसी कई विशेष मांग रखी थीं, जो प्रोबेशन पर काम कर रहे अधिकारी को नहीं दी जाती। UPSC में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 821 हासिल की थी। पद के दुरुपयोग की कई शिकायतों के बाद खेड़कर को पुणे से वाशिम भेज दिया है। अब वह वाशिम में सुपर न्यमरी असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर काम करेंगी। आदेश में कहा गया, ‘2023 बैच की IAS अधिकारी प्रोबेशन के बचे हुए समय के लिए वाशिम जिले में सुपर न्यूमरी असिस्टेंट कलेक्टर के रूम में सेवाएं देंगी।’ कलेक्टर दफ्तर से विशेष मांगें रखने के चलते खेड़कर विवादों में आ गई थीं। खेड़कर के पिता भी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने कथित तौर पर कलेक्टर कार्यालय से बेटी की सभी मांगों को पूरा करने का दबाव बनाया था। कहा जा रहा है कि ऐसा नहीं होने पर उन्होंने परिणामों की धमकी भी दी थी। पुणे कलेक्टर डॉक्टर सुहास दिवासे ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी नितिन गदरे को पहले एक पत्र भी लिखा था, जिसमें खेड़कर को किसी अन्य जिले में भेजने पर विचार की मांग की गई थी। दिवासे ने उनके व्यवहार को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की भी मांग की थी। उन्होंने जूनियर स्टाफ के साथ गलत व्यवहार किए जाने और एडिशनल कलेक्टर अजय मोरे के चैंबर पर कब्जा करने समेत कई शिकायतें की थीं। VIP नंबर, ऑडी वह लाल-नीली बत्ती के साथ अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल करती थीं। इसके चलते भी विभाग में हड़कम्प मच गया था। इसके अलावा उन्होंने अपनी कार पर ‘महाराष्ट्र सरकार’ का बोर्ड भी लगा रखा था। उन्होंने कई अनुचित मांगें भी रखी थीं, जिनमें VIP नंबर प्लेट के साथ एक कार, घर, स्टाफ और एक कॉन्स्टेबल के साथ एक चैंबर शामिल है। इतना ही नहीं खेड़कर ने एडिशनल कलेक्टर अजय मोरे की गैरमौजूदगी में उनके अगले कमरे पर भी कब्जा कर लिया था। साथ ही कमरे के बाहर अपने नाम का बोर्ड लगा दिया था। उन्होंने एडिशनल कलेक्टर की अनुमति के बगैर वहां मौजूद सभी सामान भी हटा दिया था, जिसमें कुर्सी, सोफा, टेबल शामिल हैं। बाद में उन्होंने रेवेन्यु असिस्टेंट से अपने नाम का लैटरहेड, विजिटिंग कार्ड, पेपरवेट, नेम प्लेट, सील और इंटरकॉम की भी मांग की थी।

मुस्लिम महिला गुजारा भत्ता की हकदार, सर्वोच्च अदालत ने कहा कि देश में सेकुलर कानून ही चलेगा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी महिलाएं सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। वह गुजारा भत्ता की हकदार हैं। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि देश में सेकुलर कानून ही चलेगा। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टिन गॉर्ज मसीह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम महिला गुजारा भत्ता के लिए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर सकती हैं। वो सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका दायर कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ये धारा सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। आपको बता दें कि अब्दुल समद नाम के एक मुस्लिम शख्स ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने के तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उसने दलील दी थी कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका दायर करने की हकदार नहीं है। महिला को मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही चलना होगा। लेकिन कोर्ट ने ऐसे मामलों में सीआरपीसी की धारा 125 को प्राथमिकता दी। पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका लंबित रहने के दौरान कोई मुस्लिम महिला तलाकशुदा हो जाती है तो वह मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 का सहारा ले सकती है। पीठ ने कहा कि इस अधिनियम के तहत किए गए उपाय सीआरपीसी की धारा 125 के तहत उपाय के अतिरिक्त है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि सीआरपीसी की धारा 125 एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है जो मुस्लिम महिलाओं पर भी लागू होता है। हालांकि मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 द्वारा इसे निरस्त कर दिया गया और 2001 में कानून की वैधता को बरकरार रखा गया।  

अमेरिका रिपोर्ट में बताया की भारत में घटिया तेल खाने से हर 1,000 बच्चों में से हो रही 27 की मौत

वाशिंगटन भारत में भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले घटिया ईंधन के संपर्क में आने के कारण हर 1,000 शिशुओं और बच्चों में से 27 की मौत हो जाती है। अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। कोर्नेल विश्वविद्यालय में ‘चार्ल्स एच. डायसन स्कूल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक्स एंड मैनेजमेंट’ में प्रोफेसर अर्नब बसु समेत अन्य लेखकों ने ‘भोजन पकाने के ईंधन के विकल्प और भारत में बाल मृत्यु दर’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में 1992 से 2016 तक बड़े पैमाने पर घरों के सर्वेक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। आंकड़ों का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया गया कि प्रदूषण फैलाने वाले इन ईंधन का मनुष्य की सेहत पर क्या असर पड़ता है। इसमें पाया गया कि इसका सबसे ज्यादा असर एक माह की आयु तक के शिशुओं पर पड़ा है। बसु ने कहा कि यह ऐसा आयु वर्ग है जिसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं और शिशु सबसे ज्यादा अपनी मां की गोद में रहते हैं जो अक्सर घर में खाना पकाने वाली मुख्य सदस्य होती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खाना पकाने के घटिया ईंधन के संपर्क में आने के कारण हर 1,000 शिशु और बच्चों में से 27 की मौत हो जाती है। बासु ने बताया कि भारतीय घरों में इसके कारण लड़कों के बजाय लड़कियों की मौत ज्यादा होती हैं। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह नहीं है कि लड़कियां अधिक नाजुक या प्रदूषण से जुड़ी श्वसन संबंध बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं बल्कि इसकी वजह यह है कि भारत में बेटों को ज्यादा तरजीह दी जाती है और जब कोई बेटी बीमार पड़ती है या उसे खांसी शुरू होती है तो परिवार उसका इलाज कराने पर समुचित ध्यान नहीं देते हैं। बसु ने विश्वविद्यालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करने से न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा बल्कि बेटियों की उपेक्षा भी कम होगी।” विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी चूल्हे या स्टोव पर खाना पकाती हैं जिसमें ईंधन के तौर पर लकड़ी, उपले या फसलों के अपशिष्ट का इस्तेमाल किया जाता है जिससे दुनियाभर में हर साल 32 लाख लोगों की मौत होती है। बसु ने कहा कि बदलाव लाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, ‘‘ज्यादातर ध्यान बाहरी वायु प्रदूषण और फसलों के अपशिष्ट को जलाने के तरीकों पर केंद्रित रहता है। सरकारें पराली जलाने के खिलाफ कानून बना सकती हैं और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते अग्रिम भुगतान कर सकती हैं।” रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि घर के अंदर के प्रदूषण पर भी ध्यान देना उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अन्य कारकों के अलावा क्षेत्रीय कृषि भूमि स्वामित्व और वन क्षेत्र, घरेलू विशेषताएं और पारिवारिक संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

महाराष्ट्र के हिंगोली में 4.5 तीव्रता का भूकंप, नांदेड़-परभणी में महसूस किए गए भूकंप के झटके

अमरावती  महाराष्ट्र के हिंगोली, परभणी और नांदेड़ में बुधवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इस भूकंप से किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन दहशत के मारे लोग अपने घरों से बाहर जरूर निकल आए। मौसम विभाग के विज्ञान केंद्र के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, सुबह करीब 7.14 बजे क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। बता दें कि इसी साल मार्च महीने में भी हिंगोली में भूकंप आया था। भूकंप के यह झटके लगातार दो बार लगे थे। दूसरी बार आया झटका बेहद तेज था और काफी देर तक जमीन हिलती रही। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 4.5 रही थी। वहीं दूसरा भूकंप का झटका पहले झटके के 10 मिनट बाद 6 बजकर 19 मिनट पर लगा। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.6 थी। जिस समय भूकंप के झटके महसूस किए गए अधिकांश लोग सो रहे थे। वहीं इसी दिन अरुणाचल प्रदेश में भी दो बार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप क्यों आता है?धरती के अंदर कई तरह के प्लेट्स मौजूद हैं। पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स होते हैं। ये धरती के नीचे लगातार घूमती रहती है। जब ये आपस में टकराते हैं या इसमें हलचल होती है तो भूकंप आता है 6 साल में कई बार महसूस किए गए भूकंप के झटके कहा जा रहा है कि बीते 6 साल के कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए है। इसी साल 21 मार्च की सुबह 6.08 बजे भूकंप आया था, इस दौरान जमीन के अंदर से तेज आवाज आई थी। इसके बाद आज सुबह 7.15 बजे 4.5 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप के झटके नांदेड़ औक परभणी में भी महसूस किए गए। प्रशासन ने की लोगों से सतर्क रहने की अपील तहसील प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। तहसीलदार शारदा दलवी ने कहा कि आज सुबह भूकंप आया,प्रशासन नागरिकों की मदद कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिना घबराए प्रशासन का सहयोग करें। भूकंप का पहला झटका तो तेज था जिससे सो रहे लोग भी जाग गए थे और अपने घरों से बाहर निकल आए थे. इस दौरान किसी जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. क्यों आता है भूकंप? बता दें कि पृथ्वी पर 4 प्रमुख परतें हैं, जिनको आउटर कोर, इनर कोर, क्रस्ट और मेंटल कहते हैं. पृथ्वी के नीचे ये प्लेट्स घूमती रहती हैं. इनके आपस में टकराने से पृथ्वी के नीचे कंपन होती है और जब ये प्लेट्स खिसकती है तो भूकंप के झटके महसूस होते है. इसी जगह पर भूकंप का ज्यादा असर रहता है और अगर भूकंप की तीव्रता ज्यादा होती है तो भूकंप के झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं. ऐसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता? रिक्टर स्केल के जरिए भूकंप की तीव्रता का पता लगाया जाता है. रिक्टर स्केल पर 1 से 9 तक भूकंप के झटकों को मापते हैं. भूकंप के दौरान पृथ्वी के नीचे से ऊर्जा तरंगे निकलती है जिसे रिक्टर स्केल के जरिए मापते हैं. इसी से पता चलता है कि भूकंप की तीव्रता कितनी थी और इसका केंद्र कहा था.

प्रेम विवाह से नाराज लड़की पक्ष ने युवक को अगवा कर डीजल से जलाया

 पुणे महाराष्ट्र के पुणे में एक लड़की ने परिजनों की मर्जी विरुद्ध अंतरधार्मिक शादी (inter religious marriage) कर ली. इसके बाद लड़की के भाई ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर बहन के पति की हत्या कर दी. इस मामले में तीन लोगों पर केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने दो आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है. मृतक का नाम अमीर मोहम्मद शेख है. अमीर ने अंतरधार्मिक विवाह किया था. जानकारी के अनुसार, अमीर मोहम्मद शेख और एक लड़की के बीच प्रेम संबंध था. दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे. लड़की के परिजनों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. परिवार के खिलाफ जाकर दोनों ने अंतरधार्मिक विवाह कर लिया. शादी के बाद दोनों विवाद से बचने के लिए पुणे आकर रहने लगे. पांच-छह महीने से दोनों पुणे के मोशी में रह रहे थे. लड़की नाम बदलकर अरीना हो गई थी, वह अमीर के साथ रह रही थी. अमीर एक कंपनी में काम करता था. बीते महीने 15 जून को अमीर शेख कंपनी में काम पर जाने के लिए घर से निकला था, तभी अमीर को लड़की के भाई ने बुलाया और शराब पीने को कहा. फिर शराब लेने के बाद लड़की का भाई और दो अन्य आलंदी-चाकन रोड के पास जंगल में पहुंचे और शराब पीने लगे. सभी वहां शराब पी रहे थे, तभी लड़की के भाई ने अमीर को बुरी तरह पीटा. सिर पर पत्थर मारकर हत्या कर दी. साक्ष्य मिटाने के लिए शव को डीजल से जला दिया. हड्डियों और राख को बोरे में भरकर नदी में बहा दिया. लड़की का भाई बहन के अंतरधार्मिक विवाह से नाराज था. जब अमीर शेख घर नहीं पहुंचा तो उसकी पत्नी ने भोसरी एमआईडीसी पुलिस से शिकायत कर पति के लापता होने की बात कही. वहीं अमीर के पिता मोहम्मद शेख ने आशंका जताई कि बेटे का अपहरण कर हत्या कर दी गई है. इस मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. पुलिस ने पंकज और सुशांत नाम के आरोपियों को भिंगे अदगांव हिंगोली और लोनावला से गिरफ्तार कर लिया. वहीं तीसरा आरोपी गणेश फरार है, जो लड़की का चचेरा भाई है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. इस बीच शव को जलाने के लिए डीजल देने वाले को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. जांच में पता चला है कि ये सारी साजिश लड़की के भाई सुशांत ने रची थी.  

जेलेंस्की ने कहा कि मैं यूक्रेन की मदद और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अमेरिका के दृढ़ निश्चय के लिए उनका आभार जताता हूं

कीव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे चुके यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की इस समय अमेरिका में हैं. वह वॉशिंगटन में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) की बैठक में हिस्सा लेने वहां पहुंचे हैं. ऐस में उन्होंने रोनाल्ड रीगन इंस्टीट्यूट के मंच से कई अहम बातें कही. जेलेंस्की ने कहा कि मैं यूक्रेन की मदद और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अमेरिका के दृढ़ निश्चय के लिए उनका आभार जताता हूं. रूस के आतंक का खात्मा करना अब बहुत जरूरी हो गया है. जेलेंस्की ने यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि पुतिन कितने समय तक टिकेंगे इसका जवाब वाशिंगटन के पास है. उन्होंने कहा कि 20वीं सदी में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शब्द आज भी बहुत तर्कसंगत लगते हैं कि शांति के लिए रणनीति हमेशा से बहुत साधारण रही है कि मजबूत बने रहें ताकि कोई भी विरोधी एक पल के लिए ये ना सोचे कि युद्ध से लाभ हो सकता है. जेलेंस्की ने कहा कि रीगन ने 1988 में नाटो की स्ट्रैटेजी को लेकर ये बात कही थी. ऐसे में वॉशिंगटन में नाटो समिट की पूर्वसंध्या पर उनकी बातों को दोहराना प्रतीकात्मक है. लेकिन अब समय के गुजरने के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा लोग राष्ट्रपति रीगन की इन बातों से इत्तेफाक रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये शब्द अमेरिका के बारे में हैं. अमेरिका जिसे दुनिया महत्व देती है. रीगन ने ये भाषण 23 फरवरी 1988 को दिया था. इसके बाद आई 24 फरवरी की तारीख लेकिन एक अलग युग में. 24 फरवरी 2022 को रूस ने हमारी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन कर हम पर हमला किया था. जेलेंस्की ने कहा कि ये दिन रीगन की विरासत और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था जिसे वह संजोकर रखना चाहते थे, दोनों के लिए बड़ी चुनौती का दिन था. लेकिन क्या इसे अब संजोकर रखा गया है? अब हर कोई नवंबर का इंतजार कर रहा है. अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट, इंडो पैसिफिक और पूरी दुनिया की निगाहें नवंबर में होने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर है. पुतिन को भी इसका इंतजार है, लेकिन यह नवंबर क्या लेकर आएगा, उसके लिए भी तैयार रहने की जरूरत है. जेलेंस्की ने कहा कि यह समय किसी की भी परछाई से बाहर निकलने, मजबूत फैसले लेने, नवंबर या किसी अन्य महीने का इंतजार करने का नहीं बल्कि काम करने का है. हमें किसी भी हालात में समझौता नहीं करना है. पुतिन और उसकी फौज से लोकतंत्र की रक्षा करनी है, उनके आतंक से लाखों यूक्रेनवासियों को बचाना है. हम सभी ने मिलकर काम किया है, हमने एक दिन या एक मिनट का भी इंतजार नहीं किया. हम हर दिन जूझ रहे हैं और बिना झुके डटे हुए हैं. दुनिया ने देखा है कि पुतिन हार सकते हैं और लोकतंत्र जीत सकता है. जब ऐसा लगना असंभव लगे, तब भी हम जीत सकते हैं. उन्होंने कहा कि लेकिन हमने ऐसा सोचना कब से शुरू कर दिया कि कोई भी कदम उठाने से बेहतर देरी करना है? या जीत से बेहतर आंशिक समाधान है? और ऐसा कब लगने लगा कि आजादी की वकालत करना कथित तौर पर असुरक्षित है? या पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने के लिए पुतिन को सबक सिखाने से कथित तौर पर कोई फायदा नहीं होगा? जेलेंस्की ने कहा कि दुनिया अमेरिका के बिना सुरक्षित नहीं हो सकती. दुनियाभर के मामलों की परवाह किए बगैर अमेरिका ना तो वर्ल्ड लीडर बन सकता है और ना ही ड्रीममेकर. अमेरिका को अपनी ताकत को पहचानना चाहिए क्योंकि इससे दुनिया की आजादी महफूज रहती है. इस वजह से दुनिया अमेरिका को तरजीह देता है क्योंकि अमेरिका हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठता. उन्होंने कहा कि हमें मई-जून में बड़ी जीत मिली थी. हमने रूस की सेना को यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव में घुसने से रोक दिया था. हमारे लोगों की बहादुरी और रूस में सैन्य ठिकानों पर हमला करने की अमेरिका की मंजूरी से ये मुमकिन हो सका. मैं इसके लिए राष्ट्रपति बाइडेन का आभारी हूं. सत्ता में कितना टिक सकेंगे पुतिन? लेकिन पुतिन सत्ता में कितना टिकेंगे? इसका जवाब अमेरिका के पास है- इसका जवाब आपके नेतृत्व, आपके एक्शन, आपकी पसंद, कदम उठाने के आपके फैसले पर निर्भर करता है. नाटो समिट में कड़े फैसले लिए जाने की जरूरत है और हम उनका इंतजार कर रहे हैं. 75 सालों तक यूरोप के लोग आश्वस्त हो सकते थे कि नाटो के बीच मतभेद से कोई फर्क नहीं पड़ता दशकों तक दुनिया क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों पर निर्भर रहा है. क्या ये सिद्धांत अभी भी बने हुए हैं? यूक्रेन, रूस के पड़ोसी और अमेरिका के सहयोगी राष्ट्रों को इसके जवाब की जरूरत है.  

भारत को रूस से 6 और परमाणु ऊर्जा संयंत्र मिलेंगे, पीएम मोदी और पुतिन ने लोकेशन और डिजाइन पर की चर्चा

नईदिल्ली अब इस मौके पर फैसले को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉस्को की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनके आधिकारिक निवास स्थान क्रेमलिन में मुलाकात की थी। यहां दोनों नेताओं ने यहां चाय पर चर्चा की और बाद में द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया, जिसमें रूसी सरकार के स्वामित्व वाले रोसाटॉम ने 6 नए न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने भारत की मदद करने की पेशकश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय रूस यात्रा के दौरान, नई दिल्ली और मॉस्को ने व्यापार, ऊर्जा, जलवायु और अनुसंधान सहित कई क्षेत्रों में 9 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई बड़ी परियोजनाओं को लेकर सहमति बनी, जिसमें रूस के सहयोग से भारत में 6 नए न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने पर भी बातचीत हुई. रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसाटॉम (Rosatom) इन न्यूक्लियर पावर प्लांट्स को बनाने में भारत की मदद करेगी. बता दें कि रूसी एजेंसी पहले भी कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) को स्थापित करने में भारत की मदद कर चुकी है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉस्को की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनके आधिकारिक निवास स्थान क्रेमलिन में मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने यहां चाय पर चर्चा की और बाद में द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया, जिसमें रूसी सरकार के स्वामित्व वाले रोसाटॉम ने 6 नए न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने भारत की मदद करने की पेशकश की. इसके अलावा रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (Russian Direct Investment Fund) ने फार्मा, जहाज निर्माण और शिक्षा क्षेत्र में भारत के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए.  रूस के दूसरे सबसे बड़े बैंक ने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने पर पेमेंट फ्लो को आसान बनाने के प्रयासों पर भारत के साथ बात की. रोसाटॉम ने एक बयान में कहा कि भारत के साथ सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की जा रही है- एक नई साइट पर रूसी डिजाइन की 6 और हाई-पावर न्यूक्लियर यूनिट्स का निर्माण और कुछ छोटे परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने में भारत का सहयोग करने पर हमारी बातचीत हुई है. इसी साल मई महीने में रोसाटॉम ने भारत को फ्लोटिंग परमाणु ऊर्जा संयंत्र (FNPP) के निर्माण और संचालन की तकनीक ऑफर की थी. रूस के पास है फ्लोटिंग न्यूक्लियर पावर प्लांट वर्तमान में रूस ही दुनिया का एकमात्र देश है जिसके पास पानी पर तैरता हुआ परमाणु ऊर्जा संयंत्र है. इस परमाणु संयंत्र को एकेडेमिक लोमोनोसोव जहाज (Akademik Lomonosov) पर असेंबल किया गया है. रूस के पेवेक में बिजली सप्लाई इसी फ्लोटिंग न्यूक्लियर पावर प्लांट से हो रही है. पेवेक नॉर्थ आर्कटिक में स्थित रूस का एक बंदरगाह शहर है. रूस के अलावा अन्य कोई देश अब तक फ्लोटिंग न्यूक्लियर पावर प्लांट की तकनीक विकसित नहीं कर सका है. इस तरह के संयंत्र से दूरदराज के क्षेत्रों या समुद्र में स्थित द्वीपों तक भी निर्बाध बिजली सप्लाई की जा सकती है. ​रोसाटॉम और भारत उत्तरी समुद्री मार्ग (Northern Sea Route) की ट्रांजिट क्षमता को विकसित करने पर भी चर्चा कर रहे हैं. यह समुद्री मार्ग नॉर्वे के साथ रूस की सीमा के पास मरमंस्क से पूर्व की ओर अलास्का के पास बेरिंग जलडमरूमध्य तक फैला है. इस सी रूट का विशेष रूप से रूसी तेल, कोयला और लिक्विड नेचुरल गैस की आपूर्ति के लिहाज से काफी  महत्व है. रूस को उम्मीद है कि एनएसआर के जरिए वह 2030 तक 150 मिलियन मीट्रिक टन का परिवहन कर सकेगा, जो इस वर्ष  80 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक रहा है. रूस के सहयोग से बना है कुडनकुलम संयंत्र  कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam NPP or KKNPP) भारत का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर स्टेशन है, जो दक्षिणी भारतीय राज्य तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम में स्थित है. भारत और रूस के बीच हुए समझौते के तहत लगभग दो दशक पहले (31 मार्च, 2002) इस संयंत्र की पहली दो इकाइयों का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन स्थानीय मछुआरों के विरोध के कारण इसे देरी का सामना करना पड़ा. इस न्यूक्लियर पावर प्लांट में रूसी द्वारा डिजाइन  किए गए VVER-1000 रिएक्टरों का उपयोग होता है.  कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से 6,000 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है. इस संयंत्र में रूस की सरकारी कंपनी एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट (Atomstroyexport) और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के सहयोग से छह VVER-1000 रिएक्टर बनाए जाने हैं, जिनमें से दो रिएक्टरों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है और उनसे बिजली उत्पादन भी हो रहा है. यूनिट 1 को 22 अक्टूबर 2013 को दक्षिणी पावर ग्रिड के साथ सिंक्रनाइज किया गया था और तब से यह, 1000 मेगावाट की अपनी निर्धारित क्षमता के साथ बिजली पैदा कर रहा है. यूनिट 2 का काम 10 जुलाई 2016 को पूरा हुआ था और इसी साल 29 अगस्त को इसे पावर ग्रिड के साथ सिंक्रनाइज किया गया. यूनिट 3 और 4 के निर्माण के लिए ग्राउंड-ब्रेकिंग सेरेमनी 17 फरवरी 2016 को किया गया था और ये दोनों रिएक्टर निर्माणाधीन है. यह भारत में सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन संयंत्र है जो अपने सभी 6 रिएक्टरों के चालू हो जाने के बाद 6 गीगावाट (1 गीगावाट = 1000 मेगावाट) इलेक्ट्रिसिटी का प्रोडक्शन करता है. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की दोनों इकाइयां वाटर-कूल, वाटर-मॉडरेटेड रिएक्टर हैं. स्थानीय लोग 1979 में प्रस्तावित होने के बाद से ही इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे. कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का हुआ था विरोध विरोध के कारण इस परियोजना को रोक दिया गया था. हालांकि, वर्ष 2000 में इस पर दोबारा काम शुरू हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण शुरू हुआ. 2011 में, जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु दुर्घटना के बाद कुडुकुलम संयंत्र के आसपास के हजारों लोगों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने तमिलनाडु में भी फुकुशिमा जैसी परमाणु आपदा की आशंका जतायी. हालांकि, 2012 में, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के प्रमुख डॉ. श्रीकुमार बनर्जी ने इस संयंत्र को दुनिया के सबसे सुरक्षित न्यूक्लियर प्लांट में से एक बताया था. वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी जिसमें सुरक्षा चिंताओं का मूल्यांकन होने तक  कुडुकुलम संयंत्र में नए रिएक्टरों के निर्माण और पहले से स्थापित रिएक्टर से बिजली उत्पादन रोकने की मांग की … Read more

पूरे भारत में भारी बारिश के बीच, सितंबर 2023 के बाद पहली बार देश के मुख्य जलाशयों का जलस्तर बढ़ा

नई दिल्ली केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि पूरे भारत में भारी बारिश के बीच, सितंबर 2023 के बाद पहली बार देश के मुख्य जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ 29 सितंबर 2023 को जारी बुलेटिन के बाद से दर्ज की गई सप्ताह-दर-सप्ताह आने वाली गिरावट रुक गई है। उस समय इनकी भंडारण क्षमता 73 प्रतिशत थी। यह सुधार देशभर में व्यापक वर्षा के बीच हुआ है। देशभर के 150 जलाशयों की भंडारण स्थिति की निगरानी करने वाली सीडब्ल्यूसी ने चार जुलाई को इन घटनाक्रम का विवरण देते हुए अपना नवीनतम बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन के अनुसार, 150 जलाशयों में से 20 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए समर्पित हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 35.30 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। सीडब्ल्यूसी के चार जुलाई के बुलेटिन में कहा गया कि इन जलाशयों में उपलब्ध भंडारण क्षमता 39.729 बीसीएम थी जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का 22 प्रतिशत है। इसकी तुलना में, पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान उपलब्ध संग्रहण स्तर 50.422 बीसीएम था, जबकि सामान्य संग्रहण स्तर 44.06 बीसीएम था। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि इससे पता चलता है कि वर्तमान भंडारण क्षमता पिछले वर्ष की इसी अवधि की 79 प्रतिशत तथा सामान्य भंडारण क्षमता की 90 प्रतिशत है। उत्तरी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान) में 10 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 19.663 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण 5.39 बीसीएम (27 प्रतिशत) है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 45 प्रतिशत था, जबकि सामान्य भंडारण क्षमता 31 प्रतिशत है। पूर्वी क्षेत्र (असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नगालैंड और बिहार) में 23 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 20.430 बीसीएम है। यहां वर्तमान भंडारण 3.979 बीसीएम (19 प्रतिशत) है, जो पिछले वर्ष के 20 प्रतिशत से कम है तथा सामान्य स्तर 23 प्रतिशत है। पश्चिमी क्षेत्र (गुजरात और महाराष्ट्र) में 49 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 37.130 बीसीएम है। वर्तमान में भंडारण 7.949 बीसीएम (21 प्रतिशत) है, जबकि पिछले वर्ष यह 27 प्रतिशत था, जबकि सामान्य भंडारण स्तर 22 प्रतिशत है। मध्य क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ) में 26 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 48.227 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण 12.26 बीसीएम (25 प्रतिशत) है, जबकि पिछले साल यह 35 प्रतिशत था और सामान्य भंडारण स्तर 26 प्रतिशत है। दक्षिणी क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु) में 42 जलाशय हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 53.334 बीसीएम है। वर्तमान भंडारण स्तर 10.152 बीसीएम (19.03 प्रतिशत) है, जो पिछले साल के 19.43 प्रतिशत से कम है और सामान्य स्तर 24 प्रतिशत है। बुलेटिन में सामान्य भंडारण स्तर को पिछले 10 वर्षों के औसत भंडारण के रूप में परिभाषित किया जाता है। सम्रग रूप से भंडारण स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि तथा इसी अवधि के दौरान सामान्य भंडारण दोनों से कम है। ब्रह्मपुत्र, साबरमती और ताद्री से कन्याकुमारी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में जल भंडारण सामान्य से बेहतर देखा गया है। सिंधु, सुवर्णरेखा, माही और अन्य नदियों में जल भंडारण सामान्य के करीब पाया गया है। महानदी, कावेरी, ब्राह्मणी और वैतरणी नदियों में जल भंडारण कम है। पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियों और अन्य समान नदियों में जल भंडारण अत्यधिक कम है।    

विहिप ने राज्य सरकारों से हिंदू मंदिरों और तीर्थ स्थलों के क्षेत्रों से मुस्लिम दुकानों को बंद करवाने की मांग की

नई दिल्ली  विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सभी राज्य सरकारों से हिंदू मंदिरों और तीर्थ स्थलों के क्षेत्रों से मुस्लिम दुकानों को बंद करवाने की मांग की है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा ने कहा कि उन्हें अनेक स्थानों से जानकारी मिली है कि जो लोग ‘भारत माता की जय’ या ‘वंदे मातरम’ भी नहीं बोल सकते और मूर्ति पूजा के विरोधी हैं, वे छद्म नामों से या हिंदू देवी-देवताओं के नामों से या हिंदू आस्था केंद्रों के नाम से हिंदू धर्म स्थलों पर प्रसाद और पूजा सामग्री बेच रहे हैं। देशभर से अनेकों प्रत्यक्ष ऐसी घटनाएं सामने आईं हैं, जहां सब्ज़ियों सहित अन्य खाद्य एवं पेय सामग्रियों पर थूककर उन्हें अपवित्र करने के बाद श्रद्धालुओं को बेचा जाता है, जिससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। विहिप महामंत्री ने आगे कहा कि देश के अनेक तीर्थों में भगवान के भोग, श्रृंगार व अर्पण इत्यादि से जुड़ी अनेक वस्तुओं को मुस्लिम समाज के लोग अपवित्र कर बेच रहे हैं, जो कि हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ है, जिसे अविलंब रोका जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सभी राज्य सरकारों से मांग करती है कि वे हिंदू मंदिरों व धर्मस्थलों की पवित्रता को बनाए रखने हेतु मजहबी धोखेबाजों के विरुद्ध तुरंत प्रभावी कदम उठाएं, जिससे समाज की आस्था व विश्वास को किसी प्रकार की क्षति ना पहुंचे। साथ ही वे हिंदू समाज से भी अपील करते हैं कि ऐसे धर्मद्रोहियों से सावधान रहकर उन्हें बेनकाब करें और स्थानीय शासन-प्रशासन को समय पर सूचित करें।    

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये

वारसॉ  यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है। वाशिंगटन में शुरू हो रहे उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों द्वारा द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने  बताया कि समझौते में यूक्रेन के लिए पोलैंड के निरंतर रक्षा समर्थन, विशेष रूप से वायु रक्षा का जिक्र है। इसके साथ ही पोलैंड ने यूक्रेन को ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करने और पुनर्निर्माण में भाग लेने का भी आश्वासन दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) और 19 देशों ने यूक्रेन के साथ इसी तरह के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेज में व्यावहारिक द्विपक्षीय प्रतिबद्धताएं शामिल हैं, न कि केवल खोखले वादे। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रक्षा सहयोग और यूक्रेन के सुरक्षाबलों की जरूरतें उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं हैं। वह एक शांतिपूर्ण और मजबूत यूक्रेन के साथ-साथ एक शांतिपूर्ण और मजबूत पोलैंड के निर्माण में विश्वास करते हैं। इससे पहले सोमवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा से मुलाकात की। वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों के बारे में पोलैंड के राष्ट्रपति को जानकारी दी। जेलेंस्की ने बताया कि हमने इस बात पर चर्चा की कि हमारे लोगों को अधिक सुरक्षा देने के लिए क्या आवश्यक है। उन्होंने उद्घाटन शांति शिखर सम्मेलन के महत्व के साथ-साथ यूक्रेन और पोलैंड के बीच सुरक्षा समझौते पर भी ध्यान दिया।  

बुढ़ापा कटेगा आराम से, अब हर महीने मिलेंगे 10,000 रुपये पेंशन, APY की रकम बढ़ाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली  केंद्र सरकार अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) में न्यूनतम भुगतान को दोगुना कर सकती है ! माना जा रहा है कि सरकार बजट में इस बारे में घोषणा कर सकती है ! अगर ऐसा होता है तो इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) में रजिस्ट्रेशन कराने वालों को दोगुनी पेंशन का लाभ मिलेगा ! Atal Pension Yojana , न्यूनतम राशि बढ़ाने पर विचार आपको बता दें कि फिलहाल अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) के तहत हर महीने 5000 रुपये दिए जाते हैं, जिसे दोगुना करके 10000 रुपये प्रति महीने करने पर विचार किया जा रहा है ! पिछले महीने पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन दीपक मोहंती ने कहा था कि 2023-24 में अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) के तहत नामांकन योजना शुरू होने के बाद से सबसे अधिक रहा है ! आपको बता दें कि इस सामाजिक सुरक्षा योजना को वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया था ! वित्त मंत्री ने कही थी ये बात गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) को गारंटीड पेंशन राशि वाली किफायती योजना के तौर पर डिजाइन किया गया है ! सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) ने अपनी शुरुआत से अब तक 9.1% रिटर्न दिया है और यह अन्य बचत योजनाओं की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है ! मैच्योरिटी के आधार पर मिलती है पेंशन इस अटल पेंशन योजना ( APY Pension Scheme ) के तहत खाता खोलने पर लोगों को मैच्योरिटी पर 1 हजार से 5 हजार रुपये तक मासिक पेंशन मिलती है ! यह अटल पेंशन योजना ( Atal Pension Yojana ) में निवेश की गई राशि पर निर्भर करता है !  सरकार अपनी प्रमुख सोशल सिक्योरिटी स्कीम अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana) के तहत न्यूनतम गारंटीड राशि को दोगुना कर 10,000 रुपये कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार इसके राजकोषीय प्रभाव का आकलन कर रही है तथा बजट से पहले इस पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार देश में सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना चाहती है क्योंकि वह सामाजिक सुरक्षा पर लेबर कोड लागू करने के लिए आधार तैयार कर रही है। 20 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक अटल पेंशन योजना में कुल 6.62 करोड़ लोगों ने खाते खोले थे। साल 2023-24 में 1.22 करोड़ नए खाते खोले जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि अटल पेंशन योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें गारंटीड राशि बढ़ाना भी शामिल है। इन पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में, सरकार द्वारा गारंटीकृत लाभ के साथ, अंशदान के आधार पर 1,000-5,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। पिछले महीने पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक मोहंती ने कहा था कि 2023-24 में अटल पेंशन योजना के तहत एनरॉलमेंट 2015 में योजना के शुभारंभ के बाद से सबसे अधिक था। किसे नहीं मिलता है फायदा पेंशन रेगुलेटर ने पेंशन राशि में बढ़ोतरी की वकालत की है। उसका कहना है कि मौजूदा राशि समय के साथ अपनी वैल्यू बरकरार नहीं रख पाएगी। इस साल की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अटल पेंशन योजना को एक किफायती योजना के रूप में डिजाइन किया गया है जिसमें पेंशन राशि की गारंटी है। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस योजना ने शुरुआत से ही 9.1% रिटर्न दिया है और यह अन्य बचत योजनाओं की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है। वित्त मंत्री ने कहा कि अटल पेंशन योजना गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिए एक सब्सिडी वाली योजना है और यह स्पष्ट है कि अधिकांश पेंशन खाते निचले स्लैब में हैं। साल 2015-16 में शुरू की गई अटल पेंशन योजना को नेशनल पेंशन स्कीम के माध्यम से PFRDA द्वारा प्रशासित किया जाता है। इस योजना में मृत्यु या लाइलाज बीमारी के मामलों को छोड़कर 60 वर्ष की आयु में पेंशन फंड के 100% एन्युटी के साथ योजना से बाहर निकलने की अनुमति है। बाहर निकलने पर ग्राहक को पेंशन उपलब्ध होती है। इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले लोग इस योजना में शामिल होने के पात्र नहीं हैं।  

भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने उच्च स्तरीय राजनीतिक फोरम एचएलपीएफ के उद्घाटन के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। योजना पटेल ने कहा कि हम ऐसे समय में मिले रहे हैं, जब दुनिया इस दर्दनाक सच्चाई का सामना कर रही है कि एसडीजी लक्ष्यों में से केवल 12 प्रतिशत ही अभी ट्रैक पर है। इसलिए 2030 एजेंडा और इसके लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने की तत्काल जरूरत है। भारत ने एसडीजी को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीतियों में पूरी तरह से शामिल किया है। एसडीजी यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल भविष्य के अंतरराष्ट्रीय विकास संबंधित लक्ष्यों के सेट हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाया गया है और वैश्विक लक्ष्यों के समान प्रचारित किया गया है। राजदूत योजना पटेल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एसडीजी के समाधान के लिए कई केंद्रित हस्तक्षेप भी शुरू किए गए हैं। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय थिंक टैंक नीति आयोग एसडीजी को लागू करने में केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों दोनों का मार्गदर्शन कर रहा है। नीति आयोग ने एक गवर्निंग काउंसिल बनाई है, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। वह एसडीजी की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और इसकी समीक्षा राज्य सरकारों द्वारा भी की जाती है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग एसडीजी की प्रगति पर नजर रखने और महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने के लिए विभिन्न सूचकांकों का भी इस्तेमाल करता है। भारत को अपने एसडीजी स्थानीयकरण मॉडल पर गर्व है, जो चार स्तंभों, संस्थागत स्वामित्व, सहयोगात्मक प्रतिस्पर्धा, क्षमता निर्माण और पूरे समाज के दृष्टिकोण पर आधारित है। भारत के मजबूत आर्थिक विकास सूचकांक प्रणालीगत सुधारों, समावेशी नीतियों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लाभ से आते हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा शुरू किया गया आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) 112 पिछड़े जिलों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एडीपी की सफलता ने आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की शुरुआत की है। भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की इच्छा रखता है, जो हमारी स्वतंत्रता का 100वां वर्ष होगा। भारत सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और 2030 एजेंडा को साकार करने की वैश्विक प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा खड़ा है।  

बाढ़ से असम में मचा हाहाकार! 18.80 लाख लोग अब भी प्रभावित,अबतक 85 की मौत

गुवाहाटी  असम में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, हालांकि अब भी 27 जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या करीब 18.80 लाख है। अधिकारियों नेयह जानकारी दी।अधिकारियों ने बताया कि राज्य में छह और लोगों की मौत हो जाने से इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। ब्रह्मपुत्र सहित कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं तथा कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। अधिकारियों ने बताया कि अब 27 जिलों में 18,80,700 लोग प्रभावित हैं जबकि  करीब 22.75 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित थे। राज्य में धुबरी जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां करीब 4.75 लाख लोग बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद कछार में दो लाख से अधिक लोग और बारपेटा में करीब 1.36 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन 25 जिलों में 543 शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है तथा वर्तमान में 3,45,500 विस्थापित लोगों की देखभाल कर रहा है।राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ( एसडीआरएफ) सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहाटी स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने  बताया कि अगले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ बारिश हो सकती है।  असम के मौजूदा हालात पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, बाढ़ से प्रभावित 22.75 लोगों की तुलना में रविवार को 27 जिलों में 18.80 लाख प्रभावित थे। बाढ़ के कारण धुबरी बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 4.75 लाख लोग बाढ़ के पानी में रहने को मजबूर है। इसके अलावा कछार में 2.01 लाख लोग और बारपेटा में 1.36 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की तरफ से राहत शिविरों का आयोजन प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 25 जिलों में 543 राहत शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में 3,45,500 लोग रह रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एसडीआरएफ सहित कई एजेंसियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुवाहटी में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि असम और आसपास के राज्यों में चक्रवात का खतरा बना हुआ है।   ब्रह्मपुत्र नदी निमती घाट, तेजपुर, गुवाहाटी और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अन्य प्रमुख नदियां सुबनसिरी ( बदाती घाट), बुरहिडीहिंग (चेनिमारी), दिखौ (शिवसागर), दिसांग ( नांगलमुराघाट), कोपिली (धरमतुल ), बराक (बी पी घाट), संकोश (गोलोकगंज) और कुशियारा ( करीमगंज) भी खतरे के निशान को पार कर गई हैं ।    

मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित

नई दिल्ली  पूर्वी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व में एक अकेली मादा घड़ियाल देखी गयी जो इस क्षेत्र में घडियालों की संख्या को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकती है। मादा घड़ियाल का बह्मपुत्र नदी के किनारे पाये जाने से सभी आश्चर्यचकित है। वर्ष 1950 के दशक से इस नदी से घड़ियाल विलुप्त हो गये थे। सर्वेक्षण में मादा घड़ियाल अपनी प्रजाति की एकमात्र ऐसी घड़ियाल पाई गई जो “रेतीले तट” और “4.5 मीटर गहरे जल वाले रेतीले टीले” के बीच रहती है। इस मादा घड़ियाल को पहली बार 2021 में काजीरंगा के बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में देखा गया था। इस घड़ियाल की लंबाई 2.55 मीटर है। इसे जनवरी में ब्रह्मपुत्र पर जलीय सरीसृपों के 10 दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान चुनी गई तीन प्राथमिकता वाले ठिकानों में से एक में 500 मीटर की दूरी पर नदी के तट पर बालू पर दो बार धूप सेंकते हुये देखा गया था। जानकारों का मानना है कि घड़ियालों की आबादी बढ़ाने की स्वीकृति मिलने पर उत्तर प्रदेश के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से घड़ियाल यहां लाये जा सकते है। इसका उद्देश्य घड़ियालों को उनके ऐतिहासिक क्षेत्र में वापस लाना और इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के अस्तित्व को बचाना है। वन्यजीव अधिकारियों और विशेषज्ञों को अभी यह पता नहीं चला कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के भीतर ब्रह्मपुत्र नदी के एक हिस्से में यह घड़ियाल कैसे आ गया, लेकिन उन्हें यकीन है कि यह सरीसृप नदी को घड़ियालों से फिर से आबाद करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अपनी लम्बी थूथन के कारण अन्य मगरमच्छों से बिल्कुल भिन्न इस घड़ियाल ( गेवियलिस गैंगेटिकस ) के बारे में माना जाता है कि यह 1950 के दशक में ब्रह्मपुत्र नदी से विलुप्त हो गये थे, हालांकि 1990 के दशक में इसे देखने के दावे भी किये गये थे। सरीसृपों में विशेषज्ञता रखने वाली गैर सरकारी संस्था टर्टल सर्वाइवल अलायंस फाउंडेशन इंडिया (टीएसएएफआई) और असम वन विभाग की टीमों ने पश्चिम में कलियाभोमोरा पुल से लेकर बिश्वनाथ डिवीजन के पूर्वी छोर से आगे माजुली के कमलाबाड़ी घाट तक 160 किलोमीटर के क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र का सर्वेक्षण किया। टीएसएएफआई की परियोजना निदेशक सुष्मिता कार ने कहा, “हम इस उपयुक्त आवास में घड़ियालों को पुनः स्थापित करने के लिए प्रस्ताव करते हैं।” काजीरंगा की निदेशक सोनाली घोष ने घड़ियाल प्रजनन कार्यक्रम के लिए क्षेत्र की आदर्श स्थितियों पर प्रकाश डाला, जिसमें न्यूनतम मानवजनित व्यवधान और प्रचुर मछली आबादी का हवाला दिया गया।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet