LATEST NEWS

देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है: संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार

नई दिल्ली  कोरोना वायरस के नए ‘सिंगापुर वेरिएंट’ की भारत में पुष्टि के बीच ICMR-NIV ने देशवासियों को राहत की खबर दी है। संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है और फिलहाल जो वेरिएंट्स फैल रहे हैं, उनके लक्षण सामान्य और हल्के हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसका असर उतना घातक नहीं है जितना पहले देखा गया था। ऐसे में घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। डॉ. कुमार ने कहा, “हम कोविड के वेरिएंट्स की जीनोमिक जांच और डायग्नोसिस कर रहे हैं। सिंगापुर और उसके आसपास के देशों में मामलों की बढ़ोतरी के बाद हमने देखा कि वही वेरिएंट भारत में भी पिछले 5-6 हफ्तों से देखा जा रहा है। हमने इस पर अपनी निगरानी और टेस्टिंग बढ़ा दी है।” भारत में अभी कौन-कौन से वेरिएंट एक्टिव? ICMR-NIV के अनुसार, भारत में इस समय JN.1, LF.7, XFG और NB.1.8.1 जैसे ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट्स सक्रिय हैं। डॉ. कुमार के मुताबिक, “हमने इन सभी वेरिएंट्स को आइसोलेट कर लिया है और अभी तक इनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं। ज़्यादातर संक्रमण हल्के ही हैं।” सरकार की तैयारी ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने ANI से बातचीत में कहा कि सरकार तीन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दे रही है, जिसमें संक्रमण की गति और केसों में तेजी, क्या वायरस हमारी प्राकृतिक या वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी से बच निकल रहा है? क्या ये वेरिएंट पहले से ज्यादा गंभीर हैं या फिर ओमिक्रॉन जैसे हल्के हैं, शामिल हैं। उन्होंने कहा, “फिलहाल ज़्यादातर मामलों में लक्षण ओमिक्रॉन जैसे ही हल्के और सामान्य हैं।” सरकार की रणनीति डॉ. बहल ने यह भी बताया कि अगर कोई नया वेरिएंट उभरता है, तो सरकार के पास दो विकल्प हैं- एक मौजूदा वैक्सीन की प्रभावशीलता की जांच करना और दूसरा विशेष रूप से नए वेरिएंट को टारगेट कर नई वैक्सीन बनाना। उन्होंने आगे कहा, “हमारी वैक्सीन डेवलपमेंट क्षमता तैयार है और ज़रूरत पड़ने पर नई वैक्सीन जल्द विकसित की जा सकती है। अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है।”  

पीएम मोदी ने बताया- क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 शिक्षा जगत के लिए अच्छी खबर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारतीय विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। पीएम मोदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक एक्स पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आई है। हमारी सरकार भारत के युवाओं के लाभ के लिए अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा, “वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ 54 उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल होने के साथ भारत ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग में एक नया मुकाम हासिल किया है। साल 2014 में सिर्फ 11 संस्थानों से अब 54 तक, यह लगभग पांच गुना वृद्धि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए परिवर्तनकारी शैक्षिक सुधारों को दर्शाती है। मुझे विश्वास है कि अनुसंधान, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीयकरण पर एनईपी पर जोर के साथ आने वाले समय में और अधिक भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान वैश्विक उत्कृष्टता हासिल करेंगे।” आपको बता दें, गुरुवार को जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में कुल 54 भारतीय संस्थानों को शामिल किया गया है, जो भारत के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली शीर्ष रैंक वाला भारतीय संस्थान बनकर उभरा है, जो वैश्विक स्तर पर 150वें स्थान से 123वें स्थान पर पहुंच गया है, जो अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। शिक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया, “आईआईटी दिल्ली भारत के शीर्ष रैंक वाले संस्थान के रूप में अग्रणी है। यह क्यूएस रैंकिंग में संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक ऊंचाई है।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने क्यूएस रैंकिंग में प्रतिनिधित्व में 390 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की है, जो जी-20 देशों में सबसे तेज है। पिछले साल की रैंकिंग में भारत का शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे इस साल 118वें स्थान से फिसलकर 129वें स्थान पर आ गया है। इस वर्ष भारत के लगभग 48 प्रतिशत विश्वविद्यालयों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। वैश्विक शीर्ष 100 में पांच भारतीय संस्थानों ने भी स्थान प्राप्त किया है।

छात्र वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी विद्यार्थियों के लिए फिर खोले द्वार, वीजा के लिए नई रखी शर्त

वाशिंगटन  अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि वह छात्र वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी विद्यार्थियों के लिए निलंबित प्रक्रिया को फिर से शुरू कर रहा है, लेकिन अब सभी आवेदकों को सरकारी समीक्षा के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘अनलॉक’ रखने होंगे। विभाग ने कहा कि वाणिज्य दूतावासों के अधिकारी उन पोस्ट और संदेशों पर नजर रखेंगे जिन्हें अमेरिका, उसकी सरकार, संस्कृति, संस्थानों या संस्थापक सिद्धांतों के लिए शत्रुतापूर्ण माना जा सकता है। बुधवार को सार्वजनिक किए गए एक नोटिस में, विभाग ने कहा कि उसने छात्र वीजा प्रक्रिया के निलंबन के अपने मई के आदेश को रद्द कर दिया है, लेकिन कहा कि नए आवेदक जो अपने सोशल मीडिया अकाउंट को ‘सार्वजनिक’ करने और उनकी समीक्षा करने की अनुमति देने से इनकार करते हैं, उनके आवेदन को खारिज किया जा सकता है। उसने कहा कि ऐसा करने से इनकार करना इस बात का संकेत हो सकता है कि वे बचने या अपनी ऑनलाइन गतिविधि को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने अमेरिका में अध्ययन करने की उम्मीद कर रहे विदेशी छात्रों के लिए नए वीजा साक्षात्कारों की समय-सारणी को अस्थायी रूप से रोक दिया था, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधि पर निगरानी का विस्तार करने की तैयारी कर रहा था।   दुनिया भर के छात्र उत्सुकता से अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों द्वारा वीजा साक्षात्कार के लिए समय देने की प्रक्रिया फिर से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि शिक्षण वर्ष की शुरुआत से पहले उनके पास यात्रा की बुकिंग करने और आवास की व्यवस्था करने के लिए कम समय बचा है। बुधवार दोपहर को, टोरंटो में 27 वर्षीय एक पीएचडी छात्र को अगले सप्ताह वीजा साक्षात्कार के लिए समय दिया गया। इस चीनी छात्र को जुलाई के अंत में शुरू होने वाली एक शोध इंटर्नशिप के लिए अमेरिका की यात्रा करने की उम्मीद है। चीन, भारत, मेक्सिको और फिलीपीन के छात्रों ने सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट किया है कि वे वीजा बुकिंग वेबसाइटों पर नजर रख रहे हैं और विदेश विभाग की प्रेस ब्रीफिंग को बारीकी से देख रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि साक्षात्कार के लिए समय आवंटित करने की प्रक्रिया पुन: कब शुरू हो सकती है। वीजा प्रक्रिया को फिर से शुरू करते हुए विदेश विभाग ने वाणिज्य दूतावासों से उन छात्रों को प्राथमिकता देने के लिए भी कहा, जो उन कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं, जहां विदेशी छात्रों की संख्या 15 प्रतिशत से कम है। यह जानकारी अमेरिका के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर दी।    

मौसम विभाग ने बताया- दिल्ली में हल्की बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी, मौसम रहेगा सुहावना

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में हो रही बारिश ने लोगों को तेज गर्मी से राहत दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी 24 जून तक मौसम सुहावना बने रहने की संभावना जताई है। गुरुवार के लिए दिल्ली में हल्की बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी के अनुसार, इस सप्ताह के अंत तक मानसून दिल्ली समेत उत्तर भारत के और इलाकों में पहुंच सकता है। आज का मौसम – तापमान और हवाएं अधिकतम तापमान: 34 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान: 23 डिग्री सेल्सियस तेज हवाएं: 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं दिल्ली में बारिश से प्रदूषण में सुधार बारिश के बाद राजधानी की वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार देखा गया। गुरुवार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 153 रिकॉर्ड किया गया जो मध्यम श्रेणी में आता है। दिल्ली के प्रमुख इलाकों में वायु गुणवत्ता इस प्रकार रही-पूसा में 113, पंजाबी बाग में100, नॉर्थ कैंपस में 104 रही।   उत्तर प्रदेश में बदलेगा मौसम, कई जिलों में बारिश की संभावना यूपी के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। काशी, चंदौली, जौनपुर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, लखनऊ, हरदोई, संभल, झांसी, जालौन और अमेठी में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लखनऊ और रायबरेली में तेज बारिश का अनुमान है। बिहार में मानसून सक्रिय, कई जिलों में अलर्ट पटना, दरभंगा, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और अररिया जैसे जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने किसानों और नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। राजस्थान, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी प्रभाव राजस्थान के जयपुर, डूंगरपुर, जोधपुर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, चुरू और सीकर में हल्की वर्षा का अनुमान इन राज्यों में ऑरेज अलर्ट जारी असम, मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा में ऑरेंज अलर्ट, भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे सफर पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें।  

चलती ट्रेन में महिला कोच में अश्लील हरकत, कैमरे में कैद हुआ आरोपी, टोकने पर भड़का, ट्रेन से कूदने की कोशिश

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाने वाली मुंबई में लोकल ट्रेनें जहां लाखों यात्रियों की जीवनरेखा हैं, वहीं आए दिन इनमें हो रही सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला 14 जून को सामने आया, जब एक शख्स ने महिला कोच में घुसकर बेहद अश्लील हरकतें कीं, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैमरे में कैद हुई शर्मनाक हरकत घटना शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे की है, जब भीड़भाड़ वाले समय में एक महिला पत्रकार ने उस व्यक्ति की हरकतों को कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी व्यक्ति न सिर्फ महिला कोच में गलत तरीके से घुसा, बल्कि अपनी पैंट की ज़िप खोलने और उसे उतारने की कोशिश भी करता रहा। इस दौरान वह महिलाओं को घूरता भी नजर आया। टोकने पर भड़का, ट्रेन से कूदने की कोशिश जब यात्रियों ने उस पर सवाल उठाए और उसे बाहर निकलने के लिए कहा गया, तो वह आक्रामक हो गया और गुस्से में ऐसा बर्ताव करने लगा मानो वह चलती ट्रेन से कूदने की कोशिश करेगा। हालांकि, ऐन वक्त पर उसने दिशा बदली और अगले कोच की ओर बढ़ गया। घटना जीटीबी नगर स्टेशन के पास की बताई जा रही है, जहां आरोपी को दूसरे कोच में चढ़ते देखा गया। ‘एक्स’ पर हुआ खुलासा, पत्रकार ने शेयर किया वीडियो घटना का वीडियो पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किया, जिसके बाद यह वायरल हो गया। पोस्ट के मुताबिक, शख्स नशे में धुत था और उसने चूनाभट्टी स्टेशन पर ट्रेन के नीचे से रेंगकर महिला कोच में एंट्री ली। जीटीबी स्टेशन पहुंचने पर उसे कोच से उतार दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को समूल खत्म करने का है संकल्प

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के संपूर्ण उन्मूलन के लिए हम सबकी सक्रिय सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। सबके विश्वास, साथ और प्रयासों से ही रोग का उन्मूलन होगा। राज्यपाल श्री पटेल विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर बड़वानी में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर से वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश की जनता के नाम संदेश और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर आधारित अभिनंदन-पत्र का उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा वाचन किया गया। जनजातियों के कल्याण का स्वर्ण काल राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जनजाति जीवन के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए समर्पित और संवेदनशील व्यक्तित्व है। उनके नेतृत्व में भारत में जनजाति कल्याण का स्वर्ण युग चल रहा है। सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत प्रदेश सरकार सराहनीय कार्य कर रही है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों के लिए राज्य सरकार की पूरी टीम को बधाई दी। सिकल सेल के उन्मूलन के लिए दिए मंत्र राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए जागरूकता सर्वाधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विवाह के पूर्व युवक-युवती अपने जेनेटिक कार्ड का मिलान ज़रूर करें। इसी प्रकार गर्भावस्था में माँ और बच्चे की सिकल सेल जाँच और जन्म के 72 घंटों में नवजात की जाँच किया जाना ज़रूरी है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित रोगी और वाहकों से भी अपील की है कि वे नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और चिकित्सक की सलाह अनुसार दवाइयाँ लें। उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि सिकल सेल प्रभावित बच्चों के साथ आत्मीय व्यवहार करें। उन्हें सिकल सेल को समझने, लड़ने और हराने में संबल प्रदान करें। जनजातीय प्रतिनिधियों से की सहयोग की अपील राज्यपाल श्री पटेल ने स्वयं जनजातीय समुदाय से आने की बात कहते हुए समुदाय के प्रतिनिधियों से अपील की कि जनजाति क्षेत्रों में सिकल सेल के जनजागरण प्रयासों में सतत्, सक्रिय और संवेदनशीलता के साथ सहयोग करें। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने। युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग जनजातीय कल्याण में करें राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल की जागरूकता और रोकथाम प्रयासों को शैक्षणिक संस्थानों की विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने के लिये कहा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने वाले जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों से अपील की कि वे सिकल सेल रोग उन्मूलन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करें। इस बीमारी पर शोध करें। अपने ग्रामीण अंचलों में जागरूकता प्रयासों में सहभागी बने। अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग अपने समुदाय के कल्याण और विकास में करें। प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग हुई पूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे समाज में शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा है। अब समय आ गया है कि कुंडली के साथ हम वर-वधु का ‘सिकल सेल जेनेटिक कार्ड’ भी मिलाएं। इस बीमारी का पता जितनी जल्दी चल जाए इसे नियंत्रण में रखने और रोगी को स्वस्थ रखने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। प्रदेश का जनजातीय समाज बड़ी संख्या में इस बीमारी से प्रभावित है। सिकल सेल हमारे लिए केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। वर्ष 2047 तक सिकल सेल को जड़ से मिटाने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में “राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047” प्रारंभ किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्क्रीनिंग, रोग प्रबंधन, परामर्श और जन-जागरूकता, इन चारों महत्वपूर्ण स्तरों पर प्रदेश में समन्वित रूप से कार्य किया जा रह है। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। सभी चिन्हित मरीजों को हाइड्रॉक्सी यूरिया, फॉलिक एसिड और नि:शुल्क रक्तदान की सुविधा दी जा रही है। सिकल सेल रोगियों की जेनेटिक कॉउंसिलिंग का कार्य भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खरगोन जिले में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे संपूर्ण निमाड़ अंचल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी पहुंचने के लिए भोपाल से रवाना हुए लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे बड़वानी नहीं पहुंच पाए और उन्होंने इन्दौर से ही कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया।  राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल ने प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र को इसका लाभ मिला है। सिकल सेल बीमारी से भावी पीढ़ियां खराब हो जाती हैं। सिकल सेल बीमारी से जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। सिकल सेल एनीमिया होने पर हमारी रक्त कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर आगे बढ़ती रहती है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की है। इसमें बड़वानी जिले के सिकल सेल से सबसे ज्यादा प्रभावित होने की जानकारी मिली। यहां सिलक मित्र तैनात किए गए हैं। मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिकल सेल एमीनिया से डरने की आवश्यकता नहीं है। स्क्रीनिंग और रोकथाम के योग्य तरीकों से इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है। नवजात शिशुओं की जांच के लिए एम्स भोपाल में सिकल सेल जांच यूनिट शुरू की गई है। प्रदेश में जारी अभियान सिकल सेल के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है। जनजातीय अंचलों में खोली जा रहीं फूड प्रोसेसिंग यूनिट मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी, झाबुआ, धार सहित प्रदेश के अन्य जनजातीय बहुल जिलों के लिए अनेक कल्याणकारी कदम उठाए हैं। निमाड़ के किसानों को अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। राज्य सरकार ने तापी मेगा रीचार्ज परियोजना पर कार्य शुरू किया है। जनजातीय अंचलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट करने के अभियान अंतर्गत प्रदेशभर में कृषि मेले लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने तीसरी फसल मूंग के लिए सरकारी खरीद शुरू करने के लिए पंजीयन शुरू कर दिया हैं। बिजली बिल से … Read more

मौसम विभाग ने बताया- 19 से 22 जून के बीच 20 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, रेड और ऑरेंज अलर्ट भी लागू

नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के उत्तर, मध्य, पूर्व और दक्षिणी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में रेड और ऑरेंज अलर्ट भी लागू किया गया है। यह मॉनसूनी बारिश कृषि के लिए राहत तो है, लेकिन जनजीवन पर असर डालने की भी आशंका जताई जा रही है। इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार, 19 से 22 जून के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, झारखंड, बिहार, ओडिशा और गंगा के मैदानी इलाकों समेत 20 राज्यों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 19, 22 और 23 जून को भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से ओडिशा और झारखंड में आज और कल के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, यानी वहां के लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। दक्षिण भारत में झमाझम बारिश के आसार तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, रायलसीमा और यनम में 19 जून को व्यापक स्तर पर बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा, मराठवाड़ा और गुजरात क्षेत्रों में 19 से 24 जून तक रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।   उत्तर भारत भी भीगने को तैयार उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 19 से 24 जून के बीच भारी बारिश का पूर्वानुमान है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के पहाड़ी इलाकों में 22 जून को बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 20 से 23 जून के बीच भारी बारिश की आशंका है। तापमान में गिरावट की संभावना मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इसके बाद तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा जाएगा। यूपी में मानसून की दस्तक उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में मानसून 13 जून की सामान्य तिथि से पांच दिन की देरी से 18 जून को पहुंचा। अगले 2-3 दिनों में मानसून पूरे राज्य में फैलने के लिए अनुकूल रहेगा। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहेगी। हिमाचल में अलर्ट, शनिवार को हो सकती है भारी बारिश हिमाचल प्रदेश में भी मानसून अगले कुछ दिनों में दस्तक दे सकता है। शुक्रवार को भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट और शनिवार व रविवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भीगी शुरुआत संभव दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार को बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार और शनिवार को बारिश की गतिविधि तेज हो सकती है। मानसून इस बार राजधानी में तय समय से पहले दस्तक दे सकता है।  

इजरायली ने मिसाइल हमले के कारण क्षतिग्रस्त हुईं खिड़कियों और इलाके से उठते घने काले धुएं के फुटेज प्रसारित किए, हुई क्षति

  तेल अवीव ईरान की एक मिसाइल बृहस्पतिवार तड़के दक्षिणी इजरायल के मुख्य अस्पताल पर गिरी जिससे कई लोग घायल हो गए और ‘‘व्यापक पैमाने पर क्षति’’ हुई। अस्पताल ने यह जानकारी दी। इजरायली मीडिया ने मिसाइल हमले के कारण क्षतिग्रस्त हुईं खिड़कियों और इलाके से उठते घने काले धुएं के फुटेज प्रसारित किए। ईरान ने तेल अवीव में एक ऊंची अपार्टमेंट इमारत और मध्य इजरायल में अन्य जगहों पर हमले किए। इजरायल की ‘मैगन डेविड एडम’ बचाव सेवा के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं। इस बीच इजरायल ने ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर पर हमला किया। ईरान के विशाल परमाणु कार्यक्रम पर यह हमला संघर्ष के सातवें दिन किया गया। इजरायल ने सात दिन पहले ईरान के सैन्य स्थलों, वरिष्ठ अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर अचानक हमले किए जिससे यह संघर्ष शुरू हो गया। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे लेकिन अधिकतर को इजरायल की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। 10 लाख निवासियों को सेवाएं देता है अस्पताल ईरानी मिसाइल ने ‘सोरोका मेडिकल सेंटर’ को निशाना बनाया जो इजरायल के दक्षिण में स्थित मुख्य अस्पताल है। अस्पताल की वेबसाइट के अनुसार, इस अस्पताल में 1,000 से अधिक बिस्तर हैं और यह इजरायल के दक्षिण के लगभग 10 लाख निवासियों को सेवाएं प्रदान करता है। बयान में कहा गया है कि चिकित्सा केंद्र के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और आपातकालीन कक्ष में मामूली रूप से घायल कई लोगों का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल को नए रोगियों के लिए बंद कर दिया गया है और केवल उन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जो किसी जानलेवा समस्या से जूझ रहे हैं। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले में कितने लोग घायल हुए हैं। इजरायल के कई अस्पतालों ने पिछले सप्ताह आपातकालीन योजनाएं सक्रिय कर दी थीं और अस्पतालों की भूमिगत पार्किंग में मरीजों को स्थानांतरित कर दिया था। अराक रिएक्टर पर इजरायली हमला ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल ने बृहस्पतिवार को बताया कि इजरायल ने ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर पर हमला किया है। चैनल ने बताया कि हमले के बाद ‘‘किसी भी तरह के विकिरण का खतरा नहीं’’ है और हमले से पहले ही केंद्र को खाली करा लिया गया था तथा रिएक्टर के आस-पास स्थित असैन्य इलाकों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। इजरायल ने बृहस्पतिवार की सुबह पहले ही चेतावनी दी थी कि वह रिएक्टर पर हमला करेगा और उसने लोगों से क्षेत्र छोड़कर जाने को कहा था। हमले को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन अग्निशमन कर्मियों ने कहा कि ऐसा लगता है कि चिकित्सकीय इमारत और कुछ अपार्टमेंट इमारतों को निशाना बनाया गया है। इस बात की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी कि इन हमलों में कोई हताहत हुआ है या नहीं। अराक रिएक्टर तेहरान से 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। परमाणु रिएक्टर को ठंडा करने के लिए भारी जल रिएक्टर का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह प्लूटोनियम भी बनाता है जिसका संभावित रूप से परमाणु हथियारों में उपयोग किया जा सकता है। ईरान पर इजरायल के हवाई हमले सातवें दिन भी जारी रहे। इससे एक दिन पहले ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका के आत्मसमर्पण के आह्वान को खारिज कर दिया था और चेतावनी दी थी कि अमेरिकियों की किसी भी सैन्य भागीदारी से उन्हें ‘‘अपूरणीय क्षति’’ होगी। 400 मिसाइल और सैकड़ों ड्रोन दागे वाशिंगटन स्थित एक ईरानी मानवाधिकार समूह ने बताया कि ईरान में 263 आम नागरिकों सहित कम से कम 639 लोग मारे गए हैं और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने करीब 400 मिसाइल और सैकड़ों ड्रोन दागे हैं, जिससे इजरायल में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ मिसाइल एवं ड्रोन मध्य इजरायल में अपार्टमेंट इमारतों पर गिरे जिससे भारी नुकसान हुआ है।  

पुतिन ने इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश, ट्रंप ने लताड़ा

सेंट पीटर्सबर्ग  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की. अपनी यूक्रेन वाली जंग में फंसकर चारों खाने चित हो रहे पुतिन अब इजरायल और ईरान के बीच शांति का ‘मसीहा’ बनने चले हैं. सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने बड़े जोश में कहा, ‘हम इजरायल-ईरान के झगड़े को सुलझा सकते हैं. रूस इस संकट के समाधान के लिए एक ऐसा समझौता कराने में मदद कर सकता है जिससे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिले और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं भी दूर हों.’ लेकिन इस बयान को सुनकर दुनिया हैरान है. क्योंकि पुतिन अभी अपना युद्ध ही नहीं रोक पाए हैं. पुतिन ने कहा, ‘यह एक संवेदनशील मामला है, लेकिन मेरी नजर में इसका समाधान संभव है.’ लेकिन पुतिन को ट्रंप ने नसीहत दी है कि वह पहले अपनी जंग से निपटें और दूसरों की फिक्र करना छोड़ दें. पुतिन का यह बयान तब आया है जब यूक्रेन ने दावा किया है कि अब तक 10 लाख रूसी सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. जब रूसी राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि अगर इजराइल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दे तो रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया. पुतिन ने कहा, ‘मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता. लगातार बढ़ रहा है ईरान-इजरायल का संघर्ष ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध दो साल से ऊपर चला गया है और हालात सुधरने की जगह और बिगड़ते जा रहे हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की असली संख्या छुपाई जा रही है. उन्होंने कहा, “बहुत ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जितना बताया जा रहा है उससे कहीं ज़्यादा. वहां एक बिल्डिंग गिरती है और कहा जाता है कि कोई घायल नहीं हुआ  क्या ये मजाक है?” वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. रूस के लिए यूक्रेन युद्ध का समाधान जितना दूर है, उतना ही जटिल इजरायल-ईरान संकट भी बनता जा रहा है. पुतिन ने की थी पेशकश बुधवार को पुतिन ने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के पत्रकारों के साथ एक गोलमेज सत्र में बोलते हुए, पुतिन ने कहा कि “यह एक नाजुक मुद्दा है. मेरे विचार से, एक समाधान पाया जा सकता है.” पुतिन ने कहा कि उन्होंने ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मास्को के प्रस्तावों को साझा किया. ट्रंप ने पुतिन को सुना दिया इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने इजरायल के हमलों के आगे झुकने से इनकार करते हुए चेताया कि अगर अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो यह उसके लिए ‘अपूरणीय क्षति’ साबित हो सकती है. पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ने ईरान, इजराइल और अमेरिका को अपने प्रस्ताव साझा कर दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम किसी पर कुछ थोप नहीं रहे हैं. हम सिर्फ इस स्थिति से बाहर निकलने का एक रास्ता सुझा रहे हैं. लेकिन अंतिम निर्णय इन देशों के राजनीतिक नेतृत्व का है, खासकर ईरान और इजरायल का.’ हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘मैंने पुतिन से कहा, मुझ पर अहसान करो. पहले अपने ही मुद्दे सुलझा लो. बाद में बाकी की चिंता करना.’ ईरान से रिश्तों की दुहाई दे रहे पुतिन पुतिन ने बड़े गर्व से बताया कि रूस और ईरान की दोस्ती ‘पक्की’ है. रूस ने ईरान के बुशहर में परमाणु संयंत्र बनाया, और अब वहां दो और रिएक्टर बना रहा है. वहां 200 से ज्यादा रूसी कर्मचारी दिन-रात जुटे हैं. पुतिन ने ये भी कहा कि ईरान ने कभी उनसे सैन्य मदद नहीं मांगी. रूस ने इजरायल के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित किया है कि उसकी सुरक्षा से समझौता न हो. यूक्रेन युद्ध पर रूस का रुख पुतिन ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन दोहराया कि जेलेंस्की का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब वह वैध नेता नहीं हैं. हालांकि कीव और उसके सहयोगी देशों ने इस दावे को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हम अपने लक्ष्यों को सैन्य माध्यम से प्राप्त करेंगे.’

अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बीमा का पैसा तो दे दें लेकिन लेने वाला है कौन? एयर इंडिया क्रैश के बाद इंश्योरेंस कंपनियों के सामने बड़ा संकट

नई दिल्ली गुजरात के अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश के मामले में बीमा कंपनियों को अनोखी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन कंपनियों के सामने कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें पॉलिसीधारक और उनके नॉमिनी दोनों की ही इस हादसे में मौत हो चुकी है। ऐसे में बीमा कंपनियां दावे की राशि का भुगतान किसे करें, इसी बात को लेकर परेशान हैं। इस विमान दुर्घटना ने बैंक डिपॉजिट, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स और बचत योजनाओं में नॉमिनी बनाने की अहमियत सतह पर ला दी है। इस दुर्घटना में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पति-पत्नी के साथ बच्चों की भी मृत्यु हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाताधारक या बीमाधारक और उनके साथ ही नॉमिनी की भी मृत्यु होने के ऐसे मामलों में सक्सेसिव नॉमिनेशन करने और वसीयत बनाने का महत्व बढ़ जाता है। बना सकते हैं चार नॉमिनी इस साल बैंकिंग लॉज अमेंडमेंट ऐक्ट 2024 लागू होने के साथ बैंक खातों में अब एक के बजाय अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। पीपीएफ सहित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में भी चार तक नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। सेबी के नियमों के मुताबिक, डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियों में अधिकतम 10 नॉमिनी बनाने की सुविधा है। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर तारेश भाटिया ने कहा, ‘अधिकतर लोग पत्नी या पति के रूप में एक नॉमिनी बनाते हैं। कुछ साइमल्टेनियस नॉमिनेशन करते हुए एक से ज्यादा नॉमिनी भी बनाते हैं और तय कर देते हैं कि उनके बाद किस नॉमिनी को कितना हिस्सा दिया जाएगा। सक्सेसिव नॉमिनेशन इतना प्रचलन में नहीं है। हालांकि नॉमिनेशन करने के अलावा वसीयत बना लेना ज्यादा बेहतर होता है।’ क्या है साइमल्टेनियस और सक्सेसिव नॉमिनेशन साइमल्टेनियस नॉमिनेशन में एक से अधिक नॉमिनी बनाए जाते हैं। बीमाधारक या खाताधारक की मृत्यु के पहले अगर किसी नॉमिनी की मृत्यु हो जाए और नॉमिनेशन में कोई बदलाव न किया गया हो तो मृत नॉमिनी के लिए तय हिस्से का आनुपातिक बंटवारा बाकी नॉमिनीज में होता है। खाताधारक के जीवित रहते ही किसी नॉमिनी की मृत्यु हो और वह नॉमिनेशन में बदलाव करें तो उसी बदलाव को लागू माना जाता है। वहीं, सक्सेसिव नॉमिनेशन में जितने भी नॉमिनी होते हैं, उनका वरीयता क्रम देना होता है। इसमें खाताधारक या बीमाधारक की मृत्यु होने पर पहले नंबर के नॉमिनी को पूरी रकम दी जाती है। इसमें हिस्सा यानी पर्सेंटेज तय करने का मामला नहीं बनता। अगर बीमाधारक के साथ पहले नंबर के नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाए, तो उनके बाद जिनका नंबर हो, उनकी बारी आएगी और इसी तरह क्रम तय होता है। बीमा कंपनियों, बैंकों और डीमैट अकाउंट में सक्सेसिव नॉमिनेशन हो सकता है, लेकन म्यूचुअल फंड फोलियो में सुविधा नहीं है। वहीं, बैंक लॉकर के मामले में केवल सक्सेसिव नॉमिनेशन होता है। कानूनी वारिस को करना होगा भाटिया ने कहा, ‘अहमदाबाद विमान हादसे जैसे मामलों में यह स्थिति बन सकती है कि पति, पत्नी और बच्चों की एकसाथ मृत्यु के चलते बीमाधारक और सक्सेसिव नॉमिनीज में से कोई भी जीवित न हो। ऐसी सूरत में जो भी कानूनी वारिस होगा, उसका क्लेम बनेगा। हालांकि उसे दस्तावेजों के साथ साबित करना होगा कि वह कानूनी वारिस है। किसी और ने दावा कर दिया तो मामला कोर्ट से तय होगा। वसीयत ऐसी सूरत में उपयोगी होती है।’ परिवार के लोगों को ही नॉमिनी बनाएं नॉमिनी बनाते समय अपने प्रियजन को कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए बेहतर यही होता है कि उन्हीं लोगों को नॉमिनी बनाएं, जो परिवार के हों और उनका कानूनी वारिस होने का दावा भी बनता हो। नामित व्यक्ति अगर बेईमानी पर उतर आए, तो कानूनी वारिसों को ऐसा मामला कोर्ट-कचहरी तक ले जाना पड़ता है। सेबी के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से यह स्पष्ट हो चुका है कि कोई भी नॉमिनी सिर्फ संबंधित रकम का रिसीवर होता है और अगर कानूनी वारिस दावा करें तो रकम उन्हें मिलेगी। बड़ी कानूनी चुनौती यह स्थिति बीमा कंपनियों के लिए एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक चुनौती बन गई है, क्योंकि अब यह देखना होगा कि ऐसे मामलों में बीमा राशि किसे दी जाए – खासकर तब जब परिवार का कोई सदस्य बचा ही न हो. ऐसे मामलों में उत्तराधिकारी तय करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है, जिससे क्लेम की प्रक्रिया लंबी हो सकती है. क्या हो रहा है अब यह हादसा न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि बीमा सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है. बीमा कंपनियां अब पीड़ित परिवारों तक पहुंच रही हैं और प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कई परिवारों में अब कोई नहीं बचा जिसे मुआवजा दिया जा सके. ऐसे मामलों में सरकार को भी हस्तक्षेप कर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की जरूरत है. वसीयत न बनाई हो तो क्या? भाटिया ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार के नियमों के मुताबिक, वसीयत न बनाई गई हो तो किसी व्यक्ति की खुद कमाई गई संपत्ति पर उसके बाद उनकी पत्नी, उनके बाद संतान और अगर पत्नी और संतान भी न हों तो व्यक्ति की मां का कानूनी हक बनता है। मां के बाद व्यक्ति के पिता का और उनके बाद भाई और फिर बहन का नंबर आता है। कोर्ट में रजिस्टर कराएं वसीयत भाटिया ने कहा कि वसीयत में यह भी बताना होता है कि एग्जिक्यूटर कौन होगा। आमतौर पर वकील यह काम करते हैं और इसकी फीस लेते हैं। वसीयत को कोर्ट में रजिस्टर करा लेना चाहिए। वसीयत में किसे कितना हिस्सा तय किया गया है, यह बताएं या न बताएं, घरवालों को यह जरूर बताएं कि वसीयत बना ली है और कोर्ट में रजिस्टर भी करा ली है। इससे आपके बाद पत्नी या किसी दूसरे आश्रित को जरूरत पड़ी तो कोर्ट से उसकी कॉपी या प्रोबेट ऑर्डर लेकर बैंक या किसी भी जरूरी जगह पर देने से काम आसानी से हो जाता है।  

दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया में तनाव लंबे समय से बना हुआ है, तो किम जोंग उन के देश पर US फेंक देगा परमाणु बम

दक्षिण कोरिया ईरान और इजरायल में चल रहे युद्ध के बीच एक और देश ने परमाणु हथियारों का जिक्र छेड़ दिया है। दक्षिण कोरिया के एक अधिकारी का दावा है कि उनपर हमला होने की स्थिति में अमेरिका उत्तर कोरिया पर अटैक कर सकता है। हालांकि, दक्षिण कोरिया की सरकार या अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया में तनाव लंबे समय से बना हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसी के निदेशक पद के उम्मीदवार ली जॉन्ग सोक का कहना है कि उन्हें लगता है कि अगर प्योग्यांग उनपर हमला करता है, तो अमेरिका उत्तर कोरिया पर परमाणु बम से हमला कर देगा। उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन हैं। उन्होंने का कि वॉशिंगटन नॉर्थ पर हमला करेगा और अमेरिका को खतरे में डालेगा, फिर भले ही प्योग्यांग ने बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात कर दी हों। किसके पास कितने परमाणु हथियार सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 तक दुनिया भर में अनुमानित 12,241 परमाणु हथियार मौजूद थे। जिसमें से करीब 9,614 हथियार सैन्य उपयोग के लिए तैनात थे यानी यह या तो मिसाइलों पर लगे हुए थे, या सैन्य ठिकानों पर रखे थे, या ऐसे गोदामों में थे जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किए जा सकते हैं। इनमें से लगभग 3,912 परमाणु हथियार मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के साथ तैनात थे. और इनमें से भी करीब 2,100 हथियार ‘हाई अलर्ट’ स्थिति में थे, यानी तुरंत उपयोग के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैयार थे। अमेरिका- 5177 रूस- 5459 ब्रिटेन- 225 फ्रांस- 290 चीन- 600 भारत- 180 पाकिस्तान- 170 उत्तर कोरिया- 50 इजरायल- 90  

मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को NHAI ने किया ब्लैकलिस्ट

नई दिल्ली कश्मीर में इन दिनों जोजिला टनल (Zojila Tunnel) बनाने का काम चल रहा है। यह काफी चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। इस सुरंग को बनाने वाली कंपनी का नाम मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) है। हैदराबाद मुख्यालय वाली इसी कंपनी को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जी हां, एनएचएआई ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक साल के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से ही रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि MEIL अब एक साल तक NHAI के किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए बोली नहीं लगा पाएगी। क्यों हुई कार्रवाई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एमईआईएल पर यह कार्रवाई केरल में NH-66 के चेंगला-नीलेश्वरम सेक्शन में सड़क के किनारे ढलानों को ठीक से सुरक्षित नहीं करने और पानी की निकासी का सही सिस्टम नहीं बनाने की वजह से की गई है। आसान भाषा में कहें तो, MEIL को सड़क के किनारे की मिट्टी को गिरने से बचाने और बारिश के पानी को निकालने का काम ठीक से करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। NHAI ने MEIL को एक नोटिस भेजा है। इसमें पूछा गया है कि उन्हें एक साल के लिए क्यों न बैन कर दिया जाए। साथ ही, उन पर 9 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कंपनी को मिला था यह काम MEIL को NH-66 के 77 किलोमीटर लंबे चेंगला-नीलेश्वरम से थालिपरम्बा तक के हिस्से को चौड़ा करने का काम मिला था। यह प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जा रहा था। HAM का मतलब है कि कंपनी को सड़क बनाने के साथ-साथ 15 साल तक उसकी देखभाल भी करनी होगी। अब MEIL को अपने खर्च पर ढलानों को फिर से ठीक करना होगा। यानी, जितना भी नुकसान हुआ है, उसे MEIL ही ठीक करेगी। अधिकारियों ने MEIL को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें एक साल के लिए बैन लगाने और 9 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। जांच के लिए कमेटी इस मामले की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। इसमें सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के एक सीनियर वैज्ञानिक, IIT-पलक्कड के एक रिटायर्ड प्रोफेसर और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के एक्सपर्ट शामिल हैं। यह कमेटी देखेगी कि डिजाइन कैसा था, निर्माण की क्वालिटी कैसी थी और क्या सुधार किया जा सकता है। NHAI ने कहा है कि वे सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि आगे से ऐसे प्रोजेक्ट में सुरक्षा और जवाबदेही बनी रहे। यानी, NHAI यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में जो भी सड़कें बनें, वे सुरक्षित हों और अगर कोई गलती करे तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके। पहले भी हुआ है विवाद मई के महीने में महाराष्ट्र में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 14,000 करोड़ रुपये के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के टेंडर रद्द कर दिए थे। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद हुआ। इन प्रोजेक्ट के ठेके मेघा इंजीनियरिंग को दिए गए थे, जिस पर काफी विवाद हुआ था। L&T नाम की एक कंपनी ने MMRDA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस किया था। L&T का कहना था कि मुंबई के कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के दो जरूरी प्रोजेक्ट के लिए उनकी बोली को गलत तरीके से रिजेक्ट कर दिया गया। इन प्रोजेक्ट में गैमुख और फाउंटेन होटल जंक्शन के बीच एक रोड टनल और ठाणे-घोड़बंदर कॉरिडोर पर एक एलिवेटेड रोड बनाना शामिल था। टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए जुलाई 2024 में L&T, MEIL और तीन अन्य कंपनियों ने बोली लगाई थी। L&T की बोली को टेक्निकल जांच के दौरान ही रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद L&T ने बॉम्बे हाई कोर्ट में फिर से विचार करने के लिए अर्जी दी, लेकिन 20 मई, 2025 को उसे खारिज कर दिया गया। MMRDA ने MEIL को सफल बोली लगाने वाला घोषित कर दिया। इसके बाद L&T ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया। इसमें L&T ने कहा कि MEIL की बोली 3,100 करोड़ रुपये ज्यादा थी, फिर भी उसे चुना गया। L&T का कहना था कि जब उनकी बोली कम थी, तो उन्हें प्रोजेक्ट क्यों नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखने के बाद हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने पब्लिक के पैसे का गलत इस्तेमाल किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका क्यों दिया गया। इसके बाद MMRDA ने 30 मई को टेंडर रद्द करने का फैसला किया। चुनावी बॉन्ड के लिए चर्चा में रही है कंपनी साल 2024 में मेघा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को चुनावी बॉन्ड के जरिए राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाली बड़ी कंपनी के तौर पर पहचाना गया। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, मेघा इंजीनियरिंग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगभग 60% चंदा दिया, जो कुल 966 करोड़ रुपये था। डेटा के अनुसार, MEIL ने एक-एक करोड़ रुपये के कुल 966 बॉन्ड खरीदे, जिनमें से ज्यादातर 584 बॉन्ड BJP को गए। भारत राष्ट्र समिति को 195 बॉन्ड, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 85 बॉन्ड और YSR कांग्रेस पार्टी को 37 बॉन्ड मिले। इसके अलावा, तेलुगु देशम पार्टी को 28 बॉन्ड, INC को 18 बॉन्ड, बिहार प्रदेश जनता दल को 10 बॉन्ड, जनता दल को पांच बॉन्ड और जनसेना पार्टी को चार बॉन्ड मिले। MEIL की एक सहायक कंपनी, एवे ट्रांस प्राइवेट ने 6 बॉन्ड खरीदे, जिनकी कीमत 1 करोड़ रुपये प्रति बॉन्ड थी। ये सभी बॉन्ड भारत राष्ट्र समिति को दिए गए। इसके अलावा, कंपनी की एक और सहायक कंपनी, SEPC पावर ने 40 बॉन्ड खरीदे, जिनकी कीमत 1 करोड़ रुपये प्रति बॉन्ड थी।

इजरायल ने ईरान पर हमले किए हैं, सहयोगी असामान्य रूप से चुप्पी साधे हुए हैं, दशकों बाद अकेला पड़ा ईरान

तेहरान इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। 13 जून को इजरायल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके बाद दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी है। इस बीच, एक सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या ईरान दशकों बाद पहली बार इस युद्ध में अपने पारंपरिक सहयोगियों के बिना अकेला लड़ रहा है? दरअसल पिछले चार दशकों से, ईरान ने मध्य पूर्व में अपनी शक्ति का विस्तार करने और अमेरिका व इजरायल के प्रभाव को कम करने के लिए एक “प्रतिरोध की धुरी” यानी एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस के रूप में प्रॉक्सी ताकतों का गठन किया है। यह गठबंधन अभी तक ईरान को सीधे टकराव से बचाते रहे हैं और खुद ही इजरायल और अमेरिकी हितों पर हमले करते रहे हैं। लेकिन अब, जब इजरायल ने ईरान की धरती पर अभूतपूर्व हमले किए हैं, तो ये सहयोगी असामान्य रूप से चुप्पी साधे हुए हैं। यह सवाल उठता है कि क्या ईरान, दशकों बाद पहली बार, अकेला लड़ रहा है? आइए, समझते हैं। कहां गायब है कि ईरान के “प्रतिरोध की धुरी”? ईरान ने लेबनान में हिजबुल्लाह, फिलिस्तीन में हमास, यमन में हूती विद्रोहियों और इराक में शिया मिलिशिया जैसे संगठनों को हथियार, ट्रेनिंग और आर्थिक सहायता प्रदान की है। ये समूह ईरान के लिए क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन का माध्यम रहे हैं। लेकिन वर्तमान में ये संगठन कमजोर, आंतरिक रूप से विभाजित और अपनी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इराक: इराक में ईरान समर्थित शिया मिलिशिया ने लंबे समय तक अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए और बगदाद में ईरान के हितों की रक्षा की। लेकिन हाल के वर्षों में, ये समूह आंतरिक संघर्ष और स्थानीय विरोध का सामना कर रहे हैं। इजरायल के हमलों के बाद, इन मिलिशियाओं ने कोई बड़ा जवाबी कदम नहीं उठाया है। लेबनान: यहां हिजबुल्लाह ईरान का सबसे मजबूत सहयोगी है। लेकिन हिजबुल्लाह भी इजरायल के हाथों भारी नुकसान उठा चुका है। 2023 से इजरायली सेना लगातार हिजबुल्लाह को निशाना बना रही है। लेबनान में संघर्ष में इसके वरिष्ठ कमांडरों की हत्या और संसाधनों की कमी ने इसे कमजोर किया है। फिलिस्तीन: हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर अभूतपूर्व हमले किए थे। इस हमले के बाद से हमास गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों का सामना कर रहा है और अपनी सैन्य क्षमता खो चुका है। वहीं इजरायल ने लगभग पूरी गाजा पट्टी को तबाह कर दिया है। यमन: हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में शिपिंग पर हमले करके वैश्विक ध्यान खींचा था, लेकिन इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों ने उनकी क्षमता को सीमित कर दिया है। रूस और अन्य सहयोगी: रूस, जो पहले ईरान का रणनीतिक साझेदार रहा है, वह यूक्रेन युद्ध और अपनी क्षेत्रीय रणनीति के कारण इस संघर्ष में तटस्थ दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे युद्ध की स्थिति में रूस को नुकसान हो सकता है, क्योंकि ईरान में सरकार बदलने से उसका एक महत्वपूर्ण सहयोगी खत्म हो सकता है। इजरायल-ईरान संघर्ष का वर्तमान परिदृश्य कैसा है? इजरायल ने हाल ही में ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। ईरान ने जवाब में इजरायल पर लगभग 400 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 40 ने हवाई रक्षा को भेदकर 24 नागरिकों की जान ले ली। ईरान ने अपनी हवाई रक्षा को सक्रिय किया, ड्रोन को मार गिराया और 18 संदिग्ध इजरायली जासूसों को गिरफ्तार किया। साथ ही, सुरक्षा कारणों से अस्थायी इंटरनेट प्रतिबंध भी लगाए गए। लेकिन इसके बावजूद, ईरान के प्रॉक्सी सहयोगी खामोश हैं, जिसने तेहरान की क्षेत्रीय रणनीति पर सवाल उठाए हैं।   अमेरिका और ट्रंप की भूमिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करने की मांग की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस युद्ध में सीधे शामिल होगा या नहीं। ट्रंप ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि अमेरिका ईरान पर हमला करेगा या नहीं।” इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि वे ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को “चरणबद्ध तरीके से” नष्ट कर रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के फोर्डो परमाणु संवर्धन केंद्र को नष्ट करने की संभावना पर विचार किया है, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिक्रियाएं क्या हैं? सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे खाड़ी देशों ने इजरायल के साथ सहयोग की इच्छा जताई है, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्र के लिए खतरा बताया है। वैश्विक स्तर पर, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के साथ ईरान का गठबंधन है जिसे पश्चिमी देश “अराजकता की चौकड़ी” या “CRINK धुरी” कहते हैं। यह संगठन भी इस संकट में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहा। रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित दिख रहा है।

आने वाले समय में अंग्रेजी बोलने में आएगी शर्म ‘, भाषा विवाद के बीच अमित शाह बोले- अब बदलाव का समय

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में लोग अंग्रेजी बोलने पर शर्मिंदगी महसूस करेंगे. उन्होंने भारतीय भाषाओं को देश की संस्कृति के रत्न बताते हुए कहा कि ये भाषाएं हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके बिना हम भारतीय नहीं कहला सकते. दिल्ली में पूर्व सिविल सेवक आईएएस आशुतोष अग्निहोत्री द्वारा लिखी किताब के विमोचन के मौके पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा, ‘मेरी बात ध्यान से सुनिए और याद रखिए, इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी, ऐसे समाज का निर्माण अब दूर नहीं है. चीजों को वो ही कर पाते हैं जो एक बार अपने मन में ठान लेते हैं और मैं मानता हूं कि हमारे देश की भाषाएं, हमारा गहना है. इनके बिना हम भारतीय नहीं हैं. आप किसी विदेशी भाषा में अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म को नहीं समझ सकते.’ देश को समझने के लिए विदेशी भाषा पर्याप्त नहीं शाह ने कहा कि इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म आएगी। ऐसे समाज का निर्माण दूर नहीं है, केवल दृढ़ निश्चयी लोग ही बदलाव ला सकते हैं। मेरा मानना है कि हमारे देश की भाषाएं हमारी संस्कृति के रत्न हैं। अपनी भाषाओं के बिना हम सच्चे भारतीय नहीं हैं। अपने देश, अपनी संस्कृति, अपने इतिहास और अपने धर्म को समझने के लिए कोई भी विदेशी भाषा पर्याप्त नहीं हो सकती है।  प्रधानमंत्री के पंच प्रण उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के पंच प्रण कै जिक्र किया। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना, गुलामी की हर सोच से मुक्ति पाना, विरासत पर गर्व करना, एकता और एकजुटता, प्रत्येक नागरिक में कर्तव्य की भावना जगना। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रतिज्ञाएं देश के नागरिकों का संकल्प बन गई हैं। 2047 के विकसित भारत की यात्रा में हमारी भाषाएं प्रमुख भूमिका निभाएंगी।  प्रशासनिक प्रशिक्षण मॉडल में सहानुभूति को करना होगा शामिल  गृह मंत्री पूर्व आईएएस आशुतोष अग्निहोत्री की लिखी गई पुस्तक मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं, के विमोचन में गुरुवार को शामिल हुए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण मॉडल में सहानुभूति लाने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि यह मॉडल ब्रिटिश काल से प्रेरित है, इसलिए यहां सहानुभूति की कोई जगह नहीं है। मेरा मानना है कि कोई शासक अगर सहानुभूति के बिना शासन करता है, तो वह अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता है।  प्रशिक्षण में बदलाव की जरुरत शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में बदलाव की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन में अधिक महत्व देना चाहिए ताकि देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिले। इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने इसे भारतीय भाषाओं के प्रति गर्व का प्रतीक बताया, जबकि कुछ ने इसे भाषाई विवाद के रूप में देखा। विवादों में बयान यह बयान कुछ हलकों में विवादास्पद भी हो सकता है, क्योंकि अंग्रेजी देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली भाषा है, खासकर शहरी क्षेत्रों और पेशेवर माहौल में। इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर बहस की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि अधूरी विदेशी भाषाओं के साथ संपूर्ण भारत की कल्पना नहीं की जा सकती. मैं इस बात से पूरी तरह वाकिफ हूं कि लड़ाई कितनी कठिन है. मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय समाज इस लड़ाई को जीतेगा और अपनी भाषाओं पर गर्व करते हुए हम अपने देश को चलाएंगे, विचार करेंगे, शोध करेंगे, निर्णय लेंगे और दुनिया पर शासन करेंगे. इसमें किसी को संदेह करने की कोई जरूरत नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि 2047 में दुनिया में शीर्ष पर रहने में हमारी भाषाओं का बहुत बड़ा योगदान होगा.  

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, रात के सन्नाटे में दिखा तेंदुए का आतंक

हिमाचल  हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां अर्की उपमंडल के मलावन गांव में देर रात एक तेंदुआ एक घर में घुस गया और पालतू कुत्ते का शिकार करके फरार हो गया। यह पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसकी फुटेज अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, यह घटना रात लगभग 1 बजकर 21 मिनट पर हुई। मलावन गांव स्थित एक दो मंजिला मकान की बालकनी की तरफ से एक तेंदुआ चुपचाप घर में दाखिल हुआ। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि तेंदुआ बेहद सावधानी से घर में घुसता है और लगभग 10 सेकंड के भीतर, वह एक कुत्ते को अपने मुंह में दबाकर वहां से चला जाता है. तेंदुए की यह फुर्ती और अचानक हमला करने की रणनीति हैरान करने वाली है। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज किसी कंप्यूटर से रिकॉर्ड किया गया है, जिसमें एक महिला की आवाज भी सुनाई दे रही है. वह महिला कुत्ते के इस तरह से शिकार होने पर दुख और चिंता व्यक्त कर रही है। हालांकि, अभी तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि यह मकान किसका है। यह पहली बार नहीं है जब हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने की घटना सामने आई है. अक्सर पानी और भोजन की तलाश में ये जानवर शहरी या ग्रामीण इलाकों में आ जाते हैं. लेकिन जिस तरह से इस तेंदुए ने एक घर के अंदर घुसकर पालतू कुत्ते का शिकार किया है, उसने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण अब रात के समय घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. उन्हें डर है कि कहीं कोई और जंगली जानवर उन पर हमला न कर दे. वन विभाग को इस तरह की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देने और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है. स्थानीय लोगों ने वन विभाग से अपील की है कि वे इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाएं, ताकि भविष्य में ऐसी किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके. इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet