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भारत से ‘पिटा’ PAK भागा-भागा पहुंचा चीन, पाकिस्तान थोक के भाव चीन से 40 फाइटर जेट्स जे-35 खरीदने जा रहा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान और चीन की दोस्ती किसी से छिपी हुई नहीं है। भारत के साथ जब पिछले दिनों पाकिस्तान तनाव की स्थिति में था, तब भी चीन ने उसका खुलकर समर्थन किया था। चीनी फाइटर जेट्स, एयर डिफेंस सिस्टम आदि के जरिए ही पाकिस्तान ने भारत से दो-दो हाथ करने की कोशिश की थी, लेकिन बुरी तरह विफल रहा था। भारत से पिटने के बाद अब पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट भागे-भागे चीन पहुंचे हैं। अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए पाकिस्तान थोक के भाव चीन से 40 फाइटर जेट्स जे-35 खरीदने जा रहा है। इसके अलावा, जासूसी विमान और एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदेगा। पाकिस्तानी सरकार ने भी आधिकारिक रूप से इस सौदे की पुष्टि कर दी है। पांचवीं जेनरेशन के इन स्टील्थ फाइटर जेट्स के साथ-साथ पाकिस्तान को चीन से एयर डिफेंस सिस्टम समेत अन्य चीजें भी मिलने जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार ने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बताया है कि वह चीन से जे-35 फाइटर जेट्स, केजे-500 एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AWACS) एयरक्राफ्ट और एचक्यू-19 बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने जा रहा है। AWACS एक जासूसी विमान है जिसका इस्तेमाल लंबी दूरी पर दुश्मन के विमानों, मिसाइलों आदि का पता लगाने के लिए किया जाता है। उल्लेखनीय है कि भारत हाल ही में तनाव के दौरान अवाक्स एयरक्राफ्ट, एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट आदि को मार गिराया था। इससे चीन की भी काफी थू-थू हुई थी। पाकिस्तानी डिफेंस ऑफिशियल्स का कहना है कि फाइटर जेट की ट्रेनिंग लेने के लिए उसके पायलट चीन पहुंच भी चुके हैं। कब से मिल सकता है चीनी फाइटर जेट? चीनी फाइटर जेट्स समेत अन्य सामान पाकिस्तान को इस साल अगस्त महीने से मिलना शुरू हो सकता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आने वाले महीनों में एयरक्राफ्ट की डिलीवरी होने लगेगी। इस समय पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट चीन में हैं और जे-35 ए फाइटर जेट्स को उड़ाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बता दें कि चीन का यह फाइटर जेट पहली बार 2024 के एयरशो में दिखाया गया था। यह जे-20 के साथ दूसरा चीनी स्टील्थ फाइटर जेट है। PAK के एयर डिफेंस सिस्टम को भारत ने किया था तबाह पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसके तहत पीओके और पाक में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत के सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन से हमले की नाकाम कोशिश की। चार दिनों तक दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत ने पाकिस्तानी मिलिट्री बेस को निशाना बनाते हुए कई एयरबेस को तबाह कर दिया। इसके साथ-साथ भारत ने पाकिस्तान के फाइटर जेट को मार गिराया और उसका चीन से लिया गया AWACS सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया। वहीं, लाहौर में भारत ने पाकिस्तान के चीन से लिए गए एयर डिफेंस सिस्टम एचक्यू-9 को भी तबाह कर दिया था।  

थरूर ने कहा- चीन और पाक का गठजोड़ सिर्फ सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, ‘पाक की 81% सैन्य क्षमता चीन से आती है’

वाशिंगटन  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में एक कार्यक्रम के दौरान भारत-पाक तनाव और उसमें चीन की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की 81% सैन्य क्षमता चीन से आती है, ऐसे में भारत-पाक संघर्ष की बात हो और चीन को नजरअंदाज किया जाए, यह मुमकिन नहीं है। थरूर इन दिनों भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं और हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान और आतंकवाद के गठजोड़ को उजागर कर रहे हैं। CPEC के ज़रिए चीन की गहरी मौजूदगी थरूर ने कहा कि चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ सिर्फ सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया। उनका कहना था कि इस परियोजना के जरिए चीन ने पाकिस्तान की आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य नीतियों में गहरी घुसपैठ कर ली है। चीन की ‘किल चेन’ तकनीक का इस्तेमाल शशि थरूर ने जानकारी दी कि हाल के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने चीन की ‘किल चेन’ तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में रडार, जीपीएस, मिसाइल और फाइटर जेट्स को एक साथ जोड़ा जाता है, ताकि हमले एकदम सटीक और समन्वित हों। थरूर ने कहा कि भारत ने अपनी रणनीति तुरंत बदलते हुए पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड्स को निशाना बनाया और चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया।   UNSC में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया थरूर ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रेस रिलीज़ आई, तो उसमें पहले ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ का नाम था, जो पाकिस्तान से जुड़ा आतंकी संगठन है। लेकिन चीन और पाकिस्तान के दबाव में यह नाम बाद में हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि वैश्विक मंचों पर भी चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है। भारत-चीन संबंधों पर भी बोले थरूर शशि थरूर ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश की है। व्यापार भी दोनों देशों के बीच रिकॉर्ड स्तर पर है। लेकिन पाकिस्तान के साथ हुए हालिया संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन की रणनीति कितनी चालाक और खतरनाक है। उन्होंने कहा, ‘हम बातचीत के पक्षधर हैं, लेकिन रणनीतिक खतरे को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है। भारत को चीन के दोहरे रवैये को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति बनानी होगी।’ थरूर के इस बयान को भारत की विदेश और सुरक्षा नीति के दृष्टिकोण से एक स्पष्ट और साहसिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार, रूस तोड़ेगा अमेरिका का घमंड !

रूस रूस ने भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की सोर्स कोड तक पूरी पहुंच की पेशकश की, भारत अब अमेरिका के F-35 प्रस्ताव से इसकी तुलना कर रहा है। रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E  की तकनीक के साथ एक बड़ा ऑफर दिया है। इस प्रस्ताव में न केवल विमान की आपूर्ति शामिल है, बल्कि उसके पूरे सॉफ्टवेयर सोर्स कोड तक पहुंच तकनीकी हस्तांतरण और भारत में इसका स्थानीय निर्माण भी प्रस्तावित है।यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अमेरिका के F-35A स्टील्थ फाइटर को खरीदने पर भी विचार कर रहा है। अब भारत के सामने यह रणनीतिक विकल्प है कि वह रूस के प्रस्ताव को स्वीकार करे या अमेरिका के साथ जाए।   रूस के प्रस्ताव में क्या है खास?  रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार है, जिससे भारत इसमें अपने हथियार और एवियोनिक्स सिस्टम जोड़ सकेगा।यह कदम भारत को स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा तकनीकी लाभ देगा। रूस, भारत में इस विमान का निर्माण करने की अनुमति  भी देगा, जिससे ‘ मेक इन इंडिया ’ को बल मिलेगा। भारत इसमें अपनी मिसाइलें जैसे अस्त्र, रुद्रम * और अन्य हथियार जोड़ सकता है।        F-35A बनाम Su-57  अमेरिका का F-35A विमान तकनीकी रूप से बहुत उन्नत माना जाता है लेकिन अमेरिका पूर्ण तकनीक साझा नहीं करता । अमेरिका भारत को F-35 की केवल सीमित संख्या और सीमित क्षमताओं के साथ देने पर सहमत है। वहीं रूस न सिर्फ  पूरी टेक्नोलॉजी देने को तैयार है बल्कि  उत्पादन का अधिकार भी देगा। भारत की रणनीतिक दुविधा भारत का अमेरिका के साथ QUAD  जैसे रणनीतिक समझौते हैं, वहीं रूस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। इस समय भारत को यह निर्णय लेना है कि वह रणनीतिक दृष्टि से किस साझेदार पर अधिक विश्वास कर सकता है । टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने वाला रूस या  राजनयिक सहयोग देने वाला अमेरिका । रूस का यह प्रस्ताव भारत की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है। अमेरिका के साथ जुड़ने के राजनीतिक लाभ हैं, लेकिन तकनीकी और सामरिक आत्मनिर्भरता के लिए रूस का प्रस्ताव बेहद लुभावना है।

मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर देते हुए वैश्विक स्तर पर इस दिशा में प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। वह यूरोप में पहली बार आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर” को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फ्रांसीसी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, “मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं। साथ ही आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।” उन्होंने कहा कि तटीय और द्वीपीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अत्यधिक खतरे में हैं। उन्होंने कहा, “इस सम्मेलन की थीम है: तटीय क्षेत्रों के लिए एक लचीले भविष्य का निर्माण। भारत और बांग्लादेश में चक्रवात ‘रेमाल’, कैरेबियन में ‘हैरिकेन बेरिल’, अमेरिका में ‘हेलीन’, दक्षिण-पूर्व एशिया में ‘यागी’ और फिलीपींस में ‘उसागी’ जैसी आपदाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।” प्रधानमंत्री ने भारत की पुरानी आपदाओं की याद दिलाते हुए कहा, “भारत ने 1999 के सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी की पीड़ा को झेला है। हमने इससे सीखते हुए लचीलापन अपनाया और तटीय इलाकों में चक्रवात शेल्टर बनाए। साथ ही, 29 देशों के लिए एक सुनामी चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भी भारत ने मदद की।” भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्होंने कहा कि “कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई)” 25 छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ कार्य कर रही है, जिसमें मजबूत घर, अस्पताल, स्कूल, ऊर्जा प्रणालियां, जल सुरक्षा तंत्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने कहा, “मैं प्रशांत, हिंद महासागर और कैरेबियन क्षेत्रों से आए मित्रों का स्वागत करता हूं। मुझे यह जानकर खुशी है कि अफ्रीकी संघ भी अब सीडीआरआई का हिस्सा बन गया है।” प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक प्राथमिकताओं में सबसे पहले शिक्षा और कौशल विकास को रखा। उन्होंने कहा, “आपदा प्रबंधन से जुड़े कोर्स, मॉड्यूल और कौशल विकास कार्यक्रम उच्च शिक्षा का हिस्सा बनने चाहिए। इससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे।” उन्होंने साझा सीख पर बल देते हुए कहा, “दुनिया भर के कई देश आपदाओं का सामना कर लचीलापन अपनाते हैं। इनके अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए एक वैश्विक डिजिटल भंडार बनाना उपयोगी होगा।” वित्तपोषण पर उन्होंने कहा कि आपदा लचीलापन के लिए नवाचारी वित्त की आवश्यकता है। हमें ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा बनानी चाहिए जो विकासशील देशों को आसानी से वित्त उपलब्ध करा सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से कमजोर देशों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “हम छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देश मानते हैं। इनकी संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें विशेष ध्यान मिलना चाहिए।” अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ऐसा बुनियादी ढांचा बनाने की अपील की जो समय और आपदाओं की कसौटी पर खरा उतरे। उन्होंने एक मजबूत और प्रेरणादायक भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया।

एस. जयशंकर ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री के साथ बातचीत के दौरान कहा- आतंकवाद कतई बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपना रहा है, उम्मीद है कि हमारे साझेदार इसे समझेंगे। यह बात भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री के साथ बातचीत के दौरान कही। जयशंकर ने पहलगाम हमले की निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का समर्थन करने के लिए ब्रिटेन को धन्यवाद दिया। विदेश मंत्री ने कहाकि भारत कभी भी इस बात का समर्थन नहीं करेगा कि अपराध करने वालों को पीड़ितों के समान रखा जाए। इसके साथ ही जयशंकर ने हाल में हुए भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता, दोहरा अंशदान समझौता को मील का पत्थर बताया। भारत आए हुए हैं ब्रिटिश विदेश मंत्री गौरतलब है कि ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी व्यापार के साथ-साथ रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के लिए शनिवार को भारत की दो-दिवसीय यात्रा पर आए हुए हैं। लैमी ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ व्यापक मुद्दों पर बातचीत की। जयशंकर ने इस दौरान भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते की भी तारीफ की। साथ ही उन्होंने इस समझौते को मील का पत्थर भी बताया है। सीमा पार आतंकवाद पर हुई बात जानकारी के मुताबिक ब्रिटेन के विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से फैलाए जा रहे आतंकवाद पर भी बात हुई। बता दें कि पिछले महीने भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के दौरान ब्रिटेन दोनों देशों के संपर्क में था। भारत आने से पहले लैमी 16 मई को दो दिन के लिए इस्लामाबाद भी गए थे। वहां पर उन्होंने सैन्य संघर्ष खत्म करने के लिए दोनों देशों की तारीफ भी की थी। इससे पहले पांच मध्य एशियाई देशों ने शुक्रवार को भारत के साथ मिलकर 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। साथ ही मांग की कि आतंकवादी कृत्यों के अपराधियों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाए तथा दंडित किया जाए। नयी दिल्ली द्वारा आयोजित भारत-मध्य एशिया वार्ता के चौथे संस्करण में आतंकवाद से निपटने की चुनौती पर प्रमुखता से चर्चा हुई। इसमें कई प्रमुख क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग के समग्र स्वरूप को विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।  

शिमला में अचानक सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ गई, इलाज के लिए आईजीएमसी अस्पताल में कराया भर्ती

शिमला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें शिमला के असप्ताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी शिमला दौरे पर भी। इसी दौरान शनिवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इलाज के लिए उन्हें शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में लाया गया है। सोनिया गांधी अपनी बेटी प्रियंका गांधी के साथ 2 जून को ही शिमला आई थीं। वह यहां छराबड़ा में प्रियंका गांधी के घर पर ठहरी हुई थीं। सूचना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी अपने ऊना जिला के दौरे को बीच में छोड़कर शिमला के लिए निकल पड़े हैं। जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी की तबीयत शनिवार को शिमला प्रवास के दौरान अचानक बिगड़ गई। इसके चलते उन्हें तुरंत शिमला स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं चिकित्सालय (आईजीएमसी) में भर्ती कराया गया। चार दिन पहले वह निजी प्रवास पर शिमला के समीप छराबड़ा स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा के निवास पर पहुंची थीं, जहां वे कुछ दिन सुकून के साथ बिताने आई थीं। डॉक्टरों की टी तैनात शनिवार को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर सोनिया गांधी को तुरंत आईजीएमसी लाया गया, जहां उनकी चिकित्सा जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम तैनात की गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। उनकी एमआरआई सहित अन्य जरूरी जांचें की जा रही हैं ताकि बीमारी के कारणों की सटीक जानकारी मिल सके। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे के उपचार की दिशा तय की जाएगी। आईजीएमसी में सोनिया गांधी को विशेष वीआईपी वार्ड में भर्ती किया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर को अलर्ट मोड पर रखा है और पुलिस जवानों की तैनाती भी कर दी गई है। हर साल गर्मियों में हिमाचल प्रदेश जाती हैं सोनिया गांधी गौरतलब है कि सोनिया गांधी हर साल गर्मियों में कुछ दिन हिमाचल प्रदेश के शांत और प्राकृतिक वातावरण में बिताने आती हैं। इस बार भी वे अपने पारिवारिक निवास पर विश्राम के लिए पहुंची थीं, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक उनकी तबीयत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस बीच सोनिया गांधी के स्वास्थ्य की खबर मिलते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और शिमला लौटने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू शनिवार सुबह ऊना जिले के दौरे पर थे, जहां उन्होंने गगरेट विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। गगरेट के बाद मुख्यमंत्री कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र पहुंचे थे, जहां उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘कुटलैहड़ महोत्सव’ की सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करनी थी। इसके अलावा रविवार को जिला मुख्यालय पर स्कूल और कॉलेज भवनों के लोकार्पण कार्यक्रम भी निर्धारित थे। लेकिन सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अपने सभी शेष कार्यक्रम रद्द कर दिए और तत्काल शिमला रवाना हो गए।

अपना खुद का उद्योग या व्यापार शुरू करने बिना ब्याज 5 लाख रुपये तक का लोन, जानें सरकार की इस योजना के बारे में

नई दिल्ली  देश की महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत महिलाएं बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त कर सकती हैं। खास बात ये है कि यह योजना खासकर ग्रामीण और कम आय वर्ग की महिलाओं के लिए शुरू की गई है, ताकि वे अपना खुद का उद्योग या व्यापार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। क्या है लखपति दीदी योजना? लखपति दीदी योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने साल 2023 में की थी। इस योजना का उद्देश्य है कि देश की करोड़ों महिलाओं को खुद का रोजगार स्थापित करने में मदद मिले। इसके लिए महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग दी जाती है और उसके बाद उन्हें 1 लाख से लेकर 5 लाख रुपये तक का बिना ब्याज का लोन प्रदान किया जाता है। यह लोन सरकार स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से उपलब्ध कराती है। क्यों खास है ये योजना? बिना ब्याज का लोन: महिलाओं को 5 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी ब्याज के मिलता है स्वरोजगार को बढ़ावा: महिलाएं खुद का काम शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकती हैं सरकारी सहयोग: योजना पूरी तरह सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए धोखाधड़ी का खतरा नहीं स्किल ट्रेनिंग: व्यापार शुरू करने से पहले महिलाओं को उचित ट्रेनिंग दी जाती है कौन-कौन ले सकता है योजना का लाभ? इस योजना के तहत आवेदन करने से पहले महिलाओं को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा: महिला का संबंध किसी स्वयं सहायता समूह (SHG) से होना चाहिए परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए महिला की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए यदि कोई महिला इन शर्तों को पूरा करती है, तो वह योजना के तहत लोन के लिए आवेदन कर सकती है। कैसे मिलेगा लोन? क्या है प्रक्रिया? इस योजना का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी होगी:     सबसे पहले महिला को स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होगा     इसके बाद महिला को एक व्यवसाय योजना (Business Plan) तैयार करनी होगी     यह योजना SHG द्वारा संबंधित सरकारी विभाग को भेजी जाएगी     सरकारी अधिकारी उस योजना की समीक्षा करेंगे     योजना स्वीकृत होने पर महिला को बिना ब्याज का लोन मिल जाएगा किन दस्तावेजों की होगी जरूरत? लखपति दीदी योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:     आधार कार्ड     पैन कार्ड     आय प्रमाण पत्र     बैंक पासबुक     पासपोर्ट साइज फोटो     मोबाइल नंबर स्वयं सहायता समूह की सदस्यता प्रमाण कितनी महिलाओं को होगा फायदा? सरकार ने इस योजना के तहत 3 करोड़ महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके माध्यम से देश के हर कोने में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे परिवार के लिए आय का मुख्य स्रोत बन सकेंगी। यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद महिलाओं को समाज में सम्मान, सशक्तिकरण, और व्यावसायिक कुशलता प्रदान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को जहां रोजगार के अवसर सीमित हैं, वहां यह योजना एक नई उम्मीद लेकर आई है।

थरूर ने साफ कहा- दोनों देशों की स्थिति बिल्कुल अलग है और उनके बीच मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं

वाशिंगटन  अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को खत्म करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ा जवाब दिया है। थरूर ने साफ कहा कि दोनों देशों की स्थिति बिल्कुल अलग है और उनके बीच मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। आतंकवादियों और पीड़ितों की तुलना नहीं हो सकती थरूर ने कहा, “मध्यस्थता ऐसा शब्द है जिसे हम मानने को तैयार नहीं हैं। जब आप ‘मध्यस्थ’ या ‘ब्रोकर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो आप यह मान लेते हैं कि दोनों पक्ष समान हैं, जबकि ऐसा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “एक तरफ वह देश है जो आतंकवाद को पनाह देता है और दूसरी ओर भारत है – एक मजबूत लोकतंत्र जो शांति से जीना चाहता है। ऐसे में दोनों के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती।” थरूर ने यह भी कहा, “भारत अपने तरीके से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है, जबकि पाकिस्तान 75 साल पुरानी सीमाओं और राजनीतिक व्यवस्था को बदलना चाहता है। ऐसे दो बिल्कुल अलग देशों के बीच मध्यस्थता की बात करना बिल्कुल गलत है।” बता दें कि शशि थरूर इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं और वे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारतीय सांसदों के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने यह बयान अमेरिका की ‘काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ में एक सवाल के जवाब में दिया। ट्रंप के दावे – मैंने युद्ध रुकवाया ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ और इसमें अमेरिका की मध्यस्थता ने बड़ी भूमिका निभाई। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने दोनों देशों से कहा, “अगर तुम लड़ते रहोगे और परमाणु हथियार दिखाते रहोगे, तो अमेरिका तुम्हारे साथ व्यापार नहीं करेगा।” ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बातचीत में भी यही बात दोहराई और कहा, “मैंने वह युद्ध रुकवाया। क्या मुझे इसका श्रेय मिलेगा? नहीं मिलेगा। लेकिन सच ये है कि और कोई ऐसा नहीं कर सकता था।” भारत का जवाब – DGMOs के बीच बातचीत से हुआ समझौता भारत सरकार ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का फैसला दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच सीधे बातचीत से हुआ था। इससे पहले, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। चार दिन तक चली इस कार्रवाई के बाद, 10 मई को युद्धविराम पर सहमति बनी। थरूर ने अमेरिकी प्रयासों को सराहा, लेकिन भूमिका सीमित बताई जब थरूर से पूछा गया कि वह अमेरिका की भूमिका को कैसे देखते हैं, तो उन्होंने कहा, “कुछ कॉल्स हमारी सरकार को अमेरिका की ओर से जरूर आईं। हम उनकी चिंता और बातचीत की पहल की सराहना करते हैं। लेकिन मेरा अनुमान है कि अमेरिका ने पाकिस्तान से ज्यादा बात की होगी और शायद वहीं असर हुआ।” उन्होंने यह भी कहा, “हम मानते हैं कि पाकिस्तान को ही समझाने की सबसे ज्यादा जरूरत थी। लेकिन यह मेरा निजी अनुमान है, मैं नहीं जानता कि उन्होंने वहां क्या बातचीत की।”    

एमएफ हुसैन ने भारत माता को आपत्तिजनक तरीके से चित्रित किया है, लगे रोक: ‘हिंदू जनजागृति संगठन’

मुंबई  मुंबई में फेमस पेंटर MF Husain की पेंटिंग्स की नीलामी को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। ‘हिंदू जनजागृति संगठन’ ने कहा है कि एमएफ हुसैन ने भारत माता को आपत्तिजनक और अपमानजनक तरीके से चित्रित किया है, इसलिए उनकी सभी पेंटिंग्स पर रोक लगाई जानी चाहिए। संगठन ने मांग की है कि एमएफ हुसैन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और उनके विवादित चित्रों का महिमामंडन बंद किया जाए। एमएफ हुसैन की कई पेंटिंग्स पहले भी विवादों में रही हैं। इनमें एक पेंटिंग में भारत माता को एक नग्न महिला के रूप में दिखाया गया है, जो भारत के नक्शे जैसी मुद्रा में झुकी हुई है। इस पेंटिंग को लेकर पहले भी काफी विरोध हुआ था और कोर्ट ने इसे सीज करने का आदेश दिया था। अब हिंदू जनजागृति संगठन ने कहा है कि ऐसे 25 और चित्रों की नीलामी पर भी रोक लगाई जाए। उन्होंने इस नीलामी को ‘देश के धार्मिक और राष्ट्रीय भावनाओं के साथ खिलवाड़’ बताया है।   एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स की नीलामी 12 जून को मुंबई के हैमिल्टन हाउस की ‘पंडोल आर्ट गैलरी’ में होनी है। इस मामले में हिंदू जनजागृति समिति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुंबई पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर नीलामी रोकने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि अगर नीलामी जारी रही तो वे तीव्र आंदोलन करेंगे। संगठन ने बताया कि एमएफ हुसैन ने 26/11 आतंकी हमले के समय ‘रेप ऑफ इंडिया’ नाम से एक पेंटिंग बनाई थी, जिसमें भारत माता को नग्न और अपमानजनक रूप में दिखाया गया था। इसके अलावा कई अन्य चित्रों में देवी-देवताओं को अश्लील और विकृत रूपों में दिखाया गया है, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। संगठन के अनुसार, एमएफ हुसैन के खिलाफ देशभर में 1250 से अधिक पुलिस शिकायतें भी दर्ज की गई हैं, जिसके कारण वह भारत छोड़कर कतर की नागरिकता लेने पर मजबूर हुए थे।   हिंदू जनजागृति समिति ने कहा कि एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स की नीलामी और प्रदर्शन राष्ट्रद्रोह को बढ़ावा देने जैसा है। ‘कलात्मक स्वतंत्रता के नाम पर धार्मिक भावनाओं का अपमान करना स्वीकार्य नहीं है।’ हाल ही में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने भी हुसैन की पेंटिंग्स को जब्त करने के आदेश दिए हैं। कई जगह उनकी प्रदर्शनियां विरोध के कारण रद्द हो चुकी हैं और उनके नाम पर मिलने वाले पुरस्कार भी वापस लिए जा चुके हैं। अब हिंदू जनजागृति समिति ने सरकार से मांग की है कि एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स की नीलामी पर तत्काल रोक लगाई जाए और धार्मिक व राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले चित्रों के प्रसार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही भारत माता के अपमानजनक चित्र को राष्ट्रविरोधी घोषित कर उसे नष्ट किया जाना चाहिए। इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक और सांस्कृतिक सम्मान की रक्षा की जा सकेगी और देशवासियों की भावनाओं का सम्मान होगा।

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दी चेतावनी, मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को भारत के हवाले करे

नई दिल्ली  भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सरकार की कड़ी नीति को एक बार फिर स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि आतंकवाद को लेकर अब दोगलापन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ‘एक का आतंकी, दूसरे का फ्रीडम फाइटर’ वाली सोच अब पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर वह आतंकवाद के खिलाफ गंभीर है तो मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को भारत के हवाले करे। ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवादियों के ठिकानों पर सटीक हमला 7 मई 2025 को भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और पाकिस्तान के अंदर आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी सेना के 11 एयरबेस भी इस हमले में बुरी तरह प्रभावित हुए। शनिवार 7 जून को इस ऑपरेशन को एक महीना पूरा हो गया है। आतंकवाद पर भारत का अडिग रुख: बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब आतंकवाद के प्रति बिल्कुल भी सहिष्णु नहीं रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। भविष्य में पाकिस्तान से किसी भी वार्ता का केंद्र आतंकवाद और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर होगा। उन्होंने पाकिस्तान से यह भी कहा कि यदि वह सचमुच आतंकवाद खत्म करना चाहता है तो उसे प्रमुख आतंकियों को तुरंत भारत को सौंपना होगा। आतंकवाद के खिलाफ पांच सूत्रीय रणनीति का आह्वान रक्षा मंत्री ने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के विरुद्ध मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया:     आतंकवाद की एक सार्वभौमिक परिभाषा तय की जाए ताकि सभी देशों के लिए समान रूप से आतंकवाद को परिभाषित किया जा सके।     आतंकवाद और उसके वित्त पोषण पर पूरी रोक लगाई जाए, साथ ही आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाए।     पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी लागू की जाए, क्योंकि आतंकवादी यहां राज्य सम्मान पाते हैं।     प्रॉक्सी वॉर को रोकने के लिए आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों की पहचान कर उनका पर्दाफाश किया जाए।     आधुनिक तकनीक जैसे AI, ड्रोन और बायोटेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। भारत की बदलती सैन्य रणनीति: रक्षात्मक से आक्रामक नीति की ओर राजनाथ सिंह ने भारत की सैन्य नीति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब भारत आतंकवादियों के खिलाफ केवल रक्षात्मक कदम नहीं उठा रहा, बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रहा है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक और हालिया ऑपरेशन सिंदूर इसके उदाहरण हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जो पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण थी। आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता जरूरी रक्षा मंत्री ने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा मानकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मिलकर आतंकवाद के इस दानव को खत्म करना होगा। इस अभियान में संयुक्त राष्ट्र की व्यापक आतंकवाद निरोधक संधि को लागू करना सबसे जरूरी कदम होगा। 

कनाडा में बसे पंजाबी कारोबारियों से रंगदारी वसूलने, धमकाने और हत्या के मामले बढे, पंजाबी व्यवसायी की हत्या

कनाडा  कनाडा ने वर्षों से कथित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शरण नीति के नाम पर भारत विरोधी तत्वों और खालिस्तान समर्थकों को खुली छूट दी है। लेकिन अब उसी नीति का खामियाजा कनाडा के आम पंजाबी नागरिक भुगत रहे हैं। जिन लोगों को कभी “राजनैतिक शरणार्थी” मानकर जगह दी गई, अब वही चरमपंथी तत्व कनाडा में बसे पंजाबी कारोबारियों से रंगदारी वसूलने, धमकाने और हत्या करने में लगे हैं। कनाडा के एक प्रसिद्ध पंजाबी व्यवसायी हरजीत सिंह ढड्डा की हाल ही में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब उनकी बेटी गुरलीन कौर ढड्डा ने खुलासा किया है कि उनके पिता से  5 लाख डॉलर (लगभग 4 करोड़ रुपये)  की रंगदारी मांगी जा रही थी। गुरलीन के अनुसार, उनके परिवार ने पहले ही धमकियों की सूचना कनाडाई पुलिस को दी थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा, “मेरे पिता मेहनत की कमाई को किसी को नहीं देने वाले थे, उन्होंने झुकने से साफ मना कर दिया था।” खालिस्तानियों का अपने ही समुदाय पर वार  हरजीत ढड्डा की हत्या कोई अकेला मामला नहीं है।  ब्रैम्पटन, वैंकूवर, एडमोंटन, ओकविले, कैलगरी और सरी (BC) जैसे इलाकों में पंजाबी कारोबारियों को धमकियां, जबरन वसूली की कॉल, गोलीबारी और आगजनी की कई घटनाएं दर्ज हुई हैं।जिन संगठनों पर पहले भारत ने आरोप लगाए थे, अब उनके नाम कनाडा की जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में भी सामने आ रहे हैं।   गिरफ्तारियां और साजिश की पुष्टि  ब्रैम्पटन में हाल ही में रंगदारी के लिए गोली चलाने के आरोप में  हरपाल सिंह (34), राजनूर सिंह (20) और एकनूर सिंह (22) को गिरफ्तार किया गया। यह तीनों ब्रैम्पटन के ही निवासी हैं और सीधे तौर पर खालिस्तानी नेटवर्क से जुड़े गिरोहों के संपर्क में थे।व्यापारियों ने बताया कि जब वे धमकियों की शिकायत लेकर पुलिस के पास गए, तो उन्हें “देखते हैं” कहकर लौटा दिया गया। बाद में, जब धमकियां सच्चाई में बदल गईं । दुकानों में गोलीबारी, ट्रकिंग कंपनियों पर हमले और परिवारों को धमकियों की बौछार हुई तब जाकर जांच शुरू हुई। भारत ने पहले ही दी थी चेतावनी  भारत ने पहले ही कनाडा को आगाह किया था कि वह अपनी भूमि का इस्तेमाल खालिस्तान जैसे अलगाववादी आंदोलन और आतंकवाद के लिए न होने दे। लेकिन कनाडा की सरकार, खासकर प्रधानमंत्री  जस्टिन ट्रूडो ने इस चेतावनी को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के नाम पर नज़रअंदाज़ किया।अब कनाडा में बसे आम सिख और पंजाबी नागरिक खुद खतरे में हैं। यह सवाल अब कनाडा की संसद और जनता में गूंज रहा है  “क्या खालिस्तानी आतंकियों को शरण देकर हमने खुद को ही कमजोर कर लिया है?”    

गाजा में बद से बदतर होते हालात, 2300 में बिक रहा 5 रुपये का Parle-G, वायरल वीडियो ने दिखाई सच्चाई

रामल्ला  भारत में पारले-जी बिस्कुट एक सादगी का पर्याय है। यह चाय के साथ खाए जाने वाले सबसे पसंदीदा बिस्कुट में से एक है, जिससे लगभग हर भारतीय परिवार परिचित है। हालांकि, युद्ध से तबाह गाजा पट्टी में इस प्रतिष्ठित भारतीय बिस्कुट की एक अलग पहचान बन गई है, और वह है एक विलासिता की वस्तु की। जी हां, गाजा पट्टी में भारत में 5 रुपये में बिकने वाली पारले-जी बिस्कुट 2300 रुपये में बिक रही है। इसे अकाल के कगार पर खड़ी गाजा पट्टी के अवाम के लिए हताशा का प्रतीक माना जा रहा है। गाजा में हालात बेकाबू  रिपोर्ट के अनुसार, पारले-जी की नई कीमतों का खुलासा गाजा में रहने वाले एक फिलिस्तीनी मोहम्मद जवाद के वायरल सोशल मीडिया पोस्ट से हुई है। इस पोस्ट से दुनिया को यह पता चला है कि युद्ध से तबाह गाजा पट्टी में हालात कितने नाजुक हैं। संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही गाजा को अकाल के कगार पर खड़ा दुनिया का सबसे खतरनाक युद्धक्षेत्र घोषित किया है। हाल में ही एक राहत सामग्री डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर पर गोलीबारी के बाद हालात और ज्यादा खराब हो गए हैं। गाजा के वायरल वीडियो में क्या दिखा मोहम्मद जवाद के पोस्ट किए गए वीडियो में उनकी छोटी बेटी रफीफ पारले-जी बिस्कुट का एक पैकेट पकड़े हुए दिखाई दे रही है। जवाद ने बताया कि उन्होंने पैकेट के लिए €24 (लगभग 2,342 रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया, जिसकी कीमत आमतौर पर भारतीय बाजारों में 5 रुपये से कम और अंतरराष्ट्रीय किराना स्टोर में लगभग 100 रुपये होती है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भले ही कीमत €1.5 से बढ़कर €24 से ज्यादा हो गई हो, लेकिन मैं राफिफ को उसकी पसंदीदा चीज देने से मना नहीं कर सका।” सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस पोस्ट ने दुनिया भर के लोगों के दिलों को जीत लिया और चौंक गए, खासकर उन भारतीय उपयोगकर्ताओं के बीच जिनके लिए पारले-जी किफ़ायती और बचपन का एक स्थायी प्रतीक है। उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और कई भारतीय उपयोगकर्ताओं ने सरकारी अधिकारियों और पारले कंपनी को मदद के लिए टैग किया। एक यूजर ने लिखा: “भारत ने सहायता के तौर पर फिलिस्तीनियों को पारले-जी भेजा, लेकिन सहायता ट्रक हमास द्वारा कब्जा कर लिए गए और उन्होंने भूखे फिलिस्तीनियों को भोजन और दवाइयां ब्लैक में बेच दीं। 5 रुपये का पारले-जी 2,500 रुपये में बेचा जा रहा है। यह मासूमों के दुख का शोषण करने वाले तथाकथित प्रतिरोध का असली चेहरा है।” गाजा में राहत सामग्री वितरण पर सवाल पोस्ट का जवाब देते हुए, जवाद ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि गाजा के लोगों के लिए आने वाली सहायता निष्पक्ष रूप से वितरित की जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि कब्जे ने इस सहायता को चुराने और इसे आसमान छूती कीमतों पर बाजार में बेचने के लिए कई एजेंटों और चोरों की भर्ती की है। उदाहरण के लिए, आटा लगभग 500 डॉलर में बेचा जाता है, और चीनी लगभग 90 डॉलर प्रति किलोग्राम में बेची जाती है। सभी बुनियादी सामान पागल कीमतों पर बेचे जाते हैं। कुछ लोग, जो खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, अपनी ज़रूरत की चीज़ें पाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। इस बीच, अन्य लोग बड़ी मात्रा में चोरी करते हैं और उन्हें भारी मुनाफ़े के लिए बाजार में बेचते हैं।”  

पाक के विदेश मंत्री ने कहा- हम भारतीय पीएम के बयान से निराश हैं, हमले में खुद के शामिल होने का सुबूत भी मांगा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पीएम मोदी के बयान पर पाकिस्तान को मिर्ची लगी है। इसको लेकर पाकिस्तानी विदेश मंत्री का जवाब आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार ने कहा है कि हम भारतीय प्रधानमंत्री के बयान से निराश हैं। साथ ही उसने पहलगाम हमले में खुद के शामिल होने का सुबूत भी मांगा है। गौरतलब है कि कश्मीर में चिनाब ब्रिज और वंदे भारत ट्रेन को झंडी दिखाने के बाद में भारतीय प्रधानमंत्री ने वहां की जनता को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने पहलगाम पर हमले को इंसानियत और कश्मीरियत पर हमला बताया था। पीएम मोदी ने पाकिस्तान को जमकर सुनाया गौरतलब है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने पहलगाम में 22 अप्रैल को हमला कर दिया था। इसमें कई बेकसूर भारतीय टूरिस्ट मारे गए थे। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। आतंकी हमलों के बावजूद कश्मीर में विकास की यात्रा बदस्तूर जारी है। शुक्रवार को पीएम मोदी ने कश्मीर में चिनाब ब्रिज, अंजी ब्रिज का शुभारंभ किया। अलावा यहां पर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी भी दिखाई। इसके बाद पीएम मोदी ने पाकिस्तान को जमकर सुनाया था। पाकिस्तान को बताया गरीबों का दुश्मन मोदी ने कहाकि पाकिस्तान गरीबों की रोजी-रोटी का भी दुश्मन है। 22 अप्रैल को पहलगाम में जो हुआ, वह इसका स्पष्ट उदाहरण है। पाकिस्तान ने पहलगाम में इंसानियत और कश्मीरियत पर हमला किया। उन्होंने कहाकि पाकिस्तान का इरादा भारत में सांप्रदायिक दंगे भड़काना था। वह मेहनतकश कश्मीरियों की रोजी-रोटी भी छीनना चाहता था, इसलिए उसने पर्यटकों को निशाना बनाया। यह पहलगाम आतंकी हमला और उसके जवाब में भारत की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री का पहला जम्मू-कश्मीर दौरा था। ऑपरेशन सिंदूर की भी दिलाई याद मोदी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने ठीक एक महीने पहले, छह-सात मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों पर कयामत बरपाई थी। उन्होंने कहाकि पाकिस्तान जब भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम सुनेगा, उसे अपनी शर्मनाक हार की याद ताजा हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहाकि पाकिस्तान की सेना और आतंकवादी नेटवर्क ने भारत के इस साहसिक कदम की कभी कल्पना भी नहीं की होगी। उनके देश में सैकड़ों किलोमीटर अंदर दशकों में बनाए गए आतंकवादी ढांचों को कुछ ही मिनटों में नष्ट कर दिया गया।  

सूरत में ऐसी ही दिल को दहला देने वाली घटना घटी, 5 दिन पहले सगाई, दुकान में बैठे-बैठे आया हार्ट अटैक, हुई मौत

सूरत कुछ दिन पहले सगाई और फिर घर से अर्थी का उठना, किसी भी परिवार के लिए ये सब झेल पाना इतना भी आसान नहीं होता। गुजरात के सूरत में ऐसी ही दिल को दहला देने वाली घटना घटी। यहां ऋषभ गांधी नामक 27 साल के युवक की मौत हार्ट अटैक के चलते उनकी दुकान में हो गई। अपनी टैक्सटाइल की शॉप में श्रषभ आम दिनों की तरह बैठे-बैठे बातें कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया और मौके पर ही मौत हो गई। घटना का पूरा वीडियो दुकान में लगे सीसीटीवी में कैद हो गया है। ऋषभ मूलता जोधरुर के चांदपोल इलाके के रहने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक गुरुवार शाम ऋषभ दुकान पर अपने जीजा और दोस्तों के साथ आम दिनों की तरह बातचीत कर रहे थे। तभी उन्हें प्यास लगी और सामने रखी पानी की बोतल उठाकर उसका ढक्कन खोलकर पानी पीने की कोशिश करने लगे, तभी उन्होंने पाया कि उनके हाथ-पांव काम नहीं कर रहे और फिर वो बैठे-बैठे कुर्सी पर ही लुढ़कने लगे। अचानक घटी इस घटना का वीडियो दुकान में लगे सीसीटीवी में कैद हो गया है। पास बैठे दोस्तों और जीजा ने जैसे ही मामले को समझा, ऋषभ को सीपीआर देना शुरू किया। मगर तब तक ऋषभ ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया था। इस बीच जल्दी से फोन पर उनके स्वास्थ्य खराब होने के बारे में बताया गया और कुर्सी पर बैठाकर लिफ्ट के जरिए नीचे पार्किंग तक लाया गया। आनन-फानन में ऋषभ को नजदीकी निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई है। घटना की बात परिजनों तक पहुंची तो सब हैरान रह गए और नए जुड़ रहे परिवार में भी मातम का माहौल छाया हुआ है। अंतिम संस्कार के लिए ऋषभ का पार्थिव शरीर सूरत से राजस्थान उनके पैतृक गांव लाने के लिए तैयारी शुरू हो गई। जानकारी में सामने आया है कि मृतक अपनी बहन के साथ रहते थे और माता-पिता गांव में ही रहते थे। उन्हें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर पद्मावती टेक्सटाइल मार्केट में कपड़े की दुकान शुरू की थी।  

ऑपरेशन स्पाइडर पर पुतिन की रिवेंज स्ट्राइक! यूक्रेन पर मिसाइलों की बरसात

कीव रूस ने यूक्रेन पर भीषण हवाई हमला किया है। इस हमले में यूक्रेन के चार नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 40 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। हमले इतने जोरदार थे कि यूक्रेनी सेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इसे यूक्रेन के ऑपरेशन स्पाइडर वेब का जवाब माना जा रहा है, जिसमें रूस को कम के कम 9 परमाणु बमवर्षक विमान खोने पड़े थे। इस हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने रात भर में 400 से अधिक ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों से बड़े पैमाने पर हमला किया है। ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के सहयोगियों से युद्ध रोकने के लिए शीघ्र कार्रवाई करने का आह्वान किया। रूसी हमले से सदमे में यूक्रेन ज़ेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “यदि कोई दबाव नहीं डालता है और युद्ध को लोगों की जान लेने के लिए और समय देता है, तो वे दोषी और जिम्मेदार हैं। हमें निर्णायक रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।” यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति के आह्वान का समर्थन किया तथा सहयोगियों से अविलंब अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने का आग्रह किया। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिगा ने एक बयान में कहा, “रूस द्वारा रात में नागरिकों पर किया गया हमला एक बार फिर दर्शाता है कि मॉस्को पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव यथाशीघ्र बढ़ाया जाना चाहिए।” 18 इमारतों को किया जमींदोज यह हमला रूस की ओर से यूक्रेन पर हो रहे लगातार और व्यापक हमलों की कड़ी में एक और खतरनाक कदम है. खारकीव के मेयर इगोर टेरेखोव ने बताया कि हमले में 18 बहुमंजिला इमारतें और 13 निजी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. यूक्रेन ने मचाई थी तबाही पिछले दिनों यूक्रेन ने ड्रोन के जरिए रूस पर ताबड़तोड़ हमला किया. रॉयटर्स ने तीन ओपन सोर्स विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि रूस के अंदर यूक्रेन द्वारा ड्रोन हमला किए जाने के तुरंत बाद ली गई रूसी एयर बेस की सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि कई बम गिराने वाले विमान नष्ट हो गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. 117 ड्रोन से किया अटैक यूक्रेन ने टारगेट के करीब कंटेनरों से लॉन्च किए गए 117 मानव रहित एरियल व्हीकल का उपयोग करके रूस भर में करीब चार एयर बेस को निशाना बनाया. रॉयटर्स की ओर से वेरिफाइड ऑपरेशन के ड्रोन फुटेज से पता चलता है कि करीब दो जगहों पर कई एयरक्राफ्ट पर हमला किया गया. चार लोगों की मौत की पुष्टि कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने पुष्टि की कि चार लोगों की मौत हो गई है और कहा कि शहर में 20 लोग घायल हुए हैं। सोलोम्यांस्की जिले में, 16 मंजिला आवासीय इमारत की 11वीं मंजिल पर आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने अपार्टमेंट से तीन लोगों को निकाला, और बचाव अभियान जारी है। इसके बाद एक धातु गोदाम में आग लग गई। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन प्रमुख दिमित्रो ब्रायज़िन्स्की के अनुसार, उत्तरी चेर्निहाइव क्षेत्र में, एक शाहेद ड्रोन एक अपार्टमेंट इमारत के पास फट गया, जिससे खिड़कियां और दरवाजे टूट गए। उन्होंने कहा कि शहर के बाहरी इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलों से विस्फोट भी दर्ज किए गए। जेलेंस्की ने बताया कहां-कहां हुआ हमला हमले के बाद जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा, रूस अपनी नीति नहीं बदलता – शहरों और आम जीवन पर एक और बड़ा हमला। उन्होंने लगभग पूरे यूक्रेन को निशाना बनाया – वोलिन, लविवि, टेरनोपिल, कीव, सुमी, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, चर्कासी और चेर्निहिव क्षेत्र। कुछ मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया गया। मैं अपने योद्धाओं को उनकी रक्षा के लिए धन्यवाद देता हूं। लेकिन दुर्भाग्य से, सभी को रोका नहीं जा सका।।” 400 ड्रोन, 40 मिसाइलों से हमला उन्होंने आगे कहा, आज के हमले में कुल मिलाकर 400 से अधिक ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों – बैलिस्टिक मिसाइलों सहित – का इस्तेमाल किया गया। 49 लोग घायल हुए। दुर्भाग्य से, संख्या बढ़ सकती है – लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक, तीन मौतों की पुष्टि हुई है – वे सभी यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के कर्मचारी थे। उनके परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। सभी आवश्यक सेवाएं अब ग्राउंड पर काम कर रही हैं, मलबे को साफ कर रही हैं और बचाव अभियान चला रही हैं। सभी नुकसान निश्चित रूप से बहाल किए जाएंगे।”

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