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बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे तेज होता जा रहा, 4 राज्यों में खूब बरसेंगे बादल

महाराष्ट्र जहां उत्तर भारत में गर्मी पूरे उरूज पर है वहीं महाराष्ट्र और पश्चिमी घाट के तटवर्ती राज्यों में बारिश ने कहर ढा रखा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा चेतावनी के अनुसार देश के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को मजबूती मिल रही है। साथ ही 29 मई से उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जिससे हिमालयी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मौसम बिगड़ सकता है। दक्षिण भारत में भारी बारिश का कहर केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अगले 5-6 दिनों तक मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। 27 से 30 मई तक केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। तूफानी हवाएं 50-70 किमी/घंटा तक की रफ्तार पकड़ सकती हैं। वहीं कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात में भी बारिश का जोर रहेगा। 27 मई को कोंकण के घाट क्षेत्रों और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश के आसार हैं। रायगढ़, रत्नागिरी और पुणे जिलों के लिए फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर और पूर्व भारत में राहत कब तक 29 मई तक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे गर्मी थोड़ी बहुत निजात मिलती नजर आएगी। हिमाचल में ओलावृष्टि की भी आशंका है। पूर्वी राज्यों में जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अगले कुछ दिनों तक गरज और बिजली के साथ बारिश का दौर जारी रहेगा। दिल्ली-एनसीआर का क्या हाल वहीं राजधानी क्षेत्र में अधिकतम तापमान 37-39 डिग्री के बीच रहेगा। 29-30 मई को आंशिक बादलों के साथ गरज-चमक और हल्की बारिश हो सकती है। तेज़ हवाओं की गति 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।  

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमापार पाकिस्तानी चौकियों को ध्वस्त करने के लिए किन घातक हथियारों का किया इस्तेमाल

नई दिल्ली सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमापार पाकिस्तानी चौकियों को ध्वस्त करने के लिए किन घातक हथियारों का इस्तेमाल किया, मंगलवार को उनका प्रदर्शन किया। बीएसएफ ने इस ऑपरेशन में विध्वंसक एंटी-मटेरियल राइफल, ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर सिस्टम, 12.7 मिमी एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मीडियम मशीन गन जैसे हथियार यूज किए। BSF के एक जवान ने बताया, ‘यह विध्वंसक एंटी-मटेरियल राइफल है, जिसकी मारक क्षमता 1300 से 1800 मीटर तक है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस हथियार ने दुश्मन के टावरों और बंकरों को नष्ट कर दिया।’ बीएसएफ ने ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर सिस्टम का भी प्रदर्शन किया। एक जवान ने बताया, ‘यह सिस्टम ऑपरेशन सिंदूर में बहुत प्रभावी साबित हुआ। इसने पाकिस्तानी चौकियों, ठिकानों और उनके बुलेटप्रूफ वाहनों को नष्ट कर दिया। इसकी रेंज 1700-2100 मीटर है और इसका ग्रेनेड 10 मीटर के क्षेत्र में घातक प्रभाव डालता है।’ बीएसएफ ने 12.7 मिमी एंटी-एयरक्राफ्ट गन का उपयोग पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोनों को मार गिराने के लिए किया। एक जवान ने बताया, ‘इस गन ने दुश्मन के टैंक, कैंप और ड्रोन नष्ट किए। ऑपरेशन सिंदूर में हमने दुश्मन की चौकियों को तबाह कर उनकी सीमा चौकियों को खाली करने पर मजबूर कर दिया।’ मीडियम मशीन गन ने भी किया कमाल मीडियम मशीन गन ने भी पाकिस्तानी बंकरों को नेस्तनाबूद किया। एक जवान ने कहा, ‘इस गन से हमने पाकिस्तानी चौकियों और ड्रोनों को नष्ट किया। यह प्रति मिनट 600-1000 राउंड फायर कर सकती है।’ इस तरह ऑपरेशन सिंदूर में बीएसएफ ने अपनी रणनीति, हथियारों की ताकत और जवानों के जोश के दम पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। असिस्टेंट कमांडेंट नेहा भंडारी ने क्या बताया बीएसएफ की असिस्टेंट कमांडेंट नेहा भंडारी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक फॉरवर्ड पोस्ट की कमान संभाली थी। उन्होंने कहा, ‘हमारा जोश बहुत ऊंचा था। हमारी जिम्मेदारी थी कि किसी भी घुसपैठ को रोका जाए, पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाए और अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखा जाए। हमने अपने घातक हथियारों से दुश्मन पर हमला किया। इस ऑपरेशन में महिला और पुरुष बीएसएफ जवानों ने एकसाथ कंधे से कंधा मिलाकर कर्तव्य निभाया।’ बीएसएफ जवान शंकरी दास ऑपरेशन के दौरान फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात थे। उन्होंने कहा, ‘हमने अपनी महिलाओं के ‘सिंदूर’ को मिटाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान से बदला लिया है।’  

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की तरफ से चीनी निर्यात पर टैरिफ बढ़ाए जाने से ड्रैगन को करारा झटका, 90 लाख नौकरियों पर खतरा

न्यूयॉर्क अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद से ही जारी है। माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की तरफ से चीनी निर्यात पर टैरिफ बढ़ाए जाने से ड्रैगन को करारा झटका लगने वाला है। खासतौर पर उसके यहां बेरोजगारी में तेज इजाफा हो सकती है और दशकों से ग्रोथ में चल रही इकॉनमी मंदी की चपेट में आ सकती है। मीडिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि टैरिफ वॉर ऐसे ही जारी रहा तो चीन में 90 लाख नौकरियां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में छिन सकती हैं। इसके अलावा चीन में प्रॉपर्टी ग्रोथ भी पहले से काफी डाउन है। चीन में पहले ही बेरोजगारी की दर दोहरे अंकों में जा चुकी है। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से निकलने वाले नए ग्रैजुएट्स को नौकरी मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। इस तरह चीन में पहले से ही लाखों लोग बेरोजगारी के दलदल में हैं और अमेरिका से टैरिफ वॉर इस संकट को और बढ़ा सकता है। दरअसल चीन में अकेले 100 मिलियन नौकरियां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ही हैं। इसी महीने चीन और अमेरिकी अधिकारियों के बीच सहमति बनी है कि अस्थायी तौर पर टैरिफ को कम कर दिया जाए। इसकी वजह है कि दोनों देश ही ऑल आउट ट्रेड वॉर में नहीं जाना चाहते। इससे दोनों की ही इकॉनमी के मंदी में आने की आशंका है। इन्वेस्टमेंट बैंक Natixis की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिका की ओर से लागू टैरिफ ऐसे ही लागू रहे तो फिर चीन की ओर से अमेरिका को किया जाने वाला निर्यात आधा हो सकता है। ऐसी स्थिति में 6 मिलियन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नौकरियां छिन सकती हैं। यही नहीं यदि टैरिफ वॉर तेज हुआ और यह ट्रेड वॉर में तब्दील हुआ तो फिर नौकरियां छिनने आंकड़ा 9 मिलियन यानी 90 लाख तक जाने की आशंका है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान- 1.6 करोड़ नौकरियों पर होगा खतरा बता दें कि बीते महीने ही गोल्डमैन सैक्स की भी एक रिपोर्ट आई थी। इसमें कहा गया था कि चीन में अमेरिकी फैसलों के चलते 1.6 करोड़ नौकरियां छिन सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि चीन और अमेरिका के बीच ऐसे ही संघर्ष बना रहा तो फिर लेबर मार्केट में दबाव होगा। ऐसी स्थिति नौकरियों के लिए संकट पैदा करेगी। खासतौर पर मैन्युफैक्टरिंग और रिटेल सेक्टर में यह संकट अधिक होगा।  

टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत, ITR फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ी, जानें कब तक कर सकते हैं दाखिल

नई दिल्ली इनकम टैक्स विभाग ने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की समयसीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दी है। इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा में यह विस्तार टैक्सपेयर्स को दस्तावेज एकत्र करने और दिशा-निर्देशों और अनुपालन मानदंडों में बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अधिक समय प्रदान करेगा। आईटीआर फॉर्म, सिस्टम डेवलपमेंट की जरूरतों और टीडीएस क्रेडिट रिफ्लेक्शन में कई महत्वपूर्ण संशोधन हुए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ट्वीट किया, “इससे सभी के लिए एक सहज और अधिक सटीक फाइलिंग अनुभव सुनिश्चित होगा। औपचारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।” यह फैसला इस साल ITR फॉर्म में किए गए महत्वपूर्ण अपडेट, फाइलिंग सिस्टम में आवश्यक समायोजन और TDS क्रेडिट रिफ्लेक्शन में देरी के मद्देनजर लिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, आईटीआर की डेडलाइन सभी कैटेगरी के टैक्‍सपेयर्स के लिए एक सहज और अधिक सटीक टैक्‍स फाइलिंग अनुभव सुनिश्चित करना है. CBDT ने कहा कि संशोधित समयसीमा के बारे में औपचारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी. यह विस्तार सैलरीड कर्मचारी, कारोबारी और अन्य नॉन-ऑडिट टैक्‍सपेयर्स को बहुत जरूरी राहत प्रदान करता है, जिन्हें आम तौर पर फाइलिंग सीजन के दौरान अंतिम समय में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. टैक्‍सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे अतिरिक्त समय का उपयोग फॉर्म 26AS को सत्यापित करने, टीडीएस क्रेडिट का मिलान करने और सटीक रिटर्न दाखिल करने में करें. 12 लाख तक की टैक्‍स छूट,लेकिन… गौरतलब देश में 1 अप्रैल 2025 से न्यू टैक्स रिजीम लागू हो चुके हैं. 12 लाख की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा. इसके अलावा न्यू टैक्स रिजीम के साथ 75000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ मिलने वाला है. यानी जिनकी सैलरीड इनकम सालाना 12.75 लाख रुपये है, उन्हें कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा. बता दें, इससे पहले न्यू टैक्स रिजीम 7 लाख रुपये तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता था. इसका सबसे ज्यादा फायदा मिडिल क्लास को होना है. हालांकि आईटीआर भरने में इस बार 12 लाख टैक्‍स छूट का लाभ नहीं मिलेगा, क्‍योंकि यह आईटीआर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भरा जाएगा और टैक्‍स छूट वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिया गया है.   ITR की लास्‍ट डेट चूकने के बाद क्‍या होगा? अगर आपने नियत तिथि तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, जो अब 15 सितंबर, 2025 है, तो आपके पास अभी भी विलंबित रिटर्न दाखिल करने का विकल्प है. हालांकि आपको लागू विलंब शुल्क देना पड़ेगा, लेकिन अधिकांश कटौती और छूट उपलब्ध रहेंगी.  वहीं आप किसी भी नुकसान को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए विलंबित रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2025 है.

रिमोट सेंसिंग के पितृ पुरुष, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. के. एस. मिश्रा के निधन से वैज्ञानिक जगत में शोक”

पुणे मध्यप्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (मेपकास्ट) के संस्थापक एवं जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वरिष्ठ डिप्टी डॉयरेक्टर जनरल डॉ. के. एस. मिश्रा का  दिनांक 26-05-2025 को 81 वर्ष की आयु में पुणे में निधन हो गया है। डॉ. मिश्रा द्वारा भारतीय रिमोट सेंसिंग तकनीक में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा मध्यप्रदेश में रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के संस्थापक प्रभारी रहे, उनके मार्गदर्शन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अनेक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। डॉ. मिश्रा, कैनेडियन सरकार लेबोरेट्री विजिटिंग फेलो कनाडा सेन्टर फॉर रिमोट सेन्सिंग ओटावा में रडार सेट प्रोजेक्ट में अनेक वर्षों तक कार्यरत रहें, उन्होंने कनाडा में स्ट्रक्चरल जियोफिजिक्स, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट एवं रिमोट सेसिंग आदि के क्षेत्र में भी कनाडा सरकार को महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. के. एस. मिश्रा ने 1983 में मेनीटोबा विश्वविद्यालय, कनाडा से रिमोट सेन्सिंग उपयोग में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। डॉ. मिश्रा भारत सरकार के तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में कन्सल्टेन्ट के पद पर कार्यरत रहे। कुछ समय पूर्व तक वे देहरादून में यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एण्ड एनर्जी में डिस्टिंविश्ट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। रिमोट सेंसिंग सेन्टर में मध्यप्रदेश के भूमि उपयोग मानचित्रकरण, वेस्ट लेण्ड मानचित्रण, भूजल संभावित क्षेत्रों का मानचित्रण आदि परियोजनाओं का कार्य आपके मार्गदर्शन में सम्पन्न किया गया। डॉ. के. एस. मिश्रा के निधन पर मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के वैज्ञानिकों डॉ. अनिल कोठारी, महानिदेशक, डॉ. विवेक कटारे, कार्यकारी संचालक, डॉ. प्रवीण कुमार दिघर्रा, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख प्रशासन, श्री तस्नीम हबीब, सलाहकार, डॉ. अनिल खरे, श्री पराग भल्ला, सलाहकार एवं समस्त वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जी. डी. बैरागी, श्री डी. के. सोनी, डॉ. कपिल खरे, डॉ. रवि भारद्वाज, डॉ. आलोक चौधरी, श्री निरंजन शर्मा, श्री हरिनटराजन, श्री एस. ए. रजा तथा डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. आर. के. सिंह, डॉ. मनीषा ज्योतिषी, डॉ. सरोज बोकिल, डॉ. जे. पी. शुक्ला, डॉ. एन. के. तिवारी, श्री मुकेश साहू, श्रीमती किरण कानूनगो, श्रीमती मधुमिता तिवारी आदि ने अपनी शोक संवेदनाएं प्रेषित की हैं।

अमेरिका की बड़ी चेतावनी- बिना सूचना के अपने स्टडी प्रोग्राम से हटते हैं, तो उनका छात्र वीजा रद्द किया जा सकता है

वाशिंगटन अमेरिका ने भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों को एक सख्त चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि यदि वे अपनी कक्षाएं छोड़ते हैं या बिना सूचना के अपने स्टडी प्रोग्राम से हटते हैं, तो उनका छात्र वीजा रद्द किया जा सकता है। यह चेतावनी अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई और सामूहिक निर्वासन की चिंताओं के बीच आई है। चेतावनी में कहा गया है कि अगर ये छात्र बिना जानकारी दिए अपने कोर्स से अलग हो जाते हैं, तो उनका स्टूडेंट वीजा रद्द किया जा सकता है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “अगर आप कोर्स छोड़ते हैं, कक्षाएं नहीं जाते, या अपनी पढ़ाई का कार्यक्रम बिना अपनी यूनिवर्सिटी को सूचित किए छोड़ देते हैं, तो आपका स्टूडेंट वीजा रद्द हो सकता है। इससे आप भविष्य में अमेरिका का वीजा नहीं प्राप्त कर पाएंगे। हमेशा अपने वीजा की शर्तों का पालन करें और छात्र स्थिति बनाए रखें ताकि किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके।” यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में विदेशी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई छात्रों के वीजा अचानक और बिना पूर्व सूचना के रद्द किए जा रहे हैं। इनमें कुछ मामलों में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में भाग लेना, ट्रैफिक उल्लंघन, या वीजा शर्तों का उल्लंघन जैसी विविध वजहें सामने आई हैं। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के खिलाफ अपनी नीतियों को और सख्त किया है। हाल ही में, हार्वर्ड विश्वविद्यालय को नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को नामांकन करने की अनुमति से वंचित कर दिया गया था, जिसने लगभग 788 भारतीय छात्रों सहित हजारों छात्रों को प्रभावित किया। चिंता की बात यह है कि कई बार न तो छात्र और न ही उनकी यूनिवर्सिटी को यह पता चलता है कि छात्र की जानकारी SEVIS सिस्टम से हटा दी गई है। SEVIS एक वेब-आधारित प्रणाली है जिसे अमेरिका का होमलैंड सिक्योरिटी विभाग अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर निगरानी रखने के लिए संचालित करता है। यह चेतावनी भारतीय छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में 3 लाख से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो वहां के विश्वविद्यालयों में दूसरा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह है। इस बीच, भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों में इस बात को लेकर भी गहरी चिंता है कि ट्रंप प्रशासन “ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT)” कार्यक्रम को समाप्त करने की योजना बना रहा है। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। अमेरिकी सांसदों ने पहले ही “उच्च कुशल अमेरिकियों के लिए निष्पक्षता अधिनियम 2025” नामक एक विधेयक पेश कर दिया है, जिसमें OPT कार्यक्रम को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के प्रमुख पद के लिए राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा नामित जोसेफ एडलो ने यह घोषणा की है कि वे OPT और STEM OPT (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के छात्रों के लिए विस्तारित संस्करण) कार्यक्रमों को खत्म करने के पक्ष में हैं।  

देश में एक्टिव हुए कोरोना के दो वैरिएंट NB.1.8.1 and LF.7, जानें ये कितने खतरनाक?

नई दिल्ली देश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है। मई 2025 के अंत तक भारत में कोविड-19 के एक्टिव केस 1000 का आंकड़ा पार कर चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और बिहार समेत कई राज्यों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों ने सतर्कता बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा केस कहां? कोविड की इस नई लहर में केरल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बनकर सामने आया है, जहां अब तक 430 से अधिक एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, दिल्ली में 100 से ज्यादा मरीज, महाराष्ट्र में 43 नए केस, और नोएडा में 8 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। पटना में भी संक्रमण ने दस्तक दे दी है, जहां एक मरीज पटना एम्स का डॉक्टर है। नोएडा और पटना में नए केस नोएडा में सामने आए मामलों में से एक व्यक्ति की हाल की यात्रा चेन्नई से रही है, जो नए संक्रमण के प्रसार की आशंका को और गहरा करता है। वहीं बिहार की राजधानी पटना में दो नए केस दर्ज किए गए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है। कोरोना के नए वेरिएंट भारत में इस समय 4 वेरिएंट्स की पुष्टि हो चुकी है:     XFG सीरीज     LF.7 सीरीज     JN.1 सीरीज     NB.1.8.1 सीरीज इन वेरिएंट्स में से JN.1 तेजी से फैलने वाला बताया जा रहा है, जिसके लक्षणों में नाक बहना, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। एशिया में भी बढ़ता खतरा भारत के साथ-साथ एशिया के कई देशों में कोरोना मामलों में तेजी देखी जा रही है। हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड और चीन में रोज़ नए संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। सिंगापुर और हांगकांग में मौतों की संख्या में भी इजाफा दर्ज हुआ है। कोरोना के दो वैरिएंट NB.1.8.1 and LF.7, जानें ये कितने खतरनाक? पिछले सप्ताह में वायरस के कारण कम से कम सात मौतें हुई हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्थापित भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के डेटा के अनुसार इस समय देश में कोरोना वायरस के दो वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 भी पाए गए हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में ख्याल आ सकता है कि यह दोनों वैरिएंट कितने खतरनाक हैं. चलिए हम आपको इस सवाल का जवाब देते हैं. सबसे पहले आपको संक्षेप में इन मामलों के अपडेट बताते हैं.     INSACOG के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में तमिलनाडु में NB.1.8.1 का एक मामला पाया गया था, जबकि मई में गुजरात में LF.7 के चार मामले सामने आए थे.     अब तक, 22 अलग-अलग देशों के ग्लोबल जीनोम डेटाबेस में NB.1.8.1 वैरिएंट के 58 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और सिंगापुर शामिल हैं. अमेरिका में, कैलिफ़ोर्निया, वाशिंगटन, वर्जीनिया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान इस वैरिएंट की पहचान की गई थी. कोरोना वायरस के NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 वैरिएंट क्या हैं? इसे जानने के लिए आपको पहले वैरिएंट का मतलब समझना होगा. दरअसल फैलने के लिए एक वायरस किसी होस्ट (इंसान या जानवर) को संक्रमित करता है, वह अपनी बहुत साली कॉपी बनाता है. जब कोई वायरस अपनी कॉपी बनाता है, तो वह हमेशा अपनी एक सटीक कॉपी तैयार करने में सक्षम नहीं होता है. इसका मतलब यह है कि, समय के साथ, वायरस अपने जीन सीक्वेंस (जिन कैसे लाइन में लगे हैं) में थोड़ा अलग होना शुरू कर सकता है. इस प्रक्रिया के दौरान उस वायरस के जीन सीक्वेंस में किसी भी परिवर्तन को म्यूटेशन के रूप में जाना जाता है, और इन नए म्यूटेशन (नए या अलग जीन सीक्वेंस वाले वायरस) वाले वायरस को ही वेरिएंट कहा जाता है. वेरिएंट एक या एक से अधिक म्यूटेशन से भिन्न हो सकते हैं. अब वापस आते हैं कोरोना वायरस के दो वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 पर. NB.1.8.1 और LF.7 दोनों कोरोना के JN.1 वैरिएंट में बदलाव होने से बने हैं आनी वे उप-वंशावली हैं. अभी भारत में सबसे अधिक फैलने वाला वैरिएंट JN.1 ही है. सभी मालूम चले कोरोना मामलों के सैंपल में 53% JN.1 वैरिएंट के ही हैं. इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और अन्य ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) का स्थान है. भारत सरकार की तैयारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं। टेस्टिंग, ट्रैकिंग और आइसोलेशन पर ज़ोर देने की सिफारिश की गई है, ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। क्या कहती हैं ताज़ा रिपोर्ट्स?     दिल्ली में बीते एक हफ्ते में 100+ नए केस सामने आए हैं।     महाराष्ट्र में अब तक कोविड से 5 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।     केरल, कर्नाटक और मुंबई जैसे शहरों में रेड अलर्ट लागू कर दिया गया है। कोरोना वायरस के NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 वैरिएंट कितने खतरनाक? WHO के इन वैरिएंट को लेकर उनके जोखिम का जो शुरुआती मूल्यांकन किया है, उसके अनुसार, NB.1.8.1 वैरिएंट दुनिया भर में कम सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है. फिर भी इसमें A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन है. यह दिखाता है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैल सकता है और शरीर के इम्यून सिस्टम (रोगों से लड़ने की क्षमता) को मात दे सकता है. शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि NB.1.8.1 और LF.7 के संक्रमण से सामान्य फ्लू या हल्के COVID-19 के समान लक्षण होते हैं. अधिकांश रोगी अस्पताल में एडमिट हुए बिना घर पर ही जल्दी ठीक हो जाते हैं. यह डेल्टा जैसे पहले के वेरिएंट के उल्टा है, जो अधिक गंभीर बीमारी और उच्च मृत्यु दर का कारण बनता है, खासकर बिना टीकाकरण वाले लोगों में या उनमें जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है . हांगकांग-ताइवान में मरीजों की भीड़…. कोरोना कहां-कहां बरपा रहा कहर? भारत में पिछले एक हफ्ते में कोविड-19 के 752 नए केस रिपोर्ट किए गए हैं. देश में कुल पॉजिटिव मामलों की तादाद 1,000 से ज्यादा हो गई है. केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली ऐसे राज्य हैं, जहां पिछले एक हफ्ते में सबसे ज्यादा नए मामले रिपोर्ट किए गए हैं. इसके साथ ही विदेश में भी कोरोना के … Read more

राष्ट्रपति मैक्रों को पत्नी ने जड़ा थप्पड़, प्लेन से उतरने के तुरंत पहले पड़ी मार, मुंह छिपाने लगे इमैनुअल

हनोई  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि फ्लाइट से उतरते वक्त उनकी पत्नी उन्हें थप्पड़ लगा रही हैं। ये वायरल वीडियो वियतनाम की राजधानी हनोई का है, जहां फ्रांसीसी राष्ट्रपति बतौर राजकीय यात्रा पर अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। वीडियो में फर्स्ट लेडी को वियतनाम के हनोई में राष्ट्रपति विमान से बाहर निकलते समय इमैनुएल मैक्रों का चेहरा हाथ से धकेलते देखा जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि जैसे ही विमान का दरवाजा खुलता है, राष्ट्रपति मैक्रों अचानक पीछे हटते हैं, जबकि उनकी पत्नी ब्रिगिट, मैक्रों के मुंह पर धक्का दे रही हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों को फौरन अहसास होता है कि नीचे पत्रकारों का हुजूम है और कैमरे ऑन हैं, इसीलिए वो थोड़ा मुस्कुराकर हाथ हिलाते हैं और फिर वहां से प्लेन के अंदर छिप जाते हैं। हालांकि शुरूआत में फ्रांसीसी राष्ट्रपति भवन ने वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया हुआ कहकर उसे फर्जी बताता है, लेकिन बाद में वीडियो की सत्यता की पुष्टि हो गई। जिसके बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक बयान में भी थोड़ा बदलाव आ गया। राष्ट्रपति मैक्रों के एक करीबी दोस्त ने इसे एक साधारण “पति-पत्नी का झगड़ा” बताया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति का पत्नी से हुआ था झगड़ा फ्लाइट से उतरते वक्त भी राष्ट्रपति मैक्रों और उनकी पत्नी बगैर एक दूसरे का हाथ पकड़े उतरते दिख रहे हैं। जबकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इस दौरान काफी असहज दिख रहे थे। वो अपनी पत्नी को कुछ ऐसे देख रहे थे मानो वो कहीं सार्वजनिक तौर पर कोई कांड ना कर दें। आपको बता दें कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति की शादी की कहानी पूरी दुनिया में मशहूर है। इसे एक असामान्य रिश्ता कहा जा सकता है। इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट की उम्र में 24 सालों का फासला है। मैंक्रों अपनी पत्नी से 24 साल छोटे हैं। बिगिट का जन्म 13 अप्रैल 1953 को हुआ था और वो स्कूल में इमैनुएल मैक्रों को पढ़ाया करतीं थीं। स्कूल में ही मैक्रों और ब्रिगिट में प्यार हो गया था। उस वक्त इमैनुएल मैक्रों सिर्फ 15 सालों के थे जबकि ब्रिगिट करीब 39 सालों की थीं। ब्रिगिट पहले से शादी शुदा और तीन बच्चों की मां थीं। इमैनुएनल मैक्रों ने 16 साल की उम्र में ब्रिगिट को शादी के लिए प्रपोज किया था। लेकिन मैक्रों के परिवार को ये रिश्ता हरगिज मंजूर नहीं था। लिहाजा उनकी शादी काफी विवादित बन गई थी। उनके समाज में भी शादी का काफी विरोध किया गया था। ब्रिगिट ने मैक्रों से शादी के लिए अपने पति से तलाक ले लिया था। साल 2007 में जब इमैनुएल मैक्रों 29 साल के थे और ब्रिगिट 54 साल की थीं, उस वक्त दोनों ने शादी कर ली थी। ये शादी फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक निजी समारोह में हुई थी। साल 2017 में जब इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति बने तो ब्रिगिट फ्रांस की फर्स्ट लेडी बन गईं। वो अभी भी अपने पति के सार्वजनिक जीवन में काफी सक्रिय भूमिका निभाती हैं और करीब करीब उनके सभी विदेशी दौरे में उनके साथ होती हैं।

ब्रिटेन : लिवरपूल में कार ने भीड़ को रौंदा, फुटबॉल प्रीमियर लीग की खिताबी जीत का चल रहा था जश्न, 47 लोग घायल

लंदन  ब्रिटेन के लिवरपूल शहर में फुटबॉल प्रीमियर लीग की खिताबी जीत का जश्न मना रही भीड़ को कार ने रौंद दिया, जिसमें 47 लोग घायल हो गए हैं। घायलों में चार बच्चे हैं। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट द सन ने बताया कि 27 घायलों को चार अस्पतालों में भर्ती किया गया है, जिनमें दो को गंभीर चोटें आई हैं। 20 लोगों को घटनास्थल पर ही इलाज किया गया। पुलिस ने कहा है कि यह आतंकवादी हमला नहीं था। पुलिस ने इसे आतंकवादी घटना नहीं कहा है और वे जांच में किसी और की तलाश नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि लिवरपूल के ही एक 53 वर्षीय गोरे व्यक्ति को घटनास्थल से गिरफ्तार किया है। माना जा रहा है कि वह कार चालक है। मर्सीसाइड पुलिस की सहायक पुलिस कांस्टेबल जेनी सिम्स ने कहा, ‘हमारा मानना है कि यह एक अलग घटना है और हम फिलहाल इसके संबंध में किसी और की तलाश नहीं कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इस घटना को आतंकवाद नहीं माना जा रहा है।’ कैसे हुई घटना? लिवरपूल शहर के केंद्र में वाटर स्ट्रीट पर लिवरपूल फुटबॉल क्लब के प्रीमियर लीग का खिताब जीतने का जश्न मनाया जा रहा था। उसी दौरान एक कार भीड़ में घुस गई और सड़क पर जश्न मना रहे लोगों को रौंद दिया। घटना शाम 6 बजे के बाद हुई, जब विजय परेड समाप्त होने वाली थी। घटना के बारे में 6 बजकर 7 मिनट पर कॉल आई, जिसके बाद एयर एंबुलेंस समेत आपातकालीन सेवाएं शहर के केंद्र में स्थित वाटर स्ट्रीट पर पहुंच गईं। फायर टीम ने पाया कि चार लोग गाड़ी के नीचे फंसे हुए थे, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। उन्हें निकालने के लिए तेजी से काम किया गया। 20 मीटर तक रौंदते चली गई कार प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि करीब 20 मीटर तक घसीटने के बाद कार रुक गई, जिसके बाद भीड़ ने वाहन पर हमला कर दिया और तोड़फोड़ की। पुलिस जब आरोपी चालक को वैन में बैठाकर ले जा रही थी, उस दौरान भी भीड़ ने उस तक पहुंचने की कोशिश की। नॉर्थ वेस्ट एंबुलेंस सर्विस ने घोषणा की कि रात 9.30 बजे सड़क को साफ कर दिया गया था। मर्सीसाइड पुलिस जांच का नेतृत्व कर रही है। पीएम स्टार्मर ने जताया दुख प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर ने घटना पर दुख जताते हुए कहा, लिवरपूल में दृश्य भयावह हैं- मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं, जो घायल का प्रभावित हुए हैं। बाद में उन्होंने लिवरपूल में आपातकालीन सेवाओं के उल्लेखनीय साहस की तारीफ की और कहा, ‘हर किसी को विशेष रूप से बच्चों को इस भयावहता के बिना अपने नायकों का जश्न मनाने में सक्षम होना चाहिए।’

SC ने यौन शिक्षा में सुधार और POCSO मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के सुझावों पर केंद्र सरकार से राय मांगी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों से निपटने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर POCSO कोर्ट बनाए। कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों ने स्पेशल POCSO कोर्ट बनाए हैं, लेकिन तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में केस पेंडेंसी के चलते और ज्यादा कोर्ट बनाए जाने की जरूरत है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट कम होने के कारण मामले की जांच करने के लिए डेडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने पॉक्सो केस के लिए निर्धारित डेडलाइन के अंदर ट्रायल पूरा करने के अलावा निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी वी गिरी और सीनियर एडवोकेट उत्तरा बब्बर को POCSO कोर्ट की स्थिति पर राज्यवार डीटेल देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने “बाल बलात्कार की घटनाओं की संख्या में खतरनाक वृद्धि” को हाइलाइट करते हुए एक्शन लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन जिलों में दो कोर्ट बनाने को कहा जहां POCSO अधिनियम के तहत बाल शोषण के पेंडिंग मामलों की संख्या 300 से ज्यादा है। कोर्ट ने कहा POCSO एक्ट के तहत 100 से ज्यादा FIR वाले हर जिले में एक कोर्ट बनाने के जुलाई 2019 के निर्देश का मतलब था कि डेजिगनेटेड कोर्ट केवल कानून के तहत ऐसे मामलों से निपटेगा। पहले जानिए क्या है पॉक्सो एक्ट भारत में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए पॉक्सो एक्ट, 2012। अगर कोई 18 साल से कम उम्र का यौन शोषण करता है तो उसे इस कानून के तहत सजा मिलती है। बच्चों को गलत तरीके से छूना, उन्हें गलत तरीके से छूने के लिए कहना, या उनके साथ यौन संबंध बनाना, बच्चों को अश्लील चीजें दिखाना, उन्हें वेश्यावृत्ति या पोर्नोग्राफी में शामिल करना, या इंटरनेट पर उनसे गलत बातें करना भी बाल यौन शोषण (CSA) है। पॉक्सो एक्ट के तहत पुरुष और महिला आरोपी दोनों के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट का हाल बहरहाल, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्श फंड (ICPF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में CSA के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन इन मामलों को निपटाने की रफ्तार बहुत धीमी है। इसी वजह से भारत सरकार ने अक्टूबर 2019 में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने योजना शुरू की। इसके तहत, देश भर में 1,023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) बनाए गए हैं। ये कोर्ट CSA के मामलों की तेजी से सुनवाई करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में FTSC को 1 अप्रैल, 2023 से 31 मार्च, 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस पर कुल 1952.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों को निपटाने की क्या स्थिति है। पूरे देश में, 2022 में सिर्फ 3% मामलों में ही दोषियों को सजा मिली। मतलब 2,68,038 मामलों में से सिर्फ 8,909 मामलों में ही आरोपियों को दोषी पाया गया। हर FTSC ने 2022 में औसतन सिर्फ 28 पॉक्सो मामलों का निपटारा किया। 2022 में, हर पॉक्सो मामले को निपटाने में औसतन 2.73 लाख रुपये खर्च हुए। इसी तरह, हर सफल सजायाफ्ता पॉक्सो मामले पर सरकारी खजाने से औसतन 8.83 लाख रुपये खर्च हुए। अगर कोई नया मामला नहीं आता है, तो भी भारत को 31 जनवरी, 2023 तक लंबित पॉक्सो मामलों के बैकलॉग को खत्म करने में लगभग नौ (9) साल लगेंगे। अभी 2.43 लाख पॉक्सो मामले पेंडिंग हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि हर जिले में स्थिति का दोबारा आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर नए ई-पॉक्सो कोर्ट बनाए जाएं। योजना के अनुसार, सभी 1,023 स्वीकृत फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को तुरंत पूरी तरह से चालू किया जाना चाहिए। ट्रायल की समय-सीमा तय की जाए रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित के लिए न्याय की लड़ाई लोअर कोर्ट में सजा होने के बाद भी खत्म नहीं होती है। यह लड़ाई तब तक जारी रहती है जब तक कि अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। इसलिए, अपील/ट्रायल के समय को तय किया जाना चाहिए ताकि जल्द न्याय मिल सके। इस संबंध में नीतियां बनाई जानी चाहिए, और हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर समयबद्ध ढांचे बनाए जाने चाहिए ताकि लंबित पॉक्सो मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने 16 दिसंबर, 2019 को एक विस्तृत आदेश पारित किया था। इसमें राज्य सरकारों को पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। यह 25 जुलाई, 2019 के आदेश के क्रम में था, जिसमें सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि हर जिले में 60 दिनों के भीतर एक विशेष पॉक्सो अदालत स्थापित की जाए, जिसमें 100 से अधिक पॉक्सो मामले लंबित हैं। कानून और न्याय मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई की और जनवरी 2020 में बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों के त्वरित निपटान के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) की योजना लेकर आया. इस योजना में FY 2021-22 के अंत तक पूरे भारत में बलात्कार और पॉक्सो मामलों के त्वरित निपटान के लिए 389 एक्सक्लूसिव पॉक्सो कोर्ट (EPC) सहित 1,023 FTSC स्थापित करने की परिकल्पना की गई थी। इस विश्लेषण के माध्यम से, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों और शिकायतों के संबंध में भारत की स्थिति पर प्रकाश डालता है। इस व्यापक कानून के बनने के एक दशक बाद भी, पीड़ितों और उनके परिवारों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं, जिन्हें पहले के कानूनों द्वारा पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था। हालांकि, जिस गति से मामलों को निपटाया जा रहा है, वह बहुत निराशाजनक है। केस बैकलॉग की चौंकाने वाली स्थिति रिपोर्ट में केस बैकलॉग की एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति का पता चला। … Read more

इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई

यरुशलम  इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने  ये जानकारी दी है। इजरायली सेना इसके लिए बड़ा जमीनी हमला शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें फिलिस्तीनी आबादी को गाजा में तीन छोटे क्षेत्रों में धकेल दिया जाएगा। अगर फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास बंधकों को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता है तो इस अभियान को जल्द शुरू किया जा सकता है। इन इलाकों में रहेगी आबादी जिन क्षेत्रों में फिलिस्तीनी आबादी को भेजा जाना है, उसमें दक्षिणी पट्टी के कट पर मावासी में नया सुरक्षित क्षेत्र है, जहां इजरायल ने पहले एक मानवीय क्षेत्र घोषित किया था। इसके अलावा मध्य गाजा का दीर अल-बलाह और नुसेरात में जमीन की एक पट्टी है। तीसरा क्षेत्र गाजा सिटी का केंद्र, जहां इस साल की शुरुआत में युद्ध विराम के दौरान कई फिलिस्तीनी वापस लौटे थे। 20 लाख आबादी रहेगी छोटे से हिस्से में इजरायली सेना के अनुसार, वर्तमान में मवासी क्षेत्र में करीप 700,000 फिलिस्तीनी रह रहे हैं, जबकि 3 से 3.5 लाख मध्य गाजा और गाजा शहर में करीब 10 लाख लोग हैं। इसका मतलब है कि जब आईडीएफ अपना जमीनी अभियान शुरू करेगी तो गाजा की 20 लाख आबादी को पट्टी के 25 फीसदी हिस्से में धकेल दिया जाएगा। कब्जे वाले हिस्से के लिए बना प्लान इसके बाद सेना गाजा के बाकी हिस्से पर कब्जा कर लेगी। हमास के बुनियादी ढांचे को हटा दिया जाएगा। अधिकांश इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा और निकट भविष्य तक उस पर कब्जा बनाए रखा जाएगा। इस कब्जे वाले क्षेत्र में राफा, खान यूनिस और गाजा शहर के उत्तर में स्थित सभी शहर शामिल होंगे। इजरायल का हवाई हमला जारी इस बीच सोमवार को गाजा पट्टी में इजराइली हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई जिनमें से 31 लोग आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे एक स्कूल में हुए हमले में मारे गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लोग सो रहे थे तभी स्कूल पर हमला किया गया जिससे उनके सामान में आग लग गई। इजराइली सेना ने कहा कि उसने स्कूल से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे चरमपंथियों को निशाना बनाया। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवा के प्रमुख फहमी अवाद ने बताया कि उत्तरी गाजा में स्कूल पर हुए हमले में 55 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। इस बीच शिफा अस्पताल ने बताया कि सोमवार को एक मकान पर हुए हमले में एक ही परिवार के 15 लोग मारे गए जिनमें पांच महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। ऑनलाइन उपलब्ध फुटेज में बचावकर्मियों को जले हुए शवों को निकालते और आग बुझाने के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है।

जापान में चावल की कीमत में पिछले साल की तुलना में 98.4% तेजी आई

टोक्यो कभी अमेरिका की इकॉनमी के लिए मुश्किलें पैदा करने वाले जापान आज भारत से भी पिछड़ गया है। जापान को पछाड़कर भारत दुनिया की चौथी बड़ी इकॉनमी बन गया है। उधर जापान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। देश में महंगाई ने कई साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। अप्रैल में चावल की कीमत में पिछले साल की तुलना में 98.4% तेजी आई जो 1971 के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक उछाल है। मार्च में यह तेजी 92.1 फीसदी रही थी। इसी तरह एनर्जी की कीमत देश में 9.3% बढ़ गई। अप्रैल में देश में महंगाई 3.5% बढ़ी जो मार्च में 3.2 फीसदी बढ़ी थी। देश में लगातार पांचवें महीने महंगाई में तीन फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। इस बीच पहली तिमाही में जापान की इकॉनमी में 0.7% गिरावट आई। 2024 की पहली तिमाही के बाद जापान की इकॉनमी में पहली बार गिरावट आई है। चावल जापान का मुख्य आहार है। लेकिन हाल में इसमें काफी तेजी आई है। इसके कई कारण हैं। 2023 में खराब मौसम के कारण चावल की पैदावार प्रभावित हुई। इस बीच देश में रेकॉर्ड पर्यटकों के आने से चावल की डिमांड बढ़ी है। इस बीच सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए चावल की खेप बाजार में जारी की लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। जापान वर्सेज जर्मनी कुछ साल पहले जापान को पछाड़कर जर्मनी दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी बना था। लेकिन दोनों देशों की इकॉनमी में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। बैंक ऑफ जापान का पॉलिसी रेट अभी 0.50 परसेंट है और जापान का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 250% है। उधर यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी जर्मनी का पॉलिसी रेट 2.25 फीसदी और डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 62 फीसदी है। यानी जर्मनी की पॉलिसी रेट जापान से 4.5 गुना है जबकि डेट-टु-जीडीपी रेश्यो एक चौथाई है। दोनों देशों के 30 साल की मैच्योरिटी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड्स पर यील्ड 3.1 फीसदी है। 1990 के दशक से पहले जापान की इकॉनमी रॉकेट की स्पीड से दौड़ रही थी और माना जा रहा था कि वह अमेरिका को पछाड़ देगा। लेकिन उसके बाद वह ऐसे गर्त में फंसी कि उसे बाहर निकलने में कई दशक लग गए। 25 साल से भी अधिक समय तक देश डिफ्लेशन में की स्थिति रही। हालात ऐसी हो गई है कि देश के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने हाल में कहा कि जापान की हालत ग्रीस से भी बदतर हो गई है। ग्रीस पिछले कई साल से आर्थिक संकट से जूझ रहा है।  

भारत अब अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को हटाकर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा

नई दिल्ली भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अब अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को हटाकर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बीवीआर सुब्रह्मण्यम 25 मई 2025 को लुटियन दिल्ली में एक बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठकर पत्रकारों के सामने जब यह ऐलान कर रहे थे, तब नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री के तीसरे कार्यकाल के तौर पर 4018 दिन गुजर चुके थे। मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और आज 26 मई 2025 है यानी पीएम के तौर उनके कार्यकाल का आज 4019वां दिन है। इनमें 1148 वीकेंड, 122 हॉलीडेज और 2747 कामकाजी दिन शामिल हैं। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सुब्रह्मण्यम 10वीं नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा, “मैं जब बोल रहा हूं, तब हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 4 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी हैं और यह मेरा डेटा नहीं है। यह आईएमएफ का डेटा है। आज भारत जापान से भी बड़ी अर्थव्यवस्था है।” उन्होंने बताया, “केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और जर्मनी ही हमसे बड़े हैं और जो योजना बनाई जा रही है, अगर हम उसी पर टिके रहते हैं, तो भारत अगले 2, 2.5 से 3 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।” मोदी के कार्यकाल का कुल हासिल प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का कुल हासिल भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना है…और अगर अर्थव्यवस्था के हिसाब-किताब की नजर में प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी के कार्यकाल के दिनों को देखा जाए तो पीएम मोदी अब तक जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद सबसे ज़्यादा समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। नेहरू और इंदिरा गांधी मुख्यमंत्री नहीं थे। लेकिन वे 6,130 और 5,829 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे। 26 मई 2025 तक मोदी PM के तौर पर 4018 दिनों से ज़्यादा समय पूरा कर चुके हैं। इस लिस्ट में वह तीसरे पायदान पर पहुंच चुके हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी हैं। मनमोहन सिंह तीसरे पायदान से खिसकर चौथे स्थान पर जा चुके हैं। जिस सड़क पर अर्थव्यवस्था दौड़ रही है, उसी रास्ते पर पीएम मोदी का कार्यकाल भी आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा कि 2.5-3 साल में भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा, और यह भी संयोग देखिए कि नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए, मोदी को मार्च 2031 तक प्रधानमंत्री बने रहना होगा। सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बने मोदी 17 सितंबर 2024 को नई दिल्ली स्थिति नेशनल मीडिया सेंटर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस याद कीजिए। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित की गई थी। यह वह दिन भी था जब 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी 74 वर्ष के हुए थे। उस दिन अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी के के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था… पीएम मोदी के 8 बड़े काम प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में कई बड़े फैसले लिए हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने कई फैसले लिए जिसमें आर्थिक सुधार और बुनियादी ढांचा को प्राथमिकता दी गई। 1. आर्थिक सुधार और बुनियादी ढांचा विकास: मोदी सरकार ने 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया, जिससे पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था बनी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला और विदेशी निवेश आकर्षित किया गया। ‘स्टार्टअप इंडिया’ के जरिए नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया गया। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर सड़कें बनाई गईं और ‘भारतमाला’ व ‘सागरमाला’ जैसी योजनाएं शुरू की गईं। मेट्रो नेटवर्क भी देश के कई शहरों में तेजी से फैला। 2. जनकल्याण और सामाजिक योजनाएं: प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए जिससे वित्तीय समावेशन को बल मिला। उज्ज्वला योजना के माध्यम से 9 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए लाखों लोगों को घर मिले और आयुष्मान भारत योजना के तहत 50 करोड़ लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया गया। 3. डिजिटल और तकनीकी प्रगति: डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिला, ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचा और ऑनलाइन सरकारी सेवाएं आसान हुईं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई। देश में 5G सेवा की शुरुआत हुई और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे कदम भी उठाए गए। 4. राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा: 2016 और 2019 में भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया गया — तेजस लड़ाकू विमान, INS विक्रांत, अग्नि-V मिसाइल जैसे कई प्लेटफॉर्म विकसित हुए। माइनस्वीपर युद्धपोतों की योजना को फिर से शुरू किया गया ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों का मुकाबला किया जा सके। 5. विदेश नीति और वैश्विक पहचान: ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘इंडो-पैसिफिक रणनीति’ के तहत भारत ने चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में काम किया। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों के साथ संबंध मजबूत किए। भारत ने 2023 में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत की। 6. शासन और संरचनात्मक सुधार: 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, जिससे राज्य को विशेष दर्जा समाप्त हुआ। तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया गया। ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना से प्रवासी मजदूरों को देश के किसी भी हिस्से में राशन मिलना संभव हुआ। 7. कृषि और ग्रामीण विकास: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत किसानों को सीधे खातों में आर्थिक सहायता दी गई। ‘सौभाग्य योजना’ और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ से गांवों में बिजली और सड़कें पहुंचीं। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य लिया गया। 8. क्राइसिस मैनेजमेंट: कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने … Read more

मुस्लिम देश ने एक झटके में खत्म कर दी 37000 से ज्यादा लोगों की नागरिकता, सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल, जानें वजह

कुवैत सिटी  खाड़ी देश कुवैत ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए रातों-रात 37,000 लोगों की नागरिकता छीन ली है। इनमें अधिकांश महिलाएं हैं, जिन्होंने शादी के जरिए नागरिकता हासिल की थी। कुछ तो 20 साल से ज्यादा समय से कुवैत में रह रही हैं। कई को तो इसकी जानकारी तब हुई, जब वे रूटीन काम के लिए पहुंची। 50 साल की लामा (बदला हुआ नाम) को इसका पता वीकली वर्कआउट क्लास के दौरान चला, जब उनके क्रेडिट कार्ड का पेमेंट रिजेक्ट हो गया। उन्हें चेक किया तो उनका बैंक खाता अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया था, क्योंकि उनकी राष्ट्रीयता रद्द कर कर दी गई थी। जॉर्डन की मूल निवासी लामा ने एएफपी से बातचीत में कहा कि यह उनके लिए एक झटका था। उन्होंने अधिकारियों के डर से अपना असली नाम इस्तेमाल न करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ’20 सालों से ज्यादा सालों तक कानून का पालन करने वाली नागरिक होने के बाद एक दिन सुबह आप जागते हैं और पाते हैं अब आप नागरिक नहीं हैं। यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।’ शेख मिसाल की पहल के तहत उठाया गया कदम कुवैत का ये कदम अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-सबा के नेतृत्व वाले शासन के सुधारवादी पहल का हिस्सा है। इसका उद्येश्य राष्ट्रीयता को कवैती रक्त संबंधों तक सीमित रखना और कुवैती पहचान को नया आकार देना है। विश्लेषकों का कहना है कि नागरिकता नीति का उद्देश्य तेल समृद्ध देश की राष्ट्रीयता को रक्त संबंध तक सीमित करके संभावित रूप से इसके मतदाताओं को कम करना है। अमीर शेख मेशाल ने दिसम्बर 2023 में सत्ता संभालने के पांच महीने बाद संसद को भंग कर दिया और संविधान के कुछ हिस्सों को निलंबित कर दिया था। 26000 महिलाओं की छिनी नागरिकता कुवैत में जिन 37,000 लोगों की नागरिकता रद्द कर दी गई है, उनमें कम से कम 26,000 महिलाएं हैं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। कुवैत विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर बदल अल-सैफ ने कहा, जबकि कुवैत में बड़े पैमाने पर नागरिकता रद्द करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह संख्या निश्चित रूप से अभूतपूर्व है। कुवैत में पहले ही लगभग 100,000 बिदून लोगों का राज्यविहीन समुदाय है। बिदून एक अरब अल्पसंख्यक हैं, जो बेडोइन नामक खानाबदोश जनजाति से आते हैं, जो कुवैत में बस गए थे। 1961 में जब कुवैत आजाद हुआ, बिदून लोगों को नागरिक के रूप में शामिल नहीं किया गया। नया उपाय विवाह के जरिए नागरिकता को समाप्त करता है। संविधान के कुछ हिस्सों को किया गया था सस्पेंड कुवैत में रहने वाली लामा नाम की महिला जब कुवैत सिटी में क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने लगीं तो पता लगा कि उनका बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया गया और उनकी नागरिकता ही छिन गई है। लामा मूल रुप से जॉर्डन की रहने वाली हैं। गौरतलब है कि अमीर शेख मेशाल अल सबाह दिसंबर 2023 में कुवैत के अमीर बने थे। इसके बाद बाद उन्होंने संसद को भंग कर दिया गया। इसके साथ ही संविधान के कुछ हिस्सों को सस्पेंड कर दिया गया है।

पाकिस्तानी जासूस निकला सीआरपीएफ जवान, एनआईए ने किया गिरफ्तार

नई दिल्ली देश में एक के बाद एक पाकिस्तानी जासूस सामने आ रहे हैं। अब एक और जासूस गिरफ्तार किया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने एक सीआरपीएफ जवान को पकड़ा है। आरोपी जवान की पहचान मोती राम जाट के रूप में हुई है, जो सक्रिय रूप से जासूसी गतिविधि में शामिल था। पता चला है कि साल 2023 से पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों को जानकारी दे रहा था। एजेंसी ने आगे पाया है कि विभिन्न माध्यमों से पीआईओ से पैसा मिल रहा था। एनआईए की टीम ने मोती राम को दिल्ली से पहले पकड़ा और फिर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। 

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