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सरकार की उपलब्धियों से लेकर विकसित भारत के रोडमैप तक, पढ़ें वित्त मंत्री के संबोधन की बड़ी बातें

From the achievements of the government to the roadmap of developed India, read the important points of the Finance Minister’s address. नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में अंतरिम बजट पेश किया। इस दौरान बजट भाषण के दौरान उन्होंने बीते 10 वर्षों की सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और विकसित भारत के लिए सरकार का रोडमैप भी बताया। आइए जानते हैं उनके भाषण की अहम बातें.. जन कल्याणकारी योजनाएं और विकास के बूते हम लोगों तक पहुंचे उन्होंने कहा कि 10 वर्ष में अर्थव्यवस्था में काफी विकास हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसने तरक्की की है। जब वे प्रधानमंत्री बने, तब कई चुनौतियां मौजूद थीं। सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ सरकार ने इन चुनौतियों का सामना किया। जन कल्याणकारी योजनाएं और विकास के बूते हम लोगों तक पहुंचे। देश को नया उद्देश्य और नई आशा मिली। जनता ने सरकार को फिर बड़े जनादेश के साथ चुना। हमने दोगुनी चुनौतियों को स्वीकार किया और सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ काम किया। हमने सामाजिक और भौगोलिक समावेश के साथ काम किया। ‘सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ हमने कोरोना के दौर का सामना किया और अमृतकाल में प्रवेश किया। इसके नतीजतन हमारा युवा देश के पास अब बड़ी आकांक्षाएं, उम्मीदें हैं।80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गयासीतारमण ने कहा कि पिछले 10 साल में हमने सबके लिए आवास, हर घर जल, सबके लिए बैंक खाते जैसे कामों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गया। अन्नदाताओं की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। पारदर्शिता के साथ संसाधनों का वितरण किया गया है। हम असमानता दूर करने का प्रयास किया है, ताकि सामाजिक परिवर्तन लाया जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता, ये ही चार जातियां हैं, जिन पर हमारा फोकस है। उनकी जरूरतें, उनकी आकांक्षाएं हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। 25 करोड़ लोगों को विविध तरह की गरीबी से बाहर निकाला उन्होंने कहा कि गरीब का कल्याण, देश का कल्याण, हम इस मंत्र के साथ काम कर रहे हैं। ‘सबका साथ’ के उद्देश्य के साथ हमने 25 करोड़ लोगों को विविध तरह की गरीबी से बाहर निकाला है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए काम कर रहे हैं।बड़ी योजनाओं की प्रभावी तरीके से और स समय पूरा किया जा रहा वित्त मंत्री ने कहा कि लोग अच्छे से रह रहे हैं और अच्छी आमदनी कर रहे हैं। बड़ी योजनाओं की प्रभावी तरीके से और ससमय पूरा किया जा रहा है। जीएसटी ने एक देश, एक मार्केट और एक टैक्स की धारणा को मजबूत किया है। गिफ्टी आईएफएससी ने वैश्विक वित्तीय निवेश का रास्ता खोला है। अमृतकाल अमृतकाल के लिए सरकार ऐसी आर्थिक नीतियों को अपनाएं जो टिकाऊ विकास, सभी के लिए अवसरों, क्षमता विकास पर केंद्रित रहेंगी। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ हम सुधारों का अगला चरण शुरू करेंगे। समय पर आर्थिक मदद, प्रासंगिक प्रौद्योगिकी, MSME को सशक्त बनाने जैसे पहुलओं पर नई नीतियों के जरिए काम होगा। हम ऊर्जा सुरक्षा पर भी काम करेंगे। तकनीक नई तकनीकों से कारोबार को मदद मिल रही है। लालबहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। अटलजी ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का नारा दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे और विस्तार देते हुए जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान का नारा दिया है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह स्वर्णिम दौर है। एक लाख करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त या कम ब्याज दर पर कोष वितरित किया जाएगा। इससे दीर्घकालिक वित्तीय मदद दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र को मदद मिलेगी। रेलवे तीन रेलवे कॉरिडोर ऊर्जा, खनिज और सीमेंट के लिए बनाए जाएंगे। पीएम गति शक्ति के तहत इनकी पहचान की गई है। इससे लागत कम होगी और सामान की आवाजाही सुगम होगी। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से विकास दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। 40 हजार सामान्य बोगियों को वंदे भारत के पैमानों के अनुरूप विकसित किया जाएगा ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत को बढ़ाया जा सके। विमानन अब देश में 149 विमानतल हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों को ‘उड़ान’ के तहत विस्तार दिया जा रहा है। देश की विमानन कंपनियां एक हजार नए विमान खरीद रही हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार छठी बार देश का बजट पेश कर रही है।

Union Finance Minister Nirmala Sitharaman is presenting the country’s budget for the sixth consecutive time today.  नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अंतरिम बजट 2024 पेश कर रही है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी बजट से आम लोगों के साथ-साथ बच्चों के लिए काफी ज्यादा उम्मीद लगाई जा रही है। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अंतरिम बजट 2024 पेश कर रही है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी बजट से आम लोगों के साथ-साथ महिलाओं के लिए कई अहम घोषणाएं की गई है। केंद्र सरकार ने लखपति दीदी योजना के तहत नए वित्त वर्ष में 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा है। बजट में महिलाओं के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। खुद निर्मला सीतारमण ने बनाया रिकॉर्ड केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार छठी बार देश का बजट पेश कर रही है। निर्मला सीतारमण ऐसी दूसरी वित्त मंत्री बन गई है, जो सबसे ज्यादा बार बजट पेश किया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के पास था। वहीं सबसे ज्यादा 10 बजट पेश करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम ही है। मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, अरुण जेटली और यशवंत सिन्हा ने 5 बजट पेश किए हैं।

सद्भावना और सहिष्णुता के “महात्मा“ थे गॉधी

Gandhi was the “Mahatma” of goodwill and tolerance. राष्ट्रपिता की 76वीं पुण्यतिथि पर विशेष शहीद दिवस डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) महात्मा गॉधी ने अपने जीवन में अहिंसा का पालन कर यह सिखाया कि सत्य और अहिंसा ही सबसे बड़े शक्तिशाली युद्ध हैं। उनका यह उपदेश हमें आत्म-नियंत्रण, सद्भावना और सहिष्णुता की ओर प्रवृत्त करता है। उनके सिद्धांतों ने हमें बताया कि समस्त मानव जाति को एक परिवार की भावना के साथ जीना चाहिए। सभी को समानता और न्याय का अधिकार है। शहीद दिवस पर करते हैं महात्मा गॉधी का पुण्य स्मरण। 30 जनवरी को महात्मा गॉंधी की 76वीं पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाकर पूरा देश आज बापू का पुण्य स्मरण कर रहा है। भारत सदियों से वीरों की भूमि रहा है। देश में अनेक वीर-सपूतों ने जन्म लिया और अपनी शहादत से वतन की मिट्टी को पावन कर दिया। वीर-शहीदों की याद में ही हर वर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है। हालांकि भारत में विभिन्न तिथियों में शहीद दिवस मनाने की परंपरा है। जनवरी, मार्च और नवंबर महीने में शहीद दिवस की तारीख अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन इन दिवसों की भावना एक ही है। हम जांबाज क्रांतिकारियों को याद कर उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करने यह दिवस मनाते हैं। आज का शहीद दिवस गांधी जी की अहिंसात्मक सोच और उनके बलिदान के स्मरण का प्रतीक है। 1948 को इस दिन ही नाथूराम गोडसे ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। महात्मा गॉधी, जिन्हें कोई बापू कहता है तो कोई देश का राष्ट्रपिता। दोनों का अर्थ एक ही है। वे एक ऐसे महान आत्मा थे जो अपने आदर्शों और अनूठी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। बापू ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर आजादी की जंग लड़ी और देशवासियों का भी मार्गदर्शन किया।अहिंसा परमो धर्मः…. धर्म हिंसा तथैव चः … अर्थात अहिंसा ही मनुष्य का परम धर्म है और जब धर्म पर संकट आए तो उसकी रक्षा करने के लिए की गई हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है। बावजूद इसके अहिंसा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने वाले गॉधी ने इसे अपने आचार, विचार और व्यवहार में उतारा। अहिंसा परमो धर्मः को ही जीवन में अपनाया। हालांकि भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गाँधी की अंहिसा की धारणाएं अलग-अलग थीं फिर भी वेद, महावीर और बु़द्ध की अहिंसा से महात्मा गाँधी प्रेरित थे।महात्मा गाँधी ने अपने जीवन को भारतीय समाज के लिए समर्पित किया और अपने आदर्शों का पालन करते हुए आजादी के लिए संघर्ष किया। महात्मा गाँधी की शहादत ने यह सिखाने का मौका दिया कि हमें अपने मौलिक सिद्धांतों के लिए खड़ा होना चाहिए, चाहे जैसी भी परिस्थिति हो। उनका संदेश था कि सत्य, अहिंसा और ईमानदारी का पालन करते हुए हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करके एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। महात्मा गॉधी का मानना था कि एक मात्र वस्तु जो हमें पशु से भिन्न करती है वह है अहिंसा। व्यक्ति हिंसक है तो वह पशुवत है। मानव होने या बनने के लिए अहिंसा का भाव होना आवश्यक है। गॉधी जी की सोच थी कि हमारा समाजवाद अथवा साम्यवाद अहिंसा पर आधारित होना चाहिए। जिसमें मालिक, मजदूर एवं जमींदार, किसान के मध्य परस्पर सद्भाव पूर्ण सहयोग हो। निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी। सच्ची अहिंसा मृत्यु शैया पर भी मुस्कराती रहेगी। बहादुरी, निर्भिकता, स्पष्टता, सत्यनिष्ठा इस हद तक बढ़ा लेना कि तीर-तलवार उसके आगे तुच्छ जान पड़ें। यह अहिंसा की साधना है। शरीर की नश्वरता को समझते हुए उसके न रहने का अवसर आने पर विचलित न होना अहिंसा है। उनकी इसी सोच ने महात्मा गॉधी को देश का सबसे ज्यादा प्रभावशाली नेता बना दिया।जिन्होंने अहिंसा और सत्याग्रहों को एक मात्र हथियार बनाकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी। सामाजिक और राजनीतिक सुधार में उनकी सार्वजनिक भूमिका का परिणाम ऐसा था कि उनके विचारों और आंदोलनों पर अमेरिकी और यूरोपीय समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और रेडियों पर चर्चा होने लगी थी। उनके काम को दुनियाभर के शीर्ष राजनेताओं द्वारा उत्सुकता से अनुसरण किया जाने लगा। जबकि अहिंसा या अहिंसा का दर्शन गॉधी का पर्याय बन गया था। अहिंसा का उनका अभ्यास अन्य धर्मां के प्रति सम्मान और भाईचारे की भावना का विस्तार था। सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें शांति का वैश्विक प्रतीक और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना दिया। अहिंसक विरोध आज गॉधीवादी विरासत की प्राथमिक अभिव्यक्ति है। गॉधी जी के अनुसार अहिंसा केवल एक दर्शन ही नहीं बल्कि कार्य करने की एक बेहतर पद्धति है। मानव के हृदय परिवर्तन का एक साधन है। यही वजह थी कि उन्होंने कभी भी अहिंसा को व्यक्तिक आचरण तक ही सीमित न रखकर उसे मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में लागू किया। उनका मानना था कि सत्य सर्वोच्च कानून है। तो अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है। आत्म-समर्पण और सत्य के माध्यम से ही हम अद्वितीय भारत की ऊँचाइयों को छू सकते हैं। महात्मा गांधी ने दिखाया कि एक व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने मौलिक आदर्शों पर कैसे कड़ाई से अड़े रह सकता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।उनकी महानता को समझने का यह एक अद्वितीय अवसर है, जो हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में प्रेरित कर सकता है। क्योंकि सत्य की तरह ही अहिंसा की शक्ति भी कम नहीं है। वह भी असीम है। इसी सोच ने उन्हें सत्य और अहिंसा का पुजारी बना दिया। वे देश ही नहीं दुनिया में अहिंसा परमो धर्मः के साथ ही सद्भावना और सहिष्णुता के “महात्मा“ बन गए। सत्य, प्रेम और अहिंसा के ऐसे महात्मा को हमारा शत्-शत् नमन्।

गणतंत्र दिवस 2024, जोश और राष्ट्रप्रेम की भावना जगा देंगे देशभक्ति के ये नारे

Republic Day 2024: These patriotic slogans will awaken the feeling of enthusiasm and patriotism बच्चों को गणतंत्र दिवस पर सिखाए आजादी के बाद भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए देश का संविधान आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। तब से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाते हैं। इस दिन पूरे देश में जश्न का माहौल होता है। स्कूल-कॉलेज, सरकारी और गैर सरकारी दफ्तरों में झंडा रोहण किया जाता है। देशभक्ति के नारे लगाए जाते हैं और भारत की गौरवपूर्ण गाथा को गाकर गर्व महसूस किया जाता है। 26 जनवरी के मौके पर स्कूलों में रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें बच्चे प्रतिभाग करते हैंं। वैसे तो गणतंत्र दिवस के लिए स्कूलों में तैयारी पहले से ही शुरू हो जाती है लेकिन अगर आपका बच्चा भी गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा है तो उसे देशभक्ति जगाने वाले जोशीले नारे सिखाएं। सुभाष चंद्र बोस रवीन्द्रनाथ टैगोर बाल गंगाधर तिलक श्यामलाल गुप्त लाल बहादुर शास्त्री बंकिम चंद्र चटर्जी इकबाल बिस्मिल अजीमाबादी आजादी की जंग में शामिल क्रांतिकारियों ने इन्हीं नारों के जरिए भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देशवासियों को एकजुट किया था। गणतंत्र दिवस पर बच्चों को जोश से भर देने वाले देशभक्ति के नारे सिखाएं।

बेटियों का जहां सम्मान, वह घर स्वर्ग समान

Where daughters are respected, that home is like heaven. डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) हिंदू परिवार में जब किसी कन्या का जन्म होता है तो अक्सर कहा जाता है, बधाई हो! आपके घर में लक्ष्मी आई है। शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि बेटी का जन्म पुण्यवान के घर ही होता है। कन्या को न सिर्फ देवी कहा जाता है बल्कि देवी की तरह पूजा भी जाता। लेकिन समाज में ऐसे दानव मौजूद हैं जिनके कारण देवियों के रूप में पूजी जाने वाली बेटियां असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जानते हैं बालिकाओं की वास्तविक स्थिति और हालात के साथ उनके प्रति होने वाले अपराधों की वास्तविकता। 24 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। महिला बाल विकास मंत्रालय ने पहली बार 2008 में इस दिवस को मनाने की शुरूआत की थी। इस बार 17वां दिवस है। सवाल उठता है कि आखिर 24 जनवरी को ही यह दिवस क्यों मनाया जाता है? तो इसकी एक खास वजह है। इस दिन का नाता देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा है। इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। देश की बेटी के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की उपलब्धि को प्रतिवर्ष याद करने के साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाने और जागरूकता लाने के उद्देश्य से 24 जनवरी का दिन महत्वपूर्ण माना गया। बालिकाओं व महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से उन्हें बचाने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों व अधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूक करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।कारण स्पष्ट है कि हर साल 60 हजार सें अधिक बच्चे गायब हो जाते हैं, जिनमें बालिकाओं का प्रतिशत अधिक होता है। देश में बालिकाओं के कुछ जोखिम, उल्लंघन और कमजोरियां हैं। जिनका सामना उन्हें केवल इसलिए करना पड़ता है, क्योंकि वे लड़की हैं।यही वजह है कि बालिकाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी 19 दिसम्बर 2011 को प्रति वर्ष 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की घोषणा की। यह न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण के उनके अधिकारों को सुनिश्चित करता है।देश में दो-दो बालिका दिवस मनाए जाने और भारत सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी व्यापक प्रचारित योजना के बावजूद भारत में अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संकल्पों का लक्ष्य करीब नहीं आ पा रहा है।आज भी इंदिरा गॉधी जैसी कुछ भारतीय महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली आवाज उठा रही हैं। भारत ने विश्व को कल्पना चावला जैसी अंतरिक्ष यात्री दी हैं। आज भारत की बेटियां न केवल फाइटर प्लेन चला रही हैं बल्कि युद्ध के मोर्चे पर भी तैनात हैं। चन्द्रयान-3 की सफलता में भी भारत की बेटियों का महत्वपूर्ण योगदान है। बावजूद इसके भारतीय समाज में पितृ सत्तात्मक विचारों, मानदंडों, परंपराओं और संरचनाओं के कारण ज्यादातर बालिकाएं अपने कई अधिकारों का पूरी तरह से उपभोग नहीं कर पा रही हैं। लैंगिक भेदभाव, सामाजिक मानदंडों और प्रथाओं के प्रचलन के कारण, बालिकाओं को बाल विवाह, किशोर गर्भावस्था, घरेलू काम, खराब शिक्षा और स्वास्थ्य, यौन शोषण और हिंसा की संभावनाओं का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल लिंगानुपात बढ़कर 1020 कन्या हो गया है। लेकिन यह लैंगिक तरक्की सुविधाभोगी और कथित पढ़े-लिखे जागरूक शहरियों के घरों में नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में हुई है। शहरों में आज भी प्रति हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 985 ही है। मतलब यह कि शहरों में जहां गर्भावस्था में भ्रूण परीक्षण की सुविधाएं हैं, वहां बालिका भ्रूण अब भी सुरक्षित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में लिंगानुपात संतोषजनक है तो वहां चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। यही वजह है नवजात से लेकर पॉंच साल से कम बच्चों की मृत्यु दर अधिक है। इनमें बालिकाओं का प्रतिशत सर्वाधिक है। इसी सर्वेक्षण के मुताबिक अब भी 18 साल से पहले 23 प्रतिशत किशोरों का विवाह हो जाता है जिनमें बालिकाएं ही अधिक होती हैं। बाल विवाह के कारण 15 से लेकर 19 साल उम्र की 6.8 प्रतिशत बेटियां गर्भवती या माताएं पाईं गईं।अपराध की बात करें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार वर्ष 2022 में कुल 83,350 बच्चे गुम हुए। जिनमें 62,946 बालिकाएं थीं। इन गुमशुदा बालिकाओं में 1,665 का कहीं पता नहीं चला। ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1 लाख 62 हजार 449 मामले दर्ज हुए । जबकि 2021 में 1,49,404 मामले दर्ज हुए थे। एक साल के अंदर यह वृद्धि 8.7 प्रतिशत थी। पॉस्को एक्ट के तहत यौन अपराध के 39.7 प्रतिशत मामले दर्ज हुए। सबसे ज्यादा 20 हजार 762 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। राज्य बाल शोषण के मामले में मध्य प्रदेश में 20 हजार 415 अपराध दर्ज हैं, इनका देश में तीसरा नंबर है। महिलाओं के प्रति अपराध में प्रदेश के हालात ठीक नहीं हैं। सन् 2021 में बालिकाओं से बलात्कार के 37 हजार 511 मामले दर्ज हुये थे। जो 2022 में बढ़कर 38 हजार 30 हो गये। यौन हमलों की संख्या में 3.1 प्रतिशत तथा यौन उत्पीड़न में दशमल शून्य 4 की वृद्धि दर्ज की गयी। महिला पहलवानों द्वारा गत वर्ष लगाया गया यौन उत्पीड़न का मामला लोग भूले नहीं होंगे। पहलवानों ने सरकार पर व्यभिचारी को बचाने का आरोप लगाया था। लड़कियों के खिलाफ अत्याचार करने वालों को राजनीतिक आधार पर माफ करना या उनको बचाना घोर सामाजिक अपराध भी है।इस तरह के आरोप देश के लिए श्राप के समान हैं। हमारा देश तब तक पूरी तरह से विकसित नहीं होगा जब तक कि बालक और बालिकाओं दोनों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने के लिए समान रूप से अवसर नहीं दिये जाते। प्रत्येक बच्चा अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का हकदार है, लेकिन उनके जीवन में और उनकी देखभाल करने वालों के जीवन में लैंगिक असमानताएं इस वास्तविकता में बाधा डालती हैं। शिक्षा, जीवन कौशल, खेल और बहुत कुछ के साथ निवेश करके और उन्हें सशक्त बनाकर लड़कियों के महत्व को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।लड़कियों के महत्व में वृद्धि करके हम सामूहिक रूप से विशिष्ट परिणामों की उपलब्धि में योगदान दे सकते हैं, कुछ अल्पकालिक व अन्य मध्यम अवधि जैसे बाल विवाह को समाप्त करना … Read more

भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर हमले के विरोध में MP कांग्रेस का मौन धरना, नेता बोले- ये लोकतंत्र की हत्या

Silent protest of MP Congress in protest against the attack on ‘Bharat Jodo Nyay Yatra’, leader said – this is murder of democracy कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर असम में हुए हमले के विरोध में पूरे देश में कांग्रेस द्वारा मौन धरना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के भी अलग-अलग जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया. मध्यप्रदेश प्रदेश कांग्रेस द्वारा भोपाल के रोशनपुरा में मुख्य तौर पर धरना दिया गया. Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर असम में हुए हमले के विरोध में पूरे देश में कांग्रेस (Congress) द्वारा मौन धरना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के भी अलग-अलग जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया. मध्यप्रदेश प्रदेश कांग्रेस द्वारा भोपाल के रोशनपुरा में मुख्य तौर पर धरना दिया गया. जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh),कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jeetu patwari) और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता कार्यकर्ता मौजूद रहे. इस दौरान सभी ने अपने हाथ पर काली पट्टी बांधी हुई थी.ये धरना करीब 3 घंटे तक चला. ग्वालियर, इंदौर, अशोकनगर से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आई हैं. दरअसल कांग्रेस का आरोप है कि असम में राहुल गांधी की न्याय यात्रा पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमला किया है. कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली जा रही भारत जोड़ो न्याय यात्रा को भारतीय जनता पार्टी की असम सरकार द्वारा रोकने का प्रयास किया गया है और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा राहुल गांधी की यात्रा पर हमला कर व्यवधान पैदा किया जा रहा है. दूसरी तरफ ग्लावियर के फूलबाग में भी कांग्रेस विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भी धरना दिया. कांग्रेस के विधायक साहब सिंह गुर्जर ने कहा कि ये लोकतांत्रिक देश है और असम में सरेआम लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. इस मौके पर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि कल पूरे देश में लोग मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे लेकिन असम की सरकार राहुल जी को मंदिर में जाने से रोककर अलोकतांत्रिक काम कर रही थी. इसलिए आज हम गांधी जी की प्रतिमा के सामने बैठकर ऐसे लोगों को सदबुद्धि देने की प्रार्थना कर रहे हैं.इसी तरह से इंदौर में भी शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा के नेतृत्व में कांग्रेसनी कार्यकर्ताओं ने धरना दिया. उधर अशोकनगर में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा स्थानीय गांधी पार्क पर मौन धरना प्रदर्शन किया गया. इस धरने से पहले अशोकनगर विधायक हरी बाबू राय ने खुद झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की. हरी बाबू राय ने कहा कि जिस प्रकार हमारे नेता राहुल गांधी के प्रति व्यवहार किया जा रहा है वह अशोभनीय है.

खनिज ब्लॉक की नीलामी में MP अव्वल, राज्य खनन मंत्रियों का सम्मेलन

MP tops in auction of mineral blocks, conference of state mining ministers खनिज ब्लॉक की नीलामी में मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार, राज्य खनन मंत्रियों का सम्मेलन केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में राज्य खनन मंत्रियों का सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया। यह राज्य खनन मंत्रियों का दूसरा सम्मेलन है। भोपाल। राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य खनन मंत्रियों के सम्मेलन मंगलवार सुबह शुरू हुआ।केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव भी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हैं। इस सम्मेलन में 20 राज्यों के खनिज मंत्री हिस्सा ले रहे हैं।खनिज ब्लॉक की नीलामी में मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार प्रदान करने के लिए, खान मंत्रालय एवं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इस मौके पर “माइनिंग एंड बियॉन्ड’’ विषय पर प्रदर्शनी भी कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में लगाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया, जिला खनिज प्रतिष्ठान सहित देश की प्रमुख खनन कंपनियो, निजी एजेंसियों और स्टार्ट-अप्स द्वारा अपनी उपलब्धियां को प्रदर्शित किया गया है।इस सम्मेलन के दौरान खनन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि यह राज्य खनन मंत्रियों का दूसरा सम्मेलन है। पहली बार यह सम्मेलन सितंबर 2022 में हैदराबाद में आयोजित किया गया था। सीएम मोहन यादव से की मुलाकातइस सम्मेलन में शिरकत करने के लिए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार सुबह भोपाल पहुंचे। यहां पर उन्होंने सम्मेलन से पहले मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सीएम डा. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डा. यादव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान दोनों के बीच राज्य में कोयला एवं खनन क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूर्व रोशनी से जगमगा उठी अयोध्या नगरी

Ayodhya city illuminated with lights before Ram Mandir consecration ceremony अयोध्या में दिवाली जैसा माहौल… प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले रोशनी से नहाए राज सदन, पुराने मंदिर अयोध्या ! अयोध्या के पूर्व राजा का भव्य आवास राज सदन, विभिन्न मंदिर और यहां अन्य इमारतें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर रोशनी से जगमगा उठी है, जिससे इस मंदिर नगरी में दिवाली उत्सव जैसा माहौल बन गया है। प्राचीन ‘अयोध्या नगरी’ को आकर्षक ढंग से सजाया गया है खासतौर से राम पथ और धर्म पथ की साज-सज्जा देखने लायक है। अयोध्या की गलियों में ‘राम आएंगे’ और ‘अवध में राम आए हैं” जैसी गीतों की गूंज सुनायी दे रही है और मंदिर शहर की इमारतें भगवा ध्वज से पटी पड़ी हैं।‘प्राण प्रतिष्ठा’ के दिन शहर में चकाचौंध रहने की उम्मीद है क्योंकि कई मकान, मंदिर और अन्य इमारतें रोशनी से नहायी हैं। अयोध्या के शाही परिवार का घर रहा राज सदन रोशनी से जगमग है। सैकड़ों लोग, स्थानीय निवासी और दर्शक शनिवार देर रात तक इसके सुशोभित द्वार ‘लक्ष्मीद्वार’ के सामने तस्वीरें या सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े। प्रवेश द्वार के शीर्ष पर भगवान राम की धनुष और बाण लिए तस्वीर लगायी गयी है और ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे। प्रवेश द्वार के मेहराब के नीचे एक झूमर लगाया गया है। यह साज-सज्जा नजदीकी राम पथ से गुजरने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अयोध्या में 22 जनवरी को दिवाली उत्सव या संभवतः उससे बड़े पैमाने पर उत्सव मनाएँ जाने की उम्मीद है। बेगमपुरा इलाके में कई महीनों पहले खुला लॉज प्रभाराज पैलेस शुक्रवार रात को रोशनी से जगमग हो उठा। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।

कूनो में चीते की मौत नामीबिया से लाए एक और चीते ने तोड़ा दम

भोपाल। मॉनीटरिंग टीम को चीता शौर्य अचेत अवस्था में मिला था। कूनो में अब तक दस चीतों की मौत हो चुकी है, इनमें सात चीते और तीन शावक शामिल हैं। लॉयन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया कि आज करीब सवा तीन बजे चीता शौर्य की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का खुलासा होगा। अब तक 7 चीते और 3 शावक की मौत कूनो में अब तक चीते और शावक को मिलाकर यह 10वीं मौत है। इनमें 7 चीते और 3 शावक हैं। प्रोजेक्ट चीता में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। नामीबिया से लाया गया चीता शौर्य अपने सगे भाई गौरव के साथ आया था। दोनों हमेशा एकसाथ रहते थे, साथ शिकार करते थे। कुछ समय पहने दोनों की अग्नि और वायु चीते से भिड़ंत हुई थी। वे दोनों भी सगे भाई थे। इसमें अग्नि चीता गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बार चीतों को बाड़े में बंद कर दिया था। + कब-कैसे हुई चीतों की मौत… 26 मार्च 2023: साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत  नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई। 27 मार्च : ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया साशा की मौत के अगले ही दिन मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया। ज्वाला को नामीबिया से यहां लाया गया था। कूनो नेशनल पार्क में इन शावकों को मिलाकर चीतों की कुल संख्या 23 हो  गई। 23 अप्रैल : उदय की दिल के दौरे से मौत साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते क्की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।  9 मई : दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरेक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई। 23 मई : ज्वाला के एक शावक की मौत मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जिएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली 31 परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इनकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई। 25 मई : ज्वाला के दो और शावकों की मौत पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और शावकों की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात आमने सामने आई थी। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित 18 चीते बचे। 11 : मेल चीता तेजस की मौत चीते तेजस की गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया गया कि चीतों के आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। इस मौत के बाद कूनो में 17 चीते बचे थे। 14 जुलाई : मेल चीता सूरज की मौत चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला। कूनो प्रबंधन का अनुमान है कि चीतों के आपसी संघर्ष में ही सूरज की जान गई है। इससे नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 16 रह गई थी। 2 अगस्त : मादा चीता धात्री की मौत कूनो परिसर में ही मादा चीता धात्री का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में इंफेक्शन से मौत की वजह सामने आई थी। धात्री की मौत होने के बाद चीतों की संख्या 15 रह गई थी। 03 जनवरी : आशा ने तीन शावक जन्मे इसी साल 03 जनवरी को श्योपुर जिले के कूनो बेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई। मादा चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया। कूनो में अब 4 शावक समेत कुल 18 चीते हो गए थे। नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाई गई मादा चीता आशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नाम दिया था।  16 जनवरी 2024: नर चीते शौर्य की मौत नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क लाए गए नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा। अब यहां 4 शावक समेत 17 चीते बचे हैं।

अमर बलिदानी वीरांगना आदिवासी वीरबाला शहीद बिन्दु कुमरे

Immortal Martyr Heroine Tribal Veerbala Martyr Bindu Kumre पूर्व कलेक्टर डॉ श्याम सिंह कुमरे (IAS) की बहन शहीद बिंदु कुमरे का बलिदान दिवस बरघाट में गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा लेखक- डाँ. श्यामसिंह कुमरे हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) भारत संघ का प्रमुख केन्द्रीय पुलिस बल है। यह सबसे पुराना केन्द्रीय अर्ध्द सैनिक बल (अब केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल के रूप में जानते है) में से एक है, जिसे 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में गठित किया गया था। क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस द्वारा भारत की तत्कालीन रियासतों में आंदोलनों व राजनीतिक अशांति तथा साम्राज्यिक नीति के रूप में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में सहायता की। हमारे देश की स्वतंत्रता के बाद 28 दिसम्बर 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल का नाम केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल दिया गया था। तत्कालीन गृहमंत्री मा. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नव स्वतंत्र राष्ट्र की बदलती आवश्‍यकताओं के अनुरूप इस बल के लिए एक बहुआयामी भूमिका की कल्पना की थी। भारत संघ में रियासतों के एकीकरण के दौरान बल ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तानी घुसपैठियों और पाकिस्तानी सेना द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद इस बल को जम्मू-कश्‍मीर की पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया गया था। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की जाँबाज अमर शहीद बिन्दु कुमरे का नाम जिला-सिवनी एवं उसके आसपास के जिलों के युवाओं विशेषकर महिलाओं एवं युवतियों में देश प्रेम की भावना की अलख जगाता है। अमर शहीद बिन्दु कुमरे के बलिदान का स्मरण कर क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति का मस्तक गर्व से ऊंचा उठ जाता है।88 वीं वाहिनी के केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में पदस्थ अमर शहीद बिन्दु कुमरे को जम्मू एवं कश्‍मीर में पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों जैश-ए-मोहम्मद का सफाया करने हेतु, उनके अदम्य साहस, वीरता, बहादुरी एवं कुशल योग्यता को दृष्टिगत रखते हुये तैनात किया गया था।ग्राम जावरकाठी जो कि जनजाति बाहुल्य ग्राम है। इस ग्राम में गणेश उत्सव में गणेश जी व शारदीय नवरात्रि में दुर्गा देवी जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करने की पुरानी परंपरा है। ग्राम जावरकाठी की रामायण मंडली प्रदेश में प्रसिध्द रही है तथा वर्ष 1956 में भोपाल में इस ग्राम की रामायण मंडली को पुरूष्‍कार प्राप्त हुआ था। देश की प्रथम महिला अमर शहीद वीरांगना बाला बिन्दु कुमरे का जन्म 07 अप्रैल 1970 को सिवनी जिला, बरघाट, मध्यप्रदेश के एक छोटे से ग्राम जावरकाठी बरघाट निवासी प्रतिष्ठित मालगुजार अनुसूचित जनजाति परिवार में हुआ था। माता श्रीमति गिंदिया जी-पिता स्व. श्री शिवनाथ जी (पटेल), दादी स्व.श्रीमति झिकिया जी, ताऊ स्व.श्री पन्नालाल जी, श्री धन्नालाल जी कुमरे (ग्राम-पटेल), ताई स्व.श्रीमति रूपा माय, स्व.श्रीमति सुहागा माय, श्रीमति फूलवती माँ, बडे भाई बैजनाथ, रामेश्‍वर, मेनसिंग, श्यामसिंह, सुजानसिंह, बिहारीलाल, शरदसिंह, बड़ी बहन बैजन्ती, जसवन्ती, पदमा, शिवरी, किरण, मंजू, सुधा के स्नेह एवं वात्सल्य में इनका बचपन बीता । इनकी प्राथमिक शिक्षा ग्राम-जावरकाठी, माध्यमिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा बरघाट में हुई, कुछ वर्षो के लिए विद्या अध्ययन हेतु अपनी बड़ी बहन बैजन्ती-लालसिंह जी के साथ राजनांदगांव में भी रही। बाल्यकाल से ही तैरना, निशानेबाजी, साइकिल एवं दो पहिया वाहन चलाने में बड़ी रूचि रखती थी। वे कुशाग्र बुध्दि की धनी थी व बहुत ही साहसी, देश प्रेमी, राष्ट्रवादी व अपनी भारतीय परम्परा, संस्कृति, सभ्यता और धर्म का गर्व से कठोरता पूर्वक पालन करने वाली थी। ग्राम-जावरकाठी स्थित कुलदेवी के दर्शन करने के पश्चात ही अपना कार्य प्रारंभ करती थी। चैत्र नवरात्री एवं शारदीय नवरात्री में बाल्यकाल से ही वृत रखती थी, साथ ही बडे़ देव की पूजा भी करती थी। वर्ष में दो बार नवा खाने के कार्यक्रम में विशेष रूप से भाग लेती थी। भारतीय सभ्यता, परम्परा, संस्कृति पर गर्व करती थी। देश-भक्ति के गीत गुनगुनाया करती थी। किन्ही भी विषम परिस्थितियों में अपने उद्देश्‍य से पीछे हटती नहीं थी। अपने उद्देश्‍य को पूर्ण करने हेतु बहुत ही जिद्दी थीं, उनमें राष्ट्रवाद का जुनून था। हमारे देश में पाकिस्तानी मुस्लिम आंतकवादियों से बदला लेने सेना में भर्ती होने का संकल्प बचपन से ही ले ली थी। इसलिये अवसर मिलते ही पैरा मिलिट्री फोर्स में भर्ती होने का अदम्य साहस दिखाया। के.रि.पु. बल में चयन के पश्चात अमर शहीद बिन्दु कुमरे ने आजीवन अविवाहित रहकर देश की रक्षा करने का संकल्प लिया था। वे चाहती तो ग्राम की अन्य बहन-बेटियों की तरह शिक्षक बनकर सामान्य जीवन जीने के रास्ते का चुनाव कर सकती थी किन्तु उनकी आत्मा में बसी राष्ट्रवाद, देशप्रेम की भावना ने व भारतीय भाई-बहनों का पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किये जा रहे नरसंहार की घटनाओं ने उन्हे सी.आर.पी.एफ. में भर्ती होने का साहस एवं प्ररेणा दी। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के कुछ पुरूषकर्मी हिम्मत हारकर सेवा छोड़कर घर वापस आ गये थे लेकिन अमर शहीद बिन्दु कुमरे अपने कर्तव्यों की बेदी पर शहीद होने तक मोर्चे पर डटी रहीं। देश की प्रथम महिला शहीद (सी.आर.पी.एफ.) होने का गौरव अमर शहीद वीरांगना जनजाति बाला बिन्दु कुमरे को प्राप्त हुआ है। बल संख्या 971351827 अमर शहीद बिन्दु कुमरे, वर्ष 1997 में रिजर्व पुलिस बल में सि./जी.डी. के पद पर भर्ती हुई थी। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की 88वीं बटालियन में पदस्थ अमर शहीद बिन्दु कुमरे की श्रीनगर एयरपोर्ट पर तैनाती के दौरान दिनांक 16 जनवरी 2001 को लष्कर-ए-तोयेबा के 6 फिदायीन पाकिस्तानी मुस्लिम आत्मघाती आतंकवादीयों ने श्रीनगर हवाई अड्डे पर अचानक हमला कर दिया। सभी 6 फिदायीन पाकिस्तानी मुस्लिम आत्मघाती आतंकवादी भारतीय सेना की वर्दी में थे इसलिए उन्हें पहचानने में कुछ विलम्ब हुआ एवं लगभग 2.45 बजे हवाई अड्डे के प्रथम प्रवेश मार्ग जो कि टर्मिनल बिल्डिंग से करीब 2 कि.मी. दूर स्थित है के पास पहुचने में आतंकवादी सफल हो गये, जहां अमर शहीद बिन्दु कुमरे सहित वहां पर तैनात सी.आर.पी.एफ. के जवानों ने पाकिस्तानी मुस्लिम आत्मघाती आतंकवादियों को वहां पर रोका व ललकारा। लश्‍कर-ए-तोयेबा के 6 आत्मघाती फिदायीन पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों ने अमर शहीद बिन्दु कुमरे सहित केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के वहां पर तैनात जवानों पर ग्रेनेड से हमला किया। 06 फिदायीन पाकिस्तानी मुस्लिम आत्मघाती आतंकवादियों व अमर शहीद बिन्दु कुमरे सहित के.रि.पु. बल के जावनों के बीच करीब 3 घंटे से भी अधिक समय तक मुठभेड़ चली। अमर शहीद बिन्दु कुमरे ने अपने अदम्य साहस व वीरता के साथ देश हित में अपनी जान की … Read more

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी , “नल जल योजना” पर भ्रष्टाचारियों ने लगाया ग्रहण , अफसरो,विधायको से लेकर मंत्री तक बंटता है कमीशन

Prime Minister’s ambitious “Tap Water Scheme” has been eclipsed by the corrupt, commission is distributed from officers, MLAs to ministers. विशेष संवादाता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ,” नल जल योजना ” जिसके माध्यम से प्रत्येक गरीब परिवार के घर में नल से जल पहुंचने का कार्य किया जा रहा है । मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री की इस , नल जल योजना को , पब्लिक इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सब इंजीनियर एसडीओ से लेकर विभाग के प्रमुख सचिव इसमे कमिशन के रूप मे भारी कमाई कर रहे हैं । सरकार के नेता तक इस योजना में भ्रष्टाचार कर के पलीता लगाने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश के 52 अब 55 जिलों में इस योजना को पूरा किया जाना है । प्रत्येक जिले में 200 करोड़ से 350 करोड रुपए तक का बजट है ।इस बजट को बंदर बांट की तरह बांटने में अधिकारी और कर्मचारी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं ।वर्तमान समय में विभाग के‌ प्रमुख सचिव संजय शुक्ला है, जो पिछले लगभग डेढ़ 2 सालों से पदस्थ हैं । इससे पहले भी संजय शुक्ला इस पद पर रह चुके हैं । जिसके कारण उन्हें इस विभाग के एसडीओ से लेकर चीफ इंजीनियर व ईएनसी की समस्त जानकारी है । “नल जल योजना ” में बड़ी मात्रा में सामान की सप्लाई का काम किया जाता है । बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां सप्लाई का काम विभाग में करती हैं, सूत्रों की माने तो पी एस ऐसे बड़े ठेकेदारों को डायरेक्ट बुलाकर उनसे बात करते हैं । जाति विशेष अधिकारी पर प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का संरक्षण,12 वर्षो से जमे है राजधानी में शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में संजय शुक्ला ने अपने सजातीय अधिकारियों को खुला संरक्षण दे रखा था। मध्य प्रदेश के इस विभाग के एक अधिकारी, जो भोपाल राजधानी में पिछले 12 सालों से एक ही विभाग में पदस्थ हैं उन्हें हटाने के लिए विभागीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखे लेकिन संजय शुक्ला ने अपने सजातिय अधिकारी को वहां से नहीं हटाया और मुख्यमंत्री और मंत्री की नोट सीटों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया ।मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है ,शिवराज सिंह चौहान की जगह डॉक्टर मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं ।जाहिर संजय शुक्ला डॉक्टर मोहन यादव को भी अपने जाल में फंसने का पूरा प्रयास करेंगे और इस मलाईदार पद पर बने रहने की कोशिश करेंगे अपने हथकंडे अपना कर‌ पी एस शुक्ला विभागीय मंत्री को भी दरकिनार कर देते हैं और मन माने तरीके से खुद तो काम करते ही हैं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों से भी करवाते हैं मध्य प्रदेश में , “जल जीवन योजना “को पूरी तरह से पलीता लगाने का काम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा निरंतर जारी है। यदि इसी तरह इस विभाग में “नल जल योजना ” को ठिकाने लगाने में यह अधिकारी और कर्मचारी लग रहे हैं ,तो निश्चित ही इस नल जल योजना का लाभ मध्यप्रदेश के गरीब जनता को नहीं मिल पाएगा और इसका ठीकरा मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सिर पर फोड़ दिया जाएगा । मलाई अधिकारी~कर्मचारी खा जाएंगे ।यदि अधिकारियों और कर्मचारी द्वारा इस तरह से योजना के पैसे का बंदरबाट किया जाएगा तो, इस योजना का कार्य गुणवत्ता के आधार पर नहीं किया जा सकता जहां तक इस योजना का सवाल है ,देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव चाहेंगे कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक आम गरीब जनता तक पहुंचे । जिस उद्देश्य से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को लागू किया है उसे योजना का क्रियान्वयन गुणवत्ता के साथ उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे यदि यह लाभ आम नागरिक तक नहीं पहुंचता है तो इसके लिए दोषी अधिकारी और कर्मचारियों को निष्पक्ष जांच कर कर उन्हें दंडित भी किया जाना चाहिए उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाने चाहिए । विधायक व सांसदो तक जाता था कमिशन एक तरफ अधिकारी कर्मचारी इस काम में सप्लाई से लेकर काम करने वाले हर मामले में मोटी रकम कमीशन के रूप में ले रहे हैं,तो वहीं दूसरी तरफ सूत्रों पर भरोसा करें तो बड़े-बड़े ठेकेदार जो इस योजना में कार्य कर रहे हैं , उनसे स्थानीय विधायक से लेकर संसद तक चंदे के रूप में मोटी रकम वसूल रहे हैं । विभाग का कमीशन सांसदों और विधायकों को दिए जाने वाला पैसा अगर इसी तरह बटता रहेगा तो इस योजना में संबंधित ठेकेदार योजना को पूरा गुणवत्ता के साथ कैसे कर पाएगा यह सोचने वाली बात है। मामले की जाचं हो मध्य प्रदेश सरकार के नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेना चाहिए और नल जल योजना की निष्पक्ष अधिकारियों से जांच करानी चाहिए। इसकी मॉनिटरिंग करनी चाहिए और जो लोग भी इसमें दोषी पाए जाते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए । अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस नल जल योजना को यह अधिकारी और कर्मचारी पलीता लगाए बिना नहीं रहेंगे और ठीक रहा मध्य प्रदेश के योग्य शिक्षित योग्य मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सर पर फोड़ दिया जाएगा। मंत्री और मुख्यमंत्री के आदेशों को नहीं मानते प्रमुख सचिव शुक्ला विभाग में पदस्थ पी.एस . संजय शुक्ला की अपने विभाग में कितनी पकड़ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि वह अपने विभाग में सजातिय अधीनस्थ अधिकारियों की कितनी मदद करते हैं उनकी मदद करने के लिए यह अधिकारी अपने विभाग के मंत्री और मुख्यमंत्री तक की नोटशीट को रद्दी की टोकरी में डालकर उनके आदेशों की सरेआम अवेलना करते हैं । मुख्यमंत्री व मंत्री से जनता की आस अब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बदल गए हैं शिवराज सिंह चौहान की जगह डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गए हैं और मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की जगह अब सम्पतिया उईके बन गई हैं ।अब देखना यह होगा कि यह अधिकारी मुख्यमंत्री और अपने विभागीय मंत्री को ,अपनी गिरफ्त में लेने में सफल हो जाते हैं या मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे मनमाने तरीके से और जातिवाद के आधार पर भ्रष्टाचार के आधार पर कार्य करने वाले अधिकारी की विभाग से विदाई करते हैं ।

दुनिया में धाक जमाती हिंदी

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष हिंदी महज एक भाषा नहीं बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की संस्कृति, सभ्यता, साहित्य और इतिहास को बयां करती है और उन्हें एकता के सूत्र में बांधती है। हिंदी भारतीयों के मान, सम्मान और स्वाभिमान की भाषा है। हिंदी भाषा ही नहीं यह भावों की अभिव्यक्ति है। हिंदी मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है। हिंदी हमारा ईमान है और हिंदी हमारी पहचान है। हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची परिचायक भी है। आइए जानते हैं विश्व हिंदी दिवस पर विश्व में हिंदी के बढ़ते प्रभाव और उसका महत्व। डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) 10 जनवरी को पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक भारतीय के लिए यह बेहद गर्व की बात है। बहुल सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवतः सबसे वैज्ञानिक भाषा है। जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हिंदी भाषा वक्ताओं की ताकत है, लेखकों का अभिमान है। करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बांधने के साथ ही हमारी आन-बान, शान और अभिमान है। हिंदी को राष्ट्र की अस्मिता और प्रणम्य का प्रतीक माना जाता है। इसके हर शब्द में गंगा जैसी पावनता और गगन सी व्यापकता है। समुद्र सी गहराई और हिमालय सी ऊंचाई है, जो इसे महान बनाती है। यही वजह है कि पूरी दुनिया विश्व हिंदी दिवस मना रही है।यदि हम हिंदी भाषा के विकास की बात करें तो यह कहना मुनासिब होगा कि पिछली शताब्दी मेंं हिंदी का तेजी से विकास हुआ है और दिनों-दिन इसका प्रभाव बढ़ रहा है। हिंदी का करीब एक हजार वर्ष पुराना इतिहास है। संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसे देवभाषा भी कहा जाता है। माना जाता है कि हिंदी का जन्म भी संस्कृत से हुआ है। ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। यह मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। इस कारण हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है।भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, बावजूद इसके हिंदी सबसे ज्यादा बोली, लिखी व पढ़ी जाती है। इसीलिए हिंदी भारत की सबसे प्रमुख भाषा है। 26 जनवरी 1950 को संसद के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को प्राथमिक भाषा माना गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर विदेशी धरती पर मातृभाषा का मान बढ़ाया। हिन्दी के जहां अंग्रेजी में मात्र 10 हजार मूल शब्द हैं। वहीं हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या 2 लाख 50 हजार से भी अधिक है। हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ हमारी राजभाषा भी है। हिन्दी ने भाषा, व्याकरण, साहित्य, कला, संगीत के सभी माध्यमों में अपनी उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं वर्चस्व कायम किया है। हिन्दी की यह स्थिति हिन्दी भाषियों और हिन्दी समाज की देन है, हमें अहसास होना चाहिये कि हिन्दी दुनिया की किसी भी भाषा से कमजोर नहीं है। हिंदी भाषा के इतिहास पर पुस्तक लिखने वाला कोई हिंदुस्तानी नहीं बल्कि फ्रांसीसी लेखक ग्रेसिम द टैसी था। हिंदी के बढ़ते प्रभाव के कारण ही ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में अच्छा और सूर्य नमस्कार जैसे कई हिंदी शब्दों को शामिल किया गया है।हिंदी का वर्चस्व बढ़ाने के लिए 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से इसकी वर्षगांठ के उपलक्ष में हर साल मनाया जाता है। आज दुनियाभर में अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी तीसरे नंबर की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सर्वे एजेंसी स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में 43. 63 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा बोलते और समझते हैं।भारत के अलावा फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिनाद, टोबैगो, गुयाना, नेपाल, तिब्बत और पाकिस्तान में हिंदी बोली जाती है। इसके चलते इंटरनेट की दुनिया में अब हिंदी का वर्चस्व बढ़ रहा है।यही कारण है कि हिंदी आज दुनिया भर में इंटरनेट की पसंदीदा भाषा बन रही है। प्रति वर्ष 94 फीसदी हिंदी भाषी जुड़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी के महज 17 प्रतिशत हैं। गूगल-केपीएमजी रिसर्च, सेंसस इंडिया और आईआरएस की सर्वे रिपोर्ट को मानें तो आने वाले साल में हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वाले अंग्रेजी वालों से ज्यादा हो जाएंगे। एक अनुमान के मुताबिक 34 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे। हिंदी के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की मशहूर ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया ने अपना एप हिन्दी में लॉन्च किया। ओएलएक्स, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न कंपनियों के प्लेटफॉर्म पहले ही हिन्दी में उपलब्ध हैं। स्नैपडील भी हिन्दी में आ चुका है। 2023 तक 16.1 करोड़ लोगों ने डिजिटल पेमेंट के लिए हिन्दी का उपयोग किया। जबकि 2016 में यह संख्या 2.2 करोड़ थी। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी। जो 2023 में बढ़कर 24.4 करोड़ तक हो गई।इसी को दृष्टिगत रखते हुए इस बार हिंदी दिवस मनाने की थीम “ हिंदी पारंपरिक ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता“ रखी गई है।विदेशों में हिंदी जनमानस के दिलो दिमाग पर अपनी छाप छोड़ रही है। लंदन में हिंदी पढ़ाई जा रही है। जर्मन में ऐसे स्कूल और गुरुकुल हैं जहां बच्चों को हिंदी के साथ ही संस्कृत भी पढ़ाई जाती है। क्योंकि हिंदी सोच बदलने वाली भाषा है। यह दुनिया की प्राचीन समृद्ध और सबसे सरल भाषा है। वर्तमान में दुनियाभर के करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं और लिखते भी हैं। कह सकते हैं कि दुनिया के भाल पर चंदन की भांति चमकने वाली हिंदी अपनी धाक जमा रही है।

हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल

Chakka jam strike by drivers in protest against hit and run law केंद्र सरकार के तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल दिनेश राज शर्मा जबलपुर ! केंद्र सरकार ने तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में गाड़ी चलाको, ड्राइवरों ने चक्का जाम कर हड़ताल पर बाघ्य हुए सरकार ने बिना सोचे समझे मोटर कानून में बदलाव करके चालक से एक्सीडेंट होने पर 10 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना का प्रावधान किया जाना पूर्णतःगलत है कोई भी ड्राइवर या गाड़ी चालक जानबूझकर एक्सीडेंट नहीं करता जब गाड़ी का मालिक गाड़ी का इंश्योरेंस कराकर हर साल 25 से ₹30000 इसलिए चुकता है, कि रिस्क कवर हो गाड़ी का इंश्योरेंस है तो ड्राइवर से 5 लाख का जुर्माना लेने का प्रावधान क्यों किया गया?कांग्रेस पूर्व प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने जो इंश्योरेंस कंपनियों का प्राइवेटीकरण किया है उसको फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से एक तरफा कानून में बदलाव कर गाड़ी मालिक और ड्राइवर का गाड़ी का चक्का जाम के लिए मजबूर किया।कांग्रेस नेता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि सोशल मीडिया पर ट्रक ड्राइवर एवं बस चालक सोशल मीडिया पर हड़ताल पर जाने की विगत कई दिनों से चेतावनी दे रहे थे उसके बावजूद शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। और आम जनता को पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कमी से जूझने के लिए मजबूर कर दिया। अभी तो शुरुआत है शासन प्रशासन से मांग है कि ड्राइवर की मांगों पर तत्काल ध्यान दें । और आम जनता को राहत पहुचाने आवश्यक कदम शीघ्र उठाये।

देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

Corona infection once again gained momentum in the country देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 24 घंटे में 636 नए मामले, जेएन.1 के मरीज 200 पार स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। देश में कोरोना संक्रमण के 636 नए मामले सामने आए हैं, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,394 हो गई है। साथ ही नए उपस्वरूप जेएन.1 के 37 नए मामले मिलने के बाद इसके मरीजों की संख्या 200 पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी, लेकिन ठंड और वायरस के नए उपस्वरूप के कारण मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, अब तक संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक हो गई है। किस राज्य में कितने जेएन.1 वैरिएंट के मामलेजेएन.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बताने के लिए INSACOG ने राज्यवार आंकड़े भी जारी किए। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। राज्यों को निगरानी बढ़ाने का निर्देशWHO के मुताबिक कोरोना वायरस के जेएन.1 सब-वैरिएंट को पहले बीए.2.86 का प्रकार माना गया। हालांकि, बीते कुछ हफ्तों में 40 से अधिक देशों में JN.1 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है।

हिट एंड रन कानून के विरोध में मध्य प्रदेश में सड़कों पर उतरे चालक

यात्री परेशान, पेट्रोल की किल्लत शुरू पेट्रोल टैंकर चालक भी रविवार से हड़ताल पर हैं कई पंपों पर शुरू हुई किल्लत। रोजना सफर करने वाले लाखों लोगों को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा। हिट एंड रन के नए कानून को वापस लेने की मांग। केंद्र सरकार द्रारा लाये जा रहे हिट एंड रन के नए कानून को लेकर ड्राइवरों में रोष व्याप्त है। मध्य प्रदेश में चालक इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। पेट्रोल टैंकर चालकों की हड़ताल के बाद सोमवार को नादरा बस स्टैंड चौराहे पर बस ड्राइवरों ने चक्का जाम कर चौराहा जाम कर दिया। चौराहे पर वाहनों को खड़ा कर दिया गया। इससे चौराहा से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। ड्राइवर इस कानून को लाने का विरोध कर रहे हैं। इसमें में एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर को 10 साल की सजा और 7 लाख के जुर्माने का प्रविधान किया गया है। आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी 2 जनवरी को बैठक बुलाई। ड्राइवरों की हड़ताल का कर सकते हैं समर्थन। ड्राइवरों की तीन दीनी हड़ताल से ट्रक और बसों के थमे पहिए। जरूरी सामान की भी किल्लत हो सकती है। मध्यप्रदेश के इन जिलों में जारी है हड़तालखंडवा- यहां नए कानून के विरोध में ड्राइवर सड़क पर उतर आए हैं। खंडवा के धर्मकांटा क्षेत्र में कर रहे ड्राइवरों ने चक्काजाम कर दिया है। इस हड़ताल में बस, ऑटो और लोडिंग वाहन चालक भी शामिल हैं। इसके अलावा खंडवा के पुनासा में संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के अफसरों को खुद ही अपनी गाड़ी चलाकर ऑफिस पहुंचना पड़ रहा है। देवास- देवास में भी ड्राइवरो की हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। यहां बायपास चौराहे पर ड्राइवरों ने जाम लगा दिया है। इससे इंदौर-देवास मार्ग जाम हो गया है। भोपाल- राजधानी भोपाल में भी ट्रक हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। करोंद मंडी रोड पर ड्राइवरों ने चक्काजाम कर दिया है। उज्जैन- साल के पहले दिन उज्जैन में भी ट्रक चालकों की हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। शहर में ट्रक और बस के पहिए थम गए हैं। नरसिंहपुर- नरसिंहपुर जिले में इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। हड़ताल के चलते जिले में डीजल-पेट्रोल की किल्लत हो गई है। हिट एंड रन के नए प्रस्तावित कानून को लेकर भारी वाहन चालकों में आक्रोश है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। नए कानून को लेकर ट्रक ड्राइवर हड़ताल कर रहे हैं। रविवार को पेट्रोल डीजल के टैंकरों के ड्राइवर ने विरोध स्वरूप अपना आंदोलन शुरू कर दिया। जिसके चलते पेट्रोल-डीजल की किल्लत शुरू हो गई है

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