LATEST NEWS

पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है हम आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में पोस्ट के बाद अफसरों में सन्नाटा.

In the cycle of positions upheaval occurs, Silence prevails among officers after the post in the IFS Association WhatsApp group is altered. उदित नारायण भोपाल। 1993 बैच के आईएफएस शशि मलिक ने सेवानिवृत के आठ महीने पहले एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप पर अपने भावनाओं को संकलित कर ब्लॉग के रूप में एक पोस्ट किया है। एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में ब्लॉग पोस्ट होते ही लोकसेवक बिरादरी में सन्नाटा खींच गया। मलिक ने लिखा है कि पदस्थापना को बदलवाने के फेर में हम ऐसे दुष्चक्र में फंस जाते कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें नहीं मिला पाते है. हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है।नए साल के जुलाई में रिटायर होने वाले शशि मलिक जहां भी सदस्य रहे, वहां सुर्खियों में बने रहे। वर्तमान में वे मुख्यालय के समन्वय शाखा में प्रमुख हैं। यहां का पदभार संभालते ही उन्होंने तृतीय और चतुर्थ कर्मचारी को कार्यालय में गणवेश (वर्दी) पहनकर आने की अनिवार्यता आदेश जारी कर सुर्खियों में है। इसकी वजह यह है कि मुख्यालय में ही उनके आदेश का माख़ौल उड़ाया जा रहा है। अपने तमाम पदस्थापनाओं के दौरान अनुभवों को समेटते हुए एक ब्लॉग में लिखा कि कई बार हम अपनी वर्तमान पद स्थापना से संतुष्ट नहीं होते है तथा येन-केन-प्रकारेण पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में हमारा कई प्रकार से दोहन किया जाता है। जिसका प्रभाव पुनः हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है। इस प्रकार हम एक दुष्चक्र में फंस जाते है जिससे निकलने का हमें कोई भी मार्ग नहीं मिलता है। हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है। इस दुष्वक्र में फंसकर हम न तो स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय ले पाते हैं तथा न ही कर्तव्यों का सम्पादन उचित रूप से कर पाते है, जिसकी हमसे अपेक्षा की जाती है। हम अपने वर्तमान की उस समय से तुलना करें, जब हम इस पवित्र शासकीय सेवा के सदस्य नहीं थे। उस समय हमारी विचारधारा क्या थी, हम क्या सोचते थे ? परन्तु शासकीय सेवा में आते ही हमारे विभिन्न प्रकार के स्वार्थ जाग्रत हो जाते हैं तथा हम उन्ही की पूर्ति में लग जाते है। हमें इस प्रकार की मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता है। जहां भी हमारी पदस्थापना होती है, हमें उसी में पूर्ण रूप से आनंद लेना चाहिए, क्योंकि कई बार इस दुष्चक्र में फंसकर जाने-अनजाने में हम कोई ऐसा कार्य कर जाते हैं कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें न मिला सकेंगे तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों होने दी जाए ? हमसे अपेक्षा की जाती है कि प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य को हम नौकरी समझ कर नही बल्कि एक पवित्र कार्य मानते हुये निष्काम भाव से पूर्ण करे। हमारे कर्तव्य पालन का केवल एक ही तरीका है।

एचडीएफसी बैंक जबलपुर शाखा द्वारा 46 केंद्रों में रक्तदान अभियान के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया.

HDFC Bank’s Jabalpur branch collected 4661 units of blood across 46 centers through a blood donation campaign. भोपाल! भारत का अग्रणी निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार 8 दिसंबर, 2023 से शुरू होने वाले अपने राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के 15वें संस्करण का आयोजन जबलपुर के विजय नगर शाखा में किया। अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम परिवर्तन के तहत भारत के 1200 शहरों में 6,000 केंद्रों पर रक्तदान शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन निर्मला देवी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्री मुनेंद्र मिश्रा जी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। श्री मिश्रा ने एचडीएफसी बैंक द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बैंक व्यवसायिक दायित्वों के निर्वाह के साथ साथ सामाजिक दायित्व के निर्वहन में भी देश का नंबर वन बैंक बन चुका है। एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री अनूप शर्मा ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि इस दान से बड़ा और कोई दान नहीं हो सकता। श्री शर्मा ने शहर के सभी युवाओं को स्वेच्छा से रक्तदान करने का आग्रह किया। गत माह में एचडीएफसी बैंक के जबलपुर सर्किल के द्वारा 45 विभन्न कैंपों के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया गया। एचडीएफसी बैंक अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, कॉरपोरेट्स, रक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न प्रकार के रक्त दानदाताओं को जुटाने के लिए तैयार है। इस साल एक अनोखे दृष्टिकोण में एचडीएफसी बैंक ने लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए ‘फीलिंग ऑफ सेविंग समवन नामक एक फिल्म लॉन्च की है। फिल्म व्यक्तियों को इस जीवन रक्षक कार्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है और रक्तदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। यह फिल्म बैंक के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी, यह जनता के बीच उनके योगदान के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करेगा और अभियान में बड़े पैमाने पर रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक, श्री भावेश ज़वेरी ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हम लोगों को इस प्रयास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि दान किए गए रक्त की हर बूंद एक संभावित जीवन रक्षक है। अपने 15वें अखिल भारतीय रक्तदान अभियान के साथ हम नागरिकों को इस नेक काम में भाग लेने और अपना योगदान देने के लिए एक मंच देना चाहते हैं।” यह पहल 2007 में केवल 88 केंद्रों और 4000 दानदाताओं के साथ शुरू की गई थी जो केवल बैंक कर्मचारियों के बीच ही चलाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया और इसमें कॉलेज के छात्रों, कॉरपोरेट्स और सेना और सेवा कर्मियों को शामिल किया गया। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डसा” से सबसे बड़े (सिंगल डे, मल्टीपुल वेन्यू) रक्तदान अभियान के रूप में मान्यता और प्रमाणन प्राप्त हुआ। 2022 में बैंक ने 25 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया। कुछ महत्वपूर्ण दानकर्ता 1500- कॉलेजों, 550 कॉरपोरेट्स और 105- रक्षा और सेवा कर्मियों से आए जिन्होंने रक्तदान अभियान में भाग लिया। एचडीएफसी बैंक के रक्तदान अभियान के बड़े पैमाने और व्यापक आधार ने देश के समग्र रक्त संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।रक्तदान शिविर का संचालन जबलपुर शाखा के ऑपरेशन प्रबंधक श्री लीजू जोसेफ ने किया एवं समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से रक्तदान करने आए बैंक के ग्राहकों एवं युवा वर्ग का आभार व्यक्त किया।

विष्णु देव साय होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री, विधायक दल की बैठक में लगी मुहर

Vishnu Dev will be the new Chief Minister of Chhattisgarh, the seal was set in the legislative party meeting. आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय और रेणुका सिंह के नाम पर मुहर लग गई है। रायपुर! छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के पद को लेकर बना संशय रविवार को खत्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित विधायकों की बैठक में विष्णु देव साय को नया मुख्‍यमंत्री चुना गया। हालांकि इसकी औप‍चारिक घोषणा होना बाकी है। रायपुर: छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल की बैठक पर भाजपा नेता नारायण चंदेल ने कहा, “वे(विष्णुदेव साय) बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष हैं। बहुत सहज हैं, सरल हैं, विनम्र हैं और एक ऐसा चेहरा हैं जिसका कोई विरोध नहीं कर पाया..नव निर्वाचित विधायकों की बैठक रविवार को हुई। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में इस बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता का चयन किया गया। बैठक के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व सर्वानंद सोनोवाल और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम रायपुर के बीजेपी कार्यालय पहुंचे। बैठक में नवनिर्वाचित प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री व चुनाव सह प्रभारी डा. मनसुख मांडविया, भाजपा संगठन सह प्रभारी नितिन नबीन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह भी उपस्थित रहे। इस बीच पर्यवेक्षक अर्जुन मुंडा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा था शाम तक छत्तीसगढ़ को मिल जाएगा नया मुख्यमंत्री। ओबीसी या आदिवासी का फार्मूला इससे पहले पार्टी सूत्रों ने कहा था कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में अगर पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के चेहरे पर सहमति नहीं बनी तो पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आदिवासी मुख्यमंत्री के फार्मूले पर विचार कर सकती है। ओबीसी वर्ग से अरुण साव व ओपी चौधरी और आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय और रेणुका सिंह के नाम पर मुहर लगने की संभावना थी। बता दें कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 54 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बहुमत प्राप्त किया है। कांग्रेस 34 सीटों पर सिमट गई है। वहीं, एक सीट गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के खाते में पहुंची है।

मध्य प्रदेश को नया आयम देने मोदी की गारंटी”

Modi’s guarantee to give Madhya Pradesh a new dimension. संपादकीय, उदित नारायण, Sahara Samachaarभोपाल। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस का अहम मुद्दा भ्रष्ट सरकार ,भाजपा की छवि को सुधारने हेतु प्रधानमंत्री और अमित शाह ने मिलकर जो रणनीति बनाई उससे कांग्रेस के पास आती प्रतीत हो रही सत्ता हाथ से फिसल गई और आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्य प्रदेश मे केंद्रीय नेतृत्व ने एक साफ सुथरी छवि का मुख्य मंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है, कल विधायक दल की बैठक के बाद निर्णय हो जायेगा कि जाएगा कि मोदी के विकसित भारत बनाने की गारंटी का जिम्मा मध्य प्रदेश मे किसके हाथ होगा, राजनैतिक विश्लेषकों की राय में तो मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद मुख्य मंत्री तय करना कठिन हो गया है। लेकिन प्रधानमंत्री, अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष ने शायद अपना निर्णय मध्य प्रदेश इकाई को बता दिया है अब कुछ औपचारिकता ही शेष बची है !शिवराज और उनकी “मैनेजमैंट पॉलिटिक्स” लाख इस तथ्य को छुपाने ,दबाने का प्रयास करती रही पर इस कटु सत्य को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से छुपने का कोई प्रश्न ही नही था ,और इसलिए मध्य प्रदेश का चुनाव “मोदी“ के चेहरे पर लड़े जाने का निर्णय लिया गया और तभी यह तय हो गया था कि मध्य प्रदेश में “शिवराज सरकार “का अंत समीप है ! शिवराज सिंह चौहान और उनके चाटुकार नौकरशाह और मीडिया मैनेजर गर्व से “लाड़ली बहना” का नाम लेते है ! सब जानते है यदि मोदी का चेहरा और “ ब्रॉड मोदी “की गॉरंटी नही होती तो मध्य प्रदेश की “लाडली बहनाये ““कमलनाथ से इस योजना का लाभ लेना पसंद करती ! महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. यथार्थ यह है कि 18 साल में मध्य प्रदेश गरीबी के उस पड़ाव पर पहुंच गया जहाँ महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. ! यदि मोदी की गॉरंटी नही होती तो शिवराज सिंह की भाजपा मध्य प्रदेश मे 80 सीटों पर सिमट जाती !मध्यप्रदेश के जानकार जानते है “लाडली बहना “ शिवराज की “मनी मैनेजमैंट “का उदाहरण है ! मध्य प्रदेश 3.85 लाख करोड के कर्जे मे है ! अपने भृष्टाचार और घोटालो को दबाने के लिए कर्जे उठाकर चुनाव के पहले गरीब लाचार बेरोजगार महिलाओ को 1200 रूपये प्रतिमाह की रिश्वत दी गई है ! नोट के बदले लाचार बेरोजगार कराह रही “बहनाओ “के वोट खरीदने के लिए यह योजना लाई गई थी ! यदि मोदी ने गॉरंटी न दी होती तो बहनाये सरकार के बहकावे में आने वाली नही थी ! देखा जाए तो भाजपा की नई सरकार को मध्यप्रदेश के कर्ज चुकाने हेतु 3.85 लाख करोड़ के “ मोदी पैकेज “की जरूरत पडेगी नही तो प्रदेश के दीवालिया होने का खतरा है !मजे की बात यह है शिवराज सिंह अभी भी खुद को “हीरो “बताकर मुख्य मंत्री बनने के सपने देख रहे थे ! वे चाहते थे कि लोग उन्हे मध्यप्रदेश की जीत का श्रेय दें। इसीलिए वो दिल्ली ना आकर मध्य प्रदेश से भावनात्मक बयान दे जनता और प्रधानमंत्री को सन्देश दे रहे है, बेशक संघ और संगठन के कृपापात्र शिवराज अब भी संगठन पर निगाहें जमाये है लेकिन भ्रष्टाचार और भावना मे चुनावी नुकसान मोल लेने मे संगठन भी साथ नहीं आएगा!तीन राज्यो की “जीत के शिल्पकार “अमित शाह को हर अंधकार को समाप्त करने की मोदी की गॉरंटी याद है इसलिए शिवराज का पुनःमुख्यमंत्री बनना सिर्फ उनकी खुली ऑखो का सपना है क्योकि अमित शाह इतने भोले नही हैं कि शिवराज सिंह पुनः मुख्य मंत्री बनाए। मध्यप्रदेश के 3.85 लाख करोड़ के शिवराज काल के कर्जो को चुकाने केन्द्र से पैकेज देते रहें और शिवराज सिंह को बीजेपी का राजनीतिक शिखर सौप दें ! इसलिए शिवराज सिंह को जाना होगा ! यकीन मानिए जो भी मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री होगा उसका कद और किरदार इतना ऊंचा और उज्जवल होगा मध्य प्रदेश मोदी की पसंद पर नाज कर सकेगा ! सोमवार को 18 साल के तिमिर के छंटने और नए सूर्योदय का इंतजार कीजिए !

INDIA गठबंधन’ का अहम मुद्दा बनेगा चुनावी पारदर्शिता.

The formation of the ‘INDIA Alliance’ will become a crucial issue for electoral transparency. जबलपुर में राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा का बड़ा बयान Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpur. भोपाल। जबलपुर पहुचे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा चुनाव में पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर संसद, कोर्ट, चुनाव और जनता के बीच जाने का रास्ता खुला है। चुनाव में जो पारदर्शिता होनी चाहिए वह इस चुनाव में नहीं दिखी , चुनाव के पहले ग्राउंड में बदलाव का माहौल दिख रहा था । चुनावी नतीजों के बाद लोगों में आक्रोश दिख रहा है। विवेक तंखा ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था हो जिससे चुनाव निष्पक्ष रूप से हो संपन्न सकें, चुनाव में पारदर्शिता का मुद्दा INDIA गठबंधन का अहम विषय होगा । विपक्ष के अस्तित्व के लिए जरूरी है कि सब मिलकर लड़ाई लड़ें। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे की अटकलों को बताया कमलनाथ और हाई कमान के बीच का मामला है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला न होने को लेकर विवेक तन्खा का कहना है कि मुख्यमंत्री के चयन को भाजपा की आंतरिक रणनीति का हिस्सा बतया है।

सीएम पद पाने दावेदार टस से मस नहीं, एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में फंसा पेंच.

The aspirant claiming the Chief Minister position is not making headway despite efforts; caught in a deadlock between Tussle in Madhya Pradesh, Rajasthan, and Chhattisgarh. भाजपा को सीएम चुनने में जब भी 5 दिन से ज्यादा वक्त लगा, हो गया यह खेला, भाजपा को सीएम चुनने में आ रहा पसीना उदित नारायणभोपाल। विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई है। बड़े से लेकर छोटे नेता तक एक ही बात कह रहे हैं- सबकुछ हाईकमान तय करेंगे। हाईकमान मतलब नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा। हालांकि, मुख्यमंत्री चुनने में हो रही देरी के गणित ने बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी है। बीजेपी ने जब भी मुख्यमंत्री चुनने में 5 दिन से ज्यादा का वक्त लगाया, तब पार्टी ने पुराने के बदले नए चेहरे को तरजीह दी।मसलन, 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी ने 9 दिन का समय लगाया था। उस वक्त राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे बड़े नेता मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे, लेकिन बीजेपी ने नए चेहरे महंथ योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी सौंपी।उसी साल उत्तराखंड के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी। पार्टी को यहां भी मुख्यमंत्री चुनने में 8 दिन का वक्त लग गया था। पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि बीएस खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पुराने नेता यहां मजबूत दावेदार थे।इसी तरह सीएम सिलेक्शन के लिए हिमाचल (2017) और महाराष्ट्र (2014) में पार्टी को 7 दिन का वक्त लगा था। दोनों जगहों पर बीजेपी ने पुराने चेहरे को नकार कर नए चेहरे को कमान सौंपी थी।हिमाचल में धूमल और महाराष्ट्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे। हरियाणा (2014) में भी बीजेपी को मुख्यमंत्री चुनने में 6 दिन का वक्त लगा था। यहां पार्टी ने नए चेहरे मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया था। 2013 में लगे थे 3 दिन का वक्त2013 में भी भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बंपर जीत मिली थी। उस समय राजनाथ सिंह बीजेपी के अध्यक्ष थे। 2013 में पार्टी को मुख्यमंत्री चुनने में 3 दिन का वक्त लगा था। 8 दिसंबर को चुनावी नतीजे आए थे और 11 दिसंबर को पार्टी ने मध्य प्रदेश में शिवराज और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को कमान देने की घोषणा कर दी थी। 12 दिसंबर को वसुंधरा राजे के नाम का ऐलान किया गया था। 2013 में चुनाव परिणाम आते ही बीजेपी ने इन राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था। उस वक्त मध्य प्रदेश के लिए सुषमा स्वराज, राजीव प्रताप रूडी और अनंत कुमार को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। वेंकैया नायडू, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक थे, जबकि अरुण जेटली, अमित शाह और कप्तान सोलंकी बतौर पर्यवेक्षक बनकर राजस्थान गए थे। 5 दिन से कम का वक्त लगा यानी चेहरा रिपीट2019 में हरियाणा चुनाव के रिजल्ट के 3 दिन बाद ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने मनोहर लाल खट्टर को ही दूसरी बार राज्य की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी सौंपी।गुजरात में भी 8 दिसंबर 2022 को चुनाव परिणाम आया, जिसमें बीजेपी को एकतरफा जीत मिली। पार्टी ने 3 दिन के भीतर ही मुख्यमंत्री का नाम ऐलान कर दिया। भूपेंद्र पटेल को ही पार्टी ने सीएम की जिम्मेदारी सौंपी। 2019 में महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के 5 दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया था। हालांकि, शिवसेना की वजह से फडणवीस उस वक्त सरकार नहीं बना पाए थे। शिवसेना ने पावर शेयरिंग के मुद्दे पर बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था। सीएम हर बार रिपीट, एक अपवाद शिवराज के लिए खतरा2014 के बाद सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने जिस भी राज्य में चुनाव जीती है, वहां के मुख्यमंत्री नहीं बदला है। हालांकि, 2021 का असम चुनाव इसका अपवाद है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यही डर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सता रहा है। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद विजय रुपाणी को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया था। 2019 में हरियाणा में भी यही हुआा। जीत के बाद पार्टी ने खट्टर पर ही भरोसा जताया। 2022 में यूपी, गोवा और उत्तराखंड में भी जीत के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री नहीं बदला। उत्तराखंड में तो मुख्यमंत्री धामी विधानसभा का चुनाव भी हार गए थे। इसी तरह अरुणाचल में जीत के बाद पेमा खांडू और त्रिपुरा में जीत के बाद माणिक साहा की सत्ता बरकरार रही। दोनों चुनाव से पहले भी राज्य के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री को लेकर क्यों फंसा है पेंच?पहला- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री चेहरे के बिना बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी थी। तीनों ही राज्य में बीजेपी का यह प्लान काम कर गया है। इसी वजह से मुख्यमंत्री तय करने में पार्टी को मशक्कत करनी पड़ रही है।दूसरा- पिछले 2 दशक राजस्थान में वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द बीजेपी की राजनीति घूम रही है। कहा जा रहा है कि हाईकमान अब इसे खत्म करना चाहती है।तीसरा- राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान काफी मजबूत स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव के नजदीक होने की वजह से बीजेपी कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहती है। कहां कितने दावेदार, एक नजर इस पर भी बीजेपी कैसे चुनती है राज्यों में मुख्यमंत्री?भारतीय जनता पार्टी में भी मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया कांग्रेस की तरह ही है। चुनाव में जीत के बाद दिल्ली से पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं। पर्यवेक्षक सभी विधायकों से राय लेते हैं और आलाकमान को बताते हैं। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना फैसला सुनाते हैं, जो विधायक दल की मीटिंग में बताया जाता है। कई बार पेंच फंसने पर सभी बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया जाता है और उसके बाद फैसला सुनाया जाता है। इस बार बीजेपी ने राजस्थान के लिए राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े, मध्य प्रदेश के लिए मनोहर लाल खट्टर, के लक्ष्मण और आशा लकड़ा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री चयन के लिए बीजेपी ने अर्जुन … Read more

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

भ्रष्टाचार दुःख का कारण, दंड ही इसका निवारण.

Corruption is the cause of sorrow; punishment is the solution to its elimination. काटनी होगीं भ्रष्टाचार की मजबूत होती जडेमहिला असिस्टेंट इंजीनियर करोड़ों के भ्रष्टाचार में फंसी…नगर निगम का अफसर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा …महिला सब इंस्पेक्टर का रिश्वत लेने का वीडियो वायरल…बाबू ने मांगी रिश्वत… रिश्वत लेने और भ्रष्टचार से जुड़े अनेक मामलों की ऐसी खबरें आए दिन समाचार-पत्रों की प्रमुख हेडलाइंस होती हैं। जिन्हें पढ़कर और सुनकर लगता है कि मानों आज भ्रष्ट आचरण वाले अधिकारी और कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य कर बनाई व्यवस्था को ध्वस्त कर तंत्र को दीमक की तरह चाट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस पर पढ़िए मौजूदा परिवेश में जड़ जमाते भ्रष्टाचार की हकीकत को दर्शाती खास रिपोर्ट। डॉ. केशव पाण्डेय अंतराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस आज भ्रष्टाचार@भ्रष्ट+आचार : भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुअ…आचार का मतलब आचरण… अर्थात भ्रष्टचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो। जब कोई न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरुद्ध जाकर अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है।मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार एक जटिल सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्या है, जो सभी देशों को प्रभावित करती है। भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर आर्थिक विकास को धीमा करता है और सरकारी अस्थिरता में योगदान देता है।भ्रष्टाचार वर्तमान में एक नासूर बनकर समाज को खोखला करता जा रहा है। धर्म का नाम लेकर लोग अधर्म को बढ़ावा दे रहे हैं। दोषी व अपराधी धन के प्रभाव में स्वच्छंद घूम रहे हैं। धन-बल का प्रदर्शन, लूट-पाट, तस्करी आदि आम बात हो गई है। भ्रष्टाचार का समाज और राष्ट्र में व्यापक असर हो रहा है।भ्रष्टाचार ऐसा अनैतिक आचरण है, जिसमें व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं की पूर्ति हेतु देश को संकट में डालने से परहेज नहीं करता है। देश के भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना भी भ्रष्टाचार का स्वरूप है।सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश में आज भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। दुनियाभर में पीढ़ियों के सामने भ्रष्टाचार एक सबसे बड़ी चुनौती है। यही चुनौती दुनिया भर के लोगों की समृद्धि और स्थिरता को खतरे में डाल रही है। क्योंकि आज अधिकांश लोग अवैध तरीकों से धन अर्जित करने की चाह में भ्रष्टाचार कर रहे हैं और निजी लाभ के लिए देश की संपत्ति का शोषण। यह देश की उन्नति के पथ पर सबसे बड़ा बाधक तत्व है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में दोष निहित होने पर देश में भ्रष्टाचार की मात्रा बढ़ रही है।यही वजह है कि भ्रष्टाचार का समाज के हर पहलू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और यह संघर्ष और अस्थिरता के साथ गहराई से जुड़ रहा है। जो सामाजिक और आर्थिक विकास को खतरे में डालकर लोकतांत्रिक संस्थानों और कानून के शासन को कमजोर कर रहा है।भ्रष्टाचार न केवल संघर्ष का कारण बनता है, बल्कि अक्सर इसके मूल कारणों में से एक है। यह कानून के शासन को कमजोर करके, गरीबी को बदतर बनाकर, संसाधनों के अवैध उपयोग को सुविधाजनक बनाकर और सशस्त्र संघर्ष के लिए वित्तपोषण प्रदान करके संघर्ष को बढ़ावा देता है और शांति प्रक्रियाओं को रोकता है।हैरान करने वाली बात यह है कि देश का दिल कहे जाने वाला मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार के मामले में चौथे नंबर पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 2022 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 294 मामले पंजीबद्ध हुए थे।प्रदेश में रिश्वत लेने के मामले सबसे ज्यादा हैं। इनमें लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के पास 257 मामले आए। ट्रेप के मामले में भी प्रदेश तीसरे पायदान पर है। अनुपातहीन संपत्ति के मामले में भी पिछले वर्ष 2022 में 17 मामले दर्ज हुए थे। इस मामले में प्रदेश का पांचवा नंबर है।भ्रष्टाचार के बढ़ते संकट को दृष्टिगत रखते हुए संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी और शांति, सुरक्षा और विकास के बीच महत्वपूर्ण संबंध को उजागर करना चाहता है। इसके मूल में यह धारणा है कि इस अपराध से निपटना हर किसी का अधिकार और जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति और संस्था के सहयोग और भागीदारी से ही हम इस अपराध के नकारात्मक प्रभाव पर काबू पा सकते हैं। राज्य, सरकारी अधिकारी, सिविल सेवक, कानून प्रवर्तन अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज, शिक्षाविद, जनता और युवा सभी को समान रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ दुनिया को एकजुट करने में भूमिका निभानी होगी।क्योंकि भ्रष्टाचार वह दीमक है जो अंदर ही अंदर देश को खोखला कर रहा है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है जो यह दिखाता है व्यक्ति लोभ, असंतुष्टि, आदत और मनसा जैसे विकारों के वजह से कैसे मौके का फायदा उठा सकता है।भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि भ्रष्टाचारियों को कठोर से कठोर दंड मिले।यदि सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना है तो भ्रष्टाचार को रोकना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और संस्थानों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। कह सकते हैं कि समाज व राष्ट्र की उन्नति और लोगों की तरक्की के लिए भ्रष्टाचार की मजबूत होती जड़ों को समूल काटना होगा।

चाइना के यूरिया से भारत बनेगा आत्मानिर्भर ,जानिए पूरी कहानी.

India will become self-reliant in urea production with China’s assistance – learn the entire story. नई दिल्ली: चाइना से आया यूरिया, बोरी पे लिखा आत्मानिर्भर भारत, जानिए पूरी कहानी – यूरिया की एक बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बोरी का फोटो दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) का है। इस फोटो में यूरिया की बोरी पर एक ओर लिखा है ‘सशक्त किसान-आत्मनिर्भर भारत’ और वही दूसरी ओर इस खाद का उद्गम स्थल चाइना को बताया गया है। इसी भ्रम को लेकर इस बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी बीच इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी ने इस वायरल फोटो पर टिप्पणी की हैं। डॉ. अवस्थी ने इस वायरल की जा रही फोटो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोगो के पास समझ का अभाव हैं। वैसे आजकल एआई के समय में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो बहुत हद तक डॉ. अवस्थी की बात सही भी हैं। भारत में 30 मिलियन टन यूरिया उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से 90% उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जाता है। यूरिया की बाकि जरूरतो के लिए उर्वरक कंपनियां दूसरे देशों से आयात करती हैं। ये जानना जरूरी हैं कि भारत अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन भारत सरकार 2025-26 तक य़ूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा हैं। आत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान‘ का नाराआत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान’ का नारा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक विकास योजनाओं के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया और इसे लोकप्रिय बनाया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रमुख कड़ी है आत्मनिर्भर किसान। श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सशक्त और समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बताई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से देश के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल, भारत लंबे समय से खेती-किसानी में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायिन‍क उर्वरकों का दूसरे देशों से आयात कर रहे हैं। जिसमें यूरिया का आयात सबसे अधिक है। भारत आजादी के 75 साल बाद भी हम उर्वरकों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सका हैं. लेकिन, अब उस रास्ते पर चल रहे हैं जिसमें आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। काफी हद तक इसमें सफलता भी मिली है। सरकार कृषि क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए साल दर साल मजबूरी में खाद का आयात कर रही है।

सीएम के सलाहकार और पूर्व आईएएस केसरी अडानी की कंपनी में बने एडवाइजर.

Advisors to the Chief Minister and former IAS officer Kesari Adani are appointed as advisors in Adani’s company. भोपाल। मप्र के सीनियर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईसीपी केशरी ने अडानी ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। वह ग्रुप के एनर्जी सेक्टर को देखेंगे और वहां एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे। केशरी ने ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। केशरी का शासकीय अधिकारी के तौर पर एनर्जी सेक्टर में करीब दस साल का अनुभव रहा है और वह इस विभाग में प्रमुख सचिव, एसीएस स्तर के अधिकारी रहे हैं। केंद्र में भी उन्होंने इस सेक्टर में काम किया है। केशरी के रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें दिसंबर 2022 में मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। करीब एक साल इस पद पर काम करने के बाद उन्होंने हाल ही में आचार संहिता लगने के पहले 30 नवंबर को यह पद त्याग दिया था और इसके बाद ग्रुप में ज्वाइनिंग की उनकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। केशरी 1988 बैच के अधिकारी है और एनर्जी सेक्टर में उनके काम का लंबा अनुभव रहा है। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान करीब साढ़े पांच साल तक वह ऊर्जा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी (थर्मल) रहे। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और मप्र भवन, नई दिल्ली के आवासीय आयुक्त रहे आईसीपी केशरी बाद में मुख्य सचिव के वेतनमान पर पदोन्नत के बाद अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा भी रहे।केशरी आईएएस एमपी के साथ मप्र, छग और केंद्र में ग्रासरूट एंड पॉलिसी लेवल का अनुभवी अधिकारी बताया है। खासकर इन्फ्रा-पॉवर, रोड, एरिगेसन सेक्टर में। साथ ही लिखा है ज्वाइन्ड एनर्जी ग्रुप।

खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर सख्ती से रोक, अवैध परिवहन में 4 वाहन जब्त.

Stringent measures to curb illegal mining, transportation, and storage of minerals, with the seizure of 4 vehicles involved in unauthorized transportation. विशेष संवाददाता, सहारा समाचार’ बालाघाट बालाघाट। जिला स्तरीय टास्कफोर्स समिति की 21 नवम्बर को हुई बैठक तथा कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा 5 दिसम्बर को जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर सख्ती से रोक लगाये जाने के निर्देश दिये गए थे। निर्देश का पालन करते हुये खनिज अधिकारी श्री आर. के. खातरकर, खनिज निरीक्षक श्री सुरेश कुमार कुलस्ते एवं मुकेश वाडिवे द्वारा लालबर्रा क्षेत्र का 6 दिसम्बर बुधवार को औचक निरीक्षण कर बिना अभिवहन पारपत्र (ई.टी.पी.) के खनिज रेत तथा गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 04 वाहनों डम्फर- एमएच-35एजे-3213, ओडी-23-एल-4944, एमपी-22-जेसी-3510 तथा एमपी-28-एच-4427 को जप्त कर थाना लालबर्रा परिसर में सुरक्षार्थ रखा गया है। निर्देश के उल्लंघनकर्ता सईद हनीफ खान निवासी बोरी बरघाट, सईद अब्दूल जफ्फार निवासी सिवनी, देवेंद्र लक्ष्मीप्रसाद निवासी बरघाट तथा सुंदरलाल चम्पतलाल अहाने निवासी ओमठ छपारा के विरूद्ध खनिज नियमों के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

दिसंबर और जनवरी में घूमने जाने वाले यात्रियों का ट्रेन बिगाड़ेगी खेल.

The train will disrupt the plans of travelers going on vacation in December and January. कई रूटों पर रेलवे लगातार कर रहा ट्रेनों को निरस्त भोपाल। पमरे जोन व भोपाल रेल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों को रेलवे की ओर से लगातार कैंसिल किया जा रहा है। भोपाल से ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की यात्रा मुश्किलों भरी हो सकती है। यदि आप दिसंबर और जनवरी में ट्रेन से घूमने जाने की योजना बना रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएं। दिसंबर अंत और जनवरी में ट्रेनों को रेलवे एक के बाद एक कर रद करने जा रहा है। रेलवे ने इन दिनों पटरियों की मरम्मत का काम तेज कर दिया है । तो वहीं नई परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार भी बढ़ाई जा रही है, ताकि लोकसभा चुनाव तक अटकी रेल परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। इस वजह से कई ट्रेनों को रद कर पटरियों पर काम करने की योजना है। रिजर्वेशन कराने से डर रहे यात्रीऐसे में दिसंबर व जनवरी में बाहर घूमने जाने वाले यात्रियों को अब ट्रेन में सफर के लिए रिजर्वेशन कराने वाले यात्री डर रहे है। दरअसल यात्रियों को लग रहा है रिजर्वेशन कराने के बाद यात्रा वाली तारीख पर अगर रेलवे ने ट्रेन निरस्त कर दी। तो सारी प्लानिंग बेकार हो जाएगी। बाहर यानी जिस जगह जाना है। वहां की कई होटल आदि की बुकिंग में घटा हो सकता है। तो वहीं कई ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बढ़ रही है। इसके चलते कई यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं होने के चलते भी परेशान होना पड़ रहा है। अब लखनऊ मंडल में चल रहे कार्यहाल ही में झांसी और भोपाल मंडल ने कई ट्रेनों को रद किया था और अब मथुरा स्टेशन पर जनवरी से काम शुरू होने जा रहा है। इस वजह से ट्रेनों को बड़ी संख्या में रद किया जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल मंडल व पमरे जोन से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में देखने को मिलेगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार इस वजह से लगभग 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित होंगी और लगभग इनमें यात्रा करने वाले 20 हजार से ज्यादा यात्रियों का सफर मुश्किलों भरा हो सकता है।जनवरी व फरवरी में यह ट्रेन रहेगी निरस्त 21,24,26,28,31 जनवरी और 02, 04 फरवरी तक को गाडी संख्या 12121 जबलपुर- निजामुद्दीन एक्सप्रेस रद्द रहेगी। 22,25,27,29 जनवरी से 01,03,05 फरवरी तक को निजामुद्दीन से रवाना होने वाली गाडी संख्या 12122 निजामुद्दीन- जबलपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी। इसके अलावा अन्य ट्रेनें भी निरस्त रहेगी।

भोपाल स्टेशन पर बनी 6 करोड़ की बिल्डिंग में यात्रियों को नहीं मिल रही सुविधाएं.

The building worth 60 million at Bhopal station lacks facilities for passengers  तीन साल पहले बनी थी बिल्डिंग, न फूड कोर्ट, न ही पैसेंजर लाउंज भोपाल। भोपाल स्टेशन पर करीब साढ़े तीन साल पहले करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से सेंकड एंट्री पर प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर नई बिल्डिंग बनाई थी। उस समय बिल्डिंग में यात्रियों को पैसेंजर लाउंज, फूड कोर्ट और बजट होटल जैसी शुरू होनी थी, ताकि सफर के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके। लेकिन अभी तक यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिल सकी। तो वहीं रानीकमलापति स्टेशन पर आए दिन यात्रियों को कई नई सुविधा दी जा रही है।  उल्लेखनीय है कि स्टेशन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर वीआईपी लाउंज, फर्स्ट फ्लोर पर फूड कोर्ट और सेकंड फ्लोर पर बजट होटल के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी के बीच करीब 8 साल पहले अनुबंध हुआ था। लेकिन अब आईआरसीटीसी पीछे हट गया। इसके बाद पिछले साल फिर से आईआरसीटीसी के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। जिसके बाद सहमति बन गई थी। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका। इस वजह से यह सब सुविधा यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। तो वहीं भोपाल रेल मंडल के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे है।  आईआरसीटीसी ने पीछे खींचे हाथ  रेल सूत्रों के अनुसार आईआरसीटीसी द्वारा इस बिल्डिंग का उपयोग इसलिए नहीं किया जा रहा है कि यहां यात्रियों की संख्या कम है। यहां पर सिर्फ 8 से 10 ट्रेनें रुकती हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर ज्यादा ट्रेनें रुकने से वहां यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा नहीं होगा। इस बिल्डिंग को आईआरसीटीसी नहीं ले रहा है। तो वहीं आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जितनी जगह की जरूरत थी रेलवे उससे ज्यादा जगह देना चाहता है। इसलिए मामला अटका हुआ है। उधर, रेल अधिकारियों का कहना है कि छह नंबर की नई बिल्डिंग पर यात्रियों को सुविधा को बढ़ाया गया है। आने वाले दिनों में ओर सुविधा बढ़ाई जाएगी। इस दिशा में नए तरीके से योजना पर काम चल रहा है। 132 ट्रेनें भोपाल स्टेशन पर रोजाना रुकती हैं। सबसे ज्यादा 46 ट्रेनें प्लेटफॉर्म-1 की ओर रुकती हैंसबसे कम 08 से10 ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर रुकती हैं।

नया जोश भरने की कवायद – नमो के जरिए 100 दिनों में पीएम से मिल सकेंगे भाजपा कार्यकर्ता

In the first 100 days, BJP workers can meet the Prime Minister through a renewed vigor strategy. क्यू आर कोड को स्कैन करके चैलेंज को एक्सेप्ट कर सकते हैं, भाजपा के कार्यकर्ता फील्ड पर उतरेंगे  उदित नारायण, ग्रुप एडिटर सहारा समाचार   भोपाल। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा लोकसभा चुनाव में जुट गई है। अपने कार्यकतार्ओं को हमेशा काम में लगाए रखने वाली भाजपा ने अब पार्टी वर्कर्स को लोकसभा के लिए 100 दिन का चैलेंज दिया है। इस चैलेंज के तहत कार्यकतार्ओं को भारतीय जनता पार्टी की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके साथ ही जिन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें इनका लाभ दिलवाना है।इसकी मॉनिटरिंग के लिए नमो एप का भी उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पोस्टर्स भी हर भाजपा कार्यालय में लगवा दिए गए हैं।  कार्यकतार्ओं में नया जोश भरने के लिए भाजपा उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का मौका देने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने 100 डे का एक चैलेंज तैयार किया है। इस चैलेंज को पूरा करने पर हर हफ्ते और महीने में पांच विजेताओं को चुना जाएगा। इन्हें आकर्षक पुरस्कार भी दिया जाएगा। इसके लिए कार्यकर्ता क्यू आर कोड को स्कैन करके इस चैलेंज को एक्सेप्ट कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे भाजपा के कार्यकर्ता फील्ड पर उतरेंगे। खास बात है कि बेहतर काम करने वाले कार्यकर्ता को पीएम मोदी से भी मिलवाया जाएगा।  प्रदेश की 29 सीटों पर नजर – भारतीय जनता पार्टी की अब मध्यप्रदेश की 29 सीटों पर नजर है। हालांकि, अभी भाजपा के पास इनमे से 28 सीटें हैं। सिर्फ एक सीट छिंदवाड़ा ही कांग्रेस के हाथ में हैं। छिंदवाड़ा को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का गढ़ माना जाता है। वर्तमान में नाथ के बेटे नकुल यहां से सांसद हैं। इस बार के विधानसभा के चुनाव में भी कांग्रेस ने छिंदवाड़ा जिले की सभी सातों सीटों पर कब्जा किया है। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद यहां पर मोर्चा संभालने की बात कह रहे हैं।

नये वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री फिर रोकी.

Registration of the three floors sold in the new government building has been halted again. उदित नारायणभोपाल। राजधानी के तुलसी नगर में बने नये वन भवन के तीन फ्लोर को बेचे जाने के बाद इसकी रजिस्ट्री एक बार फिर रुक गई है। दरअसल इस भवन के तीन फ्लोर कर्मकार कल्याण मंडल, इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं स्टेट माईनिंग कारपोरेशन को करीब 60 करोड़ रुपये में बेचे गये थे ताकि वन भवन को बनाने में लगी भारी भरकम लागत 182 करोड़ रुपये की कुछ भरपाई हो सके। लेकिन 8 अगस्त 2023 को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त नये भवन का लोकार्पण किया था तब उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अगर नवीन वन भवन में जगह की कमी पड़ती है तो पूरा परिसर वन भवन को दे दिया जायेगा। दरअसल सीएम को बताया गया था कि जगह की कमी होने से वन विभाग का जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन एवं इको पर्यटन बोर्ड नये वन भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है। इसी कारण से सीएम ने उक्त घोषणा कर दी थी। लेकिन सीएम की यह घोषणा तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने सीएम घोषणा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने दी। इस पर लोक परिसम्पत्ति विभाग जिसने उक्त तीनों फ्लोर की नीलामी कराई थी, ने वन विभाग को पत्र लिख कर कहा है कि वह वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री करा दे। वन विभाग ने भी वन बल प्रमुख को रजिस्ट्री कराने के लिये पत्र भेज दिया। लेकिन वन बल प्रमुख रमेश गुप्ता ने इनकी रजिस्ट्री यह कहकर रुकवा दी है कि वे उच्च स्तर पर बातचीत कर इन बेचे गये तीन फ्लोर को वापस वन मुख्यालय को दिलवायेंगे। नई सरकार के गठन होने पर यह उच्च स्तरीय बातचीत हो सकेगी।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet