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अडानी ग्रुप के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में तेजी

नई दिल्ली ससंद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। इसमें विपक्ष दल अडानी ग्रुप के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों पर चर्चा के लिए सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है। इस बीच अडानी ग्रुप के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में तेजी दिख रही है। बीएसई पर ग्रुप के शेयरों में 7% तक की उछाल आई है। ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 4% बढ़कर 2,319.90 रुपये पर पहुंच गए। इसी तरह अडानी एनर्जी के शेयर लगभग 7% बढ़कर 694.15 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गए। अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर के शेयरों में भी 4.6%, अडानी ग्रीन एनर्जी में 6.4% और अडानी टोटल गैस के शेयरों में 5% की तेजी आई। इसी तरह अडानी विल्मर, एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स जैसी अन्य कंपनियों के शेयरों में 2-3% के बीच उछाल आया। कांग्रेस सांसदों ने अडानी ग्रुप पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सोमवार को संसद की बैठक में सबसे पहले अडानी मुद्दे को उठाया जाए। उन्होंने कहा कि यह देश के आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपनी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल सौदे पाने के लिए राजनेताओं और नौकरशाहों को कथित तौर पर 2,300 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। ठोस आधार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करने का निर्णय बिजनस एडवाइजरी कमेटीज पर निर्भर करता है और इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की मंजूरी की आवश्यकता होती है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और अन्य पर अमेरिकी अभियोजकों ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अडानी के पास इसे चुनौती देने के लिए एक ठोस आधार है।

पुनीत गोयनका ने आगामी सालाना आम बैठक में इस पद पर पुनर्नियुक्ति से भी खुद को किया अलग

नई दिल्ली पिछले सप्ताह प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा देने वाले जी एंटरटेनमेंट के सीईओ पुनीत गोयनका ने आगामी सालाना आम बैठक (एजीएम) में इस पद पर पुनर्नियुक्ति से भी खुद को अलग कर लिया है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में यह जानकारी दी। जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने शेयर बाजार को गोयनका का त्यागपत्र साझा करते हुए कहा कि वह कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए अपनी सहमति वापस ले रहे हैं, जैसा कि आगामी वार्षिक आम बैठक के नोटिस में प्रस्तावित है। 2029 तक के लिए मिली थी मंजूरी इससे पहले 18 अक्टूबर, 2024 को जी एंटरटेनमेंट के निदेशक मंडल ने एक जनवरी, 2025 से 31 दिसंबर, 2029 तक प्रभावी पांच साल के कार्यकाल के लिए गोयनका की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ के रूप में गोयनका का वर्तमान कार्यकाल 2024 के अंत में समाप्त होने वाला था। 28 नवंबर की बैठक में मिलने वाली थी मंजूरी पुनीत गोयनका की पुनर्नियुक्ति आगामी एजीएम में शेयरधारकों की मंजूरी पर आधारित थी, जो 28 नवंबर को होने वाली है। हालांकि, 18 नवंबर को मीडिया दिग्गज सुभाष चंद्रा के बेटे पुनीत गोयनका ने जी एंटरटेनमेंट के प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले कंपनी द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, जी एंटरटेनमेंट के निदेशक मंडल ने गोयनका की पुनर्नियुक्ति के लिए उनके प्रदर्शन लक्ष्यों को बढ़ा दिया था। सेबी ने लगाई थी रोक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जून 2023 में पुनीत गोयनका और उनके पिता तथा एस्सेल समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा को एस्सेल समूह की कंपनियों की परिसंपत्तियों की कथित रूप से हेराफेरी को लेकर किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में प्रमुख पद लेने से रोक दिया था। हालांकि, बाद में इस आदेश को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती दी गई, जिसने 30 अक्टूबर, 2023 को सेबी द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया था।

भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखी, तेजी के साथ हुआ बंद

नई दिल्ली अडानी समूह के स्टॉक्स में निचले लेवल से लौटी खरीदारी, आईटी स्टॉक्स और रिलायंस के शेयर में जोरदार तेजी के चलते भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखी गई। सेंसेक्स 1961 अंक की तेजी के साथ 79,117 और निफ्टी में भी 557 अंक की तेजी रही, ये 23,907 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 2000 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 79,160 और निफ्टी में भी 600 अंक की तेजी रही, ये 23,950 के स्तर पर था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में तेजी और 2 में गिरावट रही। निफ्टी के 50 शेयरों में से 47 में तेजी और 3 में गिरावट है। NSE के सभी सेक्टोरल इंडेक्स तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे। अडानी ग्रुप के शेयर्स में लौटी तेजी अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगने के बाद केन्या सरकार ने गुरुवार को अडानी ग्रुप के साथ की गईं सभी डील रद्द करने की घोषणा की। इसका असर अडानी ग्रुप के शेयर्स में देखने में भी देखने को मिला। हालांकि, अब अडानी ग्रुप के शेयर्स में रिकवरी देखने को मिली।  

शेयर बाजार में बढ़त पर ताजा विवाद से अदाणी के शेयर और टूटे; सेंसेक्स 6 00 अंक चढ़ा, निफ्टी 23450 पार

मुंबई अडानी ग्रुप के चेयरमैन अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) को लेकर अमेरिका में जांच की खबर का असर कल शेयर बाजार पर दिखाई दिया था और दिनभर सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे. लेकिन सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर मार्केट में हरियाली नजर आ रही है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex 600 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 180 अंक की उछाल के साथ दौड़ लगा रहा है. इस बीच Adani Stocks आज भी लाल-लाल नजर आ रहे हैं. सेंसेक्स ने 600 की लगाई छलांग शुक्रवार को बीएसई का सेंसेक्स (BSE Sensex) कल की गिरावट के बाद जोरदार तेजी के साथ खुला. सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद 77,155 की तुलना में करीब 200 अंक की तेजी लेते हुए 77,349.74 के लेवल पर कारोबार शुरू किया और कुछ ही मिनटों में जोरदार रफ्तार पकड़ते हुए 608 अंक चढ़कर 77,764 के लेवल पर पहुंच गया. वहीं दूसरी ओर NSE Nifty भी तूफानी रफ्तार पकड़ते हुए 181.30 अंक की तेजी लेकर 23,541.10 के लेवल पर पहुंच गया. अडानी के शेयरों में आज भी बड़ी गिरावट अब बात कर लेते हैं अरबपति गौतम अडानी की शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के बारे में, जिनमें अमेरिका में जांच की खबर के बाद कल कोहराम मच गया था. तो बता दें कि शुक्रवार को भी Adani Stocks लाल निशान पर ओपन हुए. फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर (Adani Enet Share) गिरावट के साथ खुला और ये 2 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहा है. इसके अलावा जिस कंपनी को लेकर US में जांच हो रही है, उस Adani Green Energy का स्टॉक 8.76 फीसदी फिसलकर ट्रेड कर रहा है. Adani Ports Share (4.09%), Adani Power Share (3.56%), Adani Total Gas (3.63%), Adani Energy Solutions (5.72%) और Adani Wilmar Share (2.34%), की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर ACC Share, Ambuja Cement Share और NDTV के शेयर में मामूली तेजी देखने को मिल रही है. ग्रीन जोन में ओपन हुए 1462 शेयर शुक्रवार को शेयर बाजार में तेजी के बीच करीब 1462 कंपनियों के शेयरों ने बढ़त के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुए, जबकि 889 शेयर ऐसे रहे, जिनकी शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई. वहीं 119 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. बैंकिंग शेयरों ने दिया बाजार को सपोर्ट गुरुवार की गिरावट के बाद सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सपोर्ट किया. ICICI Bank Share, SBI Share, IndusInd Share करीब 1-2 फीसदी तक उछले. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में शामिल SJVN Share (4.54%), Godrej Properties Share (3.42%), Paytm Share (2.80%) तक चढ़कर कारोबार कर रहा था.  स्मॉलकैप कंपनियों में EKI Share 9.98%, Kopran Share 8.29% और DCAL Share 6.92% उछलकर कारोबार कर रहा था. कल बाजार में मची थी भगदड़ इससे पहले बीते कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार (Stock Market) में भगदड़ का माहौल देखने को मिला था. दिनभर गिरावट में कारोबार करने के बाद 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 422 अंक की गिरावट लेकर बंद हुआ था, तो वहीं निफ्टी भी 171 अंक फिसलकर क्लोज हुआ था. इस बीच Adani Shares 20 फीसदी तक फिसल गए थे और अडानी ग्रुप के मार्केट कैप में (Adani Group Market Cap) 2.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई थी.

अडानी ग्रुप ने कहा, हमने कानूनों और नियमों का पूरी तरह से पालन किया है, आरोप बिल्कुल निराधार और झूठे हैं

नई दिल्ली गौतम अडानी और उनके समूह पर अमेरिकी अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए जाने के बाद अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ग्रुप ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि सभी आरोप बिल्कुल निराधार और झूठे हैं। अडानी ग्रुप का बयान अडानी ग्रुप ने कहा, “हमने हमेशा सभी देशों के कानूनों और नियमों का पूरी तरह से पालन किया है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और हमारे खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है। हमारी प्राथमिकता हमेशा से पारदर्शिता और कानून के प्रति सम्मान रही है।” ग्रुप ने यह भी कहा कि वे इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और सच्चाई सामने लाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। बाजार में गिरावट का असर हालांकि अडानी ग्रुप ने आरोपों को खारिज किया है लेकिन इन खबरों का असर बाजार पर साफ नजर आया। ग्रुप के शेयरों में गुरुवार को 10% से 20% तक की गिरावट देखी गई।

1 जनवरी से RoW का नया नियम होगा लागू, Jio, Airtel, Voda, BSNL पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली सरकार की तरफ से टेलीकॉम के नियमों में समय समय पर बदलाव किया जाता है। टेलीकॉम एक्ट में कुछ नए नियमों को जगह दी गई थी। अब कहा गया है कि इसे फॉलो भी करना चाहिए। सभी राज्यों से इन नियमों को सख्ती से फॉलो करने के लिए कहा गया है। इसे राइट ऑफ वे (RoW) रूल का नाम दिया गया था। हर राज्य की तरफ से इसे एडॉप्ट करने के लिए कहा गया था और चार्ज में छूट भी अलग-अलग राज्य को दी गई थी। 30 नवंबर तक मांगा है जवाब रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नया नियम 1 जनवरी से लागू होने जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर और टेलीकॉम टॉवर इंस्टॉल करने में इसे बूस्ट किया जाएगा। टेलीकॉम ऑपरेटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स को भी इससे काफी मदद मिलने वाली है। DoT सचिव नीरज मित्तल ने इस मामले पर सभी राज्यों के सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि सभी 30 नवंबर तक सुनिश्चित करें। 1 जनवरी से RoW पोर्टल के नए नियमों को लागू किया जाएगा। राज्य को मिलेगी ज्यादा पावर मित्तल ने लिखा, ‘नया नियम जनवरी 2025 से लागू हो जाना चाहिए। मौजूदा RoW नियम यहीं पर थम जाना चाहिए।’ यानी अब नया नियम लागू किया जाएगा। नया नियम आने के बाद राज्यों को ज्यादा पावर दी जाएगी कि वह खुद इस मामले पर अथॉरिटी को सफाई दे सकते हैं। क्या है RoW नियम? RoW नियम को अगर साधारण शब्दों में समझें तो ये वही नियम है जो पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी पर टॉवर या टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के मानक तय करता है। इसकी मदद से ही सरकार टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न करने पर फोकस करती है। प्रॉपर्टी के मालिक और टेलीकॉम प्रोवाइडर RoW नियमों को ही फॉलो करते हैं। क्योंकि इसके तहत पब्लिक सेफ्टी और पारदर्शिता को काफी महत्व दिया जाता है। 1 जनवरी, 2025 से नया नियम आ रहा है जिसके बाद कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 5G पर होगा पूरा फोकस RoW के नए नियमों में 5G पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अब टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से इंस्टॉल किया जा रहा है। फास्ट नेटवर्क के लिए ये नियम काफी पॉजिटिव साउंड करता है क्योंकि 5G के लिए नए टॉवर इंस्टॉल करने पर फोकस किया जाएगा। इसमें अधिकतम लिमिट को भी फिक्स किया जाएगा।

अडाणी 2 अरब डॉलर के रिश्वत कांड में फंसे! पिछले हफ्ते ही अमेरिका में इन्वेस्टमेंट करने का किया था ऐलान, वारंट जारी

नई दिल्ली  अडानी ग्रुप के चेयरमैन और देश के दूसरे सबसे अमीर उद्योगपति गौतम अडानी बड़ी मुसीबत में घिरते नजर आ रहे हैं। अडानी और सात अन्य लोगों पर अमेरिका में अरबों डॉलर की रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। इस मामले में अमेरिका की कोर्ट में सुनवाई हुई। अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। इस मामले में नाम आने के बाद अडानी ग्रुप ने अमेरिका में 600 मिलियन डॉलर का बॉन्ड रद्द कर दिया। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार अभियोजकों ने बुधवार को आरोपों की घोषणा की। इसमें आरोप लगाया गया है कि अडानी ग्रुप ने सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी। अडानी ने बुधवार को ग्रीन एनर्जी में निवेश की घोषणा की थी। यह घोषणा तब की गई जब कंपनी के अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप को उनकी चुनावी जीत पर बधाई दी। ट्रंप ने किया था वादा रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ने निवेश की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप को उनकी चुनावी जीत पर बधाई भी दी। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने ऊर्जा कंपनियों के लिए नियमों को सरल बनाने का वादा किया है। इससे उनके लिए संघीय भूमि पर ड्रिलिंग करना और पाइपलाइनों का निर्माण करना आसान हो जाएगा। क्या है अडानी का मामला? अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग की ओर से बनाए गए मामले के अनुसार, गौतम अडानी पर कथित रूप से अमेरिकी निवेशकों को धोखा देने और अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है। अडानी और अन्यों पर आरोप है कि उन्होंने झूठे और भ्रामक बयानों से अमेरिकी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों से फंड लिया। इसके बाद उस रकम का इस्तेमाल रिश्वतखोरी में किया। अभियोग में कहा गया है कि अडानी और अन्य ने लगभग 265 मिलियन डॉलर (करीब 2237 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। उन्हें उम्मीद थी कि इन कॉन्ट्रैक्ट से दो दशकों में 2 बिलियन डॉलर (करीब 16882 करोड़ रुपये) का मुनाफा होगा। अभियोक्ताओं का दावा है कि इस योजना में शामिल कुछ लोगों ने गौतम अडानी को संदर्भित करने के लिए ‘न्यूमेरो यूनो’ और ‘द बिग मैन’ जैसे कोड नामों का इस्तेमाल किया। भतीजे पर भी लगा आरोप अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और एक अन्य कार्यकारी विनीत जैन ने अडानी ग्रीन एनर्जी के लिए 3 बिलियन डॉलर से अधिक के लोन और बॉन्ड हासिल करने के लिए ऋणदाताओं और निवेशकों से रिश्वत की बात छिपाई। ये आरोप विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, जो विदेशी व्यापार सौदों में रिश्वतखोरी के खिलाफ एक अमेरिकी कानून है। जारी हुए गिरफ्तारी वारंट रिपोर्ट में कहा गया है कि गौतम अडानी और सागर अडानी के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने दोनों व्यक्तियों और एक अन्य व्यक्ति सिरिल कैबनेस के खिलाफ संबंधित नागरिक आरोप दायर किए हैं। हालांकि अमेरिकी सरकार ने अभी तक अडानी और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ विशिष्ट आरोपों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है। अभियोग से कुछ घंटे पहले ही बॉन्ड बेचे अभियोग की खबर से कुछ घंटे पहले ही अडानी ग्रुप की एक इकाई ने 600 मिलियन डॉलर की पेशकश के लिए अमेरिकी कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में प्रवेश किया। इस पेशकश को 3 गुना से अधिक ओवरसब्सक्राइब किया गया। बाद में इन बॉन्ड को बेच भी रद्द भी कर दिया गया। अडानी ने एक महीने पहले भी इसी तरह की पेशकश की थी। हालांकि, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूल्य निर्धारण को लेकर निवेशकों के विरोध के बाद उस पेशकश को स्थगित करना पड़ा। प्रतिवादियों के नामों और विवरणों की पूरी सूची अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय (न्यूयॉर्क) के अनुसार, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के मामले में शामिल लोग हैं: 1. गौतम एस. अदानी उम्र: 62, भारत 2. सागर एस. अडानी उम्र: 30, भारत 3. विनीत एस. जैन उम्र: 53, भारत 4. रंजीत गुप्ता उम्र: 54, भारत 5. सिरिल कैबनेस उम्र: 50, फ्रांस/ऑस्ट्रेलिया 6. सौरभ अग्रवाल उम्र: 48, भारत 7. दीपक मल्होत्रा उम्र: 45, भारत 8. रूपेश अग्रवाल उम्र: 50, भारत

अमेरिका और यूरोप को कर्ज कम करना जरूरी, भविष्य में आ सकता है संकट: रघुराम राजन

नई दिल्ली  मशहूर अर्थशास्त्री और भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अमेरिका समेत उन सभी देशों को ऐसी सलाह दी है, जिसे अगर नहीं माना गया तो भविष्य में गंभीर खतरे हो सकते हैं. उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ते हुए सार्वजनिक कर्ज को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. राजन का कहा है कि लगातार बढ़ता हुआ कर्ज अगले आपातकाल के समय में दुनिया को बेहद कमजोर बना सकता है. यह चेतावनी वैसे तो उन देशों के लिए जो भारी-भरकम कर्ज उठाकर अपनी अर्थव्यवस्था चला रहे हैं. मुख्य रूप से अमेरिका और चीन इसमें शामिल हैं. लेकिन, खतरा भारत जैसे उन देशों पर भी होगा, जिनका बिजनेस अमेरिका और चीन जैसे देशों के साथ चलता है. अमेरिका में होने वाली हर गतिविधि का असर भारत पर पड़ता है, तो चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. रघुराम राजन ने ‘कर्ज लेकर घी पीने’ वाले देशों को उनके बढ़ते सार्वजनिक ऋण पर नज़र डालने का आग्रह किया है. दुनिया में बढ़ती महामारियों के खतरे के बीच एक बड़े अर्थशास्त्री का ऐसा कहना मायने रखता है. दरअसल, बड़े अर्थशास्त्री पैसे और बजट के बारे में लम्बी दृष्टि रखते हैं और भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं. राजन ने कहा, “हमने वैश्विक वित्तीय संकट और महामारी देखी है. आने वाले समय में ऐसी महामारियां अधिक नियमित हो सकती हैं. इसलिए कर्ज के बढ़ते स्तर को नजरअंदाज करना खतरनाक है.” राजन ने रोम में वार्षिक Bancor Prize समारोह के दौरान दिए गए भाषण में उन्होंने कई अहम बातों का जिक्र किया. अपने भाषण में उन्होंने कहा, दुनिया को विखंडन (fragmentation) से बचाने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं (multilateral institutions) में सुधार करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सर्विस ट्रेड, जलवायु कार्य (climate action), और अन्य नए क्षेत्रों में व्यापार के रास्ते खोलने से समस्याओं को हल किया जा सकता है. अमेरिका को लेकर बड़ी चेतावनी अपने भाषण के बाद पत्रकारों से बातचीत में अमेरिका का जिक्र करते हुए रघुराम राजन कहा कि वहां का सार्वजनिक ऋण तेजी से बढ़ रहा है, जो उसे वित्तीय रूप से असुरक्षित बना रहा है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हालिया अनुमानों के अनुसार, अमेरिका का कर्ज लगातार बढ़ने की राह पर है. उन्होंने आगाह किया कि यह सिर्फ अमेरिका की समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के लिए भी चेतावनी है. वैश्विक ऋण की चौंकाने वाली तस्वीर आईएमएफ के अनुसार, 2024 के अंत तक वैश्विक सार्वजनिक ऋण लगभग 100 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 93% है. अमेरिका और चीन जैसे देशों का इसमें प्रमुख योगदान है. राजन ने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति (inflation) की धीमी दर और गिरते ब्याज दरें (interest rates) देशों को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने का अवसर दे रही हैं. लेकिन, इसके बावजूद, अधिकतर सरकारों में इसे लेकर कोई तत्परता नहीं दिख रही है. कर्ज के खतरों से बचने की जरूरत राजन ने जोर देकर कहा कि कर्ज को कम करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति के लिए एक सेफ्टी कुशन बनाया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि अत्यधिक कर्ज वाले देश एक-दूसरे की मदद करने में असमर्थ हो जाते हैं, जिससे दुनिया के लिए एक और खतरा खड़ा हो सकता है. किस देश पर कितना कर्ज अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका पर अपने अपनी जीडीपी का 121 फीसदी कर्ज है. मतलब वह गले तक नहीं डूबा है, बल्कि पानी उसके सिर के ऊपर तक जा चुका है. दूसरे नंबर पर कनाडा है, जिस पर अपनी जीडीपी का 106 फीसदी कर्ज है. चीन ने अपनी जीडीपी की तुलना में 90.1 फीसदी कर्ज उठा रखा है. भारत पर यह प्रतिशत 83.1 फीसदी है. सबसे अधिक कर्ज सूडान पर है, जिसने अपनी जीडीपी की तुलना में 344.4 फीसदी कर्ज लिया हुआ है. फ्रांस, स्पेन और इंग्लैंड पर भी जीडीपी के 100 फीसदी से ज्यादा कर्ज है.

तेजी से बाजार चमका, सेंसेक्स ने लगाई 800 अंक की छलांग; M&M बना टॉप गेनर

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में बीते कुछ दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को थमता नजर आया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) जोरदार उछाल के साथ ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 828 अंक तक चढ़कर 78000 के पार पहुंच गया. तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) ने भी 249 अंकों की तेजी लेते हुए कारोबार करता नजर आया. इससे पहले बीते कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुए थे. बाजार में तेजी के बीच NTPC से लेकर Tata Motors तक के शेयर तूफानी तेजी के भागते हुए दिखाई दिए.   सेंसेक्स-निफ्टी में तूफानी तेजी मंगलवार को हरे निशान पर खुले शेयर बाजार (Share Market) में बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,339.01 से करीब 200 अंक की तेजी लेते हुए 77,548 के लेवल पर ओपन हुआ. इसके बाद कुछ ही मिनटों में इसने जोरदार रफ्तार पकड़ ली और 769.52 अंक की उछाल के साथ 78,108.58 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई का इंडेक्स निफ्टी भी तेज रफ्तार से भागा. NSE Nifty ने अपने पिछले बंद 23,453.80 की तुलना में चढ़कर 23,529.55 के स्तर पर कारोबार शुरू किया और फिर रफ्तार बढ़ाते हुए 237.05 अंक की उछाल के साथ 23,690 पर ट्रेड करता दिखाई दिया. दोनों इंडेक्स में तेजी और भी बढ़ती गई और सेंसेक्स 828 अंक, जबकि निफ्टी 249 अंक चढ़ गया. सोमवार को टूटा था बाजार इससे पहले बीते कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार (Stock Market) गिरावट के साथ बंद हुआ था. हालांकि, दोनों इंडेक्स ने हरे निशान पर तेजी के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन कुछ ही मिनटों में इसकी रफ्तार पर ब्रेक लग गया और मार्केट क्लोज होने पर सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex-Nifty) गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुए थे. BSE का सेंसेक्स 241.30 अंक की गिरावट लेकर 77,339.01 के लेवल पर बंद हुआ. वहीं NSE Nifty 78.90 अंक टूटकर 23,453.80 के स्तर पर बंद हुआ था. 1789 शेयरों में जोरदार तेजी शेयर बाजार में बम-बम के बीच मंगलवार को 1789 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत की, जबकि 587 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ खुले. वहीं 94 कंपनियां ऐसी थी, जिनके शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. निफ्टी पर टाटा ग्रुप की कंपनी Trent, BPCL, Infosys, NTPC और Adani Ports के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी आई. तो वहीं Dr Reddy’s Labs, Shriram Finance, SBI Life Insurance, Asian Paints और JSW Steel के शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. सबसे ज्यादा भागे ये शेयर खबर लिखे जाने तक BSE की 30 में से 29 कंपनियों के शेयर तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. इनमें सबसे ज्यादा रफ्तार पकड़ने वाले शेयरों की बात करें, तो लार्ज कैप में M&M Share (2.75%), Tata Motors Share (2.27%), Adani Ports (2.11%), TCS (1.80%) शामिल रहे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल Zeel Share (6.23%), Suzlon Share (4.87%), Delhivery Share (3.74%) और Federal Bank Share (3.57%), जबकि Mazgaon Doch Share (3.48%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा था.वहीं स्मॉलकैप कंपनियों में सबसे ज्यादा रफ्तार PGEL Share ने पकड़ी और ये 10.94% तक उछल गया.

भारत ने सबसे तेजी से बढ़ती जी-20 अर्थव्यवस्था का ताज हासिल

नई दिल्ली भारत ने जी20 देशों में जीडीपी ग्रोथ रेट को टॉप किया है। भारत का 2024 में अनुमानित ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत सबसे हाई दर्ज किया गया है। देश की यह उपलब्धि मजबूत अर्थव्यवस्था और वैश्विक चुनौतियों के बीच एक शक्तिशाली विकास को प्रदर्शित करता है। क्या है जी20 देशों का प्रोजेक्टेड जीडीपी ग्रोथ रेट?     भारत- 7 प्रतिशत     इंडोनेशिया-5 प्रतिशत     चीन- 4.8 प्रतिशत     रूस-3.6 प्रतिशत     ब्राजील-3 प्रतिशत     अफ्रीका-3 प्रतिशत     तुर्किए-3 प्रतिशत     यूएसए-2.8 प्रतिशत     कोरिया-2.5 प्रतिशत     मेक्सिको-1.5 प्रतिशत     सऊदी अरब-1.5 प्रतिशत     कनाडा-1.3 प्रतिशत     आस्ट्रेलिया-1.2 प्रतिशत     फ्रांस-1.1 प्रतिशत     यूरोपियन यूनियन-1.1 प्रतिशत     यूके-1.1 प्रतिशत     साउथ अफ्रीका-1.1 प्रतिशत     इटली-0.7 प्रतिशत     जापान-0.3 प्रतिशत     जर्मनी-00     अर्जेंटिना- माइनस3.5 प्रतिशत

ईपीएफओ ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया: डॉ. मनसुख मांडविया

नई दिल्ली केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया है। राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ की परिवर्तनकारी यात्रा की सराहना की। उन्होंने ईपीएफओ द्वारा अपने सदस्यों के विशाल कोष का प्रबंधन करने को भी सराहा और पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्री ने मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म, शिकायत प्रबंधन के लिए कुशल प्रणाली और सेवा वितरण के सदस्य केंद्रित मॉडल के कार्यान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया। डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ कर्मचारियों से संगठन के नारे “हम हैं ना” को अपनाने का आग्रह किया और उन्हें लोगों की सेवा करने के उनके कर्तव्य की प्रतिदिन याद दिलाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची सेवा का पैमाना कर्मचारियों द्वारा जरूरतमंद की समयानुसार मदद होती है। केंद्रीय मंत्री ने सेवाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पेंशन कवरेज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने ईपीएफओ के अधिकारियों और कर्मचारियों से सदस्यों की सेवा में ईमानदारी, समर्पण, सहानुभूति और व्यावसायिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “संगठन के भीतर निरंतर कौशल वृद्धि और क्षमता निर्माण के प्रयास उभरती चुनौतियों के अनुकूल होने और सेवा वितरण में सुधार के लिए सर्वोपरि हैं।” इस बीच, ईपीएफओ में योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 202-2023 में 6.85 करोड़ से 7.6 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 7.37 करोड़ हो गई है, जबकि इस अवधि के दौरान संगठन में योगदान देने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 6.6 प्रतिशत बढ़कर 7.66 लाख हो गई है। ईपीएफओ ने पिछले वर्ष के 3,390 करोड़ रुपये के इसी आंकड़े की तुलना में बकाया राशि की वसूली में 55.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी, जो 5,268 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में निपटाए गए दावों की संख्या में भी 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कार्यकारी समिति ने रिपोर्ट को केंद्रीय बोर्ड द्वारा अपनाने की सिफारिश की।  

गिरने लगे प्याज के दाम, जल्द और राहत की उम्मीद, खुदरा कीमत 67 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 63 रुपए हुई

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतों में मामूली गिरावट देखने को मिली है। इस सप्ताह प्याज की औसत खुदरा कीमत 67 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 63 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई। सरकार को उम्मीद है कि अगले 1-2 सप्ताह में कीमतों में और कमी आएगी। कीमतों में गिरावट के कारण राजस्थान के अलवर में प्याज की फसल लगभग तैयार हो गई है। हालांकि, दिवाली और छठ पर्व के दौरान खेतों में मजदूरों की कमी के कारण फसल की कटाई और ढुलाई में देरी हुई है। अब मजदूर धीरे-धीरे लौटने लगे हैं, जिससे लोकल प्याज की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। सरकारी सप्लाई में तेजी सरकारी सहकारी समितियां नैफेड और एनसीसीएफ ने प्याज की सप्लाई बढ़ा दी है। सरकार ने इस साल 4.75 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार किया है। पहले दिल्ली में प्याज की सप्लाई ट्रकों के जरिए होती थी लेकिन अब इसे मालगाड़ियों के माध्यम से भेजा जा रहा है, जिससे एक बार में लगभग 1400 टन प्याज दिल्ली पहुंच रही है। पिछले सप्ताह दो मालगाड़ियां प्याज लेकर दिल्ली पहुंची थीं और एक और मालगाड़ी नासिक से रवाना हो रही है। व्यापारियों का क्या कहना है आजादपुर मंडी में प्याज व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि कीमतों में स्थायी गिरावट आने में अभी एक या दो महीने का समय लग सकता है। मिश्रा के अनुसार, “इस साल प्याज की कीमतें असामान्य रूप से ऊंची बनी हुई हैं। हालांकि पिछले महीने मामूली गिरावट आई थी लेकिन कीमतें फिर से बढ़ गईं। खरीफ की फसल आने के बाद ही कीमतों में और कमी आने की संभावना है।”

प्रट्रोल-डीज़ल के दामों से लोगो जल्द मिल सकती है राहत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द ही लोगों को राहत मिलने वाली है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 फीसदी से अधिक घटकर 71 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई, जबकि डब्लूटीआई 2 फीसदी गिरकर 67 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इस हफ्ते के दौरान ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी और डब्लूटीआई 5 फीसदी गिरा है। यह गिरावट उस वक्त आई है जब ओपेक प्लस देशों ने लगातार दूसरी बार उत्पादन में कटौती की समयसीमा बढ़ाई है, यानी उत्पादन में कटौती के बावजूद तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत और पॉलिसी से संबंधित अनिश्चितताओं के कारण डॉलर में मजबूती आई है, वहीं अगले साल तेल सप्लाई में सरप्लस की संभावना है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव और बढ़ने का अनुमान है। इन सब घटनाक्रमों के बीच, घरेलू रिटेल प्राइस में कटौती की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। सितंबर में जब कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब थीं, तब पेट्रोलियम सचिव ने कहा था कि अगर ये स्तर बने रहते हैं, तो खुदरा कीमतों में कटौती की जा सकती है। हालांकि, बाद में मध्य-पूर्व संकट के कारण कीमतें फिर बढ़ गईं, लेकिन ब्रेंट क्रूड की कीमत कभी भी 82 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर नहीं पहुंची। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगले साल तेल सप्लाई में सरप्लस की स्थिति रह सकती है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में उत्पादन बढ़ने के कारण, 2025 में डिमांड के मुकाबले सप्लाई 10 लाख बैरल प्रति दिन अधिक हो सकती है। इस संकेत और चीन में डिमांड घटने की आशंका के बीच, यूबीएस ने अगले साल के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 87 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। 

पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, यह सब जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है: बाबा रामदेव

हरिद्वार योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है पतंजलि के स्वामित्व को लेकर बड़ी बात कही है। बाबा रामदेव ने साफ किया है कि लाखों करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक ना तो वह हैं और ना ही आचार्य बालकृष्ण। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में साइकलिंग करते हुए बाबा रामदेव ने कंपनी के मालिकाना हक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह पूरा साम्राज्य देश की जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है। उन्होंने यह भी कहा कि पंतजलि की संपत्ति पर कुछ लोगों की बुरी नजरें हैं। उन्होंने स्वदेशी कंपनी की यात्रा और इसके साम्राज्य को लेकर भी विस्तार से बात की। रामदेव ने कहा कि पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, लोगों की बुरी नजर है कि ये इतना बड़ा अनुष्ठान कैसे खड़ो हो गया और इसका मालिक कौन है। निरामयम, योग ग्राम, पतंजलि योगपीठ, पतंजलि गुरुकुलम, पतंजलि वेलनेस, विश्वद्यालय तक हमारे सैकड़ों सेवा के संस्थान हैं। इन कार्यों के साथ साथ बहुत दूर तक हम इस अभियान को लेकर ले गए। आज हालात यह है कि पूरे देश में 100 से बड़ी संस्थाएं हमने खड़ी कर दी। हमने योग को बहुत ऊंचाई प्रदान की है। इसका कुल मूल्यांकन है तो कैपिटल मार्केट एक लाख करोड़ से ज्यादा कर रहे हैं।’ बाबा रामदेव ने कहा कि एक लाख से अधिक जगहों पर हमारे योग शिक्षक भाई बहन योग के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें कम से कम 10 लाख से ज्यादा को यहां हमने ट्रेनिंग दी और 20-25 लाख को जिला स्तर पर दी गई। आज हमारे साथ कम से कम 25 लाख से ज्यादा वरिष्ठ योग शिक्षक सेवा दे रहे हैं। हमने शिक्षा की गुलामी, आर्थिक वैचारिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए पुरुषार्थ किया है। यह जो लाखों करोड़ का साम्राज्य है, यह ऐसे ही खड़ा नहीं हुआ है। इसमें बहुत पुरुषार्थ लगा है। रामदेव ने इस बात से इनकार किया कि पंतजलि के मालिक वह या आचार्य बालकृष्ण हैं। पतंजलि के साम्राज्य की विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, ‘लोगों की दृष्टि है कि इसका असली लाभार्थी कौन है। हमारा विश्वास है समृद्धि, सेवा के लिए है, समाज की भलाई के लिए है। स्वामी रामदेव इसका मालिक नहीं है, आचार्य बालकृष्ण इसका मालिक नहीं है। इसका मालिक है पूरा देश और देश के लोग। आज हमने हेल्थ, एजुकेशन, पुअर रिलीफ, नेचर, रिसर्च, चैरिटी के जो काम किए हैं उसका कुल्य मूल्यांकन किया जाए तो हमने लाखों करोड़ रुपया खर्च किया है, एक ही ध्येय है कि यह यात्रा ऐसी ही बढ़ती रही। 200 करोड़ रुपए तो इसकी रनिंग कॉस्ट है।’

शादी सीजन में राहत सोना-चांदी हुआ सस्ता ₹5000 तक गिर गया गोल्ड का भाव, चेक करें सिटी वाइज लेटेस्ट रेट

मुंबई शेयर बाजार (Share Market) में बीते कुछ दिनों से बड़ी गिरावट देखने को मिली है. गुरुवार को भी Sensex-Nifty ने तेज शुरुआत की और कुछ देर बाद फिर से गिरावट में कारोबार करता दिखाई दिया. लेकिन सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, सोना (Gold) भी लगातार टूट रहा है. Gold Rates में बीते 1 नवंबर से अब तक यानी दो हफ्ते में ही 5000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. आइए जानते हैं क्या है आज 24 कैरेट गोल्ड का ताजा रेट… लगातार सस्ता हो रहा सोना सोने की कीमतों में इस साल बड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिला है. एक ओर जहां मोदी 3.0 का पहला बजट (Union Budget 2024) पेश होने के दौरान सरकार की ओर से सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी हटाने का ऐलान किए जाने के बाद ये भरभराकर टूटा था, तो इसके अगले ही महीने से Gold Price ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए शिखर पर पहुंच गया. लेकिन बीते दो हफ्तों से Gold Rate में गिरावट दर्ज की गई है. गुरुवार को ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड के रेट में 700 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई. दो हफ्ते में इतना घटा Gold Rate एमसीएक्स (MCX) पर सोने की कीमतों में बीते दो हफ्ते में हुए बदलाव पर नजर डालें, तो महीने की शुरुआत में यानी 1 नवंबर को पांच दिसंबर की एक्सपायरी वाला Gold Rate 78,867 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, लेकिन गुरुवार 14 नवंबर 2024 मतलब आज ये गिरकर 73,750 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इस हिसाब से देखें तो सोने की कीमत में 1 से 14 नवंबर के दौरान 5,117 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की बड़ी गिरावट (Gold Price Fall) आई है. घरेलू मार्केट में क्या चल रहा सोने का भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के साथ ही घरेलू मार्केट में भी सोने की कीमत (Gold Price) में गिरावट देखने को मिली है. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोशियएसन (IBJA) की वेबसाइट के मुताबिक, बीते 1 नवंबर फाइन गोल्ड (999) की कीमत 81 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई थी, लेकिन अब इसका भाव कम होकर 75,260 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. मतलब 24 कैरेट गोल्ड के रेट में दो हफ्ते में 6000 रुपये स् ज्यादा की कमी आई है. अन्य क्वालिटी के गोल्ड की घरेलू मार्केट में कीमत पर नजर डालें तो… क्वालिटी        दाम (IBJA के मुताबिक) 24 कैरेट        75,260 रुपये/10 ग्राम 22 कैरेट        73,450 रुपये/10 ग्राम 20 कैरेट        66,980 रुपये/10 ग्राम 18 कैरेट        60,960 रुपये/10 ग्राम गौरतलब है कि घरेलू मार्केट में सोने का ये दाम 3 फीसदी जीएसटी और मेकिंग चार्ज के बिना हैं. मेकिंग चार्ज अलग-अलग होते हैं और इसके चलते देश के तमाम शहरों में सोने की कीमत में बदलाव देखने को मिलता है. Budget के बाद भरभराकर टूटा था सोना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बीते 23 जुलाई को संसद में मोदी 3.0 का बजट पेश करने के बाद अचानक सोने की कीमत में बड़ी गिरावट क्यों देखने को मिली थी? तो बता दें कि बजट में कई बदलावों का ऐलान हुआ था और इनमें से एक Gold-Silver से जुड़ा हुआ था. दरअसल, सरकार ने गोल्ड पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया और इसका असर बजट वाले दिन ही सोने के भाव में करीब 4000 रुपये की गिरावट के रूप में देखने को मिला था और ये गिरावट कई दिनों तक जारी रही थी. ऐसे चेक करें Gold की शुद्धता बता दें कि देश भर में सोने के आभूषणों की कीमत उत्पाद शुल्क, राज्यों के कर और मेकिंग चार्ज के कारण बदलती रहती है. यहां बता दें कि आभूषण बनाने के लिए ज्यादातर 22 कैरेट का ही इस्तेमाल होता है, वहीं कुछ लोग 18 कैरेट सोने का भी इस्तेमाल करते हैं. आभूषण पर कैरेट के हिसाब से हॉल मार्क दर्ज होता है. 24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999 लिखा होता है, जबकि 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है.  

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