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जनगणना से पहले कांग्रेस ने फिर आदिवासियों को बनाया मुद्दा, गैर हिंदू बताने का प्रयास

Before the census, Congress again made tribals an issue, tried to declare them non-Hindus भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समुदाय की अपनी अलग भूमिका और महत्व होने से कांग्रेस और भाजपा के बीच उन्हें लुभाने की जंग नई नहीं है। यह समुदाय जिसके साथ चलता है, सत्ता उसी को मिलती है। पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय से अपील की है कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं। इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे हिंदुओं का अपमान बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान ‘गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं’ के बाद प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। भाजपा के आदिवासी नेताओं ने सिंघार के बयान को आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों को आधार बनाकर कहा कि कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध की रही है। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। 2028 चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी बहसबता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। कांग्रेस ने आदिवासी बनाम हिंदू बहस ही वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है, ताकि उसे राजनीतिक लाभ मिल सके। उमंग सिंघार का बयान ऐसे समय पर आया है, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस ने सरकार का साथ देकर एक तरह से अपने हथियार डाल दिए हैं। उसने ओबीसी आरक्षण के मामले में सफलता और असफलता का अनुमान लगाए बिना यह कदम उठाकर बड़ा जोखिम ले लिया है। कांग्रेस की कोशिश बन सकती है राजनीतिक जोखिमजनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की यह कोशिश भी राजनीतिक जोखिम बन सकती है। कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है। साथ ही पेसा एक्ट जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के अनुषांगिक संगठन आदिवासी समुदायों के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश आदिवासियों को मुख्य धारा में लाने कीसंघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए। इधर कांग्रेस के बयान इन कोशिशों के लिए चुनौती खड़ी करते हैं। मामला संघ के प्रयासों से जुड़ा है और सीधे सत्ता के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।

80 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को मिलेगा असाधारण सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र

80 police officers and personnel will receive commendation letters for exceptional service भोपाल। मध्य प्रदेश के 80 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को डीजीसीआर (महानिदेशक प्रशस्ति पत्र) से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी समर्पित सेवा के लिए दिया जाता है। पुलिस महानिदेशक विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 80 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र और डिस्क प्रदान करेंगे। इसमें एआईजी विशेष शाखा विनीता मालवीय, एआईजी विशेष शाखा आभा तिर्की, एएसपी मऊगंज सारिका शुक्ला, उप पुलिस अधीक्षक उज्जैन दिलीप सिंह परिहार, आरआई भोपाल जय सिंह तोमर, उप निरिक्षक जिला विशेष शाखा भोपाल संतोष कुमार द्विवेदी समेत अन्य अधिकारी व कर्मी शामिल हैं।

वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : अम्बाड़े

Negligence in forest and wildlife protection will not be tolerated: Ambade भोपाल। वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने कहा है कि प्रदेश में वन एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में नियमित रूप से पेट्रोलिंग की जा रही है किन्तु वनों की अवैध कटाई और कम समय में बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु की खबरें आ रहीं हैं। अम्बाड़े ने कहा है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को एक सख्त पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि विगत 20-25 दिनों में टाईगर रिजर्व एवं क्षेत्रीय वनों में 5-6 बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु हुई है। इतनी सुदृढ़ व्यवस्था होने के पश्चात् भी कम समय में बाघ एवं तेंदुओं की इतनी अधिक मृत्यु होना वन एवं वन्य जीव संरक्षण व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। पेंच एवं सतपुड़ा टाईगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु के संबंध में यह बताया गया कि बाघों की मृत्यु आपसी संघर्ष में हुई है। जब बाघों में संघर्ष होता है तो उनकी दहाड़ दूर तक सुनाई देती है, ऐसी स्थिति में एक बाघ की मृत्यु होने के पश्चात् स्थानीय अमले को जानकारी न होना सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने का संकेत देता है। एम-स्ट्रिप (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status), मानसून पेट्रोलिंग आदि के द्वारा निगरानी रखी जाती है फिर भी बाघों की मृत्यु के पश्चात् जानकारी न होना उचित नहीं है। बालाघाट की घटना अत्यंत खेदजनकबालाघाट में जिस प्रकार से बाघ की मृत्यु के पश्चात् वन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई। यह अत्यंत ही अशोभनीय एवं खेद का विषय है। अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को निर्देशित किया जाता है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहनीय नहीं है। अतः भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जावे।

लालबर्रा में बाघिन की संदिग्ध मौत: एसडीओ होंगे निलंबित- डीएफओ हटेंगे

Suspicious death of tigress in Lalbarra: SDO will be suspended – DFO will be removed भोपाल। बालाघाट के लालबर्रा रेंज में बाघिन की मौत का रहस्य बरकरार है। स्टेट टाइगर फोर्स बाघिन की मौत पर जांच कर रहीं है पर अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार जहां एसडीओ बी सिरसम को निलंबित किया जा रहा है वहीं डीएफओ अधर गुप्ता को दक्षिण बालाघाट सामान्य वन मंडल से हटाए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। स्पीच सोमवार को कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल से मुलाकात कर डीएफओ के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की पुनः मांग की है। स्टेट टाइगर फोर्स द्वारा की जा रही जांच का सप्ताह भर बीत गया पर बाघिन की मौत की गुत्थी नहीं सुलझी। यह जरूर है कि वन विभाग का पूरा अमला बंदर की तरह उछल कूद कर रहा है। एक माह का समय बीत गया पर अभी तक न शिकारी पकड़ में आए और न ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। हां, वन्य प्राणी शाखा द्वारा भेजा गया एसडीओ बीआर सिरसाम के निलंबन का प्रस्ताव मंत्रालय के गलियारों में मूव कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि एसडीओ के साथ-साथ डीएफओ अधर गुप्ता पर भी कड़ी कार्रवाई के संकेत मिले हैं। बालाघाट की सक्रिय महिला विधायक अनुभा मुंजारे ने बाघिन की संदिग्ध मौत और उसकी जलाने की प्रक्रिया को लेकर विधानसभा से लेकर मंत्रालय के गलियारों तक न केवल सवाल उठाए बल्कि डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए अब तक सक्रिय हैं। कांग्रेस विधायकों की एक ही मांग है कि डीएफओ गुप्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए। जंगल महकमे मे यह चर्चा है कि बांधवगढ़ में हाथियों की मौत पर तुरंत एक्शन लेने वाले एसीएस अशोक वर्णवाल दक्षिण बालाघाट डीएफओ अधर गुप्ता पर मेहरबान क्यों है ?विधायकों की मांग अधर गुप्ता हटाएमंगलवार को महिला विधायक अनुभा मुंजारे नेतृत्व में विधायक संजय उइके, विक्की पटेल और मधु भगत के अलावा शत्रुघ्न असाटी ने अधर गुप्ता को दक्षिण वन मंडल से तत्काल हटाने की मांग की है। बातचीत के दौरान महिला विधायक अनुभा मुंजारे ने उन्हें अधर गुप्ता की शहडोल में हुई पोस्टिंग के दौरान तत्कालीन संभाग आयुक्त राजीव शर्मा की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें उन्हें मद्यपान का आदि होने के साथ-साथ फील्ड में मदद न करने का उल्लेख किया था।

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में कबीर दर्शन यात्रा पर NGT की सख्ती

 NGT’s strictness on Kabir Darshan Yatra in Bandhavgarh Tiger Reserve भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, केंद्रीय क्षेत्र पीठ  ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार समिति की सिफारिशों और आवश्यक अतिरिक्त उपायों के साथ तीन माह की समय-सीमा में निर्णय ले तथा उसे प्रकाशित करे। साथ ही एनटीसीए ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को बाद में उपयुक्त मंच पर आवेदन करने का अधिकार होगा। इन निर्देशों के साथ मूल आवेदन का निस्तारण कर दिया गया। भोपाल में मूल आवेदन संख्या 268/2024 (सीज़ेड) अजय शंकर दुबे बनाम  शुभरंजन सेन एवं अन्य में सुनवाई दिनांक 12 अगस्त 25 को हुई। पीठ के समक्ष आवेदक की ओर से अधिवक्ता श्री हरषवर्धन तिवारी उपस्थित हुए, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता श्री प्रशांत एम. हर्ने उपस्थित रहे। इस प्रकरण में आवेदक ने एक गंभीर पर्यावरणीय प्रश्न उठाया, जो बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र अधिकारी द्वारा श्री सद्गुरु कबीर धर्मदास साहब वंशावली को “दर्शन यात्रा” आयोजित करने की दी गई अनुमति से संबंधित था। यह यात्रा बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में प्रस्तावित थी, जो प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बाघ आवास है। आवेदक का कहना था कि यह यात्रा उद्यान के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा पहुँचाती है, इसकी समृद्ध जैवविविधता को नुकसान पहुँचाती है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन करती है। आवेदक के अनुसार, पिछले वर्षों में इस यात्रा में 14,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिन्होंने संवेदनशील कोर क्षेत्र में प्रवेश किया, चरनगंगा नदी में धार्मिक अनुष्ठान किए, रात्रि विश्राम बिना किसी स्वच्छता सुविधा के किया, बांस काटकर लाठियाँ बनाई, और प्रदूषण, शोर व अन्य गतिविधियों से पारिस्थितिकीय क्षति पहुँचाई। इससे बाघ एवं उनके शिकार प्रजातियों के व्यवहार और प्रजनन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। आवेदक ने यह भी कहा कि दी गई अनुमति में प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने, प्रवेश-निकास समय तय करने, स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध कराने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना लागू करने जैसी आवश्यक शर्तें शामिल नहीं थीं। विनाश का कारण बनते हैं आयोजन कोर क्षेत्र में आवासीय केंद्रीय एनटीसीए पीठ ने यह माना कि ऐसे धार्मिक आयोजन कोर क्षेत्र में आवासीय विनाश का कारण बनते हैं और संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव एवं वनों की रक्षा के लिए बनाए गए क़ानूनों के विपरीत हैं। सुनवाई में 27 नवम्बर 2024 के प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पत्र का उल्लेख हुआ, जिसमें कुछ शर्तों के साथ यात्रा की अनुमति दी गई थी, तथा वर्ष 2022 में उसी अधिकारी द्वारा राज्य वन विभाग को इस प्रकार की गतिविधियों के नियमन की सिफारिश की गई थी। आवेदक ने सरिस्का टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन से संबंधित उच्चतम न्यायालय में लंबित स्वतः संज्ञान याचिका का भी हवाला दिया। एनटीसीए में सरकार का जवाब  प्रदेश राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 6 जनवरी 2025 को कबीर मेला के संदर्भ में हुई बैठक के बाद वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यू.आई.आई.) ने 9 जनवरी 2025 से 18 जनवरी 25 तक कबीर मंदिर तक जाने वाले मार्ग की तीर्थयात्रियों की वहन क्षमता तथा वन्यजीव एवं जैवविविधता पर प्रभाव का अध्ययन किया। डॉ. पराग निगम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में क्षमता 7,000–8,000 यात्रियों की आंकी गई, लेकिन कठिन चढ़ाई, क्षतिग्रस्त मार्ग, और जंगली हाथी व बाघों की उपस्थिति के कारण इसे घटाकर केवल 4,000–5,000 यात्रियों तक सीमित करने की सिफारिश की गई। ऑनलाइन पंजीकरण करें  समिति ने यह भी अनुशंसा की कि सभी यात्री मेले में आने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण करें, जिसकी जानकारी आयोजकों और गुरुओं के माध्यम से एक माह पूर्व दी जाए, और सभी यात्रियों को केवल वाहनों द्वारा कबीर गुफा तक पहुँचने की व्यवस्था की जाए ताकि कोर क्षेत्र में वन्यजीवों को न्यूनतम व्यवधान हो। इन सिफारिशों को राज्य सरकार की स्वीकृति हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक को भेजा गया और इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) एवं दिशा-निर्देश अंतिम रूप देने की कार्यवाही लंबित थी। राज्य के अधिवक्ता ने कहा कि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कर उपाय सुझाए गए हैं, और नीति-निर्माण का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

Independence day: प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मना आजादी का जश्न,PCC चीफ बोले- प्रेम,अहिंसा, न्याय हमारी पहचान

Independence day: Independence day celebrated in state Congress office, PCC chief said- love, non-violence, justice are our identity मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 15 अगस्त के अवसर पर जश्न मनाया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को 79वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होने कहा कि आजादी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि विचार और मूल्यों की यात्रा है। कांग्रेस की विचारधारा, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और संविधान व मानवता के सिद्धांतों पर आधारित है, देश को एकता, भाईचारा और शांति की दिशा देती रही है। उन्होंने महान नेताओं के बलिदानों को याद करते हुए कहा कि प्रेम, अहिंसा और न्याय की परंपरा गांधीजी से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस की पहचान रही है। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले, वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल, राजीव सिंह, जेपी धनोपिया, रामेश्वर नीखरा महेंद्र जोशी, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल, भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, सहित कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। विश्व शांति हमारी विचारधाराएमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ध्वजारोहण के बाद पार्टी का सन्देश दिया। उन्होंने कहा, ’78 साल की आजादी की यात्रा में कांग्रेस की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस राजनैतिक दल के साथ विचारधारा है। वसुधैव कुटुम्बकम, विश्व शांति हमारी विचारधारा है। संविधान और मानवता हमारी विचारधारा है। भारत विश्वगुरु जब हम प्रथम आएंगे तब कांग्रेस की विचारधारा नेतृत्व करेगी।’ देश की आजादी में कांग्रेस ने योगदान दियाउन्होंने आगे कहा, ‘देश की आजादी में तो कांग्रेस ने योगदान दिया ही है, साथ ही एकता और अखंडता में भी योगदान दिया। संविधान, वोट के अधिकार को बचाने की कांग्रेस लड़ाई लड़ेगी। संविधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता बचाने का हमारा संकल्प है। देश में गरीब और गरीब होता जा रहा है। बेरोजगारी, नशा, महिला सुरक्षा, बढ़ती महंगाई देश के लिए चुनोती है। जातिगत जनगणना, गरीबों की पहचान करना हमारा उद्देश्य। बीजेपी की सरकार 27% ओबीसी आरक्षण को रोकने कोर्ट में वकील भेज रही है। पाकिस्तान के खिलाफ देश एकजुट हुआ था, लेकिन निराशा हाथ लगी।

वन विभाग में खरीदनी थी फोर व्हील ड्राइव खरीद ली टू व्हील ड्राइव….!

I had to buy a four wheel drive from the forest department but bought a two wheel drive…! भोपाल। जंगल महकमे में 26 करोड़ के 214 वाहनों की खरीदी को लेकर उठे सवाल थम ही नहीं रहे हैं। अब इसकी अनुगूंज विधानसभा के मानसून सत्र में सुनाई देगी। कांग्रेस विधायक ध्यानाकर्षण के जरिए यह मुद्दा उठाने जा रहे हैं। सूचना अधिकार के तहत मिले दस्तावेज के अनुसार डॉ दिलीप कुमार की अध्यक्षता वाली क्रय समिति ने फोर व्हील ड्राइव वाहन खरीदने की अनुशंसा की थी किंतु कतिपय शीर्ष अधिकारियों के निजी हितार्थ के चलते टू व्हील ड्राइव वाहनों की खरीदी की गई। चिंता जनक पहलू यह है कि टू व्हील ड्राइव वाली वाहन महंगी कीमत पर खरीदे गए।सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेज वाहन क्रय करने के लिए तीन कमेटियां इसलिए बनाई गई, ताकि वाहन खरीदी में गड़बड़ करने की मंशा से अधिकारी अपनी मनमर्जी कर सके। यही वजह रही की तीन बार क्रय समिति का गठन करना पड़ा। जबकि पहले क्रय समिति के अध्यक्ष रहे डॉ दिलीप कुमार कमेटी ने फोर व्हील (4wD) वाहन खरीदने की अनुशंसा की थी। इस सवाल का जवाब वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के पास नहीं है कि जब फोर व्हील ड्राइव स्कार्पियो-एन 15.84 लाख कीमत पर मिल रही थी तो फिर टू व्हील ड्राइव स्कार्पियो 18.24 कुल लागत में क्यों खरीदी ? वन विभाग के लिए 4wD वाहन की रिक्वारमेंट थी, क्योंकि जब शहर और गांवों की रोड समाप्त होते है तब वन विभाग की सीमा आरंभ होती है। कच्चे, रेतीले, गिट्टो, और पहाड़ों पर वन विभाग का वाहन चलता है। ऐसी जगह पर 4wD वाहन की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार वाहन खरीदते समय अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस का ध्यान भी नहीं रखा गया। डॉ दिलीप कुमार के रिटायर्ड होने के बाद यूके सुबुद्धि और उसके बाद सुदीप सिंह अध्यक्षता वाली कमेटियां बनाई गई। समिति में विशेषज्ञ को जगह नहीं दी गई थी। इन कमेटियों को भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन कर वाहन स्पेसिफिकेशन और दरों का तुलनात्मक पत्रक नहीं बनाया। यानि कम से कम दो अलग-अलग कंपनियों के वाहन मॉडल तय करना था पर एक ही कंपनी को परचेज ऑर्डर जारी कर दिए गए। यानी पूर्व से ही या तय कर लिया गया था कि महिंद्रा एन्ड महिंद्रा कंपनी के विशेष वाहन खरीदने हैं।वित्त विभाग के परिपत्र की अनदेखीवाहन क्रय समिति वित्त विभाग के सर्कुलर की अनदेखी की। यानि एसीएस और वन बल प्रमुख को भी गुमराह किया। वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार अफसर के लिए वाहन पे-स्केल के आधार पर खरीदने का प्रावधान है। यदि पात्रता से अधिक कीमत ( स्कॉर्पियो और इनोवा जैसी अधिक कीमत वाली वाहन) की वाहन खरीदना था तब संबंधित प्रस्ताव पर कैबिनेट के मंजूरी लेना चाहिए थी।राइट ऑफ वाहन की सूची में गड़बड़ी15 वर्ष पुराने वाहनों को राइट ऑफ किए जाने के एवज में नए वाहन खरीदने की बात कही जा रही है। राइट ऑफ वाहनों की सूची में भी गड़बड़ी प्रकाश में आई है। दस्तावेज के आधार पर आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत टंडन ने दावा किया है कि सूची में दिए गए वाहनों के नंबरों का मिलन परिवहन विभाग की बेवसाइट पर मिलान किया तब 5 वाहन के नंबर एम्बुलेंस के बताए जा रहें हैं। एक वाहन का नंबर तो इंदौर आरटीओ का है जो फाइनेंस पर ली गई है।

जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में नकली कृषि उत्पादों से किसानों को हो रहे भारी नुकसान पर चिंता व्यक्त की, सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की

Jeetu Patwari expressed concern over the huge losses being suffered by farmers in Madhya Pradesh due to fake agricultural products, demanded immediate action from the government भोपाल ! मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य में नकली खाद, नकली बीज और नकली कीटनाशकों की बिक्री पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिससे किसानों को अभूतपूर्व वित्तीय संकट और फसल हानि का सामना करना पड़ रहा है। पटवारी ने आज मोहन सरकार पर किसानों के प्रति उदासीनता और इस गंभीर मुद्दे को रोकने में विफलता का आरोप लगाया। पटवारी ने कहा,मध्य प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की मार और बढ़ती लागत से जूझ रहा है। ऐसे में नकली खाद, बीज और कीटनाशक उसकी कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे है अमानक उत्पाद किसानों की मेहनत और पूंजी को बर्बाद कर रहे हैं, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है और वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।” प्रमुख बिंदु जो पटवारी ने उठाए:व्यापकता और प्रमाण:पिछले कुछ महीनों में, राज्य के विभिन्न जिलों से नकली उत्पादों की बिक्री और उपयोग के कारण किसानों को हुए नुकसान की अनगिनत शिकायतें मिली हैं। मंडला, सिवनी, रायसेन, सीहोर, विदिशा, और हरदा जैसे जिलों में किसानों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि नकली बीज बोने के बाद अंकुरण नहीं हुआ, नकली खाद से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई, और नकली कीटनाशकों ने कीटों पर कोई असर नहीं दिखाया, जिससे उनकी फसलें तबाह हो गईं। आर्थिक नुकसान का अनुमान:प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, नकली उत्पादों के कारण राज्य के किसानों को अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए विनाशकारी है। सरकार की निष्क्रियता: जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। “निरीक्षण, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। स्वयं केंद्र के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार को आईना दिखाते हुए नकली खाद ,नकली बीज ,नकली कीटनाशक ,के विषय को उठाया इसके बाबजूद सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों का शोषण:नकली उत्पादों की बिक्री न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि किसानों के मनोबल को भी तोड़ रही है। कई किसान अपनी जमीन बेचने या सूदखोरों से कर्ज लेने पर मजबूर हो रहे हैं, जिससे आत्महत्या के मामले बढ़ने का भी खतरा है।पटवारी ने चेतावनी दी,“यदि सरकार ने जल्द ही इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। हम किसानों को उनके हक से वंचित नहीं होने देंगे।

मॉनसून सत्र की बारिश से पहले राजनीतिक गरमाहट: सरकार-जवाबदेही और विपक्ष-रणनीति आमने-सामने

Political heat before the monsoon session rains: Government-accountability and opposition-strategy face to face भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और 8 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में कुल 10 बैठकें प्रस्तावित हैं। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार जहां अनुपूरक बजट लेकर आने वाली है, वहीं कांग्रेस विपक्ष जनहित और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। नई भूमिका में हेमंत खंडेलवालबैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल, जिन्हें हाल ही में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है, अब विधानसभा में पहली पंक्ति में स्थान पाएंगे। यह न सिर्फ उनकी बढ़ी हुई भूमिका का संकेत है, बल्कि पार्टी के भीतर नई राजनीतिक रणनीति का भी प्रतीक है। 3,377 प्रश्न, 191 ध्यानाकर्षण और एक स्थगन प्रस्तावविधानसभा सचिवालय को इस सत्र के लिए 3,377 सवाल मिल चुके हैं, जिनमें से अनेक सवाल शासन की जवाबदेही को कठघरे में खड़ा करेंगे। 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव यह दर्शाते हैं कि सत्र में विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। बजट की प्राथमिकता – सिर्फ जनहितमोहन सरकार अनुपूरक बजट लाने की तैयारी में है, लेकिन इस बार सरकार का रुख फिजूलखर्ची के खिलाफ सख्त और जनहित योजनाओं के पक्ष में दिख रहा है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वाहन जैसी गैर-ज़रूरी मांगें न भेजें। यह रुख सरकार की वित्तीय अनुशासन और छवि सुधार की मंशा को दर्शाता है। रणनीति की थाली: कांग्रेस विधायकों की डिनर बैठकसत्र की पूर्व संध्या पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक होटल में होगी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मांडू में हुए नव संकल्प शिविर में तय किए गए मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। चर्चा है कि जल जीवन मिशन घोटाले जैसे संवेदनशील मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाया जाएगा। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे रोस्टर मंत्रीमुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि हर दिन सदन में कम से कम तीन मंत्री रोस्टर अनुसार अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। ये मंत्री न केवल सवालों के जवाब सुनिश्चित करेंगे, बल्कि विधायकों की उपस्थिति भी ट्रैक करेंगे। यह पहल सरकार की तैयारियों को संगठित रूप में दर्शाती है। मानसून सत्र – बहस, बजट और भरोसे की परीक्षायह मानसून सत्र सिर्फ सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और विपक्ष की धार का टेस्ट बन गया है। एक ओर जहां सरकार बजट से भरोसा पैदा करना चाहती है, वहीं विपक्ष जवाबदेही से सरकार को झकझोरने की रणनीति बना रहा है। अगले दस दिन नीतियों से ज्यादा नीयत की परीक्षा साबित होंगे।

राज्यपाल पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं के साथ किया सह-भोज

Governor Patel had lunch with differently abled girls भोपाल ! राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन में सफलता और आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखते रहना चाहिए। राज्यपाल बहुदिव्यांग बालिकाओं से उनके शिक्षकों के माध्यम से राजभवन के सभा कक्ष जवाहर खण्ड में आत्मीय चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल से सौजन्य भेंट करने के लिए आनंद सर्विस सोसायटी की मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिकाएं शुक्रवार को इंदौर से राजभवन आईं थीं। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं से उनके मार्ग दर्शकों के माध्यम से परिचय प्राप्त किया। उनके जीवन की कठिनाईयों और सफलताओं को जाना। उनको निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। दिव्यांग बालिकाओं के साथ बालिका सुश्री गुरदीप कौर वासु के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। उन्होंने दिव्यांग बालिकाओं और शिक्षकों के साथ सह-भोज भी किया। राजभवन भ्रमण के अनुभव किए साझा राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सभी बालिकाओं से राजभवन भ्रमण के अनुभव जाने और सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। बालिकाओं ने सांकेतिक भाषा में ऐतिहासिक राजभवन परिसर और विशेष रूप से आर्ट गैलेरी भ्रमण के सुखद अनुभव साझा किए। उन्होंने राज्यपाल के प्रति मुलाकात, सह-भोज करने और राजभवन भ्रमण का अवसर देने के लिए आत्मीय आभार जताया। राज्यपाल को स्व-रचित कलाकृतियां की भेंट राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भेंट के अवसर पर मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिका सुश्री दिव्या गोले और वैष्णवी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्हें सुश्री किरण विश्वकर्मा और अन्य बालिकाओं ने स्वयं द्वारा सृजित पैंटिंग और कलाकृतियां भेंट की। राज्यपाल ने देखी बहुदिव्यांग गुरदीप पर बनी फिल्म राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बालिकाओं के साथ मध्यप्रदेश वाणिज्य कर विभाग में कार्यरत मूकबधिर बहुदिव्यांग शासकीय सेवक सुश्री गुरदीप के जीवन और संघर्षों पर आधारित लघु फिल्म को देखा। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं से गुरदीप के जीवन के संघर्षों और सफलताओं से प्रेरणा लेने और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरदीप के परिजनों, संस्था के शिक्षकों और प्रतिनिधियों के समर्पण की प्रशंसा की। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, संस्था की को-फाउंडर और संचालक श्रीमती मोनिका पुरोहित, सचिव ज्ञानेन्द्र पुरोहित, गुरदीप की माताजी श्रीमती सीमा मंजीत कौर, शिक्षिका श्रीमती मृणालिनी शर्मा और बालिकाएं उपस्थित रही।

मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां शुरू, ओबीसी कल्याण आयोग में कुसमारिया को अध्यक्ष और मौसम बिसेन को बनाया सदस्य

Political appointments started in Madhya Pradesh, Kusmaria appointed as Chairman and Mausam Bisen as member in OBC Welfare Commission भोपाल। हेमंत खंडेलवाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के 21 दिन के भीतर ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। बुधवार को डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया को ओबीसी कल्याण आयोग का अध्यक्ष और मौसम बिसेन को सदस्य बनाने का आदेश जारी हुआ है। इसके साथ ही पार्टी ने राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत के संकेत दे दिए हैं। मौसम बिसेन पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन की बेटी हैं, जो वर्ष 2021 में आयोग के गठन के साथ अगस्त 2023 तक इसके अध्यक्ष रहे। अब उनकी जगह ओबीसी आयोग के अध्यक्ष कुसमारिया को कल्याण बोर्ड का भी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही संतुलन की दृष्टि से मौसम को सदस्य बनाया गया है। बालाघाट से टिकट दिया थाबता दें कि पार्टी ने मौसम बिसेन को विधानसभा चुनाव में भी बालाघाट से टिकट दिया था। बाद में इसे बदलकर गौरी शंकर बिसेन को लड़ाया था, जिसमें वह हार गए थे। मौसम की नियुक्ति के साथ उन नेताओं में भी निगम, मंडल और आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनने की आस जगी है, जो लंबे समय से प्रतीक्षा में हैं। इसमें विधानसभा चुनाव हार चुके तो कुछ कांग्रेस से आए नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव के पहले 13 फरवरी 2024 को 46 निगम, मंडल और आयोगों में नियुक्तियां रद कर दी थीं। सभी नियुक्तियां शिवराज सरकार में हुई थीं। 25 पदों पर 2021 में नियुक्तियां हुई थीं। शैलेन्द्र बरुआ, जितेन्द्र लिटोरिया और आशुतोष तिवारी जैसे भाजपा के संगठन मंत्रियों को भी निगम मंडलों में जगह मिली थी। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 सामाजिक कल्याण बोर्ड भी बनाए थे। हालांकि, इनकी नियुक्तियां रद नहीं की गई थीं। नए प्रदेश अध्यक्ष की प्रतीक्षा में टलती रहीं नियुक्तियांमाना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियां प्रारंभ होंगी, पर अध्यक्ष का निर्वाचन दो जुलाई 2025 को पूरा हो पाया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य नहीं होने से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। नीतिगत निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है अब चरणबद्ध तरीके सभी निगम मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियां शीघ्र होंगी। सबसे पहले उन्हें लिया जा सकता है, जिनके लिए दावेदार कम हैं और नियुक्ति में अंदरूनी विरोध होने की संभावना नहीं है। सत्ता-संगठन के सामंजस्य से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को देखते हुए नियुक्तियां की जाएंगी। प्रदेश में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस कारण पार्टी का पूरा जोर संतुलन पर रहेगा, जिससे कोई नाराज नहीं होने पाए। अगले चरण में कैबिनेट विस्तार की संभावनाराजनीतिक नियुक्तियों के बाद अगली कड़ी में सरकार मंत्रिमंडल में रिक्त तीन पदों को भरने के लिए कैबिनेट का विस्तार भी कर सकती है। कई महीने से विस्तार की अटकलें चल रही हैं।

बड़ी खबर, अब ‘राम बाग’ कहलाएगा अशोका गार्डन, हमीदिया और हबीबगंज का नाम भी बदलेगा

ashoka garden now called ram bagh hamidia and habibganj also renamed Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के प्रमुख जगहों के नाम बदलकर शहर सरकार ‘शुद्धिकरण अभियान’ चला रही है। दावा किया जा रहा है कि, अब गुलामी और विदेशी आंक्राताओं के नाम से नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान भारतीय संस्कृति के नामों से होगी। इसी के चलते नगर निगम द्वारा हमीदिया कॉलेज, हमीदिया अस्पताल, हबीबगंज के साथ-साथ शहर के कई प्रमुख इलाकों के नाम बदलने के लिए शासन से मांग की है। इसी के तहत मेयर इन काउंसिल (MIC) ने शहर के बड़े और प्रमुख इलाके में शामिल अशोका गार्डन का नाम बदल भी दिया है। इस इलाको को अब ‘राम बाग’ नाम से जाना जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि, गुलामी और विदेशी आक्रांताओं के नामों को बदलना जरूरी है। भारतीय संस्कृति के नामों से भोपाल को राजा भोजपाल की पहचान मिले। कई सड़कों और संस्थानों के नाम बदलने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। शहर सरकार की शक्तियों का उपयोग कर अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग का प्रस्ताव पारित हुआ है। निगम अद्यक्ष ने कहा कि, भोपाल का नवाब रहा हमीदुल्लाह खान के नाम की सड़कों के नाम बदले। भोपाल का हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान में विलय चाहता था। इसलिए ये शुद्धिकरण का अभियान है। विपक्ष के मति में भ्रम और अशुद्धि है।

भोपाल प्रशासन का बड़ा फैसला, स्कूलों में ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगेगा, बच्चों की सेफ्टी के सही नहीं

Bhopal administration’s big decision, e-rickshaws will be banned in schools, not good for children’s safety भोपाल: शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए शुक्रवार को कंट्रोल रूम में एक मीटिंग हुई। सांसद आलोक शर्मा ने जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मीटिंग में लेफ्ट-टर्न को सुधारने, ई-रिक्शा पर नियंत्रण रखने, ट्रांसफार्मर हटाने और पार्किंग व्यवस्था को ठीक करने जैसे मुद्दों पर बात हुई। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को उनके अधूरे प्लान के लिए फटकार लगाई गई और उन्हें एक हफ्ते में ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लेफ्ट टर्न सुधार का प्लान पेश करने का निर्देश दिया गया। शहर के 42 चौराहों पर लेफ्ट टर्न की समस्या को दूर करने के लिए 3 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। ई-रिक्शा पर रोकई-रिक्शा के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई और कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को ई-रिक्शा में स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। इसलिए स्कूलों में ई-रिक्शा को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया, क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। मीटिंग में सड़कों से अतिक्रमण हटाने और कंडम वाहनों को हटाने पर भी बात हुई। सांसद शर्मा ने ट्रांसफार्मर और खंभों को हटाने की बात कही और पार्किंग व्यवस्था को आम लोगों के लिए आसान बनाने के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकारसांसद आलोक शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार भी लगाई। दरअसल, पीडब्ल्यूडी अधिकारी बिना किसी वर्किंग प्लान के मीटिंग में पहुंच गए थे। इस पर सांसद ने नाराजगी जताई। मीटिंग में संबंधित विभागों को कुछ निर्देश दिए गए। उन्हें मैनिट के ट्रैफिक विशेषज्ञों की मदद से सभी 42 चौराहों की समीक्षा रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने को कहा गया। इससे जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके। ऐसा करने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का आना-जाना आसान हो जाएगा। साथ ही, चौराहों की सुरक्षा और दृश्यता भी बेहतर हो जाएगी।

धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़झाला

There was a mess in the tender process in Dhar forest division भोपाल। इंदौर सर्किल के अंतर्गत वन विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़ियों की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को की गई है। आरोप है कि अफसरों और सप्लायर्स के गठजोड़ (नेक्सस) के चलते निविदाएं नियमों को ताक पर रखकर जारी की गईं, जिससे खास सप्लायर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।धार वन मंडल की संदिग्ध निविदाएंशिकायतकर्ता हितेंद्र भावसार ने बताया कि धार वन मंडल अधिकारी द्वारा 3 जुलाई को पांच निविदाएं जेम पोर्टल पर प्रकाशित की गईं। इनके क्रमांक इस प्रकार हैं —GEM/2025/B/6413130GEM/2025/B/6411838GEM/2025/B/6412580GEM/2025/B/6412737GEM/2025/B/6413223ये निविदाएं महज एक दिन के भीतर यानी 4 और 5 जुलाई को पूर्ण भी कर दी गईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में क्रय भंडार नियमों और वन बल प्रमुख द्वारा निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। यह भी कहा गया है कि जिन वस्तुओं के लिए निविदाएं निकाली गईं, उन्हें पहले भी तीन बार प्रकाशित किया गया था, लेकिन हर बार उन्हें बिना कारण बताए निरस्त कर दिया गया। वन मुख्यालय से नहीं ली गई अनुमतिमध्यप्रदेश के वन नियमों के अनुसार, किसी भी निविदा को निर्धारित समय से पूर्व निरस्त करने के लिए वन मुख्यालय से पूर्वानुमति लेना आवश्यक होता है। मगर धार वन मंडल अधिकारी ने यह जरूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई। इस मामले में संदेह जताया जा रहा है कि इंदौर सर्किल के प्रभावशाली अधिकारियों और एक खास सप्लायर के बीच सांठगांठ है और उसी को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी निविदा प्रक्रिया को मनमर्जी से चलाया गया। हॉफ के दिशा-निर्देशों की अवहेलनायह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह देखा जाए कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने सप्लायर्स और अधिकारियों के इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए ‘उत्तम शर्मा कमेटी’ बनाई थी। इस कमेटी ने प्रदेश के लिए統一ित (एकजाई) निविदा नियम तय किए थे। इसके तहत निर्देश दिए गए थे कि सभी निविदाएं केवल जेम पोर्टल पर ही नहीं बल्कि विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।हालांकि धार वन मंडल में न तो विभागीय पोर्टल पर जानकारी दी गई और न ही पारदर्शिता के नियमों का पालन किया गया। यह सीधे तौर पर विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है। आईटी शाखा की रिपोर्ट भी हुई नजरअंदाजपूर्व में वन विभाग की आईटी शाखा द्वारा विभाग के हॉफ (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) को एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें ऐसे मामलों में लगातार नियमों की अनदेखी और नेक्सस की गतिविधियों को उजागर किया गया था। लेकिन उस रिपोर्ट पर भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय प्रमुख स्तर पर भी ऐसी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतअब जबकि यह शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी है, विभागीय हलकों में हलचल बढ़ गई है। हितेंद्र भावसार ने अपने पत्र में मांग की है कि धार वन मंडल में हुई निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है पारदर्शितामध्यप्रदेश वन विभाग में बीते कुछ वर्षों में कई टेंडर प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। सप्लायर्स और अधिकारियों के बीच बने अपारदर्शी गठजोड़ के कारण विभाग की छवि लगातार धूमिल हो रही है। यह मामला इस बात की एक और बानगी है कि कैसे विभागीय आदेशों को दरकिनार कर कुछ चहेते सप्लायर्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना वन विभाग में हुए तबादले, कुछ वनमंडल हुए ACF विहीन

Transfers took place in the forest department without any administrative exercise, some forest divisions were left without ACF भोपाल। तबादलों के मौसम में मैनेजमेंट कोटे के आधार पर ACF और रेंजरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना ही स्थानांतरण कर दिए गए। अब पीसीसीएफ प्रशासन विवेक जैन को आईएफएस अफसरों के व्हाट्सप्प ग्रुप पर पोस्ट कर पूछना पड़ रहा है कि समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।गत दिनों वन विभाग में एसडीओ और रेंजर्स के तबादले किए गए। पहली बार अधिकारियों ने अपनी मनमानी कर तबादला सूची जारी की। यही वजह रही कि जारी किए गए स्थानांतरण आदेश आने के बाद प्रशासन-एक के पीसीसीएफ विवेक जैन की प्रशासनिक अक्षमता भी उजागर हो गई। अर्थात प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दे दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप कुछ वन मंडल ACF विहीन हो गए। अब प्रशासन एक के पीसीसीएफ को अपने व्हाट्सप्प ग्रुप को यह पोस्ट करना पड़ा कि ‘वर्तमान में हुए ACF स्थानांतरण के पश्चात यदि किसी वनमण्डल के समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।’ यही नहीं, मुख्यालय पदस्थ और अपने निज सहायक कि ड्यूटी लगाई है किवह सभी वन मंडलों में लगाकर जानकारी ले और स्थानांतरित एसीएफ को भारमुक्त कराने डीएफओ दबाव बनाएं। उनके पोस्ट जब प्रशासन-एक शाखा से सेवानिवृत पीसीसीएफ से बातचीत की। पहले तो हंसे और फिर बोले कि पूरी प्रशासनिक एक्सरसाइज इस बात के लिए की जाति है कि कहीं वनमण्डल में स्वीकृत एसीएफ के सभी पद रिक्त तो नहीं हो जाएंगे। ऐसी स्थिति बनने के पूर्व ही कितनी ही उच्च दबाव बने पर हम तबादला नहीं करते थे। ऐसी स्थिति में मंत्री और अन्य राजनेताओं के नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। एक करने पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी की टिप्पणी है कि यह तो प्रशासनिक दिवालियापन है। कुछ डीएफओ ने भार मुक्त करने से किया इंकारपीसीसीएफ विवेक जैन की पोस्ट के बाद मालवांचल क्षेत्र के डीएफओ ने पीसीसीएफ मुख्यालय को पत्र लिखकर उनके वन मंडल में एकमात्र एसीएफ को भारमुक्त करने से मना कर दिया है। इंदौर वन मंडल में दो एसीएफ पदस्थ हैं और दोनों को ही स्थानांतरित कर दिया गया और अब रालामंडल के अधीक्षक को मैनेजमेंट के आधार पर इंदौर का अतिरिक्त प्रभार देने के निर्देश भोपाल से दिए गए हैं। हास्यास्पद पहलू यह कि इंदौर में पदस्थ एसीएफ का स्थानांतरण इसलिए कर दिया गया क्योंकि पिछले दिनों संपन्न कार्यशाला में कई अफसरों और उनकी पत्नियों की इच्छा अनुसार व्यवस्था नहीं कर पाया था। ट्रांसफर नीति का खुला उल्लंघनशीर्ष अधिकारियों ने एसीएफ और रेंजर्स के तबादले करते समय राज्य सरकार के स्थानांतरण नीति का भी उल्लंघन किया। नीति में साफ तौर पर पति-पत्नि का एक साथ रहने का अधिकार दिया है। इसका पालन वन विभाग ने नहीं किया गया। रीवा सर्किल ऑफिस के संलग्नाधिकारी विद्या भूषण मिश्रा का ट्रांसफर खरगोन वनमंडल कर दिया। जबकि उनकी पत्नि रीवा आईटीआई कॉलेज में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। वैसे भी रीवा में सामाजिक वानिकी में एसडीओ के दो पद खाली है। मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बाहर मुक्त कर दिया है और उनका प्रभार सीनियर रेंजर को सौंपा है, जोकि प्रभारी एसडीओ है। अब रेंजर के पास मऊगंज और रीवा का प्रभार आ गया है। यानी यहां भी मुख्यालय के अफसर ने प्रभार का खेल खेला है। मंत्रालय में बरसों से जमे हैं एसडीओ और बाबूरेंजर संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप में एक यक्ष प्रश्न उठाया है कि क्या वन विभाग अंतर्गत ट्रान्सफर नीति और ट्रान्सफर केवल वन विभाग के वर्दी वाले लोगों के लिए लागू होते हैं ? क्या ट्रांसफर नीति वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यालय के एसीएफ और उनके बाबुओं के लिए नहीं? मुख्यालय के साथ-साथ प्रदेश के अनेक वन वृत्तों और वनमण्डलों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे बाबू हैं जिनकी नियुक्ति उसी ऑफिस में पार्टिकुलर उसी शाखा में हुई और उसी में प्रमोशन और रिटायरमेंट हुआ। लेकिन उनका ट्रांसफर उस शाखा और उस ऑफिस से नहीं हुआ। संरक्षण शाखा, कैम्पा, वित्त एवं बजट, प्रशासन, एचआरडी आदि शाखाओं 4-5 सालों से एसीएफ और 8-9 सालों से कंप्यूटर ऑपरेटर जमे हैं पर उनका ट्रांसफर करने की हिमाकत कोई नहीं कर पा रहा है। ये कंप्यूटर ऑपरेटर शाखा चला रहे हैं और उनके अफसर रबर स्टाम्प बने हुए है। सूत्रों की खबर यह भी है कि कतिपय कंप्यूटर ऑपरेटर अपने अपने मुखियाओं के नाम से डीएफओ-एसडीओ और रेंजर्स से चौथ वसूली भी करते हैं। पिछले दिनों नई वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर धन संग्रह किए गए हैं।

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