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सोनम रघुवंशी ने SIT के सामने कबूल किया अपना जुर्म, सोनम और राज कुशवाह के साथ वाली फोटो आई सामने

इंदौर सोनम रघुवंशी ने आखिरकार यह कबूल कर लिया कि उसने ही अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करवाई थी। शिलॉन्ग में पुलिस पूछताछ के दौरान सोनम टूट गई और उसने रोते-रोते यहब कबूल कर लिया है कि हां उसने ही अपने पति की जान ली है।सोनम रघुवंशी ने आखिरकार यह कबूल कर लिया कि उसने ही अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करवाई थी। शिलॉन्ग में पुलिस पूछताछ के दौरान सोनम टूट गई और उसने रोते-रोते यह कबूल कर लिया है कि हां उसने ही अपने पति की जान ली है। इस बीच खास बात यह है कि सोनम का राज कुशवाहा से भी आमना-सामना कराया गया है। मेघालय के राजा रघुवंशी हत्याकांड में मेघालय पुलिस ने सोनम रघुवंशी और उसके प्रेमी राज कुशवाह का आमना-सामना करवाया, जिसके बाद सोनम टूट गई और उसने अपने पति राजा की हत्या की साजिश में शामिल होने की बात कबूल कर ली. पुलिस ने पुख्ता सबूतों के साथ दोनों को आमने-सामने बिठाया, जिसके बाद सोनम के पास छिपाने को कुछ नहीं बचा. मेघालय पुलिस के ‘ऑपरेशन हनीमून’ के तहत 23 मई को शिलांग के सोहरा में हुई राजा रघुवंशी की हत्या की जांच में बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस ने सोनम और राज कुशवाहा को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की. 42 सीसीटीवी फुटेज, खून से सनी जैकेट, सोनम का रेनकोट, और अन्य सबूतों को सामने रखा गया. सबूतों के दबाव में सोनम टूट गई और उसने कबूल किया कि उसने राज कुशवाह और तीन सुपारी किलर्स आकाश राजपूत, विशाल उर्फ विक्की ठाकुर, और आनंद कुर्मी के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची.   पुलिस जांच में पता चला कि सोनम ने हनीमून के बहाने राजा को सोहरा के सुनसान इलाके में ले जाकर हत्यारों को उसकी लोकेशन भेजी. उसने अपनी सास को झूठ बोला कि वह अपरा एकादशी का व्रत रख रही है, जबकि होटल रिकॉर्ड से पता चला कि उसने खाना खाया था. हत्या के बाद सोनम ने राजा के सोशल मीडिया अकाउंट से ‘सात जन्मों का साथ है’ पोस्ट कर जांच को भटकाने की कोशिश की. पुलिस को गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के पास से हत्या में इस्तेमाल हथियार भी मिला.   मेघालय पुलिस ने सोनम, राज कुशवाह और तीनों हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया है. सोनम ने 9 जून को गाजीपुर (UP) में सरेंडर किया था. पुलिस के मुताबिक, सोनम का मकसद राजा को रास्ते से हटाकर राज कुशवाह के साथ नई जिंदगी शुरू करना था.    राजा के भाई सचिन और पिता अशोक रघुवंशी ने सोनम के लिए फांसी की सजा और उसके परिवार के सामाजिक बहिष्कार की मांग की है. सोनम के भाई गोविंद ने भी हत्यारों के लिए फांसी की मांग की, लेकिन दावा किया कि उसे साजिश की जानकारी नहीं थी.   मुझे अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए- राजा रघुवंशी की मां राजा रघुवंशी की मां उमा ने कहा, ‘मुझे अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. मेरे बेटे ने क्या किया था? उसकी क्या गलती थी? उसे क्यों मारा गया?’ कामाख्या मंदिर क्यों गई सोनम, क्या नरबलि की थी इच्छा…’ राजा की मां का सोनम पर आरोप राज उससे प्यार नहीं कर सकता- सोनम की बॉयफ्रेड की मां राज कुशवाह की मां ने भी बातचीत में कहा कि राज उससे प्यार नहीं कर सकता. सोनम क्यों राज को पसंद करेगी? मेरा  बेटा सोनम से कभी बात नहीं करता था. हमारा एक कमरा है, ऊपर राज सोता है और नीचे हम.अगर वो किसी से बात करता तो हमें तो सुनाई देता. किसी को तो पता चलता. वहां गोविंद भी काम करता था. ऐसा नहीं सकता है कि किसी को इस बारे में कुछ पता चले. मैंने तो सोनम को आजतक देखा नहीं, ना ही मैंने उनके घरवालों को देखा. मेरे बच्चे को मारा उनकी इतनी हिम्मत कैसे हुई- राजा की मां राजा रघुवंशी की मां ने कहा कि राजा की मौत के बाद हमारे यहां जब राज आया तो मेरे मन में यही ख्याल आया कि जिन्होंने मेरे बच्चे को मारा उनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे यहां आने की. हनीमून पर गोल्ड पहनकर आने के लिए सोनम ने राजा से कहा था राजा रघुवंशी की मां ने कहा कि राजा ने कामख्या जाने के बाद कोई फोटो नहीं डाली. मुझे एक फोटो में राजा की चैन दिखी तो मैंने बोला तुमने चैन क्यों पहनी? जिस पर राजा ने कहा कि सोनम ने पहनने के लिए बोला है. हमें अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहिए.   बेटे की हत्या में जो भी लोग शामिल हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए- राजा रघुवंशी की मां बातचीत में राजा रघुवंशी की मां ने कहा कि वो चाहती हैं कि उनके बेटे की हत्या में जो भी लोग शामिल हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. उन्होंने कहा कि सोनम पर हमारा ध्यान कभी ज्यादा नहीं गया. सोनम शादी के बाद चली गई थी तब उसके घरवालों ने बोला कि अमावस्या के बाद आना. सोनम के शिलांग पहुंचने से पहले ही सुलझ गई राजा रघुवंशी हत्याकांड की गुत्थी  मध्य प्रदेश के राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी गुवाहाटी पहुंच चुकी हैं। रात करीब दो बजे तक सोनम रघुवंशी के शिलांग पहुंच जाने की संभावना है। मंगलवार को मेघालय पुलिस पटना से लेकर कोलकाता और फिर कोलकाता से लेकर गुवाहाटी पहुंची। गुवाहाटी से सोनम रघुवंशी को सड़क मार्ग से शिलांग के लिए निकाला गया। उधर, राजा रघुवंशी की हत्या में गिरफ्तार सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा समेत तीन अन्य आरोपियों को भी मेघालय पुलिस इंदौर से लेकर शिलांग के लिए रवाना हो गई है। इंदौर एयरपोर्ट एक आरोपी की एक व्यक्ति ने गुस्से में थप्पड़ भी मारा। गुवाहाटी से शिलांग की कुल दूरी 100 किलोमीटर की है। सोमवार की देर रात को मेघालय पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की कोर्ट ट्रांजिट रिमांड हासिल की थी। इंदौर में कबूले सुपारी किलर्स मेघालय पुलिस के दबाव के बाद गाजीपुर में इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम के सरेंडर किया था। इतना ही नहीं इंदौर पुलिस के साथ ज्वाइंट ऑपरेशन में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तार किया गया था। मेघालय पुलिस ने इस केस को सुलझाने … Read more

राजा की मां से गले मिलकर रोया सोनम का भाई बोला -मैं हर पल आपके साथ हूं… मेरी बहन गुनहगार है

इंदौर  मैं हर पल आपके साथ हूं… मेरी बहन गुनहगार है… मैं सोनम के खिलाफ खुद केस लडूंगा… पति की हत्या में गिरफ्तार सोनम के भाई गोविंद, राजा के घर पहुंचे तो माहौल भावुक हो गया. गोविंद राजा की मां उमा रघुवंशी से लिपट गए और फूट-फूटकर रोने लगे. उन्होंने उनके पैर पकड़ लिए. इंदौर के राजा हत्याकांड में बुधवार को यह भावुक लम्हा आया. सोनम के भाई गोविंद ने राजा की मां से कहा कि इस मामले में वह उनके परिवार का पूरा साथ देंगे. उन्होंने सोनम के खिलाफ खुद केस लड़ने की की बात भी कही. पुलिस सूत्रों के मुताबिक शिलॉन्ग ले जाई गई सोनम ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस इस मामले में गिरफ्तार किए गए बाकी चार आरोपियों को भी शिलॉन्ग ले जा चुकी है. उनसे राजा हत्याकांड का हर राज उगलवाया जा रहा है. पुलिस के हाथ कुछ अहम सबूत भी लगे हैं. इसमें खून से सना रेनकोट और टी-शर्ट भी शामिल है. इसके साथ ही वह खुखरी भी बरामद कर ली गई है जिससे शिलॉन्ग की पहाड़ी पर राजा की हत्या की गई थी.    शिलॉन्ग में जहां पुलिस राजा की हत्या का हर पन्ना खोलने में जुटी हुई है, वहीं इंदौर में सोनम और राजा के परिवार सदमे में है. राजा रघुवंशी की मां अपनी बहू की करतूत से सदमे में है. बुधवार दोपहर सोनम के भाई  गोविंद सीधे राजा की मां से मिलने चले गए. इस दौरान माहौल में नमी घुल गई. रोती-बिलखती राजा की मां ने गोविंद को गले से लगा लिया. गोविंद भी बिलख-बिलखक रोने लगे. उन्होंने राजा की मां के पैर पकड़े लिए. मीडिया से बातचीत में गोविंद ने कहा कि उनके परिवार को राज कुशवाहा और सोनम के रिश्ते के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. सोनम को राज ‘दीदी’ कहकर बुलाता था. पिछले तीन सालों से सोनम राज कुशवाहा को राखी बांध रही थी.  सोनम के भाई गोविंद ने राजा के परिवार के साथ मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए. सोनम के भाई ने कहा कि राजा मेरा बहुत प्रिय था. सोनम ने जो भी प्लानिंग की, मुझे मीडिया से पता चला. गोविंद ने कहा कि मैंने राजा की मां से माफी मांगी है. अगर सोनम है गुनहगार है तो उसे सजा मिलनी चाहिए. सोनम ने खुद को दोषी नहीं माना है. उससे कोई संपर्क नहीं हुआ है. हमने उससे सभी संबंध तोड़ लिए हैं…हम राजा (रघुवंशी) की ओर से लड़ेंगे. हम राजा के परिवार के लिए वकील से बात करेंगे. राजा रघुवंशी की मां ने क्या बताया?  राजा रघुवंशी की मां ने कहा कि गोविंद ने कहा कि सोनम को फांसी पर लटका देना चाहिए. उसे राजा के लिए दुख है, सोनम के लिए नहीं. गोविंद की कोई गलती नहीं है. मैंने गोविंद से पूछा कि क्या वह सोनम से मिला था. उसने कहा कि वह उससे तीन मिनट के लिए मिला था. मैंने उससे पूछा कि उसने उसे क्यों नहीं मारा? उसने कहा कि उसे मौका नहीं मिला क्योंकि वहां मीडिया और पुलिस थी.” सोनम ने ही राज कुशवाहा के साथ मिलकर रची थी! इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी 29 साल के राजा रघुवंशी ने 11 मई 2025 को धूमधाम से सोनम से शादी की थी. शादी के तुरंत बाद ही उसे मौत के घाट उतारने का प्लान तैयार हो चुका था. उसकी नई नवेली पत्नी सोनम ने ही राज कुशवाहा के साथ मिलकर रची थी. साजिश के तहत यह कपल शिलॉन्ग पहुंचा था. 21 मई को शिलॉन्ग पहुंचने के बाद इस कपल ने 22 मई को चेरापूंजी में जाकर एक होमस्टे लिया. कपल के साथ ही हत्याकांड में संलिप्त अन्य आरोपियों ने भी वहां पर होमस्टे लिया. लेकिन, इस बात की बिल्कुल भी भनक राजा रघुवंशी को नहीं थी. ‘ऑपरेशन हनीमून’ के जरिए जांच जारी मेघालय पुलिस ने राजा रघुवंशी हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ने के लिए एक विशेष ऑपरेशन चलाया, जिसका नाम ‘ऑपरेशन हनीमून’ रखा गया. पुलिस ने बताया कि यह मामला काफी जटिल था, इसलिए इसे एक ऑपरेशन के रूप में लिया गया. इस ऑपरेशन के तहत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है. 

उज्जैन में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई , जब आंख खुली तो बुलडोजर अपनी कार्रवाई में लग चुका था

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर से सटे इलााके में बुधवार को फिर बुलडोजर गरजा. थाना महाकाल क्षेत्र अंतर्गत आने वाली बेगमबाग कॉलोनी में अवैध निर्माण को हटाया गया. यहां पर 23 मई को भी बुलडोजर की कार्रवाई हुई थी. इस दौरान 3 प्रॉपर्टी ध्वस्त करने के बाद 4 और अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए. इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. प्रशासन ने कुल 28 प्रॉपर्टी चिह्नित की गौरतलब है कि बेगमबाग कॉलोनी श्री महाकाल मंदिर से 500 मीटर के दायरे में आती है. महाकालेश्वर मंदिर जाने के लिए यहीं से मुख्य रास्ता भी है. यहां ब्रिज का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण व अन्य कार्य किए जाने हैं. इस क्षेत्र में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने कुल 28 मकान-दुकान चिह्नित किए हैं. इन प्रॉपर्टी के मालिकों ने नियम-शर्तों का उल्लंघन किया है, जिन्हें ध्वस्त किया जाना है. सभी 28 प्रॉपर्टी संचालकों ने न्यायालय से स्टे लिया है, जिसकी समय सीमा खत्म होती जा रही. अब तक कुल 7 प्रॉपर्टी ध्वस्त की जा चुकी हैं. प्रशासन का कहना है कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. महाकाल क्षेत्र में सुबह से गरजा बुलडोजर  उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी ने बताया “श्री महाकाल मंदिर क्षेत्र में बेगमबाग मोहल्ला है, जहां 1998 में विकास प्राधिकरण ने जमीन दुकानें लीज पर दी थीं. सर्वे में पाया गया कि लीज रिन्यू नहीं करवाई गई. दुकानों के साथ ही इस एरिया को रहवासी भी बना लिया. नोटिस दिए पर जवाब नहीं मिला तो अब ध्वस्तीकरण के लिए 7 दिन में खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. अब कार्रवाई की जा रही है.” IPS राहुल देशमुख ने बताया “शांति बनाए रखने के लिए 250 से अधिक पुलिस बल तैनात है. कार्रवाई शांतिपूर्वक जारी है.” 

जीसीएफ में बनी लाइट फील्ड गन की गूंज फिर सीमा पर सुनाई पड़ेगी, 19 किमी की दूरी तक गोला दागने की क्षमता

जबलपुर  आयुध क्षेत्र की प्रमुख फैक्ट्रियों में शुमार गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में बनी लाइट फील्ड गन (एलएफजी) की गूंज फिर सीमा पर सुनाई पड़ेगी। गन का तय समय पर उत्पादन के बाद परीक्षण लांग प्रूफ रेंज में होगा। भारतीय सेना ने करीब एक दशक बाद एलएफजी को लेकर अपनी रुचि दिखाई है। जिसके बाद 18 गन का उत्पादन जीसीएफ करने जा रहा है। महत्वपूर्ण है कि पूर्व में जीसीएफ में बनने वाली लाइट फील्ड गन का उत्पादन नया आर्डर नहीं मिलने के कारण लगभग बंद कर दिया गया था। आखिरी लाइट फील्ड गन फैक्ट्री ने 2014-15 में बनाई थी। 17 से 19 किमी की दूरी तक गोला दागने वाली यह गन कभी फैक्ट्री का मुख्य उत्पादों में शामिल है। एलएफजी के साथ ही साथ निर्माणी ने सारंग और धनुष तोप पर भी फोकस किया है। लेकिन भार में हल्की एलएफजी को सेना की हरी झंडी मिली तो जीसीएफ के पास तीन अलग तरह के गन बनाने पर तेजी से कार्य शुरू हुआ और इस वित्त वर्ष के शेष माहों में लक्ष्य तक पहुंचने दक्ष टीम जुट गई। यह गन 17 से 19 किमी की दूरी तक गोला दागने में सक्षम प्रति मिनट चार राउंड फायर किए जा सकते हैं इस बैरल फायरिंग पोर्ट पर 360 डिग्री घूम सकता है इसकी क्षमता 100 राउंड की है करगिल युद्ध में भी इस गन का इस्तेमाल एडवांस वैपन एंड इक्विपमेंट कंपनी की एक इकाई जीसीएफ की 105 एमएम की इस गन की अहमियत इसलिए भी है, क्योंकि यह हल्के वजन की होती है। इसे हेलीकाप्टर के माध्यम से सुदूर सीमाई क्षेत्र, दुर्गम स्थानों में आसानी से पहुंचाया जा सकता है। करगिल युद्ध में भी इस गन का इस्तेमाल हुआ था। सामान्य तौर पर वह सालाना 50 गन का उत्पादन करती रही है। वजन घटाकर बनाया गया लाइट फील्ड गन पहले यह गन मार्क-1 व मार्क-2 नाम से विकसित हुई, बाद में इसे एलएफजी नाम दिया गया। वजन में कम होने की वजह से इसका परिवहन आसान होता रहा है। इसकी मारक क्षमता 17 से 19 किलोमीटर तक है। पहले इसे इंडियन फील्ड गन भी कहा जाता था। लेकिन इसका वजन अधिक होने के कारण इस्तेमाल करना थोड़ा कठिन था। इसे घटाने पर शोध हुआ। इसकी टेल यानी पीछे के हिस्से को मॉडिफाई किया गया। इसी पर गन मूव करती थी। उसमें लोहे के वजनदार टुकड़ों की जगह पाइप लगाया गया। ऐसे में यह हल्की हो गई और इस तरह बाद में इसका नाम लाइट फील्ड गन हो गया। एक साल में 72 गन बनाने का रिकार्ड माना जा रहा है कि रक्षा उत्पादन समय पर पूरा हुआ तो बढ़कर टारगेट मिलने की संभावना प्रबल होगी। अत: निर्माण का पूरा फोकस एलएफजी को आकार देने पर है। बता दें कि जीसीएफ के नाम एक साल में 72 गन बनाने का रिकार्ड है। इस संबंध में जीसीएफ के कार्यकारी निदेशक राजीव गुप्ता ने बताया कि अपनी खूबियों के कारण लाइट फील्ड गन की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। अभी हम 18 गन पर कार्य कर रहे हैं और दक्ष टीम की मदद से मांग को ध्यान में तय समय पर उत्पादन पूरा हो सकेगा।

ढाई लाख में की शादी दुल्हन टॉयलेट के बहाने भागी, कैलासर से आए दूल्हे को दलालों ने फंसाया

रोहतास/ कैलासर  सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि बिहार के सासाराम में एक भगोड़ी दुल्हन की खबर सामने आई है। जहां मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के कैलासर का रहने वाला मोनू राज शिवहरे दलाल के जरिए ढाई लाख रुपये देकर रोहतास जिले के तिलौथू की काजल कुमारी से शादी रचाने पहुंचा। सासाराम के धर्मशाला मोड़ पर स्थित एक धर्मशाला में फर्जी पंडित ने मोनू राज की धर्मशाला के कमरे में ही शादी कर दी। शादी के बाद टॉयलेट के बहाने भागी दुल्हन शादी के बाद टॉयलेट जाने के बहाने नई नवेली दुल्हन फरार हो गई। बाद में कथित रूप से पता चला कि लड़की के फर्जी चाचा, फर्जी बहन, फर्जी मामा भी ढाई लाख रुपये लेकर फरार हो गए। इसके बाद रोता-गाता हुआ दूल्हा सासाराम के नगर थाना फरियाद लेकर पहुंचा। धर्मशाला के कमरे में नकली पंडित ने कराई शादी इस पूरे प्रकरण में सासाराम के तकिया मोहल्ले में किराए के मकान में रह रही पिंकी देवी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उसने ही धर्मशाला के एक कमरे में शादी कराने के लिए ढाई लाख रुपये कैश लिए थे। आरोप है कि फर्जी शादी कराकर दुल्हन सहित सभी फर्जी बहन, फर्जी चाचा, फर्जी मामी फरार हो गए। फिलहाल पुलिस ने एक नकली चाची को पूछताछ के लिए अपने पास बिठाया है। राजो देवी नामक एक महिला जो करगहर की रहने वाली है, जो दुल्हन की चाची बनी थी। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। लड़की की कमी के चलते MP से बिहार पहुंचा था शादी करने पीड़ित दूल्हा और उसके भाई ने बताया कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास वे लोग रहते हैं। वहां लड़कियों की कमी है। कई लड़के कुंवारे ही जीवन बिता रहे हैं। ऐसे में दलाल के माध्यम से संपर्क हुआ कि बिहार में ढाई लाख रुपये में शादी के लिए लड़की मिल रही है। चूंकि इस पूरे प्रकरण में पिंकी देवी नामक महिला ही मास्टरमाइंड है। दूल्हा पक्ष ने पैसे के लेनदेन का वीडियो भी बना लिया है। जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसकी हम पुष्टि नहीं करते। बताया जाता है कि लड़की अपने साथ आभूषण और कई उपहार भी लेकर भाग गई। दूसरे राज्यों में बेची जाती रही हैं रोहतास की लड़कियां रोहतास जिले के पर्वतीय इलाकों की गरीब लड़कियों को पहले भी दलाल टारगेट करते रहे हैं। उन्हें हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे इलाके में पैसे लेकर बेचने का धंधा चलता रहा है। इस बार मामला उलटा पड़ा है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के कैलारस से शादी करने आया दूल्हा ही यहां लूट गया है। कल रात से ही दूल्हा, उसका भाई संजय शिवहरे सासाराम के नगर थाने में ही अपनी गुहार लेकर बैठा है। उधर, पुलिस पूरे मामले की तहकीकात कर रही है। पूरे प्रकरण के पीछे एक बड़ा गैंग कम कर रहा है। पूरे मामले पर सासाराम अनुमंडल पुलिस अधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि मामले का जांच के बाद ही कुछ कहा जाएगा। इसके बाद रोता बिलखता दूल्हा नगर थाने में शिकायत करने पहुंचा। पीड़ित युवक की पहचान मुरैना जिले के कैलासर निवासी संजय शिवहरे (40) के रूप में हुई है। 5 दिन पहले मुरैना से सासाराम आया था दूल्हा दूल्हा संजय शिवहरे ने बताया, ‘मेरे गांव में लड़कियों की कमी है। एक महीने पहले गांव में एक दलाल से मेरी मुलाकात हुई। उसने मेरी शादी करवाने का वादा किया।’ ‘इसके लिए उसने लड़की वालों को ढाई लाख रुपए देने की शर्त रखी। उसकी बातों में आकर मैं तैयार हो गया। 5 दिन पहले मैं अपने बड़े भाई के साथ सासाराम आया।’ ‘बिक्रमगंज के होटल में बिहार की दलाल पिंकी देवी ने लड़की को दिखलाया। लड़की पसंद आने पर शादी की बात तय हो गई। ‘मंगलवार की रात सासाराम की धर्मशाला के कमरे में फर्जी पंडित ने साड़ी, फुल, मिठाई और 551 रुपए दिलवाए। इसके बाद कमरे में ही हमारी शादी हुई।’ सब भाग गए फर्जी चाची पकड़ी गई पुलिस को दिए आवेदन में दूल्हे ने बताया ‘इस पूरे मामले में सासाराम के तकिया मोहल्ले में किराए पर रहने वाली पिंकी देवी मुख्य आरोपी है। उसने ही धर्मशाला में शादी कराने के लिए पैसे लिए।’ जिसका हमने वीडियो बना लिया।’ ‘शादी के थोड़े देर बाद लड़की टॉयलेट जाने के बहाने कमरे से निकली और भाग गई। धीरे-धीरे करके फर्जी बहन, फर्जी चाचा, फर्जी मामी सब फरार हो गए। लेकिन आखिर में हमने नकली चाची राजो देवी को पकड़ लिया। जिसे हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।’ बहन के मना करने पर भी कराई शादी दूल्हे के बड़े भाई मोनू राज शिवहरे ने बताया कि ‘छोटे भाई की शादी करने एमपी से सासाराम आए थे। यहां आने के बाद हमें लड़की दिखाई गई। लड़की पसंद आने के बाद मैंने अपनी बहन को फोन किया। उसे जब बताया कि लड़की हमें पसंद आई है और शादी के लिए ढाई लाख की डिमांड की है।’ ‘इतने में दीदी ने शादी के लिए मना करते हुए बोला कि दलाल के चक्कर में मत पड़ो। वापस आ जाओ, यहीं शादी करवा देंगे। लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी और पैसे देकर धर्मशाला में शादी करवा दी।’ पुलिस हिरासत में फर्जी चाची करगहर निवासी राजो देवी ने बताया कि ‘पिंकी देवी से बाजार में खरीदारी के दौरान दोस्ती हुई थी। उसके बोलने पर वो शादी में शामिल होने आई थी। उन्हें भगोड़ी दुल्हन और फर्जी शादी के बारे में जानकारी नहीं थी।’ हालांकि, पीड़ित युवक का कहना है कि ये दुल्हन की चाची बनकर मुझसे मिली थी। शादी होने के बाद मुझे पकड़कर फूट-फूटकर रो रही थी। सासाराम अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि ‘पैसे लेकर दुल्हन के भागने का मामला आया है। पीड़ित के आवेदन पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।’

अंतिम संस्कार कर वापस लौट रहे भाजपा नेता की सड़क हादसे में मौत

मैहर  मैहर के भाजपा नेता की सड़क हादसे में मौत हो गई। परिवार के पांच सदस्य घायल भी हुए हैं। सभी लोग अपने परिवार की महिला का प्रयागराज में अंतिम संस्कार कर वापस आ रहे थे।  मैहर के भाजपा नेता और पूर्व पार्षद पुरुषोत्तम चौरसिया(55) की चाची और लवकुश चौरसिया की मां का मंगलवार को निधन हो गया था। चाची की इच्छा के अनुसार परिवार के 6 सदस्य उनका अंतिम संस्कार करने प्रयागराज गए थे। वापस लौटते समय हादसा हो गया। हादसे के बाद एंबुलेंस चालक मौके से फरार हो गया। एंबुलेंस में सवार पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों में पोलो चौरसिया (28), दिवाकर चौरसिया (60), लखन चौरसिया (46), रामलाल चौरसिया (55) और प्रमोद चौरसिया (45) शामिल हैं। सभी घायलों को सतना के बिड़ला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अमरपाटन थाना प्रभारी केपी. त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घायलों को तत्काल बचाव दल की मदद से एंबुलेंस से निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। फरार चालक की तलाश जारी है।

बिजली खपत कम करेंगे तो बिल भी कम ही आएगा, रीडिंग में भी कोई गड़बड़ी नहीं हो रही

बिजली खपत कम करेंगे तो बिल भी कम ही आएगा, रीडिंग में भी कोई गड़बड़ी नहीं हो रही घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं ने बताए फायदे  भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की पहल पर भोपाल सहित पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र के 16 जिलों में घरेलू स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। भोपाल शहर वृत्त में लगभग तीन माह पहले लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से जब बातचीत की तो अनेक सकारात्मक पहलू सामने आए। अधिकतर स्मार्टमीटर उपभोक्ताओं ने फायदा होने की बात कही है। मकान नंबर 23, देवीनगर कॉलोनी करोंद भोपाल के उपभोक्ता महेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां तीन महीने पहले स्मार्ट मीटर लगा था। शुरू में उन्हें डर था की कहीं स्मार्ट मीटर से बिल तो अधिक नहीं आएगा, लेकिन जैसे ही अगले महीने बिल आया तो देखा कि कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं आई। बल्कि अब तो ऐप के माध्मय से अपने घर के बिजली उपयोग को भी नियंत्रित करना सीख गए हैं, क्योंकि जो उपकरण हम अधिक समय चलाते थे, उन पर नियंत्रण करने से बिल में अब कमी आई है। इसी तरह करोंद के ही देवकी नगर की उपभोक्ता श्रीमती देव कुमारी ने बताया कि स्मार्ट मीटर से रीडिंग लेने में कोई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि अब तो अपने आप रीडिंग हो रही है और सटीक रीडिंग हो रही है। अब तो न कोई रीडिंग लेने आता है, बल्कि अपने आप दूरसंचार प्रणाली से रीडिंग हो रही है और निर्धारित तिथि को सही रीडिंग का बिल मोबाइल पर दिया जा रहा है। एक अन्य स्मार्ट मीटर उपभोक्ता मकान नंबर 87, गांधीनगर निवासी शेरू रजक ने बताया कि अब हमें बिजली की खपत की हर पंद्रह मिनट में जानकारी मिल रही है। इससे अंदाजा लगाना आसान हो गया कि हम किस समय कितनी बिजली की खपत करते हैं। इससे एक तो बिजली की बचत करने में आसानी हो रही है, दूसरी बात यह कि बिल में पूरी पारदर्शिता आ गई है, क्योंकि रीडिंग में गलती होने की अब जरा सी भी गुंजाइश नहीं है। मकान नंबर 53, एकतापुरी निवासी अमित सेमल ने बताया कि वे जिस किराए के मकान में रहते हैं, वहां स्मार्ट मीटर लगा है। हमें डर था कि कहीं बिल अधिक आया तो कैसे भरेंगे। लेकिन नया मीटर लगने के बाद पहले ही महीने में हमने देखा कि सब्सिडी घटाकर बिल तो 82 रूपये ही आया है। इसके बाद लगातार तीन माह हो गए 100 रुपये से कम ही बिल आ रहा है, क्योंकि हमारी बिजली खपत कम है। इसलिए हमारे लिए तो यह मीटर फायदेमंद है। घरेलू स्मार्ट मीटर के फायदे              ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।              बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।              एप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।              ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।              ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।              ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।              ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकता है।  

सिपरी साफ्टवेयर की बारीकियां सीखने गुरूवार को भोपाल आया महाराष्ट्र का 9 सदस्यीय दल

जल गंगा संवर्धन अभियान भोपाल  जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा परिषद द्वारा किए गए नवाचार का अध्ययन करने महाराष्ट्र सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का 9 सदस्यीय दल दो दिवसीय दौरे पर मध्यप्रदेश आएगा। यह दल 12 जून को भोपाल आएगा। साथ ही फील्ड में जाकर सिपरी साफ्टवेयर खेत तालाब और अमृत सरोवरों के निर्माण स्थल चयन में किस तरह से काम करता है, दल के सदस्य इसकी बारीकियां सीखेंगे। इसके साथ ही मनरेगा परिषद द्वारा कार्ययोजना को लेकर तैयार किए गए प्लानर ऐप के बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। इस दौरान दल के सदस्य 12 जून को भोपाल एवं 13 जून को रायसेन जिले के सांची विकासखंड का भ्रमण करेंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बारिश के पानी को बचाने के लिए बनाए जा रहे खेत तालाब, अमृत सरोवर और कूप रिचार्ज पिट का कार्य देखेंगे। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय भूमि संसाधन विभाग द्वारा बीते दिनों राष्ट्रीय समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। समीक्षा कार्यक्रम में मनरेगा आयुक्त-संचालक वाटरशेड मिशन अवि प्रसाद ने मध्य प्रदेश में “जल संरक्षण व संवर्धन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के कार्यों के चयन तथा मॉनिटरिंग के लिए किए गए नवाचार सिपरी SIPRI सॉफ्टवेयर (A Decision Support System) का प्रस्तुतीकरण किया था, जिसकी भारत सरकार द्वारा प्रशंसा की गई थी। साथ ही भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के इस नवाचार को समीक्षा कार्यवाही विवरण में रेखांकित किया। राष्ट्रीय समीक्षा में आए हुए अन्य राज्यों के प्रमुख सचिवों और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों ने भी सिपरी (SIPRI) की उपयोगिता की सराहना की और अपने राज्यों में भी इसके उपयोग की रुचि दिखाई थी। अन्य राज्यों से भी सिपरी (SIPRI) के अध्ययन के संबंध में प्रस्ताव प्राप्त हो रहे है। इसी के अंतर्गत महाराष्ट्र सरकार के वाटरशेड विभाग के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलाकर रानादेवी के नेतृत्व में 9 सदस्यों का दल 12 और 13 जून को मध्य प्रदेश प्रवास पर आ रहा है। वे यहां आकर SIPRI सॉफ्टवेयर के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे। साथ ही इसे कैसे बनाया गया है, इसमें किस-किस तरह के डेटाबेस का उपयोग किया जा रहा है इसका गहन अध्ययन करेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि इसका उपयोग वे किस तरीके से महाराष्ट्र में प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के कार्यों के लिए कर सकते हैं। इस दल में महाराष्ट्र शासन के मंत्रालय, जिला और विकास खंड स्तर के अधिकारी शामिल है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया संत कबीर को नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान समाज सुधारक, कवि और संत कबीरदास जी की जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों, आडंबर एवं अंधविश्वास के विरुद्ध संत कबीर की जागृति अनंत काल तक समाज को लोक कल्याण की दिशा प्रदान करती रहेगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बिस्मिल जी का पुण्य स्मरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां भारती की परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, श्रद्धेय रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की जयंती पर उन्हें नमन् किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काकोरी केस सहित विभिन्न प्रयासों से बिस्मिल जी ने दमनकारी हुकूमत की जड़ें हिला दीं और असंख्य देशवासियों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता सेनानी बिस्मिल जी  का योगदान स्मरणीय रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रख्यात साहित्यकार प्रो. हाशमी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रतलाम निवासी प्रख्यात साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। प्रो. अजहर हाशमी का कल रतलाम में निधन हो गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में श्री हाशमी ने निरंतर कार्य किया। वे विभिन्न धर्म ग्रंथों के अध्ययन में भी रुचि रखते थे। उनके निधन से मध्यप्रदेश ने एक शीर्ष और प्रतिष्ठित साहित्यकार खो दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. हाशमी की आत्मा की शांति और उनके शोकाकुल परिजन को यह दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।  

मंत्री शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है

भोपाल जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है। ग्रामीण सांस्कृति की धड़कन है वाद्ययंत्र मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कोल जनजाति का मुख्य जीविकोपार्जन वनोपज संग्रहण, कृषि और मजदूरी पर आधारित है। प्रकृति की पूजा करने वाली यह जनजाति जंगल, नदियों और पहाड़ों से गहरा नाता रखती है। कोल समाज के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है। सरकार और समाज मिलकर कोल जनजाति के उत्थान और सम्मान के लिये कार्य कर रहे है। सरकार द्वारा जनजातियों के विकास के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से और औद्योगिकरण के विकास से कोल जनजाति भी विकास की और अग्रसर है। शिक्षा और रोजगार पर शासन का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजाति वर्ग के चहुँमुखी उत्थान के लिये राज्य और केन्द्र सरकार के द्वारा छात्र-छात्राओं के विकास के लिये किये जा रहे समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि कोल जनजाति के छात्र-छात्राएँ आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है। राज्य शासन द्वारा म.प्र. प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों को देय राशि प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 40 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 60 हजार एवं साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 50 हजार की राशि प्रदान की जाती है। इसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता के लिए आय सीमा का बंधन नहीं है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले जनजातीय वर्ग के सफल अभ्यार्थी जिनके माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 8 लाख से अधिक न हो को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 25 हजार की राशि प्रदान की जाती है। दूसरी बार सफलता प्राप्त करने पर अभ्यर्थी को उपरोक्त उल्लेखित राशि की 50 प्रतिशत राशि एवं तीसरी बार योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाता। अंगेजी हुकुमत के विरूद्ध हुआ कोल विद्रोह मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में कोल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकुमत के अन्याय के विरूद्ध 1831 में अंग्रेजों से लोहा लिया, जिसे कोल विद्रोह के रूप में याद किया जाता है। बुधू भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में कोल विद्रोह असमानता, शोषण और अत्याचार के विरूद्ध अन्य जनजातियों के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना। कोल विद्रोह से प्रभावित होकर इसका अनुसरण करते हुए अन्य कई जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।  

राज्यपाल ने कहा वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी

लक्ष्य को समय सीमा से पहले पूरा करने का भाव जरूरी : राज्यपाल मंगुभाई पटेल सिकल सेल मिशन के कार्य मानवता की सेवा का माध्यम : राज्यपाल राज्यपाल ने कहा वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी राजभवन में सिकल सेल समीक्षा बैठक हुई भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी है। कार्य का भाव लक्ष्य को समय सीमा से पूर्व पूरा करने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल मिशन के कार्य मानवता की सेवा के माध्यम है। ईश्वरीय कृपा के भागी होने का यह बड़ा अवसर है। राज्यपाल पटेल राजभवन में सिकल सेल मिशन के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी उपस्थित थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के द्वारा सिकल सेल उपचार, प्रबंधन और नियंत्रण प्रयासों की जानकारी प्राप्त की। उनको बताया गया कि मिशन के अंतर्गत 19 जून से 3 जुलाई तक समस्त ग्राम पंचायतों, एकलव्य आवासीय स्कूलों एवं छात्रावासों में मेगा शिविर आयोजित होंगे। अधिक से अधिक स्क्रीनिंग जांच की जाएगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से लेकर जिला चिकित्सालयों में पीओसी किट  के द्वारा स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रतिदिन स्क्रीनिंग जांच का डेटा पोर्टल में दर्ज होगा। जेनेटिक काउंसलिंग की जाएगी। जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड प्रदान किए जाएंगे। ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर चिह्नित सिकल सेल रोगियों के लिए शिविर लगेंगे। उन्हें विशेषज्ञों की परामर्श सेवायें उपलब्ध कराई जाएगी। सिकल सेल रोगियों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यू.डी.आई.डी. कार्ड प्रदान कर पेंशन की सुविधा प्रदान की जाएगी। आयुष विभाग द्वारा बताया गया कि विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में जनजातीय बहुल 20 जिलों में संचालित 78 आयुष औषधालयों में शिविर का आयोजन किया जाएगा। सिकल सेल उपचार में सहायक आयुर्वेद दवाओं की किट का वितरण होगा। रोग उपचार में सहायक स्थानीय वनस्पति के संरक्षण, संवर्धन के प्रति जन जागरूकता के कार्य होंगे। सिकल सेल एनीमिया प्रभावित प्रत्येक ग्राम में जनजागृति के लिए प्रभात फेरी, योगाभ्यास, ग्राम-सभा आदि के आयोजन किए जाएंगे। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, सचिव जनजातीय प्रकोष्ठ श्रीमती जमुना भिड़े, संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सुसलोनी सिडाना, आयुक्त आयुष संजय मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

जबलपुर में गंदगी फैलाने वालों पर अब लगेगा 50000 रुपए तक का जुर्माना

जबलपुर  जबलपुर नगर निगम में शहर में गंदगी फैलाने वाले के खिलाफ अब कड़ा रुख अख्तियार किया है, शहर में गंदगी फैलाने वाले पर नगर निगम ने 50000 रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। सदन की बैठक में इस बात का निर्णय लिया कि जो लोग बार-बार शहर की व्यवस्था बिगाड़ने पर उतारू है उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। यही वजह है कि निगम ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया गया है। जिसमें कहा गया है कि सड़क में कचरा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ 1000 से लेकर 50000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने पर नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति   सदन की बैठक में कचरा फैलाने वालों पर 50 हजार रुपए तक की जुर्माने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष रमेश मिश्रा ने भारी विरोध किया, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोगों के घरों तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो रहा है, सफाई व्यवस्था भ्रष्टाचार है ऐसे में कचरा फैलाने पर जुर्माना लगाना कहीं से भी उचित नहीं है। निगम की बैठक में मुआवजा राशि, महापुरुषों के नाम के मार्गों का नामकरण, आउटसोर्स श्रमिकों को समय वृद्धि एवं एक राष्ट्र एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पारित किए गए। खास बात यह रही कि सदन की इस बैठक में 18 मिनट में 18 प्रस्ताव सर्व सम्मति से पास किए गए।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने निर्देशित किया है कि डाटा अपडेशन में देरी पर संबंधित डीडीओ की जिम्मेदारी तय की जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों के डाटा को समय पर अपडेट करने के निर्देश जिम्मेदार अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि डाटा अपडेशन में देरी पर संबंधित डीडीओ की जिम्मेदारी तय की जाए। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि डाटा क्लीनिंग एक्सरसाइज एक सतत् प्रक्रिया है, जिससे सेवानिवृत्त होने वाले, प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले कर्मचारियों, मृत कर्मचारियों एवं अन्य विभिन्न स्थितियों में अन्य स्थानों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का डाटा अपडेट किया जाता है।  उन्होंने बताया कि प्रदेश के कर्मचारियों का डाटा सत्यापन किया गया है और अभी तक कोई भी कर्मचारी संदिग्ध नहीं पाया गया है अर्थात किसी भी कर्मचारी को किसी भी प्रकार से कोई भी आर्थिक लाभ नियमों के विपरीत नहीं मिला है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि डाटा क्लीन करने की प्रक्रिया के बाद IFMIS NEXT GEN मे Data Migration करना सुविधाजनक होगा। इससे शुद्ध डाटा की फीडिंग हो सकेगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि प्रदेश में आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा गठित स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) द्वारा विभिन्न डाटा सेट्स का परीक्षण तथा विश्लेषण निरंतर हो रहा है। सरकार द्वारा सुशासन के दृष्टिगत की जाने वाली कार्यवाही में IFMIS डाटा से संज्ञान में आया कि प्रदेश में 36 हजार 26 नियमित, 8 हजार 784 गैर नियमित कुल मिलाकर 44 हजार 810 कर्मचारियों का वेतन आहरित नहीं किया गया है। शासन स्तर से वेतन आहरण नहीं होने के कारणों का पता लगाने के लिये निर्देश जारी किये गये। संभावित कारणों की पड़ताल होने पर जांच में सामने आया कि त्यागपत्र देने वाले कर्मचारी, सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी, प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले कर्मचारी,बगैर एम्पलाई कोड वाले कर्मचारी और मृत कर्मचारियों का डाटा समय पर अपडेट नहीं होने से कर्मचारियों का डाटा मिसमेच हुआ है। शासन स्तर से इनकी वास्तविक संख्या ज्ञात करते हुए IFMIS में DDO तथा कोषालय अधिकारी स्तर से डेटाबेस में आवश्यक अपडेट कराने के उद्देश्य से समस्त DDO से जानकारी कोषालय अधिकारियों के माध्यम से एकत्रित कर भविष्य में सभी प्रविष्टियां समय पर करने के निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त कोष एवं लेखा ने बताया है कि इस सन्दर्भ में ऐसे नियमित एवं गैर नियमित कर्मचारियों की डाटा सम्बन्धी जानकारी प्राप्त की गई है, जिनका वेतन IFMIS  कोषालय प्रणाली से आहरित नहीं हुआ है, (यह अन्य किसी प्रणाली से आहरित हो सकता है यथा प्रतिनियुक्ति, स्थानीय निकाय आदि)। इसके साथ अन्य संभावित कारणों को DDO के माध्यम से एकत्रित किया गया है। आयुक्त कोष एवं लेखा ने बताया कि प्रथम दृष्टया DDO से सत्यापन उपरांत जानकारी विश्लेषण करने पर अभी तक कोई संदिग्ध कर्मचारी परिलक्षित नहीं हुआ है। समस्त DDO को एम्पलाई कोड के समक्ष उपयुक्त flagging करने तथा एग्जिट एंट्री इत्यादि के माध्यम से डेटाबेस अद्यतन करने के निर्देश दिये गये हैं।

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