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भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों और विधायकों का महामंथन, सीएम के साथ प्रेजेंटेशन, खेती को लाभकारी बनाने पर चर्चा

भोपाल  सीएम डॉ मोहन यादव आज अभिमुखीकरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। कृषि कल्याण वर्ष के तहत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कुशाभाऊ कन्वेंशन सेंटर में जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों का अभिमुखीकरण कार्यक्रम होगा। जिसमें किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सहित उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सहकारिता एवं पशुपालन विभाग अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों से साझा की जाएगी। खेती को लाभ का धंधा बनाने पर फोकस इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “कृषि वर्ष” के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। दिनभर चलने वाले इस मंथन में इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर खेती को वास्तविक रूप में ‘फायदे का धंधा’ कैसे बनाया जाए। भोजन अवकाश के बाद दोपहर में कृषि और उससे संबद्ध विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के सामने अपनी कार्ययोजना का प्रजेंटेशन देंगे। विभागवार होंगे प्रजेंटेशन     कृषि विभाग: उन्नत बीज, खाद और नई तकनीकों पर आधारित योजनाएं।     उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन: नकदी फसलों और मछली पालन के जरिए आय दोगुनी करने का रोडमैप।     सहकारिता एवं पशुपालन: डेयरी और सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा। आज के कार्यक्रम की प्रमुख रूपरेखा     विशेष तकनीकी सत्र (सुबह 11:00 – 12:30): कृषि, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों द्वारा जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन।     सवालों का निराकरण (दोपहर 03:10): विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की समस्याओं और खेती से जुड़े सुझाव सीधे विभाग के बड़े अधिकारियों के सामने रखेंगे।     मंत्रीगणों का संबोधन (दोपहर 03:20): संबंधित विभागों के मंत्री अपनी प्राथमिकताओं को साझा करेंगे।     मुख्यमंत्री का मुख्य संबोधन (दोपहर 03:30): डॉ. मोहन यादव प्रदेश के किसानों के हित में सरकार के विजन और आगामी रणनीतियों पर अपनी बात रखेंगे। सक्रिय सहभागिता को लेकर मंथन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा आयोजित इस ‘अभिमुखीकरण’ कार्यक्रम के जरिए सरकार चाहती है कि हर जिले का जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के किसानों को सीधे योजनाओं से जोड़ने में मदद करे, ताकि कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सके।

काटजू अस्पताल में शुरू हुआ हाईटेक प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी सेंटर, मेनोपॉज और इन्फर्टिलिटी का इलाज एक ही जगह

भोपाल भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है।  करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।  

मैहर पालिका क्षेत्र में मांस, मछली और अंडे पर प्रतिबंध, प्रशासन ने शुरू की सख्ती

मैहर  चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व और मां शारदा के दरबार में उमड़ने वाली भारी श्रद्धालु भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। मैहर की धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए संपूर्ण नगर पालिका क्षेत्र में 9 दिनों तक मांस, मछली और अंडे के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।  एसडीएम दिव्या पटेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 19 मार्च 2026 से 27 मार्च 2026 की मध्य रात्रि तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान मैहर नगर पालिका क्षेत्र में किसी भी दुकान, होटल, ढाबे, रेहड़ी या अन्य स्थान पर मांसाहार की बिक्री, भंडारण या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए निर्णय मैहर मां शारदा मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां चैत्र नवरात्रि के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले के दौरान शहर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में शहर की धार्मिक शुचिता, स्वच्छता और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने यह कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि नवरात्रि के दौरान शहर में धार्मिक माहौल बना रहे और किसी भी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो, इसके लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है। कानून के तहत होगी कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है। यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाएगी प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में संबंधित विभागों और पुलिस की टीमें लगातार निगरानी रखेंगी, ताकि प्रतिबंध का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके। मैहर धार्मिक नगरी घोषित आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि मैहर को मध्यप्रदेश शासन के पर्यटन विभाग द्वारा धार्मिक नगरी घोषित किया गया है। नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेला लगता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की धार्मिक गरिमा बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रशासन ने नगर के सभी व्यापारियों और नागरिकों से अपील की है कि वे आदेश का पालन करें और नवरात्रि पर्व के दौरान शहर में धार्मिक वातावरण बनाए रखने में सहयोग करें।  

भोजशाला के पत्थरों ने खोला ऐतिहासिक राज, 16 मार्च की सुनवाई पर सभी की निगाहें

धार ऐतिहासिक भोजशाला की धरती से आखिरकार वह साक्ष्य सामने आया है, जिसका वर्षों से इंतजार था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के उत्खनन में पत्थर का दुर्लभ शिल्पखंड मिला है, जिस पर देव आकृतियां उकेरी हुई हैं। यह संभवतः पहली बार है जब भोजशाला के मंदिर स्वरूप का इतना सुस्पष्ट प्रमाण तस्वीर के साथ सामने आया है।यह साक्ष्य ऐसे समय सार्वजनिक हो रहा है जब 16 मार्च (सोमवार) को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर सुनवाई होनी है। अलग-अलग संरचनात्मक परतें सामने आईं वर्ष 2024 में एएसआइ द्वारा किए गए उत्खनन में कई अन्य महत्वपूर्ण संकेत भी सामने आए हैं। खोदाई के दौरान एक स्थान पर मिट्टी की एक मीटर मोटी परत के नीचे प्राचीन संरचना दिखी, जबकि एक अन्य स्थान पर पांच मीटर गहराई तक अलग-अलग संरचनात्मक परतें सामने आईं। इससे स्पष्ट होता है कि इस परिसर में प्राचीन काल से निर्माण गतिविधियां होती रही हैं। पत्थरों से बनी दीवार जैसी संरचना भी मिली परिसर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में पत्थरों से बनी दीवार जैसी संरचना भी मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन अवशेषों से भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप को समझने में बड़ी मदद मिलेगी। नींव में पत्थर-ईंट की परतें, सिक्के व स्थापत्य अवशेष मिले हैं। खोदाई में पत्थर व ईंटों की दीवारें, मंच, फर्श की परतें और कई स्थापत्य अवशेष सामने आए हैं। इनसे परिसर में अलग-अलग कालखंडों में निर्माण व पुनर्निर्माण के प्रमाण मिलते हैं। कुछ अवशेष राजा भोज के काल के कुछ अवशेष राजा भोज के काल यानी 11वीं शताब्दी से जुड़े होने के संकेत देते हैं। साल 2024 में सर्वे के दौरान सात ट्रेंच और कुछ परीक्षण गड्ढों में खोदाई की गई थी। मलबा हटाने पर मूर्तियों के टुकड़े और घरेलू वस्तुएं मिलीं मलबा हटाने के दौरान मूर्तिकला के खंड, स्थापत्य अवयव, सिक्के और अंगूठियां मिलीं। साथ ही अनाज पीसने के पाट, ओखली-मूसल जैसी घरेलू वस्तुएं भी सामने आईं। परमार काल की धरोहर के बारे में भी जानकारी दी गई उत्तर दिशा में चूने से पलस्तर किया हुआ बड़ा फर्श और तीन सीढ़ियों वाली संरचना भी मिली है। इंदौर के एडवोकेट और विशेषज्ञ विनय जोशी ने बताया कि रिपोर्ट में एक स्थान पर परमार काल की धरोहर के बारे में भी जानकारी दी गई है। उत्खनन के लिए जो ट्रेंच खोदी गई थीं, उनसे प्राप्त धरोहर अपने आप में यह प्रमाण देती हैं कि यह धरोहर भोजकालीन है। मस्जिद पक्ष करेगा विरोध मस्जिद पक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह सर्वे रिपोर्ट की बातों का विरोध करेगा। ऐसे में यह सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है। कोर्ट के आदेश पर सभी पक्षों को एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट सौंप दी गई है।

फ्लाई 91 और स्टार एयर शुरू करेंगी इंदौर से जलगांव, हैदराबाद, गोवा, बेलगाम-कोल्हापुर के लिए फ्लाइट्स

इंदौर  इंदौर से जलगांव और हैदराबाद के लिए उड़ान सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही एयरलाइन फ्लाई 91 मई से इंदौर-गोवा के बीच भी सीधी फ्लाइट शुरू करने की योजना बना रही है। इसके लिए एयरलाइन ने डीजीसीए में आवेदन भी कर दिया है। वहीं दूसरी ओर स्टार एयर इंदौर को बेलगाम और कोल्हापुर से जोड़ने की तैयारी पूरी कर चुकी है। इन उड़ानों का संचालन 30 मार्च से शुरू होगा। दोनों उड़ानें मुंबई के रास्ते संचालित होंगी और यात्री बिना विमान बदले अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि स्टार एयर पहले भी इंदौर से बेलगाम के लिए फ्लाइट संचालित कर चुकी है। हाल ही में इंदौर में फ्लाई 91 की मैनेजमेंट टीम और ट्रैवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टाफी) मध्यप्रदेश चैप्टर के पदाधिकारियों के साथ एक कॉफी मीट आयोजित की गई। इसमें इंदौर से प्रस्तावित उड़ानों, संभावित रूट और भविष्य में नेटवर्क विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। टाफी के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि नई एयरलाइन के संचालन से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और शहर का अन्य प्रमुख शहरों से हवाई संपर्क भी मजबूत होगा। खासतौर पर गोवा जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल के लिए सीधी उड़ान शुरू होने से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। बैठक में फ्लाई 91 की टीम ने कंपनी की विस्तार योजनाओं की जानकारी भी साझा की। एयरलाइन के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज चाको ने संदेश में बताया कि फ्लाई 91 फिलहाल गोवा, नांदेड़, सोलापुर, जलगांव, सिंधुदुर्ग, पुणे, अगत्ती, हैदराबाद और कोच्चि सहित नौ शहरों के लिए उड़ान सेवाएं संचालित कर रही है। इंदौर सहित छह नए शहरों को जोड़ने की तैयारी कटारिया ने बताया कि कंपनी मौजूदा तिमाही में चरणबद्ध विस्तार करते हुए इंदौर सहित छह नए शहरों को अपने नेटवर्क से जोड़ने की योजना बना रही है। इसके बाद एयरलाइन का नेटवर्क बढ़कर करीब 15 स्टेशनों तक पहुंच जाएगा, जिससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और मजबूती मिलेगी। सप्ताह में तीन दिन होंगी बेलगाम-कोल्हापुर उड़ानें स्टार एयर पहले इंदौर से गोंदिया और हैदराबाद के लिए उड़ानें संचालित करती थी। 15 जनवरी से कंपनी ने इसमें बदलाव करते हुए गोंदिया और मुंबई के लिए उड़ानों की शुरुआत की है। अब समर शेड्यूल में कंपनी अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। एयरपोर्ट के जनसंपर्क अधिकारी रामस्वरूप यादव ने बताया कि 30 मार्च से इंदौर-मुंबई फ्लाइट को आगे बढ़ाते हुए जाते समय बेलगाम और लौटते समय कोल्हापुर को जोड़ा जाएगा। इन उड़ानों का संचालन सप्ताह में तीन दिन—सोमवार, बुधवार और शनिवार को होगा। पहले भी बेलगाम के लिए उड़ान चला चुकी है स्टार एयर स्टार एयर ने 2019 में इंदौर से बेलगाम और राजस्थान के किशनगढ़ के लिए सीधी उड़ान शुरू की थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान उड़ानें बंद होने के बाद इन्हें दोबारा शुरू नहीं किया गया। करीब एक वर्ष पहले कंपनी ने इंदौर से गोंदिया और अहमदाबाद के लिए उड़ानें शुरू की थीं। बाद में अहमदाबाद की जगह पहले हैदराबाद और फिर मुंबई फ्लाइट संचालित की जाने लगी। अब मुंबई फ्लाइट के माध्यम से बेलगाम और कोल्हापुर का कनेक्शन मिलने से यात्रियों को सुविधा होगी। यह रहेगा उड़ानों का शेड्यूल     इंदौर-मुंबई-बेलगाम (एस5-462/112) : फ्लाइट शाम 5:50 बजे इंदौर से रवाना होकर 7:05 बजे मुंबई पहुंचेगी। मुंबई से 7:45 बजे उड़ान भरकर रात 8:50 बजे बेलगाम पहुंचेगी।     कोल्हापुर-मुंबई-इंदौर (एस5-163/461) : फ्लाइट सुबह 10:40 बजे कोल्हापुर से रवाना होकर 11:45 बजे मुंबई पहुंचेगी। मुंबई से दोपहर 12:25 बजे उड़ान भरकर 1:40 बजे इंदौर पहुंचेगी।

मध्य प्रदेश के 40 लाख आवारा पशुओं को मिलेगा विशेष 12 अंकों का कोड, केसरिया टैग से पहचान होगी

भोपाल  मध्य प्रदेश की सड़कों और खेतों में घूम रहे करीब 40 लाख आवारा पशुओं की पहचान अब दूर से ही हो सकेगी। केंद्र सरकार ने राज्य के उस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत आवारा मवेशियों के कान पर 12 अंकों वाला केसरिया या लाल रंग का पहचान टैग लगाया जाएगा। अब तक सभी पशुओं को पीले रंग के टैग लगाए जाते थे, जिससे पालतू और लावारिस पशुओं के बीच फर्क करना मुश्किल होता था। पहचान का नया डिजिटल फॉर्मूला अपर मुख्य सचिव (पशुपालन) उमाकांत उमराव के मुताबिक, अधिकारियों को फील्ड में मवेशियों के प्रबंधन में काफी दिक्कतें आ रही थीं। नए रंगों के कोड से नगर निगम और मवेशी पकड़ने वाले दस्ते बिना स्कैन किए यह समझ पाएंगे कि कौन सा पशु आवारा है और कौन सा किसी डेयरी या घर का है। यह पूरी कवायद भारत पशुधन परियोजना का हिस्सा है, जिसमें हर मवेशी का अपना एक डिजिटल डेटाबेस होगा। हादसों और मुआवजे का गणित राज्य विधानसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि आवारा मवेशी अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले दो साल में पशुओं की वजह से हुए 237 सड़क हादसों में 94 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी हर तीसरे दिन सड़क पर एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है। किसानों की दोहरी मार एक तरफ सड़कों पर हादसे बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ खरीफ सीजन में किसान पूरी रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आवारा पशुओं द्वारा फसल बर्बादी पर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने सदन में बताया कि विभाग के पास नुकसान का सटीक आंकड़ा फिलहाल मौजूद नहीं है। कानून क्या कहता है? मध्य प्रदेश में मवेशियों को लावारिस छोड़ना गौ-वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत अपराध है। इसके अलावा नगर निगम कानून के तहत मालिक पर पहली बार 200 रुपये और तीसरी बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के तहत एनजीओ के माध्यम से लाखों पशुओं को आश्रय दिया जा रहा है, लेकिन सड़कों पर संख्या अब भी चुनौती बनी हुई है।

16 मार्च को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे CM यादव, मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक बदलाव पर फैसला

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में आगामी 16 मार्च का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है, क्योंकि माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद प्रदेश सरकार में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार: नए चेहरों को मिल सकती है जगह, इस दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा मंत्रिमंडल विस्तार है। वर्तमान में कैबिनेट में चार पद रिक्त हैं। चर्चा है कि 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए सरकार 4 से 5 नए मंत्रियों को शपथ दिला सकती है। अमित शाह के साथ हुई पिछली ‘सीक्रेट मीटिंग’ के बाद अब पीएम मोदी के साथ इस पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि चैत्र नवरात्रि तक प्रदेश को नए मंत्री मिल सकते हैं। बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी: मुलाकात के दौरान केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सर्जरी पर भी चर्चा होगी। प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादलों की एक बड़ी सूची तैयार है। खबर है कि आईएएस रवि सिहाग मध्य प्रदेश छोड़कर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के भी केंद्र में इम्पैनलमेंट की चर्चा है। विकास योजनाओं के लिए केंद्र से बूस्टर डोज: मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रधानमंत्री को प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराएंगे, केन-बेतवा लिंक परियोजना और लाड़ली बहना योजना के सकारात्मक फीडबैक पर चर्चा होगी। प्रदेश में पिछले डेढ़ साल में हुए 30 लाख करोड़ रुपये के MOU और औद्योगिक गलियारों के लिए केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग की जा सकती है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) के लिए विशेष बजट की मंजूरी मिलने की भी प्रबल संभावना है। 2028 का ‘रोडमैप’ और बड़े नेताओं की विदाई: बिहार चुनाव में भाजपा की जीत के बाद केंद्रीय नेतृत्व का मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भरोसा बढ़ा है। चर्चा है कि इस बार विस्तार में मुख्यमंत्री को ‘फ्री हैंड’ मिल सकता है। ऐसे में कुछ कद्दावर मंत्रियों की छुट्टी कर उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है, ताकि 2028 के चुनाव के लिए एक नई और ऊर्जावान टीम तैयार की जा सके। मुख्य बिंदु: तारीख: 16 मार्च (सोमवार) स्थान: दिल्ली। एजेंडा: मंत्रिमंडल विस्तार, प्रशासनिक तबादले और विकास परियोजनाएं। संकेत: चैत्र नवरात्रि तक हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव।  

हिनौती गौधाम में अव्यवस्थित निर्माण पर रोक, मास्टर प्लान के मुताबिक काम कराने के निर्देश: उपमुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के हिनौती गौधाम में आयोजित बैठक में कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार ही सभी निर्माण कार्य कराये जांय। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि गौधाम में प्रस्तावित गौशेड, भूसा शेड सहित अन्य कार्य व्यवस्थित ढंग से लेआउट देकर प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम के निर्माणाधीन गौशेड एवं गेस्ट हाउस का कार्य 30 मार्च तक पूर्ण कराकर लोकार्पण कराने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विधायक मनगवां द्वारा प्रदत्त की गयी 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से गोपाल, सुरभि एवं नंदिनी गौशेड निर्माण कार्य की प्रगति जानकारी ली। उन्होंने सभी कार्य 30 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिये। कामधेनु गौशेड के साथ भूसा शेड का कार्य भी नियत समय तक पूर्ण किये जाने का निर्देश दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उनके स्वयं की विधायक निधि से स्वीकृत 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से मास्टर प्लान के अनुसार व्यवस्थित ढंग से निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गौधाम से लगी किसानों की निजी भूमि में गौवंश न जाएँ यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गौशाला संचालन समिति में क्रियाशील सदस्यों को शामिल करने के भी निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि गौधाम से लगे नाले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार शीघ्र कार्य प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम में जल निगम एवं पीएचई द्वारा निर्मित की गयी जन भागीदारी से टंकी व नेटवर्क पाइप लाइन कार्य के लिए विभागीय अधिकारियों की प्रशंसा की। इस अवसर पर बताया गया कि सभी गौशेड में पानी का कनेक्शन कर दिया गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौधाम के लिए शासकीय भूमि का शेष सीमांकन कराने के निर्देश बैठक में अधिकारियों को दिये। उन्होंने गौधाम के लिए सड़क निर्माण व अन्य प्रयोजन के लिए निजी भूमि दाताओं का द्वारा प्रदत्त भूमिदान के लिये सम्मान किया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमार्ग से गौधाम तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ करायें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौपूजन कर गाय को गुड खिलाया। विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष मती नीता कोल, पूर्व विधायक  श्यामलाल द्विवेदी सहित विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय जन उपस्थित रहे।    

संस्कृति और परंपराओं का उल्लास आने वाली पीढ़ी को समझाएगा उनका महत्व : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को जितना उल्लास के साथ मनायेंगे आने वाली पीढ़ी उसके महत्व को समझेगी और वह भी इस परंपरा को आजीवन काल तक चिर स्थाई बनाकर रख सकेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल रीवा में माँ कर्मा जयंती महोत्सव में शामिल हुए। राजकपूर आडिटोरियम में साहू युवा संगठन के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने माँ कर्मा की विधि विधान से आरती की। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा कृष्ण भक्त थीं और भगवान  कृष्ण उनकों साक्षात दर्शन देते थे और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते थे। माँ कर्मा भक्ति की प्रतीक थी। माँ कर्मा जयंती का आयोजन महान आत्माओं को याद दिलाने का आयोजन है। इस आयोजन के लिए आयोजनकर्ता बधाई के पात्र हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मैं कल भी माँ कर्मा शोभा यात्रा का साक्षी बना था और आज इस आयोजन में भी उपस्थिति हुआ हूं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि इन आयोजनों में शामिल हुआ। माँ कर्मा जयंती महोत्सव में विधायक सिंगरौली  रामनिवास शाह, पूर्व मंत्री  रविकरण साहू, करण साहू, नगर परिषद अध्यक्ष रामपुर नैकिन  रामकुमार साहू सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर रायपुर छत्तीसगढ़ की भजन गायिका हीना सिंह ने शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष  व्यंकटेश पाण्डेय,  वंशीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में साहू समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक उपस्थित रहे।  

ग्वालियर अस्पताल में लिफ्ट बंद होने से परेशानी, 20 दिनों से मरीजों को सीढ़ियों के सहारे पहुंचाया जा रहा वार्ड तक

ग्वालियर ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में पिछले करीब 20 दिनों से कई लिफ्ट बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई ब्लॉकों में छह से अधिक लिफ्टें बंद हैं, जबकि सी ब्लॉक में मरीजों को केवल एक लिफ्ट के भरोसे रहना पड़ रहा है। ऐसे में दूसरी, तीसरी और छठी मंजिल पर भर्ती मरीजों को जांच के लिए नीचे लाने और फिर ऊपर ले जाने में काफी मुश्किल हो रही है। लिफ्ट बंद होने के कारण गंभीर और ऑपरेशन वाले मरीजों को सीढ़ियों के सहारे या स्ट्रेचर खींचकर ऊपर-नीचे ले जाना पड़ रहा है। इस दौरान मरीजों के परिजन भी काफी परेशान हो रहे हैं। कई बार मरीज दर्द से कराहते हुए सीढ़ियों पर ही रुकने को मजबूर हो जाते हैं। प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप अस्पताल की स्थिति को लेकर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लिफ्टों की मरम्मत को लेकर डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। करोड़ों का बजट, फिर भी परेशानी अस्पताल के रखरखाव और सुविधाओं के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, इसके बावजूद बार-बार तकनीकी खराबी और लिफ्ट बंद होने की समस्या सामने आ रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों ने जताई नाराजगी अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लिफ्ट बंद होने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। पेट दर्द से पीड़ित सविता को परिजन सी ब्लॉक में लिफ्ट तक लेकर पहुंचे, लेकिन वहां लिफ्ट खराब मिली। गार्ड ने दूसरी लिफ्ट की जानकारी दी, जिसके लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। वहीं मरीज जय नारायण को उनके बेटे सीढ़ियों के सहारे नीचे लेकर आए। उनका कहना है कि लिफ्ट बंद होने से अस्पताल में इलाज के साथ-साथ आवागमन भी मुश्किल हो गया है। मरीजों ने प्रशासन से जल्द लिफ्ट ठीक कराने की मांग की है।

डॉक्टर सेवाभाव से मरीज का करें इलाज : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जी मीडिया समूह के कार्यक्रम में रीवा शहर के डॉक्टर्स का किया सम्मान

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर को संवेदनशीलता के साथ मरीज का इलाज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती में डॉक्टर भगवान के सामान हैं डॉक्टर भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सेवाभाव से करें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने पत्रिका समूह द्वारा आयोजित चिकित्सकों के सम्मान समारोह में शहर के डॉक्टर्स का सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी मीडिया समूह द्वारा चिकित्सकों का रीवा में पहली बार इस तरह का सम्मान किया गया है। यह आयोजन सिद्ध करता है कि रीवा में डॉक्टर्स बेहतर कार्य कर रहे हैं। रीवा को मेडिकल हब बनाने का सपना सही दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब जीवन संकट में आता है तो केवल डॉक्टर के पास ही लोग जाते हैं। मेहनत से किये गये कार्य की जब बड़े सामाजिक स्तर पर सराहना मिलती है तो उत्साह भी बढ़ता है। सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि विचारहीन समाज स्थाई नहीं होता किसी भी क्षेत्र में विचार के ऊपर व्यावसायिकता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह द्वारा डॉक्टर्स का किया गया सम्मान प्रशंसनीय है। उन्होंने आयोजन से कहा कि सकारात्मक कार्यो के लिए केवल प्रेरित ही नहीं किया जा रहा बल्कि सामने आकर कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने सम्मानित होने वाले डॉक्टर्स को शुभकामनाएं दी तथा उनके द्वारा कोरोनाकाल सहित अन्य समय में किये गये सेवाभाव की प्रशंसा भी की। नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय सहित चिकित्सक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

अब जमीन के नीचे चलेगी भोपाल मेट्रो, 15 मीटर गहराई में TBM; पुराने शहर में सुरंग का काम शुरू

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

विदेशों में निवेश की तलाश: सिंगापुर और लंदन में रोड शो, MP को सौर ऊर्जा हब बनाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं, जिससे बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक  कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।  

कुत्ते की तलाश में 8 दिन की छुट्टी! MP में भेल कर्मचारी के अनोखे कदम से अफसर भी हैरान

भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ”आवारा कुत्ते” चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ”भेल” के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी और निजी संस्थानों में ऊंचे पदों पर कार्यरत थे, वहां भी शिकायतें पहुंचने लगीं। दबाव इतना बढ़ा कि इन जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपने दफ्तरों से छुट्टी लेनी पड़ी। मेनका गांधी और पीएमओ तक पहुंची शिकायत दरअसल, भोपाल स्थित नवरत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) के कर्मचारी आठ दिनों तक एक कुत्ते को खोजते रहे। हुआ यह कि ये कर्मचारी अवधपुरी क्षेत्र की जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां एक कुत्ता प्रेमी महिला एक आवारा कुतिया को रोज खाना खिलाती थी। कालोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के क्रम में रहवासियों ने उसे भी भगा दिया। इससे दुखी होकर उस महिला ने भेल प्रबंधन, पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय और पेटा जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक रहवासी कालोनी की सोसायटी के पदाधिकारियों की शिकायत कर दी। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी कुत्ते के गायब होने को लेकर पत्र लिख दिया। छुट्टियों में कुत्ते पकड़ने का अनूठा ‘ऑपरेशन’ वहीं, भेल के जो कर्मचारी हैं, वे सोसायटी के पदाधिकारी थे। मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने भी कर्मचारियों को कुत्ते को खोजकर देने को कहा। ऐसे में भेल के कर्मचारी सहित सोसायटी के सभी पदाधिकारी अपनी होली और रंगपंचमी सहित आठ दिन तक खेतों में कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। कुत्ते की तलाश का ”आपरेशन” कुछ यूं चला – पदाधिकारियों ने शहर की गली-गली में कुत्ते को ढूंढा। सातवें दिन वह एक सुदूर इलाके में खेतों में मिली, लेकिन हाथ नहीं आई। कुत्ते को पकड़ने के लिए पदाधिकारी अगले दो दिनों तक बिस्कुट, ब्रेड और मछली-मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे, ताकि उसे लालच देकर काबू किया जा सके। ‘नॉन-वेज’ डिप्लोमेसी से मिली कामयाबी जहां पूरा शहर होली, भाईदूज और रंगपंचमी के जश्न में डूबा था, वहीं ये पदाधिकारी कुत्ते पकड़ने वालों की भूमिका निभा रहे थे। आखिरकार भारी मशक्कत और ”नान-वेज” डिप्लोमेसी के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर वापस कालोनी लाया गया। तब जाकर महिला डाक्टर का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने अपनी फाइलें बंद कीं। कालोनी के लोग अब दबी जुबान में कह रहे हैं कि श्वानों को कालोनी से बाहर निकालना तो आसान था, लेकिन कानून और रसूख के शिकंजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया था।

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