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कंपनी विद्युत नेटवर्क के आधुनिकीकरण और क्षमतावर्धन की दिशा में लगातार प्रयासरत

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश ने विद्युत पारेषण क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पारेषण हानि (ट्रांसमिशन लॉस) को ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर तक लाने में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि विद्युत कर्मियों की तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी, उन्नत प्रबंधन प्रणाली और अत्याधुनिक तकनीकी उपायों के समन्वय से संभव हो सकी है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए निर्धारित 2.77 प्रतिशत लक्ष्य की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में पारेषण हानि को घटाकर 2.60 प्रतिशत तक लाया गया है। यह राज्य की विद्युत कंपनियों की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पिछले दो वर्षों की तुलना में भी उल्लेखनीय सुधार है। वर्ष 2022-23 और 2023-24 में पारेषण हानि 2.61 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2024-25 में इसमें 0.01 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई है। पारेषण हानि में कमी के लाभ किसी भी ट्रांसमिशन प्रणाली में पारेषण हानि के न्यूनतम स्तर पर होने से न केवल पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है, बल्कि विद्युत उत्पादन की लागत भी घटती है। इसके अतिरिक्त, यह वोल्टेज स्तर समेत अन्य तकनीकी मानकों को स्थिर रखने में भी सहायता करता है। इससे समग्र बिजली प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनती है। विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता होगी बेहतर एम.पी. ट्रांसको द्वारा किए गए नवाचारों, स्कॉडा प्रणाली जैसी उन्नत तकनीकी विधियों, विद्युत ग्रिडों की निरंतर निगरानी और समय-समय पर किए गए रख-रखाव के चलते यह सफलता संभव हो सकी है। कंपनी विद्युत नेटवर्क के आधुनिकीकरण और क्षमतावर्धन की दिशा में लगातार प्रयासरत है। यह सफलता न केवल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर व निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।  

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी-2.0 सबके लिये आवास मिशन शुरू, वर्ष 2029 तक बनेंगे 10 लाख आवास

भोपाल प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी-2.0 सबके लिये आवास मिशन शुरू किया जा चुका है। यह मिशन वर्ष 2029 तक 5 वर्ष की अवधि के लिये क्रियान्वित किया जायेगा। देश भर में एक करोड़ और मध्यप्रदेश में 10 लाख नवीन आवासों के निर्माण का कार्यक्रम तैयार किया गया है। योजना का उद्देश्य सभी पात्र शहरी गरीब एवं आवासहीन परिवारों को सुरक्षित स्थायी और किफायती आवास उपलब्ध कराना है। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी-1.0 (पीएमएवाई) में अब तक 8 लाख 50 हजार आवासों का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस पर अब तक 22 हजार 975 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों को पीएमएवाई-यू-2.0 के लक्ष्य को समय-सीमा में हासिल करने के लिये निर्देश जारी किये गये हैं। आवास योजना में लाभार्थी को 4 घटकों में दी जायेगी मदद प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी-2.0 में पात्र लाभार्थी को 4 प्रमुख घटकों के माध्यम से लाभ दिया जायेगा। योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इच्छुक हितग्राही आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा विकसित यूनिफाइड वेब पोर्टल (https://pmay-urban.gov.in/) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये हितग्राही अपने संबंधित नगरीय निकाय कार्यालय में भी सम्पर्क कर सकते हैं। केन्द्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार आवास के अभाव में न रहे। स्पेशल फोकस ग्रुप पीएमएवाई-यू-2.0 विभिन्न वर्गों के लिये समानता सुनिश्चित करता है, जिसमें कल्याणी, अकेली महिलाएँ, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर वंचित वर्गों की आवास आवश्यकता को ध्यान में रखा गया है। इस योजना में विशेष रूप से सफाईकर्मियों, पीएम स्वनिधि योजना के तहत चिन्हित स्ट्रीट वेण्डर्स, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत विभिन्न कारीगरों, आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों, झुग्गी-बस्तियों और चालों के निवासियों और अन्य पात्र समूहों को प्राथमिकता दी जायेगी।  

हर स्कूल में 15 जुलाई तक चीनी बोर्ड लगाया जाएगा, डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए कदम उठाया

भोपाल बच्चे टिफिन (Lunch box) में क्या ला रहे हैं? सीबीएसई स्कूलों में इसकी निगरानी होगी। खाने में चीनी के उपयोग को सीमित करने के लिए सीबीएसई (CBSE New Circular) ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं। हर स्कूल में 15 जुलाई तक अनिवार्यत: चीनी बोर्ड लगाया जाएगा। डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया है।  दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सर्वे में पाया कि 4 से 10 साल की उम्र के बच्चे तय सीमा से 3 गुना अधिक चीनी का सेवन कर रहे हैं। इससे टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes) का खतरा बढ़ा है। सहोदय ग्रुप ऑफ सीबीएसई स्कूल भोपाल के अध्यक्ष चैतन्य सक्सेना ने बताया कि स्कूलों के बोर्ड में छात्रों के टिफिन (Lunch Box) और शुगर कंटेंट (Children Health Alert) नोट होंगे। साथ ही पौष्टिक खाने के बारे में अभिभावकों को भी जानकारी दी जाएगी। चीनी बोर्ड लगेगा स्कूलों में लगने वाले चीनी बोर्ड की निगरानी प्राचार्य-शिक्षकों के साथ विद्यार्थी (CBSE School Students)भी करेंगे। स्कूल मैनेजमेंट इसके लिए मेन्यू तैयार कर सकता है। इसमें मीठी चीजों की मात्रा तय रहेगी। बोर्ड बच्चों के टिफिन में आने वाले खाद्य पदार्थों में चीनी की उपलब्धता और नियंत्रण पर कार्य करेगा। सर्वे में इस बात पर जोर – 10 साल तक के बच्चों को औसतन 5 फीसदी चीनी सेवन करना चाहिए – मीठा, चॉकलेट या जंक फूड से 15 फीसदी तक चीनी का सेवन करते हैं। – छोटी उम्र से ही चीनी का अधिक उपयोग करने से उनमें टाइप-2 मधुमेह का खतरा तेजी से बढ़ा है।

राज्य सेवा के 21 अधिकारी बनेंगे IAS-IPS, एसएएस के 16 और एसपीएस के 5 अफसरों को मिलेगा मौका

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य सेवा के 16 अफसर आईएएस और 5 आईपीएस बनेंगे। दरअसल, अगले महीने यूपीएससी में डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी की बैठक होना लगभग तय है। जिसमें इन अफसरों को आईएएस और आईपीएस कैडर में प्रमोशन दिया जाएगा। स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (SAS) और स्टेट पुलिस सर्विस (SPS) के 21 अफसरों को अखिल भारतीय सेवा में प्रमोशन मिलेगा। इनमें 16 एसएएस को IAS में प्रमोशन मिलेगा। वहीं 5 एसपीएस अफसर IPS बनेंगे। अगले महीने यूपीएससी में डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी (DPC) की बैठक होना लगभग तय है। बैठक में इन अफसरों को आईएएस और आईपीएस कैडर में प्रमोशन दिया जाएगा। आईपीएस के लिए 1997-98 बैच के अफसरों के नाम शामिल किए जा सकते हैं। आईएएस के लिए वरिष्ठता सूची के आधार पर 2006-2007 बैच के अफसर आईएएस बनेंगे। कुल 21 पदों के मुकाबले तीन गुना नाम भेजे जाने हैं। यूपीएससी को देर से प्रस्ताव भेजे जाने के कारण 2023 में आठ पदों के लिए डीपीसी नहीं हो पाई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने डीपीसी के लिए प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव के अनुमोदन के लिए भेजा था। इसलिए इस साल 2023 और 2024 के 8-8 यानी 16 पदों के लिए डीपीसी होगी। राज्य सरकार मध्य प्रदेश कैडर के अफसरों के नाम तय कर यूपीएससी को भेजती है। इसके बाद खाली पदों के आधार पर नामों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग से अधिसूचना जारी करेगी।

देश में जल संवर्धन अभियान में जनता और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी

जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश में जल संवर्धन अभियान में जनता और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरचनाओं के निर्माण और साफ-सफाई के कार्य में निरंतर तेजी आती जा रही है। अभियान में जन-भागीदारी और प्रशासनिक अमला संयुक्त रूप से मिलकर भागीदारी कर रहा है। नदी, तालाबों और चेकडेम की सफाई के साथ बोरी-बंधान के कार्य भी किये जा रहे हैं। कलेक्टर ने बोरी बंधान कार्य में निभाई सहभगिता शहडोल जिले के मुड़ना नदी में ग्राम जोधपुर में स्टाप डैम में बोरी बंधान से नदी का जल क्षेत्र 12 घंटे के अंदर हुआ लबालब। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत तहसील सोहागपुर के ग्राम जोधपुर से बहने वाली मुड़ना नदी की जलधारा सूख सी गई थी। पूर्व से बनाए गए स्टाप डैम में जन अभियान परिषद की ग्राम जोधपुर की प्रस्फुटन समिति तथा ग्राम पंचायत ने स्टाप डैम में बोरी बंधान करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों के निर्णय से प्रभावित होकर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, एसडीएम सोहागपुर अरविंद शाह और जन सामान्य ने गांव में पहुंचकर श्रमदान किया। बोरी बंधान से धीरे-धीरे मुड़ना नदी के बहाव क्षेत्र में जल स्तर बढ़ने लगा जिसे देखकर ग्रामीण जन प्रसन्न हो गए। पानी भर जाने से गांव के पशु-पक्षियों को पीने का पानी तथा ग्रामीण जनों को निस्तार के लिये पानी की सुविधा उपलब्ध हो गई है। जल का अपव्यय रोकने को किया प्रेरित श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पीएचई विभाग द्वारा गांव-गांव में लोगों को नलो में टोटियां लगाकर जल का अपव्यय रोकने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत छीताखेडली में नल कनेक्शन में टोटी लगाकर पानी व्यर्थ न फैलाने के लिए ग्राम वासियों को प्रेरित किया गया। ऐसे नल जिनमें टोटियां नही लगी थी, उनमें टोटियां लगाई गई। इस अवसर पर जल संरक्षण के लिए शपथ भी दिलाई गई। जल की एक-एक बूंद बचाने का दिया जा रहा संदेश देवास जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान’’ में नगर निगम देवास द्वारा मीठा तालाब की सफाई की गई। नगरीय निकायों एवं प्रत्येक ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण के कार्य किये जा रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जिले में जल की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए 30 जून 2025 तक अभियान जारी रहेगा। अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निगम देवास द्वारा देवास के राजोदा स्थित मीठा तालाब की साफ-सफाई की गई तथा तालाब सौंदर्यीकरण भी किया गया। इसी क्रम में नगर निगम देवास द्वारा आलोट पायगा स्कूल के कुएं की साफ-सफाई की गई। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किये जा रहे कार्यों से जिले में बारिश के दिनों में पानी संग्रहित होगा तथा वाटर लेवल भी बढ़ेगा। प्राचीन बावड़ी का हो रहा है कायाकल्प उज्जैन जिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरुप जिले में जल गंगा जल संवर्धन अभियान का योजनाबद्ध क्रियान्वयन किया जा रहा है। गौरतलब है की जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जन भागीदारी से जल संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना है। इस अभियान के अंतर्गत समाज की भागीदारी एवं विभिन्न सहभागी विभागों की समेकित पहल से मुख्यतः नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण, भू-जल संवर्धन, पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले में स्थित प्राचीन जल के स्रोत- बावड़ी, कुए और कुंड की साफ-सफाई कर उनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसी क्रम में तराना जनपद की ग्राम पंचायत कायथा में स्थित प्राचीन बावड़ी का भी अभियान के अंतर्गत कायाकल्प किया जा रहा है।      इस बावड़ी का निर्माण देवी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा लगभग 300 वर्ष पूर्व कराया गया था। इस निर्माण में किसी भी प्रकार के चूना, सीमेंट और केमीकल का उपयोग नहीं किया गया था। बावड़ी निर्माण में पत्थरों की जमावट विशिष्ट तरीके से कि गई  जिससे बावड़ी अपने मूल स्वरूप में आज भी सुरक्षित है। बावड़ी प्राचीन होने के बावजूद भी अपने वर्तमान स्वरूप में अच्छी स्थिति में है। प्राचीन समय में बावड़ी में उपलब्ध पानी का उपयोग पेयजल के लिए किया जाता था साथ ही बावड़ी के समीप ग्रामीणजन पूजा भी करते है। कायथा बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिये 50 हज़ार रुपए की लागत से गाद निकालने और मुण्डेर की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। मल्हारगढ में पेयजल पाईप लाईन दुरुस्ती का कार्य मंदसौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य नदी, तालाब, पुरानी बावड़ी सार्वजनिक कुंआ की स्वच्छता और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में नगर परिषद मल्हारगढ में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत वार्ड क़मांक-2 में ईदगाह मार्ग पर पेयजल पाईप लाईन दुरुस्ती और शिप्टिंग का कार्य किया गया। ग्राम ठकुर्रा में स्वच्छता गतिविधि छतरपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिले में जल स्रोतों के जीर्णोद्धार, संरक्षण और जल संवर्धन के लिए सामूहिक रूप से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में जिलेभर में गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड गौरिहार के ग्राम ठकुर्रा में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कैल नदी में साफ-सफाई एवं शपथ का आयोजन किया गया। घुघरी में जल संरक्षण कार्यों का किया गया निरीक्षण मंडला जिले में सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कूमट ने विकासखंड घुघरी के ग्राम पंचायत डोंगर मंडला का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत चल रहे विभिन्न जल संरक्षण कार्यों का जायजा लिया। सीईओ जिला पंचायत कूमट ने निर्माणाधीन खेत तालाब, डग वेल रिचार्ज और कूप मरम्मत कार्यों को देखा। उन्होंने ग्रामीणों से जल संरक्षण के कार्यों में सामुहिक श्रमदान की अपील की।  

मोहन सरकार पचमढ़ी में रहेगी, 3 जून को कैबिनेट बैठक भी यहीं होगी

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर के राजवाड़ा के बाद पचमढ़ी में अगली कैबिनेट बैठक होगी। तीन जून को होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी में कैबिनेट मीटिंग प्रस्तावित है। डॉ मोहन यादव सरकार में 37 और डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक होगी। मध्य प्रदेश में डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक के तहत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  इंदौर के प्रसिद्ध राजवाड़ा में मंत्रिमंडल की बैठक हुई । यह मीटिंग राजवाड़ा के गणेश हॉल में  हुई । जहां सीएम और मंत्री पारंपरिक तरीके से पटिए-गद्दों पर बैठें। इस मीटिंग में मोहन सरकार कई अहम फैसले भी लिए । 3 जून को पचमढ़ी में मोहन कैबिनेट की पहली बैठक होगी। इसमें सभी मंत्री और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक कराने के लिए जिला प्रशासन ने अभी तक ओल्ट होटल के सामने का मैदान सहित कई होटल, रिसोर्ट आदि देखे हैं। इसमें से किसी एक जगह का चयन किया जाना है। बैठक में शामिल होने वाले मंत्री अधिकारियों का आना 2 जून से शुरू हो जाएगा। इसलिए उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्थाओं के लिए होटल रिसोर्ट भी देखे जा रहे हैं। एक दो दिन में बैठक का स्थल तय कर लिया जाएगा।  सबसे पहले 3 जनवरी 2024 को जबलपुर के भेड़ाघाट के पास पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। दूसरी 5 अक्टूबर 2024 को रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती पर उनके गांव सिंग्रामपुर में हुई थी। वहीं तीसरी 24 जनवरी 2025 को पर्यटन नगरी महेश्वर में कैबिनेट बैठक हुई थी। आपको बता दें कि डॉ मोहन यादव सरकार में 37 और डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक होगी।

पीएम आवास योजना में अब 75,000 सैलरी वालों को भी सरकार से सब्सिडी, शहरों में बन रहे एक करोड़ नए घर

भोपाल शहरों में रहने वालों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के बाद अब केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना-शहरी (PMAY-U) की डेडलाइन भी बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने एक करोड़ नए घरों के लिए आवेदन लेने शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने इस योजना को 31 मार्च, 2022 तक रखा था। PMAYU 2.0 के तहत सरकार का लक्ष्य शहरों में रहने वाले ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को पक्का घर मुहैया कराना है। खास बात यह है कि इस योजना का लाभ गरीब मजदूर से लेकर मध्यम वर्ग के लोगों तक मिलेगा। मध्यम वर्ग के लोग अगर पहला घर खरीदते हैं तो पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के तहत होम लोन के ब्याज में सरकार की ओर से सब्सिडी मिलती है। केंद्र सरकार ने 25 जून, 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी को लॉन्च किया था। ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ मिशन के साथ शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य शहरों में रहने वाले परिवारों को सस्ते घर मुहैया कराना था। इस योजना के तहत घर लेने पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। पीएम आवास योजना शहरी के लिए कम से कम 30 वर्ग मीटर का घर होना चाहिए। केंद्र सरकार न सिर्फ घर बनाने में मदद करती है बल्कि होम लोन पर 2.67 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी देती है। इसके अलावा किराए का घर मुहैया कराने में भी मदद की जाती है। इन 4 तरीकों से सरकार दे रही मदद पीएम आवास योजना शहरी के अंतर्गत EWS, LIG और MIG श्रेणी में आने वाले उन लोगों को लाभ दिया जाता है, जिनके पास पक्का मकान नहीं है। सरकार चार तरीकों से इनकी मदद करती है।     खुद का घर तैयार करने में आर्थिक मदद करना     हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनरशिप करना     होम लोन पर लगने वाले ब्याज में सब्सिडी देना     किराए का घर मुहैया कराना 31 मई तक पहले खाते में जरूर रखें 456 रुपये, नहीं तो मुश्किल वक्त में गंवा देंगे ये 2 बड़े लाभ 1.5 लाख का मुफ्त इलाज, एक्सीडेंट में घायल लोगों के लिए संजीवनी बनेगी मोदी सरकार की नई योजना पीएम आवास योजना के फायदे     EWS कैटेगरी में आने वाले परिवारों को घर बनाने के लिए 2.5 लाख रुपये की मदद     ऐसे प्रोजेक्ट जहां 35% घर EWS कैटेगरी के लिए हैं और 250 से ज्यादा घर हैं, वहां प्रति घर 2.5 लाख रुपये की मदद     होम लोन पर लगने वाले ब्याज में सब्सिडी: EWS/LIG/MIG परिवारों को 3 से 6.5% तक ब्याज में सब्सिडी क्या आपको मिलेगा PMAY-U का फायदा     EWS कैटेगरी: वो परिवार जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है     LIG : ऐसे परिवार जिनकी आय 3 लाख से 6 लाख रुपये के बीच है     MIG: वे परिवार जिनकी आय 6 लाख से 9 लाख के बीच है     आवेदक के पास देश के किसी भी राज्य में अपने नाम से पक्का घर नहीं होना चाहिए     आप जिस राज्य या शहर में रह रहे हों, वहां यह योजना लागू होनी चाहिए     अगर आपने पहले सरकार से ऐसी किसी भी योजना का फायदा नहीं लिया हो इन्हें मिलेगी प्राथमिकता पीएम आवास योजना शहरी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों, सिंगल महिलाओं, विधवाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर्स को इस योजना के तहत आवेदन करने पर प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा पीएम स्वनिधि योजना के तहत चुने गए स्ट्रीट वेंडर्स, सफाई कर्मियों और पीएम विश्वकर्मा के तहत रजिस्टर्ड कारीगरों पर भी फोकस किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में सड़क हादसे में घायलों की मदद पर मिलेगा ₹25000 का इनाम – जानिए कैसे!

भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने ‘राहवीर योजना’ के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने पर ₹25,000 इनाम देने की घोषणा की। पीएम मोदी करेंगे इंदौर मेट्रो और दतिया-सतना एयरपोर्ट का उद्घाटन। जानें कैबिनेट बैठक के सभी बड़े फैसले। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा गणेश हॉल में हुई कैबिनेट बैठक कई बड़े फैसलों की गवाह बनी। इस दौरान मंत्रियों ने परंपरागत धोती-कुर्ता और भगवा साफा पहनकर देवी अहिल्या को पुष्पांजलि अर्पित की। इस ऐतिहासिक बैठक में घायल को अस्पताल पहुंचाने पर इनाम से लेकर मेट्रो-एयरपोर्ट, महिला सुरक्षा और पर्यटन विकास तक कई अहम घोषणाएं हुईं। लोगों को इनाम देने की योजना पुरस्कार पाने की सबसे अहम शर्त यह होगी कि गंभीर घायल(Road Accident) को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाना होगा। बता दें, आमतौर पर घायलों की मदद के लिए आगे आने वालों से ही कुछ मामलों में कई सवाल पूछे जाते हैं, इस वजह से कई बार घायलों की मदद के लिए लोग आगे आने से भय खाते हैं। इस परोपकार से जोड़ने लोगों को इनाम देने की योजना बनाई है। ऐसे मिलेगा पुरस्कार सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्ति का चोटे की वजह से ऑपरेशन करना पड़े, कम से कम तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो, सिर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें हो। घायल के साथ इनमें से कोई भी स्थिति निर्मित होने की स्थिति में बचाने वाले नागरिक पुरस्कार के हकदार होंगे।  घायल को अस्पताल पहुंचाने पर ₹25 हजार का इनाम मध्यप्रदेश सरकार ने ‘राहवीर योजना’ की घोषणा की है। इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को ₹25,000 का इनाम दिया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि उस व्यक्ति को पुलिस या प्रशासन द्वारा कोई परेशानी नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस योजना को “मानवता की नई मिसाल” बताया है। गेहूं खरीदी में रचा इतिहास, किसानों को मिला ₹20 हजार करोड़ का भुगतान सरकार ने इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2600 प्रति क्विंटल तय कर 30 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा की खरीदी की है। इसके तहत प्रदेश के किसानों को ₹20 हजार करोड़ का भुगतान किया गया, जो अब तक की सबसे बड़ी राशि है।

स्मार्ट पीडीएस व्यवस्था लागू होने के बाद केंद्र सरकार सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगी

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश में सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली (PDS System) को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट पीडीएस सिस्टम अब एक जून से लागू हो जाएगा। पहले इसे एक मई से लागू होना था, लेकिन ई-केवाईसी (eKYC ) का काम पूरा न हो पाने के कारण देरी हुई। प्रदेश में 87 प्रतिशत उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी हो चुकी है। 31 मई तक बचे हुए उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरा कर लेने का लक्ष्य है। ई-केवाईसी के लिए यही अंतिम तिथि भी है। केंद्र सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगा     इस प्रणाली के लागू होने के बाद केंद्र सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगा। स्मार्ट पीडीएस के तहत पारदर्शिता को बढ़ाया जा रहा है, ताकि सभी राज्यों में खाद्यान्न वितरण को लेकर एक जैसी स्थिति रहे। अब राज्यों की स्थिति के आधार पर राशन देना होगा कुछ राज्य अपने स्तर पर बदलाव कर लेते थे, लेकिन अब राज्यों की स्थिति के आधार पर राशन देना होगा। अभी भी कुछ राज्यों में एपीएल को राशन दिया जाता है, जिसे अब बंद कर दिया जाएगा। वैसे पहले से ही वन नेशन वन राशन कार्ड लागू है, जिसके तहत पात्र हितग्राही देश में कहीं से भी राशन ले सकता है। मदरसा बोर्ड के मान्यता नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 23 मई से होंगे इस बीच, भोपाल से खबर है कि मदरसा बोर्ड द्वारा शिक्षा सत्र 2025-26 में मदरसा मान्यता नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 23 मई से 30 जून तक के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें वर्ष 2025 तक मान्यता प्राप्त सामान्य मदरसों के अतिरिक्त वर्ष 2022 तक मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए यह अंतिम अवसर है। इसके बाद ऐसे मदरसों की मान्यता नवीनीकरण के ऑनलाइन आवेदन करने की पात्रता समाप्त कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन से संबंधित विस्तृत जानकारी मदरसा बोर्ड की अधिकृत वेबसाइट पर एवं एमपी ऑनलाइन के पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। मान्यता प्राप्त मदरसों में निर्धारित तिथियों में आवेदन करना सुनिश्चित करें एवं आवेदन की एक प्रति समस्त दस्तावेजों के साथ अविलम्ब बोर्ड में भेजना एवं एक प्रति अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करना सुनिश्चित करें। इसके बाद ही प्रकरण पर अग्रिम कार्रवाई की जा सकेगी।

सोलर पंप के लिए मोहन यादव सरकार किसानों को देगी सब्सिडी, स्थाई बिजली कनेक्शन नहीं होने वाले किसानों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों को भी अब केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना का लाभ मिल सकेगा. राज्य सरकार ने सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने की इस योजना में संशोधन कर इसे राज्य में लागू कर दिया है. इस योजना के तहत सभी किसानों को सोलर पंप लगाने का मौका फिलहाल नहीं मिल सकेगा. राज्य सरकार ने इसमें संशोधन किया है. इसके तहत योजना के पहले चरण में चुनिंदा किसानों को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा. अभी सिर्फ उन्हीं किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगाए जाएंगे, जिन खेतों पर बिजली का स्थाई कनेक्शन मौजूद नहीं है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी जेब से कितनी राशि खर्च करनी होगी यह भी साफ कर दिया है. शुरूआत में किन किसानों को मिलेगा लाभ राज्य सरकार ने योजना में संशोधन कर इसे लागू करने अधिसूचना जारी कर दी है. इसमें प्रावधान किया गया है कि योजना के लिए वह किसान पात्र होंगे, जिनकी भूमि पर अभी स्थाई बिजली कनेक्शन नहीं है. सोलर पंप लगाए जाने के पहले कृषि भूमि पर टैगिंग किया जाएगा, ताकि किसान को सोलर पंप और बिजली कनेक्शन दोनों के अनुदान का लाभ न मिल सके. इस योजना के दूसरे चरण में उन सभी किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगाने के लिए अनुदान का लाभ दिया जाएगा, जिसके खेतों पर स्थाई बिजली कनेक्शन मौजूद है. विभाग बनाएगा किसानों का डाटा बेस नवीन एवं नवकरणीय विभाग बिजली कंपनियों की मदद से प्रदेश के किसानों का डाटाबेस तैयार करेगी. इसमें किसानों द्वारा लिए गए अस्थायी और स्थायी बिजली कनेक्शन उससे लिंक किए गए किसानों के समग्र, आधार का डाटा प्राप्त करेगी और उसे मध्य प्रदेश भू लेख की मदद से खसरा नंबर से लिंक किया जाएगा. इसके आधार पर ही किसानों को सोलर पंप के लिए ऋण और अनुदान दिया जाएगा. सोलर पंप लेने वाले किसानों से हितग्राही अंश की राशि पोर्टल के जरिए ही जमा कराई जाएगी. इससे किसानों का डाटा वैरीफाई किया जाएगा. सोलर पंप के साथ ड्रिप, स्प्रिंकलर सिस्टम भी जोड़ा जाएगा राज्य सरकार ने तय किया है कि सोलर पंप की इस योजना के साथ किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा. इसमें भी किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, उद्यानिकी विभाग द्वारा अनुदान दिया जाता है. इससे किसानों को पानी की बचत होगी. ऐसे कर सकेंगे योजना के लिए आवेदन इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के वेब पोर्टल पर सोलर पंप के लिए आवेदन करना होगा.     हितग्राही का नाम, पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर भरना होगा.     भू -स्वामित्व संबंधी दस्तावेज का विवरण जैसे खसरा नंबर, ग्राम, आर.आई सर्कल, तहसील एवं जिला का नाम भरना होगा.     उस खसरे, खसरे के बटांकन पर सिंचाई का वर्तमान स्त्रोत बताना होगा.     कृषि भूमि के खसरों पर बिजली कनेक्शन है या नहीं ? यदि है, तो वह स्थाई या अस्थाई है?     आवेदन के बाद विभाग प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों की सूची तैयार करेगी और इसके बाद सोलर पंप लगाए जाएंगे. कितना मिलेगा अनुदान     3 एचपी सोलर पंप पर केन्द्र सरकार का अनुदान 30 फीसदी, कृषक ऋण 65 फीसदी और किसान द्वारा दी जाने वाली मार्जिन मनी 5 फीसदी.     3 एचपी सोलर पंप पर केन्द्र सरकार का अनुदान 30 फीसदी, कृषक ऋण 60 फीसदी और किसान द्वारा दी जाने वाले मार्जिन मनी 10 फीसदी. सोलर पंप योजना के लाभ     प्रदेश में जिन किसानों के पास स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं है, वे इस योजना के पात्र होंगे। सोलर पंप की लागत का 5-10 प्रतिशत हिस्सा किसान को देना होगा, जिसमें तीन हार्स पावर से कम के पंप के लिए 5 प्रतिशत और उससे अधिक के लिए 10 प्रतिशत अंशदान निर्धारित है। 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा कुसुम योजना के तहत दिया जाएगा। शेष 60-65 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध होगी, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी। ऊर्जा विकास निगम का सर्विस चार्ज भी किसानों से नहीं लिया जाएगा। सोलर पंप की दरें निविदा के आधार पर तय होंगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस: अतुलनीय मध्यप्रदेश जहां हर रंग में बसी है एक पहचान

भोपाल   मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान यहां की परंपराओं, लोक कलाओं और विविध बोलियों में रची-बसी है। यहां संस्कृति केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है, जो हर उत्सव, हर गीत और हर रंग में झलकती है। मध्यप्रदेश की आत्मा उसके जनजातीय समुदायों, लोक कलाकारों और ग्रामीण कारीगरों में बसती है। संस्कृति के ये रंग केवल भारतीय पर्यटकों बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचते हैं। चूंकि “भारत गांवों में बसता है”, इसलिए विश्व के पर्यटकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति से अवगत कराने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा होमस्टे की अवधारणा को साकार किया गया है। इसमें पर्यटक प्रकृति की गोद में शांति के अनुभव के साथ वहां की परंपराओं, रीति–रिवाजों, त्यौहारों, कलाओं और खान–पान का आनंद ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के छह अनूठे सांस्कृतिक क्षेत्रों–बुंदेलखंड, बघेलखंड, महाकौशल, निमाड़, मालवा और चंबल के 120 से अधिक गांवों में 200 से अधिक होम स्टे का निर्माण कराया गया है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रामीण परिवेश की सुखद अनुभूति पर्यटकों को हो रही है।   प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा, मध्यप्रदेश की संस्कृति केवल कलाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है, जो हर गांव, हर त्योहार और हर गीत में धड़कती है। विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसका सम्मान करने का अवसर देता है। मध्य प्रदेश की छह सांस्कृतिक क्षेत्रों की विविधता के बावजूद हम एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं। हम वैश्विक मंच पर समृद्ध संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।   उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों के अनुसार यहां बघेली, बुंदेली, मालवी, निमाड़ी, गोंडी लोक भाषाएं हैं। प्रसिद्ध भगोरिया के साथ–साथ सैलेया, करमा, तेरहवी जैसे नृत्य परंपराओं को प्रदर्शित करते हैं। विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव, विश्व रंग, लोकरंग जैसे सांस्कृतिक उत्सव कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं। वहीं गोंड चित्रकला और भील कला पीढ़ी दर पीढ़ी इन जनजातियों को विरासत में मिली है। ध्रुपद गायन और वीणा वादन शास्त्रीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन क्षेत्रों के गांवों में संचालित हैं होम स्टे मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्र चंबल में लगभग 7 गांवों, मालवा में 22, निमाड़ में 17, महाकौशल में 37, बुंदेलखंड में 19 और बघेलखंड के 19 और बघेलखंड के 19 गांवों में  होम स्टे का संचालन किया जा रहा है।    सांस्कृतिक क्षेत्र और उनकी विशेषताएं बुंदेलखंड : वीरता और कला का संगम बुंदेलखंड, अपनी वीर गाथाओं और ऐतिहासिक किलों के लिए प्रसिद्ध, बुंदेली भाषा और लोक कथाओं का केंद्र है। यहां का दीपावली उत्सव और बूंदी के लड्डुओं की मिठास पर्यटकों को आकर्षित करती है। विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव, सांस्कृतिक उत्सव का अनूठा प्रदर्शन है। वहीं भूरा रोटी, कोदो-कुटकी पुलाव, बैंगन का भरता, महुआ के लड्डू आदि बुंदेलखंड के पाककला कौशल का एक सच्चा प्रमाण है। बघेलखंड : प्रकृति और संस्कृति का मेल रीवा और सतना जैसे क्षेत्रों में बसे बघेलखंड में बघेली भाषा और आदिवासी परंपराएं जीवंत हैं। यहां का मडई उत्सव, जिसमें आदिवासी समुदाय अपनी कला और नृत्य का प्रदर्शन करते हैं और सामुदायिक एकता को प्रदर्शित करते हैं। बघेलखंड की गोंड और कोल जनजातियां अपनी अनूठी चित्रकला और लोक संगीत से सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देती हैं। डुबकी वाले आलू, कढ़ी-चावल,  सत्तू पराठा, तिलकुट, ठेकुआ आदि का स्वाद यहां की पाककला की परंपरा को दर्शाते हैं। महाकौशल : इतिहास और आध्यात्मिकता का केंद्र जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में फैला महाकौशल, अपनी हिंदी और छत्तीसगढ़ी प्रभाव वाली बोली के साथ जाना जाता है। त्रिपुरी नृत्य और दशहरा उत्सव यहां की सांस्कृतिक पहचान हैं। नर्मदा जयंती जैसे त्योहार इस क्षेत्र की आध्यात्मिकता और पर्यावरण के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं। यहां स्वीटकॉर्न वड़ा, पोहा जलेबी, कोदो कुटकी की खीर, सिक्या खीर आदि पारंपरिक व्यंजनों के रूप में परोसे जाते हैं।   निमाड़ : रंग-बिरंगे उत्सवों का गढ़ निमाड़, अपनी निमाड़ी बोली और जीवंत लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है, भगोरिया हाट उत्सव का घर है। यह उत्सव, जिसमें युवा अपने जीवनसाथी चुनते हैं, संगीत, नृत्य और रंगों का अनूठा संगम है। भील और भिलाला जनजातियों की पारंपरिक कला और शिल्प इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करते हैं।  बाफला रोटी और दाल, चक्‍की की शाक, भरता, मालपुआ, खोपरापाक, दाल पानीये यहां के प्रसद्ध व्यंजन व पकवान हैं। मालवा : साहित्य और संगीत का स्वर्ग उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों वाला मालवा, मालवी भाषा और साहित्यिक परंपराओं का केंद्र है। यहां का तानसेन संगीत समारोह और रंगपंचमी उत्सव सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाते हैं। मालवा की लोक कथाएं और भक्ति संगीत इस क्षेत्र को एक अनूठा सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करते हैं। पोहा-जलेबी, भुट्टे का कीस, दाल बाफला, सेव टमाटर की सब्जी, इंदौरी चाट और नमकीन मध्य प्रदेश आने वाले हर पर्यटक की पहली पसंद होते हैं। चंबल : वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का क्षेत्र चंबल में कला, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा यहां देखने को मिलती है। चंबल में चंबली बोली और लोक नृत्य प्रसिद्ध हैं। बेड़ई आलू, बेसन की रोटी और लहसुन की चटनी, गोंद के लड्डू यहां के पांरपरिक पाककला को प्रदर्शित करते हैं।

चिकित्सा अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में मंत्रिपरिषद का महत्वपूर्ण निर्णय: राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने एवं चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के नेतृत्व में आज मंत्रिपरिषद द्वारा दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन निर्णयों से न केवल चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी, बल्कि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्राप्त होंगी। मंत्रिपरिषद ने जिला इंदौर स्थित गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय परिसर में कुल 773.07 करोड़ रुपए की लागत से 1450 बिस्तरीय नवीन शिक्षण चिकित्सालय भवन, 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम तथा बाह्य विकास कार्यों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना इंदौर एवं आसपास के क्षेत्रों के लाखों नागरिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगी एवं मेडिकल एजुकेशन की संरचना को आधुनिक बनाएगी। रीवा जिले में स्थित श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी चिकित्सालय के व्यापक उन्नयन के लिए 321.94 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इस योजना में नवीन ओ.पी.डी. भवन, मेटरनिटी ब्लॉक, नर्सिंग कॉलेज एवं हॉस्टल, मल्टी लेवल पार्किंग, 171 आवास, अत्याधुनिक किचन, डोरमेट्री, न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक तथा कैंसर इकाई के लिये बंकर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल हैं। इससे विंध्य क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी एवं रीवा मेडिकल कॉलेज की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को जनकल्याण की सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सशक्त भारत – स्वस्थ भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।  

अमानक स्‍तर का कार्य करने वाले ठेकेदारों को ब्‍लैक लिस्‍ट किया जाएगा

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अमानक स्तर का विद्युतीय निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने बताया कि कंपनी कार्य क्षेत्र में उपभोक्‍ता हित की योजनाओं के अंतर्गत विद्युतीय एवं निर्माण कार्यों में गुणवत्‍ता तथा नियम एवं शर्तों के अनुसार यदि कोई कमी पाई जाती है तो कार्य करने वाली एजेंसी और ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करने हेतु कंपनी द्वारा वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया है। यदि स्‍क्रीनिंग कमेटी ठेकेदार अथवा एजेंसी को दोषी मानती है तो कंपनी ऐसे ठेकेदारो/ एजेंसी को ब्‍लैक लिस्‍ट करेगी।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी  के महाप्रबंधक (संचा.-संधा./ शहर) द्वारा वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन करके ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में अनियमितता की जांच की जाएगी। जांच में किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर तुरंत 7 दिवस में गुणवत्ता सुधार का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद भी संबंधित ठेकेदार की कार्य प्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई कर क्षेत्र स्तरीय कमेटी द्वारा ब्लैक लिस्टिंग की कार्रवाई की जाएगी। महाप्रबंधक (संचा.-संधा./ शहर) द्वारा गठित स्क्रीनिंग कमेटी में 2 उप महाप्रबंधक स्‍तर के अधिकारी तथा एक प्रबंधक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रकरणों में प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना, पूर्ण जमा योजना, सुपरविजन चार्ज योजना, सामान्य विकास योजना, पीव्‍हीटीजी, डीएजेजीयूए व अन्य योजना के ठेकेदारों के कार्य कमेटी के जांच के दायरे में आएंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खगोल वैज्ञानिक डॉ. नार्लीकर के निधन पर शोक व्यक्त किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक डॉ. जयंत नार्लीकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया” एक्स” पर कहा कि डॉ.नार्लीकर का निधन वैज्ञानिक जगत के लिए बड़ी क्षति है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. नार्लीकर की ख्याति मात्र वैज्ञानिक नहीं बल्कि एक संस्थान के रूप में थी। उन्होंने युवाओं के बौद्धिक भविष्य के लिए शिक्षण एवं नवाचार के केंद्र स्थापित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. नार्लीकर ने विज्ञान को आम नागरिकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिजन को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।  

लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर को नमन से हुई मंत्रि-परिषद बैठक की शुरुआत

भोपाल इंदौर के राजवाड़ा में आयोजित मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक का शुभारंभ लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के नमन के साथ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजवाड़ा के समीप स्थित उद्यान में देवी अहिल्या बाई होल्कर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल तथा श्री जगदीश देवड़ा सहित मंत्रीगण श्री प्रहलाद सिंह पटेल, श्री राकेश सिंह, श्री कैलाश विजयवर्गीय, श्री तुलसीराम सिलावट और अन्य मंत्रीगणों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित मंत्रि-परिषद के सदस्यों का मालवी परम्परा के अनुरूप पगड़ी पहनाकर स्वागत-सत्कार किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्रीगणों ने इस स्मृति को चिर स्थायी बनाये रखने के लिये सामूहिक फोटो भी खिंचवाये। मुख्यमंत्री ने राजवाड़ा के दरबार हाल के जीर्णोद्धार कार्य का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर के गौरव राजवाड़ा के प्रसिद्ध दरबार हाल के संरक्षण एवं पुनर्स्थापना कार्य का शुभारंभ किया। यह कार्य संस्कृति विभाग के पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा प्रदेश की समृद्ध, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के संरक्षण की दिशा में कराया जा रहा है। इससे दरबार हॉल के गौरव को पुन: लौटाया जायेगा। दरबार हॉल के लिये 11 करोड़ 21 लाख रूपये सिंहस्थ मद के तहत स्वीकृत किये गये हैं। यह कार्य होने से इंदौर की पहचान होल्करकालीन स्थापत्य की कला को उसका मूल भव्य स्वरूप प्राप्त होगा। सांस्कृतिक गतिविधियों, धरोहर भ्रमण और विरासत पर्यटन के एक सक्रिय केन्द्र के रूप से पुनः: विकसित किया जायेगा।

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