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भोपाल में लड़कियों को मतांतरण के लिए मजबूर किया गया, NCW की रिपोर्ट में चौंका देने वाले खुलासे

भोपाल भोपाल में हिंदू लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाकर उनसे दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के बहुचर्चित मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच में बड़ा राजफाश हुआ है।मध्यप्रदेश के भोपाल में कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू छात्राओं से रेप और ब्लैकमेलिंग केस में NCW यानी नेशनल कमीशन फॉर वूमेन की जांच समिति ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इस मामले में महिला आयोग की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का कहना है कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे गिफ्ट और लग्जरी गाड़ियों का लालच देकर फंसाया था. पीड़ित लड़कियों को मतांतरण के लिए मजबूर किया गया भोपाल में तीन से पांच मई के बीच आए आयोग के जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीड़ित लड़कियों को मतांतरण के लिए मजबूर किया जाता था। इस अपराध के पीछे बड़े संगठित नेटवर्क की आशंका व्यक्त करते हुए आयोग ने कहा है कि आरोपितों ने छात्राओं को महंगे उपहार, वस्त्र और मोटर साइकिलों के माध्यम से आकर्षित कर प्रेमजाल में फंसाया। आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए। इनके माध्यम से ब्लैकमेल किया। आयोग ने राज्य सरकार से इस संबंध में गहन जांच कराने की सिफारिश की है। बता दें कि मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया था। इस प्रकरण में अभी तक छह पीड़ित लड़कियां सामने आ चुकी हैं, इनमें दो सगी बहनें हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित छात्राओं पर दबाव डाला कि वे अपनी परिचित अन्य लड़कियों को भी उनसे दोस्ती करने के लिए लाएं, अन्यथा वीडियो को वायरल कर दिया जाएगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की. इस समिति ने बीती 3 मई से 5 मई तक भोपाल में पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों, पुलिस अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जांच की. समिति ने उन स्थानों का भी दौरा किया जहां पीड़िताओं को नशीली दवाएं देकर उनके साथ अमानवीय कृत्य किए गए. जांच समिति में निर्मल कौर, आईपीएस (सेवानिवृत्त), पूर्व पुलिस महानिदेशक, झारखंड (अध्यक्ष),   निर्मला नायक, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, जबलपुर (सदस्य), और  आशुतोष पांडे, अवर सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग (सदस्य) शामिल थे. कमेटी के प्रमुख निष्कर्षों में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे गिफ्ट, कपड़ों और घुमाने का लालच देकर प्रेमजाल में फंसाया. उन्हें नशीले पदार्थ देकर आपत्तिजनक तस्वीरें खींची गईं और ब्लैकमेल किया गया. पीड़िताएं मानसिक और सामाजिक दबाव में हैं, फिर भी उन्होंने साहस दिखाकर FIR दर्ज कराई. आरोपियों की सामान्य पारिवारिक स्थिति के बावजूद उनकी विलासितापूर्ण जीवनशैली ड्रग तस्करी जैसे संगठित अपराध की संभावना को दर्शाती है. कमेटी ने पाया कि आरोपियों ने पीड़िताओं पर धर्मांतरण के लिए दबाव डाला, जो एक साजिशपूर्ण नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. कमेटी ने सुझाव दिया कि इसकी राज्यव्यापी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या आरोपियों को किसी संगठन से वित्तीय सहायता मिल रही थी. मुख्य आरोपित फरहान खान सहित पांच को पुलिस ने गिरफ्तार किया मुख्य आरोपित फरहान खान सहित पांच को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक फरार है। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। आयोग ने झारखंड की पूर्व डीजीपी निर्मल कौर के नेतृत्व में टीम बनाई थी। टीम ने पीड़ित छात्राओं, उनके स्वजन, संबंधित थाना क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जांच की। समिति ने उन स्थानों का भी दौरा किया, जहां आरोपितों ने पीडि़ताओं को नशीली दवाएं खिलाकर उनके साथ गलत काम किया। राज्यव्यापी जांच के लिए आयोग ने कहा राष्ट्रीय महिला आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि आरोपितों का तरीका सुनियोजित है और गिरोह बनाकर अपराध किया गया। उनके द्वारा पीडि़त छात्राओं पर मतांतरण के लिए भी दबाव डाला जाता रहा। ऐसे मामलों का पता लगाने के लिए राज्यव्यापी जांच की जा सकती है। किसी संगठन द्वारा वित्त पोषित जा रहा? यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या इन्हें किसी संगठन द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। आरोपितों की पारिवारिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है परंतु उनकी जीवनशैली अत्यधिक विलासितापूर्ण है, जिस कारण ड्रग्स तस्करी जैसे संगठित अपराध की आशंकाओं की जांच की भी आवश्यकता दिखती है। वीडियो वायरल करने की दी धमकी आरोपियों ने लालच देकर छात्राओं को फंसाया. इसके बाद नशा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया. इसके बाद आरोपियों ने पीड़िताओं को धमकाया भी कि वे दूसरी छात्राओं को इनके चंगुल में फंसाए, अगर ऐसा नहीं किया तो उनके वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए जाएंगे. सीएम को सौंपी रिपोर्ट महिला आयोग का कहना है कि इस मामले में सिर्फ यौन अपराध ही नहीं, बल्कि जबरन धर्म परिवर्तन और संगठित आपराधिक नेटवर्क की भी भूमिका सामने आ रही है. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सीएम मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सौंपी है. इसमें पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए कठोर कार्रवाई की मांग की है. ॉ बड़े नेटवर्क की आशंका जांच समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि कुछ मामलों में पीड़िताओं पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी डाला गया है. इसके साथ ही यह भी पाया गया कि आरोपी सामान्य आर्थिक स्थिति से थे, लेकिन उनकी जीवन-शैली इशारा करती है कि उनके तार ड्रग तस्करी या फिर किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. बता दें कि NCW की टीम 3 से 5 मई तक भोपाल दौरे पर रही. टीम ने इस दौरान पीड़ित छात्राओं, उनके परिवारों, पुलिस अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन से मुलाकात की थी. बाहरी फंडिंग की जांच की सिफारिश महिला आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि राज्य सरकार इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराए, जिसमें बाहरी फंडिंग, वैचारिक प्रभाव और प्राइवेट संस्थानों द्वारा सरकारी योजनाओं, जमीन और शिक्षा निधियों के दुरुपयोग की संभावना को भी शामिल किया जाए.  

प्याज के भाव औंधे मुंह गिर जाने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरा

गुना सब्जी में जायका बढ़ाने वाली प्याज की अकड़ निकल गई है। 15 दिन पहले तक यह 15 रुपए किलों में थोक में बिक रही थी, अब स्थिति यह है कि पांच रुपए किलों में भी इसे कोई नहीं खरीद रहा है। प्याज के भाव औंधे मुंह गिर(Onion Rate Decreases) जाने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। स्थानीय स्तर पर ही प्याज की अच्छी पैदावार होने की वजह से इसके भाव नरम थे। लेकिन पिछले कई दिनों से मौसम में आए परिवर्तन और बारिश से इसके खराब होने का अंदेशा पैदा हो गया है। इस वजह से किसान मंडी में प्याज बेचने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।  मंगलवार को नानाखेड़ी स्थित थोक सब्जी मंडी में प्याज की बंपर आवक रही, लेकिन इस हिसाब से खरीददार नहीं पहुंचे। इस कारण से इसके दाम 10 रुपए किलो घट गए। 15 रुपए किलों में बिकने वाली प्याज को पांच रुपए में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं था। इस वजह से किसान परेशान होते रहें, उनका कहना था कि ऐसी स्थिति रहीं तो गुना तक आने का भाड़ा तक निकलना मुश्किल हो जाएगा। गुना में ही इस बार अच्छी पैदावार पिछली बार प्याज की कम पैदावार होने की वजह से इसके दाम आसमान पर पहुंच गए थे। थोक में ही 25 से 30 रुपए किलों में बिकी थी। यही वजह रही कि किसानों इस बार भी अच्छा लाभ कमाने के चक्कर में बड़े रकबे में प्याज की खेती की है। पिपरौदा निवासी किसान कमलेश सिंह ने बताया कि पिछली बार प्याज महंगी बिकी थी, इसी को देखते हुए इस बार ज्यादातर किसानों ने प्याज की बोवनी की तरफ रुझान किया। इसकी अधिक पैदावार होने से इसके दाम गिर गए हैं। क्योंकि प्याज एक ऐसी उपज है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। इसलिए किसान इसे जल्दी से जल्दी बेचना चाहता है। इधर बारिश और तेज गर्मी की वजह से भी इसके खराब होने की आशंका है। महाराष्ट्र की थोक मंडियों में भी स्थिति बुरी प्याज कारोबारी(Onion Rate Decreases) इमरान राईन ने बताया कि महाराष्ट्र की थोक मंडियों में प्याज एक रुपए से लेकर 7 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। इसमें ज्यादातर ऐसी प्याज है, जो लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है। हालांकि पिछली बार महाराष्ट्र की मंडी में ही प्याज 15 से 20 रुपए किलों बिकी थी। इसी तरह एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज के भाव में गिरावट है। राज्य की दूसरी मंडियों में हालात और भी खराब हैं। इस बार स्थानीय स्तर पर अच्छी पैदावार की वजह से बाहर से भी प्याज नहीं मंगाई जा रही है। इसका असर हर मंडी पर पड़ा है।

न्यायालयों में तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एक की जगह अब दो सप्ताह का अवकाश

जबलपुर मध्य प्रदेश में कार्यरत न्यायालयीन कर्मचारियों के अच्छी खबर है, जबलपुर उच्च न्यायालय ने सभी न्यायालयों में पदस्थ तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि की है, उच्च न्यायालय ने इसके लिए अलग अलग आदेश जारी किये हैं मध्य प्रदेश के न्यायालयों में काम करने वाले कर्मचारियों  के लिए अभी तक एक सप्ताह के ग्रीष्मकालीन अवकाश की सुविधा प्रदान की गई थी यानि न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में कर्मचारी एक सप्ताह का अवकाश ले सकता था लेकिन अब इसमें बदलाव करते हुए वृद्धि की गई है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एक की जगह अब दो सप्ताह का अवकाश   हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि  05 जुलाई 2018 की कंडिका-4 में दिए आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए, जिला स्थापना एवं कुटुम्ब न्यायालय की स्थापना पर कार्यरत ऐसे कर्मचारी जिनका वेतनमान छठवे वेतन आयोग के अनुसार ग्रेड-पे रुपये 3600/- एवं उससे अधिक है, ऐसे कर्मचारियों को एक सप्ताह के स्थान पर अब दो सप्ताह का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता हैं एवं रुपये 3600/- ग्रेड पे से कम वेतनमान प्राप्त करने वाले समस्त कर्मचारियों को (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर) एक सप्ताह के स्थान पर 10 दिवस का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश में भी वृद्धि इसी तरह उच्च न्यायालय ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश में भी वृद्धि की है, कोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि समस्त नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीगण, उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश जबलपुर द्वारा 17 मई 2025 को दिए गए आवेदन को स्वीकार करते हुए मुख्यपीठ जबलपुर ने 09 मई 2025 को दिए आदेश मेंआंशिक संशोधन करते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को स्वीकृत 1 सप्ताह के ग्रीष्मकालीन अवकाश को बढ़ाकर 10 दिवस का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने किया आईएफएस को कमजोर करने वाले मप्र सरकार के आदेश को किया खारिज

Supreme Court rejects MP government’s order weakening IFS भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को मप्र सरकार द्वारा 29 जून, 2024 को जारी किए गए एक विवादास्पद आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश में कहा गया था कि गैर-वन अधिकारी – विशेष रूप से कलेक्टर और संभागीय आयुक्त – प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों की कार्य-निष्पादन मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के एपीएआर संशोधन प्रक्रिया के आदेश को अनुचित ठहराते हुए वर्ष 2002 में पूर्ववर्ती आदेश को यथावत रखा। यानि अब डीएफओ और एपीसीसीएफ के एपीएआर में कलेक्टर कमिश्नर और प्रमुख सचिव टिप्पणी नहीं लिखेंगे। उच्चतम न्यायालय के आदेश से आईएफएस अफसर की जहां जीत हुई है वही प्रदेश के नौकरशाही खासकर एसीएस अशोक वर्णवाल की किरकिरी हुई है।पर्यावरण अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल और अन्य द्वारा दायर याचिका के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने माननीय न्यायमूर्ति मसीह के साथ मिलकर यह फैसला सुनाया। बुधवार को सुप्रीम न्यायालय ने प्रशासनिक औचित्य और पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए आदेश को निर्णायक रूप से रद्द कर दिया। पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि विवादित सरकारी आदेश प्रकृति में अवमाननापूर्ण है, क्योंकि यह सरकारी आदेश इस न्यायालय के दिनांक 22 सितम्बर 2000 और 19 अप्रैल 2024 के पूर्वोक्त आदेशों का उल्लंघन करता है और इसे इस न्यायालय से स्पष्टीकरण/संशोधन मांगे बिना ही जारी किया गया है। हम ऐसे सरकारी आदेश जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू कर सकते थे। हालांकि, हम ऐसा करने से खुद को रोकते हैं। उक्त सरकारी आदेश इस न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के कारण रद्द किए जाने योग्य है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अधिवक्ता बंसल ने आदेश की संवैधानिकता और प्रशासनिक सुदृढ़ता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि इसने भारतीय वन सेवा की संस्थागत अखंडता का उल्लंघन किया है और वन संरक्षण प्रयासों को कमजोर किया है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि महत्वपूर्ण वन और वन्यजीव संरक्षण कार्य का आकलन करने में गैर-वन अधिकारियों को शामिल करना न केवल अनुचित होगा, बल्कि टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ (2000) और संतोष भारती बनाम मध्य प्रदेश राज्य जैसे ऐतिहासिक पर्यावरण मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों के भी विपरीत होगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य का आदेश भारतीय वन सेवा की स्वायत्तता और तकनीकी अध्यादेश का उल्लंघन करता है और भारत के वन प्रशासन के लिए इसके दूरगामी परिणाम हैं। क्या थी एपीएआर लिखने की नई व्यवस्था? 29 जून 24 को जारी आदेश के तहत राज्य शासन ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एपीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। राज्य शासन के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि 29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। आईएफएस का संरक्षण जरूरी जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। इस अद्वितीय भूमिका के कारण, कई बार भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जब उनके संरक्षण प्रयास राज्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए विकासात्मक उद्देश्यों से टकराते हैं। ऐसे आईएफएस अफसरों का संरक्षण अधिक जरूरी है। अतः एपीआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन गैर वाजिब है।

ग्राम पंचायत सचिव गिरफ्तार, लोकायुक्त पुलिस ने 15000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

अनूपपुर भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर लोकायुक्त पुलिस बहुत सख्ती से काम कर रही है, इसी क्रम में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने एक्शन लेते हुए आज एक घुसखोर ग्राम पंचायत सचिव को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। लोकायुक्त संभाग रीवा के पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा से मिली जानकारी के मुताबिक अनूपपुर जिले के ग्राम पोस्ट भाद तहसील कोतमा निवासी आवेदक राजेंद्र कुमार सोनी ने एक शिकायती आवेदन लोकायुक्त कार्यालय में दिया था जिसमें ग्राम पंचायत सचिव पर रिश्वत मांगे जाने का आरोप था। पुलिया के निर्माण की स्वीकृत राशि को बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग   शिकायती आवेदन में राजेंद्र कुमार सोनी ने बताया कि वो ठेकेदारी करता है,  ग्राम भाद में पुलिया के निर्माण की स्वीकृत राशि को बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत सचिव बृजेश तिवारी द्वारा 20000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है, आवेदन मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा द्वारा शिकायत का सत्यापन कराया गया। 5000 रुपये पहले ही ले चुका था आरोपी सत्यापन के दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता से रिश्वत राशि के रूप में 5000 रुपये ले लिए तथा शेष राशि 15000 रुपये लेने के लिए सहमत हो गया, इस आधार पर एसपी के निर्देश पर रीवा लोकायुक्त पुलिस की एक टीम गठित की गई और आरोपी बृजेश तिवारी के बताये अनुसार ग्राम पंचायत कार्यालय चुकान,जनपद पंचायत अनूपपुर पहुंच गई। रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा ग्राम पंचायत सचिव   प्लान के मुताबिक आवेदक राजेंद्र कुमार सोनी ने जैसे ही आरोपी ग्राम पंचायत सचिव बृजेश तिवारी को रिश्वत की राशि 15000 रुपये दिए पहले से तैयार लोकायुक्त पुलिस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत में ली गई राशि बरामद कर ली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच में ले लिया है।

इंदौर में विरोधी देशों का व्यापार रुकेगा, देश के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा

इंदौर  अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन के तहत 22 अगस्त 1921 को विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का आंदोलन चलाया था। उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी। अब एक बार फिर विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की एक मुहिम इंदौर में शुरू हुई है। इस बार निशाने पर चीन और बांग्लादेश हैं। इंदौर रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन ने चीन और बांग्लादेश के कपड़ों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। नियम बनाकर एसोसिएशन के व्यापारी सदस्यों पर लागू भी कर दिया है। एसोसिएशन के सदस्य व्यापारी यदि चीन या बांग्लादेश निर्मित वस्त्र व एसेसरीज बेचते पाए गए तो उन पर भारी जुर्माना भी लगा दिया जाएगा। दोनों देशों के कपड़ों के बहिष्कार का निर्णय  इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बीते दिनों पाकिस्तान से हुए संघर्ष में चीन का दुश्मन देश की मदद करना और बांग्लादेश में बढ़ी भारत विरोधी भावना व्यापारियों के इस निर्णय का कारण बनी है। दोनों देशों के वस्त्रों के बहिष्कार के निर्णय को तुरंत लागू कर दिया गया है। एसोसिएशन के सदस्य व्यापारियों को सूचना दी गई है कि जो इन देशों में निर्मित, आयातित वस्त्र या एसेसरीज बेचता पाया जाएगा, उस पर एक लाख 11 हजार रुपये का जुर्माना एसोसिएशन लगाएगा। इस निर्णय का असर सबसे पहले राजवाड़ा और मध्य क्षेत्र के पुराने परंपरागत बाजार में नजर आएगा। अन्य एसोसिएशनों को लिखेंगे पत्र इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट शहर के अन्य बाजारों के वस्त्र व्यापारी व संगठनों को भी बुधवार से पत्र लिखना शुरू करेगा। एसोसिएशन के अनुसार मध्य क्षेत्र में प्रतिबंध लागू होने के बाद अन्य व्यापारियों से अपील की जाएगी कि वे भी दोनों देशों में निर्मित कपड़ों को न बेचें। व्यापारी एसोसिएशन के अनुसार इससे दुश्मन देशों का व्यापार तो प्रभावित होगा ही, दूसरा लाभ यह कि भारतीय वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। 50 अन्य एसोसिएशनों को लिखेंगे पत्र चीन और बांग्लादेश में निर्मित गारमेंट का शहर के रिटेल काउंटरों खासतौर पर मध्य क्षेत्र के काउंटरों से ही सालाना करीब 50 करोड़ का कारोबार होता है। यह कहना है इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन का। इसमें 70 प्रतिशत हिस्सेदारी महिला वस्त्रों, 30 प्रतिशत पुरुष वस्त्रों की और शेष किड्स गारमेंट व अन्य सामग्री होती है। जैन कहते हैं बड़े व्यापारी कारोबार बंद करेंगे तो सीधे आयातकों पर असर होगा और इन देशों से आने वाले वस्त्रों पर लगाम लगेगी। वस्त्रों से जुड़ी एसेसरीज क्लिप, बेल्ट, टैग आदि भी इन देशों में बनी हुई न हो, इसका परहेज भी किया जाएगा। इसका अभियान शुरू किया है।

हाई कोर्ट ने डॉ. अजय मेहता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द , सीबीआई की रिपोर्ट में भी आर्थिक लेन-देन की बात नहीं कही गई

जबलपुर व्यापमं घोटाले में फंसे डॉ. अजय कुमार मेहता को जबलपुर हाईकोर्ट बेंच से राहत मिली है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने व्यापमं घोटाले में उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। साक्ष्यों के अनुसार याचिकाकर्ता ने किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन नहीं किया है। सीबीआई की रिपोर्ट में भी आर्थिक लेन-देन की बात नहीं कही गई है। व्यापमं घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में अंक घोटाले के संबंध में डॉ. अजय मेहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर यह जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। डॉ. मेहता पर आरोप था कि इस घोटाले में उन्होंने मिडिलमैन की भूमिका निभाते हुए मुख्य आरोपी से अभ्यर्थियों को मिलवाया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि कोई भी आर्थिक लेन-देन, व्यक्तिगत लाभ या आपराधिक साजिश का प्रमाण व दस्तावेज न होने के बावजूद उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। सीबीआई ने युगलपीठ को बताया कि मुख्य आरोपी नितिन मोहिंद्रा बोर्ड में सिस्टम एनालिस्ट था। उसके कार्यालय से कुछ एक्सेल शीट जब्त की गई थीं, जिनमें उम्मीदवारों के नाम, रोल नंबर, प्राप्त अंक, खाली छोड़े गए उत्तर विकल्प और उम्मीदवारों को दिए जाने वाले अंक का उल्लेख था। एक्सेल शीट में बिचौलियों के नाम और लेन-देन की गई रकम का भी उल्लेख किया गया था। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सह-आरोपी नितिन मोहिंद्रा ने अपने बयान में वर्तमान आवेदक का नाम नहीं लिया है। आवेदक ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि नितिन मोहिंद्रा उसका दोस्त था। सीबीआई के आरोप पत्र में भी किसी आर्थिक लेन-देन या किसी अन्य प्रकार से लाभ पहुंचाने का कोई उल्लेख नहीं है। आरोप पत्र में ऐसा कोई तत्व नहीं है, जिसके आधार पर आवेदक के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ एफआईआर निरस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने पैरवी की।

इंदौर नगर निगम को जलसंकट की चिंता, वाणिज्यिक भवनों मालिकों को जल संवर्धन और वाटर रिचार्जिंग यूनिट का निर्माण करना अनिवार्य

इंदौर इंदौर में पंद्रह दिन बाद मानसून की  आमद हो सकती है और अब नगर निगम को जलसंकट की चिंता सताई है। नियमों का हवाला देते हुए निगमायुक्त शिवम वर्मा ने नगर निगम सीमा क्षेत्र के रहवासी, औद्योगिक और वाणिज्यिक भवनों मालिकों को जल संवर्धन और वाटर रिचार्जिंग यूनिट का निर्माण करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए जुलाई माह की मियाद दी गई है। यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि निर्माण नहीं किया जाता है तो फिर नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा इंदौर में होने वाले निर्माण कार्यों और कार सर्विस सेंटर में बोरिंग और नर्मदा के जल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वे अब तरी करने और गाडि़यां धोने के लिए ट्रीटेंड वाॅटरों का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। अफसरों ने कहा कि इंदौर में 48 स्थानों पर ट्रीटेड वाॅटर के हाइड्रेड लगाए गए है। वहां से पानी लेकर उसका उपयोग किया जाए। यदि बोरिंग का उपयोग मिला तो फिर बोरिंग नगर निगम अधिगृहित कर लेगा। इंदौर में नर्मदा से 500 एमएलडी पानी आता है, लेकिन ज्यादातर निजी बोरिंगों में पानी नहीं होने के कारण जलसंकट शहर में छाया हुआ है। शहर में नगर निगम 200 से ज्यादा टैंकरों से पानी बांट रहा है। पानी की डिमांड लगातार बनी हुई है। इंदौर के 25 प्रतिशत इलाके में नर्मदा लाइन नहीं है। वहां सबसे ज्यादा जलसंकट बना हुआ है।

आज ग्वालियर-चंबल में लू, 40 जिलों में तेज आंधी-बारिश का अलर्ट- क्या है वजह?

भोपाल  मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश के साथ भीषण गर्मी का दौर चल रहा है. लगातार 20 दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है. वहीं कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है. मंगलवार को छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, अनूपपुर समेत 17 जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई, जबकि खजुराहो और नौगांव में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया. मौसम के दो रंग के बीच IMD ने बुधवार, 21 मई के लिए अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, आज ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के 8 जिले में लू चलेगी, जबकि  राजधानी भोपाल, इंदौर समेत 40 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. मध्य प्रदेश के इन जिलों में लू का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, ग्वालियर, श्योपुर, निमाड़ी, टीकमगढ़, मुरैना, भिंड, दतिया और छतरपुर में लू चलने की संभावना है. MP के 40 जिलों में आज होगी बारिश, 9 जिलों में आंधी का ऑरेंज अलर्ट   नर्मदापुरम, बुरहानपुर, खरगोन, बैतूल, हरदा, खंडवा, बड़वानी, अलीराजपुर और झाबुआ में आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. यहां आंधी 50 से 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी. इसके अलावा राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सिंगरौली, कटनी, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, बालाघाट, रीवा, मऊगंज, सीधी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, अशोकनगर, शिवपुरी, विदिशा, शाजापुर, सीहोर, गुना, राजगढ़, रायसेन, देवास, आगर-मालवा, रतलाम, धार, नीमच और मंदसौर में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. 45 डिग्री के पार पहुंचा MP का पारा मंगलवार को मध्य प्रदेश के कई जिलों में गर्मी का असर देखने को मिला. छतरपुर जिला सबसे गर्म रहा. दअसल, छतरपुर के खजुराहो में तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि  नौगांव में पारा 45 डिग्री सेल्सियस रहा. टीकमगढ़ में 44.8 डिग्री, ग्वालियर में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. सतना में 43.5 डिग्री सेल्सियस, शिवपुरी-रीवा में 43 डिग्री सेल्सियस, गुना में 42.8 डिग्री सेल्सियस, सीधी में 42.4 डिग्री सेल्सियस, दमोह में 41.5 डिग्री सेल्सियस, मंडला में 41.4 डिग्री सेल्सियस, उमरिया-सागर में 40.6 डिग्री सेल्सियस और रायसेन में तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में पारा 40.8 डिग्री सेल्सियस, राजधानी भोपाल में 39 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में 36.5 डिग्री और इंदौर में पारा 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा.

90 लाख की लूट, मंदिर के नाम पर गबन करने वाली साध्वी को कोर्ट ने राहत देने से इनकार किया

छिंदवाड़ा  श्रीराम-जानकी मंदिर, चौरई (लोनीकला) से जुड़ा 90 लाख रुपये के गबन का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। हाईकोर्ट ने आरोपी साध्वी लक्ष्मी दास (रीना रघुवंशी) की उस अर्जी को सख्ती से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने शर्त हटाने की मांग की थी। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा- आरोपी ने अदालत को गुमराह किया है, धोखाधड़ी की है, इसलिए राहत नहीं दी जा सकती। क्या है पूरा मामला? चौरई विकासखंड के लोनीकला गांव स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर के महंत स्व. कनक बिहारी दास महाराज का निधन 17 अप्रैल 2023 को नरसिंहपुर में एक सड़क हादसे में हो गया था। कनक बिहारी दास न केवल मंदिर के प्रमुख थे, बल्कि रघुवंशी समाज के गुरु के तौर पर भी उन्हें श्रद्धा से देखा जाता था। 90 लाख पर बुरी नजर उनके निधन के बाद, मंदिर और भक्तों की आस्था से जुड़े 90 लाख रुपये पर साध्वी लक्ष्मी दास और उसके भाई हर्ष रघुवंशी ने बुरी नजर डाल दी। आरोप है कि लक्ष्मी दास ने फर्जी तरीके से महंत के बैंक खाते से अपना मोबाइल नंबर लिंक करवाया और फिर नेट बैंकिंग के जरिए रकम निकाल ली। एफआईआर के बाद कोर्ट की शरण में गई थी साध्वी इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब मंदिर के पुजारी श्याम सिंह ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। इसके बाद साध्वी लक्ष्मी दास ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, जिसमें उसने कहा था कि वह 90 लाख रुपए अदालत में जमा कर देगी। इसी आधार पर दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने उसे अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन शर्त यह थी कि रकम जमा करनी होगी। अब बोली- ‘पैसे नहीं हैं’, कोर्ट ने लगाई फटकार हाल ही में साध्वी लक्ष्मी दास ने एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं, इसलिए 90 लाख जमा करने की शर्त को हटाया जाए। हालांकि कोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी माना। जस्टिस पीके अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि साध्वी लक्ष्मी दास और हर्ष रघुवंशी— दोनों ने अदालत को गुमराह किया, तथ्यों को छिपाया और जमानत आदेश धोखे से हासिल किया। भाई की भी जमानत रद्द केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने साध्वी के भाई हर्ष रघुवंशी की पहले दी गई जमानत भी रद्द कर दी। अदालत ने अपने आदेश में साफ लिखा कि दोनों आरोपियों ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। आस्था को किया छलनी, अब कानून करेगा हिसाब 90 लाख का यह घोटाला सिर्फ पैसों का मामला नहीं है, बल्कि यह भक्तों की आस्था, एक पवित्र मंदिर और समाज के सम्मान के साथ विश्वासघात है। अब अदालत का सख्त रुख साफ संकेत देता है कि धार्मिक संस्थानों में गबन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

बालाघाट गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्राया, हॉक फोर्स पर फायरिंग कर भागे नक्सली

बालाघाट बालाघाट में मंगलवार को एक बार फिर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. जहां मौके का फायदा उठाकर नक्सली भाग खड़े हुए. जानकारी के मुताबिक, जिले के लांजी क्षेत्र अंतर्गत पुलिस चौकी डाबरी में जीआरबी डिवीजन के 10 से 15 नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना प्राप्त हुई थी. जिसके चलते हॉकफोर्स तथा सीआरपीएफ बी 217 कोबरा की कुल 12 टीमों ने नक्सल विरोधी अभियान के तहत मंगलवार को सर्चिंग अभियान शुरू किया. नक्सलियों की पुलिस पर फायरिंग सर्चिंग के दौरान हॉकफोर्स की टीम बिलालकसा ग्राम से लगे जंगल क्षेत्र में पहुंची. जहां पुलिस टीम की उपस्थिति का पता लगने पर 15 से 20 सशस्त्र माओवादियों के समूह ने पुलिस पार्टी पर 20 से 30 राउंड फायर किए. जिससे पुलिस टीम को आत्मरक्षा के लिए पेड़ों तथा पत्थरों का सहारा लेना पड़ा. तब नक्सली सतर्क होकर पुलिस टीम पर फायर कर मौके से भागने में सफल हो गए. पुलिस ने बरामद किया नक्सलियों का सामान हॉकफोर्स की टीम ने भी आत्मरक्षा में जवाबी संतुलित फायर किए. मुठभेड़ के दौरान नक्सल पार्टी के भागने की दिशा में हॉकफोर्स तथा सीआरपीएफ कोबरा की टीम को तैनात कर सम्पूर्ण क्षेत्र को सर्च किया जा रहा हैं. मुठभेड़ में बालाघाट पुलिस ने मौके से नक्सलियों द्वारा उपयोग की जा रही सोलर प्लेट तथा बड़ी संख्या में दैनिक उपयोग की सामग्री तथा दवाइयां भी बरामद कर ली. पुलिस अधीक्षक नागेंद्र सिंह ने बताया कि, ”मुठभेड़ में किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ है. घटना के बाद क्षेत्र में सर्चिंग अभियान और भी तेज कर दिया गया है. जवानों ने नक्सलियों की सोलर प्लेट, दैनिक उपयोग की सामग्री और दवाइयां बरामद की हैं. थाने में नक्सलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है.” एंटी-नक्सल ऑपरेशन पकड़ जोर जहां एक ओर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल एंटी नक्सल ऑपरेशन चला रहे हैं. वहीं छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे बालाघाट में सुरक्षाबलों का सर्चिंग अभियान जारी है. पिछले कई महीने से यहां का जवानों और नक्सलियों का आमना-सामना हुआ है. 19 फरवरी को बालाघाट जिले के ही गढ़ी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 62 लाख रुपये की 4 महिला इनामी नक्सली मारी गई थीं. नक्सलियों का सामान जब्त पुलिस अधीक्षक नगेन्द्रसिंह ने बताया कि मुठभेड़ में किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में बड़ा सर्चिंग अभियान चल रहा है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के इस्तेमाल की सोलर प्लेट, दैनिक उपयोग की सामग्री और दवाइयां बरामद की हैं। पुलिस थाने में नक्सलियों के खिलाफ केस दर्ज किया जा रहा है। फरवरी में 4 महिला नक्सलियों को मारा गया था इससे पहले 19 फरवरी को बालाघाट पुलिस ने गढ़ी थाना क्षेत्र में एक मुठभेड़ में 62 लाख रुपए के इनामी 4 महिला नक्सलियों को मार गिराया था। कान्हा के वनक्षेत्र सूपखार के जंगलों में हुई इस मुठभेड़ में भोरमदेव कमेटी की एक कमांडर और तीन एसीएम स्तर की महिला नक्सली मारी गई थीं।

मुस्लिम युवती ने श्रेया बनकर हिंदू युवक को फंसाया, शादी के बाद 3 बच्चों की मां निकली, धर्मपरिवर्तन का बना रही दबाव

भोपाल राजधानी भोपाल में कथित लव जिहाद का अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें एक हिंदू युवक ने एक मुस्लिम युवती पर आरोप लगाया है कि वह उस पर धर्म बदलने का दबाव बना रही है. दूसरी ओर, युवती ने आरोप लगाया है कि युवक चार साल से उसके साथ रिलेशनशिप में है और अब किसी अन्य युवती से शादी करने वाला है, जो उसे स्वीकार नहीं है. दोनों थाने पहुंचकर एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दे चुके हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है. भोपाल के रहने वाले शेखर सिलावट ने अशोका गार्डन पुलिस थाने में आवेदन दिया है कि नीलोफर नाम की युवती ने श्रेया बनकर उससे प्रेम संबंध बनाए और फिर शादी कर ली. अब वह धर्म परिवर्तन का दबाव बना रही है. आवेदन के साथ युवक ने पुलिस को युवती के दो आधार कार्ड सौंपे, जिनमें एक में उसका नाम नीलोफर और दूसरे में श्रेया दर्ज है. युवक ने अपने आवेदन में लिखा कि वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है. उसकी मुलाकात अपनी कॉलोनी में रहने वाली श्रेया से हुई, जिसके बाद दोस्ती हो गई. श्रेया ने बताया कि वह भी नौकरी करती है और किराए के मकान में अकेले रहती है. श्रेया ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने नाम से आईडी बनाई थी, जिसके जरिए दोनों की चैट होती थी. युवक ने आरोप लगाया कि 2021-22 से श्रेया उस पर शादी का दबाव बनाने लगी. जब उसने कहा कि उसके परिजन शादी के लिए तैयार नहीं हैं, तो श्रेया ने धमकी दी कि यदि शादी नहीं की तो उसे बलात्कार के मामले में फंसा देगी. इसके अलावा, श्रेया उसे ब्लेड की तस्वीरें भेजती थी और कहती थी कि यदि उससे शादी नहीं की तो वह नस काटकर आत्महत्या कर लेगी और सुसाइड नोट में शेखर को जिम्मेदार ठहराएगी. इन्हीं धमकियों के चलते श्रेया ने दबाव बनाकर 6 मई को गायत्री मंदिर में जबरन शादी कर ली. बाद में शेखर को पता चला कि श्रेया का असली नाम नीलोफर है और वह पहले से शादीशुदा है, जिसके तीन बच्चे हैं. पूछने पर नीलोफर ने बताया कि उसका तलाक हो चुका है और बच्चे उसके पूर्व पति के पास हैं. युवक ने आरोप लगाया कि नीलोफर ने यह बात छिपाई और अब उस पर दबाव बना रही है कि वह हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाए और उसके तीन बच्चों को भी स्वीकार करे. इसके अलावा, 18 मई को नीलोफर ने कुछ लड़कों की मदद से उसका अपहरण करवाया और भानपुर ब्रिज के नीचे ले जाकर मारपीट की, साथ ही इस्लाम अपनाने और शादी का दबाव बनाया. वहीं, इस मामले में युवती मंगलवार दोपहर थाने पहुंची और आरोप लगाया कि शेखर को उसके मुस्लिम होने की जानकारी पहले से थी. युवती ने अपने आवेदन में बताया कि उसकी शादी 2012 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई थी, जिससे उसके तीन बच्चे हैं. पति के साथ झगड़े और मारपीट के कारण वह 2020 में सुभाष नगर इलाके में किराए के मकान में अकेले रहने लगी. इसी मकान के नीचे शेखर रहता था, जिससे उसकी बातचीत शुरू हुई और दोनों रिलेशनशिप में आ गए. युवती ने आरोप लगाया कि शेखर को उसके मुस्लिम होने और शादीशुदा होने की जानकारी थी, साथ ही उसे उसके तीन बच्चों के बारे में भी पता था. शेखर को इससे कोई आपत्ति नहीं थी. दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने. कई बार शेखर उसके कमरे में रहता था और वहीं से ऑफिस जाता था. अगस्त 2023 में जब वह गर्भवती हुई, तो शेखर ने उसे गर्भनिरोधक गोली दी, जिससे गर्भपात हो गया. इसके बाद भी दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने. जब भी वह शादी की बात करती, शेखर कहता कि दोनों के धर्म अलग होने के कारण उसके परिजन शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. इस साल अप्रैल में जब उसे मासिक धर्म नहीं हुआ, तो सोनोग्राफी से पता चला कि वह पांच सप्ताह की गर्भवती थी. युवती का आरोप है कि शेखर उसे अस्पताल ले गया और डॉक्टर को दिखाने के बाद घर पर गोली दी, जिससे उसका मासिक धर्म शुरू हो गया. आखिरकार 6 मई को दोनों ने गायत्री मंदिर में शादी कर ली, जिसके लिए युवती ने अपना धर्म बदलकर हिंदू नाम श्रेया रख लिया. युवती का आरोप है कि शादी के दो दिन बाद 8 मई को शेखर ने दूसरी युवती से सगाई कर ली. जब उसने विरोध किया, तो शेखर ने कहा कि वह दोनों को साथ रखेगा. युवती का कहना है कि वह केवल शेखर के साथ रहना चाहती है. उसने यह भी आरोप लगाया कि शेखर अब उस पर झूठा केस लगाने की कोशिश कर रहा है, जबकि उसे उसके मुस्लिम होने की जानकारी पहले से थी. सोमवार को शेखर ने अशोका गार्डन थाने में युवती के खिलाफ आवेदन दिया था, जिसके बाद मंगलवार को युवती ने भी थाने में शेखर के खिलाफ आवेदन दिया. अशोका गार्डन के थाना प्रभारी हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त हुए हैं और मामले की जांच की जा रही है. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है.

हाई कोर्ट के जस्टिस रमना ने रिटायरमेंट से पहले अपने विदाई समारोह में गहरी कड़वाहट की व्यक्त

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस दुप्पाला वेंकट रमना ने रिटायरमेंट से पहले अपने विदाई समारोह में गहरी कड़वाहट व्यक्त की. इंदौर में आयोजित समारोह में रमना ने कहा कि 2023 में गृह राज्य आंध्र प्रदेश से गलत इरादे के चलते उनका ट्रांसफर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में किया गया. सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करने पर भी मेरी बात नहीं सुनी गई. जस्टिस रमणा ने कहा, “यह मेरे जीवन का एक उल्लेखनीय दौर था, लेकिन मुझे बिना कारण आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी पीएनईएस (पैरोक्सिस्मल नॉन-एपिलेप्टिक सीज़र्स) और COVID-19 के बाद मस्तिष्क संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी, जिसके लिए उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट का विकल्प चुना ताकि उनकी पत्नी को बेहतर इलाज मिल सके. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस विनती को अनसुना कर दिया. उन्होंने 19 जुलाई 2024 और 28 अगस्त 2024 को अपनी पत्नी की गंभीर मेडिकल कंडिशन बताते हुए अभ्यावेदन पेश किए, लेकिन इन पर न तो विचार किया गया और न ही इन्हें खारिज किया गया. रमना ने दुख जताते हुए कहा, “मुझे कोई जवाब नहीं मिला. एक न्यायाधीश के रूप में मुझे कम से कम मानवीय विचार की उम्मीद थी. मैं बहुत निराश और दुखी हूं.” उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान चीफ जस्टिस बी. आर. गवई शायद अधिक सहानुभूतिपूर्ण हो सकते थे, लेकिन यह सहानुभूति “बहुत देर से आई, क्योंकि मैं अब सेवानिवृत्त हो रहा हूं.” जस्टिस रमना ने दावा किया कि उनका तबादला गलत इरादे से और परेशान करने के लिए किया गया. उन्होंने कहा, “मुझे स्पष्ट कारणों के बिना अपने गृह राज्य से स्थानांतरित किया गया. मैं उनके अहंकार को संतुष्ट करने में खुश हूं. अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन भगवान न तो माफ करते हैं और न ही भूलते हैं. वे भी किसी रूप में पीड़ित होंगे.” कटुता के बावजूद जस्टिस रमना का भाषण गरिमा से भरा था. पहली पीढ़ी के वकील के रूप में उन्होंने अपने जीवन पर विचार करते हुए कहा, “मैं मानव संघर्ष की शक्ति, गरीबी में गरिमा और अडिग आशा का गवाह रहा हूं. कड़ी मेहनत के अलावा सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है.” उन्होंने स्वीकार किया कि उनका करियर संघर्षों और कड़वे अनुभवों से भरा था, जिसमें ‘षड्यंत्रकारी जांच’ भी शामिल थी. उन्होंने कहा, “मेरे परिवार ने चुपचाप पीड़ा सही, लेकिन सत्य की जीत होगी.” जस्टिस ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के शब्दों का हवाला दिया: “किसी व्यक्ति का मापदंड यह नहीं कि वह सुविधा के क्षणों में कहां खड़ा है, बल्कि यह कि वह चुनौती के समय कहां खड़ा है.” जस्टिस रमना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अगस्त 2023 में उन्हें आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने कर्नाटक का अनुरोध किया, लेकिन कॉलेजियम ने इसे अस्वीकार कर मध्य प्रदेश स्थानांतरण की सिफारिश को दोहराया. उन्होंने कहा, “मैंने कर्नाटक चुना ताकि मेरी पत्नी को निमहान्स, बेंगलुरु में इलाज मिल सके, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार नहीं किया.” हालांकि, रमना ने इसे वरदान बताया, क्योंकि जबलपुर और इंदौर के बार और सहयोगी न्यायाधीशों से उन्हें अपार समर्थन मिला. उन्होंने कहा, “मैंने आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थायी योगदान दिया. मुझे अमरावती, कृष्णा, गोदावरी और नर्मदा की धरती पर सेवा का अवसर मिला. मैंने न्याय किया और इन अवसरों के लिए धन्य हूं.” साल 1994 में द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और हाई कोर्ट के जस्टिस तक पहुंचे. इस पर रमना ने कहा, “मैंने कई चुनौतियों का सामना किया. मेरे करियर में संघर्ष और कड़वे अनुभवों ने मुझे विविधता लाने में मदद की. सत्य की हमेशा जीत होगी, ‘सत्यमे जयते’.”  

बैतूल की धरती आधी रात में हिली, भूकंप से घबरा के उठे लोग, इतनी थी तीव्रता

बैतूल मध्यप्रदेश के बैतूल में बुधवार तड़के 2:59 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. एनसीएस के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर की गहराई में था. आधी रात को आए इस भूकंप से अब तक कीसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है. लोगों को नहीं हुआ भूकंप का अहसास रात का समय होने और तीव्रता कम होने के कारण अधिकतर लोगों को इस भूकंप का अहसास भी नहीं हुआ. हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की कंपन महसूस की गई, लेकिन कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है. जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल ने पुष्टि की है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है. गौरतलब है कि बैतूल क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले 3 मई को जिले के मुलताई क्षेत्र में भी रिक्टर स्केल पर 2.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. लगातार दूसरी बार आई इस हल्की भूकंपीय हलचल से विशेषज्ञों का ध्यान एक बार फिर इस क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता की ओर गया है. भूकंप की तीव्रता 2.8 रही एनसीएस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “भूकंप की तीव्रता 2.8, समय 21/05/2025 को 02:59:44 IST, अक्षांश 21.73°N, देशांतर 78.35°E, गहराई 5 किमी रही. इससे पहले मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर पैमाने पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था. वहीं रविवार को अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, 18 मई को सुबह 5:06 बजे अरुणाचल में रिक्टर पैमाने पर 3.8 तीव्रता का भूकंप आया. विशेषज्ञों की राय भूवैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह के हल्के झटके आमतौर पर किसी बड़े भूकंप का संकेत नहीं होते, लेकिन यदि बार-बार भूकंपीय गतिविधि दर्ज की जाए, तो गहन निगरानी की आवश्यकता होती है. एनसीएस लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर जानकारी साझा कर रहा है. प्रशासन की जनता से अपील जिला खनिज अधिकारी मनीष पालेवाल ने नागरिकों से अपील की है कि, ”घबराएं नहीं, लेकिन आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी एहतियात बरतें. सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखें और भूकंप के समय क्या करना चाहिए, इसके बारे में जागरूक रहें. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र और स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थिति पर नजर बनाए हुए है.”  

पशुपतिनाथ मंदिर की वास्तुशैली में इंदौर के निकट पशुपतिनाथ मंदिर आकार ले रहा

 इंदौर  नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की वास्तुशैली में इंदौर से 20 किमी दूर तिल्लौर खुर्द के पास पशुपतिनाथ मंदिर आकार ले रहा है। 25 हजार वर्गफीट में तैयार हो रहे इस मंदिर में सर्वेश्वर भोले बाबा विराजित होंगे। 2015 में शुरू हुआ मंदिर निर्माण का काम 60 फीसदी पूरा हो चुका है। यहां मंदिर के साथ हेल्थ केयर सेंटर, गोशाला, स्कूल आदि बनाए जाएंगे। शिव ओम सांई ट्रस्ट द्वारा तिल्लौर में 25 हजार वर्गफीट परिसर में पांच हजार वर्गफीट में मुख्य मंदिर बनाया जा रहा है। यह मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की वास्तुशैली पर बन रहा है। यहां लकड़ी की 12 फीट की 48 मूर्तियां बनाकर स्थापित की जा रही हैं। परिसर में 11 अन्य मंदिर भी बन रहे हैं इनमें पहली मंजिल पर शिव परिवार, राम परिवार, कृष्ण परिवार और पांडव की मूर्तियां हैं। दूसरी मंजिल पर योगिनियों की मूर्तिया लगाई गई है। खास बात यह है कि बंगाल के कलाकारों ने एक ही तने से एक मूर्ति बनाई है। परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा 11 अन्य मंदिर भी बन रहे हैं, जिसमें लाल गणेशजी, दत्तात्रय, अन्नपूर्णा माता, उन्मत भैरव आदि के मंदिर है। मंदिर निर्माण शुरू करने से पहले ट्रस्ट सदस्यों द्वारा नेपाल जाकर पशुपतिनाथ मंदिर भी गए और बारीकी से एक-एक वस्तु का निरीक्षण किया ताकि वास्तुशैली को यहां आकार दे सकें। सर्वेश्वर महादेव होंगे विराजित ट्रस्टी मनोज ठक्कर ने बताया कि पशुपतिनाथ मंदिर एक है और वह नेपाल में है। हम यहां पर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की वास्तुशैली का उपयोग कर रहे हैं। मगर यहां पर सर्वेश्वर महादेव को स्थापित किया जाएगा। गेस्ट हाउस, अन्नक्षेत्र के अलावा आठ हजार वर्गफीट में भजन और आध्यात्मिक केंद्र भी बनाया जाएगा। ऐसे शुरू हुआ मंदिर निर्माण मंदिर का निर्माण सबसे पहले 11 रुपये के चंदे के साथ हुआ। इसके बाद गुरु मनोज ठक्कर द्वारा लिखी गई चार किताबों से होने वाली आय से मंदिर निर्माण चल रहा है।

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