LATEST NEWS

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट भोपाल मंडल द्वारा अब तक जारी किए गए 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड, जानिए कैसे उठाएं लाभ भोपाल भारतीय रेलवे, विशेष रूप से भोपाल मंडल, दिव्यांग यात्रियों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया के नेतृत्व में नवंबर 2023 से अब तक कुल 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें रेल यात्रा में अधिक सुविधा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांग रियायत प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव : अब दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप भोपाल मंडल दिव्यांग सेल की प्रभारी डॉ. ज्योति तिवारी के अनुसार, रेलवे द्वारा दिव्यांग यात्रियों को 25% से लेकर 75% तक किराये में छूट प्रदान की जाती है। यह छूट विशेष रूप से दृष्टिहीन, मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए लागू है। पूर्व में इन चारों श्रेणियों के लिए रेलवे रियायत प्रमाणपत्र हेतु एक ही प्रारूप (फॉर्म) का उपयोग होता था। परन्तु वर्ष 2025 से रेलवे ने दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-1) तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-2) जारी किया है। विशेष रूप से अब दृष्टिहीनता की 90% या उससे अधिक स्तर पर भी रियायत का प्रावधान किया गया है, जो दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि दिव्यांग यात्री के साथ एक सहयोगी (एस्कॉर्ट) यात्रा करता है, तो उसे भी समान रियायत मिलती है। जारी किए गए रियायत कार्ड की जानकारी रेलवे के सॉफ़्टवेयर में अपडेट कर दी जाती है, जिससे टिकट बुकिंग के समय कार्ड की फोटो कॉपी प्रस्तुत कर आसानी से छूट का लाभ लिया जा सकता है। यह सुविधा ई-टिकट बुकिंग पर भी उपलब्ध है। दिव्यांग रियायत कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब दिव्यांगजन आसानी से ऑनलाइन माध्यम से रियायत कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज हैं: * जिला चिकित्सा अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) * रेलवे रियायत प्रमाण पत्र जो कि पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल से जारी किया गया हो, जिसमें यह उल्लेख हो कि यात्री बिना सहायक (एस्कॉर्ट) के यात्रा करने में असमर्थ है। (इसका प्रारूप भारतीय रेलवे की वेबसाइट https://divyangjanid.indianrail.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है) * आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाणपत्र * पासपोर्ट साइज फोटो इन दस्तावेजों को भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर अपलोड करना होता है। सत्यापन के बाद कार्ड जारी कर दिया जाता है और आवेदक को इसकी जानकारी SMS के माध्यम से दी जाती है। आवेदन करते समय सभी जानकारी सही-सही भरना अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया, “हमारा प्रयास है कि दिव्यांगजन यात्रियों को सहज, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से रेलवे की सुविधाओं का लाभ मिले। रियायत कार्ड बनने की प्रक्रिया को सरल बनाकर हम उनकी यात्रा को अधिक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक दिव्यांगजन स्वयं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे।” दिव्यांग रियायत कार्ड से संबंधित जानकारी या सहायता के लिए यात्री भोपाल मंडल यात्री हेल्पलाइन नंबर 9630951262 पर संपर्क कर सकते हैं। भोपाल मंडल का यह प्रयास भविष्य में और भी अधिक दिव्यांगजनों तक पहुँच बनाने के लिए जारी रहेगा, जिससे “सबका साथ, सबका विकास” की भावना सशक्त हो।

व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।  

बच्चा होने के 7 महीने बाद विधवा महिला ने लिखाई दुष्कर्म की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने किया खारिज

जबलपुर  बच्चा पैदा होने के सात महीने बाद विधवा महिला द्वारा युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया. इस मामले को हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने खारिज कर दिया. मामले में जो तथ्य सामने आए उन्हें ध्यान में रखते हुए एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दिए गए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भौतिक परिस्थितियों पर विचार करते हुए ऐसा नहीं माना जा सकता है कि दोनों के बीच विवाह के झूठे वादे के आधार पर संबंध बने थे. दोनों पति-पत्नी की रहते थे और एक बच्चे को जन्म दिया है. भरण-पोषण व अन्य राहत का दावा करने के लिए महिला उचित कार्यवाही कर सकती है. पति की मौत के बाद बने संबंध दरअसल, जबलपुर निवासी आवेदक की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की शिकायत पर अधारताल थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता महिला की आयु 32 साल है और उसके पति की मृत्यु साल 2021 में हो गई थी. पति का दोस्त होने के कारण आवेदक का महिला के घर में आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत होने लगी. पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद मई 2021 में दोनों ने शादी करने का फैसला किया और इस तरह दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे. शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि इस संबंध से वह गर्भवती हो गई और उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन आवेदक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर आवेदक पिछले तीन वर्षों से उसका शारीरिक शोषण कर रहा है. लंबे समय तक सहमति से बने संबंध, ये दुष्कर्म नहीं महिला की शिकायत पर आवेदक युवक की ओर से तर्क दिया गया कि उसने कभी शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया. उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे. कोर्ट में तर्क दिया गया कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों. दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे. इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है. हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीमकोर्ट का हवाला एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है. ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे आरोप पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण हो सकते हैं. इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है. एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को आगे स्वतंत्रता प्रदान की है, कि वह जीवन यापन भत्ते आदि के लिए अपना पक्ष रख सकती है. क्या है मामला जबलपुर निवासी वीरेंद्र वर्मा ने उसके ऊपर दर्ज हुए केस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। उसने बताया कि अधारताल थाने में उसके खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में कहा गया था कि एफआईआर के अनुसार शिकायत करने वाली महिला की आयु 32 साल है। उसके पति की साल 2021 में मृत्यु हो गयी थी। पति का दोस्त होने के कारण आवेदन का महिला के घर आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत प्रारंभ हो गयी। सहमति से साथ रहने का लिया फैसला पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद आवेदन के उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव भी रखा। दोनों ने सहमति से मई 2021 में शादी करने का निर्णय लिया था। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए। दोनों पति-पत्नी की तरह लंबे समय तक साथ रहे और इस दौरान एक बच्चे का जन्म हुआ, जो लगभग सात माह का है। लेकिन आवेदक ने शादी करने से इनकार कर दिया। महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर कई सालों से उसका शारीरिक शोषण करता रहा। महिला ने दर्ज कराई एफआईआर शिकायतकर्ता महिला ने शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जनवरी 2025 में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया। उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों। दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे। इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने इस तर्क से खारिज की याचिका एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है। ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण ऐसा हो सकते हैं। इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को उक्त स्वतंत्रता प्रदान की है।

खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा

खरगोन खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा। यानी यहां अब माताएं दूध का दान करेगी और उन्हें नवजात बच्चों को दिया जाएगा। इस सुविधा से उन नवजात बच्चों को भी सुविधा मिलेगी जिन्हें खुद की माताएं जन्म के बाद दूध नहीं पीला पाती। अभी ऐसे बच्चों को परिजन बाजार से दूध खरीदकर फिर पिलाते हैं।  इससे बच्चे को वह पोषक तत्व नहीं मिल पाते जो मां के दूध से मिलते हैं। जिला अस्पताल में एसएनसीयू के पास लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (स्तनपान प्रबंधन इकाई) तैयार की गई है। कक्ष बनकर तैयार है। भोपाल से उपकरण आने के बाद इसे इसी माह से शुरू किया जाएगा। 6 महीने तक स्टोर किया जा सकता है दूध सिविल सर्जन डॉ. अमरसिंह चौहान ने बताया इस यूनिट की आवश्यकता लंबे समय से है। इसे एनएचएम के जरिए तैयार कराया है। इस यूनिट पर करीब 21 लाख रुपए खर्च हुए हैं। अभी अस्पताल में औसत 20 से 25 डिलेवरी होती है। प्रत्येक नवजात को माता का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में जिन माताओं को दूध अधिक आता है, उस दूध को इस यूनिट में स्थापित रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा। अस्पताल में भर्ती किसी बच्चे को दूध की आवश्यकता पड़ेगी तो डॉक्टर्स के परामर्श पर उसे मां का दूध यहां से उपलब्ध कराएंगे। इस यूनिट में करीब छह माह तक मां के दूध को सुरक्षित रखा जा सकता है। क्या कहते है एक्सपर्ट्स? जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। कई बार माताओं को दूध नहीं आता। ऊपर का दूध बच्चे नहीं पचा पाते, उल्टियां होती है, पेट फूलने की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में मदर मिल्क बैंक से उन्हें मां का दूध मिलेगा। इससे शिशु मृत्युदर में भी गिरावट आएगी। यह अच्छी पहल है। डॉ. भानुप्रिया खरते, शिशु रोग विशेषज्ञ, खरगोन शिशु मृत्युदर में आएगी गिरावट एसएनसीयू के डॉ. पवन पाटीदार बताते हैं कि यहां वार्ड में करीब 15 बच्चे औसत भर्ती रहते हैं। अधिकांश बच्चे को ऊपर का दूध दिया जाता है। परिजन यह दूध बाजार से या घर से लेकर आते हैं। यह समस्या मां को दूध नहीं आने की स्थिति में आती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आध्यात्मिक गुरु, परम पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय दद्दा जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा में समर्पित रहा। उनकी दिव्य शिक्षा और साधनामय जीवन मानव कल्याण के संकल्प की सिद्धि के लिए एक प्रेरणा पुंज के समान है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर दी संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर दी संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए प्रदेशवासी नियमित जांच को दें प्राथमिकता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर प्रदेशवासियों से, अपने परिवार और समाज में हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरुकता लाने के प्रयास करने का आहवान किया है। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप दिवस, सभी को नियमित जांच के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से बचाव के लिए संयमित जीवनशैली, नियमित योग-व्यायाम, संतुलित आहार और प्रभावी कार्य-प्रबंधन आवश्यक है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने पर दी बधाई

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023 से सम्मानित होने पर बधाई दी। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह सम्मान स्वामी रामभद्राचार्य को यह सम्मान प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृत के प्रकांड विद्वान स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा दृष्टिबाधित होने के बावजूद अंतर्मन के आलोक से वेद, उपनिषद एवं रामकथा की जो गूढ़ व्याख्या की गई है, वह भारत ही नहीं, वैश्विक साहित्य जगत के लिए अनुपम आध्यात्मिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि भारतीय संत परंपरा के गौरव, श्रद्धेय संत पद्मविभूषित स्वामी रामभद्राचार्य की संस्कृत साधना और तपस्वी जीवन की इस उपलब्धि से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी।  

2019 में स्वीकृत 5.1 किमी फ्लाईओवर पर अब तक काम कब शुरू होगा, HC ने पीडब्ल्यूडी विभाग से जवाब तलब किया

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्याओं में से एक अंबेडकर चौक से अब्दुल हमीद चौक तक के मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण की योजना, जो वर्ष 2019 में स्वीकृत हुई थी, अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी, शहरी विकास विभाग के सचिव और जबलपुर कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 2019 में मिली थी मंजूरी, 2024 तक सिर्फ बढ़ती गई लागत फ्लाईओवर की शुरुआती योजना 3.2 किलोमीटर लंबी थी, जिसकी लागत 186 करोड़ रुपए तय की गई थी। हालांकि, 2024 में इसकी लंबाई बढ़ाकर 5.1 किलोमीटर कर दी गई और बजट भी तीन गुना तक बढ़ाया गया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि जब स्वीकृति और बजट दोनों पहले ही तय हो चुके हैं, तो आखिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ? सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक इलाके में स्वीकृत है फ्लावर आपको बता दे की अंबेडकर चौक से लेकर अब्दुल हमीद चौक तक स्वीकृत यह फ्लाईओवर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक है। अंबेडकर चौक से लेकर घमापुर चौक तक हर वक्त जाम की स्थिति लगी रहती है। उसके बावजूद यहां फ्लाईओवर ना बनना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है। जबकि यहां पर स्थानीय प्रतिनिधि से लेकर आम लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग की है। घंटों जाम में फंसते हैं लोग अंबेडकर चौक से घमापुर और अब्दुल हमीद चौक तक का इलाका जबलपुर का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है, जहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ट्रैफिक की परेशानी से जूझ रहे स्थानीय लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग उठाई है। इसके बावजूद शासन और प्रशासन की उदासीनता से यह परियोजना केवल कागज़ों में ही सिमटी रह गई है। हाईकोर्ट की सख्ती से जागेगा सिस्टम? हाईकोर्ट (MP High Court) द्वारा अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर कुछ ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी। यह मामला ना केवल एक शहरी विकास परियोजना से जुड़ा है, बल्कि यह जनता की रोजमर्रा की परेशानियों और शासन की जवाबदेही से भी सीधा संबंध रखता है। सात साल पुरानी मंजूरी के बावजूद अगर एक जरूरी फ्लाईओवर का काम शुरू नहीं हो पाया है, तो ऐसी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना लाजिम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व दूरसंचार दिवस की शुभकामनाएं दीं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्व दूरसंचार दिवस की शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नवाचार आधारित देश की समग्र विकास की यात्रा में दूरसंचार की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में डिजिटल इंडिया के संकल्प के साथ भारत ने दूरसंचार क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनते हुए अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नवीन तकनीकों एवं नवाचारों को अधिक से अधिक अपनाकर देश-प्रदेश की विकास यात्रा में अपना योगदान देने का आहवान किया है।  

एथलीट चोपड़ा की उपलब्धि से देश हुआ गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

एथलीट चोपड़ा की उपलब्धि से देश हुआ गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जेवलिन थ्रोअर चोपड़ा ने 90.23 मीटर तक भाला फेंककर बनाया नया राष्ट्रीय रिकार्ड मुख्यमंत्री ने दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के गोल्डन बॉय, एथलीट नीरज चोपड़ा को दोहा डायमंड लीग 2025 में अद्भुत प्रदर्शन के लिए बधाई दी। नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचते हुए 90.23 मीटर तक भाला फेंक कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीरज चोपड़ा की इस उपलब्धि से पूरा देश गौरवान्वित है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर माँ भारती का मान बढ़ाया। चोप भारत के इकलौते एथलीट हैं, जिन्होंने भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में 90 मीटर का लेवल पार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से नीरज के उज्जवल भविष्य की कामना की है।  

सेंधा नमक का रेट 60 रुपये प्रति किलो हुआ, पनीर के फूल और खारक के भाव भी बढ़े

भोपाल भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर बाजारों में दिखने लगा है। पाकिस्तान से आयात की जाने वाली खाद्य व अन्य वस्तुओं के भाव बढ़ने लगे हैं। सेंधा नमक 50 से 60 रुपये प्रतिकिलो हो गया है, जो 30 रुपये प्रतिकिलो मिलता था। वहीं, पनीर के फूल (जड़ी-बूटी) के भाव 100 रुपये तक बढ़ गए हैं। इसका उपयोग मधुमेह नियंत्रण, अनिंद्रा, अस्थमा व मूत्र विकारों के दूर करने में किया जाता है। पाकिस्तान से छुआरा या खारक भी आता है, जिसके भाव में भी 100 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। सूखे मेवे व जड़ी-बूटियों के थोक विक्रेता अरुण सोगानी बताते हैं कि आपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान से नया माल नहीं आ रहा है, जितना भंडारण में हैं, वो ही उपलब्ध है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भोपाल के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि पाकिस्तान से संघर्ष के चलते और तुर्किए की ओर से पाकिस्तान की सहायता करने पर कैट ने वहां की वस्तुओं का व्यापार करने का बहिष्कार कर दिया है। तुर्किए से मंगाते हैं यह वस्तुएं संगमरमर, सोना, सेब, सीमेंट, चूना, खनिज तेल समेत अन्य वस्तुएं भारत तुर्किए से आयात करता है। इनके दाम भी आगामी समय में बढ़ सकते हैं, लेकिन इनमें से भारत में भी इन वस्तुओं का उत्पादन होता है, इसलिए भाव में ज्यादा तेजी होने की संभावना कम ही दिखाई देती है। पाकिस्तान से इनका आयात पाकिस्तान से सेंधा नमक, सूखे मेवे, सीमेंट, पत्थर, चूना, कपास, ऑप्टिकल वस्तुएं, मुल्तानी मिट्टी, चमड़े की वस्तुएं, तांबा, सल्फर आते हैं, हालांकि सेंधा नमक के अलावा बाकी वस्तुओं का उत्पादन भारत में भी होता है। ऐसे में बाकी वस्तुओं के भाव नहीं बढ़े हैं।

देर रात युवतियों ने चिलम से उड़ाया धुआँ, गंजेड़ियों के साथ नशा करने सुपर कॉरिडोर पहुंची युवतियां

 इंदौर इंदौर में युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसमें लड़कियां भी पीछे नहीं है, शहर से एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ युवतियां गांजा पीते नजर आ रही हैं। वीडियो सुपर कॉरिडोर ओवरब्रिज का बताया जा रहा है। जहां देर रात युवतियां चिलम से गांजा पीते नजर आ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो में एक युवक चिलम जलाते हुए दिखाई दे रहा है, जबकि युवतियां धुएं के छल्ले बना रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये युवतियां घर के लोगों के सोते ही देर रात गंजेडियों के साथ यहां पहुंचती हैं और खुलेआम नशा करती हैं। सुपर कॉरिडोर जैसी जगह पर इस तरह नशे का सेवन सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इन युवतियों और इनके साथियों पर कोई कार्रवाई करेगा? इंदौर में युवाओं में बढ़ते नशे की लत पर लगाम लगाने के दावों के बावजूद ये घटनाएं उजागर हो रही हैं।  कल देर रात 2:30 बजे एरोड्रम सुपर कॉरिडोर निकली तो देखा कि ब्रिज पर कुछ खास हलचल तो नहीं थी लेकिन ब्रिज के डिवाइडर पर युवाओं का ग्रुप बैठा था। टीम ने उनपर ध्यान दिया तो पता चला कि युवकों के साथ युवतियां बंसी में गांजा भरकर दम मार रही है। मुंह से ऐसे खींच रही है जैसे नशे की आदि हो। युवतियों के साथ चार अन्य युवक भी खड़े थे जो युवती के मुंह में रखी बंसी को सुलगाने के लिए माचिस जलाकर आग दे रहे थे। यह घटना उस समय हुई जब इलाके में सन्नाटा रहता है, लेकिन रात का समय है। शहर में क्राइम रेट फ्लकचुएट होने के चलते कमिश्नर संतोष सिंह ने अधिकारियों को रात में टाइट पुलिसिंग के निर्देश दे रखे है। उसके बाद भी ऐसे इलाकों में पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी गश्त करती नहीं दिखी और न ही बीट के पुलिसकर्मी दिखाई दिए। घरवालों के सोने के बाद दरवाजा खोलकर निकली  गांजा पी रही एक युवती और युवक को बहाने से बुलाकर बात की और खुद को कॉलेज का छात्र होना बताकर घर से निकालने का बहाना बनाना पूछता तो युवती बोली कि मम्मी-पापा के सो जाने के बाद में घर का दरवाजा खोलकर निकल जाती हूं। युवती फिलहाल सुखलिया इलाके के मार्थोमा स्कूल में 11वीं की पढ़ाई कर रही है। युवक भी 11वीं कक्षा में है। वहीं, अन्य युवती और युवक भी 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे है।

मिस एशिया यूनिवर्स प्रतियोगिता में सतना की बेटी मीनाक्षी सिंह ने लहराया परचम, अब करेंगी एशिया में भारत का प्रतिनिधित्व

सतना  जिले के लिए गर्व का क्षण तब आया जब सतना की बेटी मीनाक्षी सिंह ने “मिस एशिया यूनिवर्स” प्रतियोगिता में शानदार जीत हासिल कर खिताब अपने नाम किया। अब मीनाक्षी पूरे एशिया में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि शुक्रवार को, दिल्ली के एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित फाइनल इवेंटके दौरान दर्ज हुई। प्रतियोगिता में देशभर से आई सुंदरियों ने भाग लिया था, लेकिन अपनी आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और प्रस्तुति से मीनाक्षी ने निर्णायकों का दिल जीत लिया। स्टेज पर उनके आत्मविश्वास और भारतीयता से भरे उत्तरों ने उन्हें सब पर भारी कर दिया। मीनाक्षी सिंह जो कि मूलतः सतना जिले की निवासी हैं, ने मॉडलिंग और फैशन के क्षेत्र में कड़ा संघर्ष करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपने जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। प्रतियोगिता में मीनाक्षी को “बेस्ट कैटवॉक” और “ब्यूटी विद ब्रेन” टाइटल भी मिले, जिससे उनके समग्र प्रदर्शन को और भी मजबूती मिली। मीनाक्षी ने खिताब जीतने के बाद कहा,यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, सतना और पूरे देश की है। मैं अपने माता-पिता, गुरुजनों और उन सभी का आभार मानती हूं जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया। मेरा सपना है कि मैं भारत की सांस्कृतिक सुंदरता को एशिया के मंच पर गर्व से प्रस्तुत करूं।” इस उपलब्धि पर सतना में खुशी की लहर है। जिले के सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक वर्गों ने मीनाक्षी की उपलब्धि पर बधाई दी है। सोशल मीडिया पर भी मीनाक्षी सिंह ट्रेंड कर रही हैं। अब सबकी नजरें एशिया लेवल पर होने वाली मिस यूनिवर्स प्रतियोगितापर टिकी हैं, जहां मीनाक्षी सिंह भारत का तिरंगा थामे अपनी प्रतिभा और गरिमा से पूरी दुनिया को भारत की सुंदरता और शक्ति का अहसास कराएंगी।

दुआ है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे

भोपाल: तहज़ीब, तालीम, तरक्क़ी और तासीर का शहर  ताहिर अली यदि मंदिरों से घंटियों की मधुर आवाज़ और मस्जिदों से बुलंद अज़ान एक साथ गूंजे, तो समझ लीजिए आप उस शहर में हैं, जहाँ सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब ने अपने खूबसूरत रंग बिखेरे हैं। यह शहर है भोपाल – झीलों की नगरी, नवाबी संस्कृति की परछाईं, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल और ऐतिहासिक धरोहरों का सजीव संग्रह। तहज़ीब और भाईचारा भोपाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साझा संस्कृति है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच मंदिर, मस्जिद और मजारों का साथ-साथ दिखना आम बात है। यही वह शहर है, जहाँ सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक – ताजुल मस्जिद है, तो वहीं विश्व की सबसे छोटी मस्जिद मानी जाने वाली ‘ढाई सीढ़ी मस्जिद’ भी यहीं स्थित है। भोपाल में उर्दू भाषा का उपयोग लगभग सभी समुदाय के लोग करते हैं। भोपाल की सड़कों पर चलते हुए अगर कोई राहगीर किसी मोहल्ले का पता पूछ ले, तो भोपाली उसे दरवाजे तक छोड़कर आते हैं। यही इसकी तहज़ीब है, यही इसकी पहचान है। भोपाल की एक बात ओर मशहूर है कि जो भी भोपाल आता है यहां के लोग उसे सीने से लगा लेते हैं। हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से जो भोपाल आया जैसे नौकरीपेशा या कोई भी व्यवसाय के लिए यहीं का होकर रह गया। भेल कारखाना इसका जीता-जागता उदाहरण है। ज्यादातर नौकरी पेशा अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने के बाद भोपाल को ही अपना मानकर यहीं बस गए। काफी लोग कारोबार करने के उद्देश्य से यहीं आकर आबाद हो गये। भोपाल की मज़ेदार ‘उर्फ़ियत’ – नाम के पीछे नाम की दुनिया! भोपाल, भोपाली और भोपालियत की पहचान  केवल ताल-ता‍लैया और ऐतिहासिक इमारतों आबोहवा, तहजीब और संस्‍क़ति तक सीमित नहीं है,  बल्कि अपनी अनोखी और मज़ेदार ‘उर्फ़ियतों’ के लिए भी मशहूर है। जब किसी मोहल्ले में एक ही नाम के कई लोग हों, तो पहचान बनाने के लिए नाम के पीछे कुछ जोड़ना लाज़मी हो जाता है, फिर चाहे वो पहनावे से जुड़ा हो, बोलचाल से, शौक से या किसी मज़ेदार किस्से से – हर भोपाली को मिल जाता है उसका ख़ास “उर्फ़ी टाइटल”। तो मिलिए भोपाल की इस अनोखी नामावली से – तारिक़ टाई, जो हमेशा टाई में दिखते थे, तारिक़ चपटे, जिनके गाल खुद गवाही देते हैं, तारिक़ होंठ कटे, जिनके होंठों की कहानी हर गली जानती है, और तारिक़ झबरे, जिनकी आंखें ही उनकी पहचान हैं। आरिफ़ अंडे का नाश्ता शहर भर में मशहूर है, तो आरिफ़ बुलबुल अपने गले से सबको दीवाना बना देते हैं। बाबूलाल 501 नाम की सिगरेट की तरह मशहूर हैं, और सेठ छगनलाल, जिनका “सेठपना” मोहल्ले में आज भी कायम है। रविंद्र सिंह लखरत, बाबूलाल लठमार, चांदमल हिटलर, मोहन पंचायती, लाला मुल्कराज, सरदारमल लालवानी, नाहर सिंह सूरमा भोपाली, कन्हैयालाल ‘बीड़ी’ और के. अमीनउद्दीन-301 तो अपनी शान और रसूख़ के लिए पहचाने जाते हैं। अखिलेश अग्रवाल गफूरे और वहीद अग्रवाल की उर्फ़ियतें उनकी दोस्ती और कारोबार की दास्तान सुनाती हैं। हफ़ीज़ पाजामे और चांद कटोरे का नाम सुनते ही भोपाल मुस्कुरा उठता है, वहीं चांद चुड़वे मोहल्ले की कहानियों के नायक हैं। सुरेश 501, अनिल अग्रवाल पटीये, और देवेश सिमहल वकील साहब अपने नाम से ही काफ़ी असरदार हैं। बाबू साहब घोड़े और बाबू साहब नाम की सादगी में गजब की शान है। आलू बड़े, ज़ायकों की दुनिया के हीरो हैं, और लोक सिंह ताल ठोंकू हर बहस में जीत की गारंटी हैं। रईस भूरा, मुन्ने मॉडल ग्राउंड, मुन्ने पेंटर, मुईन क़द्दे और माहिर मदीना – ये नाम जैसे ही कान में पड़ें, पूरा मोहल्ला मुस्करा उठता है। भोपाल की गलियों में लोग नाम से कम और उर्फ़ियत से ज़्यादा जाने जाते हैं। जावेद चपटे और जावेद चिराटे जैसे नामों में मज़ाकिया तंज है, तो बन्ने पहलवान और बन्ने लखेरा में मोहल्ले की दो अलग-अलग शख्सियतें झलकती हैं। कल्लू अट्ठे, बाबू भड़भुजे, मुन्ने फुक्की, ईरानी और डूंड जैसे नाम रोज़मर्रा की आदतों, मज़ाक या पेशे से जुड़े हैं। सईद बुल, छुटकटे, वहीद ढेलकी, आरिफ पिस्स, और अनफिट भोपाल की उस खास तासीर को दर्शाते हैं, जहां हर नाम के पीछे एक किस्सा है — हँसी, अपनापन और तंज से भरा। यही भोपाल की असली पहचान है — उर्फ़ियतों में बसी यारी और यादें। भोपाल की इन मज़ेदार उर्फ़ियतों में वो अपनापन है, जो किसी GPS में नहीं मिलता – सिर्फ मोहल्लों की यादों और बातों में ही जिंदा रहता है। भोपाल में हिंदू-मुस्लिम एकता : सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल भोपाल की सांस्कृतिक विरासत की सबसे मजबूत कड़ी उसकी हिंदू-मुस्लिम एकता है, जो सिर्फ सामाजिक सौहार्द का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के बीच पनपी सहिष्णुता और साझेदारी की अनूठी मिसाल है। जब देश के अन्य हिस्सों में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, तब भी भोपाल ने अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोए रखा। हर वर्ग के लोगों ने एक दूसरे से बहुत प्यार मोहब्बत के साथ दिली लगाव रखा। सन 1812 की लड़ाई में हिंदू योद्धाओं जैसे डांगर सिंह, जय सिंह, और अमन सिंह पटेल ने भोपाल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि युद्ध में महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की, यह दिखाते हुए कि भाईचारा केवल धार्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्तर पर भी जीवित था। भोपाल रियासत के प्रशासन में हर कालखंड में हिंदुओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दीवान (प्रधानमंत्री) जैसे उच्च पदों पर लाला घानी राम, लाला फूलानाथ, राजा अवध नारायण जैसे हिंदू अधिकारी रहे। यह समावेशिता केवल औपचारिक नहीं थी — ये अधिकारी नवाबों के विश्वासपात्र भी थे। नवाब क़ुदसिया बेग़म के दरबार में एक हिंदू, एक मुसलमान और एक ईसाई मंत्री नियुक्त थे — यह उस समय की धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक था। रियासत के इंजिमाम (शामिल करने) के बाद शरीफ़ शरणार्थियों में (उच्च परिवार के शरणार्थी) सरदार गुरबख्श सिंह भी थे, जिनके बेटे अमरीक सिंह रंजीत होटल चलाते हैं। वे बहू मियाँ के साथ ईद पर नवाब साहब को सलाम करने जाते। एक बार नवाब साहब ने पूछा कि भोपाल कैसा लग रहा है, तो सरदार साहब ने हाथ जोड़कर कहा कि जहाँ गरीब परवर सरकार का साया हो, वहाँ कोई कैसे न खुश हो — यह कहते हुए वे भावुक हो … Read more

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet