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कांग्रेस नेता मनोज शुक्‍ला अब उप मुख्‍यमंत्री जगदीश देवड़ा के भी बंगले पर कालिख पोतने जा रहे थे, हुए गिरफ्तार

भोपाल कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्री विजय शाह के श्यामला हिल्स बंगले पर लगी उनकी नेम प्लेट पर कालिख पोतने वाले कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने शनिवार को जगदीश देवड़ा के भी बयान का विरोध किया। वे मंत्री देवड़ा के 74 बंगले पर पहुंचे और कालिख पोतने के लिए बंगले में घुसने लगे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शुक्ला व अन्य कांग्रेसियों ने उपमुख्यमंत्री देवड़ा मुर्दाबाद के नारे लगाए। उनके इस्तीफे की मांग की। पुलस ने उपमुख्यमंत्री के बंगले की सुरक्षा बढ़ा दी। कांग्रेस नेता शुक्ला ने बताया कि विजय शाह के बाद उपमुख्यमंत्री ने जगदीश देवड़ा ने सेना पर आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा कि सेना व देश के नागरिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने नतमस्‍तक हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव जल्द ही शाह व देवड़ा को हटाने की कार्रवाई करें। इस अवसर पर मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश पंथी, तारिक अली, अमित खत्री, दीपक दीवान, मुजाहिद सिद्दीकी, अलीमुद्दीन बिल्ले, बाबर खान, प्रिंस नवांगे, मनोज ठाकुर आदि मौजूद रहे। मंत्री विजय शाह के सेना को लेकर दिए गए विवादित बयान के खिलाफ कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। उनके नेतृत्व में शिवाजी नगर अंकुर खेल मैदान के पास सेना के सम्मान में सेना के तीनों प्रमुखों को सलामी दी गई। तीनों के पोस्टर लगाए गए। फिर अपने समर्थकों के साथ सलामी दी। इससे पूर्व सेवादल के पूर्व जिलाध्यक्ष मुईन सिद्दीकी ने वंदेमातरम गीत गाया। फिर सेनाध्यक्षों को सलामी देकर राष्टगान गाया। विधायक मसूद ने कहां विजय शाह के बाद जगदीश देवड़ा सहित एक के बाद एक मंत्री सेना के खिलाफ अपशब्द कहने लगे तो हमें ये लगता है की सैनिकों को सेल्यूट करना चाहिए। यह संदेश देना चाहिए की सेना हमारे सिर का ताज हैं। सैनिक जब सरहदों पर खड़े होकर देश की हिफाजत करते हैं, तब हम चेन से सोते हैं, इसलिए हमने सेना को सलाम किया है। मंत्री विजय शाह के मामले और उनकी गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर विधायक मसूद ने कहा कि अब उच्च न्यायालय से ही उम्मीद है। भेल बरखेड़ा में उपमुख्यमंत्री व मंत्री के पुतलों को जूतों की माला पहनकर घुमाया     गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बड़खेड़ा पठानी में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और मंत्री विजय शाह द्वारा सैनिकों पर किए गए अपत्तिजनक बयान के विरोध में शनिवार को श्रमिक कांग्रेस नेता दीपक गुप्ता के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया।     इसमें उपमुख्यमंत्री व मंत्री के पुतलों पर जूते मारकर मुर्दाबाद के नारे लगाए गए पुतलों को जूते की माला पहनाकर बरखेड़ा पठानी में घुमाया। पुतलों का दहन किया।     इस दौरान जेके पाठक, उपेंद्र सिंह, सुशील प्रजापति, दुलीचंद जांगड़ा, सतीश कनोजिया, मनोज सोनी, वीरु लाहौरी सहित सैकड़ों जन शामिल हुए।

मई में एक साथ मिलेगा तीन महीने का राशन,अगर आपने एक जरूरी काम नहीं क‍िया तो आप इससे हाथ धो सकते हैं

भोपाल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से हर महीने राशन लेने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए ये महत्वपूर्ण खबर है, राज्य शासन ने आदेश दिया है कि उन्हें तीन महीनों का राशन एकमुश्त दिया जायेगा, यानि जून, जुलाई और अगस्त का राशन हितग्राहियों को एक साथ दिया जायेगा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। संचालनालय ने सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु NFSA/PMGKAY अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री के आवंटन, उठाव एवं वितरण किया जाए। 20 तारीख तक मई का और 21 से जून, जुलाई, आगस्त का राशन मिलेगा निर्देश में कहा गया कि मई हेतु आवंटित राशन सामग्री का वितरण हर हाल में 20 मई तक समस्त पात्र परिवारों को कराया जाए, उसके बाद अगले दिन 21 मई से जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री (PMGKAY, MDM, ICDS, KKY का खा‌द्यान्न, शक्कर एवं नमक) का पात्रतानुसार वितरण कराया जाए। POS मशीन पर तीन महीने के राशन वितरण की सुविधा आदेश में कहा गया है कि जून से अगस्त तक का एकमुश्त आवंटन जारी किया गया है जिसे 31 मई, 2025 तक प्रदाय केन्द्रों पर उठाव कराकर उचित मूल्य दुकानों पर भंडारण सुनिश्चित कराया जाए, पीओएस मशीन में माह जून से अगस्त, 2025 तक की राशन सामग्री माहवार वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है अर्थात् पात्र हितग्राही को राशन प्राप्त करने हेतु माहवार क्रमानुसार पीओएस मशीन पर एथेंटिकेशन किया जाकर राशन का वितरण कराया जाए। मानसून को देखते हुए सरकार का फैसला तीन महीने का राशन एक साथ वितरित कराने का कारण मानसून सीजन बताया गया है, आदेश में कहा गया है की मानसून सीजन में संभावित बाढ़ के कारण राशन सामग्री के परिवहन, भंडारण एवं वितरण में आने वाली समस्याओं के निराकरण एवं पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु ये व्यवस्था की गई है। 3 महीने के राशन से धो बैठेंगे हाथ! अगर 31 मई से पहले नहीं क‍िया ये काम अगर अब भी आप राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराने में आलस दिखाएंगे तो एक नहीं लगातार तीन महीने का गेहूं-चावल और चीनी का नुकसान करा लेंगे। देशभर में तमाम राज्यों में जून-जुलाई और अगस्त का राशन एक साथ देने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत यूपी, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों में तीन महीने का एडवांस राशन दिया जाएगा। 21 मई से राशन मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि अगर आपके राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं हुआ है तो आपको तगड़ा झटका लग सकता है। इसके बाद राशन सीधे सितंबर में मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ियों को रोकने और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए सभी राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी कराया जाए। सरकारें लगातार इसे लेकर मौके दे रही हैं। बावजूद इसके अभी भी बहुत से लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराया है। यूपी में मई-जून में ही मिलेगा 3 महीने का राशन यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग की बैठक में तय हुआ है कि मई का राशन 20 मई तक वितरित कर दिया जाएगा। इसके बाद 21 मई से 31 मई तक जून का राशन बांटा जाएगा। फिर 5 जून से 16 जून तक जुलाई का राशन मिलेगा। जून में ही 19 से 30 जून तक अगस्त का राशन भी मिल जाएगा। इसके बाद फिर सीधे सितंबर में राशन मिलेगा। झारखंड में 1 जून से 30 जून के बीच जून, जुलाई और अगस्त का एडवांस राशन मिलेगा। अनुमान के मुताबिक झारखंड में करीब 2.88 करोड़ लाभार्थी हैं, जो सरकार द्वारा सब्सिडी पर मिलने वाला राशन लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी 21 मई से तीन महीने का राशन एक साथ मिलना शुरू हो जाएगा। अन्य राज्यों में भी एडवांस राशन बांटने की तैयारी हो गई है। ऐसे करें ई-केवाईसी राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराना बहुत ही आसान है। आप मोबाइल से बस 2 मिनट में इस काम को कर सकते हैं। मोबाइल में 2 एप डाउनलोड करें- ‘मेरा KYC’ और AadhaarFaceRD मोबाइल एप। बस आपको अपना आधार नंबर डालकर लोकेशन के साथ वेरिफाई करना है और फिर मोबाइल कैमरे से अपनी वेरिफिकेशन को पूरा करना है। बस हो गया ई-केवाईसी। आप चाहें तो पास की राशन कार्ड की दुकान पर आधार कार्ड ले जाकर भी यह काम करा सकते हैं। क्यों मिल रहा 3 महीने का एडवांस राशन सरकार द्वारा तीन महीने का एडवांस राशन मिलने को कुछ लोग पाकिस्तान के साथ तनाव के साथ जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। दरअसल मानसून में कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। राशन का ट्रांसपोर्टेशन, उसका वितरण, स्टोरेज जैसी बहुत सी समस्याएं आती हैं। ऐसे में कोई परिवार इस वजह से भूखा न सोए, इसलिए सरकार मानसून खत्म होने तक का राशन एडवांस में दे रही है। कई बार सरकार ऐसा कदम जरूरत से ज्यादा अनाज उत्पादन की वजह से भी करती है। अंत्योदय अन्न योजना (AAY) राशन कार्ड धारकों को प्रति परिवार 35 किलो राशन दिया जाता है। जबकि पीएचएच कार्ड पर परिवार में प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाता है।

सिवनी में डबल मर्डर के बाद तनाव,गुस्साई भीड़ शराब दुकान को फूंका, चक्काजाम किया

सिवनी सिवनी में दो युवकों की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इस घटना से गुस्साए परिजन और ग्रामीणों ने हमलावरों को पकड़कर शराब दुकान में आग लगा दी और मंडला रोड पर चक्काजाम कर दिया। मौके पर पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता, एसडीओपी, टीआई, एसडीएम और तहसीलदार मौजूद हैं. घटना केवलारी के परासपानी गांव में शुक्रवार रात करीब 12 बजे की है। परिजन ने बताया कि अमन बघेल (20) और रूपक बघेल (25) केवलारी आए थे। इसी दौरान गांव के ठाकुर परिवार ने दोनों को खेरमाई मंदिर के पास खिरका मोहल्ले में बुलाया। यहां दोनों पर चाकू से हमला कर दिया। आरोपियों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं। घायल युवकों को पहले केवलारी अस्पताल ले जाया गया। यहां से डॉक्टरों ने उन्हें जिला चिकित्सालय सिवनी रेफर कर दिया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों का पोस्टमॉर्टम शनिवार को सिवनी में किया जाएगा।केवलारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पर आरोपियों को शहर से बाहर भेजने के आरोप मृतकों के मामा संजय बघेल का आरोप है कि कमल ठाकुर और उसके परिवार ने भांजे रूपेश और अमन पर चाकू से हमला किया था। अमन की मौके पर मौत हो गई थी। रूपेश ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। टीआई को इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। टीआई ने आरोपियों को केवलारी के बाहर भेज दिया है। हम सड़क पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। थाना प्रभारी को हटाने की मांग कर रहे ग्रामीण सिवनी एसपी सुनील कुमार मेहता का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। मृतकों के परिजनों को समझा रहे हैं। शवों का पोस्टमॉर्टम कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों द्वारा हत्या के आरोपियों को तत्काल पकड़ने और केवलारी थाना प्रभारी को हटाने की मांग की जा रही है। तीन बहनों का इकलौता भाई था रूपक मृतक रूपक बघेल माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह पेशे से किसान था। शादी नहीं हुई थी। उसकी तीन बहन हैं। वहीं मृतक अमन दो भाई और एक बहन हैं। उसकी भी शादी नहीं हुई थी। वह पेशे से किसान था।

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन   भोपाल मंडल  के इटारसी स्टेशन पर ठहराव भोपाल    रेल प्रशासन द्वारा समर के दौरान अतिरिक्त यात्री यातायात को क्लियर करने और उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से 09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर 06-06 ट्रिप चलाने का निर्णय लिया गया है। इस गाड़ी में शयनयान श्रेणी एवं सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे। यह स्पेशल ट्रेन पश्चिम मध्य रेल के इटारसी, जबलपुर, कटनी एवं सतना स्टेशनों से होकर गन्तव्य को जाएगी। उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (12 सेवाएं)  गाड़ी संख्या 09039 उधना-गया साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 23 मई से 27 जून 2025 तक प्रत्येक शुक्रवार को उधना स्टेशन से रात 22:00 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन इटारसी सुबह 08:30 बजे, जबलपुर 11:50 बजे, कटनी दोपहर 13:20 बजे, सतना 14:30 बजे पहुँचकर, अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन रविवार 03:15 बजे गया स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप)   गाड़ी संख्या 09040 गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 25 मई से 29 जून 2025 तक प्रत्येक रविवार को गया स्टेशन से सुबह 07:10 बजे प्रस्थान कर, सतना सायं 18:40 बजे, कटनी रात 20:00 बजे, अगले दिन जबलपुर 21:50 बजे, पहुँचकर अगले दिन इटारसी मध्यरात्रि 01:20 बजे,अन्य स्टेशनों से होते हुए सोमवार दोपहर 14:00 बजे उधना स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप) ठहराव: चलथान, बारडोली, नंदुरबार, अमलनेर, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्ज़ापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम और डेहरी ऑन सोन। रेल यात्रियों से अनुरोध है कि समर स्पेशल ट्रेन की विस्तृत जानकारी स्टेशन, रेल मदद 139 अथवा ऑनलाइन वेबसाइड से प्राप्त कर सकते हैं।

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट भोपाल मंडल द्वारा अब तक जारी किए गए 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड, जानिए कैसे उठाएं लाभ भोपाल भारतीय रेलवे, विशेष रूप से भोपाल मंडल, दिव्यांग यात्रियों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया के नेतृत्व में नवंबर 2023 से अब तक कुल 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें रेल यात्रा में अधिक सुविधा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांग रियायत प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव : अब दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप भोपाल मंडल दिव्यांग सेल की प्रभारी डॉ. ज्योति तिवारी के अनुसार, रेलवे द्वारा दिव्यांग यात्रियों को 25% से लेकर 75% तक किराये में छूट प्रदान की जाती है। यह छूट विशेष रूप से दृष्टिहीन, मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए लागू है। पूर्व में इन चारों श्रेणियों के लिए रेलवे रियायत प्रमाणपत्र हेतु एक ही प्रारूप (फॉर्म) का उपयोग होता था। परन्तु वर्ष 2025 से रेलवे ने दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-1) तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-2) जारी किया है। विशेष रूप से अब दृष्टिहीनता की 90% या उससे अधिक स्तर पर भी रियायत का प्रावधान किया गया है, जो दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि दिव्यांग यात्री के साथ एक सहयोगी (एस्कॉर्ट) यात्रा करता है, तो उसे भी समान रियायत मिलती है। जारी किए गए रियायत कार्ड की जानकारी रेलवे के सॉफ़्टवेयर में अपडेट कर दी जाती है, जिससे टिकट बुकिंग के समय कार्ड की फोटो कॉपी प्रस्तुत कर आसानी से छूट का लाभ लिया जा सकता है। यह सुविधा ई-टिकट बुकिंग पर भी उपलब्ध है। दिव्यांग रियायत कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब दिव्यांगजन आसानी से ऑनलाइन माध्यम से रियायत कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज हैं: * जिला चिकित्सा अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) * रेलवे रियायत प्रमाण पत्र जो कि पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल से जारी किया गया हो, जिसमें यह उल्लेख हो कि यात्री बिना सहायक (एस्कॉर्ट) के यात्रा करने में असमर्थ है। (इसका प्रारूप भारतीय रेलवे की वेबसाइट https://divyangjanid.indianrail.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है) * आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाणपत्र * पासपोर्ट साइज फोटो इन दस्तावेजों को भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर अपलोड करना होता है। सत्यापन के बाद कार्ड जारी कर दिया जाता है और आवेदक को इसकी जानकारी SMS के माध्यम से दी जाती है। आवेदन करते समय सभी जानकारी सही-सही भरना अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया, “हमारा प्रयास है कि दिव्यांगजन यात्रियों को सहज, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से रेलवे की सुविधाओं का लाभ मिले। रियायत कार्ड बनने की प्रक्रिया को सरल बनाकर हम उनकी यात्रा को अधिक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक दिव्यांगजन स्वयं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे।” दिव्यांग रियायत कार्ड से संबंधित जानकारी या सहायता के लिए यात्री भोपाल मंडल यात्री हेल्पलाइन नंबर 9630951262 पर संपर्क कर सकते हैं। भोपाल मंडल का यह प्रयास भविष्य में और भी अधिक दिव्यांगजनों तक पहुँच बनाने के लिए जारी रहेगा, जिससे “सबका साथ, सबका विकास” की भावना सशक्त हो।

व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।  

बच्चा होने के 7 महीने बाद विधवा महिला ने लिखाई दुष्कर्म की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने किया खारिज

जबलपुर  बच्चा पैदा होने के सात महीने बाद विधवा महिला द्वारा युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया. इस मामले को हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने खारिज कर दिया. मामले में जो तथ्य सामने आए उन्हें ध्यान में रखते हुए एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दिए गए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भौतिक परिस्थितियों पर विचार करते हुए ऐसा नहीं माना जा सकता है कि दोनों के बीच विवाह के झूठे वादे के आधार पर संबंध बने थे. दोनों पति-पत्नी की रहते थे और एक बच्चे को जन्म दिया है. भरण-पोषण व अन्य राहत का दावा करने के लिए महिला उचित कार्यवाही कर सकती है. पति की मौत के बाद बने संबंध दरअसल, जबलपुर निवासी आवेदक की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की शिकायत पर अधारताल थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता महिला की आयु 32 साल है और उसके पति की मृत्यु साल 2021 में हो गई थी. पति का दोस्त होने के कारण आवेदक का महिला के घर में आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत होने लगी. पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद मई 2021 में दोनों ने शादी करने का फैसला किया और इस तरह दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे. शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि इस संबंध से वह गर्भवती हो गई और उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन आवेदक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर आवेदक पिछले तीन वर्षों से उसका शारीरिक शोषण कर रहा है. लंबे समय तक सहमति से बने संबंध, ये दुष्कर्म नहीं महिला की शिकायत पर आवेदक युवक की ओर से तर्क दिया गया कि उसने कभी शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया. उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे. कोर्ट में तर्क दिया गया कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों. दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे. इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है. हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीमकोर्ट का हवाला एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है. ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे आरोप पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण हो सकते हैं. इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है. एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को आगे स्वतंत्रता प्रदान की है, कि वह जीवन यापन भत्ते आदि के लिए अपना पक्ष रख सकती है. क्या है मामला जबलपुर निवासी वीरेंद्र वर्मा ने उसके ऊपर दर्ज हुए केस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। उसने बताया कि अधारताल थाने में उसके खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में कहा गया था कि एफआईआर के अनुसार शिकायत करने वाली महिला की आयु 32 साल है। उसके पति की साल 2021 में मृत्यु हो गयी थी। पति का दोस्त होने के कारण आवेदन का महिला के घर आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत प्रारंभ हो गयी। सहमति से साथ रहने का लिया फैसला पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद आवेदन के उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव भी रखा। दोनों ने सहमति से मई 2021 में शादी करने का निर्णय लिया था। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए। दोनों पति-पत्नी की तरह लंबे समय तक साथ रहे और इस दौरान एक बच्चे का जन्म हुआ, जो लगभग सात माह का है। लेकिन आवेदक ने शादी करने से इनकार कर दिया। महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर कई सालों से उसका शारीरिक शोषण करता रहा। महिला ने दर्ज कराई एफआईआर शिकायतकर्ता महिला ने शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जनवरी 2025 में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया। उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों। दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे। इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने इस तर्क से खारिज की याचिका एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है। ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण ऐसा हो सकते हैं। इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को उक्त स्वतंत्रता प्रदान की है।

खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा

खरगोन खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा। यानी यहां अब माताएं दूध का दान करेगी और उन्हें नवजात बच्चों को दिया जाएगा। इस सुविधा से उन नवजात बच्चों को भी सुविधा मिलेगी जिन्हें खुद की माताएं जन्म के बाद दूध नहीं पीला पाती। अभी ऐसे बच्चों को परिजन बाजार से दूध खरीदकर फिर पिलाते हैं।  इससे बच्चे को वह पोषक तत्व नहीं मिल पाते जो मां के दूध से मिलते हैं। जिला अस्पताल में एसएनसीयू के पास लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (स्तनपान प्रबंधन इकाई) तैयार की गई है। कक्ष बनकर तैयार है। भोपाल से उपकरण आने के बाद इसे इसी माह से शुरू किया जाएगा। 6 महीने तक स्टोर किया जा सकता है दूध सिविल सर्जन डॉ. अमरसिंह चौहान ने बताया इस यूनिट की आवश्यकता लंबे समय से है। इसे एनएचएम के जरिए तैयार कराया है। इस यूनिट पर करीब 21 लाख रुपए खर्च हुए हैं। अभी अस्पताल में औसत 20 से 25 डिलेवरी होती है। प्रत्येक नवजात को माता का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में जिन माताओं को दूध अधिक आता है, उस दूध को इस यूनिट में स्थापित रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा। अस्पताल में भर्ती किसी बच्चे को दूध की आवश्यकता पड़ेगी तो डॉक्टर्स के परामर्श पर उसे मां का दूध यहां से उपलब्ध कराएंगे। इस यूनिट में करीब छह माह तक मां के दूध को सुरक्षित रखा जा सकता है। क्या कहते है एक्सपर्ट्स? जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। कई बार माताओं को दूध नहीं आता। ऊपर का दूध बच्चे नहीं पचा पाते, उल्टियां होती है, पेट फूलने की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में मदर मिल्क बैंक से उन्हें मां का दूध मिलेगा। इससे शिशु मृत्युदर में भी गिरावट आएगी। यह अच्छी पहल है। डॉ. भानुप्रिया खरते, शिशु रोग विशेषज्ञ, खरगोन शिशु मृत्युदर में आएगी गिरावट एसएनसीयू के डॉ. पवन पाटीदार बताते हैं कि यहां वार्ड में करीब 15 बच्चे औसत भर्ती रहते हैं। अधिकांश बच्चे को ऊपर का दूध दिया जाता है। परिजन यह दूध बाजार से या घर से लेकर आते हैं। यह समस्या मां को दूध नहीं आने की स्थिति में आती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आध्यात्मिक गुरु, परम पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय दद्दा जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा में समर्पित रहा। उनकी दिव्य शिक्षा और साधनामय जीवन मानव कल्याण के संकल्प की सिद्धि के लिए एक प्रेरणा पुंज के समान है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर दी संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर दी संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए प्रदेशवासी नियमित जांच को दें प्राथमिकता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर प्रदेशवासियों से, अपने परिवार और समाज में हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरुकता लाने के प्रयास करने का आहवान किया है। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप दिवस, सभी को नियमित जांच के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से बचाव के लिए संयमित जीवनशैली, नियमित योग-व्यायाम, संतुलित आहार और प्रभावी कार्य-प्रबंधन आवश्यक है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने पर दी बधाई

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023 से सम्मानित होने पर बधाई दी। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह सम्मान स्वामी रामभद्राचार्य को यह सम्मान प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृत के प्रकांड विद्वान स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा दृष्टिबाधित होने के बावजूद अंतर्मन के आलोक से वेद, उपनिषद एवं रामकथा की जो गूढ़ व्याख्या की गई है, वह भारत ही नहीं, वैश्विक साहित्य जगत के लिए अनुपम आध्यात्मिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि भारतीय संत परंपरा के गौरव, श्रद्धेय संत पद्मविभूषित स्वामी रामभद्राचार्य की संस्कृत साधना और तपस्वी जीवन की इस उपलब्धि से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी।  

2019 में स्वीकृत 5.1 किमी फ्लाईओवर पर अब तक काम कब शुरू होगा, HC ने पीडब्ल्यूडी विभाग से जवाब तलब किया

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्याओं में से एक अंबेडकर चौक से अब्दुल हमीद चौक तक के मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण की योजना, जो वर्ष 2019 में स्वीकृत हुई थी, अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी, शहरी विकास विभाग के सचिव और जबलपुर कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 2019 में मिली थी मंजूरी, 2024 तक सिर्फ बढ़ती गई लागत फ्लाईओवर की शुरुआती योजना 3.2 किलोमीटर लंबी थी, जिसकी लागत 186 करोड़ रुपए तय की गई थी। हालांकि, 2024 में इसकी लंबाई बढ़ाकर 5.1 किलोमीटर कर दी गई और बजट भी तीन गुना तक बढ़ाया गया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि जब स्वीकृति और बजट दोनों पहले ही तय हो चुके हैं, तो आखिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ? सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक इलाके में स्वीकृत है फ्लावर आपको बता दे की अंबेडकर चौक से लेकर अब्दुल हमीद चौक तक स्वीकृत यह फ्लाईओवर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक है। अंबेडकर चौक से लेकर घमापुर चौक तक हर वक्त जाम की स्थिति लगी रहती है। उसके बावजूद यहां फ्लाईओवर ना बनना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है। जबकि यहां पर स्थानीय प्रतिनिधि से लेकर आम लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग की है। घंटों जाम में फंसते हैं लोग अंबेडकर चौक से घमापुर और अब्दुल हमीद चौक तक का इलाका जबलपुर का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है, जहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ट्रैफिक की परेशानी से जूझ रहे स्थानीय लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग उठाई है। इसके बावजूद शासन और प्रशासन की उदासीनता से यह परियोजना केवल कागज़ों में ही सिमटी रह गई है। हाईकोर्ट की सख्ती से जागेगा सिस्टम? हाईकोर्ट (MP High Court) द्वारा अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर कुछ ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी। यह मामला ना केवल एक शहरी विकास परियोजना से जुड़ा है, बल्कि यह जनता की रोजमर्रा की परेशानियों और शासन की जवाबदेही से भी सीधा संबंध रखता है। सात साल पुरानी मंजूरी के बावजूद अगर एक जरूरी फ्लाईओवर का काम शुरू नहीं हो पाया है, तो ऐसी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना लाजिम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व दूरसंचार दिवस की शुभकामनाएं दीं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्व दूरसंचार दिवस की शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नवाचार आधारित देश की समग्र विकास की यात्रा में दूरसंचार की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में डिजिटल इंडिया के संकल्प के साथ भारत ने दूरसंचार क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनते हुए अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नवीन तकनीकों एवं नवाचारों को अधिक से अधिक अपनाकर देश-प्रदेश की विकास यात्रा में अपना योगदान देने का आहवान किया है।  

एथलीट चोपड़ा की उपलब्धि से देश हुआ गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

एथलीट चोपड़ा की उपलब्धि से देश हुआ गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जेवलिन थ्रोअर चोपड़ा ने 90.23 मीटर तक भाला फेंककर बनाया नया राष्ट्रीय रिकार्ड मुख्यमंत्री ने दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के गोल्डन बॉय, एथलीट नीरज चोपड़ा को दोहा डायमंड लीग 2025 में अद्भुत प्रदर्शन के लिए बधाई दी। नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचते हुए 90.23 मीटर तक भाला फेंक कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीरज चोपड़ा की इस उपलब्धि से पूरा देश गौरवान्वित है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर माँ भारती का मान बढ़ाया। चोप भारत के इकलौते एथलीट हैं, जिन्होंने भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में 90 मीटर का लेवल पार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से नीरज के उज्जवल भविष्य की कामना की है।  

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