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स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष-2024-25 में प्रावधान किये गये कुल बजट का 95 प्रतिशत हिस्सा स्कूल शिक्षा के सुधार में दिया

स्कूल शिक्षा को भारतीय मूल्यों, संस्कृति आधारित शिक्षा से जोड़ने के लिये किये गये प्रभावी प्रयास एक वर्ष की रही है उल्लेखनीय उपलब्धियाँ भोपाल प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है, जिसका उद्देश्य भारत के सतत् विकास के लिये आवश्यक शैक्षिक सुधारों को साकार करना प्रमुख रहा है। इसी उद्देश्य को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का स्कूल शिक्षा में प्रभावी रूप से क्रियान्वयन कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय परम्परा और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाये रखते हुए, आधुनिक, वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में समग्र परिवर्तन को प्रस्तावित करती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति कहती है कि शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है, जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हो, जिसमें करूणा और सहानुभूति, साहस और लचीलापन, वैज्ञानिक चिंतन, रचनात्मक कल्पना शक्ति, नैतिक मूल्य और आधार हो। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए समावेशी शिक्षा के दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्थानीय और वैश्विक आवश्यकताओं के बीच संतुलन भी बनाती है। प्रदेश में उठाये गये उल्लेखनीय कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के लिये स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों, शिक्षाविदों, शासकीय-अशासकीय विद्यालयों के 43 सदस्यीय टॉस्क फोर्स का गठन प्रदेश में किया जा चुका है। टॉस्क फोर्स के गठन के बाद नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं सुझाव के लिये टॉस्क फोर्स की 3 बैठकों का आयोजन भी किया जा चुका है। इसके साथ ही निरन्तर समीक्षा के लिये 13 समितियों का गठन भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी शासकीय व अशासकीय विद्यालयों में जुलाई 2024 में गुरूपूर्णिमा के महत्व एवं पारम्परिक गुरू-शिष्य संस्कृति पर प्रार्थना सभा में बातचीत एवं शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा गुरू संस्मरण का आयोजन भी किया गया है। प्रदेश की शालाओं में जन्माष्टमी पर्व पर आयोजन अगस्त 2024 में किया गया। आयोजन में श्रीकृष्ण की शिक्षा एवं मित्रता के प्रसंग तथा जीवन दर्शन पर आधारित विभिन्न विषयों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं व्याख्यान आयोजित किये गये। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयन्ती के आयोजन को देखते हुए भाषा भारती कक्षा-7 पाठ 18 सुरभि संस्कृत कक्षा 8 में लोकमाता के जीवन पर केन्द्रित पाठ्यक्रम को शामिल किया गया। स्कूलों में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने के लिये निरन्तर कैम्प भी आयोजित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 26 से 29 नवम्बर 2024 के मध्य श्रीमद् भागवत गीता आधारित मूल्य शिक्षा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 11 दिसम्बर 2024 को गीता जयन्ती के अवसर पर विद्यालयों में गीताकर्म पर आधारित व्याख्यान एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्कूलों में मकर संक्रांति पर्व, संस्कृत भाषा के विकास के लिये महाकवि कालिदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर श्लोक पाठ और नृत्य-नाटिका आयोजित की गई। प्रदेश में स्थानीय जनजातीय भाषा गोंडी, भीली, सहरिया, बारेली, निमाड़ी, बुंदेली और बघेली में तैयार की गई त्रिभाषा पुस्तकें 21 जिलों के 89 जनजातीय विकासखंडों में उपलब्ध कराई गई। बजट का समुचित उपयोग स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष-2024-25 में प्रावधान किये गये कुल बजट का 95 प्रतिशत हिस्सा स्कूल शिक्षा के सुधार में दिया। प्रदेश में 10वीं बोर्ड परीक्षा में इस वर्ष 74 प्रतिशत परिणाम आया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम इस वर्ष 74 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। बोर्ड की कक्षा 10 और 12 में 53 प्रतिशत विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की है। प्रदेश में बोर्ड जीरो पेपर लीक के साथ सम्पन्न हुई। योजनाओं का क्रियान्वयन प्रदेश में स्कूल शिक्षा की लोक कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक योजना में शासकीय विद्यालय में पढ़ाई कर रहे 82 लाख विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक वितरित की गई। छात्रवृत्ति योजना में कक्षा एक से 12वीं में अध्ययनरत एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल के 66 लाख छात्रों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 332 करोड़ रूपये की राशि अंतरित की गई। नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में कक्षा 6 एवं 9 के 4 लाख 75 हजार विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरित की गई। प्रतिभाशाली छात्र प्रोत्साहन योजना में कक्षा 12 में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 89 हजार 801 विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 224 करोड़ 25 लाख रूपये की राशि ट्रांसफर की गई। सांदीपनि विद्यालय योजना में पहले चरण में 276 सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किये जा चुके हैं। इन विद्यालयों में 2 लाख 62 हजार 613 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। विनोवा सांदीपनि रतलाम विद्यालय में नवाचार की श्रेणी में वर्ल्ड बेस्ट स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में मध्यप्रदेश में 787 पीएमविद्यालय संचालित किये जा रहे हैं। मॉडल स्कूलों का संचालन प्रदेश में 145 मॉडल स्कूलों में से 143 मॉडल स्कूल स्वयं के भवन निर्मित हो चुके हैं। प्रदेश में मॉडल स्कूलों में 50 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इसी के साथ प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं विकासखंड मुख्यालय पर स्थापित चयनित एक शासकीय विद्यालय को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में 43 जिला मुख्यालयों एवं 96 विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिये शैक्षिक संवाद का आयोजन किया जा रहा है। व्यावसायिक शिक्षा नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश के 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है, जिसमें 4 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें 12 ट्रेड्स में शिक्षा दी जा रही है। विद्यालयों में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये भी 465 विद्यालयों में कृषि ट्रेड्स संचालित किये जा रहे हैं। स्किल कैरियर काउंसलिंग के माध्यम से करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों को कैरियर संबंधी सलाह दी गई। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये एक लाख 84 हजार प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये।  

बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण के लिए जिला प्रशासन वृहद परियोजना तैयार कर रहा

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को सिद्ध करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 30 मार्च से ‘जल गंगा सवंर्धन अभियान’ प्रारंभ किया गया है। अभियान का समापन गंगा दशहरा, 30 जून को होगा। जन-जन के जीवन से जुड़ा यह महत्वपूर्ण अभियान में नये तालाब बनाये जा रहे हैं, पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है और नदियों को साफ-स्वच्छ किया जा रहा है। अभियान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में भी जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। विदिशा जिले की जीवनदायिनी बेतवा नदी की दीर्घकालिक सुरक्षा एवं पुर्नजीवन जल गंगा संवर्धन अभियान के उद्धेश्यों की प्राप्ति एवं सतत जल प्रबंधन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण के लिए जिला प्रशासन वृहद परियोजना तैयार कर रहा है। परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए विशेषज्ञों को क्षेत्र का भ्रमण कराया जा रहा है। बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण पर आधारित परियोजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। परियोजना में नदी में मिलने वाले सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को नियंत्रित करने और नदी के प्राकृतिक प्रवाह एवं पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने पर फोकस किया जा रहा है। इससे नदी के क्षरण को रोका जा सकेगा। इसके लिए इन्दौर आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम ने बेतवा नदी के घाटों, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और नालों का गहन सर्वेक्षण किया। आईआईटी इन्दौर की टीम ने नदी के विभिन्न घाटों, नालों और एसटीपी की वस्तु-स्थिति का आकलन किया और गंदगी के स्त्रोतों की पहचान की। आगामी चरण में टीम नदी के बहाव क्षेत्र का भ्रमण कर एक विस्तृत वैज्ञानिक डीपीआर तैयार करेगी।  सीहोर में जल संरक्षण जन जागरुकता और बुधनी में तालाब का गहरीकरण एवं साफ-सफाई जल गंगा संवर्धन अभियान में सीहोर जिले में जन अभियान परिषद ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों तथा नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया तथा जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। जिले के बुधनी में जन अभियान परिषद के सदस्यों ने मांजरकुई गांव में जल संरक्षण के उद्देश्य से तालाब के गहरीकरण एवं साफ सफाई का कार्य किया गया। इस कार्य में सभी सदस्यों एवं आमजनों ने श्रमदान किया। इस अवसर पर सभी को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। शहडाेल के गांवों में श्रमदान से बोरी बंधान खेत तालाबों का हो रहा निर्माण आओ बचाएं जल, करें सुरक्षित कल और पानी बचाओ कल के लिये, पानी की बर्बादी जीवन की बर्बादी जैसे नारों के साथ शहडोल के गांवो में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। जन भागीदारी संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों, जन अभियान परिषद के सदस्यों, समाजसेवी और ग्रामीणों के सहयोग से जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार, नदी नालों की सफाई, बोरी बंधान तालाबों का गहरीकरण औऱ नये खेत तालाब जैसे कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर के कतिरा गांव में पानी की सहजेने के लिए, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समाजसेवी सहित अन्य लोगों ने बोरी बंधान एवं नदी-नाला सफाई में उत्साहपूर्वक सहभागिता करत् हुए श्रमदान किया। जिले की जनपद पंचायत बुढार के गांव कुम्हारी, कदमहा, गिरवा, मझौली में नए खेत तालाबों का निर्माण किया गया। के कार्य किए गए। जिले के ही पोनांग तालाब में श्रमदान के माध्यम से सफाई की गई। क्षिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रवहमान रखने की शपथ के साथ जल स्रोतों की सफाई के लिए श्रमदान देवास में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जन-जन के सहयोग से जन अभियान बन रहा है। जिले के नूतन हायर सेकेंडरी स्कूल (संकुल) के अंतर्गत आने वाले सभी हाई स्कूल, मिडिल स्कूल एवं प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों ने ग्राम हवनखेड़ी में क्षिप्रा नदी की साफ-सफाई की। इस अवसर पर स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर महेश सोनी ने सभी शिक्षकों को जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों को साफ रखने और रिचार्ज करने प्रति सप्ताह एक घंटा श्रमदान करने की शपथ दिलाई। नदी की साफ-सफाई और गहरीकरण होने से बारिश के दिनों में पानी का संग्रहित होगा तथा वाटर लेवल भी बढ़ेगा, जिससे पेयजल के साथ खेती करने के लिए भी पानी मिल सकेगा। ग्रामीणों ने क्षिप्रा नदी को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लिया।  

पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी ने किया आतंकवाद के विरूद्ध भारत की नीति का उद्घोष : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यह युग आतंकवाद का नहीं है, यह एक वाक्य काफी है भारत का संदेश समझने को: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी का आभार मानती है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री की विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चलने को है तैयार प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रतिक्रिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए भारत की आतंकवाद के विरूद्ध नीति का उद्घोष किया है। भारत ने आपरेशन सिंदूर सिर्फ स्थगित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि यह युग युद्ध का नहीं है, लेकिन यह युग आतंकवाद का भी नहीं है। यह एक वाक्य भारत का संदेश समझने के लिए काफी है। भारत ने पहलगाम की घटना में जिन बहनों का सिंदूर उजड़ा उसका हिसाब पाकिस्तान से चुकता करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक मजबूत अर्थ व्यवस्था बना है, साथ ही राष्ट्रवासियों ने धारा 370 को समाप्त होते देखा है। राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे कठिन निर्णय प्रधानमंत्री मोदी ने लिए, जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जो मार भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलों से की उससे कहीं अधिक मार आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से हुई है और इस संबोधन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना अध्यक्ष सहित अन्य दुश्मनों की जमीन खिसका दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्र को दिए गए संबोधन के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दुनिया बदलते दौर का भारत देख रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है। ऊर्जा से लबरेज कर दिया है। उन्होंने उत्साह और उमंग से सेनाओं का हौसला भी बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में सेना ने सिर्फ 5 दिन में जबरदस्त प्रतिकार करते हुए पाकिस्तान की कमर तोड़ने का कार्य किया है। आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को खाद-पानी देता रहा है। आतंकवादियों के जनाजे पर पाकिस्तान का झंडा चढ़ते हुए देखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मेड इन इंडिया की दृष्टि से भारत की सर्वोच्च सुरक्षा का आव्हान किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जब बात होगी तो पीओके (पाक ऑक्युपाईड कश्मीर) पर होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में न्यूक्लियर बम के नाम पर पाकिस्तान द्वारा ब्लैक मेल किया जाना असंभव है। प्रधानमंत्री मोदी के एक-एक शब्द से प्रत्येक भारतीय का सीना छप्पन इंच करने का कार्य किया है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्माणाधीन पीडब्ल्यूडी भवन का किया निरीक्षण

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में निर्माणाधीन पीडब्ल्यूडी भवन का निरीक्षण किया तथा इसको शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कोठी कम्पाउण्ड स्थित मनकामेश्वर मंदिर के सौन्दर्यीकरण कार्य का अवलोकन कर अद्यतन निर्माण प्रगति की जानकारी प्राप्त की तथा शीघ्रता से कार्य करने के निर्देश दिये।  

प्रदेश में 13 मई से सभी यात्री और शैक्षणिक संस्था वाहनों की होगी चेकिंग

प्रदेश में 13 मई से सभी यात्री और शैक्षणिक संस्था वाहनों की होगी चेकिंग परिवहन विभाग ने जारी किये निर्देश भोपाल प्रदेश में यात्री बसों, शैक्षणिक संस्थानों की बसों और स्कूल बसों की सघन चेकिंग किये जाने का निर्णय लिया गया है। यह विशेष अभियान 13 मई से प्रदेश में एक साथ शुरू होगा। अभियान में पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक और जिला परिवहन कार्यालय को निर्देश जारी किये गये हैं। जाँच अभियान में जिन बिंदुओं को शामिल किया गया है। उनमें – •सभी वाहनो में केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 118 अनुसार गति नियंत्रक लगा होना चाहिये। •सभी यात्री बसों में सभी वीएलटीडी डिवाइस लगा होना आवश्यक है। शैक्षणिक वाहनों में AIS 140 अनुरूप व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD), केमरे तथा पेनिक बटन लगे हों। VLTD का परिवहन विभाग के सेन्ट्रल सर्वर से एन्टीग्रेशन अनिवार्यतः हो तथा वाहन में परिवहन किये जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं सम्बंधित शैक्षणिक संस्था को इसका ऐक्सेस प्रदान करना भी आवश्यक होगा। •सभी वाहनो में प्रथम उपचार पेटी (फर्स्टएड बॉक्स) अनिवार्य रूप से रखा जाये। •एक अक्टूबर 2023 के बाद निर्मित शैक्षणिक वाहनो में केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 1250 के प्रावधान अनुसार AIS-135 अनुरूप FAPS लगा होना चाहिए तथा शेष शैक्षणिक वाहनों में वाहन अनुसार उचित मात्रा का अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए। •वाहनों की खिड़कियों पर काले कॉच या परदे नहीं लगे होगें तथा वाहनो के अंदर की गतिविधि सदैव वाहन के बाहर से स्पष्ट रूप से दिखना चाहिये। •वाहन के साथ वैध बीमा प्रमाण-पत्र, फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट होना अनिवार्य है। •यदि वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र होने के उपरांत अनफिट पाई जाती है तो फिटनेस जारीकर्ता अधिकारी / ATS के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। •वाहन चालक एवं परिचालक के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए। •बस के सभी प्रकार के कर (टैक्स) पूर्ण रूप से जमा होना चाहिए। •बस के विरुद्ध पूर्व के चालान की जानकारी भी आवश्यक रूप से ली जाए। •बस में किसी भी प्रकार के ओवरलोड अर्थात परमिट से अधिक यात्री न हो। बसों में माल ले जाने की परंपरा बहुत अधिक बढ़ रही है इसकी सघन चेकिंग की जायेगी। निर्धारित मात्रा से अधिक माल का परिवहन यात्री बसों द्वारा न किया जाए। दोषी वाहन चालकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी।  

नागरिकों की सुरक्षा के लिये वाहनों की फिटनेस की जाँच के लिये चलाएं अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नागरिकों की सुरक्षा के लिये वाहनों की फिटनेस की जाँच के लिये चलाएं अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुलिस महानिदेशक को दिये गये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में नागरिकों की सुरक्षा के लिये सड़क पर चलने वाले सभी वाहनों विशेषकर परिवहन वाहनों के आवश्यक कागजों समेत फिटनेस, परमिट और रजिस्ट्रेशन वैधता की जाँच के लिये 13 मई से विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा को परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करने के लिये कहा है। निर्देश में कहा गया है कि आवश्यक कागज न होने पर दोषी वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये।  

अब हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी

ग्वालियर भारतीय रेलवे बोर्ड ने देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन का नया हॉल्ट मध्य प्रदेश के एक नए शहर में देने का फैसला किया है. अब नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे दतिया के पीतांबरा माता शक्तिपीठ के दर्शन के लिए आने जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है. मंगलवार से दतिया में रुकेगी वंदेभारत एक्सप्रेस झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह से मिली जानकारी के अनुसार खजुराहो-निजामुद्दीन के बीच सफर करने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22469/22470 का दतिया हॉल्ट आगामी 13 मई से लागू होने जा रहा है. भारतीय रेलवे बोर्ड ने यह फैसला यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लिया है. ये होगा दतिया ग्वालियर और झांसी का नया समय वंदे भारत एक्सप्रेस के दतिया ठहराव के साथ ही रेलवे ने नई समय सारणी भी जारी की है. अब से दतिया हॉल्ट की वजह से ग्वालियर और झांसी रेलवे स्टेशन का समय भी बदलने जा रहा है. जहां खजुराहो से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22469 का दतिया रुकने का समय शाम 6:42-6:44 का होगा, जिसकी वजह अब यह ट्रेन ग्वालियर शाम 7:28 बजे पहुंचेगी और शाम 7:33 बजे निजामुद्दीन के लिए रवाना होगी. निजामुद्दीन से खजुराओ चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22470 निजामुद्दीन से चलकर सुबह 09:59 बजे दतिया पहुंचेगी 2 मिनट हॉल्ट के बाद 10:01 बजे आगे के लिए रवाना होगी. मंगलवार से झांसी नए समय पर सुबह 10:30 पर पहुंचेगी और 10:35 बजे खजुराहो रवाना होगी. हर रोज पहुचते हैं लाखों श्रद्धालु बता दें कि लंबे समय से धार्मिक स्थल पीतबारा माई शक्तिपीठ पर यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत वंदे भारत एक्सप्रेस के हॉल्ट की मांग की जा रही थी. क्योंकि प्रतिदिन न सिर्फ प्रदेश से बल्कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु पीताम्बरा माता के दर्शन के लिए दतिया पहुंचते हैं. मान्यताओं के हिसाब से शनिवार को यहां आने वालों श्रद्धालुओं की संख्या लाखों की होती है. ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव चम्बल अंचल के लिए तीर्थ और पर्यटन के लिहाज से एक बड़ी सौगात है.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने रखी फुले फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग, भोपाल के डीबी मॉल में होगा आयोजन

भोपाल एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन और विचारों पर बनी फिल्म “फुले” की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है।  इसका आयोजन आज 13 मई का भोपाल के डीबी मॉल स्थित सिनेप्लेक्स में किया जाएगा। दिग्विजय सिंह के अलावा पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य कांग्रेस नेता व पार्टी कार्यकर्ता यहां फिल्म देखेंगे। कार्यकर्ताओं को फुले के संघर्ष से रूबरू कराना इस आयोजन का उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फुले के समतावादी विचारों और सामाजिक न्याय के संघर्ष से रूबरू कराना है। दिग्विजय सिंह की इस पहल को सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा फुले को वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस आयोजन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। फुले जैसे विचारकों को याद करना जरूरी कार्यक्रम को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि महात्मा फुले ने उस दौर में समानता, शिक्षा और जातिविहीन समाज का सपना देखा था जब ऐसी बातें सोच पाना भी कठिन था। आज जब समाज में विभाजनकारी शक्तियां सक्रिय हैं, फुले जैसे विचारकों को याद करना और उनकी प्रेरणा लेना पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी है। फुले के जीवन संघर्षों पर बनी है यह फिल्म जनकारी के लिए बता दें कि कि यह फिल्म महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, शिक्षा आंदोलन और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ उनके आंदोलन को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने किस तरह समाज के खिलाफ जाकर पहले अपनी पत्नी को पढ़ाया और फिर समाज की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। ये सब उस दौर में हुआ जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था। जब हमारे समाज में बाल विवाह, विधवा का मुंडन कर देना और छुआछूत जैसी कुप्रथाएं जिंदा थी। समाज के एक बड़े तबके के विरोध के बावजूद उन्होंने ये कैसे किया। यही इस फिल्म की कहानी है।  

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल से गुजरने वाले ट्रेनें अब सिग्नल के इंतजार में लेट नहीं होंगी, ऑप्टिकल फाइबर सिग्नल सिस्टम शुरू

भोपाल पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने रेल सिग्नल प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है. गौरतलब है कि भारतीय रेल में पहली बार भोपाल मंडल के निशातपुरा यार्ड में ऐसी तकनीक शुरू की गई है, जिसमें सिग्नल ऑपरेशन अब तारों की बजाय ऑप्टिकल फाइबर के जरिए किया जाएगा. अब तक जो सिग्नल प्रणाली चल रही थी, उसमें अलग-अलग तारों के ज़रिए सिग्नलों को कंट्रोल किया जाता था. लेकिन इसमें समय लगता था और कई बार खराबी की संभावना भी रहती थी. यह नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित है, जो पारंपरिक संकेत प्रणाली की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय मानी जा रही है. नई तकनीक में ‘लैम्प आउटपुट मॉड्यूल’ नाम का एक यंत्र लगाया गया है, जो सीधे कंट्रोल रूम से सिग्नल तक ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिए सिग्नल भेजता है. यह क्या है? • यह एक नई सिग्नल तकनीक है, जिसमें रेलवे ट्रैक पर लगे सिग्नल अब फाइबर लाइन से सीधा कंट्रोल होंगे. • इसमें कोई भारी वायरिंग नहीं होगी, सब कुछ फाइबर के ज़रिए होगा, जिससे सिग्नल तेज़ी से और बिना रुकावट के काम करेगा. इसका फायदा क्या है? • सिग्नल कभी ‘ब्लैंक’ नहीं होंगे, यानी अगर एक सिग्नल गड़बड़ करे तो भी ट्रेन को सिग्नल का आस्पेक्ट दिखाई देगा. • ट्रेनें ज़्यादा सुरक्षित और समय पर चलेंगी. • सिस्टम के साथ स्वचालित पंखा भी जुड़ा है जो ज़रूरत पड़ने पर खुद चालू होकर मशीन को गर्म होने से बचाता है. • अगर एक लाइन खराब हो जाए तो दूसरी फाइबर लाइन से काम चलता रहेगा – यानी सिस्टम कभी नहीं रुकेगा. • सिग्नल का रख-रखाव आसान और कम खर्चीला होगा. खराबी की आशंका होगी कम सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया, अभी जो सिग्नल प्रणाली थी, उसमें तारों से सिग्नल कंट्रोल करते थे। इसमें समय लगता था। खराबी की आशंका रहती थी। अब नहीं रहेगी। नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित है। यह ज्यादा विश्वसनीय और तेज है। इनका कहना वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि इस तकनीक की शुरुआत S/SH-15 और S/SH-16 नाम के दो सिग्नलों पर निशातपुरा यार्ड में की गई है. भोपाल से बीना के मध्य रेलखंड पर इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का कार्य प्रारंभ हो चुका है. योजना के अनुसार, जून 2026 तक पूरे रेलखंड में यह उन्नत प्रणाली सक्रिय कर दी जाएगी. यह तकनीक आगे चलकर देशभर की रेलवे लाइनों को और सुरक्षित और आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.  

MP में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन बढ़ोत्तरी के बाद अब, माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही

भोपाल मध्य प्रदेश में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन भत्तों में बढ़ोत्तरी के बाद अब करीब 9 साल बाद प्रदेश के माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही है. पक्ष और विपक्ष के विधायकों की मांग पर विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार कर संसदीय कार्य विभाग को प्रस्ताव सौंपा गया है. समिति ने विधायकों की वेतन-भत्तों में 40 फीसदी और पेंशन में करीबन 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव सौंपा है. वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी का आधार दूसरे राज्यों में दी जा रही सुविधाओं को बनाया गया है. उधर इस प्रस्ताव पर विधानसभा सचिवालय की लेखा शाखा द्वारा एक बार फिर आंकलन किया जा रहा है. विधायकों को कितना मिलता है वेतन-भत्ता मध्य प्रदेश के विधायकों का वेतन भत्ता 2016 में बढ़ाया गया था, जिसे अब एक बार फिर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. अभी प्रदेश के विधायकों को वेतन भत्ते मिलाकर करीबन 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं. एमपी विधायकों का वेतन भत्ता विधायकों को रेल कूपन भी दिया जाता है, इससे विधायक राज्य के अंदर व बाहर रेल यात्रा कर सकते हैं. यह रेल कूपन विधायक के अकेले सफर के लिए फर्स्ट क्लॉस एससी के लिए होता है. राज्य के अंतर एक साल में 10 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकते हैं. विधायकों को 10 हजार रुपए मेडिकल अलाउंस और विधानसभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए 2500 रुपए तक दैनिक भत्ता दिया जाता है. वेतन बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव हुआ तैयार इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी विधायकों द्वारा वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की मांग की जाती रही है. विधानसभा बजट सत्र के दौरान भी विधायकों ने इसको लेकर बात उठाई थी. विधायकों का कहना था कि पिछले 9 सालों में महंगाई बढ़ी है. इसके अलावा बंगले पर पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं के स्वागत सत्कार में भी काफी पैसा खर्च होता है. उधर विधायकों की मांग पर अब विधायकों के वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी के लिए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार किया है. कहां विधायकों की कितनी सैलरी इसमें विधायकों का वेतन 40 फीसदी बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपए और पेंशन 35 हजार रुपए से बढ़ाकर 58 हजार रुपए दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. उधर विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व विधायकों, विधायकों को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, फिलहाल शासन स्तर पर यह विचाराधीन है. जबकि इन राज्यों में मध्य प्रदेश से कम सैलरी मिलती है     मॉर्डन हो रहे मध्य प्रदेश के ‘माननीय’, ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन पूछे सवाल, जानिए कितना पढ़े-लिखे हैं विधायक     संपत्ति के मामले में बीवियों से पिछड़े माननीय, शिवराज और कमलनाथ भी रह गए गरीब, देखिए किसकी पत्नी कितनी धनवान झारखंड के विधायकों को मिलता है सबसे ज्यादा वेतन देश में झारखंड में विधायकों को सबसे ज्यादा वेतन-भत्ते मिलते हैं. झारखंड में विधायकों को हर माह वेतन-भत्ते सहित करीबन 2 लाख 90 हजार रुपए वेतन-भत्ते दिए जाते हैं. जबकि महाराष्ट्र में करीबन 2 लाख 60 हजार रुपए वेतन-भत्ते मिलते हैं. तेलंगाना विधानसभा में विधायकों को करीबन 2 लाख 75 हजार वेतन-भत्ता मिलता है.

इंदौर-खंडवा हाईवे पर टोल प्लाजा का काम जुलाई से शुरू होगा और एनएचएआई संचालन करेगा

 इंदौर इंदौर-खंडवा राजमार्ग का पहला टोल प्लाजा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने जनवरी से शुरू करने का फैसला किया है। यह प्लाजा तेजाजी नगर बायपास से 33 किमी पर बनाया जाएगा, जो बलवाड़ा के नजदीक गांव पडाली में होगा। मगर वाहन चालकों से 33 की बजाए 46 किमी की सड़क का टोल टैक्स वसूला जाएगा, क्योंकि इंदौर-चोरल की बीच तीन सुरंगें होंगी। इस वजह से राजमार्ग के इस हिस्से की दरें अधिक होंगी। फिलहाल टोल की दरों पर यातायात को लेकर आकलन करना बाकी है, जो अक्टूबर से प्रारंभ किया जाएगा। उसके आधार पर दरें निर्धारित की जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर से भारी वाहन भी राजमार्ग से गुजरेंगे। 216 किमी लंबे इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का काम जनवरी 2025 में खत्म होना था, लेकिन काम धीमा होने से एनएचएआई ने प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाई है। फरवरी 2026 तक मेघा इंजीनियरिंग को यह काम पूरा करना है। मगर तलाई (300), भेरूघाट (500) और चोरल (300) मीटर की तीन सुरंग है। इनका 35-40 फीसद काम बाकी है। एनएचएआइ ने एजेंसी को दिसंबर तक काम पूरा करने पर जोर दिया है। खंडवा तक रहेंगे दो टोल राजमार्ग पर दो से तीन टोल रहेंगे। इंदौर से बलवाड़ा के बीच पहला टोल रखा जाएगा, जबकि धनगांव में दूसरा प्लाजा अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक 50-55 किमी की दूरी पर टोल प्लाजा रहेंगे। इंदौर-बलवाड़ा वाले हिस्से में टैक्स थोड़ा अधिक होगा, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंग है। इनकी लंबाई 1300 मीटर रखी है। अधिकारियों के मुताबिक सुरंग की लंबाई की तुलना में दस गुना टैक्स लगाया जाता है। जैसे 1300 मीटर सुरंग की लंबाई है तो 13 किमी सड़क का टोल टैक्स लगाया जाएगा। इस आधार पर इंदौर से बलवाड़ा के बीच 33 किमी का सफर तय करने पर 46 किमी का टैक्स देना होगा। एनएचएआई करेगी संचालित राजमार्ग का प्रोजेक्ट लगभग 900 करोड़ रुपये का है। नए नियमों के मुताबिक एजेंसी की बजाए एनएचएआई ही टोल का संचालन करेगा। टोल टैक्स से आने वाली राशि का कुछ हिस्सा एजेंसी को दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा, क्योंकि निर्माण कार्य के दौरान 60 फीसद राशि एजेंसी लगाती है। अक्टूबर से करेंगे आकलन इंदौर-बलवाड़ा के बीच बनने वाले टोल प्लाजा से वाहन गुजरने का आकलन अक्टूबर से किया जाएगा। तब तक राजमार्ग का हिस्सा भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा। यातायात के दवाब को देखने के बाद टोल की दरें तय होंगी। कार, हल्के-भारी वाहन, कंटेनर-ट्रक, बस की राशि निर्धारित करेंगे। थोड़ा ज्यादा देना होगा टैक्स     इंदौर-खंडवा राजमार्ग पर पहला टोल प्लाजा बलवाड़ा के पास बनेगा। इसके लिए थोड़ी अधिक टैक्स राशि चुकानी होगी, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंगें आ रही हैं। इन्हें बनाने में खर्च अधिक आता है। इसके लिए टैक्स भी अधिक वसूला जाएगा। सुरंग की लंबाई के आधार पर दस गुना टैक्स लगता है। जुलाई से टोल प्लाजा का काम शुरू होगा। अक्टूबर से दरें निर्धारित की जाएंगी। – सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र तय किया जा रहा

भोपाल भोपाल (Bhopal) मेट्रोपॉलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region) का प्राथमिक मैप तैयार कर लिया गया है। भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र (Mahanagar) तय किया जा रहा है। हेक्टेयर में ये आठ लाख 79 हजार 109.94 है। भोपाल जिले की आबादी के घनत्व 855 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर के अनुसार इसमें 75 लाख की आबादी के लिए जगह तय (Development News) होगी। गौरतलब है कि इसकी डीपीआर के लिए बीडीए ने दस लाख रुपए के शुरुआती बजट के साथ कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी की है। इस माह कंसल्टेंट तय हो जाएगा, इसके 14 माह में डीपीआर बनाना होगी। इन जिलों के ये क्षेत्र भोपाल मेट्रोपॉलिटन में रायसेन जिले के रायसेन, औबेदुल्लागंज। विदिशा जिले के विदिशा, ग्यारसपुर, गुलाबगंज। सीहोर जिले के सीहोर, इछावर, आष्टा, श्यामपुर, जावर। राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खूजनेर। भोपाल जिले के हुजूर, बैरसिया, कोलार। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्र विकास के आधार पर योजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए इंदौर में 5 जिलों के 1756 गांव होंगे शामिल इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में पांच जिले इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया जाएगा। जिसका कुल क्षेत्रफल 9 हजार किलोमीटर का होगा। इसमें भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आंकलन किया जाएगा कि कहां कौन सी इंडस्ट्री है, कैसे जरूरतें हैं। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद रीजनल और इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। बता दें कि, इंदौर के पहले चरण के इंस्पेक्शन का काम पूरा हो चुका है। अब इसमें ऑथरिटी के द्वारा यह तय किया जाएगा कि इसमें कौन-कौन से जिले, तहसीलें और गांवों को शामिल किया जाएगा।

भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से तस्वीर बदलेगी

रतलाम  भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर रतलाम की तस्वीर बदलने जा रहे हैं. इसी को देखते हुए रतलाम के बंजली हवाई पट्टी को विस्तारित करने पर जोर है. यहां से बिजनेस जेट्स और कॉमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी. मध्य प्रदेश सरकार बंजली हवाई पट्टी पर बिजनेस जेट्स उतारने की तैयारी कर रही है. इसके लिए रविवार को भोपाल से टेक्निकल टीम विशेष विमान से रतलाम पहुंची. टेक्निकल टीम ने किया हवाई पट्टी का निरक्षण टेक्निकल टीम ने बंजली हवाई पट्टी का निरीक्षण किया. हवाई पट्टी को बिजनेस जेट्स की आवाजाही के लिए तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश तकनीकी टीम ने लोक निर्माण विभाग और अन्य सबंधित विभागों को दिए. रतलाम जिले से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और यहां बन रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को देखते हुए रतलाम की इस एयर स्ट्रिप पर कॉमर्शियल उड़ानें भी शुरू हो सकेंगी. भोपाल से पहुंची टीम के सीनियर पायलट कैप्टन विश्वास राय ने कहा “निरीक्षण का लक्ष्य हवाई पट्टी के विस्तार और कॉमर्शियल उड़ानों की संभावना को तलाशना है.” रतलाम हवाई पट्टी का विस्तार दो भागों में योजना के अनुसार रतलाम एयर स्ट्रिप की सतह को व्यवस्थित किया जाएगा. दो भागों में एयर स्ट्रिप का विस्तार किया जाएगा. इसके लिए सरकारी भूमि को चिह्नित कर लोक निर्माण और राजस्व विभाग की मदद से हवाई पट्टी के विस्तार की योजना को अमल मे लाया जाएगा. गौरतलब है कि दिल्ली-मुंबई 8 लेन एस्कप्रेस-वे पर रतलाम के पास करीब 1500 हेक्टेयर में नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आकार ले रहा है. ऐसे में रतलाम हवाई पट्टी पर, विमानों का आवागमन बढ़ जाएगा.

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नवंबर से शुरू होगा निर्माण, मप्र, उप्र और राजस्थान को मिलेगा लाभ, 220 करोड़ स्वीकृत

ग्वालियर  ग्वालियर से आगरा के बीच 4,263 करोड़ रुपये की राशि से प्रस्तावित 88.4 किमी. लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जीआर इंफ्रा से अनुबंध होने के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी है। अधिग्रहण के काम में तेजी लाने, मुआवजा वितरण करने के लिए 220 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल गई है। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के 14 गांव, राजस्थान के धौलपुर के 30 गांव, मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर सहित कुल 100 गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन बनेगी इसके बाद नवंबर माह से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि मुआवजा वितरण में किसानों की ओर से आपत्तियां लगाई गई हैं, लेकिन एनएचएआई के अधिकारी इनका भी निराकरण करने का दावा कर रहे हैं। इस परियोजना में ग्वालियर से राजस्थान के बीच 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन होगी। एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए दोतरफा तैयारियां चल रही हैं, क्योंकि कंपनी को अब छह माह के अंदर निर्माण कार्य के लिए राशि की व्यवस्था करनी है, तो वहीं एनएचएआई को जमीन उपलब्ध करानी है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत कंपनी को वर्तमान ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की मरम्मत को प्राथमिकता से करना होगा। ग्वालियर से सीधे आगरा पहुंचाएगा एक्सप्रेस-वे कंपनी को इस पूरे हाईवे का पुनरुद्धार करना है, ताकि जिन वाहनों को ग्वालियर से सीधे आगरा जाना है, वह एक्सप्रेस-वे का सहारा लें। वहीं जिन वाहनों को मुरैना, धौलपुर की ओर जाना है, वे वर्तमान फोरलेन का सहारा ले सकें। कंपनी को वर्तमान हाईवे की मरम्मत के लिए सिर्फ एक साल का समय दिया जाएगा, यानी नवंबर 2026 तक कंपनी को इसकी मरम्मत का काम पूरा करना होगा। मिल चुकी हैं सारी अनुमतियां इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा सरकारी एजेंसियों से सभी अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं। रेलवे, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण, वन विभाग और तीनों राज्यों के राजस्व विभाग से अनुमतियां प्राप्त होने के बाद कार्य में तेजी आई है। अब सिर्फ निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया बाकी रह गई है। चूंकि एनएचएआई को अब राशि स्वीकृत हो चुकी है, ऐसे में अब मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिग्रहण प्रक्रिया अंतिम चरण में     ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए लगभग 220 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो गई है। जल्द ही मुआवजा वितरण शुरू किया जाएगा। – प्रशांत मीणा, मैनेजर एनएचएआई।  

प्रदेश में अब एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए एक साथ होंगी भर्तियां, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए यह बड़ी खबर है. अब सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को अलग-अलग विभागों की अलग-अलग परीक्षाओं से जूझना नहीं पड़ेगा. दरअसल, राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सभी विभागों में भर्ती के एक जैसे नियम बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को नियम समझने में कोई परेशानी न हो.। इसके लिए आदर्श भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से इस बारे में सुझाव मांगे हैं। दरअसल, प्रदेश में विभिन्न विभागों में अगले दो-तीन साल में करीब ढाई लाख पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसके लिए ही सभी विभागों के भर्ती नियम एक जैसे करने का निर्णय लिया गया है, ताकि कोई नियमसंगत समस्या खड़ी न हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियमों में भिन्नता है। 2.5 लाख पदों पर होंगी भर्तियां बता दें कि राज्य के अलग-अलग विभागों में आने वाले 2-3 सालों में करीब 2.5 लाख पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इसलिए राज्य सरकार द्वारा सभी विभागों में कर्मचारियों के भर्ती नियम एक समान बनाने का फैसला किया गया है। दरअसल, अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियम काफी अलग हैं। इसकी वजह से प्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करते हैं और अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। कुछ नियम अलग-अलग हैं मसलन, वन विभाग, शिक्षा विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश सेवा भर्ती के कुछ नियम अलग-अलग हैं। इनके आधार पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करके अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। नियम अलग होने से इन चयन एजेंसियों को विभागवार भर्ती करने में परेशानी होती है और समय भी अधिक लगता है। चूंकि, अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर भर्तियां होनी हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विभागों के भर्ती नियमों में एकरूपता रहे ताकि भर्ती विज्ञापन जारी करने में विलंब न हो। एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए भर्ती एक साथ करवा दी जाएंगी। रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को देंगे अंतिम रूप इससे समय और संसाधन की बचत होगी। इसे देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है, जो नियमों का अध्ययन करके रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। क्या है राज्य सरकार का प्लान? विभागों के कर्मचारियों के भर्ती नियम अलग होने के कारण राज्य की चयन एजेंसियों को भर्ती करने में परेशानी होती है। इसके अलावा, भर्ती के प्रोसेस पर भी काफी समय लगता है। प्रदेश में आने वाले सालों में पैमाने पर विभाग में भर्तियां होने वाली हैं। अगर पुराने नियम से भर्ती हुई तो उसमें काफी समय लगेगा। समय और संसाधन की बचत के लिए प्रदेश में एक नई भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। ये नियम हो सकते हैं एक समान     उम्र संबंधी।     पात्रता के मानक।     आरक्षण संबंधित मानक।     महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण मानक।     परिवीक्षा अवधि। चयन भर्तियों में किया जा चुके हैं बदलाव बता दें कि हाल ही में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं को लेकर कुछ बदलाव किए गए हैं। इनके अंतर्गत अब वर्ष में केवल एक बार होंगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा और फीस नहीं देनी होगी। जनवरी 2026 से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समय पर होगी। यह कदम अभ्यर्थियों के हित में माना जा रहा है।

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