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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, एम्स में महिला डॉक्टर की मौत पर 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट का आदेश

भोपाल  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एम्स भोपाल में कार्यरत एक महिला सहायक प्राध्यापक की मौत के मामले में गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए 15 दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 जनवरी 2026 को महिला डॉक्टर की मौत लंबे समय से हो रहे मानसिक उत्पीड़न और खराब कार्य वातावरण के कारण हुई। शिकायत के अनुसार ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूनुस पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं।  महिला डॉक्टरों की शिकायतों को दबाया शिकायत में बताया गया है कि पीड़ित डॉक्टर ने अपनी परेशानी को लेकर तीन बार ई-मेल के माध्यम से संस्थान के अधिकारियों को जानकारी दी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संस्थान में पहले भी महिला डॉक्टरों की शिकायतों को दबाया गया और इस मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।  पुलिस आयुक्त और एम्स भोपाल के निदेशक को दिए निर्देश मामले को गंभीर मानते हुए आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी किया है। आयोग ने भोपाल के पुलिस आयुक्त और एम्स भोपाल के निदेशक को निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच कर प्राथमिकी, शव परीक्षण रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज आयोग को उपलब्ध कराएं। 3 वर्षों की शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा इसके साथ ही एम्स प्रशासन से संस्थान की यौन उत्पीड़न निवारण समिति की जानकारी, पिछले तीन वर्षों में मिली शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को 15 दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

वित्त विभाग की योजना पर ठहराव, 64% महंगाई भत्ता मार्च तक नहीं मिलेगा, 12 लाख कर्मचारियों के लिए देरी

भोपाल   मध्य प्रदेश में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर वित्त विभाग की घोषित योजना फिलहाल पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने हाल ही में तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की है, जिसके बाद सातवें वेतनमान के तहत कर्मचारियों को अब कुल 58 प्रतिशत भत्ता मिलेगा जबकि विभागीय प्लान के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक यह दर 64 प्रतिशत तक पहुंचनी थी। इस अंतर के कारण प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वित्त विभाग घोषित प्लान के मुताबिक 7वें वेतनमान पर 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता चालू वित्त वर्ष में नहीं दे पाएगा। ताजा ऐलान के आधार पर महंगाई भत्ता की राशि केंद्र सरकार के निर्णय के 8 माह बाद एमपी के कर्मचारी-अधिकारियों को दी गई है। जबकि केंद्र में जल्द ही फिर महंगाई भत्ता दिए जाने की कवायद चल रही है। ऐसे में एमपी के कर्मचारियों को नए घोषित होने वाले महंगाई भत्ते की दरों के आधार पर लाभ पाने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश में साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स को राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दी जाती है। इस तरह 12 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को बढ़ती महंगाई के दौर में 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता पाने के लिए 4 से 6 माह तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह तीन प्रतिशत बढ़ा हुआ भत्ता अप्रैल के वेतन में मिलने का राज्य सरकार का फैसला माना जा रहा है। अगर केंद्र ने मार्च में महंगाई भत्ता बढ़ा भी दिया तो राज्य सरकार तुरंत इसे नहीं देगी। यह था वित्त विभाग का प्लान वित्त विभाग ने जो प्लान तय किया था उसके अनुसार सातवां वेतनमान पाने वाले अधिकारी कर्मचारी को वर्ष 2025-26 में 31 मार्च 2026 तक 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलना है। इसी तरह वर्ष 2026-27 में 31 मार्च 2027 तक 74 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 31 मार्च 2028 तक 84 प्रतिशत और इसके बाद वर्ष 2028-29 में मार्च 2029 तक इसे 94 प्रतिशत पहुंचाना है जो सरकार की मौजूदा व्यवस्था के आधार पर गड़बड़ाता नजर आ रहा है। वित्त विभाग का यह प्लान इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि वित्त वर्ष 2028-29 में ही नवंबर-दिसंबर में विधानसभा के चुनाव होना हैं। एमपी को लाभ मिलने की संभावना कम प्रदेश में लगभग साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत के दायरे में आते हैं। सरकार का तर्क है कि बढ़ा हुआ तीन प्रतिशत भत्ता अप्रैल के वेतन में जोड़ा जाएगा और भुगतान मई से होगा। लेकिन यदि केंद्र सरकार मार्च में फिर से महंगाई भत्ता बढ़ाती है, तो भी राज्य में उसका लाभ तुरंत मिलने की संभावना कम है। पिछली बार भी केंद्र के फैसले के करीब आठ महीने बाद राज्य कर्मचारियों को संशोधित दर का लाभ मिला था। प्लान के विपरीत अभी यह है मौजूदा स्थिति रोलिंग बजट की कवायद के बीच राज्य सरकार ने 6 माह पहले यह कहा था कि 2026-27 के बजट के पहले महंगाई भत्ते की राशि को सरकार 64 प्रतिशत तक पहुंचाएगी लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। 8 माह के अंतराल के बाद दिए गए महंगाई भत्ते की असलियत यह है कि यह 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी ही हुआ है। इसका भुगतान भी सरकार कर्मचारियों को अप्रैल के वेतन से मई माह से करेगी। सरकार के प्लान के चलते कर्मचारी नेता यह मानकर चल रहे थे कि 2025 की दिवाली और फिर 2026 में फरवरी-मार्च में सरकार दो से तीन किस्तों में महंगाई भत्ता बढ़ाकर इसे 31 मार्च के पहले 64 प्रतिशत तक पहुंचा देगी। 5वें और 6वें वेतनमान वालों के लिए यह बताई थी प्लानिंग वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते को लेकर जारी प्लानिंग में 6 माह पहले कहा था कि जिन विभागों में 6वें या 5वें वेतनमान पाने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% तक महंगाई भत्ता दिया जाता है जो मुख्यमंत्री द्वारा होली के मौके पर की गई घोषणा के बाद 255 प्रतिशत हो जाएगा। आगामी वर्षों को लेकर सरकार की प्लानिंग यह है कि वर्ष 2026-27 में 265 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 280 और वर्ष 2028-29 में 295 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इसके हिसाब से विभागों को रोलिंग बजट में प्रावधान करना होगा। प्रदेश सरकार के उपक्रम, निगम, मंडल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर महंगाई भत्ता दिया जाना है। इसी तरह शासन में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत पांचवें वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों को वर्तमान में 315% के मान से मंहगाई भत्ता दिया जाना है। हालांकि सातवें वेतनमान की तरह यह स्थिति अभी लागू नहीं हो पाई है। इसके आधार पर जो प्लान तय किया है उसके मुताबिक वर्ष 2026-27 में 325 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 335 और वर्ष 2028-29 में 345 प्रतिशत के हिसाब से बजट प्रावधान किया जाएगा।

रतलामी सेंव को नया रूप देने की कोशिश, उद्योग विभाग ने शुरू किया निर्माताओं का डेटा संग्रह

रतलाम  मालवा की झन्नाटेदार स्वाद और लज्जत रतलामी सेंव को देश-विदेश में विपणन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अब एक जिला एक उत्पाद योजना में निर्माताओं को आगे लाने की तैयारी है। इस योजना में उद्योग विभाग शहर व जिले के नमकीन निर्माताओं का रिकार्ड तैयार करवा रहा है। इससे किसी भी समय मांग आने पर जानकारी दी जा सकेगी। इसके साथ ही देश विदेश में होने वाले सेमिनार आदि की जानकारी भी निर्माताओं को दी जा सकेगी। 15 तक सभी निर्माताओं को जानकारी देने के लिए कहा गया है। वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनने का रास्ता भी खुल गया मालूम हो कि नमकीन निर्माण में रतलामी सेंव नमकीन मंडल ने भौगोलिक संकेतक (जियोग्राफिकल इंडक्शन) साल 2012-13 में ही हासिल कर लिया था। इससे रतलाम नमकीन की पहचान को कानूनी सुरक्षा मिलने के साथ ही वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनने का रास्ता भी खुल गया, लेकिन 12 साल बीतने के बाद भी इसका व्यावसायिक और रणनीतिक लाभ रतलाम जिले व नमकीन कारोबारियों तक नहीं पहुंच पाया है। जीआई टैग लेने वाले रतलामी सेंव नमकीन मंडल के अनुसार भौगोलिक आधार पर रतलामी सेंव का निर्माण मालवा अंचल में ही किया जा सकता है। यदि अन्य स्थानों पर बनाई भी जाती है तो स्वाद व गुणवत्ता में बेहद कमजोर रहती है। रतलामी सेंव के नाम से उत्पाद अब अधिकृत जीआइ रजिस्ट्री में पंजीकृत व्यक्ति, फर्म ही बेच सकती है। रतलामी सेंव को यह टैग उसकी विशेष मसालेदार रेसिपी, मोटी बनावट, देशी सामग्री और पारंपरिक प्रक्रिया के कारण मिला है। रतलामी सेव निर्माण इकाईयों की जानकारी संकलित की जा रही महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र अतुल वाजपेयी ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) अंतर्गत रतलाम जिले के लिए चयनित रतलामी सेंव के निर्माण को बढ़ावा देने व उप्ताद की गुणवत्ता में सुधार एवं उक्त उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा देने, निर्यात की संभावना के लिए जिले में कार्यरत रतलामी सेव निर्माण इकाईयों की जानकारी संकलित की जा रही है। शहर में सेंव-नमकीन निर्माताओं की संख्या करीब 1000 से अधिक है, लेकिन नमकीन मंडल में अभी आठ से दस व्यापारी ही रजिस्टर्ड हैं। रतलाम में व बाहर धड़ल्ले से तय मानक से हटकर बनाई जा रही सेंव को रतलामी सेंव के नाम से बेचा जा रहा है। व्यावसायिक रणनीति, ब्रांडिंग और योजनागत समर्थन के अभाव में यह टैग एक कागजी तमगा बनकर रह गया है। इन कारणों से पिछड़ गए     जीआई टैग मिलने के बाद भी व्यापक स्तर पर इसकी जानकारी न तो व्यापारियों को है ना उपभोक्ताओं को।     स्टैंडर्ड पैकेजिंग, ब्रांड लेबल, गुणवत्ता प्रमाणन जैसे पहलुओं पर काम नहीं हो पाया। अधिकांश निर्माण असंगठित तौर पर हो रहा है।     ऑनलाइन नेटवर्क में प्रमोशन को लेकर भी ठीक से पहल नहीं हो पाई। अब यह होगा विभागीय स्तर पर सभी नमकीन निर्माताओं को जीआई टैग अनुसार गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शासन की योजनाओं के मान से जानकारी देकर जहां जरूरी होगा वहां प्रदर्शनी आदि के लिए भी भेजा जाएगा।

जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध की जाए कार्यवाही

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण नहीं, विकास का आधार भी है। यह भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का भी एक प्रयास है। अभियान अंतर्गत संचालित हर गतिविधि में राज्य से ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। भू-जल स्त्रोतों के दोहन से गिरते भू-जल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए भी सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। प्रदेश में पिछले जल गंगा संवर्धन अभियान के सुखद परिणाम प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2026 के अभियान में भी हमें जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को प्रभावी और परिणामूलक बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में गुरूवार को आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,  अशोक बर्णवाल,  संजय दुबे,  नीरज मंडलोई, मती दीपाली रस्तोगी,  शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में वर्ष 2025 के जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष-2026 की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर सतत् रूप से निगरानी रखने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा और उनके आस-पास सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यक्तिगत पहल तथा सामुदायिक सहभागिता से प्याऊ लगाने की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्लास्टिक की बोतल के उपयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ शीतल पेयजल उपलब्ध कराने को सामाजिक दायित्व के रूप में समाज में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिन जिलों में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने यह प्रयास अन्य जिलों से साझा करें तथा जिले परस्पर इस तरह के नवाचारों का आदान-प्रदान करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को नेतृत्व प्रदान करें। सांसद, विधायक, पंचायत, नगरीय‍निकाय के सभी प्रतिनिधि सक्रियता से अभियान में सहभागिता करें। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी जनसहभागिता संबंधी गतिविधियों में जोड़ा जाए। जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्यों के क्रियान्वयन की प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नोडल और नगरीय प्रशासन एवं विकास सह नोडल विभाग होगा। राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नर्मदा घाटी विकास, वन, जन अभियान परिषद, उद्योग एवं एमएसएमई, पर्यावरण, संस्कृत, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग सहभागिता करेंगे। बैठक में अभियान के अंतर्गत वर्ष-2025 की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। 19 मार्च से प्रारंभ होगा राज्य स्तरीय अभियान बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से एक साथ आरंभ किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों में विक्रम संवत् और पर्यावरण, जलीय संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन पर गतिविधियां संचालित होंगी। अभियान के अंतर्गत 23 से 24 मई तक भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन होगा, 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा, 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर शिप्रा तट उज्जैन में महादेव नदी कथा, 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम होगा। इसमें प्रदेश की कृषि भूमि के सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत कार्य प्रस्तावित किये गये। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 170 करोड़ रूपए लागत के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। वर्ष 2025 में आरंभ 2500 करोड़ रूपए की लागत के 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। विभाग जल जीवन मिशन की सिंगल विलेज स्कीम के कार्य क्षेत्रों में भू-जल संवर्धन के कार्य और प्राचीन परम्परागत जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा अभियान के अंतर्गत मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना तथा एक बगिया माँ के नाम परियोजना के अंतर्गत गतिविधियां संचालित की जाएंगी। बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों की पुर्नउत्थान की योजना तैयार होगी। नगरीय विकास विभाग नगरीय‍निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। युवाओं की भागीदारी के लिए उन्हें अमृत मित्र बनाकर ‘माय भारत पोर्टल’ पर पंजीयन किया जाएगा। अभियान में 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। नदियों में मिलने वाले 20 नालों की शोधन प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया जाएगा। नगरीय‍निकायों द्वारा नदी, तालाब, बावड़ी का संवर्धन, नालों की सफाई, बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी किया जाएगा। वातावरण निर्माण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैली और शालाओं में आईईसी गतिविधियां संचालित होंगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के भूजल स्त्रोतों के रिचार्ज, पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और रख-रखाव के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी। वन विभाग द्वारा अविरल निर्मल नर्मदा अंतर्गत भूजल संवर्धन के कार्य तथा वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधों के रोपण की योजना है। वन्य जीवों को पानी की उपलब्धता के लिए 25 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केन्द्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्थापित करने, जल संरक्षण के ग्राम स्तर पर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने और आंगनवाड़ी केन्द्रों को जल एवं पोषण मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित कर समुदाय को प्रेरित करने जैसी गतिविधियां संचालित करेगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रूपए और पोषण वाटिका के लिए 10 हजार रूपए स्वीकृत हैं।  

उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह ने मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की ओर से प्राप्त किया सम्मान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजनरी नेतृत्व और प्रदेश में ‘रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जर्मनी के बर्लिन में आयोजित ‘आईटीबी बर्लिन ट्रैवल मार्ट’ में प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी को प्रतिष्ठित ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस ब्रॉन्ज’ सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया है। यह प्रमाणन नीदरलैंड स्थित ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस फाउंडेशन’ द्वारा प्रदान किया जाता है, जो ‘ग्लोबल सस्टेनेबल टूरिज्म काउंसिल’ से मान्यता प्राप्त संस्था है। पचमढ़ी यह अंतर्राष्ट्रीय गौरव हासिल करने वाला देश का पहला हिल स्टेशन बन गया है। म.प्र. टूरिज्म बोर्ड की ओर से उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह ने यह सम्मान प्राप्त किया। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पर्यटन नित नई ऊँचाइयों को छू रहा है। पचमढ़ी को मिला यह ‘ग्रीन डेस्टिनेशन ब्रॉन्ज’ सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण है कि हम पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को सहेजने में भी अग्रणी हैं। यह उपलब्धि पचमढ़ी को वैश्विक स्तर पर एक ‘सस्टेनेबल टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करेगी, जिससे यहाँ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी ने कहा कि यह सम्मान पचमढ़ी में विरासत संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा और जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की वैश्विक पहचान है। इस उपलब्धि के साथ ही अब पचमढ़ी देश के अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों और इको-टूरिज्म साइट्स के लिए एक ‘रेप्लिकेबल मॉडल’ (अनुकरणीय मॉडल) के रूप में उभरा है। यह मान्यता प्रदेश में ‘रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म’ को और अधिक सशक्त बनाएगी। स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक मानक ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस’ अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक प्रतिष्ठित प्रमाणन कार्यक्रम है, जो आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिरता के 3 मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है। कठोर परीक्षण में मिली सफलता पचमढ़ी का चयन अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित एक अत्यंत जटिल और सूक्ष्म मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किया गया। इसके तहत डेस्टिनेशन मैनेजमेंट, प्रकृति एवं परिदृश्य, पर्यावरण और जलवायु, संस्कृति एवं परंपरा, सामाजिक कल्याण और व्यापारिक संचार जैसे 6 प्रमुख विषयों के 75 कड़े मापदंडों पर पचमढ़ी का परीक्षण किया गया। मूल्यांकन में पचमढ़ी ने 10 में से 6.5 का स्कोर और 40% का GSTC अनुपालन स्तर हासिल किया। पर्यटन बोर्ड के प्रयासों का परिणाम म.प्र. टूरिज्म बोर्ड द्वारा इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। इस परियोजना के तहत नवंबर 2025 में पचमढ़ी में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसके बाद व्यापक फील्ड वर्क, डेटा कलेक्शन और दस्तावेजीकरण किया गया। फरवरी 2026 में अंतर्राष्ट्रीय ऑडिटर द्वारा ऑन-साइट ऑडिट के बाद इस उपलब्धि पर मुहर लगी।  

भाईदूज पर श्रद्धा का माहौल, मंत्री सारंग ने चित्रगुप्त मंदिर में की पूजा-अर्चना

भोपाल भाईदूज/यम द्वितीया के अवसर पर गुरुवार को कोटरा स्थित  राम जानकी चित्रगुप्त मंदिर में मां ईरावती चित्रगुप्त संस्कृति एवं सामाजिक न्यास के तत्वाधान में भगवान  चित्रगुप्त जी का विशेष पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग सम्मिलित होकर भगवान  चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मंत्री  सारंग ने कहा कि भगवान  चित्रगुप्त न्याय, सत्य और कर्म के प्रतीक हैं। उनकी कृपा से समाज में सदाचार, ज्ञान और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। भगवान चित्रगुप्त की आराधना हमें अपने कर्मों के प्रति सजग रहने और समाज के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भाईदूज/यम द्वितीया की शुभकामनाएं देते हुए समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में समाज के 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान कर उन्हें शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। साथ ही श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया तथा भगवान चित्रगुप्त के प्रतीक स्वरूप कलम भी वितरित की गई जिससे ज्ञान और विद्या के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में  अजय वास्तव नीलू, प्रबंध न्यासी  ओ.पी. वास्तव, अध्यक्ष  राजेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।  

शुजालपुर नगर पालिक के नए भवन के लिए 3 करोड़ रूपए और अन्य विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ रूपए स्वीकृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नगरपालिका परिषद का शताब्दी वर्ष शुजालपुर के हर नागरिक के सम्मान का उत्सव है। यह हमारी विरासत, उपलब्धियों और सामूहिक संकल्प का पर्व है। जटाशंकर महादेव की असीम कृपा से शुजालपुर नगरपालिका ने जन सेवा और लोक कल्याण के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर नगरपालिका के नए भवन के लिए 3 करोड़ रुपए और नगरपालिका क्षेत्र में सड़कों सहित अन्य विकास कार्य के लिए दो करोड़ रुपए नगरपालिका परिषद शुजालपुर को उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को शुजालपुर नगरपालिका परिषद के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शुजालपुर में आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह को मंत्रालय भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। शुजालपुर में हुए कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह सिंह परमार, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती बबीता परमार उपस्थित रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुजालपुर में स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों में निरंतर प्रगति हो रही है। नगर को राष्ट्रीय रैंकिंग में और बेहतर स्थान पर लाने के लिए आगामी वर्षों में अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गत 2 वर्षों में शुजालपुर में ऑडिटोरियम और सीसी रोड के लिए 5 करोड़ रुपए, कायाकल्प योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए, अमृत 2 के अंतर्गत जलप्रदाय के लिए 12 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुजालपुर वीरों की भूमि रही है। जब पेशवा बाजीराव प्रथम ने मालवा में विजय का परचम लहराया तब शुजालपुर उनकी रणनीतिक प्राथमिकता में था। इस पावन धरा पर पेशवाओं की सेना का नेतृत्व करते हुए राणो जी शिंदे ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनकी स्मृति में बना भव्य शिव मंदिर और ऐतिहासिक छतरी आज भी हमें शौर्य की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शौर्य और संकल्प की नींव पर आज से ठीक 100 वर्ष पहले 1926 में नगरपालिका परिषद का गठन शुजालपुर में हुआ था। एक उज्जवल भविष्य का संकल्प आज वट वृक्ष बन चुका है। वर्तमान में शुजालपुर विकास का मॉडल बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में जारी गतिविधियों के परिणाम स्वरूप शुजालपुर क्षेत्र में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा सुविधाओं, व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों आदि में निरंतर प्रगति हो रही है। परिषद के माध्यम से राज्य सरकार हर घर तक सड़क-बिजली और पानी पहुंचाने के संकल्प को सिद्ध कर रही है। शहर की पेयजल समस्या का समाधान काफी हद तक करने का प्रयास किया गया है। नगर में 21 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से जमघड़ नदी को साफ रखने की तैयारी है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उपहार के समान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर को विकास के शिखर पर ले जाने के लिए जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आहवान किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में गत 2 वर्षों में विकास और जनकल्याण की दृष्टि से क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। मंत्री श्री परमार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से नए और बड़े बस स्टैंड के लिए भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम को नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती बबीता परमार ने भी संबोधित किया। शुजालपुर के कार्यक्रम में पूर्व मंत्री श्री विजेंद्र सिंह सिसोदिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हेमराज सिंह सिसोदिया, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।  

वाहन ट्रांसफर में बड़ा बदलाव: MP में HSRP डेटा नेशनल पोर्टल से लिंक

भोपाल अब यदि आपका वाहन मध्य प्रदेश से किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर होता है, तो उसे ट्रेस करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान होगा। परिवहन विभाग ने अपने ऑनलाइन पोर्टल को नेशनल डेटाबेस के साथ अपडेट कर दिया है, जिससे हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) के यूनिक लेजर कोड को राष्ट्रीय स्तर पर लिंक कर दिया गया है। इस तकनीकी बदलाव के बाद वाहन की मूल जानकारी जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर और मालिक का विवरण दूसरे राज्यों में भी तुरंत सत्यापित किया जा सकेगा। इससे न केवल चोरी की गाड़ियों को पकड़ने में मदद मिलेगी, बल्कि फर्जी नंबर प्लेट और डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस अपडेट से अंतरराज्यीय वाहन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी होगी। 1500 से अधिक शिकायतों का हुआ निराकरण हाल ही में परिवहन आयुक्त के निर्देश पर हुई प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई में विभाग से जुड़े लंबित कार्यों का निपटारा किया गया। इसमें भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित अन्य क्षेत्रों से आए ड्राइविंग लाइसेंस, एनओसी और वाहन ट्रांसफर से जुड़े करीब 1388 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। अधिकारियों का क्या कहना “परिवहन विभाग के पोर्टल को नेशनल डेटाबेस से जोड़ने का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि दूसरे राज्यों में होने वाली गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी। हमने जनसुनवाई के दौरान लंबित मामलों को प्राथमिकता से हल किया है और आगे भी पारदर्शिता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।”

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की निर्माण कार्यों की समीक्षा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में न्यू सर्किट हाउस राजनिवास में आयोजित बैठक में विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने हिनौती गौधाम में 25 हजार गौवंश के संरक्षण के लिये शेड निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि शेड निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो तथा समय सीमा में पूरा हो। उप मुख्यमंत्री ने बाउण्ड्रीबाल निर्माण सहित शेष कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री ने रीवा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण कार्य में सभी औपचारिकताओं की पूर्ति सुनिश्चित कराकर कार्य को गति देने के निर्देश दिये। बैठक में अजगरहा से इटहा, नीम चौराहा से मनकहरी तथा गड्डी रोड के निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान अद्यतन स्थिति की उप मुख्यमंत्री ने जानकारी ली। उन्होंने सभी तालाब के रखरखाव तथा उसके उन्नयन एवं चिरहुला मंदिर मार्ग विकास व परिसर विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। बैठक में कलेक्टरमती प्रतिभा पाल, आयुक्त नगर निगम डॉ. सौरभ सोनवणे, एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राकृतिक खेती का किया निरीक्षण

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने हरिहरपुर धाम में प्राकृतिक खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राकृतिक रूप से उगाई गई पालक व चुंकदर की खेती को देखा तथा निर्माणाधीन वायो इनपुट सेंटर मल्टी वेयर फार्मिंग प्रकल्प का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिये। रीवा जिले में प्राकृतिक खेती का बसामन मामा सहित हरिहरपुर में भी किसानों के लिये प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया गया है। जहां प्राकृतिक खेती की जा रही है और साथ ही साथ किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उप मुख्यमंत्री ने आमजनों से की भेंट उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने अमहिया निवास रीवा में आमजनों से भेंट की। उन्होंने लोगों को होली की बधाई दी तथा उनकी समस्यायें सुनीं। उप मुख्यमंत्री ने प्राप्त आवेदनों पर तत्काल समाधान कारक कार्यवाही करने के निर्देश दिये।  

पन्ना में खतरनाक देसी नुस्खा, धतूरे का काढ़ा पीते ही बिगड़ी तबीयत; 3 लोग भर्ती

पन्ना “नीम हकीम खतरा-ए-जान” कहावत पन्ना जिले में उस समय सच साबित हो गई, जब जोड़ों और कमर दर्द से राहत पाने के लिए अपनाया गया देसी नुस्खा एक परिवार पर भारी पड़ गया। पन्ना निवासी 45 वर्षीय सावित्री बाई को किसी परिचित ने धतूरा और एक स्थानीय जड़ी-बूटी का काढ़ा पीने की सलाह दी। बिना चिकित्सकीय परामर्श के उन्होंने घर पर काढ़ा तैयार कर लिया। तेज चक्कर, उल्टियां और शरीर सुन्न दोपहर में सावित्री बाई ने स्वयं काढ़ा पिया और अपने बेटे शिवम आदिवासी (22 वर्ष) व बेटी रेखा आदिवासी (24 वर्ष) को भी पिला दिया। कुछ ही देर में तीनों को तेज चक्कर, उल्टियां और शरीर सुन्न होने की शिकायत शुरू हो गई। जड़ी-बूटियों के सेवन से बचने की अपील हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पन्ना लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने इसे भोजन विषाक्तता का मामला मानते हुए तत्काल उपचार शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से बड़ा हादसा टल गया। चिकित्सकों ने बिना सलाह जहरीली जड़ी-बूटियों के सेवन से बचने की अपील की है।  

होली पर्व पर उप मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ के किये दर्शन

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने होली पर्व पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशिर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेश वासियों की सुख, समृद्धि एवं मंगल कामना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद कढ़ी-भात एवं खीर का श्रृद्धालुओं को वितरण कर पुण्य कार्य में सेवाभाव से सहभागिता की। उप मुख्यमंत्री ने भगवान भैरवनाथ के दर्शन किये उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने होली महापर्व पर गुढ़ स्थित भैरवनाथ लोक पहुंचकर भगवान भैरवनाथ के दर्शन किये तथा लोक कल्याण की कामना की। 

भागीरथपुरा पानी कांड पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, निगम को 10 दिन में दस्तावेज देने का आदेश

इंदौर भागीरथपुरा में रहवासियों को मल-मूत्र युक्त पानी पिलाने वाले नगर निगम की एक और लापरवाही सामने आई है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगम ने मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को अब तक भागीरथपुरा क्षेत्र में बिछाई गई पाइप लाइनें, टेंडर से जुड़े दस्तावेज, दूषित पानी की वजह से जान गंवाने वालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं सौंपे। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और आदेश दिया कि निगम दस दिन के भीतर पूरे दस्तावेज आयोग को सौंप दे। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को एक साथ सुनवाई हुई। दस्तावेज न मिलने से जांच के अंतिम निष्कर्ष में बाधा आयोग ने गुरुवार को अंतरिम जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। इसमें कहा है कि चूंकि निगम से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं है। कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वे कौन अधिकारी थे जिनकी लापरवाही की वजह से भागीरथपुरा दूषित पानी कांड हुआ और 36 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सीवेज मौत पर 30 लाख, भागीरथपुरा कांड में सिर्फ 2 लाख सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सीवेज लाइन में उतरे दो लोगों की मृत्यु पर उनके परिजनों को तो 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया, लेकिन भागीरथपुरा कांड में सिर्फ दो-दो लाख रुपये दिए गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने दीजिए, इस बारे में भी विचार करेंगे। गुरुवार दोपहर ठीक 2.30 बजे न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भागीरथपुरा मामले की सुनवाई शुरू हुई। दस्तावेज सौंपने में देरी पर कोर्ट सख्त, आयोग में कर्मचारी तैनात करने के निर्देश एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे पढ़ने के बाद कोर्ट ने निगम के वकील से कहा कि निगम को दस्तावेज सौंपने में क्या दिक्कत है। निगम के वकील ने कहा – हम दस्तावेज दे रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट दो मार्च को तैयार की है और इसमें साफ लिखा है कि दस्तावेज नहीं मिले हैं। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि आमजन आयोग के पास भागीरथपुरा मामले में दस्तावेज, साक्ष्य, शिकायत लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन वहां कोई कर्मचारी ही नहीं है जो उनकी शिकायत या दस्तावेज ले सके। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग में इस कार्य के लिए कर्मचारी तैनात किए जाएं। क्या पानी में मिलाया गया था जानलेवा केमिकल? सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि शहर में 110 टंकियां हैं, लेकिन सिर्फ भागीरथपुरा टंकी से वितरित हुए पानी से ही मौतें हुई हैं। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भागीरथपुरा टंकी में कुछ ऐसा मिलाया गया जो जानलेवा साबित हुआ। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा टंकी में केमिकल की कुछ अतिरिक्त मात्रा मिलाई गई थी। उन्होंने इस संबंध में एक पेन ड्राइव भी कोर्ट में प्रस्तुत की मुआवजे की राशि पर एडवोकेट मनीष यादव की दलील एडवोकेट मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले शहर में सीवेज में उतरने से हुई दो लोगों की मौत के मामले में शासन ने उनके परिजनों को 30-30 लाख रुपये की सहायता की, जबकि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये दिए गए। यह राशि भी शासन ने नहीं दी बल्कि रेडक्रास सोसायटी से दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट में इसे लेकर कहा है कि अंतिम रिपोर्ट में इस बिंदु को शामिल करेंगे। आयोग नियुक्त करेगा शिकायत अधिकारी कोर्ट ने न्यायिक आयोग से कहा है कि वह आमजन की शिकायत, सुझाव, दस्तावेज, साक्ष्य आदि दर्ज कराने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति करे ताकि आमजन सुविधाजनक तरीके से इस मामले में साक्ष्य दे सकें। आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सुनवाई के दौरान एडवोकेट अनिल ओझा, एडवोकेट विभोर खंडेलवाल, निगम की ओर से एडवोकेट ऋषि तिवारी आदि ने पैरवी की। अदालत में हुई जिरह के कुछ अंश     कोर्ट: आप यह बताओ पूरा रिकॉर्ड कब देंगे?     निगम के वकील: रिकॉर्ड दे दिया था, आयोग ने दो मार्च को पत्र जारी कर कुछ और रिकॉर्ड मांगा है।     कोर्ट: रिकॉर्ड देने में क्या दिक्कत है?     निगम के वकील: कुछ रिकॉर्ड आईडीए से संबंधित है। वहां से बुलवाना पड़ेगा, जैसे ही रिकॉर्ड वहां से मिलेगा हम सौंप देंगे।     कोर्ट: आप दस दिन में अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दें।  

महिला सशक्तिकरण को समर्पित आयोजन, ‘अधिकार, न्याय और कार्यवाही’ बनेगी महिला दिवस की थीम

भोपाल मध्य प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तैयारी शुरू हो गई है और इस बार अधिकार, न्याय और कार्यवाही महिलाओं और बालिकाओं के लिए इस थीम पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों, सुरक्षा और न्याय तक उनकी सुलभ पहुंच को सुगम बनाने के लिए ‘अधिकार, न्याय, कार्यवाही– महिलाओं और बालिकाओं के लिए’ थीम पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना तथा समाज में सुरक्षा और सम्मान का वातावरण मजबूत करना है। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर संवाद और जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें घरेलू हिंसा कानून की जानकारी, न्याय चौपाल के माध्यम से कानूनी सहायता के मॉडल, मानसिक स्वास्थ्य और सायबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। इस विशेष आयोजन में सामाजिक संस्थाओं द्वारा अपने अनुभव और सफल पहल साझा की जाएंगी, ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए प्रभावी मॉडल सामने आ सकें। साथ ही घरेलू कामकाजी महिलाओं द्वारा पॉवर वॉक के माध्यम से आत्मविश्वास, स्वाभिमान और महिला शक्ति का संदेश दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस कार्यक्रम में सचिव राज्य महिला आयोग के सुरेश तोमर, सामुदायिक पुलिसिंग के डीआईजी विनीत कपूर, महिला सुरक्षा शाखा के स्पेशल डीजी अनिल कुमार, सेवानिवृत्त एडीजी प्रशिक्षण अनुराधा शंकर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा करेंगी। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। साथ ही सायबर वेलबीइंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग और अहान फाउंडेशन के बीच एमओयू भी होगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी कामयाबी, फ्लाई ऐश उपयोगिता पर चार राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि अर्जित की है। कंपनी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया व अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई को फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक, सुनियोजित एवं अधिकतम उपयोग के लिये किए जा रहे सतत् प्रयास करने के लिए गोवा में आयोजित 15 वें फ्लाई ऐश उपयोगिता पुरस्कार 2026 समारोह में चार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था मिशन एनर्जी फाउंडेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समारोह में यह सम्मान प्रदान किए गए। सिंगाजी ताप विद्युत गृह को मिले दो पुरस्कार समारोह में सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी को स्टेट सेक्टर 500 से 1500 मेगावाट तक वर्ग में और अमरकंटक ताप विद्युत गृह को स्टेट सेक्टर पब्लिक यूटिलिटी 500 मेगावाट से कम वर्ग में फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने करने के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना को दो सर्वोच्च सम्मान फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने और ओवरऑल चैंपियन-फ्लाई ऐश मैनेजमेंट एक्सीलेंस के लिए प्रदान किए गए। एक करोड़ से अधिक मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तरण सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (खंडवा) द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 के दौरान कुल 61,21,066 मीट्रिक टन ऐश का सफलतापूर्वक निस्तारण एवं उपयोग सुनिश्चित किया गया। यह उपलब्धि 161 प्रतिशत उपयोगिता दर को दर्शाती है। यह न केवल वर्तमान फ्लाई ऐश के शत-प्रतिशत उपयोगिता का प्रमाण है, बल्कि पूर्व में संचित (लीगेसी) ऐश के बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक निस्तारण को भी रेखांकित करती है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी ने वित्तीय वर्ष 2023 से 2025 तक के निर्धारित किए गए लक्ष्य को 119 प्रतिशत की संचयी उपयोगिता दर से आसानी से हासिल कर 34,12,785 मीट्रिक टन रख को निष्पादित किया। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 204 प्रतिशत की उपयोगिता दर से 6,66,438 मीट्रिक टन राख का निस्तारण किया। इस प्रकार तीन ताप विद्युत गृहों द्वारा 1,02,00,289 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण किया।  

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